Yogi Adityanath Popularity Survey: यूपी में आज चुनाव हुए तो सीएम पद के लिए योगी आदित्यनाथ कितने लोकप्रिय?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कद और उनकी लोकप्रियता एक बार फिर बुलंदियों पर नजर आ रही है। आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर न्यूज 18 की ओर से कराए गए मेगा ओपिनियन पोल में मुख्यमंत्री पद की पसंद, सरकार के कामकाज और जनता के मूड को लेकर बेहद चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ इस पद की रेस में अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे नजर आ रहे हैं।

सर्वे: सीएम पद की पसंद में योगी आदित्यनाथ सबसे आगे, अखिलेश यादव काफी पीछे

सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य के मतदाताओं के बीच फिर से सत्ता की कमान संभालने के लिए सबसे पसंदीदा चेहरा बने हुए हैं। सर्वे में शामिल कुल लोगों में से 66.2% लोगों ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त और योग्य उम्मीदवार माना है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव इस मुकाबले में काफी पीछे छूटते नजर आए। उन्हें सिर्फ 24.4% लोगों का समर्थन मिला। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती को मात्र 5% लोगों ने पसंद किया है जबकि चंद्रशेखर आजाद को 1.8% उत्तरदाताओं का समर्थन हासिल हुआ।

विपक्षी दलों के वोटर्स के बीच भी है सीएम योगी का प्रभाव

इस सर्वे का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आकर्षण सिर्फ एनडीए के पारंपरिक मतदाताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों के कैडर में भी उनकी स्वीकार्यता है। सर्वे के अनुसार, सपा-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन करने वाले 11.7% मतदाताओं ने भी यह माना कि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं। इसके अलावा बसपा समर्थकों में से भी 10.2% लोगों ने सीएम योगी के पक्ष में अपनी पसंद जाहिर की है।

बीजेपी की बंपर बढ़त और वोट शेयर का अनुमान

अगर उत्तर प्रदेश में आज विधानसभा चुनाव आयोजित कराए जाते हैं, तो सर्वे के नतीजे एक बार फिर बीजेपी के लिए भारी बहुमत की ओर इशारा करते हैं। सर्वे के अनुसार, एनडीए को 66.6% वोट शेयर मिलने का अनुमान है। वहीं, 66.6% लोगों का यह भी मानना है कि अगली सरकार भी बीजेपी ही बनाएगी और 65.2% जनता चाहती है कि बीजेपी को उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरे कार्यकाल (हैट्रिक) के लिए मौका मिलना चाहिए। सपा-कांग्रेस के गठबंधन को 26.4% वोट शेयर मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि 26.5% लोगों ने इनके सरकार बनाने की उम्मीद जताई है। बीएसपी को 5.4% वोट शेयर मिलने का अनुमान है।आपको बता दें कि यह सर्वे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 18 वर्ष से अधिक आयु के 30925 लोगों के बीच 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के दौरान किया गया था।

UP Election Survey: यूपी में आज हुए चुनाव तो क्या Gen-Z वोटर पलटेंगे बाजी? जानिए इस मेगा सर्वे में क्या पता चला

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक हलचल अभी से तेज हो गई है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की है। एक बार फिर सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी तीसरी बार यूपी की सत्ता पर दावेदापी पेश कर रही है। ऐसे में प्रदेश की जनता का मूड, युवाओं की भूमिका और सरकार के कामकाज को लेकर न्यूज 18 ने Pvalue Analytics के सहयोग से ने सबसे बड़ा ओपिनियन पोल पेश किया है। हाल के दिनों युवाओं और छात्रों (Gen-Z) के आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों की चर्चा के बीच इस मेगा सर्वे में एक बड़ा सवाल पूछा गया कि क्या आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में Gen-Z यानी युवा मतदाता बाजी पलटने में मुख्य भूमिका निभाएंगे? इस पर उत्तर प्रदेश की जनता ने बेहद दिलचस्प और स्पष्ट राय दी है।

56% लोगों का मानना: Gen-Z वोटर निभाएंगे सबसे बड़ी भूमिका

न्यूज 18 के मेगा सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक आधे से अधिक यानी 56% उत्तरदाताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में Gen-Z मतदाता निर्णायक और प्रमुख भूमिका निभाएंगे। इसके उलट सिर्फ 16.2% लोगों का मानना है कि चुनाव में युवाओं का कोई बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा। सर्वे में यह भी सामने आया कि भारतीय जनता पार्टी और एनडीए (BJP/NDA) के समर्थकों में यह आंकड़ा अधिक है क्योंकि वे बेहतर शिक्षित हैं और राजनीतिक रूप से अधिक जागरूक नजर आते हैं। वहीं 14.2% लोगों ने स्वीकार किया कि वे Gen-Z शब्द या इसके कॉन्सेप्ट को नहीं जानते।

सर्वे: 77% लोग योगी सरकार से संतुष्ट, सीएम पद की पहली पसंद योगी आदित्यनाथ

सर्वे में राज्य सरकार के प्रदर्शन और नेतृत्व को लेकर भी जनमत का आकलन किया गया। ओपिनियन पोल में शामिल 77.1% लोग योगी आदित्यनाथ सरकार के अब तक के कामकाज और प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट हैं। अगले मुख्यमंत्री के रूप में 66.2% मतदाताओं की पहली पसंद योगी आदित्यनाथ हैं। 65.2% लोगों का मानना है कि बीजेपी को उत्तर प्रदेश में सत्ता की हैट्रिक बनाते हुए तीसरा कार्यकाल दिया जाना चाहिए।

सपा-कांग्रेस गठबंधन 26.4% वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) 5.4% वोट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर सिमटती नजर आई। आपको बता दें कि न्यूज 18 का यह ओपिनियन पोल 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच किया गया था। इसमें यूपी के सभी 75 जिलों से 30925 लोगों की राय ली गई।

UP Election Survey: यूपी में अभी चुनाव हुए तो किसकी बनेगी सरकार? ओपिनियन पोल में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

उत्तर प्रदेश की सियासत को लेकर देश के सबसे बड़े ओपिनियन पोल के आंकड़े सामने आ चुके हैं। हमारे सहयोगी न्यूज 18 द्वारा कराए गए इस सर्वे में राज्य की भावी राजनीतिक दिशा, मुख्यमंत्री पद की पसंद और योगी सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा जनता की राय के आधार पर पेश किया गया है। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में 30925 के बीच किए गए इस ओपिनियन पोल के नतीजे बताते हैं कि राज्य में आज विधानसभा चुनाव होते हैं, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला एनडीए (NDA) विपक्ष के इंडिया गठबंधन पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। हालांकि आंकड़े ये भी बता रहे हैं कि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन भी युवाओं और आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों के बीच अपनी पैठ मजबूत कर रहा है।

सत्ता की हैट्रिक की ओर बीजेपी/एनडीए, सपा-कांग्रेस गठबंधन दूसरे नंबर पर

ओपिनियन पोल में जब लोगों से पूछा गया कि आज चुना हुए तो वो किसे वोट देना पसंद करेंगे, तो बीजेपी/एनडीए को 66.6% फीसदी लोगों ने अपनी पहली चॉइस बताया। सपा-कांग्रेस गठबंधन 26.4% वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) 5.4% वोट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर सिमटती नजर आई। यानी ओपिनियन पोल में ये बात साफ समझ में आई कि सीएम योगी के नेतृत्व में एनडीए चुनावों में हैट्रिक लगा सकता है।

सीएम पद की पहली पसंद योगी आदित्यनाथ, 77% लोग कामकाज से संतुष्ट

योगी आदित्यनाथ सरकार का प्रदर्शन और उनका नेतृत्व बीजेपी की इस बढ़त का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। सर्वे के मुताबिक ओपनियन पोल में शामिल 77.1% लोग योगी सरकार के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट हैं, जबकि केवल 13.5% लोगों ने असंतोष जताया है। अगले मुख्यमंत्री के रूप में 66.2% लोगों की पहली पसंद योगी आदित्यनाथ हैं। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव को 24.4% लोग मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।

विपक्ष की वापसी और मतदाताओं का रुझान

सर्वे से यह भी संकेत मिलता है कि 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव की तुलना में सपा-कांग्रेस गठबंधन के जनाधार में क्रमशः 3.7% और 2.4% की बढ़त देखने को मिली है। यह रुझान मुख्य रूप से युवाओं, बेरोजगारों, पेपर लीक/जेन-जी विरोध प्रदर्शनों से प्रभावित लोगों और पूर्वी उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। हालांकि ओपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी न सिर्फ अपने 91% पुराने मतदाताओं को बरकरार रखने में सफल रही है, बल्कि 2024 में वोट न देने वाले 53.0% नए मतदाताओं को भी अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

कैसा रहा इस ओपिनियन पोल का सर्वे सैंपल?

न्यूज 18 द्वारा कराए गए इस व्यापक ओपिनियन पोल का सर्वे 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच आयोजित किया गया था। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों से 30925 लोगों की राय ली गई।

2027 के चुनाव से पहले BJP को क्यों याद आईं स्मृति ईरानी? समझें पूरा सियासी समीकरण

Smriti Irani: BJP ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को फिर से राष्ट्रीय महासचिव बनाकर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को एक बड़ा चेहरा दे दिया है। पार्टी को उम्मीद है कि उनकी राजनीतिक पकड़, दमदार भाषण शैली और खासतौर पर महिला वोटरों के बीच उनकी लोकप्रियता यूपी में चुनावी अभियान को मजबूती देने में मदद करेगी।

बता दें कि स्मृति ईरानी उन आठ नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश से BJP अध्यक्ष नितिन नबीन की नई राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है। इससे साफ है कि पार्टी उत्तर प्रदेश को कितनी अहमियत दे रही है। ईरानी और पूर्व बस्ती सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है। वहीं, पूर्व धौरहरा सांसद रेखा वर्मा और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा डॉ. भोला सिंह और संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। जबकि अमर पाल मौर्य को BJP OBC मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।

हालांकि, स्मृति ईरानी के लिए यह नई जिम्मेदारी खास तौर पर अहम मानी जा रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार के बाद से ईरानी के पास पार्टी में कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं थी। अब उत्तर प्रदेश में होने वाले बेहद अहम चुनाव से पहले उन्हें राष्ट्रीय संगठन में वापस लाया गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि BJP इस चुनाव में महिला वोटरों के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में ईरानी की वापसी को पार्टी की चुनावी रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक मनोज भद्रा ने कहा,  “ऐसे समय में जब सभी राजनीतिक दल महिला मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तब भाजपा स्मृति ईरानी की वापसी के माध्यम से एक बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है। वह एक प्रभावशाली वक्ता हैं और कई भाषाओं में भाषण दे सकती हैं। वह विशेष रूप से महिलाओं के बीच लोकप्रिय हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण, राष्ट्रीय स्तर पर उनकी उपस्थिति से पार्टी महिला मतदाताओं को फिर से लुभाने और उन्हें अपने पाले में एकजुट करने के लिए जोरदार प्रयास करेगी।”

हालांकि, भाजपा के लिए ईरानी की राजनीतिक उपयोगिता केवल महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तक ही सीमित नहीं है। उनकी आक्रामक शैली और कांग्रेस नेतृत्व से उनकी अच्छी जान-पहचान उन्हें उस राज्य में पार्टी के प्रमुख प्रचारकों में से एक बना सकती है, जहां कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के भाजपा के खिलाफ संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने की उम्मीद है। उनका राजनीतिक कद उन्हें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव दोनों को चुनौती देने में भी सक्षम बनाता है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश ईरानी के लिए एक जाना-पहचाना राजनीतिक क्षेत्र है। उन्होंने पहली बार 2014 में अमेठी से चुनाव लड़ा था, जहां उन्होंने कांग्रेस के गढ़ में राहुल गांधी को चुनौती दी थी। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करना जारी रखा और मतदाताओं से संपर्क बनाए रखा। भाजपा नेता अमेठी में पार्टी का संगठनात्मक आधार मजबूत करने में उनकी निरंतर जमीनी भागीदारी को श्रेय देते हैं।

ईरानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को हराया था

उनके प्रयासों का फल 2019 के लोकसभा चुनाव में मिला, जब उन्होंने राहुल गांधी को सीधे मुकाबले में हराकर अमेठी पर गांधी परिवार के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को समाप्त कर दिया। इस जीत ने ईरानी को भाजपा के सबसे प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में से एक बना दिया और उन्हें “जायंट किलर” का खिताब दिलाया।

हालांकि, 2024 की हार उनके राजनीतिक करियर में एक झटका साबित हुई। वह अमेठी सीट किशोरी लाल शर्मा से हार गईं। उस हार के बाद, उन्हें अपनी हालिया नियुक्ति तक कोई महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी गई।

अमेठी में भाजपा नेताओं का मानना ​​है कि उनकी वापसी से क्षेत्र में पार्टी के चुनाव प्रचार को नई ऊर्जा मिल सकती है। अमेठी और रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर उनकी नियुक्ति का जश्न मनाया। समर्थकों का कहना है कि ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ईरानी जल्द ही जमीनी स्तर पर वापसी करेंगी।

भाजपा के अमेठी स्थानीय नेता जनमजय शर्मा ने कहा कि ईरानी ने इस क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने कहा कि 2014 में राहुल गांधी से हारने के बावजूद, वह नियमित रूप से अमेठी आती रहीं और लोगों के दिलों में उनकी एक खास जगह है।

हालांकि, अमेठी और पड़ोसी रायबरेली में चुनावी समीकरण भाजपा के लिए अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। 2022 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने अमेठी की चार सीटों में से दो, तिलोई और जगदीशपुर सीटें जीतीं। जबकि सपा ने गौरीगंज और अमेठी की सीटें जीतीं थी। हालांकि, गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

वहीं, रायबरेली में सपा ने 6 विधानसभा सीटों में से चार सीटें – बछरावां, हरचंदपुर, सरेनी और ऊंचाहार – जीतीं, जबकि भाजपा ने रायबरेली और सलोन सीटें जीतीं। हालांकि, ऊंचाहार के विधायक मनोज पांडे बाद में भाजपा में शामिल हो गए और अब योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री हैं।

ईरानी जल्द शुरू कर सकती हैं यूपी का दौरा

भाजपा सूत्रों के अनुसार, ईरानी जल्द ही उत्तर प्रदेश में व्यापक दौरे शुरू कर सकती हैं और विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज करते हुए विशेष रूप से अमेठी और रायबरेली पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “स्मृति ईरानी एक जाना-पहचाना चेहरा हैं, उन्होंने अमेठी से चुनाव जीता है और भाजपा के लिए भीड़ जुटाना आसान है।” उन्होंने आगे कहा, “दूसरा, वह राहुल गांधी का मुकाबला करने के लिए बेहतर स्थिति में होंगी… और इस खींचतान को मीडिया कवरेज मिलेगा, जिससे पार्टी को फायदा होगा।”

‘तुलसी’ से सियासत तक का सफर

बता दें कि ईरानी का राजनीतिक सफर टेलीविजन से शुरू हुआ, जहां लोकप्रिय धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी विरानी के किरदार से वे घर-घर में मशहूर हो गईं। उन्होंने 2003 में भाजपा में प्रवेश किया और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद के रूप में कार्य किया और 2014 से 2024 के बीच मोदी सरकार में शिक्षा, वस्त्र, सूचना एवं प्रसारण, महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक मामलों सहित कई विभागों का कार्यभार संभाला।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में स्मृति ईरानी की BJP के राष्ट्रीय संगठन में वापसी पार्टी के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उनके पास उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार का अनुभव है और वह पार्टी के लिए एक पहचाना हुआ और आक्रामक चेहरा हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्मृति ईरानी 2019 में अमेठी की ऐतिहासिक जीत से बनी अपनी राजनीतिक पकड़ को पूरे उत्तर प्रदेश में BJP के लिए चुनावी फायदे में बदल पाएंगी? यह देखना दिलचस्प होगा क्योंकि पार्टी राज्य में अगले चुनाव के लिए अपना अभियान शुरू कर रही है।

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