Market Next Week: भारत से अमेरिका तक आ रहे ये आंकड़े, अगले हफ्ते तय करेंगे मार्केट की चाल

Market next week: 31 अगस्त से शुरू हो रहे अगले कारोबारी हफ्ते मार्केट की चाल मुख्य तौर पर जीडीपी के घरेलू आंकड़ों, कच्चे तेल के भाव और अमेरिका में गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। इसके अलावा एनालिस्ट्स के मुताबिक मैक्रोइकनॉमिक रिलीज, ऑटो सेल्स के आंकड़े और विदेशी निवेशकों की ट्रेडिंग एक्टिविटी भी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। पिछले कारोबारी हफ्ते यानी 17-21 अगस्त के दौरान घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) 276.32 प्वाइंट्स यानी 0.35% गिरा, तो निफ्टी (Nifty) 76.35 प्वाइंट्स यानी 0.31% नीचे आया। लगातार तीसरे हफ्ते ये लाल हुए।

Market next week: क्या कहना है एक्सपर्ट्स का?

रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्र का कहना है कि आने वाला कारोबारी हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। जीडीपी के घरेलू आंकड़े और वैश्विक आर्थिक आंकड़े मार्केट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय अर्थव्यस्था में बात करें तो जून 2026 तिमाही के आंकड़े 31 अगस्त को जारी होंगे। अजीत के मुताबिक निवेशकों की नजर अगस्त महीने के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई के आंकड़ों, जीएसटी कलेक्शंस, फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और रुपये की चाल पर भी रहेगी।

अजीत के मुताबिक सबसे बड़ा ट्रिगर तो अमेरिकी रोजगार का आंकड़ा रहेगा। 4 अगस्त को अगस्त के नॉन-फार्म पेरोल्स का आंकड़ा आएगा। अजीत का मानना है कि यग फेडरल रिजर्व के सितंबर महीने की मौद्रिक नीति, अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड्स और एमर्जिंग मार्केट्स में फंड्स फ्लो से जुड़ी उम्मीदों पर असर डाल सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त में भारतीय इक्विटीज में अब तक ₹30,919 करोड़ का नेट निवेश किया है और लगातार दूसरे महीने उनकी नेट खरीदारी जारी रही।

ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ-टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि घरेलू स्तर पर जून तिमाही के जीडीपी आंकड़े ब्रोडर रिस्क सेंटिमेंट के लिए अहम होंगे। इससे यह पता चलेगा कि घरेलू अर्थव्यवस्था किस चाल से बढ़ रही है, खासतौर से ऐसे समय में जब एनर्जी प्राइसेज रॉकेट बने हुए हैं और पश्चिमी एशिया में तनाव अभी भी बना हुआ है।

पोनमुडी का कहना है कि जैक्सन होल में फेड चेयर कैविन वार्श के हॉकिश कमेंट के बाद अब अमेरिकी मौद्रिक नीति वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ा कैटेलिस्ट बन गई है। पोनमुडी का कहना है कि मार्केट की नजर अब 4 सितंबर को आने वाले अगस्त की जॉब्स रिपोर्ट के साथ-साथ अगली इनफ्लेशन रीडिंग पर भी नजर रहेगी। इन आंकड़ो से यह तय होगा कि सितंबर में रेट हाइक की हाल में बढ़ी उम्मीदें बनी रहती हैं या कम होती हैं।

रिसर्च एनालिस्ट फर्म एचएसटी वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि सोमवार को भारतीय इकॉनमी के लिए जून तिमाही के जीडीपी के आंकड़े के आंकड़े आएंगे, जिससे घरेलू आर्थिक विकास की दिशा पता चलेगी। वहीं शुक्रवार को आने वाला अमेरिकी रोजगार का आंकड़ा वैश्विक बाजारों के सेंटिमेंट पर असर डाल सकता है। उनका कहना है कि इसके बाद निवेशक फिर से फेडरल रिजर्व की सितंबर की मौद्रिक नीतियों को लेकर अपनी उम्मीदों को रिव्यू करेंगे।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक्स 55% तक रिटर्न दे सकते हैं, एक्सपर्ट्स ने खरीदने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच ब्रोकरेज फर्मों ने 5 कंपनियों पर खरीदारी की सलाह दी है। इनमें पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, रिटेल और क्विक कॉमर्स जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टर शामिल हैं। ब्रोकरेज के हिसाब से इन शेयरों में 55% तक रिटर्न मिल सकता है। आइए जानते हैं इन 5 स्टॉक्स में ब्रोकरेज को क्या संभावनाएं दिख रही हैं।

  1. Cummins India

ब्रोकरेज फर्म Macquarie ने Cummins India पर ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने ₹6,150 का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा स्तर से इसमें करीब 18.43% का रिटर्न मिल सकता है।

पावर जनरेशन कंपनी के लिए बड़ा बिजनेस बना हुआ है। डेटा सेंटर की बढ़ती मांग भी कंपनी की ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रही है। साथ ही CPCB IV+ इंजन वारंटी अवधि से बाहर आने पर आफ्टरमार्केट बिजनेस से अतिरिक्त अवसर मिलने की उम्मीद है।

2. Adani Enterprises

मोतीलाल ओसवाल ने अदाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी Adani Enterprises पर ‘Buy’ रेटिंग के साथ ₹3,880 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, इसमें करीब 25% तक का उछाल देखने को मिल सकता है।

कंपनी एयरपोर्ट, सड़क, रिन्यूएबल एनर्जी, डेटा सेंटर, कॉपर और स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे कारोबार में मौजूद है। ब्रोकरेज को इन लॉन्ग टर्म बिजनेस से ग्रोथ की उम्मीद है।

3. NTPC

Bernstein ने सरकारी पावर कंपनी NTPC पर ‘Buy’ रेटिंग के साथ ₹450 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक शेयर में करीब 32% तक बढ़ोतरी की गुंजाइश है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, भारत में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की भूमिका उम्मीद से बड़ी हो सकती है। रिन्यूएबल एनर्जी के साथ स्टोरेज बिजनेस NTPC के लिए बड़ा अवसर बन सकता है।

4. Avenue Supermarts

CLSA ने Avenue Supermarts पर ‘हाई-कन्विक्शन आउटपरफॉर्म’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने ₹5,723 का टारगेट प्राइस रखा है। इससे शेयर में करीब 49% का रिटर्न मिलने की संभावना है।

ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी का कम ऑपरेटिंग कॉस्ट मॉडल और कम कीमत पर सामान बेचने की रणनीति इसकी बड़ी ताकत है। प्राइवेट लेबल कारोबार और नए स्टोर्स का विस्तार भी ग्रोथ को सहारा दे सकता है।

5. Eternal 327

CLSA ने जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी Eternal को खरीदने की सलाह के साथ ₹506 का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज के मुताबिक इसमें करीब 55% तक की तेजी देखने को मिल सकती है।

Blinkit का विस्तार इस निवेश की बड़ी वजहों में शामिल है। कंपनी नए शहरों में पहुंच बढ़ा रही है और डार्क स्टोर्स की संख्या भी बढ़ा रही है। Zomato Gold के जरिए ऑर्डर की बढ़ती संख्या और फूड डिलीवरी बिजनेस में सुधार से भी ग्रोथ की उम्मीद है।

Stocks to Watch: 31 अगस्त को ये 14 स्टॉक्स फोकस में रहेंगे, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका

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Upcoming IPO: विजय केडिया का है तगड़ा निवेश! एंकर राउंड में मधुसूदन केला ने भी लगाया बड़ा दांव, 31 अगस्त से खुलेगा ये आईपीओ

Vijay Kedia Backed Asuthosh Fibre IPO: शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक विजय केडिया के निवेश वाली कंपनी आशुतोष फाइबर का आईपीओ दांव लगाने के लिए खुलने जा रहा है। पब्लिक सब्सक्रिप्शन खुलने से ठीक पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों के जरिए ₹16.04 करोड़ जुटा लिए हैं।

एंकर बुक में मधुसूदन केला के मेंटरशिप वाले सिंगुलैरिटी AMC समेत कई बड़े फंड्स ने हिस्सा लिया है। आइए आपको बताते हैं इस आईपीओ की प्राइस बैंड, महत्वपूर्ण तारीखें और कैसी है कंपनी की सेहत।

एंकर बुक: इन 5 बड़े निवेशकों ने लगाए पैसे

28 अगस्त को कंपनी ने एंकर निवेशकों को अपर प्राइस बैंड पर 17.43 लाख शेयर आवंटित किए:

  1. Nine Alps Corporate Advisors: ₹6 करोड़ के निवेश से 6.52 लाख शेयर खरीदे।
  2. Singularity Equity Fund II: ₹3.45 करोड़ के निवेश से 3.75 लाख शेयर खरीदे।
  3. Nav Capital Emerging Star Fund: ₹3.45 करोड़ के निवेश से 3.75 लाख शेयर खरीदे।
  4. Aarth AIF Growth Fund: ₹2.11 करोड़ के निवेश से 2.3 लाख शेयर खरीदे।
  5. Vira Bharat Opportunities Fund: ₹1 करोड़ के निवेश से 1.09 लाख शेयर खरीदे।

Asuthosh Fibre IPO की सभी जरूरी डिटेल्स

गुजरात बेस्ड टेक्निकल टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स बनाने वाली यह कंपनी फ्रेश इश्यू के जरिए बाजार से कुल ₹56.34 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इसमें कोई भी ऑफर फॉर सेल (OFS) कंपोनेंट नहीं है।

  • IPO खुलने की तारीख: 31 अगस्त
  • IPO बंद होने की तारीख: 2 सितंबर
  • प्राइस बैंड: ₹87 से ₹92 प्रति शेयर
  • अलॉटमेंट: 3 सितंबर
  • लिस्टिंग: 7 सितंबर

आईपीओ के पैसों का क्या करेगी कंपनी?

आशुतोष फाइबर जुटाए गए फंड का इस्तेमाल अपनी क्षमता बढ़ाने और कर्ज कम करने में करेगी। ₹25.5 करोड़ नए उपकरण और मशीनरी की खरीद के लिए। ₹20 करोड़ कंपनी का पुराना कर्ज चुकाने के लिए और बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए करेगी।

विजय केडिया की कितनी है हिस्सेदारी?

ऑफर से पहले कंपनी के प्रमोटर्स के पास 59.79% हिस्सेदारी है। बाकी हिस्सेदारी पब्लिक शेयरधारकों के पास है, जिसमें शेयर बाजार के जाने-माने निवेशक विजय केडिया की 6.57% हिस्सेदारी शामिल है। इस आईपीओ के मर्चेंट बैंकर के रूप में Mefcom Capital Markets को नियुक्त किया गया है।

अब जानिए कैसी है कंपनी की वित्तीय सेहत

टेक्सटाइल यार्न और फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र से जुड़ी इस कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है। मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का मुनाफा 88.5% बढ़कर ₹16.04 करोड़ हो गया, जो इससे पिछले साल (FY25) में ₹8.5 करोड़ था। कंपनी का कुल रेवेन्यू 2.9% की मामूली बढ़त के साथ ₹117.37 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹114 करोड़ था।

क्या है ग्रे मार्केट का हाल?

आईपीओ वॉच के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 29 अगस्त 2026 को आशुतोष फाइबर आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹37 प्रति शेयर दर्ज किया गया है। यह इसके अपर प्राइस बैंड ₹92 के मुकाबले 40.22% के तगड़े प्रीमियम का संकेत दे रहा है।

इससे पहले 28 अगस्त को भी जीएमपी ₹37 ही था, जबकि 27 अगस्त को यह ₹15 (16.30%) और 26 अगस्त को ₹13 (14.13%) पर बना हुआ था। लगातार बढ़ते और मजबूत जीएमपी ट्रेंड से स्पष्ट है कि प्राइमरी मार्केट में इस आईपीओ को लेकर निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रही है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Ather Konarc: एथर ने लॉन्च किया सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर Konarc, कीमत ₹99999 से शुरू, जानिए इसके फीचर्स और पूरी रेंज

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी एथर एनर्जी ने भारतीय बाजार में अपने पहले मास-मार्केट इलेक्ट्रिक स्कूटर एथर कोनार्क लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने 29 अगस्त को आयोजित अपने सालाना एथर कम्युनिटी डे के मौके पर इस नए स्कूटर के लॉन्चिंग का ऐलान किया है. एथर कोनार्क की शुरुआती कीमत ₹99999 तय की गई है. इसके जरिए कंपनी की नजर अब प्रीमियम सेगमेंट से आगे बढ़कर भारत के विशाल आम उपभोक्ता वर्ग को साधने पर है. 1 लाख रुपये से लेकर 1.44 लाख रुपये तक के बजट सेगमेंट में उतारे गए इस स्कूटर को एथर की मौजूदा 450 सीरीज की तुलना में अधिक पारिवारिक और व्यावहारिक लुक में डिजाइन किया गया है.

100 किमी से लेकर 200 किमी तक की रेंज, जानिए सभी वेरिएंट्स की कीमतें

एथर ने कोनार्क इलेक्ट्रिक स्कूटर को ग्राहकों की जरूरत और बजट के अनुसार कई रेंज विकल्पों और वेरिएंट्स के साथ पेश किया है. 100 किमी रेंज वेरिएंट की शुरुआती कीमत ₹99999 रखी गई है.125 किमी रेंज वेरिएंट की कीमत ₹121999 रखी गई है. ये दोनों शुरुआती वेरिएंट्स सितंबर से बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे. इसके अलावा कंपनी भविष्य के लिए भी अपना मजबूत रोडमैप लेकर आई है.

कंपनी ₹144999 की कीमत पर अधिक रेंज देने वाले 161 किमी रेंज वेरिएंट को उतारने की योजना बना रही है. लंबी दूरी तय करने वाले लोगों के लिए 200 किमी की रेंज वाला कोनार्क वेरिएंट 2027 की तीसरी तिमाही में लॉन्च किया जाएगा. कंपनी अपने रोडमैप के तहत 125 किमी और 161 किमी रेंज विकल्पों के साथ कोनार्क Z को 2027 की दूसरी तिमाही में पेश करेगी.

नए EL प्लेटफॉर्म पर आधारित पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर

एथर कोनार्क कंपनी के नए-जनरेशन EL प्लेटफॉर्म पर आधारित पहला प्रॉडक्शन स्कूटर है. इस प्लेटफॉर्म को एथर ने विशेष रूप से वर्सेटिलिटी, स्केलेबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में सुधार के लिए तैयार किया है. एथर की 450 सीरीज वाले प्लेटफॉर्म के बाद यह कंपनी का पहला पूरी तरह से नया व्हीकल आर्किटेक्चर है. ईएल प्लेटफॉर्म को सबसे पहले एथर कम्युनिटी डे 2025 के दौरान पेश किया गया था, जहां कंपनी ने रिड्यूक्स (Redux) कॉन्सेप्ट व्हीकल, नेक्स्ट-जनरेशन फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी और AtherStack 7.0 को शोकेस किया था.

एथर को उम्मीद है कि यह नया प्लेटफॉर्म उसके कंज्यूमर सपोर्ट का दायरा बढ़ाएगा और मास-मार्केट सेगमेंट में कंपनी की ग्रोथ को नई रफ्तार देगा. भविष्य में कंपनी के कई अन्य प्रोडक्ट्स भी इसी ईएल प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगे.

बाजार में किससे होगी सीधी टक्कर?

एथर कोनार्क बाजार में उतरते ही टीवीएस और बजाज के स्थापित फैमिली स्कूटर्स को सीधी चुनौती देता है. ₹99999 की शुरुआती कीमत पर कोनार्क का एंट्री-लेवल वेरिएंट सीधे TVS iQube और Bajaj Chetak C2501 के समान प्राइस ब्रैकेट में आता है.

हालांकि, चेतक C2501 (113 किमी) और एंट्री iQube (114 किमी) की तुलना में कोनार्क के 100 किमी वाले बेस वेरिएंट में रेंज का कोई बड़ा फर्क नहीं है, लेकिन इसका 161 किमी वाला वेरिएंट चेतक व आईक्यूब के टॉप-एंड वेरिएंट्स को कड़ी टक्कर देता है.

₹121999 की कीमत वाला 125 किमी रेंज का कोनार्क, एथर के ही अपने मौजूदा रिज्टा एस के करीब है, जिसकी शुरुआती कीमत ₹121499 है.

मास-मार्केट की जरूरतों को पूरा करने का सही समय: तरुण मेहता

लॉन्च के मौके पर एथर के सीईओ और को फाउंडर तरुण मेहता ने कहा कि भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट अब शुरुआती खरीदारों से आगे बढ़कर मेनस्ट्रीम कस्टमर्स की ओर बढ़ रहा है.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हम वर्षों से एक अच्छे स्कूटर को बनाने के लिए जरूरी आर्किटेक्चर और तकनीकों में निवेश कर रहे हैं. उन्होंने आगे लिखा कि अब ईवी को एक कस्टमर के लिए रीसेल वैल्यू, सर्विसिंग में लगने वाला समय, खराब सड़कों पर राइडिंग कंफर्ट से लेकर आसान और सुपर-फास्ट चार्जिंग जैसी सारी जरूरतों को पूरा करना है.

तरुण मेहता ने आगे कहा कि आज के समय में बेहतर विजिबल सेफ्टी, आसान चार्जिंग सुविधाएं और सॉफ्टवेयर-लेड सेफ्टी कस्टमर्स के ओनरशिप एक्सपीरियंस का सबसे अहम हिस्सा बन चुके हैं.

अपने पोर्टफोलियो को 450 सीरीज और रिज्टा से आगे बढ़ाते हुए, एथर कोनार्क के जरिए आम उपभोक्ताओं की हर जरूरत को पूरा करने का दावा कर रहा है.

भारत में बनाओ, दुनिया भर में बेचो! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी कंपनियों को दिया बड़ा ऑफर, GIFT City का भी जिक्र, समझिए पूरी तैयारी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्लोबल निवेशकों और कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग बेस के साथ-साथ टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेंटर स्टैबलिश करने का ओपन ऑफर दिया है। अमेरिका की छह दिन की यात्रा पर गईं वित्त मंत्री ने शिकागो में टॉप इन्वेस्टर्स और बिजनेस लीडर के साथ एक हाई लेवल बिजनेस राउंडटेबल में यह बात कही। उन्होंने ग्लोबल पार्टनर्स से अपील की कि वे भारत की विशाल प्रतिभा और अवसरों का फायदा उठाते हुए देश में कोडेवलपमेंट और कोप्रोडक्शन करें। इससे सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रोडक्ट्स और कैपेसिटी को डेवलप करें।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शिकागो में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के सहयोग से आयोजित इस बैठक में वित्त मंत्री ने भारत की व्यापक आर्थिक वृद्धि, देश में चल रहे रिफॉर्म्स की स्पीड और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट को लेकर डिटेल में बात की है।

भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, ग्लोबल प्लेटफॉर्म समझें

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत में निवेश का अवसर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह अपने विशाल पैमाने, विकास दर, इंजीनियरिंग प्रतिभा, आधुनिक बुनियादी ढांचे और पिछले एक दशक में हुए सुधारों से काफी व्यापक इंपैक्ट रखता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत को सिर्फ एक कंज्यूमर मार्केट के रूप में न देखें बल्कि इसे दुनिया के लिए मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने एक मजबूत प्लेटफॉर्म के रूप में देखें।

इस बैठक का मैं एजेंडा भारत में निर्माण करें — भारत के लिए और दुनिया के लिए (Manufacture in India — for India and for the world) था। इसमें एआई, डिजिटल, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस और हाई एंड टेक्नोलॉजी में अवसरों पर चर्चा हुई।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और AI में नए मौके

वित्त मंत्री ने बताया कि भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे यूपीआई, डिजिलॉकर, ओएनडीसी और इंडिया स्टैक ने आबादी के स्तर पर कई बड़े और सफल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि अब अगला बड़ा अवसर एआई, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हाई वैल्लूर बिजनेस तैयार करने में है। भारत में बनाए गए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स तेजी से ग्लोबल इनोवेशन के सेंटर बनते जा रहे हैं।

गिफ्ट सिटी तेजी से बन रहा इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर

पीटीआई के मुताबिक वित्त मंत्री ने गुजरात की गिफ्ट सिटी (GIFT City) का खास जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर के रूप में तेजी से उभर रहा है। जून 2026 तक गिफ्ट सिटी में 1250 से अधिक रजिस्टर्ड संस्थाएं काम कर रही हैं। सीतारमण ने बताया कि गिफ्ट सिटी बैंकिंग, फंड मैनेजमेंट, रीइंश्योरेंस, एयरक्राफ्ट एंड शिप लीजिंग, सस्टेनेबल फाइनेंस और दूसरी क्रॉस बॉर्डर फाइनेंशियल सर्विसेज में काफी संभावनाएं देता है। उन्होंने ग्लोबल इंस्टीट्यूशन से आग्रह किया वो भी इसे भारत के फाइनेंशियल इकोसिस्टम में एंट्री के गेटवे के रूप में इस्तेमाल करें।

ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत न सिर्फ एक बड़े बाजार के रूप में स्केल देता है, बल्कि एक लॉन्गटर्म इनवेस्टमेंट और ऑपरेशनल प्लेटफ़ॉर्म भी ऑफर करता है। उत्पादन-जुड़े प्रोत्साहन (PLI) जैसी टारगेटेड नीतिगत पॉलिसी स्कीम के जरिए अब भारत का ध्यान सिर्फ पार्ट्स को असेंबल करने तक सीमित नहीं है बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और हाई एंड टेक्नोलॉजी तैयार करने पर भी है। क

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, एग्रीकल्चर और डिफेंस सेक्टर पर जोर

वित्त मंत्री ने कहा कि देश में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स, रेलवे का मॉडर्नाइजेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और हाई-स्पीड रेल सहित इंफ्रास्ट्रक्चर का काफी तेजी विस्तार हो रहा है। ये सब मिलकर लॉन्गटर्म इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टमेंट के मौके बना रहे हैं। नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) इनमें हिस्सेदारी लेने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स को एक कमर्शियल प्लेटफॉर्म दे रहा है।

भारत का एग्रीकल्चर बेस, बढ़ती इनकम और बदलता कंजंशन पैटर्न फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमेशन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड चेन क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही हैं। रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘iDEX’ जैसी पहलों के माध्यम से भारत ड्रोन, ऑटोनोमस सिस्टम और हाई एंड टेक्नोलॉजी में तेजी से कैपेसिटी बिल्डिंग कर रहा है।

आपको बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान नॉर्थ कैरोलिना के एशविले में जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगी। इसके बाद न्यूयॉर्क का दौरा भी करेंगी।

2030 तक ₹20 लाख करोड़ का हो सकता है EV मार्केट, 5 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी: नितिन गडकरी

भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV बाजार तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि 2030 तक भारत का EV बाजार ₹20 लाख करोड़ का हो सकता है। इससे करीब 5 करोड़ नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।

गडकरी ने CII-ITC Centre of Excellence for Sustainable Development के एक कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने बताया कि भारत में अभी करीब 57 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल रजिस्टर्ड हैं। देश में EV की गाड़ियों के मार्केट में हिस्सेदारी करीब 7% है।

EV बाजार में बड़ा मौका

गडकरी के मुताबिक, भारत के EV सेक्टर में आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार हो सकता है। सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही है। इससे वाहन निर्माण के साथ बैटरी, चार्जिंग और इससे जुड़े दूसरे कारोबार भी बढ़ सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प जैसे बड़े टू-व्हीलर निर्माता भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता दिखा रहे हैं। दोनों कंपनियां अपने बनाए 50% से ज्यादा वाहन विदेशों में एक्सपोर्ट करती हैं।

इलेक्ट्रिक बसों की मांग ज्यादा

गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल करीब 1 लाख इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत है। लेकिन घरेलू कंपनियां अभी सिर्फ 50,000 से 60,000 इलेक्ट्रिक बसें सालाना बना रही हैं।

यानी इस सेगमेंट में अभी भी बड़ी कमी है। सरकार का फोकस घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर है। इससे इलेक्ट्रिक बस बनाने वाली कंपनियों के लिए भी अवसर बढ़ सकते हैं।

ऑटो सेक्टर को नंबर-1 बनाने का लक्ष्य

गडकरी ने कहा कि सरकार अगले पांच साल में भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया का नंबर-1 बनाना चाहती है। उन्होंने माना कि लक्ष्य मुश्किल है। लेकिन इसे हासिल करना असंभव नहीं है।

उनके मुताबिक, जब उन्होंने परिवहन मंत्री का पद संभाला था, तब भारत का ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री करीब ₹14 लाख करोड़ का था। अब इसका आकार करीब ₹22 लाख करोड़ हो गया है।

अमेरिका और चीन से पीछे भारत

गडकरी के मुताबिक, अमेरिका का ऑटोमोबाइल उद्योग करीब ₹78 लाख करोड़ का है। चीन का उद्योग करीब ₹47 लाख करोड़ का है। वहीं भारत का ऑटो सेक्टर करीब ₹23 लाख करोड़ का है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रशिक्षित कर्मचारी और प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है। इसलिए देश के पास वैश्विक ऑटो हब बनने की क्षमता है।

फॉसिल फ्यूल इंपोर्ट घटाने पर जोर

गडकरी ने कहा कि भारत हर साल करीब ₹22 लाख करोड़ का फॉसिल फ्यूल इंपोर्ट करता है। इससे देश के आयात बिल के साथ प्रदूषण भी बढ़ता है। उन्होंने बायोफ्यूल और दूसरे वैकल्पिक ईंधनों को भविष्य के लिए अहम बताया।

लॉजिस्टिक्स लागत 8% करने का लक्ष्य

सरकार लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर GDP के करीब 8% तक लाने का लक्ष्य रखती है। गडकरी के मुताबिक, इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।

उन्होंने बताया कि IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बेंगलुरु की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत करीब 16% से घटकर 10% रह गई है। सरकार इसे और घटाकर 8% तक लाना चाहती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

2030 तक EV सेक्टर में आएंगी 5 करोड़ नौकरियां, 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा मार्केट! नितिन गडकरी का बड़ा दावा

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही इस सेक्टर में 5 करोड़ नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, CII-ITC सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर से आयोजित एक समिट को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत में अभी 57 लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं और ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा, “2030 तक भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट 20 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। इससे 2030 तक पांच करोड़ नौकरियां भी पैदा होंगी।”

इस दौरान गडकरी ने भारत की दो सबसे बड़ी टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनियों, बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प की एक्सपोर्ट क्षमता का भी जिक्र किया और कहा कि वे अपने बनाए गए वाहनों में से 50 प्रतिशत से ज्यादा का एक्सपोर्ट करती हैं।

भारत को और ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत

गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल एक लाख इलेक्ट्रिक बसों की मांग है, लेकिन देश के मैन्युफैक्चरर अभी साल में सिर्फ 50,000-60,000 EV बसें ही बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच सालों में भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया में सबसे बड़ा बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के पास ट्रेंड मैनपावर और कॉम्पिटिटिव व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं हैं।

गडकरी ने आगे कहा, “अगले पांच सालों में हमारा लक्ष्य भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया में नंबर 1 बनाना है… यह मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं।”

उन्होंने कहा कि भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर का आकार काफी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर का पद संभाला था, तब इस सेक्टर की वैल्यू 14 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभी US के ऑटोमोबाइल सेक्टर की वैल्यू 78 लाख करोड़ रुपये है, इसके बाद चीन 47 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे और भारत 23 लाख करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है।

फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने पर जोर

गडकरी ने कहा कि भारत फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट पर 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ता है।

उन्होंने कहा, “हम अच्छे हाईवे बना रहे हैं… अच्छे रास्ते और उनके विकल्प तैयार कर रहे हैं, और बायो-फ्यूल ही भविष्य है।”

लॉजिस्टिक्स लागत के बारे में गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य इसे घटाकर 8% तक लाना है। उनका तर्क है कि लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से ग्लोबल मार्केट में भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धा क्षमता) बेहतर होगी।

गडकरी ने कहा कि IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बैंगलोर की हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16% से घटकर 10% हो गई है।

उन्होंने कहा, “सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर 8% करना है, जिससे भारत को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी।”

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Deepa Jewellers IPO: त्योहारी सीजन से पहले ज्वैलरी सेक्टर के इस मेगा आईपीओ में पैसे लगाने का बढ़िया मौका! प्राइस बैंड ₹168-177 तय

Deepa Jewellers IPO: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले एक और ज्वैलरी सेक्टर की कंपनी अपना आईपीओ ला रही है। हैदराबाद बेस्ड 22-कैरेट हॉलमार्क गोल्ड ज्वैलरी प्रोसेस करने और सप्लाई करने वाली कंपनी दीपा ज्वेलर्स ने अपने आईपीओ के लिए प्राइस बैंड का ऐलान कर दिया है। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए ₹460 करोड़ जुटाने की प्लानिंग में हैं।

फ्रेश इश्यू और OFS का गणित

दीपा ज्वेलर्स मार्केट से कुल ₹459.7 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1,701.4 करोड़ आंका गया है। कंपनी ₹250 करोड़ मूल्य के नए शेयर जारी करेगी। साथ ही कंपनी के प्रमोटर्स ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए ₹209.7 करोड़ के 1.18 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेंगे।

IPO की पूरी डिटेल्स

  • प्राइस बैंड: ₹168 से ₹177 प्रति शेयर
  • एंकर बुक ओपनिंग: 31 अगस्त
  • आईपीओ ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 1- 3 सितंबर 2026
  • अलॉटमेंट: 4 सितंबर
  • लिस्टिंग: 8 सितंबर
  • न्यूनतम निवेश: अपर प्राइस बैंड पर न्यूनतम ₹14,868 के निवेश की जरूरत होगी।

कंपनी का बिजनेस मॉडल और फंड्स का उपयोग

दीपा ज्वेलर्स एक संगठित बिजनेस-टू-बिजनेस(B2B) कंपनी है। यह 41 कारीगरों के नेटवर्क के जरिए आउटसोर्स मैन्युफैक्चरिंग मॉडल पर ज्वैलरी डिजाइन और प्रोसेस करवाती है। कंपनी तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में रिटेल चेन्स और स्टोर्स को अपनी सप्लाई देती है।

फ्रेश इश्यू से मिलने वाले ₹250 करोड़ में से ₹215 करोड़ का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और इन्वेंट्री बढ़ाने के लिए किया जाएगा, जबकि बाकी बची रकम सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों में खर्च होगी।

दमदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस: 158% उछला मुनाफा

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन वित्तीय मोर्चे पर काफी शानदार रहा है। 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का नेट प्रॉफिट 158.2% बढ़कर ₹104.8 करोड़ पर पहुंच गया, जो बीते वर्ष (FY25) में ₹40.6 करोड़ था। इस दौरान कंपनी की कुल आय 37.9% की बढ़त के साथ ₹1,926.7 करोड़ रही, जो पिछले साल ₹1,397 करोड़ थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।