2026 के साहित्य नोबेल का ऐलान आज:चीन की कैन श्वे सबसे आगे, भारत के अमिताव घोष भी दावेदार; सिर्फ 1 भारतीय के पास यह पुरस्कार

2026 के साहित्य नोबेल पुरस्कार का ऐलान आज किया जाएगा। स्वीडिश अकादमी भारतीय समय के मुताबिक शाम 4:30 बजे विजेता के नाम की घोषणा करेगी। ऐलान से पहले बुकमेकरों के अनुमान में चीन की प्रयोगधर्मी लेखिका कैन श्वे सबसे आगे चल रही हैं। भारत के लेखक अमिताव घोष का नाम भी संभावित विजेताओं में शामिल है। भारत से अब तक सिर्फ रवींद्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्हें 1913 में यह पुरस्कार दिया गया था। वह नोबेल जीतने वाले पहले एशियाई भी थे। नोबेल पुरस्कार के विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। पुरस्कार राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी करीब 11.5 करोड़ रुपए है। सपनों जैसी कहानियां लिखती हैं कैन श्वे चीन की 73 साल की लेखिका कैन श्वे इस बार साहित्य के नोबेल की सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। उनका असली नाम डेंग शियाओहुआ है। कैन श्वे की कहानियां आम कहानियों से अलग होती हैं। इनमें सपने जैसे दृश्य होते हैं और कहानी से ज्यादा किरदारों के मन में चल रहे विचारों पर ध्यान दिया जाता है। उनके लेखन की तुलना मशहूर लेखकों फ्रांज काफ्का और जॉर्ज लुइस बोर्खेस से भी की गई है। उनकी चर्चित किताबों में ‘द लास्ट लवर’, ‘लव इन द न्यू मिलेनियम’ और ‘आई लिव इन द स्लम्स’ शामिल हैं। इंटरनेशनल बुकर की शॉर्टलिस्ट में पहुंचे थे अमिताव घोष भारत के लेखक अमिताव घोष की चर्चित किताब ‘सी ऑफ पॉपीज’ 2008 में इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार की शॉर्टलिस्ट में शामिल हुई थी। यह किताब उनके आइबिस ट्रिलॉजी का पहला हिस्सा है। घोष की किताबों में इतिहास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे प्रमुखता से दिखाई देते हैं। उनकी एक और चर्चित किताब ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ जलवायु परिवर्तन और इंसानों पर उसके असर के बारे में है। दक्षिण एशियाई मूल के दूसरे चर्चित लेखकों में सलमान रुश्दी, माइकल ओंडाट्जे और मॉरीशस की भारतीय मूल की लेखिका आनंदा देवी शामिल हैं। जापान-ऑस्ट्रेलिया समेत 10 देशों के लेखक भी नोबेल की रेस में जापान के मशहूर लेखक हारुकी मुराकामी लंबे समय से साहित्य के नोबेल के संभावित विजेताओं में शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया के जेराल्ड मर्नेन और अमेरिका के थॉमस पिंचन भी प्रमुख नामों में हैं। इसके अलावा मेक्सिको की क्रिस्टीना रिवेरा गार्सा, स्पेन के एनरिक विला-मातास, पुर्तगाल की लिडिया जॉर्ज, रूस की ल्यूडमिला उलित्स्काया, कनाडा की मार्गरेट एटवुड और फ्रांस के मिशेल ह्वेलेबेक के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि, ये आधिकारिक दावेदारों की सूची नहीं है। स्वीडिश अकादमी संभावित विजेताओं की शॉर्टलिस्ट सार्वजनिक नहीं करती। पिछले 10 साल में 4 महिलाओं को मिला साहित्य नोबेल पिछले 10 साल में साहित्य का नोबेल 10 लेखकों को मिला, जिनमें 4 महिलाएं थीं। इनमें 6 ने अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओं में लिखा, जबकि 6 विजेता यूरोप से रहे। 2024 में दक्षिण कोरिया की हान कांग एशिया से पुरस्कार जीतने वाली लेखिका थीं। इस दौरान दक्षिण एशिया से कोई लेखक नहीं जीता। हर साल स्वीडिश अकादमी नॉमिनेशन मंगाती है। इसमें अकादमी के सदस्य, साहित्य और भाषा के प्रोफेसर, पूर्व नोबेल विजेता और लेखक संगठनों के प्रमुख नाम भेज सकते हैं। लेखक खुद को नामांकित नहीं कर सकते। नोबेल कमेटी पहले 15 से 20 नाम चुनती है, फिर मई में इन्हें 5 उम्मीदवारों तक सीमित किया जाता है। इसके बाद स्वीडिश अकादमी के 18 सदस्य वोटिंग से विजेता चुनते हैं। 50 साल तक गोपनीय रहता है नॉमिनेशन स्वीडिश अकादमी नोबेल के नामांकित लेखकों की लॉन्गलिस्ट या शॉर्टलिस्ट जारी नहीं करती। नॉमिनेशन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक गोपनीय रहती है। इसलिए 2026 में किन लेखकों को नामांकित किया गया, इसकी पूरी जानकारी 2076 में सामने आएगी। नोबेल रिकॉर्ड के मुताबिक, सरवपल्ली राधाकृष्णन, श्री अरविंद, ताराशंकर बंद्योपाध्याय और आरके नारायण जैसे भारतीय लेखकों को अलग-अलग वर्षों में साहित्य नोबेल के लिए नामांकित किया गया था। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 2026 का केमिस्ट्री नोबेल फ्रांस-जापान के वैज्ञानिकों को:अणुओं के मिरर इमेज की 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई; दवाएं बनाने में मदद मिली 2026 का केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन और जापान के केन्सो सोआई को दिया गया है। दोनों वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान की करीब 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

T-20I टीम में बैंच पर बैठे वैभव सूर्यवंशी बिहार का रणजी मैच भी करेंगें मिस

वेस्टइंडीज के खिलाफ टी-20 टीम में शामिल वैभव सूर्यवंशी बैंच पर बैठे हैं और शायद यह पूरी सीरीज ही वह बैंच पर बैठे क्योंकि मुख्य कोच गौतम गंभीर ने इशारा कर दिया है कि वह विश्व विजेता टीम के संयोजन से खिलवाड़ नहीं करना चाहते। सूर्यवंशी सिर्फ एक वैकल्पिक सलामी बल्लेबाज हैं। ऐसे में वह ना ही राष्ट्रीय टीम के लिए खेल पा रहे हैं और ना ही अपने राज्य बिहार की रणजी टीम के साथ खेल पाएंगे।

वेस्टइंडीज के साथ चल रही पांच मैचों की टी-20 सीरीज के लिए भारतीय राष्ट्रीय टीम में शामिल वैभव सूर्यवंशी रणजी ट्रॉफी में बिहार की ओर से पहले चार मैच नहीं खेल पाएंगे। बिहार क्रिकेट में चल रही भारी उथल-पुथल के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से नियुक्त चयनकर्ताओं ने रणजी ट्रॉफी के पहले दो मैचों के लिए बिहार की 17 सदस्यीय टीम का चयन किया है।

बिहार इस बार एलीट ग्रुप में शामिल है और अपने अभियान की शुरुआत 11 अक्टूबर से नवनिर्मित राजगीर क्रिकेट स्टेडियम में उत्तर प्रदेश के खिलाफ करेगा। टीम का दूसरा मैच 18 अक्तूबर से मेजबान बड़ौदा से होगा। बिहार टीम की अगुवाई साकिबुल गनी करेंगे जबकि हिमांशु सिंह को उप-कप्तान बनाया गया है। वेस्टइंडीज और फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में भारतीय टीम का हिस्सा युवा बल्लेबाज सूर्यवंशी टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में टीम के साथ नहीं होंगे।

वेस्टइंडीज के खिलाफ जारी टी-20 सीरीज जहां 17 अक्टूबर तक चलेगी, तो वहीं उसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ 22 अक्टूबर से एक नवंबर के बीच होने वाली पांच मैचों की टी-20 सीरीज में भी सूर्यवंशी भारतीय दल के साथ होंगे।

बिहार के पूर्व रणजी कप्तान आशुतोष अमन को प्रमुख कोच बनाया गया है जबकि पूर्व रणजी खिलाड़ी अशोक कुमार एसिस्टेंट कोच की भूमिका में होंगे। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में सनराइजर्स हैदराबाद (एसआरएच) के लिए शानदार प्रदर्शन करने वाले तेज गेंदबाज साकिब हुसैन टीम के प्रमुख चेहरों में होंगे।

साकिब ने आईपीएल में 11 मैचों में 26.46 की औसत से 15 विकेट झटके थे। उनके अलावा मुंबई इंडियंस (एमआई) का हिस्सा रहे बाएं हाथ के तेज गेंदबाज मोहम्मद इजहार को भी टीम में जगह मिली है। इजहार को आईपीएल में डेब्यू का अवसर नहीं मिल पाया था।

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) में प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े बदलाव चल रहे हैं। 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अश्विनी कुमार सिंह को बीसीए का प्रशासक नियुक्त किया था। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने बिहार की महिला और सभी एज-ग्रुप टीमों के चयन के लिए बीसीसीआई से मदद का अनुरोध किया। इसके बाद बीसीसीआई ने बिहार की क्रिकेट टीमों के चयन की जिम्मेदारी पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ताओं और अनुभवी क्रिकेटरों को सौंपी।

इस चयन समिति की अध्यक्षता भारत के पूर्व तेज गेंदबाज हरविंदर सिंह ने की। समिति में तमिलनाडु के पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर शरत श्रीधरण और मध्य प्रदेश के पूर्व प्रथम श्रेणी क्रिकेटर अमिताभ विजयवर्गीय भी शामिल थे। इसके अलावा प्रशासक अश्विनी कुमार सिंह ने बिहार के पूर्व रणजी कप्तान सुनील कुमार, पूर्व रणजी खिलाड़ी और कोच ज़शान उल यक़ीन और बिहार की पूर्व महिला क्रिकेटर शिखा सोनी को बीसीए के साथ मिलकर काम करने वाली समिती में रखा है।

एलीट ग्रुप ए में बिहार का सामना उत्तर प्रदेश के अलावा बड़ौदा, मध्य प्रदेश, गोवा, जम्मू-कश्मीर, विदर्भ और पुडुचेरी से होगा। बिहार घर में अपने सभी मैच राजगीर में खेलेगा, जो पहली बार किसी प्रथम श्रेणी मैच की मेजबानी करने जा रहा है।

राजगीर के नवनिर्मित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में पहली बार रणजी मुकाबले का आयोजन होने से बिहार के क्रिकेट प्रेमियों में भी खासा उत्साह है। यह मुकाबला न केवल बिहार के घरेलू क्रिकेट सत्र की शुरुआत करेगा, बल्कि राजगीर के इस नए क्रिकेट मैदान को भी आधिकारिक बीसीसीआई के घरेलू क्रिकेट नक़्शे पर स्थापित करेगा।

रणजी ट्रॉफ़ी के लिए बिहार की टीम:– साकिबुल गनी (कप्तान), आयुष लोहारुका, मंगल महरौर, नमन गौरव, पीयूष सिंह, बिपिन कुमार सौरभ(विकेटकीपर), श्रमण निग्रोध (विकेटकीपर), आकाश राज, पृथ्वी राज, हिमांशु सिंह (उप-कप्तान), ख़ालिद आलम, सूरज कुमार कश्यप, साकिब हुसैन, मोहम्मद इज़हार, शब्बीर ख़ान, राघवेंद्र सिंह और आमोद यादव।

Video: होम गार्ड भर्ती में साड़ी पहन नंगे पैर दौड़ने वाली कविता की कहानी! पति नहीं रहे तो बच्चों, ससुराल का बोझ उठाने का ये जज्बा इमोशनल कर देगा

रामगढ़ की सुबह इन दिनों सिर्फ सूरज की पहली किरणों से नहीं, बल्कि उन महिलाओं के हौसले से भी रोशन होती है, जो अपने सपनों के लिए मैदान में पसीना बहा रही हैं। इन्हीं में 32 वर्षीय कविता कुमारी की कहानी सबसे अलग नजर आती है। दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की रहने वाली कविता विधवा हैं और दो बच्चों की मां भी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य चुना है, जो उनकी जिंदगी बदल सकता है। हर सुबह घर के जरूरी काम निपटाने के बाद कविता करीब 8 किलोमीटर दूर रामगढ़ के सिदो-कान्हू मैदान पहुंचती हैं। उनके पास महंगे रनिंग शूज, ट्रैकसूट या स्पोर्ट्स टी-शर्ट नहीं हैं।

ऐसे में साड़ी ही उनका अभ्यास का पहनावा बन गई है। तेज धूप, लंबा रास्ता और सीमित साधन भी उनके कदम नहीं रोक पाए। कविता की कोशिश सिर्फ नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित भविष्य तैयार करना चाहती हैं।

पहले देखने पहुंचीं, फिर खुद दौड़ने लगीं

कविता शुरुआत में मैदान पर दूसरे अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग करते हुए देखने पहुंची थीं। धीरे-धीरे उन्होंने खुद भी दौड़ लगाने का फैसला किया। शुरुआत में 1.6 किलोमीटर की दूरी पूरी करने में उन्हें करीब 8 मिनट लगते थे। अब वह यही दूरी लगभग 7 मिनट में पूरी कर लेती हैं।

भर्ती परीक्षा के दौरान साड़ी पहनकर दौड़ते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। खास बात यह है कि कविता को काफी समय तक पता ही नहीं था कि उनका वीडियो इंटरनेट पर चर्चा में आ चुका है।

दो बच्चों की मां, परिवार की जिम्मेदारी भी कंधों पर

कविता के पति का निधन हो चुका है और वह अपने दो बच्चों के साथ बुजुर्ग ससुरालवालों की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने तैयारी का रास्ता नहीं छोड़ा। वह बताती हैं कि उनका मकसद सिर्फ नौकरी हासिल करना नहीं है। वह होमगार्ड बनकर अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को सुरक्षित करना चाहती हैं।

मैदान पर सिर्फ कविता नहीं, सैकड़ों संघर्ष की कहानियां

सिदो-कान्हू मैदान में हर सुबह का नजारा किसी कहानी से कम नहीं। ट्रैकसूट पहने युवतियों के साथ कई महिलाएं साड़ी और चप्पलों में दौड़ती दिखाई देती हैं। इनमें कई ऐसी हैं, जो घर का काम, बच्चों की देखभाल या खेतों का काम निपटाकर सीधे मैदान पहुंचती हैं।

बूढ़ा-खुखरा गांव की 30 वर्षीय सुनीता कुमारी भी साड़ी में दौड़ती हैं। उनका कहना है कि गरीब किसान परिवार से होने के कारण परिवार ट्रैकसूट और जूते नहीं खरीद सका, लेकिन इससे उनका हौसला कम नहीं हुआ।

किसी के लिए नौकरी, तो किसी के लिए बच्चों का भविष्य

गोला की मोनिका कुमारी ने 1.6 किलोमीटर की दौड़ करीब 6 मिनट 4 सेकंड में पूरी की। वहीं कई अन्य महिला अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती सिर्फ रोजगार का मौका नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने की उम्मीद है। फिटनेस कोच सिकंदर पांडेय और एक मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक अभ्यर्थियों को मुफ्त प्रशिक्षण दे रहे हैं। 2 अक्टूबर को आयोजित एक बड़ी दौड़ में करीब 2,500 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।

284 पदों ने जगाई नई उम्मीद

रामगढ़ में 284 होमगार्ड पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया 24 अक्टूबर से 5 नवंबर तक प्रस्तावित है। इसमें 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए और अतिरिक्त 5 प्रतिशत सीटें विधवा व तलाकशुदा महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। भर्ती में 1.6 किलोमीटर की दौड़ के अलावा लंबाई, सीना और अन्य शारीरिक परीक्षण होंगे। प्रशासन ने पारदर्शी तरीके से योग्यता और फिटनेस के आधार पर चयन की तैयारी की है।

Video: ‘हिंदी सीखो वरना नौकरी छोड़ दो’… Zomato सुपरवाइजर का वीडियो वायरल, अब मांगी माफी

रूस के पास तेल टैंकर पर यूक्रेन का ड्रोन अटैक:23 भारतीय सवार थे; ब्लैक सी में तनाव से रूस का अनाज निर्यात 71% घटा

रूस के पास ब्लैक सी में मंगलवार को लाइबेरिया के झंडे वाले तेल टैंकर में आग लग गई। टैंकर पर 23 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। हमले के बाद इमरजेंसी टीमों ने सभी का रेस्कयू किया। रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, टैंकर पर यूक्रेन की ओर से आए ड्रोन से हमला हुआ था। हमले के बाद जहाज में आग लगी और समुद्र में कच्चा तेल जलता दिखाई दिया। लगातार हमलों से ब्लैक सी का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। जहाज मालिक इस रूट पर जाने से बच रहे हैं और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। अगस्त में रूस का अनाज निर्यात 59 लाख टन से घटकर 17 लाख टन रह गया था, यानी 71% गिरावट। सितंबर में भी निर्यात करीब 50% घटकर 24.5 लाख टन रहने का अनुमान है। हमले के बाद की तस्वीरें… तेज आग के कारण बचाव दल नहीं पहुंच पा रहा था हमले से पहले मरीनट्रैफिक ने जहाज की आखिरी लोकेशन काला सागर में रूस-जॉर्जिया सीमा के पास बताई थी। रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक तेज आग की के कारण दमकलकर्मी शुरुआत में जहाज के पास नहीं पहुंच पा रहे थे। मंत्रालय ने बाद में कहा कि आग की तीव्रता घटने के बाद इमरजेंसी टीमों के पास इसे नियंत्रित करने के पर्याप्त साधन थे। जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में था द कीव इंडिपेंडेंट के मुताबिक, यह जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में शामिल था। इसे रूस के कथित शैडो फ्लीट का हिस्सा बताया गया था। रूस का शैडो फ्लीट उन टैंकरों और जहाजों का नेटवर्क है, जिनका इस्तेमाल रूस पश्चिमी प्रतिबंधों से बचकर तेल समेत दूसरे सामान के निर्यात में करता है। यूक्रेन ने फरवरी में जहाज पर प्रतिबंध लगाए थे। उसका कहना था कि इस नेटवर्क के जहाज रूस को जरूरी ऊर्जा आय बनाए रखने में मदद करते हैं। इसी आय से रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को फंड करता है। रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब 2 महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। इनमें अनाज ले जाने वाले जहाज, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक पोत शामिल हैं। लगातार हमलों का असर दुनिया की खाद्य सप्लाई पर पड़ने का खतरा है। गेहूं और मक्का की कीमतों में तेजी आ सकती है। रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के करीब 30% गेहूं निर्यात का हिस्सा रखते हैं। दोनों देशों का ज्यादातर अनाज ब्लैक सी के रास्ते दूसरे देशों तक पहुंचता है। रूस से अब 16 देश ही गेहूं खरीदते हैं रूसी गेहूं खरीदने वाले देशों की संख्या 43 से घटकर 16 रह गई है। वहीं, रूस से अनाज भेजने वाले बंदरगाहों की संख्या 47 से घटकर 10 रह गई। देश के सबसे बड़े बंदरगाह नोवोरोसिस्क से शिपमेंट 24.9 लाख टन से घटकर 10.4 लाख टन रह गया। बंदरगाहों और जहाजों पर हमले बढ़ने से अनाज का समुद्री कारोबार प्रभावित हुआ है। दोनों देशों के गोदामों में अनाज मौजूद है, लेकिन उसे खरीदार देशों तक पहुंचाने में मुश्किल आ रही है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है। गेहूं की कीमतें पिछले एक साल में करीब 30% बढ़ चुकी हैं। यूक्रेन ने सड़क-रेल से निर्यात बढ़ाया, लेकिन सप्लाई कम ब्लैक सी का समुद्री रास्ता प्रभावित होने के बाद यूक्रेन सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए अनाज दूसरे देशों तक भेज रहा है। हालांकि इन रास्तों की क्षमता ब्लैक सी के बंदरगाहों की तुलना में काफी कम है। डेन्यूब नदी के रास्ते भी सीमित मात्रा में अनाज भेजा जा रहा है। लेकिन जलस्तर और परिवहन क्षमता की वजह से यह विकल्प समुद्री रास्ते की पूरी भरपाई नहीं कर पा रहा है। मक्का की ग्लोबल सप्लाई पर भी असर का खतरा ब्लैक सी में बढ़ते तनाव का असर सिर्फ गेहूं पर नहीं, मक्का की सप्लाई पर भी पड़ सकता है। 2025-26 में यूक्रेन ने 2.3 करोड़ टन मक्का निर्यात किया था। यह दुनिया के कुल मक्का निर्यात का करीब 12% था। अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक जारी रहे तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्का की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज के पास जहाज पर हमला, 11 भारतीय जख्मी भारत ने मंगलवार को ओमान के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पनामा के झंडे वाले व्यापारिक जहाज पर हमले की निंदा की। हमले में 12 क्रू मेंबर घायल हुए, जिनमें 11 भारतीय हैं। पूरी खबर पढ़ें…

मेलोनी को अपनी आवाज चोरी होने की फिक्र:AI से बचने के लिए ट्रेडमार्क आवेदन दिया, ऐसा करने वाली पहली वर्ल्ड लीडर

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अपनी आवाज को गलत तरीके से इस्तेमाल होने से बचाने के लिए उसे ट्रेडमार्क कराने का आवेदन किया है। उनका यह कदम AI डीपफेक के खतरे से बचने के लिए है। मेलोनी ने यूरोपीय संघ के बौद्धिक संपदा कार्यालय (EUIPO) में यह आवेदन किया है। आवेदन के साथ मेलोनी ने करीब 4 सेकंड की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग जमा की है। इसमें वह इतालवी भाषा में दो बार कहती हैं- लो सोनो जॉर्जिया यानी मैं जियोर्जिया मेलोनी हूं। मेलोनी की 2021 में आई आत्मकथा का नाम भी लो सोनो जॉर्जिया था। यह वाक्य उनके राजनीतिक प्रचार से भी जुड़ा हुआ है। मेलोनी अपनी आवाज का ट्रेडमार्क कराने वाली पहली वर्ल्ड लीडर हैं। AI से आवाज की नकल कैसे होती है? कई कलाकार पहले ही ऐसा कदम उठा चुके AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ आवाज भी अब डिजिटल पहचान का हिस्सा बन गई है, जिसे सुरक्षित रखने के लिए कलाकार कानूनी रास्ते तलाश रहे हैं। मेलोनी अपनी आवाज को ट्रेडमार्क कराने वाली पहली बड़ी हस्ती नहीं हैं। दुनिया के कई कलाकार पहले भी अपनी आवाज, नाम और पहचान से जुड़े अधिकारों को कानूनी सुरक्षा दिलाने की कोशिश कर चुके हैं। जनवरी में अमेरिकी अभिनेता मैथ्यू मैककोनाघी ने अपनी तस्वीर और आवाज को ट्रेडमार्क कराने के लिए आवेदन किया था। अगस्त में 80 से ज्यादा कलाकारों ने ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम से ऐसा कानून बनाने की मांग की थी, जिससे लोगों को अपनी आवाज के इस्तेमाल पर कानूनी अधिकार मिल सके। टेलर स्विफ्ट ने आवाज के 2 सैंपल ट्रेडमार्क कराए अप्रैल में गायिका टेलर स्विफ्ट ने भी अमेरिका में तीन ट्रेडमार्क आवेदन किए। इनमें एक आवेदन उनकी तस्वीर और दो आवेदन उनकी आवाज से जुड़े हैं। तस्वीर वाले आवेदन में स्विफ्ट की एरास टूर के दौरान मंच पर ली गई तस्वीर इस्तेमाल की गई है। इसमें वह गुलाबी गिटार पकड़े और चमकीले कपड़े पहने नजर आ रही हैं। यही तस्वीर पहले एरास टूर की फिल्म के प्रचार में भी इस्तेमाल हो चुकी है। दो अन्य आवेदन उनकी आवाज से जुड़े हैं। इनमें उनके पुराने एल्बम के प्रचार के लिए रिकॉर्ड किए गए दो छोटे ऑडियो शामिल हैं। इन रिकॉर्डिंग में वह अपना परिचय देते हुए “हे, इट्स टेलर” और “हे, इट्स टेलर स्विफ्ट” कहती हैं। मेलोनी पहले भी डीपफेक का शिकार हो चुकी हैं मेलोनी के लिए डीपफेक कोई नई समस्या नहीं है। 2024 में उनकी तस्वीर का इस्तेमाल करके फर्जी अश्लील वीडियो बनाए गए और उन्हें इंटरनेट पर फैलाया गया। इसके बाद मेलोनी ने वीडियो बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ 1 लाख यूरो के हर्जाने की मांग की थी। इस साल मई में भी मेलोनी ने डीपफेक के खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उस समय उनकी अंडरगारमेंट्स में AI से बनाई गई फर्जी तस्वीरें इंटरनेट पर फैल रही थीं। मेलोनी ने इसे लेकर कहा था कि यह समस्या सिर्फ उनकी नहीं है। उनके मुताबिक डीपफेक ऐसी तकनीक है, जिसका इस्तेमाल किसी को धोखा देने, उसकी छवि खराब करने या उसे निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह खुद अपना बचाव कर सकती हैं, लेकिन बहुत से लोगों के पास इससे निपटने के साधन नहीं हैं। ——————————

तालिबानी ड्रोन अटैक से कंगाल पाकिस्तान बेहाल! मुनीर ने बॉर्डर चेकपोस्टों पर बंधवाई मछली पकड़ने की जाली

Pakistan Army Fishing Nets Drones: अफगानिस्तान सीमा से सटे पाकिस्तान के अशांत इलाके खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी सुरक्षा बल खौफनाक संकट से जूझ रहे हैं। आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार कमर्शियल ड्रोन का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी सेना और पुलिस चेकपोस्टों को निशाना बना रहा है।

इस बढ़ते ड्रोन खतरे से अपने जवानों की जान बचाने के लिए पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में सेना और पुलिस ने एक अनोखा ‘जुगाड़’ निकाला है। सैन्य पोस्टों और बैरकों के ऊपर मछली पकड़ने वाली जालियां टांग दी गई है।

हंगू हमले के बाद लिया गया अजीबोगरीब फैसला

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम 16 अप्रैल को हंगू जिले में हुए एक जानलेवा ड्रोन हमले के बाद उठाया गया। अफगान सीमा से महज 30 किलोमीटर दूर सरकी पियाला पुलिस चेकपोस्ट पर TTP के ड्रोन ने हमला कर दिया था, जिसके तुरंत बाद आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दर्जनों जवान घायल हो गए थे।

हंगू जिला अकेले इस साल 16 ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। ड्रोन के खौफ से अब सैनिक और पुलिसकर्मी अपनी बैरकों से बाहर निकलने से भी कतरा रहे हैं। करोड़ों डॉलर के महंगे एंटी-ड्रोन सिस्टम और रडार खरीदने में वित्तीय तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान अब बेहद सस्ते विकल्पों पर निर्भर है।

अल जजीरा के अनुसार, पूरे चेकपोस्ट को मछली पकड़ने वाली जाली से ढकने का खर्च मात्र $1,400 (लगभग 1.17 लाख रुपये) आता है। वहीं, एक आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम की कीमत $5,000 से लेकर $5 मिलियन (40 करोड़ रुपये से अधिक) तक होती है।

कहां-कहां लगी जालियां?

कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में सेना और पुलिस की चौकियों पर छत और दीवारों के बीच जालियां तान दी गई हैं।

कैसे काम करता है ‘जाल वाला सुरक्षा चक्र’?

पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई ड्रोन चेकपोस्ट की तरफ उड़ता हुआ आता है, तो उसके पंखे जाली में उलझ सकते हैं, जिससे ड्रोन रुक जाएगा या दूर ही डिफ्यूज हो जाएगा।

एक पुलिस अधिकारी फैयाज खान ने अल जजीरा को बताया, ‘अगर ड्रोन जाली में नहीं भी फंसता और ऊपर ही ब्लास्ट हो जाता है, तब भी नुकसान कम होगा। विस्फोट का मलबा और छर्रे सीधे जवानों पर गिरने के बजाय हवा में ही बिखर जाएंगे।’ वैसे, उन्होंने खुद स्वीकार किया कि यह सिस्टम 100% सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है।

रक्षा विशेषज्ञों ने बताया लाचारी और ‘बचकाना कदम’

सैन्य विशेषज्ञों ने असीम मुनीर के इस कदम की आलोचना की है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के इम्तियाज गुल ने अल जजीरा से कहा, ‘मछली पकड़ने वाली जाली लगाना एक बचकाना और सस्ता पैंतरा है। पुलिस स्टेशन ही हमेशा एकमात्र टारगेट नहीं होते। TTP के ड्रोन का मकसद बड़े इलाकों को निशाना बनाकर सनसनी फैलाना है। पाकिस्तान को ड्रोन को लॉन्च होते ही इंटरसेप्ट करने की तकनीक चाहिए, न कि जाल बिछाने की।’

TTP का बढ़ता ‘ड्रोन दस्ता’ और चीनी-तुर्की तकनीकों की नाकामी

TTP ने दिसंबर 2025 में मौलवी सलीम हक्कानी के नेतृत्व में एक विशेष ‘ड्रोन यूनिट’ बनाई थी। यह गुट बाजार में मिलने वाले सामान्य क्वाडकोप्टर में संशोधन कर बम और आईईडी (IED) जोड़कर हमले कर रहा है। रिसर्च के मुताबिक, TTP इन ड्रोन की फ्लाइंग टाइमिंग और रेंज बढ़ाने के लिए होंडा मोटरसाइकिल की बैटरियों का इस्तेमाल कर रहा है।

पाकिस्तानी मीडिया ‘डॉन’ के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में ही 100 से अधिक ड्रोन हमलों में लगभग 30 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं और 90 से अधिक घायल हुए हैं।

पाकिस्तान पहले से ही चीन और तुर्की से मिले एंटी-ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन पहाड़ी इलाकों और TTP के कम ऊंचाई वाले ड्रोन के सामने ये सिस्टम बेअसर साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि असीम मुनीर की सेना को अब केवल मछली पकड़ने वाली जालियों का ही सहारा नजर आ रहा है।

‘Gyanesh, it’s done bro…’ का नारा लगाते बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी; अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसद डिटेन

Rahul Gandhi-India Bloc EC March: देश की राजधानी में मंगलवार को विपक्षी INDIA गठबंधन ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुआई में दर्जनों विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला। सुरक्षा बलों ने इस मार्च को संसद मार्ग पर ही नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी, बोले- ‘ज्ञानेश, अब बहुत हुआ!’

सुरक्षा बलों द्वारा रास्ता रोके जाने पर माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। इसी दौरान राहुल गांधी प्रदर्शनकारियों के बीच लगे बैरिकेड्स पर चढ़ गए और हाथों में तिरंगा लहराते हुए सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित करते हुए लिखा, ‘Gyanesh it’s done bro. Time to resign’ यानी ज्ञानेश, अब बहुत हो गया ब्रो! अब इस्तीफा देने का समय आ गया है।

इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पवन खेड़ा और केसी वेणुगोपाल आकाशवाणी भवन के गेट तक पहुंच गए, जहां से पुलिस ने राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया।

सड़क पर ही धरने पर बैठे सांसद, कई बड़े चेहरे हिरासत में

बैरिकेडिंग के पास मार्च रुकने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता अभिषेक बनर्जी व डेरेक ओ’ब्रायन और सीपीआई (एम) के जॉन ब्रिटास समेत तमाम सांसद सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

सांसदों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर ले रखे थे, जिनमें सीईसी ज्ञानेश कुमार को संघ (RSS) की गणवेश में दिखाया गया था। सांसदों ने ‘भाजपा है CEC है’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘लोकतंत्र बिकाऊ नहीं है’ जैसे तीखे नारे लगाए। बाद में पुलिस ने अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं को बसों में भरकर हिरासत में ले लिया।

पैरामिलिट्री फोर्स तैनात, संजय राउत ने उठाए सवाल

विपक्ष के मार्च को देखते हुए संसद भवन और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था और भारी बैरिकेडिंग की गई थी। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने इस भारी सुरक्षा बल की तैनाती पर तीखा हमला बोला।

संजय राउत ने कहा, ‘हम सांसद हैं, इस देश के जिम्मेदार नागरिक हैं। हमें रोकने के लिए इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षा बल तैनात करने की क्या ज़रूरत थी? हम निहत्थे हैं और शांतिपूर्वक पैदल जा रहे थे।’ राउत ने यह भी दावा किया कि मौके पर बीएसएफ और सीआईएसएफ के जवानों को तैनात किया गया था और केंद्रीय मंत्रियों के आवासों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी।

क्या है विवाद की वजह?

विपक्ष का यह भारी विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद सामने आया है, जो सोमवार को मतदाता नामांकन से जुड़े ‘फॉर्म 6’ (Form 6) को लेकर की गई थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है और वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करेगी कि क्या नियमों में बदलाव किए गए थे और इसकी अनुमति किसने दी थी।

इसी मुद्दे पर चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को एक बयान जारी कर कहा था कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म 6 के साथ जोड़े गए घोषणापत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर देश को गुमराह किया है।

रांची के 3 प्रमुख बस स्टैंड्स की बदलेगी सूरत! 50 करोड़ से होगा कायाकल्प, जानें क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं

राजधानी रांची के तीनों प्रमुख बस टर्मिनल आईटीआई बस स्टैंड, सरकारी बस डिपो और बिरसा मुंडा बस टर्मिनल खादगढ़ा का कायाकल्प अब राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इन सभी टर्मिनलों के आधुनिकीकरण, नवीनीकरण और जीर्णोद्धार का निर्देश दिया है। इसके बाद नगर विकास एवं आवास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कुल 48.72 करोड़ रुपये की योजनाओं को स्वीकृति दी है। इसमें आईटीआई बस स्टैंड के लिए 24.77 करोड़, सरकारी बस डिपो के लिए 20.19 करोड़ और बिरसा मुंडा बस स्टैंड के लिए 3.76 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है। प्रधान सचिव सुनील कुमार को जुडको के माध्यम से जल्द ही काम शुरू करने का निर्देश भी दिया गया है।

2 साल के अंदर मिलेंगी कई सुविधाएं

इन तीनों बस स्टैंड में कई सारी सुविधाएं मिलेंगी। प्रधान सचिव सुनील कुमार ने बताया कि बस स्टैंड में वेटिंग रूम और डॉरमेट्री बनाई जाएगी। यानी यहां महिला और पुरुष दोनों के लिए रैन बसेरा होगा, जहां लोग आराम से रात गुजर पाएंगे। महिला डॉरमेट्री के लिए महिला वार्डन और टाइट सिक्योरिटी रहेगी।

साथ ही, वॉशरूम से लेकर नहाने के लिए बाथरूम और कई अन्य सामान्य सुविधाएं भी होंगी। साफ सफाई पर काफी विशेष ध्यान दिया जाएगा। कंबल, गद्दा, तकिया यह सारी चीज रहेगी और इसका रेट काफी कम रहेगी ₹50-100 के बीच ताकि हर तबके लोग इसको अफोर्ड कर पाए।

लाइट से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर होगा शानदार

यह तीनों बस स्टैंड रात में जगमगाते हुए नजर आयेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर शानदार होगा और उसके साथ ही, इसकी साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखी जाएगी और एक टीम होगी जो साफ सफाई पर 24 घंटा नजर रखेगी। महिला यात्रियों की सुरक्षा को भी खास ध्यान रखते हुए महिला पुलिसकर्मी की टीम रहेगी।

गंदगी फैलाई तो लगेगा जुर्माना

रांची में नए सिरे से विकसित किए जाने वाले इन बस अड्डों पर साफ-सफाई शीर्ष स्तर की होगी। यहां गंदगी फैलाने वाले को फौरन जुर्माना देना होगा, वह भी ₹1000 तक। यानी आने वाले दिनों में आपको रांची के बस स्टैंड नये रूप में नजर आने वाला है और महिलाओं को अब रात में ट्रैवल करने में भी सहजता महसूस होगी।

रांची से शिखा श्रेया की रिपोर्ट

ड्रोन हमले के बाद तुर्किये का मालवाहक जहाज ब्लैक सी में डूब, 3 भारतीय सहित 11 को सुरक्षित बचाया गया

ड्रोन हमले के बाद तुर्किये का मालवाहक जहाज ब्लैक सी में डूब, 3 भारतीय सहित 11 को सुरक्षित बचाया गया

हाल ही में ब्लैक सी यानी काला सागर में ड्रोन हमले की चपेट में आने से तुर्किये का एक मालवाहक जहाज MV रोयाड मम्मादोव डूब गया। उस पर सवार दो विदेशी नागरिकों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य क्रू मेंबर घायल हो गए। इस जहाह पर सवार 3 भारतीयों समेत 11 अन्य लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाए गए भारतीयों में से एक घायल है, जिसका इलाज रोमानिया में किया जा रहा है।

रोमानिया में भारतीय दूतावास ने सोमवार को बताया कि ब्लैक सी में एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ। इसमें सवार तीन भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं, जिनमें से एक घायल है और उसका रोमानिया में इलाज चल रहा है। MV रोयाड मम्मादोव जहाज पर ब्लैक सी में सफर करते समय हमला हुआ। जिसमें दो विदेशी नागरिकों की मौत हो गई और कई क्रू मेंबर घायल हो गए। भारतीय मिशन के मुताबिक, घायल क्रू मेंबर को इलाज के लिए रोमानिया ले जाया गया।

रोमानिया में भारतीय दूतावास ने X पर एक पोस्ट में कहा, “तीनों भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। हमने उनसे बात की है। उनमें से एक घायल हो गया है और उसका इलाज चल रहा है।”

रोमानिया में भारतीय राजदूत मनोज महापात्रा ने भी कॉन्स्टैंटा काउंटी हॉस्पिटल में तीन भारतीय क्रू मेंबर से बात की, जहां उनका इलाज चल रहा था। दूतावास ने कहा कि राजदूत ने हॉस्पिटल के चीफ फिजिशियन से भी बात की। इंडियन मिशन ने कहा कि वह रोमानियाई अधिकारियों और हॉस्पिटल अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित भारतीय क्रू मेंबर्स को हर मुमकिन मदद दे रहा है।

ड्रोन हमले से जहाज में लगी आग, 2 की मौत

रोमानियाई अधिकारियों ने कहा कि ब्लैक सी में 139 मीटर लंबे जहाज में आग लगने से दो क्रू मेंबर्स की मौत हो गई और 11 अन्य को बचा लिया गया। खबर है कि जहाज में अजरबैजानी और भारतीय नागरिक सवार थे। तुर्किये का मालवाहक जहाज रोमानियाई मछली पकड़ने वाले पोर्ट स्फांटू घोरघे से लगभग 30 नॉटिकल मील दक्षिण में डूब गया। रोमानिया के गृह मंत्रालय ने कहा कि उसके कोस्ट गार्ड बॉर्डर पुलिस को अलर्ट किया गया था कि रोमानिया के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन में मौजूद एक कमर्शियल जहाज में आग लग गई है।

ड्रोन हमले के लिए रूस जिम्मेदार

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस घटना के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया, और आरोप लगाया कि रूसी ड्रोन हमला अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में यात्रा कर रहे नागरिक जहाज पर किया गया। जेलेंस्की ने X पर एक पोस्ट में कहा, “न्यूट्रल पानी में मक्का ले जा रहे एक नागरिक जहाज पर दो रूसी ड्रोन ने भयानक हमला किया।” उन्होंने यह भी कहा कि हमले में जहाज का कैप्टन मारा गया।

रूस-यूक्रेन युद्ध से ब्लैक सी में कारोबार पर बढ़ खतरा

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि रूस-यूक्रन युद्ध से काला सागर से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर खतरा बढ़ गया है। हमले और मिलिट्री ऑपरेशन की वजह से इस इलाके में और उसके आस-पास चलने वाले मर्चेंट जहाजों को बढ़ती सुरक्षा चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है।

भारत ने कमर्शियल शिपिंग पर हमलों पर चिंता जताई

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब भारत ने मुख्य समुद्री कॉरिडोर में बढ़ते खतरों के बीच कमर्शियल जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर बार-बार चिंता जताई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले हफ्ते 81वीं यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में अपने भाषण में खाड़ी, लाल सागर और काला सागर में कमर्शियल शिपिंग और नाविकों पर हमलों पर जोर दिया।

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पानी की भारी किल्लत, पिछले साल के मुकाबले आधे रह गए जलाशय, क्या प्यासा रहेगा देश?

देश के कई राज्यों में कम बारिश का असर अब जलाशयों पर दिख रहा है। 1 अक्टूबर तक देश के प्रमुख जलाशयों में 71.84% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 90.31% था, जबकि सामान्य स्तर 81.79% है। यानी इस बार जलाशयों में पानी पिछले साल के मुकाबले काफी कम है।

पानी की कमी का असर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान और तमिलनाडु में ज्यादा दिख रहा है। कई इलाकों में खेती के लिए पानी कम पड़ रहा है और फसलों को भी नुकसान हो रहा है।

आंध्र प्रदेश में तेजी से घटा पानी का लेवल

आंध्र प्रदेश में जलाशयों का पानी काफी कम हो गया है। 1 अक्टूबर तक यहां सिर्फ 35.14% पानी बचा था। पिछले साल इसी समय यह 88.60% था, जबकि सामान्य स्तर 71.85% है। कम बारिश और फसल खराब होने से राज्य के आधे से ज्यादा हिस्से में सूखा घोषित किया गया है।

कर्नाटक में सूखे जैसे हालात

1 अक्टूबर तक कर्नाटक के जलाशयों में 59.98% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 89.16% और सामान्य स्तर 80.42% था।

पानी का स्तर कम होने से राज्य में सिंचाई और खेती को लेकर चिंता बढ़ रही है। सूखे जैसे हालात का असर किसानों पर भी दिखाई दे रहा है।

महाराष्ट्र में मराठवाड़ा और विदर्भ की हालत खराब

5 अक्टूबर तक महाराष्ट्र के जलाशयों में 74.29% पानी था। पिछले साल इसी तारीख को यह 89.22% था। मराठवाड़ा और विदर्भ में कई जलाशयों की स्थिति इससे भी ज्यादा खराब है।

• छत्रपति संभाजीनगर में पानी का भंडार 43.55% था, जबकि पिछले साल 82.96% था।

• अमरावती में इस बार 62.92% पानी रहा, जो पिछले साल 85.87% था।

• नागपुर में पानी का स्तर 72.02% रहा, जबकि पिछले साल यह 89.08% था।

कई इलाकों में फसलें खराब हुई हैं। अगर अगले फसल सीजन तक पानी की स्थिति नहीं सुधरी, तो किसानों और गांवों में रहने वाले परिवारों की मुश्किल बढ़ सकती है।

राजस्थान में कई इलाकों में सूखे का असर

5 अक्टूबर तक राजस्थान के जलाशयों में 61.93% पानी था। जोधपुर में हालात ज्यादा खराब हैं। यहां सिर्फ 15.72% पानी बचा है, जबकि पिछले साल इसी समय 80.25% पानी था।

पाली, जालौर और जैसलमेर में सूखे की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। जोधपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बालोतरा, राजसमंद, उदयपुर और सिरोही भी प्रभावित इलाकों में शामिल हैं।

कम बारिश का असर बाजरा, मोठ, सोयाबीन, मूंग और दूसरी खरीफ फसलों पर भी पड़ा है। राज्य सरकार ने कुछ इलाकों में सूखे से राहत के लिए कदम उठाए हैं।

तेलंगाना में सूखा घोषित करने की मांग

तेलंगाना के जलाशयों में भी पानी काफी कम है। 1 अक्टूबर तक यहां 40.75% पानी था, जबकि पिछले साल इसी समय 86.10% था। सामान्य स्तर 78.95% है।

कम बारिश और फसल के नुकसान को देखते हुए विपक्षी दल सूखा घोषित करने की मांग कर रहे हैं। पानी का स्तर कम होने से आने वाले समय में खेती और पीने के पानी को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

तमिलनाडु में भी बड़ा अंतर

तमिलनाडु में 1 अक्टूबर तक जलाशयों में 37.27% पानी था। पिछले साल इसी समय यह 91.96% था। राज्य का सामान्य स्तर 66% है।

यानी इस बार पानी का भंडार पिछले साल के मुकाबले काफी नीचे है। इससे सिंचाई और आने वाले फसल सीजन को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

केरल की स्थिति सामान्य से नीचे

केरल में जलाशयों का स्टोरेज 59.88% था। पिछले साल यह 76.06% और सामान्य स्तर 69.75% था। यहां भी पानी का भंडार पिछले साल और सामान्य स्तर दोनों से कम है।

कम पानी से बढ़ सकती है ये परेशानियां

• जलाशयों में पानी कम होने का सीधा असर सिंचाई और पीने के पानी पर पड़ सकता है। इसके साथ ही पनबिजली उत्पादन पर भी दबाव आ सकता है।

• सूखे की स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो किसानों की फसल और कमाई प्रभावित हो सकती है। ग्रामीण इलाकों में काम के मौके घटने से लोगों के दूसरे जगहों पर जाने का खतरा भी बढ़ सकता है।

• महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने यह भी चेतावनी दी है कि सूखे के दौरान बाल विवाह के मामले बढ़ सकते हैं।

आने वाले कुछ हफ्ते काफी अहम हैं। अच्छी बारिश हुई तो जलाशयों में पानी बढ़ सकता है और खेती की परेशानी कुछ कम हो सकती है। लेकिन बारिश कम हुई तो पानी की कमी और फसल के नुकसान से किसानों और ग्रामीण परिवारों की मुश्किल बढ़ सकती है।