Bharat Bhhagya Viddhaata OTT Release: कंगना रनौत स्टारर इस दिन ओटीटी पर दे रही है दस्तक

Bharat Bhhagya Viddhaata OTT Release: कंगना रनौत की फ़िल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ अब सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के बाद डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर आ रही है। मनोज तापड़िया के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म 12 जून, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी और यह 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों की घटनाओं पर आधारित है।

तारीफ़ मिलने के बावजूद, फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई थी। अब इसकी OTT रिलीज़ के बारे में ज़रूरी जानकारी दी गई है, जिसमें यह भी शामिल है कि आप इसे कब और कहां देख सकते हैं।

‘भारत भाग्य विधाता’ 14 अगस्त को ZEE5 पर प्रीमियर होने के लिए तैयार है। प्लेटफ़ॉर्म के ऑफ़िशियल इंस्टाग्राम हैंडल ने इस घोषणा के लिए एक नया ट्रेलर शेयर किया। साथ ही, उन्होंने कैप्शन में लिखा, “आम नर्सों की एक अनकही कहानी, जिन्होंने 26/11 की सबसे काली रात में असाधारण हिम्मत दिखाई। कुछ हीरो कभी सामने नहीं आए। उनकी कहानियाँ कभी नहीं बताई गईं। अब तक। ‘भारत भाग्य विधाता’ का ट्रेलर अब आ गया है। #BharatBhhagyaViddhaata का प्रीमियर 14 अगस्त को हिंदी ZEE5 पर होगा।”

इस घोषणा के तुरंत बाद, कंगना के फैंस ने कमेंट सेक्शन में अपना उत्साह ज़ाहिर किया। एक फैन ने लिखा, “वाह, आखिरकार।” दूसरे फैन ने लिखा, “इसे दोबारा देखने का बेसब्री से इंतज़ार है।” कुछ लोगों ने फायर इमोजी भी पोस्ट किए।

ज़्यादातर कामा और एल्ब्लेस हॉस्पिटल में सेट यह फ़िल्म गीता माधव गंधारे (कंगना रनौत) की कहानी है, जो एक नर्स हैं और खुद को और अपने साथियों को अचानक हुए आतंकी हमले के बीच फंसा हुआ पाती हैं। जब हथियारबंद आतंकवादी अस्पताल को निशाना बनाते हैं, तो मेडिकल स्टाफ़ गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं समेत सैकड़ों मरीज़ों की जान बचाने के लिए समय से होड़ करता है।

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बिना किसी हथियार या लड़ाई की ट्रेनिंग के, नर्सें और अस्पताल के दूसरे कर्मचारी मरीज़ों को सुरक्षित रखने के लिए हिम्मत, तेज़ी से सोचने की क्षमता और टीमवर्क का सहारा लेते हैं। यह फ़िल्म कामा हॉस्पिटल की नर्स अंजलि कुल्थे की असल ज़िंदगी की बहादुरी से प्रेरित है और उन गुमनाम नायकों पर रोशनी डालती है जिन्होंने 26/11 के हमलों के दौरान दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी।

कंगना के अलावा, फ़िल्म में गिरिजा ओक, स्मिता तांबे, आशा शेलार, प्रिया अरुण बेर्डे, रसिका अगाशे, सुहिता थत्ते और ईशा डे भी हैं, साथ ही अमृता नामदेव, आदित्य मिश्रा, सुनील पालवाल और सुयश कुकरेजा सहायक भूमिकाओं में हैं।

अंधेरा होते ही चमक उठते हैं ये 7 जंगल और बीच, कहलाते है इंडिया का सीक्रेट नाइट शो!

भारत के वेस्टर्न घाट के कुछ जंगल और कुछ समुद्र तट रात के समय बायोल्यूमिनेसेंस की वजह से चमक उठते हैं। जंगलों में यह रोशनी फंगस से और समुद्र में छोटे प्लैंकटन से होती है। मानसून और उसके बाद का समय इस दुर्लभ प्राकृतिक नजारे को देखने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इन जगहों की खूबसूरती के साथ-साथ इनके कंर्वेशन का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।

मट्टू बीच, कर्नाटक (Mattu Beach, Karnataka)

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कर्नाटक के उडुपी के पास मट्टू बीच अपनी खूबसूरती के साथ-साथ रात में दिखने वाली नीली चमक के लिए भी जाना जाता है। मानसून के बाद सही मौसम में समुद्र की लहरों में मौजूद छोटे-छोटे प्लैंकटन नीली रोशनी छोड़ते हैं, जिससे पूरा बीच चमकता हुआ दिखाई देता है। यह नजारा टूरिस्ट और फोटोग्राफरों को खूब पसंद आता है। सितंबर से दिसंबर के बीच यहां आने का सबसे अच्छा समय माना जाता है।

अगुम्बे, कर्नाटक (Agumbe, Karnataka)

Bioluminescent mushrooms glow softly on log in foggy forest, creating magical atmosphere 68602350 Stock Photo at Vecteezy

अगुम्बे को “दक्षिण भारत का चेरापूंजी” कहा जाता है। यह जगह घने जंगलों, तेज बारिश और प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। मानसून के दौरान यहां पेड़ों की गिरी हुई लकड़ियों पर उगने वाले खास फंगस रात में हल्की हरी रोशनी छोड़ते हैं। प्रकृति का अनोखा नजारा देखने के लिए जून से सितंबर के बीच यहां घूमने जा सकते हैं।

बंगाराम आइलैंड, लक्षद्वीप (Bangaram Island, Lakshadweep)

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लक्षद्वीप का बंगाराम आइलैंड भारत के सबसे मशहूर ग्लोइंग बीच में से एक है। यहां समुद्र में मौजूद छूटे प्लैंकटन लहरों के हिलने पर चमकीली नीली रोशनी छोड़ते हैं। रात के समय ऐसा लगता है जैसे पूरा समुद्र चमक रहा हो। इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है।

गोवा के बायोल्यूमिनेसेंट बीच, गोवा (Goa Bioluminescent Beaches, Goa)

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गोवा के बेतालबातिम, कोलवा और कुछ अन्य शांत बीचों पर मानसून के बाद कई बार रात में समुद्र की लहरें नीली रोशनी से चमकती दिखाई देती हैं। यह रोशनी समुद्र में मौजूद सूक्ष्म प्लैंकटन की वजह से होती है। हालांकि यह नजारा हर रात नहीं दिखता, लेकिन सही मौसम में इसे देखना यादगार एक्सपीरियंस बन जाता है। सितंबर से दिसंबर के बीच का टाइम यहां घूमने के लिए परफेक्ट है।

भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी, महाराष्ट्र (Bhimashankar Wildlife Sanctuary, Maharashtra)

महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में स्थित भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी रात में चमकने वाले जंगलों के लिए जानी जाती है। मानसून के दौरान यहां गिरी हुई लकड़ियों पर उगने वाले फंगस हल्की हरी रोशनी छोड़ते हैं, जिससे जंगल का नजारा बेहद खास लगता है। जुलाई से सितंबर के बीच और बिना चांद वाली रातों में यह दृश्य सबसे ज्यादा खूबसूरत दिखाई देता है।

चोरला घाट, गोवा–कर्नाटक–महाराष्ट्र (Chorla Ghat, Goa–Karnataka–Maharashtra)

गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र की बॉर्डर पर चोरला घाट अपने घने जंगलों और हरियाली के लिए पॉपुलर है। मानसून के दौरान यहां नमी ज्यादा होने की वजह से चमकने वाले फंगस आसानी से उग जाते हैं। रात के समय गिरी हुई लकड़ियों पर हल्की हरी चमक दिखाई देती है, जो इस जगह को और भी खास बना देती है। जुलाई से सितंबर यहां घूमने का सबसे अच्छा समय है।

साइलेंट वैली नेशनल पार्क, केरल (Silent Valley National Park, Kerala)

केरल का साइलेंट वैली नेशनल पार्क भारत के सबसे खूबसूरत और सुरक्षित वर्षावनों में से एक है। यहां का ठंडा और नम वातावरण चमकने वाले फंगस के लिए परफेक्ट होता है। मानसून के दौरान जंगल के कुछ हिस्सों में यह दुर्लभ प्राकृतिक नजारा देखने को मिल सकता है। प्रकृति और जंगलों को पास से देखना पसंद करते हैं, तो यह जगह आपके लिए बढ़िया ऑप्शन हो सकती है।

Autism से नहीं, लोगों की सोच से जीती मेरी बेटी | Autism Awareness Story | Mother Daughter Story

“इसे घर में बंद कर दो…”
ये सिर्फ़ एक लाइन नहीं थी। ये उस सोच की आवाज़ थी, जो अलग दिखने वाले बच्चों को समझने के बजाय उनसे दूर भागती है।
लेकिन एक माँ ने हार नहीं मानी।
उसने अपनी बेटी को दुनिया से छिपाया नहीं, दुनिया से मिलवाया।
आज वही बेटी घर की ज़िम्मेदारियाँ निभाती है, हर दिन कुछ नया सीखती है और साबित करती है कि सही प्यार, धैर्य और भरोसा किसी भी इंसान की ज़िंदगी बदल सकता है।

@chandrima.dutta16

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Cinema Flashback: जब जुदा होने के सालों बाद आमने-सामने आए देव आनंद और सुरैया….

Cinema Flashback: बॉलीवुड की असल जिंदगी की लव स्टोरीज पर्दे पर दिखाए जाने वाले रोमांटिक ड्रामा से कहीं ज्यादा सच्ची होती हैं। इसमें शामिल लोग, दांव पर लगी चीजें और नतीजे – सब कुछ असली होता है। अधूरा प्यार न सिर्फ हिंदी सिनेमा का एक पसंदीदा जॉनर है, बल्कि यह उन मशहूर ऑन-स्क्रीन और असल जिंदगी के जोड़ों की पहचान भी है, जिनकी कहानियां अधूरी रह गईं।

ऐसे ही पुराने लव कपल में से एक हैं सदाबहार देव आनंद और सिंगर-स्टार सुरैया। मशहूर कहानी है कि फिल्म ‘विद्या’ के गाने ‘किनारे-किनारे चले जाएंगे’ की शूटिंग के दौरान, जब देव आनंद ने सुरैया को डूबने से बचाया, तो दोनों एक-दूसरे के प्यार में बुरी तरह गिरफ्तार हो गए। यह बिल्कुल फिल्मी था।

वह नाव से फिसल गई थीं और उन्हें बचाने के लिए देव आनंद झील में कूद पड़े थे। सुरैया ने एक बार अपने इंटरव्यू में कहा था कि अगर उन्होंने उन्हें न बचाया होता, तो वह जिंदा न होतीं। इसी बात ने उन्हें देव आनंद की ओर आकर्षित किया।

वे मिलते रहे और हर मुलाकात के साथ उनका प्यार और गहरा होता गया। लेकिन सुरैया की दादी इस अलग-अलग धर्मों वाले रिश्ते के खिलाफ थीं। कहा जाता है कि सुरैया, देव आनंद के साथ भागने की योजना भी बना रही थीं, लेकिन उनकी दादी को इसका पता चल गया और उन्होंने उनके प्लान पर पानी फेर दिया।

हाल ही में विक्की लालवानी के साथ एक इंटरव्यू में, देव आनंद के लंबे समय तक सेक्रेटरी और सहयोगी रहे अशोक सिन्हा ने उस घटना को याद किया जब अलग होने के कई साल बाद एक अवॉर्ड फंक्शन में यह एक्स कपल को लगभग फिर से मिलने ही वाला था।

फिल्म सिटी में एक फंक्शन था। राम मोहन नाम के पुराने जमाने के एक एक्टर थे, जो काफी मशहूर थे। राम मोहन जी मेरे पास आए और बोले, ‘सुरैया यहां आई हैं, वह देव साहब से मिलना चाहती हैं। मैंने कहा, ‘यह मुश्किल होगा। मुझे उनसे पूछने दीजिए। यह एक नाजुक मामला है’।

अशोक सिन्हा ने बताया- मैंने देव साहब से पूछा, तो वह असहज हो गए। उन्होंने कहा, ‘चलो जल्दी चलते हैं। मुझे यहां से ले चलो’। जी के रऊफ ने कहा, ‘देव साहब को अवॉर्ड्स में ले आओ। उनका वहां जाना ज़रूरी है’। वह आमतौर पर अवॉर्ड शो में नहीं जाते थे”।

आखिरकार, देव आनंद इवेंट में जाने के लिए तैयार हो गए। उन्हें लता मंगेशकर को वह खास अवॉर्ड देना था। मशहूर रेडियो अनाउंसर अमीन सयानी इस अवॉर्ड शो के होस्ट थे। अशोक सिन्हा ने बताया कि जब देव आनंद और मैं बैकस्टेज थे, तो मैंने देखा कि अमीन सयानी लगभग यह ऐलान करने ही वाले थे कि ‘देव आनंद और सुरैया मिलकर यह अवॉर्ड देने जा रहे हैं’। मैंने कहा, ‘रुको!’ देव साहब चौंक गए। सोचिए उनकी क्या हालत रही होगी। हममें से किसी को भी इसके बारे में पता नहीं था। सब कुछ रुक गया। उन्होंने कहा, ‘यह कोई चाल है’।

फिर अशोक सिन्हा ने उस पल को याद किया जब उन्होंने सुरैया को देव आनंद की ओर आते देखा। मैंने उनसे कहा, ‘सर, वह आपकी तरफ आ रही हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आप मजाक कर रहे हैं। मुझे बताते रहो कि वह ठीक कहां हैं।’ फिर मैंने कहा, ‘वह ठीक आपके पीछे हैं।’ देव साहब मुड़े और सामने सुरैया थीं। क्या पल था वह! दो प्रेमी जो बहुत लंबे समय से नहीं मिले थे। देव आनंद ने शादी कर ली थी, जबकि सुरैया अभी भी कुंवारी थीं।”

देव आनंद ने अपनी आत्मकथा ‘रोमांसिंग विद लाइफ’ में अपनी प्रेम कहानी के बारे में खुलकर बात की थी। उन्होंने लिखा है -“किस्मत में ऐसा ही लिखा था। अगर मैं उनके पास चला जाता, तो मेरी ज़िंदगी कुछ और होती। अगर मैंने उनसे शादी की होती, तो उनकी तरफ की ज़िंदगी मुझे किसी और रास्ते पर ले जाती।” उन्होंने लिखा, “तब शायद मैं आज वाला देव आनंद नहीं बन पाता।”

देव आनंद ने 1954 में अपनी फ़िल्म ‘बाज़ी’ की को-स्टार कल्पना कार्तिक से शादी की। उनके दो बच्चे थे- बेटा सुनील आनंद, जिनका हाल ही में लंदन में निधन हो गया, और बेटी देविना। अशोक सिन्हा ने आगे कहा, “मैं सुरैया के हाव-भाव कभी नहीं भूल सकता। उनकी आंखों में किसी भी पल आंसू आ सकते थे। देव आनंद के चेहरे पर भी वही भाव थे। दोनों बिल्कुल चुप थे। फिर उन्होंने सुरैया के गाल को छुआ और कहा, ‘सुरैया’। उन्होंने हल्के से उनके गाल पर थपथपाया।”

अशोक सिन्हा ने अमीन सयानी से साफ तौर पर कहा कि वे देव आनंद और सुरैया का नाम एक साथ न लें। इस बीच, लता मंगेशकर भी बैकस्टेज मौजूद थीं। देव आनंद ने दोनों महिलाओं से बात की और सुरैया को लता मंगेशकर को अवॉर्ड देने के लिए मना लिया। देव आनंद और उनके सेक्रेटरी चुपचाप बैकस्टेज से निकल गए, ताकि आयोजकों और जनता की नजर उन पर न पड़े।

1942 A Love Story: अनिल कपूर, मनीषा कोइराला और जैकी श्रॉफ स्टारर ‘1942 ए लव स्टोरी’ सिनेमाघरों में होगी री रिलीज

1942 A Love Story: ‘1942 अ लव स्टोरी’ जैसी कल्ट क्लासिक फिल्म इस महीने फिर से सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। विधु विनोद चोपड़ा की डायरेक्ट की गई यह फिल्म, बेहतर क्वालिटी वाले 8K विज़ुअल और 5.1 सराउंड साउंड के साथ सिनेमाघरों में लौटेगी।

बुधवार को NH स्टूडियोज़ ने घोषणा की कि अनिल कपूर, मनीषा कोइराला और जैकी श्रॉफ स्टारर यह फ़िल्म 21 अगस्त को सिनेमाघरों में फिर से रिलीज होगी। इस फिल्म को इटली के बोलोग्ना में मौजूद दुनिया की जानी-मानी फिल्म रेस्टोरेशन सुविधा ‘L’Immagine Ritrovata’ और भारत की ‘प्रसाद फिल्म लैब्स’ के सहयोग से रिस्टोर किया गया है।

इस मेहनत भरे रेस्टोरेशन से फ़िल्म के विज़ुअल और भी शानदार हो गए हैं, जबकि इसका ओरिजिनल सिनेमैटिक अंदाज़ भी बना हुआ है। साथ ही, इसमें डॉल्बी 5.1 सराउंड साउंड मिक्स का इस्तेमाल किया गया है। 1994 में रिलीज हुई ‘1942: अ लव स्टोरी’ हिंदी सिनेमा की सबसे पसंदीदा रोमांटिक ड्रामा फ़िल्मों में से एक है।

यह फिल्म अपनी बेहतरीन एक्टिंग के साथ-साथ आर.डी. बर्मन के सदाबहार संगीत के लिए भी याद की जाती है। 1993 में निधन से पहले, यह महान संगीतकार का आखिरी पूरा किया गया साउंडट्रैक था। ‘एक लड़की को देखा’, ‘कुछ न कहो’, ‘रिम झिम रिम झिम’ और ‘रूठ न जाना’ जैसे गाने आज भी कई पीढ़ियों के बीच लोकप्रिय हैं।

री-रिलीज़ के बारे में बात करते हुए, NH स्टूडियोज़ के डायरेक्टर श्रेयंस हीरावत ने एक प्रेस नोट में कहा, “विधु विनोद चोपड़ा की शानदार फ़िल्मों के कलेक्शन को हासिल करना NH स्टूडियोज़ के लिए एक अहम उपलब्धि है। ये ऐसी फ़िल्में हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को आकार दिया है और कई पीढ़ियों के दर्शकों को प्रेरित करती रही हैं।

इस असाधारण विरासत को संजोने और उसका जश्न मनाने में पार्टनर बनकर हमें गर्व है। ‘1942: अ लव स्टोरी’ से शुरुआत करते हुए, हमारी कोशिश है कि इन सदाबहार क्लासिक फ़िल्मों को बेहतरीन क्वालिटी में बड़े पर्दे पर वापस लाया जाए, ताकि दर्शक इनका अनुभव वैसे ही कर सकें जैसा इन्हें हमेशा से देखा जाना चाहिए था।”

फिल्म के नए वर्शन के बारे में बात करते हुए फिल्ममेकर विधु विनोद चोपड़ा ने कहा, “मैं एक बहुत ज़रूरी बात कहना चाहता हूं कि पहली बार दर्शक इस फिल्म को वैसे ही देख पाएँगे, जैसा इसे देखा जाना चाहिए था। क्योंकि जब यह फिल्म रिलीज़ हुई थी, तब भारत में डॉल्बी सराउंड साउंड की सही सुविधा नहीं थी। यहां तक कि कलर ग्रेडिंग में भी कुछ कमियां थीं। यह भारत की पहली फिल्म थी जिसे डॉल्बी में बनाया गया था और हम ही डॉल्बी को भारत लाए थे। मैंने फिल्म की मिक्सिंग लंदन में करवाई थी। हम इसे वापस तो ले आए, लेकिन कोई भी सिनेमा हॉल डॉल्बी चलाने के लिए तैयार नहीं था। क्या आप सोच सकते हैं? हमने मेट्रो सिनेमा में खास तौर पर बाहर से मंगवाई गई केबल बिछाईं और सराउंड साउंड स्पीकर लगवाए।”

गल्फ संकट के दौरान भारत ने होर्मुज से कैसे निकाले अपने 60 जहाज? संसद में सरकार ने बताया पूरा प्लान

संसद में सरकार ने हाल ही में खाड़ी क्षेत्र (गल्फ) में पैदा हुए तनाव के दौरान उठाए गए कदमों की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के बावजूद भारत ने अपने महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार और जरूरी सामान की आवाजाही को जारी रखा। इसके लिए संबंधित एजेंसियों ने लगातार निगरानी रखी और समय पर आवश्यक कदम उठाए, जिससे देश की आपूर्ति व्यवस्था पर बड़ा असर नहीं पड़ा। संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि, खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारत का सामान लेकर जा रहे 60 मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से पूरी तरह सुरक्षित गुजरने में सफल रहे। सरकार ने ये भी बताया कि, खाड़ी क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया।

इसके अलावा 24 घंटे एक्टिव रहे संकट प्रबंधन सिस्टम ने इस दौरान हजारों फोन कॉल और ईमेल का जवाब देकर लोगों की मदद की। सरकार की ओर से शेयर किए गए ये आंकड़े बताते हैं कि खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए संकट के दौरान भारत ने किस तरह हालात से निपटने के लिए बड़े स्तर पर काम किया।

भारत में ज्यादातार तेल खाड़ी देशों से आता है

खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए संकट के दौरान वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से होकर दूसरे देशों तक पहुंचता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, जिसमें इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देश प्रमुख हैं। ऐसे में अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक कोई रुकावट आती है, तो इसका असर तेल की सप्लाई, माल ढुलाई की लागत और बीमा खर्च पर पड़ सकता है। इससे देश में ईंधन की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

60 मालवाहक जहाज आए वापस

सरकार ने बताया कि तनावपूर्ण हालात के बावजूद भारत की ओर आने वाले 60 मालवाहक जहाज सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान लोगों की सुरक्षा और सहायता को भी प्राथमिकता दी गई। सरकार ने जानकारी दी कि, खाड़ी क्षेत्र से 3,972 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया। अधिकारियों के अनुसार, संकट के दौरान समुद्री जहाजों पर काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही उनके परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया और जरूरत पड़ने पर सहायता व परामर्श की व्यवस्था भी की गई। संकट के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए आपातकालीन सहायता व्यवस्था पूरी तरह एक्टिव रखी गई थी।

24 घंटे किया गया काम

सरकार ने बताया कि, पूरे संकट के दौरान 24 घंटे कंट्रोल रूम और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग का संचार केंद्र लगातार एक्टिव रहा। आपात स्थिति में जहाजों को निर्देश दिए गए थे कि वे तुरंत नजदीकी भारतीय नौसेना या सहयोगी देशों के युद्धपोत से संपर्क करें। साथ ही घटना की जानकारी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग, इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) को भी तुरंत दें, ताकि समय रहते जरूरी मदद पहुंचाई जा सके।

सरकार के अनुसार, संकट के दौरान शुरू की गई सहायता व्यवस्था का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। कंट्रोल रूम शुरू होने के बाद वहां नाविकों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों की बड़ी संख्या में मदद की गई। इस दौरान 15,771 फोन कॉल और 36,499 ईमेल का जवाब दिया गया, जिससे साफ है कि हालात को लेकर लोगों में चिंता थी और लगातार संपर्क बनाए रखना जरूरी था।

स्पेसएक्स का 4000 किलो वजनी रॉकेट चांद से टकराया:8,690 kmph की रफ्तार से अंतरिक्ष में घूम रहा था; NASA ने कहा- धरती को खतरा नहीं

इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का एक बेकाबू रॉकेट चांद की सतह से टकरा गया है। 4 हजार किलो वजनी और करीब 5 मंजिला इमारत जितना बड़ा यह रॉकेट करीब 8,690 किमी/घंटा की रफ्तार से टकराया। नासा ने कहा कि इस टक्कर से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। हालांकि इस टक्कर की पुष्टि तस्वीरों के आने के बाद होगी। यह बेकाबू टुकड़ा स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का ऊपरी हिस्सा है। इसे जनवरी 2025 में फ्लोरिडा से अमेरिका और जापान के दो लूनर लैंडर को अंतरिक्ष में भेजने के लिए लॉन्च किया गया था। मिशन पूरा होने के बाद रॉकेट का यह हिस्सा अंतरिक्ष में तैरता रह गया। पिछले 18 महीनों के दौरान पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की वजह से इसका रास्ता धीरे-धीरे बदल गया। खगोलविदों ने डेटा का अध्ययन करके पहले ही अनुमान लगा लिया था कि यह रॉकेट भटककर सीधे चांद की ओर जा रहा है और उससे टकराएगा। आइंस्टीन क्रेटर के पास टक्कर हुई, दूरबीन से भी देखना मुश्किल यह टक्कर चांद के ‘आइंस्टीन क्रेटर’ के पास हुई। यह क्षेत्र चांद के उस हिस्से में है जहां दिन का उजाला रहता है और जो पृथ्वी से दिखाई देता है। हालांकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक इसे आम टेलिस्कोप से देखना नामुमकिन था, क्योंकि टक्कर के वक्त बनी रोशनी बेहद हल्की थी। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के खगोलविद डॉ. मैट बोथवेल का कहना है कि टक्कर के कारण चांद की धूल का एक बड़ा गुबार उठा होगा, जो 100 किलोमीटर तक ऊपर गया होगा और कई मिनटों तक रहा होगा। तस्वीरों के लिए इंतजार करना होगा, ऑर्बिटर जारी करेंगे डेटा फिलहाल जब यह हादसा हुआ, तब चांद का चक्कर लगा रहा कोई भी स्पेसक्राफ्ट सही पोजिशन में नहीं था, इसलिए लाइव तस्वीरें नहीं मिल पाई हैं। दक्षिण कोरिया का ‘दानुरी’ ऑर्बिटर और नासा का ‘लूनर रिकोनिसेंस ऑर्बिटर’ (LRO) आने वाले दिनों में टक्कर वाली जगह के ऊपर से गुजरेंगे और तस्वीरें लेंगे। वैज्ञानिक पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करके चांद की सतह पर बने नए निशान की पहचान करेंगे। चांद पर पहले से मौजूद है 190 टन कचरा इस टक्कर के बाद चांद पर इंसानों की छोड़ी गई या दुर्घटनाग्रस्त हुई चीजों की संख्या बढ़कर लगभग 3,000 हो गई है। इनका कुल वजन करीब 190 टन हो चुका है। सितंबर 1959 में सोवियत संघ का ‘लूना 2’ चांद की सतह पर पहुंचने वाला पहला मानव निर्मित ऑब्जेक्ट था। इसके अलावा नासा के अकेले अपोलो प्रोग्राम से जुड़ी 796 चीजें चांद पर मौजूद हैं। चांद पर कोई वायुमंडल या पर्यावरण नहीं है, इसलिए इस कचरे से वहां किसी ईकोसिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचता। हालांकि, वैज्ञानिक चिंतित हैं कि भविष्य में बढ़ते लूनर ट्रैफिक के कारण ऐतिहासिक अपोलो लैंडिंग साइट्स को नुकसान न पहुंचे और नए स्पेसक्राफ्ट्स के टकराने का जोखिम न बढ़े। NASA और वैज्ञानिकों को इस टक्कर से क्या फायदा होगा? साइंस म्यूजियम की स्पेस हेड लिब्बी जैक्सन के अनुसार, यह वैज्ञानिकों के लिए काफी रोमांचक प्रयोग है क्योंकि रॉकेट की स्पीड, वजन और आकार का डेटा पहले से मौजूद था। आमतौर पर जब कोई प्राकृतिक उल्कापिंड चांद से टकराता है, तो वैज्ञानिकों के पास उसका शुरुआती डेटा नहीं होता। इस टक्कर से बने नए गड्ढे और उड़ी हुई धूल की परत का अध्ययन करके वैज्ञानिक यह समझ सकेंगे कि अरबों साल पहले चांद और हमारे सौर मंडल का निर्माण कैसे हुआ था। इधर ऊपरी हिस्सा टकराया, उधर 18वीं बार उड़ने को तैयार बूस्टर स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का निचला हिस्सा रीयूजेबल होता है। इसे बूस्टर कहते हैं और लैंडिंग करके धरती पर वापस आ जाता है। जिस जनवरी 2025 वाले मिशन का ऊपरी हिस्सा भटककर चांद से टकराया, उसी रॉकेट के निचले बूस्टर को 10 अगस्त को 18वीं बार लॉन्च किया जाएगा। नॉलेज पार्ट: जानें क्या है स्पेस डैब्रिस और आइंस्टीन क्रेटर… इंसान द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गए रॉकेट्स के छूटे हुए टुकड़े, निष्क्रिय सैटेलाइट्स और मलबे को स्पेस डैब्रिस कहा जाता है। वहीं चंद्रमा के पश्चिमी किनारे पर स्थित एक बड़ा गड्ढा है, जिसका व्यास करीब 170 किलोमीटर है। इसे आइंस्टीन क्रेटर नाम दिया गया है। —————————————- ये खबर भी पढ़े… हजारों वॉट्सएप अकाउंट अचानक बंद, मैसेज आया- अंडर रीव्यू:बिना वार्निंग सभी फीचर्स ब्लॉक, कंपनी बोली- कभी-कभी गलती हो जाती है मैसेजिंग एप वॉट्सएप ने भारत समेत कुछ अन्य देशों में हजारों यूजर्स के अकाउंट 24 घंटे के लिए रीव्यू में डाल दिए हैं। इस दौरान एप के सभी मैसेजिंग और कॉलिंग फीचर्स को ब्लॉक कर दिया गया। पूरी खबर पढ़े…

सदन को प्रभावित कर 25 करोड़ जनता के हितों से खिलवाड़ कर रहा विपक्ष : CM योगी

UP Assembly Monsoon Session

UP Assembly Monsoon Session: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में समाजवादी पार्टी व विपक्षी सदस्यों को जमकर आड़े हाथ लिया। उन्होंने सपा विधायकों के अभद्रतापूर्ण आचरण पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी व विपक्ष का आचरण असंवैधानिक और शर्मनाक है। विपक्ष सदन की कार्यवाही को प्रभावित कर 25 करोड़ जनता के हितों के साथ खिलवाड़ कर रहा है, जिसे सभी प्रदेशवासी देख रहे हैं।

संसदीय लोकतंत्र को पुष्ट करने वाली संस्थाओं का अपमान 

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून सत्र में सभी सदस्यों के पास बेहतरीन अवसर था कि वे 25 करोड़ जनता की भावनाओं और हितों को ध्यान में रखकर सदन में उनसे जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा-परिचर्चा करें। लेकिन, जिन लोगों का लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास नहीं है,  वे लोग संसदीय लोकतंत्र को पुष्ट करने वाली सभी संस्थाओं की अवमानना व अपमान करते हैं। समाजवादी पार्टी व विपक्ष का यह आचरण न केवल असंवैधानिक, बल्कि शर्मनाक भी है। 

सदन का बहुमूल्य समय नष्ट कर रहा विपक्ष 

मुख्यमंत्री ने कहा कि दलीय नेताओं की बैठक व बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के तहत पहले ही सदन का एजेंडा तय किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों के सदस्यों ने उसके तहत सदन में विधायी कार्य या अनुपूरक बजट से जुड़े एक भी प्रस्ताव पर रुचि नहीं ली। इसके विपरीत ये लोग अनावश्यक मुद्दों को उठाकर सदन का बहुमूल्य समय नष्ट करना चाहते हैं। 

विपक्ष का संवैधानिक मूल्यों पर विश्वास नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन प्रारंभ होने से पहले ही दलीय नेताओं की बैठक में सत्ता पक्ष की ओर से मैंने व संसदीय कार्य मंत्री ने आश्वस्त किया था कि नियम के अंतर्गत सदन में जो भी प्रस्ताव आएंगे, उन पर चर्चा होगी और सरकार उसका जवाब भी देगी। लेकिन, सपा व विपक्षी दलों का सदन में चर्चा, संवैधानिक मूल्यों और सदन की उच्च परंपराओं पर विश्वास ही नहीं है। इनके द्वारा लगातार सदन को प्रभावित करके प्रदेश की 25 करोड़ जनता के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

25 करोड़ प्रदेशवासी देख रहे सपा का अलोकतांत्रिक आचरण 

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आश्वस्त किया कि सरकार सदन में हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है। पीठ के द्वारा नियम के अंतर्गत जिन भी मुद्दों को चर्चा के लिए आमंत्रित किया जाएगा, उन सभी मुद्दों पर सरकार सार्थक चर्चा को बढ़ाना चाहती है, क्योंकि हमारी सरकार जनहित के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन, विपक्षी दलों ने कभी लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास नहीं किया, बल्कि ये लोग जानबूझकर सदन की अवमानना कर लोकतंत्र की खिल्ली उड़ाना चाहते हैं। इन लोगों द्वारा लगातार सदन का माहौल खराब किया जा रहा है। प्रदेशवासी सपा के इस अलोकतांत्रिक आचरण को देख रहे हैं।

 

रिपोर्ट- ईरान का कुवैत में अमेरिकी बेस पर हमला:ओमान तट के पास जहाज पर अटैक; ट्रम्प बोले- ईरान के पास समझौते का आखिरी मौका

अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। द यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की IRGC ने मंगलवार सुबह कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कम से कम तीन ड्रोन से हमला किया। फिलहाल किसी नुकसान या हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उधर, यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया। एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है और जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसके पास समझौते का आखिरी मौका है। उन्होंने दोहराया कि बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स.. 1. अमेरिका-ईरान वार्ता की तारीख और जगह अब तक तय नहीं: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर अभी तक तारीख और स्थान तय नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और कतर संभावित मेजबान देशों के तौर पर चर्चा में हैं और दोनों देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। 2. ईरान की नई रणनीति- जंग नहीं, अमेरिका पर दबाव बढ़ाना: रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अब सीधी सैन्य जीत के बजाय समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और अहम शिपिंग रूट्स पर दबाव बनाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की लागत बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है। 3. ईरान का दावा- होर्मुज के ऊपर उड़ रहा रीपर ड्रोन मार गिराया: IRGC ने दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर उड़ रहे MQ-9 रीपर ड्रोन को एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि ड्रोन किस देश का था। 4. अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने के नए विकल्प तलाश रहा: CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपने सैन्य विश्लेषकों से ईरान पर दबाव बढ़ाने और उसे सजा देने के लिए नए सुझाव मांगे हैं। अधिकारियों ने इसे असामान्य कदम बताया है। 5. हूती धमकी के बाद 6 सऊदी सुपरटैंकरों ने रास्ता बदला: यमन के हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद छह सऊदी सुपरटैंकरों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा समुद्री रास्ता अपनाया। इससे क्षेत्र में शिपिंग सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

VIDEO: भारत में 30% और स्वीडन में 35% टैक्स देकर क्या मिलता है? युवती ने वीडियो में बताया दोनों देशों में क्या-क्या मिलती है सरकार सुविधा

स्वीडन में रहने वाली भारतीय मूल की एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। भारतीय मूल के एक एचआर प्रोफेशनल ने वहां के टैक्स सिस्टम और लोगों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की तुलना भारत से की है। वीडियो में उसने बताया कि, वहां लोग 30 से 35 प्रतिशत तक टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त शिक्षा और कई दूसरी सरकारी सुविधाएं मिलती हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद भारत और स्वीडन के टैक्स सिस्टम और सरकारी सुविधाओं को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है।

एचआर प्रोफेशनल और डिजिटल क्रिएटर कृतिका साकोरिया हाल ही में स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर में रहने गई हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि वहां 30 से 35 प्रतिशत तक इनकम टैक्स देना पड़ता है। इसके बदले लोगों को इतनी अच्छी सरकारी सुविधाएं मिलती हैं।

सरकार कैसे कर रहे पैसों का इस्तेमाल

वीडियो में कृतिका ने लिखा, “30 प्रतिशत टैक्स देना पहली नजर में बहुत ज्यादा लगता है, लेकिन जब आपको रोजमर्रा की जिंदगी में मिलने वाली सुविधाएं दिखाई देती हैं, तब इसकी अहमियत समझ आती है।” उन्होंने अपने वीडियो के कैप्शन में लिखा कि टैक्स को सिर्फ उसकी दर से नहीं, बल्कि उसके बदले मिलने वाली सरकारी सुविधाओं के आधार पर भी देखा जाना चाहिए। इस वीडियो पर उन्होंने लिखा, ‘भारत में 30% टैक्स देने के बाद’ वहीं कुछ देर बाद लिखा, स्वीडन में 35% टैक्स देने के बाद’।

कृतिका ने कहा, “हर देश की अपनी व्यवस्था होती है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि टैक्स के बदले लोगों को क्या मिलता है? टैक्स सिर्फ पैसे देने का नाम नहीं है, बल्कि यह भी मायने रखता है कि सरकार उन पैसों का इस्तेमाल समाज के लिए किस तरह करती है।”

 

क्या-क्या मिलती है सुविधाएं

कृतिका ने अपनी पोस्ट में लिखा, “स्वीडन में टैक्स देने के बाद मुझे ऐसी कई सुविधाएं मिलती हैं, जो मेरी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर और आसान बनाती हैं।” कमेंट सेक्शन में लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कृतिका ने बताया कि स्वीडन में टैक्स देने वालों को कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। इनमें कम खर्च में स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त शिक्षा, माता-पिता के लिए सवेतन अवकाश, सामाजिक सुरक्षा, बच्चों के लिए आर्थिक सहायता, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थान, बेहतर सड़कें और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वहां लोगों को काम और निजी जीवन के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखने का अवसर मिलता है।

लोगों ने किया कमेंट

इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भारत के टैक्स सिस्टम और सरकारी सुविधाओं को लेकर जमकर अपनी राय दी। कई यूजर्स ने कृतिका की बात से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, “कुछ लोग भारत की मौजूदा व्यवस्था का बचाव करने में लगे रहते हैं, लेकिन जब तक कमियां स्वीकार नहीं की जाएंगी, बदलाव संभव नहीं है।” एक यूजर ने लिखा, “अगर वहां बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, तो वहीं रहो और वापस मत आना।” वहीं एक और यूजर ने लिखा, “सिर्फ 30 प्रतिशत नहीं, जीएसटी, सेस और दूसरे टैक्स जोड़ने के बाद लोगों पर टैक्स का बोझ और बढ़ जाता है।”

एक अन्य यूजर ने कहा, “आयकर के अलावा कैपिटल गेन टैक्स, कारों पर टैक्स और पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स भी देना पड़ता है।” सोशल मीडिया पर लोगों ने कई तरह से कमेंट किए हैं।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)