Nifty फिर से 22500 लेवल के पार, एनालिस्ट्स से जानिए बाजार में इस तेजी के जारी रहने की कितनी संभावना है

शेयर बाजारों में 9 अक्टूबर को जोरदार रिकवरी आई। इससे निफ्टी ने फिर से 22,500 का हासिल कर लिया। इस रिकवरी में क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी, आईटी शेयरों में तेजी और सस्ते भाव पर शेयरों की खरीदारी का हाथ है। 1 बजे निफ्टी 1.23 फीसदी यानी 272 अंक चढ़कर 22,504 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.17 फीसदी यानी 836 अंक के उछाल के साथ 72,437 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में भी 1.22 फीसदी की तेजी दिखी। सवाल है कि क्या तेजी टिकाऊ हैं?

निफ्टी के लिए 22,600 के लेवल पर रेसिस्टेंस

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पबित्रो मुखर्जी ने कहा, “निफ्टी अगर 8 अक्टूबर के 22,180 के ऊपर बना रहता है तो इसकी रेंज 22,180-22,600 होगी। 22,600 पर इसे रेसिस्टेंस का सामना करना होगा। गिरावट की स्थिति में यह 22,000 की तरफ बढ़ेगा और 2025 के 21,750 के निचले स्तर तक जा सकता है।”

रेसिस्टेंस लेवल के ऊपर टिके रहने पर आएगी तेजी

उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर को मजबूत शुरुआत के बावजूद मार्केट का स्ट्रक्चर सावधानी वाला है। रिकवरी के लिए निफ्टी का रेसिस्टेंस लेवल से ऊपर टिके रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तब तक तेजी पर बिकवाली का एप्रोच सही रहेगा। रेसिस्टेंस लेवल के करीब बाजार पर सेलिंग प्रेशर दिख सकता है।

22,500 के बाद सेंटीमेंट में इम्प्रूवमेंट दिख सकता है

थिनक्रेडब्लू सिक्योरिटीज के गौरव उदानी ने कहा कि अगर तेजी में निफ्टी 22,500 को पार कर जाता है तो बाजार के सेंटिमेंट में इम्प्रूवमेंट दिख सकता है, जिससे शॉर्ट-कवरिंग देखने को मिल सकती है। लेकिन, गिरावट की स्थिति में निफ्टी के 22,100 के नीचे जाने पर फिर से कमजोरी दिख सकती है। उन्होंने कहा कि ट्रेडर्स को सावधान रहने की जरूरत है। ओपनिंग गैप के पीछे भागने से बचना ठीक रहेगा। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

डे ट्रेडर्स को इस सपोर्ट जोन का ध्यान रखने की सलाह

कोटक नियो के हेड (इक्विटी रिसर्च) श्रीकांत चौहान ने कहा, “डे ट्रेडर्स के लिए 22,200/71,500 और 22,150/71,300 अगले सपोर्ट जोन होंगे। इन लेवल से नीचे जाने पर सेलिंग प्रेशर बढ़ सकता है। ऐसे में निफ्टी गिरकर 22,000-21,750 तक आ सकता है। सेंसेक्स 70,800-70,000 तक गिर सकता है।”

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सपोर्ट लेवल टूटने पर फिर से बिकवाली शुरू हो सकती है

उन्होंने कहा कि तेजी की स्थिति में 22,300-22,400/71,800-72,100 अगले रेसिस्टेंस जोन होंगे। इस रेंज के ऊपर तेजी जारी रहने पर 22,500/72,500 की तरफ इंट्राडे पुलबैक दिख सकता है। सपोर्ट लेवल टूटने पर फिर से बिकवाली के लिए रास्ता खुल सकता है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

शेयर बाजार में आ सकती है 50% तक तेजी, प्रशांत जैन ने कहा-अगले कुछ हफ्तों में निवेश के बड़े मौके

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का दौर खत्म होने जा रहा है। यह उन इनवेस्टर्स के लिए शेयरों में निवेश का सही वक्त है, जो मध्यम और लंबी अवधि के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं। दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने यह कहा है। उन्होंने 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सितंबर तिमाही के लेटर में कई महत्वपूर्ण बताई है।

दिसंबर मध्य तक FIIs की बिकवाली सुस्त पड़ जाएगी

प्रशांत जैन (Prashant Jain) को इनवेस्टमेंट का कई दशकों का अनुभव है। उन्होंने कहा है कि अगले तीन साल में भारतीय शेयर बाजारों का रिटर्न 40-50 फीसदी रह सकता है। शॉर्ट टर्म में बाजार में हल्की गिरावट के आसार दिख रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारतीय बाजार में बिकवाली के बारे में उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य तक इसमें कमी आ सकती है।

अगले कुछ हफ्तों में शेयर बाजारों में एंट्री का गोल्डन मौका

उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य के बाद मार्केट्स में रिकवरी शुरू होगी। इसलिए अगले कुछ हफ्ते या महीने शेयर बाजारों में एंट्री का शानदार मौका हो सकता है। पिछले करीब दो सालों से भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दिखी है। सितंबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच Nifty 12.4 फीसदी गिरा है। इस दौरान विदेशी निवेशकों यानी FIIs ने 58 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर बेचे हैं। हालांकि, FY25 और FY26 में इकोनॉमी की ग्रोथ करीब 7.5 फीसदी रही।

इन वजहों से भारतीय बाजार का प्रदर्शन रहा खराब

भारतीय शेयर बाजारों पर कई फैक्टर्स का असर पड़ा है। इनमें जियोपॉलिटिकल टेंशन, अमेरिकी टैरिफ, गोल्ड के आयात में उछाल और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी शामिल हैं। साथ ही फॉरेन इनवेस्टर्स की दिलचस्पी आर्टफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों से जुड़ी स्टॉक्स में बढ़ी है। इससे विदेशी निवेश उन बाजारों में गया है, जिनमें ऐसी कंपनियां मौजूद हैं।

विदेशी निवेशकों ने AI स्टॉक्स में पैसे लगाने में दिखाई दिलचस्पी

AI और सेमीकंडक्टर सुपरसाइकिल में भारत की मौजूदगी ना के बराबर है। इसलिए विदेशी निवेशकों ने भारत से पैसा निकाल एआई और सेमीकंडक्टर्स वाले बाजारों में लगाए हैं। इस वजह से अमेरिका और कई उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। भारतीय शेयर बाजारों में हालिया बिकवाली की वजह अमेरिकी में 10 साल के बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड है। यह 5 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। इससे अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश का आकर्षण बढ़ा है।

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हर दो साल गिरने के बाद शेयर बाजारों में आती है बड़ी तेजी

3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स ने अपनी स्टडी में पाया है कि हर दो सालों में 15 फीसदी गिरावट के बाद के अगले तीन सालों में शेयर बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। इस दौरान बाजार ने कम से कम 20 फीसदी रिटर्न दिए हैं। कई शेयरों का रिटर्न तो 50 फीसदी या इससे ज्यादा रहा है। हालांकि, यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आगे भी ऐसा होगा। यह सिर्फ एक ट्रेंड है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना ₹3600 उछला, चांदी 3000 रुपये फिसली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 8 अक्टूबर को सोने में जोरदार तेजी देखने को मिली। यह 3,600 रुपये के उछाल के साथ 1,52,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 7 अक्टूबर को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 1,48,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। हालांकि, चांदी की कीमतों में 8 अक्टूबर को बड़ी गिरावट देखने को मिली।

फेस्टिव सीजन से पहले सोने में बढ़ी दिलचस्पी

इससे पहले लगातार दो सत्रों में सोने में गिरावट आई थी। ट्रेडर्स का कहना है कि फेस्टिवल सीजन से पहले सोने में रिटेलर्स और ज्वेलर्स की दिलचस्पी बढ़ी है, जिससे इसकी कीमतों को मजबूती मिली। ट्रेडर्स ने बताया कि ज्वेलर्स आम तौर पर फेस्टिव सीजन से पहले रॉ मैटेरियल के रूप में सोने का स्टॉक बढ़ाते हैं। त्योहारों के दौरान सोने की मांग बढ़ती है।

डॉलर में मजबूती और महंगे क्रूड से सोने में ज्यादा तेजी नहीं

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमन के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि सोने की कीमतें दो महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गई थीं। अब इसमें रिकवरी दिखी है। हालांकि, क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें और डॉलर में मजबूती से सोने में तेजी सीमित बनी हुई है। चांदी की चाल सोने से उल्टी रही। यह 3000 रुपये गिरकर 2.24 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी, चांदी में गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में 0.32 फीसदी की तेजी दिखी। यह 4,125 डॉलर प्रति औंस था। सिल्वर करीब एक फीसदी गिरकर 59.15 डॉलर प्रति औंस था। आनंदराठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड में स्थिरता रही। इससे पहले के सत्र में यह 9 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

क्रूड की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल पर 

उन्होंने कहा कि सोने में तेजी दिखी है, लेकिन क्रूड की कीमतें अब भी हाई लेवल पर बनी हुई हैं। खबरों के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने पेंटागन को ईरानी ठिकानों पर हमलों के विकल्पों पर विचार करने को कहा है। ये हमले अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शंस से पहले हो सकते हैं। उधर, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड हाई लेवल पर बनी हुई है।

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इस साल की शुरुआत में सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर

इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव और बढ़ गया।

Market View : बाजार का ढ़ांचा कमजोर, एक्सपर्ट्स जानिए अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

Market View : ग्लोबल मार्केट में बिकवाली का असर भारतीय इक्विटी इंडेक्स पर भी पड़ा। US बॉन्ड यील्ड में तेजी और इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर $102 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के कारण बेंचमार्क निफ्टी 52-हफ्ते के नए निचले स्तर पर आ गया। FII द्वारा घरेलू शेयरों की भारी बिकवाली और RBI द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका से भी लोकल इन्वेस्टर्स में घबराहट है,क्योंकि ऊंची ब्याज दरों से लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावनाओं पर बुरा असर पड़ेगा। इसके चलते 8 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स में भारी गिरावट देखी गई और निफ्टी 22,250 के स्तर से नीचे आ गया। सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44% गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ,जबकि निफ्टी 371.25 अंक यानी 1.64% गिरकर 22,231.80 पर आ गया।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर का कहना है कि घरेलू बाजार में आज भारी बिकवाली का दौर जारी रहा। RBI की सख़्त पॉलिसी का असर उन सेक्टर्स पर पड़ा जो ब्याज दरों में बदलाव के प्रति संवेदनशील हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म वैल्यूएशन मल्टीपल्स में बदलाव आया। FII की लगातार निकासी,बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये की गिरती कीमत ने इस दबाव को और बढ़ा दिया।

इसके अलावा,कच्चे तेल की कीमतों में वोलैटिलिटी,जो लगातार $100 के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं,देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। अच्छे हाई-फ़्रीक्वेंसी डेटा से मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था का पता चलता है, जबकि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना इक्विटी वैल्यूएशन को दबाए हुए है।

मार्जिन से जुड़ी चिंताओं और टैक्टिकल प्रॉफ़िट बुकिंग के बीच मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में सुस्ती रही। आगे बाज़ार का फोकस अब Q2 अर्निंग्स सीज़न पर है,जहां डिमांड की स्थिरता और इनपुट कॉस्ट को संभालने के बारे में मैनेजमेंट की कमेंट्री शॉर्ट-टर्म के लिए बाजार की दिशा तय करेंगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP-रिसर्च,अजीत मिश्रा का कहना है कि गुरुवार को बाजार में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया और बाजार लगभग 1.5 फीसदी नीचे आ गया। कमजोर शुरुआत के बाद बेंचमार्क इंडेक्स ज्यादातर समय दबाव में रहे और अंत में दिन के निचले स्तर के करीब बंद हुए। बाजार में चौतरफा बिकवाली रही।

सेक्टर के लिहाज से देखें तो बिकवाली हर तरफ थी। मेटल, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई,जबकि IT एकमात्र ऐसा सेक्टर था जिसने कुछ हद तक मजबूती दिखाई।

ब्रॉडर मार्केट में और भी तेज बिकवाली हुई इससे मिडकैप और स्मॉलकैप दोनों इंडेक्स 2% से ज्यादा गिरे। इससे साफ पता चलता है कि बाजार में जोखिम लेने से बचा जा रहा है और बाजार का दायरा (मार्केट ब्रेड्थ) कमजोर हो रहा है।

घरेलू और ग्लोबल मैक्रो चिंताओं का बाजार के सेंटीमेंट पर भारी असर रहा। RBI के रेपो रेट को 25 bps बढ़ाकर 5.50% करने और ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (सोच-समझकर सख्ती) की ओर रुख करने के फैसले से वित्तीय हालात के और सख्त होने की चिंता बढ़ गई है। साथ ही,भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत $102–103 प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चली गई। जबकि US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.3% के आसपास ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। TCS के तिमाही नतीजों से पहले सावधानी का माहौल और IT सेक्टर में घबराहट ने भी बाजार पर असर डाला।

तकनीकी तौर पर,मामूली सुधार (पुलबैक) के बाद निफ़्टी ने एक बार फिर अप्रैल 2026 के निचले स्तर 22,182.55 को टेस्ट किया है जो मौजूदा ढांचे में और कमजोरी का संकेत है। अगर यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है तो बाजार 21,700–22,000 के जोन की ओर जा सकता है।

ऊपर की तरफ़,22,400 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है और उसके बाद 22,700–22,800 अगला बड़ा रेजिस्टेंस हो सकता है। मौजूदा गिरावट के दौर में इंडेक्स के नए निचले स्तर बनाने और बाजार के दायरे में तेजी से गिरावट के कारण,निकट भविष्य के लिए सतर्क रहने की ज़रूरत है।

बाजार में अपनी पोजीशन उसी हिसाब से बनानी चाहिए और हेज्ड अप्रोच (जोखिम कम करने वाला तरीका) अपनाना चाहिए, खासकर इसलिए क्योंकि अर्निंग सीजन के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि इंडेक्स में गिरावट जारी रही और यह पिछले सेशन के निचले स्तर से भी नीचे चला गया। पूरे सेशन के दौरान मंदड़ियों का दबदबा बना रहा और तेजड़ियों को कोई राहत नहीं मिली।

चाहे वह आवरली चार्ट हो या वीकली चार्ट, इंडेक्स क्रिटिकल मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है। यह लगातार बनी कमजोरी का संकेत है। हालात निराशाजनक लग रहे हैं और यह माहौल कुछ और दिनों तक ऐसा ही बना रह सकता है।

RSI बेयरिश क्रॉसओवर में है और ओवरसोल्ड जोन में बना हुआ है। निचले स्तर पर निफ्टी के लिए 22180 पर सपोर्ट है। इसके नीचे जाने पर इंडेक्स में और गिरावट आ सकती है और यह 22000 के स्तर तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 22350 पर रेजिस्टेंस है।

 

Market Outlook : कमजोर नोट पर बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 9 सितंबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Trend : बाजार पर बढ़ सकता है दबाव, गिरते बाजार में भी कमाई के लिए इस दो शेयरों पर रहे नजर

Market Trend : ब्याज दरों में बढ़ोतरी और सख्त कमेंट्री से कल 7 अक्टूबर को बाजार का मूड बिगड़ गया। सेंसेक्स और निफ्टी कल गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि बैंक निफ्टी निचले स्तरों से संभला,लेकिन मिडकैप शेयरों पर दबाव देखने को मिला। मेटल, रियल्टी, ऑटो शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। डिफेंस, IT और PSE इंडेक्स भी गिरावट पर बंद हुए। वहीं, PSU बैंक और कैपिटल मार्केट इंडेक्स बढ़त पर बंद हुए।

निफ्टी 173 प्वाइंट गिरकर 22,603 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 429 प्वाइंट गिरकर 72,639 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी भी 73 प्वाइंट गिरकर 55,056 पर बंद हुआ। मिडकैप 379 प्वाइंट गिरकर 59383 पर बंद हुआ।

निफ्टी के 50 में से 41 शेयरों में बिकवाली रही। सेंसेक्स के 30 में से 26 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। बैंक निफ्टी के 14 में से 7 शेयरों में बिकवाली रही। डॉलर के मुकाबले रुपया 36 पैसे कमजोर होकर 96.78 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

अब सवाल ये है कि अज कैसी रह सकती है बाजार की चाल? इस पर अपनी राय देते हुए HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि पिछले कुछ सेशन में अच्छी रिकवरी दिखाने के बाद,RBI की MPC मीटिंग में ब्याज दरों में 0.25% (25bps) की बढ़ोतरी के कारण निफ्टी ऊंचे स्तरों पर टिक नहीं पाया और इसमें कमजोरी आ गई। निफ्टी 173 अंक गिरकर बंद हुआ।

डेली चार्ट पर एक साफ नेगेटिव कैंडल बनी है,जो गैप-डाउन ओपनिंग के बाद निचले स्तर पर बंद हुई है। टेक्निकल तौर पर ऐसा लगता है कि निफ्टी 22800 के सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस लेवल के पास से नीचे की ओर मुड़ गया है। मंगलवार को बने 22776 के हाई पर एक नया ‘लोअर टॉप’ बनता दिख रहा है। हालांकि, आज के सेशन में और कमजोरी आने पर ही ‘लोअर टॉप’ बनने की पुष्टि हो पाएगी।

यहां से और कमजोरी आने पर निफ्टी को 22400 और उसके बाद 22200 के लेवल पर सपोर्ट मिल सकता है। अगर इसमें कोई उछाल आता है,तो निकट भविष्य में इसे 22800 और उसके बाद 23100 के लेवल पर रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ सकता है।

Mantri FinMart के अरुण कुमार मंत्री ने कहा कि आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी उम्मीद के मुताबिक ही रही। बाजार कि बात करें तो यूएस बॉन्ड यील्ड्स और क्रूड ऑयल और रुपए की कमजोरी बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में निफ्टी 22250-22220 के आसपास स्थित पिछला लो छू सकता है। जब तक 22800 का लेवल नहीं पार होता बाजार पर दबाव रहेगा।। आने वाले 1-2 दिन में निफ्टी में 22,400-22,300 तक के लेवल्स देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में सेल ऑन राइज़ की स्ट्रेटजी रखनी चाहिए। अगर आज उछाल मिलता है या फिर बाजार फ्लैट भी खुलता है मार्केट तो एक शॉर्ट पोजीशन मार्केट में लेकर चल सकते हैं। 22800 का स्टॉप लॉस लगा कर रखें। नीचे में आज या कल में निफ्टी 22400-22350 के लेवल हिट कर सकता है।

इसी तरह का व्यू बैंक निफ्टी में भी है। बैंक निफ्टी थोड़ा आउटपरफॉर्मस जरूर दिखा रहा है। खासकर Kotak बैंक में जिस हिसाब से मोमेंटम है, उससे इसको सपोर्ट मिल रहा है। Axis Bank ने भी काफी सपोर्ट किया है। बैंक निफ्टी में भी ऐसा लगता है कि अगर 54,800 टूटता है तो और वीकनेस आ सकती है। अगर बैंक निफ्टी 54,800 के नीचे जाता है तो वहां पर भी शॉर्ट ट्रेड लेकर चल सकते हैं। बैंक निफ्टी में भी 54,400 तक के टारगेट आ सकते हैं। ओवरऑल शॉर्ट करना है तो मुझे लग रहा है निफ्टी एक ज्यादा अच्छा कैंडिडेट है। 22,300 के टारगेट के लिए शॉर्ट करके चल सकते हैं।

Mantri FinMart के अरुण कुमार के दो टॉप पिक

स्टॉक में अरुण की एक पिक बॉय की है और दूसरी सेल की है। बॉय में एक एक सेक्टर है जो जिसने काफी अच्छा किया है वो है केबल सेक्टर। इसमें कल काफी मोमेंटम देखने को मिला। तो केईआई में खरीदारी की सलाह रहेगी। इसे 4670- 4660 के आसपास खरीदें। 4615 का स्टॉप लॉस रहेगा और 4778 तक के टारगेट रहेंगे।

दूसरी पिक रियलिटी से है। जिस हिसाब से आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी आई है उसे देखते हुए इस स्पेस में ब्रेकडाउन की उम्मीद है। ऐसे में डीएलएफ को शॉर्ट करने की सलाह है। इसे 655 रुपए के आसपास शॉर्ट करें, 663 रुपए का स्टॉप लॉस रहेगा। 642 रुपए के स्पॉट लेवल्स के टारगेट डीएलएफ में आ सकते हैं।

 

Market Outlook : बाजार में दो दिन की बढ़त का सिलसिला टूटा, जानिए 8 सिंतबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market: ‘जीडीपी मजबूत, फिर भी क्यों टूट रहा शेयर बाजार?’ हर्ष गोयनका ने बताईं ये 7 बड़ी वजहें!

Indian Stock Market Crash Reasons: भारतीय अर्थव्यवस्था जहां एक तरफ मजबूत जीडीपी ग्रोथ और बेहतरीन फंडामेंटल्स के साथ दुनिया में चमक रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू शेयर बाजार में लगातार बिकवाली और गिरावट का दौर जारी है। निवेशक इस बात से हैरान हैं कि जब देश की इकोनॉमी मजबूत है, तो शेयर बाजार लाल निशान में क्यों कारोबार कर रहा है?

इस बड़े विरोधाभास पर मशहूर उद्योगपति और आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भले ही हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि ग्लोबल लिक्विडिटी भारत से निकलकर दूसरे बाजारों की ओर बह रही है। गोयनका ने भारतीय शेयर बाजार में आ रही इस गिरावट के पीछे ये 7 प्रमुख कारण गिनाए हैं।

1. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा बाहर निकाल रहे हैं। एशियाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अन्य उभरते बाजारों में बेहतर अवसरों के कारण FIIs भारतीय इक्विटी से लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार पर भारी दबाव बन रहा है।

2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

अमेरिका में 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार इजाफा हो रहा है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए बिना जोखिम के अमेरिका में ही बेहतर रिटर्न मिलने लगता है। इसी वजह से वे भारत जैसे उभरते जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में निवेश करने लगते हैं।

3. क्रूड ऑयल की कीमतें $100 के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। महंगे तेल से भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है और कॉर्पोरेट मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है।

4. भारतीय रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की फंड निकासी के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। रुपये में गिरावट के कारण विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर करेंसी लॉस का डर रहता है, जिससे वे बिकवाली तेज कर देते हैं।

5. इंफ्लेशन और रेट-हाइक का डर

महंगे क्रूड ऑयल और सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से वैश्विक और घरेलू स्तर पर महंगाई दोबारा बढ़ने की आशंका गहरा गई है। इससे केंद्रीय बैंकों (जैसे- अमेरिकी फेडरल रिजर्व और RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती टलने या दोबारा दरें बढ़ाने का डर बाजार में बैठ गया है।

6. भारतीय शेयरों का वैल्यूएशन अभी भी ऊंचा

दुनिया के अन्य बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार का वैल्यूएशन (P/E रेशियो) अब भी काफी प्रीमियम या महंगा बना हुआ है। जब बाजारों में अनिश्चितता होती है, तो निवेशक महंगे वैल्यूएशन वाले शेयरों से मुनाफा वसूलकर सस्ते बाजारों (जैसे- चीन या ब्राजील) की ओर रुख करते हैं।

7. वैश्विक स्तर पर रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट

वैश्विक स्तर पर युद्ध के हालात, भू-राजनीतिक तनाव और बड़े आर्थिक संकटों के चलते ग्लोबल इन्वेस्टर्स जोखिम भरे संपत्तियों से दूर भाग रहे हैं। वे इक्विटी के बजाय सोना, कैश और अमेरिकी बॉन्ड जैसी सुरक्षित जगह पर अपनी पूंजी ट्रांसफर कर रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Best Stocks to Buy: अक्तूबर में निवेश के लिए ये हैं पांच दिग्गज स्टॉक्स, गिरते बाजार में भी करा सकते हैं कमाई

Best Stocks to Buy:  शेयर बाजार में अभी सेंटीमेंट कमजोर है। इसके बावजूद कुछ शेयरों में अच्छी संभावना दिख रही है। अभी निवेश करने पर ये शेयर अच्छी कमाई करा सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म नुवामा वेल्थ और जेफरीज ने कुछ शेयरों को अपनी पसंद बताई है। इनमें कई सेक्टर की कंपनियां हैं।

डीएफएल में निवेश का मौका

नुवामा वेल्थ की लिस्ट का पहला स्टॉक डीएलएफ है। यह मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी है। यह शेयर 1 अक्तूबर को 1.34 फीसदी गिरकर बंद हुआ। इस साल यह करीब 4 फीसदी गिरा है। डीएलएफ लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए जानी जाती है।

गिरते बाजार में भी दिखाई ताकत

नुवामा वेल्थ की लिस्ट का दूसरा स्ट़क अदाणी एनर्जी है। यह शेयर अट्रैक्टिव दिख रहा है। इस कंपनी को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज 3 का फायदा मिलेगा। यह शेयर 1 अक्तूबर को 1.17 फीसदी चढ़कर 1,330 रुपये पर बंद हुआ। इस साल जहां कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है, यह शेयर 27 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इसे पावर सेक्टर पर सरकार के बढ़ते फोकस का फायदा मिलेगा।

52 हफ्ते के हाई से काफी नीचे है स्टॉक

जेफरीज ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) के शेयरों को अपनी टॉप पिक बताया है। इस कंपनी को डिफेंस पर सरकार के बढ़ते फोकस का फायदा मिलेगा। एचएएल का शेयर 1 अक्तूबर को 1.36 फीसदी गिरकर 4,604.70 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर अपने 52 हफ्ते के हाई से काफी नीचे आ गया है। हालांकि, इस साल यह 4.7 फीसदी चढ़ा है।

अट्रैक्टिव लेवल पर है यह शेयर 

जेफरीज का दूसरा पंसदीदा स्टॉक आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस है। यह शेयर 1 अक्तूबर को 1.01 फीसदी गिरकर 1,574 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर इस साल 19 फीसदी से ज्यादा गिरा है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इंश्योरेंस रेगुलेटर आईआरडीईए ने इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर कमीशन को लेकर जो कंसल्टेशन पेपर पेश किया है, उसका फायदा आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस को मिल सकता है।

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इस ऑयल उत्पादक कंपनी में दिखेगी तेजी

ओएनजीसी जेफरीज का तीसरा पसंदीदा स्टॉक है। यह सरकारी कंपनी है जो तेल और गैस का उत्पादन करती है। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने पर कंपनी को फायदा होता है। यह शेयर 1 अक्तूबर को 1.43 फीसदी गिरकर 222.58 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, क्रूड की कीमतों में उछाल के बावजूद यह शेयर इस साल 6 फीसदी से ज्यादा गिरा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

कार, बाइक चलाने वालों को बड़ा झटका, इस कंपनी ने बढ़ाई पेट्रोल और डीजल की कीमतें

कार और बाइक चलाने वाले लोगों को यह खबर झटका देने वाली है। नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं। यह वृद्धि तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 5 रुपये बढ़ाई है, जबकि डीजल की कीमत प्रति लीटर 3 रुपये बढ़ाई है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताई ऑयल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रिटेल कीमतों में बढ़ते फर्क को कम करने के लिए कंपनी ने यह कदम उठाया है।

ब्रेंट क्रूड फिर से लगातार 100 डॉलर से ऊपर 

बीते कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। इससे पेट्रोल और डीजल अपने पेट्रोल पंप्स से बेचने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। Nayara Energy देश की सबसे प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स है। देशभर में इसके 7,108 पेट्रोल पंप्स हैं। इस वृद्धि के बारे में ईमेल से पूछ गए सवालों के जवाब कंपनी ने नहीं दिए।

इस साल मार्च में नायरा ने सबसे पहले बढ़ाए थे प्राइस

इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया था। तब सबसे पहले नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थी। कंपनी ने 26 मार्च को पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 5 रुपये और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये का इजाफा किया था। इससे इसके आउटलेट्स पर पेट्रोल की कीमत बढ़कर 100.71 रुपये और डीजल की कीमत 91.31 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई थी।

सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भी बढ़ाए थे प्राइस

नायरा एनर्जी के पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के बाद सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें मई में बढ़ाना शुरू किया था। मई के आखिर तक पेट्रोल की कीमतें प्रति लीटर 7.5 रुपये तक बढ़ गई थी। चौथी बार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं। तब पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 2.61 और डीजल की कीमत प्रति लीटर 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई थी।

नायरा ने जुलाई में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई थीं

नायरा एनर्जी ने बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटा दी थी। उसने 1 जलाई को पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 5 रुपये और डीजल की कीमत प्रति लीटर 3 रुपये घटा दी थी। तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में नरमी आई थी। हालांकि, अभी पेट्रोल और डीजल की रिटेल सेल्स में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का दबदबा है। हालांकि, अभी सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मई के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई है।

ऑयल कंपनियों को रोजाना हो रहा बड़ा नुकसान 

पिछले महीने रेटिंग एजेंसी इकरा ने बताया था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सितंबर में उन्हें पेट्रोल पर प्रति लीटर 8 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 9 रुपये का लॉस हो रहा था। इससे सितंबर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर उन्हें रोजाना करीब 530 करोड़ रुपये का लॉस हो रहा था।

Sensex और Nifty में गिरावट की ये हैं तीन बड़ी वजहें, अक्तूबर 2024 के बाद पहली बार लगातार दो महीने गिरा बाजार

शेयर बाजारों में बीते 25 साल में इतनी लंबी गिरावट का सिलसिला दिखा है। यह 8वां हफ्ता है जब बाजार में गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट से इनवेस्टर्स में घबराहट है। म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में सिप के जरिए निवेश करने वाले लोगों को भी अपना पैसा डूबने की चिंता सता रही है।

दुनिया के दूसरे देशों में ज्यादा गिरावट नहीं आई

एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली, अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा है। दुनिया के दूसरे शेयर बाजारों में इतनी गिरावट देखने को नहीं मिली है। अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन इस साल शानदार रहा है, जबकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था दबाव में है। उस पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का असर

बजाज ब्रोकिंग और मोतीलाल ओसवाल ने भारतीय बाजार में लगातार गिरावट की कई वजहें बताई हैं। इनमें FIIs की सेलिंग और खराब ग्लोबल इनवायरमेंट सबसे ऊपर हैं। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी ने कहा, “बीते एक हफ्ते में विदेश संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से बिकवाली की है। एक्सचेंज के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, उन्होंने इस दौरान 34970 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।”

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने दिया बाजार को सहारा

उन्होंने कहा कि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार खरीदारी कर बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया है। सितंबर में FIIs ने भारतीय बाजार में 44010 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इस दौरान DIIs ने 76030 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। डीआईआई की खरीदारी से बाजार को सहारा मिला है।

अमेरिका-ईरान में समझौते पर अनिश्चतिता ने बढ़ाया दबाव

मुखर्जी ने कहा कि अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड, ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें और FIIs की बिकवाली का लगातार बाजार के सेंटिमेंट पर असर पड़ रहा है। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी दिख रही है। इसका खराब असर बाजार पर पड़ रहा है।

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अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार दिखी ऐसी गिरावट 

मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि सितंबर में निफ्टी 6.1 फीसदी गिरा है। यह निफ्टी में गिरावट का लगातार दूसरा महीना था। अक्तूबर 2024 के बाद पहली बार इस तरह की गिरावट दिखी है। 2026 में निफ्टी अब तक 13.4 फीसदी गिर चुका है। टेक्नोलॉजी, ऑटो, पीएसयू बैंक और कैपिटल गुड्स शेयरों में सितंबर में ज्यादा गिरावट आई। मार्केट की नजरें अब अगले हफ्ते पर लगी हैं।