भारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें:खतरे में 6 प्रदेश, ग्लेशियल लेक अचानक कैसे फट जाती हैं

26 अगस्त की सुबह 9 बजे। तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बाढ़ आ गई। कुछ ही मिनटों में सड़कें, इमारतें, गांव बह गए। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत-अमेरिका समेत 26 देशों के नागरिक शामिल हैं। रात 9 बजे तक 95 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, तबाही की वजह ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ यानी GLOF है। करीब एक साल पहले, जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में तिब्बत की एक ग्लेशियर झील तापमान बढ़ने से फट गई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी। ये एक पैटर्न-सा बनता जा रहा है। GLOF की जद में भारत के भी कई इलाके हैं। 5 गुना बढ़ गईं ग्लेशियर झीलें, खतरे में भारत के 6 प्रदेश IIT रोपड़ और सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साझा स्टडी की। इसी महीने जारी रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 1990 में सिर्फ 107 ग्लेशियर झीलें थीं। 2024 तक यह संख्या बढ़कर 669 हो गई, यानी 525% की बढ़ोत्तरी। 669 में से 88 झीलों पर नेपाल जैसी ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ का खतरा मंडरा रहा है। 9 झीलों को ‘बेहद ज्यादा खतरनाक’, 18 को ‘ज्यादा खतरनाक’ और 26 को ‘मध्यम खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है। रिसर्चर्स ने दो झीलों पर खास मॉडलिंग की- ब्यास बेसिन की हिमसू झील और सतलुज बेसिन की एक बेनाम झील। अगर ब्यास झील का नेचुरल डैम टूट जाए, तो 1,385 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड की बाढ़ आएगी। यानी हर सेकेंड करीब 14 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे हर सेकेंड ओलंपिक साइज के 6 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं। इसी तरह सतलुज झील से 3,507 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पानी का सैलाब आएगा। यानी हर सेकेंड करीब 35 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे डैम और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत 588 इमारतों को खतरा है। हिमालय का बढ़ता तामपान इस खतरे को और बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में आई IIT खड़गपुर की एक स्टडी बताती है कि ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान पिछले 20 सालों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इससे ग्लेशियर पिघलने और नदियों के बहाव में बड़ा बदलाव आ सकता है। ग्लेशियर झीलें अचानक कैसे फट जाती हैं? पहाड़ों पर ऊंचाई पर मौजूद ग्लेशियर जब पिघलते हैं, तो उनका पानी आसपास के निचले इलाके या किसी चट्टानी दीवार के सहारे इकट्ठा होने लगता है। ये धीरे-धीरे एक झील का रूप ले लेता है, जिसे ‘ग्लेशियल लेक’ कहते हैं। ये झील ग्लेशियर के सामने या उसकी निचली सतह पर भी बन सकती है। इन झीलों को बर्फ, पहाड़ का मलबा या चट्टान की एक नैचुरल दीवार यानी ‘डैम’ रोककर रखती है। जब ये दीवार किसी वजह से अचानक टूट जाती है, तो झील में जमा लाखों-करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी बहुत तेज रफ्तार से बेकाबू होकर नीचे की तरफ बहता है। इसी को ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, GLOF या ग्लेशियर की झील फटना कहते हैं। GLOF में पानी के बहाव की रफ्तार आम बारिश से आई बाढ़ के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है, जिससे यह रास्ते में आने वाली हर चीज को बहुत तेजी से काटती-छांटती और बहाती चली जाती है। ग्लेशियर झील 3 वजहों से फट सकती हैं… 1. ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर का तेजी से पिघलना 2. बर्फ या चट्टान का झील में गिरना 3. भारी बारिश से झील का ओवरफ्लो होना GLOF की तबाही कैसे रोकी जा सकती है? नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDMA और नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के मुताबिक, क्या नेपाल की बाढ़ से भारत में फौरन कोई खतरा? इसलिए भोटेकोशी में अधिक पानी आने पर उसका पानी सुनकोशी और फिर कोसी नदी तंत्र में शामिल हो सकता है। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जिले काफी प्रभावित हो सकते हैं। 2008 में नेपाल के कुसहा में कोसी नदी का तटबंध टूट गया था। इसके बाद कोसी नदी अपने नए/प्राकृतिक रास्ते को छोड़कर सैकड़ों साल पुराने पूर्व की ओर वाले रास्ते पर बहने लगी। इससे अचानक नदी का रुख घनी आबादी और नए इलाकों की तरफ मुड़ गया, जिससे बिहार के 34 लाख से अधिक लोग बिना किसी पूर्व चेतावनी के भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए। हालांकि, इस बार रसुवा में लैंडस्लाइड, भूस्खलन या हिम झील टूटने से अचानक नदी में भारी मात्रा में पानी आ गया है। लेकिन नदी ने अपना रास्ता नहीं बदला है। वह अपने तय रास्ते पर बह रही है। इस कारण एक्सपर्ट तटबंध टूटने की संभावना व्यक्त नहीं कर रहे हैं। पानी के भारी दबाव और संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। बिहार के 8 जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया है। ये जिले पश्चिमी चंपारण (बगहा), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हैं। ———— ये खबरें भी पढ़ें- नेपाल में बाढ़ से तबाही, सैकड़ों लापता, 95 मौतें:पावर प्लांट-पुल बहे; 133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे नेपाल की बाढ़ से गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ा:बैराज के 36 गेट खोले गए, मोतिहारी-गोपालगंज समेत बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट

राम मंदिर चढ़ावा चोरी! 30 बैंक लॉकरों की जांच में जुटी SIT, सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ी जांच अब केवल दस्तावेजों की पड़ताल तक सीमित नहीं रह गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने मामले में संपत्तियों और बैंक लॉकरों की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सभी 30 बैंक लॉकरों में रखी सामग्री का सत्यापन किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लॉकरों में वास्तव में कितनी और कौन-कौन सी वस्तुएं मौजूद हैं। साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि क्या उनका डिटेल्स राम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज इन्वेंट्री से मेल खाता है या नहीं।

‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच टीम ने मंगलवार (26 अगस्त) को भी अपनी कार्रवाई जारी रखी। पूरी प्रक्रिया को वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा है। लॉकर खोलने से लेकर उसमें रखी प्रत्येक वस्तु की जांच तक हर चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। टीम वस्तुओं की पहचान, उनकी संख्या, उपलब्धता और स्थिति की पुष्टि करने के साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड से उनका मिलान कर रही है।

रिकॉर्ड और वास्तविक सामान का होगा मिलान

फोरेंसिक सत्यापन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज सामान और लॉकरों में वास्तव में मौजूद सामान में कोई अंतर तो नहीं है। टीम प्रत्येक वस्तु को रिकॉर्ड में दर्ज विवरण से क्रॉस-चेक कर रही है।

जांच के दौरान केवल सामान की गिनती ही नहीं की जा रही, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित वस्तु किस रिकॉर्ड में दर्ज है और मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति क्या है। इस पूरी प्रक्रिया के आधार पर एक विस्तृत फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

हर सामान का बनाया जा रहा ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड

जांच की खास बात यह है कि प्रत्येक वस्तु के सत्यापन के दौरान ऑडियो-वीडियो साक्ष्य भी तैयार किया जा रहा है। सामान का डिटेल्स, उसकी पहचान, रिकॉर्ड में उसकी एंट्री और मौके पर उसकी मौजूदगी को डिजिटल तरीके से दर्ज किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, इन डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में न्यायिक कार्यवाही के दौरान उनकी प्रामाणिकता पर सवाल न उठे। इस तरह जांच टीम केवल कागजी रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं रहना चाहती। बल्कि भौतिक साक्ष्यों का भी डिजिटल दस्तावेज तैयार कर रही है।

पेन ड्राइव में सुरक्षित होंगे जांच के दस्तावेज और वीडियो

फोरेंसिक सत्यापन के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा। जांच से जुड़े दस्तावेजों और वीडियो साक्ष्यों को एक पेन ड्राइव में संकलित कर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करने की भी तैयारी की जा रही है। इससे जांच में सामने आए भौतिक साक्ष्यों का डिजिटल रिकॉर्ड भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेगा।

सितंबर के पहले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट?

सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। संभावना जताई जा रही है कि जांच टीम सितंबर के पहले सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर सकती है। वहीं, 2 सितंबर को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक भी प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसी बैठक के आसपास SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में सौंप सकती है।

फिलहाल, 30 बैंक लॉकरों की फोरेंसिक जांच को इस मामले की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। इस सत्यापन से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज संपत्तियों और वास्तविक रूप से मौजूद सामान के बीच कोई अंतर है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा भी तय हो सकती है।

आरोपियों पर BNS की गलत धाराएं लगाने का वकील का दावा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में आरोपियों की ओर से पेश वकील ने मंगलवार को विशेष अदालत में दावा किया कि पुलिस ने मामले की जांच भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गलत धाराओं के तहत की है। आरोपियों के वकील कुल शेखर सिंह ने कहा कि मामले में चोरी और गबन, दोनों की धाराएं लगाई गई हैं। जबकि ये दोनों धाराएं एक साथ लागू नहीं हो सकतीं। सिंह ने अयोध्या के विशेष जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रजत वर्मा की अदालत में यह दलील दी।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कथित चोरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद FIR दर्ज की गई। साथ ही मंदिर में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई लोगों के बयान दर्ज किए।

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सिंह ने यह भी दलील दी है कि पुलिस ने आरोपियों को लोक सेवक के रूप में पेश किया है। जबकि राम मंदिर ट्रस्ट लोक प्राधिकरण नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने लगाई गई धाराओं में आरोपियों को लोक सेवक बताया और उन पर सार्वजनिक संपत्ति के गबन का आरोप लगाया। सिंह ने बताया कि अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अगली सुनवाई के लिए दो सितंबर की तारीख तय की है।

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UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की क्वालिटी सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति परियोजनाओं की क्वालिटीकी जांच देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) संस्थानों के एक्सपर्ट्स करेंगे। सरकार ने इसके लिए थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था में IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की जैसे प्रमुख संस्थान बड़ी परियोजनाओं की टेक्निकल क्वालिटी की निगरानी करेंगे।

इसका मकसद यह है कि निर्माण में किसी भी तरह की तकनीकी कमी, घटिया सामग्री या सुरक्षा से जुड़ी समस्या का पता परियोजना पूरी होने के बाद नहीं। बल्कि निर्माण के दौरान ही चल जाए। थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) में सड़कें, पुल, सीवरेज सिस्टम और पानी की सप्लाई वाले प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक होगी जांच 

एक्सपर्ट्स हर प्रोजेक्ट की शुरुआत से लेकर आखिर तक जांच करेंगे। इसमें उसका डिजाइन, बनाने का तरीका, इस्तेमाल होने वाली सामग्री और जरूरी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, जैसे सभी कारण शामिल होगा। IIT की टीमें निर्माण के अलग-अलग चरणों की भी निगरानी करेंगी ताकि काम पूरा होने के बाद के बजाय शुरुआती दौर में ही किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।

शुरुआत से अंत तक होगी जांच

IIT के विशेषज्ञ केवल तैयार सड़क या पुल की जांच नहीं करेंगे, बल्कि परियोजना के अलग-अलग चरणों की निगरानी करेंगे। इसका उद्देश्य निर्माण पूरा होने के बाद खामियां मिलने के बजाय उन्हें समय रहते पहचानकर ठीक करना है। इसमें मुख्य रूप से-

  • प्रोजेक्ट के डिजाइन की जांच
  • निर्माण में अपनाई जा रही तकनीक
  • इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता
  • निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
  • निर्माण की सुरक्षा
  • काम की अलग-अलग स्टेज पर गुणवत्ता की जांच शामिल होगी।

IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के 8 डिवीजन में प्रोजेक्ट की क्वालिटी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी जांच IIT कानपुर की टीम करेगी।

IIT-BHU के जिम्मे ये इलाके

IIT-BHU वाराणसी को भी कई महत्वपूर्ण डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी। वहीं IIT रुड़की को सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ समेत पांच डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।

₹100 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट पर खास नजर

नई व्यवस्था के तहत ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रमुख प्रोजेक्ट जांच के दायरे में आएंगे। टेक्निकल एक्सपर्ट निर्माण की क्वालिटी के साथ-साथ इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना की सुरक्षा का भी परीक्षण करेंगे। सरकार का मानना है कि बाहरी और एक्सपर्ट्स संस्थानों से ऑडिट कराने से निर्माण एजेंसियों पर गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ेगा। साथ ही सरकारी पैसे से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की विश्वसनीयता बेहतर होगी।

‘उन्नाव एक्सप्रेसवे’ हादसे के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढहने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे। इसके करीब 12 दिन बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब निर्माण के दौरान ही पकड़ में आएंगी खामियां

नई TPQA व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि किसी परियोजना के पूरा होने के बाद सामने आने वाली तकनीकी खामियों को निर्माण के दौरान ही पकड़ा जा सकेगा। सरकार की कोशिश है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल समय और बजट के भीतर पूरे न हों। बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यानी अब यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट पर सिर्फ सरकारी विभागों की नजर नहीं होगी। बल्कि IIT के टेक्निकल एक्सपर्ट भी निर्माण की क्वालिटी का हिसाब रखेंगे।

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पटना से मैक्सिको तक का सफर, बिहार में जन्मे IIT ग्रेजुएट 4 बिजनेस शुरू करने के लिए छोड़ी Uber की नौकरी

बिहार में जन्मे एक एंटरप्रेन्योर की कहानी इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है। उनकी कहानी उनके जीजाजी ने X (पहले ट्विटर) पर शेयर की है। इस कहानी में IIT दिल्ली से पढ़ाई और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में 10 साल के करियर के बाद मेक्सिको में चार बिजनेस चलाने तक का सफर शामिल है।

पटना के रहने वाले 33 साल के विजीत सुमन ने Uber में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने के बाद फ़ूड, वेलनेस, सॉफ़्टवेयर और फ़्रॉड प्रिवेंशन (धोखाधड़ी रोकने) के क्षेत्र में बिजनेस शुरू किए। हाल ही में उनके जीजाजी राहुल राज ने X पर उनकी उपलब्धियों के बारे में पोस्ट किया, जिससे उनका यह अनोखा करियर सफर वायरल हो गया और लोगों का ध्यान इस ओर गया।

IIT दिल्ली से लेकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में 10 साल का सफर

टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपना करियर शुरू करने से पहले सुमन ने IIT दिल्ली से टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की पढ़ाई की थी। उन्होंने पेमेंट और फ़्रॉड प्रिवेंशन के क्षेत्र में 10 साल से ज़्यादा समय तक काम किया और कंपनियों को अरबों डॉलर से जुड़े फाइनेंशियल क्राइम से निपटने में मदद की। उनके प्रोफेशनल सफर में ऐसी कंपनियों में काम करना भी शामिल है, जिन्हें बाद में दूसरी कंपनियों ने खरीद लिया था, जैसे Falabella द्वारा Linio और Uber द्वारा Cornershop का अधिग्रहण।

लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया में कई साल बिताने के बाद, सुमन ने एक अलग रास्ता चुनने का फ़ैसला किया। उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप की दुनिया में पहला कदम तब रखा जब वे टेक सेक्टर में काम कर रहे थे।

इसकी शुरुआत मैक्सिको में भारतीय खाने से हुई

2023 में, सुमन और उनके बिज़नेस पार्टनर अर्पित खुराना ने मैक्सिको सिटी में ‘अरोमा करी’ (Aroma Curry) शुरू किया। यह आइडिया विदेश में रहने वाले भारतीयों की एक आम समस्या से आया: घर जैसा स्वाद वाला खाना मिलना। न तो सुमन और न ही खुराना को रेस्टोरेंट चलाने का कोई अनुभव था, लेकिन जल्द ही उनके बिज़नेस को शादियों और दूसरे इवेंट्स में कैटरिंग के लिए रिक्वेस्ट मिलने लगीं।

जो एक रेस्टोरेंट के तौर पर शुरू हुआ था, वह आगे चलकर कई बिज़नेस में से पहला बिज़नेस बन गया। 2024 तक, सुमन ने पूरी तरह से एंटरप्रेन्योरशिप पर ध्यान देने के लिए उबर (Uber) छोड़ दिया। वे एक बिज़नेस से चार बिज़नेस तक पहुंचे।

कॉर्पोरेट दुनिया छोड़ने के बाद, सुमन ने मैक्सिको सिटी में ‘संतुलन’ (Santulan) नाम का एक योग स्टूडियो शुरू किया।

शुरुआत में यह स्टूडियो एक छोटा सा वेंचर था, लेकिन जल्द ही कस्टमर्स ने पिलेट्स रिफॉर्मर क्लास की मांग की। बिज़नेस का विस्तार हुआ और सुमन के अनुसार, दो साल के भीतर यह मैक्सिको सिटी के सबसे ज़्यादा रेटिंग वाले स्टूडियो में से एक बन गया। उनकी तीसरी कंपनी एक और समस्या के समाधान के तौर पर शुरू हुई, जिसका सामना उन्हें स्टूडियो चलाते समय करना पड़ा था।

बिज़नेस को मैनेज करने के लिए सही सॉफ़्टवेयर न मिलने पर, सुमन ने अपना खुद का सॉफ़्टवेयर बनाया। बाद में दूसरे स्टूडियो मालिकों ने भी इस सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई, जिससे ‘क्लासियस’ (Klasius) बना – यह स्टूडियो मैनेजमेंट पर केंद्रित एक सॉफ़्टवेयर बिज़नेस है।

अपने चौथे वेंचर के साथ वे उस फील्ड में वापस लौटे जिसे वे सबसे अच्छी तरह जानते थे।

सुमन और उनके तीन दोस्तों ने ‘फोर्टिफाई’ (Fortify) नाम का एक प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया, जो धोखाधड़ी रोकने पर केंद्रित था। एंटरप्रेन्योर के अनुसार, कंपनी अब मेक्सिको की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक के साथ पायलट प्रोग्राम चला रही है। इस तरह सुमन अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ — इंडियन फ़ूड, वेलनेस, सॉफ़्टवेयर और फ़ाइनेंशियल टेक्नोलॉजी — में चार बिज़नेस चला रहे थे।

300 मेहमानों वाली शादी एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई

इस सफ़र के सबसे यादगार पलों में से एक तब आया जब ‘अरोमा करी’ (Aroma Curry) ने 300 से ज़्यादा मेहमानों वाली एक शादी में कैटरिंग की। उस स्तर पर यह टीम का पहला बड़ा इवेंट था। कैटरिंग के इस सफल काम से बिज़नेस का कॉन्फिडेंस काफ़ी बढ़ा, खासकर तब जब मेहमानों ने टीम से कहा कि खाने ने उन्हें दिल्ली की याद दिला दी।

भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर शुरू किए गए बिज़नेस के लिए, लोगों की इस प्रतिक्रिया ने ‘अरोमा करी’ को शुरू करने के मूल मकसद को और मज़बूत किया। फिर उनके जीजाजी ने उनके बारे में पोस्ट किया। जब सुमन के जीजा राहुल राज ने X पर उनकी कहानी शेयर की, तो यह बहुत से लोगों तक पहुंची।

इस पोस्ट में बताया गया कि कैसे वे IIT दिल्ली के पूर्व छात्र और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल से मैक्सिको में कई बिज़नेस चलाने वाले एंटरप्रेन्योर बने। सुमन के अनुसार, इस पोस्ट ने तेज़ी से लोगों का ध्यान खींचा और इसे 1,00,000 से ज़्यादा बार देखा गया। उन्होंने बताया कि इस अचानक मिली चर्चा की वजह से उन्हें ऐसे लोगों के मैसेज भी मिले जिनसे उन्होंने कॉलेज के बाद से बात नहीं की थी। इस अप्रत्याशित वायरल मोमेंट ने परिवार के एक सदस्य की पोस्ट को उनके अनोखे करियर सफ़र के बारे में एक बड़ी चर्चा में बदल दिया।

2 बार JEE में फेल हुआ लड़का, आज ₹2 लाख महीना कमाता है, Ankur Warikoo ने बताई कहानी

बिजनेसमैन अंकुर वारिकू की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भारत में टैलेंट और सफलता को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। उन्होंने इंदौर के एक डिजाइनर नमन की कहानी साझा की, जो दो बार JEE में सफल नहीं हो सके। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बिना किसी प्रतिष्ठित कॉलेज की डिग्री के अपने दम पर प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया। YouTube से सीखते हुए नमन ने धीरे-धीरे अपने कौशल को निखारा और फ्रीलांसिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। आज उनकी कमाई करीब 2 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है।

नमन की कहानी साझा करते हुए वारिकू ने कहा कि भारत में टैलेंट की कमी नहीं है, बल्कि लोगों को पहचानने का नजरिया सीमित है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की काबिलियत केवल कॉलेज, डिग्री या नौकरी के नाम से तय नहीं होनी चाहिए। उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि सफलता के लिए डिग्री जरूरी है या असली हुनर।

‘भारत में टैलेंट की नहीं, लेबल की समस्या है’

अंकुर वारिकू ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “India does not have a talent problem. It has a label problem.” उनका कहना है कि भारत में लोगों की काबिलियत को अक्सर उनके कॉलेज, डिग्री और नौकरी के नाम से आंका जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार बेहतरीन टैलेंट सिर्फ इसलिए सामने नहीं आ पाता, क्योंकि उसके पास किसी बड़े कॉलेज की डिग्री या मशहूर कंपनी का अनुभव नहीं होता।

JEE में दो बार फेल, फिर YouTube से सीखा डिजाइन

वारिकू ने इंदौर के डिजाइनर नमन का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, नमन दो बार JEE में सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने रात में YouTube की मदद से खुद प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपना पोर्टफोलियो तैयार किया और फ्रीलांस काम शुरू किया। वारिकू के अनुसार, आज नमन हर महीने करीब 2 लाख रुपये कमाते हैं।

‘डिग्री यह नहीं बता सकती कि आप कितनी दूर जाएंगे’

वारिकू ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी व्यक्ति की डिग्री या पुराने अनुभव से यह तय नहीं किया जा सकता कि वह भविष्य में कितना सफल होगा। उनके मुताबिक, क्रेडेंशियल्स बताते हैं कि कोई व्यक्ति अब तक कहां पहुंचा है, लेकिन यह नहीं बताते कि वह आगे कितनी दूर जा सकता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

वारिकू की पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी मिली-जुली रहीं। कुछ यूजर्स ने नमन की सफलता को प्रेरणादायक बताया, लेकिन कुछ लोगों का कहना था कि ऐसी कहानियां अपवाद हो सकती हैं। एक यूजर ने कहा कि कई IIT ग्रेजुएट भी कम उम्र में 2 लाख रुपये महीने नहीं कमा पाते। वहीं, दूसरे यूजर ने IIT से तुलना पर सवाल उठाते हुए कहा कि JEE जैसी कठिन परीक्षा पास करना भी किसी व्यक्ति की समस्या सुलझाने की क्षमता दिखाता है।

Viral Video: मुरथल में इंसान नहीं रोबोट परोस रहे पराठे, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

Diamond State Summit: ‘हमारे युवा प्रतिभाशाली हैं…’ , CM योगी ने की Gen-Z युवाओं की जमकर तारीफ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यूज18 इंडिया के खास कार्यक्रम डायमंड स्टेट समिट में देश युवाओं की काफी तारीफ की। डायमंड स्टेट्स समिट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि, युवा देश का भविष्य हैं। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की मदद के लिए उनकी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी।

बता दें कि, सीएम योगी आदित्यनाथ का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में दिल्ली में नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक विवाद को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में Gen-Z युवाओं का बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। न्यूज18 इंडिया के ‘डायमंड स्टेट्स समिट’ कार्यक्रम में बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन दिया जाता है। उन्होंने बताया कि यूपीएससी परीक्षा पास कर चुके लोग इस योजना के तहत कम से कम एक घंटे का समय उन छात्रों को देते हैं, जो यूपीएससी, नीट, आईआईटी और जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

युवाओं पर सीएम योगी आदित्यनाथ का फोकस

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी सबसे युवा आबादी का नेतृत्व करता है। हमारा युवा प्रतिभाशाली है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए हैं, जहां मॉडर्न टेक्नोलॉजी सिखाई जा रही है। AI, स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर तमाम आधुनिक शिक्षा दी जा रही है। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत यूपी के सरकारी इंटर कॉलेजों का कायाकल्प किया गया। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिला। UPSC, UPPSC, NEET और IIT-JEE की तैयारी के लिए वर्चुअल और फिजिकल कोचिंग की व्यवस्था की गई। जिलों में तैनात UPSC पास अधिकारी युवाओं को मार्गदर्शन दे रहे।

सीएम योगी ने कहा कि देश के युवा प्रतिभाशाली हैं। उन्होंने खास तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश की बड़ी युवा आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में हुए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में काफी लंबी दूरी तय की है और क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वह सिर्फ आंकड़ों के आधार पर बदलाव की बात नहीं कर रहे हैं। उनके मुताबिक, जब आम लोग खुद अपनी आंखों से बदलाव देख रहे हैं, तो यह साफ है कि वास्तव में काफी बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में काशी और प्रयागराज को छोड़कर किसी दूसरे इलाके में विश्वविद्यालय नहीं था। लेकिन पिछले 9 वर्षों में गोरखपुर, आजमगढ़, बलरामपुर और मिर्जापुर में नए विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में भदोही में भी काशी नरेश विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के बनने से प्रदेश के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

Jharkhand Bandh Today: छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में BJP का राज्यव्यापी बंद, छात्रों ने की CBI जांच की मांग

Jharkhand Bandh Today: रांची में JPSC और JSSC के उम्मीदवारों के मार्च के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में झारखंड BJP ने मंगलवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आरोप लगाया है कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन के इस्तेमाल से सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह बंद सुबह 8 बजे से आधी रात तक रहेगा।

आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन सरकार पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह बंद छात्रों के साथ हुए “अन्याय और अत्याचार” के विरोध में किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को नौकरी से जुड़ी कथित धांधली और परीक्षा के पेपर पहले ही लीक होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का भी आरोप लगाया।

साहू ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस के गोले और दूसरी चीजें चलाई गईं, जिससे सैंकड़ों छात्र घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी कार्यकर्ता छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतरेंगे और राज्य में कामकाज ठप कर देंगे।

वहीं, झारखंड में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी आंदोलन से निपटने के सरकार के तरीके की आलोचना की।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करने के दौरान उन्हें और अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया और सवाल उठाया कि सरकार ने कथित अनियमितताओं की CBI जांच के आदेश क्यों नहीं दिए।

मरांडी ने कहा कि छात्र 15 दिनों से धरना और भूख हड़ताल कर रहे थे और तर्क दिया कि यह आंदोलन सोमवार की झड़प से कहीं ज्यादा समय से चल रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के बजाय सरकार ने उन पर लाठीचार्ज किया।

छात्रों का विधानसभा की ओर मार्च

यह टकराव तब हुआ जब JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में उम्मीदवार ‘विधानसभा घेराव’ मार्च निकाल रहे थे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को झारखंड विधानसभा तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन, आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, नौकरी के हजारों उम्मीदवार विधानसभा की ओर मार्च करते हुए कई बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ गए, जहां मानसून सत्र चल रहा था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि महिलाओं समेत कई छात्र घायल हुए हैं।

हालांकि, रांची के SSP राकेश रंजन ने कहा कि पत्थरबाजी में 14 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

पुलिस ने कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने वालों की पहचान के लिए CCTV फुटेज की जांच की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।

बता दें कि जब प्रदर्शनकारी विधानसभा से करीब 200 मीटर दूर पहुंचे, तो जगन्नाथपुर मंदिर के पास पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई राउंड आंसू गैस के गोले छोड़े।

इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने आखिरी बैरिकेड भी पार कर लिया और विधानसभा के गेट नंबर 1 तक पहुंच गए, जहां उन्होंने धरना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने एक बार फिर लाठीचार्ज किया।

छात्रों की मांग: CBI जांच हो और परीक्षा रद्द की जाए

गौरतलब है कि भर्ती परीक्षाओं, खासकर JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र 25 जुलाई से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांगों में CBI जांच, JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) व झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के कामकाज में व्यापक सुधार शामिल हैं।

वे 14वीं झारखंड PSC सिविल सेवा परीक्षा सहित कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं। साथ ही, वे CBI या राज्य के बाहर के रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों के पैनल से स्वतंत्र जांच की मांग भी कर रहे हैं।

इस बीच, JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो इस मुद्दे पर नौ दिनों से भूख हड़ताल पर थे, खराब सेहत के बावजूद सोमवार को एम्बुलेंस में बैठकर मार्च में शामिल हुए।

बाद में, ब्लड शुगर लेवल में “भारी गिरावट” आने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताई है।

बता दें कि प्रोटेस्ट के दौरान महतो ने स्ट्रेचर पर खड़े होकर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया और छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर बल प्रयोग की आलोचना की।

हेमंत सोरेन ने बातचीत की अपील की

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विरोध कर रहे छात्रों से अपील की कि वे बातचीत और भरोसे के जरिए अपनी शिकायतों का समाधान करें। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी चिंताएं जाहिर करने का लोकतांत्रिक अधिकार है और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों पर “पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता” के साथ विचार करेगी।

सोरेन ने विपक्षी नेताओं पर राजनीतिक फायदे के लिए छात्रों को गुमराह करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया और प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया कि वे किसी भी राजनीतिक जाल में न फंसें।

उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी, टेक्नोलॉजी-आधारित, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की इच्छुक है।

बता दें कि राज्य सरकार 14वीं JPSC परीक्षा और 2023 व 2025 की बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमत हो गई है। उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं के सबूत मिलने के बाद सरकार ED जांच के लिए भी सहमत हो गई है।

JSSC-CGL परीक्षा को लेकर कुमार ने कहा कि सरकार इसे रद्द करने का आदेश नहीं दे सकती, क्योंकि यह परीक्षा अदालत की निगरानी में आयोजित की गई थी।

सरकार ने CID जांच की निगरानी के लिए हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाने का प्रस्ताव भी दिया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

इसके अलावा JPSC और JSSC की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इन सुधारों के लिए IIT-ISM धनबाद, IIM रांची और XLRI जमशेदपुर से सुझाव लिए जाएंगे।

ED की जांच और CID की गिरफ्तारी से विवाद और बढ़ा

सोमवार को विरोध-प्रदर्शन और तेज हो गया, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई भर्ती परीक्षाओं, खासकर JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू कर दी।

वहीं, झारखंड CID ने कथित अनियमितताओं के मामले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते को गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में CID की ओर से गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है।

इससे पहले जांच एजेंसी ने रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद में कुल 18 ठिकानों पर छापेमारी की थी।

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महिला आरक्षण पर राहुल गांधी का रिजिजू को जवाब, बोले- 2023 का कानून बिना शर्त लागू करें

kiren rijiju and rahul gandhi on women reservation

राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि तीन साल बाद भी कानून लागू क्यों नहीं हुआ और इसे परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है। ALSO READ: IIT दिल्ली में PM मोदी का छात्रों को मंत्र, ‘जिंदगी की परीक्षा में सब आउट ऑफ सिलेबस’, चुनौतियों से मत घबराना
 

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि रिजिजू जी, संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर यह कौन जानता होगा – महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ। सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं? 2023 का क़ानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के। ALSO READ: 'क्या हम Gen Z की नब्ज नहीं पकड़ पाए?' राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' पर शशि थरूर का बड़ा बयान

 

राहुल के किस बयान ने रिजिजू को दी उम्मीद?

इससे पहले शनिवार को राहुल गांधी द्वारा महिलाओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात किए जाने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने की चुनौती दी थी। राहुल गांधी ने अपने वीडियो में कहा था कि देश की राजनीति का मकसद 'लोगों को यह समझाना होना चाहिए कि महिलाओं की अभिव्यक्ति के बिना हमारा देश अधूरा और पिछड़ा हुआ है। रिजिजू ने राहुल गांधी के इस बयान को कांग्रेस की ओर से एक सकारात्मक संदेश बताया।

 

राहुल गांधी के बयान पर रिजिजू ने क्या प्रतिक्रिया दी?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की ओर से एक सकारात्मक संदेश लगता है। राहुल गांधी जी की महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव साफ दिख रहा है। अब, मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करेगी।

 

गौरतलब है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन वे परिसीमन की प्रक्रिया का विरोध करते रहे हैं।

‘देश को आपकी जरूरत है…’, CJP प्रोटेस्ट के बाद PM मोदी का Gen Z को बड़ा संदेश

PM Modi: नई दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के बाद अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के युवाओं की क्षमता और ताकत पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को युवा पीढ़ी की जरूरत है। बता दें कि पीएम मोदी ने यह बात दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) के वार्षिक दीक्षांत समारोह में कही।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में छात्रों से कहा, “हमें आप पर भरोसा है, और देश को आपकी जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी की देश के प्रति जिम्मेदारी होती है और युवाओं के लक्ष्यों में देश का सर्वांगीण विकास शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप सभी जानते हैं कि हर पीढ़ी को अपने समय की खास चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है… अगले 30 से 35 सालों में आप जो कुछ भी करेंगे, उसका असर ‘विकसित भारत’ की ओर हमारे सफर पर पड़ेगा। इसलिए, आपके हर फैसले का आधार यह भी होना चाहिए कि इससे देश को क्या फायदा होगा? इससे देश की कौन-सी जरूरतें पूरी होंगी?”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि आज की तेजी से बदलती दुनिया में टेक्नोलॉजी अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग इन बदलावों के हिसाब से खुद को ढाल लेंगे, वे “आखिरकार जीतेंगे”।

उन्होंने कहा, “…ग्लोबल स्ट्रैटेजिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ग्लोबल पावर बैलेंस हर पल बदल रहा है, और इसकी मुख्य वजह टेक्नोलॉजी में हो रही तेजी से तरक्की है। कोई भी पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि अगले 20 या 30 सालों में दुनिया कैसी दिखेगी… दुनिया, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और प्रोफेशन, सभी में बदलाव आएंगे। लेकिन इन सबके बीच एक बात याद रखें: जो लोग सीखते रहेंगे, वे ही सफल होंगे।”

प्रधानमंत्री के संबोधन में Gen Z की झलक

स्काईरूट के विक्रम-1 रॉकेट के सफल लॉन्च का जिक्र करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने युवाओं को अपना योगदान देने के लिए कई रास्ते खोले हैं।

उन्होंने कहा, “हमने ऐसे कई रास्ते खोले हैं जिनसे हमारे युवा योगदान दे सकते हैं। नए सेक्टर खुले हैं। मैंने पहले भी स्पेस सेक्टर के बारे में बात की थी। आज वही स्पेस सेक्टर हमारे युवाओं के लिए आसमान की ऊंचाइयों को छूने का जरिया बन गया है।”

अपने संबोधन में Gen Z वाली बात जोड़ते हुए पीएम मोदी ने कहा: “आज हमारे युवा कह रहे हैं, ‘अपने परिवार में रॉकेट बनाने वाला मैं पहला व्यक्ति हूं’। आज हमारे युवा रॉकेट लॉन्च कर रहे हैं।”

पीएम मोदी ने आगे कहा कि देश का ड्रोन सेक्टर भी तेजी से बढ़ रहा है। आज ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ तकनीक के तौर पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर दवाइयां पहुंचाने जैसे जरूरी कामों में भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल से युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और यह सेक्टर आने वाले समय में देश की तरक्की में अहम भूमिका निभा सकता है।

बता दें कि पीएम मोदी का यह संबोधन ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में NEET-UG 2026 से जुड़े पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP ने विरोध-प्रदर्शन किया था। इस विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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Gen Z की अनोखी नौकरी वाली मांग ने छेड़ी बहस, IITian फाउंडर ने बताया क्यों कैंडिडेट को किया सिलेक्ट

नौकरी के इंटरव्यू में कैंडिडेट आमतौर पर सैलरी, छुट्टियों, वर्क फ्रॉम होम और जॉब रोल से जुड़ी बातें पूछते हैं। लेकिन नोएडा के एक फाउंडर के सामने एक उम्मीदवार ने ऐसी मांग रख दी, जिसने इंटरव्यू का माहौल ही बदल दिया। कैंडिडेट ने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि उसे हर दोपहर 30 मिनट की नींद लेने की जरूरत होगी, क्योंकि इससे उसकी productivity बेहतर होती है। हैरानी की बात यह थी कि उसने यह बात न तो मजाक में कही और न ही किसी झिझक के साथ।

फाउंडर नितिन वर्मा के मुताबिक, उम्मीदवार ने अपनी इस जरूरत को ऐसे रखा जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। पहली प्रतिक्रिया में उन्हें इंटरव्यू खत्म करने का ख्याल आया, लेकिन बाद में उन्होंने इस मांग को एक अलग नजरिए से देखने का फैसला किया। सवाल यह था कि क्या कर्मचारी के काम के नतीजे अच्छे हों तो 30 मिनट की nap वास्तव में बड़ी समस्या है?

 ‘हर दोपहर मुझे Nap चाहिए’

IIT-backed कंपनी के फाउंडर और CEO नितिन वर्मा ने LinkedIn पर इस इंटरव्यू का अनुभव शेयर किया। उनके मुताबिक, उम्मीदवार ने पूरी गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ कहा कि दोपहर की 30 मिनट की झपकी उसके काम को बेहतर बनाती है। वर्मा ने बताया कि उम्मीदवार ने यह बात ऐसे रखी, जैसे वह सैलरी पर बातचीत कर रहा हो। उनका पहला विचार इंटरव्यू खत्म करने का था, लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि क्या यह मांग वाकई इतनी गलत है।

फाउंडर को पसंद आई कैंडिडेट की बेबाकी

नितिन वर्मा ने माना कि छोटी दोपहर की नींद से फोकस, एनर्जी और याददाश्त बेहतर हो सकती है। उन्होंने मजाक में कहा कि कॉरपोरेट ऑफिस में दोपहर की मीटिंग्स के दौरान कई लोग वैसे भी ऊंघते नजर आते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि यह उम्मीदवार अपनी जरूरत खुलकर बता रहा था। फाउंडर के मुताबिक, ज्यादातर लोग इंटरव्यू में खुद को कंपनी की पसंद के हिसाब से पेश करते हैं, जबकि इस कैंडिडेट ने साफ बताया कि वह किस तरह काम करने पर सबसे ज्यादा productive रहता है।

‘मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम कब सोते हो’

वर्मा ने कैंडिडेट को फिक्स 30 मिनट की Nap Break देने के बजाय साफ कहा कि उन्हें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि कर्मचारी कब आराम करता है। उनके लिए जरूरी यह है कि सौंपा गया काम समय पर पूरा हो। यानी शर्त सीधी थी, काम पूरा करो, तो घंटे गिनने की जरूरत नहीं; काम नहीं हुआ तो कोई Nap मदद नहीं करेगी।

आखिरकार मिल गई नौकरी

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि कैंडिडेट को नौकरी मिल गई। फाउंडर ने कहा कि उसकी Nap की मांग असली मुद्दा नहीं थी। उन्हें उसकी ईमानदारी और आत्मविश्वास ने प्रभावित किया। इस घटना ने उन्हें यह सोचने पर भी मजबूर किया कि क्या आधुनिक वर्कप्लेस में कर्मचारियों की productivity को ऑफिस में बिताए घंटों से मापा जाना चाहिए या उनके actual results से।

LinkedIn पर लोगों ने क्या कहा?

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसे बदलते workplace culture का संकेत बताया। कुछ ने कहा कि अगर कर्मचारी अपना काम पूरा कर रहा है तो उसे अपनी working style में थोड़ी आजादी मिलनी चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने Gen Z के इस अंदाज पर मजाक भी किया। एक यूजर ने कहा कि Gen Z को पता है कि जरूरी benefits के लिए negotiation कैसे करनी है।

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