IIT रुड़की के हरकिरत सिंह की अनोखी करियर जर्नी, पहले फ्रीलांसिंग से ₹80 लाख कमाए, अब ₹4 करोड़ का पैकेज

हर कोई लाखों के पैकेज वाली नौकरी पाने का सपना देखता है, लेकिन IIT रुड़की के हरकिरत सिंह ने नौकरी मिलने के बाद ही अपना रास्ता बदलने का फैसला किया। Goldman Sachs जैसी बड़ी कंपनी छोड़कर उन्होंने फ्रीलांसिंग में हाथ आजमाया और रिपोर्ट्स के मुताबिक, सालाना 80 लाख रुपये तक कमाए। अब Gather में उनकी रिमोट सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी का पैकेज करीब 4 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। उनकी कहानी सिर्फ मोटी सैलरी तक पहुंचने की नहीं, बल्कि करियर में अलग रास्ता चुनने के फैसले की भी है। हालांकि, इतनी बड़ी कमाई की खबर के बीच यह समझना भी जरूरी है कि हर किसी के लिए ऐसा सफर एक जैसा नहीं होता।

IIT रुड़की से पढ़ाई, Google के प्रोग्राम में भी लिया हिस्सा

हरकिरत सिंह ने 2018 में IIT रुड़की से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था। उनकी प्रोफेशनल यात्रा में Google Summer of Code में दो बार हिस्सा लेना भी शामिल रहा। इसके अलावा, उन्होंने FAANG कंपनियों, फाइनेंस सेक्टर और स्टार्टअप्स के साथ काम करके अपना अनुभव बढ़ाया। इस तरह उनका करियर सिर्फ एक कंपनी या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा।

Goldman Sachs छोड़ी, फ्रीलांसिंग को बनाया कमाई का जरिया

आमतौर पर बड़ी वित्तीय कंपनी में नौकरी मिलना युवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। लेकिन हरकिरत ने महामारी से ठीक पहले इस नौकरी को छोड़कर दूसरे अवसर तलाशने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने फ्रीलांसिंग के जरिए काम करना शुरू किया।

बताया जाता है कि इस दौरान उनकी सालाना कमाई करीब 80 लाख रुपये तक पहुंच गई। अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम करने और तकनीकी कौशल का इस्तेमाल करने से उन्हें वैश्विक बाजार में अवसर तलाशने का मौका मिला।

अब ₹4 करोड़ के रिमोट पैकेज की चर्चा

हरकिरत सिंह को लेकर साझा की जा रही जानकारी के मुताबिक, उन्हें Gather में रिमोट सॉफ्टवेयर डेवलपर की भूमिका मिली, जिसके लिए सालाना पैकेज करीब 4 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। हालांकि, इस रकम और नौकरी की शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

सोशल मीडिया पर छिड़ी नौकरी को लेकर बहस

उनकी कहानी पर कुछ यूजर्स ने तकनीकी कौशल और लगातार सीखते रहने की अहमियत बताई। वहीं, एक यूजर ने कहा कि फ्रेशर्स और जूनियर कर्मचारियों के लिए रिमोट नौकरी पाना आज भी मुश्किल है, जबकि अनुभवी लोगों को अपेक्षाकृत ज्यादा अवसर मिलते हैं।

हरकिरत की यात्रा यही दिखाती है कि करियर में नए रास्ते तलाशना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसके लिए कौशल, अनुभव और जोखिम उठाने की तैयारी भी जरूरी है।

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IIIT Delhi Placements 2026: दिल्ली के इस संस्थान के बीटेक छात्र को मिला ऐसा धाकड़ पैकेज, देखते रह गए IIT-NIT के छात्र

IIIT Delhi Placements 2026: बीटेक में प्रवेश लेने वाले ज्यादातर छात्रों की यही चाहत होती है कि कोर्स पूरा होने के साथ ही उन्हें किसी मल्टीनेशनल कंपनी में तगड़े सैलरी पैकेज पर नौकरी मिल जाए। देश के प्रतिष्ठित आईआईटी या एनआईटी संस्थानों से बीटेक करने वाले छात्रों का ये सपना पूरा होता भी है। लेकिन इस साल दिल्ली के इंजीनियरिंग संस्थान IIIT Delhi ने बाजी मार ली है। यहां के एक बीटेक छात्र को 1.22 करोड़ रुपये से ज्यादा का सालाना पैकेज ऑफर किया गया है। इसके अलावा, इंस्टीट्यूट के कई कोर्स में प्लेसमेंट के आंकड़े भी अच्छे रहे हैं। आइए जानते हैं दिल्ली के इस इंस्टीट्यूट और उसके प्लेसमेंट आंकड़ों के बारे में

प्लेसमेंट के दौरान यहां के B.Tech छात्रों को अलग-अलग श्रेणी में ऑफर मिले हैं। इनमें 372 A+ ऑफर शामिल थे, जिनका सालाना CTC 12.50 लाख रुपये था। इसके अलावा, 222 A कैटेगरी के ऑफर मिले, जिनका CTC 7 लाख रुपये से ज्यादा और 12 लाख रुपये से कम था। वहीं, 88 B कैटेगरी के ऑफर ऐसे थे, जिनका CTC 7 लाख रुपये से कम था। इनमें से 60 ऑफर बाद में A या A+ कैटेगरी में अपग्रेड हो गए।

IIIT दिल्ली के B.Tech छात्र ने झटका तगड़ा पैकेज

इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) दिल्ली के B.Tech प्लेसमेंट 2026 में सबसे ज्यादा सालाना पैकेज 122.76 लाख रुपये यानी करीब 1.22 करोड़ रुपये रहा। इंस्टीट्यूट की ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार, M.Tech के लिए सबसे ज्यादा पैकेज 38.38 लाख रुपये सालाना दर्ज किया गया। वहीं, फॉरेन प्लेसमेंट में सबसे ज्यादा पैकेज 48.65 लाख रुपये रहा।

क्या कहते हैं प्लेसमेंट 2026 के आंकड़े ?

IIIT दिल्ली के प्लेसमेंट आंकड़ों के अनुसार, इस साल कुल 868 ऑफर दर्ज किए गए। इनमें 682 फुल टाइम जॉब ऑफर और 186 समर इंटर्नशिप ऑफर शामिल थे। वहीं, B.Tech छात्रों का औसत सालाना सैलरी पैकेज 20.77 लाख रुपये रहा, जबकि M.Tech छात्रों का औसत पैकेज 17.05 लाख रुपये दर्ज किया गया। इसके अलावा, इंस्टीट्यूट का कुल एवरेज पैकेज 19.59 लाख रुपये रहा।

प्लेसमेंट के दौरान छात्रों को भारत और विदेश, दोनों जगह नौकरी के ऑफर मिले। आंकड़ों में 679 भारतीय और 2 विदेशी ऑफर दर्ज किए गए। हालांकि, इन ऑफरों की संख्या और कुल प्लेसमेंट ऑफरों की संख्या में अंतर है, क्योंकि प्लेसमेंट के आंकड़ों में अलग-अलग तरह के ऑफर शामिल हो सकते हैं।

सीएसई में सबसे ज्यादा 98.26 % रहा प्लेसमेंट

IIIT दिल्ली में अलग-अलग बीटेक ब्रांच में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) में सबसे ज्यादा 98.26% छात्रों को प्लेसमेंट मिला। वहीं, CSAM में 94.55% और CSSS में 92.68% छात्रों को नौकरी के ऑफर मिले। इसके अलावा, CSAI ब्रांच में प्लेसमेंट प्रतिशत 92% और CSB में 91.11% रहा। EVE में 87.50% छात्रों को प्लेसमेंट मिला, जबकि ECE में यह आंकड़ा 69.70% दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि इंस्टीट्यूट में कंप्यूटर साइंस से जुड़ी कई ब्रांच का प्लेसमेंट प्रदर्शन बेहतर रहा।

क्यों खास है IIIT दिल्ली?

आईआईआईटी दिल्ली के प्लेसमेंट 2026 के आंकड़े बताते हैं कि यहां बीटेक के एक छात्र को 1.22 करोड़ रुपये से ज्यादा का पैकेज मिला, जबकि बीटेक का औसत पैकेज 20.77 लाख रुपये रहा। इसलिए इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने की योजना बना रहे छात्रों के लिए यह इंस्टीट्यूट भी विचार करने लायक विकल्प हो सकता है। हालांकि, एडमिशन से पहले अपनी पसंद की ब्रांच और उससे जुड़े प्लेसमेंट के आंकड़ों की जांच जरूर करनी चाहिए।

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कैंसर के इलाज और वैक्सीन रिसर्च के लिए आईआईटी कानपुर और भारत बायोटेक ने उठाया बड़ा कदम, मिलकर करेंगे ये काम

कैंसर, वैक्सीन और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज के लिए देश में ही नई तकनीक तैयार करने की तैयारी चल रही है। IIT कानपुर और भारत बायोटेक इस दिशा में साथ काम करेंगे। दोनों इंस्टिट्यूट के साइंटिस्ट बीमारी की पहचान, जांच और इलाज से जुड़ी तकनीक पर रिसर्च करेंगे।

दोनों संस्थानों के बीच जल्द समझौता हो सकता है। इसका मकसद देश में ही नई मेडिकल तकनीक तैयार करना है। आगे इन तकनीकों का इस्तेमाल मरीजों के इलाज में किया जा सकेगा।

कैंसर और वैक्सीन पर रहेगा खास ध्यान

IIT कानपुर और भारत बायोटेक के बीच हुई मीटिंग में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें कैंसर, वैक्सीन और ऑटोइम्यून बीमारियों पर खास ध्यान दिया गया। साइंटिस्ट इन बीमारियों को समझने पर काम करेंगे। इसके साथ नए इलाज और तकनीक भी तैयार की जाएगी।

बायोमेडिकल और हेल्थ टेक्नोलॉजी पर IIT कानपुर में पहले से काम हो रहा है। भारत बायोटेक के साथ जुड़ने से इस काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

IIT कानपुर पहुंचे भारत बायोटेक के ऑफिसर

IIT कानपुर की इंडस्ट्री कनेक्ट सीरीज के तहत यह मीटिंग हुई। इसमें भारत बायोटेक के प्रेजिडेंट (R&D) डॉ. के. मुरुगप्पन शामिल हुए। IIT कानपुर के शिक्षक और साइंटिस्ट भी मीटिंग में मौजूद रहे। मीटिंग में वैक्सीन, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों पर चर्चा हुई।

मीटिंग के बाद डॉ. मुरुगप्पन ने IIT कानपुर की रिसर्च सुविधाएं देखीं। इस दौरान डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. जयधरन राव और जैविक विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख प्रो. अश्वनी कुमार ठाकुर समेत कई साइंटिस्ट मौजूद रहे।

गंगवाल स्कूल में भी हो रही मेडिकल रिसर्च

IIT कानपुर के गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में कई फील्ड पर रिसर्च चल रही है। इनमें हेल्थकेयर में एआई, टेलीमेडिसिन और रोबोटिक्स शामिल हैं। यहां बीमारी की शुरुआती जांच और मेटाबॉलिक बीमारियों पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा इन्फेक्शन, न्यूरोसाइंस, न्यूरोटेक्नोलॉजी और मेंटल हेल्थ पर रिसर्च की जा रही है।

IIT कानपुर और भारत बायोटेक के साथ काम करने से नई वैक्सीन और जांच की बेहतर तकनीक बन सकती है। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद मिलेगी। साथ ही देश में मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

JEE Advanced 2026: एससी और एसटी कैटिगरी के क्वालिफिकेशन रेट में बड़ा उछाल, महिलाओं का 6 साल का रिकॉर्ड टूटा

JEE Advanced 2026: जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट (JEE) एडवांस्ड देश के प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी में प्रवेश का जरिया माना जाता है। यह देश की सबसे मुश्किल प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक है। हाल ही में इस परीक्षा में पिछले कुछ सालों में छात्रों की हिस्सेदारी से जुड़े आंकड़े जारी किए गए हैं। IIT रुड़की ने शनिवार को जॉइंट इम्प्लीमेंटेशन कमेटी (JIC) की रिपोर्ट जारी की। इसके अनुसार, JEE एडवांस्ड 2026 में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उम्मीदवारों का क्वालिफिकेशन रेट तेजी से बढ़ा है। वहीं, सभी श्रेणियों में क्वालिफाइंग मार्क्स बढ़े हें। इसमें शामिल छह साल के समय में महिलाओं ने भी अपना सबसे ज्यादा क्वालिफिकेशन रेट दर्ज किया।

इस साल एससी क्वालिफिकेशन रेट 50.16% रहा, जो 2025 में 40.41% था, यानी 9.8 परसेंटेज पॉइंट्स की बढ़ोतरी। ST कैंडिडेट्स के लिए, यह रेट 33.99% से बढ़कर 42.14% हो गया, यानी 8.1 परसेंटेज पॉइंट्स की बढ़ोतरी। महिलाओं का क्वालिफिकेशन रेट पिछले साल के 21.7% से बढ़कर 23.4% हो गया, जो 2021 और 2026 के बीच सबसे ज़्यादा है।

इसी समय, जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स के लिए क्वालिफिकेशन रेट 3.2 परसेंट पॉइंट गिरकर 39.8% हो गया, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग-नॉन-क्रीमी लेयर (OBC-NCL) कैंडिडेट्स के लिए रेट 0.7 परसेंट पॉइंट गिरकर 17.5% हो गया। इस साल ज़्यादा क्वालिफाइंग मार्क्स के बावजूद ये बदलाव हुए।

SC, ST कैंडिडेट्स के लिए JEE एडवांस्ड 2026 क्वालिफिकेशन रेट बढ़ा

कुल 56,880 कैंडिडेट्स ने JEE एडवांस्ड 2026 के लिए क्वालिफाई किया। इसमें 15,856 SC कैंडिडेट्स और 6,379 ST कैंडिडेट्स शामिल थे, जबकि 2025 में यह संख्या क्रमशः 12,499 और 5,008 थी। दूसरे शब्दों में, इस साल रजिस्टर्ड हर दो में से लगभग एक SC कैंडिडेट क्वालिफाई हुआ, जबकि पांच में से दो से ज़्यादा ST कैंडिडेट्स क्वालिफाइंग लिमिट पार कर पाए।

श्रेणी 2025 क्वालिफिकेशन रेट 2026 क्वालिफिकेशन रेट बदलाव

SC 40.41% 50.16% +9.8 परसेंटेज पॉइंट्स

ST 33.99% 42.14% +8.1 परसेंटेज पॉइंट्स

जनरल 43% 39.8% -3.2 परसेंटेज पॉइंट्स

OBC-NCL 18.2% 17.5% -0.7 परसेंटेज पॉइंट्स

महिलाएं 21.7% 23.4% +1.7 परसेंटेज पॉइंट्स

सामान्य श्रेणी के सफल प्रतियोगियों की संख्या 2025 में 16,154 से थोड़ी कम होकर इस साल 15,883 हो गई। हालांकि, EWS क्वालिफायर 6,291 से बढ़कर 6,377 हो गए, हालांकि क्वालिफिकेशन रेट पिछले साल के 21.6% की तुलना में लगभग 21% पर स्थिर रहा। OBC-NCL क्वालिफायर 12,606 से घटकर 12,385 हो गए, और क्वालिफिकेशन रेट 18.2% से घटकर 17.5% हो गया।

JEE एडवांस्ड 2026 में सभी श्रेणी में कट-ऑफ बढ़ा

कुछ कैटेगरी के लिए क्वालिफिकेशन रेट में बढ़ोतरी कम क्वालिफाइंग मार्क्स की वजह से नहीं हुई। JEE एडवांस्ड 2026 में क्वालिफाइंग लिमिट सभी कैटेगरी में बढ़ी। कॉमन रैंक लिस्ट (CRL) कट-ऑफ 2025 में 74 से बढ़कर 360 में से 92 मार्क्स हो गई, यानी 18 मार्क्स की बढ़ोतरी।

कैटेगरी 2025 क्वालिफाइंग मार्क्स 2026 क्वालिफाइंग मार्क्स

CRL 74 92

OBC-NCL और GEN-EWS 66 82

SC और ST 37 46

CRL, कैंडिडेट के टोटल मार्क्स के आधार पर ओवरऑल मेरिट लिस्ट है, चाहे कैटेगरी कोई भी हो। JIC रिपोर्ट में बताया गया है कि हर कैटेगरी में मौजूद सीटों की संख्या के मुकाबले कम से कम दोगुने कैंडिडेट क्वालिफाई करें, यह पक्का करने के लिए जहा जरूरी था, क्वालिफाइंग क्राइटेरिया में ढील दी गई थी। रिपोर्ट में कैटेगरी के हिसाब से बदलावों को खास तौर पर कैंडिडेट की परफॉर्मेंस या कैंडिडेट पूल की बनावट में अंतर के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया।

महिलाओं की सफलता दर छह साल के शीर्ष पर

महिलाओं ने भी परीक्षा में काफी सुधार किया। JEE एडवांस्ड 2026 के लिए पंजीकरण कराने वाली 43,112 महिलाओं में से 40,562 दोनों पेपर में शामिल हुईं और 10,107 क्वालिफाई हुईं। सफलता दर 2025 में 21.7% से बढ़कर 23.4% हो गया, जिसका मतलब है कि इस साल पंजीकृत चार में से लगभग एक महिला कैंडिडेट क्वालिफाई हुई।

महिलाओं का पंजीकरण 2025 में दर्ज 43,413 से थोड़ा कम था। इसके बावजूद, रिपोर्ट में शामिल 2021-2026 के समय में क्वालिफिकेशन रेट अपने शीर्ष पर पहुंच गया।

फाइनल IIT सीट अलॉटमेंट में 3,814 महिलाएं थीं, जो अलॉट की गई 18,861 सीटों का लगभग 20.2% थीं। इनमें से 37 महिलाओं को जेंडर-न्यूट्रल पूल से सीटें मिलीं, जबकि 3,777 को सिर्फ महिलाओं के लिए सुपरन्यूमरेरी सीटों से एडमिशन मिला।

IIT में लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए 2018 में फीमेल सुपरन्यूमरेरी सीट सिस्टम शुरू किया गया था। यह पुरुष कैंडिडेट्स के लिए उपलब्ध सीटों की संख्या को कम किए बिना महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें देता है। इसका मकसद महिलाओं का प्रतिनिधित्म 20% तक ले जाना है। स्कीम शुरू होने से पहले, IIT में BTech स्टूडेंट्स में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 7% से 9% थी। बाद में 2020 तक उनकी हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 20% हो गई और उसी लेवल के आसपास बनी हुई है।

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Diwali 2026 Dates: कब मनाया जाएगा दिवाली का त्योहार? जानें दिवाली से लेकर चित्रगुप्त पूजा तक की सही तारीख और पूजा मुहूर्त

Diwali 2026 Dates: हिंदू धर्म में दिवाली का पर्व विशेष स्थान रखता है। यह पूरे साल में आने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। लोग इसके लिए काफी पहले से तैयारियां करते हैं। दिवाली का पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। यह पांच दिनों का त्योहार है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और चित्रगुप्त पूजा या भाई दूज के साथ संपन्न होता है। घर, बाजार, आस-पड़ोस हर तरफ इस त्योहार की तैयारियों की धूम रहती है। आइए जानें इस साल ये पंच दिवसीय पर्व कब से शुरू होगा और किस दिन मनाई जाएगी दिवाली? दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

दिवाली 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक अमावस्या तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर को दिन में 11 बजकर 27 मिनट पर होगा और यह तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक मान्य रहेगी। उदयातिथि और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त के आधार पर दिवाली का त्योहार 8 नवंबर दिन रविवार को है।

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

8 नवंबर को दिवाली की लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त 1 घंटा 56 मिनट का रहेगा। आप शाम में 05 बजकर 54 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 50 मिनट के बीच लक्ष्मी पूजा विधि विधान से कर सकते हैं।

आयुष्मान योग में मनेगी दिवाली

इस बार की दिवाली पर आयुष्मान् योग बन रहा है, जो पूरे दिन रहेगा। दिवाली पर आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर 9 नवंबर को 03:03 ए एम तक मान्य है। उसके बाद से सौभाग्य का प्रारंभ होगा। आयुष्मान् योग व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है। दिवाली पर स्वाति नक्षत्र है, जो प्रात:काल से लेकर पूरी रात तक है।

धनतेरस 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाते हैं। इस साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक है। उदयातिथि के आधार पर त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर को है, लेकिन धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। उस दिन ही प्रदोष व्रत की पूजा भी होगी। 6 नवंबर को धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम में 6 बजकर 02 मिनट से शाम 7 बजकर 57 मिनट तक है।

दिवाली कैलेंडर 2026

6 नवंबर, शुक्रवार : धनतेरस, धन त्रयोदशी

7 नवंबर, शनिवार : काली चौदस, हनुमान पूजा

8 नवंबर, रविवार : दिवाली, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा, काली पूजा

10 नवंबर, मंगलवार : गोवर्धन पूजा, अन्नकूट

11 नवंबर, बुधवार : भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त पूजा

IIT कानपुर बनाएगा देश का पहला ‘सन सिम्युलेटर’, ऐसे परखे जाएंगे सोलर पैनल

IIT कानपुर बनाएगा देश का पहला ‘सन सिम्युलेटर’, ऐसे परखे जाएंगे सोलर पैनल

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी कानपुर देश की पहली ऐसी सुविधा विकसित करने जा रहा है, जहां कृत्रिम रूप से सूर्य की रोशनी तैयार कर फोटोवोल्टिक सिस्टम की जांच की जा सकेगी। संस्थान ने बेंगलुरु की नेक्स पीवी एनर्जी सिस्टम के साथ समझौता किया है। इस परियोजना में आईआईटी कानपुर के रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी पार्क फाउंडेशन (टेक्नोपार्क) की सदस्य कंपनी इनवेरिएंस ऑटोमेशन भी सहयोग करेगी। इसके तहत कंसंट्रेटेड फोटोवोल्टिक (सीपीवी) सिस्टम के लिए देश का पहला सन सिम्युलेटर विकसित किया जाएगा। इससे सीपीवी मॉड्यूल को बाजार में उतारने से पहले उनकी क्षमता और गुणवत्ता की जांच देश में ही हो सकेगी।

सूरज की रोशनी जैसी होगी कृत्रिम रोशनी

इस परियोजना का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर आशीष गर्ग और उनकी टीम कर रही है। सन सिम्युलेटर ऐसी तकनीक है, जिसमें प्रयोगशाला के अंदर सूर्य की रोशनी जैसी परिस्थितियां तैयार की जाती हैं। इससे मौसम या दिन के समय पर निर्भर हुए बिना सोलर सिस्टम का परीक्षण किया जा सकता है। अभी सीपीवी सिस्टम के परीक्षण के लिए देश में इस स्तर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। नई सुविधा तैयार होने के बाद उत्पादन के अंतिम चरण में ही मॉड्यूल की क्षमता और गुणवत्ता को परखा जा सकेगा।

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसी तकनीक और परीक्षण सुविधाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास है कि शोध को प्रयोगशाला तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे उद्योग के साथ जोड़कर वास्तविक उपयोग तक पहुंचाया जाए। यह परियोजना सौर ऊर्जा के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और देश में ही परीक्षण की क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

छोटे सेल, ज्यादा क्षमता वाला सीपीवी सिस्टम

प्रोफेसर आशीष गर्ग ने बताया कि सीपीवी सिस्टम सामान्य सोलर पैनल से अलग तरीके से काम करता है। इसमें लेंस की मदद से सूर्य की रोशनी को छोटे और ज्यादा क्षमता वाले सोलर सेल पर केंद्रित किया जाता है। इन सेल में अर्धचालक की कई परतें होती हैं और हर परत सूर्य के प्रकाश के अलग-अलग हिस्से को इस्तेमाल करती है।

उन्होंने बताया कि सीपीवी में सोलर सेल पैनल के करीब 0.1 प्रतिशत हिस्से में ही होते हैं। यानी सेल के लिए जरूरी जगह सामान्य सोलर तकनीक की तुलना में काफी कम हो जाती है। हालांकि ऐसी तकनीक के लिए तेज और सीधी धूप वाले इलाके ज्यादा उपयुक्त होते हैं।

2070 के नेट जीरो लक्ष्य में मददगार

प्रोफेसर आशीष गर्ग ने कहा कि भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है और इसे हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा को अपनाना होगा। इसके लिए केवल सोलर पैनल बनाना ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और क्षमता जांचने की देश में मजबूत व्यवस्था भी जरूरी है। सीपीवी सिम्युलेटर इसी दिशा में काम करेगा।

नेक्स पीवी एनर्जी सिस्टम के निदेशक चिदानंद मूर्ति आर ने कहा कि देश में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सोलर सेल के उत्पादन और परीक्षण की क्षमता को भी बढ़ाना जरूरी है। देश में सीपीवी सिम्युलेटर उपलब्ध होने से बड़े स्तर पर उत्पादन के दौरान गुणवत्ता जांच आसान होगी और सीपीवी तकनीक को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

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जिस IIT में पढ़ाई की, उसी की विदेश में बड़ी जिम्मेदारी संभाली प्रीति अघलायम ने!

किसी इंस्टीटूशन में स्टूडेंट रहने के बाद फिर वहीं की बड़ी जिम्मेदारी संभालना अपने आप में खास सफर है। प्रीति अघलायम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वह 1991 में IIT मद्रास में केमिकल इंजीनियरिंग की स्टूडेंट रहकर पढ़ाई कर चुकी है। अब तीन दशक से ज्यादा समय बाद वह इसी इंस्टिट्यूट के इंटरनेशनल कैंपस IIT मद्रास जंजीबार की डायरेक्टर-इन-चार्ज बनीं है। जुलाई 2023 में मिली इस जिम्मेदारी के साथ वह IIT लीड करने वाली पहली महिला बनीं।

प्रीति अघलायम की साइंस में रुचि बचपन से थी। उनका परिवार भी पढ़ाई और शिक्षा से जुड़ा हुआ था। उनके पिता केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे, जबकि उनकी मां ने दूसरी जिम्मेदारियों के साथ PhD की। अपनी मां को पढ़ाई और एकेडेमिक वर्क जारी रखते देखकर प्रीति को भी हायर एजुकेशन के लिए इंस्पिरेशन मिली।

MIT से IIT Bombay तक का सफर

BTech के बाद अमेरिका चली गईं – यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर से MS और UMass Amherst से PhD (2000)

MIT में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च की

2002 में भारत लौटीं और IIT बॉम्बे में प्रोफेसर बनीं

2010 में वापस अपने होम IIT – IIT मद्रास में प्रोफेसर बनीं

रिसर्च: Underground Coal Gasification, ऑटोमोबाइल से होने वाले NOx प्रदूषण को कम करना

IIT बॉम्बे से एक्सपीरियंस लेकर फिर IIT मद्रास लौटीं

अमेरिका में पढ़ाई और काम का एक्सपीरियंस लेने के बाद प्रीति भारत लौटीं और IIT बॉम्बे में फैकल्टी के तौर पर अपना एकेडेमिक करियर शुरू किया। साल 2010 में वह फिर से IIT मद्रास से जुड़ गईं। यहां उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग पढ़ाने के साथ रिसर्च पर भी काम किया।

IIT मद्रास में उनके रिसर्च के कई एरिया रहे। इनमें अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन, गाड़ियों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड को कम करना, रिएक्टर मॉडलिंग और जटिल केमिकल रिएक्शन को समझना शामिल है। उनके एकेडेमिक वर्क को इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियर्स जैसे इंस्टिट्यूट से भी पहचान मिली।

जंजीबार में मिली नई जिम्मेदारी

प्रीति अघलायम के करियर में बड़ा बदलाव तब आया, जब जुलाई 2023 में उन्हें IIT मद्रास जंजीबार का डायरेक्टर-इन-चार्ज बनाया गया। यह भारत के बाहर IIT का पहला इंटरनेशनल कैंपस था, इसलिए यहां काम करना उनके लिए एक नई चुनौती थी। IIT मद्रास के डायरेक्टर वी कामकोटि ने कहा था -“हम सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को फॉलो कर रहे हैं और जेंडर बैलेंस लाना चाहते हैं, इसलिए प्रीति पहली महिला IIT डायरेक्टर हैं।” पहले बैच में जंजीबार, तंजानिया, भारत और नेपाल से स्टूडेंट पहुंचे।

फिलहाल प्रीति अघलायम IIT मद्रास के ऑफिस ऑफ ग्लोबल एंगेजमेंट की डीन हैं। वह IIT मद्रास जंजीबार से अपनी पहले की डायरेक्टर और फैकल्टी की जिम्मेदारियों के कारण भी जुड़ी रही हैं।

IAS से इस्तीफा देकर पॉलिटिक्स करने का ऐलान करने वाली दिव्या मित्तल कितना पढ़ी-लिखी हैं? इनकी पूरी प्रोफाइल जानिए

पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा के बाद अब राजनीति की राह चुनने का ऐलान किया है। करीब 13 साल तक IAS के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक शुरुआत करने की बात कही है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उन्होंने लोगों से जुड़ने और उनके मुद्दों को उठाने की बात कही। दिव्या मित्तल के राजनीति में आने की खबर के साथ उनकी पढ़ाई और अब तक के सफर को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। आखिर IAS बनने से पहले उन्होंने क्या पढ़ाई की और उनका करियर कैसा रहा? आइए जानते हैं।

IIT दिल्ली से शुरू हुई पढ़ाई

दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से Engineering Physics में BTech किया। उनके LinkedIn प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने 2001 से 2005 के बीच यह पढ़ाई की। ग्रेजुएशन में उनका CGPA 9.07/10 था और वह अपने विभाग में दूसरे स्थान पर रही थीं। इसके बाद उन्होंने IIM बेंगलुरु से MBA किया। 2005 से 2007 के बीच की गई इस पढ़ाई में भी उनका प्रदर्शन अच्छा रहा। उपलब्ध प्रोफाइल जानकारी के अनुसार, वह अपनी MBA बैच के टॉप 5 फीसदी छात्रों में शामिल थीं।

पढ़ाई के बाद लंदन में नौकरी

MBA पूरा करने के बाद दिव्या मित्तल ने विदेश में कॉर्पोरेट करियर शुरू किया। उन्होंने लंदन में JP Morgan में Associate के तौर पर काम किया। अप्रैल 2007 से जुलाई 2008 तक उन्होंने वहां नौकरी की। इसके बाद उन्होंने कॉर्पोरेट करियर छोड़कर भारत लौटने और UPSC की तैयारी करने का फैसला किया।

UPSC में सफलता और IAS का सफर

दिव्या मित्तल ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की। रिपोर्टों के मुताबिक, अपने पहले प्रयास में वह IPS के लिए चुनी गईं और बाद के प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 68 हासिल कर IAS बनीं। वह 2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की अधिकारी रहीं। IAS के तौर पर उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। वह संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने NITI Aayog और उत्तर प्रदेश सरकार में भी अलग-अलग पदों पर काम किया।मिर्जापुर में उनके कार्यकाल के दौरान एक पहाड़ी गांव तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की पहल भी चर्चा में रही।

MIT से भी की पढ़ाई

दिव्या मित्तल ने नौकरी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने 2019 से 2020 के बीच MITx से Data, Economics and Development Policy में MicroMasters किया। यानी उनकी शैक्षणिक यात्रा इंजीनियरिंग से शुरू होकर मैनेजमेंट, डेटा और डेवलपमेंट पॉलिसी तक पहुंची।

IAS के बाद अब राजनीति में एंट्री

अगस्त 2026 में दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की IAS सेवा के बाद इस्तीफा दे दिया। अब उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी अगली पारी राजनीति में होगी।

उन्होंने कहा है कि वह उत्तर प्रदेश से राजनीतिक शुरुआत करेंगी और किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं जाएंगी। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने शिक्षक, डॉक्टर, किसान, मजदूर, वकील और छात्रों से जुड़ने की अपील की है।

IIT दिल्ली की पढ़ाई, IIM बेंगलुरु का MBA, लंदन की नौकरी, UPSC में सफलता और करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद दिव्या मित्तल अब अपने करियर का एक नया अध्याय शुरू करने जा रही हैं।

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अब नहीं लीक होगा कोई पेपर! धांधली रोकने के लिए एक्शन में नंदन नीलेकणि का टास्क फोर्स, NTA में बड़े बदलाव की तैयारी

NTA Exam Reforms Updates: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और हाई-टेक बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित नंदन नीलेकणि हाई-पावर्ड टास्क फोर्स (HPTF) ने अपनी रणनीतिक बैठकों का दौर तेज कर दिया है।

अधिकारियों के अनुसार, जुलाई 2026 में गठित इस विशेष टास्क फोर्स ने पूर्व इसरो (ISRO) प्रमुख के राधाकृष्णन के साथ गहन परामर्श किया है। गौरतलब है कि के राधाकृष्णन ने 2024 के NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व किया था।

राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट और समीक्षा का दायरा

वर्ष 2024 में NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के बाद जून 2024 में इसरो के पूर्व अध्यक्ष के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई थी। इस समिति ने अक्टूबर 2024 में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें परीक्षा प्रणाली में सुधार, डाटा सुरक्षा और NTA के पुनर्गठन को लेकर 101 महत्वपूर्ण सिफारिशें शामिल थीं। बाद में इन सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए केंद्र सरकार ने एक ‘हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी’ बनाई, जिसके प्रमुख भी के राधाकृष्णन ही बनाए गए।

सुप्रीम कोर्ट भी केंद्र सरकार से राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन और नीलेकणि टास्क फोर्स की अब तक की प्रगति पर अपडेट मांग चुका है। नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाली नई टास्क फोर्स अब राधाकृष्णन समिति की पूर्व सिफारिशों की समीक्षा कर रही है ताकि देश में परीक्षा सुधारों के अगले चरण को लागू किया जा सके।

7-सदस्यीय नीलेकणि टास्क फोर्स

UIDAI के पूर्व अध्यक्ष और आईटी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली इस 7-सदस्यीय समिति में देश की तकनीक, सुरक्षा और शिक्षा नीति से जुड़ी दिग्गज हस्तियों को शामिल किया गया है:

  1. नंदन नीलेकणि(पूर्व अध्यक्ष, UIDAI)- अध्यक्ष
  2. के राधाकृष्णन(पूर्व अध्यक्ष, ISRO)- विशेष परामर्शदाता
  3. एस सोमनाथ(पूर्व अध्यक्ष, ISRO)- सदस्य
  4. तपन डेका(पूर्व निदेशक, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB))- सदस्य
  5. वी कामाकोटी(निदेशक, IIT मद्रास)- सदस्य
  6. अनीता करवाल(पूर्व शिक्षा सचिव)- सदस्य
  7. अमृत लाल मीणा(लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ)- सदस्य

टेक्नोलॉजी आधारित सुधार और सुरक्षा पर रहेगा पूरा फोकस

श्रम और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस टास्क फोर्स का मुख्य जोर परीक्षाओं को साइबर थ्रेट्स और तकनीकी सेंधमारी से बचाना है।

तकनीक का आधुनिक इस्तेमाल: टास्क फोर्स की सिफारिशें अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर आधारित होंगी ताकि परीक्षा प्रणाली मजबूत, पारदर्शी, सुरक्षित और भविष्य के अनुकूल बन सके।

NTA के दायरे को सीमित करना: पूर्व की कमेटी ने यह सुझाव दिया था कि NTA की भूमिका को मुख्य रूप से केवल उच्च शिक्षा की प्रवेश परीक्षाओं तक सीमित किया जाए और इसके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर व गवर्नेंस को मजबूत किया जाए।

हितधारकों से राय: टास्क फोर्स ने NTA के महानिदेशक और उच्च शिक्षा विभाग के अलावा छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, विषय विशेषज्ञों और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों से सुझाव मांगे हैं।

ISRO Roadmap: 2028 तक लॉन्च होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल, इसरो का मून प्लान जानिए

ISRO Roadmap Bharatiya Antariksh Station:  चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब स्पेस टेक्नोलॉजी के एक नए और महत्वाकांक्षी युग में प्रवेश करने की तैयारी में है। भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब सिर्फ रॉकेट लॉन्चिंग और उपग्रह भेजने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका मुख्य फोकस अब मानव अंतरिक्ष उड़ान (ह्यूमन स्पेसफ्लाइट), भारत का अपना स्पेस स्टेशन, चंद्रमा से मिट्टी व पत्थरों के सैंपल वापस लाना और साल 2040 तक चांद पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेजने पर है।

IIT दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ISRO के चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ वी नारायणन ने भारत के भावी अंतरिक्ष रोडमैप, आगामी बड़े मिशनों और इस क्षेत्र में हो रहे ऐतिहासिक बदलावों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।

440 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप कर रहे हैं काम

भारत के स्पेस सेक्टर में सबसे बड़ा बदलाव सरकारी संस्थानों के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप की बढ़ती भागीदारी है। डॉ नारायणन के कहा कि 2020 में स्पेस सेक्टर रिफॉर्म्स के बाद देश में करीब 440 स्पेस स्टार्टअप चल रहे हैं। कंपनियों को सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल, स्पेस एप्लीकेशन और दूसरी नई टेक्नोलॉजी से जुड़े एरिया में काम करने के मौके बढ़े हैं। नतीजतन भारत का प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम भी ISRO के बड़े मिशन के साथ-साथ डेवलप हो रहा है।

भारत ने खुद डेवलप किया क्रायोजेनिक टेक्नोलॉजी

स्पेस सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता का एक उदाहरण देते हुए डॉ नारायणन ने क्रायोजेनिक टेक्नोलॉजी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1990 के दशक में भारत को यह टेक्नोलॉजी नहीं दी गई थी। इसके बाद ISRO ने इस टेक्नोलॉजी को देश में ही डेवलप करने पर काम किया। भारत ने अब तीन क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम डेवलप कर लिए हैं। इसका मतलब है कि भारत ने अब एक ऐसी टेक्नोलॉजी में अपनी क्षमताएं डेवलप कर ली हैं जिसके लिए पहले दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। यह क्षमता भविष्य के बड़े और भारी स्पेस मिशन के लिए भी बहुत जरूरी होगी।

अब चंद्रयान-4 की तैयारी

23 अगस्त 2023 भारत के स्पेस प्रोग्राम के लिए एक अहम दिन था। चंद्रयान-3 ने चांद के साउथ पोलर रीजन के पास सक्सेसफुली सॉफ्ट-लैंडिंग की। इसके बाद ISRO अब चांद के सैंपल धरती पर वापस लाने की दिशा में काम कर रहा है। डॉ नारायणन ने चंद्रयान-4 को इस बड़े लक्ष्य से जोड़ा और बताया कि इसका मकसद चांद के सैंपल निकालकर उन्हें धरती पर वापस लाना है। इसके अलावा भारत ने स्पेस में डॉकिंग टेक्नोलॉजी को सक्सेसफुली दिखाया। इस टेक्नोलॉजी को भविष्य के स्पेस स्टेशन और दूसरे मुश्किल मिशन के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।

गगनयान के बाद भारतीय स्पेस स्टेशन

भारत का अगला बड़ा कदम इंसानों को स्पेस में भेजना है। ISRO गगनयान मिशन के तहत इंसानों को स्पेसफ्लाइट भेजने की तैयारी कर रहा है। अभी बिना पायलट वाली उड़ानों के जरिए मिशन की तैयारियों को आगे बढ़ा रहा है। भारत अपना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन भी डेवलप कर रहा है। डॉ. नारायणन के मुताबिक, स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 तक लॉन्च करने का प्लान है। आने वाले सालों में दूसरे मॉड्यूल भी जोड़े जाएंगे। इसका लक्ष्य 2035 तक इसे डेवलप करना है। यह भारत के लिए न सिर्प एक साइंटिफिक मिशन होगा बल्कि स्पेस में लंबे समय तक रिसर्च और टेक्नोलॉजी करने की क्षमता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

2040 तक चंद्रमा पर इंसान भेजने का प्लान

ISRO का रोडमैप सिर्फ लूनर मिशन तक ही खत्म नहीं होता है। भारत 2040 तक चांद पर ह्यूमन मिशन की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके अलावा वीनस मिशन और नेक्स्ट-जेनरेशन लॉन्च व्हीकल पर भी काम चल रहा है। डॉ नारायणन ने कहा कि ISRO एक नेक्स्ट-जेनरेशन लॉन्च व्हीकल पर काम कर रहा है जो लो अर्थ ऑर्बिट में 30,000 किलोग्राम तक वजन ले जा सकता है। पार्शियली रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल सिस्टम पर भी काम चल रहा है।

स्पेस इकोनॉमी के लिए क्यों अहम है यह मिशन?

डॉ नारायणन ने कहा कि गगनयान, स्पेस स्टेशन, चंद्रयान-4, और भविष्य के बड़े लॉन्च व्हीकल सिर्फ साइंटिफिक उपलब्धियां नहीं हैं। वे प्राइवेट कंपनियों के लिए नई टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और काम के नए एरिया भी शुरू कर सकते हैं।जैसे-जैसे स्पेस मि न की संख्या और कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ेगी वैसे ही लॉन्च सिस्टम, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, स्पेस कम्युनिकेशन, डेटा और दूसरे स्पेस एप्लीकेशन से जुड़े एरिया में भी एक्टिविटी बढ़ेगी। यही वजह है कि स्पेस सेक्टर में सुधारों के बाद भारत में स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या को अहम माना जा रहा है। आने वाले सालों में ISRO के सरकारी मिशन के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों की भूमिका कैसे बढ़ती है, यह भारत की स्पेस इकॉनमी के विकास के लिए बहुत जरूरी होगा।

(दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट)

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