कौन हैं एमके दास? जिन्होंने PM मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन के लिए झोंक दी अपनी पूरी ताकत

Who is Manoj Kumar Das

Manoj Kumar Das (MK Das) : यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की परीक्षा पास करने वाला हर सिविल सर्वेंट ऊंचे पदों पर पहुंचकर देश सेवा करने का सपना देखता है। बिहार के दरभंगा के मूल निवासी और 1990 बैच के IAS अधिकारी मनोज कुमार दास (एमके दास) की कहानी भी कुछ ऐसी ही प्रेरणादायी है। दरभंगा में अपनी 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने प्रतिष्ठित IIT खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस में डिग्री हासिल की और इसके बाद वे भारतीय सिविल सेवा में शामिल हो गए।

 

2. गुजरात सरकार के नए 'श्री विश्वसनीय'

नवंबर 2025 में गुजरात के मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार संभालने के बाद एमके दास प्रशासनिक गलियारों में सरकार के नए 'श्री विश्वसनीय' (Mr. Dependable) बनकर उभरे हैं। पहले ऐसा माना जा रहा था कि लंबे समय तक आर्थिक और नीतिगत विभाग संभालने वाले दास के लिए सामाजिक क्षेत्र एक बड़ी चुनौती साबित होगा। हालांकि शासन की गहरी समझ और सरकार की राजनीतिक प्राथमिकताओं को सही ढंग से पहचानकर उन्होंने प्रशासनिक तंत्र पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।

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3. आलोचकों को जवाब और सामाजिक सुधार

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार में मुख्य प्रशासनिक प्रमुख के रूप में सेवा दे रहे एमके दास ने पिछले 9 महीनों में अपने आलोचकों को गलत साबित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण (Vision) के अनुरूप वे न केवल नीतिगत ढांचे को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि सामाजिक क्षेत्र के कल्याणकारी कार्यक्रमों को भी नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं। विशेष रूप से गुजरात में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (Dropouts) की दर को कम करने और बाल कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए उन्होंने एक निर्णायक अभियान शुरू किया है।

 

4. एमके दास का प्रगतिशील '3E' फॉर्मूला

एमके दास का मानना है कि आज के बच्चे वर्ष 2047 के 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे राज्य के श्रमिकों के बच्चों तक भी 'शाला प्रवेशोत्सव' जैसे प्रगतिशील कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पहुंचाने में कामयाब रहे हैं। वे शासन चलाने के लिए खास '3E' फॉर्मूले पर भरोसा करते हैं, जिसका अर्थ है Effective (असरदार), Efficient (कुशल) और Easy (आसान)।

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5. फील्ड ऑफिसर से कलेक्टर तक का सफर

उन्होंने अपने सिविल सर्विस करियर की शुरुआत गुजरात के डभोई में SDM के रूप में की थी। इसके बाद, जब 2 अक्टूबर 1997 को जूनागढ़ से पोरबंदर जिला अलग हुआ, तो वे वहां के पहले जिला कलेक्टर बने। इसके अलावा, उन्होंने बनासकांठा और सूरत जैसे महत्वपूर्ण जिलों में कलेक्टर के रूप में और सूरत व वडोदरा नगर निगम में म्यूनिसिपल कमिश्नर के रूप में यादगार सेवाएं दी हैं। वडोदरा में कमिश्नर के तौर पर उनका 5 साल का कार्यकाल आज भी लोग बड़े आदर के साथ याद करते हैं।

 

6. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और CMO में दोहरी सेवा

राज्य स्तर के अलावा एमके दास ने केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिसमें गृह मंत्रालय के तहत जम्मू-कश्मीर मामलों के निदेशक (Director) के रूप में उनकी भूमिका प्रमुख है। गुजरात में उन्होंने उद्योग, राजस्व, बंदरगाह, परिवहन, पंचायत और गृह जैसे कई संवेदनशील विभागों में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के रूप में कार्य किया है।

इसके अलावा, उन्हें दो बार मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में सेवा करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने 2017-2021 और 2024-2025 के दौरान मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

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7. एमके दास की व्यक्तिगत प्रोफाइल और तकनीक का उपयोग

जन्म तिथि : 20 दिसंबर, 1966

सेवा प्रवेश वर्ष : 20 अगस्त, 1990

मुख्य सचिव के रूप में पदभार ग्रहण : 1 नवंबर, 2025

 

वे प्रशासनिक कार्यों में टेक्नोलॉजी के व्यापक उपयोग के हिमायती हैं। उनके मार्गदर्शन में गुजरात में अधिकांश सरकारी प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाकर पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया गया है और आवश्यक दस्तावेजों की संख्या में भी भारी कटौती की गई है।

 

8. पॉलिसी फ्रेमवर्क और भविष्य का प्रशासनिक नेतृत्व

गुजरात को देश का अग्रणी डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब बनाने के लिए हाल ही में 'विकसित गुजरात डेटा सेंटर नीति 2026-29' घोषित की गई है। इसके अतिरिक्त उनके नेतृत्व में पिछले 9 महीनों में 4 अन्य महत्वपूर्ण नीतियां भी लागू की गई हैं:

 

गुजरात ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति 2025-30

गुजरात एकीकृत नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2025

विकसित गुजरात औद्योगिक नीति 2026

गुजरात निर्यात नीति 2025

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सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि एमके दास ने प्रशासन पर इस कदर पकड़ बनाई है कि उन्होंने लंबे समय तक सुपर-ब्यूरोक्रेट रहे के. कैलाशनाथन की कमी महसूस नहीं होने दी। उनका कार्यकाल दिसंबर 2026 के अंत में समाप्त होने जा रहा है और वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 से ठीक पहले उनकी सेवानिवृत्ति नजदीक होने के कारण 1991 बैच की वरिष्ठ IAS अधिकारी जयंती एस. रवि को उनका संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है।


Manoj Kumar Das

IIT की डिग्री और हाई पैकेज के बाद भी क्यों छोड़ी नौकरी? पत्नी संग पहाड़ों में रहने लगा शख्स

कभी बड़े शहरों की भागदौड़ और कॉर्पोरेट करियर का हिस्सा रहे IIT कानपुर के पूर्व छात्र अर्जव मोदी ने अपनी जिंदगी को एक नए नजरिए से देखना शुरू किया। अच्छी नौकरी, बेहतर कमाई और शहर की सुविधाओं के बीच भी उन्हें एक अलग तरह के संतुलन की तलाश थी। इसी तलाश ने उन्हें हिमाचल प्रदेश के छोटे से पहाड़ी कस्बे बीर तक पहुंचाया, जहां उन्होंने अपनी पत्नी सिमरन चौधरी के साथ एक अलग जीवनशैली अपनाई।

यहां की शांत वादियां, धीमी रफ्तार और प्रकृति के करीब रहने का अनुभव उनके लिए किसी बदलाव से कम नहीं रहा। अर्जव और सिमरन की यह कहानी अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग करियर, खुशी और जिंदगी की प्राथमिकताओं को लेकर नए सिरे से सोच रहे हैं।

कम कमाई लेकिन ज्यादा खुशी का एहसास

शहरों में अच्छी कमाई और सुविधाओं के बावजूद अर्जव को महसूस हुआ कि जीवन में संतुष्टि की कमी है। अब वह फ्रीलांस राइटिंग और कंटेंट का काम करते हैं, जबकि उनकी पत्नी रिमोट जॉब जारी रखे हुए हैं। दोनों की संयुक्त आय पहले से आधी से भी कम हो गई है, लेकिन उनका कहना है कि वे अब ज्यादा खुश और संतुष्ट हैं।

95 किलो से 72 किलो तक, बदली सिर्फ जिंदगी नहीं सोच भी

अर्जव ने लिंक्डइन पर अपने सफर को साझा करते हुए बताया कि 2021 में IIT से निकलने के बाद वह बेंगलुरु में तेज-तर्रार कॉर्पोरेट लाइफ जी रहे थे। उस समय उनका वजन 95 किलो था। 2026 में वह पहाड़ों में सादा जीवन जी रहे हैं, वजन करीब 72 किलो है और कम कमाई के बावजूद खुद को ज्यादा बेहतर महसूस करते हैं।

पहाड़ों ने सिखाया ‘घर’ का असली मतलब

सिमरन ने बताया कि बीर में रहने के बाद उनकी जीवनशैली पूरी तरह बदल गई है। वे ज्यादातर खाना घर पर बनाते हैं, कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटते हैं और प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल लगभग छोड़ चुके हैं। उनके अनुसार, पहाड़ों ने सिखाया कि घर सिर्फ खूबसूरत जगह या महंगे सामान से नहीं बनता, बल्कि उस जगह से जुड़ने और उसमें योगदान देने से बनता है।

शहर की दौड़ बनाम पहाड़ों की शांति

अर्जव ने अपनी पोस्ट में दो तरह की जिंदगी की तुलना की। एक तरफ महानगर में रहने वाला युवा प्रोफेशनल है, जिसकी कमाई ज्यादा है, लेकिन लगातार दूसरों से तुलना, करियर का दबाव और अकेलेपन का सामना करना पड़ता है।

दूसरी तरफ पहाड़ी इलाके में रहने वाला व्यक्ति है, जिसकी आय कम हो सकती है, लेकिन वह प्रकृति, रिश्तों और रोजमर्रा के छोटे-छोटे पलों का आनंद लेता है।

पहाड़ों में चले जाओ’ नहीं, सोच बदलने की बात

अर्जव ने साफ किया कि उनका मकसद सभी को शहर छोड़कर पहाड़ों में बसने की सलाह देना नहीं है। उनका संदेश सिर्फ इतना है कि जिंदगी की खुशी केवल ज्यादा कमाई या दूसरों से आगे निकलने में नहीं, बल्कि अपनी प्राथमिकताओं को समझने और संतुलन बनाने में भी है।

हर ऑटो ड्राइवर एक जैसा नहीं! बेंगलुरु के इस शख्स का अंदाज देख मुस्कुरा उठेंगे आप

Siddharth Saxena: कौन हैं सिद्धार्थ सक्सेना? जिन्होंने 26 साल की उम्र में एक दिन में कमाए 76.99 करोड़ रुपये!

Who is Siddharth Saxena: इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय टेक एंटरप्रेन्योर की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। इस शख्स का नाम है सिद्धार्थ सक्सेना। इन्होंने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने महज 26 साल की उम्र में एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर (करीब 76.99 करोड़ रुपये) की कमाई की थी। कंटेंट क्रिएटर विराज अला के साथ हुए एक स्ट्रीट इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने भारत के एक छोटे से शहर से अमेरिका में मल्टी-मिलियन डॉलर की कंपनियां खड़ी करने तक के अपने इस शानदार सफर के बारे में खुलकर बात की है। आइए जानते हैं कि कौन हैं सिद्धार्थ सक्सेना और उन्होंने यह मुकाम कैसे हासिल किया।

IIT कानपुर से की पढ़ाई, बोले- हार्वर्ड से 20 गुना मुश्किल है एडमिशन

विराज अला को दिए इंटरव्यू में सिद्धार्थ सक्सेना ने अपनी पढ़ाई और करियर के बारे में कई दिलचस्प बातें साझा कीं। सिद्धार्थ ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बी. टेक की डिग्री हासिल की है। वह साल 2019 में आईआईटी कानपुर से ग्रेजुएट हुए थे। इंटरव्यू के दौरान सिद्धार्थ ने दावा किया कि आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में दाखिला पाना अमेरिका की प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलने से 20 गुना ज्यादा कठिन है।

एक दिन में ₹76.99 करोड़ की कमाई का सच

जब इंटरव्यूअर विराज अला ने सिद्धार्थ से पूछा कि उन्होंने एक साल में अधिकतम कितनी कमाई की है, तो सिद्धार्थ ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि उन्होंने एक ही दिन में 8 मिलियन डॉलर (लगभग 76.99 करोड़ रुपये) कमाए हैं। इस पर जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब यह है कि वह रातों-रात करोड़पति बन गए, तो उन्होंने कहा कि हां, कुछ ऐसा ही कह सकते हैं। उन्होंने महज 26 साल की उम्र में यह मुकाम हासिल कर लिया था। सिद्धार्थ ने बताया कि जब वह 16 साल के थे तब उन्होंने अपने भविष्य में इस तरह की सफलता की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी।

कैसा रहा है सिद्धार्थ का करियर और बिजनेस?

आईआईटी कानपुर से 2019 में पास आउट होने के बाद सिद्धार्थ ने मशीन लर्निंग इंजीनियर के रूप में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम किया। उनके करियर के सफर में Envestnet, Yodlee, Wadhwani AI जैसी कंपनियों और एल्टो यूनिवर्सिटी, जूमियो कॉर्पोरेशन जैसे संस्थान रहे।

Merlin और Thine के को-फाउंडर

नौकरी के बाद सिद्धार्थ ने एंटरप्रेन्योरशिप की राह चुनी। साल 2022 में सिद्धार्थ ने अपने आईआईटी कानपुर के बैचमेट्स प्रत्यूष राय और शीर्षेंदु सरकार के साथ मिलकर Merlin नाम की एक एआई-पावर्ड क्रोम एक्सटेंशन कंपनी की सह-स्थापना की। रिपोर्ट्स के मुताबिक आज इस कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 50 मिलियन डॉलर (करीब 418 करोड़ रुपये से अधिक) है। इसके अलावा सिद्धार्थ एक दूसरे स्टार्टअप Thine के भी को-फाउंडर हैं।

स्टार्टअप्स को लेकर क्या है उनकी सोच?

स्टार्टअप और बिजनेस को लेकर सिद्धार्थ का मानना है कि भारत में सीमित संसाधनों की वजह से बहुत से लोग स्कार्सिटी माइंडसेट (कमी की सोच/सुरक्षित चलने की मानसिकता) के साथ बड़े होते हैं। उनका कहना है कि सफल उद्यमी बनने के लिए इस मानसिकता को बदलकर अबंडेंस माइंडसेट (प्रचुरता की सोच) अपनाना बेहद जरूरी है, जहां लोग खुलकर जोखिम लेने और नए अवसरों की तलाश करने के लिए तैयार रहें।

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सिद्धार्थ ने दोनों देशों के वर्क-कल्चर की तुलना करते हुए कहा कि अमेरिका में लोग अक्सर काम को इसलिए चुनते हैं क्योंकि वे उसे पसंद करते हैं जबकि भारत में कई बार लोग मजबूरी या जरूरत की वजह से काम करते हैं।

E20 Petrol: एथेनॉल वाले पेट्रोल से इंजन खराब होता है या नहीं? IIT कानपुर की रिसर्च ने दिया बड़ा जवाब

E20 Petrol Row: देश भर में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (E20) के रोलआउट को लेकर वाहन मालिकों के मन में कई तरह की चिंताएं और सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एथेनॉल वाले पेट्रोल से गाड़ी का इंजन खराब हो जाता है? इस मामले पर चल रही तमाम बहसों और आशंकाओं के बीच देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर के रिसर्चर ने एक बड़ा और राहत देने वाला दावा किया है।

संस्थान के शोधकर्ताओं का कहना है कि उनकी स्टडी में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में कोई खास गिरावट नहीं पाई गई है। इस बात के भी कोई सबूत नहीं मिले हैं कि E20 फ्यूल मौजूदा या पुरानी गाड़ियों के इंजन को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाता है।

माइलेज पर क्या होता है असर? IIT कानपुर की रिसर्च

आपको बता दें कि हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में माइलेज 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि इसके फायदे इस मामूली नुकसान से कहीं अधिक हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस पर आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के इंजन रिसर्च लेबोरेटरी के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज कराना ने बताया है कि आईआईटी कानपुर में की गई रिसर्च के मुताबित E20 फ्यूल के इस्तेमाल से माइलेज में होने वाली कमी वास्तव में 5 प्रतिशत से भी कम है।

ध्रुव राज कराना ने स्पष्ट किया कि माइलेज में आने वाली 5 प्रतिशत तक की यह कमी फ्यूल के अलावा दूसरी वजहों से भी हो सकती है। अगर सामान्य या शुद्ध पेट्रोल के साथ भी लगातार दो बार बैक टू बैक टेस्ट किए जाएं तब भी इस तरह के परिणाम आ सकते हैं।

माइलेज कम होने की असली वजह: IIT की स्टडी के मुताबिक माइलेज में होने वाला कोई भी बदलाव फ्यूल से ज्यादा ड्राइवर की ड्राइविंग के तरीके, सड़क की स्थिति और गाड़ी के मेंटनेंस पर निर्भर करता है।

क्या सच में खराब होता है इंजन?

प्रोजेक्ट साइंटिस्ट ध्रुव राज कराना ने बताया कि काफी डिटेल्ड और एक्सटेंसिव टेस्टिंग से यह साबित हुआ है कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से इंजन को कोई नुकसान, जंग या अन्य तकनीकी समस्याएं नहीं होती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिनमें दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियां खराब हो रही हैं।

कराना ने इन दावों को वैज्ञानिक रूप से निराधार बताया और गाड़ी चलाने वालों को सलाह दी कि वे इंटरनेट पर बिना किसी वेरिफिकेशन के साझा की जाने वाली पोस्ट पर भरोसा करने के बजाय अपनी गाड़ी के मैनुफैक्चरर के मैनुअल और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करें।

E85 फ्यूल का भी हो चुका है सफल परीक्षण

आईआईटी कानपुर की यह रिसर्च प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में चल रही है। वो इस इंजन रिसर्च लेबोरेटरी के प्रमुख हैं। उनकी टीम लंबे समय से एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल पर व्यापक शोध कर रही है। टीम ने E85 फ्यूल (जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल होता है) का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। हालांकि ध्रुव राज कराना ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने उच्च स्तर के मिश्रण के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए इंजनों और उनके अनुकूल ईंधन प्रणालियों की जरूरत होती है।

मंत्रालय ने कहा- ‘यह अधिक स्वच्छ और बेहतर फ्यूल है’

एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम को लेकर हो रही आलोचनाओं का जवाब देने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने हाल ही में एक विस्तृत Q&A डॉक्युमेंट जारी किया था। मंत्रालय के मुताबिक E20 पेट्रोल, E10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ, उच्च गुणवत्ता वाला और अधिक कुशल ईंधन है। सरकार ने इसे देश में लागू करने से पहले वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण किए हैं, वाहन निर्माताओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया है और देश के भीतर एथेनॉल के उत्पादन को बढ़ाया है। इससे कार्बन उत्सर्जन काफी कम होता है, जो पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है।

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Netweb Share Price: डेटा सेंटर स्टॉक के लिए ₹5000 का टारगेट, BofA ने खरीदने की सलाह दी

Netweb Share Price: विदेशी ब्रोकरेज BofA Securities ने पहली बार डेटा सेंटर कंपनी Netweb Technologies पर कवरेज शुरू की है। ब्रोकरेज ने शेयर को ‘Buy’ रेटिंग दी है। साथ ही ₹5,000 का टारगेट प्राइस तय किया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 14% की संभावित तेजी दिखाता है।

AI से मिल सकता है बड़ा फायदा

BofA का मानना है कि भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है। इसका फायदा Netweb Technologies को मिल सकता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, कंपनी इस मौके का फायदा उठाने की मजबूत स्थिति में है।

रिपोर्ट के मुताबिक, Netweb की सबसे बड़ी ताकत NVIDIA के साथ 15 साल पुरानी साझेदारी है। कंपनी की सुपरकंप्यूटिंग में अच्छी पकड़ है। सरकारी ग्राहकों के साथ भी उसके लंबे समय से मजबूत रिश्ते हैं। यही बातें उसे दूसरी कंपनियों से अलग बनाती हैं।

आगे भी तेज ग्रोथ की उम्मीद

Netweb ने पिछले कुछ सालों में सुपरकंप्यूटिंग बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की है। FY20 में उसका मार्केट शेयर सिर्फ 2% था। FY26 तक यह बढ़कर 9% हो गया।

BofA का कहना है कि जैसे-जैसे कंपनी का कारोबार बढ़ेगा, उसकी कमाई भी तेजी से बढ़ सकती है। ज्यादा बिक्री होने से लागत पर बेहतर नियंत्रण रहेगा। इससे कंपनी ऊंची महंगाई के दौर में भी अपनी मुनाफेदारी बनाए रख सकती है। ब्रोकरेज ने FY26 से FY29 के बीच कंपनी के रेवेन्यू में 40% CAGR की उम्मीद जताई है।

Netweb Technologies का शेयर मंगलवार को 0.11% की गिरावट के साथ 4,395.10 पर बंद हुआ। इस साल अब तक यह शेयर 40% से ज्यादा चढ़ चुका है।

Netweb का बिजनेस क्या है?

Netweb Technologies हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC), AI सर्वर, सुपरकंप्यूटर, डेटा सेंटर और डेटा स्टोरेज सॉल्यूशंस बनाने वाली कंपनी है। कंपनी सरकार, रक्षा क्षेत्र, रिसर्च संस्थानों, IIT-IISc जैसे शैक्षणिक संस्थानों और बड़ी कंपनियों को एडवांस कंप्यूटिंग सिस्टम उपलब्ध कराती है।

यह ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से सर्वर, स्टोरेज, क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करती है। कंपनी का फोकस भारत में तेजी से बढ़ रहे AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर बाजार का फायदा उठाने पर है।

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CAT 2026 Notification: जल्द जारी किया जाएगा कैट 2026 का नोटिफिकेशन, यहां जानें आवेदन प्रक्रिया और परीक्षा पैटर्न

CAT 2026 Notification: भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) और भारतीय प्रौद्यागिकी संस्थान (IIT) में मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित किया जाने वाला कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। आईआईएम जल्द ही इसके लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर सकता है। इससे देश भर में मैनेजमेंट प्रोग्राम के लिए साल का एडमिशन साइकिल शुरू हो जाएगा। पिछले साल के ट्रेंड को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि कैट 2026 का नोटिफिकेशन जुलाई में जारी हो सकता है। पिछले साल कैट का विज्ञापन जुलाई में पब्लिश हुआ था।

बता दें, यह परीक्षा आईआईएम में एमबीए पाठ्यक्रम का मेन गेटवे है और कई दूसरे बिजनेस स्कूल भी प्रवेश के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। आईआईएम में प्रवेश के लिए कैट स्कोर एक जरूरी क्राइटेरिया है। हालांकि, अंतिम चयन के लिए शॉर्टलिस्ट कैंडिडेट की सूचि संबंधित आईआईएम की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, हर आईआईएम शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट को सीधे इंटरव्यू लेटर भेजेगा। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि देश के सभी आईआईएम और अन्य प्रबंधन संस्थानों के शॉर्टलिस्टिंग के क्राइटेरिया अलग-अलग होते हैं।

आईआईएम प्रवेश प्रक्रिया समझें

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, आईआईएम और अन्य प्रबंधन संस्थान अपने-अपने योग्यता मानदंड के आधार पर इंटरव्यू चरण के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करते हैं। यह एक-दूसरे से अलग हो सकते हैं। इस प्रक्रिया में राइटिंग एबिलिटी टेस्ट (WAT), ग्रुप डिस्कशन (GD) और पर्सनल इंटरव्यू (PI) शामिल हो सकते हैं।

कैट 2026 में परीक्षार्थियों का प्रदर्शन प्रवेश प्रक्रिया का एक जरूरी हिस्सा होगी। आईआईएम सहित सभी प्रमुख प्रबंधन संस्थान प्रवेश प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों पर उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग और रैंकिंग में कैंडिडेट्स का पिछला शैक्षिक प्रदर्शन, काम का अनुभव, जेंडर और एकेडमिक डाइवर्सिटी और इसी तरह के दूसरे इनपुट जैसे दूसरे फैक्टर्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रक्रिया, शैक्षिक कट-ऑफ और मूल्यांकन मानदंडों को दिया गया वेटेज अलग-अलग आईआईएम में अलग-अलग हो सकता है।

ज्यादातर आईआईएम इंटरव्यू और लिखित परीक्षा का समायोजन करते हैं। कुछ में ग्रुप एक्सरसाइज या अतिरिक्त टेस्ट भी शामिल होते हैं। हाल के साइकल में कई आईआईएम ने इन-पर्सन इंटरव्यू जारी रखे हैं जबकि कुछ ने इन्हें हाइब्रिड ऑप्शन के साथ पूरा किया है।

प्रवेश प्रक्रिया के लिए जरूरी डिटेल्स

पर्सनल डिटेल्स : आपको अपना नाम, जन्म की तारीख, जेंडर, कैटेगरी, स्कैन किए हुए पासपोर्ट-साइज फोटो और सिग्नेचर डालने होंगे।

शैक्षिक : 10वीं और 12वीं कक्षा की मार्कशीट या स्कोर और आपकी बैचलर डिग्री, और मास्टर या प्रोफेशनल डिग्री।

काम का अनुभव : उम्मीदवारों को कंपनी के नाम, पद और अवधि देने होंगे। इसमें समय के हिसाब से एम्प्लॉयमेंट ब्रेक या एग्जिट की डिटेल हो।

पाठ्यक्रम : कैंडिडेट्स को उन 21 हिस्सा लेने वाले आईआईएम में से खास पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम्स (PGP) और फेलो प्रोग्राम्स (FPM/PhD) चुनने होंगे जिनके लिए वे अप्लाई करना चाहते हैं, साथ ही पसंदीदा इंटरव्यू सिटी भी चुननी होगी।

परीक्षा शहर : आवेदकों को कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट लिखने के लिए प्राथमिकता के अनुसार पांच पसंदीदा परीक्षा शहर चुनने का ऑप्शन दिया जाएगा।

डिक्लेरेशन : परीक्षार्थियों को शर्तों से सहमत होना होगा, यह सत्यापित करना होगा कि दी गई सभी जानकारी सही है, और अपना सबमिशन फाइनल करने के लिए पंजीकरण शुल्क देना होगा।

कैट परीक्षा पैटर्न

कैट परीक्षा पैटर्न के तीन हिस्से होते हैं, वर्बल एबिलिटी और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन, डेटा इंटरप्रिटेशन और लॉजिकल रीजनिंग और क्वांटिटेटिव एबिलिटी। कैट 2026 देश भर के आईआईटी जैसे बड़े संस्थानों में एमबीए या पीजीडीएम में प्रवेश चाहने वाले उम्मीदवारों के लिए 120 मिनट का होता है।

CSIR UGC NET June 2026: csirnet.nta.nic.in पर जारी हुआ एडमिट कार्ड, पासवर्ड और एप्लिकेशन नंबर की मदद से करें डाउनलोड

कर्नाटक के गांव से निकल बिना IIT डिग्री के पृथ्वीराज ने NVIDIA में पाई 2.6 करोड़ की जॉब, जानिए कैसे किया मुमकिन

कर्नाटक के एक इंजीनियर की सफलता की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। चित्रदुर्ग के पास एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित NVIDIA में करीब 2.6 करोड़ रुपये सालाना के पैकेज वाली नौकरी हासिल की। वहीं उन्होंने ये उपलब्धि IIT डिग्री के बिना हासिल की है। ये कहानी पृथ्वीराज पी की है, जिनका बचपन कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले के कटमदेवरकोट गांव में बीता, जहां संसाधन और टेक्नोलॉजी सुविधाएं काफी सीमित थीं।

इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई और मेहनत के दम पर आगे बढ़ने का रास्ता बनाया। आज उनकी सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो छोटे शहर या गांव से निकलकर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना देखते हैं।

आईआईटी से नहीं की पढ़ाई

पृथ्वीराज पी ने किसी आईआईटी से नहीं, बल्कि बेंगलुरु की PES यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ नई तकनीक सीखने और अपने प्रैक्टिकल स्किल्स को बेहतर बनाने पर लगातार मेहनत की। इसी लगन और सीखने की इच्छा ने उन्हें आगे बढ़ने और टेक इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने में मदद की। पृथ्वीराज ने सफलता पाने के लिए किसी बड़े कोचिंग संस्थान या नामी कॉलेज के सहारे पर भरोसा नहीं किया।

उन्होंने ऑनलाइन कोर्स किए, इंटर्नशिप की, अपने खुद के प्रोजेक्ट्स पर काम किया और लगातार प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करते रहे। कई वर्षों की मेहनत से उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीप लर्निंग के क्षेत्र में अपनी अच्छी पकड़ बनाई, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।

NVIDIA में करते हैं काम

रिपोर्ट्स के अनुसार, पृथ्वीराज बाद में मास्टर डिग्री करने के लिए अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने एक टियर-3 यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। सीमित आर्थिक संसाधनों और कम मार्गदर्शन के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने लगातार अपनी तकनीकी कौशल को बेहतर बनाया और करियर में आगे बढ़ने के लिए मेहनत जारी रखी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार मेहनत और सीखने की लगन की बदौलत पृथ्वीराज ने NVIDIA की कठिन चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पार की। अब वह कंपनी के अमेरिका स्थित सांता क्लारा मुख्यालय में डीप लर्निंग से जुड़े सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर के रूप में काम कर रहे हैं और उनकी सालाना आय करीब 2.6 करोड़ रुपये बताई जाती है।

उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे लगातार सीखते रहें, धैर्य रखें और अपनी मेहनत पर भरोसा बनाए रखें, क्योंकि समर्पण से बड़े अवसर हासिल किए जा सकते हैं।