अब SIR के लिए नहीं लगाने होंगे ऑफिस के चक्कर! चुनाव आयोग का बड़ा फैसला

वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग ने शनिवार को वेरिफिकेशन प्रक्रिया में कुछ बदलावों का ऐलान किया। आयोग ने कहा कि इन कदमों का मकसद वोटरों के लिए जांच और जरूरी दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। ये फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की बैठक में लिया गया। आयोग के मुताबिक, इन बदलावों का मकसद मतदाताओं को अपने रिकॉर्ड की जांच और जरूरी प्रक्रिया पूरी करने में ज्यादा सुविधा देना है।

नहीं लगाना होगा BLO के चक्कर

आयोग ने कहा कि जिन वोटरों का रिकॉर्ड पुराने डेटा से मैच नहीं हो रहा है या जानकारी में कोई गलती है, उन्हें वेरिफिकेशन के लिए ऑफिस जाने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे लोगों के घर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) जाएंगे, जरूरी दस्तावेज लेंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। इससे वोटरों के लिए पूरी प्रक्रिया आसान हो जाएगी। चुनाव आयोग के नए नियमों के तहत सुनवाई की जरूरत केवल जरूरी मामलों में ही होगी और कोशिश रहेगी कि इसे ऑनलाइन पूरा किया जाए। अगर वोटर खुद मौजूद नहीं हो सकता, तो उसकी ओर से परिवार का कोई अधिकृत सदस्य भी सुनवाई में शामिल हो सकेगा।

SIR के लिए हेल्प डेस्क बनाने को कहा

चुनाव आयोग ने ऐसे मतदाताओं की मदद के लिए खास इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं, जिन्हें SIR की प्रक्रिया में परेशानी हो सकती है। इसके तहत जिला निर्वाचन अधिकारियों को विशेष कैंप और हेल्प डेस्क लगाने को कहा गया है। इन केंद्रों पर नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीब और बेघर मतदाताओं को जरूरी जानकारी और सहायता दी जाएगी, ताकि वे आसानी से वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी कर सकें।

बढ़ाई गई नोटिस की समयसीमा

चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR से जुड़े दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए समय बढ़ा दिया है। दिल्ली में अब 30 अक्टूबर 2026 तक क्लेम और ऑब्जेक्शन किए जा सकेंगे, वहीं उनका निपटारा 30 नवंबर तक होगा। महाराष्ट्र में लोग 12 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां दे सकेंगे और इनके निपटारे की आखिरी तारीख 10 नवंबर 2026 है। दोनों राज्यों को चुनाव आयोग ने SIR के एक ही चरण में शामिल किया है।

इन जगहों पर पूरा हुआ SIR

चुनाव आयोग के अनुसार, 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पूरा हो चुका है। अगर किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं है, तो वह लगातार अपडेट की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम जुड़वा सकता है। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी शामिल हैं। आयोग के वोटर पोर्टल पर पुराने वोटर रिकॉर्ड में नाम देखने और SIR से जुड़े नोटिस के जवाब में जरूरी दस्तावेज जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध है। SIR को लेकर सवालों के बीच चुनाव आयोग ने कहा कि इस प्रक्रिया से जुड़े फैसलों को सभी सदस्यों की मंजूरी मिली थी।

आयोग के मुताबिक, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR कराने का आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था। इसकी शुरुआत बिहार से हुई और बाद में प्रक्रिया को पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया गया।

ECINet सिस्टम की होगी समीक्षा

चुनाव आयोग ने ECINet सिस्टम की समीक्षा करने का फैसला लिया है, जिससे ये पता लगाया जा सके कि यह चुनावी नियमों के अनुसार सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं। इसके लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। ECINet के जरिए फिलहाल पुराने वोटर रिकॉर्ड देखने और SIR से जुड़े नोटिस का जवाब देने जैसे कई काम किए जा रहे हैं।

चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया और फॉर्म 6 से जुड़े नियमों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग के मुताबिक, SIR के दौरान फॉर्म 6 के साथ लगाए जाने वाले घोषणा पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने मान्य माना है। वहीं SIR के अलावा सामान्य अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए 1960 के नियमों के तहत तय फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।

इस राज्य के स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील में मिलेगी मछली! जानिए क्या है पूरी तैयारी

दक्षिण भारत के केंद्र शासित राज्य पुडुचेरी के सरकारी स्कूल के छात्रों को मिड-डे मील में मछली से बनी डिश खाने को मिल सकती है। राज्य सरकार के मत्स्य पालन मंत्रालय ने मछली परोसने का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया है। सरकारी स्कूल के छात्रों को मिड डे मील में नॉनवेज परोसने वाला लक्षद्वीप और केरल के बाद पुडुचेरी तीसरा राज्य होगा। यह योजना शुरुआत में राज्य के कुछ क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की जाएगी।

पुडुचेरी के मत्स्य पालन मंत्री के कार्यालय से जारी एक रिलीज में इस प्रस्ताव के बारे बताया गया है। यह प्रस्ताव विधानसभा में एक बैठक के दौरान रखा गया, जिसकी अध्यक्षता पब्लिक वर्क्स मिनिस्टर मल्लाडी कृष्ण राव ने की, जिनके पास फिशरीज और मछुआरों के कल्याण का भी पोर्टफोलियो है। इस बैठक में मरीन प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (MPEDA) के अध्यक्ष पी जवाहर और दूसरे लोग भी मौजूद थे। राव ने कहा कि यह पहल शुरू में पुडुचेरी और यनम इलाकों के कुछ स्कूलों में पायलट बेसिस पर शुरू की जाएगी।

केरल और लक्षद्वीप के बाद तीसरा राज्य होगा पुडुचेरी

पुडुचेरी ने 1930 में फ्रांसीसी प्रशासन के तहत स्कूलों में मिड-डे मील स्कीम शुरू की थी। छात्रों को अब तक अंडे दिए गए हैं, और इस केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी स्कूलों के मेन्यू में मछली पहली नॉन-वेज डिश होगी। पुडुचेरी के अलावा लक्षद्वीप में छात्रों को नियमित मिड डे मील में मछली परोसी जाती है। वहीं, केरल में कुछ स्कूलों में मछली और चिकन परोसा जाता है।

PM POSHAN स्कीम में 65,856 छात्र शामिल

आज, PM POSHAN स्कीम में प्री-प्राइमरी बच्चों के अलावा 438 सरकारी/सरकारी मदद वाले और प्राइवेट स्कूलों में एलकेजी से कक्षा 12 तक के 65,856 छात्र शामिल हैं। केंद्र सरकार कक्षा 8 तक के खर्च का 60% देती है, जबकि राज्य बाकी हिस्सा देता है। वरिष्ठ कक्षाओं के लिए, राज्य पूरा खर्च उठाता है।

बैठक में कई प्रस्ताव पेश किए गए

जवाहर ने समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक मौकों को बढ़ाने के लिए कई खास पहल का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि MPEDA ने पुडुचेरी इलाके के बहौर और कराईकल के पोलागाम इंडस्ट्रियल एस्टेट में खास मछली पालन पार्क बनाने और यनम इलाके में मिट्टी के केकड़े पालन के तरीकों को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि अथॉरिटी इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए ज़रूरी फाइनेंशियल मदद देगी।

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Sleeper Vande Bharat में सफर का सपना होगा पूरा? जानें दिल्ली-वाराणसी रूट, टाइमिंग और स्टॉपेज की पूरी जानकारी

भारतीय रेलवे यात्रियों के लिए एक बड़ी सुविधा लाने की तैयारी कर रहा है। नई दिल्ली और वाराणसी के बीच Sleeper Vande Bharat Express चलाने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्तावित ट्रेन रात में सफर कर यात्रियों को सुबह मंजिल तक पहुंचा सकती है। इस रूट में प्रयागराज और कानपुर जैसे बड़े शहर भी शामिल होंगे। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेन का ट्रायल जल्द शुरू होने की संभावना है और इसे दिवाली के आसपास चलाने का लक्ष्य रखा गया है। अगर योजना समय पर पूरी होती है, तो दिल्ली, प्रयागराज, कानपुर और वाराणसी के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को तेज और आरामदायक सफर का नया विकल्प मिल सकता है।

दिल्ली-वाराणसी के साथ प्रयागराज और कानपुर भी जुड़ेंगे

प्रस्तावित ट्रेन सिर्फ दिल्ली और वाराणसी के बीच नहीं दौड़ेगी। इसके रास्ते में प्रयागराज और कानपुर भी शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश के इन प्रमुख शहरों से बड़ी संख्या में यात्री दिल्ली और वाराणसी की यात्रा करते हैं। ऐसे में ट्रेन का रूट चार बड़े शहरों को एक साथ जोड़ने वाला होगा।

रात में चलेगी ट्रेन, सुबह पहुंचाएगी मंजिल तक

प्रस्तावित टाइमिंग के अनुसार, वाराणसी कैंट से ट्रेन रात 9:20 बजे रवाना होकर करीब 10:45 बजे प्रयागराज और 12:35 बजे कानपुर सेंट्रल पहुंचेगी। इसके बाद सुबह करीब 5 बजे नई दिल्ली पहुंचने का प्रस्ताव है। वापसी में भी नई दिल्ली से ट्रेन रात 9:20 बजे चलकर सुबह 5 बजे वाराणसी पहुंच सकती है। यानी यात्रियों को रात में सफर करने और सुबह अपनी मंजिल पर पहुंचने का विकल्प मिलेगा।

160 kmph तक पहुंच सकती है रफ्तार

Sleeper Vande Bharat को 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने की योजना है। हालांकि वास्तविक स्पीड ट्रैक की स्थिति, ट्रायल और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगी। रेलवे के Mission Raftaar के तहत ट्रैक और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार होने पर इस रूट पर सफर का समय कम करने में मदद मिल सकती है।

823 यात्रियों के लिए होगी जगह

प्रस्तावित ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे और इनमें करीब 823 यात्रियों के बैठने-सोने की क्षमता होगी। कोच की संभावित संरचना में 11 AC 3-टियर, चार AC 2-टियर और एक First AC कोच शामिल होंगे। ट्रेन के रखरखाव की जिम्मेदारी Northern Railway संभाल सकती है।

किराया कितना होगा? अभी इंतजार

ट्रेन की चर्चा और प्रस्तावित टाइमिंग सामने आने के बावजूद अभी किराया, ट्रेन नंबर और नियमित संचालन की आधिकारिक तारीख तय नहीं हुई है। ट्रेन की अंतिम गति और शेड्यूल भी ट्रायल के बाद स्पष्ट होगा। इसलिए यात्रियों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

IIT job offers withdrawn: आईआईटी से दो प्लेसमेंट सीजन के लिए बाहर हो सकती हैं ओरेकल समेत 22 कंपनियां, जानें क्यों लेना पड़ रहा ऐसा फैसला

IIT job offers withdrawn: आईआईटी से दो प्लेसमेंट सीजन के लिए बाहर हो सकती हैं ओरेकल समेत 22 कंपनियां, जानें क्यों लेना पड़ रहा ऐसा फैसला

IIT job offers withdrawn: देश के प्रमुख आईआईटी संस्थानों ने छात्रों के हितों को देखते हुए सर्व सम्मति से एक फैसला किया है। इस फैसले के अनुसार, इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) ने 2 प्लेसमेंट सीजन के लिए 22 कंपनियां को बाहर कर दिया है। आईआईटी संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट के दौरान छात्रों को नौकरी का ऑफर देने वाली इन कंपनियों में ओरेकल जैसी दिग्गज कंपनी भी शामिल है।

ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) इस बारे में 30 सितंबर तक कंपनियों को लिखित रूप से सूचित करेगी। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये कंपनियां 2026 में ग्रेजुएट होने वाले स्टूडेंट्स को दिए गए जॉब ऑफर को पूरा करने में फेल रहीं। एआईपीसी के कन्वीनर और आईआईटी गुवाहाटी के एसोसिएट प्रोफेसर जॉन जोस ने बताया कि कमेटी ने कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने के बजाय इस एक्शन को “नॉन-कोऑपरेशन” कहा है।

एआईपीसी ने क्यों लिया यह फैसला ?

आईआईटी ने अगले दो प्लेसमेंट सीजन के लिए कैंपस रिक्रूटमेंट के लिए 22 कंपनियों के साथ सहयोग बंद करने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये कंपनियां 2026 में ग्रेजुएट होने वाले स्टूडेंट्स को दिए गए जॉब ऑफर को पूरा करने में फेल रहीं। यह फैसला 23 आईआईटी के 150 से ज्यादा ऑफर पर लागू होता है। एआईपीसी के कन्वीनर जोस जोस ने कहा कि कुछ कंपनियों ने 10 से 15 ऑफर वापस ले लिए थे। फाइनल लिस्ट और जिन ऑफर पर असर पड़ा है, उनकी संख्या अभी भी तैयार की जा रही है क्योंकि अलग-अलग आईआईटी कमेटी को मामलों के स्टेटस के बारे में अपडेट कर रहे हैं।

प्लेसमेंट सीजन से बाहर होने वाली कंपनियों में ओरेकल भी शामिल

आईआईटी के 2 प्लेसमेंट सीजन से बाहर होने वाली कंपनियों की सूची में ओरेकल का नाम भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूएस सॉफ्टवेयर कंपनी ने आईआईअी छात्रों को दिए गए करीब 40 ऑफर नहीं माने। कई स्टार्टअप भी इस लिस्ट में हैं।

IITs ने नियोक्ताओं को पहले दी थी चेतावनी

आईआईटी का सितंबर का यह फैसला ऑफर वापस लेने वाली कंपनियों के साथ महीनों की बातचीत के बाद आया है। जून में, एआईपीसी ने Oracle, Interview Kickstart और SuperAGI समेत 10 से ज्यादा कंपनियों से कहा कि वे या तो उनके ऑफर मानें या प्रभावित स्टूडेंट्स को तीन महीने की सैलरी दें। इस मामले से उस समय करीब 100 छात्र प्रभावित हुए थे।

आईआईटी ने कंपनियों को दिया था 15 अगस्त तक का समय

एआईपीसी ने कंपनियों को जवाब देने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया था। मामलों को सुलझाने में नाकाम रहने वाली कंपनियों को 2027 और 2028 की क्लास के प्लेसमेंट ड्राइव से बाहर करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद AIPC ने कंपनियों के लिए ऑफर पाने वाले छात्रों को ऑनबोर्ड करने की डेडलाइन 15 सितंबर तय की।

एक अरब वोटरों की चाभी—सीमा खन्ना

भारत राष्ट्र-राज्य के 145 करोड़ लोगों, एक अरब यानी कोई सौ करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की डिजिटल चाबी और मतदाता सूचियों की धांधली के पासवर्ड का नाम है—सीमा खन्ना। दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से निरंकुश राक्षसी तंत्र (Despotic System), डिजिटल तानाशाही की जिन आशंकाओं में उसके प्रोटोटाइप की झलक देखती है, उसकी एक भारतीय प्रतीक, नमूना हैं चुनाव आयोग की सीमा खन्ना (डायरेक्टर जनरल, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, चुनाव आयोग)।

सवाल है कैसे यह महिला भारत के एक अरब मतदाताओं की डिजिटल मतदाता सूची के दरवाजे की चाबी? तो जान ले बात मामूली वेबसाइट या ऐप की नहीं है। मतदाताओं को काटने-जोड़ने व मतदाता सूचियों को जैसा चाहे बनाने वाले, कंट्रोलर याकि ECINet की बनवाई डिजिटल व्यवस्था है। इसमें चुनाव आयोग ने अपने चालीस से अधिक apps और portals को समेटा-बांधा हुआ है। मतदाता का registration, application, voter list में नाम, e-EPIC, शिकायत—सब इसी ecosystem में। चुनाव आयोग इसे “one unified platform” कहता है। जनवरी में इसके औपचारिक लॉन्च पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बेशर्मी से झूठ बोला था कि इसे कानून के अनुरूप बनाया गया है। DG-IT सीमा खन्ना ने तब कहा—technology अब support function नहीं, strategic enabler है; ECINet transparency, efficiency, credibility और public trust बढ़ाता है।

पर इसी को लेकर चुनाव आयोग के बाकी दो चुनाव आयुक्त—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने फाइलों में अलग लिखा। चार नवंबर 2025 को Deputy Election Commissioner ने सीमा खन्ना और दूसरे वरिष्ठ अफसरों को लिखकर साफ किया—ERO, DEO और CEO के जो statutory functions हैं, वे उन्हीं को करने हैं, किसी और को नहीं। आईटी सिस्टम कानून के अनुरूप होना चाहिए, “without any exception”। फिर 2 जनवरी को सीमा खन्ना को दोबारा लिखा गया—software ऐसा हो कि ERO को कानून से मिली discretion किसी तरह restricted न हो।

भला क्यों लिखना पड़ा?

क्योंकि मतदाता सूची की संवैधानिक-वैधानिक व्यवस्था का मूल विचार उलटा पड़ रहा था। दिल्ली में कोई एक बाबू (यानी सीमा खन्ना की चाबी, उसका पासवर्ड, उसके access point) बैठकर देश की voter list नहीं बनाता। constituency में Electoral Registration Officer होता है। वही कानून से अधिकृत अधिकारी है। नागरिक उसके सामने दस्तावेज देता है। वह जांचता है। वह तय करता है कि नाम जुड़ेगा या हटेगा।

लेकिन अब बीच में मशीन थी। और मशीन की चाबी दिल्ली में! एक आईटी अफसर के हाथ में (मतलब प्रदेशों के चुनाव अधिकारियों, आईएएस अफसरों, कैबिनेट सचिव से लेकर पूरी नौकरशाही में किसी के भी पास नहीं। न मंत्रियों के पास। न ही मंत्रिमंडल, मंत्रालयों आदि किसी के प्रति accountable, जवाबदेह)।

16 अप्रैल 2026 को चुनाव आयुक्त संधू ने खुद फाइल पर दर्ज किया कि IT division ने पिछले कुछ महीनों में कई नए modules और portals विकसित किए, लेकिन उन्हें न तो इसकी जानकारी दी गई और न वे Commission के सामने रखे गए। उन्होंने यहां तक लिखा कि उन्हें नए developments का पता मीडिया से चल रहा है। उन्होंने कहा—DG-IT सभी Commissioners को जानकारी दें और जरूरी approvals लिए बिना गतिविधि न करें।

फिर 29 मई 2026 को दूसरे चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने खतरे का असली नाम लिखा—“gradual centralisation of the electoral roll database.” और इलाज भी सुझाया। स्वतंत्र audit हो। IIT जैसे बाहरी विशेषज्ञ से जांच कराई जाए और certify किया जाए कि voter database में बदलाव करने की credentials संबंधित statutory authorities के अलावा किसी के पास नहीं हैं।

सोचें, खुद भारत के Election Commissioner कह रहे है—जांच कराओ कि देश की voter list बदलने की digital credentials किस-किस के पास हैं! फिर अगस्त में संधू ने और साफ लिखा। राज्यों के CEO, DEO और ERO बता रहे थे कि उन्हें ERONet का “proper and complete access” नहीं है। उनकी वैधानिक शक्तियां DG-IT स्तर के centralised control से सीमित हो रही हैं। संधू ने सीमा खन्ना के पद के बारे में रिकॉर्ड पर लिखा कि DG-IT को statutory authorities को कानून से मिला पूरा access और operational freedom रोकने का कोई legal authority नहीं है।

पर न चुनाव आयुक्त की सुनना। न देश के जमीनी, चुनावी अफसरों की चिंता। जाहिर है सीमा खन्ना को सुनने, परवाह करने की भला क्या जरूरत है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सीमा खन्ना के कंट्रोल से वह सब प्राप्त है जो चुनावी धांधलियों के आर्किटेक्ट या अपने ही पन्ना प्रमुखों से स्क्रीन पर नाम काटने-जोड़ने का काम धड़ल्ले से फ्रॉड डिजिटल इंडिया के जरिए प्राप्त हो रहा हो?

और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में छपा उदाहरण हकीकत की पुष्टि है। सत्य गोवा के 97 नागरिकों के अनुभवों का है। इनके बतौर मतदाता नाम काटे जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में जब याचिका हुई, तब सुप्रीम कोर्ट का निर्देश हुआ। गोवा ERO/AERO ने कागज देखे। 97 लोगों को योग्य पाया। पहले उन्हें हटाने का जो फैसला हुआ था, उसे reverse करना था।

लेकिन ECINet में reverse करने का option ERO अफसरों के पास नहीं!

सो गोवा के Chief Electoral Officer के कार्यालय ने सात दिनों में आठ ईमेल दिल्ली भेजे। सीमा खन्ना को हर बार copy किया गया। 18 फरवरी को चुनाव आयोग के अपने Deputy Election Commissioner ने DG-IT को साफ लिखा कि चुनाव आयोग का IT system सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार जरूरी कार्रवाई को block नहीं कर सकता। ERO के निर्णय के अनुसार कार्रवाई facilitate की जाए।

फिर?

21 फरवरी को final voter list प्रकाशित हुई। वे 97 मतदाता जस के तस बाहर।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने 20 सिंतबर को सभी 97 नाम जांचे। सभी 97 सूची से बाहर थे। Goa के CEO संजय गोयल ने अखबार से कहा कि उन्होंने आयोग को बताया था कि इन लोगों को शामिल किया जाना है। और फिर वह वाक्य जो पूरे Digital India को नंगा कर देता है—“The call (to not include) was theirs.” ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने सीमा खन्ना से पूछा कि final roll से पहले rollback facility क्यों enable नहीं की गई। अखबार के मुताबिक जवाब नहीं मिला।

तो सवाल सीमा खन्ना नाम की एक महिला का नहीं है। उन्हें कोई “एक अरब वोटरों की मालिक” नहीं कह सकता। लेकिन लोकतंत्र को यह जरूर जानना चाहिए कि एक अरब मतदाताओं के database की digital keys की architecture क्या है।

और इसका Super-admin कौन है? किसके पास read access है? किसके पास write access? कौन नाम बदल सकता है? कौन reversal रोक सकता है? प्रत्येक बदलाव का क्या immutable audit trail है या नहीं? क्या Commissioners उसे देख सकते हैं? क्या बाहरी independent audit कभी हुआ? चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने जो independent audit मांगा था उसका क्या हुआ?

और सबसे बड़ा सवाल—यदि देश के तीन चुनाव आयुक्तों में से दो को ही अपने चुनाव आयोग के IT architecture पर ये सवाल लिखने पड़ें, तो भारत का साधारण मतदाता किस भरोसे सोए?

पहले वोट की रखवाली कानून करता था। फिर चुनाव अधिकारी करता था। अब बीच में software खड़ा है। और यह software आया कहां से? किसने बनवाया? कैसे बना? देश में बना या विदेश में इजराइल जैसे किसी देश से बनवाया गया?

कानून मतदाता के बारे में दो टूक कहता है—ERO फैसला करेगा। और ERO कहता है कि फलां नागरिक योग्य है, वैध मतदाता है। फिर सुप्रीम कोर्ट भी कहता है—सुनो और निर्णय करो।

और सीमा खन्ना के software की screen कहती है—Access denied!

क्यों? भला कौन है इसका SUPER ADMIN? उसकी credentials किसके पास हैं? यदि ERO के पास नहीं, राज्य के CEO के पास नहीं और खुद चुनाव आयुक्तों को इस पर सवाल लिखने पड़ रहे हैं, तो आखिर उस डिजिटल दरवाजे की आखिरी चाबी किसके पास है? नरेंद्र मोदी-अमित शाह की चुनावी मशीनरी से क्या उसका रिश्ता है? क्या इनके पन्ना प्रमुखों और उसके चुनावी control rooms की voter-data machinery तथा चुनाव आयोग के database के बीच कोई तकनीकी access, interface या data-flow है? यदि नहीं, तो चुनाव आयोग ने अब तक, ऐसे भंडाफोड के बाद भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट दवाब क्यों नहीं दिया?

हे राम! यह है मां भारत का Digital India—मनुष्य प्राणियों को वैध और अवैध ठहराने वाले यमराजों के दरवाजों के चौकीदारों का मोदी राज! क्या नहीं?

सेना के लिए अत्याधुनिक ड्रोन बनाएगा पॉलीटैक्निक का छात्र, रक्षा मंत्रालय ने मंजूर किए 3.50 करोड़

लोकल 18 के रिपोर्टर जसबीर कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, हमीरपुर के एक पॉलीटेक्निक छात्र ने अपनी तकनीकी सोच और मेहनत से ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है। साधारण परिवार से आने वाले सर्वेश शर्मा ने भारतीय सेना की सीमा निगरानी से जुड़ी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ड्रोन बनाने पर काम किया। तैयार किए गए उनके इस प्रोटोटाइप के बाद अब इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय से बड़ी ग्रांट मिली है।

ऐसे मिला प्रोजेक्ट का आइडिया

सर्वेश शर्मा राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज हमीरपुर के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र हैं। सर्वेश ने IIT जोधपुर और कोनार्क कोर की नेशनल लेवल की ओपन कार्डबोर्ड ड्रोन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। इस प्रतियोगिता में देशभर की करीब 50 टीमों ने अपने आइडिया पेश किए थे। सर्वेश की टीम ने इसमें चौथा पुरस्कार हासिल किया।

शुरुआती प्रोटोटाइप की लागत

सर्वेश ने अपने प्रोजेक्ट पर आगे काम शुरू किया और प्रोटोटाइप तैयार करने में उन्हें करीब 87 हजार रुपये का खर्च आया। इसके बाद उन्होंने डिफेंस इनोवेशन ऑर्गेनाइजेशन और इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस यानी iDEX से जुड़े प्रोजेक्ट के तहत स्टार्टअप के लिए आवेदन किया। अब इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए 3.50 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने की जानकारी सामने आई है।

सेना के लिए ऐसे काम करेगा सर्वेश का ड्रोन प्रोजेक्ट

सर्वेश अब रुद्रा एज टी-1 (स्पेक्ट्रा) ड्रोन प्रोजेक्ट पर काम करेंगे। इसे भारतीय सेना की सीमा निगरानी से जुड़ी जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। ड्रोन को दुश्मन के रडार से बचने और जैमिंग जैसी इलेक्ट्रॉनिक रुकावटों के असर को कम करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।

IIT रुड़की में होगा आगे का काम

इस प्रोजेक्ट का इनक्यूबेशन सेंटर IIT रुड़की में बनाया गया है। रक्षा मंत्रालय से जुड़ी मंजूरी के बाद सर्वेश अब वहां की लैब में प्रोजेक्ट पर आगे काम करेंगे। प्रोजेक्ट से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 20 दिन का समय दिया गया है और इसे करीब 20 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

साधारण परिवार से निकला हुनरमंद छात्र

सर्वेश शर्मा हमीरपुर के बाहनवीं गांव के रहने वाले हैं और उनका परिवार साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उनके पिता संजीव शर्मा दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। सर्वेश ने अपनी शुरुआती और स्कूली पढ़ाई सरकारी स्कूल से की। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ उनके कॉलेज में भी खुशी का माहौल है। कॉलेज के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर, विभागाध्यक्ष समीर भारती और दूसरे शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी है।

सर्वेश की कहानी दिखाती है कि किसी तकनीकी आइडिया को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ बड़े संसाधन ही जरूरी नहीं होते, बल्कि सही सोच और लगातार मेहनत भी अहम भूमिका निभाती है। एक कॉलेज प्रतियोगिता से शुरू हुआ उनका काम अब रक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट तक पहुंच चुका है।

दिल्ली की हवा में क्यों बढ़ रहा प्रदूषण? मानसून की वापसी से जुड़ा है इसका कनेक्शन

दिल्ली में मौसम बदलने के साथ हवा की क्वालिटी में खराब होने लगी है। बारिश कम होने और हवाओं की रफ्तार धीमी पड़ने से प्रदूषण का असर बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में मौसम ज्यादा सूखा रहने की संभावना है, जिससे दिल्ली की हवा को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

मानसून की वापसी से बदला मौसम

भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून दिल्ली से अगले दो-तीन दिनों में पूरी तरह लौट सकता है। इस हफ्ते दिल्ली में बारिश की कोई उम्मीद नहीं है। मानसून की बारिश और तेज हवाओं के कारण पिछले कुछ दिनों से हवा साफ थी, लेकिन अब मौसम के सूखने से प्रदूषक ज्यादा देर तक हवा में रह सकते हैं।

चार दिनों में तेजी से बढ़ा है AQI

दिल्ली का AQI शुक्रवार को 88 था। इसके बाद शनिवार को 118, रविवार को 160 और सोमवार को 169 पहुंच गया। इस दौरान PM2.5 और ओजोन प्रमुख प्रदूषकों में रहे। सोमवार का AQI 19 जुलाई के बाद सबसे ज्यादा बताया गया, जो कि 171 था।

कम हवा और धूल से बढ़ सकती है परेशानी

बारिश कम होने के साथ सड़कों की धूल, गाड़ियों का धुआं और कंस्ट्रक्शन से निकलने वाले कण हवा में ज्यादा फैल सकते हैं। कम हवाएं इन कणों को ज्यादा फैलने नहीं देतीं, जिससे शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण जमा होने लगता है।

इन आठ जगहों की हवा है खराब

सोमवार को दिल्ली के 42 एक्टिव मॉनिटरिंग स्टेशनों में से आठ जगहों पर AQI 200 से ऊपर रहा।

  • सिरी फोर्ट और चांदनी चौक: दोनों जगह AQI 221 दर्ज किया गया।
  • IGI: यहां AQI 219 रहा।
  • बुराड़ी: यहां AQI 215 दर्ज हुआ।
  • वजीरपुर: यहां AQI 213 रहा।
  • पटपड़गंज: यहां AQI 208 दर्ज किया गया।
  • नरेला: यहां AQI 207 रहा।
  • IIT: यहां AQI 202 दर्ज हुआ।

सर्दियों में बदल जाता है प्रदूषण का असर

अभी दिल्ली में प्रदूषण का वह दौर शुरू नहीं हुआ है, जो आमतौर पर सर्दियों में देखने को मिलता है। टेम्परेचर गिरने और हवाओं के धीरे चलने से सर्दियों में प्रदूषण जमीन पर ही रहता है। पंजाब और हरियाणा में फसल के अवशेष जलाने का असर भी अक्टूबर से नवंबर के बीच ज्यादा दिखाई देता है।

AQI 169 का क्या मतलब है?

CPCB के अनुसार 101 से 200 के बीच AQI को ‘मॉडरेट’ कैटेगरी में रखा जाता है। 201 से 300 के बीच हवा ‘खराब’ मानी जाती है। ऐसे में 169 खराब कैटेगरी में नहीं आता, लेकिन इसका लेवल उस केटेगरी के काफी पास है। प्रदूषण बढ़ने पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल से जुड़ी परेशानी वाले लोगों को बाहर ज्यादा समय बिताने से बचना चाहिए।

पिछले महीनों में बारिश से सुधरी थी हवा की क्वालिटी

मानसून के दौरान बारिश और तेज हवाओं की वजह से दिल्ली की हवा साफ रही थी। सितंबर में अब तक 12 दिन AQI ‘संतोषजनक’ और आठ दिन ‘मॉडरेट’ कैटेगरी में रहा। वहीं 9 जुलाई को दिल्ली का AQI 48 दर्ज हुआ था, जो इस साल का सबसे साफ दिन रहा। इसके बाद 12 जुलाई को AQI 246 तक पहुंचा था और उस समय हवा ‘खराब’ कैटेगरी में थी।

वीकेंड तक ठंड बढ़ने के मिल सकते है संकेत

सोमवार को दिल्ली में अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री रहा। मौसम विभाग के मुताबिक अधिकतम तापमान इसी के आसपास रह सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान धीरे-धीरे कम होकर वीकेंड तक 22 से 23 डिग्री तक पहुंच सकता है।

दिल्ली में प्रदूषण का बढ़ता लेवल बताता है कि लोगों को हवा की क्वालिटी पर ज्यादा ध्यान देना होगा। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी परेशानी वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। रोज के कामों के दौरान धूल और धुएं से बचना, बाहर निकलते समय जरूरी सावधानी रखना और एयर क्वालिटी का अपडेट देखते रहना चाहिए।

पड़ोसी के WiFi कनेक्शन से की जेईई की तैयारी, मुंबई के स्लम में पले अभिषेक अब आईआईटी दिल्ली से कर रहे बीटेक

आईआईटी में पढ़ाई का सपना टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक ढेरों युवाओं का होता है। इसके लिए छात्र जेईई एडवांस्ड की तैयारी करते हैं, जिसे देश की सबसे मुश्किल प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक माना जाता है। आमतौर पर छात्र और अभिभावक सोचते हैं कि JEE एडवांस्ड की तैयारी का मतलब सबसे अच्छी कोचिंग, शांत स्टडी रूम या बिना रुकावट इंटरनेट एक्सेस होना है। लेकिन मुंबई के अभिषेक शर्मा के लिए ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसके बावजूद उन्होंने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 2,456 हासिल की, जिसमें OBC-NCL रैंक 415 थी। वह अब आईआईटी दिल्ली से बीटेक कर रहे हैं।

मोबाइल डेटा खत्म होने के बाद पड़ोसी के वाईफाई से की पढ़ाई

अभिषेक की कामयाबी की चर्चा होना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि उन्होंने साबित किया है कि देश की सबसे प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा में सफल होने के लिए पैसा हो या न हो, सही सोच जरूरी है। उनका परिवार मुंबई के एक स्लम एरिया लोकमान्य तिलक नगर में किराए के घर में रहता था, जहां वे हर महीने ₹3,000 किराया देते थे। उनके पिता एक स्टील फैब्रिकेशन कंपनी में मजदूर के तौर पर काम करते थे और परिवार के पास पैसे कम थे। जेईई एडवांस्ड की तैयारी कर रहे कई छात्रों के लिए, किताबें, कोचिंग, स्टेबल इंटरनेट और पढ़ाई के लिए एक खास जगह तक पहुंच उनकी तैयारी का एक जरूरी है। शर्मा के पास उस स्तर की सुविधाएं नहीं थीं। इसके बजाय, उन्होंने अपने आस-पास जो भी सुविधाएं मौजूद थीं, उन पर भरोसा किया और मुश्किलों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी।

कम सहूलियों के बावजूद शर्मा ने कैसे की तैयारी ?

अभिषेक के लिए जेईई एडवांस्ड की तैयारी के रास्ते की सबसे बड़ी मुश्किल थी इंटरनेट एक्सेस। फोन का मोबाइल डेटा जब खत्म हो जाता था, तो वह छत पर जाते थे और अपने पड़ोसी के Wi-Fi से कनेक्ट करते थे ताकि वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। उनके घर का माहौल भी परिवार के वित्तीय हालात से अलग नहीं था। उनका परिवार महंगी कोचिंग सुविधा और तैयारी के दूसरे महंगे स्रोत उपलब्ध नहीं करा सकता था। इसके बावजूद अभिषेक ने इन मुश्किलों को अपने इरादे कमजोर करने नहीं दिया। उन्होंने एग्जाम की तैयारी जारी रखी और आखिरकार ऐसी रैंक हासिल की जिससे भारत के सबसे बड़े इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूशन में से एक में एडमिशन मिल गया।

JEE एडवांस्ड रैंक 2456 से IIT दिल्ली तक

जब JEE एडवांस्ड के रिजल्ट घोषित हुए, तो अभिषेक का नाम ऑल इंडिया रैंक 2,456 और OBC-NCL रैंक 415 के साथ आया। यह रिजल्ट उनके करियर का वह पहला कदम था जहां से IIT दिल्ली की यात्रा शुरू होनी थी। शर्मा अब आईआईटी दिल्ली से बीटेक कर रहे हैं। उनका सफर दिखाता है कि एक ही परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के हालात कितने अलग हो सकते हैं। अभिषेक की सक्सेस स्टोरी दिखाती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान पैसों की तंगी किस तरह की मुश्किलें पैदा कर सकती है।

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IND vs JPN: बिहार की गलियों से निकलकर जापान की नेशनल टीम तक…भारत-जापान मैच से पहले छाए अभिषेक आनंद

भारत और जापान के बीच एकमात्र टी20 मुकाबला 22 सितंबर को खेला जाएगा। दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला कांटो के सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में खेला जाएगा। इस मुकाबले में जापान के एक खिलाड़ी की काफी चर्चा हैं। ये खिलाड़ी बिहार की छोटी-छोटी गलियों से निकलकर वह जापान के नेशनल टीम तक का सफर तय किया है। इस खिलाड़ी का नाम अभिषेक आनंद है। बिहार के रोहतास जिले से आने वाले 28 साल के अभिषेक आनंद की कहानी काफी दिलचस्प है। भारत और जापान के बीच होने वाले मुकाबले से पहले अभिषेक का एक वीडियो वायरल होने के बाद वह चर्चा में आ गए हैं। भारत के खिलाफ होने वाले इस मैच में अभिषेक जापानी टीम में शामिल नहीं है। आइए जानते हैं इनकी कहानी

वायरल हो रहा वीडियो

भारत और जापान के टी20 मैच से पहले अभिषेक आनंद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा। वीडियो में उनसे जापान के लिए खेलने वाले बिहारी क्रिकेटर होने को लेकर सवाल पूछा गया। अभिषेक के जवाब और भारतीय टीम के लिए दिए गए उनके संदेश ने लोगों का ध्यान खींचा। उनका “बिहारी कहां नहीं है भाई” वाला जवाब भी काफी चर्चा में है।

 

भारत और जापान के बीच 22 सितंबर को पहली बार पुरुषों का टी20 इंटरनेशनल मैच खेला जाएगा। यह मुकाबला दोनों देशों के 75 साल पुराने राजनयिक संबंधों के मौके पर होगा और एशियन गेम्स से पहले तैयारियों का हिस्सा है। वहीं अभिषेक भारत के खिलाफ सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड में होने वाले मुकाबले का हिस्सा नहीं होंगे। जापान के 15 सदस्यीय टीम में अभिषेक आनंद का नाम शामिल नहीं है।

जानें बिहार के अभिषेक की कहानी

बिहार के रहने वाले अभिषेक आनंद ने IIT कानपुर में पढ़ाई के दौरान अभिषेक आनंद क्रिकेट से लगातार जुड़े रहे और कॉलेज की टीम की कप्तानी भी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए वह टोक्यो चले गए। जापान पहुंचने के बाद भी उन्होंने क्रिकेट खेलना नहीं छोड़ा और क्लब क्रिकेट के जरिए खेल से अपना रिश्ता बनाए रखा। इस तरह उन्होंने नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ अपने क्रिकेट के जुनून को भी जारी रखा। अभिषेक आनंद ने जापान के घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, जिसके बाद उन्हें नेशनल टीम में खेलने का मौका मिला।

कब खेला था पहला मुकाबला

अभिषेक आनंद ने 9 मई 2025 को कुक आइलैंड्स के खिलाफ अपना पहला टी20 इंटरनेशनल मैच खेला। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके बाद वह अब तक 18 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके हैं, जिसमें उनके नाम 275 रन हैं। उनका सबसे बड़ा स्कोर 55 रन रहा है, जबकि गेंदबाजी में उन्होंने एक विकेट भी लिया है। वहीं भारत के खिलाफ वह खेलेंगे या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

कौन हैं IIT Bombay के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला? छात्र की मौत के बाद क्यों गई डीन की कुर्सी

शुक्रवार को IIT बॉम्बे के पवई कैंपस में एक छात्र के सुसाइड मामले में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला जांच के दायरे में आ गए हैं, जिस वजह से संस्थान ने उनसे डीन का पद छीन लिया है। बताया जा रहा है कि BTech के इस द्वितीय वर्ष के छात्र की मौत से ठीक पहले हुई घटना के समय डूला ही इंस्ट्रक्टर और परीक्षा के इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे।

खबरों के मुताबिक, IIT बॉम्बे ने सोमवार को सूर्यनारायण डूला को डीन के पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई, जब संस्थान ने छात्र की मौत से जुड़ी अपनी पहले की कुछ बातों को वापस ले लिया।

IIT बॉम्बे ने यह भी माना कि जांच पूरी होने से पहले मौत की परिस्थितियों को लेकर कुछ बातें कही गई थीं। संस्थान ने इन दावों के लिए माफी भी मांगी है।

कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला?

LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, डूला पावर सिस्टम और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के रिसर्चर हैं और उन्होंने IIT बॉम्बे में 17 साल से ज्यादा समय बिताया है।

उनका एकेडमिक काम स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, पावर-सिस्टम कंट्रोल और डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स के इंटीग्रेशन जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।

उनकी प्रोफाइल में बताई गई रिसर्च की मौजूदा रुचियों में स्मार्ट ग्रिड और माइक्रोग्रिड, कन्वर्टर टोपोलॉजी और कंट्रोल, पावर सिस्टम के लिए कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल, डिस्ट्रिब्यूटेड एनर्जी रिसोर्स का ग्रिड इंटीग्रेशन, और पावर सिस्टम ऑपरेशन और कंट्रोल शामिल हैं।

सूर्यनारायण डूला के प्रोफाइल में बताया गया है कि उनका एकेडमिक बैकग्राउंड पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और पावर सिस्टम्स पर आधारित है।

IIT बॉम्बे में 17 साल

डूला सितंबर 2009 में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर IIT बॉम्बे से जुड़े और मार्च 2015 तक इस पद पर रहे। इसके बाद, मार्च 2015 से जुलाई 2019 तक वे एसोसिएट प्रोफेसर रहे।

उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, जुलाई 2019 से वे IIT बॉम्बे में फुल-टाइम प्रोफेसर हैं।

उन्होंने मार्च 2023 से जुलाई 2026 तक डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के तौर पर भी काम किया। जुलाई 2026 में उन्होंने डीन ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स का पद संभाला। उनकी प्रोफाइल के अनुसार, वे अभी भी इस पद पर हैं।

इस तरह, डूला IIT बॉम्बे में शिक्षण और रिसर्च के साथ-साथ कई अहम प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभाल रहे हैं।

एकेडमिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड

IIT बॉम्बे में शामिल होने से पहले, डूला ने जनवरी से सितंबर 2009 के बीच ‘पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड’ में पावर-सिस्टम कंसल्टिंग का काम किया।

इससे पहले, उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने अगस्त 2006 से अक्टूबर 2008 के बीच ‘मशीन 2 मशीन’ में आर्किटेक्ट के तौर पर काम किया। उन्होंने 2002-03 में एलुरु के CRR कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में लेक्चरर के तौर पर भी काम किया।

डूला की एकेडमिक क्वालिफिकेशन भी पावर और एनर्जी सिस्टम के क्षेत्र में ही हैं। उन्होंने 2004 से 2006 के बीच IIT दिल्ली से पावर सिस्टम में PhD पूरी की। उससे पहले, उन्होंने 2000 से 2002 के बीच IIT बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम्स एंड इंजीनियरिंग में M.Tech किया।

उन्होंने 1996 से 2000 के बीच बीच आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की।

विवाद के केंद्र में क्यों हैं डूला?

डूला इस विवाद के केंद्र में इसलिए आए क्योंकि वे मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान कोर्स इंस्ट्रक्टर और इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम के बयान में कहा गया है कि उन्होंने एक छात्र को बिना इजाजत स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए देखा था।

फैकल्टी फोरम ने बताया कि डूला 18 सितंबर को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक परीक्षा की निगरानी कर रहे फोरम के मुताबिक, उन्होंने जिस घटना को शैक्षणिक नियमों का उल्लंघन बताया, उसे देखने के बाद उन्होंने संस्थान के नियमों के अनुसार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।

इसके बाद फोरम ने डूला का समर्थन करते हुए कहा कि वे संस्थान की सीनेट द्वारा मंजूर शैक्षणिक नीतियों के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।

बता दें कि IIT बॉम्बे के पहले के बयान में कहा गया था कि छात्र ने कथित तौर पर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया और जवाब पाने के लिए प्रश्न-पत्र को ChatGPT पर अपलोड किया।

बाद में संस्थान ने इस बात के लिए माफी मांगी कि उसने जांच की सही प्रक्रिया से पुष्टि होने से पहले ही ये विवरण सार्वजनिक कर दिए थे।

प्रोफेसर के खिलाफ पुलिस केस दर्ज

वहीं, छात्र के माता-पिता की ओर से उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद यह विवाद बढ़ गया।

इसके बाद डूल्ला को आरोपी बनाते हुए एक FIR दर्ज की गई। आरोपों में यह भी शामिल था कि उन्होंने तीन महीने तक छात्र के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।

फिलहाल, मामले को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। डूल्ला पर लगे आरोप अभी चल रही जांच का हिस्सा हैं और इन्हें अभी तक तथ्य के तौर पर साबित नहीं किया गया है।

बता दें कि यह घटनाक्रम कैंपस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और संस्थान से जवाबदेही की बढ़ती मांगों के बीच सामने आया। इसके बाद IIT बॉम्बे ने डूल्ला की डीनशिप सस्पेंड कर दी और साथ ही घटनाओं के बारे में अपनी पिछली बात भी वापस ले ली।

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