माता–पिता को वेक्सीन के रखरखाव से जूझते देखकर आया आइडिया, 3 किशोरों ने नमक से चलने वाला फ्रिज बनाकर जीता 12500 डॉलर का इनाम

भारत प्रतिभा की खान है। ये बाद मध्य प्रदेश के तीन किशोरों ने अपनी नई खोज से फिर साबित कर दी है। इंदौर के ध्रुव चौधरी, मिथ्रन लधानिया और मृदुल जैन ने फार्मेसी के क्षेत्र में काम करने वाले अपने माता-पिता को वैक्सीन के रखरखाव से जूझते देखा। बिजली की कमी और मौसम की मार के बीच वैक्सीन को ठंडा रखना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन इन किशोरों ने हार नहीं मानी और इस समस्या का ऐसा हल खोजा जिसने न सिर्फ उन्हें अंतररष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया, बल्कि 12,500 डॉलर की पुरस्कार राशि भी जीतने का मौका दिया।

ध्रुव, मिथ्रन और मृदुल ने एक ऐसा फ्रिज बनाया जो बिजली से नहीं नमक से चलता है। उन्होंने इसे ‘थर्मावॉल्ट’ नाम दिया, यह एक इंसुलेटेड कूलिंग बॉक्स है जिसे किसी आउटलेट, बैटरी और बर्फ की जरूरत नहीं होती। यह नमक से चलता है। इस खोज के लिए तीनों ने 2025 का अर्थ प्राइज जीता, यह पर्यावरण प्रोजेक्ट पर काम करने वाले किशोरों को दिया जाता है। चौधरी, लधानिया और जैन ने एशिया क्षेत्र से यह पुरस्कार जीता। इस उपलब्धि के साथ $12,500 मिले, जिसका इस्तेमाल इन्होंने थर्मावॉल्ट की 200 यूनिट बनाने और उन्हें टेस्टिंग के लिए 120 हॉस्पिटल में भेजने का प्लान बनाया।

ध्रुव, मिथ्रन और मृदुल ने कोविउ-19 के समय इस आइडिया पर काम करना शुरू किया। तीनों लड़के अपने माता-पिता से एक ही दिक्कत सुकर परेशान थे। उनका कहना था, वैक्सीन तैयार थीं, लेकिन जिन ग्रामीण इलाकों में बिजली नहीं थी, उनके पास उन्हें सही तापमान पर लंबे समय तक रखने का कोई तरीका नहीं था। इलाज होने और उसे पहुंचा पाने के बीच के इस अंतर को ही टीनएजर्स ने पाटने का फैसला किया।

सही नमक की खोज कैसे हुई

थर्मावॉल्ट के पीछे विज्ञान का बहुत साधारण सिद्धांत है। कुछ नमक, पानी में घुलने पर, आयन नाम के चार्ज्ड पार्टिकल्स में अलग हो जाते हैं। इस अलगाव में एनर्जी लगती है, और नमक अपने आस-पास से वह एनर्जी खींचता है, इस प्रोसेस में अपने आस-पास का पानी ठंडा करता है। चौधरी, लधानिया और जैन ने इंटरनेट की दुनिया को खंगाला। उन्होंने लगभग 150 नमक की एक लिस्ट, फिर इसे लगभग 20 तक सीमित किया और टेस्ट करने लायक बनाया। उन्होंने प्रयोग करने के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में लैब स्पेस लिया।

किसी भी नमक ने पानी को काफी ठंडा नहीं किया। नौवीं क्लास की साइंस की टेक्स्टबुक में चुपचाप पड़े दो कंपाउंड थे बेरियम हाइड्रॉक्साइड ऑक्टाहाइड्रेट और अमोनियम क्लोराइड उनके काम आए। बिजनेस इनसाइडर के मुताबिक, चौधरी ने कहा, “हमने सबसे अच्छा नमक ढूंढने के लिए पूरा इंटरनेट खंगाला, लेकिन हम बस अपनी नौवीं क्लास की साइंस की टेक्स्टबुक पर वापस आ गए।”

अमोनियम क्लोराइड अकेले 2 से 6 डिग्री सेल्सियस (लगभग 35 से 43 डिग्री फ़ारेनहाइट) के बीच टेम्परेचर बनाए रखता था, यह रेंज कई वैक्सीन के लिए सही है। बेरियम हाइड्रॉक्साइड ऑक्टाहाइड्रेट मिलाने से मिक्सचर सबजीरो टेम्परेचर पर पहुंच गया, जो वैक्सीन के लिए और ऑर्गन ट्रांसपोर्ट के लिए भी काम का था। फ़ॉर्मूला मिलने के तीन महीने बाद, उनके पास एक वर्किंग प्रोटोटाइप था और वे इंदौर के आस-पास के हॉस्पिटल में इसकी टेस्टिंग कर रहे थे।

थर्मावॉल्ट के अंदर असल में क्या है

डिवाइस खुद डिजाइन में सिंपल था। इंसुलेटेड प्लास्टिक के बाहरी शेल के अंदर कॉपर की लाइनिंग थी, जहां वैक्सीन या ऑर्गन रखे जाएंगे। प्लास्टिक और कॉपर के बीच, किशोरों ने पानी में नमक घोलकर बनाया गया एक कूलिंग सॉल्यूशन डाला।

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Deepfake पर सरकार का बड़ा एक्शन, AI कंटेंट पर लेबल जरूरी, गैरकानूनी सामग्री अब 3 घंटे में हटानी होगी, नए नियम जान लें वरना पछताएंगे

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार होने वाले डीपफेक और अन्य हानिकारक कंटेंट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने नियामक व्यवस्था को और सख्त किया है। सरकार ने AI से तैयार कंटेंट पर स्पष्ट लेबल और पहचान योग्य मेटाडेटा उपलब्ध कराना अनिवार्य किया है। साथ ही, सरकारी या न्यायालय के आदेश के आधार पर गैरकानूनी जानकारी हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में दी।

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AI से बने कंटेंट की पहचान होगी आसान

 

सरकार के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को आईटी नियम, 2021 में संशोधन कर कृत्रिम रूप से उत्पन्न सूचना (SGI), जिसमें डीपफेक और AI-जनित कंटेंट शामिल हैं, से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत किया गया। नए प्रावधानों के तहत मध्यस्थों को AI-जनित सामग्री के लिए स्पष्ट लेबलिंग और ट्रेस किए जा सकने वाले मेटाडेटा की व्यवस्था करनी होगी। इसका उद्देश्य यूजर्स को यह समझने में मदद करना है कि कोई सामग्री वास्तविक है या कृत्रिम रूप से तैयार की गई है और इसके जरिए धोखाधड़ी तथा दुरुपयोग को रोकना है।

 

36 घंटे की जगह अब 3 घंटे में हटानी होगी गैरकानूनी सामग्री

 

नए नियमों में कंटेंट हटाने की समयसीमा को भी कम किया गया है। सरकार के अनुसार, गैरकानूनी जानकारी हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। वहीं कुछ संवेदनशील शिकायतों के निपटारे की समयसीमा भी कम की गई है।

 

डीपफेक बनाने और फैलाने पर भी नियम सख्त

 

आईटी नियमों के तहत मध्यस्थों को ऐसी जानकारी को होस्ट, प्रदर्शित, अपलोड, प्रकाशित या साझा करने से रोकने के लिए उचित सावधानी बरतनी होगी, जिसमें AI के जरिए किसी अन्य व्यक्ति का रूप धारण करना, जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी देना, निजता का उल्लंघन करना या राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करना शामिल है।

 

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि AI से तैयार बाल यौन शोषण सामग्री, बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरें, प्रतिरूपण और अन्य हानिकारक सामग्री के खिलाफ प्लेटफॉर्म को रोकथाम और तत्काल कार्रवाई करनी होगी।

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किन कानूनों के तहत हो सकती है कार्रवाई?

 

डीपफेक और AI से जुड़े अपराधों पर आईटी एक्ट, 2000 के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत भी कार्रवाई का प्रावधान है। BNS की धारा 319 प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी से संबंधित है, जबकि धारा 336 में धोखाधड़ी के लिए झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने जैसे कृत्य शामिल हैं। धारा 353 गलत या भ्रामक बयान, अफवाह या रिपोर्ट के जरिए गलत सूचना और दुष्प्रचार फैलाने से जुड़े मामलों पर लागू हो सकती है। संगठित साइबर अपराधों पर धारा 111 के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भी बढ़ी जिम्मेदारी

 

भारत में 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत यूजर्स वाले महत्वपूर्ण सोशल मीडिया मध्यस्थों (SSMI) पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां हैं। इनमें गैरकानूनी कंटेंट का पता लगाने और उसके प्रसार को सीमित करने के लिए स्वचालित तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल, अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करना और भारत में संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति जैसी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

 

डीपफेक की शिकायत कहां करें?

 

सरकार के अनुसार, नागरिक National Cyber Crime Reporting Portal के जरिए डीपफेक, वित्तीय धोखाधड़ी और कंटेंट के दुरुपयोग की शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए cybercrime.gov.in पोर्टल उपलब्ध है और 1930 हेल्पलाइन भी संचालित है। अगर किसी मध्यस्थ के शिकायत अधिकारी से समस्या का समाधान नहीं होता है, तो उपयोगकर्ता Grievance Appellate Committee (GAC) के माध्यम से ऑनलाइन अपील कर सकते हैं।

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सरकार ने डीपफेक डिटेक्शन पर भी बढ़ाया फोकस

 

IndiaAI Mission के तहत सुरक्षित और भरोसेमंद AI को बढ़ावा देने के लिए 13 जिम्मेदार AI परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें डीपफेक का पता लगाने से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। IIT जोधपुर और IIT मद्रास द्वारा विकसित मल्टी-एजेंट फ्रेमवर्क तथा IIT खड़गपुर की रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन सिस्टम जैसी पहलें इसमें शामिल हैं।

टोल फ्री हुई कानपुर-लखनऊ एक्‍सप्रेसवे! NHAI ने सड़क बनाने वाली कंपनी पर लिया ये एक्शन

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क में आई खराबी के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने बड़ा फैसला लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फिलहाल टोल वसूली बंद कर दी है। ये फैसला एक्सप्रेसवे के करीब 300 मीटर लंबे हिस्से पर सड़क के फिसलन भरे होने की शिकायत सामने आने के बाद लिया गया। सड़क की स्थिति को देखते हुए मरम्मत का काम तेजी से कराया जा रहा है। टोल बंद रहने से होने वाले रेवेन्यू नुकसान की भरपाई निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड से कराई जाएगी।

शुरू किए जांच

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कहा है कि जब तक सड़क का खराब हिस्सा पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता, तब तक इस एक्सप्रेसवे पर टोल नहीं वसूला जाएगा। साथ ही, टोल बंद रहने से होने वाले रेवेन्यू नुकसान की भरपाई निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड से कराई जाएगी। NHAI ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक, परियोजना के स्वतंत्र इंजीनियर और निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। NHAI ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।

NHAI ने कंपनी को जारी किया नोटिस 

प्रभावित हिस्से पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया है और मरम्मत का पूरा खर्च PNC इंफ्राटेक उठाएगी। वहीं, NHAI ने कंपनी को नोटिस जारी कर उसे ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही कंपनी पर जुर्माना लगाने और परियोजना से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। प्रोजेक्ट मैनेजर, स्वतंत्र इंजीनियर की टीम के प्रमुख और रेजिडेंट इंजीनियर को उनके पद से हटा दिया गया। साथ ही उन्हें अगले दो साल तक सड़क परिवहन मंत्रालय, NHAI और NHIDCL की परियोजनाओं में काम करने से रोक दिया गया है। इसके अलावा, लापरवाही के आरोप में मौजूदा और पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर के खिलाफ भी चार्जशीट जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सड़क बनने के बाद लगेगा टैक्स

NHAI ने बताया कि, परियोजना के स्वतंत्र इंजीनियर थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है और उसे भविष्य की परियोजनाओं से बाहर किया जा सकता है। वहीं, सड़क में आई खराबी की वजह पता लगाने के लिए IIT खड़गपुर के प्रोफेसर के. एस. रेड्डी की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम बनाई गई है। NDTV ने बताया कि इसके अलावा, एक्सप्रेसवे की सड़क की स्थिति की जांच के लिए लेजर प्रोफाइलोमीटर तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। NHAI ने स्पष्ट किया है कि सड़क के खराब हिस्से की पूरी तरह मरम्मत होने के बाद ही एक्सप्रेसवे पर दोबारा टोल वसूली शुरू की जाएगी।

300 मीटर हिस्सा होगा रिपेयर

NHAI के अनुसार, 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के दाहिने कैरिजवे पर किलोमीटर 64 के पास सड़क में फिसलन की समस्या सामने आई। ये मामला 13 जुलाई को एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आया। उन्नाव जिले के कोरारी गांव के पास हुई भारी बारिश के बाद सड़क के इस हिस्से के खराब होने की तस्वीरें भी सामने आई थीं। शुरुआती रिपोर्ट में 5 से 7 मीटर तक सड़क प्रभावित होने की बात कही गई थी, लेकिन NHAI की जांच में करीब 300 मीटर लंबे हिस्से में फिसलन मिलने की पुष्टि हुई।

‘IIT सिर्फ एक टैग है…’, इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले सालाना 95 लाख की कमाई करने का किया दावा, सैलरी का स्क्रीनशॉट वायरल

भारत में IIT की डिग्री को लंबे समय से सबसे कीमती एकेडमिक क्वालिफिकेशन में से एक माना जाता रहा है। हालांकि, इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले एक व्यक्ति की वायरल पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी है। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि कॉलेज पूरा किए बिना ही वे सालाना 95 लाख रुपये से ज़्यादा कमाते हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब बड़े एजुकेशनल टैग के बजाय स्किल्स और अनुभव ज़्यादा मायने रखते हैं।

यह बहस तब शुरू हुई जब ग्रोथ मार्केटर लावण्या जैन ने दावा किया कि वे सालाना 1,00,000 डॉलर (लगभग 95 लाख रुपये) से ज़्यादा कमाते हैं, जबकि उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री कभी पूरी नहीं की। अपने दावे को साबित करने के लिए, जैन ने कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए। इनमें 3.74 लाख रुपये और 1.12 लाख रुपये की सैलरी क्रेडिट होती दिख रही थी, यानी उनके अकाउंट में कुल मिलाकर लगभग 4.86 लाख रुपये जमा हुए थे।

जैन के अनुसार, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में अपना बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी (BTech) प्रोग्राम आखिरी सेमेस्टर के दौरान छोड़ दिया था। इस फ़ैसले को वे अब अपनी ज़िंदगी के सबसे अच्छे फ़ैसलों में से एक मानते हैं।

उन्होंने लिखा, “मैं IIT से भी नहीं हूं। असल में, मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन्स इंजीनियरिंग में अपनी B.Tech की पढ़ाई आखिरी सेमेस्टर में ही छोड़ दी थी। मुझे लगता है कि यह मेरी ज़िंदगी के सबसे अच्छे फैसलों में से एक था।” जैन ने आगे कहा कि वे अभी एक कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर सिर्फ़ पार्ट-टाइम काम करके अपने पुराने कॉलेज के सबसे ज़्यादा प्लेसमेंट पैकेज से भी ज़्यादा कमा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं अपने कॉलेज के सबसे ज़्यादा प्लेसमेंट पैकेज (100k USD) से भी ज़्यादा कमा रहा हूं, और वह भी एक कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर पार्ट-टाइम काम करके।” अपनी मुख्य कमाई के अलावा, जैन ने यह भी बताया कि उन्होंने कई पैसिव इनकम के ज़रीये बनाए हैं जो उनकी कुल कमाई को काफ़ी बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा, “मेरे पास पैसिव इनकम के 5 ज़रीये हैं, और मेरी मुख्य कमाई मेरे सभी खर्चों को पूरा करती है (और वैसे, मैं काफ़ी खर्च करता हूं)।”

उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल पर मौजूद जानकारी के अनुसार, जैन ने Runable, Kairos Computer और Fold जैसे स्टार्टअप्स में ग्रोथ मार्केटिंग और गो-टू-मार्केट (GTM) भूमिकाओं में काम किया है। उनके करियर का सफ़र स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़े ट्रेंड को दिखाता है, जहां कई एम्प्लॉयर अब सिर्फ़ एकेडमिक डिग्री के बजाय स्किल्स, काम करने के तरीके और मापने योग्य बिज़नेस इम्पैक्ट को ज़्यादा अहमियत दे रहे हैं।

अपनी कमाई के बारे में बताने के बावजूद, जैन ने ज़ोर देकर कहा कि उनकी पोस्ट का मकसद अपनी आर्थिक सफलता का दिखावा करना नहीं था। इसके बजाय, उन्होंने कहा कि इसका मकसद उस आम धारणा को चुनौती देना था कि सिर्फ़ IIT की डिग्री ही करियर में सफलता की गारंटी देती है।

CWG 2026 Medal List: ग्लासगो में भारत ने जीते कितने मेडल? देखें गोल्ड-सिल्वर-ब्रॉन्ज की पूरी लिस्ट और मेडल टैली

Commonwealth Games 2026 Medal List: 11 दिनों तक चले रोमांचक मुकाबलों के बाद ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 का शानदार समापन हो गया है। रविवार 2 अगस्त को एक रंगारंग समापन समारोह के साथ राष्ट्रमंडल खेलों का फ्लैग और बेटन अगले मेजबान देश भारत को सौंप दिया गया। भारतीय दल ने ग्लासगो में कई पारंपारिक और पदक दिलाने वाले खेलों (जैसे शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी और टेबल टेनिस) को शामिल न किए जाने के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने कुल 39 पदक (13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य) जीतकर मेडल टैली में चौथा स्थान हासिल किया है।

2030 में अहमदाबाद करेगा शताब्दी संस्करण की मेजबानी

समारोह के दौरान स्कॉटलैंड के अधिकारियों ने राष्ट्रमंडल खेल संघ का ध्वज और बेटन भारतीय प्रतिनिधियों ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को सौंपा।

वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन भारत के अहमदाबाद शहर में होगा। ये इन खेलों का 100वां यानी शताब्दी संस्करण होगा। भारत इससे पहले 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों का सफल आयोजन कर चुका है। इसके साथ ही भारत, ऑस्ट्रेलिया के बाद एक से अधिक बार इन खेलों की मेजबानी करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा।

राष्ट्रमंडल खेल 2026: अंतिम मेडल टैली में टॉप 5 देश

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 की पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपना वर्चस्व कायम करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। ऑस्ट्रेलिया कुल 171 पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जिसमें 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य पदक शामिल हैं। इंग्लैंड ने 29 स्वर्ण, 45 रजत और 36 कांस्य पदक जीतकर कुल 110 पदकों के साथ दूसरा स्थान प्राप्त किया। जबकि कनाडा 19 स्वर्ण, 20 रजत और 23 कांस्य मिलाकर कुल 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

भारत के खाते में आए 39 मेडल

भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदकों के साथ कुल 39 मेडल जीतकर तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। मेजबान स्कॉटलैंड ने भी कुल 39 पदक जीते। लेकिन उसके खाते में 13 स्वर्ण, 9 रजत और 17 कांस्य पदक आए। भारत के पास स्कॉटलैंड से अधिक रजत पदक (17) होने के कारण भारतीय दल पदक तालिका में पांचवें स्थान पर रहे स्कॉटलैंड से ऊपर चौथे स्थान पर रहा।

खेलों में भारत का प्रदर्शन: बॉक्सिंग का रहा दबदबा

भारतीय एथलीटों ने मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा स्पोर्ट्स और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन किया। मुक्केबाजी भारत का सबसे सफल खेल रहा, जिसने कुल 10 पदक दिलाए (7 स्वर्ण और 3 रजत)। ट्रैक एंड फील्ड और पैरा एथलीट्स ने कई ऐतिहासिक पदक जीते। जूडोकाओं ने अहम पदक जोड़े, जबकि वेटलिफ्टरों ने भारत के मेडल खाते को मजबूती दी। हालांकि जुडोका तुलिका मान को एंटी-डोपिंग नियमों के तहत सस्पेंड होने के कारण खेलों से बाहर होना पड़ा, जो भारत के लिए एक शुरुआती झटका था।

CWG 2026: भारत के पदक विजेताओं की पूरी लिस्ट

1- बॉक्सिंग (Boxing) – 10 मेडल (7 Gold, 3 Silver)

गोल्ड: प्रीति पवार (महिला 51 किग्रा)

गोल्ड: साक्षी चौधरी (महिला 54 किग्रा)

गोल्ड: जैस्मिन लंबोरिया (महिला 57 किग्रा)

गोल्ड: प्रिया घनघस (महिला 60 किग्रा)

गोल्ड: अरुंधति चौधरी (महिला 66 किग्रा)

गोल्ड: सचिन सिवाच (पुरुष 55 किग्रा)

गोल्ड: अंकुश पंघाल (पुरुष 65 किग्रा)

सिल्वर: लवलीना बोरगोहेन (महिला 75 किग्रा)

सिल्वर: जादुमणि सिंह (पुरुष 50 किग्रा)

सिल्वर: नरेंद्र बेरवाल (पुरुष +90 किग्रा)

2- पैरा एथलेटिक्स – 6 मेडल (3 Gold, 2 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: शर्मीला ढाका (महिला शॉट पुट F57)

गोल्ड: दिलीप गावित (पुरुष 100 मीटर T47)

गोल्ड: सोमन राणा (पुरुष शॉट पुट F57)

सिल्वर: मोहम्मद बासिल (पुरुष 100 मीटर T47)

सिल्वर: शुभम जुयाल (पुरुष शॉट पुट F57)

कांस्य: शिल्पा शैला (महिला शॉट पुट F57)

3- जूडो – 4 मेडल (2 Gold, 1 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: अस्मिता डे (महिला 48 किग्रा)

गोल्ड: हर्ष सिंह (पुरुष 60 किग्रा)

सिल्वर: यामिनी मौर्या (महिला 57 किग्रा)

कांस्य: उन्नति शर्मा (महिला 63 किग्रा)

4- भारोत्तोलन – 8 मेडल (1 Gold, 6 Silver, 1 Bronze)

गोल्ड: सायखोम मीराबाई चानू (महिला 48 किग्रा)

सिल्वर: ऋषिकान्त सिंह (पुरुष 60 किग्रा)

सिल्वर: मुथुपंडी राजा (पुरुष 65 किग्रा)

सिल्वर: ज्ञानेश्वरी यादव (महिला 53 किग्रा)

सिल्वर: वल्लूरी अजय बाबू (पुरुष 79 किग्रा)

सिल्वर: हरजिंदर कौर (महिला 69 किग्रा)

सिल्वर: लवप्रीत सिंह (पुरुष +110 किग्रा)

कांस्य: बिंद्यारानी देवी (महिला 58 किग्रा)

5- एथलेटिक्स – 10 मेडल (5 Silver, 5 Bronze)

सिल्वर: नीरज चोपड़ा (पुरुष भाला फेंक / Javelin Throw)

सिल्वर: मुरली श्रीशंकर (पुरुष लंबी कूद / Long Jump)

सिल्वर: प्रवीण चित्रवेल (पुरुष ट्रिपल जंप / Triple Jump)

सिल्वर: सर्वेश अनिल कुशारे (पुरुष ऊंची कूद / High Jump)

सिल्वर: गुलवीर सिंह (पुरुष 10,000 मीटर दौड़)

कांस्य: यशवीर सिंह (पुरुष भाला फेंक / Javelin Throw)

कांस्य: सेल्वा प्रभु थिरुमारन (पुरुष ट्रिपल जंप / Triple Jump)

कांस्य: गुलवीर सिंह (पुरुष 5,000 मीटर दौड़)

कांस्य: तेजस्विन शंकर (पुरुष डेकाथलॉन / Decathlon)

कांस्य: सीमा कालीरामना (महिला डिस्क थ्रो / Discus Throw)

6 – पैरा पावरलिफ्टिंग – 1 मेडल (1 Bronze)

कांस्य : झंडू कुमार (पुरुष हैवीवेट)

ग्लासगो 2026 के सफल समापन के बाद अब भारतीय खेल जगत की निगाहें 2030 अहमदाबाद राष्ट्रमंडल खेलों पर टिक गई हैं।

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Top News 31 July: ITR भरने की आखिरी तारीख आज, 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, भिवंडी हादसा समेत 5 बड़ी खबरें

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Top News 31 July : आज इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख है। मौसम विभाग ने 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। भिवंडी में 4 मंजिला इमारत गिरी। संसद में एंटी पेपर लिक बिल पास होने के बाद पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर जारी किया वीडियो मैसेज। प्रियंका गांधी की  IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई टिप्पणी पर बवाल। 31 जुलाई की बड़ी खबरें : 

 

ITR भरने की आज आखिरी तारीख

आईटीआर भरने की आज आखिरी तारीख है। अगर आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो जल्द कर लें। समय पर आईटीआर भरने से आपका टैक्स रिकॉर्ड सही रहता है, ज्यादा कटा हुआ टैक्स वापस (रिफंड) मिल सकता है और बाद में जुर्माने जैसी परेशानी से बचा जा सकता है। ALSO READ: ITR Filing 2026 Deadline: 31 जुलाई से पहले ऐसे भरें आयकर रिटर्न, पेनल्टी से बचें

 

IMD का 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दो सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र और एक पश्चिमी विक्षोभ आने वाले दिनों में कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश करा सकते हैं। देश के 17 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। ALSO READ: IMD का बड़ा अलर्ट: 17 राज्यों में भारी बारिश का खतरा, क्या है बाढ़ प्रभावित गुजरात-असम का हाल?

 

भिवंडी में 4 मंजिला इमारत गिरी

महाराष्‍ट्र के भिवंडी में देर रात एक निर्माणाधिन 4 मंजिला इमारत का एक हिस्सा गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई। NDRF समेत कई टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी।

 

एंटी पेपर लीक बिल पास होने पर क्या बोले पीएम मोदी?

संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पारित होने का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर अपने संदेश में कहा कि सरकार देश की परीक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने दोहराया कि पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। परीक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के लिए आने वाले समय में कई और कदम उठाए जाएंगे। ALSO READ: Anti Paper Leak Bill 2026 : पेपर लीक विरोधी बिल पास होने पर इंस्टाग्राम पर PM मोदी का संदेश, पेपर लीक गैंग पर होगी सख्त कार्रवाई

 

प्रियंका गांधी की ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर बवाल

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 214 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के प्रति अनुचित बताया गया है। ALSO READ: Priyanka Gandhi Remark : प्रियंका गांधी की 'गौमूत्र एक्सपर्ट' टिप्पणी पर 214 शिक्षाविदों का खुला पत्र, IIT मद्रास निदेशक के समर्थन में उठी आवाज

Anti Paper Leak Bill 2026 : पेपर लीक विरोधी बिल पास होने पर इंस्टाग्राम पर PM मोदी का संदेश, पेपर लीक गैंग पर होगी सख्त कार्रवाई

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संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पारित होने का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि सरकार देश की परीक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने दोहराया कि पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक विरोधी विधेयक का संसद से पारित होना भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

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उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के लिए आने वाले समय में कई और कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने देशवासियों से विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने कहा कि दशकों से केंद्र और राज्य की अलग-अलग सरकारें पेपर लीक की घटनाओं से निपटती रही हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में सुधार करना जरूरी हो गया था। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से निपटने के लिए सख्त कानून की आवश्यकता थी।

 

प्रधानमंत्री ने अपने करीब 2 मिनट 26 सेकंड के वीडियो में कहा कि सरकार ने संसद में विधेयक पेश किया था और उनके वादे के मुताबिक दोनों सदनों में बड़ी संख्या में सांसदों ने इस पर विस्तार से चर्चा की। अब दोनों सदनों ने सख्त प्रावधानों वाले इस विधेयक को पारित कर दिया है।

 

पीएम मोदी ने कहा कि विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है और यह काम आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी स्थिति को लंबे समय तक बने नहीं रहने देगी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने की अपील की।

राज्यसभा में ध्वनिमत से पास हुआ बिल

'Public Examination (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026' को गुरुवार को राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस दौरान कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया। इससे पहले बुधवार को लोकसभा ने इस विधेयक को मंजूरी दी थी। अब विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

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पेपर लीक पर 5 से 10 साल तक की सजा

 

संशोधन विधेयक में पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल में शामिल लोगों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, संगठित अपराध के मामलों में कम से कम 7 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ऐसे मामलों में कम से कम 10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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यह विधेयक ऐसे समय में पारित हुआ है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सरकार का दावा है कि नए कड़े प्रावधान परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की मुलाकात, किन मुद्दों पर हुई चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति से भेंट की। राष्ट्रपति कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मुलाकात की तस्वीरें शेयर कीं।

राष्ट्रपति कार्यालय ने पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की। 

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एक सप्ताह के सफल विदेश दौरे के बाद रविवार को भारत लौटी हैं। इस दौरान उन्होंने मोल्दोवा, नॉर्थ मैसेडोनिया और रोमानिया का दौरा किया था।  राष्ट्रपति के इस दौरे को भारत के इन यूरोपीय देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।

Priyanka Gandhi Remark : प्रियंका गांधी की ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 214 शिक्षाविदों का खुला पत्र, IIT मद्रास निदेशक के समर्थन में उठी आवाज

priyanka gandhi

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) की IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को लेकर की गई कथित ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ टिप्पणी पर 200 से अधिक शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति जताई है। 214 शिक्षाविदों के हस्ताक्षर वाले एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद के प्रति अनुचित बताया गया है।

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यह विवाद उस समय सामने आया जब वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि को शामिल किए जाने पर सवाल उठाए थे।

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परीक्षा सुधारों के लिए गठित टास्क फोर्स में शामिल हैं वी. कामकोटि

 

परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित टास्क फोर्स की अध्यक्षता Infosys के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इसमें पूर्व ISRO चेयरमैन एस. सोमनाथ, पूर्व IB निदेशक तपन डेका, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। यह टास्क फोर्स NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार की ओर से घोषित कई उपायों में से एक है। इन घटनाक्रमों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

 

214 शिक्षाविदों ने खुले पत्र में क्या कहा?

 

214 शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित खुले पत्र में प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर निराशा जताई गई है। पत्र में कहा गया है कि IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि को ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ बताना, चाहे व्यंग्य के तौर पर कहा गया हो या राजनीतिक बयानबाजी के रूप में, गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि को देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में से एक बताया है। पत्र में कहा गया कि इतिहास बताता है कि कई ऐसे विचार जिन्हें कभी असंभव माना गया था, बाद में वैज्ञानिक रूप से सही साबित हुए, जबकि कई व्यापक रूप से स्वीकार की गई धारणाओं को बाद में खारिज कर दिया गया।

 

खुले पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में National Informatics Centre (NIC) के पूर्व महानिदेशक डॉ. सीएसआर प्रभु, हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अप्पा राव पोडिले, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, मुंबई विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरडी कुलकर्णी और IIT धारवाड़ के निदेशक डॉ. वीआर देसाई समेत कई शिक्षाविद शामिल हैं।

 

लोकसभा में प्रियंका गांधी ने क्या कहा था?

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में प्रोफेसर वी. कामकोटि की भूमिका पर सवाल उठाया था। उन्होंने सदन में टास्क फोर्स के सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा था कि इसमें एक पूर्व IB प्रमुख, एक IT कंपनी के मालिक और एक ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ हैं।

 

उनकी इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों में से एक को निशाना बनाया है। ठाकुर ने प्रियंका गांधी की सदन में बोलने की शैली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वह गंभीर मुद्दों पर बात करते समय मुस्कुराकर और मासूम चेहरा बनाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश करती हैं।

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बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज

प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद अब 214 शिक्षाविदों के खुले पत्र ने इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया है। शिक्षाविदों ने प्रोफेसर कामकोटि के वैज्ञानिक और तकनीकी योगदान का उल्लेख करते हुए सार्वजनिक बहस में व्यक्तियों के प्रति सम्मानजनक भाषा के इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। परीक्षा सुधारों और NEET-UG से जुड़े विवाद के बीच टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

कौन हैं जगदीश अफले? IIT बॉम्बे से पढ़े इंजीनियर को राम मंदिर ट्रस्ट का सचिव नियुक्त किया गया

Jagdish Aphale: राम मंदिर में दान में मिले सामान की कथित चोरी के विवाद के बीच, बुधवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जगदीश अफले को अपना पहला सेक्रेटरी नियुक्त किया है। News 18 के अनुसार, अफले रोजाना के कामकाज की देखरेख करेंगे। हालांकि, अफले की नियुक्ति पर 2 सितंबर को ट्रस्ट की एग्जीक्यूटिव मीटिंग में औपचारिक रूप से मुहर लगाई जाएगी।

राम मंदिर ट्रस्ट ने बनाया पहला सेक्रेटरी पद

राम मंदिर में कथित चांदी चोरी मामले को लेकर मचे राजनीतिक विवाद के बीच ट्रस्ट ने सचिव का नया पद बनाया है। यह पद सीईओ (CEO) के पद से अलग होगा। सीईओ पद के लिए जहां ट्रस्ट ने पहले सार्वजनिक रूप से आवेदन मांगे थे और इसके लिए एक तय जॉब डिस्क्रिप्शन जारी किया गया था, वहीं सचिव की नियुक्ति ट्रस्ट की कार्यकारिणी समिति के फैसले के आधार पर की गई है।

जगदीश अफले कौन हैं?

पुणे के रहने वाले जगदीश अफले, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे (IIT) के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने सिविल इंजीनियर के तौर पर ट्रेनिंग ली है। उनके पास इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में BTech और MTech की डिग्री है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्रोजेक्ट मैनेजर के तौर पर अफले ने अयोध्या राम मंदिर के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह उस मुख्य इंजीनियरिंग टीम का हिस्सा थे, जिसने नींव के काम से लेकर सुपरस्ट्रक्चर तक के प्रोजेक्ट को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बताया जाता है कि अफले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी हैं और कई सालों से संगठन से जुड़े हुए हैं।

रिटायरमेंट के बाद भारत लौटने से पहले, अफले ने कई मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ काम किया है। अपने करियर के दौरान उन्होंने यूरोप और अमेरिका में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं हैं।

अब जगदीश अफले अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को रिपोर्ट करेंगे और ट्रस्ट में एक पदाधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

राम मंदिर दान चोरी मामले में ताजा अपडेट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए IGP किरण एस. की अगुवाई में चार सदस्यों वाली SIT के गठन का संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश सरकार से जांच टीम में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने को कहा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि “सुधारात्मक कदम उठाने होंगे” और “पारदर्शिता सुनिश्चित करने” के लिए कदम उठाए जाएंगे। बेंच ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को दो हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया। राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि SIT में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाएगा।

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IIT में एडमिशन नहीं मिला तो छात्र ने कर दी वेबसाइट हैक, अब मिल सकता है अपनी काबिलियत दिखाने का मौका

IIT कानपुर में साइबर सिक्योरिटी प्रोग्राम में दाखिला न मिलने के बाद एक छात्र का मामला चर्चा में आ गया है। छात्र ने कथित तौर पर IIT कानपुर और IIT मद्रास की वेबसाइट तक पहुंच बनाकर अपनी तकनीकी क्षमता दिखाने की कोशिश की। उसका कहना है कि उसका मकसद किसी सिस्टम को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि अपनी साइबर सिक्योरिटी स्किल साबित करना था। इस घटना के बाद जहां एक ओर हैकिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर IIT कानपुर छात्र की प्रतिभा को परखने और उसे सही दिशा देने पर विचार कर रहा है।

संस्थान अब कानूनी कार्रवाई से पहले उसकी तकनीकी योग्यता की जांच करने की तैयारी में है। ये मामला साइबर टैलेंट, सुरक्षा और युवाओं को मौके देने को लेकर नई बहस शुरू कर चुका है। वेबसाइट पर उसने संदेश छोड़ा—”Site is hacked. All I need is just a fair chance.” यानी उसे सिर्फ एक निष्पक्ष मौका चाहिए था।

छात्र का दावा

मामला सामने आने के बाद छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और Reddit पर कथित हैकिंग के स्क्रीनशॉट साझा किए। उसने दावा किया कि उसका उद्देश्य किसी सिस्टम को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि अपनी साइबर सिक्योरिटी स्किल्स साबित करना था। छात्र के मुताबिक, उसने एडमिशन के लिए आवेदन किया, फीस जमा की, जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोजेक्ट्स की जानकारी भी दी थी।

हैकाथॉन में मौका नहीं मिलने से था नाराज

छात्र ने बताया कि सभी प्रक्रिया पूरी करने के बावजूद उसका चयन नहीं हुआ। साथ ही, वह एडमिशन प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैकाथॉन में भी शामिल नहीं हो सका। इसी के बाद उसने अपनी तकनीकी क्षमता दिखाने के लिए वेबसाइट में सेंध लगाने का दावा किया।

IIT कानपुर अब जांचेगा छात्र की काबिलियत

PTI की रिपोर्ट के अनुसार,  IIT कानपुर के डायरेक्टर मणिंद्र अग्रवाल ने बताया कि छात्र को इस सत्र में एडमिशन देना संभव नहीं है क्योंकि प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि, संस्थान अब उसे बुलाकर एक विशेष टेस्ट के जरिए उसकी तकनीकी क्षमता जांचने पर विचार कर रहा है। अगर छात्र अपनी योग्यता साबित करता है, तो अगले एडमिशन चक्र में उसे मौका दिया जा सकता है।

वेबसाइट के कुछ हिस्सों तक पहुंच की पुष्टि

IIT कानपुर के निदेशक ने बताया कि छात्र ने IIT कानपुर और IIT मद्रास की आधिकारिक वेबसाइट के कुछ हिस्सों तक पहुंच बनाई थी। उन्होंने कहा कि फैकल्टी सदस्य और इंजीनियर छात्र से बातचीत करेंगे और उसे समझाएंगे कि बिना अनुमति किसी भी कंप्यूटर सिस्टम में प्रवेश करना कानून के खिलाफ है।

FIR दर्ज करने का था विचार, फिर बदला फैसला

IIT कानपुर ने शुरुआत में छात्र के खिलाफ FIR दर्ज कराने पर विचार किया था। लेकिन बाद में संस्थान ने पहले उसके दावों और तकनीकी क्षमता की जांच करने का फैसला लिया। अधिकारी के मुताबिक, IIT कानपुर साइबर सिक्योरिटी क्षेत्र में प्रतिभाशाली युवाओं को प्रोत्साहित करता रहा है।

पहले भी साइबर टैलेंट को मिला है मौका

इससे पहले IIT कानपुर ने एक ऐसे युवा को अपने C3iHub में काम करने का अवसर दिया था, जिसने CBSE के ऑनलाइन स्क्रीन-मार्किंग पोर्टल में सुरक्षा खामियों का पता लगाया था। अब इस छात्र का मामला भी चर्चा में है, जहां एक ओर अनधिकृत हैकिंग को लेकर सवाल हैं, वहीं दूसरी ओर उसकी साइबर स्किल्स को सही दिशा देने की संभावना भी दिखाई दे रही है।

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