AI में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम, जानिए भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा कितना असर

अमेरिका में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में आई बड़ी गिरावट ने कई एशियाई शेयर बाजारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिका में सेमीकंडक्टर्स शेयरों में लगातार 8 सत्रों में बिकवाली देखने को मिली। यह 2008 के बाद बिकवाली का सबसे लंबा सिलसिला था। इसका असर नैस्डेक 100 पर भी पड़ा। अप्रैल 2005 के बाद इसमें सबसे बड़ी गिरावट आई।

आईआई शेयरों की बदौलत अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी

पिछले 1.5-2 सालों में अमेरिका में एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इस सेक्टर को चिप और दूसरे हार्डवेयर सप्लाई करने वाली एशियाई कंपनियों के शेयरों में भी खूब तेजी आई है। इनमें दक्षिण कोरिया और ताइवान की कई कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका में एआई बूम जारी रखने के लिए नए निवेश की जरूरत है। पहले ही इस सेक्टर में काफी ज्यादा निवेश हो चुका है।

एआई में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम

अगर अमेरिका में एआई में निवेश की रफ्तार सुस्त पड़ती है तो इसका असर इस सेक्टर से जुड़ी एशियाई कंपनियों पर भी पड़ेगा। इसका संकेत दिखने लगा है। नियोक्लाउड ऑफर करने वाली कंपनी CoreWeave के बॉन्ड्स की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इससे इस सेक्टर पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है। इनवेस्टर्स सवाल पूछ रहे है कि एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों ने जो निवेश किया है, क्या उसका रिटर्न मिलने जा रहा है? क्या AI की डिमांड इतनी है, जिससे इन कंपनियों के रेवेन्यू को सपोर्ट मिलेगा?

इंटरेस्ट रेट बढ़ने से एआई कंपनियों के लिए बढ़ रही इनवेस्टमेंट कॉस्ट

CoreWeave के शेयरों में 16 अक्तूबर को 12 फीसदी गिरावट आई। क्रूड की बढ़ती कीमतों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों के लिए चिंता और बढ़ा दी है। क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ रही है, जिससे काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट्स बढ़ा रहे हैं। इससे इससे एआई कंपनियों के लिए नए निवेश की लागत भी बढ़ रही है। पिछले महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ा चुका है। अब नजरें इस महीने की फेड की पॉलिसी पर लगी हैं।

ताइवान और दक्षिण कोरिया की चिप कंपनियों को हो सकती है दिक्कत

ताइवान की TSMC, दक्षिण कोरिया की SK Hynix और Samsung Electronics जैसी कंपनियां AI कंप्यूटिंग के लिए जरूरी चिप और मेमोरी की सप्लाई करती हैं। इन कंपनियों की कमाई एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले इनवेस्टमेंटम पर निर्भर है। अगर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश घटता है तो इन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। Gartner ने चेतावनी दी है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 3.5 ट्रिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट को 2030 तक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टमेंट के अनुपात में रेवेन्यू नहीं दिख रहा।

कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में 236% तक उछाल

Union Bancaire Privee में मैनेजिंग डायरेक्टर वी-सेर्न लिंग ने कहा, “अगर हायरपरस्केलर्स और नियोक्लाउड्स को निवेश जारी रखने के लिए फंड नहीं मिलता है तो इसका असर टीएसएमसी, सैमसंग और SK Hynix जैसी एशियाई कंपनियों पर पड़ेगा। उन्हें मिलने वाले ऑर्डर्स घट जाएंगे।” इस साल MSCI Asia-Pacific Index की सबसे ज्यादा चढ़ने वाली 10 कंपनियों से 8 कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियां हैं। इनमें से हर कंपनी का शेयर कम से कम 236 फीसदी चढ़ा है।

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भारतीय बाजार पर इस वजह से नहीं पड़ेगा असर 

जहां तक भारत की बात है तो इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत में एआई और सेमीकंडक्टर्स बनाने वाली कंपनियां नहीं हैं। यहीं वजह है कि पिछले 1-2 सालों में जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों में तेजी आई तब भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। यहां तक की एआई बूम का निगेटिव असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा है। अब जब एआई और चिप शेयर गिर रहे हैं तो भारतीय आईटी शेयरों में तेजी दिख रही है।

 

FPI ने अक्टूबर में अब तक बेचे ₹52100 करोड़ के भारतीय शेयर, किन वजहों से बने हुए हैं सेलर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 52,100 करोड़ रुपये निकाले हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिका में बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय शेयरों से 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे।

इससे पहले जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का निवेश किया था। अक्टूबर की ताजा सेलिंग के साथ विदेशी निवेशक साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 3.12 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चॉइस वेल्थ के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौड़ का कहना है कि अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर हाई यील्ड, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अमेरिका में महंगाई का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंकाओं को बढ़ा रहा है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी एसेट्स अधिक आकर्षक हो गए हैं।

यह भी कहा कि महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। इसके अलावा, उत्तर एशियाई बाजारों में आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के कारण विदेशी पूंजी भारत के बजाय उन बाजारों की ओर जा रही है।

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16 अक्टूबर को की थी खरीद

16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने कुछ बाइंग की थी। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर यील्ड के कुछ नीचे आने और रुपये में मजबूती के कारण ऐसा हुआ था। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्व पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और शुक्रवार को बाइंग इस बात का संकेत है कि बाजार में निवेशकों की धारणा स्थिर हो सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में रिकवरी की राह में अब भी जोखिम बनी हुई हैं।

फिनटेक कंपनी में 20% का अपर सर्किट, ₹189 करोड़ की ब्लॉक डील से रॉकेट बना स्टॉक

फिनटेक कंपनी One Mobikwik Systems के शेयर मंगलवार, 6 अक्टूबर को 20% चढ़ गए। शेयर 242.14 रुपये के भाव पर पहुंच गया। कंपनी के करीब 79.20 लाख शेयरों में ब्लॉक डील हुई।

यह कंपनी की कुल इक्विटी का करीब 10% हिस्सा है। इन शेयरों का औसत सौदा भाव 240 रुपये रहा। इस हिसाब से पूरी डील करीब 189 करोड़ रुपये की रही।

ब्लॉक डील के बाद शेयर में तेजी

ब्लॉक डील के बाद शेयर में जोरदार खरीदारी दिखी। यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र है, जब One Mobikwik का शेयर चढ़ा है।

दो कारोबारी सत्रों में शेयर करीब 23% ऊपर आ चुका है। हालांकि, इस बड़ी डील में खरीदार और बेचने वाला कौन था, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

Mobikwik में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

जून 2026 तक One Mobikwik Systems में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 25.08% थी। वहीं, पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 74.92% हिस्सेदारी थी।

प्रमोटर्स में बिपिन प्रीत सिंह के पास 14.52% और उपासना रूपकृष्णन टाकु के पास 10.11% हिस्सेदारी थी। प्रमोटर ग्रुप के पास दो फैमिली ट्रस्ट के जरिए भी शेयर हैं।

FPI और Bajaj Finance की हिस्सेदारी

पब्लिक शेयरहोल्डिंग में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की हिस्सेदारी 4.48% थी। इसमें Government Pension Fund Global की 2.99% और FLC Investco की 1.16% हिस्सेदारी शामिल थी।

इंश्योरेंस कंपनियों के पास 2.69% हिस्सेदारी थी। इस पूरी हिस्सेदारी में Bajaj Life Insurance शामिल है। वहीं, Bajaj Finance के पास कंपनी की 10.13% हिस्सेदारी थी।

इसके अलावा Times Internet की 1.91% और Elimath Advisors Private Limited की 1.75% हिस्सेदारी थी। जून तिमाही के अंत में 1.62 लाख रिटेल शेयरहोल्डर्स के पास कंपनी की 36.95% हिस्सेदारी थी।

IPO प्राइस के करीब पहुंचा शेयर

मंगलवार की तेजी के बाद One Mobikwik Systems का शेयर 242.14 रुपये पर बंद हुआ। अब यह अपने IPO प्राइस 279 रुपये के काफी करीब पहुंच गया है।

2026 में शेयर अब तक 5% से ज्यादा चढ़ चुका है। हालांकि, पिछले 12 महीनों का प्रदर्शन अभी भी कमजोर है। इस दौरान शेयर करीब 13% नीचे है।

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HDFC Bank में आ सकती है जोरदार तेजी! Emkay ने 74% तक उछाल का अनुमान दिया

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC Bank के शेयर में सोमवार को दबाव रहा। शुरुआती तेजी के बावजूद शेयर 2% से ज्यादा गिरकर ₹704.55 पर बंद हुआ। इस बीच Emkay Research ने बैंक के शेयर पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने ₹1,225 का टारगेट दिया है। यानी मौजूदा भाव से करीब 74% की तेजी की गुंजाइश है।

ब्रोकरेज का कहना है कि लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन के बाद HDFC Bank का वैल्यूएशन अब आकर्षक दिख रहा है। अगर नए नेतृत्व में कारोबार सुधरता है और FPI आउटफ्लो कम होता है, तो शेयर में री-रेटिंग हो सकती है।

नेतृत्व का संकट अब पीछे

HDFC Bank में नेतृत्व को लेकर बना लंबा असमंजस अब खत्म हो गया है। RBI ने 1 अक्टूबर को अनूप बागची को बैंक का नया MD और CEO बनाने की मंजूरी दी थी। उनका तीन साल का कार्यकाल 27 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा।

Emkay का मानना है कि बागची की नियुक्ति से बैंक के निवेशकों और ग्राहकों का भरोसा लौट सकता है। बागची का ICICI Bank Group में लंबा अनुभव रहा है। उनका नेतृत्व का तरीका ज्यादा दखल देने वाला नहीं है। वह बड़े रणनीतिक मुद्दों पर फोकस करते हैं और टीम को काम करने की आजादी देने में भरोसा रखते हैं।

HDFC Bank के लिए टारगेट

ब्रोकरेजरेटिंगटारगेट प्राइस
संभावित तेजी

Emkay ResearchBuy₹1,22574%
Motilal OswalBuy₹92531%
PL CapitalBuy₹95035%
ICICI SecuritiesBuy₹92030.60%

अब बैंक के सामने क्या चुनौती है?

नए MD के सामने कई अहम काम होंगे। सबसे पहले वरिष्ठ प्रबंधन में स्थिरता लानी होगी। इसके साथ ही डिपॉजिट ग्रोथ को फिर रफ्तार देनी होगी।

नई ब्रांचों की प्रोडक्टविटी सुधारना भी जरूरी होगा। बैंक को टेक्नोलॉजी और डिजिटल क्षमता मजबूत करनी होगी। इसके अलावा मिस-सेलिंग जैसे पुराने मामलों से जुड़े प्रोसेस में भी सुधार करना होगा।

लोन और डिपॉजिट ग्रोथ पर नजर

Emkay को HDFC Bank के कारोबार में आगे सुधार की उम्मीद है। ब्रोकरेज ने FY27 में लोन ग्रोथ 16% और डिपॉजिट ग्रोथ 17.1% रहने का अनुमान लगाया है। FY28 और FY29 में लोन ग्रोथ 18% रहने का अनुमान है।

FY27 में बैंक का नेट प्रॉफिट करीब ₹86,189 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके बाद FY28 में यह करीब ₹99,738 करोड़ और FY29 में करीब ₹1.22 लाख करोड़ पहुंच सकता है।

HDFC बैंक पर बाकी ब्रोकरेज की राय

मोतीलाल ओसवाल ने भी HDFC Bank पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इसके साथ ही ₹925 का टारगेट प्राइस दिया है। यह 31.3% की तेजी की संभावना दिखाता है।

HDFC Bank के लिए PL Capital ने टारगेट प्राइस ₹950 रखा है, जो करीब 34.9% की तेजी दिखाता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, अब बैंक के सामने बैलेंस शीट ग्रोथ, डिपॉजिट, NIM और क्रेडिट कॉस्ट से जुड़ी चुनौतियों को बेहतर करने की जिम्मेदारी होगी।

ICICI Securities ने ₹920 का टारगेट दिया है। यह टारगेट करीब 30.6% की तेजी दिखाता है। रिपोर्ट में बागची की नियुक्ति को बैंक के लिए नया दौर शुरू होने वाला कदम बताया गया है।

HDFC Bank के शेयरों का हाल

HDFC बैंक का शेयर सोमवार को 2.31% की गिरावट के साथ 704.55 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, शुरुआत हरे निशान में हुई और स्टॉक पिछले बंद स्तर से करीब 2% उछल गया। लेकिन फिर मुनाफावसूली हावी हो गई।

पिछले 6 महीने में स्टॉक 8.62% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 27% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। बैंक का मार्केट कैप 5.40 लाख करोड़ रुपये है।

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Rupee Falls: 99 तक गिर सकता है रुपया! Kotak Securities ने कहा- ये लेवल टूटा तो बढ़ेगी मुश्किल

Rupee Falls: रुपया जल्द ही डॉलर के मुकाबले 97 तक गिर सकता है। अगर 97 का स्तर टूट गया, तो यह 98.5 से 99 तक भी जा सकता है। यह अनुमान Kotak Securities के करेंसी, कमोडिटी और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी ने दिया है।

बनर्जी के मुताबिक रुपये पर कई तरफ से दबाव है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है। इंपोर्ट महंगा हुआ है। ग्लोबल यील्ड भी ऊंची है। इन सबका असर रुपये पर दिख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत है। लेकिन ग्लोबल हालात रुपये के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं।

FPI की बिकवाली से दबाव

इस महीने अब तक विदेशी निवेशक करीब 6.1 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच चुके हैं। बनर्जी के मुताबिक पिछले दो महीनों में आया करीब 90% विदेशी निवेश अब वापस निकल चुका है।

हाल में FCNR(B) के जरिए भी पैसा आया है। लेकिन इससे रुपये को तुरंत फायदा नहीं मिला। इसका बड़ा हिस्सा सीधे बाजार में जाने के बजाय RBI के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में गया है।

अगर रुपये पर दबाव और बढ़ा, तो RBI बाजार में अपना दखल बढ़ा सकता है। बनर्जी के मुताबिक ग्लोबल दबाव के कारण रुपया कमजोर बना हुआ है। ऐसे में 97 का स्तर जल्द दिख सकता है। इसके टूटने पर रुपया और गिर सकता है।

कच्चा तेल भी बढ़ा रहा चिंता

बनर्जी का कहना है कि रुपये पर कच्चे तेल का दबाव भी है। इसे सिर्फ Brent के फ्यूचर्स भाव से नहीं समझना चाहिए। स्पॉट क्रूड, फ्रेट और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमत भी मायने रखती है।

डीजल और एविएशन फ्यूल की कीमतें भी ऊंची हैं। दुनियाभर में रिफाइनरी से जुड़ी दिक्कतों के कारण इनकी कीमतों पर दबाव है। इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है। महंगा ईंधन महंगाई बढ़ा सकता है। इससे कारोबार और आम लोगों की लागत भी बढ़ती है। इसका असर रुपये पर भी पड़ सकता है।

RBI बढ़ा सकता है ब्याज दर

बनर्जी को आने वाले महीनों में RBI से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद है। उन्हें एक से ज्यादा रेट हाइक की संभावना दिखती है। दिसंबर में भी दर बढ़ सकती है।

हालांकि, उनका कहना है कि RBI सिर्फ अमेरिकी फेड के फैसले को देखकर दरें नहीं बढ़ाएगा। घरेलू महंगाई RBI के लिए ज्यादा अहम रहेगी। महंगाई को ध्यान में रखने के बाद पॉजिटिव रियल इंटरेस्ट रेट बनाए रखना भी RBI का फोकस रहेगा।

US बॉन्ड यील्ड भी परेशानी

अमेरिका में लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड तेजी से बढ़ी है। खासकर 10 साल और उससे ज्यादा अवधि वाले बॉन्ड पर दबाव है। इसे ग्लोबल मार्केट के लिए बड़ी चिंता माना जा रहा है।

बनर्जी के मुताबिक बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों की उधारी भी फंड की मांग बढ़ा रही है। इससे लंबी अवधि की यील्ड ऊंची रह सकती है।

जब तक कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतें कम नहीं होतीं, ग्लोबल यील्ड पर दबाव बना रह सकता है। लंबे समय तक ऊंची यील्ड और महंगी कमोडिटी से ग्लोबल ग्रोथ और वित्तीय बाजारों पर भी दबाव पड़ सकता है।

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Commodity Market : 7 हफ्तों के निचले स्तरों पर पहुंचे सोने-चांदी के दाम, क्रूड में फिर बड़ा उछाल

Commodity Market : कारोबारी हफ्ते की शुरुआत सोने-चांदी के लिए भारी गिरावट के साथ हुई। सोने-चांदी की कीमतें 7 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गईं और 3% से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। MCX पर सोना 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के नीचे चला गया है। वहीं, MCX पर चांदी 2.27 लाख रुपए प्रति किलो के नीचे आ गई है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना $4200 के नीचे है। जबकि इंटरनेशनल मार्केट में चांदी $62 के नीचे दिख रही है। इस बीच ब्रेंट क्रूड का भाव $107 के पार निकल गया है। महंगे क्रूड से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। डॉलर इंडेक्स भी 101 के ऊपर कायम है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी तेजी जारी। महंगाई बढ़ने पर फेड दरें बढ़ा सकता है।

वेंचुरा में कमोडिटी और CRM के हेड, एन एस रामास्वामी का कहना है कि हाल की तेजी के बाद सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है। इसकी वजह अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड में तेजी और फेडरल रिजर्व द्वारा और सख्ती बरतने की बढ़ती उम्मीदें हैं। अमेरिका की 10-साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.2% के ऊपर पहुंच गई है,जो जून 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। जबकि 30-साल की यील्ड बढ़कर लगभग 5.52% हो गई है, जो 2004 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स मज़बूत हो रहा है और बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। इस बीच अमेरिका के उम्मीद से बेहतर आर्थिक आंकड़ों ने ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों को मज़बूत किया है। सितंबर में कंपोजिट PMI बढ़कर 58.4 हो गई है,जो पांच साल से ज़्यादा समय में सबसे तेज़ रफ़्तार है।

इस हफ़्ते बाजार की नजर कोर PCE महंगाई के आंकड़ों (जो फ़ेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना है) और GDP के फाइनल आंकड़ों पर रहेगी। ये दोनों बुधवार को आने वाले हैं। वहीं,नॉन-फार्म पेरोल के आंकड़े शुक्रवार को आएंगे। इस हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत पर भी सबकी नजर रहेगी।

आगे सोने की चाल महंगाई की चिंता और ग्लोबल सेंट्रल बैंकों के संभावित एक्शन पर निर्भर करेंगी। फिलहाल इसका ट्रेंड थोड़ा कमजोर बना हुआ है। MCX गोल्ड दिसंबर 149,427 के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके लिए तत्काल रेजिस्टेंस 151,000, 153,500 और 155,500 पर है, जबकि सपोर्ट 148,000, 145,000 और 140,000 पर दिख रहा है। COMEX गोल्ड दिसंबर 4,194 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके लिए सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस 4,260 डॉलर और 4,350 डॉलर पर है,जबकि सपोर्ट 4,130, 4,050 और 4,000 डॉलर पर दिख रहा है।

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क्रूड की चाल पर एक नजर

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्रूड में फिर बड़ा उछाल देखने को मिला है। आज कच्चे तेल के दाम करीब 3% चढ़े हैं। ब्रेंट $108 के पार चला गया तो WTI $94 के ऊपर पहुंच गया है। ईरान से बातचीत की उम्मीद के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है। ट्रंप ने ईरान का स्ट्रेट खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है और ईरान पर ज्यादा मांग रखने का आरोप लगाया है। उधर, ईरान ने US के साथ भीषण जंग के लिए तैयार रहने की बात कही है। बाजार को सप्लाई संकट गहराने की आशंका है।

इक्विटी मार्केट पर क्या होगा असर?

मास्टर कैपिटल सर्विसेज़ में चीफ़ रिसर्च ऑफ़िसर रवि सिंह का कहना है कि बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों,जियोपॉलिटिकल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी चिंताओं की वजह से भारी गिरावट आई है। साथ ही FPI की बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना भी बाजार पर भारी पड़ रहा है।

FPI की तरफ से लगातार हो रही निकासी भारतीय इक्विटी पर बिकवाली का दबाव बढ़ा सकती है। डॉलर की मांग के कारण रुपये की कमजोरी बढ़ सकती है, आयातित महंगाई का जोखिम बढ़ा सकता है और बाजार में कुल लिक्विडिटी और निवेशकों का भरोसा घट सकता है।

बैंक,तेल मार्केटिंग कंपनियां,पेंट,टायर,एयरलाइंस और कच्चे तेल से जुड़े अन्य सेक्टर पर असर पड़ सकता है। डिफेंसिव,फार्मास्यूटिकल्स,हेल्थकेयर और FMCG सेक्टर तुलनात्मक रूप मजबूती दिखा सकते हैं।

निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों,ईरान-अमेरिका के बीच बन रही स्थिति,होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी खबरों,अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड,FPI फ्लो,रुपये की चाल,ग्लोबल मार्केट,घरेलू महंगाई और आने वाली कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर नजर रखनी चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market View : बाजार में चौतरफा बिकवाली, जानिए सुस्ती के इस माहौल में कहां और कैसे बन सकता है पैसा

Market View : सभी सेक्टरों में आई चौतरफा बिकवाली के कारण भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स शुरुआती कारोबार में कमजोर दिख रहे हैं और निफ्टी 22900 के नीचे आ गया है। सुबह 11 बजे के आसपास सेंसेक्स 1,030 अंक यानी 1.39 प्रतिशत गिरकर 72,865.57 पर और निफ्टी 320 अंक यानी 1.38 प्रतिशत गिरकर 22,820 पर कारोबार कर रहा था। NSE पर सबसे ज्यादा एक्टिव शेयरों में क्लीन मैक्स,एसएस रिटेल,हीरो मोटर्स, HDFC बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल थे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी के विजयकुमार कुमार का कहना है कि जुलाई और अगस्त में FPI का पैसा आने के बाद,इस महीने की शुरुआत में ही इसके नेगेटिव होने का ट्रेंड साफ दिखने लगा था। यह ट्रेंड जारी रहा और 25 अगस्त तक एक्सचेंजों के ज़रिए कुल इक्विटी आउटफ्लो (विदेशी पैसे का बाहर जाना) 25,682 करोड़ रुपये तक पहुच गया। साथ ही,प्राइमरी मार्केट के ज़रिए FPI निवेश का ट्रेंड भी जारी है और इस महीने की 25 तारीख तक कुल निवेश 8,551 करोड़ रुपये रहा है।

एक्सचेंज के जरिए बेचने और प्राइमरी मार्केट के ज़रिए निवेश करने के इस ट्रेंड की वजह से इस साल एक्सचेंज के जरिए कुल FPI बिक्री 2,95,971 करोड़ रुपये और इसी दौरान प्राइमरी मार्केट के ज़रिए कुल निवेश 54,398 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

US बॉन्ड यील्ड ज्यादा होने और भारत के IPO मार्केट से बेहतर रिटर्न मिलने की वजह से इस ट्रेंड के जारी रहने की संभावना है। FPI निवेश में एक और अहम ट्रेंड यह है कि भले ही वे लार्ज-कैप शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं,लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगातार खरीदारी कर रहे हैं। FPIs मार्केट के मोमेंटम (तेजी या मंदी के रुख) को भी फॉलो कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इकोनॉमी और मार्केट में दो ऐसी बातें दिख रही हैं जो एक-दूसरे के विपरीत हैं और इन पर ध्यान देना जरूरी है। इकोनॉमी मजबूत बनी हुई है और कंपनियों की कमाई भी बढ़ रही है,लेकिन मार्केट लगातार नीचे जा रहा है। यह घरेलू सपोर्ट के मुकाबले बाहरी मुश्किलों के हावी होने का मामला है। ब्रेंट क्रूड का $106 पर होना और US 10-ईयर बॉन्ड यील्ड का 5.2% पर होना ऐसी बड़ी मुश्किलें हैं जो मार्केट पर दबाव डाल रही हैं। जुलाई और अगस्त में खरीदार आने के बाद,FPIs सितंबर में फिर से सेलर बन गए हैं। इस स्थिति की वजह से मार्केट पर कुछ समय तक दबाव बना रहेगा।

मार्केट के नजरिए से एक अहम ट्रेंड यह है कि भले ही FPIs लार्जकैप शेयरों में बिकवाली कर रहे हैं,लेकिन वे मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की ज्यादा कीमत (वैल्यूएशन)के बावजूद उन्हें लगातार खरीद रहे हैं। असल तेजी या मोमेंटम ब्रॉडर मार्केट में ही है। माना जा रहा है कि यह दौर कुछ समय के लिए ही रहेगा।

एक तरफ लार्जकैप और दूसरी तरफ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की वैल्यूएशन में जो अंतर है,वह ज़्यादा समय तक नहीं रहेगा। आखिरकार वैल्यूएशन का अपने औसत स्तर पर वापस आना तय है। ऐसा तभी होगा जब कच्चे तेल की कीमतें और US बॉन्ड यील्ड में नरमी आएगी।

आज के लिए निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

manasjaiswal.com के मानस जायसवाल का कहना है कि निफ्टी में 23250 के ऊपर जाने पर खरीदारी करें, 23175 के स्टॉप-लॉस के साथ 23400 पर टारगेट सेट करें। वहीं, कमजोरी आने की स्थिति में 23000 के नीचे जाने पर 23100 के स्टॉप-लॉस के साथ, 22800 के टारगेट के लिए बिकवाली करें।

बैंक निफ्टी में 56000 के ऊपर जाने पर खरीदारी करें, 55700 के स्टॉप-लॉस के साथ 56600 पर टारगेट सेट करें। वहीं, कमजोरी आने की स्थिति में 55300 के नीचे जाने पर 55550 के स्टॉप-लॉस के साथ, 54750 के टारगेट के लिए बिकवाली करें।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं manasjaiswal.com के मानस जायसवाल। इनकी बैंक ऑफ महाराष्ट्रा में 83 रुपए के स्टॉप-लास के साथ, 88 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, ब्लू स्टॉर में इनकी 1539 रुपए के स्टॉप-लास के साथ, 1625 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

Top Trading Picks : कमजोर बाजार में भी शॉर्ट टर्म में करनी है बंपर कमाई, तो एक्सपर्ट्स के पसंदीदा इन शेयरों पर लगाएं दांव

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

FPI लगातार निकाल रहे पैसा, सितंबर में अब तक बेचे ₹20974 करोड़ के भारतीय शेयर; डेट मार्केट से भी मोह भंग

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी है। उन्होंने सितंबर में अब तक भारतीय शेयरों से 20,974 करोड़ रुपये निकाले हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें, बढ़ती बॉन्ड यील्ड, महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपया इसकी वजह हैं। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में हुई बिकवाली से पहले विदेशी निवेशकों ने जुलाई में भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,630 करोड़ रुपये का निवेश किया था। हालांकि, मार्च से जून तक लगातार 4 महीने भारतीय शेयरों में बिकवाली की थी।

ताजा सेलिंग के बाद साल 2026 में अब तक FPI भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.45 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये की सेलिंग की थी। 1-18 सिंतबर 2026 तक FPI ने 20,974 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे। लेकिन IPO बाजार के जरिए FPI का निवेश जारी रहा।

विदेशी निवेशकों ने भारतीय ऋण या बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली की है। सितंबर में अब तक उन्होंने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के जरिए 10,296 करोड़ रुपये, वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) के तहत 1,817 करोड़ रुपये और जनरल रूट से 1,068 करोड़ रुपये निकाले हैं।

एक्सपर्ट्स का क्या है मानना

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चॉइस वेल्थ के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौड़ का कहना है कि FPI की हालिया बिकवाली के पीछे 3 प्रमुख कारण हैं— अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और ऊंची बॉन्ड यील्ड, भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भारतीय रुपये में कमजोरी। अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने सितंबर की मीटिंग में बेंचमार्क ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके बाद ये 3.75-4 प्रतिशत हो गई हैं। इससे भारत और अमेरिका के बीच यील्ड का अंतर कम हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय एसेट्स का आकर्षण घटा है।

दूसरी ओर, ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने तेल को और महंगा कर दिया है, जिससे महंगाई और भारत के आयात बिल को लेकर​ चिंता बढ़ गई है। रुपये पर भी दबाव बना हुआ है। पिछले सप्ताह रुपये में 1.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो 4 महीने में उसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट रही। रुपया 95.92-95.96 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास कारोबार करता रहा और कारोबार के दौरान 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को भी पार कर गया।

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इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Trackk के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते का मानना है कि FPI की सितंबर की बिकवाली को मुख्य रूप से कच्चे तेल और डॉलर की स्थिति से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर केवल भारत पर ही नहीं, बल्कि दूसरे उभरते बाजारों पर भी काफी ज्यादा पड़ रहा है। आगे FPI का फ्लो ईरान-अमेरिका के बीच चल रहे टकराव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर से काफी हद तक प्रभावित होगा।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

23000 से नीचे फिसला Nifty तो बढ़ सकता है सेलिंग प्रेशर, नए हफ्ते में ये शेयर करा सकते हैं तगड़ी कमाई

निफ्टी के लिए 23,000–23,100 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया बना हुआ है और आने वाले हफ्ते में इस लेवल पर नजर रखना जरूरी होगा। ऐसा मानना है SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह का। उनका कहना है कि कुल मिलाकर मार्केट का स्ट्रक्चर कमजोर बना हुआ है। निफ्टी 50 अपने हालिया हाई 24,774 से काफी नीचे आ गया है, लेकिन 23,000 के लेवल के नीचे जाने की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। उन्होंने निफ्टी 50 को लेकर और क्या संभावना जताई, नए शुरू हो रहे सप्ताह के लिए उनके टॉप स्टॉक आइडियाज क्या हैं, आइए जानते हैं…

क्या आपको उम्मीद है कि Nifty 50 अगले हफ्ते 23,000 के सपोर्ट लेवल के ऊपर बना रहेगा, या इस बात की ज्यादा संभावना है कि इंडेक्स इस सपोर्ट के नीचे चला जाएगा?

23,000-23,100 का जोन Nifty के लिए एक अहम सपोर्ट एरिया है और आने वाले हफ्ते में इस लेवल पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि इंडेक्स अपने हालिया हाई 24,774 से तेजी से नीचे आया है, लेकिन 23,000 के नीचे जाने (ब्रेकडाउन) की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इस जोन की अहमियत को देखते हुए, इन लेवल के आसपास कुछ कंसोलिडेशन या खरीदारी का रुझान दिख सकता है। हालांकि, कुल मिलाकर मार्केट का स्ट्रक्चर कमजोर बना हुआ है। Nifty लगातार 5 हफ्तों से गिरावट के साथ बंद हुआ है और अगस्त के पीक से 6 प्रतिशत से ज्यादा नीचे आ चुका है।

इंडेक्स अपने मुख्य शॉर्ट और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेजेस से नीचे ट्रेड कर रहा है, मोमेंटम इंडिकेटर लगातार कमजोरी का संकेत दे रहे हैं। डेली RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) ‘ओवरसोल्ड’ जोन में आ गया है और वीकली RSI भी नीचे की ओर जा रहा है, जो पॉजिटिव मोमेंटम की कमी को दिखाता है। इसके अलावा, भूराजनीतिक तनाव का बढ़ना, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे बाहरी कारण निवेशकों की धारणा पर असर डाल रहे हैं। इससे बीच-बीच में उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ रहा है।

टेक्निकल नजरिए से 23,000-23,100 का दायरा 22,182 से 24,774 तक की पिछली रैली के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट और पहले के एक अहम ‘स्विंग लो’ का मजबूत संगम है। जब तक यह सपोर्ट बना रहेगा, इंडेक्स स्थिर होने और कंसोलिडेट करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, 23,000 के नीचे निर्णायक गिरावट से बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और 22,800 व 22,500 के निचले स्तरों की ओर जाने का रास्ता खुल सकता है।

ऊपर की ओर, 23,600-23,650 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है। इस बाधा के ऊपर लगातार बने रहना पहला संकेत होगा कि चल रहा करेक्शन का दौर अपनी गति खो रहा है और एक मीनिंगफुल रिकवरी हो सकती है। तब तक, ट्रेडर्स को सतर्क रहना चाहिए और रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान देना चाहिए।

अगले हफ्ते के लिए आपके टॉप 2 स्टॉक आइडिया कौन से हैं?

LIC Housing Finance: शेयर 24 अगस्त के अपने ₹485 के निचले स्तर से लगभग 16 प्रतिशत रिकवरी देख चुका है। अगस्त के आखिर से, काउंटर में वॉल्यूम लगातार बढ़ा है। स्टॉक अब जरूरी शॉर्ट और लॉन्ग टर्म मूविंग एवरेजेस से ऊपर ट्रेड कर रहा है। RSI डेली टाइमफ्रेम पर 60 मार्क से थोड़ा ऊपर गया है, जो नए बुलिश मोमेंटम का संकेत देता है।

वीकली चार्ट पर MACD जीेरो लाइन के ऊपर चला गया है, जो ऊपर की तरफ मोमेंटम बनने का संकेत देता है। स्टॉक अब वीकली चार्ट पर अपने नीचे की ओर झुके हुए ट्रेंडलाइन रेजिस्टेंस से थोड़ा नीचे ट्रेड कर रहा है, मौजूदा प्राइस एक्शन और इंडिकेटर निकट अवधि में ब्रेकआउट की संभावना का संकेत दे रहे हैं। इसलिए, ₹540 के स्टॉप-लॉस के साथ ₹560-565 के जोन में शेयर जमा करने की सलाह दी जाती है। ऊपर की तरफ, इसके शॉर्ट टर्म में ₹605 के लेवल को टेस्ट करने की संभावना है।

Five-Star Business Finance: यह पिछले 11 ट्रेडिंग सेशन से ₹540–513 जोन में कंसोलिडेट हो रहा था। स्टॉक ने वॉल्यूम में अच्छी बढ़ोतरी के सपोर्ट के साथ रेंज से ब्रेकआउट दिया है। ADX इंडिकेटर में DI+, DI- को पार कर गया है, जो दिखाता है कि बुल्स, सेलर्स पर अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। RSI, जो फ्लैट था, ब्रेकआउट के बाद ऊपर चला गया है, जो नए बुलिश मोमेंटम का इशारा है।

इसके अलावा, MACD लाइन थोड़ी सी जीरो लाइन को पार कर गई है और हिस्टोग्राम बार ऊपर उठने लगे हैं, जिससे बुलिश बायस और मजबूत हो रहा है। लगातार मोमेंटम आगे और तेजी का रास्ता बना सकता है। इसलिए, ₹530 के स्टॉप-लॉस के साथ ₹545-555 के जोन में शेयर जमा करने की सलाह है। ऊपर की तरफ, यह शॉर्ट टर्म में ₹590 के लेवल को टेस्ट कर सकता है।

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क्या आपको उम्मीद है कि अगले हफ्ते भी HDFC Bank में खरीदारी का रुझान बना रहेगा?

HDFC Bank ने वीकली चार्ट पर अपने अहम सपोर्ट जोन (₹725–720) को तोड़ दिया है और नीचे आ गया है, जो लगातार कमजोरी का संकेत है। यह स्टॉक अपने मुख्य मूविंग एवरेजेस से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है, जो ब्रॉडर ट्रेंड में कमजोरी को दिखाता है। स्टॉक के लिए इमीडिएट रेजिस्टेंस ₹755–760 के जोन में है। जब तक HDFC Bank इस जोन के नीचे ट्रेड करेगा, तब तक अगले हफ्ते लगातार खरीदारी का रुझान दिखने की संभावना कम है।

क्या आपको भरोसा है कि Paytm अगले हफ्ते अपने रिकॉर्ड हाई को पार कर सकता है?

One 97 Communications (Paytm) डेली चार्ट पर ‘हायर-हाई’ स्ट्रक्चर बना रहा है और अपने मुख्य मूविंग एवरेजेस से ऊपर आराम से ट्रेड कर रहा है। यह लगातार तेजी के रुझान (bullish momentum) का संकेत है। ADX इंडिकेटर पर DI+ लाइन DI- लाइन के ऊपर है और दोनों के बीच का अंतर बढ़ गया है। यह बेयर्स पर बुल्स के मजबूत कंट्रोल को दिखाता है। ₹1,650–1,660 का 20-दिन का EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) जोन इमीडिएट सपोर्ट का काम कर सकता है। जब तक स्टॉक इस जोन के ऊपर है, तेजी का स्ट्रक्चर बना रहेगा, जिससे और ऊपर जाने और अगले हफ्ते रिकॉर्ड हाई से आगे निकलने की संभावना बढ़ जाती है।

क्या आपको उम्मीद है कि अगले हफ्ते भी Blue Star में खरीदारी का रुझान बना रहेगा?

डेली चार्ट पर ब्लू स्टार में पिछले सपोर्ट जोन ₹1,430–1,450 से जबरदस्त खरीदारी का रुझान देखा गया है। RSI, जो पहले स्थिर था, अब ऊपर की ओर बढ़ गया है, जो बुलिश मोमेंटम में तेजी का संकेत देता है। स्टॉक ने अपने 20-दिन और 50-दिन के EMA को भी फिर से हासिल कर लिया है, जो शॉर्ट-टर्म सेंटीमेंट में सुधार का संकेत है। जब तक स्टॉक ₹1,430–1,450 के सपोर्ट जोन के ऊपर बना रहेगा, तब तक हालिया पॉजिटिव मोमेंटम बना रहेगा और अगले हफ्ते भी खरीदारी का रुझान जारी रह सकता है।

Stock Split: 6 महीनों में 245% का उछाल, अब 10 टुकड़ों में टूटेगा शेयर

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Market Outlook: इस हफ्ते किस ओर मुड़ेगा बाजार; पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमत समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों की चाल भी बाजार की दिशा को प्रभावित करेगी। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 749.08 अंक या 0.96 प्रतिशत के नुकसान में रहा। वहीं निफ्टी 277.95 अंक या 1.14 प्रतिशत नीचे आया। शुक्रवार, 4 सितंबर को सेंसेक्स 362.57 अंक चढ़कर 76,515.43 पर और निफ्टी 24.25 अंकों की बढ़त के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ था।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है, ‘‘इस सप्ताह बाजार वैश्विक मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर संवेदनशील रह सकता है। अमेरिका के उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़ों के बाद अब निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की सितंबर में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक को लेकर बदलती उम्मीदों पर रहेगी।’’

घरेलू मोर्चे पर विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू बाजार में नकदी की स्थिति पर नजर रहेगी। मिश्रा के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे, क्योंकि इनका भारत की महंगाई, बाहरी संतुलन और कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर सीधा असर पड़ सकता है।

बीते सप्ताह 8 प्रतिशत महंगा हुआ ब्रेंट क्रूड

एनरिच मनी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पोनमुडी आर का कहना है कि पिछले सप्ताह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत में 8 प्रतिशत से अधिक और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत में 9 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ा दिया है। नए हफ्ते में भी तेल की कीमतों पर फोकस रहेगा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार की धारणा पर लगातार दबाव डाल सकती हैं।

बाजार की नजर अमेरिका के आने वाले महंगाई आंकड़ों पर भी होगी। ये आंकड़े फेडरल रिजर्व की पॉलिसी और ग्लोबल मार्केट के सेंटीमेंट को लेकर उम्मीदें तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड भी महंगाई के आंकड़ों से प्रभावित होगी।

नए हफ्ते में निफ्टी 50 के 23600-23500 के नीचे जाने की संभावना ज्यादा, ये शेयर करा सकते हैं अच्छी कमाई

FPI फिर बने सेलर

भारतीय शेयर बाजार में लगातार 2 महीने बायर रहने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) सितंबर के पहले सप्ताह में फिर से सेलर बन गए। इस दौरान उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से 7,443 करोड़ रुपये निकाले। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई है। FPI ने इससे पहले जुलाई में भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 30,919 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इससे पहले मार्च से जून तक लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।