Voda Idea को मिला ₹26.8 करोड़ का नोटिस, अब 3 अगस्त को शेयर फोकस में

Voda Idea Share Price: टेलीकॉम विभाग ने वोडाफोन आइडिया को ₹26.83 करोड़ का लिक्विडेटेड डैमेज यानी हर्जाना भरने का नोटिस भेजा है। कंपनी ने इसके बारे में शनिवार 1 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया। ऐसे में अब इसका असर सोमवार 3 अगस्त को स्टॉक मार्केट खुलने पर इसके शेयरों पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 31 जुलाई को इसके शेयर पॉजिटिव मार्केट सेंटिमेंट में बीएसई पर 1.09% की बढ़त के साथ ₹13.01 के भाव पर बंद हुए। शुक्रवार को घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो सेंसेक्स (Sensex) 166.49 प्वाइंट्स यानी 0.21% की बढ़त के साथ 78,094.64 और निफ्टी 0.27% यानी 66.45 प्वाइंट्स के उछाल के साथ 24,383.60 पर बंद हुआ था।

Voda Idea को क्यों मिला है नोटिस

टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने वोडा आइडिया को ₹26.83 करोड़ का हर्जाना भरने का नोटिस भेजा है। टेलीकॉम कंपनी को यह नोटिस साल 2022 की नीलामी में मिले स्पेक्ट्रम के लिए तय मिनिमम रोलआउट ऑब्लिगेशन्स को पूरा नहीं करने के आरोप में मिला है। कंपनी का कहना है कि वह 31 जुलाई को मिले इस नोटिस को अभी रिव्यू कर रही है जिसके बाद आगे क्या करना है, इस पर विचार किया जा रहा है। हालांकि कंपनी का यह कहना है कि इस नोटिस की उसकी सेहत और कारोबार पर असर नहीं होगा। कंपनी को यह नोटिस इस बात के लिए मिला है कि स्पेक्ट्रम मिलने के बाद नेटवर्क के रोलआउट के लिए जो न्यूनतम शर्तें हैं, टेलीकॉम कंपनी ने उसका पालन नहीं किया।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

वोडा आइडिया के शेयरों ने एक साल के निचले स्तर से शानदार रिकवरी की है और निवेशकों का पैसा फटाफट ढाई गुना हो गया। पिछले साल 14 अगस्त 2025 को बीएसई पर यह ₹6.12 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 10 महीने में यह 150.82% चढ़कर 15 जून 2026 को ₹15.35 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से शेयर फिलहाल 15% से अधिक नीचे आ चुके हैं लेकिन अब भी यह एफपीओ प्राइस से 18% से अधिक ऊपर हैं। इसके ₹18 हजार करोड़ के एफपीओ के तहत निवेशकों को ₹11 के भाव पर शेयर जारी हुए थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FPI Buying in India: विदेशी निवेशकों ने ₹20199 करोड़ डाले भारतीय शेयरों में, 66% तो आया खास रूट से, वजह भी स्पेशल

FPI Buying in India: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने पिछले महीने जुलाई में अपनी बिकवाली का सिलसिला थाम दिया। जुलाई में उन्होंने भारतीय शेयरों की बिकवाली से अधिक खरीदारी की यानी वे नेट खरीदार बन गए। उन्होंने कुल ₹20,199 करोड़ के शेयर खरीदे। इसमें से ₹6,731 करोड़ स्टॉक एक्सचेंज के जरिए आए, तो ₹13,467 करोड़ प्राइमरी मार्केट और अन्य कैटेगरी के जरिए भारतीय मार्केट में आए। सिर्फ इक्विटी मार्केट ही नहीं, बल्कि विदेशी निवेशकों ने पिछले महीने डेट मार्केट में भी काफी हलचल बढ़ा दी और NSDL (नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड) के आंकड़ों के मुताबिक अकेले जनरल लिमिट कैटेगरी के जरिए ही उन्होंने ₹29,211 करोड़ डाले।

क्या है विदेशी निवेशकों के ताबड़तोड़ खरीदारी की वजह?

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ वीके विजयकुमार ने दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे मार्केट के तेज उठा-पटक को ही भारतीय मार्केट में विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ खरीदारी की मुख्य वजह बताया है। उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में भारी वोलैटिलिटी और चिप ट्रेड के कंसंट्रेशन रिस्क के चलते विदेशी निवेशक भारत जैसे स्थिर बाजारों की तरफ रुख कर रहे हैं। इसके अलावा रुपए की स्थिरता और भारतीय मार्केट में लार्ज कैप के बेहतर वैल्युएशन ने निवेश को सपोर्ट किया है। विजयकुमार के मुताबिक विदेशी निवेशकों के ताबड़तोड़ निवेश की एक अहम बात ये है कि वे अपना निवेश भारतीय मार्केट में मिडकैप और स्मॉलकैप में बढ़ा रहे हैं क्योंकि लार्ज कैप की तुलना में इन सेगमेंट्स में ग्रोथ की गुंजाइश अधिक है।

जुलाई में कैसी रही भारतीय मार्केट की चाल

लगातार चार महीने की गिरावट के बाद अप्रैल 2026 में निफ्टी 7.46% मजबूत हुआ लेकिन फिर मई में यह 1.87% कमजोर हुआ। इसके बाद निफ्टी ने फिर करवट ली और जून महीने में 1.35% मजबूत हुआ और जुलाई में 2.17% चढ़कर 24,383.60 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 मार्च में 10.19% की गिरावट के बाद लगातार चौथे महीने जुलाई में मजबूत हुआ। अप्रैल में 18.44%, मई में 0.73% और जून में 3.99% की तेजी के बाद जुलाई में यह 2.53% मजबूत हुआ। अब निफ्टी मिडकैप 100 की बात करें तो इसमें भी स्मॉलैकप दैसा रुझान दिखा। मार्च में 10.94% की गिरावट के बाद लगातार चौथे महीने जुलाई में यह मजबूत हुआ। अप्रैल में 13.55%, मई में 3.24% और जून में 0.12% की तेजी के बाद जुलाई में यह 1.81% ऊपर चढ़ा।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

टॉप 10 कंपनियों में से 4 का M-Cap ₹92995 करोड़ बढ़ा, HDFC Bank को सबसे ज्यादा फायदा

पिछले सप्ताह शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सेंसेक्स की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में कुल मिलाकर 92,995.48 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। सबसे अधिक फायदा HDFC Bank और भारती एयरटेल को हुआ। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 194.52 अंक या 0.25 प्रतिशत और निफ्टी 63.95 अंक या 0.26 प्रतिशत गिरावट के साथ बंद हुआ।

टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC Bank, भारती एयरटेल और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के मार्केट कैप में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं ICICI Bank, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केट कैप में 49,294.13 करोड़ रुपये की गिरावट आई।

सप्ताह के दौरान HDFC Bank का मार्केट कैप सबसे अधिक 35,808.09 करोड़ रुपये बढ़कर 12,69,454.42 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसी तरह भारती एयरटेल का मार्केट कैप 34,896.92 करोड़ रुपये बढ़कर 11,98,774.22 करोड़ रुपये, LIC का 16,065.50 करोड़ रुपये बढ़कर 5,60,205.05 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) का मार्केट कैप 6,224.97 करोड़ रुपये बढ़कर 17,71,206.33 करोड़ रुपये हो गया।

बाकी 6 कंपनियों को कितना नुकसान

इसके उलट हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप 12,088.65 करोड़ रुपये घटकर 5,04,997.65 करोड़ रुपये रह गया। इसी तरह L&T का मार्केट कैप 11,040 .23 करोड़ रुपये घटकर 5,42,938.40 करोड़ रुपये, TCS का 8,574.87 करोड़ रुपये घटकर 7,48,600.40 करोड़ रुपये, बजाज फाइनेंस का 7,813.58 करोड़ रुपये घटकर 6,35,327.78 करोड़ रुपये, ICICI Bank का 6,315.32 करोड़ रुपये घटकर 10,05,379.71 करोड़ रुपये और SBI का मार्केट कैप 3,461.48 करोड़ रुपये घटकर 9,56,430.44 करोड़ रुपये रह गया।

टॉप 10 कंपनियों में RIL अव्वल

सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। इसके बाद क्रमशः HDFC Bank, भारती एयरटेल, ICICI Bank, SBI, TCS, बजाज फाइनेंस, LIC, L&T और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज 17 जुलाई को अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी करने वाली है। HDFC Bank और ICICI Bank के नतीजे 18 जुलाई को सामने आएंगे। TCS बीते सप्ताह 9 जुलाई को नतीजे जारी कर चुकी है।

FPI ने 4 महीनों बाद की वापसी, जुलाई में अब तक खरीदे ₹15157 करोड़ के भारतीय शेयर

नए सप्ताह में 15 जुलाई को मेनबोर्ड सेगमेंट में NSE और BSE पर Kusumgar की लिस्टिंग हो सकती है। इसके बाद 16 जुलाई को Laser Power & Infra के शेयर NSE और BSE पर लिस्ट होने वाले हैं। इसी दिन BSE SME पर Devson Catalyst और NSE SME पर Happy Steels के शेयरों के लिस्ट होने की उम्मीद है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FPI ने 4 महीनों बाद की वापसी, जुलाई में अब तक खरीदे ₹15157 करोड़ के भारतीय शेयर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार 4 महीने तक बिकवाली करने के बाद जुलाई में बायर नजर आ रहे हैं। इस महीने में अब तक उन्होंने भारतीय शेयरों में 15,157 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश किया है। बेहतर होते घरेलू व्यापक आर्थिक संकेतकों, रुपये की स्थिरता और वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती धारणा से यह रुझान देखने को मिला है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले FPI ने जून में भारतीय शेयरों से 49,340 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मार्च में 1.17 लाख करोड़ रुपये निकाले थे।

इस बिकवाली के दौर से पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। साल 2026 में अब तक FPI भारतीय शेयरों से कुल 2.60 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। पिछले साल की समान अवधि में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी।

एक्सपर्ट्स का क्या है मानना

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि जुलाई में FPI की वापसी वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति, भू-राजनीतिक तनाव कम होने से ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता घटने और भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक स्थिति पर बढ़े भरोसे का नतीजा है।

जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का कहना है कि घरेलू व्यापक आर्थिक स्थिति में सुधार और रुपये की स्थिरता ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।सेमीकंडक्टर कारोबार में कमजोरी और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में FPI की बिकवाली के कारण निवेश का एक हिस्सा भारत की ओर आया है। इसके साथ ही श्रीवास्तव ने आगाह किया कि भले ही जुलाई में FPI के निवेश की यह मजबूत वापसी उत्साहजनक है, लेकिन आगे उनका रुख वैश्विक परिस्थितियों और भारत की घरेलू आर्थिक वृद्धि की मजबूती पर निर्भर करेगा।

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बॉन्ड मार्केट में कितना निवेश

भारत के डेट या बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की रुचि बनी हुई है। जुलाई में अब तक FPI ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत डेट सिक्योरिटीज में 6,625 करोड़ रुपये और जनरल रूट से 3,228 करोड़ रुपये का निवेश किया।

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Market Outlook: ‘जून 2027 तक 1 लाख के पार जा सकता है सेंसेक्स’, मॉर्गन स्टेनली ने कहा- चौंका सकता है आईटी सेक्टर

Market Outlook: विदेशी ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley का मानना है कि जून 2027 तक BSE Sensex 1 लाख के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि, इसकी संभावना 25% ही है। ब्रोकरेज ने इसे अपना बुल केस (Bull Case) बताया है। यानी अगर ज्यादातर चीजें बाजार के पक्ष में रहीं, तो यह लक्ष्य हासिल हो सकता है।

Morgan Stanley का कहना है कि यह अनुमान कुछ अहम हालात के भरोसे है। मसलन, कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहे। अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाली नीतियों का असर दिखने लगे। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच कंपनियों की कमाई में हर साल औसतन 19% की बढ़ोतरी हो।

ब्रोकरेज का यह भी कहना है कि भारतीय शेयर बाजार की वैल्यूएशन में जो गिरावट आई है, वह स्थायी नहीं है। यह एक चक्रीय गिरावट है। यानी जैसे-जैसे ग्रोथ तेज होगी, बाजार की वैल्यूएशन में भी सुधार आ सकता है।

89,000 अंक को माना बेस केस

Morgan Stanley ने जून 2027 तक Sensex के 89,000 अंक तक पहुंचने की 50% संभावना जताई है। इसे उसने अपना बेस केस (Base Case) माना है।

ब्रोकरेज के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट रिद्धम देसाई और नयंत पारेख का कहना है कि पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा है। विदेशी निवेशकों (FPI) की हिस्सेदारी भी घटी है। ऐसे में अगर हालात सुधरते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है।

बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर क्या होगा?

Morgan Stanley के मुताबिक, भारत की आर्थिक ग्रोथ अब निचले स्तर से उबरती दिख रही है। धीरे-धीरे इसमें सुधार भी आ रहा है। हालांकि, अभी भी भारत उन देशों से पीछे है, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर हो रहे बड़े निवेश का फायदा मिल रहा है।

ब्रोकरेज का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि निवेशक भारत और दुनिया की ग्रोथ के अंतर को कैसे देखते हैं। अगर दुनिया में AI पर खर्च को लेकर उत्साह कम होता है और दूसरी तरफ भारत की ग्रोथ तेज होती है, तो बाजार का नजरिया बदल सकता है।

जून तिमाही के नतीजों पर रहेगी नजर

Morgan Stanley का मानना है कि जून तिमाही के नतीजे बाजार को नई दिशा दे सकते हैं। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि मजबूत आर्थिक संकेतकों की वजह से कंपनियों के नतीजे अनुमान से बेहतर रह सकते हैं। निवेशकों की नजर मानसून पर भी रहेगी। हालांकि, Morgan Stanley को इसकी ज्यादा चिंता नहीं है।

ब्रोकरेज का कहना है कि भारत में कई बड़े सुधार चल रहे हैं। इनसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए निवेश करना आसान हो सकता है। IPO की बढ़ती संख्या भी बाजार को सपोर्ट दे सकती है। हालांकि, अगर IPO की बाढ़ आ गई, तो इसका असर उल्टा भी पड़ सकता है। फिलहाल Morgan Stanley को ऐसा खतरा अगले कुछ महीनों तक नहीं दिखता।

किन सेक्टरों पर Morgan Stanley का भरोसा?

Morgan Stanley को घरेलू मांग से जुड़े सेक्टर ज्यादा पसंद हैं। ब्रोकरेज ने फाइनेंशियल, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर ओवरवेट (Overweight) रेटिंग दी है।

वहीं एनर्जी, मटेरियल्स, यूटिलिटीज और हेल्थकेयर सेक्टर को लेकर इसकी राय ज्यादा सकारात्मक नहीं है। इन सेक्टरों पर अंडरवेट (Underweight) रेटिंग दी गई है।

आईटी सेक्टर दे सकता है बड़ा सरप्राइज

Morgan Stanley का मानना है कि आईटी सर्विसेज सेक्टर आने वाले समय में सबसे बड़ा सरप्राइज दे सकता है। दुनियाभर की कंपनियां AI एप्लिकेशन और सॉल्यूशन बनाने के लिए भारतीय आईटी कंपनियों का ज्यादा इस्तेमाल कर सकती हैं।

हालांकि, कुछ जोखिम भी हैं। इनमें भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती, कृषि उत्पादकता में कमजोरी, न्यायिक व्यवस्था में क्षमता की कमी और AI की वजह से रोजगार बाजार पर पड़ने वाला असर शामिल हैं।

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