‘LTCG और STT पर निवेशकों की राय सुनेगी सरकार’, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान से शेयर बाजार में तूफानी तेजी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर सभी पक्षों की राय सुनना चाहेगी। इन दोनों टैक्स को लेकर निवेशक लगातार अपनी बात रख रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को टैक्स का बोझ कम करना चाहिए।

सीतारमण ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह बात कही। उन्होंने बताया कि LTCG टैक्स को लेकर भारत ही नहीं, विदेश के निवेशक भी सवाल उठा रहे हैं।

LTCG और STT पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?

सीतारमण ने कहा कि बजट की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार किन सुझावों पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सोच-समझकर बोलना चाहती हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘यह सवाल उठता है कि शेयर बाजार में LTCG टैक्स और STT दोनों क्यों लगाए जाते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इनमें से कोई एक टैक्स ही होना चाहिए। सभी तरह की संपत्तियों पर एक जैसा टैक्स लगाने का मुद्दा भी लंबे समय से चर्चा में है।’

LTCG और STT के पीछे मकसद

सीतारमण ने कहा कि दो साल पहले सरकार ने अलग-अलग एसेट क्लास पर टैक्स को एक समान स्तर पर लाने की कोशिश की थी। उस समय कुछ लोगों को लगा कि सरकार टैक्स बढ़ा रही है। हालांकि, सीतारमण ने कहा कि ऐसा नहीं था। सरकार का मकसद अलग-अलग एसेट क्लास के बीच टैक्स का अंतर कम करना था।

इससे निवेशकों को सिर्फ टैक्स में मिलने वाले फायदे के आधार पर निवेश का विकल्प चुनने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वित्त मंत्री ने कहा, ‘इन मुद्दों पर बहस होना अच्छी बात है। मैं इस मामले में सभी पक्षों की राय सुनना चाहूंगी।’

बयान के बाद शेयर बाजार में तेजी

वित्त मंत्री के बयान के बाद शेयर बाजार में तेजी और बढ़ गई। सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों 1.5% से ज्यादा चढ़ गए। निफ्टी दिनभर 22,600 के स्तर को पार करने के लिए संघर्ष कर रहा था। हालांकि, बाद में यह इस स्तर के ऊपर निकल गया। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,650 के पार भी पहुंचा।

कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी तेजी आई। BSE, CDSL और NSDL के शेयरों में बढ़त देखने को मिली।

रुपये की गिरावट पर क्या बोलीं सीतारमण?

वित्त मंत्री ने रुपये की कमजोरी पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को संभालने के लिए कई कदम उठा रहा है।

हालांकि, रुपये में गिरावट की कई वजहें हैं। इनमें से ज्यादातर का संबंध दूसरे देशों से है। सीतारमण ने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है।

फिस्कल डिसिप्लिन पर निवेशकों को चिंता की जरूरत नहीं

सीतारमण ने राजकोषीय अनुशासन यानी फिस्कल डिसिप्लिन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए हमेशा अहम मुद्दा रहा है।

उनके मुताबिक, गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भी मोदी राजकोषीय अनुशासन पर जोर देते थे। वित्त मंत्री ने कहा कि फिस्कल डिसिप्लिन को लेकर निवेशकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।

Market Outlook: ‘जून 2027 तक 1 लाख के पार जा सकता है सेंसेक्स’, मॉर्गन स्टेनली ने कहा- चौंका सकता है आईटी सेक्टर

Market Outlook: विदेशी ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley का मानना है कि जून 2027 तक BSE Sensex 1 लाख के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि, इसकी संभावना 25% ही है। ब्रोकरेज ने इसे अपना बुल केस (Bull Case) बताया है। यानी अगर ज्यादातर चीजें बाजार के पक्ष में रहीं, तो यह लक्ष्य हासिल हो सकता है।

Morgan Stanley का कहना है कि यह अनुमान कुछ अहम हालात के भरोसे है। मसलन, कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहे। अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाली नीतियों का असर दिखने लगे। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच कंपनियों की कमाई में हर साल औसतन 19% की बढ़ोतरी हो।

ब्रोकरेज का यह भी कहना है कि भारतीय शेयर बाजार की वैल्यूएशन में जो गिरावट आई है, वह स्थायी नहीं है। यह एक चक्रीय गिरावट है। यानी जैसे-जैसे ग्रोथ तेज होगी, बाजार की वैल्यूएशन में भी सुधार आ सकता है।

89,000 अंक को माना बेस केस

Morgan Stanley ने जून 2027 तक Sensex के 89,000 अंक तक पहुंचने की 50% संभावना जताई है। इसे उसने अपना बेस केस (Base Case) माना है।

ब्रोकरेज के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट रिद्धम देसाई और नयंत पारेख का कहना है कि पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा है। विदेशी निवेशकों (FPI) की हिस्सेदारी भी घटी है। ऐसे में अगर हालात सुधरते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है।

बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर क्या होगा?

Morgan Stanley के मुताबिक, भारत की आर्थिक ग्रोथ अब निचले स्तर से उबरती दिख रही है। धीरे-धीरे इसमें सुधार भी आ रहा है। हालांकि, अभी भी भारत उन देशों से पीछे है, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर हो रहे बड़े निवेश का फायदा मिल रहा है।

ब्रोकरेज का कहना है कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि निवेशक भारत और दुनिया की ग्रोथ के अंतर को कैसे देखते हैं। अगर दुनिया में AI पर खर्च को लेकर उत्साह कम होता है और दूसरी तरफ भारत की ग्रोथ तेज होती है, तो बाजार का नजरिया बदल सकता है।

जून तिमाही के नतीजों पर रहेगी नजर

Morgan Stanley का मानना है कि जून तिमाही के नतीजे बाजार को नई दिशा दे सकते हैं। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि मजबूत आर्थिक संकेतकों की वजह से कंपनियों के नतीजे अनुमान से बेहतर रह सकते हैं। निवेशकों की नजर मानसून पर भी रहेगी। हालांकि, Morgan Stanley को इसकी ज्यादा चिंता नहीं है।

ब्रोकरेज का कहना है कि भारत में कई बड़े सुधार चल रहे हैं। इनसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए निवेश करना आसान हो सकता है। IPO की बढ़ती संख्या भी बाजार को सपोर्ट दे सकती है। हालांकि, अगर IPO की बाढ़ आ गई, तो इसका असर उल्टा भी पड़ सकता है। फिलहाल Morgan Stanley को ऐसा खतरा अगले कुछ महीनों तक नहीं दिखता।

किन सेक्टरों पर Morgan Stanley का भरोसा?

Morgan Stanley को घरेलू मांग से जुड़े सेक्टर ज्यादा पसंद हैं। ब्रोकरेज ने फाइनेंशियल, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी और इंडस्ट्रियल सेक्टर पर ओवरवेट (Overweight) रेटिंग दी है।

वहीं एनर्जी, मटेरियल्स, यूटिलिटीज और हेल्थकेयर सेक्टर को लेकर इसकी राय ज्यादा सकारात्मक नहीं है। इन सेक्टरों पर अंडरवेट (Underweight) रेटिंग दी गई है।

आईटी सेक्टर दे सकता है बड़ा सरप्राइज

Morgan Stanley का मानना है कि आईटी सर्विसेज सेक्टर आने वाले समय में सबसे बड़ा सरप्राइज दे सकता है। दुनियाभर की कंपनियां AI एप्लिकेशन और सॉल्यूशन बनाने के लिए भारतीय आईटी कंपनियों का ज्यादा इस्तेमाल कर सकती हैं।

हालांकि, कुछ जोखिम भी हैं। इनमें भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती, कृषि उत्पादकता में कमजोरी, न्यायिक व्यवस्था में क्षमता की कमी और AI की वजह से रोजगार बाजार पर पड़ने वाला असर शामिल हैं।

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