सेवारत सैनिक बेटे के पिता ने किया लिवर और किडनी दान, एयरफोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया मिशन

एक सेवारत सैनिक के 62 साल के पिता ने बेहद साहसिक फैसला किया। उन्होंने लिवर और एक किडनी दान कर मानवीय मूल्यों का सर्वोच्च प्रदर्शन किया। अंगदान के बाद इन महत्वपूर्ण अंगों को तय समयसीमा के भीतर जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाना बेहद जरूरी था। इस चुनौतीपूर्ण काम में भारतीय वायुसेना ने अहम भूमिका निभाई।

दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाए गए अंग

भारतीय वायुसेना ने मेडिकल टीमों के साथ सहयोग करते हुए चंडीगढ़ से दिल्ली तक अंगों को एयरलिफ्ट किया। एयरलिफ्ट किए गए दोनों अंगों को दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया। लिवर को आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में ट्रांसप्लांट के लिए भेजा गया, जबकि किडनी को सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया गया।

वायुसेना ने तेजी से पूरी की प्रक्रिया

इस पूरे मिशन की खास बात यह रही कि अंगदान करने वाले 62 वर्षीय व्यक्ति ने अपने बेटे, जो भारतीय सेना में सेवारत है, के माध्यम से देशसेवा की भावना को एक अलग स्तर पर पहुंचाया। उन्होंने अपने अंग दान कर जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगाई। मिशन के दौरान समय की गंभीरता को देखते हुए पूरी प्रक्रिया तेजी से पूरी की गई, ताकि अंगों को सुरक्षित और जल्द से जल्द संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके।

पहले भी ऐसे मिशन का हिस्सा रही है वायुसेना

भारतीय वायुसेना पहले भी ऐसे मिशन का हिस्सा रह चुकी है। समय-समय पर आपात स्थितियों में मेडिकल इवैक्यूएशन और महत्वपूर्ण अंगों को समय पर पहुंचाने जैसे मिशनों में सहयोग करती रही है। इस मिशन में भी तेज प्रतिक्रिया और सटीक समन्वय के जरिए चंडीगढ़ से दिल्ली तक जीवन बचाने की इस महत्वपूर्ण कड़ी को पूरा किया गया।

Lalbaugcha Raja Ganapati Utsav: गणपति उत्सव में लालबागचा राजा पर भक्तों ने लुटाया प्यार, तीन दिनों में आया 3 करोड़ से ऊपर चढ़ावा

Lalbaugcha Raja Ganapati Utsav: महाराष्ट्र सहित देश में कई जगहों पर गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। खासतौर से मुंबई इस त्योहार की शोभा देखते ही बनती है। बप्पा का भव्य पंडाल लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। मुंबई के लालबागचा राजा गणेश मंडल को गणेशोत्सव के पहले तीन दिनों में 3.18 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला है। इसमें कैश, सोना, चांदी और विदेशी मुद्रा शामिल है।

लालबागचा राजा मुंबई के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले सार्वजनिक गणेश मंडलों में से एक है। गणेश उत्सव के त्योहार के दौरान यहां भारी भीड़ उमड़ती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस हफ्ते की शुरुआत में अपने परिवार के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अंबानी परिवार के सदस्य, शाहरुख खान, अबराम खान और रणवीर सिंह भी पंडाल में दिखे। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को शुरू हुई थी। यह त्योहार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के साथ खत्म होगा।

मंडल की मैनेजिंग कमिटी के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक चढ़ावे में 1.9 करोड़ रुपये कैश, 98.9 लाख रुपये कीमत का 647.47 ग्राम सोना और 30.35 लाख रुपये कीमत की 12,389 ग्राम चांदी शामिल है। दान पेटियों में अमेरिकी डॉलर और दूसरी विदेशी मुद्र भी मिलीं, लेकिन जब आंकड़े जारी किए गए, तब उनकी कीमत मौजूदा एक्सचेंज रेट पर नहीं आंकी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने के चढ़ावे में चूड़ियां और चेन शामिल थीं, जबकि चांदी की चीजों में पेन और नक्काशीदार क्रिकेट बैट शामिल थे।

दान पेटियों की गिनती के पहले दिन, मंडल को 48.5 लाख रुपये कैश, 66.77 ग्राम सोना और 2,806 ग्राम चांदी मिली। 16 सितंबर को हुई गिनती में 88.9 लाख रुपये कैश, 226.12 ग्राम सोना और 5,516 ग्राम चांदी मिली। मीडिया खबरों के मुताबिक, एक दिन बाद, बक्सों में 53 लाख रुपये कैश, 354.58 ग्राम सोना और 4,067 ग्राम चांदी मिली।

लालबागचा राजा के पंडाल में पूजा के बाद रोजाना दान पेटियां खोली जाती हैं। ट्रस्ट के एक सदस्य ने बताया कि बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधिकारी, बैंक ऑफ महाराष्ट्र के प्रतिनिधि और लालबागचा राजा ट्रस्ट के सदस्य गिनती और जांच की प्रक्रिया की देखरेख करते हैं। ट्रस्ट सदस्य ने कहा कि कैश बैंक में जमा किया जाता है और साल भर संगठन द्वारा किए जाने वाले चैरिटेबल कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

मंडल इस साल के त्योहार के दौरान बीएमसी के साथ मिलकर वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है। इस पहल के तहत, इसके प्रसाद के हिस्से से गीला कचरा मुंबई के चार अस्पतालों में बायोमीथेनेशन प्लांट में भेजा जा रहा है, जिससे लगभग 7,744 यूनिट बिजली बनाने का लक्ष्य नगर निकाय ने तय किया है।

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15 साल की सिंचना के पास 13.9 लाख रुपये का पोर्टफोलियो, जानें गुल्लक के 10 हजार से कैसे शुरू हुआ निवेश का सफर?

आमतौर पर 15 साल की उम्र में बच्चे स्कूल, दोस्तों और अपनी पसंदीदा चीजों को करने में व्यस्त रहते हैं, लेकिन बेंगलुरु की सिंचना संतोष ने इसी उम्र में एक ऐसी राह चुनी, जो उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाती है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली सिंचना की दिलचस्पी बचपन से ही पैसों की बचत और उसके सही इस्तेमाल को समझने में रही है। एक छोटी-सी गुल्लक से शुरू हुई उनकी बचत की आदत धीरे-धीरे वित्तीय समझ और निवेश की जिज्ञासा में बदल गई। आज वो करीब 13.9 लाख रुपये के निवेश पोर्टफोलियो को संभाल रही हैं।

खास बात ये है कि उनके लिए पैसा सिर्फ बचाने या बढ़ाने का जरिया नहीं, बल्कि भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करने का माध्यम है। पढ़ाई के साथ वित्तीय दुनिया को समझने और नई चीजें सीखने का उनका यह सफर दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और जिज्ञासा के साथ छोटी उम्र में भी बड़े लक्ष्य तय किए जा सकते हैं।

गुल्लक में जमा किए 10 हजार रुपये

RR नगर स्थित स्वर्गरानी स्कूल की छात्रा सिंचना को बचपन से ही पैसे बचाने की आदत थी। 12 साल की उम्र तक उन्होंने अपनी गुल्लक में करीब 10,000 रुपये जमा कर लिए थे। लगातार बढ़ती रकम को देखकर उन्हें समझ आया कि छोटी-छोटी बचत समय के साथ बड़ी बन सकती है। यही अनुभव उनके लिए वित्तीय समझ की पहली सीढ़ी बना।

टेलीस्कोप खरीदने के लिए खुद जुटाए पैसे

सिंचना की ‘मनी जर्नी’ को एक और अहम मोड़ तब मिला, जब उन्हें बचपन में टेलीस्कोप खरीदना था। उनके पिता संतोष कुमार ने उनसे इसकी कीमत का कुछ हिस्सा खुद जुटाने को कहा। सिंचना ने रिश्तेदारों से बात कर 10,000 रुपये जुटाए, जबकि बाकी 2,000 रुपये माता-पिता ने दिए। इस अनुभव से उन्हें पैसे की कीमत और लक्ष्य के लिए बचत करने की अहमियत समझ आई।

YouTube से सीखी निवेश की बारीकियां

निवेश शुरू करने से पहले पिता ने उन्हें वित्तीय अवधारणाओं को समझने की सलाह दी। इसके बाद सिंचना ने खुद सीखना शुरू किया। उन्होंने YouTube पर पर्सनल फाइनेंस और निवेश से जुड़े वीडियो देखे और Ankur Warikoo, Dave Ramsey, Power of Money, Mint Wealth और Sonia Shenoy जैसे क्रिएटर्स से सीखने की बात कही है। वह छुट्टियों और वीकेंड में इसके लिए समय निकालती थीं।

NISM और SEBI सर्टिफिकेशन भी किए

Moneycontrol से बात करते हुए  सिंचना ने बताया कि उन्होंने आपनी वित्तीय शिक्षा को ऑनलाइन वीडियो तक सीमित नहीं रखा। उनके पास दो NISM और एक SEBI सर्टिफिकेशन हैं। एक NISM परीक्षा में वह पहली कोशिश में सिर्फ एक अंक से चूक गई थीं, लेकिन दोबारा परीक्षा देकर उन्होंने उसे पास किया।

13.9 लाख का पोर्टफोलियो, माता-पिता की निगरानी

इस साल सिंचना ने निवेश को ज्यादा गंभीरता से शुरू किया। परिवार के अनुसार, कुछ ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसियों से पैसा निकाला गया, जिनसे अपेक्षित रिटर्न नहीं मिल रहा था। अब उनका निवेश इक्विटी और म्यूचुअल फंड में है और यह भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक फैला हुआ है। करीब सात साल की निवेश अवधि के साथ उनका लक्ष्य भविष्य में मास्टर डिग्री की पढ़ाई का खर्च जुटाना है। निवेश में माता-पिता की निगरानी भी रहती है।

‘GDP’ है सिंचना का निवेश मंत्र

म्यूचुअल फंड को समझने के लिए सिंचना ने ‘GDP’ नाम का अपना फ्रेमवर्क बनाया है Growth, Direct और Passive। वह ग्रोथ पर केंद्रित फंड, कम लागत वाले डायरेक्ट प्लान और इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड को अपने निवेश नजरिए का हिस्सा मानती हैं।

अब बच्चों को सिखाएंगी Financial Literacy

सिंचना की रुचि केवल निवेश तक सीमित नहीं है। 14 साल की उम्र में उन्होंने NCERT के सिलेबस पर आधारित ‘ITIHASA – The Royal Game’ नाम का इतिहास कार्ड गेम बनाया और बेंगलुरु के 36 सरकारी हाई स्कूलों में 170 गेम सेट दान किए।

अब वह बच्चों के लिए एक रणनीति-आधारित वित्तीय कार्ड गेम तैयार कर रही हैं। इसमें बजटिंग, बैंकिंग, ब्याज, महंगाई, जोखिम, बीमा, क्रेडिट, कर्ज और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव जैसी बातें खेल के जरिए सिखाई जाएंगी। उनका लक्ष्य भारत के 10 लाख छात्रों तक वित्तीय साक्षरता को अनुभव आधारित तरीके से पहुंचाना है। गुल्लक में जमा 10 हजार रुपये से शुरू हुआ सिंचना का सफर आज निवेश से आगे बढ़कर दूसरों को पैसों की समझ देने की दिशा में पहुंच चुका है।

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बिहार की चार हस्तियों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

बिहार की चार फिल्मी हस्तियों को वर्ष 2024 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बिहार के लिए 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह खास होने जा रहा है। बिहार से जुड़ी चार फिल्मी हस्तियों अभिनेता संजय मिश्रा, निर्देशक कमलेश के. मिश्र, निर्माता मिंटी मिश्रा और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर (केवाड़िया) में आयोजित समारोह में पुरस्कार प्रदान करेंगी। दरभंगा निवासी अभिनेता संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ में बेहतरीन अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। ‘भक्षक’ की कहानी चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से प्रेरित है। गोपालगंज निवासी निर्देशक कमलेश के. मिश्र और निर्माता मिंटी मिश्रा को फिल्म ‘काकोरी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ जीवनीपरक/ऐतिहासिक पुनर्निर्माण/संकलन फिल्म का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। देशभक्ति पर आधारित यह फिल्म 1925 के ऐतिहासिक ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शताब्दी वर्ष पर काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है। फिल्म में काकोरी की ऐतिहासिक घटना और उससे जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य, संकल्प और उनके अमिट योगदान को रेखांकित किया गया है।

कमलेश के. मिश्र की फ़िल्म को पहले भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हो चुका हैं। उनकी फ़िल्म ‘मधुबनी: द स्टेशन ऑफ कलर्स’ के लिए गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ कथन का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला था। फिल्मकार कमलेश मिश्र की पहली निर्देशित फीचर फिल्म ‘आज़मगढ़’ है, जिसमें पंकज त्रिपाठी ने मुख्य नेगेटिव भूमिका निभाई है। यह फिल्म आतंकवाद के विषय पर आधारित है। अपनी फिल्मों में विशेष दृष्टिकोण से इतिहास और रिसर्च को प्रमुख स्थान देते हैं। हाल ही में उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों पर ‘दिल्ली दंगे…जलने और दोषारोपण की कहानी’ ( दिल्ली राइट्स- अ टेल ऑफ बर्न एंड ब्लेम) डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जो तब काफ़ी चर्चित हुई थी। उनकी पहली शोर्ट फ़िल्म “किताब” ने वैश्विक ख्याति अर्जित की। काकोरी के निर्माता जसविंदर सिंह दिल्ली से और मिंटी मिश्रा बिहार के गोपालगंज की हैं। यह फ़िल्म उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से बनी है। बिहार के दरभंगा के रहने वाले संजय मिश्रा देश के प्रसिद्ध अभिनेता हैं।

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तीन दशक से भी ज्यादा समय से अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रभावशाली अभिनय उनकी पहचान है। 1995 में फिल्म ओह डार्लिंग! ये है इंडिया! से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। ‘आंखों देखी ‘ (2015) और ‘वध’ (2022) में उन्हें उम्दा अभिनय के लिए दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिल चुका है। सीतामढ़ी निवासी पत्रकार, लेखक और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लिए स्वर्ण कमल प्रदान किया जाएगा। वह करीब ढाई दशक से दिल्ली में पत्रकारिता और फिल्मों पर लेखन कर रहे हैं। वह मुंबई में भी फिल्मों की रिपोर्टिंग कर चुके हैं। श्री श्रीवास्तव की सिनेमा पर कई पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें ‘समय सिनेमा और इतिहास’, ‘सिनेमा की समानांतर दुनिया’ और ‘आपातकाल का सिनेमा’ प्रमुख हैं।

उन्होंने ‘माधुरी’ पत्रिका के संस्थापक संपादक अरविंद कुमार से स्वर्णिम दौर के सिनेमा पर लंबी बातचीत भी की है, जिसे वह सिनेमाई अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। फिल्मकार कमलेश के मिश्र ने ‘काकोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव और खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार केवल किसी फिल्म या फिल्मकार का सम्मान नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और संवेदनाओं को ईमानदारी से सामने रखने वाले रचनात्मक प्रयास की राष्ट्रीय स्वीकृति है। श्री मिश्र ने कहा कि वह इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि के रूप में देखते हैं। काकोरी रेल एक्शन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव था और फिल्म के माध्यम से इस ऐतिहासिक घटना को उचित महत्व के साथ आज की पीढ़ी तक पहुंचाना उनका उद्देश्य था।

उन्होंने कहा कि फिल्म का निर्माण पूरी निष्ठा के साथ किया गया है। उन्होंने निर्माता जसविंदर सिंह, मिंटी मिश्रा, उत्तर प्रदेश सरकार तथा फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों और तकनीशियनों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह पुरस्कार सामूहिक प्रयास और समर्पण की सफलता है। कमलेश के मिश्र ने कहा कि उन्हें सबसे अधिक खुशी इस बात की है कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के माध्यम से काकोरी के वीर क्रांतिकारियों की स्मृति और उनके बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के साथ याद किया जा रहा है। उन्होंने यह सम्मान सभी अमर शहीदों को समर्पित किया। मिंटी मिश्रा ने कहा कि काकोरी जैसी ऐतिहासिक घटना पर फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण और सुखद अनुभव रहा। अब इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना इस पूरी यात्रा को और विशेष बना देता है।

मिंटी मिश्रा ने कहा कि काकोरी रेल एक्शन स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण अध्याय है और काकोरी के अमर क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और बलिदान को आज की पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि काकोरी के माध्यम से इतिहास की महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित घटना को प्रमुखता से सामने लाने का छोटा-सा प्रयास किया गया। उन्होंने उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से निर्मित फिल्म के मुख्य निर्माता जसविंदर सिंह के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लेखक-निर्देशक कमलेश के मिश्र और पूरी टीम के समर्पण ने इस प्रयास को सार्थक बनाया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के लिए गर्व का क्षण है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर श्री श्रीवास्तव ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बिहार की चार हस्तियों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना भी बड़ी बात है।

Pic Credit : ANI

शादी से इनकार करने पर सिरफिरे आशिक ने छात्रा पर किया हमला, चाकू और कट्टे से घायल छात्रा अस्पताल में

मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा में एक 18 साल की छात्रा के लिए एक युवक का शादी का प्रस्ताव ठुकराना जानलेवा साबित हुआ। इससे नाराज युवक ने कॉलेज कैंपस में छात्रा पर चाकू और कट्टे से हमला कर दिया। इस हमले में छात्रा और उसकी सहेती बुरी तरह घायल हो गए। दोनों को नजदीकी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहां वे खतरे से बाहर बताई जा रही हैं। कॉलेज परिसर में मौजूद छात्रों ने आरोपी को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है।

घटना वीर बलिदानी खाज्या नायक स्नातकोत्तर महाविद्यालय की है। कॉलेज प्राचार्य ज्ञान सिंह वास्कले ने बताया कि घटना के समय परिसर में करीब 500 विद्यार्थी मौजूद थे। घटना के तत्काल बाद पुलिस और छात्रा के माता-पिता को सूचना दी गई। प्राचार्य ने बताया कि जिस विज्ञान भवन के सामने घटना हुई, वहां लगे सीसीटीवी कैमरे फिलहाल काम नहीं कर रहे हैं।

कट्टा नहीं चला, तो चाकू से किए ताबड़तोड़ वार

सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे के मुताबिक बीए प्रथम वर्ष की छात्रा संगीता सेनानी (बदला हुआ नाम) हिंदी विषय की परीक्षा देकर अपनी सहेलियों के साथ कॉलेज से बाहर निकल रही थी। विज्ञान भवन के सामने पहुंचने पर बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र गणेश ठाकुर ने कथित तौर पर उस पर पिस्टल तानकर फायर करने की कोशिश की। पिस्टल नहीं चलने पर उसने चाकू से संगीता की गर्दन के नीचे वार कर दिया। हमले में छात्रा घायल होकर बेहोश हो गई। मौके पर मौजूद छात्रों ने आरोपी को पकड़ लिया। सूचना मिलने पर सेंधवा शहर थाना पुलिस कॉलेज पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया।

हमले में घायल हुई पीड़िता की सहेली

अचानक हुए हमले से कॉलेज परिसर में अफरातफरी मच गई। हमले के बाद संगीता मौके पर ही बेहोश हो गई। घटना देखकर उसकी सहेली रोशनी भी बेहोश हो गई। घायल संगीता को तत्काल सिविल अस्पताल सेंधवा ले जाया गया, जहां उसका उपचार किया गया। एसडीओपी के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है।

पीड़िता की किसी और से सगाई पर नाराज था गणेश

पुलिस के मुताबिक गणेश और संगीता पहले से एक-दूसरे को जानते थे। गणेश कथित तौर पर संगीता से शादी करना चाहता था। कुछ दिन पहले संगीता की किसी अन्य युवक से सगाई हो गई थी। इसके बाद से गणेश नाराज था। एसडीओपी ने बताया कि आरोपी पिछले करीब 15 दिनों से संगीता को कथित तौर पर धमका रहा था और कह रहा था कि वह उसकी शादी किसी अन्य युवक से नहीं होने देगा।

देसी पिस्टल और चाकू जब्त किया

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक देसी पिस्टल और चाकू जब्त किया है। पुलिस घटना में इस्तेमाल हथियारों के स्रोत और आरोपी द्वारा छात्रा को पूर्व में दी गई कथित धमकियों की भी जांच कर रही है। छात्र और छात्रा दोनों आदिवासी समुदाय से हैं।

Kanya Sankranti 2026 Date: सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश पर होगी कन्या संक्रांति कल, सूर्य दोष और करियर में उड़ान के लिए महापुण्यकाल में करें ये 4 उपाय

Kanya Sankranti 2026 Date: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य को पिता, अच्छी सेहत और करियर का कारक माना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन का राशि चक्र की सभी 12 राशियों पर असर पड़ता है। यह ग्रह हर 30 दिनों में राशि परिवर्तन करता है। इस हिसाब से हर माह सूर्य का राशि परिवर्तन होता है, जिसे संक्रांति कहते हैं। सितंबर माह में सूर्य देव एक बार फिर राशि बदलने जा रहे हैं। इस बार सूर्य देव अपने मित्र बुध की राशि कन्या में प्रवेश करेंगे। इस समय अपनी उच्च राशि सिंह में गोचर कर रहे सूर्य देव जिस समय कन्या राशि में गोचर करेंगे, उस समय सूर्य की कन्या संक्रांति होगी।

कन्या संक्रांति के दिन लोग गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पाप मिटते हैं और पुण्य लाभ होता है। इस दिन पितरों को जल से तर्पण देना शुभ माना जाता है। कहते हैं ऐसा करने से पितृ तृप्त होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिससे जीवन में खुशहाली आती है। इस साल कन्या संक्रांति कल यानी 17 सितंबर को होगी। इस बार कन्या संक्रांति के साथ विश्वकर्मा पूजा का भी संयोग बन रहा है। कन्या संक्रांति के दिन कुछ ज्योतिष उपायों को करने से कुंडली का सूर्य दोष मिट जाता है और करियर में आने वाली रुकावटें भी दूर होती हैं।

कन्या संक्रांति 2026 तारीख

वैदिक पंचांग क अनुसार, कन्या राशि में सूर्य का प्रवेश 17 सितंबर को सुबह में 7 बजकर 58 मिनट पर होगा। उस समय कन्या संक्रांति का क्षण होगा। कन्या संक्रांति के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बनेगा। इन दोनों ही शुभ योगों में किए गए कार्य सफल सिद्ध होंगे।

कन्या संक्रांति 2026 महापुण्य काल

कन्या संक्रांति का महापुण्य काल 2 घंटे 3 मिनट का होगा। महापुण्य काल सुबह में सुबह में 07 बजकर 58 मिनट से सुबह 10 बजकर 01 मिनट तक रहेगा।

वहीं कन्या संक्रांति का पुण्य काल सुबह में 07 बजकर 58 मिनट से दोपहर 02 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस आधार पर पुण्य काल का कुल समय 6 घंटे 33 मिनट का होगा। जो लोग किसी कारणवश महापुण्य काल में स्नान और दान न कर पाएं, वे पुण्य काल में ये काम कर सकते हैं।

कन्या संक्रांति 2026 पर करें सूर्य दोष के उपाय

कन्या संक्रांति पर अपनी कुंडली के सूर्य दोष को दूर करने के लिए महापुण्य काल में स्नान करें, पितरों को जल अर्पित करें और सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें। इसके लिए एक लोटे में जल भरकर उसमें लाल रंग के फूल, लाल चंदन और थोड़ा सा गुड़ डालें। ओम सूर्य देवाय नम: मंत्र का जाप करते हुए भगवान भास्कर को अर्पित करें। फिर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और आरती करें।

कन्या संक्रांति पर सूर्य के शुभ प्रभाव की प्राप्ति के लिए सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान करें। सामर्थ्यानुसार गुड़, गेहूं, लाल चंदन, लाल रंग के वस्त्र, लाल फूल, तांबे के बर्तन आदि का दान किसी ब्राह्मण को कर सकते हैं।

सूर्य देव के बीज मंत्र ॐ घृणि: सूर्याय नम: का जाप लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं।

कन्या संक्रांति के अवसर पर अपने माता पिता और घर के वरिष्ठ लोगों की सेवा करें। पिता तुल्य किसी व्यक्ति की सेवा करके आशीर्वाद लें, आपकी उन्नति होगी।

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Sanjukta Parashar: CRPF की सबसे घातक फोर्स CoBRA की कमान पहली बार महिला अफसर के हाथ, जानिए कौन हैं IPS संजुक्ता पराशर

Who is Sanjukta Parashar: असम की चर्चित IPS अधिकारी संजुक्ता पराशर ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की सबसे खतरनाक जंगल युद्धक कमांडो यूनिट CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action) की पहली महिला प्रमुख बनकर इतिहास रच दिया है। 2006 बैच की असम-मेघालय कैडर की अधिकारी पराशर को उनकी नियुक्ति से पहले ही उग्रवाद विरोधी अभियानों में उनके साहस और नेतृत्व के लिए ‘आयरन लेडी ऑफ असम’ के नाम से जाना जाता है। वह इस स्पेशल जंगल-वारफेयर फोर्स की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं।

कौन हैं  IPS अधिकारी पराशर?

असम-मेघालय कैडर की 2006-बैच की IPS अधिकारी पराशर के पास उग्रवाद विरोधी अभियानों, फील्ड पुलिसिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जांच का लंबा अनुभव है। CRPF मुख्यालय ने पिछले सप्ताह नियुक्ति का आदेश जारी किया। पराशर CoBRA की IG के तौर पर 1996-बैच के IPS अधिकारी दानिश राणा की जगह लेंगी। एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “यह पहली बार है जब CRPF की 10-बटालियन वाली CoBRA यूनिट की कमान एक महिला अधिकारी संभालेंगी।” हाल ही में CRPF ने मणिपुर में हथियारबंद हिंसा को रोकने के लिए CoBRA की दो यूनिट तैनात की थीं।

NDFB के खिलाफ अभियान से मिली ‘आयरन लेडी’ की पहचान

संजुक्ता पराशर ने अपने करियर के शुरुआती दौर में बोडो और अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों से जुड़े संघर्षों को संभाला था। इसके बाद 2013-14 में सोनितपुर की SP रहते हुए उन्होंने उग्रवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB) के खिलाफ बड़े अभियान का नेतृत्व किया। इस कार्रवाई में 16 उग्रवादियों के मारे जाने और 64 के गिरफ्तार होने की बात सामने आई थी। एक ऑपरेशन के दौरान हाथ में AK-47 लिए उनकी तस्वीर काफी चर्चित हुई, जिसके बाद उन्हें ‘आयरन लेडी ऑफ असम’ कहा जाने लगा। अभियान के दौरान उन्हें बोडो उग्रवादियों से जान से मारने की धमकियां भी मिली थीं।

NIA और असम पुलिस में भी निभाई अहम जिम्मेदारी

असम की रहने वाली पराशर ने अपने कैडर के अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में भी काम किया है। यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी जांचों में भूमिका निभाई। CoBRA की IG नियुक्ति से पहले वह असम पुलिस की CID विंग की प्रमुख थीं। अब CoBRA की कमान संभालते हुए उनके सामने देश के उन बड़े जंगल क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होगी, जिन्हें नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों ने अपने नियंत्रण में लिया है। CoBRA मुख्य रूप से जंगलों में उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित कमांडो बल है।

छत्तीसगढ़ और झारखंड में बड़ी जिम्मेदारी

CoBRA के जवान मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ और झारखंड के बड़े वन क्षेत्रों में तैनात हैं। इन इलाकों में नक्सल गतिविधियों के खिलाफ लंबे समय से अभियान चलाए जा रहे हैं। खबर के मुताबिक, मार्च 2026 तक देश में वामपंथी उग्रवाद को लगभग समाप्त करने की दिशा में सुरक्षा अभियानों की अहम भूमिका रही है। इसके अलावा CoBRA की दो बटालियन मणिपुर में भी तैनात हैं, जहां जातीय तनाव के कारण समय-समय पर हिंसा होती रही है।

CRPF में महिला अधिकारियों को मिल रही बड़ी कमान

संजुक्ता पराशर की नियुक्ति को CRPF में महिला अधिकारियों को ऑपरेशनल और कॉम्बैट से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की व्यापक पहल का हिस्सा माना जा रहा है। CRPF के एक अधिकारी ने Times of India को बताया कि महिला अधिकारी वर्तमान में जम्मू, CoBRA, Rapid Action Force (RAF), नॉर्थ ईस्ट, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों में IG के पद पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

एक और महिला अधिकारी की संवेदनशील इलाकों में तैनाती

हाल ही में 2006 बैच की IPS अधिकारी ए. विजया लक्ष्मी को संवेदनशील जम्मू सेक्टर का IG नियुक्त किया गया था। नीतू डी. भट्टाचार्य मध्य प्रदेश सेक्टर की IG हैं। वह बालाघाट में नक्सल विरोधी अभियानों से जुड़ी रही हैं। ओडिशा कैडर की IPS अधिकारी कविता जालान नॉर्थ ईस्ट सेक्टर की कमान संभाल रही हैं, जिसमें पूरा मेघालय और असम के कुछ हिस्से शामिल हैं। वहीं, गुजरात कैडर की IPS अधिकारी अर्चना शिवहरे राजस्थान सेक्टर की IG हैं।

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CRPF की Rapid Action Force (RAF) की कमान भी अधिकारी सीमा धुंधिया के पास है। वह 1987 में महिला अधिकारियों के पहले बैच के हिस्से के रूप में CRPF में शामिल हुई थीं। संजुक्ता पराशर की नई जिम्मेदारी ऐसे समय में आई है, जब CoBRA को नक्सल प्रभावित जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ मणिपुर जैसे संवेदनशील इलाकों में भी महत्वपूर्ण ऑपरेशनल भूमिका निभानी है।

Pitru Paksha 2026 Niyam: पितृ पक्ष में नए कपड़े या खुद के लिए कोई चीज खरीदना क्यों है मना? जानिए इन 15 दिनों के लिए खरीदारी के नियम

Pitru Paksha 2026 Niyam: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को एक विशेष अवधि के रूप में जाना जाता है, जब हम अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना और दान करते हैं। इस अवधि को अत्यंत पवित्र और प्रभावशली माना जाता है। पितृ पक्ष की अवधि लगभग 15-16 दिनों की होती है। इस दौरान लोग नियम से तिथि अनुसार और दिवंगत परिजनों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। पितृ पक्ष की इस अवधि के दौरान कई सख्त नियमों का पालन करना जरूरी होता है। इनमें आहार से संबंधित नियम हैं, शुभ और मांगलिक कार्यों से संबंधित नियमों के साथ-साथ खरीदारी से जुड़े नियमों मानने अनिवार्य होते हैं।

पितृ पक्ष हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा। इसमें पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहे। इस दौरान लोग निजी इस्तेमाल की चीजें और कपड़े आदि नहीं खरीदते हैं। आइए जानें इस बारे में शास्त्र क्या कहते हैं? इस अवधि में क्या खरीद सकते हैं और क्या नहीं ?

पितृपक्ष में नए कपड़े और चीजें खरीदें या नहीं?

शास्त्रों के मुताबिक, पितृपक्ष के दौरान नया सामान या नए कपड़े खरीदना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इस दौरान गहने, नए वस्त्र, गाड़ी, मकान-जमीन और लोहे का सामान जैसी बड़ी चीजें खरीदना अशुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि नई चीजें हमारे भीतर दिखावे की भावना ला सकती हैं, इसलिए इनसे बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, रोजमर्रा के इस्तेमाल की जरूरी चीजें खरीदने में कोई बुराई नहीं है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों का आयोजन वर्जित माना जाता है। इस निषेध का मुख्य कारण यह है कि यह अवधि पूरी तरह से पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित होती है। पितृपक्ष की प्रकृति अत्यंत गंभीर और संयमित होती है, जबकि मांगलिक कार्यों में उत्सव और उल्लास का माहौल रहता है। माना जाता है कि ऐसे आयोजनों से इस विशेष समय की आध्यात्मिक गंभीरता और शांति प्रभावित हो सकती है।

पितृपक्ष क्या न खरीदें?

व्यक्तिगत नए वस्त्र और आभूषण- पितृपक्ष में खुद पहनने के लिए नए फैंसी कपड़े या गहने।

पितृपक्ष में मकान, जमीन या नई गाड़ी भी नहीं खरीदनी चाहिए।

पितृपक्ष में लोहे का सामान, झाड़ू, नमक और सरसों का तेल घर लाना वर्जित माना जाता है।

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Jupiter Transit in Leo 2026: देवगुरु बृहस्पति करेंगे सिंह राशि में प्रवेश और 4 राशियों के लिए खुलेगा खजाने का ताला, जानें कौन सी हैं ये राशियां

Jupiter Transit in Leo 2026: देवगुरु बृहस्पति का सिंह राशि में 31 अक्टूबर को गोचर होगा। ज्योतिषशास्त्र में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना मानी जाती है, जिसे “सिंहस्थ बृहस्पति” भी कहा जाता है। सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं, जो बृहस्पति के मित्र ग्रह हैं। मित्र राशि में होने के कारण गुरु का यह गोचर सामान्यतः शुभ और प्रभावकारी परिणाम देता है। सिंह राशि शक्ति, नेतृत्व और अधिकार का प्रतीक है। गुरु का यहां आना व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता, ज्ञान, प्रशासनिक गुणों और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। जब देवगुरु बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं और सूर्य मेष राशि में होते हैं, तब नासिक के त्र्यंबकेश्वर में प्रसिद्ध सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन होता है। समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में तेजी आती है। लोग परोपकार और ज्ञान प्राप्ति की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। यह समय राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, कानून या प्रबंधन से जुड़े लोगों के लिए विशेष रूप से उन्नतिदायक सिद्ध होता है। देवगुरु के इस गोचर से यूं तो सभी 12 राशियों के जातक प्रभावित होंगे, लेकिन 4 राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा। आइए जानें इसके बारे में

मेष राशि : मेष राशि वालों के लिए गुरु का सिंह राशि में गोचर कई तरह के शुभ अवसरों में वृद्धि हो सकती है। गुरु आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर करते हैं। इससे करियर में नए तरह के अवसर मिल सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के अच्छे संकेत हैं। आर्थिक मोर्चे पर आपको आय के नए स्त्रोत मिल सकते हैं।

कर्क राशि : कर्क राशि वालों के लिए गुरु का राशि परिवर्तन धन लाभ के अवसरों में वृद्धि ला सकता है। पारिवारिक मामलों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। यहां पर गुरु का आपकी कुंडली में गोचर आपके धन के भाव में होगा जिससे आपको अच्छा खासा लाभ हासिल हो सकता है।

तुला राशि : तुला राशि वालों पर गुरु के राशि परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिलेगा। गुरु का गोचर आपके लिए बहुत ही लाभकारी रहेगा। गुरु आपकी राशि से 11वें भाव में संचरण करेंगे,ऐसे में आपको आय में वृद्धि के अवसर मिल सकते हैं। करियर में नई तरह की जिम्मेदारियां मिल सकती है।

सिंह राशि : सिंह राशि में गुरु के गोचर करने से सिंह राशि वालों पर विशेष प्रभाव पड़ेगा। आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी और नेतृत्व करने की क्षमता में विकास होता है। गुरु के गोचर करने से मान-सम्मान में वृद्धि, नौकरी-कारोबार में नई तरह की जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है। आपकी आय में वृद्धि होगी।

शुभ परिणामों के लिए सरल उपाय

गुरु ग्रह के बीज मंत्र का जाप करें: `ॐ बृं बृहस्पतये नमः`

गुरुवार के दिन पीले कपड़े, चने की दाल या हल्दी का दान करें।

भगवान विष्णु या श्री हरि की पूजा करें और माथे पर केसर/हल्दी का तिलक लगाएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

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Hartalika Teej puja samagri list: 14 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत करने से पहले पूजा के लिए जरूरी सामग्री जुटा लें, इनके बिना अधूरा है अटल सुहाग का व्रत

Hartalika Teej puja samagri list: हरतालिका तीज भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र व अखंड सौभाग्य के लिए और अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर पाने के लिए निर्जला व्रत (बिना अन्न-जल का उपवास) रखती हैं। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। ‘हरतालिका’ शब्द ‘हरत’ यानी हरण करना और ‘आलिका’ यानी सखी से मिलकर बना है। मान्यता है कि माता पार्वती की सखियां उन्हें घने जंगल में ले गई थीं, ताकि उनके पिता हिमालय किसी और के साथ उनका विवाह न कर पाएं। यहां उन्होंने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था।

हिंदू धर्म के इस प्रमुख व्रत में पूजा के लिए जरूरी समाग्री का भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए व्रत करने वाली महिलाएं इस उपवास की सभी सामग्री बहुत ध्यान से अर्जित करती हैं। आप भी यह व्रत करने जा रही हैं, तो सोमवार को व्रत शुरू करने से पहले एक बार यहां दी जा रही सामग्री सूची से अपनी सूची का मिलान कर लें। ताकि पूजा करते समय आपको कोई असुविधा न हो। आइए जानें पूजा की संपूर्ण सामग्री लिस्ट और पूजा विधि

हरतालिका व्रत 2026 तारीख और समय

वर्ष 2026 में उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।

तृतीया तिथि प्रारंभ : 13 सितंबर 2026 को सुबह 07:08 बजे से

तृतीया तिथि समाप्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे तक

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त : 14 सितंबर 2026 को सुबह 06:05 से 07:06 बजे तक

हरतालिका तीज पूजन सामग्री लिस्ट

बालू या मिट्टी से बनी शिव, पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं

सुहाग सामग्री (लाल चुनरी, बिंदी, चूड़ियां, आलता, मेहंदी, सिंदूर, कुमकुम, काजल, कंघी, बिछिया, पायल और अन्य श्रृंगार वस्तुएं)

रोली, चावल, कपूर, रुई, माचिस, मौली, हल्दी, चंदन, घी का दीपक, अगरबत्ती या धूपबत्ती, फल और मिठाइयां, खीर और हलवा, भिगोए हुए चने, पूजा के लिए कलश, जल और गंगाजल, पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, शहद, शक्कर और घी, 1 नारियल, दूर्वा घास, बेलपत्र, शमी पत्र, कच्ची हल्दी की गांठें, गेहूं या चावल, एक चौकी या आसन, मंडप बनाने के लिए केले के पत्ते, फूलों की माला और फूल, पान के पत्ते और सुपारी, कच्चा सूत

हरतालिका तीज 2026 पूजा विधि

प्रतिमा निर्माण : प्रातः स्नान के बाद संकल्प लें। इसके बाद काली मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा बनाएं।

शृंगार व अर्पण : भगवान शिव को चंदन, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और वस्त्र अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, चुनरी आदि) चढ़ाएं।

कथा व आरती : हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में शिव-पार्वती की आरती करें।

रात का जागरण : इस व्रत में रात भर जागरण कर भजन-कीर्तन करने की परंपरा है।

पारण : अगले दिन सुबह विधिवत पूजा के बाद पंडित या बुजुर्गों को दान-दक्षिणा देकर व्रत खोलें।

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