पटना के महावीर मंदिर की अनूठी पहल, प्रसाद और दान की कमाई से चल रहे अस्पताल, बच्चों के लिए बन रहा बाल कैंसर हॉस्पिटल

बिहार की राजधानी पटना स्थित महावीर मंदिर सिर्फ एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल नहीं है। पटना जंक्शन से लगा यह मंदिर आस्था के साथ-साथ सेवा और जनकल्याण की भी एक बड़ी मिसाल है। यहां बजरंगबली के दर्शन करने के लिए हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि मंदिर में चढ़ने वाले नैवेद्यम प्रसाद और अन्य माध्यमों से होने वाली कमाई का इस्तेमाल मरीजों के इलाज, शिक्षा और जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने जैसे कार्यों में भी किया जाता है। महावीर मंदिर न्यास समिति के अंतर्गत कई अस्पताल, चिकित्सा संस्थान, प्रशिक्षण केंद्र और भोजनालय संचालित होते हैं।

प्रसाद की कमाई से होता है मरीजों का इलाज

महावीर मंदिर की आय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नैवेद्यम प्रसाद की बिक्री से होने वाली बचत से आता है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के चढ़ावे, कर्मकांड शुल्क, स्वैच्छिक दान, विक्रय केंद्रों की बचत और बैंक से मिलने वाले ब्याज से भी मंदिर को आय होती है। इन्हीं संसाधनों के जरिए महावीर मंदिर न्यास समिति स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण संस्थानों का संचालन करती है। इन संस्थानों में महावीर कैंसर संस्थान, महावीर आरोग्य संस्थान, महावीर वात्सल्य अस्पताल, महावीर नेत्रालय, महावीर हार्ट हॉस्पिटल, महावीर वरिष्ठ नागरिक अस्पताल और विशालनाथ अस्पताल शामिल हैं।

इसके अलावा भीखमदास ठाकुरबाड़ी स्थित महावीर नेत्रालय की शाखा भी संचालित की जाती है। इन संस्थानों के माध्यम से कैंसर, हृदय रोग, आंखों की बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इस अस्पतालों में बेहद कम दरों पर आधुनिक सुविधाएं दी जाती है।

बन रहा है बाल कैंसर संस्थान

महावीर मंदिर न्यास समिति का स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा विस्तार लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में महावीर किशोर कुणाल बाल कैंसर संस्थान का निर्माण कार्य भी जारी है। 100 बेड का एक नया अस्पताल बनाया जा रहा है। यह पूरी तरह कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज को समर्पित होगा। इसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और 2027 तक इसके तैयार होने की उम्मीद है। इस अस्पताल में 18 साल तक के बच्चों को निशुल्क इलाज की सुविधा दी जाएगी। यहां जांच और उपचार के लिए सभी आधुनिक उपकरण और तकनीकें होंगी।

इलाज के साथ मेडिकल शिक्षा पर भी जोर

महावीर मंदिर की गतिविधियां केवल अस्पतालों के संचालन तक सीमित नहीं हैं। महावीर पैरा मेडिकल ट्रेनिंग और महावीर एएनएम नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से चिकित्सा एवं नर्सिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है। वहीं, पाणिनि वेद विद्यालय के जरिए पारंपरिक वैदिक शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जाता है।

गयाजी से अयोध्या तक जरूरतमंदों के लिए भोजन की व्यवस्था

धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए भी महावीर मंदिर न्यास समिति की ओर से पहल की गई है। इसके तहत गयाजी में विष्णु रसोई, सीतामढ़ी में सीता रसोई और अयोध्या में राम रसोई का संचालन किया जाता है। इन रसोइयों में लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है। धार्मिक यात्राओं पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऐसी व्यवस्था काफी उपयोगी साबित होती है।

पूर्वी चम्पारण में में आकार ले रहा विराट रामायण मंदिर

महावीर मंदिर न्यास समिति की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में पूर्वी चंपारण जिले के चकिया क्षेत्र में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर भी शामिल है। विराट रामायण मंदिर का निर्माण संसार के सबसे बड़े मंदिर के रूप में हो रहा है।

इस भव्य मंदिर परिसर में 33 फीट ऊंचा और लगभग 210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग स्थापित किया गया है। मंदिर की प्रस्तावित लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट है। इसकी संरचना में कुल 18 शिखर और 22 मंदिर शामिल होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट रखी गई है, जबकि अन्य शिखरों की ऊंचाई 180, 135, 108 और 90 फीट प्रस्तावित है। महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार, निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।

रोजाना करीब 10 लाख रुपये की आय

महावीर मंदिर की आर्थिक गतिविधियों का अंदाजा मई 2023 में महावीर मंदिर न्यास समिति की ओर से जारी आंकड़ों से लगाया जा सकता है। इन आंकड़ों के अनुसार, मंदिर की प्रतिदिन की आय करीब 10 लाख रुपये थी। इस आय में भेंटपात्रों में मिलने वाली चढ़ावे की राशि, कर्मकांड शुल्क, नैवेद्यम प्रसाद से होने वाली बचत, श्रद्धालुओं की ओर से स्वेच्छा से दिए जाने वाले दान, विक्रय केंद्रों की बचत और बैंक ब्याज शामिल थे। इसमें अस्पतालों और अन्य संस्थानों की आय-व्यय राशि शामिल नहीं थी।

पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

दिल्ली से चेन्नई जा रही फ्लाइट में पावर बैंक फटने से लगी आग, इंडियो एयरलाइन का विमान हैदराबाद डायवर्ट

मेट्रो, ट्रेन, इंटरनेट सेवा बहाल करने का आदेश

नई दिल्ली। शनिवार, 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से पहले मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बंद करने, इंटरनेट बाधित करने और लोगों को हिरासत में लेने से जुड़ी याचिकाओं पर रविवार को छुट्टी के दिन सुप्रीम कोर्ट ने विशेष सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिए गए अपने आदेश का पालन नहीं करके अदालत की अवमानना करने के मामले की भी सुनवाई की। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए, इंटरनेट बाधित नहीं होना चाहिए और लोगों की आवाजाही नहीं रोकी जानी चाहिए।

शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और मेनका गुरुस्वामी की ओर से दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि नौ अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली मेट्रो और यहां आने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक न लगाई जाए। इसके बावजूद शनिवार को कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हुआ। इस पर कोर्ट ने दिल्ली के अधिकारियों को नोटिस जारी कर मंगलवार तक जवाब मांगा। अदालत ने पूछा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाया गया।

इसके साथ ही रविवार की सुनवाई में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 163 लागू होने की जानकारी देने वाला बोर्ड भी हटाने का निर्देश दिया। बेंच ने कहा कि बोर्ड हटाया जाए, ताकि नागरिकों और वकीलों को न्याय तक पहुंचने में परेशानी न हो। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बीएनएसएस की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू क्षेत्रों से बाहर शांतिपूर्ण और बिना हथियार के प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें हिरासत में न लिया जाए।

रविवार को विशेष सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने की। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार और दिल्ली पुलिस का पक्ष रखा। दूसरी ओर कपिल सिब्बल, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी, संजय हेगड़े और शादान फरासत ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा। केंद्र की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली में इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और सभी मेट्रो स्टेशन और ट्रेनें पूरी तरह चालू हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों के कामकाज में बाधा नहीं डाली जाएगी।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर UNICEF India ने स्मृति मंधाना को यह सम्मान

Unicef India ने  भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान स्मृति मंधाना को संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार एजेंसी की सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की। इस नई भूमिका में, मंधाना बच्चों और युवाओं के समान अधिकारों और अवसरों की वकालत करने के अपने पूर्व के कार्यों को आगे बढ़ाएंगी।

यह नियुक्ति 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर की गई, जो लड़कियों के अधिकारों, सुरक्षा, क्षमता और नेतृत्व पर प्रकाश डालती है, साथ ही उन बाधाओं पर भी जो अभी भी उनके विकल्पों को सीमित करती हैं। भारत की खेल आइकन और युवा महिलाओं व लड़कियों के लिए रोल मॉडल, मंधाना लड़कियों को खेलने और आगे बढ़ने के लिए समान अवसरों की वकालत करेंगी। वह यूनिसेफ इंडिया के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहयोग देंगी ताकि किशोरियों को सशक्त बनाया जा सके, उनके स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा दिया जा सके और वे अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकें।

इस अवसर पर मंधाना ने कहा, “मैं यूनिसेफ इंडिया की सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में जुड़कर सम्मानित महसूस कर रही हूं। बचपन में क्रिकेट खेलने ने मुझे सिखाया कि हर सपना एक अवसर से शुरू होता है। मेहनत, दृढ़ संकल्प और प्रोत्साहन से वह अवसर कुछ असाधारण बन सकता है। हर बच्चे और युवा को बड़ा सपना देखने और अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए।”

यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने इस अवसर पर कहा, “हम अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर स्मृति मंधाना का यूनिसेफ इंडिया की सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में स्वागत करते हुए प्रसन्न हैं। स्मृति की यात्रा, एक महत्वाकांक्षी युवा एथलीट से वैश्विक क्रिकेट आइकन तक, लड़कियों को दिखाती है कि जब प्रतिभा को अवसर मिलता है तो क्या संभव है। ऐसे समय में जब भारत दुनिया के सबसे बड़े बच्चों और युवाओं की पीढ़ी का घर है, लड़कियों के अधिकारों, नेतृत्व और कल्याण में निवेश करना किसी देश का सबसे समझदार निवेश है। हम स्मृति के साथ साझेदारी करने की आशा करते हैं ताकि हर लड़की को सीखने, खेलने, नेतृत्व करने और अपनी क्षमता पूरी करने का अवसर मिल सके।”

अर्जुन पुरस्कार प्राप्त और भारत की अग्रणी खिलाड़ियों में से एक, मंधाना, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हैं। वह उस टीम का हिस्सा थीं जिसने 2025 में भारत को पहला आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप खिताब दिलाया। उसी वर्ष, वह पहली महिला बनीं जिन्होंने एक कैलेंडर वर्ष में 1,000 से अधिक वनडे रन बनाए, और पांच वनडे शतक लगाकर रिकॉर्ड बनाया। 2026 में, वह महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय में अग्रणी रन-स्कोरर बनीं। वह विश्व की शीर्ष रैंक वाली महिला वनडे बल्लेबाज हैं और दो बार आईसीसी महिला क्रिकेटर ऑफ द ईयर रह चुकी हैं।

मंधाना ने पहले यूनिसेफ-आईसीसी अभियानों का समर्थन किया है जो लैंगिक समानता और जीवन कौशल पर केंद्रित थे। वह यूनिसेफ के प्रॉमिस टू चिल्ड्रन अभियान की भी समर्थक रही हैं।

यूनिसेफ सरकारों, समुदायों, नागरिक समाज और युवाओं के साथ मिलकर किशोरियों के अधिकारों, एजेंसी और अवसरों को आगे बढ़ाने के लिए काम करता है। लड़कियों को ज्ञान, जीवन कौशल, नेतृत्व के अवसर और सुरक्षित स्थान प्रदान करता है ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, कल्याण और अपने भविष्य के बारे में सूचित निर्णय ले सकें। साझेदारों के साथ मिलकर, यूनिसेफ परिवारों और समुदायों के साथ भी काम करता है ताकि हानिकारक लैंगिक मानदंडों को चुनौती दी जा सके, सहयोग प्रणालियों को मजबूत किया जा सके, लड़कियों को शिक्षा में बनाए रखा जा सके, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार किया जा सके और उन्हें कौशल और आजीविका मार्गों से जोड़ा जा सके — जिससे उनका आत्मविश्वास और विकल्प बढ़े ताकि वे सीख सकें, नेतृत्व कर सकें, आगे बढ़ सकें और विवाह को टाल सकें।

यूनिसेफ हर बच्चे के अधिकारों को बनाए रखने का प्रयास करता है, उन्हें नुकसान और सभी प्रकार के भेदभाव से बचाता है, ताकि वे स्वस्थ और शिक्षित होकर अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकें। यह कार्य यूनिसेफ के वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त जनादेश और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के समर्थन के अनुरूप है। यूनिसेफ दुनिया के सबसे कठिन स्थानों में काम करता है, ताकि दुनिया के सबसे वंचित बच्चों तक पहुंचा जा सके। 190 से अधिक देशों और क्षेत्रों में, संस्था हर बच्चे के लिए हर जगह काम करती है ताकि सभी के लिए एक बेहतर दुनिया बनाई जा सके। यूनिसेफ इंडिया व्यवसायों और व्यक्तियों से मिलने वाले समर्थन और दान पर निर्भर करता है ताकि स्वास्थ्य, पोषण, जल और स्वच्छता, शिक्षा, सामाजिक नीति और सामाजिक सुरक्षा तथा बाल संरक्षण कार्यक्रमों को विस्तारित किया जा सके।

महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने भी इस अवसर पर यूनिसेफ और मंधाना की तारीफ में ट्वीट किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘‘स्मृति मंधाना यूनिसेफ इंडिया परिवार में आपका स्वागत है। आप मैदान पर लाखों लोगों को प्रेरित करती हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि मैदान के बाहर आप बच्चों के अधिकारों के लिए बुलंद आवाज बनोगी।’’

Imran Khan: इमरान खान ‘अधूरे हम अधूरे तुम’ से करने जा रहे कमबैक, दिसंबर में नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी फिल्म

Imran Khan: इमरान खान ने आखिरकार अपनी आने वाली फिल्म ‘अधूरे हम अधूरे तुम’ की रिलीज डेट कन्फर्म कर दी है। बड़े पर्दे पर इमरान खान की वापसी बॉलीवुड की सबसे चर्चित वापसी कहानियों में से एक रही है। ‘कट्टी बट्टी’ (2015) के बाद से ही यह एक्टर फिल्मों से काफी हद तक दूर रहे हैं, जिससे फैन्स यह सोचते रहे कि वे कब किसी प्रोजेक्ट में लीड रोल में नजर आएंगे।

इमरान ने अब हिंदुस्तान टाइम्स को बताया-“हमें बताया गया है कि वे इसे दिसंबर 18 को रिलीज करना चाहते हैं। इसलिए हम पोस्ट-प्रोडक्शन का काम तेजी से पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। यह OTT पर रिलीज होगी, न कि सिनेमाघरों में। इसलिए मुझे नहीं लगता कि तारीख से कोई फर्क पड़ता है। मैं बस इस बात से खुश हूं कि आखिरकार हम यह फिल्म सभी के साथ शेयर कर सकते हैं।”

हालांकि इमरान ने इस साल की शुरुआत में वीर दास की फिल्म ‘हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस’ में एक छोटा सा रोल करके दर्शकों को चौंका दिया था। लेकिन लीड एक्टर के तौर पर उनकी वापसी एक राज बनी हुई थी। अब एक्टर ने आखिरकार कन्फर्म कर दिया है कि उनकी वापसी वाली फ़िल्म इस साल क्रिसमस से पहले रिलीज होगी। यह फिल्म नेटफिलिक्स पर उपलब्ध होगी।

इमरान के अलावा इस फिल्म में भूमि पेडनेकर और गुरफतेह पीरजादा भी हैं। इसे दानिश असलम ने डायरेक्ट किया है। इससे पहले ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ के साथ बातचीत में इमरान ने इस फिल्म को “एक मैच्योर रोमांटिक कॉमेडी… जो मेरी मौजूदा उम्र के हिसाब से सही है” बताया था।

इससे पहले News18 से बात करते हुए इमरान ने बताया था कि ‘अधूरे हम अधूरे तुम’ टाइटल ‘ब्रेक के बाद’ फिल्म के एक गाने से लिया गया है। हालांकि यह फिल्म ‘ब्रेक के बाद’ का सीक्वल नहीं है। लेकिन वे इसे उसका ‘स्पिरिचुअल सक्सेसर’ (आध्यात्मिक उत्तराधिकारी) मानते हैं। इसमें ‘ब्रेक के बाद’ की झलक भी शामिल की है। कहा जा रहा है कि यह एक मैच्योर रोमांटिक कॉमेडी है जो इमरान के निजी जीवन के अनुभवों—जैसे शादी और अलगाव—पर काफी हद तक आधारित है, जिससे यह एक्टर के लिए एक बहुत ही पर्सनल प्रोजेक्ट बन गया है।

इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बारे में बात करते हुए, इमरान ने कहा कि उन्हें फिल्म बनाने की इच्छा हुई और उनके मन में कुछ ऐसे विषय थे जिन पर वे काम करना चाहते थे। वे पहले से ही दानिश की सोच और काम करने के तरीके से वाकिफ थे, इसलिए उन्होंने एक प्रोजेक्ट पर साथ काम करने के लिए उनसे संपर्क किया और दानिश ने भी पूरे उत्साह के साथ हामी भरी। दानिश पिछले लगभग एक दशक से अपने मन में एक कहानी पर काम कर रहे थे। इमरान को वह कहानी तुरंत पसंद आ गई। इसके बाद दोनों ने मिलकर इस फिल्म को बनाने का फैसला किया।

ट्रेन से पटना का सफर होगा आसान, नई रेल लाइन परियोजना से मेन रूट पर घटेगा दबाव

पटना की सबसे व्यस्त रेल लाइनों में से एक पर ट्रेनों का दबाव कम होने जा रहा है। दानापुर मंडल की नेउरा-दनियावां नई रेललाइन परियोजना के तहत करीब 20 किलोमीटर लंबे नेउरा-जट डुमरी रेलखंड के निरीक्षण का काम पूरा हो गया। रेलवे संरक्षा आयुक्त ने यह निरीक्षण किया। जट डुमरी से नेउरा तक विशेष ट्रेन का 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रायल किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। इस रेलखंड पर मालगाड़ियों का परिचालन शुरू हो गया है।

पटना-दानापुर-किऊल रेलमार्ग पर दबाव घटेगा

इस नए रेलखंड के चालू होने से पटना-दानापुर-किऊल रेलमार्ग पर ट्रेनों का दबाव कम हो जाएगा। खासकर मालगाड़ियों के लिए यह वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध होगा, जिससे मुख्य रेलमार्ग पर यात्री ट्रेनों के संचालन को आसान बनाने में मदद मिलेगी। नेउरा जंक्शन और जट डुमरी जंक्शन के बीच गोनपुरा स्टेशन बनाया गया है। अधपा, चामुचक और बाजिदपुर में हाल्ट बनाया गया है। नेउरा स्टेशन पहले से पटना-आरा रेलखंड पर और जट डुमरी स्टेशन पटना-गया रेलखंड पर मौजूद हैं।

रेल लाइन के निरीक्षण का काम हुआ पूरा

करीब 20 किलोमीटर के इस रेलखंड पर रेल यातायात को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए 3 बड़े पुल, 16 छोटे पुल, 5 सीमित ऊंचाई वाले पुल, 2 रोड ओवरब्रिज, एक रेल ओवर रेल और 12 रोड अंडरब्रिज बनाए गए हैं। 8 अक्टूबर को रेलवे संरक्षा आयुक्त ने नए रेलखंड का निरीक्षण किया। अधिकारियों के मुताबिक, अब दूसरी ओर से आने वाली मालगाड़ियों को पटना की ओर लाने के बजाय नेउरा से जट डुमरी, दनियावां, बिहारशरीफ और बरबीघा होते हुए शेखपुरा की तरफ भेजा जा सकेगा। वहां से यह मार्ग किऊल-गया रेललाइन से जुड़ जाएगा।

आउटर पर ट्रेनों को नहीं करना पड़ेगा इंतजार

नई व्यवस्था शुरू होने के बाद मुख्य रेललाइन का इस्तेमाल उन्हीं मालगाड़ियों के लिए होगा, जिन्हें दानापुर या फतुहा यार्ड में माल उतारना है। डीडीयू और हावड़ा की ओर जाने वाली लंबी दूरी की मालगाड़ियों को नेउरा-जटडुमरी-दनियावां वैकल्पिक रेलमार्ग से गुजारा जाएगा। इससे पटना के व्यस्त रेलखंड पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा और यात्री ट्रेनों के परिचालन के लिए अधिक जगह उपलब्ध होगी। आउटर पर ट्रेनों के इंतजार और शंटिंग के कारण होने वाली देरी में भी कमी आने की उम्मीद है।

50 लाख से ज्यादा लोगों को होगा फायदा 

इस रेललाइन से पटना, नालंदा और शेखपुरा जिलों के बड़ी आबादी को फायदा मिलेगा। नई रेललाइन से इन इलाकों की सीधी रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, वहीं व्यापार, कृषि उत्पादों की आवाजाही और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रेलवे के अनुसार, यह लाइन दानापुर-पटना-किऊल-झाझा की अत्यधिक व्यस्त मुख्य रेललाइन के लिए बाईपास के रूप में भी काम करेगी। इस परियोजना के तहत जट डुमरी से दनियावां तक 22.74 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर पहले ही ट्रेनों का परिचालन शुरू हो चुका है। अब नेउरा-जट डुमरी खंड के जुड़ने से इस वैकल्पिक रेलमार्ग की उपयोगिता और बढ़ जाएगी।

(पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट)

Sarva Pitru Amavasya 2026: कल शनि अमावस्या के साथ विदा होंगे पितृ, जानें सर्व पितृ अमावस्या पर तर्पण और श्राद्ध का मुहूर्त

Sarva Pitru Amavasya 2026: अश्विन अमावस्या से पितरों श्राद्ध और तर्पण की अवधि, जिसे पितृ पक्ष कहते हैं, समाप्त हो जाती है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनका निधन किसी भी माह की अमावसया तिथि को हुआ था और जिनकी मृत्यु की तारीख ज्ञात नहीं है। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और दान के बाद पितृ लोक से आए पितृ विदा हो जाते हैं।

सर्व पितृ अमावस्या तारीख और समय?

आश्विन अमावस्या तिथि शुक्रवार, 9 अक्टूबर रात 9 बजकर 35 मिनट से शनिवार रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कार्य दोपहर के समय करते हैं। उदयातिथि के आधार पर सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर शनिवार को है। शनिवार की अमावस्या होने की वजह से यह शनि अमावस्या भी है और आश्विन अमावस्या भी।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 मुहूर्त

सर्व पितृ अमावस्या पर ज्ञात और अज्ञात सभी पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध होता है। सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कुतुप मुहूर्त या रौहिण मुहूर्त में कर देते हैं।

कुतुप मुहूर्त : 11:45 ए एम से 12:31 पी एम

रौहिण मुहूर्त : 12:31 पी एम से 01:18 पी एम

अपराह्न काल : 01:18 पी एम से 03:37 पी एम

सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों को विदा करने की विधि

सर्व पितृ अमावस्या को आप विधि विधान से सही मुहूर्त में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर लें। उसके बाद जब सूर्यास्त हो तो पितरों की विदाई का कार्यक्रम करें। उनके लिए चार मुख वाला तेल का एक दीप जलाएं। यह दीपक दक्षिण दिशा में रखना है। जब पितर धरती से विदा होंगे तो उस दीपक की वजह से उनके मार्ग में उजाला रहेगा।

पितरों को विदा करें मोक्ष प्राप्ति की कामना

दीपक जलाने के बाद आप पितरों को स्मरण करें और दोनों हाथों को जोड़कर उनको प्रणाम करते हुए कहें— हे सभी पितृ देव! पितृ पक्ष के समय में आपके लिए तर्पण, श्राद्ध, पंचबलि कर्म, दान, ब्राह्मण भोज आदि अपनी क्षमता के अनुसार किया, आप सभी मेरे इन कार्यों से तृप्त और संतुष्ट हों। भगवान विष्णु की कृपा से आप सभी को मोक्ष की प्राप्ति हो। आप सभी अपने मार्ग से अपनी दिशा की ओर प्रस्थान करें और पूरे परिवार को सुख, समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद दें।

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Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

Maharaja Agrasen Jayanti: कौन थे महाराजा अग्रसेन? 5000 साल पहले दी थी ऐसी न्यायनीति, जानकर रह जाएंगे हैरान

Who was Maharaja Agrasen, Learn about his principles of justice

Maharaja Agrasen Jayanti 2026: भारत के महान लोकनायक एवं महाराजा अग्रसेन की जयंती 11 अक्टूबर, रविवार 2026 को मनाई जाएगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार, उनका जन्म आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को हुआ था। महाराजा अग्रसेन समानता पर आधारित आर्थिक नीति को अपनाने वाले संसार के प्रथम सम्राट थे। महाराजा अग्रसेन को समाजवाद का अग्रदूत भी कहा जाता है। महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति प्राचीन भारत के इतिहास में सबसे अनोखी, मानवीय और प्रेरणादायक मानी जाती है। आइए जानते हैं महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति और उनके जीवन के बारे में विस्‍तार से…

 

कौन थे महाराजा अग्रसेन?

महाराजा अग्रसेन का जन्म सूर्यवंशी क्षत्रिय राजा वल्लभ सेन के यहां हुआ था जो प्रतापनगर के राजा थे। मान्यता के अनुसार इनका जन्म मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम की 34वीं पीढ़ी में द्वापर के अंतिमकाल और कलियुग के प्रारंभ में आज से 5000 वर्ष पूर्व हुआ था।

 

यह भी कहा जाता है कि उनका जन्म विक्रम संवत प्रारंभ होने के करीब 3130 साल पहले हुआ था। कहते हैं कि महाभारत के युद्ध के समय महाराज अग्रसेन 15 वर्ष के थे। महाराज अग्रसेन ने 108 वर्षों तक राज किया। उनके 18 पुत्र हुए जिनसे 18 गोत्र चले। गोत्रों के नाम गुरुओं के गोत्रों पर रखे गए।

 

‘1 रुपया और 1 ईंट’ का स्वर्णिम सिद्धांत

महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति का सबसे बड़ा स्तंभ उनकी सामाजिक सहायता प्रणाली थी। जब भी कोई नया परिवार उनके राज्य (अग्रोहा) में आकर बसता था तो राज्य का प्रत्येक नागरिक उसे 1 रुपया और 1 ईंट भेंट करता था।

इसका उद्देश्‍य यह था कि 1 ईंट से वह व्यक्ति अपने रहने के लिए घर बना लेता था और रुपयों से अपना व्यापार शुरू कर पाता था। इस व्यवस्था से कोई भी व्यक्ति असहाय या गरीब रहकर अपराध (जैसे चोरी या लूट) की ओर प्रवृत्त नहीं होता था। उन्होंने समाज से असमानता मिटाकर अपराध की संभावना को ही समाप्त कर दिया था।

 

अहिंसात्मक एवं सुधारात्मक दंडनीति

महाराजा अग्रसेन शारीरिक हिंसा, मृत्युदंड या कठोर कारावास के घोर विरोधी थे। यदि कोई नागरिक पहली बार कोई अपराध या गलती करता था, तो उसे तुरंत कठोर दंड देने के बजाय सुधरने का अवसर दिया जाता था। दंड ऐसा होता था जिससे अपराधी में पश्चाताप की भावना जागे, न कि प्रतिशोध की।

महाराजा अग्रसेन का न्याय केवल अपराध की सजा देने तक सीमित नहीं था, बल्कि अपराध की जड़ (गरीबी और लाचारी) को समाप्त करने और समाज में समानता स्थापित करने पर केंद्रित था।

 

आर्थिक समानता और स्वाभिमान

महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य में ऐसी व्यवस्था बनाई थी जहां कोई भी व्यक्ति याचक (भिखारी) न बने। उनका मानना था कि किसी को बिना काम किए दान देना उसके स्वाभिमान को चोट पहुंचाता है। इसलिए उन्होंने ऐसी नीति बनाई जिससे हर व्यक्ति को व्यापार या कृषि का साधन मिले और वह स्वाभिमान से अपनी जीविका चला सके।

 

प्रजातांत्रिक एवं लोकतांत्रिक न्याय

महाराजा अग्रसेन ने राजतंत्र में भी लोकतांत्रिक सिद्धांतों को लागू किया। उन्होंने राज्य को 18 प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित किया था और 18 यज्ञों के माध्यम से 18 गोत्रों की स्थापना की। निर्णय अकेले राजा द्वारा नहीं, बल्कि गणराज्य के प्रतिनिधियों और गुरुओं की सलाह व सहमति से निष्पक्ष रूप से लिए जाते थे।

 

राजा और प्रजा के बीच विश्वास

उनकी न्यायनीति इतनी पारदर्शी और लोककल्याणकारी थी कि प्रजा को कभी अदालती चक्करों या शोषण का सामना नहीं करना पड़ता था। राज्य में विश्वास और बंधुत्व का वातावरण था, जिससे अपराध दर न के बराबर थी।

महाराजा अग्रसेन की न्यायनीति केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह कल्याणकारी राज्य और व्यवहारिक समाजवाद का पहला ऐतिहासिक उदाहरण थी, जहां न्याय का अर्थ समाज के हर व्यक्ति को बराबरी का अवसर और सम्मान देना था।

 

पशु हिंसा पर प्रतिबंध

उन्होंने अपने राज्य में यज्ञों में दी जाने वाली बलि और पशु हिंसा पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया था। उनका मानना था कि जीव हत्या अन्याय है।

 

महाराज अग्रसेन के मुख्‍य 3 आदर्श

महाराज अग्रसेन ने एक ओर हिन्दू धर्मग्रंथों में वैश्य वर्ण के लिए निर्देशित कर्मक्षेत्र को स्वीकार किया और दूसरी ओर देशकाल के परिप्रेक्ष्य में नए आदर्श स्थापित किए। उनके जीवन के मूल रूप से 3 आदर्श हैं- लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था, आर्थिक समरूपता एवं सामाजिक समानता।

वृंदावन में दर्दनाक हादसा, पानी की टंकी में सफाई करने उतरे 4 छात्रों की जहरीली गैस से मौत, जांच में जुटी पुलिस

Mathura News: मथुरा के वृंदावन में मंगलवार रात एक ऐसी घटना हुई, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। दरअसल यहां पर स्थित एक आवासीय संस्कृत गुरुकुलम में पानी की टंकी साफ करने उतरे चार छात्रों की संदिग्ध जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। वहीं, एक अन्य छात्र की हालत गंभीर बताई जा रही है।

बता दें कि यह घटना चैतन्य विहार 2 स्थित पाणिनि संस्कृत गुरुकुल में रात करीब 10 बजे हुई। मरने वाले छात्रों की पहचान 22 साल के मनु कटारे, 19 साल के विशु शर्मा, 16 साल के आर्यन पांडे और 17 साल के देवांश शर्मा के तौर पर हुई है। पांचवें छात्र, रुद्राक्ष, को बचा लिया गया और उसका इलाज चल रहा है।

पुलिस ने दी जानकारी

पुलिस के मुताबिक, टंकी से बदबू आने के बाद छात्र उसमें उतरे थे। एक छात्र सबसे पहले अंदर गया लेकिन बाहर नहीं आया। इसके बाद उसे बचाने की कोशिश में चार अन्य छात्र भी अंदर गए, लेकिन वे भी बेहोश हो गए।

गुरुकुलम में मौजूद लोगों ने काफी मशक्कत के बाद पांचों छात्रों को टंकी से बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने चार छात्रों को मृत घोषित कर दिया। वहीं, रुद्राक्ष को पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में बेहतर निगरानी और इलाज के लिए उसे दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, रुद्राक्ष होश में है और बात भी कर पा रहा है।

SSP ने बताया कैसे हुआ पूरा हादसा

मथुरा के SSP श्लोक कुमार ने बताया कि यह घटना एक आवासीय संस्थान में हुई, जहां छात्र रहते और पढ़ते हैं। “टैंक से बदबू आ रही थी और छात्र उसे साफ करने के लिए उसमें उतरे थे।

जब पहला छात्र बाहर नहीं आया, तो चार अन्य छात्र अंदर गए। वे भी बाहर नहीं आए और बाद में उन्हें बचाया गया,” उन्होंने कहा। पुलिस ने शवों को मुर्दाघर भेज दिया है और मृतकों के परिवारों से संपर्क कर रही है। घटनाक्रम का पता लगाने के लिए परिसर में लगे CCTV फुटेज की भी जाँच की जा रही है।

इस संस्थान में 200 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं और लगभग 100 छात्र अभी परिसर में ही रहते हैं। यहां कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई होती है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद गुरुकुल चलाने वाला व्यक्ति परिसर से चला गया। पुलिस ने कहा कि पीड़ितों के परिवारों की शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

12 फीट गहरी टंकी में उतरे थे पांच छात्र

डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा, “स्कूल परिसर में पानी का एक सबमर्सिबल टैंक था जो लगभग 12 फीट गहरा था। उससे बदबू आ रही थी और गुरुकुल के पांच बच्चे उसे साफ करने के लिए टैंक में उतरे। जहरीली गैस की वजह से चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि एक बच्चा पूरी तरह सुरक्षित बच गया। इस बात की विस्तृत जांच की जा रही है कि यह हादसा कैसे और क्यों हुआ और गुरुकुल कौन चला रहा था। मुख्यमंत्री ने भी इस घटना का तुरंत संज्ञान लिया है। यह बेहद दुखद घटना है और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दी जाएगी।”

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ना स्मार्टफोन, ना UPI… फिर भी दिल का करोड़पति निकला पोस्टमास्टर, 2 साल की बच्ची के लिए दान कर दी पूरी सैलरी

भुवनेश्वर: आज के दौर में जहां लोग 10 रुपये दान करने से पहले 10 बार सोचते हैं, वहीं ओडिशा के एक पोस्टमास्टर ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है जिसे सुनकर हर कोई सलाम कर रहा है। ना उनके पास स्मार्टफोन है, ना डिजिटल वॉलेट… लेकिन दिल सोने से भी खरा है।

कौन हैं ये पोस्टमास्टर बिमल और क्या है त्रिशिका की कहानी?

बिमल कुमार साहू 58 साल के हैं और ढेंकानाल जिले के गांदिया ब्लॉक स्थित पिंगुआ सब-पोस्ट ऑफिस में पोस्टमास्टर हैं। रिटायरमेंट में कुछ ही दिन बाकी हैं और उनकी मासिक सैलरी 26,304 रुपये है। वहीं, जाजपुर जिले की 2 साल की त्रिशिका रे एक दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) टाइप-2 से जूझ रही है। डॉक्टरों ने उसके इलाज के लिए जोल्जेन्स्मा इंजेक्शन की सलाह दी है, जिसकी कीमत करीब 16 करोड़ रुपये बताई गई है। त्रिशिका के पिता क्राउडफंडिंग के जरिए इलाज के लिए पैसे जुटा रहे हैं। अब तक करीब 6 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं, जबकि अभी भी करीब 10 करोड़ रुपये की जरूरत है।

टीवी पर देखी खबर, फिर स्कूटर में पेट्रोल भरकर निकल पड़े

बिमल साहू ने टीवी पर त्रिशिका की खबर देखी। उन्होंने सोचा कि ऑनलाइन कैसे भेजूं, इससे अच्छा है खुद जाकर दे आऊं। उन्होंने अपने स्कूटर में पेट्रोल भरवाया और सीधे भुवनेश्वर के लिए निकल पड़े। रास्ता पूछते-पूछते वह News18 के ऑफिस पहुंचे और बोले – मुझे त्रिशिका की मदद करनी है। वहीं पर त्रिशिका के परिवार को बुलाया गया और बिमल जी ने अपनी पूरे महीने की सैलरी उनके हाथ में रख दी।

बोले- मैं तो बस गिलहरी जैसा योगदान दे रहा हूं

पैसे देते हुए बिमल साहू ने कहा, “मैं इस बच्ची को जितने पैसों की जरूरत है उतना तो नहीं दे सकता, लेकिन क्या मैं गिलहरी की तरह अपना छोटा सा योगदान भी नहीं दे सकता?” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बिमल साहू की यह कहानी सिर्फ दान की नहीं, बल्कि सोच की है। एक तरफ जहां लोग मदद के नाम पर सोशल मीडिया पर सिर्फ पोस्ट शेयर करके अपनी जिम्मेदारी खत्म समझ लेते हैं, वहीं 58 साल के इस पोस्टमास्टर ने बिना किसी दिखावे के वह कर दिया जो बड़े-बड़े दानवीर भी नहीं कर पाते। उनकी सैलरी भले ही 26 हजार हो, लेकिन उनका दिल करोड़ों का है। रिटायरमेंट से ठीक पहले दिया गया उनका यह योगदान यह बताता है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। सोशल मीडिया पर अब हर कोई कह रहा है – टेक्नोलॉजी नहीं, नियत बड़ी होनी चाहिए।

आज का एक्सप्लेनर:हूतियों से लड़ने सऊदी जा रहीं पाक-तुर्किये की सेनाएं, पाकिस्तान ने पहले इनकार किया, आखिर किस मजबूरी में एक्टिवेट हुआ ‘मक्का पैक्ट’

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने पहली बार ‘मक्का पैक्ट’ एक्टिवेट कर दिया है। 2 महीने पहले हुए करार के तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों पर हमला माना जाएगा। यानी, अब हूतियों से जंग में उलझे सऊदी की मदद के लिए पाक-तुर्किये को सेनाएं भेजनी पड़ेंगी। आखिर मदद मांगने को कैसे मजबूर हुआ सऊदी, क्या वाकई दूसरे देश के लिए लड़ेंगी पाकिस्तान-तुर्किये की सेनाएं और क्या इससे भारत को चिंता करनी चाहिए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: हूतियों ने सऊदी अरब को मदद मांगने पर कैसे मजबूर किया? जवाब: सऊदी अरब के पड़ोस में है यमन। यहां की कुल 4 करोड़ की आबादी में करीब 35% जैदी शिया हैं। इन्हीं शियाओं का हथियारबंद समूह और राजनीतिक ऑर्गेनाइजेशन है हूती। यमन की मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है। सऊदी के जवान सरकार की सेना के साथ मिलकर कई इलाकों में डेरा डाले हुए हैं। वहीं सरकार के खिलाफ विद्रोह करके यमन के उत्तर-पश्चिम इलाके, राजधानी सना और लाल सागर के तटीय इलाके में हूतियों का कब्जा है। इन्हें ईरान से हथियार और पैसे की मदद मिलती है। 2015 से ही हूतियों और सऊदी समर्थित यमन की सेना में इलाकों पर कब्जे को लेकर छिटपुट संघर्ष चलता रहा। 2022 में संयुक्त राष्ट्र ने सीजफायर करवाया। बीते साल शुरू हुई ईरान-अमेरिका जंग के दौरान ईरान ने अमेरिका के सहयोगी सऊदी पर भी हमले किए। हूतियों ने भी कई बार सऊदी पर हमला करने की धमकी दी। 5 अगस्त 2026 को हूतियों ने सऊदी समर्थित यमन सेना के कैंपों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले शुरू कर दिए. हूतियों ने आरोप लगाया कि यहां सऊदी गठबंधन सेना जमावड़ा बढ़ा रही थी। इसी के साथ 4 साल पुराना सीजफायर टूट गया… सवाल-2: पाकिस्तान ने पहले टाला, फिर जमीनी सेना भेजने को क्यों तैयार हुआ? जवाब: 10 सितंबर को पाकिस्तान ने कहा, ‘सऊदी पर हूतियों के हमले के खिलाफ मक्का पैक्ट के तहत कोई कार्रवाई करने पर कोई बातचीत नहीं हुई है। जब वक्त आएगा, तब कदम उठाएंगे।’ पाकिस्तान के इस रुख के पीछे 3 वजहें थीं… 1. साझा सैन्य कमांड का कोई ढांचा नहींः तुर्किये के डिप्लोमेट रहे मुस्तफा एनेस एसेन के मुताबिक, ‘मक्का पैक्ट प्रतीकात्मक है, क्योंकि इसका एक जॉइंट सैन्य कमांड स्ट्रक्चर नहीं है। तुर्किये और पाकिस्तान का सीधे टकराव में शामिल होना मुश्किल है। 2. मध्यस्थ की भूमिका को खतराः पाकिस्तान, अमेरिका-ईरान जंग में मध्यस्थता की भूमिका में है। उसने ईरान से हूतियों पर लगाम कसने के लिए कहा और सऊदी पर हमलों की निंदा भी की। लेकिन इससे आगे बढ़ने से पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका खतरे में पड़ सकती थी। 3. शिया-सुन्नी की लड़ाई में नहीं उलझना चाहताः पाकिस्तान में शियाओं की भी बड़ी आबादी है। 2015 में सऊदी ने हूतियों के खिलाफ जंग में मदद मांगी थी, तब भी पाकिस्तान ने इनकार कर दिया था। तब के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था, ‘हम किसी सांप्रदायिक जंग का हिस्सा नहीं बनना चाहते, क्योंकि इसकी दरारें पाकिस्तान के अंदर भी नजर आएंगी।’ इधर 10 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से फोन पर हूतियों पर हवाई हमले करने को कहा था। ट्रम्प ने मदद ठुकरा दी। फिर 15 सितंबर को हूतियों और अमेरिका में सीक्रेट मीटिंग हुई, जिसमें हूतियों ने वादा किया कि वो लाल सागर में अमेरिका और इजराइल के जहाजों पर हमला नहीं करेंगे। इससे सऊदी को अमेरिकी मदद मिलने की उम्मीद और कम हो गई। सऊदी ने दावा किया कि 15-16 सितंबर की रात हूतियों ने सऊदी के पवित्र शहर मक्का की तरफ ड्रोन छोड़े। हूतियों के प्रवक्ता याह्या सिरी का कहना था, ‘हमारा निशाना सऊदी के तेल और सैन्य ठिकाने थे, जो कि पवित्र स्थलों से काफी दूर हैं।’ हालांकि ड्रोन को रोकने के दौरान मक्का प्रांत के ताइफ शहर में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए। इसके बाद पाकिस्तान का रुख बदलने लगा… सवाल-3: तो क्या वाकई पाक-तुर्किये की सेनाएं हूतियों से लड़ेंगी? जवाब: साझा बयान में कहा गया है, ‘तीनों देश सऊदी में ‘तेजी से’ जॉइंट फोर्सेज और दूसरी ताकत (यानी हथियार, इंटेलिजेंस वगैरह) तैनात करेंगे।’ हालांकि पाकिस्तानी सैनिकों का सऊदी जाना नई बात नहीं है…. वहीं तुर्किये के विदेश मंत्री फिदान ने कहा है कि मक्का पैक्ट, नाटो की तरह काम करेगा, लेकिन मदद का पैमाना आगे की बातचीत से तय होगा। तुर्किये के सामने अपनी सेना भेजने में एक अड़चन ये भी है कि उसके कानून के तहत विदेश में सेना भेजने के लिए संसद की मंजूरी लेनी होगी। 5 अक्टूबर के फैसले में भी कहा गया है कि सऊदी की मदद में सेनाओं की तैनाती तीनों देशों के राष्ट्रीय कानूनों और आपसी सहमति के आधार पर होगी। सवाल-4: पाकिस्तान-भारत जंग छिड़ी, तो क्या तुर्किये-सऊदी भी लड़ने आएंगे? जवाब: सऊदी और तुर्किये भारत को दुश्मन नहीं मानते, इसलिए जंग में उनके हमले की आशंका बेहद कम है। लेकिन 3 बातें गौर करनी चाहिए… पाकिस्तान पैक्ट का फायदा उठाएगा: कार्नेगी इंडिया थिंकटैंक में सिक्योरिटी स्टडीज प्रोग्राम के फेलो दिनकर पेरी के मुताबिक, ‘यह पैक्ट पश्चिम एशिया के लिए बना है, लेकिन पाकिस्तान इसे भारत के साथ संघर्षों में इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा। खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनी हालात के चलते।’ सऊदी भारत पर हमला नहीं करेगा: भारत और सऊदी अरब के अच्छे कूटनीतिक संबंध हैं। सऊदी और भारत में सालाना 40 बिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है। सऊदी-पाकिस्तान से यह 5 बिलियन डॉलर से भी कम है। इसलिए पूर्व भारतीय राजदूत नवदीप सूरी कहते हैं, ‘अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करे या ऑपरेशन सिंदूर जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो, तो सऊदी पाकिस्तान का रक्षक बनकर नहीं आएगा।’ तुर्किये हथियार सप्लाई जारी रखेगा: रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये ने पाकिस्तान को 350 से ज्यादा ड्रोन्स भेजे थे। पाकिस्तान के समर्थन में स्टेटमेंट जारी किया था। पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया के मुताबिक, ‘इस पैक्ट से भारत-पाकिस्तान की स्थिति नहीं बदलेगी। तुर्किये पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई करता रहेगा और सऊदी खुद को पाकिस्तान का समर्थक दिखाने से बचेगा।’ सवाल-5: भारत के पास इस नई चुनौती की क्या काट है? जवाब: भारत की सबसे बड़ी काट उसके खाड़ी देशों से डिप्लोमैटिक और व्यापारिक रिश्ते हैं। खाड़ी देशों में 89 लाख भारतीय रहते हैं। भारत सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। सऊदी अरब अपना करीब 16% तो UAE करीब 11% कच्चा तेल भारत को बेचता है। मई 2026 में ही भारत ने UAE के साथ रक्षा समझौता किया है। यह रिश्ते और मजबूत किए जा सकते हैं… ——– ये एक्सप्लेनर भी पढ़िए… पैरों में हवाई चप्पल, कमर में लुंगी, मुंह में कात दबाए हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब का F-15 फाइटर जेट गिरा दिया है। वो भी अपनी देसी बैलिस्टिक मिसाइल से। यमन की सऊदी समर्थित सेना की बख्तरबंद गाड़ियां छीन लीं और निशाना चूकी DF-15 मिसाइल भी उठा ले गए। हूतियों के हमले से इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का तक हाई अलर्ट पर है। पूरी खबर पढ़िए…