यूपी के गो संरक्षण में अब जेन जी की एंट्री, गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार ‘गो मित्र’

यूपी के गो संरक्षण में अब जेन जी की एंट्री, गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार 'गो मित्र'

Gen Z enters fray for cow conservation in UP

– यूपी में बच्चों के मन में गो माता के प्रति प्रेम बढ़ाने के लिए गांव गांव चलेगा अभियान

– योगी सरकार नई पीढ़ी को बनाएगी गो संरक्षण के प्रति सजग

– तैयार किए जाएंगे मास्टर ट्रेनर, देंगे अन्य ट्रेनर को प्रशिक्षण

– गो संरक्षण में रुचि रखने वालों को दी जाएगी वरीयता

Cow Protection Campaign : योगी सरकार की प्रदेश में गो संरक्षण अभियान से अब नई पीढ़ी, खासकर जेन जी को भी जोड़ने की तैयारी है। गांव-गांव अभियान चलाकर युवाओं को गोवंश के संरक्षण, गो सेवा और इसके सामाजिक-आर्थिक महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार किए जाएंगे। पहले मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित होंगे और फिर उनके माध्यम से अन्य लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गो संरक्षण और गो सेवा में पहले से रुचि रखने वाले लोगों को इसमें वरीयता दी जाएगी। इसके साथ ही योगी सरकार गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता का मॉडल विकसित करने पर काम कर रही है।

 

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो संरक्षण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सरकार का प्रयास है कि गोवंश का संरक्षण केवल गो आश्रय स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि इससे रोजगार और ग्रामीण समृद्धि के नए अवसर भी पैदा हों। इसी सोच के तहत गोशालाओं को गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों, प्राकृतिक खेती, बायोगैस और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

 

बच्चों और युवाओं तक पहुंचेगा गो संरक्षण का संदेश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि नई पहल में सबसे ज्यादा जोर बच्चों और युवाओं को गो संरक्षण से जोड़ने पर रहेगा। गांवों में अभियान चलाकर उन्हें देसी गोवंश, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय के महत्व की जानकारी दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि नई पीढ़ी गो संरक्षण के पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं को भी समझे।

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अभियान को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। ये मास्टर ट्रेनर आगे अन्य लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इस व्यवस्था के जरिए गांव-गांव प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी है। गो संरक्षण में रुचि रखने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।

 

7,500 से अधिक गो आश्रय स्थलों में 12 लाख से ज्यादा गोवंश

उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में साढ़े सात हजार से अधिक गो आश्रय स्थल विकसित किए गए हैं, जिनमें 12 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। किसानों की फसलों को निराश्रित पशुओं से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ गोवंश को सुरक्षित आश्रय देना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

योगी सरकार ने गोवंश के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में भी वृद्धि की है। प्रति गोवंश प्रतिदिन मिलने वाली राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये किया गया है। वहीं अधिकांश गो आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।

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1.15 लाख पशुपालकों को सौंपे गए करीब 1.85 लाख गोवंश

गोवंश संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन को भी आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं। इससे गोवंश को परिवार आधारित संरक्षण मिलने के साथ पशुपालकों को भी इससे जुड़ने का अवसर मिला है।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा पशुधन वाला राज्य है और दुग्ध उत्पादन में भी देश में पहले स्थान पर है। सरकार अब इस क्षमता को ग्रामीण आय और रोजगार बढ़ाने के बड़े माध्यम के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।

 

गोशाला से गो आधारित उद्योग तक बढ़े कदम

सरकार की रणनीति गोशालाओं को धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में गोबर से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकम्पोस्ट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले और दीपक जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ पंचगव्य, घनामृत और जीवामृत जैसे उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

इन गतिविधियों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। इससे महिलाओं के लिए गांव में ही स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। जो गोबर पहले सामान्य अपशिष्ट के रूप में देखा जाता था, वही अब खाद, ऊर्जा और विभिन्न उत्पादों के जरिए आय का साधन बन रहा है।

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हर जिले की गोशालाओं का होगा मूल्यांकन

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने प्रदेश की गोशालाओं की क्षमता का व्यापक मूल्यांकन करने की पहल की है। इसके पीछे उद्देश्य अलग-अलग जिलों की स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार गो-आधारित आर्थिक गतिविधियां विकसित करना है।

 

योजना है कि किसी जिले में गोबर से बायोगैस की संभावना बेहतर है तो वहां उस पर जोर दिया जाए, जबकि दूसरे जिले में जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयां विकसित की जाएं। सरकार का लक्ष्य गो संरक्षण को स्थानीय रोजगार से जोड़ना और गांवों में आय के नए स्रोत तैयार करना है।

Vande Mataram: ‘सोनिया गांधी को जनता माफ नहीं करेगी’; अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप, बंकिम चंद्र के वंशज भी नाराज

Vande Mataram Row: कांग्रेस पर राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने का आरोप लगाते हुये केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मांग की है कि विपक्षी दल इसके लिए देश की जनता एवं गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर आत्मा से माफी मांगे। शाह ने रविवार (16 अगस्त) को आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ को भुला दिया। शाह चित्तौड़गढ़ में ‘अटल गौरव स्मृति समारोह’ में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

शनिवार को दिल्ली के लालकिले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि इस समारोह में इस साल एक बड़ा बदलाव यह था कि आजादी के 80 साल के बाद लाल किले की प्राचीर पर और देश भर में जहां ध्वज वंदन हुआ वहां पर वंदे मातरम का गायन 80 साल में पहली बार हुआ है।

‘कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया’

अमित शाह ने आरोप लगाते हुए कहा, “कांग्रेस ने वंदे मातरम को भुला दिया है।” उन्होंने कहा, “बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की वह अमर कृति, एक गान के दो शब्द वंदेमातरम… भारत माता की मैं वंदना करता हूं.. यह बोलते-बोलते हजारों लाखों लोग फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे, गोलियां खाई थीं, लाठियां खाईं, कई साल जेल में रहे।”

शाह ने आगे कहा, “वोट बैंक की लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम को बुला दिया था।” उन्होंने कहा कि यह 150वां साल है वंदेमातरम के प्राकट्य का… लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने वंदेमातरम् को फिर से एक नया आयुष्य देने का काम किया है।

सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को वंदे मातरम रोकने की बात कही?

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “इनकी (कांग्रेस) निर्लज्जता देखिए। कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय पर वंदे मातरम का गान हो रहा था। चालू गान में कांग्रेस की नेत्री, सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष को गान रोकने की बात कही। हम सब टी.वी. पर देखते रह गए। 80 साल के बाद बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय का ये अमर गान, जब फिर से सम्मान प्राप्त कर रहा है, वो भी सोनिया गांधी को रास नहीं आता है। सोनिया जी, 140 करोड़ जनता आपको देख रही है।”

शाह ने कहा, “आपके द्वारा किया गया ये पाप इस देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। कोई स्वप्न में भी कैसे सोच सकता है कि वंदे मातरम का गान अधूरा छोड़ दिया जाए? कांग्रेस के लोगों को शर्म आनी चाहिए और थोड़ी भी शर्म बची है तो दोनों हाथ जोड़कर बंकिम बाबू और देश की जनता से उन्हें माफी मांगनी चाहिए।”

बंकिम चंद्र के वंशज नाराज

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी से मांग की है कि वह स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में हुई ‘वंदे मातरम’ के गायन से जुड़ी कथित घटना को लेकर बिना शर्त माफी मांगें। चटर्जी ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने को लेकर असहजता नजर आई।से रोकने के बार-बार प्रयास किए गए। चटर्जी ने गांधी को लिखे पत्र में कहा कि 15 अगस्त को जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, तब हुई कथित घटना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि एक ऐतिहासिक भूल का शर्मनाक दोहराव भी है।

नैहाटी से विधायक चटर्जी ने कहा कि वह एक सामान्य नागरिक, देशभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज के रूप में यह पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर गहरा दुख, खालीपन और आक्रोश व्यक्त किया। चटर्जी ने श्री अरविंद के इस कथन का उल्लेख किया कि इस मंत्र ने राष्ट्र को देशभक्ति के धर्म की दीक्षा दी थी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की धरती पर ‘वंदे मातरम’ को पूरा गाने में कथित हिचक खुदीराम बोस जैसे शहीदों के बलिदान का अपमान है।

उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरला देवी चौधरानी ने 1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन में इसे गाया था। बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने 1909 में उन पर राजद्रोह के मुकदमे के दौरान इसका गायन किया था। हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रवादी छात्रों ने 1938 में निजाम की पाबंदियों के बावजूद इसे अपने आंदोलन का नारा बनाया था।

‘जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी कांग्रेस’

चटर्जी ने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा इस गीत की प्रस्तुति का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की कथित दोहरी नीति नई नहीं है। चटर्जी ने कहा कि 1937 में पार्टी मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के आगे झुक गई थी और उसी वर्ष अक्टूबर में गीत को छोटा कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस ‘‘समझौते’’ की छाया पार्टी के मौजूदा आचरण में फिर दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की अपनी छात्र इकाई छात्र परिषद जब मंत्र मोदेर संजीवन-वंदे मातरम नारे का इस्तेमाल करती है तो फिर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसी गीत को लेकर असहज क्यों है। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि देश की सामूहिक स्मृति, बंकिम चंद्र की अमर विरासत और शहीदों के खून एवं बलिदान से प्राप्त पवित्र राष्ट्रीय प्रतीक है।

चटर्जी ने कहा कि इस गीत का सम्मान करना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का सम्मान करने के समान है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इतिहास किसी को माफ नहीं करता। जो नेतृत्व स्वतंत्रता के अपने ही मंत्र का सम्मान नहीं करता, उसे इतिहास गुमनामी के अंधकार में धकेल देगा। चटर्जी ने कहा कि इस घटना से पश्चिम बंगाल के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने गांधी से पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना किसी शर्त के माफी मांगने की अपील की है।

क्या है पूरा विवाद?

BJP ने दावा किया है कि कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने पर सोनिया गांधी समेत पार्टी के कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई थी। 15 अगस्त को कांग्रेस के कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया है जिसमें जब ‘वंदे मातरम’ बजाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बात कर रही थीं। इसके बाद गांधी और खड़गे को कथित तौर पर गाना रोकने का इशारा करते हुए देखा जा सकता है।

हालांकि, कांग्रेस ने इस बात से इनकार किया कि ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को गाने से रोकने की कोई कोशिश की गई थी। पार्टी ने कहा कि गांधी सिर्फ़ खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं। पिछले महीने संसद ने एक विधेयक पारित किया था जिसमें राष्ट्रगीत के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है। कानून में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा दिया गया है।

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क्या राहु-केतु परेशानी पैदा कर रहे हैं? नाग पंचमी पर अपनी राशि के अनुसार करें ये उपाय

हिंदू परंपरा में नाग पंचमी का खास महत्व है। इस दिन भक्त नाग देवता की पूजा करते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद मांगते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दिन उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है, जो राहु और केतु के बुरे प्रभावों को कम करना चाहते हैं।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जन्म कुंडली में राहु या केतु की खराब स्थिति जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उलझन, अचानक आने वाली रुकावटों, अस्थिरता और परेशानियों का कारण बन सकती है। वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु का संबंध ‘काल सर्प दोष’ से भी माना जाता है।

17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु अपनी राशि के अनुसार कुछ खास पूजा-पाठ और उपाय कर सकते हैं। यहां बताया गया है कि पारंपरिक रूप से हर राशि के लोगों को क्या करना चाहिए।

मेष– मेष राशि के लोग पानी में लाल फूल और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकते हैं। माना जाता है कि इस उपाय से भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और राहु-केतु के बुरे प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

वृषभ– वृषभ राशि के लोग भगवान शिव को सफेद फूल चढ़ा सकते हैं। वे पानी में थोड़ा कच्चा दूध मिलाकर उससे शिवलिंग का जलाभिषेक भी कर सकते हैं।

मिथुन– मिथुन राशि के लोग भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और फिर भगवान गणेश को दूर्वा घास चढ़ा सकते हैं। परंपरा के अनुसार हरे कपड़े, हरे फल या मूंग की दाल दान करने की भी सलाह दी जाती है। भक्त “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।

कर्क– कर्क राशि के लोग नाग पंचमी पर रुद्राभिषेक कर सकते हैं या करवा सकते हैं। परंपरा के अनुसार, वे पूजा के हिस्से के तौर पर चांदी के सांपों के प्रतीकात्मक जोड़े की पूजा भी कर सकते हैं। बाद में विसर्जन या निपटान के लिए, प्राकृतिक जल स्रोतों में धातु की चीजें डालने के बजाय स्थानीय मंदिर के निर्देशों और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों का पालन करना बेहतर है।

सिंह– सिंह राशि के लोग भगवान शिव की पूजा करने से पहले सूर्य देव को जल चढ़ाकर दिन की शुरुआत कर सकते हैं। एक और पारंपरिक उपाय है तांबे के बर्तन में गेहूं भरकर किसी जरूरतमंद को दान करना।

कन्या– कन्या राशि वालों को सलाह दी जाती है कि वे जलाभिषेक करें और जानवरों व पक्षियों की देखभाल करें या उन्हें खाना खिलाएं। कुछ परंपराओं में बहते पानी में कच्चा कोयला विसर्जित करने की भी सलाह दी जाती है; हालाँकि, नदियों में सामग्री डालने के बजाय, भक्त पर्यावरण के लिए सुरक्षित कोई प्रतीकात्मक विकल्प चुन सकते हैं या किसी स्थानीय पुजारी से सलाह ले सकते हैं।

तुला– तुला राशि वाले नाग पंचमी पर शिव मंदिर जा सकते हैं और महादेव की पूजा कर सकते हैं। अपनी क्षमता के अनुसार ज़रूरतमंदों को अनाज दान करना या भोजन कराना भी इस दिन से जुड़ा एक उपाय है।

वृश्चिक– वृश्चिक राशि वाले भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और सुंदरकांड का पाठ कर सकते हैं। पारंपरिक ज्योतिष में माना जाता है कि पूजा और पाठ का यह मेल राहु और केतु से जुड़ी परेशानियों को कम करने में मदद करता है।

धनु– धनु राशि वाले भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा कर सकते हैं और इस मौके पर पीले कपड़े पहन सकते हैं। पारंपरिक रूप से विष्णु मंदिर में हल्दी और चने की दाल दान करने की भी सलाह दी जाती है।

मकर– मकर राशि वाले नाग पंचमी पर कुत्ते को रोटी और गुड़ खिला सकते हैं। शाम को, वे पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जला सकते हैं, बशर्ते ऐसा करना सुरक्षित और अनुमत हो।

कुंभ– कुंभ राशि के लोग ज़रूरतमंदों को कंबल या स्टील के बर्तन जैसी उपयोगी चीज़ें दान कर सकते हैं। भगवान शिव के सामने बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी इस राशि से जुड़ा एक पारंपरिक उपाय है।

मीन– मीन राशि के लोग पानी में थोड़ी सी केसर मिलाकर उससे भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकते हैं। कुछ परंपराओं में बहते पानी में नारियल प्रवाहित करने की भी बात कही गई है, लेकिन प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पर्यावरण के अनुकूल चीज़ें चढ़ाना या मंदिर द्वारा स्वीकृत विकल्प चुनना बेहतर है।

उपाय

राशि के अनुसार किए जाने वाले उपायों के अलावा, जो लोग राहु और केतु के बुरे असर का अनुभव कर रहे हैं, वे नाग पंचमी के दिन भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और उन पर जल चढ़ा सकते हैं (जलाभिषेक कर सकते हैं)। कुछ ज्योतिष परंपराओं में राहु काल के दौरान शिव की पूजा करने की खास सलाह दी जाती है।

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये उपाय वैज्ञानिक रूप से साबित तरीकों के बजाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें सेहत, पैसे, रिश्तों या ज़िंदगी की दूसरी समस्याओं के पक्के समाधान के तौर पर नहीं, बल्कि आस्था और आध्यात्मिक अभ्यास के तौर पर देखा जाना चाहिए।

CM धामी का बड़ा ऐलान: युवाओं के लिए बनेगा युवा आयोग, 3 जिलों में औद्योगिक पार्क

CM धामी का बड़ा ऐलान: युवाओं के लिए बनेगा युवा आयोग, 3 जिलों में औद्योगिक पार्क

pushkar singh dhami

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देहरादून में ध्वजारोहण किया। उन्होंने युवाओं के रोजगार, प्रशिक्षण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए युवा आयोग के गठन का ऐलान किया। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में पहले चरण में औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।

 

सीएम धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने युवाओं को हमेशा ही सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। युवाओं से संबंधित निर्णय, रोजगार से संबंधित बातें, युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार मिलने की बात हो, बिना पर्ची, बिना किसी खर्ची के या बिना भ्रष्टाचार या नकल के, हमने युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सभी काम किए हैं जो राज्य के हित में जरूरी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य के निर्माण के लिए, रोजगार-स्वरोजगार की दिशा में वे आगे बढ़ें, उनका प्रशिक्षण हों, सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, युवा आयोग का गठन किया जाएगा। इसकी हमने घोषणा की है। जल्द ही युवा आयोग युवाओं के विकास की दिशा में काम करेगा।

 

उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में औद्योगिकरण के लिए काफी बड़ी इंडस्ट्रियां हमारे यहां आ गई हैं। पर्वती क्षेत्रों में भी उद्योग स्थापित हो, रोजगार मिले, वहां भी इंडस्ट्री का विस्तार हो इस दिशा में चमोली, पौढ़ी और अलमोड़ा जनपदों को पहले चरण में औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे। उद्योग से संबंधित गतिविधियां यहां पर प्रारंभ की जाएंगी।

 

मुख्यमंत्री धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 80वें स्वतंत्रता दिवस का यह पावन अवसर राष्ट्र के गौरव, शौर्य और असंख्य बलिदानों को स्मरण करने का विशेष दिवस है। इस गौरवपूर्ण अवसर पर शासकीय आवास परिसर में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर वीर बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

Independence Day 2026 Wishes: 15 अगस्त पर अपनों को भेजें देशभक्ति से भरे 50+ शानदार शुभकामना संदेश और शायरी

अगस्त का महीना भारत के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हर साल 15 अगस्त को देशभर में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1947 में भारत को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी। यह दिन देश के लिए गर्व, सम्मान और देशभक्ति का प्रतीक है। स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने वाले सभी वीरों और स्वतंत्रता सेनानियों को इस दिन याद किया जाता है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूरे देश में अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और दफ्तरों में तिरंगा फहराया जाता है। देशभक्ति से जुड़े गीत, भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। दिल्ली के लाल किले से प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण और राष्ट्र को संबोधन इस दिन का प्रमुख आकर्षण होता है।

इस खास मौके पर लोग अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और करीबियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं भेजते हैं। अगर आप भी इस 15 अगस्त पर अपनों को देशभक्ति और आजादी के जज्बे से भरे संदेश भेजकर शुभकामनाएं देना चाहते हैं, तो यहां दिए गए खास मैसेज आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं।

यहां देखें 15 अगस्त पर मैसेज: 

1.स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हमारा तिरंगा हमेशा शान से लहराता रहे और देश यूं ही तरक्की करता रहे।

2. आजादी के इस पावन पर्व पर उन सभी वीरों को नमन, जिन्होंने देश के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। जय हिंद!

3. तिरंगा हमारी पहचान है, देश हमारा अभिमान है। सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।

4. आजादी सिर्फ एक अधिकार नहीं, बल्कि इसे पाने वाले वीरों के बलिदान की निशानी है। स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।

5. देश के वीर जवानों और स्वतंत्रता सेनानियों को सलाम। आप सभी को 15 अगस्त की ढेरों शुभकामनाएं।

6. जहां देशभक्ति दिल में हो, वहां हर दिन स्वतंत्रता दिवस जैसा होता है। जय हिंद, जय भारत!

7.  हमारा भारत शांति, एकता और भाईचारे के साथ हमेशा आगे बढ़ता रहे। स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।

8. तिरंगे की आन, देश की शान और भारत माता का सम्मान हमेशा कायम रहे। जय हिंद!

9. आज का दिन हमें याद दिलाता है कि आजादी अनेक वीरों के त्याग से मिली है। उन सभी को शत-शत नमन।

10. स्वतंत्र भारत के हर नागरिक को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई। देश का भविष्य और भी उज्ज्वल हो।

11. दिल में देशप्रेम, हाथों में तिरंगा और जुबां पर भारत माता का नाम हो। जय हिंद!

12. आजादी के रंग में रंग जाएं और देश की एकता को मजबूत बनाने का संकल्प लें। Happy Independence Day!

13. भारत की मिट्टी से प्यार और तिरंगे पर गर्व ही सच्ची देशभक्ति की पहचान है।

14. हमारे वीरों की कुर्बानी हमेशा याद रहे और भारत का तिरंगा आसमान में ऊंचा लहराता रहे।

15. देश की एकता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है। आइए, मिलकर इसे और मजबूत बनाएं।

16. स्वतंत्रता दिवस हमें अपने देश के प्रति जिम्मेदारियों को निभाने की प्रेरणा देता है। जय हिंद!

17. भारत की संस्कृति, एकता और अखंडता हमेशा बनी रहे। सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।

18. आजादी का जश्न मनाएं, वीरों को याद करें और देश को बेहतर बनाने का संकल्प लें।

19. तिरंगे की छांव में हमारा हर सपना पूरा हो। स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

20. भारत माता के वीर सपूतों को नमन, जिनके बलिदान से हमारा देश आजाद हुआ।

21. देश के लिए सम्मान और तिरंगे के लिए प्यार कभी कम न हो। जय हिंद, जय भारत!

22. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर भारतीय के जीवन में खुशहाली और सफलता आए।

23. हमारा देश नई ऊंचाइयों को छुए और दुनिया में भारत का नाम हमेशा रोशन हो।

24. आजादी की खुशी हर दिल में रहे और देशभक्ति की भावना हर भारतीय के मन में जीवित रहे।

25. गर्व से कहो हम भारतीय हैं। सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

यहां देखें 15 अगस्त पर शायरी:

independence day

  1. तिरंगा हमारी शान है, भारत हमारी जान है,

इसके लिए कुर्बान होना भी हमें मंजूर है।

  1. मिट्टी की खुशबू और तिरंगे का मान रहे,

मेरे भारत का हमेशा ऊंचा सम्मान रहे।

  1. देश के लिए जिसने अपना जीवन वार दिया,

ऐसे वीरों ने हमें आजादी का उपहार दिया।

  1. दिल में हिंदुस्तान और हाथ में तिरंगा रहे,

हर भारतीय के दिल में देशप्रेम जिंदा रहे।

independence day

  1. ना जाति का भेद हो, ना धर्म की दीवार हो,

मेरा भारत हमेशा एकता का मिसाल हो।

  1. शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा,

भारत का तिरंगा हमेशा ऊंचा लहराया जाएगा।

  1. आजादी का जश्न दिल से मनाएंगे,

वीर शहीदों को हमेशा याद रखेंगे।

  1. भारत की धरती पर जन्म लेना हमारा सौभाग्य है,

तिरंगे का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।

  1. वतन की मिट्टी से हमें प्यार है,

भारत पर दिल से हमें ऐतबार है।

independence day (2)

  1. तिरंगे की आन कभी कम न होने देंगे,

भारत का सम्मान कभी कम न होने देंगे।

  1. देशभक्ति का रंग दिलों पर चढ़ता रहे,

भारत का तिरंगा आसमान में बढ़ता रहे।

  1. हजारों वीरों ने आजादी के लिए जान गंवाई,

तब जाकर हमने स्वतंत्र हवा में सांस पाई।

  1. भारत मां की जय हर जुबान पर रहे,

देशप्रेम हमेशा हर इंसान के दिल में रहे।

  1. मेरा देश मेरी पहचान है,

तिरंगा मेरी सबसे बड़ी शान है।

independence day (1)

  1. आजादी की कीमत वही समझ सकता है,

जिसने देश के लिए अपना सब कुछ खोया है।

  1. वतन से बढ़कर कोई नाम नहीं,

भारत से बढ़कर कोई धाम नहीं।

  1. शहीदों के सपनों का भारत बनाना है,

देश को हर ऊंचाई तक पहुंचाना है।

  1. तिरंगा लहराए तो दिल में जोश आता है,

हर भारतीय को अपने देश पर नाज आता है।

  1. देश की खातिर जो मुस्कुराकर मर गए,

वो भारत के इतिहास में अमर हो गए।

independence day (2)

  1. भारत की धरती हमें प्यारी है,

तिरंगे पर जान भी हमारी है।

  1. आजादी का पर्व खुशियों से मनाएं,

वीर शहीदों को दिल से शीश झुकाएं।

  1. वतन की मोहब्बत में खुद को मिटा देंगे,

जरूरत पड़ी तो देश के लिए जान लुटा देंगे।

  1. एकता की ताकत से भारत महान है,

तिरंगे की वजह से हमारी अलग पहचान है।

  1. देश के वीरों का हमेशा सम्मान करेंगे,

भारत की शान को और महान करेंगे।

independence day (3)

  1. नफरत को छोड़कर प्यार फैलाएंगे,

मिलकर भारत को और मजबूत बनाएंगे।

  1. हर दिल में भारत का अरमान रहे,

तिरंगा हमेशा आसमान की शान रहे।

  1. देश की मिट्टी से रिश्ता हमारा खास है,

हिंदुस्तान पर हर भारतीय को विश्वास है।

  1. आजादी की हवा में एक अलग ही बात है,

भारत की मिट्टी से जुड़ी हमारी हर सांस है।

  1. वीरों की कुर्बानी से मिली आजादी को सलाम,

हिंदुस्तान के नाम मेरा दिल और मेरी जान।

  1. जब तक सूरज-चांद रहेगा, भारत का नाम रहेगा,

तिरंगा यूं ही आसमान में हमेशा शान से लहराता रहेगा।

सावन मास में अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब, अब तक 35 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे

सावन मास में अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब, अब तक 35 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे

Shravan month Ayodhya Ramlala Darshan: श्रावण मास में श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या धाम में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। देश के विभिन्न राज्यों एवं जनपदों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर श्री रामलला के दर्शन-पूजन के साथ ही प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं तथा भगवान शिव के मंदिरों में जलाभिषेक कर रहे हैं। श्रावण मास के दौरान अब तक 35 लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचकर दर्शन-पूजन कर चुके हैं।

 

इस वर्ष श्री रामलला के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 10 प्रतिशत से अधिक श्रद्धालुओं ने श्री रामलला के दर्शन किए हैं। प्रत्येक शनिवार एवं रविवार को भी एक लाख से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंच रहे हैं।

 

श्रावण मास के प्रथम सोमवार को लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं ने अयोध्या पहुंचकर दर्शन-पूजन किया, जबकि द्वितीय सोमवार को श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर लगभग 6 लाख तक पहुंच गई। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस द्वारा भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, यातायात एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

भीड़ प्रबंधन एवं यातायात व्यवस्था पर विशेष फोकस

जिला प्रशासन द्वारा प्रमुख मंदिरों, घाटों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के साथ ही आवश्यकता के अनुसार रूट डायवर्जन, बैरिकेडिंग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों में अधिकारियों एवं पुलिस बल की तैनाती कर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके लिए उच्च अधिकारी स्वयं रात्रि में भी मेला क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति का अवलोकन कर रहे है।

 

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता, शौचालय, प्रकाश एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। घाटों एवं प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को भी सुदृढ़ रखा गया है।

नोटों की गिनती के लिए नई व्यवस्था

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर मे विगत दिनों हुए चढ़ावा व दान चोरी की घटना ने सभी को हिला कर रख दिया हालांकि जांच अभी चल रही है। दोषी पाए गए आरोपियों को रिमांड पर लिया जा चुका है। इस बीच, SBI प्रबंधन राम मंदिर में नोटों की गिनती के लिए अपनी व्यवस्था मे बड़ा परिवर्तन करते हुए सेना के सेवानिवृत 10 कर्मियों का चुनाव किया है साथ ही इनका एक प्रभारी भी नियुक्त किया गया है।

 

वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर में सिक्योरिटी सर्विस की सेवा समाप्ति के लिए सरकूलर जारी कर दिया गया है। जानकारी दे दें कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ने दान व चढ़ावे चोरी की घटना के बाद SBI प्रबंधन ने सेक्युरिटी सेवा की समाप्ति के लिए एक सरकूलर भी जारी कर दिया है क्योंकि जेल मे बंद आठ आरोपियों मे से छह आरोपी इसी सिक्योरिटी एजेंसी के ही हैं। 

राम मंदिर ट्रस्ट का पहला CEO कौन? एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजेश पांडे और पूर्व DM योगेश्वर मिश्रा का नाम रेस में शामिल, जानें कौन हैं ये

Ram Mandir Trust CEO: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। ट्रस्ट की चयन समिति ने शॉर्टलिस्ट किए गए सभी 16 उम्मीदवारों के इंटरव्यू ले लिए हैं। आपको बता दें कि ट्रस्ट के CEO पद के लिए 5200 एप्लिकेशन मिले थे। इनमें से छंटनी के बाद सिर्फ 16 कैंडिडेट्स को इंटरव्यू कॉल गई थी। इन कैंडिडेट्स की सूची में पूर्व IAS और IPS अधिकारी, सेना के रिटायर अधिकारी, सिक्योरिटी और ऑर्गेनाइजेशनल मैनेजमेंट एक्सपर्ट्स और दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों के प्रशासनिक अनुभव वाले कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पूर्व IPS राजेश पांडे का भी नाम

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद की दौड़ में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे का भी नाम है। उन्होंने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वह मंगलवार को चयन समिति के सामने इंटरव्यू के लिए पेश हुए थे। आपको बता दें कि प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले राजेश पांडे 2003 बैच के IPS अधिकारी हैं। राजेश पांडे पीपीसी से प्रमोट होकर IPS बने थे। राजेश पांडे ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) जैसी महत्वपूर्ण यूनिट्स में सर्विस दी है। वह लखनऊ, अलीगढ़, मेरठ और सहारनपुर के SSP रह चुके हैं और हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर्स के लिए जाने जाते हैं।

राजेश पांडे उत्तर प्रदेश में दो बड़े आतंकी मामलों की जांच से जुड़े रहे हैं। पहला 2005 में अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर पर हुआ आतंकी हमला और दूसरा 2006 में वाराणसी में हुए सिलसिलेवार बम धमाके।

काशी कॉरिडोर का काम देख चुके पूर्व IAS योगेश्वर राम मिश्रा भी लिस्ट में शामिल

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व नौकरशाह योगेश्वर राम मिश्रा को भी राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में से एक माना जा रहा है। योगेश्वर राम मिश्रा का व्यापक प्रशासनिक अनुभव उनकी दावेदारी को मजबूत बनाता है। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम (काशी कॉरिडोर) के के डेवलपमेंट के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसे उनके मंदिर प्रबंधन और प्रशासनिक क्षमता से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

इंटरव्यू में उम्मीदवारों से क्या पूछा गया?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इंटरव्यू के दौरान चयन समिति ने उम्मीदवारों के प्रशासनिक और सामाजिक-धार्मिक बैकग्राउंड को गहराई से परखा। कैंडिडेट्स से उनके पेशेवर करियर और प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ राम मंदिर परिसर की सुरक्षा प्रबंधन को लेकर उनकी समझ पर सवाल किए गए। उम्मीदवारों के मंदिरों में काम करने के पूर्व अनुभव और मंदिर प्रशासन से जुड़ी जटिलताओं की उनकी समझ को जांचा गया। कैंडिडेट्स से सामाजिक और धार्मिक संगठनों से उनकी संबद्धता और हिंदू धार्मिक संस्थाओं के साथ उनके संपर्कों/संबंधों के बारे में भी पूछा गया।

क्यों पड़ी पूर्णकालिक CEO की जरूरत?

ट्रस्ट में पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति का फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है जब राम मंदिर के नाम पर मिलने वाले दान में वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोपों के कारण ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठे हैं। इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वित्तीय अनियमितता के आरोपों के बाद ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय समेत तीन अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसी के बाद ट्रस्ट के प्रबंधन को पारदर्शी और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

15 अगस्त विशेष: शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र और कर्म से बनेगा

15 अगस्त केवल एक तिथि नहीं, बल्कि देश के गौरवशाली इतिहास, अमर बलिदानों और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। हर साल जब लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा लहराता है, तो वह केवल स्वतंत्रता का उत्सव मनाने का क्षण नहीं होता, बल्कि एक राष्ट्र के रूप में आत्ममंथन करने का अवसर भी होता है। अमर शहीदों के सपनों का भारत केवल नारों से नहीं, बल्कि नागरिकों के चरित्र, कर्तव्यनिष्ठा और आचरण से निर्मित होता है। आइए जानते हैं कि इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें अधिकार मांगने के साथ-साथ किन नागरिक कर्तव्यों का संकल्प लेने की आवश्यकता है।

 

1. आत्ममंथन और अतीत का स्मरण:

15 अगस्त केवल तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान गाने और देशभक्ति के नारों का दिन नहीं है। यह वह अवसर है जब राष्ट्र को अपने अतीत के बलिदानों को स्मरण करते हुए वर्तमान का आत्ममंथन और भविष्य का संकल्प करना चाहिए। स्वतंत्रता हमें संघर्ष, त्याग और असंख्य बलिदानों के बाद मिली है। इसलिए यह सवाल आज भी प्रासंगिक है कि जिस भारत का सपना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था, क्या हम उसके निर्माण की दिशा में उतनी ही ईमानदारी से आगे बढ़ रहे हैं?

 

2. अमर सेनानियों का आदर्श और राष्ट्रीय चरित्र

भगत सिंह का साहस, चंद्रशेखर आजाद का आत्मविश्वास, नेताजी सुभाष चंद्र बोस का राष्ट्र-समर्पण, महात्मा गांधी का सत्य-अहिंसा का मार्ग और सरदार पटेल की राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता- केवल इतिहास के अध्याय नहीं हैं। वे स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय चरित्र की आधारशिलाएँ हैं। उनका सपना एक ऐसा भारत था जो:- 

  • राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हो।
  • सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण हो।
  • आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो।
  • नैतिक रूप से मजबूत और नागरिक चेतना से संपन्न हो।

 

3. अधिकार, कर्तव्य और नागरिक आचरण

आजादी का अर्थ केवल अधिकार प्राप्त करना नहीं है; लोकतंत्र अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की भी मांग करता है।

सरकारें नीतियाँ बना सकती हैं, योजनाएँ लागू कर सकती हैं और संस्थाएँ खड़ी कर सकती हैं, लेकिन राष्ट्र का वास्तविक चरित्र उसके नागरिकों के आचरण से तय होता है।

  • कानून का सम्मान
  • सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा
  • करों का ईमानदार भुगतान
  • स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव
  • ये केवल मामूली बातें नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की बुनियादी शर्तें हैं।

 

4. युवा शक्ति और आधुनिक चुनौतियाँ

आज भारत परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में देश की युवा शक्ति निर्णायक भूमिका

A young person saluting the Indian flag in the picture.

निभा सकती है। तकनीक, शिक्षा, कौशल, विज्ञान, अनुसंधान, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसर हैं। हालाँकि, डिजिटल दुनिया के साथ कुछ चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं:-

  • भ्रामक सूचनाएँ (Misinformation)
  • नशा और निराशा
  • सामाजिक विभाजन
  • इसलिए युवा ऊर्जा को केवल रोजगार की तलाश तक सीमित रखने के बजाय, उसे राष्ट्र-निर्माण की सकारात्मक शक्ति बनाना होगा।

5. स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और विविधता में एकता

स्वच्छता और आत्मनिर्भरता को केवल सरकारी अभियानों के रूप में देखना उचित नहीं है। सड़क पर कचरा न डालना, जल-स्रोतों को प्रदूषण से बचाना, स्थानीय उत्पादों एवं उद्यमियों को प्रोत्साहित करना तथा संसाधनों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाना प्रत्येक नागरिक की भूमिका है। आत्मनिर्भरता का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा, श्रम और क्षमता पर विश्वास करना है।

 

भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता और एकता है। भाषा, धर्म, जाति और क्षेत्र की भिन्नताओं के बावजूद एक राष्ट्र के रूप में साथ खड़े रहना हमारी असाधारण उपलब्धि है। मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन वैमनस्य लोकतंत्र को कमजोर करता है। इसलिए संवाद, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान को राष्ट्रीय जीवन का आधार बनाना होगा।

 

6. हर नागरिक की देशभक्ति

सीमा पर सैनिक देश की रक्षा करता है, लेकिन राष्ट्र-निर्माण की जिम्मेदारी सीमा के भीतर रहने वाले हर नागरिक की है। किसान, शिक्षक, वैज्ञानिक, श्रमिक, उद्यमी और कर्मचारी- हर व्यक्ति अपने कर्म से देश को मजबूत करता है। देशभक्ति केवल सीमा पर दिखाई देने वाली वीरता नहीं है, बल्कि अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाना भी देशभक्ति ही है।

 

7. निष्कर्ष और नागरिक संकल्प

इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें यह पूछने की जरूरत है कि “देश ने हमें क्या दिया?” से अधिक महत्वपूर्ण यह प्रश्न है कि “हमने देश को क्या दिया?”

स्वतंत्रता की सबसे बड़ी सार्थकता यही है कि हम अपने अधिकारों का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करें। शहीदों के बलिदान का सच्चा सम्मान केवल स्मारकों पर पुष्प अर्पित करने से आगे बढ़कर उनके आदर्शों को जीवन में उतारने में है।

 

आइए, इस 15 अगस्त को केवल उत्सव न मनाएँ, बल्कि एक नागरिक संकल्प लें:

  • ईमानदार बनें और जिम्मेदार बनें।
  • स्वच्छ और संवेदनशील समाज बनाएँ।
  • भारत की एकता और गरिमा को सर्वोपरि रखें।

 

क्योंकि शहीदों के सपनों का भारत नारों से नहीं, हमारे चरित्र, परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा से बनेगा। यही स्वतंत्रता का सम्मान है, यही सच्ची देशभक्ति है और यही नए भारत की ओर हमारा वास्तविक कदम है।

जय हिंद!

14 लाख सैनिक, 6000 टैंक, 3400 विमान… पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की का ये ‘इस्लामिक नाटो’ कितना मजबूत है?

अल जजीरा के एक विश्लेषण के अनुसार, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ के तहत अपने सैन्य सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस समझौते के तहत तीनों देश मिलकर लगभग 14 लाख सक्रिय सैन्य कर्मियों, 3,400 से ज्यादा विमानों और 6,000 से अधिक टैंकों को एक साथ ला रहे हैं।

7 अगस्त को हुआ यह समझौता अब केवल एक राजनीतिक घोषणा से कहीं आगे बढ़ चुका है। तीनों देश एक ऐसी संयुक्त व्यवस्था बनाने की योजना बना रहे हैं जिसमें उनके रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और सैन्य प्रमुख शामिल होंगे। इसके अलावा, तीनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किए जाएंगे। आने वाले समय में यह सहयोग रक्षा उपकरण बनाने और सैन्य तकनीक साझा करने तक भी बढ़ सकता है।

वहीं, इस समझौते को उभरते हुए “इस्लामिक NATO” के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें सामूहिक सुरक्षा का प्रावधान है, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमले को सभी पर हमला माना जाएगा। लेकिन यह व्यवस्था अभी NATO-जैसी एकीकृत सैन्य गठबंधन बनने से काफी दूर है, क्योंकि किसी भी सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में बाकी देश किस तरह सैन्य मदद करेंगे, इसे लेकर अभी कोई निश्चित नियम तय नहीं किया गया है।

तीनों देशों का मिलिट्री ग्रुप कितना ताकतवर है?

अल जजीरा की ओर से 2026 ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के हवाले से बताए गए आंकड़े इनकी मिली-जुली मिलिट्री ताकत का पैमाना दिखाते हैं। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के पास कुल मिलाकर लगभग 14 लाख एक्टिव सैनिक, 3,415 मिलिट्री एयरक्राफ्ट, 6,046 टैंक और 344 नेवल एसेट्स (नौसेना के संसाधन) हैं।

एक्टिव मिलिट्री मैनपावर में पाकिस्तान का हिस्सा सबसे ज्यादा है, जिसके पास लगभग 6,60,000 सैनिक हैं। जबकि तुर्की के पास लगभग 4,81,000 और सऊदी अरब के पास लगभग 2,47,000 सैनिक हैं।

वहीं, इन तीनों देशों में टैंकों का सबसे बड़ा बेड़ा भी पाकिस्तान के पास है, जिसके पास लगभग 2,677 टैंक हैं। इसके बाद तुर्की (2,284 टैंक) और सऊदी अरब (1,085 टैंक) का नंबर आता है।

एयरक्राफ्ट के मामले में भी पाकिस्तान सबसे आगे है, जिसके पास लगभग 1,397 मिलिट्री एयरक्राफ्ट हैं। जबकि तुर्की के पास लगभग 1,101 और सऊदी अरब के पास 917 एयरक्राफ्ट हैं।

नौसेना के ताकत की बात करें तो, इसका हिसाब-किताब अलग है। तुर्की के पास 192 नेवल एसेट्स हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 120 और सऊदी अरब के पास 32 हैं। वहीं, तीनों देशों के पास कुल मिलाकर 33 फ्रिगेट, 24 कार्वेट और 22 सबमरीन हैं।

सऊदी अरब के पास सबसे ज्यादा पैसा है

हालांकि, सिर्फ मिलिट्री के आंकड़ों से पूरी बात समझ नहीं आती।

हालांकि, सिर्फ सैन्य संख्या से तीनों देशों की पूरी ताकत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए रक्षा बजट बजट भी बहुत भी जरूरी है, जिसमें सऊदी अरब इन तीनों देशों से काफी आगे है।

अल जजीरा के आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों देशों में सऊदी अरब का डिफेंस बजट सबसे ज्यादा है। 2026 में उसका अनुमानित डिफेंस खर्च लगभग 63.9 अरब डॉलर है, जबकि तुर्की का खर्च 51.4 अरब डॉलर और पाकिस्तान का सिर्फ 9.1 अरब डॉलर है।

यह अंतर इस्लामाबाद के लिए अहम है, क्योंकि उसे लगातार आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है और वह बाहरी आर्थिक मदद पर बहुत ज्यादा निर्भर है।

फिर भी, इस समझौते से पाकिस्तान को सऊदी अरब के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने और साथ ही अपने रक्षा उद्योग के लिए नए बाजार तलाशने का मौका मिलता है।

एकेडमिक और सिक्योरिटी एनालिस्ट एंड्रियास क्रीग ने अल जजीरा को बताया कि सऊदी अरब “पूंजी, भौगोलिक स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक रूप से लोगों को साथ लाने की क्षमता” का योगदान देता है, जबकि तुर्की “लगातार बेहतर होते रक्षा-औद्योगिक आधार, ड्रोन, मिसाइल, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, नौसैनिक सिस्टम और NATO-आधारित सैन्य विशेषज्ञता” लाता है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का योगदान “मैनपावर, एक बड़ी पेशेवर सैन्य व्यवस्था, ऑपरेशनल अनुभव, रक्षा उत्पादन और परमाणु क्षमता” है।

सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्की से क्या मिलता है?

रियाद के लिए, यह समझौता अमेरिका पर उसकी लंबे समय से चली आ रही निर्भरता के अलावा सुरक्षा का एक और जरिया देता है।

ईरान और उसके सहयोगियों से जुड़े बार-बार होने वाले क्षेत्रीय संघर्षों और हमलों के बीच, सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश की है। तुर्की का रक्षा उद्योग रियाद को ड्रोन, मिसाइल और अन्य सैन्य तकनीकें उपलब्ध कराता है, जबकि पाकिस्तान एक बड़ा सैन्य ढांचा और परमाणु प्रतिरोध क्षमता प्रदान करता है।

अमेरिकी रक्षा विभाग में अरब प्रायद्वीप मामलों के पूर्व निदेशक डेविड डेस रोशेस ने अल जजीरा को बताया कि इस समझौते से सऊदी अरब को पश्चिमी देशों से हथियारों के निर्यात को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।

क्या पाकिस्तान सच में सऊदी अरब के लिए लड़ेगा?

यहीं पर ‘सामूहिक सुरक्षा’ वाली शर्त की सबसे बड़ी परीक्षा हो सकती है।

समझौते के मुताबिक, अगर किसी एक सदस्य पर हमला होता है, तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। लेकिन इसमें NATO के आर्टिकल 5 की तरह तुरंत सैन्य कार्रवाई करने की कोई बात नहीं कही गई है।

यह फर्क पाकिस्तान के लिए इसलिए अहम है क्योंकि इस्लामाबाद के ईरान के साथ संबंध हैं और वह बड़े मिडिल ईस्ट संघर्ष में खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश करता रहा है।

इसलिए सवाल यह है कि अगर सऊदी अरब पर सीधे हमला होता है, तो क्या पाकिस्तान सच में ईरान के खिलाफ सेना भेजेगा?

अगर हम पहले की घटनाओं को देखें तो, पता चलता है कि इस्लामाबाद किसी आक्रामक संघर्ष में सीधे शामिल होने के बजाय कूटनीतिक या रक्षात्मक भूमिका निभाना पसंद कर सकता है।

क्या यह अमेरिका के नेतृत्व वाले सुरक्षा ढांचे के लिए चुनौती है?

इस समझौते का असर सिर्फ इन तीन देशों तक ही सीमित नहीं रहेगा।

पाकिस्तान अमेरिका का सहयोगी है और उसे अमेरिकी सुरक्षा सहायता मिलती है। सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य उपकरणों के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है, जबकि तुर्की के पास अमेरिका के बाद NATO की दूसरी सबसे बड़ी सेना है।

हार्डकैसल एडवाइजरी के जैद एम. बेलबागी ने अल जजीरा को बताया कि “पाकिस्तान को अमेरिकी मदद मिलती है, सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य उपकरणों का सबसे बड़ा विदेशी खरीदार है, और तुर्की के पास अमेरिका के बाद NATO की दूसरी सबसे बड़ी सेना है।”

ऐसे में अमेरिका के तीन प्रमुख साझेदारों को शामिल करते हुए एक अलग सुरक्षा व्यवस्था का उभरना, क्षेत्र में तेजी से बदलते रणनीतिक समीकरणों में एक नई परत जोड़ सकता है।

क्या मिस्र इस समझौते में शामिल हो सकता है?

यह सुरक्षा समझौता आगे चलकर और देशों तक फैल सकता है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने खुले तौर पर मिस्र के इस समझौते में शामिल होने का समर्थन किया है। उन्होंने मिस्र को इसका “स्वाभाविक साझेदार” बताया है।

मिस्र की मजबूत सैन्य ताकत और उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, खासकर स्वेज नहर पर उसका नियंत्रण, उसे इस गठबंधन के लिए एक अहम सदस्य बना सकता है।

हालांकि, मिस्र को इस तरह के सामूहिक रक्षा समझौते में शामिल होने से पहले कई बातों पर विचार करना होगा। इनमें अमेरिका के साथ उसके संबंध, मौजूदा सैन्य गठबंधन और क्षेत्र में उसकी दूसरी जिम्मेदारियां शामिल हैं।

फिलहाल, अभी मुख्य ध्यान इस बात पर है कि क्या सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की अपनी बड़ी संयुक्त सैन्य क्षमताओं को एक कारगर सुरक्षा तंत्र में बदल सकते हैं।

पाकिस्तान के लिए यह बात खास तौर पर अहम हो सकती है। क्योंकि यह देश इस समूह में सबसे ज्यादा सैनिक बल और परमाणु क्षमता का योगदान देता है, लेकिन इसका रक्षा बजट अपेक्षाकृत कम है और आर्थिक रूप से इसकी निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि सैन्य कर्मियों और रणनीतिक प्रतिरोध के अलावा यह कितना योगदान दे सकता है।

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में अनोखा प्रदर्शन, दान पात्र में मिले 2.15 लाख रुपए हनुमान मंदिर में चढ़ाए

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में अनोखा प्रदर्शन, दान पात्र में मिले 2.15 लाख रुपए हनुमान मंदिर में चढ़ाए

opposition chadawa chori drama in parliament

संसद भवन के मकर द्वार पर विपक्ष के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने काफी दान किया। देखते ही देखते कुछ ही दिनों में दान पात्र में 2 लाख 14 हजार रुपए का चंदा हासिल हुआ। सपा सांसदों ने गुरुवार को इस रकम को कनाट पैलेस स्थित हनुमान मंदिर में जमा करा दिया। ALSO READ: नांदेड़ में पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल पर कृपाण से हमला, अस्पताल में भर्ती, जानें कौन हैं सुखबीर बादल

 

राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, मनोज झा समेत सभी विपक्षी सांसदों ने इस दान पात्र में पैसा डाला था। अब सपा सांसदों ने इस रकम को हनुमान मंदिर में जमा कराया है। उनका कहना है कि हम हनुमान मंदिर में यह दान इसलिए जमा करा रहे हैं क्योंकि वह धर्म के रक्षक माने जाते हैं।

 

चढ़ावा चोरी मामले में प्रदर्शन के दौरान जब सांसद पप्पू यादव साधु के वेश में संसद पहुंचे तो बवाल मच गया। भाजपा ने पप्पू यादव की इस हरकत की जमकर आलोचना की तो कई स्थानों पर साधु संतों ने भी उनका विरोध किया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन पर हमला भी हुआ। ALSO READ: कंगना रनौत का राहुल गांधी पर हमला- सवाल पूछते हैं, जवाब नहीं सुनते

 

मॉनसून सत्र के आखिरी दिन जब समाजवादी पार्टी के सांसद रुचि वीरा और अक्षय यादव ने दान पात्र खोला तो मकर द्वार के बाहर रोज एक घंटे के लिए रखे जाने वाले दानपात्र में 2 लाख 15 हजार 3 सौ 90 रुपए से ज्यादा का चंदा इकट्ठा हुआ।

 

सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि बीजेपी ने राम मंदिर तक में चढ़ावा चोरी कर दी और संसद में चर्चा तक नहीं करा रहे हैं। इसी के चलते हमने दान पात्र रखकर विरोध किया है।