सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर बवाल, इकरा हसन का बड़ा आरोप- ‘संविधान का गला घोंटा जा रहा’, अब कोर्ट जाएंगी

सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर बवाल, इकरा हसन का बड़ा आरोप- 'संविधान का गला घोंटा जा रहा', अब कोर्ट जाएंगी

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने प्रशासन की कार्रवाई पर तीखा हमला बोलते हुए इसे संविधान और कानून के खिलाफ बताया है। सांसद ने कहा कि इस मामले को लेकर वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी।

 

इकरा हसन ने आरोप लगाया कि मस्जिद के मामले में सभी संबंधित लोगों को दरकिनार करते हुए बुलडोजर की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद वर्ष 1947 से पहले से बनी हुई थी और इतने पुराने धार्मिक स्थल को बिना सभी पक्षों की बात सुने ढहा दिया गया।

 

सांसद ने कहा हमें तानाशाही के तहत हाउस अरेस्ट किया गया है। हमारे संविधान का गला घोंटा जा रहा है। इस मामले में कोई मोहलत नहीं दी गई, जबकि टेररिस्ट को मोहलत दी जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि देश में नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इकरा हसन ने कहा, संविधान का गला घोंटा जा रहा है और नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस मामले को लेकर हम लोग कोर्ट जाएंगे।

 

 

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि जिस जमीन पर मस्जिद बनी है, वह गाटा संख्या 539 है और यह जमीन वालिद खां तथा याकूब खां के नाम पर थी। उनके मुताबिक, इन लोगों ने यह जमीन कलेक्ट्रेट, कोषागार और तहसील के निर्माण के लिए दान की थी।

 

इमरान मसूद ने यह भी दावा किया कि जमीन से संबंधित वर्ष 1911 का बिजली का बिल अदालत में साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया है, जिसे पोर्टल से प्राप्त किया गया था। उनका कहना है कि इसी जमीन पर एक मंदिर भी मौजूद है।

 

मस्जिद ध्वस्तीकरण पर Aimim के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने मीडिया से कहा कि शामली विधायक इकरा हसन रील मास्टर है, यदि वह सही मायने में सहारनपुर जा रही थी और उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया है तो अखिलेश यादव अपने विधायकों के साथ वहां आयें। 

 

कलेक्ट्रेट परिसर में चला बुलडोजर

 

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन ने मस्जिद के निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बताते हुए इसे हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। मामले में न्यायालय में भी कानूनी लड़ाई चली।

 

मिली जानकारी के मुताबिक जिला अदालत ने 4 सितंबर को मस्जिद प्रबंधन की अपील खारिज कर दी और इससे पहले जारी हटाने के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।

 

प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है और विवादित निर्माण सरकारी भूमि पर था। वहीं, सांसद इकरा हसन सहित विरोध करने वाले पक्ष का आरोप है कि मामले में पर्याप्त मोहलत और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।

 

कार्रवाई के बाद बढ़ा राजनीतिक तापमान

 

मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है। इकरा हसन ने इसे महज एक निर्माण हटाने की कार्रवाई न मानते हुए संविधान और कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल बताया है। उन्होंने साफ किया है कि वह इस मामले को न्यायालय में उठाएंगी।

 

अब इस पूरे विवाद की अगली कड़ी अदालत में देखने को मिलेगी। एक तरफ प्रशासन न्यायालय के आदेश के अनुपालन की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर सांसद इकरा हसन कार्रवाई को चुनौती देने की तैयारी में हैं। ऐसे में सहारनपुर का यह मस्जिद विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

Aja Ekadashi 2026: 6 या 7 सितंबर, कब किया जाएगा अजा एकादशी का व्रत? नोट करें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Aja Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। यह व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हर एकादशी व्रत का अलग नाम और महत्व होता है। इस दिन बहुत से भक्त फलाहार उपवास करते हैं, तो कुछ निर्जला व्रत भी करते हैं। एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि से लेकर द्वादशी तिथि तक माने जाते हैं। हर माह की तरह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी या अन्नदा एकादशी का व्रत किया जाता है। यह दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होता है और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। पौराणिक काल में चक्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र ने अपने वचन और सत्य की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण राज्य, पत्नी और पुत्र तक त्याग दिया था। जब वे अत्यंत कष्ट झेल रहे थे, तब महर्षि गौतम के बताए अनुसार उन्होंने अजा एकादशी का निष्काम भाव से व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उनके सभी पाप नष्ट हो गए, उनका मृत पुत्र जीवित हो गया और उन्हें पुनः अपना खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ।

अजा एकादशी व्रत 2026 की तारीख

अजा एकादशी व्रत तारीख : 7 सितंबर 2026 (सोमवार)

एकादशी तिथि प्रारंभ : 6 सितंबर 2026, शाम 07:29/07:30 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 7 सितंबर 2026, शाम 05:03/05:05 बजे तक

व्रत पारण समय : 8 सितंबर 2026, सुबह 06:02 से 08:33 बजे तक

अजा एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 AM से 05:38 AM तक

प्रातः सन्ध्या: 05:15 AM से 06:25 AM तक

अभिजित मुहूर्त: 12:12 PM से 01:01 PM तक

गोधूलि मुहूर्त: 06:48 PM से 07:11 PM तक

अमृत काल: 03:59 PM से 05:29 PM तक

सायाह्न सन्ध्या: 06:48 PM से 07:58 PM तक

पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (विशेष रूप से पीले) पहनकर व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान की सफाई कर पीले कपड़े पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान को पीला चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। भोग में तुलसी दल (पत्ते) अनिवार्य रूप से शामिल करें।
  • अजा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें।
  • अगले दिन द्वादशी को शुभ समय में पूजा और दान-पुण्य के बाद ही व्रत खोलें।

अजा एकादशी व्रत के मुख्य नियम

एकादशी के दिन चावल (अक्षत), तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार) और शराब का सेवन पूर्णतः वर्जित है।

फलाहार में दूध, फल, मखाने या सेंधा नमक से बनी चीजें ली जा सकती हैं।

इस दिन किसी की निंदा न करें और घर में शांति बनाए रखें।

Bhadrapad Bhauma Pradosh Vrat: भाद्रपद में बना भौम प्रदोष व्रत का संयोग, जानें सही तारीख और इस व्रत के लाभ

Bhadrapad Bhauma Pradosh Vrat: हिंदू धर्म का कैलेंडर चंद्रमाह पर आधारित होता है और यह अंग्रेजी कैलेंडर से अलग होता है। इस समय हिंदू कैलेंडर का छठा माह भाद्रपद चल रहा है। प्रत्येक हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह तिथि जब मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। “भौम” मंगल देव का ही एक नाम है, और यह व्रत भगवान शिव और हनुमान जी दोनों की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस बार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर, 2026, मंगलवार के दिन पड़ रही है। इसलिए भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष व्रत होगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस व्रत में सूर्योदय के बाद प्रदोष काल में पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा रहते हैं।

कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत

वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 08 सितंबर को सुबह 05 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 09 सितंबर को रात 3 बजे होगा। ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए प्रदोष व्रत 8 सितंबर, दिन मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल पूजा का शुभ समय शाम 06:35 बजे से रात 08:52 बजे तक रहेगा।

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

कर्ज से मुक्ति : इसे ‘ऋण मोचन प्रदोष’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पुराने कर्ज और आर्थिक समस्याओं से जल्द राहत मिलती है।

भूमि और संपत्ति का लाभ: ज्योतिष में मंगल देव को भूमि का कारक माना जाता है। भौम प्रदोष व्रत करने से नया घर खरीदने, जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद सुलझाने और अचल संपत्ति के लाभ का योग बनता है।

मंगल दोष का निवारण : जिनकी कुंडली में मंगल दोष या मंगल से जुड़ी समस्याएं होती हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत लाभदायक माना जाता है।

शिव और हनुमान जी की कृपा : मंगलवार होने के कारण भगवान शिव के साथ-साथ भगवान हनुमान जी की भी विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।

शत्रु और भय से रक्षा : भगवान शिव और हनुमान जी की कृपा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और मन से अज्ञात भय, चिंता या मानसिक तनाव समाप्त होता है।

पूजा विधि

  • सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और भगवान शिव व हनुमान जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • दिन में फलाहार लें और सात्विक रहें।
  • सूर्यास्त से ठीक पहले और बाद का समय (प्रदोष काल) शिव पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • शाम को स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल चढ़ाएं।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • पूजा के अंत में आरती करें और अपनी क्षमता अनुसार किसी गरीब या जरूरतमंद को भोजन या दान दें।

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Bhadrapad Bhauma Pradosh Vrat: हिंदू धर्म का कैलेंडर चंद्रमाह पर आधारित होता है और यह अंग्रेजी कैलेंडर से अलग होता है। इस समय हिंदू कैलेंडर का छठा माह भाद्रपद चल रहा है। प्रत्येक हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। भगवान शिव को समर्पित यह तिथि जब मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। “भौम” मंगल देव का ही एक नाम है, और यह व्रत भगवान शिव और हनुमान जी दोनों की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस बार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 सितंबर, 2026, मंगलवार के दिन पड़ रही है। इसलिए भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष व्रत होगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस व्रत में सूर्योदय के बाद प्रदोष काल में पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा रहते हैं।

कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत

वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 08 सितंबर को सुबह 05 बजकर 12 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 09 सितंबर को रात 3 बजे होगा। ऐसे में प्रदोष काल को देखते हुए प्रदोष व्रत 8 सितंबर, दिन मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल पूजा का शुभ समय शाम 06:35 बजे से रात 08:52 बजे तक रहेगा।

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

कर्ज से मुक्ति : इसे ‘ऋण मोचन प्रदोष’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से पुराने कर्ज और आर्थिक समस्याओं से जल्द राहत मिलती है।

भूमि और संपत्ति का लाभ: ज्योतिष में मंगल देव को भूमि का कारक माना जाता है। भौम प्रदोष व्रत करने से नया घर खरीदने, जमीन-जायदाद से जुड़े विवाद सुलझाने और अचल संपत्ति के लाभ का योग बनता है।

मंगल दोष का निवारण : जिनकी कुंडली में मंगल दोष या मंगल से जुड़ी समस्याएं होती हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत लाभदायक माना जाता है।

शिव और हनुमान जी की कृपा : मंगलवार होने के कारण भगवान शिव के साथ-साथ भगवान हनुमान जी की भी विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।

शत्रु और भय से रक्षा : भगवान शिव और हनुमान जी की कृपा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और मन से अज्ञात भय, चिंता या मानसिक तनाव समाप्त होता है।

पूजा विधि

  • सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और भगवान शिव व हनुमान जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • दिन में फलाहार लें और सात्विक रहें।
  • सूर्यास्त से ठीक पहले और बाद का समय (प्रदोष काल) शिव पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
  • शाम को स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और फूल चढ़ाएं।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • पूजा के अंत में आरती करें और अपनी क्षमता अनुसार किसी गरीब या जरूरतमंद को भोजन या दान दें।

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यूपी का राजनीतिक भविष्यफल!

यूपी का राजनीतिक भविष्यफल!

क्या आप उत्तर प्रदेश से हैं? किसी राजनीतिक दल से आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकटार्थी हैं? अगर हां, तो आपको किसी विरहन की तरह भादों की रातें भारी लगेंगी। 

 

क्वार में आसमान साफ होने तक आपकी स्थिति कुछ हद तक साफ होगी। फिर भी मुकम्मल तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। इसलिए देवताओं की परिक्रमा करते रहिए। अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा भी देते रहिए।

 

त्रेता में बारिश के बाद ही लंका कांड हुआ था। भगवान श्रीराम उत्तर प्रदेश के अयोध्या से ही थे। अब कलयुग में इस बार उत्तर प्रदेश में क्या होगा, कहना संभव नहीं। सब कुछ रामजी की मर्जी पर है। अपने मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी से वह खुश हैं या नाराज, यह वक्त बताएगा।

 

हर दौर की तरह इस बार भी विभीषणों की चांदी रहेगी। इन दिनों विभीषण कुछ ज्यादा ही हैं, इसलिए मिलेंगे भी खूब। 

लेकिन ध्यान रखिए—ये त्रेता वाले विभीषण नहीं, कलयुग के विभीषण हैं। इनकी निष्ठा संदिग्ध रहेगी। ये विपक्ष यानी रावण का साथ छोड़कर आपके साथ आएं, यह जरूरी नहीं। मौका मिला तो आपको ही मरवाने की भूमिका में भी नजर आ सकते हैं। इसलिए इनसे दोस्ती करते समय सावधानी जरूरी है।

 

सावन-भादों में बारिश अच्छी हुई है और सिलसिला अभी जारी है। इससे मौसमी नेताओं यानी ‘मेंढकों’  की खुशी का ठिकाना नहीं। इनकी टर्र-टर्र अभी और बढ़ेगी। हालांकि इस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत नहीं, क्योंकि टर्राना मेंढकों का स्वभाव है और मौसम बदलते ही इनकी आवाज भी बदल जाएगी।

 

भादों मौसम के बदलाव का प्रतीक है। कुछ दिनों में मानसून की वापसी शुरू होगी। उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक मौसम बदलेगा या नहीं, फिलहाल मुकम्मल तौर पर कुछ कहना मुश्किल है।

 

ग्लोबल वार्मिंग ने मौसम को जितना अप्रत्याशित बनाया है, उससे कहीं ज्यादा चुनावी राजनीति ने सियासी मौसम को। देश के सबसे बड़े सूबे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बढ़ता चुनावी तापमान आने वाले दिनों को और अस्थिर बनाएगा। 

 

इसलिए थोड़ा दिल थामकर इंतजार करिए। आने वाले दिनों में कई चेहरे बदलेंगे, कई मौसम बदलेंगे और कई भविष्यफल गलत साबित होंगे। लेकिन तब तक एक काम जरूर कर लीजिए—SIR के बाद यह जरूर देख लीजिए कि आप मतदाता हैं भी या नहीं!

पुरी जगन्नाथ मंदिर के बैंक खाते में जमा है ₹1,912 करोड़, सामने आया कमाई और खर्च का पूरा ब्योरा

Shree Jagannath Temple: अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में गड़बड़ी के आरोपों के बीच, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने बुधवार को मंदिर की बैंक में जमा रकम की जानकारी सार्वजनिक की। प्रशासन के मुताबिक, मंदिर के बैंक खातों में अब तक करीब 1,912 करोड़ रुपये जमा हैं।

TOI के मुताबिक, सरकार द्वारा संचालित SJTA ने एक लिखित बयान में कहा कि मंदिर के आर्थिक मामलों का प्रबंधन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाता है, जिसमें व्यवस्थित अकाउंटिंग और नियमित ऑडिट की प्रक्रियाएं शामिल हैं। SJTA के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधी ने कहा कि जवाबदेही और जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

SJTA के अनुसार, मंदिर कई स्रोतों से कमाई करता है, जैसे भक्तों का दान और चढ़ावा, मंदिर की अपनी खदानों से होने वाली कमाई, फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज, जमीन के लेन-देन से होने वाली आय और सरकारी ग्रांट।

इसके अलावा, कमाई का एक तय हिस्सा ‘कॉर्पस फंड’ के तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा जाता है, जबकि एक और हिस्सा ‘फाउंडेशन फंड’ के लिए अलग किया जाता है। बाकी पैसा मंदिर के फंड अकाउंट में रखा जाता है। मंदिर के फंड का इस्तेमाल इस प्राचीन मंदिर की पूजा-पाठ, धार्मिक सेवाओं और प्रशासनिक कामकाज के रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए किया जाता है। अगर कोई अतिरिक्त पैसा बचता है, तो उसे बाद में फिक्स्ड डिपॉजिट में बदल दिया जाता है ताकि भगवान की संपत्ति को सुरक्षित और मजबूत बनाया जा सके।

बता दें कि 31 अगस्त तक, SJTA ने लगभग 1,912 करोड़ रुपये की बैंक संपत्ति जमा कर ली है। इसमें कॉर्पस, फाउंडेशन और मंदिर की जमा राशि जैसे तीन मुख्य मदों के तहत रखे गए लगभग 1,811 करोड़, 9 लाख और 58 हजार रुपये शामिल हैं। इस आंकड़े में जून 2024 में राज्य सरकार द्वारा कॉर्पस में दिए गए 500 करोड़ रुपये का योगदान भी शामिल है।

अरबिंद कुमार पाढ़ी ने कहा, “मंदिर के पास अभी सेविंग्स, करंट और फ्लेक्सी अकाउंट्स में लगभग 100 करोड़, 70 लाख, 66 हजार और 868 रुपये हैं। लोगों का भरोसा बनाए रखने और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, मंदिर की हुंडी से इकट्ठा हुई रकम की गिनती हर दिन की जाती है। इसकी जानकारी तुरंत ऑफिशियल नोटिस बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाती है, ताकि दुनिया भर के भक्त इसे देख सकें।”

उन्होंने यह भी बताया कि इस साल 15 जुलाई को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा डिजिटल हुंडी ‘समर्पण’ प्लेटफॉर्म लॉन्च किए जाने के बाद से, भक्तों ने ऑनलाइन डोनेशन सिस्टम के जरिए 56.7 लाख रुपये का योगदान दिया है।

हालांकि, मंदिर के फंड के गलत इस्तेमाल का कोई आरोप अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन पुलिस सूत्रों का कहना है कि पिछले 25 सालों में मंदिर में कैश, गहनों और मूर्तियों की चोरी की कम से कम सात घटनाएं हुई हैं।

ऐसे ही एक मामले में, मंदिर के क्लर्क प्रदीप कुमार महापात्रा को 7 फरवरी, 2024 को दान की गिनती के दौरान CCTV सर्विलांस के जरिए 31,940 रुपये नकद चुराते हुए पकड़े जाने का आरोप है। इससे पहले, 15 जुलाई, 2023 को मंदिर के चपरासी सुशांत कुमार राउतराय को गिनती की प्रक्रिया के दौरान 800 रुपये चुराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

यह भी पढ़ें: अधिकारियों के रील, वीडियो और पोस्ट पर केंद्र की नजर! अफसरों के लिए जल्द आएगा ‘Social Media Code’

Pitru Paksha 2026: सितंबर या अक्टूबर कब से शुरू होंगे पितृ पक्ष? जानें सही तारीख और श्राद्ध पक्ष की सभी महत्वपूर्ण तिथियां

Pitru Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष की अवधि का विशेष महत्व है। यह लगभग 15 दिनों का समय होता है, जिसमें हम अपने परिवार के स्वर्गवासी हो चुके सदस्यों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थन, श्राद्ध और तर्पण करते हैं। पितृ पक्ष की शुरुआत भाद्रपद माह की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या तक चलता है। माना जाता है कि इस अवधि में पितरों की आत्माएं पृथ्वी पर अपने परिजनों के पास आती हैं। इस दौरान उनके नाम से श्राद्ध, तर्पण, और पिंडदान करने से उन्हें शांति मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पितृ पक्ष का पालन करने वाले इस अवधि में सात्विक जीवन जीते हैं। इस समय नया सामान खरीदना, शादी-विवाह, मुंडन जैसे मांगलिक या शुभ कार्य और तामसिक भोजन वर्जित माने जाते हैं। साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत सितंबर महीने में होगी और इसका समापन अक्टूबर में सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं 2026 में पितृपक्ष कब से कब तक रहेगा और इस दौरान पड़ने वाली सभी महत्वपूर्ण श्राद्ध तिथियां कौन-कौन सी हैं।

कब से शुरू होगा पितृपक्ष 2026?

साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार से होगी। इस दिन भाद्रपद पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर को प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध होगा। वहीं, पितृपक्ष का समापन 10 अक्तूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं होती या किसी कारणवश उनका श्राद्ध तिथि पर नहीं हो पाता।

पितृ पक्ष के दौरान किए जाने वाले प्रमुख कर्म

तर्पण : जल, तिल और कुशा से पितरों को जल अर्पित करना।

पिंडदान : चावल, जौ और तिल के पिंड बनाकर अर्पित करना।

दान-पुण्य : ब्राह्मणों, गरीबों, कौओं, गायों और कुत्तों को भोजन कराना।

पितृपक्ष 2026 कैलेंडर

दिनांक तिथि श्राद्ध

26 सितंबर भाद्रपद पूर्णिमा पूर्णिमा श्राद्ध

27 सितंबर प्रतिपदा प्रतिपदा श्राद्ध

28 सितंबर द्वितीया द्वितीया श्राद्ध

29 सितंबर तृतीया तृतीया श्राद्ध

30 सितंबर चतुर्थी चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध

1 अक्तूबर षष्ठी षष्ठी श्राद्ध

2 अक्तूबर सप्तमी सप्तमी श्राद्ध

3 अक्तूबर अष्टमी अष्टमी श्राद्ध

4 अक्तूबर नवमी नवमी श्राद्ध

5 अक्तूबर दशमी दशमी श्राद्ध

6 अक्तूबर एकादशी एकादशी श्राद्ध

7 अक्तूबर द्वादशी द्वादशी श्राद्ध

8 अक्तूबर त्रयोदशी त्रयोदशी श्राद्ध

9 अक्तूबर चतुर्दशी चतुर्दशी श्राद्ध

10 अक्तूबर अमावस्या सर्वपितृ श्राद्ध

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‘श्रीकृष्ण पर्व’ में घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल से गूंजेगा मध्यप्रदेश, जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्‍ण लोक का मुख्‍यमंत्री करेंगे भूमि पूजन

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से संस्‍कृति विभाग के श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास द्वारा 4 सितंबर को ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का राज्‍य स्‍तरीय व्यापक आयोजन किया जा रहा है। ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ प्रदेश के सभी 55 जिलों में 111 स्थानों पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि राज्‍य के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी, जबकि भव्य जन्मोत्सव में 1500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करेंगे। इस प्रदेशव्यापी पर्व का विशेष आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर भी होगा। यहाँ श्रीकृष्ण की विविध कलाओं और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे। जन्‍मोत्सव में मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जो श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज की उत्सव परंपरा की झलक प्रस्तुत करेगा।

मुख्यमंत्री निवास पर होने वाले आयोजन में 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी बच्‍चों को माखन मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति, श्रीकृष्‍ण की बाल लीलाओं पर केन्द्रित पुस्‍तक भेंट करेंगे। कार्यक्रम उपरांत जानापाव में मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव द्वारा परशुराम श्रीकृष्‍ण लोक का भूमि-पूजन किया जायेगा।  

 

राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण आस्था और भक्ति के साथ भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के महान प्रतीक हैं। मध्यप्रदेश की धरती का भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और परंपराओं से गहरा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहा है। श्रीकृष्ण के जीवन से हमें मित्रता, करुणा, धैर्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इसी गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का व्यापक आयोजन किया जा रहा है। 

 

राज्य मंत्री लोधी ने बताया कि श्रीकृष्ण पर्व के लिए चयनित 111 स्थलों में अनेक ऐसे पावन और ऐतिहासिक स्थल सम्मिलित हैं, जिनकी परंपराएँ सीधे तौर पर द्वापर युग और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-प्रसंगों से जुड़ी हुई हैं। इनमें सांदीपनी आश्रम-उज्जैन, नारायणा धाम-उज्जैन, अमझेरा-धार, जानापाव-महू एवं जामगढ़-रायसेन जैसे स्थल प्रमुख हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थलों में अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक केंद्र भी शामिल हैं, जिनका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्‍व होने के साथ-साथ गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत भी है।

 

श्रीकृष्‍ण पाथेय न्‍यास के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेश की धरती भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को अपने भीतर समेटे हुए है। भगवान श्रीकृष्‍ण के जीवन के विभिन्‍न पहलुओं एवं लीलाओं के लोकव्‍यापीकरण, सनातन संस्‍कृति के विस्‍तार के साथ ही उनके द्वारा बताए जीवन मूल्‍यों यथा धैर्य, मित्रता, करुणा, दया इत्‍यादि जनमानस तक प्रेषित करने के उद्देश्‍य से माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप श्रीकृष्‍ण पर्व के माध्‍यम से सांस्‍कृतिक परिदृश्‍य में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्‍होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से न केवल इन स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को व्यापक पहचान मिल रही है, बल्कि नई पीढ़ी भी मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत और गौरवपूर्ण इतिहास से परिचित हो रही है। यह पहल आस्था के उत्सव के साथ-साथ विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्स्मरण और प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। इस वर्ष श्रीकृष्ण पर्व के आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होने वाली स्‍थानीय गतिविधियों का विस्‍तार करने के लिए सांस्कृतिक महत्‍व के स्थलों को चिन्हित कर वहाँ आयोजन किए जा रहे हैं। 

 

कृष्णमय होगा मध्यप्रदेश, 1500 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ-‘श्रीकृष्ण पर्व’ के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं, गुरु-शिष्य परंपरा, मित्रता, भक्ति और लोक संस्कृति पर केंद्रित विविध सांस्कृतिक आयोजन होंगे। नारायणा धाम, सांदीपनि आश्रम, महिदपुर, पन्ना, अमझेरा और जानापाव सहित प्रदेश के अनेक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर नृत्य-नाटिका, रासलीला, भजन, लोकगायन और अन्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन आयोजनों में प्रदेश के 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार और विभिन्न सांस्कृतिक दल सहभागिता करेंगे। 

 

नारायणा धाम में पांच दिवसीय आयोजन-उज्जैन के नारायणा धाम मंदिर प्रांगण में 2 से 6 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन होगा। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की स्मृति से जुड़े इस स्थल पर पहले दिन गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़े प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसमें श्रीकृष्ण और सुदामा के आश्रम के लिए लकड़ियां चुनने तथा सुदामा द्वारा गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने के प्रसंग को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ भरतनाट्यम, भजन गायन और ‘रासलीला : श्रीकृष्ण की दान लीला’ का मंचन होगा। दूसरे दिन कथक में ‘कृष्णम’ नाटिका, भजन गायन तथा ‘श्रीकृष्ण की माखन चोरी’ रासलीला होगी। तीसरे दिन ओडिसी शैली में कृष्ण आधारित नृत्य-नाटिका, भजन गायन और ‘श्रीकृष्ण जन्म एवं बाल लीला’ प्रस्तुत की जाएगी। चौथे दिन श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग पर नृत्य-नाट्य और भजन गायन होगा। पांचवें दिन गीता उपदेश पर आधारित नृत्य-नाटिका तथा भजन गायन होगा। सभी पांचों दिनों रासलीला का मंचन भी किया जाएगा। 

 

सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की झलक-उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक शाम 4 बजे से तीन दिवसीय आयोजन होगा। इसमें ‘कर्षति इति कृष्ण’, भजन गायन और बघेली लोकगायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने तथा 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञान अर्जित करने की पौराणिक परंपरा पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 

 

महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम और लोकसंगीत-महिदपुर के रामलीला चौक में 2 से 4 सितंबर तक शाम 7 बजे से कार्यक्रम होंगे। पहले दिन राधा-कृष्ण प्रेम प्रसंग पर नृत्य प्रस्तुति और भक्ति गायन होगा। दूसरे दिन बुंदेली गायन तथा भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भजन गायन के साथ श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी महिदपुर की परंपरा पर केंद्रित श्रीकृष्ण जन्म आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। 

 

पन्ना और अमझेरा में साकार होंगे कृष्ण के विविध प्रसंग-पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर परिसर में 2 सितंबर को बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। श्री जुगल किशोर मंदिर में 3 और 4 सितंबर को दो दिवसीय आयोजन में श्रीकृष्ण नृत्य-नाटिका, भक्ति गायन तथा प्रणामी परंपरा पर केंद्रित भरतनाट्यम प्रस्तुति होगी। धार जिले के अमझेरा में 3 और 4 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला तथा रुक्मिणी वरण एवं विवाह प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी। साथ ही भजन गायन भी होगा। अमझेरा को श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी वरण से जुड़े प्राचीन स्थल के रूप में आयोजन की विषयवस्तु में विशेष स्थान दिया गया है। 

 

जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्ण प्रसंग-महू के जानापाव में 4 सितंबर को शाम 4 बजे भगवान परशुराम द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद भजन गायन होगा। आयोजन स्थल पर भगवान परशुराम और श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 

 

प्रदेश के अनेक जिलों में कृष्ण भक्ति का रंग-श्रीकृष्ण पर्व के अंतर्गत पाली (उमरिया), शहडोल, मंडला, दमोह, रीवा और खातेगांव सहित अनेक स्थानों पर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इनमें मथुरा प्रवेश, कृष्ण-सुदामा प्रसंग, गोवर्धन धारण, सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां शामिल हैं। लोकगायन और भजन के साथ विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं को मंच पर साकार किया जाएगा। उज्जैन के गोपाल मंदिर में 4 सितंबर को गीत गोविंद केंद्रित नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। तराना स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में भी लोक एवं भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। आगर-मालवा, रायसेन, गुना, ग्वालियर, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, मुरैना, राजगढ़ और इंदौर सहित अनेक जिलों में भी 4 सितंबर को शाम 7 बजे से कृष्ण केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें नृत्य-नाटिका, भजन और लोकगायन के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को श्रीकृष्ण भक्ति से जोड़ा जाएगा। 

 

1500 से अधिक स्थानीय कलाकार होंगे सहभागी-‘श्रीकृष्ण पर्व’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्थानीय कलाकारों की व्यापक भागीदारी है। 1500 से अधिक कलाकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। खरगौन, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, बैतूल, सीहोर, भोपाल, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, नीमच, रायसेन, सागर, सतना, रीवा, सिंगरौली, सीधी, कटनी, छिंदवाड़ा, झाबुआ, धार, देवास, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, बुरहानपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ सहित प्रदेश के अनेक जिलों के कलाकार मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रस्तुतियां देंगे। इस सांस्कृतिक श्रृंखला में लोकगायन, भजन, नृत्य-नाटिका और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन एवं दर्शन के विविध आयाम सामने आएंगे। प्रदेश के 82 मंदिरों में प्रस्तावित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ यह आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने और प्रदेश की विविध लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को कृष्ण भक्ति से जोड़ने का व्यापक प्रयास बनकर सामने आएगा।

 

 

राम मंदिर को कल मिल सकता है पहला CEO! 5500 लोगों ने किया था आवेदन, सेलेक्शन कमेटी ने 3 नाम किए शॉर्टलिस्ट

Ayodhya Ram Temple CEO Update: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्रशासनिक प्रबंधन को लेकर एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राम मंदिर को बुधवार को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिल सकता है। चयन समिति ने मंगलवार को इस पद के लिए तीन शीर्ष उम्मीदवारों के नामों का एक पैनल तैयार कर सिफारिश दी है। राम मंदिर के पहले सीईओ की दौड़ में रिटायर ब्यूरोक्रेट सबसे आगे बताए जा रहे हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक राम मंदिर के नए सीईओ का चयन बुधवार को मणिरामदास छावनी स्थित राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास के आवास पर आयोजित होने वाली बैठक में किया जाएगा।

3 सदस्यीय सर्च कमेटी ने छांटे नाम, 5,500 आवेदनों की हुई स्क्रीनिंग

तीन सदस्यीय सर्च कमेटी अयोध्या पहुंच चुकी है और उम्मीद है कि वह बैठक से पहले ट्रस्ट को अपनी अंतिम शॉर्टलिस्ट सौंप देगी। इस समिति में रिटायर जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और उद्योगपति सुरेश हावरे शामिल हैं। बुधवार को दोपहर 2 बजे से प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में सीईओ की नियुक्ति पर अंतिम फैसला लिए जाने की संभावना है।

मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने पीटीआई से बात करते हुए कहा कि इतने बड़े और विश्व प्रसिद्ध मंदिर का श्रेष्ठ प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए हम एक उत्कृष्ट सीईओ की तलाश में थे। इसके लिए हमने जस्टिस (प्रमोद) कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावरे से मार्गदर्शन मांगा था। इस तीन सदस्यीय चयन समिति ने सुबह से शाम तक अथक परिश्रम करते हुए साक्षात्कार लिए।

गोविंद देव गिरि ने बताया कि देश भर से लगभग 5500 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें आईएएस और आईपीएस अधिकारी, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और एनजीओ से जुड़े प्रोफेशनल शामिल थे। चयन समिति ने चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत पहले 3500, फिर 1500 और अंत में 300 उम्मीदवारों को छांटा। प्रारंभिक स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवारों के साक्षात्कार लिए गए। इसके बाद 3 अंतिम शॉर्टलिस्ट किए गए नामों का पैनल तैयार किया गया।

दान के पैसों की चोरी के आरोपों के बाद लिया गया फैसला

राम मंदिर में चंदे के प्रबंधन और दान की चोरी से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद ट्रस्ट की वित्तीय देखरेख पर सवाल खड़े हुए थे। ट्रस्ट ने खुद माना था कि दान की चोरी से उसकी छवि को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद 6 जुलाई को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के दैनिक कामकाज और दैनिक संचालन की देखरेख के लिए एक पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त करने का निर्णय लिया था।

सेक्रेटरी और अन्य पदों का भी हो सकता है आधिकारिक ऐलान

बुधवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में सीईओ के अलावा दो सदस्यों और जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) के पदों के लिए भी नामों की घोषणा की जा सकती है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के सचिव के पद पर भी आधिकारिक घोषणा की जाएगी। जगदीश आफले मंदिर ट्रस्ट के पहले सचिव होंगे। जब गोविंद देव गिरि से पूछा गया कि क्या बुधवार को नए सीईओ के नाम की घोषणा होगी तो उन्होंने कहा कि यह तय करना ट्रस्ट पर निर्भर है। मुझे उम्मीद है कि ऐसा होगा, लेकिन ट्रस्टी बोर्ड तय करेगा कि इसे अभी करना है या नहीं।

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Nepal Floods: बाढ़ से भयानक तबाही के बाद भारत-अमेरिका-चीन से मुआवजा क्यों मांगने लगा नेपाल?

Nepal Floods: नेपाल ने विनाशकारी बाढ़ के बाद अब इंटरनेशनल मदद की मांग का अपना रुख बदलते हुए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग उठाई है। नेपाल का कहना है कि जलवायु संकट पैदा करने में उसका योगदान बेहद कम है। लेकिन ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और चरम मौसम की घटनाओं का सबसे ज्यादा खामियाजा हिमालयी देश को भुगतना पड़ रहा है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने मानवीय सहायता मांगने के बजाय विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के लिए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग करने का अपना कूटनीतिक रुख बदल लिया है।

नेपाल का तर्क है कि यह हिमालयी देश उस जलवायु संकट का खामियाजा भुगत रहा है, जिसे पैदा करने में उसकी भूमिका बहुत कम थी ‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि उनका देश अब सहायता को महज मानवीय मदद के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि इसे जलवायु जिम्मेदारी और मुआवजे के मुद्दे से जोड़ रहा है। यह विनाशकारी बाढ़ 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने या हिमस्खलन के कारण आई थी।

‘यह दान नहीं, न्याय और मुआवजे का मामला’

विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान लगभग नगण्य है। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और हिमालयी आपदाओं का सामना नेपाल को करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल अपनी कूटनीतिक रणनीति को ‘मदद’ से ‘न्याय और मुआवजे’ की ओर ले जा रहा है। उनके मुताबिक यह किसी देश की ओर से दी जाने वाली चैरिटी नहीं, बल्कि जलवायु संकट के लिए जिम्मेदारी और मुआवजे का सवाल है।

भारत, चीन और अमेरिका को बताया बड़ा प्रदूषक

नेपाल के विदेश मंत्री ने चीन, अमेरिका और भारत को दुनिया के प्रमुख इंडस्ट्रियल एमिटर्स में शामिल बताते हुए कहा कि इन देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि वे नेपाल जैसे जलवायु संवेदनशील देशों को मुआवजा दें। खनाल ने कहा कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा एमिटर्स है, उसके बाद अमेरिका और भारत का स्थान आता है। उन्होंने दावा किया कि नेपाल ने इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को औपचारिक क्लाइमेट कंपेंसेशन क्लेम लेटर भी भेजा है।

‘यह बाढ़ नहीं, हिमालयी सुनामी थी’

विदेश मंत्री ने हालिया आपदा की भयावहता बताते हुए इसे सामान्य बाढ़ मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पानी की लहरें 20 से 30 मीटर तक ऊंची थीं। उनकी रफ्तार करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई। इसी वजह से उन्होंने इसे ‘हिमालयी सुनामी’ करार दिया। बाढ़ के पानी ने घरों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों को बहा दिया। जबकि कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा।

नेपाल ने UN से मांगी 5 अरब डॉलर की मदद

आपदा के बाद नेपाल ने पुनर्निर्माण और रिकवरी की लागत करीब 5 अरब डॉलर आंकी है। साथ ही, देश ने जलवायु आपदाओं से उबरने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े विशेष फंड से तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की है। नेपाल के जलवायु अधिकारियों का कहना है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन ने उन परिस्थितियों को और गंभीर बनाया, जिनके बीच यह भयावह आपदा सामने आई।

नेपाल का तर्क है कि जो देश जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं, वे ही अक्सर इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि हिमालय के ग्लेशियर लगातार पिघलते रहे तो गंगा और त्रिशूली जैसी नदियों पर निर्भर दक्षिण एशिया के अरबों लोगों की जल सुरक्षा भी गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा 1,000 के करीब

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार को 987 हो गई> सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

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नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं।इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMAए ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं।