सत्य, प्रेम, करुणा से लेकर राम हरि और जयजगत तक विनोबा भावे का सर्वोदय दर्शन!

सत्य, प्रेम, करुणा से लेकर राम हरि और जयजगत तक विनोबा भावे का सर्वोदय दर्शन!

Vinoba Bhave 131st Birth Anniversary

Vinoba Bhave 131st Birth Anniversary: आज ग्यारह सितंबर को संत विनोबा भावे का 131वां जन्मदिवस है। युवा विनोबा भावे के मन में हिमालय में जाने का भाव उठा पर शीघ्र ही विनोबा के कदम हिमालय के बजाय महात्मा गांधी के पास या सानिध्य में जाने की दिशा में चल पड़े और इस तरह विनोबा जी महात्मा गांधी के पास पहुंच गए। गांधी जी ने विनोबा भावे को पहला सत्याग्रही कहा ही नहीं घोषित भी किया। विनोबा ने तीन शब्दों में मनुष्य जीवन सूत्र का सार बताया “सत्य, प्रेम, करुणा।”

 

विनोबा सूत्र में संवाद करते थे। जिसका सुनने समझने वाले अपने अपने तरीके से अर्थ और भाष्य करते थे। पर विनोबा के सूत्र कालजयी एवं स्पष्ट हैं। 1974 में भारत में आपातकाल लगने से पहले ही विनोबा जी मौन ले चुके थे। विनोबा का मौन देश-दुनिया को आत्मचिंतन का स्पष्ट संदेश देता था, आपातकाल में विनोबा से पूछा गया कि क्या संदेश है तो विनोबा ने एक शब्द लिखा अनुशासन पर्व! आपातकाल के सन्नाटे में अनुशासन पर्व की गूंज समूची दुनिया में गूंजती रही। विनोबा के मौन की मुखरता की अभिव्यक्ति शब्दों की ध्वनि से से ज्यादा बोध्यगम्य रही। विनोबा की बौद्धिक क्षमता की सहजता और सरलता का जीवंत शब्द कर्म 'गीताई' के रूप में आज भी लोकसमाज को सत्य प्रेम और विश्वास को आत्मसात करने की असीम ऊर्जा देता है।

 

महाराष्ट्र की बिना पढ़ी-लिखी पर भक्ति ज्ञान और श्रद्धा-विश्वास से ओतप्रोत गुणवान मातृशक्ति को सहज सरल स्वरूप में 'गीताई' मिली। जगत के स्वरूप को जानने की जिज्ञासुओं को 'गीताई' के रूप में साकार रूप में सरल समाधान मिला। 1942 की अगस्त क्रांति के दौरान नागपुर केन्द्रीय जेल में विनोबा जी ने गीता पर प्रवचन दिए थे, जिसे साने गुरुजी ने लिपिबद्ध किया था जो आज भी देश दुनिया में पढ़ा जाता है।

 

जय जगत की उद्धोषणा का सहज सरल सूत्र देने वाले संत विनोबा अपने विचारों या जीवन दर्शन को सत्य, प्रेम और करुणा के त्रिवेणी संगम के माध्यम से व्यक्त करते रहे। विनायक नरहरि भावे से प्रारंभ हुए विनोबा के हस्ताक्षर 'बाबा' के स्वरूप तक आकर 'राम हरि' में परिवर्तित हो गए। विनोबा जी द्वारा दिया जयजगत शब्द समूचे जगत में व्याप्त हो गया। व्यक्ति नहीं जगत की जय ही जीवन का सार है।

 

संत विनोबा भावे ने अपने जीवन काल में सभी धर्मों के ग्रंथों का अध्ययन मनन और चिन्तन कर हम सब को सभी धर्मों का सार निकाल कर सबके सामने रखा और सभी ने उस सार सहजता और सरलता के साथ स्वीकार किया। विनोबा भावे ने मन और तन के समन्वय के साथ आजीवन लोकसागर से प्रत्यक्ष साक्षात्कार एवं प्रत्यक्ष संवाद करते हुए समूचे देश में पैदल यात्रा करते हुए सतत् संवाद का अद्भुत प्रयोग कर, पैदल लोक यात्री के रूप में बारह साल तक सतत् गतिशील रहकर यात्रा संपन्न की।

 

हर दिन नई जमीन हर समय नया आसमान। भारत भूमि के लोकमानस में दान की गहरी समझ और परम्परा मौजूद है इस सूत्र को सामने रखकर विनोबा जी ने भूदान, ग्राम दान से लेकर जीवन दान के विचार को जमीन पर साकार कर समूची मानव सभ्यता को आजाद भारत में एक दूसरे के साथ मिलकर रहने और मिल-जुलकर ज़ीने का मार्ग अपनी जीवन यात्रा और कृतित्व से समझाया।

 

चंबल घाटी के बागी भाइयों के मन में संत विनोबा भावे ने बागी जीवन को त्याग कर सामान्य मनुष्य की तरह जीवन जीने का भाव जागृत कर बागी भाई सामान्य रूप से जीने की राह के राहगीर बने और सत्य प्रेम करुणा को बचे हुए जीवन का सूत्र बना दिया। विनोबा भावे ने सर्वोदय दर्शन को समग्रता से समझने की राह चुनी। सर्वोदय पात्र की परिकल्पना को साकार स्वरूप प्रदान किया।

 

सबै भूमि गोपाल की सब सम्पत्ति भगवान की के शाश्वत जीवन दर्शन को समग्रता से समझने की दृष्टि विकसित की। जीवन का कार्य सम्पूर्ण हो गया तो बिनोबाजी सहजता से शून्य में विलीन हो गये। अपने जीवन के आखरी पड़ाव में विनोबा जी ने नये प्रयोग किए जैसे शून्य में प्रवेश, क्षेत्र संन्यास। विनोबा ने अपने सभी साथियों एवं लोगों को एक दूसरे से आपस में नाहक मिलने जुलने का सिलसिला अपने निजी एवं सार्वजनिक जीवन में बनाए रखने का रास्ता सुझाया।

 

हम सब एक दूसरे से कोई काम होता है तभी मिलते-जुलते हैं विनोबा जी ने यह सुझाया कि हम नाहक मिलने जुलने की संस्कृति को बढ़ावा देंगे तो हमें स्वतंत्र सहजीवन का आनंद जीवन भर लगातार बिना रुके और विशेष प्रयास के मिलता रहेगा। विनोबा भावे से मिलकर असीम आनन्द और शान्ति की अनुभूति होती थी। विनोबा जी ने देश और दुनिया की भाषाओं को सीखने का सिलसिला आजीवन जारी रखा। अंतिम समय में वे जापानी सीख रहे थे।

 

भारतीय भाषाओं को समझने में लोगों को सहजता और सरलता हो इसलिए विनोबा जी ने सभी भारतीय भाषाओं को देवनागरी लिपि में लिखने का न केवल सुझाव दिया वरन कई पत्र-पत्रिकाओं को देवनागरी लिपि में प्रकाशित करने की शुरुआत भी की और करवाईं। विनोबा जी का जीवन प्रकृति की प्रतिकृति की तरह ही आरंभ से अंत तक बना रहा। हर दिन प्रवाहमान और सरलता से परिपूर्ण संत विनोबा जी का जन्मदिन पर सादर स्मरण, जयजगत।

Hartalika Teej Puja 2026: हरतालिका तीज पर राशि के अनुसार पूजा करने से मिलेगा अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख, जानें आपकी राशि के लिए क्या है सही

Hartalika Teej Puja 2026: हर साल हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। इस साल यह व्रत 14 सितंबर, सोमवार को किया जाएगा। यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए प्रेम, समर्पण और दांपत्य सुख से जुड़ा प्रमुख पर्व है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन पूजा के साथ ही दान का भी विशेष महत्व है। ज्योतिष मान्ताओं के अनुसार, हरतालिका तीज पर राशि अनुसार पूजा और दान करने से व्रत का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।

राशि के अनुसार ऐसे करें शिव-पार्वती की पूजा

मेष राशि : मेष राशि के जातक भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराने के बाद रेशमी वस्त्र अर्पित करें। शिव-पार्वती की आराधना करते हुए सुखी दांपत्य जीवन की कामना करना शुभ माना गया है।

वृष राशि : वृष राशि वाले शिव-पार्वती की पूजा में गुलाब का पुष्प और इत्र अर्पित करें। इसके बाद धूप दिखाकर भगवान से परिवार में प्रेम, सौहार्द और सुख-शांति की प्रार्थना करें।

मिथुन राशि : मिथुन राशि के जातक हरे रंग के वस्त्र धारण कर पूजा कर सकते हैं। माता पार्वती को हल्दी और भगवान शिव को सफेद चंदन अर्पित करने की धार्मिक परंपरा बताई गई है।

कर्क राशि : कर्क राशि वालों के लिए पूजा के बाद भगवान शिव का श्रृंगार करना और ॐ नमः शिवाय का जाप करना शुभ माना गया है। श्रद्धा के साथ शिव-पार्वती की आराधना कर दांपत्य सुख की कामना करें।

सिंह राशि : सिंह राशि के जातक शिव-पार्वती को पीले पुष्पों की माला अर्पित करें। इसके बाद रुद्राष्टकम का पाठ करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पूजा मनोकामना और पारिवारिक सुख के लिए शुभ मानी जाती है।

कन्या राशि : कन्या राशि वाले भगवान शिव को बेलपत्र और दूर्वा अर्पित करें। तीज के अवसर पर मेहंदी लगाना भी सुहाग और सौभाग्य से जुड़ी परंपरा मानी जाती है।

तुला राशि : तुला राशि के जातक भगवान महादेव का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके साथ सुहाग की सामग्री का दान करने की परंपरा है। इससे अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख की कामना की जाती है।

वृश्चिक राशि : वृश्चिक राशि वाले पीले वस्त्र धारण कर शिव-पार्वती की पूजा करें। भगवान शिव को दूर्वा अर्पित करना भी शुभ माना गया है। पूजा के दौरान परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

धनु राशि : धनु राशि के जातक लाल वस्त्र धारण कर शिव-पार्वती की आराधना करें। पूजा में सुगंधित पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धा के साथ पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करें।

मकर राशि : मकर राशि वाले भगवान शिव को सफेद चंदन अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। शिव-पार्वती की पूजा कर घर में सुख-शांति और दांपत्य जीवन में स्थिरता की प्रार्थना करें।

कुंभ राशि : कुंभ राशि के जातक गुलाबी वस्त्र धारण कर पूजा कर सकते हैं। महादेव को श्वेत पुष्प अर्पित कर शिव-पार्वती का ध्यान करें और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करें।

मीन राशि : मीन राशि वालों के लिए हरे वस्त्र धारण कर पूजा करने की परंपरा बताई गई है। माता पार्वती को हल्दी और भगवान शिव को सफेद चंदन अर्पित करें। इसके बाद परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना करें।

Bhadrapada Amavasya Kab Hai 2026: 10 या 11 सितंबर, कब होगी भाद्रपद अमावस्या, जानें इस दिन कुशा को जमा करने का क्या है महत्व

Bhadrapada Amavasya Kab Hai 2026: हिंदू धर्म में भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या या पिठोरी अमावस्या भी कहा जाता है। पूरे साल में आने वाली 12 अमावस्या तिथियों में भाद्रपद अमावस्या का विशेष स्थान है। शास्त्रानुसार, इस दिन पूरे वर्ष भर के धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ, पिंडदान और तर्पण के लिए इस दिन पवित्र ‘कुश’ (एक विशेष प्रकार की घास) को जड़ सहित तोड़कर जमा किया जाता है। इस दिन तोड़ी गई कुश पूरे एक वर्ष तक पवित्र और उपयोग योग्य मानी जाती है।

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि पितरों को समर्पित है और इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान के बाद पितृ तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। भाद्रपद अमावस्या के दिन तोड़ी जाने वाली कुशा घास का विशेष धार्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुश घास की जड़ में भगवान ब्रह्मा, मध्य में भगवान विष्णु और अग्रभाग नोक में भगवान शिव का वास माना गया है। यह अमावस्या पितरों की शांति, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इसके ठीक बाद पितृ पक्ष (श्राद्ध) का आगमन होता है।

भाद्रपद अमावस्या 2026 सही तारीख

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से शुरू हो रही है और यह 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर देखा जाए तो 11 सितंबर को भाद्रपद की अमावस्या तिथि में सूर्योदय सुबह में 06:04 ए एम पर होगा, इसलिए भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर को होगी। लेकिन उस दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि नहीं होगा क्योंकि अमावस्या तिथि सुबह 8:56 बजे ही खत्म हो जा रही है।

ऐसे में भाद्रपद की दर्श अमावस्या 10 सितंबर को है। दर्श अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि किया जाएगा। इस दिन कुशा ग्रहण करने की परंपरा को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। 11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या का स्नान और दान होगा।

पितरों के तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान का समय

10 सितंबर को दर्श अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि कार्य सुबह में 11:30 बजे से करें और दोपहर 02:30 बजे तक उसे पूर्ण कर लें। इस दिन ही पितरों के लिए पंचबलि कर्म, ब्राह्मण भोज आदि किया जा सकता है।

भाद्रपद अमावस्या 2026 स्नान मुहूर्त

11 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान सबसे उत्तम समय होता है। भाद्रपद अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त 04:32 ए एम से 05:18 ए एम तक है। इसके बाद अपनी क्षमता के अुनसार दान करें।

अमावस्या के दिन अपने सामर्थ्य अनुसार करें दान

अमावस्या के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ आदि का दान करने की परंपरा है। शाम के समय घर की साफ-सफाई कर दीपक जलाने और मां लक्ष्मी का स्मरण करने की भी मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार साफ-सुथरा और सात्त्विक वातावरण घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

कुश उखाड़ने के नियम

इस बार कुशाग्रहणी अमावस्या पर कुशा ग्रहण करने की विधि और उससे जुड़े नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना गया है।

  • सूर्योदय के समय स्नान करके हाथ जोड़कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके कुश उखाड़ना चाहिए।
  • कुश को कभी भी लोहे या धातु के औजार (हंसिया/चाकू) से नहीं काटना चाहिए, केवल दाहिने हाथ से उखाड़ा जाता है।
  • कुश का अग्रभाग (नोक) टूटा हुआ या खंडित नहीं होना चाहिए।
  • कुश उखाड़ते समय पृथ्वी माता से अनुमति मांगने और “ॐ हूं फट् स्वाहा” अथवा “कुशाग्रवसते रुद्र…” मंत्र का जाप करने की परंपरा है।

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सत्य निकेतन PG हादसा: 18 साल के अर्पित ने गंवाई जान, परिवार ने दान की आंखें | Satya Niketan PG

सत्य निकेतन PG हादसा: 18 साल के अर्पित ने गंवाई जान, परिवार ने दान की आंखें | Satya Niketan PG

Satya Niketan PG, Delhi हादसे में मध्य प्रदेश के 18 वर्षीय अर्पित की जान चली गई! किसी भी माता-पिता के लिए अपने जवान बेटे को खो देने से शायद कोई दुख नहीं होता!
पर इस असहनीय पीड़ा के बीच भी, इस परिवार ने जो किया वह अतुलनीय है!

(18 Year Old Arpit Who Lost His Life In Delhi Satya Niketan PG Building Collapse Donates His Eyes)

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Laddu Gopal Chatti 2026: जन्माष्टमी के छह दिन बाद आज मनाई जाएगी लड्डू गोपल की छठी, नोट करें छठी पर्व की पूरी विधि और भोग

Laddu Gopal Chatti 2026: हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के छह दिन बाद परिवारों में आमतौर पर एक उत्सव मनाया जाता है, जिसे छठी कहते हैं। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद भी मनाया जाता है। देश-दुनिया में भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों ने 4 सितंबर को नटखट माखनचोर का जन्मोत्सव जन्माष्टमी पर्व के रूप में मनाया है। इसके पर्व के छह दिन बाद, यानी आज 9 सितंबर के दिन उनका छठी पर्व मनाया जा रहा है। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की तरह उनका छठी पर्व भी विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन उन्हें नए वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है, छठी उत्सव रस्में निभाई जाती हैं और उन्हें काजल लगाया जाता है। लड्डू गोपाल की छठी उत्सव की विधि और भोग से जुड़ी जानकारी नीचे दी गई है:

तिथि और शुभ योग

तिथि : बुधवार, 9 सितंबर 2026

शुभ संयोग : इस दिन भद्रा राजयोग, मालव्य राजयोग और हंस राजयोग का विशेष संयोग बन रहा है।

लड्डू गोपाल छठी पर्व 2026 पूजन विधि

कान्हा की छठी मनाने के लिए सबसे पहले गाय के देसी घी से उनकी मालिश करें। इसके बाद दूध के कटोरे में उनका स्नान कराएं। इस दौरान कम से कम 3 बार दूध के पात्र में डुबकियां लगाएं। फिर गंगाजल से ठाकुर जी को स्नान कराएं।

ठाकुर जी को स्नान कराने के बाद लाल या पीले रंग के नए वस्त्र पहनाएं। इसके बाद ठाकुर जी को प्यार से काजल लगाएं। छठी वाले दिन उन्हें नजर का धागा जरूर पहनाना चाहिए।

छठी के दिन बाल गोपाल को काजल लगाने की भी परंपरा है। उनकी आंखों, तलवों और कान के पीछे काजल का छोटा सा टीका लगाया जाता है। मान्यता के अनुसार बचा हुआ काजल घर के सदस्यों की आंखों में भी लगाया जा सकता है।

इन सबके अलावा भोग में उन्हें 6 सबसे अधिक प्रिय अर्पित करनी चाहिए। इसमें कड़ी, चावल, मख्खन, खीर-पूरी और हलवा का भोग जरूर लगाएं। आखिर में 11, 21 या 51 रुपये लेकर ठाकुर जी की नजर उतारकर किन्नरों को जरूर दान करें। कान्हा की छठी मनाने के लिए इस विधि को अपनाएं।

लड्डू गोपाल की छठी खासतौर से शाम के समय मनाई जाती है। लड्डू गोपाल के झूले को सुंदर-सुंदर फूलों से सजाना चाहिए और उनके भजन को गाना चाहिए।

लड्डू गोपाल के छठी पर्व का विशेष भोग

कढ़ी, चावल, माखन-मिश्री, धनिया की पंजीरी, खीर और पूरी।

सभी भोजन बिना प्याज और लहसुन के बनाएं। लड्डू गोपाल को अर्पित किए जाने वाले प्रत्येक भोग में तुलसी दल जरूर शामिल करें।

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Bhaum pradosh vrat 2026: भौम प्रदोष व्रत आज, मंगल दोष से छुटकारा पाने के लिए भगवान शिव को अर्पित करें ये खास चीजें

Bhaum pradosh vrat 2026: प्रदोष हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। यह तिथि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। इस दिन सच्ची श्रद्धा से उपवास करने वाले भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा का विधान है, इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहा जाता है। वहीं, त्रयोदशी तिथि जब मंगलवार के दिन पड़ती है, तो उसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। ‘भौम’ का अर्थ मंगल ग्रह (या मंगलवार) से है। यह व्रत भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने तथा कर्ज एवं मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव को कुछ खास चीजें अर्पित करने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है।

सितंबर 2026 भौम प्रदोष व्रत एवं मुहूर्त

तिथि : मंगलवार, 8 सितंबर 2026

त्रयोदशी तिथि प्रारंभ : 8 सितंबर 2026, दोपहर 02:42 बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त : 9 सितंबर 2026, दोपहर 12:30 बजे

प्रदोष पूजा मुहूर्त : शाम 06:43 बजे से रात 09:01 बजे तक

मंगल दोष मुक्ति के लिए भौम प्रदोष पर करें ये उपाय

शिवलिंग पर लाल चीजें अर्पित करें: प्रदोष काल में शिवलिंग पर शुद्ध जल व दूध अर्पित करने के बाद लाल चंदन, लाल कनेर के फूल या गुलाल चढ़ाएं। भगवान शिव को 11 या 21 बेलपत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘श्री राम’ लिखकर अर्पित करें।

ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ : पूजन के दौरान ‘ऋणमोचक मंगल स्तोत्र’ या ‘मंगलाष्टक’ का पाठ करें। इससे मंगल के अशुभ प्रभाव समाप्त होते हैं।

हनुमान जी की उपासना : भौम प्रदोष पर हनुमान जी को चमेली का तेल और सिंदूर (चोला) चढ़ाएं। उन्हें गुड़, भुने चने या बूंदी का भोग लगाएं और हनुमान चालीसा अथवा सुंदरकांड का पाठ करें।

मंगल ग्रह के मंत्रों का जाप : मंगल दोष शांति के लिए कम से कम 108 बार `ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः` या `ॐ अं अंगारकाय नमः` मंत्र का जाप करें।

दान कार्य : पूजा के बाद किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को लाल रंग की वस्तुएं दान करें, जैसे— मसूर की दाल, गुड़, तांबे का बर्तन, लाल वस्त्र या अनार।

भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके लाल या स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • सूर्यास्त के समय पुन: स्नान या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • शिवलिंग का जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और चंदन से अभिषेक करें।
  • हनुमान जी को गुड़-चने का भोग लगाएं और ‘ऋणमोचक मंगल स्तोत्र’ या सुंदरकांड का पाठ करें।
  • अंत में धूप-दीप जलाकर शिव जी और हनुमान जी की आरती करें।

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Bhadrapad Amavasya 2026 Upay: सितंबर में आने वाली दर्श अमावस्या पर पितरों के आशीर्वाद के लिए जरूर करें ये उपाय, जानें सही तारीख

Bhadrapad Amavasya 2026 Upay: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष स्थान है। माना जाता है कि इस दिन पितरों के नाम पर दान-पुण्य करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूरे साल में 12 अमावस्या तिथियां आती हैं। इनमें दर्श अमावस्या का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या का वह समय है जब चंद्रमा पूरी तरह से अदृश्य हो जाता है, उसे दर्श अमावस्या कहते हैं। इस तिथि को पितृ शांति और पितृ दोष निवारण के उपाय करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल भाद्रपद माह में दर्श अमावस्या संयोग बन रहा है। इसे कुशग्रहणी अमावस्या, कुशोत्पाटिनी अमावस्या और पिथौरा अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

दर्श अमावस्या तारीख और समय

वर्ष 2026 में दर्श अमावस्या 11 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी।

अमावस्या तिथि प्रारंभ : 10 सितंबर 2026, रात 10:35 बजे से

अमावस्या तिथि समाप्त : 11 सितंबर 2026, सुबह 08:58 बजे तक

उदय तिथि के अनुसार मुख्य पूजा, स्नान-दान और पितृ कर्म 11 सितंबर को ही किए जाएंगे।

महत्व और मान्यताएं

कुश एकत्र करना : इस दिन धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म के लिए ‘कुशा’ (पवित्र घास) उखाड़कर एकत्रित की जाती है।

पितृ तर्पण और दान : पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देना, पितरों के लिए तर्पण व पिंडदान करना और गरीबों को दान देना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

पिथौरा अमावस्या व्रत : शादीशुदा महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन माता दुर्गा/गौरी की पूजा-अर्चना करती हैं और व्रत रखती हैं।

दोष निवारण : कालसर्प दोष, पितृ दोष और शनि संबंधी कष्टों से मुक्ति पाने के लिए इस दिन विशेष उपाय और पूजा की जाती है।

दर्श अमावस्या पर क्या करें?

दर्श अमावस्या के दिन आपको कुछ काम करने चाहिए जिससे आपके ऊपर पूर्वजों की कृपा बनी रहे और उनकी नाराजगी से भी बचा जा सके-

दर्श अमावस्या के दिन पानी में काले तिल मिलाकर पूर्वजों के नाम से जल अर्पित करें। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद तर्पण करना शुभ माना जाता है।

दर्श अमावस्या के दिन स्नान करके पीपल के वृक्ष में दीपक जलाएं, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और पूर्वजों की कृपा बनी रहती है।

दर्श अमावस्या के दिन चंद्रमा की पूजा से पूर्वजों की कृपा भी बनी रहती है और जीवन में खुशहाली आती है। हालांकि, इस दिन रात के समय चंद्रमा आसमान में दिखाई नहीं देता है, लेकिन चंद्रोदय की दिशा में अर्घ्य देते हुए पूजा करनी चाहिए।

दक्षिण दिशा को पूर्वजों की दिशा माना जाता है। इस दिन घर की दक्षिण दिशा में पूर्वजों के नाम का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है और इससे पितरों का आशीर्वाद भी बना रहता है।

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बिहार में बाढ़ का तांडव: गंगा समेत 7 नदियां उफान पर, 12 जिलों में 22 लाख से ज्यादा प्रभावित

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bihar flood

बिहार में मानसून की सक्रियता और नदियों के उफान ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। राज्य के 12 जिलों में बाढ़ से भीषण तबाही मची हुई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, इन जिलों के 70 प्रखंडों के अंतर्गत आने वाली 368 ग्राम पंचायतों की करीब 22.42 लाख आबादी बाढ़ की चपेट में है। ALSO READ: बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता मिले, फसल और मकान क्षति का तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा दें : योगी आदित्यनाथ

 

खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं नदियां

केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, राज्य की प्रमुख नदियां—गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा—विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते गांधीघाट, पंडारक, दानापुर और बांका घाट जैसे इलाकों में गंगा उफान पर है।

 

इन 12 जिलों में सबसे बुरे हालात

बाढ़ से प्रभावित होने वाले प्रमुख 12 जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल शामिल हैं। भागलपुर में एनएच-80 पर लगभग 2 फीट पानी बहने के कारण भागलपुर-अकबरनगर मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। मुंगेर में महाने नदी के उफान से टेटिया बंबर प्रखंड के बरसंडा गांव के पास सड़क का डायवर्जन बह गया है, जिससे कई गांवों का संपर्क कट गया है। ALSO READ: चित्रकूट में सीएम योगी ने बाढ़ पीड़ितों के घावों पर लगाया मरहम, बांटी राहत सामग्री, ढहे मकानों के लिए दिए चेक

 

हादसों में 5 लोगों की मौत

बाढ़ के पानी के बीच हुए हादसों और डूबने से जनहानि की भी खबर है। सारण जिले में एक महिला समेत दो लोगों की, वैशाली जिले में दो लोगों की और खगड़िया सदर प्रखंड के रहीमपुर में एक बच्चे की बाढ़ के पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई है।

 

राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी

स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को तैनात किया गया है। लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए कुल 1,429 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही, राहत शिविरों और 190 सामुदायिक रसोई केंद्रों के माध्यम से लगभग 2.5 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

 

अगले दो दिनों के लिए भारी बारिश की चेतावनी

आपदा की इस मार के बीच बिहार मौसम सेवा केंद्र ने चिंता और बढ़ा दी है। केंद्र के मुताबिक, अगले दो दिनों के दौरान राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ खास इलाकों में भारी बारिश की संभावना है, जिससे नदियों के जलस्तर में और अधिक वृद्धि हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की है।

Rapperiya Baalam: ‘दिल टूट गया है…’, रैपरिया बालम ने ‘मिर्जापुर’ में बिना इजाजत अपना गाना ‘शूरवीर’ इस्तेमाल किए जाने पर किया रिएक्ट

Rapperiya Baalam: ‘मिर्जापुर द मूवी’ शुक्रवार, 4 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई, लेकिन अब यह फ़िल्म एक गाने के इस्तेमाल को लेकर विवादों में घिर गई है। राजस्थानी कलाकार और रैपर रैपेरिया बालम ने आरोप लगाया है कि महाराणा प्रताप को समर्पित उनका गाना ‘शूरवीर’, बिना उनकी इजाजत या क्रेडिट दिए फ़िल्म के एक सीन में इस्तेमाल किया गया, जिसमें गैंगस्टर दिखाए गए हैं।

रैपेरिया बालम ने इंस्टाग्राम पर अपनी निराशा जाहिर की

उन्होंने कहा, “आज मेरा दिल टूट गया है। आप में से कुछ लोग पूछ सकते हैं कि मेरा दिल क्यों टूटा है। आप कह सकते हैं कि मुझे खुश होना चाहिए क्योंकि मेरा गाना ‘मिर्ज़ापुर’ में है। लेकिन ‘मिर्ज़ापुर’ की टीम ने मेरा गाना इस्तेमाल करने के लिए मुझसे इजाज़त नहीं ली। उन्हें इजाज़त किसने दी? मैंने तो बिल्कुल नहीं दी।”

कलाकार ने आगे कहा कि ‘शूरवीर’ गाना महाराणा प्रताप को सम्मान देने के लिए बनाया गया था और उन्होंने ऐसे सीन में इसके इस्तेमाल पर सवाल उठाया, जो उनके मुताबिक फ़िल्म के गैंगस्टर्स का महिमामंडन करता है। उन्होंने कहा, “यह गाना महाराणा प्रताप जी को समर्पित है। हम इस गाने का इस्तेमाल फिल्म के विलेन को महिमामंडित करने के लिए कर रहे हैं। क्या यह सही है?”

रैपेरिया बालम ने आगे कहा कि अगर मेकर्स ने उनसे सीधे संपर्क किया होता तो उन्हें साथ काम करने में खुशी होती। उन्होंने कहा, “अगर मिर्ज़ापुर की टीम ने मुझसे संपर्क किया होता और कहा होता, ‘रैपेरिया भाई, हम आपका गाना इस्तेमाल करना चाहते हैं,’ तो हम उन्हें 10 आइडिया देते। लेकिन बिना इजाज़त के गाना लेना सही नहीं है।”

उन्होंने फ़िल्म में गाने को शामिल करने के पीछे कॉपीराइट और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आगे कहा, “मुझे नहीं पता कि आपको ये अधिकार किसने दिए या आपने इन्हें किससे हासिल किया। जिसने भी आपको अधिकार दिए हैं, मैं चाहूंगा कि आप उनसे पूछें- क्या आपके पास कोई कॉपीराइट है?”

गाने के इस्तेमाल को राजस्थान और महाराणा प्रताप का अपमान बताते हुए गायक ने कहा, “बुरा क्यों नहीं लगेगा? यह राजस्थान का अपमान है। यह महाराणा प्रताप जी का अपमान है और हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।” निराशा के बावजूद, रैपेरिया बालम ने उन सुनने वालों के उत्साह को माना जिन्होंने फिल्म में यह गाना सुना।

उन्होंने कहा, “गाने का कंपोज़र और गायक होने के नाते, और लाखों लोगों को इसे सुनते हुए देखकर, ज़ाहिर है कि आपके उत्साह से बहुत सारे मैसेज आते हैं। मुझे DM में हज़ारों मैसेज आए हैं जिनमें कहा गया है, ‘भाई, आपका गाना मिर्ज़ापुर में है।’ लेकिन, मिर्ज़ापुर टीम, आपको यह ठीक से करना चाहिए था। आपको मुझसे बात करनी चाहिए थी।”

उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि वह जो भी ज़रूरी कदम उठाना होगा, वह उठाएंगे। उन्होंने कहा, “खैर, जो भी कदम उठाने की ज़रूरत है, वह उठाए जाएंगे।”इस बीच, कई इंटरनेट यूज़र्स ने रैपेरिया बालम का समर्थन किया है और सोशल मीडिया पर उनके पक्ष में आवाज़ उठाई है।

एक यूज़र ने लिखा, “यह देखकर दुख होता है कि मेवाड़ के महान वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह जी को समर्पित गाना ‘शूरवीर’ मिर्ज़ापुर फ़िल्म में काल्पनिक गैंगस्टर्स की महिमा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इतिहास का सम्मान किया जाना चाहिए, न कि सस्ते मनोरंजन के लिए उसे क्राइम ड्रामा के साथ मिलाया जाना चाहिए। एक राजस्थानी होने के नाते, मैं कहना चाहता हूँ: कृपया हमारे नायकों के बलिदान का मज़ाक न उड़ाएँ। राजस्थानी संस्कृति को गलत तरीके से दिखाना बंद करें।” फिलहाल, ‘मिर्ज़ापुर: द मूवी’ के मेकर्स ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर बवाल, इकरा हसन का बड़ा आरोप- ‘संविधान का गला घोंटा जा रहा’, अब कोर्ट जाएंगी

सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर बवाल, इकरा हसन का बड़ा आरोप- 'संविधान का गला घोंटा जा रहा', अब कोर्ट जाएंगी

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने प्रशासन की कार्रवाई पर तीखा हमला बोलते हुए इसे संविधान और कानून के खिलाफ बताया है। सांसद ने कहा कि इस मामले को लेकर वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी।

 

इकरा हसन ने आरोप लगाया कि मस्जिद के मामले में सभी संबंधित लोगों को दरकिनार करते हुए बुलडोजर की कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद वर्ष 1947 से पहले से बनी हुई थी और इतने पुराने धार्मिक स्थल को बिना सभी पक्षों की बात सुने ढहा दिया गया।

 

सांसद ने कहा हमें तानाशाही के तहत हाउस अरेस्ट किया गया है। हमारे संविधान का गला घोंटा जा रहा है। इस मामले में कोई मोहलत नहीं दी गई, जबकि टेररिस्ट को मोहलत दी जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि देश में नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इकरा हसन ने कहा, संविधान का गला घोंटा जा रहा है और नियम-कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस मामले को लेकर हम लोग कोर्ट जाएंगे।

 

 

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि जिस जमीन पर मस्जिद बनी है, वह गाटा संख्या 539 है और यह जमीन वालिद खां तथा याकूब खां के नाम पर थी। उनके मुताबिक, इन लोगों ने यह जमीन कलेक्ट्रेट, कोषागार और तहसील के निर्माण के लिए दान की थी।

 

इमरान मसूद ने यह भी दावा किया कि जमीन से संबंधित वर्ष 1911 का बिजली का बिल अदालत में साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया है, जिसे पोर्टल से प्राप्त किया गया था। उनका कहना है कि इसी जमीन पर एक मंदिर भी मौजूद है।

 

मस्जिद ध्वस्तीकरण पर Aimim के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने मीडिया से कहा कि शामली विधायक इकरा हसन रील मास्टर है, यदि वह सही मायने में सहारनपुर जा रही थी और उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया है तो अखिलेश यादव अपने विधायकों के साथ वहां आयें। 

 

कलेक्ट्रेट परिसर में चला बुलडोजर

 

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन ने मस्जिद के निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बताते हुए इसे हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। मामले में न्यायालय में भी कानूनी लड़ाई चली।

 

मिली जानकारी के मुताबिक जिला अदालत ने 4 सितंबर को मस्जिद प्रबंधन की अपील खारिज कर दी और इससे पहले जारी हटाने के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।

 

प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है और विवादित निर्माण सरकारी भूमि पर था। वहीं, सांसद इकरा हसन सहित विरोध करने वाले पक्ष का आरोप है कि मामले में पर्याप्त मोहलत और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया।

 

कार्रवाई के बाद बढ़ा राजनीतिक तापमान

 

मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया है। इकरा हसन ने इसे महज एक निर्माण हटाने की कार्रवाई न मानते हुए संविधान और कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल बताया है। उन्होंने साफ किया है कि वह इस मामले को न्यायालय में उठाएंगी।

 

अब इस पूरे विवाद की अगली कड़ी अदालत में देखने को मिलेगी। एक तरफ प्रशासन न्यायालय के आदेश के अनुपालन की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर सांसद इकरा हसन कार्रवाई को चुनौती देने की तैयारी में हैं। ऐसे में सहारनपुर का यह मस्जिद विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।