आकाश अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स की प्राथमिकताएं बताईं, कहा-इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाने पर होगा फोकस

जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी ग्रोथ स्ट्रेटेजी के फोकस में बदलाव कर रही है। अब तक कंपनी का जोर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर रहा है। अब कंपनी अपने नेटवर्क का मैक्सिमम फायदा उठाने पर फोकस कर रही है। कंपनी ने पिछले सालों में पूरे देश में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भारी निवेश किया है। अब वह अपने सर्विसेज पोर्टफोलियो का विस्तार करना चाहती है और निवेश की गई पूंजी पर रिटर्न बढ़ाना चाहती है। इस बारे में जियो प्लेटफॉर्म्स के एमडी आकाश अंबानी ने बताया।

इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करने पर होगा फोकस

मनीकंट्रोल को दिए ईमेल इंटरव्यू में अंबानी ने कहा, “हमारे कैपिटल एलोकेशन की दिशा सस्टेनेबल लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएट करने के मकसद पर निर्भर करेगी। हम वहां निवेश करना जारी रखेंगे, जहां हमें टेक्नोलॉजी, कस्टमर डिमांड और उपलब्ध मौकों का फायदा उठाने के लिहाज से ऐसा करना सही लगेगा।” उन्होंने कहा कि मीडियम और लॉन्ग टर्म में हमारा फोकस उस इंफ्रास्ट्रक्चर से मैक्सिमम वैल्यू हासिल करना है, जिसे हमने बनाया है।

पिछले सालों में कंपनी ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश किया है

जियो प्लेटफॉर्म्स ने व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया है। मार्च 2026 में कंपनी के 3,60,382 नेटवर्क टावर्स थे। इसमें 10 लाख रूट किलोमीटर से ज्यादा लंबा फाइबर नेटवर्क शामिल है। कंपनी के वायरलेस ब्रॉडबहैंड नेटवर्क के तहत देश की आबादी का 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आता है। फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का कवरेज करीब 98 फीसदी पिन कोड्स तक है। FY26 में इंडिया के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में जियो की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी थी।

अब पूंजीगत निवेश की रफ्तार में धीर-धीरे कमी आ रही

कई सालों तक भारी निवेश करने के बाद अब इनवेस्टमेंट की तेज रफ्तार कम हुई है। FY26 में कंपनी का कैश कैपिटल एक्सपेंडिचर घटकर 34,184 करोड़ रुपये रही। यह FY25 में 44,268 करोड़ रुपये थी। FY24 में 53,510 करोड़ रुपये थी। नेटवर्क कैपेक्स अकेले 40,617 करोड़ रुपये से घटकर 29,377 करोड़ रुपये पर आ गया। उधर, बिजनेस की ऑपरेटिंग अर्निंग्स अब अच्छे लेवल पर पहुंच गई है। जियो प्लेटफॉर्म्स का ऑपरेशन से रेवेन्यू FY26 में बढ़कर 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गया। EBITDA 76,255 करोड़ रुपये रहा। यह करीब 52 फीसदी का मार्जिन है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 30,049 करोड़ रुपये रहा।

जियो की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल विदेश में करने पर भी होगा फोकस

कंपनी ने शॉर्ट टर्म में कंपनी की प्राथमिकताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा इसमें नेटवर्क क्वालिटी बनाए रखना, होम ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस का विस्तार करना और एंटरप्राइज एंड डिजिटल सर्विसेज का विस्तार शामिल हैं। जियो AI-एनेबल्ड एंटरप्राइज सॉल्यूशंस, IoT, क्लाउड कंप्यूटिंग और AR/VR में भी मौकों पर नजर रखेगी। उन्होंने कहा कि जियो की टेक्नोलॉजी कपैबिलिटी के लिए विदेश में मौकों की तलाश भी प्राथमिकता में शामिल होगी।

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जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को निवेश के लिए खुल जाएगा

जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,200 करोड़ रुपये के आईपीओ में सिर्फ नए शेयर इश्यू होंगे। इसमें कोई ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं है। यह आईपीओ 21 अक्तूबर यानी बुधवार को खुलेगा और 23 अक्तूबर यानी शुक्रवार को बंद होगा। कंपनी ने प्रति शेयर 1,065-1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कंपनी की वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी आईपीओ से आने वाले पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल अपनी सब्सिडियरी रिलायंस का कर्ज चुकाने के लिए करेगी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

चीन के अमीर अरबपतियों पर कस रहा टैक्स का शिकंजा, जानिए यहां के रईसों की कैसे बढ़ने वाली हैं मुश्किलें

चीनी कारोबारी अपनी कमाई पर कर बचाने के लिए ग्लोबल एक्सचेंज पर बिजनेस लिस्ट करने और अपने अरबों डॉलर ऑफशोर रखने का तरीका अपनाते रहे हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकता है, क्योंकि टैक्स अधिकारियों ने जुलाई में कहा कि वे स्थानीय करदाताओं के लिए विदेशी ट्रस्ट से होने वाले मुनाफे पर 20% टैक्स लगाना शुरू करेंगे। इन लोगों के पास अब 22 अक्टूबर तक बिना किसी पेनल्टी के अपनी देनदारियों को टैली करने, रिपोर्ट करने और चुकाने का समय है।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, इस कदम से दुनिया के 500 सबसे अमीर लोगों में से आठ और उनके लाभार्थी सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक इन टाइकून्स के ऑफशोर ट्रस्ट के जरिए चीन में बड़े ऑपरेशन वाले बिजनेस में लिस्टेड स्टेक हैं। चीनी सरकार ने किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक तौर से अलग नहीं किया है। यह साफ़ नहीं है कि इनमें से किसी अरबपति को अपने विदेशी ट्रस्ट से हुए मुनाफे पर टैक्स देना होगा या उनसे ऐसा करने के लिए कहा गया है। ब्लूमबर्ग के रेगुलेटरी फाइलिंग के आधार पर की गई गणना के मुताबिक, शुक्रवार तक उनकी होल्डिंग्स कुल मिलाकर लगभग $140.2 बिलियन थीं।

चीन की कुछ सबसे जानी-मानी कंपनियों की स्थापना करने वाले आठ अरबपतियों ने अपने ट्रस्ट ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और केमैन आइलैंड्स जैसे टैक्स हेवन में खोले हैं। वीडियो गेम डेवलपर NetEase Inc. चलाने वाले विलियम डिंग इनमें शामिल हैं। विदेशों में उनके लगभग $37 बिलियन रखे हैं, और कॉलिन हुआंग, जिन्होंने ई-कॉमर्स की बड़ी कंपनी PDD Holdings Inc. लॉन्च की और चीन के बाहर उनके पास $29 बिलियन हैं।

एल्युमिनियम बनाने वाली कंपनी चाइना होंगकियाओ ग्रुप लिमिटेड के एक स्पोक्सपर्सन ने कहा कि उसके फाउंडर झांग बो और कंपनी की लीडरशिप को टैक्स पॉलिसी में बदलाव से जोड़ना “बेबुनियाद और गुमराह करने वाला है।” बाकी सात कंपनियों के प्रतिनिधियों ने टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। विदेशों में ज्यादातर पैसा उन निवेशों से जमा हुआ था जो कंपनियों ने अमेरिका या हांगकांग में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग पूरी करने से पहले किए थे। उनमें से कुछ कारोबार, जैसे PDD और पॉप मार्ट, ने ट्रेडिंग शुरू करने के बाद से वैल्यू में बहुत बढ़ोतरी की है, जिससे उनके संस्थापकों को कागज पर अरबों डॉलर मिले हैं।

लॉ फर्म इंस एंड कंपनी हांगकांग के पार्टनर केविन वू ने कहा कि टैक्स में हड़पने से पुराने मनी ट्रस्ट पर ज्यादा असर पड़ता है। उन्होंने कहा, “कंपनी के पब्लिक होने के बाद मूल्य बहुत बढ़ जाता है।” जिन होने वाले क्लाइंट्स ने बहुत पहले अपनी कंपनियों को लिस्ट किया था, वे “ऐसे इनवेंटिव वकीलों की मांग कर रहे हैं जो सिर्फ नियम बताने के बजाय ट्रस्ट को रीस्ट्रक्चर कर सकें।” उन्होंने ब्लूमबर्ग द्वारा पहचाने गए आठ अरबपतियों के बजाय अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए कहा।

टैक्स कलेक्शन का यह अभियान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के “आम खुशहाली” के अभियान का ही एक हिस्सा है, जिसमें घरेलू टेक्नोलॉजी की बड़ी कंपनियों पर कार्रवाई और बैंकरों की सैलरी में कटौती शामिल थी। भले ही पिछले कुछ सालों में इनमें से कुछ पाबंदियां कम हुई हैं, लेकिन लंबे समय से चल रही प्रॉपर्टी की मंदी ने स्थानीय सरकारों के फाइनेंस को भी गहरा झटका दिया है, जिससे रेवेन्यू के दूसरे सोर्स खोजने पड़े हैं।

यूनियन बैंकेयर प्रिवी में एशिया के सीनियर इकोनॉमिस्ट कार्लोस कैसानोवा ने कहा, “उन्हें स्थानीय और केंद्र सरकार के लेवल पर रेवेन्यू के सोर्स को बेहतर बनाने की जरूरत है और वे एक चैनल के तौर पर ऑफशोर वेल्थ की तलाश कर रहे हैं।”

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Urmi Sinha IPS Story: मुंगेर की बेटी बनी देश की पहली सबसे कम उम्र की IPS, महज 21 साल की उम्र में यूपीएससी क्रैक कर रचा इतिहास

Urmi Sinha IPS Story: बिहार के मुंगेर जिले से ताल्लुक रखने वाली उर्मी सिन्हा ने शायद खुद भी कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन पूरा देश उनका नाम सम्मान के साथ लेगा। लेकिन उनके बुलंद इरादों और सही दिशा में की गई मेहनत ने इस उपलब्धि को उनकी तरफ मोड़ दिया। उर्मी ने महज 21 साल की उम्र में देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास की। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने लिए आईपीएस सेवा चुनकर सबसे कम उम्र की अधिकारी बनने का खिताब अपने नाम कर लिया।

तेलंगाना स्थित हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में 17 अक्टूबर 2026 को पासिंग आउट परेड में 135 IPS अधिकारियों देश की पुलिस सेवा में शामिल हुए। इसमें उर्मी सिन्हा अपने बैच की सबसे कम उम्र की अधिकारी बनकर उभरी हैं। उर्मी ने प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 170वीं रैंक हासिल की। उनकी आईपीएस ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। अब वह बतौर आईपीएस आंध्र प्रदेश कैडर में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं।

बिहार से है उर्मी सिन्हा का गहरा नाता

आईपीएस उर्मी सिन्हा का देश के पूर्वी राज्यों बिहार और पश्चिम बंगाल से गहरा नाता है। बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर स्थित मारवाड़ी टोला से जुड़ी उर्मी के पिता डॉ. रंजीत सिन्हा हावड़ा के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ हैं और मां कुशल गृहिणी हैं। उनका परिवार पश्चिम बंगाल के हावड़ा में बस गया था, जहां उनकी शुरुआती पढ़ाई पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में बीए की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन पूरी होने के साथ ही उर्मी ने यूपीएससी सीएसई की तैयारी शुरू कर दी थी।

घर पर रह कर पूरी की यूपीएससी की तैयारी

उर्मी सिन्हा ने यूपीएससी की तैयारी अपने घर पर रहकर करने का फैसला किया। उन्होंने 2023 में ग्रेजुएशन के बाद ऑनलाइन स्टडी मटीरियल, मेंटर्स के सही गाइडेंस और खुद के बनाए स्टडी प्लान पर भरोसा किया। उन्होंने प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू, तीनों चरण एक ही बार में पार कर लिए। UPSC CSE 2024 में AIR 170 हासिल कर उन्होंने अपना और अपने परिवार का नाम रोशन किया।

17 अक्टूबर को पासिंग आउट परेड में ली देश सेवा की शपथ

उर्मी 17 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद के SVPNPA में 78वें नियमित बैच की पासिंग आउट परेड में शामिल थीं। इस बैच में 135 भारतीय आईपीएस अफसरों (37 महिला अधिकारी शामिल हैं) के अलावा नेपाल, भूटान और मालदीव के 16 विदेशी अधिकारी भी शामिल थे। इस बैच में 23 वर्षीय उर्मी सबसे युवा अधिकारी रहीं। पासिंग आउट परेड के बाद उर्मी सिन्हा अपने आवंटित आंध्र प्रदेश कैडर में तैनात होंगी और ट्रेनी आईपीएस अधिकारी पुलिस प्रशासन, कानून-व्यवस्था और फील्ड पुलिसिंग की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग हासिल करेंगी।

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Food Safety : बिस्किट में भरा भूसा, दूध में डिटर्जेंट और यूरिया, उपभोक्ता अपने सेहत की कैसे करें सुरक्षा !

Food Safety : दूध और डेयरी प्रोडक्ट में डिटर्जेंट और यूरिया, घी में जानवर की चर्बी,लाल मिर्च पाउडर में लाल मिट्टी, धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा, जीरा में घास के बीज और अब बिस्किट में जानवरों की खिलाने वाला भूसा!ये सब फूड रेगुलेटर के छापों पकड़ा गया और साबित हो चुका है, फिर भी भारत में मिलावट का खेल धड़ल्ले से जारी है आखिर क्यों? कैसे रुकेगा मिलावट का काला कारोबार? आज कंज्यूमर अड्डा में इसी पर बात की गई है।

सबसे पहले समझते हैं कि फसाई (FSSAI) के छापों में ताजा खुलासा क्या हुआ है। FSSAI ने कंज्यूर्स की शिकायत पर की जांच की तो पाया कि प्रिया गोल्ड बिस्किट में ‘फाइबर’ के सोर्स के रूप में जानवरों को खिलाने वाला चोकर का इस्तेमाल किया जा रहा था । जांच में मिली चोकर की बोरियों पर साफ लिखा था कि ये केवल मवेशियों के खाने के लिए है। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग प्लांट में साफ-सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों का भारी उल्लंघन भी पाया गया। FSSAI ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है।

दूसरा मामला है दूध में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा मिलाने का। डोडला डेयरी (Dodla Dairy) के फुल क्रीम दूध के सैंपल स्टैंडर्ड टेस्टिंग में फेल हो गए। जब रेफरल लैब से जांच कराई गई तो दूध में डिटर्जेंट की पुष्टि हुई। इस दूध में फैट भी तय मात्रा से कम था और ये मानव शरीर के लिए असुरक्षित और हानिकारक घोषित किया गया।

तीसरा मामला है पीली किशमिश में जहरीला पेस्टिसाइड का। UEIR Organic Foods की पीली किशमिश के सैंपल में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक पाए गए। कंज्यूमर इस प्रोडक्ट को ‘ऑर्गेनिक’ और हेल्दी मानकर खा रहे हैं। जबकि इनमें मौजूद केमिकल अवशेष उल्टा सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हां अब तक तो आप यह जान ही गए होंगे की फसाई (FSSAI) भारत का फूड रेग्यूलेटर है।

मिलावट के तरीके

दूध और डेयरी उत्पाद में डिटर्जेंट, यूरिया, स्टार्च मिलाया जाता है। वहीं, घी और मक्खन में वेजीटेबल तेल, चर्बी, स्टार्च मिलाया जाता है। हल्दी पाउडर में लेड क्रोमेट और मेटानिल येलो मिला जाता है। लाल मिर्च पाउडर में ईंट का चूरा और लाल मिट्टी मिलाई जाती है। धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा, गोबर और भूसी मिलाई जाती है। काली मिर्च में पपीते के बीज मिला दिए जाते हैं। जीरा में घास के बीज और झाड़ू के तिनके मिला दिए जाते हैं। हींग में स्टार्च, गोंद और राल मिलाए जाते हैं। वहीं, सरसों के तेल में आर्जिमोन तेल और सस्ता पाम ऑयल मिला दिया जाता है। शहद में चीनी की चाशनी, राइस सिरप गुड़ का घोल मिलाया जाता है। वहीं, चीनी और गुड़ में चाक पाउडर और वॉशिंग सोडा मिला दिया जाता है। हरी सब्जियों में मैलाकाइट ग्रीन की मिलावट की जाती है। वहीं, फल पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड या एथिलीन गैस का इस्तेमाल होता है।

मिलावट की सजा

मानक पूरे ना करने पर लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है। सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थ के लिए 5 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत ब्रांडिंग/भ्रामक प्रचार के लिए 3-10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। असुरक्षित भोजन पर 6 महीने तक जेल और 1 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। भोजन से चोट या बीमारी होने पर 1 साल जेल की जेल और 3 लाख जुर्माना हो सकता है। भोजन से गंभीर बीमारी होने पर 6 साल जेल और 5 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। भोजन से मृत्यु होने पर आजीवन कारावास और 10 लाख जुर्माना लगाया जा सकता है।

यहां दर्ज करें शिकायत 

FSSAI के Food Safety Connect ऐप पर और FSSAI के टोल-फ्री नंबर पर मिलावट की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

खरीदारी के समय इन बातों पर ध्यान दें

पैकिंग पर FSSAI लाइसेंस नंबर होना चाहिए। एगमार्क (Agmark) / FSSAI लोगो होना चाहिए। अनचाही या असामान्य महक/स्वाद नहीं होना चाहिए। विश्वसनीय और सीलबंद पैकेट ही खरीदें।

 

 

खेती से AI तक… बिजनेस आइडिया से जीतें डेढ़ लाख रुपये! जानिए IIT कानपुर के मेंटरशिप वाले चैलेंज में कैसे करें रजिस्ट्रेशन

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आपके पास कोई ऐसा आइडिया है, जो लोगों की जिंदगी आसान बना सकता है या किसी बड़ी समस्या का समाधान कर सकता है, तो उसे हकीकत में बदलने का मौका है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर युवाओं को उनके नए विचारों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इसके लिए यूथ एंटरप्रेन्योर्स चैलेंज (YEC) 2027 के तहत आवेदन मांगे गए हैं। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में चुने जाने वाले युवाओं को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। इस प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली टीमों को डेढ़ लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार भी मिलेगा। आवेदन करने की अंतिम तिथि 22 अक्टूबर 2026 है। यह पहल भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027 का हिस्सा है। इसमें आईआईटी कानपुर नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभा रहा है।

आइडिया को कारोबार में बदलने में मिलेगी मदद

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य ऐसे युवाओं की पहचान करना है, जो तकनीक और नए प्रयोगों के जरिए समाज की समस्याओं का समाधान निकालना चाहते हैं। कई बार युवाओं के पास अच्छा विचार होता है, लेकिन उसे आगे बढ़ाने, उसका प्रोटोटाइप तैयार करने और बाजार तक पहुंचाने का रास्ता नहीं पता होता। ऐसे युवाओं को प्रतियोगिता के माध्यम से अपने विचार को बेहतर बनाने का मौका मिलेगा। आईआईटी कानपुर का स्टार्टअप इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर (एसआईआईसी) भी नए विचारों को व्यावहारिक रूप देने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में मददगार साबित हो सकता है।

18 से 35 साल के युवा कर सकेंगे आवेदन

इस प्रतियोगिता में 18 से 35 वर्ष की उम्र के युवा हिस्सा ले सकते हैं। ऐसे स्टार्टअप संस्थापक आवेदन कर सकते हैं, जिनके उद्यम को डीपीआईआईटी से मान्यता मिली हो या जो एमएसएमई के रूप में पंजीकृत हों। सरकारी, निजी, गैर सरकारी संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों में काम करने वाले पेशेवर भी निर्धारित शर्तों के तहत आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित संस्थान से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देना होगा। युवा अकेले या अधिकतम तीन सदस्यों की टीम बनाकर हिस्सा ले सकते हैं। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा।

खेती से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक पर मौका

युवा स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, कृषि, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण, शासन व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों से जुड़े अपने विचार पेश कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित नए समाधान भी इसमें शामिल किए जा सकते हैं। विचार ऐसा होना चाहिए, जो किसी वास्तविक समस्या को हल करने में मदद करे और जिसे भविष्य में उपयोगी समाधान के रूप में विकसित किया जा सके।

पहले स्थान पर डेढ़ लाख रुपये का पुरस्कार

प्रतियोगिता के तहत चुनी गई टीमों को अलग-अलग चरणों में अपने विचार प्रस्तुत करने होंगे। क्षेत्रीय स्तर पर अक्टूबर और नवंबर 2026 में प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित टीमों को दिसंबर में मार्गदर्शन मिलेगा। इसके बाद 8 और 9 दिसंबर को आईआईटी कानपुर परिसर में प्रत्यक्ष मार्गदर्शन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। प्रोटोटाइप और पोस्टर तैयार करने के लिए प्रत्येक फाइनलिस्ट टीम को 5,000 रुपये की सहायता भी दी जाएगी। प्रतियोगिता का अंतिम चरण 10 से 12 जनवरी 2027 के बीच प्रस्तावित है। इसमें पहले स्थान पर आने वाली टीम को 1.50 लाख रुपये, दूसरे स्थान पर एक लाख रुपये, तीसरे स्थान पर 75 हजार रुपये, चौथे स्थान पर 50 हजार रुपये और पांचवें स्थान पर 30 हजार रुपये मिलेंगे। फाइनल में पहुंचने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र के साथ नीति निर्माताओं और निवेशकों से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा।

22 अक्टूबर तक करना होगा पंजीकरण

इच्छुक युवा माय भारत पोर्टल पर जाकर विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2027 के अंतर्गत यूथ एंटरप्रेन्योर्स चैलेंज के लिए आवेदन कर सकते हैं। पंजीकरण की अंतिम तिथि 22 अक्टूबर 2026 है। आवेदन और पात्रता से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक लिंक https://mybharat.gov.in/pages/youth-entrepreneurs-challenge पर जाना होगा।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

‘यहां कोई न्याय नहीं’, न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के बाद CJP के सौरव दास ने दी प्रतिक्रिया

Powerica Share Price: ₹700 तक जा सकता है ₹565 का शेयर, इस कारण नुवामा हुआ बुलिश

Powerica  Share Price: नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Nuvama Institutional Equities) पावरिका लिमिटेड (Powerica Ltd) के शेयरों को लेकर बुलिश नजर आ रहा है। ब्रोकरेज फ्रर्म ने स्टॉक पर Buy रेटिंग दी है और इसके लिए 700 रुपये का टारगेट प्राइस दिया। जो मौजूदा लेवल से 20 फीसदी की तेजी दिखा रहा है । बता दें कि Powerica के शेयर अपने आईपीओ प्राइस ₹395 से लगभग 48% की तेजी आई है। सोमवार को ये 564.45 रुपये पर बंद हुआ। 2 अप्रैल 2026 को BSE और NSE पर लिस्ट होने के बाद, पिछले 6 महीनों में इस स्टॉक में 34.51% की बढ़त दर्ज की गई है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि नुवामा का यह सकारात्मक नजरिया तीन मुख्य ग्रोथ ड्राइव पर टिका है। कंपनी के डीजल जनरेटर (DG) बिजनेस में सुधार, विंड इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर (IPP) पोर्टफोलियो का विस्तार, और रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइसेस (RECDs) के क्षेत्र में लंबे समय के अवसर।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेज की राय

पावरिका का पावर-सॉल्यूशन पोर्टफोलियो काफी विविध है, जिसमें DG सेट, विंड पावर जनरेशन और RECDs शामिल हैं। नुवामा को उम्मीद है कि FY26 से FY29 के दौरान इन व्यवसायों से अच्छी कमाई होगी। इसके पीछे डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग, अधिक कुशल विंड टर्बाइन और एमिशन-कंट्रोल तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाना जैसे कारण हैं।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच, DG बिजनेस के टैक्स के बाद मुनाफे (PAT) में लगभग 21% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिलेगी। वहीं, विंड IPP के EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) में 44% और RECD के PAT में 27% की CAGR रहने की उम्मीद है।

पावरिका का DG बिजनेस लगातार कैश जनरेट करने का एक मजबूत आधार है। भारत में कमिंस (Cummins) के लिए केवल तीन जनरेटर ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (GOEMs) में से एक होने के नाते, कंपनी को एक खास फायदा मिलता है।

भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खासकर दक्षिण और पश्चिमी भारत में, जिसका फायदा पावरिका को मिल सकता है। नुवामा ने बताया कि पावरिका के पास डेटा सेंटर से जुड़े लगभग ₹1,100 करोड़ के ऑर्डर हैं। इसकी तुलना में, FY26 में डेटा सेंटर से बिक्री लगभग ₹340 करोड़ रही थी, जो भविष्य में कंपनी की ग्रोथ की अच्छी संभावनाओं को दर्शाती है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि मार्जिन में सुधार आएगा, क्योंकि कंपनी कमिंस (Cummins) द्वारा बढ़ाई गई कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डाल देगी। औद्योगिक पूंजीगत व्यय (industrial capital expenditure) में तेजी आने से इसे और बढ़ावा मिल सकता है।

हालांकि, यह सुधार इस बात पर निर्भर करता है कि पॉवरिका (Powerica) बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर कितनी अच्छी तरह डाल पाती है। नुवामा (Nuvama) ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनी बढ़ती कमोडिटी लागत के बीच कीमतों में हुई बढ़ोतरी को खुद सहने या ग्राहकों पर डालने में विफल रहती है, तो इससे DG मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।

पॉवरिका का विंड पावर (पवन ऊर्जा) कारोबार, नुवामा की निवेश थीसिस का एक और मुख्य आधार है। कंपनी की विंड कैपेसिटी, मिले हुए ‘लेटर ऑफ अवार्ड’ (LOAs) के सहारे, वित्त वर्ष 2029 तक लगभग 330 MW से बढ़कर 631 MW होने की उम्मीद है।

कंपनी का पोर्टफोलियो भी नए और अधिक कुशल टर्बाइनों की ओर बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2029 तक इनका हिस्सा 65% से बढ़कर लगभग 82% होने का अनुमान है। ये नई संपत्तियां 30% से अधिक का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) और लगभग 80% का EBITDA मार्जिन दे सकती हैं, जिससे पूरे पोर्टफोलियो की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

नुवामा को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2029 तक ब्लेंडेड PLF लगभग 29.4% और विंड बिजनेस का EBITDA मार्जिन लगभग 77% तक पहुंच जाएगा। इसी के आधार पर, वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2029 के बीच विंड IPP कारोबार के लिए 44% EBITDA CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) का अनुमान लगाया गया है।

पॉवरिका का RECD कारोबार अभी काफी छोटा है, लेकिन जैसे-जैसे उत्सर्जन नियंत्रण (emission-control) की जरूरतें बढ़ेंगी, यह विकास का एक महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है। नुवामा के अनुसार, इसका संभावित बाजार लगभग 60,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें केवल पांच से छह प्रमाणित प्रतिस्पर्धी ही मौजूद हैं।

ब्रोकरेज ने बताया कि इस कारोबार में इक्विटी पर लगभग 47% रिटर्न मिलने की संभावना है। साथ ही, विभिन्न राज्यों में RECD से जुड़े नियमों का लागू होना और कंपनी की नए ऑर्डर हासिल करने की क्षमता, इसके लिए महत्वपूर्ण कारक होंगे।

नुवामा का मानना ​​है कि पॉवरिका की रिपोर्ट की गई कमाई, उसकी नकदी पैदा करने की वास्तविक क्षमता को पूरी तरह से नहीं दर्शाती है। FY26 में ऑपरेटिंग कैश फ्लो PAT का लगभग 170% रहा, जबकि इसके विंड एसेट्स इक्विटी पर लगभग 15–17% का कैश रिटर्न देते हैं।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंसोलिडेटेड रिटर्न ऑन इक्विटी FY27 के लगभग 12% से बढ़कर FY30 तक 14.4% हो जाएगा, क्योंकि नई विंड परियोजनाओं के लिए लगभग 70:30 के डेट-टू-इक्विटी अनुपात के साथ फंडिंग की जाएगी। नुवामा (Nuvama) के अनुसार वैल्यूएशन आकर्षक हैं। इसमें विंड बिजनेस के लिए FY29 में अनुमानित एंटरप्राइज वैल्यू-टू-EBITDA लगभग 6.8 गुना है, और DG सेट के लिए प्राइस-टू-अर्निंग मल्टीपल लगभग 21 गुना है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

सिर्फ ₹5 की कॉफी ने खड़ा किया ₹180 करोड़ का बिजनेस! जानिए कैसे ‘हट्टी कापी’ बनी देश का मशहूर ब्रैंड?

नई दिल्ली। बेंगलुरु में 5 रुपये प्रति कप कॉफी बेचने से शुरू हुआ एक छोटा सा कारोबार आज करीब 180 करोड़ रुपये की कंपनी बन चुका है। इस कंपनी का नाम है हट्टी कापी (Hatti Kaapi)। यूएस महेंद्र (U.S. Mahendra) ने साल 2009 में एक इमारत की सीढ़ियों के नीचे छोटी सी जगह से इसकी शुरुआत की थी। आज कंपनी के आउटलेट ऑफिस, एयरपोर्ट और होटलों तक पहुंच चुके हैं।

महेंद्र कर्नाटक के हासन जिले में पले-बढ़े थे और उन्हें कॉफी के बिजनेस की अच्छी समझ थी। वह कैफे कॉफी डे के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ से भी इंस्पायर्ड थे। उन्होंने कॉफी के अच्छे टेस्ट और सर्विस पर ध्यान दिया। बाद में उन्होंने जंबराडी गांव के 15 से 20 किसानों से कॉफी खरीदनी शुरू की।

देश-विदेश तक ऐसे पहुंचा हट्टी कापी का बिजनेस

हट्टी कापी की पॉपुलैरिटी बढ़ने के बाद कंपनी ने अपने आउटलेट को बढ़ा दिया है। साल 2014 में इंफोसिस ने अपने कैंपस में इसे जगह दी। इसके बाद डेलॉइट और SAP जैसी कंपनियों के ऑफिस और एयरपोर्ट पर भी इसके काउंटर खुल गए। कंपनी मैरियट इंटरनेशनल से जुड़े होटलों को भी सर्विस दे रही है और पैक की हुई कॉफी ऑनलाइन बेचती है।

अब हट्टी कापी का कारोबार भारत से बाहर भी पहुंच गया है। कंपनी लंदन में मौजूद है और एम्स्टर्डम, अमेरिका, दुबई के साथ यूरोप के दूसरे शहरों में भी बिजनेस बढ़ाने की प्लानिंग बना रही है।

बिजनेस बढ़ाने के लिए कंपनी ने अलग-अलग इंवेस्टर्स से पैसा जुटाया। Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक:

• मई 2024 में कंपनी को करीब 21.9 लाख डॉलर का इन्वेस्टमेंट मिला।

• अप्रैल 2025 में करीब 10.2 लाख डॉलर की फंडिंग मिली।

• कंपनी ने कुल 13 चरणों में करीब 66.83 करोड़ रुपये जुटाए।

• 19 अगस्त 2025 तक कंपनी की कीमत करीब 180 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

हट्टी कापी की कमाई साल 2025 में करीब 44.11 करोड़ रुपये रही। इसके बावजूद कंपनी को 18.59 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। साल 2024 में यह घाटा 3.86 करोड़ रुपये था। हट्टी कापी ने कॉफी से शुरुआत करके देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। उनकी कंपनी की कमाई के साथ घाटा भी हुआ है। अब कंपनी के इस बिजनेस को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

Urban Company Share Price : कमजोर नतीजों के बाद आज 8.75% टूटा शेयर, जानिए क्या है ब्रोकरेज की राय

Urban Company Share Price : दूसरी तिमाही में अर्बन कंपनी के नतीजे कमजोर रहे हैं। नतीजों के बाद शेयर में बड़ा एक्सिडेंट दिखा है। सोमवार को इंट्राडे में अर्बन कंपनी के शेयरों में लगभग 8% की भारी गिरावट आई। कंपनी द्वारा सितंबर तिमाही के कंसोलिडेटेड नेट लॉस में सालाना आधार पर बड़ी बढ़ोतरी की रिपोर्ट जारी करने के बाद यह शेयर दबाव में आ गया है। फिलहाल NSE पर अर्बन कंपनी के शेयर 13.82 रुपए यानी 8.74 फीसदी की गिरावट के साथ 144.30 रुपए पर दिख रहे हैं।

इस होम सर्विसेज प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 182.48 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह नुकसान 59.33 करोड़ रुपये था। इस अवधि में कंपनी की कामकाजी आय सालाना आधार पर 41.4% बढ़कर 537.29 करोड़ रुपये रही है, जो वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में 380.03 करोड़ रुपये थी। डिलीवर किए गए ऑर्डर्स की संख्या 15.1 मिलियन तक पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 103% की बढ़त दिखाता है। जबकि नेट ट्रांजैक्शन वैल्यू (NTV) 39% बढ़कर 1,432 करोड़ रुपये हो गई।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अर्बन कंपनी पर अपनी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग बरकरार रखी है और इसके टारगेट प्राइस को लगभग 5.3% बढ़ाकर 190 रुपये से 200 रुपये कर दिया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि अर्बन कंपनी (UC) ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (2QFY27) में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसमें इंडिया कंज्यूमर सर्विसेज (इंस्टाहेल्प को छोड़कर) (ICS) का NTV, एक ऊंचे बेस के बावजूद, सालाना आधार पर 26.3% बढ़ा है, जबकि इंटरनेशनल NTV में सालाना आधार पर 66.9% की ग्रोथ हुई है। एमके ने आगे कहा कि UC के हर सेगमेंट में विकास की काफी संभावनाएं हैं, क्योंकि इनका लोकल नेटवर्क मजबूत है, कोर बिजनेस में इसका एकाधिकार (मोनोपोली) है और अन्य इंटरनेट कंपनियों की तुलना में इसका मार्जिन भी अधिक है।

जमकर कैश होने के बावजूद कंपनी क्यों जुटा रही है फंड?

स्नैबिट अब कंपनी का बड़ा कंपिटीटर बन रहा है। स्नैबिट भी अब तकरीबन अर्बन कंपनी जैसे ही आंकड़े डिलिवर कर रहा है। इसका मतलब है कि इस इंडस्ट्री में बड़ा कंपिटीशन होगा। इससे निपटने के लिए बोर्ड से इक्विटी के जरिए 2500 करोड़ रुपए जुटाने को मंजूरी दी है। इस बीच अर्बन कंपनी के मैनेजमेंट कमेंट्री में कहा गया है कि Q3FY28 में Adj. EBITDA के ब्रेकइवन की उम्मीद है। FY31 में Adj. EBITDA 1,000 करोड़ रुपए के पार जाना संभव है। बोर्ड से नई कैटेगरी रेसिडेंशियल एयर कंडिशनर्स को मंजूरी दी है।

कंपनी की फंड जुटाने की योजना पर बात करते हुए एमके (Emkay) ने कहा कि 25 अरब रुपये तक की यह फंड जुटाने की योजना कोर और नेटिव (Native) ग्रोत, इंस्टाहेल्प (InstaHelp) के ग्रोथ, और चुनिंदा अधिग्रहणों (acquisitions) में मदद करेगी।

ब्रोकरेज ने आगे कहा कि फंड जुटाने से निवेश क्षमता मजबूत होती है, हालांकि पूंजी का इस्तेमाल और इक्विटी डाइल्यूशन (dilution) ऐसे पहलू हैं जिनका वैल्युएशन के समय ध्यान रखना होगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही के लिए अपने कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA ब्रेक-ईवन के अनुमान और वित्त वर्ष 2031 के लिए 10 अरब रुपये के लक्ष्य को बरकरार रखा है।

 

Bank Nifty Trend : बैंकिंग इंडेक्स 0.5% गिरा, एक्सिस और HDFC बैंक ने बनाया सबसे ज्यादा दबाव, जाने आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Bank Nifty Trend : बैंकिंग इंडेक्स 0.5% गिरा, एक्सिस और HDFC बैंक ने बनाया सबसे ज्यादा दबाव, जाने आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

Bank Nifty Trend : 19 अक्टूबर को बैंक निफ्टी इंडेक्स में 0.5% की गिरावट आई। एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक जैसे प्राइवेट बैंकों के कारण बैंक निफ्टी पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा है। जुलाई-सितंबर तिमाही के मुनाफे के अनुमानों पर खरे न उतरने के बाद प्राइवेट बैंकों में 1.7% की गिरावट आई है। इसमें HDFC बैंक और एक्सिस बैंक के शेयरों में 2% और 4.1% की गिरावट आई है।

HDFC बैंक पर ट्रेजरी आय में गिरावट और बैड लोन के लिए किए गए ज्यादा प्रावधान का दबाव दिखा है। जबकि एक्सिस बैंक के ऑपरेटिंग एक्सपेंस अधिक रहे हैं वहीं, अन्य आय कम रही है। दोनों ही बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में गिरावट आई है।

दूसरी ओर पब्लिक सेक्टर बैंकों में आज 2.2% की तेजी आई है। इसमें पंजाब नेशनल बैंक सबसे आगे रहा है। आज इसके शेयरों में 5.4% का उछाल आया है। सरकारी बैंको के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

अरिहंत कैपिटल मार्केट्स में इंस्टीट्यूशनल बिजनेस हेड अनीता गांधी ने कहा कि तिमाही नतीजों के बाद निवेशक साफ तौर पर PSU बैंकों के शेयरों को प्राथमिकता देते दिख रहे हैं। मजबूत FCNR डिपॉजिट का असर निजी बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर पड़ रहा है।

19 अक्टूबर को सुबह 11 बजे, बैंक निफ्टी 0.5% गिरकर 55,571.3 पर ट्रेड कर रहा था। दूसरी ओर, निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स 2.5% बढ़कर सबसे ज्यादा बढ़त वाला (टॉप गेनर) इंडेक्स बना हुआ था।

पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में 3-6% की तेजी आई है। PNB के शेयरों में 6% की बढ़त दिख रही है। यह निफ्टी 200 इंडेक्स का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा। बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक चंद्र ने शुक्रवार को नतीजों के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिसंबर तिमाही में बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में 6-7 बेसिस पॉइंट्स का सुधार होने की उम्मीद है। सितंबर तिमाही में PNB का घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन 2.74% रहा था, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 10 बेसिस पॉइंट्स अधिक था।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बैंक निफ्टी में गुरुवार के 56,065 के हाई के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउ देखने को मिलता है तो इसकी तेजी 56,500 और 56,900 के स्तर तक जा सकती है। ये लेवल 58,706 से 53,785 तक की पूरी गिरावट का 50% और 61.8% रिट्रेसमेंट हैं। हालांकि, अगर यह इस लेवल के ऊपर टिक नहीं पाता है, तो इंडेक्स 54,500–56,000 की रेंज में कंसोलिडेट हो सकता है।

बजाज ब्रोकिंग के पाबित्रो मुखर्जी का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए 54,000-54,500 के स्तर पर एक अहम शॉर्ट-टर्म सपोर्ट है। यह लेवल हाल के निचले स्तर और पिछली बढ़ के अहम रिट्रेसमेंट का संगम है। वीकली चार्ट पर बैंक निफ्टी अपने ‘लोअर हाई’ और ‘लोअर लो’ स्ट्रक्चर को नकार रहा है और पिछले वीक के आई के ऊपर ट्रेड कर रहा है, जिससे इसमें रिकवरी का रुझान बरकरार है। लगातार 56,000–56,065 के अहम रेजिस्टेंस जोन के ऊपर बने रहने से तेजी का रुख और मजबूत होगा जिससे आगे इसके और ऊपर जाने के रास्ते खुलेंगे।

प्रभुदास लीलाधर की वैशाली पारेख ने कहा कि निवेशकों का भरोसा कायम रखने और आने वाले दिनों में और तेजी के लिए, 56900 के स्तर पर स्थित 200-पीरियड MA (मूविंग एवरेज) के ऊपर एक निर्णायक बढ़त जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, 54000 का जोन एक अहम सपोर्ट का काम करेगा। कुल मिलाकर बाजार का रुख अच्छा बनाए रखने के लिए इस स्तर का कायम रहना जरूरी है।

 

HDFC Bank Share price : Q2 नतीजों के बाद निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल हुआ शेयर, जानिए ब्रोकरेज की राय

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ICICI Bank Share Price:Q2 नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म बुलिश, बढ़ाया टारगेट, मिल सकता है 45% का रिटर्न

ICICI BANK SHARE PRICE: ICICI बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जिसके बाद ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बैंक को लेकर काफी बुलिश हैं। जेपी मॉर्गन और नोमुरा ने बैंक के लिए अपना टारगेट प्राइस बढ़ा दिया है, जबकि कई अन्य फर्मों ने ‘Buy’ या इसी तरह की रेटिंग बरकरार रखी है। जिन ब्रोकरेज फर्मों ने इस पर अपनी राय दी है, उनमें गोल्डमैन सैक्स सबसे ज्यादा तेजी की उम्मीद जता रहा है। गोल्डमैन सैक्स ने 2,025 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो शुक्रवार के 1,397 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 45 फीसदी की तेजी दिखाता है।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेज फर्मों की राय

Bernstein

इस इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग दी है और प्रति शेयर ₹1,800 का टारगेट प्राइस तय किया है। इसका मतलब है कि पिछले क्लोजिंग प्राइस से इसमें 28.8% तक की तेजी आ सकती है।फर्म ने कहा कि ICICI बैंक ने एक और शानदार तिमाही पेश की है, जिससे सबसे तेजी से बढ़ने वाले बड़े प्राइवेट बैंक के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत हुई है।

बैंक के लोन और डिपॉजिट ग्रोथ में काफी तेजी आई है। लोन ग्रोथ में कॉर्पोरेट, बिजनेस बैंकिंग और रिटेल सेगमेंट – सभी क्षेत्रों का मजबूत योगदान रहा है। बर्नस्टीन के अनुसार, हालांकि इस तिमाही में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में थोड़ी कमी आई है, लेकिन यह गिरावट अन्य बैंकों के अनुरूप ही है। साथ ही, मजबूत बैलेंस शीट ग्रोथ के कारण नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी अच्छी बनी रही। फर्म ने आगे कहा कि मजबूत फीस इनकम और बेहतर होती एसेट क्वालिटी के चलते, बैंक अपनी बेहतरीन ऑपरेटिंग और अर्निंग्स ग्रोथ को बनाए रखने में कामयाब रहा है।

JPMorgan

जेपी मॉर्गन ने ICICI बैंक को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है और इसके लिए ₹1,800 का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि बैंक ने दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) ₹25,340 करोड़ रही, जो जेपी मॉर्गन के अनुमान से 2% ज्यादा है। प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) ₹20,580 करोड़ रहा, जो अनुमान से 7% अधिक है, और टैक्स के बाद का मुनाफा (PAT) ₹14,840 करोड़ रहा, जो अनुमान से 11% ज्यादा है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने बताया कि IT रिफंड पर मिलने वाले ब्याज को छोड़कर, कोर NII में पिछली तिमाही के मुकाबले 6% और पिछले साल के मुकाबले 18% की बढ़ोतरी हुई है। इसे पिछली तिमाही के मुकाबले 12.3% की लोन ग्रोथ से सपोर्ट मिला, जो इंडस्ट्री में सबसे बेहतर है।

ICICI बैंक का कोर NIM (IT रिफंड पर मिलने वाले ब्याज को छोड़कर) पिछली तिमाही के मुकाबले 4 बेसिस पॉइंट्स कम हो गया है, जिसका मुख्य कारण FCNR (B) का असर है।

फर्म ने आगे कहा कि हालांकि FCNR (B) का पूरा असर तीसरी तिमाही में देखने को मिलेगा, जिससे NIM पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन JP मॉर्गन को चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 2028 में NIM बढ़ने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि बैंक का 57% लोन बुक रेपो रेट से जुड़ा है। साथ ही, अब अनुमानों में 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी (जिसमें दिसंबर 2026 की एक बढ़ोतरी भी शामिल है) को भी जोड़ लिया गया है।

Nomura

नोमुरा ने ICICI बैंक को “Buy” (खरीदने) की रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹1,700 से बढ़ाकर ₹1,740 प्रति शेयर कर दिया है। यह पिछले क्लोजिंग प्राइस से 24.6% की संभावित बढ़त को दर्शाता है।

नोमुरा के अनुसार, ICICI बैंक ने वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2029 के लिए अपने ‘अर्निंग पर शेयर’ (EPS) के अनुमानों को क्रमशः 3% और 7% बढ़ा दिया है।

फर्म ने बताया कि वन-ऑफ (असाधारण) आइटम्स को एडजस्ट करने के बाद NII में पिछले साल के मुकाबले 18% की बढ़ोतरी हुई है। यह नोमुरा के अनुमान से 2% अधिक है, जिसमें लोन और डिपॉजिट ग्रोथ क्रमशः 30% और 27% रही।

कोर PPOP ₹20,800 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 22% अधिक है। नोमुरा ने बताया कि बैंक ने ₹1.6 लाख करोड़ के FCNR (B) डिपॉजिट जुटाए (जो कुल डिपॉजिट का 8% है)। इसमें से 50% हिस्सा इन्हीं डिपॉजिट्स के बदले दिए गए लोन से आया है। बैंक के मैनेजमेंट को उम्मीद है कि अगले दो तिमाहियों में इस लिक्विडिटी का इस्तेमाल कर लिया जाएगा।

Goldman Sachs

गोल्डमैन सैक्स ने Buy” रेटिंग दी है और प्रति शेयर 2,025 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। यह इसके पिछले क्लोजिंग प्राइस से 44.9% की बढ़त की संभावना दिखाता है। बैंक का दूसरा तिमाही प्रदर्शन हर मोर्चे पर उम्मीदों से बेहतर रहा। लोन ग्रोथ 24% रही, जो अनुमान से 2% ज्यादा है, और कोर रेवेन्यू ग्रोथ 18% रही, जो गोल्डमैन सैक्स के अनुमान से 2% अधिक है।

बैंक का NIM (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) अनुमान से 5 बेसिस पॉइंट ज्यादा रहा और PPoP (प्रोविजन से पहले का मुनाफा) भी उम्मीद से बेहतर रहा, जबकि प्रोविजन (संभावित नुकसान के लिए रखी गई रकम) कम रहे। NIM का प्रदर्शन खास तौर पर उल्लेखनीय रहा; सिस्टम में सबसे मजबूत FCNR (B) डिपॉजिट बेस होने के बावजूद, इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले केवल 10 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई।

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, बैंक ने ब्याज दर चक्र के निचले स्तर पर भी लिक्विडिटी (नकदी) को बनाए रखा है। इसका लिक्विडिटी डिपॉजिट रेशियो (LDR) 95% है। इससे मध्यम अवधि में कमाई बढ़ाने के लिए काफी गुंजाइश मिलती है, क्योंकि इस लिक्विडिटी का इस्तेमाल आगे किया जा सकता है।

UBS

UBS ने ICICI बैंक के लिए “Buy” रेटिंग दी है और 1,800 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। इस इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म का कहना है कि बैंक का दूसरा तिमाही प्रदर्शन हर लिहाज से शानदार रहा, जिसे मजबूत लोन और डिपॉजिट ग्रोथ का सहारा मिला।

बैंक की लोन ग्रोथ पिछली तिमाही के मुकाबले 12.3% और पिछले साल के मुकाबले 30% रही, जो उम्मीदों और अन्य बैंकों के प्रदर्शन से काफी बेहतर है। इसमें बिजनेस बैंकिंग की लगातार मजबूती के अलावा, कॉर्पोरेट लोन में भी काफी तेजी देखी गई।

मैनेजमेंट को उम्मीद है कि तीसरी तिमाही में मार्जिन अपने निचले स्तर पर आ जाएंगे, जिसके बाद चौथी तिमाही में इनमें सुधार देखने को मिलेगा।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।