Stock Market Holiday: रक्षाबंधन पर खुलेगा या बंद रहेगा शेयर बाजार? ट्रेडर्स के लिए ये है बड़ा अपडेट

Raksha Bandhan Stock Market Holiday 2026: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अगर आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग या निवेश की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है। 28 अगस्त को देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या इस दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में कारोबार होगा या छुट्टी रहेगी।

बीएसई और एनएसई के ऑफिशियल ट्रेडिंग हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन शेयर बाजार पूरी तरह खुला रहेगा। इस दिन इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स और करंसी सेगमेंट में सामान्य दिनों की तरह ही ट्रेडिंग होगी।

MCX और कमोडिटी मार्केट का क्या है शेड्यूल?

इक्विटी मार्केट के साथ-साथ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) पर भी रक्षाबंधन के दिन काम-काज सामान्य रूप से जारी रहेगा। कमोडिटी एक्सचेंज में सुबह और शाम दोनों सेशंस में रेगुलर ट्रेडिंग होगी। चूंकि यह ट्रेडिंग या रेगुलर सेटलमेंट हॉलिडे नहीं है, इसलिए रोलिंग सेटलमेंट साइकिल पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा।

बैंकों की छुट्टी का पड़ सकता है असर

हालांकि शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट खुले रहेंगे, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हॉलिडे कैलेंडर के अनुसार 28 अगस्त को कई राज्यों और शहरों (जैसे- लखनऊ, कानपुर, अहमदाबाद, जयपुर आदि) में बैंक बंद रहेंगे।

ऐसे में अगर आप इस दिन ट्रेडिंग के लिए बैंक ट्रांसफर या फंड्स ऐड/विड्रॉ करने की योजना बना रहे हैं, तो अपने स्थानीय बैंक की वर्किंग स्थिति और डिजिटल बैंकिंग ऑप्शन्स की जांच पहले से कर लें।

2026 में शेयर बाजार की अगली छुट्टियां कब हैं?

रक्षाबंधन के बाद अब शेयर बाजार में अगली आधिकारिक छुट्टी सितंबर महीने में होगी। आने वाले महीनों की प्रमुख हॉलिडे लिस्ट इस प्रकार है:

  • 14 सितंबर: गणेश चतुर्थी
  • 2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती
  • 20 अक्टूबर: दशहरा
  • 10 नवंबर: दिवाली (बलिप्रतिपदा)
  • 24 नवंबर: प्रकाश गुरुपर्व (श्री गुरु नानक देव जयंती)
  • 25 दिसंबर: क्रिसमस

(नोट: दीपावली के दिन 8 नवंबर को शेयर बाजार में एक घंटे के लिए पारंपरिक ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ सेशन का आयोजन किया जाएगा।)

रक्षाबंधन के दिन यानी 28 अगस्त को शेयर बाजार में किसी भी तरह की बंदी नहीं है। निवेशक सुबह 9:15 बजे से शाम 3:30 बजे तक अपनी ट्रेडिंग सामान्य रूप से कर सकते हैं। हालांकि, बैंक हॉलिडे की वजह से फंड ट्रांसफर से जुड़े काम पहले से प्लान कर लें।

West Bengal SIR: ‘क्या हम नए चुनाव कराने का निर्देश दे सकते हैं?’; बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या न्यायपालिका नए चुनाव का आदेश दे सकती है, जब ऐसे दावे किए जा रहे हों कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर (victory margin) से ज्यादा थी। न्यूज 18 के मुताबिक, चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सदस्य की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर विचार-विमर्श किया।

TMC याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए, सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने 31 विधानसभा क्षेत्रों का ब्योरा पेश किया। इन क्षेत्रों में जीतने वाले BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर, SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए कुल वोटरों की संख्या से कम था। एक विधानसभा क्षेत्र (AC-145) में हार का अंतर सिर्फ 401 वोट था। जबकि 8,785 वोटर हटाए गए थे। एक और सीट पर SIR के तहत बहुत ज्यादा वोटर हटाए जाने के बावजूद उम्मीदवार 316 वोटों से हार गया।

नतीजों पर असर

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इतने बड़े पैमाने पर वोटर हटाने से चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा। हजारों वैध नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। सार्वजनिक डेटा की कमी: TMC के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विधानसभा-वार अपील डेटा का हिसाब लगाना मुश्किल है क्योंकि भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने ये आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

इन दलीलों के जवाब में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, “आप इस पर याचिका दायर कर सकते हैं, लेकिन क्या कोर्ट इस तरह नए चुनाव का आदेश दे सकता है?” चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या प्रभावित उम्मीदवारों ने उन 31 विधानसभा क्षेत्रों में जीते हुए उम्मीदवारों को चुनौती देने के लिए औपचारिक चुनाव याचिकाएं दायर की थीं। इस पर वकील ने जवाब दिया कि कुछ सीटों पर चुनाव याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन सभी पर नहीं। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस बात पर जोर दिया कि यह पता लगाना जरूरी है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद कितने लोगों ने असल में अपील दायर की थी।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि अगर नाम हटाए जाने वाले किसी वोटर ने अपील दायर किए बिना इसे स्वीकार कर लिया, तो उनकी ओर से नतीजों को चुनौती देना केवल सैद्धांतिक बात रह जाती है। हालांकि, अगर 100 लोगों के नाम हटाए गए, जीत का अंतर 50 था। हटाए गए वोटरों में से 60 या 70 ने अपील दायर की जो अभी भी लंबित है, तो नाम हटाने की इस प्रक्रिया को चुनौती देना एक अहम और बहुत जरूरी मामला बन जाता है।

लंबित अपील का आंकड़ा मांगा

इससे एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ECI) को पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली विभिन्न अपील पर अधिकारियों द्वारा निपटाए गए मामलों और लंबित मामलों का आंकड़ा पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इन मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना जरूरी है। पीठ ने निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा कि लंबित अपील के निपटारे की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि लोगों को यह जानकारी नहीं मिल रही है कि न्यायाधिकरणों के समक्ष कितनी अपील लंबित हैं या कितनी अपील का निपटारा हो चुका है, क्योंकि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। बनर्जी ने कहा कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले को केवल 31 विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखेगा।

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24 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने अपीलीय न्यायाधिकरणों को निर्देश दिया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित करने वाले मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।

कोलंबो टेस्ट में फॉलोऑन के बाद श्रीलंका ने खुद को पारी की हार से बचाया

INDvsSL कोलंबो टेस्ट में फॉलोऑन ना बचाने के बाद श्रीलंका ने मैच को अंतिम दिन तक खींच लिया है। श्रीलंका ने आज सुबह 290 रनों पर सिमट जाने के बाद फॉलोऑन बचाने के लिए 14 रन पीछे रह गई। इसके बाद चौथे दिन स्टंप्स तक 6 विकेट खोकर 229 रन बना गई। श्रीलंका कुल 213 रनों से पीछे थी लेकिन उसने सुनिश्चित किया कि घरेलू दर्शकों के सामने पारी की हार ना मिले।

पहली पारी में 290 रन पर सिमटने वाली श्रीलंका के लिए स्टंप तक सोनल दिनुशा सात रन और केशारा नुवांथा तीन रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे।भारतीय गेंदबाजों में मानव सुथार ने दो जबकि प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज, सारांश जैन और रविंद्र जडेजा ने एक एक विकेट झटका।

श्रीलंका की दूसरी पारी की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। उदारा एक गैरजिम्मेदार शॉट खेलकर जल्द रवाना हो गए। मिशारा भी 32 रन पर आउट हो गए। इसके बाद पसिंदू और कमिंडू ने श्रीलंकाई पारी को संभाला अंत में फॉर्म में आए कमिंडू की विकेट प्रसिद्ध कृष्णा ने चटकाया और 115 रनों की साझेदारी पर विराम लगाया।

चायकाल तक श्रीलंका 190 रनों पर 3 विकेट खोकर बड़े स्कोर की ओर बढ़ रही थी लेकिन 9 रनों के भीतर 3 विकेटों से भारत को जीत की सुगंध आने लग गई। अपना दूसरा ही टेस्ट खेल रहे पसिंदु सूर्यबंदारा पहली पारी की तरह दूसरी पारी में भी शतक के पास पहुंचकर आउट हो गए। 82 रन बनाने वाले पसिंदू इस बार 92 रनों पर स्टंप्स आउट हुए। 

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन पर्व कब है और इसका शुभ मुहूर्त कब है? महंत रोहित शास्त्री से जानें किस समय राखी बांधने से बचें

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सुरक्षा के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं। भाई अपनी बहनों का ध्यान रखने और उनकी सुरक्षा करने का वचन देते हैं। हिंदू धर्म में इस पर्व को काफी उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं स्टेट अवॉर्डी महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने बताया कि रक्षाबंधन का पावन पर्व इस वर्ष 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

कब से लग रही सावन पूर्णिमा तिथि

महंत रोहित शास्त्री के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त, गुरुवार को सुबह 09:09 बजे प्रारंभ होकर 28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 09:49 बजे समाप्त होगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय-व्यापिनी पूर्णिमा है, इसलिए रक्षाबंधन का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा।

राहुकाल में नहीं बाधें रखी

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि राहुकाल सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। अतः इस इस बहनों का भाई का राखी बांधना अशुभ होगा। इस अवधि को छोड़कर पूरे दिन राखी बांध सकते हैं।

रक्षा बंधन में नहीं होगा चंद्रग्रहण का भेद

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस दिन चंद्रग्रहण अवश्य है, लेकिन यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों के लिए इससे संबंधित किसी प्रकार की विशेष धार्मिक या सामाजिक नियम करने की आवश्यकता नहीं है। मंदिरों के कपाट बंद करने अथवा पूजा-पाठ रोकने जैसी कोई आवश्यकता नहीं होगी। जब ग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देगा, तो सूतक आदि को लेकर अनावश्यक भय या तनाव पालना उचित नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि गर्भवती महिलाओं को घबराने अथवा किसी प्रकार के नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं है। गर्भवती महिलाएं अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रखें और बेवजह की पाबंदियों से स्वयं को परेशान न करें।

उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्थाओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन आस्था के साथ विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी आवश्यक है। किसी भी प्राकृतिक खगोलीय घटना को लेकर डर, भ्रम या अफवाह फैलाने के बजाय सही जानकारी को समझना और दूसरों तक पहुंचाना बेहतर है। अतः इस दिन लोग सामान्य रूप से अपना कार्य करें। गर्भवती महिलाएं निश्चिंत रहें, मंदिरों के कपाट सामान्य रूप से खुले रहें और चंद्रग्रहण को लेकर किसी प्रकार का अनावश्यक भय या भ्रम न रखा जाए।

पूरे दिन मना सकते हैं रक्षा बंधन का पर्व

महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि 28 अगस्त को सूर्योदय व्यापिनी तिथि पूरे दिन है, इसलिए रक्षा बंधन का पर्व पूरे दिन मनाया जा सकेगा। पूर्णिमा तिथि के सुबह 9.49 बजे तक ही रहने का कोई प्रभाव नहीं होगा।

पूर्णिमा व्रत को लेकर भी दूर किया भ्रम

श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं स्टेट अवॉर्डी महंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य ने सावन पूर्णिमा के व्रत को लेकर भी भ्रम दूर किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग पूर्णिमा तिथि पर रात के समय पूजा करते हैं वे 27 अगस्त को व्रत करेंगे, जबकि दिन में पूर्णिमा व्रत की पूजा करने वाले श्रद्धालु 28 अगस्त 2026 को उपवास करेंगे।

राखी बांधने की पारंपरिक विधि

  • बहन सर्वप्रथम भाई को तिलक लगाए, आरती करें और अक्षत अर्पित करें।
  • इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधे और उसका पूजन करे।
  • भाई को मिठाई खिलाएं।
  • इसके पश्चात भाई बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करें।
  • भाई अपनी बहन को उपहार भेंट करें।
  • यह संपूर्ण प्रक्रिया व्रत अथवा उपवास रखकर संपन्न करना श्रेष्ठ माना गया है।

अगर पास में न हो भाई, तो क्या करें?

यदि भाई-बहन एक स्थान पर उपस्थित न हो सकें, तो बहन भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को राखी बांधकर पूजा करें और भाई की मंगलकामना करें। भाई भी राखी को भगवान से स्पर्श कर रक्षा का संकल्प ले सकता है। श्रद्धापूर्वक किया गया यह प्रतीकात्मक राखी बंधन भी धार्मिक दृष्टि से फलदायी माना जाता है।

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क्या होती है फ्लैश फ्लड? क्यों पहाड़ों से अचानक आता है बर्बादी का सैलाब और नेपाल प्रलय से भारत क्यों है अलर्ट पर

क्या होती है फ्लैश फ्लड? क्यों पहाड़ों से अचानक आता है बर्बादी का सैलाब और नेपाल प्रलय से भारत क्यों है अलर्ट पर

What is Flash Flood: पहाड़ों पर जब मौसम बदलता है, तो तबाही का मंज़र आने में कुछ मिनट भी नहीं लगते। हाल ही में नेपाल में भूस्खलन और उफनती नदियों ने जिस तरह से तबाही मचाई है, उसने एक बार फिर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को दहला दिया है। नेपाल में आई इस प्रलय के बाद भारत के सीमावर्ती राज्यों— विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल—में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

 

इस पूरी तबाही के पीछे सबसे बड़ा कारण 'फ्लैश फ्लड' (Flash Flood) यानी अचानक आने वाली बाढ़ है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह फ्लैश फ्लड क्या होती है, पहाड़ों पर यह इतनी खौफनाक क्यों हो जाती है और नेपाल के संकट से भारत पर क्या खतरा मंडरा रहा है। ALSO READ: नेपाल में बाढ़ का सैलाब, 5 जिलों में हाई अलर्ट, 105 भारतीय पर्यटक लापता, हाई-रिस्क एडवाइजरी जारी

क्या होती है फ्लैश फ्लड (Flash Flood)?

फ्लैश फ्लड का सीधा अर्थ है—अत्यंत कम समय में आने वाली भीषण बाढ़। सामान्य बाढ़ में नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घंटों या दिनों में बढ़ता है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का समय मिल जाता है। लेकिन फ्लैश फ्लड में:

पहाड़ों से अचानक क्यों आता है बर्बादी का सैलाब?

मैदानी इलाकों की तुलना में पहाड़ों पर फ्लैश फ्लड कहीं अधिक विनाशकारी होती है। इसके पीछे मुख्य भौगोलिक और प्राकृतिक कारण निम्नलिखित हैं:

  • तीव्र ढलान (Steep Slopes): पहाड़ों की ढलान बहुत तेज होती है। जब बारिश का पानी नीचे गिरता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण उसकी गति और शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।
  • भूस्खलन और प्राकृतिक बांध (Landslides & Debris Damming): मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ों पर बड़े-बड़े चट्टान और मिट्टी खिसककर नदियों या संकरे नालों का रास्ता रोक लेते हैं। इससे एक अस्थायी 'प्राकृतिक बांध' बन जाता है। जब पानी का दबाव बढ़ता है, तो यह बांध अचानक टूट जाता है और करोड़ों लीटर पानी, मलबा व पत्थरों के साथ नीचे की ओर तबाही बनकर दौड़ पड़ता है।
  • संकरे नदी-घाटी रास्ते : पहाड़ों में नदियों के बहने के रास्ते संकरे होते हैं। जब अत्यधिक पानी आता है, तो नदियां अपनी सीमाओं को तोड़कर विकराल रूप ले लेती हैं।
  • अनियंत्रित निर्माण व जलवायु परिवर्तन : पहाड़ों पर निर्माण कार्य, जंगलों की कटाई और ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम का मिजाज अप्रत्याशित हो गया है, जिससे ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।

नेपाल प्रलय से भारत में क्यों बजा खतरे का सायरन?

नेपाल में हुई भीषण बारिश और फ्लैश फ्लड का सीधा असर भारत पर पड़ता है, क्योंकि भौगोलिक रूप से दोनों देश एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं:

  • साझा नदियां (Cross-Border Rivers) : नेपाल से बहने वाली प्रमुख नदियां—कोसी (Kosi), गंडक (Gandak), बागमती (Bagmati) और कर्णाली (घाघरा)—सीधे भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती हैं।
  • पानी छोड़ने का दबाव : जब नेपाल के बैराजों और बांधों में पानी क्षमता से ऊपर चला जाता है, तो वहां से लाखों क्यूसेक पानी भारत की ओर छोड़ना पड़ता है।
  • 'बिहार का शोक' कोसी नदी : कोसी नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। नेपाल में जब भी फ्लैश फ्लड आती है, तो उत्तर बिहार के दर्जनों जिलों (जैसे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी) में रातों-रात बाढ़ का पानी घुस जाता है।

 

इसी वजह से नेपाल में आए संकट के बाद भारतीय गृह मंत्रालय, एनडीआरएफ (NDRF) और राज्य आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि निचले इलाकों को समय रहते खाली कराया जा सके।

फ्लैश फ्लड से बचाव के लिए क्या जरूरी है?

  • आधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम : पहाड़ी क्षेत्रों और सीमावर्ती नदियों पर रीयल-टाइम वेदर और वाटर-लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना।
  • पहाड़ों पर अनियंत्रित निर्माण पर रोक : संवेदनशील इको-जोन में बड़े पैमाने पर खोदाई और वनों की कटाई को नियंत्रित करना।
  • नदी तटबंधों की मजबूती : मानसून से पहले भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बैराजों और तटबंधों (Embankments) की मरम्मत और निगरानी सुनिश्चित करना।

 

फ्लैश फ्लड प्रकृति की वह चेतावनी है जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित होता है। नेपाल में आई तबाही यह सबक देती है कि पहाड़ों पर बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन और सटीक आपदा प्रबंधन व्यवस्था का होना कितना अनिवार्य है।

 

अचानक आई बाढ़ ने नेपाल में मचाया कहर:हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट डूबा, 42 किमी सड़क बही; 11 फोटो-वीडियो में देखें नेपाल में सैलाब

नेपाल में बुधवार को तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी। टिमुरे से त्रिशूली बाजार और बेत्रावती तक बाढ़ के पानी और मलबे ने घर, सड़कें और पुल तबाह कर दिए, जबकि एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी बह गया। कई इलाकों में बाढ़ का मंजर ऐसा था कि हेलिपैड तक बह गया और रेस्क्यू हेलिकॉप्टर को बिना उतरे लौटना पड़ा। 11 फोटो-वीडियो में देखिए, नेपाल में बाढ़ से तबाही नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास 216 मेगावाट क्षमता वाला अपर त्रिशुली-1 जल विद्युत परियोजना का बांध पानी के तेज बहाव में टूट गया। बांध टूटने के बाद त्रिशूली बेसिन पर तेजी से पानी का बहाव आया। बाढ़ में फंसे एक युवक ने अपनी टीशर्ट लहराकर इशारा किया तो सेना के हेलिकॉप्टर ने उसका रेस्क्यू किया। बाढ़ के तेज बहाव में लोगों के घरों का सामान बह गया। कई लोग उसे निकालने के लिए नदी में कूद गए। नेपाल सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ से तबाह हुए इलाकों का हवाई सर्वे किया। इसमें कई इलाकों में नुकसान दिखाई दिया। ————– ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में बाढ़ से तबाही, 8 मौतें, 384 लापता:इनमें 105 भारतीय, तिब्बत में ग्लेशियर झील फटने की आशंका; बिहार के 8 जिलों में अलर्ट तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके में कई घरों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ की चपेट में रसुवा का एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी आ गया और वह बह गया। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक, अब तक 8 लोगों की मौत की खबर है। बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक, 384 लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 291 विदेशी पर्यटक हैं जिसमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…

UP Expressway Projects: यूपी में ₹24,000 करोड़ का मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट! दो नए एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी, इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स पर भी बड़ा दांव

UP Expressway Projects: उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 24,000 करोड़ रुपये से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक निवेश से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें दो बड़े एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट सुल्तानपुर में मैन्युफैक्चरिंग-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर और राज्य के अलग-अलग जिलों में 11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। योगी सरकार का फोकस अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। नए फैसलों के जरिए उभरते औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने और प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़े निवेश को आकर्षित करने की तैयारी है।

‘गंगा एक्सप्रेसवे’ पहुंचेगा हरिद्वार, 10,761 करोड़ होंगे खर्च

कैबिनेट ने 10,761 करोड़ रुपये की लागत से गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान होगा। इस परियोजना का पूरा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। इसमें केंद्र की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है।

इस एक्सप्रेसवे से बिजनौर और हरिद्वार के बीच कनेक्टिविटी काफी बेहतर होने की उम्मीद है। फिलहाल बिजनौर से हरिद्वार जाने के लिए मुख्य रूप से NH-34 यानी मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार हाईवे पर निर्भरता है। नया एक्सप्रेसवे बनने के बाद बिजनौर की लखनऊ से कनेक्टिविटी भी गंगा एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए और मजबूत होगी।

प्रयागराज से हरिद्वार तक बनेगा तेज कॉरिडोर

गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार केवल सड़क परियोजना नहीं। बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हरिद्वार जुड़ने के बाद एक्सप्रेसवे नेटवर्क प्रयागराज और हरिद्वार जैसे गंगा तट पर बसे दो प्रमुख कुंभ शहरों को एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ देगा।

यूपी सरकार को उम्मीद है कि इससे धार्मिक पर्यटन, व्यापार, निवेश और अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसका फायदा बिजनौर, हरिद्वार और आसपास के इलाकों को मिलने की उम्मीद है। अब इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जाएगी।

झांसी लिंक एक्सप्रेसवे पर 7,968 करोड़

योगी कैबिनेट ने 7,968.30 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी BIDA क्षेत्र और झांसी के आसपास के डिफेंस कॉरिडोर को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। इस परियोजना का पूरा खर्च भी उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी। केंद्र से किसी वित्तीय भागीदारी का प्रस्ताव नहीं है। ॉ

सरकार का मानना है कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद बुंदेलखंड के उभरते औद्योगिक क्षेत्रों से उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों और देश के अन्य क्षेत्रों तक सड़क संपर्क तेज होगा। निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने पर अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

सुल्तानपुर में 272 करोड़ का इंडस्ट्रियल-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर

कैबिनेट ने सुल्तानपुर में 272.25 करोड़ रुपये के निवेश से इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर यानी IMLC के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को भी मंजूरी दी है। यह क्लस्टर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के नजदीक विकसित किया जाएगा। इससे यहां आने वाली औद्योगिक इकाइयों को पहले से मौजूद तेज सड़क नेटवर्क का सीधा फायदा मिलेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम का खर्च राज्य सरकार उठाएगी और निर्माण एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि यह क्लस्टर मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े निवेश को आकर्षित करेगा तथा सुल्तानपुर और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार पैदा करेगा।

11 बड़े प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी

इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ कैबिनेट ने 11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए भी प्रोत्साहन को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में कुल प्रस्तावित निवेश 5,500 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से आठ परियोजनाओं के लिए करीब 2,901.97 करोड़ रुपये के निवेश पर उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2022 के तहत लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं का विस्तार गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव जैसे जिलों तक है।

इनमें प्रमुख निवेश इस प्रकार हैं:-

  • सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लेक्सिफिल्म्स, गौतम बुद्ध नगर- 605.37 करोड़ रुपये
  • शाल्विस स्पेशियलिटीज, हमीरपुर- 297.30 करोड़ रुपये
  • साउंड कास्टिंग्स, हाथरस – 225 करोड़ रुपये
  • वृंदावन बॉटलर्स, बाराबंकी – 436.12 करोड़ रुपये
  • जुआरी एनविएन बायोएनर्जी, लखीमपुर खीरी- 294.72 करोड़ रुपये
  • पसवारा पेपर्स, हाथरस- 315 करोड़ रुपये
  • CRD फूड्स एंड बेवरेजेज, मथुरा- 363.94 करोड़ रुपये
  • माउंट एवरेस्ट ब्रेवरीज, उन्नाव- 363.52 करोड़ रुपये

(नोट- इन परियोजनाओं को पात्रता के आधार पर नीति के तहत नेट SGST और कैपिटल सब्सिडी समेत विभिन्न प्रोत्साहन मिल सकेंगे।)

तीन और प्रोजेक्ट्स में 2,606 करोड़ का निवेश

कैबिनेट ने तीन और परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट को मंजूरी दी है। इनका कुल प्रस्तावित निवेश 2,606.04 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में लगाई जाएंगी।

उन्नाव में एल्युमिनियम कैन फैक्ट्री

Canpack India उन्नाव में करीब 1,573.62 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी एल्युमिनियम बेवरेज कैन बनाने की इकाई स्थापित करेगी। यह प्लांट करीब 26 हेक्टेयर क्षेत्र में UPEIDA द्वारा विकसित IMLC इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्षेत्र में लगाया जाएगा। इसकी अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता 130 करोड़ यूनिट होगी।

बिजनौर में फ्रेंच फ्राइज प्लांट

इसके अलावा Agristo Masa बिजनौर में 794.27 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यह कंपनी मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स कारोबार का विस्तार करने के साथ फ्रेंच फ्राइज बनाने की यूनिट स्थापित करेगी। प्रस्तावित प्लांट की अधिकतम स्थापित क्षमता हर साल 75,000 टन होगी। इसके मुकाबले कंपनी की मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स उत्पादन क्षमता करीब 7,332 टन सालाना बताई गई है।

कानपुर देहात में प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का होगा उत्पादन

एक बयान के मुताबिक, Supreme Industries कानपुर देहात में 238.15 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यहां वैल्यू-एडेड प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन उत्पाद बनाए जाएंगे। कंपनी की स्थापना 1942 में हुई थी। यह भारत की प्रमुख प्लास्टिक प्रोसेसिंग कंपनियों में शामिल है।

एक्सप्रेसवे और उद्योग को एक साथ जोड़ने की रणनीति

यूपी सरकार के इन फैसलों से साफ संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश अब एक्सप्रेसवे नेटवर्क को सीधे औद्योगिक विकास से जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को बुंदेलखंड के औद्योगिक और डिफेंस कॉरिडोर से जोड़ा जा रहा है। जबकि सुल्तानपुर का IMLC पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का फायदा उठाएगा। वहीं, गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरिद्वार के बीच आर्थिक संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि कैबिनेट के फैसले एक्सप्रेसवे विस्तार और औद्योगिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश को दिखाते हैं। सरकार का लक्ष्य बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए निवेश, व्यापार, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देना है।

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उन्होंने कहा कि 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के इन प्रस्तावों को उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक नक्शे में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि इसका असर सिर्फ लखनऊ, नोएडा या दूसरे बड़े औद्योगिक केंद्रों तक सीमित न रहकर बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के कई जिलों तक पहुंचने की उम्मीद है।

चक दे गर्ल्स ने उठाई महिला हॉकी लीग को बचाने के लिए आवाज

हॉकी विश्वकप में अपना सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के करीब खड़ी भारतीय महिला हॉकी टीम ने गुहार लगाई है कि महिला हॉकी लीग को बंद ना किया जाए और उसे चलते रहने दिया जाए। गौरतलब है कि ऐसी खबरें आ रही थी कि यह लीग व्यवसायिक कारणों के चलते बंद की जा सकती है।

गौरतलब है कि भारतीय महिला हॉकी टीम 1974 के बाद विश्वकप के दूसरे दौर में प्रवेश कर चुकी है। हालांकि खिताब जीतने की आशा धूमिल हो चुकी हैं लेकिन टीम ने बड़ी टीमों को बराबरी पर रोका है। पहले मैच में चीन के खिलाफ 2-2 की बराबरी और फिर ऑस्ट्रेलिया से 0-0 की बराबरी। टीम नीदरलैंड्स से भी सिर्फ 2 गोल से हारी।

वहीं टीम ने पहली बार दक्षिण अफ्रीका को ना केवल हराया बल्कि विश्वकप की सबसे बड़ी जीत अर्जित की। यह सब भारत ने तब किया जब दल में 11 युवा खिलाड़ी थे और अपना पहला विश्वकप खेल रहे थे।

मिडफील्डर नेहा ने कहा  “मुझे लगता है कि हमने भारत में लड़कियों को हॉकी स्टिक पकड़ने के लिए प्रेरित करने की पूरी कोशिश की है। लोग अपने बच्चों को अलग-अलग खेल खेलना पसंद करते हैं, लेकिन इससे उन्हें उम्मीद मिलनी चाहिए।”

“पिछले दो सालों में, महिलाओं के लिए HIL से हमें बहुत फायदा हुआ है। जूनियर और सीनियर नेशनल्स में इस लेवल का कॉम्पिटिशन नहीं होता है। महिलाओं के HIL ने हमें बलजीत, साक्षी और रुतुजा जैसे खिलाड़ी दिए हैं, जो इस वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा हैं। आने वाले खिलाड़ियों के लिए भी, हमें इस लीग की ज़रूरत है। इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए।”

नवनीत कौर ने कहा “हम पिछले दो साल से HIL खेल रहे हैं और उससे हमें कॉन्फिडेंस मिला है। हमने इंटरनेशनल हॉकी के कुछ सबसे बड़े नामों के साथ खेला है और उनके साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने के बाद, डर और झिझक खत्म हो गई। इससे हमें सेल्फ-बिलीफ मिला। हम अक्सर बात करते हैं कि वे हमारी तरह हैं और हम उन्हें हरा सकते हैं क्योंकि हम उनके साथ खेले हैं।” नवनीत ने टीमों और कॉर्पोरेट हाउस से भी लीग को सपोर्ट करने की अपील की, ऐसे समय में जब इसका भविष्य खतरे में है। हमने सुना है कि कुछ टीमें विमेंस HIL से हट रही हैं, लेकिन ऐसे समय में जब हमारा परफॉर्मेंस ग्राफ ऊपर जा रहा है, हम उनसे रिक्वेस्ट करना चाहते हैं कि वे हमें सपोर्ट करें। यह विमेंस हॉकी और आने वाले प्लेयर्स के लिए एक बड़ा झटका होगा।”

यशस्वी जायसवाल को सस्ते में छोड़ने पर संजय मांजरेकर ने ट्वीट कर दिखाई नाराजगी

भारत के पूर्व बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने युवा खिलाड़ियों वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल से जुड़े अनुशासनहीनता के मामलों से निपटने के तरीके को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) की आलोचना की है।उन्होंने कहा कि यह दोनों संस्थाएं नरम रवैया अपना रही हैं जिससे खिलाड़ियों को अनुशासनहीनता के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।

मांजरेकर ने एक्स पर लिखा, ‘‘आईसीसी और बीसीसीआई, वैभव ने हाल ही में भारत ​​ए के लिए और अब जायसवाल ने (अनुशासनहीनता दिखाई है)। अगर आप उनका इस तरह के व्यवहार में बचाव करते रहेंगे तो आप उन्हें ऐसा व्यवहार दोहराने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं। यह खेल के लिए अच्छा नहीं है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उनके भविष्य के लिए भी अच्छा नहीं है।’’

कोलंबो में दूसरे टेस्ट के पहले दिन मैदान पर हुई कहासुनी के लिए जायसवाल और श्रीलंका के तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो पर उनकी मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया। दोनों को एक-एक डिमेरिट अंक भी दिया गया।भारत की पहली पारी के 17वें ओवर में फर्नांडो ने जायसवाल को आउट किया जिसके बाद दोनों में कहासुनी हो गई थी।जून में 15 वर्षीय बल्लेबाज सूर्यवंशी भारत ए की तरफ से खेलते हुए श्रीलंका ए के एक खिलाड़ी के साथ तीखी बहस में उलझ गए थे और हाथापाई की नौबत तक आ गई थी।

हालांकि इससे पहले भारत के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने भी कहा था कि यशस्वी जायसवाल को अशिता फर्नाडो के इतने करीब नहीं जाना चाहिए। सितांशु कोटक ने कहा, “मुझे लगता है कि गेंदबाज़ ने कुछ कहा और यह जोश-जोश में हुआ। ज़ाहिर है, यशस्वी को उनके इतना करीब नहीं जाना चाहिए था, लेकिन जोश-जोश में ऐसा हो जाता है।”

श्रीलंका के तेज़ गेंदबाज़ी कोच रयान वैन नीकेर्क की राय भी कुछ ऐसी ही थी। उन्हें लगा कि यह कड़े मुकाबले वाले दिन का हिस्सा था और उन्होंने इसे “भावनाओं के उबाल” का नतीजा बताया। “देखिए, टेस्ट क्रिकेट मुश्किल होता है, है ना? जब आप भारत जैसी टीम के खिलाफ खेल रहे हों, तो आप बस पीछे हटकर गेंदबाजी नहीं कर सकते। मुझे लगता है कि हमारी तरफ से, हमें हर समय चुनौती पेश करनी होगी और कुछ न कुछ करने की कोशिश करनी होगी।”

उन्होंने आगे कहा,”इसलिए, मेरे नजरिए से, मैंने गेंदबाजों से आगे बढ़कर कुछ करने को कहा है। शायद तीखी बातें भावनाओं के उबाल का नतीजा हैं। मैं इसे मैच रेफरी पर छोड़ता हूं कि वे इसे कैसे देखते हैं।”