26 अगस्त की सुबह 9 बजे। तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बाढ़ आ गई। कुछ ही मिनटों में सड़कें, इमारतें, गांव बह गए। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत-अमेरिका समेत 26 देशों के नागरिक शामिल हैं। रात 9 बजे तक 95 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, तबाही की वजह ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ यानी GLOF है। करीब एक साल पहले, जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में तिब्बत की एक ग्लेशियर झील तापमान बढ़ने से फट गई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी। ये एक पैटर्न-सा बनता जा रहा है। GLOF की जद में भारत के भी कई इलाके हैं। 5 गुना बढ़ गईं ग्लेशियर झीलें, खतरे में भारत के 6 प्रदेश IIT रोपड़ और सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साझा स्टडी की। इसी महीने जारी रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 1990 में सिर्फ 107 ग्लेशियर झीलें थीं। 2024 तक यह संख्या बढ़कर 669 हो गई, यानी 525% की बढ़ोत्तरी। 669 में से 88 झीलों पर नेपाल जैसी ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ का खतरा मंडरा रहा है। 9 झीलों को ‘बेहद ज्यादा खतरनाक’, 18 को ‘ज्यादा खतरनाक’ और 26 को ‘मध्यम खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है। रिसर्चर्स ने दो झीलों पर खास मॉडलिंग की- ब्यास बेसिन की हिमसू झील और सतलुज बेसिन की एक बेनाम झील। अगर ब्यास झील का नेचुरल डैम टूट जाए, तो 1,385 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड की बाढ़ आएगी। यानी हर सेकेंड करीब 14 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे हर सेकेंड ओलंपिक साइज के 6 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं। इसी तरह सतलुज झील से 3,507 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पानी का सैलाब आएगा। यानी हर सेकेंड करीब 35 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे डैम और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत 588 इमारतों को खतरा है। हिमालय का बढ़ता तामपान इस खतरे को और बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में आई IIT खड़गपुर की एक स्टडी बताती है कि ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान पिछले 20 सालों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इससे ग्लेशियर पिघलने और नदियों के बहाव में बड़ा बदलाव आ सकता है। ग्लेशियर झीलें अचानक कैसे फट जाती हैं? पहाड़ों पर ऊंचाई पर मौजूद ग्लेशियर जब पिघलते हैं, तो उनका पानी आसपास के निचले इलाके या किसी चट्टानी दीवार के सहारे इकट्ठा होने लगता है। ये धीरे-धीरे एक झील का रूप ले लेता है, जिसे ‘ग्लेशियल लेक’ कहते हैं। ये झील ग्लेशियर के सामने या उसकी निचली सतह पर भी बन सकती है। इन झीलों को बर्फ, पहाड़ का मलबा या चट्टान की एक नैचुरल दीवार यानी ‘डैम’ रोककर रखती है। जब ये दीवार किसी वजह से अचानक टूट जाती है, तो झील में जमा लाखों-करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी बहुत तेज रफ्तार से बेकाबू होकर नीचे की तरफ बहता है। इसी को ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, GLOF या ग्लेशियर की झील फटना कहते हैं। GLOF में पानी के बहाव की रफ्तार आम बारिश से आई बाढ़ के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है, जिससे यह रास्ते में आने वाली हर चीज को बहुत तेजी से काटती-छांटती और बहाती चली जाती है। ग्लेशियर झील 3 वजहों से फट सकती हैं… 1. ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर का तेजी से पिघलना 2. बर्फ या चट्टान का झील में गिरना 3. भारी बारिश से झील का ओवरफ्लो होना GLOF की तबाही कैसे रोकी जा सकती है? नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDMA और नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के मुताबिक, क्या नेपाल की बाढ़ से भारत में फौरन कोई खतरा? इसलिए भोटेकोशी में अधिक पानी आने पर उसका पानी सुनकोशी और फिर कोसी नदी तंत्र में शामिल हो सकता है। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जिले काफी प्रभावित हो सकते हैं। 2008 में नेपाल के कुसहा में कोसी नदी का तटबंध टूट गया था। इसके बाद कोसी नदी अपने नए/प्राकृतिक रास्ते को छोड़कर सैकड़ों साल पुराने पूर्व की ओर वाले रास्ते पर बहने लगी। इससे अचानक नदी का रुख घनी आबादी और नए इलाकों की तरफ मुड़ गया, जिससे बिहार के 34 लाख से अधिक लोग बिना किसी पूर्व चेतावनी के भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए। हालांकि, इस बार रसुवा में लैंडस्लाइड, भूस्खलन या हिम झील टूटने से अचानक नदी में भारी मात्रा में पानी आ गया है। लेकिन नदी ने अपना रास्ता नहीं बदला है। वह अपने तय रास्ते पर बह रही है। इस कारण एक्सपर्ट तटबंध टूटने की संभावना व्यक्त नहीं कर रहे हैं। पानी के भारी दबाव और संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। बिहार के 8 जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया है। ये जिले पश्चिमी चंपारण (बगहा), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हैं। ———— ये खबरें भी पढ़ें- नेपाल में बाढ़ से तबाही, सैकड़ों लापता, 95 मौतें:पावर प्लांट-पुल बहे; 133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे नेपाल की बाढ़ से गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ा:बैराज के 36 गेट खोले गए, मोतिहारी-गोपालगंज समेत बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट
भारत में चीनी की कमी को देखते हुए रिफाइनर करीब 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में बेच सकते हैं। यह चीनी पहले विदेश भेजी जानी थी। ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है।
यह स्टॉक करीब एक हफ्ते के भीतर घरेलू बाजार में आ सकता है। इतनी चीनी देश की करीब पांच दिन की कुल खपत के बराबर है। इससे हाल में तेजी से बढ़ी चीनी की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
इस साल चीनी की कमी क्यों हुई?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। लेकिन इस साल उत्पादन उम्मीद से कम रहने का अनुमान है। कई प्रमुख गन्ना उत्पादक इलाकों में बारिश सामान्य नहीं रही। फसलों में बीमारी का असर भी पड़ा है।
दूसरी तरफ अब देश में त्योहारी सीजन शुरू हो रहा है। अगस्त के आखिर से जनवरी तक चीनी की खपत आमतौर पर काफी बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर पैकेज्ड फूड तक में चीनी की मांग बढ़ती है। यानी इस समय बाजार में चीनी की जरूरत बढ़ रही है और सप्लाई पर दबाव है।
सरकार ने दो बड़े फैसले लिए
सरकार ने हाल में चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए दो कदम उठाए हैं। पहला, 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी गई है।
दूसरा, रिफाइनर्स को कुछ ऐसी रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में बेचने की इजाजत दी गई है, जिसे पहले एक्सपोर्ट के लिए रखा गया था। अब इसी फैसले के तहत करीब 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में आ सकती है।
चीनी के दाम में पहले ही आई नरमी
सरकार के कदम का असर कीमतों पर दिखने लगा है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनावरे के मुताबिक, देश में एक्स-मिल चीनी की औसत कीमत पिछले हफ्ते ₹67 प्रति किलो तक पहुंच गई थी।
अब कीमत घटकर करीब ₹54 से ₹55 प्रति किलो रह गई है। 20 अगस्त को ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की घोषणा के बाद बाजार में राहत देखने को मिली है। नाइकनावरे का कहना है कि सरकार के समय पर उठाए गए कदमों से कीमतों में और नरमी आ सकती है। इससे त्योहारी सीजन में ग्राहकों को राहत मिलेगी।
कितना इंपोर्ट हो सकता है?
सरकार ने भले ही 10 लाख टन ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है, लेकिन पूरा कोटा इस्तेमाल होने की संभावना कम है। Bloomberg ने पांच ट्रेडर्स, एनालिस्ट्स और मिलर्स से बातचीत के आधार पर अनुमान लगाया है कि अक्टूबर के अंत तक करीब 3 लाख से 6 लाख टन चीनी का इंपोर्ट हो सकता है।
घरेलू कीमतों में नरमी आने से मिलर्स और रिफाइनर्स के लिए ज्यादा चीनी इंपोर्ट करने का फायदा कम हो गया है। इसलिए पूरा 10 लाख टन कोटा इस्तेमाल होने की संभावना कम बताई जा रही है।
ब्राजील से चीनी आने तक मिलेगी राहत
जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार में एक्सपोर्ट वाली चीनी उतारने से फिलहाल राहत मिल सकती है। बाद में भारत को इंपोर्ट की जरूरत फिर भी पड़ेगी। इसका मकसद घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखना है, जब तक ब्राजील से चीनी की खेप भारत पहुंचना शुरू नहीं हो जाती।
भारत में रिफाइनर्स को Advance Authorisation के तहत कच्ची चीनी ड्यूटी फ्री इंपोर्ट करने की अनुमति भी है। हालांकि, प्रोसेसिंग के बाद इस चीनी को तय नियमों के तहत एक्सपोर्ट करना होता है।
Urban Company Share: BofA ने रेटिंग घटाई, शेयर में तीन दिन की तेजी पर भी ब्रेक लगा

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर तिब्बत के ग्यिरोंग में आई भयावह फ्लैश फ्लड को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने अपने ग्रुप को लेकर जानकारी दी। एक्स पर ट्वीट कर बताया गया कि उनके कैलाश यात्रा समूहों में से एक समूह बाढ़ की चपेट में आ गया।
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सद्गुरु ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब समूह के सदस्य वापस लौट रहे थे और इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे। उनके मुताबिक, बाढ़ के दौरान इमिग्रेशन कार्यालय की इमारत और आसपास का काफी हिस्सा पानी में डूब गया।
Sadhguru Jaggi Vasudev tweets, “A terrible and tragic flash flood has taken place at Gyirong in Tibet, China, and one of our Kailash groups was caught in it. While on their way back, they were at the immigration office when the flood occurred, and the building and much of the… pic.twitter.com/Y3A02KdGzs
— ANI (@ANI) August 26, 2026
उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद लोगों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है। उनकी टीम अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाके तक पहुंचने की कोशिश कर रही है और जोखिम के बावजूद राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग के लिए तैयार है।
सद्गुरु ने बताया कि उनके Sojourn में शामिल 21 समूहों में से 495 लोग सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। वहीं, 743 लोग इस समय तिब्बत में, 148 लोग नेपाल में और 77 लोग इमिग्रेशन सेंटर पर थे। इसके अलावा नेपाल के तिमुरे में उनके 3 स्वयंसेवक मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित स्थान तक पहुंचने तथा बचाव अभियान में सहयोग करने के लिए तैयार है।
A terrible and tragic flash flood has taken place at Gyirong in Tibet – China, and one of our Kailash groups was caught in it. While on their way back, they were at the immigration office when the flood occurred and the building and much of the town seems to have been flooded.… pic.twitter.com/CqOBxsPlWo
— Sadhguru (@SadhguruJV) August 26, 2026
भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित लोग +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस नंबर 9851289445 जारी किया है।
Nepal Flash Flood: नेपाल और चीन सीमा से सटे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल के रसुवा जिले में स्थित भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से सीमावर्ती गांव और बस्तियां पानी के तेज बहाव में बह गईं। इस आपदा में कई लोगों की जान जाने की खबर है जबकि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत की ओर जा रहे करीब 400 श्रद्धालु रसुवागढ़ी क्षेत्र में लापता या संपर्क से बाहर हो गए हैं। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश में जुट गया है।
93 नेपाली नागरिकों सहित 390 से अधिक यात्री फंसे
काठमांडू स्थित ‘टच कैलाश ट्रेवल्स एंड टूर्स’ के प्रबंध निदेशक बासु कुमार अधिकारी के मुताबिक बुधवार 26 अगस्त को कुल 390 यात्रियों को सीमा पार करना था। इनमें 93 नेपाली नागरिक भी शामिल थे। ये सभी श्रद्धालु अलग-अलग ट्रेवल एजेंसियों के माध्यम से यात्रा पर निकले थे। उन्होंने बताया कि दोपहर 3 बजे तक इनमें से कुछ ही लोगों से संपर्क हो पाया था जबकि अधिकांश श्रद्धालुओं के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
लापता यात्रियों में सम्राट टूर्स एंड ट्रेवल्स के 71, लीफ हॉलीडेज के 55, काठमांडू हॉलीडेज के 17, कैलाश जर्नी के 31, एक्सप्लोर वेकेशन के 7, ट्रेकर्स सोसाइटी के 92, रिचा टूर्स के 12, फिशटेल टूर एंड ट्रेवल्स के 27, हिमालयन ग्लेशियर के 62 और अल्पाइन इको ट्रेक के 16 ग्राहक शामिल हैं। ट्रेकिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष सागर पांडे ने बताया कि लापता श्रद्धालुओं से संपर्क साधने और उनकी स्थिति का आकलन करने के लिए लगातार कोशिश की जा रही है।
भोटे कोशी नदी में अचानक उछाल से 19 लोगों की मौत
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफ्ले ने एएफपी को बताया कि तिब्बत की ओर से अचानक आए पानी के तेज बहाव की वजह से सुबह करीब 9 बजे रसुवा जिले की भोटे कोशी नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इस बाढ़ ने टिमुरे और स्याप्रु बेसी इलाकों में जबरदस्त तबाही मचाई है। पुलिस प्रवक्ता के मुताबित अब तक 19 शव बरामद किए जा चुके हैं। बचाव और राहत के काम चल रहे हैं।
बाढ़ के असर के कारण पुलिस बल के कई जवान भी संपर्क से बाहर हो गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंत्रिपरिषद के साथ एक अहम बैठक की अध्यक्षता की और प्रभावित क्षेत्रों में खोज व बचाव अभियानों में तेजी लाने के निर्देश जारी किए।
भारत ने जताया दुख, हर संभव मदद का दिया आश्वासन
नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात कर इस त्रासदी में हुई जनहानि पर संवेदना प्रकट की। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री से बात की है और भारत इस कठिन घड़ी में नेपाल के भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत नेपाल को हर संभव मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है और दोनों देशों की टीमें राहत व बचाव कार्यों में आपस में गहरा समन्वय बना रही हैं।
सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी जल्द घट सकती है। सरकार इस बारे में विचार कर रही है। सरकार को ऐसा लग रहा है अनऑफिशियल चैनल से सोने और चांदी के इंपोर्ट की वजह ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी हो सकती है। हालांकि, अभी इस बारे में अंतिम फैसला होना बाकी है। तीन सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह जानकारी दी है।
इंपोर्ट ड्यूटी घटाने से सोने की स्मगलिंग में आ सकती है कमी
सरकार से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि सरकार में एक वर्ग इस पर विचार कर रहा है कि क्या इंपोर्ट ड्यूटी घटाने से सोने की स्मगलिंग पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और फॉर्मल चैनल से सोने के आयात को बढ़ावा मिलेगा। बुलियन ट्रेडर्स के प्रतिनिधियों और ज्वेलर्स पहले से इंपोर्ट ड्यूटी को 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी करने की मांग कर रहे हैं।
सरकार ने इस साल मई में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान किया था
सरकार ने 13 मई, 2026 को इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान किया था। सरकार का मानना था कि ड्यूटी बढ़ाने से सोने और चांदी के इंपोर्ट में कमी आएगी। इससे विदेश मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा। दरअसल, भारत सोने की अपनी जरूरत का ज्यादातर हिस्सा आयात से पूरी करता है। इस पर सरकार को डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।
इंडस्ट्री के प्रतिनिधि इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की कर रहे हैं मांग
इस बारे में कमेंट के लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला। इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि इंपोर्ट ड्यूटी घटाने से कानूनी तरीके से आयातित गोल्ड और स्मगलिंग से लाए गए गोल्ड की कॉस्ट के बीच का फर्क कम हो सकता है। इससे स्मगलिंग में दिलचस्पी कम हो सकती है।
भारत सालाना 700-800 टन सोने का आयात करता है
भारत दुनिया में सोने का सबसे ज्यादा इंपोर्ट करने वाले देशों में शामिल है। हर साल भारत करीब 700-800 टन सोने का इंपोर्ट करता है। भारत यूएई, थाइलैंड और सिंगापुर जैसे देशों को गोल्ड ज्वेलरी का एक्सपोर्ट भी करता है। इस साल इंपोर्ट ड्यूटी से पहले अप्रैल में गोल्ड का आयात साल दर साल आधार पर करीब 82 फीसदी बढ़ा था।
सोने के ज्यादा आयात से विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ता है दबाव
सोने का आयात बढ़ने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। साथ ही करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) में भी इजाफा होता है। इसका सीधा असर डॉलर के मुकाबले रुपये के एक्सचेंज रेट पर पड़ता है। इस साल मई के मध्य तक डॉलर के मुकाबले रुपया 6 फीसदी कमजोर हो चुका था।
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इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद देश में बढ़ी है सोने की स्मगलिंग
इस साल मई में सोने का आयात करीब 34 फीसदी बढ़ा। इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के पहले दो महीनों में इंपोर्ट पर देखने को मिला। जून और जुलाई में यह सिर्फ 5.5 फीसदी बढ़कर 6.13 अरब डॉलर रहा। लेकिन, इंडस्ट्री के एक सूत्र ने बताया कि ड्यूटी बढ़ने से सोने की स्मगलिंग काफी बढ़ी है।
Urban Company Share: टेक्नोलॉजी से जुड़े होम-सर्विस प्लेटफॉर्म Urban Company के शेयर में बुधवार को गिरावट आई। इसके साथ लगातार तीन दिन से चल रही तेजी भी थम गई। इसकी वजह है ग्लोबल ब्रोकरेज Bank of America यानी BofA की नई रिपोर्ट।
BofA ने Urban Company की रेटिंग ‘न्यूट्रल’ से घटाकर ‘अंडरपरफॉर्म’ कर दी है। ब्रोकरेज को शेयर की मौजूदा कीमत ज्यादा लग रही है। कंपनी को घाटा भी हो रहा है। ऊपर से Instant Help कारोबार में मुकाबला बढ़ रहा है।
शेयर 0.69% गिरा
बुधवार को NSE पर Urban Company का शेयर 0.69% गिरकर ₹168.12 पर बंद हुआ। हालांकि, इससे पहले तीन कारोबारी दिनों में शेयर करीब 16% चढ़ चुका था।
जून तिमाही के नतीजों के बाद शेयर करीब 30% ऊपर जा चुका था। इसी तेजी के बाद BofA ने अपना रुख बदला है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट ₹155 रखा है। यानी मौजूदा भाव से करीब 8% नीचे जाने का अनुमान है।
Instant Help कारोबार चिंता बढ़ा रहा
BofA की सबसे बड़ी चिंता Urban Company का Instant Help कारोबार है। कंपनी इस सेगमेंट में तेजी से पैसा लगा रही है। लेकिन अभी यहां घाटा काफी बढ़ गया है।
ब्रोकरेज का मानना है कि इस कारोबार में मुकाबला और बढ़ेगा। इससे कंपनी की कमाई पर दबाव आ सकता है। Urban Company को Snabbit और Pronto जैसी कंपनियों से टक्कर मिल रही है। दोनों ने हाल में पैसा भी जुटाया है। इसका मतलब है कि मुकाबला आगे और तेज हो सकता है।
InstaHelp का घाटा 13 गुना बढ़ा
InstaHelp का EBITDA घाटा तेजी से बढ़ा है। FY26 की पहली तिमाही में यह करीब ₹10 करोड़ था। FY27 की पहली तिमाही में घाटा बढ़कर करीब ₹130 करोड़ हो गया। यानी कंपनी इस कारोबार को तेजी से बढ़ाने के लिए पैसा लगा रही है। लेकिन फिलहाल इसका असर मुनाफे पर नहीं दिख रहा है।
BofA ने इसी वजह से Urban Company के कमाई अनुमान भी घटाए हैं। FY28 के लिए अब उसे प्रति शेयर ₹0.73 का घाटा होने का अनुमान है। पहले यह अनुमान ₹0.59 के घाटे का था। FY29 के लिए EPS अनुमान भी ₹2.27 से घटाकर ₹1.41 कर दिया गया है।
UBS और Emkay की राय अलग
Urban Company पर सभी ब्रोकरेज की राय एक जैसी नहीं है। इससे पहले UBS ने शेयर पर कवरेज शुरू की थी। उसने इसे ‘Buy’ रेटिंग दी थी। UBS का मानना है कि भारत का ऑनलाइन होम सर्विस बाजार तेजी से बढ़ सकता है। UBS ने इस बदलाव को भारत के क्विक कॉमर्स में आए ‘Blinkit मोमेंट’ जैसा बताया था।
इसके बाद Emkay ने भी शेयर पर कवरेज शुरू की। उसने ‘Buy’ रेटिंग दी और ₹190 का टारगेट दिया। Emkay को उम्मीद है कि FY26 से FY29 के बीच भारत का कंज्यूमर सर्विस मार्केट करीब 19.8% CAGR से बढ़ सकता है।
Vedanta Aluminium share Price: मोतीलाल ओसवाल ने दी खरीदने की सलाह, शेयर 3 फीसदी उछला
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Modi Balen Shah Telephonic Conversation on Flood Tragedy: नेपाल में कुदरत का भयानक कहर जारी है। भीषण बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। संकट की इस कठिन घड़ी में भारत अपने पड़ोसी मित्र देश नेपाल की ओर पूरी मजबूती से मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से टेलीफोन पर बात कर स्थिति का जायजा लिया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।
नेपाल में बाढ़ से करीब 13 पावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं। ज्यादातर परियोजनाएं रसुवा और नुवाकोट जिलों की नदियों पर बनाई गई हैं। वहीं, लांगटांग हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले करीब 60 लोगों के लापता होने की खबर है। खबरhttps://t.co/GAu7nzhSqp#nepal #nepalflood pic.twitter.com/8TOEpFFMeU
— Webdunia Hindi (@WebduniaHindi) August 26, 2026
Spoke to Prime Minister Balendra Shah and conveyed condolences on the loss of lives due to the floods in Nepal. The people of India stand in solidarity with their sisters and brothers in Nepal at this difficult time.
India is ready to provide all possible humanitarian…
— Narendra Modi (@narendramodi) August 26, 2026
नेपाल में भीषण बारिश और बाढ़ के कारण मची तबाही के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर एकजुटता व्यक्त की है। पीएम मोदी ने इस प्राकृतिक आपदा में लोगों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और नेपाल को संकट की इस घड़ी में हरसंभव सहायता प्रदान करने का भरोसा दिया। उल्लेखनीय है कि नेपाल में भीषण बाढ़ के चलते 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि 400 पर्यटक लापता हैं। इनमें 133 भारतीय भी शामिल हैं।
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक भीषण बाढ़ आ गई।
तेज बहाव की चपेट में कई बाजार और गांव आने की खबर है।
बड़ी संख्या में लोगों के बह जाने की सूचना सामने आई है।#nepalflood #nepal #flood pic.twitter.com/8WDv5fFuFB— Webdunia Hindi (@WebduniaHindi) August 26, 2026
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नेपाल के साथ खड़ा है भारत : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बातचीत में इस बात को रेखांकित किया कि भारत और नेपाल के बीच सिर्फ सीमाएं नहीं, बल्कि गहरी सांस्कृतिक और भाईचारे की भावना जुड़ी हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि इस कठिन समय में भारत के लोग नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को आश्वस्त किया कि भारत सरकार संकट के इस समय में नेपाल को राहत सामग्री, बचाव कार्य और किसी भी प्रकार की आपातकालीन सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ का एक और डरावना वीडियो सामने आया है।
वीडियो चीन अधिकृत तिब्बत के इमिग्रेशन सेंटर का बताया जा रहा है।
बाढ़ की तेज लहरें करीब 5 मंजिला इमारत की ऊंचाई तक पहुंचती दिखाई दे रही हैं।#nepal #nepalflood #flood #tibet pic.twitter.com/YylRv0CY1X— Webdunia Hindi (@WebduniaHindi) August 26, 2026
राहत और बचाव में मदद का आश्वासन
नेपाल के कई हिस्से भारी बारिश और उफनती नदियों के कारण पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत नेपाल की जरूरतों के आधार पर तुरंत मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजने के लिए तत्पर है। गौरतलब है कि जब भी पड़ोसी देशों पर ऐसी प्राकृतिक आपदा आती है, तो भारत 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) की नीति के तहत सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाता है।
वेदांता ग्रुप की कंपनियों के लिए बुधवार यानी 26 अगस्त का दिन खास रहा। ग्रुप की करीब सभी कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी। शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद ये शेयर अच्छी तेजी के साथ बंद हुए। इससे एक दिन में समूह की कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में 18,120 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
Vedanta Group की प्रमुख कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन एक दिन में 5.66 फीसदी बढ़कर 3.38 लाख करोड़ रुपये हो गया। सबसे ज्यादा 7.27 फीसदी का उछाल वेदांता ऑयल एंड गैस के शेयरों में दिखा। इससे इसका भाव 41.78 रुपये पर पहुंच गया। बीते एक महीने में यह शेयर करीब 20 फीसदी चढ़ा है।
वेदांता एल्युमीनियम के शेयरों को खरीदने की सलाह
Vedanta Aluminium Metal के शेयरों में 3.33 फीसदी की तेजी आई। इससे इसका भाव 462.75 रुपये पर क्लोज हुआ। इस शेयर में तेजी की वजह ब्रोकरेज फर्म मोतोलाल ओसवाल की रिपोर्ट है। उसने शेयर पर ‘बाय’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर के लिए 540 रुपये का टारेगट प्राइस दिया है। उसने कहा है कि आगे कंपनी की ग्रोथ स्ट्रॉन्ग रहने के आसार हैं। यह शेयर बीते एक महीने में करीब 6 फीसदी चढ़ा है।
वेदांता आयरन के शेयरों में करीब 5 फीसदी उछाल
वेदांता ऑयरन एंड स्टील के शेयर में 4.98 फीसदी उछाल आया। इससे इसका भाव 38.78 रुपये पर क्लोज हुआ। बीते एक महीने में यह शेयर करीब 28 फीसदी उछला है। वेदांता का शेयर 4.36 फीसदी चढ़कर 287 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर बीते एक महीने में 8.45 फीसदी चढ़ा है। ग्रुप की मार्केट वैल्यू बढ़ाने में सबसे ज्यादा 10,731 करोड़ रुपये का योगदान वेदांता एल्युमीनियम का रहा। वेदांता लिमिटेड का 4,891 करोड़ रुपये का योगदान रहा।
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हिंदुस्तान जिंक के शेयरों का टारगेट प्राइस 750 करोड़ रुपये
हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में भी तेजी दिखी। यह शेयर 6.29 फीसदी चढ़कर 629.85 रुपये पर बंद हुआ। तेजी की वजह सरकार की तरफ से आया एक स्पष्टीकरण है। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल उसका हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी बेचने का प्लान नहीं है। इस, कंपनी में सरकार की 27.92 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि वेदांता की 60.71 फीसदी हिस्सेदारी है। इस बीच, जेफरीज ने हिंदुस्तान जिंक के शेयरों का टारगेट प्राइस बढ़ाया है। उसने टारगेट प्राइस बढ़ाकर 750 रुपये कर दिया है।
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India Weather Update: पड़ोसी देश नेपाल में भारी बारिश के कारण मची तबाही और विनाशकारी सैलाब के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 27 अगस्त के लिए मौसम का ताजा बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक 27 अगस्त को उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के 13 राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है।
इसके साथ ही पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कई हिस्सों में तेज आंधी, वज्रपात और गर्जना को लेकर चेतावनी जारी की गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में तूफानी हवाएं चलने की आशंका है जबकि तटीय क्षेत्रों में समुद्र में उथल-पुथल को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
उत्तर भारत का मौसम: यूपी और उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश का अनुमान, पूर्वी राजस्थान में भी चेतावनी
उत्तर भारत के मैदानी व पहाड़ी इलाकों में मानसून की सक्रियता बनी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 27 अगस्त को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। नेपाल से सटे इलाकों और यूपी के मैदानी भागों में बारिश की वजह से नदियों के जलस्तर पर असर पड़ सकता है।
पर्वतीय राज्य उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान में अलग-अलग जगहों पर गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा में भारी बारिश और आंधी का संकट
आईएमडी के मुताबिक 27 अगस्त को बिहार, झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश होने का पूर्वानुमान दिया गया है। बारिश के साथ-साथ इन पूर्वी राज्यों में मौसम काफी खराब रह सकता है। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने, बिजली कड़कने और आंधी-तूफान आने की संभावना है।
पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय और अरुणाचल समेत सभी 7 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट
पूर्वोत्तर भारत में मानसून का प्रकोप लगातार जारी है। मौसम विभाग के अलर्ट के मुताबिक 27 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार बारिश दर्ज की जा सकती है।
इन सभी पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश के साथ-साथ तेज गर्जना होने और आकाशीय बिजली चमकने को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है। पूर्वोत्तर के राज्यों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
मध्य और दक्षिण भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल में होगी भारी बारिश
मध्य भारत के इलाकों में भी मानसून अपनी पूरी ताकत दिखा रहा है। 27 अगस्त को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही दोनों राज्यों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की गतिविधि भी देखने को मिल सकती है।
दक्षिण भारत की बात करें तो केरल और माहे में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग जगहों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में तेज सतह हवाएं चलने का भी अनुमान है।
अंडमान में तूफानी हवाओं का अलर्ट, समंदर में मछुआरों के लिए चेतावनी
मौसम विभाग ने द्वीपीय क्षेत्रों और समुद्री सीमाओं पर खराब मौसम को लेकर विशेष अलर्ट जारी किया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 27 अगस्त को 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।
समुद्री स्थिति पर नजर डालें तो अरब सागर में सोमालिया और ओमान तटों के साथ-साथ उत्तर, पूर्व-मध्य और पश्चिम-मध्य अरब सागर के कई हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।
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वहीं, बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे से लेकर 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन खतरनाक समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सख्त हिदायत दी है।
Bihar Flood Risk: उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई जबरदस्त बाढ़ के कारण बिहार में खास सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में अचानक बाढ़ की स्थिति बन गई है और पानी के बहाव में अचानक तेजी आने की आशंका है। हालांकि, अभी तक बाढ़ के सटीक कारण का पता नहीं चल पाया है, लेकिन पिछले साल इसी नदी में आई ऐसी ही अचानक बाढ़ का कारण बाद में एक ग्लेशियर झील का पानी निकलना बताया गया था।
नेपाल पर्यटन बोर्ड को ताजा जानकारी के अनुसार, नेपाल के नुवाकोट और धाडिंग जिलों में भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 105 भारतीय लापता हैं।
बता दें कि बुधवार को नेपाल में आई जबरदस्त बाढ़ में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई। वहीं, चीन के सरकारी मीडिया ने बताया कि दोनों देशों की सीमा पर चीन की तरफ तिब्बत के एक व्यापारिक केंद्र पर मडस्लाइड (कीचड़ और मलबे का बहाव) हुआ, जिसकी चपेट में आने से “काफ़ी लोग हताहत” हुए हैं।
बिहार में क्यों बढ़ाई गई निगरानी?
नेपाल में बाढ़ के हालात को देखते हुए बिहार के अधिकारियों ने गंडक नदी में पानी का स्तर बढ़ने की आशंका के चलते हाई अलर्ट जारी किया है।
बिहार प्रशासन ने पश्चिमी चंपारण के बगहा इलाके, खासकर वाल्मीकिनगर बैराज के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। उन्हें चिंता है कि नेपाल से बहकर आने वाला अतिरिक्त पानी दो से तीन घंटे में गंडक नदी तक पहुंच सकता है।
गंडक नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
बता दें कि भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलती है और नेपाल की त्रिशूली नदी में मिलती है, जो आगे चलकर भारत में गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है।
न्यूज एजेंसी ANI ने बिहार में आपदा प्रबंधन अधिकारियों के हवाले से बताया कि गंडक नदी के किनारे बसे जिलों में बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां की जा रही हैं।
ANI ने अधिकारियों के हवाले से बताया, “नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, लमजुंग और तनहुं जिलों (गंडक कैचमेंट एरिया) और दोलखा और सिंधुपालचोक जिलों (कोसी कैचमेंट एरिया) में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का ज्यादा खतरा होने का अनुमान है।”
फरक्का बैराज क्यों एक नया विवाद का मुद्दा बन गया है?
जैसे-जैसे गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है और राज्य में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के अपने समकक्ष सुवेंदु अधिकारी से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया है। उनका तर्क है कि बहाव बढ़ने से पूर्वी राज्य में बाढ़ का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि—जो फरक्का में नदी के कम बहाव वाले मौसम में पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है—इस साल दिसंबर में अपनी 30 साल की अवधि पूरी करने के बाद समाप्त होने वाली है। पटना लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि बांग्लादेश के साथ भविष्य में पानी के बंटवारे की किसी भी व्यवस्था में उसके हितों का ध्यान रखा जाए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्य को आश्वासन दिया है कि नवीनीकरण प्रक्रिया के दौरान फरक्का बैराज और भारत-बांग्लादेश जल बंटवारा संधि को लेकर उसकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा।
पटना की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
हालांकि, अभी सबसे बड़ी चिंता गंगा नदी के जलस्तर का बढ़ना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल राज्य में सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद, पटना और बक्सर समेत बिहार के कुछ हिस्सों में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है।
पटना के लिए अभी जरूरी है कि बैराज से और पानी छोड़ा जाए ताकि ऊपरी हिस्से (अपस्ट्रीम) का दबाव कम हो सके। हालांकि, बैराज से जुड़ा कोई भी फैसला पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के साथ पानी के बंटवारे को लेकर भारत की प्रतिबद्धताओं पर भी असर डाल सकता है।
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