बाढ़ के बीच में भी नेपाल की क्रिकेट टीम ने मैच जीतकर जनता को ढांढस बंधाई

नेपाल में बाढ़ ने मुश्किल हालत पैदा कर दी है लेकिन इसके बावजूद टीम ने अपने घरवालों की चिंता के बीच मलेशिया से खेले गए अभ्यास मैच में जीत अर्जित कर पूरे देश का मनोबल बढ़ाने का काम किया है। गौरतलब है कि नेपाल में आई बाढ़ के कारण कुल 177 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

मैच की बात करें तो नेपाल ने दूसरे अंतरराष्ट्रीय अभ्यास मैच में मलेशिया पर 27 रनों से जीत अर्जित की। पहले बल्लेबाजी करने उतरी नेपाल का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और उसने 41.4 ओवरों में 170 रन बनाए। मलेशिया भी नेपाल के खिलाफ बल्ले से औसत खेल भी नहीं खेल पाई और 40.1 ओवर में 143 रन बनाकर आउट हो गई।

यह जीत क्रिकेट से ज्यादा देश के लिए है क्योंकि नेपाल नाजुक हालत से गुजर रहा है।गौरतलब है कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित उत्तरी रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आए भयंकर सैलाब और लैंडस्लाइड में 1500 से अधिक लोग लापता है। वहीं इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी लापता है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर कई तीर्थ यात्रियों के लापता होने की जानकारी भी सामने आ रही है।

नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की प्रमुख इकाई राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने शुरुआती सैटेलाइट आधारित रिसर्च किया है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने तबाही के पैमाने का आकलन किया और उन घटनाओं को समझने की कोशिश की, जिनके कारण हाल के सालों में हिमालयी क्षेत्र की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक सामने आई।


Snakebite in India: सांप के काटने में भारत नंबर-1, हर साल 13 लाख तक मामले; जानें क्यों बढ़ रहा खतरा

भारत में सांप के काटने का खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा एक नए वैश्विक अध्ययन से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल देश में बड़ी संख्या में लोग सांप के जहर का शिकार होते हैं, जिससे यह समस्या गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। खासकर गांवों और खेतों में रहने वाले लोगों के लिए इसका खतरा ज्यादा रहता है। बारिश के मौसम में सांपों के इंसानी इलाकों के करीब आने से घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। सबसे चिंता की बात यह है कि कई मामलों में पीड़ित समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इलाज में देरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल सुविधाओं की कमी स्थिति को और गंभीर बना देती है।

वहीं, दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत में सांप के काटने के मामलों का आंकड़ा काफी ज्यादा बताया गया है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किन इलाकों में खतरा ज्यादा है और कौन से जहरीले सांप सबसे ज्यादा जानलेवा साबित होते हैं।

भारत के बाद इन देशों में सबसे ज्यादा मामले

अध्ययन में दुनिया के उन देशों की पहचान की गई है जहां सांप के काटने का खतरा सबसे ज्यादा है। अनुमानित सालाना मामलों के हिसाब से भारत सबसे ऊपर है। इसके बाद नाइजीरिया, इंडोनेशिया और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो का नंबर आता है।

भारत: 13 लाख तक मामले

नाइजीरिया: करीब 6.66 लाख मामले

इंडोनेशिया: करीब 4.90 लाख मामले

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो: करीब 4.67 लाख मामले

रिसर्च के अनुसार, दुनिया के लगभग तीन-चौथाई सांप काटने के मामले सिर्फ 20 देशों में केंद्रित हैं।

किसानों और ग्रामीणों पर सबसे ज्यादा खतरा

भारत में सांप काटने की घटनाओं का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा है। खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर खास तौर पर जोखिम में रहते हैं। मानसून के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि बारिश के समय सांप अक्सर सुरक्षित जगह की तलाश में इंसानी बस्तियों और खेतों की ओर आ जाते हैं। बिना जूते खेतों में काम करना, जमीन पर सोना और कच्चे या खुले घरों में रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

इलाज में देरी बनती है जानलेवा

सांप के काटने के बाद समय पर सही इलाज मिलना बेहद जरूरी है। लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अस्पताल दूर होने के कारण मरीज को इलाज मिलने में काफी समय लग सकता है। कई मामलों में लोग अस्पताल जाने से पहले पारंपरिक इलाज या झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं। कुछ स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में एंटीवेनम और गंभीर मरीजों के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की कमी भी समस्या को बढ़ा सकती है।

भारत के ‘बिग फोर’ जहरीले सांप

भारत में गंभीर सांप काटने के मामलों के लिए चार प्रमुख जहरीली प्रजातियों को आमतौर पर ‘बिग फोर’ कहा जाता है।

  1. Spectacled Cobra

यह कोबरा खेतों के अलावा कई बार इंसानी बस्तियों के आसपास भी दिखाई देता है। इसके जहर से शरीर के तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  1. Common Krait

कॉमन क्रेट रात में ज्यादा सक्रिय रहता है। इसके काटने की कई घटनाएं सोते समय होती हैं और पीड़ित को शुरुआत में काटने का पता भी नहीं चल पाता।

  1. Russell’s Viper

रसेल वाइपर को भारत में गंभीर सांप काटने के प्रमुख कारणों में गिना जाता है। इसके जहर से रक्तस्राव, ऊतकों को नुकसान और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

  1. Saw-scaled Viper

आकार में छोटा होने के बावजूद यह बेहद जहरीला सांप है। इसके जहर से खून बहने और शरीर में रक्त के जमने की प्रक्रिया प्रभावित होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

सांप का काटना बना ‘छिपा हुआ’ स्वास्थ्य संकट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने snakebite envenoming को Neglected Tropical Disease यानी उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी की प्राथमिकता वाली श्रेणी में रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सांप काटने के वास्तविक आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में कई घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुंचतीं।

बचाव के लिए क्या कदम जरूरी?

विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा प्रभावित इलाकों में पर्याप्त मात्रा में एंटीवेनम उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों को सांप काटने के मामलों के इलाज की बेहतर ट्रेनिंग देने की जरूरत है। ग्रामीण मजदूरों को सुरक्षित जूते उपलब्ध कराना, लोगों को सांप काटने के बाद सही प्राथमिक कदमों की जानकारी देना और समय पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करना भी इस संकट से निपटने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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Video: तिब्बत में ईशा फाउंडेशन के 80 श्रद्धालु भी लापता, इनके बारे में बात करते हुए भावुक हुए सद्गुरु! बोले- हमें भी जाने दो

Nepal flood videos: तिब्बत और नेपाल की सीमा पर आई भीषण बाढ़ पर आध्यात्मिक गुरु एवं ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने गहरा दुख जताते हुए स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि जिस स्तर पर तबाही हुई है, उसे देखते हुए अभी नुकसान का सही आंकड़ा सामने आना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि उनके संगठन से जुड़ा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया एक समूह बाढ़ की चपेट में आया, जिसमें 80 लोग शामिल थे। नेपाल में हुई त्रासदी पर बोलते हुए सद्गुरु भावुक हो गए। तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित गैर-लाभकारी संगठन ईशा फाउंडेशन ने दावा किया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं जो आव्रजन केंद्र पर थे।

सद्गुरु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट कर बताया कि वह खुद घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सभी फोन और टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं बंद हैं। भूस्खलन की वजह से रास्ते भी बाधित हैं। ऐसे में प्रभावित इलाके में संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है। वह भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के जरिए वहां पहुंचने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि राहत और बचाव के काम में मदद की जा सके।

सद्गुरु ने क्या बताया?

सद्गुरु ने कहा, “हमारे ग्रुप में से एक एस3 ग्रुप जिससे हम सागर में मिले थे। फिर दोबारा तब मिले जब हम ऊपर ट्रेकिंग कर रहे थे। वे नीचे आ रहे थे। इस ग्रुप में 80 लोग शामिल थे जिनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं थीं। इनमें से 22 लोग अमेरिका, 12 कनाडा, 11 ऑस्ट्रेलिया, 9 यूनाइटेड किंगडम, 4 जर्मनी, 3 फ्रांस, 3 नेपाल, 2 नीदरलैंड, 2 न्यूजीलैंड, 2 सिंगापुर और 2 स्पेन से थे। फिनलैंड, हंगरी, इजरायल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति ग्रुप में शामिल था।”

सद्गुरु ने आगे बताया कि समूह जब वापसी के दौरान इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा, तब तक सब कुछ सामान्य था। बुधवार सुबह करीब 9:05 बजे समूह के लीडर ने संदेश भेजकर बताया था कि वे इमिग्रेशन सेंटर पहुंच चुके हैं। इसके कुछ ही मिनट बाद करीब 9:14 बजे अचानक यह भयावह आपदा आई। इसके बाद समूह के सदस्यों से संपर्क टूट गया। सद्गुरु ने कहा कि उनके नेपाल के फोन नंबर भी सक्रिय नहीं हुए, जिससे चिंता और बढ़ गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्री और तीन स्वयंसेवक लापता बताए जा रहे हैं।

शहर का एक हिस्सा पानी और मलबे में बह गया

उन्होंने कहा कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां इमारतें और शहर का एक हिस्सा तक पानी और मलबे में बह गया। इसलिए फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कितने लोग सुरक्षित हैं और कितने लापता हैं। उन्होंने बताया कि उनके समूह के साथ वॉलंटियर और एक डॉक्टर भी मौजूद थे। कई नेपाली गाइड भी यात्रा दल के साथ थे और उनके परिवार प्रभावित इलाके में रहते हैं। ऐसे में सिर्फ तीर्थयात्रियों की ही नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।समाचार

सद्गुरु ने कहा कि अलग-अलग रिपोर्टों में नेपाल की तरफ सैकड़ों लोगों के लापता होने की बात सामने आ रही है। जबकि तिब्बत की तरफ भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। मृतकों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है।

बाढ़ से पहले भूकंप आया था?

शुरुआत में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था। न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि बाद में वैज्ञानिक विश्लेषण में संकेत मिले कि आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से का खिसकना या ग्लेशियर से जुड़ी घटना हो सकती है। इसके बाद नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा। फिर देखते ही देखते तेज फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा दी।

पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि रास्ते, पुल, मकान और दूसरी प्रॉपर्टी इसकी चपेट में आ गईं। राहत एवं बचाव दल के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई जगहों पर सड़कें टूटने और पानी का स्तर बढ़ने के कारण पहुंचना मुश्किल है।

लापता लोगों के परिजन परेशान

सद्गुरु ने कहा कि इस मुश्किल समय में सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों के परिवारों की है। उन्होंने बताया कि संबंधित देशों के दूतावासों को घटना की जानकारी दी गई है। प्रभावित परिवारों तक भी संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम हरसंभव तरीके से मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।

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उनका कहना है कि इस समय सबसे जरूरी काम है कि किसी भी तरह प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाई जाए और वहां मौजूद लोगों की स्थिति का पता लगाया जाए। न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय जल्द ही राज्य सचिवालय में मंत्रियों और अधिकारियों के साथ नेपाल में फंसे तमिल लोगों को बचाने के लिए एक इमरजेंसी बैठक करेंगे।

नेपाल- तबाही से पहले और बाद की 9 सैटेलाइट तस्वीरें:त्रिशूली नदी में बह गईं बस्तियां, 6 घंटे के सैलाब ने बदला नक्शा

नेपाल में 26 अगस्त की बाढ़ से हुई तबाही सैटेलाइट से भी दिखाई दे रही है। सैलाब में गांव और बाजार बह गए, सड़कें और पुल मलबे में दब गए। हर तरफ मटमैला पानी और पहाड़ी मलबा नजर आ रहा है। इस बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पूरे इलाके का नक्शा बदल दिया। नीचे देखिए तबाही से पहले और बाद की 9 सैटेलाइट तस्वीरें… सभी तस्वीरें तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुआ जिले की हैं। जहां त्रिशूली नदी ने अपने किनारे बसे गांवों और बस्तियों को 6 घंटे की बाढ़ में अपने चपेट में ले लिया। अब ग्राफिक्स में देखिए कहां और कैसे हुआ हादसा… ———————— ये खबर भी पढ़ें…. तिब्बत में लैंडस्लाइड से नेपाल में आई बाढ़, 210 मौतें:1500 लापता; 300 भारतीय की तलाश जारी, आज 21 भारतीयों का रेस्क्यू नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ में 210 लोगों की मौत हो गई। इनमें नेपाल में 207 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई है। करीब 1,500 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक वहां कुल 826 लोग लापता हैं। इसमें 300 से ज्यादा भारतीय हैं। पूरी खबर पढ़ें…

सहवाग और द्रविड़ के बेटे को साथ में मिला टीम में मौका, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुआ चयन

वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलना खासा पसंद था। अब इन दोंनों क्रिकेटरों के बेटें को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही डेब्यू करने का मौका दिया जा रहा है। आर्यवीर सहवाग और अन्वय द्रविड़ को मार्च में होने वाली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 अंडर 19  एकदिवसीय सीरीज में भारतीय टीम के लिए चुना गया है। यह  मैच राजकोट और अहमदाबाद में खेले जाएंगे। तीनों एकदिवसीय और पहला बहुदिवसीय मैच राजकोट में खेला जाएगा, जबकि दूसरा बहुदिवसीय मुकाबला अहमदाबाद में होगा।

अन्वय द्रविड़ एक विकेटकीपर की हैसियत से इस टूर्नामेंट में खेलेंगे जिसमें कप्तान लक्ष्य रायचंदानी होंगे। यशवर्धन सिंह चौहान को लंबे प्रारूप के मुकाबलों के लिए कप्तान बनाया गया है। आर्यवीर सहवाग एक बल्लेबाज के तौर पर टीम में चुने गए हैं। इससे पहले यह दोनों खिलाड़ी 3 साल पहले रणजी ट्रॉफी में आमने सामने हुए थे और अब दोनों साथ में खेलेंगे।

द्रविड़ के बड़े बेटे, समित द्रविड़, जो 20 वर्ष के हैं उन्हें भी 2024 में ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के ख़िलाफ़ खेलने के लिए इंडिया अंडर-19 टीम में चुना गया था, लेकिन घुटने की चोट के कारण वह बाहर हो गए थे। समित ने कर्नाटक की टी20 लीग, महाराजा टी20 ट्रॉफ़ी में शानदार प्रदर्शन करने के बाद अंडर-19 टीम में जगह बनाई थी।

भारत अंडर-19 एकदिवसीय टीम: लक्ष्य रायचंदानी (कप्तान), यशवर्धन चौहान, रजत बघेल, आर्यवीर सहवाग, वीके विनीत, कुशाग्र ओझा, अर्जुन राजपूत, मनाल चौहान, अन्वय द्रविड़, वी यशवीर, रोहित यादव, शाविन विनोद, मोहित उलवा, चिगुरुपति वेंकट और काव्या पटेल।

भारत अंडर-19 बहुदिवसीय टीम:यशवर्धन चौहान (कप्तान), लक्ष्य रायचंदानी, सागर विर्क, कुशाग्र ओझा, मनाल चौहान, कुश पटेल, मानव कृष्णा, अभिप्राय बिस्वास, रोहित यादव, ईशान ओम, अयान अकरम, प्रणव राघवेंद्र, प्रियांशु सिंह, मोहित उलवा और आर्यन यादव।

Viral Video: नेपाल की बाढ़ में बहकर भारत पहुंचे हाथी, पानी में फंसा देख लोगों का पसीजा दिल

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। अचानक आए सैलाब ने बस्तियों, सड़कों और दूसरी जरूरी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया, वहीं बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने और कई लोगों के लापता होने की खबर है। इस भयावह स्थिति के बीच अब एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वीडियो में कुछ हाथी तेज बहाव वाले बाढ़ के पानी में फंसे नजर आ रहे हैं। ये बेजुबान जानवर पानी की लहरों के बीच खुद को बचाने और सुरक्षित जगह तक पहुंचने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि नेपाल से आए बाढ़ के पानी के कारण हाथी बहकर उत्तर प्रदेश के बहराइच के पास पहुंच गए। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स हाथियों की सलामती को लेकर चिंता जता रहे हैं और उनके सुरक्षित रेस्क्यू की उम्मीद कर रहे हैं।

बाढ़ के पानी में फंसे 4-5 हाथी

वायरल वीडियो में कई हाथी तेज बहाव वाले पानी में फंसे नजर आ रहे हैं। वे लगातार खुद को पानी की सतह से ऊपर रखने और बहाव के बीच आगे बढ़ने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। वीडियो रिकॉर्ड कर रहा एक शख्स बताता है कि नेपाल की तरफ से आए बाढ़ के पानी में बहकर ये हाथी उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित कैलाशपुरी बैराज के आसपास पहुंच गए हैं। उसके मुताबिक, पानी में करीब चार से पांच हाथी फंसे हुए थे और उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही थी।

नेपाल से आए सैलाब में बहकर पहुंचे हाथी

बताया जा रहा है कि नेपाल में आई बाढ़ का पानी कर्णाली नदी में पहुंचा, जिसे उत्तर प्रदेश में घाघरा नदी के नाम से भी जाना जाता है। तेज बहाव के साथ हाथी भी बहकर भारतीय क्षेत्र की तरफ आ गए।हालात की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीमें हाथियों को बचाने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गईं। अधिकारी बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के साथ-साथ प्रभावित वन्यजीवों पर भी नजर रख रहे हैं।

‘इंसानों के साथ जानवर भी झेल रहे हैं तबाही’

हाथियों का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भावुक हो गए। लोगों ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा में इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवर भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं। एक यूजर ने लिखा कि ऐसी त्रासदियों में अक्सर यह भूल जाता है कि जानवर भी उतनी ही तकलीफ झेलते हैं। एक अन्य यूजर ने हाथियों के लिए चिंता जताते हुए कहा कि इन बेजुबान जानवरों का अच्छी तरह ख्याल रखा जाना चाहिए। वहीं, एक व्यक्ति ने लिखा कि इतने सारे जानवरों को बाढ़ में फंसा देखकर उसका दिल टूट गया और आपदा की भयावहता का अंदाजा लगाना मुश्किल है।

नेपाल में कैसे आई इतनी भयानक बाढ़?

जानकारी के अनुसार, नेपाल में अचानक आई बाढ़ की शुरुआत करीब सुबह 9 बजे हुई, जब तिब्बत की तरफ से पानी का तेज बहाव भोटे कोशी नदी में पहुंचा। इसके बाद बाढ़ का पानी नेपाल के रसुवा जिले के कई इलाकों में फैल गया। तिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों में सैलाब ने भारी तबाही मचाई। पानी के तेज बहाव ने रास्तों, बस्तियों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया।

रेस्क्यू टीमों की नजर अब हाथियों पर

एक तरफ राहत और बचाव दल बाढ़ में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं, वहीं वन विभाग की टीमें हाथियों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही हैं। वायरल वीडियो ने यह भी दिखा दिया कि प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जंगल और वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Nvidia के धमाकेदार रिजल्ट, बदला निवेशकों का सवाल, भारतीय आईटी कंपनियों के लिए ये है मतलब

Nvidia Q2 Result and IT Stocks: दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनियों में शुमार एनविडिया के धमाकेदार तिमाही नतीजों ने ग्लोबल एआई ट्रेड को एक और मजबूती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब निवेशक सवाल उठाने लगे थे कि एआई शेयरों की तेज रफ्तार आगे भी जारी रह पाएगी या नहीं। चिप कंपनी एनवीडिया ने रेवेन्यू, कमाई और गाइडेंस को लेकर बाजार के अनुमान को पछाड़ दिया। वहीं कंपनी का डेटा-सेंटर बिजनेस भी शानदार स्पीड से बढ़ता रहा। इससे एशियाई बाजारों में सेंटीमेंट मजबूत हुआ और शुरुआती कारोबार में MSCI का एशिया पैसेफिक इंडेक्स और दक्षिण कोरिया का टेक-हैवी इंडेक्स कोस्पी उछल पड़ा। हालांकि निवेशकों के लिए बड़ा सवाल ये है कि एआई पर खर्च और कमाई में बढ़ोतरी की रफ्तार इतनी मजबूत है या नहीं कि पूरे एआई इकोसिस्टम में मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को सही ठहरा सके।

Nvidia ने दूर की AI की मांग से जुड़ी चिंता

एनविडिया के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही यानी 26 जुलाई को समाप्त होने वाली तिमाही में इसका रेवेन्यू सालाना आधार पर दोगुने से अधिक बढ़कर $9622 करोड़ पर पहुंच गया जोकि एनालिस्ट्स के $9217 करोड़ के अनुमान से अधिक रहा। कंपनी का EPS भी $2.10 के अनुमान की तुलना में $2.22 पर रहा। सबसे मजबूत परफॉरमेंस तो कंपनी के डेटा-सेंटर बिजनेस का रहा, जिसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 117% बढ़कर $8900 करोड़ हो गया, जबकि अनुमान $8633 करोड़ का था।

अब आगे की बात करें तो करीब 2% के कम या ज्यादा के साथ इस तिमाही में कंपनी को करीब $10.8 करोड़ के रेवेन्यू की उम्मीद है। साथ ही कंपनी ने अगले वित्त वर्ष 2028 में लगभग 70% रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद जताई है। इससे AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार मजबूत खर्च की उम्मीद बनी हुई है।

रेमंड जेम्स इंवेस्टमेंट के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट मैट ओर्टोन (Matt Orton) के मुताबिक इन आंकड़ों से AI ट्रेड के बने रहने के संकेत मिल रहे हैं। उनका कहना है कि इससे चिप की मजबूत कंज्यूमर डिमांड, एआई को तेजी से अपनाने और पूरी सप्लाई चेन में लगातार बढ़ते ऑर्डर बैकलॉग का संकेत मिल रहा है। यह उन चिप कंपनियों के लिए पॉजिटिव है, जिनके शेयरों में हाल में तेज गिरावट आई थी।

लेकिन बनी हुई है वैल्यूएशन की चिंता

धमाकेदार कारोबार नतीजे से एआई की मांग को लेकर कुछ चिंता जरूर कम हुई है लेकिन हाई वैल्यूएशन को लेकर चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा का कहना है कि एनविडिया के ऐसे नतीजे एक-दो साल पहले आते शेयर रॉकेट बन जाते लेकिन इस बार मार्केट का रिस्पांस सीमित रहा। नतीजे के बाद इसके शेयरों में हल्की तेजी आई। हालांकि बाद में कंपनी के सीईओ जेनसेन हुआंग (Jensen Huang) के आउटलुक और एक नए AWS सौदे के बाद शेयर तेजी से ऊपर चढ़े।

अजय का कहना है कि अब निवेशकों का सवाल बदला है और अब वे एआई के डिमांड की बजाय यह पूछ रहे हैं कि AI शेयरों की कीमतों में पहले से कितनी ग्रोथ शामिल हो चुकी है। ट्रे़डिंगडॉटकॉम के सीईओ Peter McGuire का भी कहना है कि कंपनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमाई के अनुमान को पीछे छोड़ रही है, लेकिन साल 2024 के आखिरी से शेयर पर इसका असर पहले जैसा मजबूत नहीं दिख रहा। हालांकि पीटर के मुताबिक 2023-24 के AI तेजी की तुलना में वैल्यूएशन अब थोड़े नीचे आए हैं।

AI Stocks और Indian IT Stocks के लिए क्या है मतलब

एनविडिया के नतीजे ऐसे समय आए हैं जब कई वैश्विक चिप कंपनियों के शेयर हाल ही में धड़ाम हो गए थे। अमेरिका में माइक्रोन टेक (Micron Tech) और सैनडिस्क (SanDisk) जैसी चिप कंपनियों के शेयर दो महीनों में करीब 28% तक टूट चुके हैं तो दक्षिण कोरिया की सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स में भी लगभग 25-30% की गिरावट आई। एलारा की एक रिपोर्ट के मुताबिक ताइवान-फोकस्ड फंड से इस साल पहली बार लगातार दो हफ्तों तक पैसा निकला। वहीं दक्षिण कोरिया से $75.8 करोड़ की निकासी हुई, जो तीन महीनों में सबसे अधिक रही। ऐसे में एनविडिया के धमाकेदार नतीजे काफी अहम हैं और संकेत मिल रहा कि चिप स्टॉक्स की कमजोरी एआई की मांग कम होने का संकेत नहीं है।

भारतीय आईटी कंपनियों पर असर की बात करें तो इसका रुझान मिला-जुला है। चिप स्टॉक्स की गिरावट से भारतीय आईटी स्टॉक्स को फायदा मिला क्योंकि वैश्विक निवेशक महंगे हार्डवेयर शेयरों का विकल्प खोज रहे थे। एक तरफ चिप स्टॉक्स में तेज गिरावट आई तो दो महीने में निफ्टी आईटी करीब 20% चढ़ गया। इसे बेहतर वैल्यूएशन और मजबूत घरेलू लिक्विडिटी से भी सपोर्ट मिला। अब आगे की बात करें तो मार्केट एक्सपर्ट सुनील सुब्रमणियन के मुताबिक एनविडिया के धमाकेदार नतीजे से भारतीय आईटी स्टॉक्स को झटका लग सकता है क्योंकि एक बार फिर चिप कंपनियो में निवेश बढ़ सकता है।

Vedanta Resource ने दी सफाई, लाल हो गए वेदांता और वेदांता एलुमिनियम के शेयर

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अब लंदन में गूंजेंगे काशी के मंत्र, थेम्स नदी के तट पर सजेगा गंगा आरती का दरबार!

लंदन में इस बार नदी किनारे का नजारा थोड़ा अलग होने वाला है। यहां गंगा आरती अब टेम्स नदी के किनारे देखने को मिलेगी। भारतीय संस्कृति से जुड़ा यह आयोजन लंदन के माहौल में एक नया रंग भरने वाला है। यहां रोशनी, भक्ति, संगीत और नदी का खूबसूरत मेल देखने को मिलेगा, जो भारतीय यात्रियों के लिए खास एक्सपीरियंस होगा।

इस आयोजन में भारत की पुरानी परंपरा और लंदन की ऐतिहासिक विरासत एक साथ नजर आएगी। 13 सितंबर 2026 को ग्रीनविच स्थित ऐतिहासिक ओल्ड रॉयल नेवल कॉलेज में टेम्स नदी के किनारे गंगा आरती का आयोजन होगा। यदि आप लंदन में भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े कुछ अनोखे पलों की तलाश कर रहे हैं, तो यह इवेंट आपकी ट्रिप के लिए खास है।

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टेम्स नदी के किनारे इवेंट

यह इवेंट चिन्मय मिशन यूके की ओर से टोटली टेम्स के साथ मिलकर आयोजित किया जा रहा है। यह टोटली टेम्स 2026 के सितंबर महीने में चलने वाले इवेंट का हिस्सा है। पूरा इवेंट शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक चलेगा और मुख्य गंगा आरती करीब 7:15 बजे, सूर्यास्त के समय होगी। आरती से पहले लोग भारतीय खाने, स्टॉल, लाइव म्यूजिक, डांस और परिवार के साथ की जा सकने वाली एक्टिविटीज का मजा ले सकेंगे। मुख्य समारोह टेम्स नदी के किनारे बने रॉयल स्टेप्स पर होगा।

इवेंट की फीस और नियम

इस आरती का मकसद नदी के प्रति सम्मान और आभार जताना है। इसमें दीपक, संगीत और भक्ति से जुड़ा ट्रेडिशन खास रहेगा। यह प्रोग्राम सिर्फ हिंदू समुदाय के लिए नहीं है, बल्कि सभी लोगों के लिए फ्री में खुला रहेगा। साथ ही, टेम्स नदी को साफ रखने के लिए खास सावधानी बरती जाएगी। यहां फूल, मूर्तियां या किसी भी तरह का प्रसाद नदी में नहीं डाला जाएगा। ऑर्गेनाइजर ने लोगों से भी नदी का सम्मान करने और पूजा की सामग्री पानी से दूर रखने की अपील की है।

ग्रीनविच में स्काईलाइन शो

यदि आपने वाराणसी, ऋषिकेश या हरिद्वार की गंगा आरती देखी है, तो लंदन में होने वाली आरती का माहौल काफी अलग लगेगा। दशाश्वमेध घाट की आरती में पुजारी, शंख, घंटियां, मंत्रोच्चार और बड़े पीतल के दीपक शामिल होते हैं। वहीं ग्रीनविच में यही ट्रेडिशन टेम्स नदी, हिस्टोरिकल बिल्डिंग और लंदन की स्काईलाइन के बीच देखने को मिलेगी।

आरती के साथ ग्रीनविच विजिट

गंगा आरती देखने के लिए ग्रीनविच जाने वाले ट्रैवलर इसे अपनी पूरी शाम की ट्रिप में बदल सकते हैं। यहां ऐतिहासिक ओल्ड रॉयल नेवल कॉलेज, टेम्स नदी और लंदन की खूबसूरत स्काईलाइन देखने को मिलती है। सितंबर में Totally Thames 2026 के तहत टेम्स नदी के आसपास कई प्रोग्राम भी होंगे। ऐसे में ट्रैवलर आरती से पहले ग्रीनविच घूम सकते हैं।

यदि आप भी इस इवेंट का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो सितंबर में ग्रीनविच जाने का प्लान बना सकते हैं। भारतीय संस्कृति और लंदन के खूबसूरत माहौल का यह मेल आपके लिए एक अलग एक्सपीरियंस होता है। परिवार और दोस्तों के साथ बिताई गई यह शाम आपकी यादगार लंदन ट्रिप होगी।

सोना सस्ता होने वाला है! 15% से घटकर 6% हो सकती है इंपोर्ट ड्यूटी, जानिए कितनी गिरेंगी कीमतें

Gold Import Duty Cut Impact: भारतीय सर्राफा बाजार और सोना खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार सोने पर लगने वाली कस्टम इंपोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% करने पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो देश में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

गौरतलब है कि मई 2026 में सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया था। स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के विश्लेषकों के अनुसार, इस ड्यूटी में कटौती का सीधा असर घरेलू बाजार में सोने के भाव, तस्करी और आगामी त्योहारी-शादियों के सीजन में ज्वेलरी की मांग पर पड़ेगा।

15% से 6% ड्यूटी हुई तो कितनी गिरेंगी कीमतें?

भारत अपनी सोने की जरूरतों को पूरा करने के लिए सालाना 700 से 800 टन सोना विदेशों से आयात करता है। जब इंपोर्ट ड्यूटी 15% होती है, तो यह घरेलू बाजार में सोने के लिए एक न्यूनतम मूल्य तय कर देती है।

अगर ड्यूटी 9% घटकर 6% पर आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारतीय बाजार के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा। इससे स्थानीय सर्राफा बाजारों में सोने के लैंडेड कॉस्ट में सीधी कमी आएगी, जिसका फायदा सीधे रिटेल खरीदारों को मिलेगा।

दिल्ली में 24 कैरेट सोने की मौजूदा कीमत ₹1,63,890 प्रति 10 ग्राम पर अगर इंपोर्ट ड्यूटी 15% से घटकर 6% यानी 9% की सीधी कटौती होती है, तो इसके भाव में सीधे ₹14,750 की बड़ी गिरावट आएगी और यह घटकर लगभग ₹1,49,140 प्रति 10 ग्राम पर आ जाएगा। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,240 प्रति 10 ग्राम से ₹13,522 सस्ता होकर करीब ₹1,36,718 प्रति 10 ग्राम हो जाएगा।

(नोट: यह कटौती केवल सोने की बेस कीमत पर आधारित है, ज्वैलरी के कुल बिल में 3% जीएसटी और मेकिंग चार्ज के हिसाब से अतिरिक्त राहत भी मिलेगी।)

तस्करी पर लगेगी लगाम, वैध मार्केट को बढ़ावा

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हाई इंपोर्ट ड्यूटी (15%) का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि इससे सोने की तस्करी और अवैध रास्तों से आने वाले सोने को बढ़ावा मिलता है। ड्यूटी 6% होने से वैध तरीके से आयात किए गए सोने और अवैध सोने के बीच का रेट गैप खत्म हो जाएगा। इससे बुलियन ट्रेडर्स और ज्वेलर्स औपचारिक चैनलों के जरिए सोना खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे सरकार के राजस्व संग्रह में भी सुधार होगा।

शादियों के सीजन में ज्वेलरी डिमांड में आएगा उछाल

भारतीय संस्कृति में शादी-ब्याह और त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी सबसे ज्यादा होती है। सोने के दाम घटने से मध्यम वर्गीय परिवारों और रिटेल खरीदारों का बजट सुधरेगा, जिससे ज्वेलरी की मांग में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

सर्राफा कारोबारी और रिटेल ज्वेलर्स नई आयात लागत के हिसाब से अपने मेकिंग चार्जेस और फाइनल रिटेल प्राइस में तेजी से बदलाव करेंगे। विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में इसका असर सबसे तेज दिखेगा।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के अनुसार, सोने में निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों और ट्रेडर्स को इस नीतिगत बदलाव पर नजर रखनी चाहिए:

फिजिकल गोल्ड बनाम Gold ETF: ड्यूटी घटने से फिजिकल गोल्ड के प्रीमियम में कमी आएगी, जिससे Gold ETFs और गोल्ड फंड्स में निवेश करना अधिक फायदेमंद और सुरक्षित विकल्प बन सकता है।

ज्वेलरी और माइंडिंग स्टॉक्स: सोने के दाम घटने और बिक्री बढ़ने से प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों और गोल्ड-लिंक्ड शेयरों के मार्जिन और प्रदर्शन में सुधार हो सकता है।

सरकार की ओर से आधिकारिक ऐलान होते ही सर्राफा बाजार में सोने की नई दरें लागू हो जाएंगी। अगर आप त्योहारी सीजन या शादियों के लिए सोने की खरीदारी या गोल्ड ETF में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो ड्यूटी में संभावित कटौती के इस फैसले पर करीबी नजर बनाए रखना समझदारी होगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त से होगा शुरू: अब सिर्फ 4 घंटे में पूरा होगा मुंबई का सफर

वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त से होगा शुरू: अब सिर्फ 4 घंटे में पूरा होगा मुंबई का सफर

Vadodara-Mumbai

अहमदाबाद-मुंबई के बीच शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन के पहले चरण से पहले ही वाहन चालकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। देश के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे 31 अगस्त, 2026 तक यातायात के लिए खोले जाने की पूरी संभावना है। यह नया रूट शुरू होने से गुजरात और महाराष्ट्र के बीच सड़क मार्ग ज्यादा तेज़ और सुविधाजनक बन जाएगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि राज्य के हिस्से में आने वाला 157 किलोमीटर का पूरा सेक्शन 31 अगस्त तक ट्रैफिक के लिए खोलने की योजना है। लगभग ₹24,000 करोड़ की लागत से बन रहे इस सेक्शन के 7 में से 5 निर्माण पैकेज का काम पूरा हो चुका है और बाकी के दो पैकेज का काम अंतिम चरण में है।

सफर का समय घटकर आधा रह जाएगा : इस एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही वडोदरा से मुंबई के बीच की 403 किलोमीटर की दूरी अब सिर्फ 4 घंटे में तय की जा सकेगी। अब तक इसी दूरी को तय करने में यात्रियों को लगभग 8 घंटे का समय लगता था। यात्रा का समय आधा हो जाने से यात्रियों को न केवल आसानी होगी, बल्कि पेट्रोल-डीजल की भी भारी बचत होगी।

प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट : 1,400 किलोमीटर लंबा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है, जो देश के 5 राज्यों को आपस में जोड़ता है। इस विशाल कॉरिडोर का अहम हिस्सा वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे चालू होने से उत्तर और पश्चिम भारत के बीच व्यापार, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स बिजनेस को नई रफ्तार मिलेगी।