श्रीलंका ने किला लड़ाकर किया कोलंबो टेस्ट ड्रॉ लेकिन भारत ने सीरीज 1-0 से जीती

Sonal Dinusha

INDvsSL कोलंबो टेस्ट में श्रीलंका के बल्लेबाज सोनल दिनूशा और पुछल्ले बल्लेबाजों ने पांचवे दिन कमाल का संघर्ष दिखाते हुए मैच ड्रॉ करा लिया। 229 पर 6 विकेट खोकर अंतिम दिन  श्रीलंका की टीम ने बारिश का इंतजार नहीं किया और पूरे दिन बल्लेबाजी की। श्रीलंका की टीम ने 429 रन 9 विकेट गंवाए।

इसके बाद भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने शतकवीर सोनल दिनूशा से हाथ मिला लिया। श्रीलंका के सोनल दिनुशा शुरु से अंत तक आउट नहीं हुए और उन्होंने 251 गेंदों में नाबाद 131 रन बनाए।

हालंकि यह सीरीज भारत के नाम रही क्योंकि गॉल टेस्ट भारत ने 300 रनों के अंतर से जीता था। लेकिन यह टेस्ट ना जीत पाने के कारण भारत को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अंकतालिका में काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस चक्र में यह भारत का दूसरा ड्रॉ मैच है।

श्रीलंका ने ड्रॉ की नीव पहले सत्र में ही डाल दी थी जब टीम ने 29 ओवर में बिना विकेट खोए 100 रन बना लिए थे। दूसरे सत्र में टीम ने 2 विकेट गंवाए जिसके कारण टीम बहुत धीमे खेली और 31.2 ओवर में सिर्फ 54 रन बनाए। अंतिम सत्र में टीम ने 46 रन बनाए और सिर्फ एक विकेट गंवाया।

पैर में जकड़न से जूझने के बावजूद दिनुशा ने जबरदस्त जुझारूपन दिखाते हुए नाबाद 133 रन की पारी के दौरान 264 गेंद का सामना किया और भारत को जीत से वंचित कर दिया। उन्होंने अपनी पारी में और आठ चौके और दो छक्के जड़े। कल के नाबाद सात रन से आगे खेलते हुए दिनुशा ने स्वीप शॉट का शानदार तरीके से इस्तेमाल किया और भारतीय गेंदबाजों को अंतिम दिन पूरी तरह से बेअसर साबित किया।

दिनुशा की अगुआई में श्रीलंका ने दूसरी पारी में जब 154 ओवर में 9 विकेट पर 429 रन बनाए थे तब दोनों टीम मैच ड्रॉ कराने पर सहमत हो गईं। इस समय श्रीलंका को 216 रन की बढ़त हासिल थी।श्रीलंका ने छठा विकेट निरोशन डिकवेला के रूप में 65वें ओवर में गंवा दिया था जिसके बाद दिनुशा ने पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ 89 ओवर से अधिक बल्लेबाजी करके भारत की जीत हासिल करने की उम्मीदों को ध्वस्त किया।

दिनुशा और केशारा नुवांता (46 रन, 150 गेंद) ने सातवें विकेट के लिए 112 रन की साझेदारी की दौरान 246 गेंद का सामना किया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने इसके बाद लाहिरू कुमारा (12 रन, 90 गेंद) के साथ नौवें विकेट के लिए 47 रन की साझेदारी के दौरान भी मिलकर 170 गेंद खेली जिससे भारत की जीत हासिल करने की रही सही उम्मीद भी टूट गई।

भारत की ओर से रविंद्र जडेजा, प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज और सारांश जैन ने एक-एक विकेट चटकाया।भारत ने इससे पूर्व अपनी पहली पारी नौ विकेट पर 503 रन बनाकर घोषित की थी जिसके जवाब में श्रीलंका की टीम दिनुशा के 103 रन के बावजूद 290 रन पर सिमट गई थी और उसे फॉलोआन के लिए मजबूर होना पड़ा था।

भारतीय टीम को उम्मीद थी कि वे श्रीलंका के बाकी बल्लेबाजों को जल्द समेट देंगे लेकिन दिनुशा और नुवांता मेहमान टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दोनों ने सुबह के सत्र में 100 रन जोड़े और भारतीय गेंदबाजों को सफलता से महरूम रखा।

भारतीय गेंदबाजों को एक बार फिर निचले क्रम के बल्लेबाजों के खिलाफ विकेट चटकाने के लिए जूझना पड़ा। तेज गेंदबाजों ने शॉर्ट गेंद और लेग साइड पर गेंदबाजी की रणनीति अपनाने की कोशिश की लेकिन वे पूरे सत्र में बेअसर ही नजर आए।

स्पिनरों मानव सुथार, सारांश जैन और रविंद्र जडेजा को कुछ मौकों पर टर्न और उछाल मिला लेकिन वे श्रीलंका की पारी को समेटने में नाकाम रहे।श्रीलंका की पहली पारी में 290 रन के दौरान भी उसके अंतिम तीन विकेटों ने मिलकर 45 ओवर बल्लेबाजी की थी और 117 रन जोड़े थे।

पहली पारी में 103 रन बनाने वाले दिनुशा मौजूदा श्रृंखला में भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हुए। उन्होंने चार पारियों में तीन शतक और एक अर्धशतक जड़कर भारतीय गेंदबाजों को काफी परेशान किया। उन्होंने पहले टेस्ट में भी 100 और 84 रन बनाए थे।

पच्चीस वर्षीय दिनुशा ने जडेजा की गेंद पर एक रन के साथ 99 गेंद में अर्धशतक पूरा किया।हालांकि लंच के बाद सत्र की शुरुआत में सुथार ने नुवांता का विकेट निकालकर यह साझेदारी तोड़ी। सुथार की गेंद ने नुवांता के बल्ले का किनारा लिया और स्लिप में ध्रुव जुरेल ने कैच लपक लिया।

जडेजा ने इसके बाद प्रभात जयसूर्या (02) को भी स्लिप में जुरेल के हाथों कैच कराया।लेकिन इसके बाद भारतीय टीम को लाहिरू कुमारा के रूप में एक और जुझारू श्रीलंकाई बल्लेबाज का सामना करना पड़ा।

दिनुशा और कुमारा ने 28 से अधिक ओवरों तक भारतीय गेंदबाजों को सफलता हासिल नहीं करने दी।जडेजा ने अंतत: कुमारा को शॉर्ट लेग पर यशस्वी जायसवाल के हाथों कैच कराके इस साझेदारी को तोड़ा।

दिनुशा ने इससे पहले अंतिम सत्र की मोहम्मद सिराज की पहली ही गेंद को मिडविकेट पर दो रन के लिए खेलकर 196 गेंद में मौजूदा श्रृंखला का अपना तीसरा शतक पूरा किया।कप्तान गिल ने अंतिम विकेट की तलाश में स्वयं गेंदबाजी करने के अलावा जायसवाल और जुरेल को भी गेंद सौंपी लेकिन सफलता नहीं मिली।

कोलंबो टेस्ट ड्रॉ होने से मुश्किल हुआ WTC Final का सपना अब हर सीरीज नॉकआउट

INDvsSL श्रीलंका ने कोलंबो टेस्ट ड्रॉ  करावाकर भारत की स्थित विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र 2025-27 में मुश्किल कर दी है। भारत ने भले ही यह सीरीज 1-0 से जीत ली है लेकिन अब उसको आने वाले दोनों सीरीज के लगभग सारे मैच जीतने होंगे। ज्यादा से ज्यादा टीम एक ड्रॉ और खेल सकती है लेकिन हार उसे अंक तालिका में और भी नीचे गिरा देगी। फिलहाल टीम 51.51 की जीत प्रतिशत से पांचवे पायदान पर खड़ी है।

यह इस चक्र में भारत का दूसरा ड्रॉ है। पहला ड्रॉ इंग्लैंड के खिलाफ हुआ था। कुल मिलाकर भारत की 5 जीत 4 हार और 2 ड्रॉ हैं। तालिका में 2 ड्रॉ का असर एक हार जैसा होता है। इस कारण भारत की यह पांचवी हार भी कही जा सकती है।

भारत की स्थिति पर एक नजर:

टेस्ट 11
जीत 5
हार 4
ड्रॉ 2
अंक प्रतिशत 51.51

आगामी सीरीज़:

न्यूज़ीलैंड (विदेशी धरती पर) 2 टेस्ट
ऑस्ट्रेलिया (घरेलू धरती पर) 5 टेस्ट

त्रिकोणीय मुकाबले ने भारत को डाला मुश्किल में

न्यूजीलैंड अगर इंग्लैंड से 2-1 या 3-0 से टेस्ट सीरीज हार जाती तो भारत के फायदे की बात होती लेकिन न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 2-1 से सीरीज हराकर भारत की स्थिति थोड़ी और मुश्किल कर दी है। फिलहाल मुकाबला 3 टीमों ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच लग रहा है। भारत के लिए 7 में से जो 2 सबसे ज्यादा मुश्किल मुकाबले हैं वह न्यूजीलैंड के खिलाफ ही देखने को मिलेंगे।  ऑस्ट्रेलिया भारतीय धरती पर बोर्डर गावस्कर ट्रॉफी खेलेगी।

इसका मतलब है 5 जीत और दो ड्रॉ (80 अंक) या 7 जीत (84 अंक)। इनमें से पांच टेस्ट ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ होंगे, जिसके विरुद्ध भारत ने 2008 से अब तक घरेलू मैदान पर पिछली पांच सीरीज़ में 12-2 का रिकॉर्ड बनाया है।पिछले WTC चक्र में फ़ाइनलिस्ट टीमों का अंक प्रतिशत 69.44 (दक्षिण अफ़्रीका) और 67.54 (ऑस्ट्रेलिया) था।

5 जीत और दो हार भारत को 62.96 प्रतिशत तक ले जाएंगी, जबकि 7 जीत और 1 हार के साथ वह 68.52 प्रतिशत पर पहुंचेगा।यानी भारत के पास अब भी ग़लती की बहुत कम गुंजाइश बची है।

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

संस्कृत दिवस 2026: दुनिया की प्राचीन भाषा के 5 रहस्य

Sanskrit Language

संस्कृत को विश्व की पहली भाषा और वह भी पहली व्याकरणबद्ध भाषा माना जाता है। कहते हैं कि इसी भाषा के कारण देश और दुनिया की अन्य भाषाओं का जन्म हुआ। विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर जानिए दुनिया की सबसे प्राचीन, वैज्ञानिक और समृद्ध भाषाओं में से एक 'संस्कृत' से जुड़े 5 अद्भुत रहस्य:- 

 

कंप्यूटर और AI के लिए सबसे उपयुक्त भाषा: नासा (NASA) के शोध के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) के लिए संस्कृत दुनिया की सबसे स्पष्ट और सटीक भाषा है, क्योंकि इसमें व्याकरण के नियम पूरी तरह से स्पष्ट और गणितीय हैं।

 

अद्भुत शब्द भंडार और एक शब्द के अनेक पर्यायवाची: संस्कृत में केवल एक ही वस्तु या भाव के लिए सैकड़ों शब्द उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, संस्कृत में 'पानी' (जल) के लिए 70 से अधिक और 'हाथी' के लिए 100 से भी अधिक पर्यायवाची शब्द हैं।

 

स्मरण शक्ति और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव: अनुसंधान से पता चला है कि संस्कृत के मंत्रों और अक्षरों का उच्चारण करने से गले और मस्तिष्क में विशेष कंपन (vibrations) उत्पन्न होते हैं। यह तंत्रिका तंत्र को सक्रिय कर ध्यान केंद्रित करने और स्मरण शक्ति (Memory Power) बढ़ाने में मदद करता है।

 

अद्वितीय व्याकरणिक संरचना (अव्यय शब्द क्रम): संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें वाक्यों में शब्दों का क्रम (word order) बदलने से वाक्य का अर्थ नहीं बदलता। जैसे- “रामः गृहं गच्छति” और “गच्छति गृहं रामः” दोनों का अर्थ एक ही रहता है, जो किसी अन्य भाषा में संभव नहीं है।

 

संसार की अधिकांश भाषाओं की जननी: संस्कृत को इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार की मूल भाषाओं में से एक माना जाता है। अंग्रेजी, जर्मन, लैटिन, रूसी और सभी भारतीय भाषाओं के अनगिनत शब्द (जैसे- Mother/मातृ, Brother/भ्रातृ, Geometry/ज्यामिति) सीधे संस्कृत से विकसित हुए हैं।

TVS iQube MillionR Edition लॉन्च, 145 किमी रेंज और Type-C चार्जिंग समेत मिलेंगे ये फीचर्स, हासिल किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा, कीमत जानेंगे तो हो जाएंगे हैरान

TVS iQube MillionR Edition लॉन्च, 145 किमी रेंज और Type-C चार्जिंग समेत मिलेंगे ये फीचर्स, हासिल किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा, कीमत जानेंगे तो हो जाएंगे हैरान

TVS Motor Company ने अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए TVS iQube MillionR Edition लॉन्च किया है। यह खास एडिशन iQube के 10 लाख यूनिट प्रोडक्शन का आंकड़ा पार करने की उपलब्धि के मौके पर पेश किया गया है। इस स्पेशल एडिशन की प्रभावी एक्स-शोरूम कीमत कर्नाटक में ₹1,40,138 बताई गई है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में सब्सिडी, टैक्स और अन्य शुल्क के कारण कीमत में बदलाव हो सकता है।

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145 किमी की रेंज और 82 किमी/घंटा टॉप स्पीड

TVS iQube MillionR Edition मौजूदा 3.5 kWh iQube वेरिएंट पर आधारित है। इसका मतलब है कि इसके मैकेनिकल सेटअप और परफॉर्मेंस में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी ने इसमें मुख्य रूप से नया डिजाइन, अतिरिक्त स्टोरेज और कुछ उपयोगी फीचर्स जोड़े हैं। इस इलेक्ट्रिक स्कूटर में 3.5 kWh बैटरी दी गई है, जो 145 किमी IDC रेंज देने का दावा करती है। इसकी टॉप स्पीड 82 किमी/घंटा है।

 

Aurora Green कलर में आया स्पेशल एडिशन

 

MillionR Edition को खास Aurora Green Dual-Tone कलर में पेश किया गया है। इसमें स्पेशल ग्राफिक्स और MillionR ब्रांडिंग दी गई है, जिससे इसे रेगुलर iQube से अलग पहचान मिलती है। इसके अलावा सीट अपहोल्स्ट्री को भी ज्यादा प्रीमियम लुक दिया गया है।

 

बढ़ा स्टोरेज, मिला Type-C चार्जिंग पोर्ट

 

TVS ने इस स्पेशल एडिशन में रोजमर्रा के इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए कई उपयोगी बदलाव किए हैं। इसमें नया फ्रंट यूटिलिटी कंपार्टमेंट दिया गया है। साथ ही स्मार्टफोन और दूसरे डिवाइस चार्ज करने के लिए USB Type-C चार्जिंग पोर्ट भी मिलता है।

 

इन बदलावों के बाद स्कूटर का कुल स्टोरेज 32 लीटर से बढ़कर 35.5 लीटर हो गया है।

 

  • TVS iQube MillionR Edition के प्रमुख स्पेसिफिकेशन
  • फीचर TVS iQube MillionR Edition
  • बैटरी क्षमता 3.5 kWh
  • IDC रेंज 145 किमी
  • टॉप स्पीड 82 किमी/घंटा
  • डिस्प्ले 12.7 सेमी TFT
  • 0-80% चार्जिंग करीब 4.5 घंटे
  • कुल स्टोरेज 35.5 लीटर
  • कलर Aurora Green Dual Tone

 

कंपनी के अनुसार, iQube MillionR Edition में 12.7 सेमी TFT इंस्ट्रूमेंट डिस्प्ले दिया गया है। इसकी 145 किमी IDC रेंज और 82 किमी/घंटा की टॉप स्पीड रेगुलर 3.5 kWh iQube के समान है। यानी यह मॉडल परफॉर्मेंस अपग्रेड के बजाय डिजाइन और सुविधा से जुड़े बदलावों पर ज्यादा केंद्रित है।

 

118 से ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स

 

3.5 kWh iQube प्लेटफॉर्म में 118 से ज्यादा कनेक्टेड फीचर्स मिलते हैं। इनमें टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन, Distance-to-Empty जानकारी और रिमोट चार्ज स्टेटस मॉनिटरिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा Q-Park Assist भी मिलता है, जो कम स्पीड पर स्कूटर को पार्क करने या रिवर्स करने में मदद करता है।

 

TVS iQube ने हासिल किया 10 लाख यूनिट का आंकड़ा

 

MillionR Edition TVS की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के मौके पर लॉन्च किया गया है। 25 जून 2026 को TVS Motor ने घोषणा की थी कि कंपनी के होसुर प्लांट से 10 लाखवां iQube रोलआउट हुआ। यह उपलब्धि भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बढ़ती लोकप्रियता और TVS के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कारोबार के विस्तार को दर्शाती है।

 

जुलाई में iQube की बिक्री में 158% की बढ़ोतरी

 

TVS iQube की बिक्री में भी हाल के महीनों में जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। जुलाई 2026 में iQube की 59,386 यूनिट्स बिकीं, जबकि जुलाई 2025 में यह आंकड़ा 23,029 यूनिट था। इस तरह सालाना आधार पर बिक्री में करीब 158 फीसदी की वृद्धि हुई। जून 2026 में iQube की 47,331 यूनिट्स बिकी थीं। ऐसे में जुलाई की बिक्री में महीने-दर-महीने भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

 

कई बैटरी विकल्पों में उपलब्ध है iQube

 

TVS अब iQube को अलग-अलग बैटरी क्षमता और रेंज के साथ पेश कर रही है। पोर्टफोलियो में एंट्री-लेवल 2.3 kWh iQube शामिल है, जिसकी IDC रेंज 114 किमी तक है। वहीं, बड़े 5.3 kWh iQube ST की IDC रेंज 212 किमी तक बताई गई है। इन दोनों के बीच 3.5 kWh iQube MillionR Edition आता है, जो 145 किमी की दावा की गई रेंज और 82 किमी/घंटा की टॉप स्पीड के साथ पेश किया गया है।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी CAS को लेकर क्या आप भी कनफ्यूज्ड हैं? यहां आसान शब्दों में समझें इसका पूरा मतलब

किसी कंपनी का शेयर बाज़ार बंद होने के समय किस भाव पर था, इससे आमतौर पर लोगों का ज़्यादा सरोकार नहीं होता। आम लोग तो अपने शेयर को खरीदने और बेचने के भाव पर ध्यान देते हैं। मगर बाज़ार बंद होने के समय का भाव (क्लोज़िंग प्राइस) कुछ तबकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, जैसे म्यूचुअल फ़ंड, बड़े संस्थागत निवेशक और वायदा एवं विकल्प बाज़ार के प्रतिभागी।

कैस से पहले कैसे निर्धारित होती थी क्लोज़िंग प्राइस?

3 अगस्त 2026 से पहले क्लोज़िंग प्राइस एक फ़ॉर्मूले के तहत निर्धारित होती थी। इस फ़ॉर्मूले का सिद्धांत यह है कि अगर 10 लोगों ने किसी कंपनी का एक शेयर 100 रुपये में खरीदा और 1,000 लोगों ने उसी कंपनी का एक शेयर 110 रुपये में खरीदा, तो साधारण औसत भाव 105 रुपये होगा। मगर 105 रुपये का साधारण औसत बाज़ार का सही चित्रण नहीं करता, क्योंकि अधिकांश लोगों ने 110 रुपये का भाव चुकाया।

इस फ़ॉर्मूले, जिसका नाम है वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (जिसे लोग बोलचाल में विवैप कहते हैं), के तहत साधारण औसत निकालने के बजाय, बाज़ार बंद होने से पहले के अंतिम 30 मिनट में किसी कंपनी के कितने शेयर किस भाव पर बिके, दोनों को ध्यान में रखते हुए एक भारित औसत निकाला जाता है। उपरोक्त उदाहरण में विवैप लगभग 110 रुपये होगा।

विवैप का उद्देश्य अधिक यथार्थवादी क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करना है, फिर भी ज़ाहिर है, यदि इन 30 मिनटों के दौरान बहुत बड़ी मात्रा में प्रचलित बाज़ार भाव से अलग भाव पर शेयर ख़रीदे और बेचे जाएँ, तो क्लोज़िंग प्राइस प्रभावित हो सकती है। सेबी ने हाल ही में एक विदेशी ट्रेडिग समूह पर जो आरोप लगाए थे, उनमें क्लोज़िंग प्राइस को प्रभावित करने से जुड़े आरोप भी थे। हालाँकि, संबंधित समूह सेबी के आरोपों और चित्रण से सहमत नहीं है और इस मामले में अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।

कैस से क्या बदला है?

इन्हीं चिंताओं के बीच सेबी ने क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करने के लिए एक नया तरीका लागू किया है, जिसका नाम है कैस, यानी क्लोज़िंग ऑक्शन सेशन। कैस एक नया विचार नहीं है और सेबी 2024 से कैस के बारे में विचार कर रहा था। कैस के अंतर्गत आने वाले शेयरों में नियमित ट्रेडिंग अब 3:15 बजे बंद हो जाती है। पहले इन शेयरों में नियमित ट्रेडिंग 3:30 बजे तक होती थी। जो शेयर फिलहाल कैस के अंतर्गत नहीं आते हैं, उनकी ट्रेडिंग अभी भी 3:30 बजे तक चलती है और उनकी क्लोज़िंग प्राइस का निर्धारण विवैप के द्वारा होता है।

कैस के तहत नियमित कारोबार समाप्त होने के बाद के 20 मिनट में चार चरणों में प्रक्रिया चलती है। इन चार चरणों को समझने का आसान तरीका यह है कि भाव निकालने के लिए दो चीज़ों की ज़रूरत है। एक शुरुआती भाव और दूसरा यह कि इस शुरुआती भाव से लोग कितने ऊपर या नीचे बोली लगाएंगे।

• शुरुआती भाव, जिसे रेफ़रेंस प्राइस कहते हैं, 3:00 और 3:15 बजे के बीच के विवैप से निर्धारित होता है। अगर इस दौरान कोई शेयर नहीं बिका, तो पूरे दिन में जो भी उस शेयर की अंतिम खरीद का भाव होगा, उसी को शुरुआती भाव मान लिया जाता है। अगर पूरे दिन कोई शेयर नहीं बिका, तो यह पिछले दिन का क्लोज़िंग प्राइस होता है।

• एक बार रेफ़रेंस प्राइस तय हो जाने के बाद, लोग खरीदने और बेचने के लिए ऑर्डर डाल सकते हैं। कैस में रेफ़रेंस प्राइस के 3 प्रतिशत ऊपर-नीचे का दायरा लागू होता है।

• चरणबद्ध तरीके से स्टॉक एक्सचेंज खरीदने और बेचने के ऑर्डर एकत्रित करता है। इसके बाद इन ऑर्डरों का विश्लेषण करके यह निर्धारित किया जाता है कि किस भाव पर सबसे अधिक शेयरों का लेन-देन संभव है। अंतिम चरण में ऑर्डरों का मिलान किया जाता है। यही भाव क्लोज़िंग प्राइस कहलाता है।

• उदाहरणतः अगर किसी शेयर के लिए लोगों ने निम्नलिखित ऑर्डर डाले हैं: (1) ख़रीदने के ऑर्डर: 103 रुपये के 15 शेयर; 102 रुपये के 25 शेयर; 100 रुपये के 40 शेयर और 98 रुपये के 30 शेयर; और (2) बेचने के ऑर्डर: 97 रुपये के 10 शेयर; 100 रुपये के 50 शेयर; 101 रुपये के 30 शेयर और 104 रुपये के 20 शेयर, तो आमतौर पर कैस के अनुसार 100 रुपये के भाव पर सबसे ज़्यादा शेयरों का लेन-देन संभव है। 100 रुपये क्लोज़िंग प्राइस होगा।

सेबी का विचार ऐसा प्रतीत होता है कि विवैप के विपरीत, कैस में क्लोज़िंग प्राइस से छेड़छाड़ करने की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है।

कैस के पहले भी वीवैप से क्लोज़िंग प्राइस तो निकलता था, लेकिन वीवैप एक औसत भाव होने की वजह से साधारणतः उस भाव पर कोई सौदा नहीं होता था। मतलब, क्लोज़िंग प्राइस एक कागज़ी संख्या थी। कैस में जो भाव निकलता है, सौदा उसी भाव पर होता है। इसलिए कैस का भाव कागज़ी भाव नहीं है, बल्कि सही मायने में उस समय का क्लोज़िंग प्राइस है। इसके काफ़ी फायदे हैं, जैसे कि, अमुमन एक पैसिव इंडेक्स फण्ड के लिए वीवैप वाली क्लोजिंग प्राइस की ट्रैकिंग से कैस वाली क्लोजिंग प्राइस की ट्रैकिंग ज़्यादा सटीक होगी।

नया नहीं है कैस

कैस जैसी व्यवस्था विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों में काफ़ी प्रचलित है। इसके लागू होने पर कुछ लोगों ने कहा कि भारत भी अब विदेशी एक्सचेंजों की प्रणाली अपना रहा है। लेकिन यह बात पूरी तरह सही नहीं है। भारत वर्षों से कैस जैसी प्रणाली का उपयोग बाज़ार खुलने के समय का भाव (ओपनिंग प्राइस) निर्धारित करने के लिए करता आया है। वैसे भी भारतीय बाज़ार नई तकनीकों को अपनाने में हमेशा आगे रहा है।

सेबी ने फिलहाल कैस को उन शेयरों पर लागू किया है, जिन पर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध हैं। आगे चलकर इसे अन्य शेयरों तक विस्तारित किए जाने की संभावना है।

कैसा रहा कैस का क्रियान्वयन?

शुरुआती दिनों में कैस का क्रियान्वयन पूरी तरह निर्बाध नहीं रहा। उदाहरणतः, निफ़्टी इंडेक्स के साप्ताहिक कॉन्ट्रैक्ट साधारणतः मंगलवार को एक्सपायर होते हैं। अगर मंगलवार को निफ़्टी में शामिल शेयरों में 3:15 तक के बाज़ार भाव और कैस के दौरान बनने वाले क्लोज़िंग प्राइस में महत्वपूर्ण अंतर हो, तो निफ़्टी के क्लोज़िंग स्तर में तेज़ बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में कैश मार्केट और डेरिवेटिव्स के भावों में अस्थायी असंगति पैदा होने पर आर्बिट्रेज की गुंजाइश भी बन सकती है।

सेबी बाज़ार पर कड़ी नज़र रखती है और सेबी ने 19 अगस्त को एक ऑर्डर निकाला है, जिसमें दो संस्थाओं के ऊपर सेबी ने यह आरोप लगाया है कि उन्होंने कैस के भाव को प्रभावित किया है। यह एक अंतरिम आदेश है, जो इन संस्थाओं का पक्ष सुने बिना जारी किया गया है; इसलिए इसे अंतिम निष्कर्ष या दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। लेकिन इससे दो निष्कर्ष निकलते हैं: एक, कि कैस में लिक्विडिटी बहुत महत्वपूर्ण है; और दूसरा, कि कैस पर सेबी की पैनी नज़र है।

इन ऑर्डरों में आरोप यह है कि कैस में बड़े खरीद और बिक्री के ऑर्डर ऑर्डर रेफ़रेंस प्राइस से लगभग 3% ऊपर और नीचे डाले गए, जो कि बाज़ार के रुख़ के विपरीत था, और बाद में ये ऑर्डर कैंसिल कर दिए गए। सेबी का आरोप है कि इससे इंडेक्स प्रभावित हुआ और संबंधित संस्थाओं को वायदा एवं विकल्प बाज़ार में फायदा हुआ।

किसी भी नई व्यवस्था से परिचित होने और उसमें पारंगत होने में समय लगता है। आशा है कि आने वाले दिनों में कैस में अधिक से अधिक ऑर्डर्स डाले जाएँगे और खरीदने-बेचने वालों की संख्या बढ़ेगी, जिससे खरीदने और बेचने के लिए पर्याप्त ऑर्डर उपलब्ध होंगे और क्लोज़िंग प्राइस निर्धारित करने की प्रक्रिया अधिक सुचारु रूप से चल सकेगी। क्या इससे क्लोज़िंग प्राइस वास्तव में अधिक यथार्थवादी होगी और उसे प्रभावित करने की संभावना कम होगी, यह तो समय ही बताएगा।

(यह लेख अम्बरीष ने लिखा है, जो शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी में पार्टनर हैं)

डिसक्लेमर-यहां व्यक्त विचार लेखक के अपने विचार हैं। इसे इस पब्लिकेशन का विचार नहीं माना जाना चाहिए।

Weather Update: अगले 5 दिन संभलकर रहें! एमपी, यूपी समेत इन राज्यों में मंडराया भारी बारिश का खतरा, IMD ने जारी किया अलर्ट

IMD Heavy Rain Alert: देश भर में मानसूनी प्रणालियां एक बार फिर बेहद सक्रिय हो गई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा बुलेटिन में अगले 5 दिनों के लिए कई राज्यों में मूसलाधार बारिश, आंधी-तूफान और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश और उसके आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत देश के बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। मौसम विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने की हिदायत देते हुए पहाड़ी और निचले इलाकों में विशेष सावधानी बरतने को कहा है।

बीते 24 घंटों के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश में बेहद भारी बारिश (21 सेमी या उससे अधिक) दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश (12 से 20 सेमी) हुई जबकि पंजाब, उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश (7 से 11 सेमी) दर्ज की गई है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अलर्ट

मध्य भारत में चक्रवाती प्रणालियों का असर साफ देखने को मिल रहा है। 27 अगस्त को पश्चिमी मध्य प्रदेश में व्यापक बारिश और मध्य प्रदेश में अलग अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 27 से 29 अगस्त और 1 से 2 सितंबर तक व्यापक बारिश का दौर जारी रहेगा। 28-29 अगस्त और 1-2 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश होगी।

छत्तीसगढ़ में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक लगातार भारी बारिश की संभावना है। विदर्भ में 28 अगस्त और 2 सितंबर को बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 27 से 31 अगस्त के दौरान गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी और उत्तराखंड में 27 अगस्त को बहुत भारी बारिश फिर 2 सितंबर तक का दौर

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में 27 अगस्त को मूसलाधार बारिश देखने को मिलेगी। पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 27 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 27 अगस्त को भारी बारिश होगी जबकि 28 अगस्त और 31 अगस्त से 2 सितंबर के दौरान दोबारा भारी बारिश का दौर लौटेगा। 2 सितंबर को पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक बारिश का अनुमान है।

उत्तराखंड में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट रहेगा। हिमाचल प्रदेश में 30 अगस्त से 2 सितंबर तक व्यापक बारिश होगी जिसमें 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच भारी बारिश की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में 31 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान व्यापक बारिश होगी।

पूर्वी भारत: ओडिशा में 31 अगस्त तक बहुत भारी बारिश, बिहार और झारखंड में भी अलर्ट

पूर्वी भारत में 29 अगस्त को बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र के कारण बारिश की गतिविधियां और तेज होंगी। ओडिशा में 27 से 31 अगस्त के दौरान अलग-अलग जगहों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है जबकि 1 और 2 सितंबर को भी भारी बारिश जारी रहेगी।

गांगेय पश्चिम बंगाल और झारखंड में 27 से 31 अगस्त के दौरान भारी बारिश और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। 27 अगस्त को झारखंड में मध्यम से गंभीर बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। बिहार में 28 और 29 अगस्त को व्यापक बारिश होगी और 27 से 30 अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट रहेगा। 28 और 29 अगस्त को बिहार में आकाशीय बिजलीॉ गिरने की आशंका जताई गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 27 और 28 अगस्त को 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी।

पूर्वोत्तर भारत: असम और अरुणाचल में 30 अगस्त को बहुत भारी बारिश का अनुमान

पूर्वोत्तर के राज्यों में मानसून पूरी तरह मेहरबान रहेगा। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक व्यापक वर्षा होगी। अरुणाचल प्रदेश और असम व मेघालय में 27 से 29 अगस्त और 31 अगस्त से 2 सितंबर तक भारी बारिश दर्ज की जाएगी जबकि 30 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 27 से 31 अगस्त और 2 सितंबर को भारी बारिश होगी। पूर्वोत्तर के इन सभी राज्यों में 31 अगस्त तक गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

पश्चिम और दक्षिण भारत: कोंकण-गोवा में व्यापक बारिश, प्रायद्वीपीय भारत में सुस्ती कायम

पश्चिम भारत की बात करें तो कोंकण और गोवा में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश का दौर बना रहेगा। गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र व कच्छ में छिटपुट से हल्की बारिश ही होने का अनुमान है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह के दौरान बारिश की गतिविधियों में सुस्ती जारी रहने की संभावना है।

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तटीय कर्नाटक में 27 अगस्त से 2 सितंबर तक और केरल व माहे और लक्षद्वीप में 27 से 30 अगस्त के बीच व्यापक बारिश होगी। 27 अगस्त को केरल और माहे में भारी बारिश हो सकती है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और कर्नाटक के विभिन्न इलाकों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया गया है।

श्रीलंका का अंगद, भारतीय टीम के सामने जमाया 2 टेस्ट में तीसरा शतक

Sonal Dinusha

INDvsSL 2 टेस्ट की 3 पारियों में 3 शतक लगाने वाले सोनल दिनूशा ने भारतीय गेंदबाजों के सामने अंगद का पैर जमा लिया और 2 टेस्ट में तीन शतक लगा डाले। कोलंबो टेस्ट में भारतीय गेंदबाजो के सामने दोनों पारियों में उन्होंने शतक जमाया पहली पारी में उन्होंने 102 रन बनाए। आज 7 रनों के सांयकाल निजी स्कोर पर खेलने उतरे सोनल दिनूशा ने पहले सत्र में अर्धशतक और तीसरे सत्र में शतक जमा लिया।

ऐसा प्रदर्शन करके सोनल दिनूशा ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। किसी भी दो टेस्ट में तीन शतक जमाने वाले वह दूसरे बल्लेबाज बने। ऐसा पहले भारत के खिलाफ 1997 में अरविंद डिसिल्वा ने किया था।साल 2022 के बाद यह पहली बार है जब भारत के खिलाफ किसी बल्लेबाज ने दोनों पारियों में शतक लगाया हो।

सोनल दिनूशा ने 2 टेस्ट की सीरीज में न्यूनतम स्कोर 84 रनों का रहा है। यह ही वह पारी थी जब वह शतक नहीं लगा सके। सोनल दिनूशा ने गॉल टेस्ट की पहली पारी में भी शतक लगाकर भारतीय टीम को फॉलोऑन नहीं देने दिया था हालांकि कोलंबो टेस्ट की पहली पारी में उनका यह प्रयास विफल गया।सोनल दिनूशा पहली बार भारत के सामने खेल रहे हैं और वह 3 टेस्ट शतक लगा चुके हैं। ट्रेविस हेड को इतने शतक लगाने के लिए भारत के खिलाफ 4 सीरीज खेलनी पड़ी थी।

सोनल दिनूशा ने कोलंबो टेस्ट मैच के चौथे दिन भी अपना शतक पूरा किया और पांचवे दिन भी यह बताता है कि उनकी फिटनेस किस स्तर की है। अपने इस प्रदर्शन  के कारण वह इस भारत बनाम श्रीलंका सीरीज के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बन कर उभरे हैं। दो पारियों में दो शतक लगाने के कारण वह मैन ऑफ द मैच के हकदार बन गए हैं।

₹15000 से कम में Realme का नया फोन लॉन्च, 6500mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले समेत मिलेंगे ये फीचर्स

Realme C100i को गुरुवार को भारत में टेक कंपनी के लेटेस्ट बजट C-सीरीज स्मार्टफोन के तौर पर लॉन्च किया गया है। यह हैंडसेट अब देश में एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सिंगल RAM और स्टोरेज कॉन्फिगरेशन और दो कलर ऑप्शन में बिक्री के लिए उपलब्ध है। इस फोन में ऑक्टा-कोर Unisoc T7000 सीरीज चिपसेट, 6,500mAh की बैटरी और 5MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। इसके अलावा, Realme C100i में 6.75-इंच का LCD टचस्क्रीन है, जो 120Hz तक के रिफ्रेश को सपोर्ट करता है। इसमें सिक्योरिटी के लिए साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट स्कैनर भी दिया गया है। अब चलिए फोन के स्पेसिफिकेशन्स और कीमत के बारे में जानते हैं।

भारत में Realme C100i की कीमत और उपलब्धता

भारत में Realme C100i के 4GB RAM और 64GB स्टोरेज वाले एकमात्र कॉन्फिगरेशन की कीमत ₹14,999 तय की गई है। कंपनी की ओर से पात्र छात्रों को 250 रुपये का कूपन डिस्काउंट भी दिया जा रहा है।

यह हैंडसेट अभी भारत में Flipkart और Realme India के ऑनलाइन स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध है। Realme C100i दो कलर Midnight Black और Skyline Silver ऑप्शन में पेश किया गया है।

Realme C100i के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

Realme C100i एक डुअल-सिम स्मार्टफोन है, जो Android 16 पर आधारित Realme UI के साथ आता है। इस फोन में 6.75-इंच का HD+ (720 x 1,570 पिक्सल) LCD टचस्क्रीन है, जिसमें 120Hz तक का रिफ्रेश रेट, 240Hz तक का टच सैंपलिंग रेट, 100% sRGB, 16.7 मिलियन कलर्स, 254 ppi पिक्सल डेंसिटी, 900 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस, 83% DCI-P3 कलर गैमट और Panda MN228 कवर ग्लास जैसे फीचर्स हैं। कंपनी का दावा है कि यह फोन धूल और पानी के छींटों से बचाव के लिए IP64 रेटिंग के साथ आता है।

परफॉर्मेंस के लिए Realme C100i में ऑक्टा-कोर Unisoc T7250 चिपसेट दिया गया है, जो 1.8GHz की पीक क्लॉक स्पीड देता है। फोन में ARM Mali-G57 GPU, 4GB LPDDR4x RAM और 64GB UFS 2.2 ऑनबोर्ड स्टोरेज भी है, जिसे माइक्रो-SD कार्ड के जरिए बढ़ाया जा सकता है।

कैमरे की बात करें तो, Realme C100i के पिछले हिस्से में ऑटोफोकस और 78-डिग्री फील्ड ऑफ व्यू वाला 8MP (f/2.0) का सिंगल कैमरा है। इसमें सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 5MP (f/2.2) का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है। यह हैंडसेट 1080p/30 fps तक वीडियो रिकॉर्ड करने में सक्षम है।

Realme C100i में 6,500mAh की बैटरी दी गई है, जो 15W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है। कनेक्टिविटी के लिए इस फोन में 4G LTE, Wi-Fi 5, Bluetooth 5.2, USB Type-C पोर्ट, 3.5mm ऑडियो जैक, GPS, GLONASS, BDS, Galileo और QZSS का सपोर्ट भी मिलता है। इसमें प्रॉक्सिमिटी सेंसर, एम्बिएंट लाइट सेंसर, ई-कंपास, एक्सेलेरोमीटर और सिक्योरिटी के लिए साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर जैसे ऑनबोर्ड सेंसर दिए गए हैं। इस हैंडसेट का साइज 166.5×78.2×8.7mm है और वजन लगभग 210 ग्राम है।

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Alpha OTT release: सिनेमाघरों के बाद अब ओटीटी पर दस्तक देने जा रही ‘ऐल्फा’, जानें कब और कहां देख सकेंगे फिल्म

Alpha OTT release: आलिया भट्ट और शरवरी की फिल्म ‘ऐल्फा’ आखिरकार OTT पर आ रही है, जिससे फ़ैन्स को घर बैठे इस एक्शन-पैक्ड स्पाई थ्रिलर को देखने का एक और मौका मिलेगा। YRF स्पाई यूनिवर्स की पहली महिला-प्रधान फ़िल्म, ‘ऐल्फा’ सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के बाद नेटफ़्लिक्स पर प्रीमियर होगी। शिव रवैल के निर्देशन में बनी ‘ऐल्फा’ 3 जुलाई, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। इसमें आलिया और शरवरी ने दो ऐसी जासूसों की भूमिका निभाई थी जो एक बड़े और अहम मिशन में फंसी हुई थीं। यह मिशन बड़ी स्पाई फ़्रैंचाइज़ी से जुड़ा हुआ था। हालांकि, बॉक्स ऑफ़िस पर फ़िल्म का प्रदर्शन औसत रहा और कहानी को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली।

कहां और कब देखें

नेटफ्लिक्स ने 27 अगस्त को कन्फर्म किया कि यह एक्शन फ़िल्म 28 अगस्त से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी। प्लेटफ़ॉर्म पर लिखे कैप्शन में कहा गया, “ऐल्फा गैंग में शामिल होने के लिए तैयार हो जाइए। 28 अगस्त को रिलीज़ हो रही ‘ऐल्फा’ को नेटफ्लिक्स पर देखें!”

कहानी क्या है?

शिव रवैल की डायरेक्ट की हुई फ़िल्म ‘ऐल्फा’ में आलिया भट्ट और शरवरी, YRF स्पाई यूनिवर्स के केंद्र में हैं। आलिया ने सीता का रोल किया है, जो एक काबिल R&AW एजेंट है और जिसे ‘ऐल्फा’ सोल्जर बनने की ट्रेनिंग दी गई है। वहीं, शरवरी ने दुर्गा कौल का रोल किया है, जो सीता की जुड़वां बहन है, लेकिन उससे अलग हो गई है।

बॉबी देओल फ़िल्म के विलेन, कर्नल फतेह सिंह लखावत का रोल निभा रहे हैं। ‘ऐल्फा’ नाम के एक ताकतवर सीरम पर उनके एक्सपेरिमेंट से ही कहानी शुरू होती है। सीता को किडनैप कर लिया जाता है और उनकी देखरेख में बड़ी होती है, और आखिर में एक सुपर-सोल्जर बन जाती है।

फ़िल्म की कहानी का ऑफिशियल सारांश कुछ इस तरह है: “बदले की आग में जल रही एक लड़की अपने रास्ते में आने वाले हर किसी को खत्म कर देती है, जब तक कि उसकी यात्रा उसे अपनी ज़िंदगी के छिपे हुए सच का पता नहीं लगा देती। वह निडर और बेबाक है, और किसी भी हद तक जा सकती है, रास्ते में आने वाले किसी भी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकती है।”इस फ़िल्म में अनिल कपूर भी हैं और इसमें ‘वॉर’ फ़्रैंचाइज़ी के ऋतिक रोशन के किरदार ‘कबीर’ की एक छोटी सी भूमिका (कैमियो) भी है।

बॉक्स ऑफ़िस पर प्रदर्शन

YRF स्पाई यूनिवर्स की एक बड़ी फ़िल्म होने के बावजूद, ‘ऐल्फा’ का बॉक्स ऑफ़िस पर प्रदर्शन औसत रहा। लगभग ₹100 करोड़ के बजट में बनी इस फ़िल्म ने भारत में करीब ₹58.86 करोड़ की नेट कमाई की।

फ़िल्म ने विदेशी बाज़ारों से लगभग ₹29.05 करोड़ कमाए, जिससे इसकी कुल वर्ल्डवाइड कमाई ₹99.10 करोड़ हो गई। यह 2026 की आठवीं सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फ़िल्म के तौर पर सिनेमाघरों से उतरी और YRF स्पाई यूनिवर्स की सबसे कम कमाई करने वाली फ़िल्म बनी हुई है।

YRF स्पाई यूनिवर्स से कनेक्शन

‘ऐल्फा’, YRF स्पाई यूनिवर्स की सातवीं फ़िल्म है। इस यूनिवर्स की शुरुआत 2012 में सलमान खान की फ़िल्म ‘एक था टाइगर’ से हुई थी। इसके बाद इस फ़्रैंचाइज़ी में ‘टाइगर ज़िंदा है’ (2017), ‘वॉर’ (2019), ‘पठान’ (2023), ‘टाइगर 3’ (2023) और ‘वॉर 2’ (2025) जैसी फ़िल्में आईं।

नेपाल में भूकंप जैसे आया पानी का बवंडर और उसी के साथ बहने लगा 24 साल का मजदूर बिबेक कुमाल! जीवन और मौत के बीच ऐसे हुआ मुकाबला

Nepal Flash Flood: नेपाल में बुधवार को हिमालयी क्षेत्र और तिब्बत सीमा के पास आई अचानक और भीषण बाढ़ हाल के कुछ सालों की की सबसे भयावह आपदा बन चुकी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक कम से कम 160 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 1500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक लापता लोगों में करीब 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं। इस फ्लैश फ्लड ने सड़कों और बेसिक इंफ्रा को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है जिससे राहत और बचाव टीमों को कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस बीच इस फ्लड का शिकार हुए लोगों की ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो दहला रही हैं।

आम के पेड़ ने बचाई बिबेक की जिंदगी, देखते ही देखते गायब हो गया मकान

बाढ़ के इस तांडव से सुरक्षित बचे 24 साल के मजदूर बिबेक कुमाल की कहानी चमत्कार से कम नहीं है। जब यह आफत आई तब बिबेक बिदुर इलाके में मजदूरी कर रहे थे। हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्ट पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया है कि बिबेक एक नए बने मकान के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे तभी उन्हें अचानक एक फुफकार जैसी तेज आवाज सुनाई दी। उनके ऊपर काम कर रहे चार साथियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकलकर भागने के लिए चिल्लाया।

बिबेक गड्ढे से बाहर तो निकल गए लेकिन पानी की हाहाकारी धारा ने उन्हें तुरंत अपनी चपेट में ले लिया। काठमांडू के एक अस्पताल में इलाज करा रहे बिबेक ने कहा कि, ‘मैंने भागना शुरू किया तभी पानी की एक विशाल दीवार ऐसे गरजती हुई नीचे आई मानो भूकंप आ गया हो।’ बाढ़ का पानी, कीचड़ और मलबा उन्हें अपने साथ बहाकर ले जाने लगा। लेकिन तभी अचानक किस्मत से वे एक आम के पेड़ में जाकर अटक गए।

बिबेक ने कहा कि ‘सौभाग्य से मैं एक आम के पेड़ में अटक गया। अगर वह आम का पेड़ न होता तो मैं बहकर मौत के मुंह में चला जाता।’ बिबेक ने बताया कि जब वे पेड़ को पकड़े हुए थे तब उन्होंने अपनी आंखों के सामने उस पूरे मकान को गायब होते देखा जहां वे काम कर रहे थे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। पानी के तेज बहाव और एक बड़े पत्थर की चपेट में आने से उनके दाहिने पैर में काफी चोटें आई हैं।

कीचड़ की दीवार में बह गई पत्नी, हेलीकॉप्टर से बचाए गए केशव प्रसाद

ऐसी ही कुछ कहानी 68 साल के केशव प्रसाद बराल की है। बाढ़ आने पर उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। उन्होंने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने अपने घर की तरफ कीचड़ का एक विशाल गुबार आते देखा। उन्होंने कहा कि कीचड़ का एक बहुत बड़ा सैलाब सीधा हमारी ओर आ रहा था। जैसे-जैसे यह करीब आ रहा था, इसकी ऊंचाई और बढ़ती जा रही थी।

जब कीचड़ घर में दाखिल हुआ तो केशव ने अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उन्हें छत पर ले जाने की कोशिश की। लेकिन कीचड़ के प्रचंड बहाव ने उनकी पत्नी को खींच लिया और वे बह गईं। बाद में केशव प्रसाद को हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया लेकिन उनकी पत्नी अब भी कीचड़ के नीचे लापता हैं। शायद उनकी जान नहीं बच पाई है।

पीने को एक गिलास पानी तक नहीं बचा

बाढ़ प्रभावित एक और बस्ती में रहने वाली दीपिका (बदला हुआ नाम) ने भी इस तबाही का खौफनाक मंजर देखा। वे सुबह करीब 9:30 बजे अपने घर के बाहर बर्तन धो रही थीं। तभी उन्होंने त्रिशूली नदी के बाढ़ के पानी को तेज स्पीड से आते देखा। एनडीटीवी को उन्होंने बताया कि बाहर होने की वजह से वे तुरंत अपने परिवार को अलर्ट कर पाईं और उन्हें लेकर घर की छत पर भाग कर गईं।

त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक हुए इस इजाफे से उनके घर की पहली मंजिल पूरी तरह कीचड़ से भर गई। उनका परिवार तो बच गया लेकिन घर का सारा सामान और जमा पूंजी मलबे में दफन हो गई। दीपिका ने बताया कि उनके पास पीने के लिए एक गिलास पानी तक नहीं बचा है। उन्होंने अपने आंगन की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां पीने के पानी का मटका रखा हुआ करता था अब वहां कुछ नहीं है।

इसी तरह एक दूसरी पीड़िता कल्पना मल्ला ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने पिता, मां, बहन और बहन के बच्चों को पानी के तेज बहाव में बहते देखा। कल्पना और उनका बेटा किसी तरह एक मकान की छत पर चढ़ने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि उनके पास बचने का कोई मौका ही नहीं था। इस बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया, लेकिन मैं और मेरा बेटा किसी तरह छत पर चढ़कर बच पाए।

सड़कों और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान, इसरो ने बताई वजह

बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों के लोग नेपाल सेना के ट्रेनिंग सेंटर के बाहर अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी पाने के लिए जमा हो रहे हैं। यहां से हेलीकॉप्टर रेस्क्यू ऑपरेशन का संचालन किया जा रहा है। पुलिस लापता लोगों के नाम दर्ज कर रही है। इस आपदा ने देश के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक प्रभावित इलाके के छह बड़े हाइड्रोपावर स्टेशनों को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में आई इस विनाशकारी बाढ़ की मुख्य वजह ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में एक बड़े ग्लेशियर का ढहना हो सकता है। तबाही के पूरे पैमाने का आकलन अभी जारी है और मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।