2 दिन के अंदर बिक गए 26 हजार टिकट, INDvsNZ सीरीज को लेकर उत्साह चरम पर

भारत के लाल और सफेद गेंद की क्रिकेट सीरीज के आगामी न्यूजीलैंड दौरे को लेकर प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह है और मेजबान क्रिकेट बोर्ड द्वारा सदस्यों के लिए शुरू की गई टिकटों की बिक्री के शुरुआती 48 घंटे में 26,000 टिकट बिक गए।अक्टूबर में शुरू होने वाला 12 मैच का यह दौरा न्यूजीलैंड क्रिकेट के ‘क्रिकेट नेशन’ सदस्यों के लिए सोमवार को शुरू हुई टिकट बिक्री में अब तक का सबसे बड़ा आकर्षण बनकर उभरा है।

ऑकलैंड के ईडन पार्क में होने वाले सीमित ओवर के मुकाबलों के टिकटों की बिक्री सबसे तेज रही है। क्राइस्टचर्च और वेलिंगटन में भी टिकटों की अच्छी मांग सामने आई है।

नौ हजार दर्शकों की क्षमता वाले हेगले ओवल में 22 और 24 अक्टूबर को होने वाले शुरुआती दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के अलावा 27 नवंबर से एक दिसंबर तक होने वाले दूसरे और अंतिम टेस्ट के भी खचाखच भरने की उम्मीद है।    वेलिंगटन में होने वाले तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय और दूसरे एकदिवसीय मैच के टिकटों की बिक्री भी शुरुआती चरण में मजबूत रही है। बेसिन रिजर्व में 19 नवंबर से पहला टेस्ट खेला जाएगा।

न्यूजीलैंड क्रिकेट के मुख्य विपणन एवं वाणिज्यिक अधिकारी ग्लेन क्रिचली ने कहा कि प्रशंसकों ने समय रहते टिकट सुरक्षित करने की अपील पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।

न्यूजीलैंड क्रिकेट ने किचली के हवाले से कहा, ‘‘शुरू से ही हमारा संदेश प्रशंसकों के लिए यही रहा है कि वे पहले से तैयारी कर लें जिससे कि टिकट से वंचित नहीं रह जाएं और पहले दो दिनों में रिकॉर्ड बिक्री से साबित होता है कि कई लोगों ने हमारी बात सुनी है।’’

उन्होंने कहा कि भारत से जुड़े क्रिकेट मुकाबलों का रोमांच महसूस करने और दुनिया के कुछ सबसे बड़े खेल सितारों को प्रतिस्पर्धा करते देखने का यह न्यूजीलैंड के प्रशंसकों के लिए दुर्लभ अवसर है।क्रिचली ने कहा कि टिकटों की कीमत पिछले सत्र के समान रखी गई है और ‘क्रिकेट नेशन’ के प्रवेश कोड का इस्तेमाल करने पर एक टिकट 30 न्यूजीलैंड डॉलर से कम में उपलब्ध है।

आम दर्शकों के लिए टिकटों की बिक्री सात सितंबर से शुरू होगी। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा कि प्रशंसक ‘क्रिकेट नेशन’ के लिए पंजीकरण कर पूर्व बिक्री का लाभ उठा सकते हैं और 15 प्रतिशत की छूट प्राप्त कर सकते हैं।

LPG New Connection: LPG के नए कनेक्शन पर लगी रोक कब हटेगी? पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिया बड़ा अपडेट

LPG New Connection: अगर आप नया LPG गैस कनेक्शन लेने की तैयारी कर रहे हैं तो फिलहाल आपको थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका-ईरन के बीच चल रहे विवाद के बीच देशभर में नए घरेलू LPG कनेक्शन जारी करने पर अस्थायी रोक लगी हुई है। तेल कंपनियां फिलहाल नए कनेक्शन की बुकिंग नहीं कर रही हैं। मौजूदा ग्राहकों को गैस सिलेंडर की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

तेल कंपनियों के मुताबिक, मार्च 2026 से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के नए कनेक्शन जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में नए कनेक्शन के लिए आवेदन करने वाले लोगों को फिलहाल इंतजार करना पड़ रहा है।

सरकार ने नए कनेक्शन पर रोक की वजह बताई

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया के जरिए स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए नए LPG कनेक्शन जारी करना अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। मंत्रालय के मुताबिक, इस समय LPG वितरकों का मुख्य फोकस मौजूदा ग्राहकों को समय पर रिफिल उपलब्ध कराने पर है, ताकि पहले से कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए कनेक्शन पर लगी रोक स्थायी नहीं है। पश्चिम एशिया की स्थिति सामान्य होने और LPG आपूर्ति स्थिर रहने के बाद नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा सकती है।

अभी सिर्फ मौजूदा ग्राहकों को मिल रही गैस

फिलहाल, तेल कंपनियां नए उपभोक्ताओं के बजाय पुराने ग्राहकों की जरूरत पूरी करने पर जोर दे रही हैं। जिन लोगों के कनेक्शन पहले से मौजूद हैं, उन्हें रिफिल उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, निष्क्रिय या बंद पड़े कनेक्शनों को दोबारा सक्रिय करने की प्रक्रिया जारी है।

इसके साथ ही उपभोक्ताओं से KYC पूरा कराने पर भी लगातार जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य फर्जी और डुप्लीकेट LPG कनेक्शनों को हटाना और वास्तविक उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

LPG की सप्लाई फिलहाल स्थिर, लेकिन आगे का अनुमान मुश्किल

‘द हिंदू’ अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, FLDI के महासचिव पवन सोनी ने कहा कि फिलहाल LPG की आपूर्ति की स्थिति स्थिर है। लेकिन यह स्थिरता कितने समय तक बनी रहेगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में लगातार बने हुए तनाव के कारण यह निश्चित नहीं है कि तेल कंपनियां LPG लेकर कितने जहाज भारत तक ला पाएंगी। यही वजह है कि सरकार और कंपनियां मौजूदा स्टॉक और सप्लाई को लेकर सतर्कता बरत रही हैं।

नया कनेक्शन नहीं मिल रहा तो क्या विकल्प है?

जिन लोगों को फिलहाल 14.2 किलो का नया घरेलू LPG कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए कुछ डिस्ट्रीब्यूटर 5 किलो या 10 किलो के सिलेंडर का विकल्प बता रहे हैं। खास तौर पर बड़े शहरों में 10 किलो का FTL (Free Trade LPG) सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसे बुक कराया जा सकता है और जरूरत के मुताबिक डिलीवरी भी ली जा सकती है। हालांकि, उपलब्धता और नियम क्षेत्र तथा वितरक के हिसाब से अलग हो सकते हैं।

होर्मुज संकट का LPG सप्लाई पर क्यों पड़ा असर?

पश्चिम एशिया में तनाव का भारत की LPG सप्लाई पर सीधा असर इसलिए पड़ता है क्योंकि देश अपनी LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। पहले भारत के LPG आयात का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से आता था। करीब 90 फीसदी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते पहुंचता था।

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री रूट्स से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी। इसके बाद भारत ने LPG की उपलब्धता बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अमेरिका से LPG और LNG की खरीद भी बढ़ाई है। अमेरिका से आने वाली LPG को भारत तक पहुंचने में लंबा समुद्री रास्ता तय करना पड़ता है। पश्चिम एशिया से आने वाली आपूर्ति की तुलना में इसकी लागत भी अधिक हो सकती है।

कब से शुरू होगी नए कनेक्शन की बुकिंग?

सबसे अहम सवाल यही है कि नया LPG कनेक्शन कब से मिलना शुरू होगा? फिलहाल सरकार ने कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, यह रोक अस्थायी है। स्थिति सामान्य होने पर नए कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया बहाल की जाएगी। यानी अभी उपभोक्ताओं को निश्चित तारीख का इंतजार करना होगा।

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फिलहाल सरकार की प्राथमिकता मौजूदा LPG ग्राहकों को नियमित रिफिल उपलब्ध कराना है। पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई और देश में LPG की उपलब्धता पर नजर रखी जा रही है। जैसे ही आपूर्ति व्यवस्था पर्याप्त रूप से स्थिर होगी, नए कनेक्शन की बुकिंग दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।

Highest Paying Jobs: सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं, ये लोग कमा रहे लाखों! PG मालिक से चायवाले तक की लिस्ट वायरल

भारत में अक्सर युवाओं को बताया जाता है कि IIT की पढ़ाई, FAANG जैसी बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी या Data Structures and Algorithms (DSA) में महारत हासिल करना अच्छी कमाई का सबसे आसान रास्ता है। लेकिन टेक और AI कमेंटेटर साक्षी ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार लिस्ट शेयर कर इस सोच को ही उलट दिया। उन्होंने भारत में इस समय सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की एक मजाकिया रैंकिंग साझा की, जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर टॉप पर नहीं, बल्कि काफी पीछे नजर आए। इस लिस्ट में PG मालिक, मकान मालिक, पानी के टैंकर वाले और चाय-सिगरेट की दुकान चलाने वाले शामिल हैं।

नंबर-1 पर PG मालिक, एक कमरे से लाखों की कमाई

साक्षी की इस मजेदार रैंकिंग में सबसे ऊपर PG मालिक को रखा गया। उन्होंने बताया कि शहरों में बढ़ती नौकरी और किराए की मांग का फायदा PG के मालिकों को मिल रहा है। उनके मुताबिक, एक कमरे में तीन लोगों को रखा जाता है और हर व्यक्ति से करीब ₹10,000 से ₹15,000 तक किराया लिया जाता है। इस हिसाब से कुछ PG मालिक किराया और दूसरे खर्च निकालने के बाद भी ₹1 लाख से ₹1.5 लाख महीने तक कमा सकते हैं। यही वजह है कि पोस्ट में PG बिजनेस को आज के दौर के सबसे कमाई वाले कामों में से एक बताया गया।

बेंगलुरु के मकान मालिक भी पीछे नहीं

लिस्ट में तीसरे नंबर पर बेंगलुरु के मकान मालिक का जिक्र किया गया। टेक सिटी में किराए की बढ़ती मांग को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चाएं होती रहती हैं। पोस्ट में मजाकिया अंदाज में बताया गया कि दो बेडरूम का फ्लैट खरीदकर उसे करीब ₹50,000 महीने के किराए पर देना, हर साल किराया बढ़ाना और WhatsApp पर सिर्फ ‘last price’ लिखकर बातचीत खत्म करना भी कमाई का शानदार तरीका बन गया है।

पानी के टैंकर वाले भी बने ‘बिजनेस किंग’

बेंगलुरु में पानी की समस्या किसी से छिपी नहीं है। इसी को लेकर साक्षी ने पानी के टैंकर संचालकों को भी अपनी लिस्ट में जगह दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि ये लोग बेंगलुरु का ही पानी वापस बेंगलुरु के लोगों को बेचते हैं। पानी की कमी के समय टैंकरों की मांग बढ़ने से इस कारोबार की कमाई भी बढ़ जाती है।

ब्रोकरों की कमाई का भी किया जिक्र

रैंकिंग में प्रॉपर्टी ब्रोकर भी शामिल हैं। पोस्ट के मुताबिक, कुछ ब्रोकर किरायेदारों को कई ऐसे घर दिखाते हैं जो उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं होते और आखिर में डील होने पर किरायेदार और मकान मालिक, दोनों से करीब एक महीने के किराए के बराबर कमीशन ले लेते हैं। बेंगलुरु जैसे शहरों में लगातार घर बदलने वाले किरायेदारों की बड़ी संख्या के कारण यह काम भी अच्छी कमाई वाला बताया गया।

टेक पार्क के बाहर चाय-सिगरेट वाला भी हिट

इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर जिस शख्स को रखा गया, वह शायद सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम है टेक पार्क के बाहर चाय, सिगरेट और स्नैक्स बेचने वाला दुकानदार। साक्षी ने उसे टेक इंडस्ट्री का ‘अनसंग हीरो’ बताया। उनके अनुसार, हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोजाना चाय, सिगरेट और स्नैक्स के लिए ऐसी दुकानों पर निर्भर रहते हैं। पोस्ट में अनुमान लगाया गया कि अच्छी लोकेशन वाली ऐसी दुकान से कुछ दुकानदार ₹30,000 से ₹50,000 महीने तक कमा सकते हैं।

न MBA, न फंडिंग, फिर भी कमाई!

इस पूरी पोस्ट का सबसे मजेदार हिस्सा यही था। चाय-सिगरेट की दुकान के लिए न किसी MBA की जरूरत है, न pitch deck की और न ही startup funding की। साक्षी ने इसी अंदाज में टेक इंडस्ट्री पर तंज कसते हुए बताया कि जहां इंजीनियर नौकरी और प्रमोशन के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, वहीं कुछ छोटे कारोबारी रोजमर्रा की जरूरतों के दम पर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर आया सबसे बड़ा तंज

पोस्ट के अंत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लेकर सबसे मजेदार टिप्पणी की गई। साक्षी ने लिखा कि जब बाकी लोग अलग-अलग तरीकों से कमाई कर रहे हैं, तब सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात 2 बजे तक DSA के सवाल हल कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अगली salary hike अच्छी होगी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने भी लिए मजे

साक्षी की पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसे खबर लिखने तक 1.5 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। यूजर्स ने भी अपने-अपने अंदाज में इस रैंकिंग पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने कमाई का सबसे मुश्किल रास्ता चुना है और उन्हें DSA की तैयारी के बजाय पानी का टैंकर खरीद लेना चाहिए था। एक अन्य यूजर ने बेंगलुरु का असली ‘product-market fit’ AI या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि चाय, प्रॉपर्टी और मेट्रो से दूरी का गणित बताया। एक यूजर ने टैक्स को लेकर भी तंज कसा और कहा कि इन कामों में कमाई करने वालों में शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही ऐसा व्यक्ति है जो नियमित रूप से इनकम टैक्स और ITR जैसी चीजों से जूझता है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Parag Parikh Fund: फंड मैनेजर राजीव ठक्कर की चाल! 39 शेयर्स समान, फिर भी क्यों अलग हैं Flexi Cap और Large Cap?

Parag Parikh Flexi Cap vs Large Cap: पराग पारिख म्यूचुअल फंड (PPFAS) के निवेशकों के बीच इस समय सबसे बड़ी चर्चा Parag Parikh Flexi Cap Fund और हाल ही में लॉन्च हुए Parag Parikh Large Cap Fund को लेकर है। दोनों ही फंड्स का प्रबंधन मुख्य रूप से जाने-माने फंड मैनेजर राजीव ठक्कर संभाल रहे हैं।

मनीकंट्रोल के जुलाई 2026 के पोर्टफोलियो विश्लेषण (ACE MF डेटा) के अनुसार, दोनों फंड्स में 39 शेयर एक जैसे हैं। पहली नजर में देखने पर दोनों स्कीम्स काफी हद तक समान लग सकती हैं, लेकिन पोर्टफोलियो आवंटन और स्ट्रैटेजी के स्तर पर इनमें बड़े अंतर हैं।

रिटर्न की स्थिति: 6 महीने से 3 साल का ट्रैक रिकॉर्ड

Parag Parikh Flexi Cap Fund: इस फंड ने इस साल अब तक -4.57% और 1 साल में -1.79% का रिटर्न दिया है। हालांकि, इसका 3 साल का सालाना रिटर्न 13.87% का रहा है।

Parag Parikh Large Cap Fund: नए फंड ने अपने शुरुआती 6 महीनों की अवधि में -2.11% का रिटर्न दिया है।

एसेट एलोकेशन: लार्ज कैप का दायरा और विदेशी शेयर

दोनों फंड्स के मैंडेट के मुताबिक उनके एसेट एलोकेशन में बड़ा अंतर है:

लार्ज कैप शेयर: फ्लेक्सी कैप फंड अपने पोर्टफोलियो का 64.85% हिस्सा लार्ज कैप कंपनियों में रखता है, जबकि लार्ज कैप फंड में यह हिस्सेदारी 95.25% है।

विदेशी शेयर व कैश: फ्लेक्सी कैप फंड में 11.06% आवंटन ग्लोबल शेयर्स (जैसे- Alphabet, Amazon, Meta और Microsoft) में है। इसके अलावा 7.15% डेट और 4.60% कैश में है। इसके विपरीत, लार्ज कैप फंड 99.16% पैसा सिर्फ भारतीय इक्विटी में ही लगाता है।

39 शेयर कॉमन, लेकिन असली ओवरलैप सिर्फ 37.27%

डेटा दिखाता है कि दोनों स्कीम्स में 39 स्टॉक्स बिल्कुल समान हैं। ये कॉमन शेयर फ्लेक्सी कैप के 67.38% और लार्ज कैप के 68.32% पोर्टफोलियो को कवर करते हैं।हालांकि, दोनों फंड्स में कंपनियों को दिया गया वेटेज अलग-अलग है, जिससे इनका वास्तविक वेटेड पोर्टफोलियो ओवरलैप सिर्फ 37.27% निकलकर आता है:

Bajaj Finance: लार्ज कैप फंड में 2.22% वेटेज है, जबकि फ्लेक्सी कैप में सिर्फ 0.41%।

State Bank of India: लार्ज कैप में 3.08% बनाम फ्लेक्सी कैप में महज 0.09%।

Power Grid & ITC: पावर ग्रिड फ्लेक्सी कैप में 5.98% है तो लार्ज कैप में 0.93%। वहीं ITC फ्लेक्सी कैप में 5.74% और लार्ज कैप में 1.96% है।

HDFC Bank: दोनों फंड्स का सबसे बड़ा होल्डिंग शेयर HDFC Bank है, जो फ्लेक्सी कैप में 7.55% और लार्ज कैप में 8.31% है। इसके अलावा ICICI Bank, Bharti Airtel और Infosys दोनों में प्रमुखता से शामिल हैं।

स्टॉक्स की संख्या और पोर्टफोलियो कंसंट्रेशन

राजीव ठक्कर एक ही फंड मैनेजर होने के बावजूद दोनों फंड्स में डायवर्सिफिकेशन की रणनीति अलग रख रहे हैं:

कुल शेयर्स: फ्लेक्सी कैप के पास 61 भारतीय और 4 विदेशी शेयर (कुल 65) हैं। वहीं, लार्ज कैप फंड ने 103 शेयरों में अपना पैसा फैलाया हुआ है।

टॉप 10 स्टॉक्स: फ्लेक्सी कैप के टॉप 10 शेयर पोर्टफोलियो का 52.31% हिस्सा बनाते हैं, जबकि लार्ज कैप में टॉप 10 शेयर सिर्फ 42.79% बनाते हैं।

टॉप 5 सेक्टर्स: फ्लेक्सी कैप के 5 बड़े सेक्टर्स का योगदान 62.97% है, जबकि लार्ज कैप में यह 55.60% है।

इसका मतलब है कि व्यापक निवेश छूट होने के बावजूद फ्लेक्सी कैप फंड ज्यादा कंसंट्रेटेड पोर्टफोलियो चला रहा है, जबकि लार्ज कैप फंड ने अपनी पूंजी को कई शेयरों में फैला रखा है।

निवेशकों के लिए केवल 39 कॉमन शेयर्स देखकर दोनों फंड्स को एक जैसा मान लेना सही नहीं होगा। फ्लेक्सी कैप फंड जहां कंसंट्रेटेड इंडियन इक्विटी के साथ इंटरनेशनल एक्सपोजर और डेट का बैलेंस देता है, वहीं लार्ज कैप फंड पूरी तरह से भारतीय लार्ज कैप कंपनियों के एक बड़े बास्केट में निवेश करता है। 6 महीने की अवधि नए फंड के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए छोटी है, लेकिन पोर्टफोलियो डेटा यह साफ करता है कि कंपनियां भले एक हों, निवेश की दिशा अलग है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

4.9 तीव्रता से आए भूकंप के कारण टूटा ग्लेशियर, क्या आइस-रॉक एवलॉन्च है तबाही की वजह?

4.9 तीव्रता से आए भूकंप के कारण टूटा ग्लेशियर, क्या आइस-रॉक एवलॉन्च है तबाही की वजह?

nepal flood

नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की प्रमुख इकाई राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने शुरुआती सैटेलाइट आधारित रिसर्च किया है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों का उपयोग करते हुए वैज्ञानिकों ने तबाही के पैमाने का आकलन किया और उन घटनाओं को समझने की कोशिश की, जिनके कारण हाल के सालों में हिमालयी क्षेत्र की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक सामने आई।

वर्तमान में भारत के 56 उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में सक्रिय हैं। NRSC के शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, इस आपदा की शुरुआत तिब्बत के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में हुई। वैज्ञानिकों का मानना है कि 4.9 तीव्रता के भूकंप ने संभवतः एक सर्क ग्लेशियर (Cirque Glacier) को प्रभावित किया, जिसके बाद उसका एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इस घटना से बर्फ और चट्टानों का विशाल हिमस्खलन हुआ, जो तेजी से नीचे घाटी की ओर बढ़ा। जो भारी मात्रा में पानी, मिट्टी, चट्टानें और मलबा लेकर अचानक नीचे की ओर बहा. इससे त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आई, जिसने व्यापक तबाही मचाई। सैटेलाइट इमेज की स्टडी कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि सर्क ग्लेशियर का ढहना और उसके बाद हुआ आइस-रॉक एवलॉन्च इस आपदा की सबसे संभावित वजह है।

पहाड़ी इलाकों को ज्यादा खतरा : इन झीलों से पैदा होने वाला खतरा मुख्य रूप से उन पर्वतीय और पहाड़ी जिलों में केंद्रित हैं, जो नीचे की ओर बहने वाली नदी घाटियों के रास्ते में स्थित हैं। यदि कोई बड़ा 'ग्लोफ' होता है, तो इन क्षेत्रों के लोगों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। पूर्वी और मध्य नेपाल, जिनमें कोशी और बागमती नदी बेसिन शामिल हैं, वहां कुल क्षेत्रीय जोखिम का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रित है। सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में सोलुखुम्बु शामिल है, जहां दूध कोसी और इमजा बेसिन आते हैं। संखुवासभा जिला बरुण और अरुण नदी घाटियों के किनारे स्थित है। दोलखा जिला तामा कोशी नदी कॉरिडोर में है और त्सो रोल्पा झील से खतरे का सामना कर सकता है।

8th Pay Commission: 3.61 से 4.00 तक फिटमेंट फैक्टर की मांग! जानिए कितनी बढ़ेगी बेसिक सैलरी और पेंशन?

8th Pay Commission Fitment Facto: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। 7वें वेतन आयोग में जहां फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था जिससे न्यूनतम बेसिक पे ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हुई थी। अब 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी यूनियनों ने 3.61 से लेकर 4.00 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।

कागज पर फिटमेंट फैक्टर के ये आंकड़े छोटे लग सकते हैं, लेकिन असलियत में इनसे हर महीने कर्मचारियों की सैलरी में हजारों रुपये का अंतर आने वाला है।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों है अहम?

फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर होता है, जिसे कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे से गुणा करके नए वेतन आयोग के तहत नई सैलरी तय की जाती है। यह न केवल महंगाई भत्ते (DA) के असर को समाहित करता है, बल्कि कर्मचारियों की वास्तविक आय में वृद्धि भी सुनिश्चित करता है। पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन तय करने में भी इसी फैक्टर का इस्तेमाल होता है।

यूनियनों की प्रमुख मांगें: किसकी कितनी है सिफारिश?

अलग-अलग कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी-अपनी मांगें और कैलकुलेशन रखी हैं:

BPMS (फिटमेंट फैक्टर 4.00 – न्यूनतम पे ₹72,000): भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने सबसे ज्यादा 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। इसके तहत न्यूनतम बेसिक पे ₹72,000 तय करने का प्रस्ताव है। BPMS का कहना है कि इसमें 1.58 घटक केवल महंगाई भत्ते (DA) के असर को बेअसर करने के लिए है, जबकि बाकी हिस्सा राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के आधार पर है।

NCJCM स्टाफ साइड और BPS (फिटमेंट फैक्टर 3.833 – न्यूनतम पे ₹69,000): नेशनल काउंसिल JCM (स्टाफ साइड) और भारत पेंशनर्स समाज (BPS) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है।

इसके तहत न्यूनतम सैलरी ₹69,000 होगी। NCJCM ने 5 सदस्यों के परिवार के खाने, कपड़े, मकान, शिक्षा, शादी और तकनीक जैसे 15वें ILC मानदंडों के आधार पर यह गणना की है।

MSA (फिटमेंट फैक्टर 3.61 – न्यूनतम पे ₹65,000): मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन (MSA) ने 3.61 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है, जिससे न्यूनतम पे ₹65,000 (लेवल-1) हो जाएगी।

सैलरी मैट्रिक्स: लेवल के हिसाब से कितना होगा फायदा?

अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के कारण पे-मैट्रिक्स में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है:

लेवल 1: MSA (3.61) के तहत ₹64,980, NCJCM (3.833) के तहत ₹69,000 और BPMS (4.00) के तहत यह ₹72,000 होगी।

लेवल 6: NCJCM के प्रस्ताव के अनुसार बेसिक पे बढ़कर ₹1,35,700 हो जाएगी।

लेवल 9 व 10 (मर्ज्ड): NCJCM के तहत यह ₹2,15,100 तक पहुंच जाएगी।

क्या सरकार उठा पाएगी इसका वित्तीय बोझ?

NCJCM का तर्क है कि 2014-15 के बाद से देश की जीडीपी में 165.23% और कुल कर राजस्व में 205.41% की भारी वृद्धि हुई है। इसलिए सरकार के पास वेतन में इस बढ़ोतरी के वित्तीय प्रभाव को आसानी से संभालने की पूरी क्षमता है। रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने भी जोर दिया है कि बेसिक पे में पर्याप्त बढ़ोतरी न होने से रिटायर्ड कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होती है।

50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और लाखों पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग द्वारा चुना जाने वाला फिटमेंट फैक्टर बेहद निर्णायक होगा। यह न केवल हर महीने मिलने वाली इन-हैंड सैलरी तय करेगा, बल्कि पेंशन, ग्रेच्युटी की सीमा और कम्यूटेशन अमाउंट पर भी लंबे समय तक असर डालेगा।

Aaj ka Mausam: आज तूफानी मौसम: आज यूपी-बिहार संग इन 15 राज्यों में IMD ने दिया भारी बारिश का अलर्ट, 40 kmph की रफ्तार से आएगा अंधड़

IMD Weather Update: देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून का उग्र रूप देखने को मिल रहा है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज यानी 27 अगस्त के लिए मौसम का बुलेटिन जारी करते हुए देश के 13 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में तेज आंधी, वज्रपात और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की चेतावनी जारी की गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है। इसे लेकर स्थानीय प्रशासन और आम जनता को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं।

उत्तर भारत का मौसम: यूपी में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, उत्तराखंड और राजस्थान में बिजली कड़कने की चेतावनी

उत्तर भारत के राज्यों में आज मानसून काफी सक्रिय रहने वाला है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अलग अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने की पूरी संभावना है। यूपी के कई जिलों में बारिश के चलते जलभराव और नदियों के जलस्तर पर असर पड़ सकता है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड और पश्चिमी भारत के पूर्वी राजस्थान में आज अलग-अलग स्थानों पर गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में लोगों को खराब मौसम के दौरान पेड़ों या खुले स्थानों के नीचे जाने से बचने की सलाह दी है।

पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड, बंगाल और ओडिशा में भारी बारिश और 40 kmph की रफ्तार से चलेगा अंधड़

पूर्वी भारत के मैदानी इलाकों के लिए आज का दिन मौसम के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक आज बिहार, झारखंड, ओडिशा और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है।

बारिश के साथ-साथ इन पूर्वी राज्यों में मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा रहेगा। बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने, अंधड़ आने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है।

पूर्वोत्तर और मध्य भारत: असम, मेघालय, एमपी और छत्तीसगढ़ में बरसेगी आफत

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मूसलाधार बारिश का दौर लगातार जारी है। आईएमडी के अलर्ट के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में आज अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ ही नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी भारी बारिश का अनुमान जताया गया है।

इन सभी सातों पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश के दौरान गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं दर्ज की जा सकती हैं। मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आज भारी बारिश होने के आसार हैं। इसके अलावा इन दोनों ही राज्यों में आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी भी दी गई है।

दक्षिण भारत का हाल: केरल में भारी बारिश, आंध्र और तमिलनाडु में तेज हवाओं का प्रकोप

दक्षिण भारत में भी मानसूनी गतिविधियां जोर पकड़ रही हैं। केरल और माहे के अलग-अलग हिस्सों में आज भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। दक्षिण के अन्य राज्यों में तेज हवाओं का असर देखने को मिलेगा। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में अलग-अलग जगहों पर तेज सतही हवाएं चलने का भी पूर्वानुमान है।

अंडमान में तूफानी हवाएं, समुद्र में मछुआरों के लिए रेड अलर्ट जारी

द्वीपीय इलाकों की बात करें तो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आज 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। समुद्री क्षेत्रों में उथल-पुथल को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। अरब सागर में सोमालिया व ओमान तटों के साथ-साथ उत्तर, पूर्व-मध्य और पश्चिम-मध्य अरब सागर के कई हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

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बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे से लेकर 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का अनुमान है। आईएमडी ने मछुआरों को इन खतरनाक समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सख्त सलाह दी है।

ब्रांडेड डिब्बा, नकली दवा! हर 3 में से 1 भारतीय को मिल रहा है नकली मेडिकल सामान! जानिए किस शहर में है सबसे ज्यादा खतरा

ब्रांडेड डिब्बा, नकली दवा! हर 3 में से 1 भारतीय को मिल रहा है नकली मेडिकल सामान! जानिए किस शहर में है सबसे ज्यादा खतरा

Fake Medicine

Fake Medicines India: जनस्वास्थ्य (Public Health) के मोर्चे पर एक बेहद डरावनी और चिंताजनक सच्चाई सामने आई है। बाजार में मिलने वाली नकली दवाएं और हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स पहली नजर में बिल्कुल असली जैसे दिखते हैं। इनकी पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजाइन की नकल इतनी सफाई से की जाती है कि आम मरीज या ग्राहक के लिए असली और नकली का फर्क पहचानना लगभग असंभव हो जाता है। खास बात यह है कि दिल्ली क्राइम ब्रांच ने हाल ही में कैंसर की नकली दवाओं के कारोबार का भंडाफोड़ किया है। देश के 17 राज्यों में फैले इस कारोबार के सिलसिले में 17 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है।

एएसपीए-क्रिसिल (ASPA-CRISIL) की हालिया जारी स्टेट ऑफ काउंटरफिटिंग इन इंडिया 2025” रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सर्वे किए गए हर तीन में से लगभग एक उपभोक्ता (33%) ने पिछले 12 महीनों के दौरान किसी न किसी नकली हेल्थकेयर प्रोडक्ट का सामना किया है। यह समस्या कपड़े या इलेक्ट्रॉनिक्स के नकली होने से कहीं ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि यहाँ सीधे मरीज की जान दांव पर लगी होती है।

 

Fake Medicine

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स्थानीय मेडिकल स्टोर से लेकर ऑनलाइन ऐप्स तक जाल

अक्सर यह माना जाता है कि नकली सामान केवल अनधिकृत या ऑनलाइन बाजारों में मिलता है, लेकिन यह सर्वे इस भ्रम को तोड़ता है। जिन लोगों का सामना नकली हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स से हुआ:

  • 63% लोगों ने स्थानीय रिटेल मेडिकल स्टोर्स को इसका स्रोत बताया।
  • 60% लोगों को ऑनलाइन एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स (दवा डिलीवरी ऐप्स) के जरिए नकली उत्पाद मिले।
  • लगभग एक-तिहाई लोगों को मल्टी-ब्रांड स्टोर्स और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए यह सामान बेचा गया।

कीमत का अंतर : नकली हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स असली की तुलना में औसतन 18% सस्ते होते हैं। हालांकि, रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि 96% लोग अंजाने में नकली दवाएं खरीदते हैं, असली समस्या यह है कि मरीज के पास दुकान पर खड़े होकर असलियत जांचने का कोई आसान जरिया नहीं है।

पैकेजिंग पर भरोसा ही सबसे कमजोर कड़ी

सर्वे के अनुसार, केवल 52% उपभोक्ता ही दवा या हेल्थकेयर प्रोडक्ट खरीदने से पहले उसकी असलियत जांचते हैं। हालांकि, 60% लोगों को यह मुगालता रहता है कि वे खुद नकली सामान पहचान सकते हैं।
लोग आमतौर पर इन चीजों को देखकर फैसला लेते हैं:

  1. पैकेजिंग की क्वालिटी (66%)
  2. होलोग्राम (48%)
  3. क्यूआर कोड (40%)

लेकिन आज के आधुनिक जालसाज पैकेजिंग डिजाइन और ब्रांडिंग की हुबहू नकल कर लेते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ डिब्बा देखकर दवा के असली होने का अंदाजा लगाना जानलेवा साबित हो सकता है।

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2018 से 2025 के बीच दर्ज हुए 521 मामले

एएसपीए (ASPA) के काउंटरफिट न्यूज़ रिपॉजिटरी के अनुसार, वर्ष 2018 से 2025 के बीच हेल्थकेयर क्षेत्र में जालसाजी के 521 आधिकारिक मामले दर्ज किए गए।

  • महामारी में सबसे बड़ा संकट: कोविड-19 (2020-2021) के दौरान नकली पीपीई किट, मास्क, कफ सिरप, जीवनरक्षक दवाओं और यहाँ तक कि नकली वैक्सीन के मामलों में भारी उछाल देखा गया था।

 

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नकली दवा का मुद्दा सिर्फ आर्थिक नुकसान का नहीं, बल्कि सीधे जीवन और मृत्यु का है। भले ही उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ रही हो, लेकिन जब तक हर दवा की रीयल-टाइम प्रामाणिकता (Authenticity) जांचने की मजबूत और आसान डिजिटल व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक जनस्वास्थ्य पर यह बड़ा खतरा मंडराता रहेगा।

Toxic worldwide box office collection day 1: यश स्टारर ने की 140 करोड़ की जबरदस्त ओपनिंग, इन फिल्मों का पहले दिन ही तोड़ा रिकॉर्ड

Toxic worldwide box office collection day 1: गीतू मोहनदास की यश-स्टारर फिल्म ‘टॉक्सिक’ ने सभी उम्मीदों को पीछे छोड़ते हुए बॉक्स ऑफ़िस पर पहले दिन जबरदस्त कमाई की। ‘A’ रेटिंग वाली इस फ़िल्म ने उन सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया, जिनमें भारत में इसकी शुरुआती कमाई लगभग ₹80-85 करोड़ (नेट) और दुनिया भर में ₹110 करोड़ (ग्रॉस) रहने की बात कही गई थी। आखिरकार, ‘टॉक्सिक’ ने देश में ₹100 करोड़ और दुनिया भर में ₹140 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया।

‘Toxic’ बॉक्स ऑफ़िस अपडेट

‘Toxic’ से पूरे भारत में ज़बरदस्त शुरुआत की उम्मीद थी। लेकिन इतनी ज़्यादा उम्मीदों के बावजूद, ‘Toxic’ ने बहुत तेज़ी से कमाई की। Sacnilk की रिपोर्ट के मुताबिक, फ़िल्म ने रिलीज़ के दिन पूरे भारत में ₹101 करोड़ नेट (₹120 करोड़ ग्रॉस) की कमाई की। इसमें फ़िल्म के हिंदी वर्ज़न का बड़ा योगदान रहा, जिसने ₹55 करोड़ कमाए।

कन्नड़ वर्ज़न काफ़ी पीछे रहा और अच्छी ऑक्यूपेंसी के बावजूद ₹25 करोड़ का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाया। तेलुगु डब्ड वर्ज़न ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और उस दिन ₹11 करोड़ नेट कमाए। यह फ़िल्म इस साल घरेलू बाज़ार में किसी भारतीय फ़िल्म की दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फ़िल्म बनी। इससे आगे सिर्फ़ ‘Dhurandhar 2’ थी, जिसने ₹103 करोड़ की ऐतिहासिक शुरुआत की थी।

हालांकि, विदेशी बाज़ार में ‘Toxic’ को वैसी पकड़ नहीं मिली जैसी ‘Dhurandhar 2’ और ‘Pathaan’ को मिली थी। इसने विदेश में अपने पहले दिन $2 मिलियन से कुछ ज़्यादा की कमाई की। फिर भी, यह फ़िल्म को दुनिया भर में ₹140 करोड़ की ओपनिंग-डे ग्रॉस कमाई दिलाने के लिए काफ़ी था, जो कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में दूसरी सबसे ज़्यादा कमाई है।

Toxic ने Jawan, Adipurush और Animal को पीछे छोड़ा

Toxic की पहले दिन की कमाई इसे अब तक की टॉप-15 भारतीय फ़िल्म ओपनिंग में जगह दिलाने के लिए काफ़ी थी। भारत में शानदार प्रदर्शन की बदौलत, गीतू मोहनदास की यह फ़िल्म Pathaan (₹104 करोड़), Animal (₹116 करोड़), Adipurush (₹127 करोड़) और Jawan (₹129 करोड़) जैसी बड़ी फ़िल्मों की ग्लोबल ओपनिंग कमाई को पीछे छोड़ने में कामयाब रही।

 

हालांकि, यह यश के ही ₹164 करोड़ के रिकॉर्ड से पीछे रह गई, जो चार साल पहले KGF Chapter 2 ने बनाया था। यह साल की सबसे बड़ी ओपनिंग – Dhurandhar 2 की ₹205 करोड़ – से भी काफ़ी पीछे रह गई।

Toxic के बारे में सब कुछ

गीतू मोहनदास की डायरेक्ट की गई फ़िल्म Toxic में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, रुक्मिणी वसंत और तारा सुतारिया भी मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फ़िल्म 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई। Toxic अपने हॉट और इंटीमेट सीन और ऐसे सीक्वेंस की वजह से चर्चा में रही है, जिनमें इमेज और डायलॉग के ज़रिए महिलाओं को अच्छी छवि में नहीं दिखाया गया है। CBFC ने बिना किसी कट के और ‘A’ रेटिंग के साथ फ़िल्म को मंज़ूरी दी थी। फ़िल्म को ज़्यादातर नेगेटिव रिव्यू मिले हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में इसके ‘वर्ड ऑफ़ माउथ’ (लोगों की राय) पर पड़ सकता है।

LPG Price 26 August 2026: दिल्ली से बिहार तक 14.2 किलो LPG कितने रुपये की? बुकिंग से पहले यहां चेक करें रेट

LPG Price 26 August 2026: 27 अगस्त 2026, गुरूवार को घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। Indian Oil, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum ने घरेलू गैस के नए रेट जारी कर दिए हैं। 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमतें पहले जैसी ही हैं। यानी घरेलू LPG सस्ती होने का इंतजार कर रहे लोगों को इस बार भी राहत नहीं मिली। शहर के हिसाब से LPG सिलेंडर की कीमत अलग-अलग है। स्थानीय टैक्स, ढुलाई और दूसरे खर्चों की वजह से अलग-अलग जगहों पर गैस के दाम में अंतर रहता है।

दिल्ली में LPG सिलेंडर ₹942

जून में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में ₹29 की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत ₹942 है। मुंबई में ₹941.50, कोलकाता में ₹968 और चेन्नई में ₹957.50 का रेट है।

प्रमुख शहरों में घरेलू LPG के दाम

शहरघरेलू LPG (14.2 किलो)कमर्शियल LPG (19 किलो)
कोलकाता₹968.00₹2,872.50
मुंबई₹941.50₹2,691.50
चेन्नई₹957.50₹2,906.00
गुड़गांव₹950.50₹2,755.00
नोएडा₹939.50₹2,738.00
बैंगलोर₹944.50₹2,821.00
भुवनेश्वर₹968.00₹2,908.00
चंडीगढ़₹951.50₹2,760.00
हैदराबाद₹994.00₹2,985.00
जयपुर₹945.50₹2,765.50
लखनऊ₹979.50₹2,860.50
पटना₹1,031.50₹3,018.00
तिरुवनंतपुरम₹951.00

कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ सस्ता

घरेलू LPG की कीमत में लोगों को राहत नहीं मिली, लेकिन 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में इस महीने की शुरुआत में बड़ी कटौती हुई थी। अलग-अलग शहरों में इसकी कीमत करीब ₹194 से ₹200 तक कम हुई। इससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य कारोबारियों को फायदा हुआ।

अमेरिका से बढ़ रहा LPG आयात

भारत अब LPG के लिए अमेरिका से ज्यादा गैस खरीद रहा है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के कारण LPG सप्लाई के स्रोत में बदलाव देखने को मिल रहा है। Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारत ने अमेरिका से करीब 0.89 मिलियन टन LPG आयात की। अगस्त में अब तक करीब 0.62 मिलियन टन LPG अमेरिका से आई है। अगस्त के कुल LPG आयात में अमेरिकी गैस की हिस्सेदारी करीब 73% बताई गई है।

वहीं, UAE और कतर से LPG की सप्लाई कम हुई है। अगस्त में UAE से करीब 1.40 लाख टन और कतर से करीब 60 हजार टन LPG आई। जुलाई और अगस्त दोनों महीनों में सऊदी अरब से LPG आयात नहीं हुआ।

घर बैठे ऐसे चेक करें LPG का रेट

अगर आप Indane Gas इस्तेमाल करते हैं, तो Indian Oil की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने राज्य और जिले के अनुसार LPG की कीमत देख सकते हैं। Bharat Gas ग्राहक ebharatgas.com के ‘Quick Book & Pay’ विकल्प से रेट चेक कर सकते हैं। HP Gas ग्राहक HP Pay ऐप पर कीमत देख सकते हैं। इसके अलावा UMANG ऐप से भी LPG की कीमत और रिफिल की जानकारी मिल सकती है।

Petrol Diesel Price Today: देशभर में पेट्रोल-डीजल के ताजा भाव जारी, जानें आपके शहर में कितना है दाम