पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल देने पर विचार, E20 को हटाने का कोई प्लान नहीं: BPCL

भारत में E20 पेट्रोल को लेकर बहस के बीच पुराने गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने पर विचार हो रहा है। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी BPCL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर संजय खन्ना ने गुरुवार को यह जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि E20 को हटाकर दोबारा E10 लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

E10 और E20 में क्या अंतर है?

E10 पेट्रोल में 10% इथेनॉल और 90% पेट्रोल होता है। वहीं E20 में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। E20 को लेकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंता रही है। इसमें माइलेज, फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स और मरम्मत से जुड़े सवाल उठे हैं।

पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पर विचार

ऑयल मार्केटिंग कंपनी BPCL के मुताबिक, पुरानी गाड़ियों के लिए अलग से E10 उपलब्ध कराने का विकल्प देखा जा रहा है। संजय खन्ना ने कहा कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर से E10 की सप्लाई करना संभव है। हालांकि, E10 और E20 को एक साथ उपलब्ध कराने के तरीके पर अभी चर्चा चल रही है।

E10 की सप्लाई में क्या दिक्कत है?

ऑयल मार्केटिंग कंपनी BPCL को E10 की सप्लाई में कोई बड़ी लॉजिस्टिक दिक्कत नजर नहीं आती। लेकिन अगर E10 और E20 दोनों को एक साथ बेचना है, तो अलग ग्रेड के पेट्रोल की सप्लाई संभालनी होगी। इसी वजह से सरकार और कंपनियां इसके तौर-तरीकों पर काम कर रही हैं।

E20 को वापस लेने का प्लान नहीं

सरकार पहले ही कह चुकी है कि E20 से वापस E10 या E0 पर जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 10 अगस्त को राज्यसभा में कहा था कि देशभर के एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर E0, E10 और E20 की अलग-अलग सप्लाई रखने से लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज की लागत बढ़ेगी।

हालांकि, BPCL के ताजा बयान से साफ है कि E10 को E20 के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि पुरानी गाड़ियों के लिए एक अलग विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

E10 की मांग क्यों उठी?

E20 को लेकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंता बढ़ी है। लोगों का कहना है कि ज्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल से माइलेज पर असर पड़ सकता है। कुछ पुरानी गाड़ियों में फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स की अनुकूलता को लेकर भी सवाल हैं।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी 17 अगस्त को एक लेख में सुझाव दिया था कि पुरानी गाड़ियों के मालिकों की परेशानी दूर करने के लिए पेट्रोल पंपों पर E10 के साथ E20 भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

E20 की शुरुआत कैसे हुई?

केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से ऑयल कंपनियों को 20% तक इथेनॉल मिला पेट्रोल बेचने का निर्देश दिया था। इस पेट्रोल का न्यूनतम Research Octane Number यानी RON 95 होना भी जरूरी किया गया। इसके बाद पुरानी गाड़ियों के मालिकों में माइलेज और गाड़ी की सेहत को लेकर चिंता बढ़ी।

फिलहाल तस्वीर यही है कि E20 की व्यवस्था जारी रहेगी। पुरानी गाड़ियों के लिए E10 उपलब्ध कराने का विकल्प जरूर सरकार और ऑयल कंपनियों की चर्चा में है।

2030 तक ₹20 लाख करोड़ का हो सकता है EV मार्केट, 5 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी: नितिन गडकरी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कल का मौसम: 28 अगस्त को यूपी, बिहार, एमपी संग इन 14 राज्यों में IMD का मूसलाधार बारिश का अलर्ट, अंधड़ और आंधी-तूफान का खतरा

IMD Heavy Rain Alert: देश के बड़े हिस्से में मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 28 अगस्त के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी करते हुए कई राज्यों में मूसलाधार बारिश, अंधड़ और गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के मुताबिक ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर के राज्यों समेत कुल 14 राज्यों में मूसलाधार बारिश को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। देश के अलग अलग इलाकों में 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने की चेतावनी भी दी गई है।

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ओडिशा में अति भारी बारिश की चेतावनी, बंगाल और झारखंड में भी बिगड़ेगा मौसम

पूर्वी भारत के राज्यों में 28 अगस्त को मौसम का मिजाज सबसे ज्यादा प्रभावित रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक ओडिशा में अलग अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही ओडिशा में आकाशीय बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार, झारखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश होने के आसार हैं। इन क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता बनी रहेगी। बिहार, झारखंड और गांगेय पश्चिम बंगाल व सिक्किम में बिजली चमकने के साथ-साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से अंधड़ और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान दिया गया है। बिहार और झारखंड के नागरिकों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों में न जाने की सलाह दी गई है।

उत्तर भारत का हाल: पूर्वी यूपी में मूसलाधार बारिश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में आंधी-बिजली का अलर्ट

उत्तर भारत में मानसूनी हवाओं का प्रभाव बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक 28 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही पूरे पूर्वी यूपी में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के इलाकों में बिजली कड़कने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान जताया गया है।

मध्य और पूर्वोत्तर भारत: एमपी, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के सातों राज्यों में बरसेगी आफत

मध्य भारत में भी बारिश का प्रकोप जारी रहेगा। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में 28 अगस्त को भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पूरे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली चमकने और गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां बेहद तेज रहने वाली हैं। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। पूर्वोत्तर के इन सभी सातों राज्यों में बारिश के साथ तेज गर्जना और बिजली चमकने की चेतावनी भी दी गई है।

दक्षिण भारत: तेज हवाओं का प्रकोप, अंडमान में तूफानी अंधड़ की चेतावनी

दक्षिण भारत के राज्यों में मूसलाधार बारिश से ज्यादा तेज हवाओं और आंधी का असर देखने को मिलेगा। आंध्र प्रदेश, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, अंधड़ आने और बिजली चमकने का अलर्ट है। इसके अलावा दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। आंध्र प्रदेश और आंतरिक कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों में तेज सतह हवाएं चलने का भी पूर्वानुमान है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मौसम बेहद तूफानी रहने वाला है। यहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।

अरब सागर में खतरनाक हवाएं, मछुआरों के लिए चेतावनी

समुद्री स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने अरब सागर के तटीय और खुले इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया है। सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य अरब सागर के कई हिस्सों, दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ इलाकों और उत्तरी और पूर्व-मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इनकी स्पीड बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक पहुंच सकती हैं। मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।

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आज का एक्सप्लेनर:‘चीन ने जानबूझकर नेपाल को तबाही का अलर्ट नहीं दिया’, इस दावे में कितनी सच्चाई; क्या वाकई बच सकती थीं सैकड़ों जिंदगियां

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर आई बाढ़ में 200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। करीब 1,500 लोग अब भी लापता हैं। दावा किया जा रहा कि काफी जानें बचाई जा सकती थीं, अगर चीन ने समय पर चेता दिया होता। तो क्या वाकई नेपाल में हुई भीषण तबाही के पीछे चीन जिम्मेदार है; दोनों देशों के बीच आपदाओं की वार्निंग देने का क्या सिस्टम है, इसी पर आज का एक्सप्लेनर… सवाल-1: नेपाल में आई बाढ़ के पीछे चीन पर क्या आरोप लग रहे? जवाब: नेपाली पत्रकार परशुराम काफ्ले ने X पर लिखा, ‘चीन ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। अगर बीजिंग के डिजास्टर डिटेक्शन सिस्टम से अर्ली वार्निंग मिल जाती, तो नेपाल में ज्यादा जानें बचाई जा सकती थीं। नेपाल हमेशा चीन की चिंताओं का ध्यान रखता है। इस एकतरफा प्यार की कीमत चुकानी पड़ रही है।’ नेपाल के मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, नेपाल और चीन के बीच मौसम से जुड़ी जानकारियां शेयर करने की व्यवस्था है, लेकिन इस घटना के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई। नेपाल के मौसम विभाग की सीनियर साइंटिस्ट विभूति पोखरेल कहती हैं, ‘हम चीनी अधिकारियों के संपर्क में हैं, लेकिन अभी तक वे नहीं बता पाए हैं कि बाढ़ की वजह क्या है।’ 2016 में भी नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर रसुवागढ़ी इलाके में भीषण बाढ़ आई थी। तब भी एक्सपर्ट्स ने कहा था कि दोनों देशों के बीच समय रहते इन्फॉर्मेशन शेयर की गई होती, तो नुकसान कम किया जा सकता था। सवाल-2: दोनों देशों के बीच ऐसे हादसों की जानकारी देने का नियम है या नहीं? जवाब: नेपाल और चीन के बीच मौसम और आपदा से जुड़ी जानकारियां साझा करने की बात तय हुई थी, लेकिन इस पर कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया है। दरअसल, 8 जुलाई 2025 को रसुवागढ़ी बॉर्डर पॉइंट से 35 किलोमीटर ऊपर चीन के इलाके में तिब्बत के पहाड़ों पर ‘पुरेपु’ नाम की ग्लेशियर झील फटी। इससे भोटेकोशी नदी के आसपास करीब 100 किमी तक के इलाके में बाढ़ का मलबा पहुंचा। एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद नेपाल और चीन ने तीन बातें तय की थीं… नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर सुदीप ठाकुर बताते हैं, ‘तिब्बत में मौसम से जुड़ी इन्फॉर्मेशन इकठ्ठा करने की व्यवस्था है, लेकिन उसे नेपाल के साथ साझा नहीं किया जाता है। चीन को वैज्ञानिक जानकारी देने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन शायद नेपाल सरकार ही मजबूती से अपनी मांग उनके सामने रख ही नहीं पाई है।’ नेपाल की डिजास्टर स्टडी सेंटर के डायरेक्टर वसंत अधिकारी भी कहते हैं कि अब तक जानकारी शेयर करने की कोई व्यवस्था नहीं है। सवाल-3: जानकारी शेयर न करने के आरोप पर चीन ने क्या कहा है? जवाब: चीन ने सीधे तौर पर इसका कोई जवाब नहीं दिया है, हालांकि चीनी दूतावास ने अपने बयान में कहा है कि भूकंप के चलते बाढ़ आई है और ये भूकंप नेपाल की तरफ आया था। बयान में कहा गया, ‘रसुवा-ग्यिरोंग बॉर्डर इलाके में आई बाढ़ से चीन बेहद दुखी है। नेपाल की तरफ आए भूकंप के चलते हिमस्खलन हुआ और फिर मलबा बहा। इससे सीमा के दोनों तरफ लोगों की मौत हुई।’ दरअसल, पहले कहा गया था कि रिक्टर स्केल पर करीब 5 की तीव्रता के भूकंप के चलते बर्फ का ग्लेशियर टूटा, हालांकि बाद में अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने साफ किया कि भूकंप जैसा झटका बर्फ और चट्टान के टूटने से पैदा हुआ था। हालांकि चीनी दूतावास ने ये जरूर कहा है, ‘भविष्य में सीमा पार मौसम और आपदाओं से जुड़ी जानकारियां साझा करने के लिए बेहतर तरीके से काम करेंगे।’ सवाल-4: बर्फ का पहाड़ चीन में गिरा या नेपाल में? जवाब: नेपाल की डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDRRMA के मुताबिक, ग्लेशियर टूटने की जगह नेपाल-चीन सीमा चौकी से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। अथॉरिटी के वैज्ञानिक प्रकाश पोखरेल के मुताबिक, ‘ये इलाका नेपाली हिस्से में आता है, न कि चीन की तरफ।’ हालांकि, नेपाली मौसम वैज्ञानिक विभूति पोखरेल कहती हैं, ‘हम चीनी अधिकारियों के संपर्क में हैं, लेकिन अब तक ये पता नहीं है कि घटना नेपाल में हुई या चीन की तरफ हुई है।’ दरअसल, मानसून सीजन के चलते उस इलाके में काफी बादल हैं। इसलिए सेटेलाइट तस्वीरों से ये साफ नहीं हो पा रहा है कि ग्लेशियर टूटने की सटीक लोकेशन क्या है। मोटे तौर पर जहां ग्लेशियर टूटा, वो इलाका सेंट्रल हिमालयन रेंज की क्रेस्टलाइन पर है। यानी अगर पहाड़ की एक तरफ की ढलान नेपाल में है, तो उसी पहाड़ की दूसरी तरफ की ढलान तिब्बत में है, जिस पर चीन का कंट्रोल है। करीब 8000 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ और ग्लेशियर जमा रहते हैं, जो पिघलकर दोनों तरफ की नदियों के लिए पानी का सोर्स बनते हैं। तकनीकी तौर पर अगर ऊंचाई पर कोई ग्लेशियर टूटे, तो उसका असर नीचे दोनों देशों के तरफ की नदियों पर पड़ सकता है। पोइकू नदी तिब्बत के ग्लेशियर से निकलती है। फिर सीमा पार करके नेपाल में दाखिल होती है और वहां भोटेकोशी कही जाती है, इसी की सहायक नदी ल्हेंदे में बाढ़ आई। एक बात और है- चीन के मुताबिक, पहले भूकंप आया और फिर ग्लेशियर टूटा। जबकि नेपाल सहित दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि पहले ग्लेशियर टूटा, जिससे भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ। सवाल-5: ग्लेशियर टूटने से नेपाल में इतनी भीषण तबाही कैसे आई?
जवाबः पूरी घटना 3 स्टेप में समझिए…. 1. ग्लेशियर टूटा: 26 अगस्त की सुबह करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर करीब 2000 फीट का ग्लेशियर टूटा और 4 हजार फीट नीचे गिर गया। 2: नदी में पानी जमा हुआ: सुबह करीब 8:37 बजे पिघला ग्लेशियर अपने साथ चट्टानों और मलबे को लेकर ल्हेंदे नदी से टकराया। इससे ल्हेंदे नदी पर एक अस्थायी बांध बन गया और पीछे पानी जमा होने लगा। 3. नदी का बांध टूटने से सैलाब बह चला: सुबह करीब 9 बजे बढ़ते पानी के दबाव से नदी का बांध टूटा, तो एक विशाल सैलाब बनकर निचले इलाकों की तरफ बह चला। आगे भोटे कोशी और त्रिशुली नदी में मलबे वाली बाढ़ आ गई। नेपाल के रसुवा से नुवाकोट, धादिंग होते हुए चितवन तक भयावह बाढ़ का असर हुआ। रसुवा में करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुईं। बाढ़ धादिंग जिले के गल्छी तक पहुंची और आगे मुग्लिन की ओर बढ़ने की चेतावनी दी गई। खतरा अभी टला नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल-चीन बॉर्डर के पास नदी में अब भी एक मलबे का अवरोध जमा है, जो किसी भी वक्त टूटकर सैलाब की एक दूसरी लहर छोड़ सकता है। जिस त्रिशुली नदी में यह बाढ़ आई है वह आगे नारायणी नदी से मिलती है। यह भारत के बिहार तक आती है, जहां इसे गंडक नदी कहते हैं। इसे बिहार और यूपी के इलाके भी हाई अलर्ट पर रखे गए हैं। ——— ये वीडियो भी देखिए… 2000 फीट चौड़ा ग्लेशियर टूटा, बिना भूकंप कांपने लगी धरती:देखिए नेपाल की तबाही का शुरू से आखिर तक एक-एक सीन 26 अगस्त, सुबह 8:30 बजे। नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर मौसम साफ था। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले 30 मिनट में क्या होने वाला है। शुरुआत से आखिर तक नेपाल की तबाही का एक-एक सीन, वीडियो देखिए…

2030 तक ₹20 लाख करोड़ का हो सकता है EV मार्केट, 5 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी: नितिन गडकरी

भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी EV बाजार तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि 2030 तक भारत का EV बाजार ₹20 लाख करोड़ का हो सकता है। इससे करीब 5 करोड़ नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।

गडकरी ने CII-ITC Centre of Excellence for Sustainable Development के एक कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने बताया कि भारत में अभी करीब 57 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल रजिस्टर्ड हैं। देश में EV की गाड़ियों के मार्केट में हिस्सेदारी करीब 7% है।

EV बाजार में बड़ा मौका

गडकरी के मुताबिक, भारत के EV सेक्टर में आने वाले वर्षों में तेजी से विस्तार हो सकता है। सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही है। इससे वाहन निर्माण के साथ बैटरी, चार्जिंग और इससे जुड़े दूसरे कारोबार भी बढ़ सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प जैसे बड़े टू-व्हीलर निर्माता भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता दिखा रहे हैं। दोनों कंपनियां अपने बनाए 50% से ज्यादा वाहन विदेशों में एक्सपोर्ट करती हैं।

इलेक्ट्रिक बसों की मांग ज्यादा

गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल करीब 1 लाख इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत है। लेकिन घरेलू कंपनियां अभी सिर्फ 50,000 से 60,000 इलेक्ट्रिक बसें सालाना बना रही हैं।

यानी इस सेगमेंट में अभी भी बड़ी कमी है। सरकार का फोकस घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर है। इससे इलेक्ट्रिक बस बनाने वाली कंपनियों के लिए भी अवसर बढ़ सकते हैं।

ऑटो सेक्टर को नंबर-1 बनाने का लक्ष्य

गडकरी ने कहा कि सरकार अगले पांच साल में भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया का नंबर-1 बनाना चाहती है। उन्होंने माना कि लक्ष्य मुश्किल है। लेकिन इसे हासिल करना असंभव नहीं है।

उनके मुताबिक, जब उन्होंने परिवहन मंत्री का पद संभाला था, तब भारत का ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री करीब ₹14 लाख करोड़ का था। अब इसका आकार करीब ₹22 लाख करोड़ हो गया है।

अमेरिका और चीन से पीछे भारत

गडकरी के मुताबिक, अमेरिका का ऑटोमोबाइल उद्योग करीब ₹78 लाख करोड़ का है। चीन का उद्योग करीब ₹47 लाख करोड़ का है। वहीं भारत का ऑटो सेक्टर करीब ₹23 लाख करोड़ का है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास प्रशिक्षित कर्मचारी और प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता है। इसलिए देश के पास वैश्विक ऑटो हब बनने की क्षमता है।

फॉसिल फ्यूल इंपोर्ट घटाने पर जोर

गडकरी ने कहा कि भारत हर साल करीब ₹22 लाख करोड़ का फॉसिल फ्यूल इंपोर्ट करता है। इससे देश के आयात बिल के साथ प्रदूषण भी बढ़ता है। उन्होंने बायोफ्यूल और दूसरे वैकल्पिक ईंधनों को भविष्य के लिए अहम बताया।

लॉजिस्टिक्स लागत 8% करने का लक्ष्य

सरकार लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर GDP के करीब 8% तक लाने का लक्ष्य रखती है। गडकरी के मुताबिक, इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।

उन्होंने बताया कि IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बेंगलुरु की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत करीब 16% से घटकर 10% रह गई है। सरकार इसे और घटाकर 8% तक लाना चाहती है।

विप्रो ने गूगल क्लाउड के साथ AI पार्टनरशिप बढ़ाई, Wipro ADR में 5% की तेजी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FIFA World Cup खेलने वाली इन 2 टीमों के खिलाफ खेलेगी भारतीय टीम मैच

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ने गुरुवार को बताया कि भारतीय सीनियर पुरुष टीम आगामी फीफा विंडो में 26 सितंबर को पनामा से और छह अक्टूबर को दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे से अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच खेलेगी।इस तरह फीफा विंडो में भारत घरेलू मैदान पर किसी मजबूत टीम के खिलाफ तीसरा अंतरराष्ट्रीय मैत्री मुकाबला खेलेगा।

उरुग्वे के खिलाफ यह मुकाबला कोलकाता में पांच बार की विश्व कप चैंपियन ब्राजील के खिलाफ भारत के अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच के तीन दिन बाद खेला जाएगा।

ब्राजील के खिलाफ मैच भी कोलकाता के विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (सॉल्ट लेक स्टेडियम) में होगा। उरुग्वे के खिलाफ मुकाबला भी इसी प्रतिष्ठित स्टेडियम में आयोजित किया जाएगा।भारतीय टीम 26 सितंबर को बेंगलुरु के कांतीरवा स्टेडियम में पनामा के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच खेलेगी। फीफा की अंतरराष्ट्रीय विंडो 21 सितंबर से छह अक्टूबर तक होगी और इस अवधि में कोई देश अधिकतम चार मैच खेल सकता है।

अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने गुरुवार को एक बयान में कहा, ‘‘भारतीय पुरुष राष्ट्रीय टीम कोलकाता में विश्व फुटबॉल की एक और दिग्गज टीम का स्वागत करेगी। दो बार की फीफा विश्व कप चैंपियन उरुग्वे छह अक्टूबर 2026 को विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन में भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच खेलेगा। यह इस विंडो में भारत का तीसरा हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय मैत्री मैच होगा। ’’

महासंघ ने कहा, ‘‘एक ही फीफा विंडो के दौरान विश्व कप में खेल चुके तीन देश पनामा, ब्राजील और उरुग्वे भारत का दौरा करेंगे। ’’

उरुग्वे फिलहाल फीफा रैंकिंग में 20वें स्थान पर है। उसने 1930 और 1950 में विश्व कप जीता था। टीम 1954, 1970 और 2010 में तीन बार विश्व कप के सेमीफाइनल तक भी पहुंची है।उरुग्वे 2026 विश्व कप में ग्रुप चरण से ही बाहर हो गया। उसने सऊदी अरब के खिलाफ 1-1 और केप वर्डे के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेला जबकि बाद में चैंपियन बनी स्पेन से 0-1 से हार गया।

उरुग्वे को 2022 विश्व कप में भी ग्रुप चरण से बाहर होना पड़ा था। उरुग्वे के मौजूदा मुख्य कोच डिएगो फोर्लान 2016 में मुंबई सिटी एफसी के लिए खेल चुके हैं।इससे पहले एआईएफएफ ने घोषणा की कि बेंगलुरु का श्री कांतीरवा स्टेडियम 26 सितंबर को भारत-पनामा मैत्री मैच की मेजबानी करेगा।

भारतीय टीम सैफ चैंपियनशिप 2023 के बाद बेंगलुरु में खेलेगी। उस टूर्नामेंट में भारत ने इसी मैदान पर फाइनल में कुवैत को हराकर खिताब जीता था।फिलहाल विश्व रैंकिंग में 44वें स्थान पर मौजूद पनामा की टीम भारत को मजबूत चुनौती पेश करेगी। इस मध्य अमेरिकी देश ने फीफा विश्व कप 2026 में भी हिस्सा लिया था जिससे इस मुकाबले का महत्व और बढ़ जाता है।

यह भारत का किसी विश्व कप में खेलने वाले देश के खिलाफ पहला मैत्री मैच होगा। यह व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान खेला जाएगा और इसके ठीक एक सप्ताह बाद भारत तीन अक्टूबर को कोलकाता में पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील के खिलाफ खेलेगा।इसके अलावा भारतीय टीम को 12 और 15 नवंबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ उसके घरेलू मैदान पर दो मैच खेलने हैं।

2030 तक EV सेक्टर में आएंगी 5 करोड़ नौकरियां, 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा मार्केट! नितिन गडकरी का बड़ा दावा

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही इस सेक्टर में 5 करोड़ नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, CII-ITC सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की ओर से आयोजित एक समिट को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भारत में अभी 57 लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं और ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 7 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा, “2030 तक भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट 20 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। इससे 2030 तक पांच करोड़ नौकरियां भी पैदा होंगी।”

इस दौरान गडकरी ने भारत की दो सबसे बड़ी टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनियों, बजाज ऑटो और हीरो मोटोकॉर्प की एक्सपोर्ट क्षमता का भी जिक्र किया और कहा कि वे अपने बनाए गए वाहनों में से 50 प्रतिशत से ज्यादा का एक्सपोर्ट करती हैं।

भारत को और ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों की जरूरत

गडकरी ने कहा कि भारत में हर साल एक लाख इलेक्ट्रिक बसों की मांग है, लेकिन देश के मैन्युफैक्चरर अभी साल में सिर्फ 50,000-60,000 EV बसें ही बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले पांच सालों में भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया में सबसे बड़ा बनाना है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के पास ट्रेंड मैनपावर और कॉम्पिटिटिव व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं हैं।

गडकरी ने आगे कहा, “अगले पांच सालों में हमारा लक्ष्य भारत के ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को दुनिया में नंबर 1 बनाना है… यह मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं।”

उन्होंने कहा कि भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर का आकार काफी बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर का पद संभाला था, तब इस सेक्टर की वैल्यू 14 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अभी US के ऑटोमोबाइल सेक्टर की वैल्यू 78 लाख करोड़ रुपये है, इसके बाद चीन 47 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे और भारत 23 लाख करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है।

फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने पर जोर

गडकरी ने कहा कि भारत फॉसिल फ्यूल के इंपोर्ट पर 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है, जिससे प्रदूषण भी बढ़ता है।

उन्होंने कहा, “हम अच्छे हाईवे बना रहे हैं… अच्छे रास्ते और उनके विकल्प तैयार कर रहे हैं, और बायो-फ्यूल ही भविष्य है।”

लॉजिस्टिक्स लागत के बारे में गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य इसे घटाकर 8% तक लाना है। उनका तर्क है कि लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से ग्लोबल मार्केट में भारत की कॉम्पिटिटिवनेस (प्रतिस्पर्धा क्षमता) बेहतर होगी।

गडकरी ने कहा कि IIT चेन्नई, IIT कानपुर और IIM बैंगलोर की हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16% से घटकर 10% हो गई है।

उन्होंने कहा, “सरकार का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर 8% करना है, जिससे भारत को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलेगी।”

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विप्रो ने गूगल क्लाउड के साथ AI पार्टनरशिप बढ़ाई, Wipro ADR में 5% की तेजी

दिग्गज आईटी कंपनी Wipro के अमेरिकी शेयर यानी अमेरिकन डिपॉजटरी रिसिप्ट (ADR) में गुरुवार को प्री-मार्केट कारोबार में करीब 5% की तेजी दिखी। यह तेजी कंपनी की Google Cloud के साथ AI को लेकर पार्टनरशिप बढ़ाने की घोषणा के बाद आई। भारतीय समयानुसार शाम 4:45 बजे Wipro ADR करीब 4.61% ऊपर कारोबार कर रहा था।

Google Cloud के साथ बढ़ी पार्टनरशिप

आईटी सर्विसेज कंपनी Wipro ने Google Cloud के साथ अपनी पार्टनरशिप को और मजबूत किया है। इसका मकसद कंपनियों में AI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल बढ़ाना है। इसके तहत Wipro Gemini Enterprise और एजेंटिक AI को एंटरप्राइज स्तर पर लागू करने में मदद करेगी।

10,000 से ज्यादा AI एक्सपर्ट तैयार होंगे

आईटी सर्विसेज कंपनी Wipro अपने 10,000 से ज्यादा AI-सर्टिफाइड विशेषज्ञों को एडवांस AI क्षमताओं से लैस करेगी। इनमें करीब 1,500 फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स भी शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि इससे कामकाज बेहतर होगा और फैसले लेने की प्रक्रिया तेज होगी।

AI के लिए LIFT फ्रेमवर्क लॉन्च

आईटी सर्विसेज कंपनी Wipro ने LIFT यानी Launch-Ignite-Flywheel-Transform फ्रेमवर्क भी लॉन्च किया है। इसका मकसद कंपनियों को AI ट्रांसफॉर्मेशन तेजी से लागू करने में मदद करना है। इसके जरिए कंपनियां सामान्य ऑटोमेशन से आगे बढ़कर अपने रोजमर्रा के काम में AI एजेंट का इस्तेमाल कर सकेंगी।

AI एजेंट से होंगे कई काम

आईटी सर्विसेज कंपनी Wipro ने Gemini Enterprise को अपने प्रमुख एजेंटिक AI प्लेटफॉर्म के तौर पर इस्तेमाल किया है। कंपनी के मुताबिक, AI एजेंट कंप्लायंस, HR और सेल्स इंटेलिजेंस जैसे कामों में मदद कर सकते हैं। इससे AI का इस्तेमाल सिर्फ छोटे कामों तक सीमित नहीं रहेगा।

Wipro शेयर का हाल

भारतीय बाजार में Wipro का शेयर गुरुवार को ₹176.40 पर बंद हुआ। इसमें 0.54% की बढ़त रही। वहीं, अमेरिका में Wipro ADR में Google Cloud के साथ AI पार्टनरशिप की खबर के बाद प्री-मार्केट कारोबार में करीब 4.61% की तेजी देखने को मिली।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नेपाल बाढ़ के बीच कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए इन 21 भारतीयों का हुआ रेस्क्यू, फुल लिस्ट यहां देखिए

Nepal Flash Flood: पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और सैलाब के बीच भारतीय नागरिकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी है कि ये सभी नागरिक सुरक्षित हैं और इन्हें नेपाल के बाढ़ प्रभावित टिमुरे क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया है।

जिन लोगों का रेस्क्यू किया गया उनकी पूरी लिस्ट भी रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट की है। इसे यहां नीचे देखा जा सकता है।

नेपाल में लापता भारतीयों में त्रिशूली प्रोजेक्ट के 73 कर्मचारी शामिल

राहत की इस खबर के बीच स्थिति की गंभीरता कम नहीं हुई है। आपको बता दें कि नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। इन लापता भारतीयों में पर्यटक समूहों के अलावा जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं। इनमें से 73 भारतीय नागरिक त्रिशूली वन पावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास इन लापता कर्मचारियों के बारे में सटीक जानकारी जुटाने के लिए प्रोजेक्ट हेड के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।

तिब्बत में भी फंसे 200 भारतीय

नेपाल के साथ-साथ तिब्बत सीमा क्षेत्र में भी भारतीय यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रयास जारी हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक तिब्बत क्षेत्र में मौजूद लगभग 200 भारतीय नागरिकों ने भी भारत सरकार से सहायता मांगी है। प्रवक्ता ने कहा कि भारत इस कठिन परिस्थिति में नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और पड़ोसी देश की जरूरतों के अनुसार हर संभव सहायता और मानवीय राहत सामग्री प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा 270 पहुंचा, युद्ध स्तर पर जारी है सर्च ऑपरेशन

नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने तीन जिलों में भयंकर तबाही मचाई है। अधिकारियों और राहत टीमों द्वारा चलाए जा रहे बचाव अभियानों के बीच मौतों की संख्या बढ़कर 270 हो गई है। नेपाली सेना, पुलिस और राहत एजेंसियां हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

हथियार बनाने में भारत की लंबी छलांग! प्रोडक्शन ₹1.80 लाख करोड़ और एक्सपोर्ट ₹39,000 करोड़ के पार

India Defence Sector Growth: भारत का रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक छलांग लगा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जानकारी दी कि पिछले एक दशक में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 4 गुना बढ़कर लगभग ₹1.80 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, भारत से रक्षा उपकरणों का निर्यात बढ़कर ₹39,000 करोड़ के करीब हो गया है।

रक्षा मंत्री मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित 57 साल पुरानी व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में T-सीरीज के मेन बैटल टैंक्स के ओवरहॉलिंग के लिए बनने वाले ₹472 करोड़ के नए प्लांट का शिलान्यास करने पहुंचे थे।

2014 से 2026: रक्षा उत्पादन और निर्यात के आंकड़े

राजनाथ सिंह ने 2014 के मुकाबले रक्षा क्षेत्र में हुई अभूतपूर्व प्रगति का ब्योरा पेश किया। साल 2014 में देश का हथियारों और गोला-बारूद का उत्पादन महज ₹46,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1.80 लाख करोड़ हो गया है। 2014 में भारत का रक्षा निर्यात सिर्फ ₹1,000 करोड़ का था, जो अब ₹39,000 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2028-29 तक ₹50,000 करोड़ के रक्षा निर्यात का लक्ष्य तय किया है।

जबलपुर VFJ में ₹472 करोड़ का प्रोजेक्ट

जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री में बनने वाला नया प्रोजेक्ट भारत के रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा। यह नया प्लांट सालाना 80 T-72 और T-90 टैंकों का ओवरहॉल यानी मरम्मत व अपग्रेडेशन करने में सक्षम होगा। भारतीय सेना को हर साल करीब 230 T-सीरीज टैंकों के ओवरहॉल की जरूरत होती है।

अब तक चेन्नई के आवडी स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF) में सालाना लगभग 150 टैंकों की ओवरहॉलिंग होती थी। जबलपुर का नया प्लांट शुरू होने के बाद सेना की यह कमी पूरी तरह से दूर हो जाएगी।

‘अब केवल हथियार बना ही नहीं रहे, मेंटेन भी कर रहे हैं’

रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में दुनिया का भारत को देखने का नजरिया बदल चुका है और इसके पीछे ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विजन है। भारत अब न सिर्फ अपनी धरती पर आधुनिक हथियार बना रहा है, बल्कि उनका रखरखाव, ओवरहॉलिंग और अपग्रेडेशन करने की पूरी क्षमता हासिल कर चुका है।

इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और यह भारतीय सेना के टैंकों को युद्ध के लिए हमेशा तैयार रखने में ‘वरदान’ साबित होगा।

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर का ऐतिहासिक सफर

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर(VFJ) की स्थापना 1969 में हुई थी, जो वर्तमान में आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) के तहत काम करती है। शुरुआत में इस फैक्ट्री में जर्मनी की MAN कंपनी के सहयोग से ‘शक्तिमान 3-टन’ ट्रक और जापान की निसान के सहयोग से ‘निसान 1T’ व ‘जोन्गा’ गाड़ियां बनाई जाती थीं। यह फैक्ट्री 330 एकड़ में फैली है और इसका संलग्न एस्टेट 600 एकड़ का है।

Vivo Y31t भारत में लॉन्च, 7200mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले के साथ, जानें कीमत और फीचर्स

Vivo ने भारतीय बाजार में Y31t नाम का एक नया मिड-रेंज स्मार्टफोन लॉन्च किया है। इस डिवाइस का डिजाइन स्लीक है और इसका बैक पैनल साफ-सुथरा है। इसके पिछले हिस्से में ऊपर बाईं ओर एक रेक्टेंगुलर कैमरा मॉड्यूल है और नीचे बाईं ओर Vivo की ब्रांडिंग दी गई है। इसके अलावा, डिवाइस के दाईं ओर पावर बटन और वॉल्यूम रॉकर दिए गए हैं। अब, आइए इस डिवाइस के बारे में बाकी सभी जरूरी बातें जानते हैं, जैसे कि भारत में इसकी कीमत, स्पेसिफिकेशन्स, कैमरा और बहुत कुछ।

भारत में Vivo Y31t की कीमत

Vivo Y31t का 4GB RAM + 128GB इंटरनल स्टोरेज वाला वेरिएंट भारतीय बाजार में ₹25,999 की कीमत पर उपलब्ध होगा। जबकि 6GB RAM + 128GB इंटरनल स्टोरेज वाले वेरिएंट को ₹25,999 में और 6GB RAM + 256GB इंटरनल स्टोरेज वाले वेरिएंट को ₹34,999 में खरीदा जा सकता है। इसके अलावा, कंपनी चुनिंदा क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर ₹1,500 का इंस्टेंट कैशबैक भी दे रही है। बता दें कि Vivo Y31t को तीन कलर ऑप्शन में पेश किया गया है—Golden Mist, Crimson Red और Seashore।

Vivo Y31t कैमरा और स्पेसिफिकेशन्स

Vivo Y31t में 6.75-इंच का HD+ LCD डिस्प्ले हो सकता है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,250 निट्स की पीक ब्राइटनेस मिलेगी। Vivo के दावे के अनुसार, यह डिवाइस पानी और धूल से बचाव के लिए IP68 और IP69 रेटिंग के साथ आता है। इसमें Qualcomm Snapdragon 4 Gen 2 प्रोसेसर है, साथ ही 6GB LPDDR4X RAM और 256GB UFS 3.1 इंटरनल स्टोरेज दी गई है। सुरक्षा के लिए, डिवाइस में साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर और फेस अनलॉक फीचर भी है। इस हैंडसेट में 7,200mAh की बैटरी है, जो 44W वायर्ड फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

कैमरे की बात करें तो, Vivo Y31t में डुअल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें 50MP का प्राइमरी शूटर और 2MP का बोकेह सेंसर शामिल है। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए, फोन में 8MP का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है।

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