Plastic Banknotes: ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक नोटों पर बड़ा अपडेट! RBI को एक अरब के फील्ड ट्रायल को मिली हरी झंडी

Polymer Banknotes Field Trial in India: क्या आपने कभी पानी में नहीं भीगने वाले या जेब में रखे-रखे न फटने वाले नोटों के बारे में सुना है? जल्द ही आपके हाथ में ऐसे प्लास्टिक या पॉलिमर वाले ₹10 और ₹20 के नोट दिख सकते हैं। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि उसने फील्ड ट्रायल के लिए ₹10 और ₹20 के 1 अरब पॉलिमर बैंकनोट्स पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश के आधार पर, RBI अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत यह मंजूरी दी गई है।

कागज के नोटों के साथ ही चलेंगे पॉलिमर नोट

सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, ये नए पॉलिमर नोट अचानक से पुराने नोटों को बंद नहीं करेंगे। ये पॉलिमर बैंकनोट्स बाजार में वर्तमान में चल रहे कागज पर आधारित नोटों के साथ ही सर्कुलेशन में रहेंगे। फील्ड ट्रायल के सफल समापन के बाद ही इन दोनों मूल्यवर्गों में पॉलिमर नोटों को नियमित रूप से जारी किया जाएगा।

RBI ने सूचित किया है कि इन नोटों की छपाई की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए, अभी इसके जारी होने की सटीक तारीख या इस पर होने वाले संभावित खर्च का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

क्यों खास होते हैं प्लास्टिक वाले नोट?

छोटे मूल्यवर्ग के नोट (जैसे- ₹10 और ₹20) लोगों के हाथों में बहुत तेजी से घूमते हैं, जिससे वे जल्दी गंदे हो जाते हैं, फट जाते हैं या पानी में भीगकर खराब हो जाते हैं। पॉलिमर नोट सामान्य कागज के नोटों की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक लंबे समय तक चलते हैं। पानी या पसीने में भीगने पर ये नोट खराब नहीं होते। इन नोटों में सुरक्षा के ऐसे फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी नकल करना बेहद मुश्किल होता है।

Abishek Porel: कभी ऋषभ पंत के बने थे रिप्लेसमेंट…कौन हैं अभिषेक पोरेल? अब रेप केस में हुए गिरफ्तार

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में दिल्ली कैपिटल्स और बंगाल के लिए खेलने वाले भारतीय क्रिकेटर अभिषेक पोरेल मुश्किल में फंस गए हैं। आईपीएल में पिछले चार सीजन से दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा रहे पोरेल को सोमवार रात हुगली जिले की पुलिस ने गिरफ्तार किया। उन पर एक महिला ने शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए क्रिकेटर को हिरासत में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है। आइए जानते हैं कौन है अभिषेक पोरेल

हुगली (रूरल) के पुलिस सुपरिटेंडेंट कुनार भूषण सिंह ने बताया, “अभिषेक पोरेल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और उनकी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से आदेश भी जारी हुआ था। उन्हें सोमवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया और आज उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा।”

क्या है पूरा मामला

कर्नाटक की एक मेडिकल छात्रा ने 23 जून को मोगरा पुलिस थाने में अभिषेक पोरेल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। छात्रा का आरोप है कि, दोनों करीब साढ़े तीन साल से एक-दूसरे के साथ रिश्ते में थे और शादी करने की योजना बना रहे थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस की टीम कई बार चंदननगर स्थित पोरेल के घर भी पहुंची, लेकिन उस समय वह घर पर नहीं मिले। पुलिस ने अभिषेक पोरेल को सोमवार देर रात मोगरा इलाके से गिरफ्तार किया। इस मामले में पुलिस ने पोरेल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया है। मामले में BNS की धारा 69 भी शामिल है।

कौन है अभिषेक पोरेल

आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलने वाले अभिषेक पोरेल घरेलू क्रिकेट में बंगाल की टीम का भी हिस्सा रहे हैं। अभिषेक पोरेल बाएं हाथ से बल्लेबाजी करने वाले विकेटकीपर हैं। उन्होंने 2023 में आईपीएल में डेब्यू किया था और अब तक दिल्ली कैपिटल्स के लिए 35 मैच खेल चुके हैं। आईपीएल 2026 में उन्होंने टीम के लिए चार मुकाबले खेले और चार पारियों में कुल 108 रन बनाए। इस सीजन में दिल्ली कैपिटल्स की कप्तानी अक्षर पटेल ने की थी।

वहीं बंगाल के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 32 मैच खेलकर 1408 रन बनाए हैं। 23 लिस्ट ए मैचों में उनके नाम 833 रन और 61 टी20 मैचों में 1590 रन हैं। पोरेल ने रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में बंगाल का प्रतिनिधित्व किया है। वह अपनी बल्लेबाजी के साथ-साथ विकेटकीपिंग के लिए भी जाने जाते हैं।

Gold Silver Price: 10 हफ्ते के हाई पर सोना, 1 हफ्ते में 11% चढ़ी चांदी, जानिए इस तेजी के पीछे क्या है वजह

Gold – Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में हालिया तेजी जारी है। सोना 10 हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है जबकि चांदी में पिछले हफ्ते 11% से ज़्यादा की बढ़त हुई है। इस हफ्ते स्पॉट गोल्ड की कीमत लगभग USD 4,435 प्रति औंस तक पहुंच गई, जो जून के मध्य के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। खबर लिखे जाने के समय USD 4,375 के आसपास थी।

Comex सिल्वर में इस हफ्ते 11% से ज्याजा की तेजी आई। स्पॉट सिल्वर की कीमत लगभग USD 64 प्रति औंस हो गई। भारत में, सोना 10 ग्राम के लिए लगभग 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि MCX सिल्वर में हफ्ते भर में लगभग 6.58% की बढ़त हुई और यह प्रति किलोग्राम लगभग 2,31,804 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था।

सोने-चांदी की कीमतों के पीछे तेजी के एक नहीं बल्कि कई वजह है। इनमें से US में कमजोर रोजगार डेटा, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की कम होती उम्मीदें, सेंट्रल बैंक द्वारा लगातार सोने की खरीद, ETF में फिर से निवेश आना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता – इन सभी ने मिलकर कीमती धातुओं की मांग को मजबूत किया है।

US में कमजोर जॉब्स डेटा से कम हुई ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें

हालिया तेजी की एक मुख्य वजह US जॉब मार्केट से आई। US ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स ने 7 अगस्त, 2026 को रिपोर्ट दी कि जुलाई में नॉन-फ़ार्म पेरोल में 23,000 की गिरावट आई, जबकि बाजार को लगभग 80,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी। जून के आंकड़ों को भी नीचे की ओर संशोधित किया गया, जबकि मई और जून के संयुक्त संशोधनों से पहले के अनुमानों में लगभग 103,000 नौकरियों की कमी आई।

इस रिपोर्ट के आने के बाद, स्पॉट गोल्ड 2.67% बढ़कर USD 4,352.60 हो गया, जबकि चांदी 4.20% बढ़कर USD 63.97 हो गई, क्योंकि ट्रेडर्स ने सितंबर में फ़ेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम कर दीं।

बाजार अब सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग 44% मान रहा है, जबकि एक हफ्ते पहले यह संभावना 67% थी। सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ब्याज दरें कम रहने की उम्मीद से इस मेटल को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ कम हो सकती है और इसकी मांग को बढ़ावा मिल सकता है।

फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले पर नजर

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने 29 जुलाई को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50% से 3.75% के दायरे में बनाए रखने के लिए 9-3 से वोट किया। हालांकि फेडरल रिजर्व ने पॉलिसी में किसी बड़े बदलाव का साफ संकेत नहीं दिया है, लेकिन कमजोर रोजगार डेटा और दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को कम कर दिया है।

कीमती धातुओं के लिए अगला बड़ा ट्रिगर इस सप्ताह के आखिर में आने वाला अमेरिकी महंगाई का डेटा है। कमजोर पेरोल रिपोर्ट से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने के लिए फेडरल रिजर्व पर दबाव कम हो सकता है, हालांकि उम्मीद से ज्यादा महंगाई दर बढ़ने की उम्मीदों को फिर से जगा सकती है और सोने-चांदी पर दबाव डाल सकती है।

सेंट्रल बैंक की रिकॉर्ड खरीदारी से सोने को मिला सहारा

कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के अलावा, सेंट्रल बैंक की मजबूत मांग ने सोने को एक मजबूत आधार दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स Q2 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सेंट्रल बैंकों की शुद्ध सोने की खरीदारी 289 टन ​​तक पहुंच गई। यह Q1 2026 के स्तर से पांच गुना अधिक और रिकॉर्ड पर दूसरी तिमाही का सबसे अधिक आंकड़ा था।

सेंट्रल बैंक की खरीदारी एक साल पहले की इसी अवधि की तुलना में 62% अधिक थी। पोलैंड के नेशनल बैंक ने Q2 के दौरान 51 टन सोना जोड़ा, जिससे उसका भंडार 632 टन हो गया, जबकि पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने 33 टन सोना जोड़ा, जो Q4 2023 के बाद से उसकी सबसे बड़ी तिमाही खरीदारी थी।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के नवीनतम सर्वेक्षण में भी सेंट्रल बैंक की मांग जारी रहने की मजबूत उम्मीदें दिखाई दीं। लगभग 89% उत्तरदाताओं को उम्मीद थी कि अगले वर्ष वैश्विक स्वर्ण भंडार में वृद्धि होगी, जबकि रिकॉर्ड 45% लोगों को उम्मीद थी कि वे अपने स्वयं के स्वर्ण भंडार में वृद्धि करेंगे।

ETF में फिर से निवेश बढ़ा

सोने को ETF की खरीदारी से भी सहारा मिला है। 20 जुलाई के बाद से एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में कुल बुलियन होल्डिंग में 24 टन की वृद्धि हुई है, जो अप्रैल की शुरुआत के बाद से निवेश के प्रवाह की सबसे तेज गति है।

ETF की मांग में यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब सेंट्रल बैंक की खरीदारी अधिक बनी हुई है, जिससे इस पीली धातु के लिए निवेश की मांग का एक और स्रोत मिल रहा है। संस्थागत खरीदारी और ETF में फिर से निवेश बढ़ने से कीमतों को सहारा मिला है, भले ही ऊंची कीमतों के कारण गहनों की मांग पर दबाव बना हुआ है।

ब्रोकरेज हाउस क्या दे रहे अनुमान

जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि सोने की कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि इस साल के आखिर तक कीमते $5,400 के स्तर पर पहुंच सकती है। वहीं मेटल फोकस का अनुमान है कि कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं डॉयचे बैंक, एचएसबीसी और ING जैसे कई बैंक इस कैलेंडर साल की चौथी तिमाही तक सोने की कीमत $4,600 से $4,900 के बीच रहने का अनुमान लगा रहे है।

 

MCX पर सोना ₹1.53 लाख के पार, चांदी ₹2.36 के नीचे फिसली, जानें किस कारण बढ़ी मांग

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तीसरी बार वेस्टइंडीज को क्यों खेलना पड़ेगा वर्ल्ड कप क्वालिफायर? 2 बार की वर्ल्ड चैंपियन की बढ़ी मुश्किलें

दो बार की वर्ल्ड चैंपियन वेस्टइंडीज अगले साल होने वाले वनडे वर्ल्ड कप में डायरेक्ट क्‍वालिफाई नहीं कर पाई है। अब टीम को विश्व कप में पहुंचने के लिए क्वालिफायर मुकाबला खेलना होगा। सोमवार को अफगानिस्तान ने आयरलैंड को वनडे मैच में हरा दिया, जिसके बाद वेस्टइंडीज के 30 सितंबर तक सीधे क्वालिफाई करने की उम्मीद खत्म हो गई। अब वेस्टइंडीज को टूर्नामेंट में जगह बनाने के लिए क्वालिफाइंग मुकाबलों में अपना दम दिखाना होगा। आईसीसी मेंस वनडे वर्ल्ड कप 2027 का आयोजन अगले साल 4 अक्टूबर से 21 नवंबर 2027 के बीच साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा।

इन टीमों को मिलेगा डायरेक्ट एंट्री

30 सितंबर तक आईसीसी की वनडे रैंकिंग में शीर्ष आठ स्थान पर रहने वाली टीमों को विश्व कप में सीधे प्रवेश मिल जाएगा। लेकिन, इस लिस्ट में दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे को शामिल नहीं किया जाएगा, क्योंकि दोनों टीमें अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप की मेजबानी करेंगी। अफगानिस्तान ने वनडे विश्व कप में अपनी जगह पक्की कर ली है। उसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, भारत, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंग्लैंड और बांग्लादेश भी टूर्नामेंट में खेलते नजर आएंगे। मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे की जगह भी तय है।

वेस्टइंडीज तीसरी बार खेलेगा क्वालिफायर मुकाबला

आईसीसी वनडे रैंकिंग में 10वें स्थान पर मौजूद वेस्टइंडीज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। टीम को विश्व कप में पहुंचने के लिए एक बार फिर क्वालिफाइंग टूर्नामेंट का सामना करना पड़ेगा। खास बात यह है कि वेस्टइंडीज लगातार तीसरी बार विश्व कप में जगह बनाने के लिए क्वालिफायर खेलने की स्थिति में पहुंची है। 2027 वनडे विश्व कप के लिए क्वालिफाइंग टूर्नामेंट अगले साल फरवरी में खेला जाएगा, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि इसकी मेजबानी कौन सा देश करेगा। क्वालिफायर जीतने वाली टीम को विश्व कप के दूसरे राउंड में सीधे जगह मिलेगी। वहीं, दूसरे से चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों को पहले राउंड से शुरुआत करनी होगी। इस राउंड को सुपर सीरीज कहा जाता है। जहां टीमों के पास आगे बढ़कर विश्व कप में अपनी जगह बनाने का मौका रहेगा।

ये टीमें लेंगी हिस्सा

इस क्वालिफाइंग टूर्नामेंट में आयरलैंड और वेस्टइंडीज़ के अलावा वर्ल्ड कप लीग 2 में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली चार टीमें भी हिस्सा लेंगी। आयरलैंड और वेस्टइंडीज को 30 सितंबर 2026 की वनडे रैंकिंग के आधार पर जगह मिलेगी, क्योंकि वे मेजबान देशों को छोड़कर सबसे नीचे रैंक वाली पूर्ण सदस्य टीमें हैं। वहीं, बदले हुए क्वालिफिकेशन फॉर्मेट को लेकर कुछ एसोसिएट देशों ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की है। नए सिस्टम में टीमों को विश्व कप तक पहुंचने के लिए पहले से ज्यादा मुकाबलों और अलग-अलग चरणों से गुजरना पड़ सकता है।

कैसे होगा क्वालिफायर मुकाबला

विश्व कप क्वालिफायर में बची चार जगहों के लिए टीमों को पहले प्लेऑफ खेलना होगा। इस प्लेऑफ में कुल आठ टीमें होंगी। इनमें वर्ल्ड कप लीग 2 की निचली चार टीमें और चैलेंज लीग की चार टीमें शामिल होंगी। चैलेंज लीग को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का तीसरा स्तर माना जाता है। चैलेंज लीग में कुल 12 टीमें हैं, जिन्हें छह-छह टीमों के दो ग्रुप में बांटा गया है। हर ग्रुप में तीन चरणों में मुकाबले होंगे और सभी टीमें एक-दूसरे से खेलेंगी। ग्रुप में सबसे ऊपर रहने वाली दो-दो टीमें प्लेऑफ में पहुंचेंगी। इसके बाद प्लेऑफ में टॉप चार टीमें विश्व कप क्वालिफायर में जगह बनाएंगी।

15 अगस्त पर लाल किले में दिखेगा नया इतिहास! जश्न में पहली बार दो ऐतिहासिक पल

15 अगस्त से पहले दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। लाल किले के पास दंगल पार्क में भारतीय सेना के जवानों ने पारंपरिक 21 तोपों की सलामी रिहर्सल की जा रही है। इस बार समारोह में ‘युवा शक्ति’, ‘विकसित भारत 2047’ और ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने को खास जगह दी जाएगी।

युवा शक्ति और Gen-Z

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इस बार लाल किले पर होने वाला स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की युवा शक्ति और Gen-Z पर फोकस रहेगा। इसमें युवाओं की अचीवमेंट, उनकी नई सोच और देश के डेवलपमेंट में उनके योगदान को सामने रखा जाएगा। साथ ही 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य में युवाओं की भूमिका को भी खास तरीके से दिखाया जाएगा। सेरेमनी में युवा अचीवर्स को स्पेशल गेस्ट के तौर पर बुलाया गया है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह

इस साल ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसे खास जगह दी जाएगी। पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले से तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे।

टेक्नोलॉजी और साइंस

स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारत की तकनीकी और वैज्ञानिक अचीवमेंट को भी दिखाया जाएगा। न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, स्पेस और मॉडर्न टेक्निक सेक्टर में देश ने जो प्रगति की है, उसकी झलक विजुअल्स के जरिए दिखाई जाएगी। इन्विटेशन कार्ड में ‘सेवा तीर्थ’ को प्रायोरिटी दी गई है, जो पब्लिक सर्विस और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को दिखाती है।

इंटर्नशिप और डेवलपमेंट स्कीम

इस बार समारोह में देश के युवा प्रतिभाओं को खास सम्मान दिया जाएगा। इंटरनेशनल फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और मैथमैटिक्स ओलंपियाड 2026 में मेडल जीतने वाले 19 स्टूडेंट्स को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा युवा इनोवेटर्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम के इंटर्न, स्किल डेवलपमेंट स्कीम का लाभ लेने वाले और MY भारत के वॉलंटियर्स जैसे युवा अचीवर्स भी समारोह में शामिल होंगे।

जल संरक्षण

इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह में बैठने की जगहों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे जाएंगे। इसका मकसद लोगों का ध्यान जल संरक्षण और पानी बचाने की जरूरत की ओर अट्रैक्ट करना है।

इस बार का स्वतंत्रता दिवस समारोह देश की परंपरा, युवाओं की ताकत और भारत की तरक्की की झलक एक साथ दिखाएगा। ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने से यह मौका और खास बन गया है। युवा प्रतिभाओं के सम्मान और देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ समारोह में विकसित भारत 2047 का संदेश भी मिलेगा।

क्या भारत की Agni-6 मिसाइल धरती के किसी भी कोने तक पहुंच सकती है? समझिए ICBM की पूरी साइंस

Agni-6: भारत के अग्नि मिसाइल प्रोग्राम में अग्नि-6 को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। इसे भारत की भविष्य की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के रूप में देखा जाता है। सबसे ज्यादा चर्चा इसकी संभावित मारक क्षमता को लेकर है। कहा जा रहा है कि इस नई मिसाइल की रेंज बहुत ज्यादा हो सकती है। लेकिन यह हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? कई रिपोर्टों में अग्नि-6 की संभावित रेंज 8,000 से 12,000 किलोमीटर तक बताई गई है। हालांकि इसकी फाइनल ऑपरेशनल रेंज को लेकर अभी आधिकारिक और डिटेल्स जानकारी सामने नहीं आई है।

सवाल यह है कि कोई मिसाइल आखिर हजारों किलोमीटर की दूरी कैसे तय कर सकती है? इसके पीछे रॉकेट प्रोपल्शन, मल्टी-स्टेज रॉकेट तकनीक, बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी, गाइडेंस सिस्टम और सबसे मुश्किल चरणों में से एक वायुमंडल में री-एंट्री का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

Agni-6 मिसाइल क्या है?

अग्नि-6 को भारत की अगली पीढ़ी की लंबी दूरी की मिसाइल प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जाता है। इसे भविष्य की ICBM क्षमता से जोड़ा जाता है। हालांकि, इस प्रोजेक्ट की कई तकनीकी जानकारियां अभी सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट नहीं हैं। कहा जाता है कि Agni-6 एक ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) है जिसे भारत भविष्य में विकसित करेगा। इसमें भारत की Agni मिसाइलों की रिसर्च के दौरान विकसित की गई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा।

भारत ने अग्नि मिसाइल परिवार के अलग-अलग वर्जन के विकास के दौरान रॉकेट, गाइडेंस, नेविगेशन, एयरोडायनामिक्स, कंट्रोल सिस्टम और हाई-टेम्परेचर मटेरियल जैसी टेक्नोलॉजी में लगातार प्रगति की है। इन्हीं क्षेत्रों में हासिल विशेषज्ञता किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

Agni-6 को कैसे विकसित किया गया?

Agni सीरीज में इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी में DRDO और भारतीय एयरोस्पेस और डिफेंस इंडस्ट्री की कोशिशों से कई दशकों से लगातार सुधार हो रहा है। इसके लिए सॉलिड रॉकेट प्रोपल्शन, गाइडेंस, मटीरियल साइंस, एयरोडायनामिक्स और कंट्रोल सिस्टम में बहुत ज्यादा महारत की जरूरत होती है। इन टेक्नोलॉजीज़ में स्पेस इंजीनियरिंग से काफी समानताएं हैं। हालांकि, इनका इस्तेमाल अलग-अलग तरह से किया जाता है।

हजारों किलोमीटर दूर तक कैसे पहुंचती है बैलिस्टिक मिसाइल?

बैलिस्टिक मिसाइल का काम सामान्य विमान की तरह लगातार इंजन चलाकर पूरी दूरी तय करना नहीं होता। इसका एक बड़ा हिस्सा बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी के आधार पर तय होता है। मिसाइल के शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन उसे तेज गति प्रदान करते हैं। ये काफी ऊंचाई तक पहुंचाते हैं। जब उसका पावर्ड फ्लाइट चरण पूरा हो जाता है, तो वाहन गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में एक निर्धारित घुमावदार पथ पर आगे बढ़ता है। यानी शुरुआती चरण में रॉकेट इंजन मुख्य भूमिका निभाते हैं। जबकि उसके बाद गति, गुरुत्वाकर्षण और निर्धारित रूट्स के आधार पर मिसाइल बहुत लंबी दूरी तय कर सकती है।

Agni-6 धरती पर कहीं भी उड़ सकती है?

अग्नि-6 को लेकर कभी-कभी यह दावा किया जाता है कि यह धरती के किसी भी हिस्से तक पहुंचने में सक्षम हो सकती है। इसका अर्थ तकनीकी तौर पर यह नहीं है कि मिसाइल सचमुच पृथ्वी के हर स्थान पर पहुंच सकती है। जब कहा जाता है कि Agni-6 “धरती पर कहीं भी” उड़ सकती है, तो इसका मतलब है कि इसमें बहुत दूर तक उड़ने की क्षमता है।

दरअसल, कोई भी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की जगह, ट्रेजेक्टरी और पेलोड के आधार पर इतनी दूर तक नहीं उड़ सकती। इस टेक्नोलॉजी के पीछे की फिजिक्स काफी आसान है। जब बैलिस्टिक व्हीकल अपनी पावर्ड फ्लाइट की ऊंचाई तक पहुंच जाता है, तो वह ग्रेविटी के असर से आर्क ट्रेजेक्टरी (घुमावदार रास्ते) पर उड़ता है।

टेस्ट के लिए कई रॉकेट स्टेज का इस्तेमाल 

मल्टी-स्टेजिंग एक आसान आइडिया पर आधारित है। बिना इस्तेमाल वाले हिस्से को अलग करके व्हीकल का वजन कम करना। हर रॉकेट स्टेज में व्हीकल के फ्यूल टैंक और इंजन होते हैं। जब फ्यूल खत्म हो जाता है, तो उसे अलग किया जा सकता है। बाकी बचा रॉकेट हल्का हो जाएगा और ज्यादा स्पीड पकड़ सकेगा। किसी भी बैलिस्टिक मिसाइल की वास्तविक पहुंच कई कारकों पर निर्भर करती है।

इनमें लॉन्च लोकेशन, प्रक्षेपवक्र, पेलोड और मिसाइल की वास्तविक क्षमता शामिल हैं। इसलिए ‘कहीं भी पहुंचने’ जैसी भाषा आमतौर पर इसकी अत्यधिक लंबी दूरी की क्षमता को दर्शाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। अग्नि-6 की वास्तविक रेंज और ऑपरेशनल क्षमता को लेकर आधिकारिक तौर पर जितनी जानकारी उपलब्ध है, उससे आगे के दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।

मल्टी-स्टेज रॉकेट टेक्नोलॉजी क्यों है अहम?

लंबी दूरी के रॉकेट और मिसाइल सिस्टम में मल्टी-स्टेजिंग एक महत्वपूर्ण तकनीक है। इसका मूल सिद्धांत काफी सरल है। इस हिस्से का ईंधन खत्म हो गया है। उसे अलग कर दिया जाए ताकि बाकी वाहन का वजन कम हो सके। जब किसी चरण का ईंधन खत्म हो जाता है, तो उस खाली चरण को अलग किया जा सकता है। इससे आगे बढ़ रहे वाहन का वजन कम होता है। उपलब्ध ऊर्जा का ज्यादा प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि लंबी दूरी की रॉकेट सिस्टम में मल्टी-स्टेज डिजाइन का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जाता है।

अग्नि परिवार के विकास में DRDO की भूमिका

भारत के अग्नि मिसाइल परिवार का विकास कई दशकों में हुआ है। इसमें DRDO और भारतीय एयरोस्पेस एवं डिफेंस उद्योग से जुड़े वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने गाइडेंस, नियंत्रण, संरचनात्मक डिजाइन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में काम किया है।

लंबी दूरी की मिसाइल तैयार करने के लिए केवल शक्तिशाली इंजन पर्याप्त नहीं होता। उसे सही दिशा में बेहद सटीक तरीके से नियंत्रित करना, उड़ान के दौरान उसकी स्थिति निर्धारित करना और अलग-अलग परिस्थितियों में उसके ढांचे को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। इनमें से कई तकनीकी क्षेत्र अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल होने वाली इंजीनियरिंग से जुड़े हैं।

धरती पर Agni-6 की री-एंट्री के समय क्या होता है?

तेज रफ्तार वाली उड़ान में ‘री-एंट्री’ (वापसी) को सबसे मुश्किल चरणों में से एक माना जाता है। जैसे ही यान पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, उसे लगातार ज्यादा घनी हवा का सामना करना पड़ता है। रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ, हवा के घर्षण और दबाव से बहुत ज्यादा गर्मी पैदा होती है। इसका मतलब है कि पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा एंट्री करने के दौरान होने वाली कठोर स्थितियों को झेलने के लिए यान को खास तरह की सामग्रियों की जरूरत होती है। किसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल के लिए वायुमंडल में दोबारा प्रवेश यानी री-एंट्री बेहद चुनौतीपूर्ण चरण होता है।

सिर्फ लंबी दूरी ही नहीं, सटीकता भी जरूरी

किसी ICBM की क्षमता का आकलन केवल उसकी रेंज से नहीं किया जाता। लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ उसे निर्धारित रूट्स पर बनाए रखना और लक्ष्य क्षेत्र तक आवश्यक सटीकता के साथ पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम अहम भूमिका निभाते हैं। मिसाइल की उड़ान के दौरान उसका रूट कंट्रोल करने और आवश्यक सुधार करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों की जरूरत होती है।

अग्नि-6 को लेकर बड़ी बातें

अग्नि-6 को भारत की भविष्य की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता से जोड़ा जाता है। लेकिन इसकी सटीक रेंज, अंतिम डिजाइन, तैनाती और अन्य ऑपरेशनल क्षमताओं को लेकर सार्वजनिक जानकारी सीमित है। 8,000 से 12,000 किलोमीटर जैसी रेंज का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में मिलता है। लेकिन इसे अग्नि-6 की आधिकारिक रूप से घोषित अंतिम ऑपरेशनल रेंज मानना उचित नहीं होगा।

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कुल मिलाकर, अग्नि-6 जैसी लंबी दूरी की मिसाइल की क्षमता के पीछे केवल एक शक्तिशाली रॉकेट नहीं। बल्कि मल्टी-स्टेज प्रोपल्शन, बैलिस्टिक उड़ान, गाइडेंस एवं कंट्रोल, एयरोडायनामिक्स और हाई-स्पीड री-एंट्री तकनीक जैसी कई जटिल तकनीकों का संयोजन होता है। यही तकनीकें किसी मिसाइल को हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने में सक्षम बनाती हैं।

Palamu Jyotirlinga Temple: झारखंड के इस मंदिर में एक साथ कर सकते हैं 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, उज्जैन की मिट्टी से बनी है महाकाल की प्रतिमूर्ति

Palamu Jyotirlinga Temple: शिव भक्तों के लिए महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा बेहद पावन और पवित्र यात्रा है। लेकिन, इनमें से कुछ बेहद दुर्गम स्थानों पर स्थित हैं, जहां हर किसी के लिए पहुंचना संभव नहीं है। इसके बावजूद, हर शिवभक्त द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने की इच्छा अपने मन में जरूर रखता है। शायद झारखंड के पलामू स्थिति भगवती भवन मंदिर का निर्माण भी इसी सोच के साथ किया गया होगा। इस मंदिर के परिसर में एक ही छत के नीचे सभी 12 ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। यानी श्रद्धालु एक यात्रा में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा का पुण्य पा सकते हैं।

उज्जैन की मिट्टी से बनी महाकाल की प्रतिमूर्ति

अपनी इस अनोखी विशेषता के कारण यह शिवभक्तों के बीच दिलचस्पी का केंद्र है। खासतौर से उन भक्तों के लिए, जो कम भीड़-भाड़ वाली धार्मिक जगहों पर घूमना पसंद करते हैं। भगवती भवन मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों प्रतिरूप होने के साथ ही यहां स्थित महाकाल की प्रतिमूर्ति भी है। मंदिर के मुख्य पुजारी शिबुल पंडित ने लोकल18 को बताया कि यहां महाकाल की प्रतिमूर्ति को उज्जैन से लाई गई मिट्टी से बनाया गया है। पारंपरिक रूप से, भक्त 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए भारत के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा करते हैं। हालांकि, भगवती भवन में, इन पवित्र रूपों का अनुभव एक ही परिसर में किया जा सकता है।

प्रकृति की गोद में बसा है झारखंड का पलामु

शिव भक्तों के लिए, भगवती भवन एक अलग तरह का तीर्थ अनुभव देता है। कई राज्यों में घूमने के बजाय, श्रद्धालु एक ही जगह पर 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर सकते हैं। पलामू अपने जंगलों, जंगली जानवरों और खूबसूरत नजारों के लिए ज्यादा जाना जाता है। हालांकि इस इलाके में कई धार्मिक और ऐतिहासिक जगहें भी हैं। जिला प्रशासन के अथक प्रयासोंक की बदौलत यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक जगहों के साथ-साथ अन्य टूरिस्ट आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

कैसे पहुंचें पलामु

पलामू का जिला हेडक्वार्टर मेदिनीनगर (डाल्टनगंज) है, जो सड़क और रेल से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। सबसे पास का एयरपोर्ट रांची में बिरसा मुंडा एयरपोर्ट है, जो मेदिनीनगर से लगभग 165 km दूर है।

ट्रेन से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए डाल्टनगंज रेलवे स्टेशन जिले का मुख्य रेलवे स्टेशन है। यहां पर रेगुलर पैसेंजर और एक्सप्रेस सर्विस हैं, जिनमें नई दिल्ली, कोलकाता, रांची और पटना जैसे शहरों के लिए सीधे ट्रेनें शामिल हैं।

पलामू रांची, पटना, वाराणसी और आस-पास के दूसरे शहरों से सड़क के रास्ते भी पहुंचा जा सकता है। जिला प्रशासन का कहना है कि डाल्टनगंज रांची से लगभग 165 km दूर है, और रांची और झारखंड के दूसरे बड़े शहरों और पड़ोसी राज्यों से रेगुलर बस सर्विस उपलब्ध हैं।

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वेस्टइंडीज से फिर छूटी वनडे विश्वकप की सीधी एंट्री, खेलना पड़ेगा क्वालिफायर

दो बार के वनडे वर्ल्ड कप चैंपियन वेस्टइंडीज़ को 2027 में होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए एक बार फिर क्वालिफ़ाइंग टूर्नामेंट का रास्ता अपनाना होगा। 30 सितंबर 2026 को जारी आईसीसी वनडे रैंकिंग में शीर्ष आठ स्थान पर रहने वाली टीमें सीधे 2027 वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफ़ाई करेंगी। हालांकि, मेजबान देशों में शामिल दक्षिण अफ़्रीका और ज़िम्बाब्वे के लिए रैंकिंग ज़रूरी नहीं।

आयरलैंड के ख़िलाफ़ बेलफ़ास्ट में रोमांचक जीत दर्ज करने के बाद अफ़ग़ानिस्तान ने भी टॉप आठ में अपनी जगह पक्की कर ली है। उसके साथ मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया, भारत, न्यूज़ीलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंग्लैंड, बांग्लादेश, दक्षिण अफ़्रीका और ज़िम्बाब्वे भी 2027 वर्ल्ड कप में जगह बना चुके हैं।

वहीं, आईसीसी वनडे रैंकिंग में 10वें स्थान पर मौजूद वेस्टइंडीज़ के पास कटऑफ तारीख़ से पहले भारत के ख़िलाफ़ दो वनडे मैच खेलने हैं। लेकिन इन दोनों मैचों में जीत हासिल करने के बावजूद वेस्टइंडीज़ शीर्ष आठ में वापसी नहीं कर पाएगा।

इसका मतलब साफ़ है कि वेस्टइंडीज़ को एक बार फिर क्वालिफ़ायर टूर्नामेंट की कठिन राह से गुज़रना होगा। यह क्वालिफ़ायर अगले साल फ़रवरी में आयोजित किया जाना है और यहीं से वेस्टइंडीज़ के पास 2027 वर्ल्ड कप का टिकट हासिल करने का एक और मौक़ा होगा। वेस्टइंडीज़ के लिए यह स्थिति नई नहीं है।

2023 वनडे वर्ल्ड कप में भी वे सीधे क्वालिफ़ाई नहीं कर पाए थे और उन्हें क्वालिफ़ायर टूर्नामेंट में हिस्सा लेना पड़ा था। हालांकि, क्वालिफ़ायर के सुपर सिक्स चरण में वेस्टइंडीज़ पांचवें स्थान पर रहा और वर्ल्ड कप में जगह बनाने में नाकाम रहा। यह क्रिकेट इतिहास में पहली बार था जब वेस्टइंडीज़ वनडे वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं बना।

वर्ल्ड कप से बाहर होने का असर आगे भी देखने को मिला और इसी वजह से वेस्टइंडीज़ 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भी क्वालिफ़ाई नहीं कर सका। वह 2013 के बाद पहली बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट से बाहर रहा। 2027 वर्ल्ड कप के क्वालिफ़ायर में कुल आठ टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें 30 सितंबर 2026 की वनडे रैंकिंग के आधार पर दो सबसे निचली रैंक वाली गैर-मेज़बान फ़ुल मेंबर टीमें, आयरलैंड और वेस्टइंडीज़ शामिल होंगी।

इसके अलावा क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग 2 की शीर्ष चार टीमें और वर्ल्ड कप क्वालिफ़ायर प्लेऑफ़ की शीर्ष चार टीमें भी क्वालिफ़ायर में जगह बनाएंगी। क्वालिफ़ायर का विजेता सीधे वर्ल्ड कप के दूसरे दौर में प्रवेश करेगा। वहीं दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों को सुपर सीरीज़ से गुज़रना होगा। इस त्रिकोणीय सीरीज़ की विजेता टीम दूसरे दौर में पहुंचेगी।वेस्टइंडीज़ के लिए 2027 वर्ल्ड कप का सफ़र एक बार फिर आसान नहीं होने वाला है। दो बार की विश्व चैंपियन टीम को पहले क्वालिफ़ायर की परीक्षा पास करनी होगी और तभी वह क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर वापसी कर सकेगी।

भारतीयों के लिए खुशखबरी! विदेश घूमने का मौका न चुके, अबू धाबी का 30 दिन का वीजा बिलकुल फ्री

अबू धाबी घूमने का सपना देख रहे भारतीय ट्रैवलर के लिए अब यह ट्रिप आसान हो गयी हैं अबू धाबी की यात्रा का खर्च और झंझट दोनों कम हो सकते हैं। क्योंकि एलिजिबल भारतीय ट्रैवलर को 30 दिन का फ्री यूएई टूरिस्ट वीजा फैसिलिटी लॉन्च की है। इससे अबू धाबी घूमने की प्लानिंग बना रहे लोगों के लिए वहां जाना पहले के मुकाबले आसान हो गया है।

फ्री वीजा स्कीम

Abu Dhabi Airports Reports Record Growth in First Half of 2025

एलिजिबल इंडियन पासपोर्ट होल्डर को इस स्कीम में 30 दिन का यूएई टूरिस्ट वीजा बिना किसी शुल्क के मिल सकता है। इस वीजा के लिए करीब Dh285 यानी लगभग 7,500 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। इस स्कीम का फायदा लेने के लिए ट्रिप की बुकिंग इसमें शामिल ट्रैवल पार्टनर या ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी के जरिए करनी होगी।

 

बुकिंग का तरीका

Abu Dhabi Wallpapers (51 images) - WallpaperCat

इस फैसिलिटी का लाभ सीधे किसी भी बुकिंग से नहीं मिलेगा। ट्रैवलर को इस स्कीम में शामिल ट्रैवल पार्टनर या ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी के जरिए अबू धाबी का हॉलिडे पैकेज बुक करना होगा। अगर कोई ट्रैवलर 31 अक्टूबर से पहले पैकेज बुक कर लेता है, लेकिन उसकी ट्रिप इस टाइम ड्यूरेशन के बाद है, तो उसे फ्री वीजा का फायदा नहीं मिलेगा।

वीजा प्रोसेस

फ्री वीजा की प्रोसेस ट्रैवल एजेंसियों के जरिए पूरी की जाएगी। एजेंसी अबू धाबी के तय डेस्टिनेशन मैनेजमेंट पार्टनर के साथ मिलकर वीजा प्रोसेस कर सकती है। कुछ एजेंसियां अपने मौजूदा पार्टनर के जरिए भी काम कर सकती हैं।

फैमिली ट्रिप

इस स्कीम में फैमिली मेंबर सभी जरूरी शर्तें पूरी करते हैं, तो वे भी इस सुविधा का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन पूरी स्कीम फिलहाल 20,000 वीजा तक लिमिटेड है। वीजा के लिए कोई अलग से फास्ट ट्रैक सुविधा नहीं होगी।

ट्रैवल कंडीशन

फ्री वीजा पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी। ट्रैवलर के पास भारतीय पासपोर्ट होना चाहिए और उसे भारत से अबू धाबी की ट्रिप करनी होगी। बुकिंग में अबू धाबी के होटल में कम से कम लगातार तीन रात रुकना और भारत से आने-जाने की फ्लाइट शामिल होनी चाहिए। जर्नी 1 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 के बीच ही करनी होगी।

 ध्यान दे

आप भी इस टाइम पर अबू धाबी घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो जरूरी शर्तें पूरी करके इस ऑफर का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन वीजा लिमिटेड है, इसलिए ट्रैवल और बुकिंग से पहले सभी रूल चेक करें।

विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में बंदरों को दूर रखने के लिए लंगूर की आवाज निकालेगा यह व्यक्ति (Video)

Monkey Langur

 

BWF World Badminton Championship अगले सप्ताह दिल्ली में खेला जाएगा लेकिन दिल्ली से में बंदरों की बड़ी तादाद के कारण विदेशी खिलाड़ियों को बहुत परेशानी आ सकती है। ऐसे में आयोजकों ने एक अलग तरकीब निकाली है।आयोजकों ने तीन मिमिक्री आर्टिस्ट बुलाए हैं जो लंगूर की आवाज निकालते हैं जिससे बंदर इंडोर स्टेडियम से दूरी बनाकर रखेंगे।

आयोजकों ने तीन प्रशिक्षित ‘मंकी व्हिस्परर्स’ (बंदरों को नियंत्रित करने वाले विशेषज्ञ) को नियुक्त किया है जो लंगूर की आवाज निकालकर ‘रीसस मकाक’ प्रजाति के बंदरों को डराकर भगाएंगे। ये बंदर मध्य दिल्ली और इंदिरा गांधी स्टेडियम के आसपास बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। 

इंदिरा गाधी स्टेडियम में ही 17 से 23 अगस्त तक विश्व चैंपियनशिप आयोजित होगी। यह अनोखा कदम जनवरी में हुए इंडिया ओपन के बाद उठाया गया है। उस टूर्नामेंट के दौरान बंदर दर्शक दीर्घा तक पहुंच गए थे जिससे कुछ समय के लिए मुकाबलों में व्यवधान पड़ा और इसकी तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बनी थीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ‘रीसस मकाक’ बंदर लंगूर से डरते हैं क्योंकि लंगूर आकार में उनसे काफी बड़े होते हैं। इसी स्वाभाविक डर का फायदा उठाने के लिए लंगूर की आवाज की नकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। गौरतलब है कि ऐसे कार्यों के लिए वास्तविक लंगूरों के इस्तेमाल पर वर्ष 2012 में प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस वर्ष दिल्ली विधानसभा ने भी बंदरों को परिसर में आने से रोकने के लिए लंगूर की आवाज निकालने वाले विशेषज्ञों की सेवाएं लेने के लिए निविदा जारी की थी।

आयोजकों द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों में से एक जफर ने बताया, ‘‘जब हम लंगूर जैसी आवाज निकालते हैं तो बंदर वहां से भाग जाते हैं। इसी तरह हम उन्हें दूर भगाते हैं ताकि सड़क पर वाहन खड़े करने या अन्य गतिविधियों में कोई परेशानी नहीं हो। ’’उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारा पुश्तैनी पेशा है। हम पूरी जिंदगी यही काम करते आए हैं। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां मैंने अपनी सेवाएं नहीं दी हों। नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, राष्ट्रपति भवन, गुरुग्राम, चंडीगढ़, मथुरा, जहां से भी हमें काम मिलता है, हम वहां जाकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। ’’

17 वर्षों बाद भारत में लौट रही बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप के लिए भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने मिलकर इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम का व्यापक कायाकल्प किया है। इसका उद्देश्य इस वर्ष जनवरी में हुए इंडिया ओपन के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई आलोचना जैसी स्थिति से बचना है।