Tata Motors CV Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹2560 करोड़ मुनाफा, रेवेन्यू भी 20% उछला

Tata Motors CV Q1 Results: टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Motors Commercial Vehicles Ltd ने 12 अगस्त को जून तिमाही के शानदार नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 83% बढ़कर ₹2,560 करोड़ हो गया। इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और फ्रेट ग्राहकों से मजबूत मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को सहारा दिया। हालांकि, कमोडिटी की बढ़ती लागत का दबाव भी रहा।

Tata Motors CV का रेवेन्यू 20% बढ़ा

टाटा मोटर्स CV का ऑपरेशंस से रेवेन्यू पहली तिमाही में 20% बढ़कर ₹20,576 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹17,192 करोड़ था।

कंपनी के MD और CEO गिरीश वाघ ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री ने मजबूती दिखाई। भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, बेहतर फ्लीट इस्तेमाल और अलग-अलग सेक्टर से बनी मांग ने कारोबार को सहारा दिया।

उन्होंने कहा कि Tata Motors के कमर्शियल व्हीकल वॉल्यूम में सालाना आधार पर 26% की बढ़ोतरी हुई। कंपनी के मुताबिक, मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो, बेहतर मार्केट रणनीति और लगातार अच्छे अमल से कंपनी की बाजार स्थिति और मजबूत हुई है।

इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल की मांग भी बढ़ी

टाटा मोटर्स ने इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी अच्छी ग्रोथ दर्ज की। eSCV सेगमेंट ने मई और जून में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया।

इन दो महीनों में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी 10% रही। वहीं, पहली तिमाही में eSCV सेगमेंट में Tata Motors की बाजार हिस्सेदारी 47% रही। कंपनी का कहना है कि इससे इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल की बढ़ती मांग और उसके EV इकोसिस्टम की मजबूती का पता चलता है।

EBITDA मार्जिन 11.7% रहा

टाटा मोटर्स के CFO जीवी रमणन के मुताबिक, पहली तिमाही में रेवेन्यू और मुनाफे के साथ EBITDA मार्जिन भी मजबूत रहा। यह 11.7% रहा।

कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल तनाव के बावजूद कंपनी ने यह मार्जिन हासिल किया। तिमाही में फ्री कैश फ्लो भी मजबूत रहा और यह करीब ₹1,100 करोड़ रहा।

कंपनी ने कहा कि कमोडिटी की लागत का दबाव अभी बना हुआ है। इससे निपटने के लिए ऑपरेशनल एफिशिएंसी, कीमतों में अनुशासन और बेहतर सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर फोकस किया जा रहा है।

Tata Motors CV का मार्केट शेयर कितना रहा?

कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में घरेलू CV VAHAN मार्केट शेयर 36.8% रहा। पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 100 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई।

कैटेगरी के हिसाब से HCV में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 56.3% रही। ILMCV में 36.9%, SCV PU में 27.7% और CV Passenger सेगमेंट में 41.3% रही।

शेयर में 1.6% की गिरावट

Tata Motors CV के शेयर 12 अगस्त को 1.6% की गिरावट के साथ ₹342 पर बंद हुए। कंपनी ने तिमाही नतीजे बाजार बंद होने के बाद जारी किए। इसलिए इन नतीजों का असर अगले कारोबारी सत्र में शेयर पर देखने को मिल सकता है।

कंपनी ने आगे के प्रदर्शन को लेकर भी भरोसा जताया है। Tata Motors के मुताबिक, मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो, लगातार इनोवेशन और ग्राहकों को बेहतर वैल्यू देने पर फोकस के चलते आने वाली तिमाहियों में कंपनी अपनी बाजार स्थिति मजबूत करने और मुनाफे के साथ ग्रोथ जारी रखने की उम्मीद कर रही है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

रूस की तरफ से मध्यस्थ बनेंगे पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़:यूक्रेन के सरकारी बैंक से चल रहा विवाद; रूस पर संपत्ति छीनने का आरोप

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के सरकारी बैंक ओश्चादबैंक से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला यूक्रेन और रूस के बीच 1998 में हुए द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत चल रहा है। ओश्चादबैंक का कहना है कि 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले की वजह से उसे दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में अपनी संपत्तियां और कारोबार गंवाना पड़ा। इन इलाकों में ओश्चादबैंक की बैंक शाखाएं, ATM, दफ्तर, जमीन, और दूसरे कारोबारी संसाधन थे। रूस के कब्जे के बाद बैंक इन संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सका। कई शाखाएं बंद हो गईं और बैंक का कारोबार ठप पड़ गया। बैंक के मुताबिक, इससे उसे भारी नुकसान हुआ। इस ही वजह से बैंक ने कई सौ मिलियन डॉलर का दावा किया है। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा सुनवाई बैंक ने जुलाई 2025 में रूस को विवाद का नोटिस भेजा था। रूस की ओर से जवाब नहीं मिलने पर उसने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ से पहले भी भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई पूर्व जज अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और ट्रिब्यूनल में अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। पहले रूस के दो प्रस्तावों को ठुकरा चुके थे चंद्रचूड़ रूस इससे पहले भी डीवाई चंद्रचूड़ को दो बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेश विवादों में अपनी ओर से मध्यस्थ बनाना चाहता था। रिपोर्ट के मुताबिक, पहला मामला जर्मनी की ऊर्जा कंपनी विंटरशाल डीया से जुड़ा था। इस कंपनी ने रूस पर आरोप लगाया था कि यूक्रेन युद्ध के बाद उसकी रूस में मौजूद गैस और तेल प्रोजेक्ट्स पर कब्जा कर लिया गया, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ। दूसरा मामला यूक्रेन की सरकारी बिजली ट्रांसमिशन कंपनी उक्रएनरगो का था। कंपनी का आरोप है कि रूस के कब्जे वाले इलाकों में उसकी बिजली से जुड़ी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया या उन पर कब्जा कर लिया गया। इन दोनों मामलों में रूस ने डीवाई चंद्रचूड़ से अपनी ओर से मध्यस्थ बनने का अनुरोध किया था। हालांकि, उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की थी। अब तक दोनों मामलों का अंतिम नतीजा नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता क्या है? जब दो देशों की कंपनियों या किसी देश और विदेशी कंपनी के बीच कारोबार या निवेश को लेकर बड़ा विवाद हो जाता है, तो वे हर बार अदालत नहीं जाते। कई बार दोनों पक्ष मिलकर कुछ विशेषज्ञ चुनते हैं। यही विशेषज्ञ दोनों पक्षों की बात सुनते हैं और फैसला देते हैं। इसे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कहा जाता है। इसे आसान उदाहरण से समझिए मान लीजिए दो कंपनियों के बीच करोड़ों रुपये का विवाद हो गया। अगर वे कोर्ट जाएंगी, तो फैसला आने में कई साल लग सकते हैं। इसलिए दोनों मिलकर कुछ निष्पक्ष विशेषज्ञ चुन लेती हैं। ये विशेषज्ञ दोनों पक्षों की बात सुनते हैं और तय करते हैं कि किसका दावा सही है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में क्या होता है? 1. दोनों पक्ष अपने-अपने विशेषज्ञ चुनते हैं: आमतौर पर दोनों पक्ष एक-एक मध्यस्थ चुनते हैं। इसके बाद दोनों मिलकर तीसरे मध्यस्थ का चयन करते हैं। ये तीनों मिलकर एक ट्रिब्यूनल बनाते हैं। 2. दोनों पक्ष अपनी बात रखते हैं: दोनों पक्ष अपने दस्तावेज, सबूत और दलीलें ट्रिब्यूनल के सामने पेश करते हैं। 3. ट्रिब्यूनल फैसला सुनाता है: सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ट्रिब्यूनल अपना फैसला देता है। इसे ‘अवार्ड’ कहा जाता है। 4. फैसले का पालन करना होता है: ज्यादातर मामलों में ट्रिब्यूनल का फैसला दोनों पक्षों के लिए मानना जरूरी होता है। यह अदालत से कैसे अलग है? भारत से जुड़े दो चर्चित ट्रिब्यूनल मामले 1. केयर्न एनर्जी बनाम भारत क्या मामला था? ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी ने 2006 में भारत में अपने कारोबार में कुछ बदलाव किए थे। उस समय सरकार ने इस पर कोई टैक्स नहीं लगाया। लेकिन 2012 में भारत सरकार ने नया टैक्स कानून बनाया और कहा कि यह कानून पुराने सौदों पर भी लागू होगा। इसके बाद सरकार ने केयर्न से हजारों करोड़ रुपये का टैक्स मांगा और उसकी कुछ संपत्तियां भी अपने कब्जे में ले लीं। फैसला क्या आया? कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल में शिकायत की। 2020 में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत की टैक्स वसूली सही नहीं थी। उसने भारत को कंपनी को करीब 1.2 अरब डॉलर (करीब 9 हजार करोड़ रुपए) लौटाने का आदेश दिया। फिर क्या हुआ? 2021 में भारत सरकार ने यह पुराना टैक्स कानून वापस ले लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया और मामला खत्म हो गया 2. वोडाफोन बनाम भारत क्या मामला था? 2007 में वोडाफोन ने भारत की एक मोबाइल कंपनी खरीदी थी। उस समय इस सौदे पर कोई टैक्स नहीं लगा। लेकिन 2012 में सरकार ने नया कानून बनाकर कहा कि पुराने सौदों पर भी टैक्स लगेगा। इसके बाद वोडाफोन से करीब 2.2 अरब डॉलर (करीब 16 हजार करोड़ रुपए) टैक्स मांगा गया। फैसला क्या आया? वोडाफोन भी अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल पहुंची। 2020 में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भारत सरकार को इतने साल बाद पुराने सौदे पर टैक्स नहीं लगाना चाहिए था। इसलिए फैसला वोडाफोन के पक्ष में आया। फिर क्या हुआ? 2021 में भारत सरकार ने यह कानून वापस ले लिया। इसके बाद वोडाफोन और भारत के बीच विवाद भी खत्म हो गया। —————–

संसद के बाहर अमित शाह के बयान के बाद क्यों भड़के राहुल गांधी? मीडिया पर दागे तीखे सवाल

संसद के बाहर अमित शाह के बयान के बाद क्यों भड़के राहुल गांधी? मीडिया पर दागे तीखे सवाल

Rahul Gandhi

संसद भवन परिसर के बाहर राजनीतिक पारा उस वक्त और चढ़ गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए पत्रकारों के रुख पर ही तीखे सवाल खड़े कर दिए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने मीडिया पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार करने का सीधा आरोप लगाया।

1. “जब वे बोलते हैं तब आप चुप रहते हैं”— मीडिया पर तीखे सवाल
संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान जब एक पत्रकार ने सवाल पूछना शुरू किया, तो राहुल गांधी ने बीच में टोकते हुए मीडिया के रवैये पर आपत्ति जताई:

•    इंटरप्ट करने का आरोप: राहुल गांधी ने कहा कि जब विपक्ष का कोई नेता बोलता है तो मीडिया उन्हें हर 24 घंटे टोकता (interrupt) है, लेकिन जब सत्ता पक्ष या गृह मंत्री बोलते हैं तो कोई सवाल नहीं पूछा जाता।

•    “चूहे की तरह खड़े हो जाते हैं”: राहुल गांधी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “उनमें ऐसी क्या खास बात है कि पूरा मीडिया उनके सामने चुप होकर खड़ा हो जाता है? जब वे बोलते हैं तो आप उन्हें इंटरप्ट क्यों नहीं करते?”

•    डरने की जरूरत नहीं: देश भर में चल रहे छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा कि जब देश के युवा और छात्र सरकार से नहीं डर रहे हैं, तो मीडिया को भी डरने की जरूरत नहीं है।

2. अमित शाह पर निशाना: “गुब्बारे से हवा निकल चुकी है”
गृह मंत्री अमित शाह की चुप्पी और उनके सुरक्षा घेरे को लेकर राहुल गांधी ने आक्रामक रुख अपनाया:
“सवाल यह नहीं है कि अमित शाह क्या कहते हैं, हमें इससे फर्क नहीं पड़ता। समझने वाली बात यह है कि वे 20 दिनों तक गायब रहे। उनके घर के बाहर 30-30 गाड़ियां और हजारों पुलिसवाले तैनात रहते हैं ताकि कोई छात्र वहां न पहुंच सके। हवा भरे गुब्बारे से अब गैस निकल चुकी है और वे अंतिम समय में फिर से हवा भरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन गुब्बारा फट चुका है।”
— राहुल गांधी (नेता प्रतिपक्ष)
राहुल गांधी ने गृह मंत्री की हिम्मत पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनमें सदन में आकर सीधी चर्चा का सामना करने का साहस नहीं है।

संसद के बाहर राहुल गांधी का यह बयान न केवल गृह मंत्री अमित शाह और सरकार पर सीधा हमला है, बल्कि भारत में मुख्यधारा मीडिया की भूमिका और उसकी निष्पक्षता पर भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। विपक्ष लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि सरकार जनमुद्दों और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का सामना करने से बच रही है।

Cow Urine: अब दूध के साथ गोमूत्र से भी बंपर कमाई करेंगे किसान! यूपी के इन जिलों में ₹10 प्रति लीटर खरीद शुरू

Cow Urine Pilot Project: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गो-संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत बुलंदशहर में गोमूत्र की खरीद का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। योगी सरकार ने बुलंदशहर में किसानों से गाय का मूत्र इकट्ठा करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। उम्मीद है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। साथ ही महिलाओं को कमाई का एक अतिरिक्त जरिया मिलेगा। साथ ही उन गायों की देखभाल में मदद मिलेगी जो अब दूध नहीं देतीं।

इकट्ठा किए गए गाय के मूत्र का इस्तेमाल खेती-बाड़ी के कामों में कच्चे माल के तौर पर किए जाने की उम्मीद है। ऐसी आशा है कि यह केमिकल वाले उत्पादों की जगह ले सकता है। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो एक औपचारिक नीति बनाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव से पहले इस प्रोजेक्ट को पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

क्या है मकसद?

इस पहल का उद्देश्य गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करना, पशुपालकों की अतिरिक्त आमदनी बढ़ाना, महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना है। पायलट प्रोजेक्ट सफल रहने पर इसे प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी लागू करने की तैयारी है।

बुलंदशहर के 15 गांवों में शुरू हुआ मॉडल

यह पहल बुलंदशहर की स्याना तहसील के नरसेना गांव में डॉ. प्रवीण के नेतृत्व में एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से शुरू की गई है। फिलहाल आसपास के 15 गांवों को इस परियोजना से जोड़ा गया है। इन गांवों में गोमूत्र जमा करने के लिए स्थानीय कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों के जरिए वर्तमान में करीब 500 लीटर गोमूत्र प्रतिदिन एकत्र किया जा रहा है। भविष्य में गोमूत्र की खरीद कीमत को बढ़ाकर 20 रुपये प्रति लीटर करने की भी योजना बताई गई है।

पशुपालकों को नहीं जाना पड़ेगा दूर

गोमूत्र संग्रह के लिए गांवों में 200 लीटर क्षमता वाले टैंक लगाए गए हैं। इससे पशुपालकों को गोमूत्र बेचने के लिए दूर स्थित किसी केंद्र तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। गांव में ही कलेक्शन और खरीद की व्यवस्था होने से इस योजना में अधिक से अधिक पशुपालकों को जोड़ने में मदद मिल रही है। खासकर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन

इस मॉडल की एक खास बात महिलाओं की आर्थिक भागीदारी है। गांवों में गोमूत्र संग्रह में मदद करने वाली महिलाओं को हर लीटर पर 2 रुपये कमीशन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं के लिए गांव में रहते हुए अतिरिक्त आमदनी का एक नया जरिया तैयार हुआ है। इस पहल से करीब 300 महिलाओं को शुरुआत में जोड़ा गया है। उन्हें इस मॉडल में शेयरधारक भी बनाया गया है।

यानी महिलाएं सिर्फ गोमूत्र संग्रह करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें पूरे आर्थिक मॉडल से सीधे जोड़ा गया है। डॉ. प्रवीण ने न्यूज एजेंसी यूएनआई को बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल गोमूत्र की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। बल्कि इसे महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ना है।

गोमूत्र से बनाए जाएंगे खेती में काम आने वाले उत्पाद

संग्रह किए गए गोमूत्र का इस्तेमाल कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है। इसके लिए गोमूत्र में विभिन्न जड़ी-बूटियों को मिलाकर कृषि में इस्तेमाल होने वाले मिश्रण और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों को स्थानीय समितियों और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इस मॉडल का उद्देश्य खेती में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में गोमूत्र आधारित प्राकृतिक उत्पादों को बढ़ावा देना भी है।

दूध के साथ गोमूत्र से भी आमदनी

ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से होने वाली आमदनी मुख्य रूप से दूध और डेयरी उत्पादों पर निर्भर रहती है। इस पहल के जरिए पशुपालकों की आय में गोमूत्र को भी एक अतिरिक्त आर्थिक संसाधन के रूप में जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यानी पशुपालक परिवारों के लिए एक ही पशु से दूध के अलावा गोमूत्र के जरिए भी अतिरिक्त आय का रास्ता बनाया जा रहा है। विशेष रूप से पशुपालन से जुड़े परिवारों की महिलाओं के लिए यह पहल घर और गांव के आसपास रहते हुए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकती है।

सहकारी समितियों के जरिए बाजार तक पहुंचेंगे उत्पाद

गोमूत्र से तैयार कृषि उत्पादों को केवल किसानों तक पहुंचाने पर ही जोर नहीं है, बल्कि इनके लिए स्थानीय बाजार तंत्र भी विकसित किया जा रहा है। तैयार उत्पादों को सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के जरिए किसानों और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे गांव में संग्रह से लेकर उत्पाद तैयार करने और फिर उसकी बिक्री तक एक स्थानीय आर्थिक चक्र विकसित करने की कोशिश है।

गो-संरक्षण, रोजगार और प्राकृतिक खेती को जोड़ने की कोशिश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, बुलंदशहर में शुरू किया गया मॉडल गो-संरक्षण, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक/जैविक खेती को एक साथ जोड़ने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इस मॉडल में गांवों से गोमूत्र इकट्ठा किया जाता है। फिर महिलाएं कलेक्शन प्रक्रिया से आमदनी हासिल करती हैं।

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इसके बाद गोमूत्र से कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार कर उन्हें सहकारी समितियों और स्थानीय समितियों के माध्यम से बाजार तक पहुंचाया जाता है। फिलहाल, यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बुलंदशहर में चलाई जा रही है। इसके अनुभव और परिणामों के आधार पर इसे उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी विस्तार देने की तैयारी है।

हम दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते… हर्ष गोयनका की पोस्ट ने छेड़ी बहस, क्यों चर्चा में है ये मशहूर नेशनल पार्क, क्या करने जा रही सरकार?

Kaziranga National Park: असम सरकार अगले दो महीनों में केंद्र सरकार से काजीरंगा नेशनल पार्क के आस-पास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की मौजूदा 10 किलोमीटर की डिफॉल्ट सीमा को घटाकर 1 किलोमीटर करने की मांग करने की योजना बना रही है। ‘असम ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि इस कदम का मकसद नेशनल पार्क के पास, जिसमें बोकाखाट भी शामिल है, विकास परियोजनाओं पर लगी उन पाबंदियों को हटाना है जिन्हें राज्य सरकार अनावश्यक मानती है।

शर्मा ने कहा, “बोकाखाट में विकास से जुड़ी कई चुनौतियां हैं जिन्हें हम हल करना चाहते हैं, जिनमें स्टेडियम का निर्माण, शहर के बुनियादी ढांचे में सुधार और अन्य अहम प्रोजेक्ट शामिल हैं।”

उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर शुरुआती बातचीत पहले ही हो चुकी है। काजीरंगा को अंतिम ESZ नोटिफिकेशन मिलने के बाद राज्य सरकार केंद्र के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव तैयार करेगी।

उन्होंने आगे कहा, “चूंकि काजीरंगा के लिए अभी तक अंतिम नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है, इसलिए डिफॉल्ट रूप से इको-सेंसिटिव जोन 10 किलोमीटर का है। नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, हम वैज्ञानिक रूप से तय 1 किलोमीटर के इको-सेंसिटिव जोन का प्रस्ताव रखेंगे।”

शर्मा ने यह भी कहा कि प्रस्तावित बदलाव से बोकाखाट में विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी और साथ ही काजीरंगा के वन्यजीवों और पर्यावरण का संरक्षण भी जारी रहेगा।

पर्यावरणविदों ने राज्य सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया?

वहीं, पर्यावरणविदों ने असम सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज साइट, काजीरंगा नेशनल पार्क के आस-पास के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को कम करने की बात कही गई है। उनका कहना है कि सुरक्षित बफर जोन को कम करने से पार्क पर दबाव बढ़ सकता है और वहां के वन्यजीवों पर बुरा असर पड़ सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या पार्क और उसके वन्यजीवों की सुरक्षा की कीमत पर विकास की अनुमति दी जानी चाहिए।

गोलाघाट के पर्यावरण कार्यकर्ता और पत्रकार अपूर्व बल्लभ गोस्वामी ने The Federal को बताया कि ESZ (इको-सेंसिटिव जोन) को कम करने से काजीरंगा में वन्यजीवों, खासकर एक सींग वाले गैंडे के लिए खतरा पैदा हो सकता है, जिसे असम का प्रतीक माना जाता है।

धेकियाजुली के एक और पर्यावरण कार्यकर्ता दिलीप नाथ ने कहा कि प्रस्तावित कटौती इको-सेंसिटिव जोन पर सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश के खिलाफ भी हो सकती है। नाथ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला दो अहम बातों पर आधारित था – जानवरों को प्रजनन के लिए पर्याप्त जगह देना और उन घास के मैदानों की रक्षा करना जो उनके लिए भोजन का स्रोत हैं।

उन्होंने कहा, “अगर सरकार ESZ का दायरा कम करती है, तो घास के मैदान कम हो जाएंगे और जानवरों की संख्या भी घट जाएगी। अगर वे इस कदम को आगे बढ़ाते हैं, तो हमारे पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचेगा।”

‘दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते…’

RPG एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा, “असम एक स्टेडियम और दूसरे विकास कार्यों के लिए काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन (पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र) को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करना चाहता है। लेकिन हर मॉनसून में बाढ़ के कारण हाथी और गैंडे इन्हीं रास्तों से ऊंचे इलाकों की ओर जाने को मजबूर होते हैं।”

उन्होंने कहा, आइए स्टेडियम कहीं और बनाएं, क्योंकि हम दूसरा काजीरंगा नहीं बना सकते।

बता दें कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन को लेकर लंबे समय से अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। मार्च में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने भी कहा था कि असम सरकार की ओर से केंद्र को न तो ESZ की अंतिम अधिसूचना भेजी गई है और न ही इसका कोई ड्राफ्ट प्रस्ताव सौंपा गया है। नतीजतन, 10 किलोमीटर के दायरे वाला नियम अभी भी लागू है।

वहीं, असम सरकार का कहना है कि मौजूदा 10 किलोमीटर के जोन की वजह से बोकाखाट में इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास रुका हुआ है। इन पाबंदियों के कारण कई प्रोजेक्ट्स, जिनमें एक आधुनिक स्टेडियम और दूसरे नागरिक विकास के काम शामिल हैं, अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

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Tata Sons Chairman N Chandrasekaran: आखिर कार्यकाल खत्म होने के 6 महीने पहले एन चंद्रशेखरन ने क्यों दे दिया इस्तीफा?

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के अचानक इस्तीफे ने चौंका दिया। 12 अगस्त की सुबह उन्होंने अपने इ्स्तीफे का ऐलान किया। इसका असर टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। टाटा समूह देश का सबसे बड़ा कारोबारी समूह है। इसकी तीन दर्जन से ज्यादा कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। इनमें टीसीएस, टाइटन, टाटा कंज्यूमर, टाटा मोटर्स जैसी दिग्गज कंपनियां हैं, जिनकी पहचान देश के घर-घर में है। चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है। सवाल है कि चंद्रशेखरन ने अचानक क्यों इस्तीफा दे दिया?

टाटा समूह से 40 साल पुराना रिश्ता खत्म हो जाएगा

पहले एन चंद्रशेखरन के बारे में थोड़ा जान लेना जरूरी है। वह 1987 में टाटा समूह का हिस्सा बने थे। 2009 में उन्हें टाटा समूह की सबसे बड़ी कंपनी TCS का सीईओ नियुक्त किया गया। यह देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी भी है। फिर, 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया। यह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। टाटा संस का चेयरमैन एक तरह से पूरे ग्रुप का बॉस होता है। इसलिए टाटा संस के चेयरमैन के पद को समूह में सबसे अहम माना जाता है।

फरवरी में तीसरी बार नियुक्ति के प्रस्ताव पर टल गया था फैसला

इस साल फरवरी में चंद्रशेखरन को तीसरी बार टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव पर फैसला होना था। लेकिन, इस फैसले को तब टाल दिया गया। इसकी वजह नोएल टाटा का विरोध था। वह इस प्रस्ताव के खिलाफ थे। नोएल टाटा समूह की चैरिटी का काम देखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं। नोएल रतन टाटा के सौतेले भाई हैं। रतन टाटा के निधन के बाद वह टाटा समूह में सबसे पावरफुल हैं। रतन टाटा के निधन के बाद उन्हें टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में नियंत्रण योग्य यानी आधा से ज्यादा हिस्सेदारी है। इसलिए टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन को सबसे ज्यादा पावरफुल माना जाता है।

टाटा समूह की नई लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता थी

तीसरी बार नियुक्ति के प्रस्ताव पर फैसला टलने के छह महीने बाद भी यह मसला लंबित था। इसका मतलब है कि टाटा संस के नए लीडर को लेकर अनिश्चितता की स्थिति थी। चंद्रशेखरन का मानना है कि टाटा ग्रुप के भविष्य के लिए ऐसी अनिश्चितता ठीक नहीं है। इस समूह में करीब तीन दर्जन ऐसी कंपनियां हैं, जो शेयर बाजार में लिस्टेड है। इन कंपनियों के शेयरों में लाखों निवेशकों का पैसा लगा है। टाटा का ब्रांड न सिर्फ भारत में बल्कि विदेश में भी काफी प्रतिष्ठित है। देश के करोड़ों लोग इस ब्रांड पर भरोसा करते हैं।

18 अगस्त को होने वाली है टाटा संस के बोर्ड की मीटिंग

चंद्रशेखरन ने काफी विचार करने के बाद अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया। इकोनॉमिक टाइम्स की 12 अगस्त की एक खबर में बताया गया कि चंद्रशेखरन 18 अगस्त से पहले इस्तीफा देना चाहते थे। इस बारे में उन्होंने अपने करीब लोगों से चर्चा की थी। दरअसल, 18 अगस्त को टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) होनी है। इस मीटिंग में शेयरहोल्डर को चंद्रशेखरन की तीसरी बार चेयरमैन पद पर नियुक्ति के प्रस्ताव पर वोटिंग करनी थी।

बोर्ड का एक सदस्य तीसरी बार नियुक्ति के प्रस्ताव के खिलाफ

चंद्रशेखरन ने इस्तीफे के बाद जो बयान दिया है, उससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें तीसरी बार कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का भरोसा नहीं था। उन्होंने बयान में कहा है, “तीसरी बार मेरी नियुक्ति के प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो सका, क्योंकि बोर्ड का एक सदस्य का समर्थन प्रस्ताव को हासिल नहीं था।”

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टाटा समूह के हित में पद से इस्तीफा देने का लिया फैसला

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव पर फैसला टलने के 6 महीने बाद भी इस मसले का समाधान नहीं हो सका है। उन्हें टाटा समूह जैसे कारोबारी समूह की लीडरशिप को लेकर ऐसी अनिश्चितता पसंद नहीं थी। उनका मानना था कि यह टाटा समूह के भविष्य के लिए ठीक नहीं है। इसलिए उन्होंने एजीएम से पहले इस्तीफा देने का फैसला किया।

‘शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचा सकता है’; Insta reels पसंद करने वाली Gen Z को PM मोदी का संदेश

PM Modi message to reel-loving Gen Z: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरों के संघर्षों से सीखने की अपील। एक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने बुधवार (12 अगस्त) को अपील करते हुए कहा कि रील के युग में रह रहे युवाओं को याद रखना चाहिए कि शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचा सकता है।

PM मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविंद का जीवन दिखाता है कि दृढ़ संकल्प किसी व्यक्ति को मुश्किलों से उबरने और सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने में कैसे मदद कर सकता है।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी कोविंद के लगातार सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने का जिक्र करते हुए कहा कि पद छोड़ने के बाद भी उन्होंने आराम नहीं किया। बल्कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पहल पर काम कर रहे हैं, जो भारतीय लोकतंत्र में एक नया अध्याय खोल सकती है। पीएम मोदी ने कहा कि इस मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति के प्रयास भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में उनके निरंतर योगदान का हिस्सा हैं।

युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील

प्रधानमंत्री ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि इनसे किसी खास दौर को उस व्यक्ति के जीवन के जरिए समझने का मौका मिलता है जिसने उसे खुद अनुभव किया हो। उन्होंने कहा, “आज रील का जमाना है, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आपको कहीं न कहीं खींच ले जाते हैं लेकिन इस दौर में भी, रेलवे स्टेशन पर लिखी बात याद रखें, ‘शॉर्टकट’ आपको नुकसान पहुंचा सकता है।”

PM मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सरकार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोशल मीडिया पर ‘जेन जी’ से जुड़ने की कोशिशें तेज कर दी हैं। नीट का पेपर लीक होने के खिलाफ पिछले महीने हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों से कहा था कि वे युवाओं से जुड़ने के लिए इंस्टाग्राम का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें और रील पोस्ट करें।

पीएम मोदी भी शेयर कर रहे हैं रील्स

हाल के हफ्तों में पीएम मोदी ने स्वयं युवाओं को संबोधित करते हुए कई बार रील शेयर की हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र की धरोहर बनेगी। साथ ही नई पीढ़ी को इससे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

पीएम मोदी ने कहा, “हमें भविष्य में और ऐसे कई युवाओं की जरूरत है जो कोविंद की हों। ऐसे लोग जो हालात से हार न मानें, बल्कि हर चुनौती से पार पाने का पुख्ता इरादा रखें। वे आत्मनिर्भर भारत का रास्ता बनाएंगे और यह आत्मकथा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।”

उन्होंने कहा कि आत्मकथा का शीर्षक बिल्कुल सही है क्योंकि कोविंद का जीवन और संघर्ष भले ही व्यक्तिगत थे। लेकिन उन संघर्षों की जीत भारतीय लोकतंत्र की है। पीएम मोदी ने याद किया कि बचपन में घर का सामान बचाने की कोशिश के दौरान लगी आग में कोविंद ने अपनी मां को खो दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुखद घटना कोविंद को तोड़ सकती थी। लेकिन इसके बजाय इसने उन्हें और मजबूत बनाया।

अच्छे संस्कार का किया जिक्र

पीएम मोदी ने कहा कि कोविंद में अच्छे संस्कार डालने में उनके पिता की अहम भूमिका रही। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन में कोविंद के साथ अपनी मुलाकातों को याद करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति उनसे ऐसी बातें करते थे जिनकी प्रोटोकॉल के तहत आम तौर पर अनुमति नहीं होती थी। PM मोदी के मना करने के बावजूद वे उन्हें खुद कार तक छोड़ने आते थे। कोविंद ने इस अवसर पर अपने बचपन की मुश्किलों और अपने आस-पास के माहौल से मिली सीख को याद किया।

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उन्होंने याद किया कि कैसे उनके घर की छत से बारिश का पानी टपकता था। उनका परिवार बारिश रुकने का इंतजार करता था। कोविंद ने कहा कि सरकारी आवास योजनाओं के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को सिर पर छत मिली है और उन्हें सम्मान के साथ जीने का मौका मिला है। कोविंद ने कहा कि वह BJP से इसलिए जुड़े क्योंकि उनकी नजर में यह पार्टी परिवार या समुदाय के हितों से ऊपर देश को रखती है।

अमित शाह के ऑफर पर क्या बोले राहुल गांधी, क्यों मांगा इस्तीफा?

अमित शाह के ऑफर पर क्या बोले राहुल गांधी, क्यों मांगा इस्तीफा?

rahul gandhi vs amit shah

जंतर मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज के मामले में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में चर्चा और जवाब संबंधी पेशकश को खारिज करते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनसे इस्तीफा मांग लिया। राहुल ने कहा कि जनता तय करेगी की कौन भाग रहा है? ALSO READ: क्या बिना संसद में परिसीमन बिल पास हुए बदल जाएंगी लोकसभा की सीटें? जानिए संविधान का वो नियम जो कोई नहीं बताता

 

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देखिए सबसे पहले लापता और भाग गए हैं इस प्रकार की भाषा भारत की सर्वाजनिक जीवन में, संसदीय जीवन में अभी अभी सुनाई देती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ है तबसे मैं लगातार संसद में आता हूं और अपने चैंबर में बैठा हूं चूंकि विपक्ष सदन को चलने नहीं दे रहे हैं। तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है सरकार की ओर से किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया कि छात्र आंदोलन के प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए तैयार हैं और चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

 

उन्होंने कहा कि मेरी ओर से मैंने भी कह दिया कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं लेकिन वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते हैं। आज 3 बजे तक वो स्पीकर साहब को पत्र दें और कल 3 बजे तक हम सभी प्रकार की चर्चा के लिए तैयार हैं मैं सदन में बैठूंगा और सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। अब विपक्ष को तय करना है उनको चर्चा करनी है या हंगामा करना है। ALSO READ: सुप्रिया सुले की बेटी की शादी में राहुल गांधी और अमित शाह, क्‍या मुलाकात हुई, कुछ बात हुई?

 

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कहा कि विपक्ष ने साफ कहा है कि हमें अमित शाह का बयान सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। जब मैं 'हम' कहता हूं, तो मेरा मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। छात्रों पर गोली किसने चलाई? कील लगी लाठियों से छात्रों को पीटने का आदेश किसने दिया? क्या हमारे बच्चों पर गोली चलाने का आदेश अमित शाह ने दिया था? अगर उन्होंने ऐसा किया है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। ALSO READ: झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर सियासी संग्राम, संसद में NDA का प्रदर्शन; राहुल गांधी से मांगा जवाब

 

उन्होंने कहा कि पिछले 20 दिनों से अमित शाह गायब हैं। भारत के गृह मंत्री में हिम्मत नहीं है, वे सदन में नहीं आ सकते। उन्होंने कहा कि जनता तय करेगी की कौन भाग रहा है? 

LPG Rate 12 August 2026: आज कितना महंगा हुआ गैस सिलेंडर? देखें दिल्ली से पटना तक के नए रेट

LPG Rate 12 August 2026: अंतरराष्ट्रीय मार्केट में मची ऊथल-पुथल के बीच तेल कंपनियों ने भारत में LPG सिलेंडर की कीमतों को स्थिर कर रखा है। 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर अब भी उसी दाम पर मिल रहा है, जो पहले था। लेकिन, 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में इस महीने कुछ बदलाव देखने मिले हैं। ऐसे में अगर आपके घर का गैस सिलेंडर खत्म हो गया है और बुक कराने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले आपको अपने शहर का जानना बहुत जरूरी है। यहां 14.2 किलो और 19 किलो, दोनों ही गैस सिलेंडर की पूरी रेट लिस्ट दी गई है।

देखें शहरवार 14.2 और 19 कलोग्राम वाले LPG सिलेंडर के दाम

शहरघरेलू LPG सिलेंडर (14.2 किलोग्राम)कमर्शियल LPG सिलेंडर (19 किलोग्राम)
दिल्ली₹942.00₹2,738.00
कोलकाता₹968.00₹2,872.50
मुंबई₹941.50₹2,691.50
चेन्नई₹957.50₹2,906.00
गुड़गांव₹950.50₹2,755.00
नोएडा₹939.50₹2,738.00
बेंगलुरू₹944.50₹2,821.00
भुवनेश्वर₹968.00₹2,908.00
चंडीगढ़₹951.50₹2,760.00
हैदराबाद₹994.00₹2,985.00
जयपुर₹945.50₹2,765.50
लखनऊ₹979.50₹2,860.50
पटना₹1,031.50₹3,018.00

महंगा होगा गैस सिलेंडर

फिलहाल घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले दिनों में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। दरअसल, सरकार रणनीतिक ईंधन भंडार तैयार करने के लिए LPG पर नया टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। ऐसे में अगर कीमतों में कोई बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। इसलिए गैस सिलेंडर के नए रेट जानने के लिए रोजाना LPG की कीमतों पर नजर रखना बेहतर होगा।

कब बदलते हैं दाम

वैसे तो पेट्रोल-डीजल की तरह LPG सिलेंडर के दाम रोजाना नहीं बदलते। लेकिन तेल विपणन कंपनियां आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को ही कीमतों की समीक्षा करती हैं और जरूरत पड़ने पर उसी दिन नई दरें लागू की जाती हैं।

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