Independence Day 2026: 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल किले पर क्यों फहराते हैं तिरंगा? इस साल देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस

Independence Day 2026: हर साल 15 अगस्त को, भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते हैं। यह पल अंग्रेजों से लंबे संघर्ष के बाद मिली आजादी को याद दिलाता है और देश को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए एक करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री ही क्यों झंडा फहराते हैं, जबकि राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस पर इसे फहराते हैं? दोनों समारोह एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन ये आजाद भारत के इतिहास में दो अलग-अलग मील के पत्थर हैं।

स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त को, प्रधानमंत्री लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी को, राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराते हैं। अंतर इस बात में है कि दोनों दिन क्या दर्शाते हैं: 1947 में भारत की स्वतंत्रता और 1950 में संविधान को अपनाना।

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री झंडा क्यों फहराते हैं?

15 अगस्त वह दिन है जब भारत 1947 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ था। लाल किले पर झंडा फहराने का समारोह ब्रिटिश शासन के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद भारत की स्वतंत्रता को दर्शाता है। आजाद भारत में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर राष्ट्रीय झंडा फहराया था। तब से, प्रधानमंत्री पारंपरिक रूप से स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं। प्रधानमंत्री झंडे के खंभे के नीचे से झंडा फहराते हैं, जिसके बाद राष्ट्रगान होता है। यह समारोह स्वतंत्रता दिवस की मुख्य परंपराओं में से एक है और पूरे देश में इसे देखा जाता है।

गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति फहराते हैं तिरंगा

गणतंत्र दिवस आजाद भारत के इतिहास में एक अलग महत्वपूर्ण पल का प्रतीक है। 26 जनवरी, 1950 को, भारत का संविधान लागू हुआ, जिसने भारत सरकार अधिनियम, 1935 की जगह ली, और भारत एक गणतंत्र बन गया। यह दिन संविधान को अपनाने की याद में मनाया जाता है और हर साल भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रमों में से एक के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर, राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय झंडा फहराते हैं। झंडा पहले से ही झंडे के खंभे के ऊपर बंधा होता है और समारोह के दौरान इसे फहराया जाता है। इस आयोजन के बाद रिपब्लिक डे परेड होती है, जिसमें भारत की संस्कृतिक विविधता, सैन्य ताकत और नेशनल अचीवमेंट्स को दिखाया जाता है।

दोनों आयोजनों में मूल अंतर

15 अगस्त और 26 जनवरी दोनों ही राष्ट्रीय दिवस हैं, जिनका भारत के इतिहास में अहम स्थान है। हर साल 15 अगस्त को मनाया जाने वाला स्वतंत्रता दिवस 1947 में ब्रिटिश राज से भारत की आजादी का प्रतीक है। वहीं, 26 जनवरी को मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवस देश में एक संविधान लागू होने की घटना का प्रतीक है।

15 अगस्त को प्रधानमंत्री का झंडा फहराने का समारोह देश की आजादी और उसके लिए हुए संघर्ष से जुड़ा है। 26 जनवरी को राष्ट्रपति का झंडा फहराने का समारोह भारत की संवैधानिक और गणतंत्र पहचान से जुड़ा है।

Independence Day 2026: स्वतंत्रता दिवस पर सबसे पहले किसने लाल किले पर फहराया था तिरंगा? जानें इतिहास में दर्ज इस घटना के बारे में

रिपोर्ट-ईरान को पता था तुर्किये में कहां रुकेंगे ट्रम्प:बिल्डिंग के फ्लोर की भी जानकारी; कल ट्रम्प ने कहा था- ईरान के डर से प्लेन बदला

ईरानी एजेंट्स को पता था कि 7 जुलाई को तुर्की के अंकारा में हुए NATO समिट में ट्रम्प किस बिल्डिंग में रुके हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह आकलन किया है। ईरान को यह भी पता था कि ट्रम्प बिल्डिंग के किस फ्लोर पर रुके हैं। इसी जानकारी के बाद ट्रम्प को तुर्की से दूसरे विमान में ले जाया गया। मंगलवार को ट्रम्प ने भी ईरान के डर से विमान बदलने की बात मानी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से नाटो समिट में हिस्सा लेने गए थे, उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए एयरफोर्स वन के पीछे एक केटरिंग ट्रक नजर आ रही है ट्रम्प के खिलाफ खास खतरे की जानकारी मिली रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था। अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो शिखर सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था। इसके बाद सीक्रेट सर्विस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्की से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था
अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
8 जुलाई को बदला गया विमान यह खतरा 8 जुलाई को सामने आया, जब ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अंकारा से रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह पुराने एयरफोर्स वन विमान से तुर्की से निकलेंगे, जिसे उन्होंने “पुराने समय की याद के लिए” बताया था। कैमरों के सामने ट्रम्प को उसी विमान में सवार होते देखा गया। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उन्हें गुप्त रूप से एयरपोर्ट के कैटरिंग कंटेनर के जरिए उस विमान से निकाला गया और छोटे सैन्य विमान में ले जाया गया। पुराना एयरफोर्स वन विमान ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस के अधिकारियों, सुरक्षा कर्मचारियों और पत्रकारों को लेकर रवाना हुआ। इस तरह वह विमान एक डिकॉय के तौर पर काम कर रहा था। इसके बाद ट्रम्प ब्रिटेन में रुके। वहां उन्होंने गुप्त रूप से दोबारा उस विमान में सवारी की और बाद में कतर से मिले बोइंग 747-8 विमान में लौटे। ट्रम्प ने कहा- मुझे दूसरे विमान में भेजना चाहते थे ट्रम्प ने मंगलवार को पुष्टि की कि उन्हें दूसरे विमान में ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि सीक्रेट सर्विस और सेना ने उनसे कहा था कि वे चाहते हैं कि ट्रम्प किसी दूसरे विमान से जाएं। द एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, “वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट, दूसरे विमान से जाऊं।” उन्होंने कहा, “शायद बाहर कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं पूछा। मुझे बहुत धमकियां मिलती हैं।” ट्रम्प ने खतरे को कम करके बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि जिस विमान से वह वास्तव में गए थे, वह शायद ज्यादा खतरे में था। डिकॉय ऑपरेशन को असामान्य क्यों माना गया खतरनाक जगहों की यात्राओं के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी गुप्त यात्रा योजनाओं और डिकॉय विमानों का इस्तेमाल कर चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2023 में गुप्त रूप से कीव की यात्रा की थी। वह पहले पोलैंड गए और वहां से रात में गुप्त ट्रेन के जरिए यूक्रेन पहुंचे। दो पत्रकार उनके साथ थे और यात्रा शुरू होने के बाद उन्होंने इस दौरे की जानकारी दर्ज की थी। ट्रम्प ने 2019 में अफगानिस्तान की गुप्त थैंक्सगिविंग यात्रा भी की थी। अधिकारियों ने एक डिकॉय विमान और अलग प्रेस पूल का इस्तेमाल किया था, ताकि यह impression बना रहे कि ट्रम्प छुट्टियां अपने मार-ए-लागो एस्टेट में मना रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और बिल क्लिंटन ने भी सुरक्षा कारणों से गुप्त यात्राएं की थीं या यात्रा के दौरान भ्रम पैदा करने वाली व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया था। ट्रम्प के मामले में असामान्य बात यह थी कि वह तत्काल खतरे वाले इलाके से निकलने के बाद भी यह धोखा जारी रहा। उनके साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल को नहीं बताया गया कि राष्ट्रपति उस विमान में नहीं थे, जिसे वे राष्ट्रपति को ले जाने वाला विमान समझ रहे थे। “रेवेन रॉक” किताब के लेखक गैरेट एम ग्राफ ने एपी से कहा कि राष्ट्रपति पहले भी बिना पहचान वाले या डिकॉय विमानों से यात्रा कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के ठिकाने को लेकर लंबे समय तक जानकारी छिपाए जाने को अभूतपूर्व बताया। ईरान पहले भी ट्रम्प को निशाना बना चुका है ट्रम्प पहले भी ईरान से जुड़ी धमकियों और साजिशों का निशाना बन चुके हैं। 2024 में पेंसिलवेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान एक संभावित हमलावर की गोली उन्हें छूकर निकल गई थी। उसी साल बाद में फ्लोरिडा के उनके गोल्फ कोर्स में एक हथियारबंद व्यक्ति ने भी उन्हें निशाना बनाया था। हत्या के ये दोनों प्रयास ईरान से जुड़ी धमकियों से अलग थे। इसके अलावा, ट्रम्प की हत्या के लिए सुपारी देने की साजिश के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था। इस साजिश का पता बाइडेन प्रशासन के दौरान चला था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि यह साजिश ईरानी एजेंट्स के एक प्रॉक्सी के जरिए काम करने से जुड़ी थी। द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ताजा खुफिया जानकारी ट्रम्प के अंकारा में रहने के दौरान मिले एक खास खतरे से जुड़ी थी।

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ईरानी एजेंट्स को पता था कि 7 जुलाई को तुर्की के अंकारा में हुए NATO समिट में ट्रम्प किस बिल्डिंग में रुके हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह आकलन किया है। ईरान को यह भी पता था कि ट्रम्प बिल्डिंग के किस फ्लोर पर रुके हैं। इसी जानकारी के बाद ट्रम्प को तुर्की से दूसरे विमान में ले जाया गया। मंगलवार को ट्रम्प ने भी ईरान के डर से विमान बदलने की बात मानी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से नाटो समिट में हिस्सा लेने गए थे, उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया। ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए एयरफोर्स वन के पीछे एक केटरिंग ट्रक नजर आ रही है ट्रम्प के खिलाफ खास खतरे की जानकारी मिली रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था। अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो शिखर सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था। इसके बाद सीक्रेट सर्विस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्की से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया। कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था। इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं। तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी अधिकारी बोले- मोदी-ट्रम्प टैरिफ का मुद्दा सुलझाएंगे:कहा- उनके बीच अच्छे संबंध; 5 दिन पहले अमेरिका में भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल पास हुआ था
अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
8 जुलाई को बदला गया विमान यह खतरा 8 जुलाई को सामने आया, जब ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अंकारा से रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह पुराने एयरफोर्स वन विमान से तुर्की से निकलेंगे, जिसे उन्होंने “पुराने समय की याद के लिए” बताया था। कैमरों के सामने ट्रम्प को उसी विमान में सवार होते देखा गया। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उन्हें गुप्त रूप से एयरपोर्ट के कैटरिंग कंटेनर के जरिए उस विमान से निकाला गया और छोटे सैन्य विमान में ले जाया गया। पुराना एयरफोर्स वन विमान ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस के अधिकारियों, सुरक्षा कर्मचारियों और पत्रकारों को लेकर रवाना हुआ। इस तरह वह विमान एक डिकॉय के तौर पर काम कर रहा था। इसके बाद ट्रम्प ब्रिटेन में रुके। वहां उन्होंने गुप्त रूप से दोबारा उस विमान में सवारी की और बाद में कतर से मिले बोइंग 747-8 विमान में लौटे। ट्रम्प ने कहा- मुझे दूसरे विमान में भेजना चाहते थे ट्रम्प ने मंगलवार को पुष्टि की कि उन्हें दूसरे विमान में ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि सीक्रेट सर्विस और सेना ने उनसे कहा था कि वे चाहते हैं कि ट्रम्प किसी दूसरे विमान से जाएं। द एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, “वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट, दूसरे विमान से जाऊं।” उन्होंने कहा, “शायद बाहर कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं पूछा। मुझे बहुत धमकियां मिलती हैं।” ट्रम्प ने खतरे को कम करके बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि जिस विमान से वह वास्तव में गए थे, वह शायद ज्यादा खतरे में था। डिकॉय ऑपरेशन को असामान्य क्यों माना गया खतरनाक जगहों की यात्राओं के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी गुप्त यात्रा योजनाओं और डिकॉय विमानों का इस्तेमाल कर चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2023 में गुप्त रूप से कीव की यात्रा की थी। वह पहले पोलैंड गए और वहां से रात में गुप्त ट्रेन के जरिए यूक्रेन पहुंचे। दो पत्रकार उनके साथ थे और यात्रा शुरू होने के बाद उन्होंने इस दौरे की जानकारी दर्ज की थी। ट्रम्प ने 2019 में अफगानिस्तान की गुप्त थैंक्सगिविंग यात्रा भी की थी। अधिकारियों ने एक डिकॉय विमान और अलग प्रेस पूल का इस्तेमाल किया था, ताकि यह impression बना रहे कि ट्रम्प छुट्टियां अपने मार-ए-लागो एस्टेट में मना रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और बिल क्लिंटन ने भी सुरक्षा कारणों से गुप्त यात्राएं की थीं या यात्रा के दौरान भ्रम पैदा करने वाली व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया था। ट्रम्प के मामले में असामान्य बात यह थी कि वह तत्काल खतरे वाले इलाके से निकलने के बाद भी यह धोखा जारी रहा। उनके साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल को नहीं बताया गया कि राष्ट्रपति उस विमान में नहीं थे, जिसे वे राष्ट्रपति को ले जाने वाला विमान समझ रहे थे। “रेवेन रॉक” किताब के लेखक गैरेट एम ग्राफ ने एपी से कहा कि राष्ट्रपति पहले भी बिना पहचान वाले या डिकॉय विमानों से यात्रा कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के ठिकाने को लेकर लंबे समय तक जानकारी छिपाए जाने को अभूतपूर्व बताया। ईरान पहले भी ट्रम्प को निशाना बना चुका है ट्रम्प पहले भी ईरान से जुड़ी धमकियों और साजिशों का निशाना बन चुके हैं। 2024 में पेंसिलवेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान एक संभावित हमलावर की गोली उन्हें छूकर निकल गई थी। उसी साल बाद में फ्लोरिडा के उनके गोल्फ कोर्स में एक हथियारबंद व्यक्ति ने भी उन्हें निशाना बनाया था। हत्या के ये दोनों प्रयास ईरान से जुड़ी धमकियों से अलग थे। इसके अलावा, ट्रम्प की हत्या के लिए सुपारी देने की साजिश के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था। इस साजिश का पता बाइडेन प्रशासन के दौरान चला था। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि यह साजिश ईरानी एजेंट्स के एक प्रॉक्सी के जरिए काम करने से जुड़ी थी। द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ताजा खुफिया जानकारी ट्रम्प के अंकारा में रहने के दौरान मिले एक खास खतरे से जुड़ी थी।

MP में निवेश का बड़ा मौका, 8,635 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, 5,700 से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

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गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित निवेश संवाद के दौरान मध्यप्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों में 8 हजार 635 करोड़ रुपए के निवेश प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से 5 हजार 785 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। निवेश संवाद में गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, भावनगर, राजकोट और वडोदरा सहित प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से 500 से अधिक उद्योगपतियों, निवेशकों एवं कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों ने सहभागिता की और मध्यप्रदेश में निवेश के प्रति विशेष रुचि दिखाई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 12 अगस्त को अहमदाबाद में आयोजित मेगा निवेश संवाद इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश में देशभर से आए प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को संबोधित किया।   

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश व्यापार-व्यवसाय, नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना-विस्तार और बिजनेस एक्सटेंशन के लिए असीम संभावनाओं की धरती है। मध्यप्रदेश में निवेश हमेशा से ही फायदे का सौदा रहा है। उन्होंने देशभर के निवेशकों का प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश में निवेश करने वालों को हमारी सरकार हर संभव सुविधा, सुरक्षा और सहयोग उपलब्ध कराएगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए देश में चल रहे विकास यज्ञ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की नई औद्योगिक नीतियों को देश के उद्योग जगत से सराहना मिल रही है। उद्योग के संचालन के लिए मुख्यत: ठोस नीति, नेक नीयत और सहयोगी सरकार। मध्यप्रदेश में आपको यह तीनों ही मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने गुजरात के उद्योग जगत को आगामी प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027, भोपाल के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, आपके पास अनुभव है और हमारे पास अवसर। हमारे अवसरों को आपका अनुभव मिल जाए, तो हम मिलकर इतिहास रचेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश के प्रगति पथ में सहयात्री बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आइए, मध्यप्रदेश में बिना किसी संकोच के और खुले दिल से निवेश कीजिए तथा हमारे साथ विकास की इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनिए।

 

एमपी में किसी बात की चिंता नहीं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों को बिजली, पानी और जमीन की चिंता करने की जरूरत नहीं है। औद्योगिक भूमि रियायती दरों पर लीज पर उपलब्ध है, पर्याप्त वाटर बैंक और सरप्लस बिजली है तथा प्लग एंड प्ले जोन विकसित किए जा रहे हैं। लगभग 19 हजार एकड़ में 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जा रहे हैं। सिंगल विंडो सिस्टम को 'समस्याओं का अंत, सेवा तुरंत' बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बाधा का समाधान एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। सरल और सहज कनेक्टिविटी को प्रदेश की बड़ी ताकत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क, मजबूत रेल कनेक्टिविटी, 8 एयरपोर्ट, 6 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो, एक्सप्रेस-वे और हाईवेज़ उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रशिक्षित और कुशल श्रम शक्ति भी बेहद आसानी से उपलब्ध है।

 

मध्यप्रदेश और गुजरात हैं जुड़वा भाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और गुजरात के बीच औद्योगिक संभावनाओं एवं उच्च कोटि के परस्पर सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ही राज्य जुड़वा भाईयों की तरह हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के पास तकनीक, व्यापार और औद्योगिक अनुभव है, वहीं मध्यप्रदेश के पास प्रचुर जल, लैंड बैंक और देश के मध्य में स्थित होने का लॉजिस्टिक्स एडवांटेज है। दोनों राज्यों की इन्हीं बेजोड़ विशेषताओं के समन्वय से इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास का नया इतिहास रचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि गुजरात के पेट्रोकेमिकल, रसायन, टेक्सटाइल, फार्मा, फूड प्रोसेसिंग और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों के लिए मध्यप्रदेश में व्यापक अवसर हैं। बीना में विशाल पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी, उज्जैन में 360 एकड़ में विकसित हो रहा अत्याधुनिक मेडिकल डिवाइस पार्क, धार और नवसारी में पीएम मित्रा पार्क तथा पीथमपुर का मजबूत ऑटोमोबाइल आधार दोनों राज्यों की औद्योगिक साझेदारी की संभावनाओं को और मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश को विभिन्न क्षेत्रों में 34 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। नवीकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो और बायोमास जैसी नीतियों से निवेश का रास्ता आसान हुआ है और इन क्षेत्रों में 7 लाख 19 हजार करोड़ रुपए का निवेश प्राप्त हुआ है।

mohan yadav

मां नर्मदा के दो बेटे देश के औद्योगिक विकास के लिए बढ़ रहे हैं साथ-साथ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के काल से गुजरात की धरती देश को समृद्धि देती आई है। गुजरात ने महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे महापुरुष हमें दिए हैं। अब प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत दुनिया का अग्रणी देश बनने की ओर अग्रसर है। गुजरात और मध्यप्रदेश मां नर्मदा के दो बेटों की तरह हैं। नर्मदा के जल से दोनों प्रदेशों में पेयजल और सिंचाई के पर्याप्त पानी मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार सरोवर बांध के लिए अपने संकल्प को पूरा किया है। दोनों राज्यों में उद्योग, व्यापार, संस्कृति सहित सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूलता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उद्यमी पुरुषार्थ और व्यापार से कई लोगों को रोजगार और घर चलाने का अवसर मिलता है। हम 'जियो और जीने दो' के साहचर्य सिद्धांत पर आगे बढ़ने वाले लोग हैं।

 

समृद्धि वाली धरती है गुजरात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेगा निवेश संवाद कार्यक्रम में आए उद्योगपतियों और उद्यमियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि गुजरात के साथ संबंध अनेक प्रकार से महात्मा गांधी के समय से है। स्वतंत्रता आंदोलन समर में सभी राज्य संयुक्त रूप से संघर्षरत थे। गुजरात से ही सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा आधुनिक भारत की नींव रखने का कार्य किया गया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने मध्यप्रदेश में शिक्षा ग्रहण की। गुजरात में वे द्वारकाधीश बने और जगद्गुरु भी बने। गुजरात की धरती ही कृष्ण को श्री लगाने वाली और समृद्धि देने वाली धरती है। अब एक बार फिर गुजरात और मध्यप्रदेश के साथ अब नया रिश्ता जुड़ रहा है। मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए गुजरात के सभी उद्यमी आमंत्रित हैं। उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश में पूरा सहयोग प्राप्त होगा। गुजरात में पेट्रोकेमिकल , रसायन, टेक्सटाइल, फॉर्मा और एनर्जी सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। गुजरात का टेक्सटाइल तो दुनिया में प्रसिद्ध है। गुजरात के पास धार जिले में प्रधानमंत्री मोदी ने 2 हजार एकड़ में बन रहे टेक्सटाइल सेक्टर के पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन किया। यहां तेजी से निवेश आ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भी गुजरात से हैं। उनके नेतृत्व में भारत पूरे विश्व में सबसे अलग छवि बना रहा।

 

क्रियान्वित हो रहा समृद्धि का संकल्प

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और गुजरात के मध्य समन्वय तेजी से बढ़ रहा है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी का जो राज्यों की समृद्धि का संकल्प था , वह क्रियान्वित हो रहा। सरदार सरोवर परियोजना के संदर्भ में राज्यों के मध्य आवश्यक सहयोग पर बल दिया गया है। दोनों राज्यों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में केंद्र का पर्याप्त समुचित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। राज्यों में परस्पर सहयोग और साथ रहे, इस दृष्टि से विभिन्न क्षेत्रों में राज्य समान रूप से आगे बढ़ें, यह अनुकूलता बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए ठोस नीतियां लागू की हैं। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मध्यप्रदेश में विशेष प्रयास हुए हैं। राज्य में बिजली की उपलब्धता सरप्लस है। मध्यप्रदेश की बिजली से दिल्ली में मेट्रो ट्रेन भी चल रही है। देश में सबसे सस्ती बिजली दर मध्यप्रदेश में है। राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों को लागू कर सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। निवेशकों से किए हर वादे को पूरा करते हुए बड़े उद्योग और एमएसएमई ईकाइयों को पिछले माह तक की निवेश प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर दिया गया है। सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के बलबूते बैकलॉग सब्सिडी को भी खत्म किया है।

 

युवाओं को हर क्षेत्र में मिल रहे अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में युवाओं के लिए हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं। राज्य में टूरिज्म, आईटी, फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में भी अपार संभावनाएं हैं। राज्य में इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन सिटी और भोपाल सहित पड़ोसी जिले को जोड़कर मेट्रोपोलिटन सिटी तैयार करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश में सबसे तेज गति से मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। सबसे तेज गति से उद्योगों की स्थापना हो रही है। मध्यप्रदेश देश में में सबसे कम बेरोजगारी दर वाला राज्य है। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास में मध्यप्रदेश में हो रहे विशेष प्रयासों और अन्य सेक्टर में आ रहे निवेश का भी विवरण दिया। मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियों और सकारात्मक वातावरण की विस्तार पूर्वक जानकारी दी।

 

एमपी में अद्भुत टूरिज्म

गुजरात के वेलस्पन ट्रांसफॉर्मेशन सर्विस लिमिटेड के ऑनर चिंतन ठाकर ने मध्यप्रदेश में निवेश का अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि गुजरात और मध्यप्रदेश सिस्टर स्टेट होने के साथ-साथ देश के भविष्य के ग्रोथ इंजन हैं। वर्ष 2011 में हमारी कंपनी ने मध्यप्रदेश में प्रवेश किया। देवास-भोपाल रोड पर अपनी यूनिट शुरू की। हमने वॉटर पाइप्स तैयार किए। मध्यप्रदेश सरकार ने केवल 12 महीने में उद्योग स्थापना के लिए जरूरी सभी अनुमतियां दे दीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में उद्यमियों और निवेशकों की सभी देनदारियां लगातार भुगतान की जा रही हैं। सिम्फनी लिमिटेड कंपनी के सीएमडी एवं कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज की गुजरात स्टेट कांउसिल के चेयरमेन  अचल बेकेरी ने कहा कि मध्यप्रदेश अतुल्य भारत का हृदय प्रदेश है। हाल के वर्षों में पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। घरेलू पर्यटकों की संख्या 14 करोड़ से अधिक दर्ज की गई। अब घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पारंपरिक तौर पर गोवा और हिमाचल प्रदेश की श्रेणी में शामिल हो रहा है। धार्मिक पर्यटन के लिए उज्जैन और चित्रकूट, वन्यजीव पर्यटन के लिए बांधवगढ़, कान्हा और पेंच राष्ट्रीय उद्यान, ऐतिहासिक विरासत के लिए खजुराहो, मांडू और सांची प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं। राज्य में बढ़ते टूरिज्म को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने होमस्टे की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। टूरिज्म राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रहा है। गुजराती समुदाय के लिए मध्यप्रदेश में हॉस्पिटिलिटी सेक्टर में अपार संभावनाएं नजर आ रही हैं। कई गुजराती निवेशक मध्यप्रदेश को अपने दूसरे घर के रूप में देखते हैं। राज्य में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य हुए हैं। गुजरात में पहले हुई इन्वेस्टर्स मीट में हजारों करोड़ों के निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश पर भरोसा दिखाते हैं। राज्य में उद्योग मित्र नीतियां, पारदर्शिता और निवेश अनुकूल वातावरण निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।

 

एमपी में निवेश के लिए अनुकूल माहौल

अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन नीरज मंडलोई ने निवेशकों को मध्यप्रदेश की विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोसी राज्य गुजरात ने हमेशा अपनी उद्यमिता, चुनौतियों का सामना करने और नवाचारों से देश को प्रेरित किया है। मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए एक लाख एकड़ से अधिक का लैंड बैंक उपलब्ध है। राज्य में 8 एयरपोर्ट, 22 रेल जंक्शन और तेजी से बढ़ता लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर इसे बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। राज्य सरकार ने 8 डेडिकेटेड इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इनमें मुरैना में फुटवियर पार्क, उज्जैन में मेडिकल डिवाइस, रायसेन में प्लास्टिक पार्क भी शामिल हैं। सेक्टर आधारित क्लस्टर हमारी विशेषता हैं। नीति आयोग ने मध्यप्रदेश को निवेश प्रोत्साहन नीतियों के निर्माण के मामले में शीर्ष राज्य घोषित किया है। हमारी उद्योग आधारित नीतियों को देश के दूसरे राज्य भी अपना रहे हैं। राज्य की पॉलिसी निर्यात, निवेश अनुदान को भी बढ़ावा दे रही हैं। मध्यप्रदेश जनवरी-फरवरी 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन करने जा रहा है। मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक, तीसरा सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। फूड प्रोसेसिंग के लिए राज्य में कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता है। उन्होंने कहा कि पीथमपुर में ऑटो सेक्टर का सबसे बड़ा टेस्टिंग ट्रैक है। धार जिले में टेक्सटाइल सेक्टर का देश के सबसे बड़ा पीएम मित्र पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें अब तक 2 हजार करोड़ से अधिक का निवेश मिल चुका है। मध्यप्रदेश की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पॉलिसी निवेशकों को हर क्षेत्र में मदद कर रही हैं। भोपाल, जबलपुर और उज्जैन में नए इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने पर काम चल रहा है। ग्वालियर में केंद्र सरकार के सहयोग से देश का पहला टेलीकॉम मैन्यूफेक्चरिंग जोन (टीएमजेड) विकसित किया जा रहा है। पर्यटन भविष्य में रोजगार का सबसे बड़ा जरिया बनेगा। मध्यप्रदेश वन्यजीव पर्यटन और धार्मिक पर्यटन में अग्रणी राज्य है। राज्य सरकार टूरिज्म सेक्टर में निवेश करने वाले उद्यमियों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।

 

आईटी सेक्टर में अपार संभावनाएं

प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेल्वेंद्रन ने कहा कि मध्यप्रदेश में आईटी सेक्टर में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में देश के दूसरे राज्यों की तुलना में सस्ती और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलती हैं। यहां रहना काफी सस्ता है। टीसीएस इंदौर में अपनी यूनिट संचालित करती है, जिसमें 16 हजार से अधिक स्टॉफ काम करता है। इन्फोसिस भी राज्य में अपना विस्तार करने जा रही है। बैगलौर और हैदराबाद की अपेक्षा मध्यप्रदेश में ट्रैफिक अत्यंत सुगम है। राज्य सरकार नया स्पेस टेक पार्क स्थापित करने पर कार्य कर रही है। भोपाल में ड्रोन मैन्यूफेक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ड्रोन टेस्टिंग के लिए ग्रीन जोन तैयार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार स्पेस टेक पॉलिसी के अंतर्गत 40 से 60 प्रतिशत तक कैपिटल सब्सिडी प्रदान करती है। हमारी सेमीकंडक्टर पॉलिसी को देशभर से बेहतर रिस्पांस मिल रहा है। राज्य सरकार उद्योग स्थापित करने के लिए किराये और स्टॉफ की सैलरी के लिए भी सहायता दे रही है।

 

मुख्यमत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों से की वन-टू-वन चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेश संवाद के दौरान प्रमुख उद्योग समूहों के साथ 15 से अधिक वन-टू-वन बैठकें हुईं। इनमें निवेश प्रस्तावों, औद्योगिक विस्तार और मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। अरविंद लिमिटेड के साथ पीएम मित्र पार्क में प्रस्तावित 1,200 करोड़ रुपए के निवेश को शीघ्र क्रियान्वित करने, टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र में उपलब्ध प्रोत्साहनों और  पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक अधोसंरचना के विकास पर चर्चा हुई। वहीं, टोरेंट पावर लिमिटेड के साथ अनूपपुर में प्रस्तावित 1600 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना, प्रदेश की दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा, अतिरिक्त विद्युत क्षमता सृजन और भविष्य में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई। पेट्रोकेमिकल, केमिकल, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, एयरोस्पेस एवं रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग समूहों ने मध्यप्रदेश में निवेश में रुचि दिखाई। वन-टू-वन बैठकों में चिरपाल ग्रुप, गोल्डक्रेस्ट सीमेंट, गुजरात अंबुजा, एजियोस पॉलीफिल्म्स, एरिस लाइफसाइंसेज सहित अन्य उद्योग समूहों के निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई। गुजरात के निवेशकों एवं उद्योग जगत ने प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, व्यवस्थाओं और नेतृत्व के प्रति विश्वास भी व्यक्त किया।

 

सीएम डॉ. मोहन ने बताया किसने कितना किया निवेश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सीमेंट क्षेत्र में गोल्डक्रेस्ट सीमेंट द्वारा 3,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 1,500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पैकेजिंग क्षेत्र में एजियोस पॉलीफिल्म्स प्रालि द्वारा 2,500 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 1,000 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। वहीं फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स लिमिटेड द्वारा 1,200 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव से 500 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि फार्मास्युटिकल्स क्षेत्र में एरिस लाइफसाइंसेज लिमिटेड द्वारा 500 करोड़ रुपए के निवेश से 800 रोजगार, टेक्सटाइल क्षेत्र में राघव वूवन एलएलपी द्वारा 250 करोड़ रुपए के निवेश से 400 रोजगार, इंजीनियरिंग क्षेत्र में भव्य मशीन टूल्स द्वारा 250 करोड़ रुपए के निवेश से 300 रोजगार, केमिकल क्षेत्र में जय केमिकल इंडस्ट्रीज प्रालि द्वारा 200 करोड़ रुपए के निवेश से 100 रोजगार तथा पैकेजिंग क्षेत्र में बालाजी मल्टीफ्लेक्स प्रालि द्वारा 200 करोड़ रुपए के निवेश से 100 रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि टेक्सटाइल क्षेत्र में श्रद्धा स्पन प्रालि द्वारा 160 करोड़ रुपए के निवेश से 600 रोजगार, अन्य क्षेत्र में इनर इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स एंड सिस्टम्स प्रालि द्वारा 150 करोड़ रुपए के निवेश से 160 रोजगार, एयरोस्पेस एवं डिफेंस क्षेत्र में ऑप्टिमाइज्ड ग्रुप द्वारा 100 करोड़ रुपए के निवेश से 120 रोजगार, फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में जेएमके फूड द्वारा 50 करोड़ रुपए के निवेश से 80 रोजगार, केमिकल क्षेत्र में विबफास्ट ग्रुप द्वारा 50 करोड़ रुपए के निवेश से 75 रोजगार तथा अरुणाया ऑर्गेनिक्स लिमिटेड द्वारा 25 करोड़ रुपए के निवेश से 50 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इन सभी निवेश प्रस्तावों से कुल 8 हजार 635 करोड़ रुपए का निवेश और 5 हजार 785 रोजगार सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश को पिछले ढाई वर्षों में 34 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जबकि 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। उन्होंने निवेशकों को आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

Delhi 2047 का मास्टर प्लान पास, DDA के पुराने मकानों को मिलेगी नई जिंदगी! मेट्रो, सड़क सब पर असर

Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के विकास को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA ने कई बड़े फैसले लिए हैं। DDA की बैठक में Master Plan for Delhi-2047 को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता दिल्ली के उपराज्यपाल और DDA के चेयरमैन सरदार तरनजीत सिंह संधू ने की। अब इस प्लान को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को भेजा जाएगा।

दिल्ली का विकास कैसे होगा?

Master Plan 2047 में दिल्ली के आने वाले वर्षों के विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। इसमें आवास, रोजगार, ट्रांसपोर्ट, पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहेगा। बढ़ती आबादी को देखते हुए शहर के विकास को एक साथ कई क्षेत्रों से जोड़ने की कोशिश की गई है।

इसमें पुराने इलाकों को बेहतर बनाने, ऐतिहासिक जगहों को बचाने और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने पर भी ध्यान दिया गया है। प्लान तैयार करने से पहले दिल्ली सरकार, MCD, NDMC, DJB, DMRC, NCRTC और RWAs समेत कई संस्थाओं से चर्चा की गई थी।

पुराने DDA मकानों का पुनर्निर्माण आसान होगा

DDA ने पुराने दो मंजिला मकानों के पुनर्निर्माण के लिए एक समान नीति को भी मंजूरी दी है। इसका फायदा 50 साल से ज्यादा पुराने उन DDA मकानों को मिलेगा, जो अब जर्जर या कमजोर हो चुके हैं।

पहले ऐसे बने-बनाए मकानों के पुनर्विकास के लिए एक समान नियम नहीं थे। अब इन मकानों को खाली रिहायशी प्लॉट की तरह रीडेवपलमेंट का अधिकार मिलेगा। हालांकि, इसके लिए FAR, ग्राउंड कवरेज, ऊंचाई, फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल सेफ्टी जैसे नियमों का पालन करना होगा।

रिठाला-कुंडली मेट्रो को भी बढ़ावा

DDA ने नरेला सब-सिटी में रिठाला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर के डिपो के लिए 19.63 हेक्टेयर जमीन का लैंड यूज बदलने को मंजूरी दी है। जमीन का इस्तेमाल अब ट्रांसपोर्टेशन के लिए किया जा सकेगा।

रिठाला से कुंडली तक मेट्रो विस्तार से नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली, रोहिणी और नरेला की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इससे हरियाणा के कुंडली तक पहुंच भी आसान होगी। DDA को उम्मीद है कि इससे नरेला में आवास, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और दूसरे कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

बिल्डिंग परमिशन में भी राहत

DDA ने Unified Building Bye-Laws यानी UBBL-2016 में बदलाव को मंजूरी दी है। इसका मकसद बिल्डिंग प्लान की मंजूरी को आसान बनाना है।

अब बिल्डिंग परमिट के लिए DPCC, Chief Inspector of Factories, Delhi Jal Board और Forest Department से पहले NOC लेने की जरूरत को हटाने का प्रावधान किया गया है। इससे प्रोजेक्ट की मंजूरी में लगने वाला समय कम हो सकता है।

कई जमीनों के लैंड यूज में बदलाव

DDA ने रोशनपुरा में 7,978 वर्ग मीटर जमीन का लैंड यूज बदलने को भी मंजूरी दी है। यहां Veterinary Council of India का मुख्यालय बनाया जाना है। सरोजिनी नगर के पास 24,400 वर्ग मीटर जमीन को ट्रांसपोर्टेशन से रेजिडेंशियल में बदलने का प्रस्ताव भी मंजूर हुआ है।

इसके अलावा Copernicus Lane में तीन प्लॉट का लैंड यूज रेजिडेंशियल से पब्लिक और सेमी-पब्लिक करने की मंजूरी दी गई। यहां भारतीय विद्या भवन अपनी उच्च शिक्षा और रिसर्च गतिविधियों का विस्तार करना चाहता है।

DDA ने मंगोलपुरी और केशोपुर के कुछ इंडस्ट्रियल एरिया को डी-नोटिफाई करने का फैसला भी लिया। वहीं, Gazipur में Waste-to-Energy प्लांट के लिए जमीन का लैंड यूज कमर्शियल से यूटिलिटी करने को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ग्रीन एरिया बढ़ाने के लिए भी जमीन के इस्तेमाल में बदलाव किया गया है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

डायमंड लीग में नहीं होगी नीरज चोपड़ा और अरशद नदीम की भिड़त, पाक खिलाड़ी ने अचानक वापस लिया नाम

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पाकिस्तान के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक गोल्ड मेडल विनर अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। वहीं खराब प्रदर्शन के बाद नदीम ने इस महीने के अंत में लॉजेन में होने वाली डायमंड लीग प्रतियोगिता से हटने का फैसला किया है। लुसाने डायमंड लीग का आयोजन 21 अगस्त को होगी। इस लीग से नदीम ने अपना नाम वापस ले लिया है। वहीं अब डायमंड लीग में भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा का सामना पाकिस्तान के अरशद नदीम के साथ नहीं होगा।

एशियन गेम के लिए करना चाहते हैं तैयार

नदीम के डायमंड लीग से पीछे हटने की वजह एशियन गेम्स 2026 और विश्व एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप के लिए तैयारी बताया जा रहा है। फिलहाल नदीम लाहौर में प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके बाद वह अपने कोच टेरसियस लिबेनबर्ग और स्थानीय प्रशिक्षकों की देखरेख में कुछ हफ्तों की ट्रेनिंग के लिए दक्षिण अफ्रीका जाएंगे। अरशद नदीम के पर्सनल ट्रेनर सलमान बट के अनुसार, नदीम अब सितंबर में होने वाले एशियन गेम्स के लिए खुद को पूरी तरह तैयार करना चाहते हैं। इसके लिए वह अपनी फिटनेस और शरीर पर खास ध्यान दे रहे हैं। इसके बाद वह 6 से 14 सितंबर तक बुडापेस्ट में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स अल्टीमेट चैंपियनशिप में नजर आएंगे।

कॉमनवेल्थ गेम्स खराब प्रदर्शन

कॉमनवेल्थ गेम्स में अरशद नदीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ग्लासगो की ठंडी और तेज हवाओं वाली परिस्थितियों में वह टॉप-8 में भी जगह नहीं बना सके। इस मुकाबले में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरगे ने 89.75 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर और यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। खराब प्रदर्शन के बाद नदीम को पाकिस्तान में आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, जिसके जवाब में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखा था।

PAAF ने नदीम से बनाई दूरी

इस बीच पाकिस्तान के अधिकारियों पर भी सवाल उठे। PTI की रिपोर्ट के अनुसार, कोच सलमान बट को पद पर बनाए रखने को लेकर विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने अरशद नदीम से दूरी बना ली। इसके चलते ओलंपिक चैंपियन को अपनी ट्रेनिंग और तैयारियों का ज्यादातर काम खुद ही संभालना पड़ा। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड ने विदेशी कोचों के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद भी रोक दी थी। इसके कारण अरशद नदीम को ग्लासगो की अलग मौसम परिस्थितियों के बावजूद लाहौर में सलमान बट की देखरेख में ही ट्रेनिंग करनी पड़ी। इससे उनकी तैयारियों पर भी असर पड़ा।

इंदौर में 13 अगस्त को निकलेगी विशाल ‘राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा’, 25 हजार से ज्यादा युवाओं के जुटने का दावा

इंदौर में 13 अगस्त को निकलेगी विशाल 'राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा', 25 हजार से ज्यादा युवाओं के जुटने का दावा

‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इंदौर में 13 अगस्त को युवाओं की विशाल ‘राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा’ का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा समिति के माध्यम से आयोजित इस यात्रा में शहर के युवाओं और नागरिकों के बड़ी संख्या में शामिल होने की उम्मीद है। आयोजकों के मुताबिक, यात्रा में 25 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता रहेगी।

‘विकसित भारत’ के जयघोष के साथ निकलेगी यात्रा

आयोजकों के अनुसार, यात्रा का उद्देश्य युवाओं और नागरिकों में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना और राष्ट्र के विकास में उनकी भागीदारी का संदेश देना है। यात्रा के दौरान ‘वंदे मातरम’ और ‘विकसित भारत’ के जयघोष के साथ युवा तिरंगा लेकर शहर की सड़कों पर निकलेंगे।

 

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से होगी शुरुआत

‘राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा’ की शुरुआत देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (तक्षशिला) परिसर से होगी। यहां से यात्रा भंवरकुआं स्थित तंत्या मामा की प्रतिमा तक पहुंचेगी। इसके बाद यात्रा राजीव गांधी चौराहे की ओर जाएगी और भंवरकुआं होते हुए वापस देवी अहिल्या विश्वविद्यालय परिसर पहुंचेगी। यात्रा का समापन देवी अहिल्या विश्वविद्यालय परिसर में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ गीत के गायन के साथ किया जाएगा।

युवाओं और नागरिकों से शामिल होने की अपील

 

आयोजकों ने बताया कि ‘राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा’ में देशभक्ति के भाव के साथ बड़ी संख्या में युवा और नागरिक शामिल होंगे। समिति का कहना है कि यह आयोजन युवाओं को राष्ट्रभक्ति, राष्ट्र उत्कर्ष और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का माध्यम बनेगा। राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा समिति की ओर से देवेन्द्र शर्मा संयोजक और पुनीत गुंजल सह-संयोजक हैं।

नीति आयोग की एबीपी रैंकिंग में गोरखपुर का बजा डंका, बांसगांव ब्लॉक नंबर वन

नीति आयोग की एबीपी रैंकिंग में गोरखपुर का बजा डंका, बांसगांव ब्लॉक नंबर वन

NITI Aayog ABP Ranking : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने गोरखपुर जिले के विकास को लेकर नया इतिहास रच दिया है। भारत सरकार के नीति आयोग की एबीपी (आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम या एस्पिरेशनल ब्लॉक प्रोग्राम) रैंकिंग में गोरखपुर जिले का बांसगांव विकास खंड, ‘नंबर वन’ चुना गया है। नंबर वन ब्लॉक बनने पर डेढ़ करोड़ रुपए का पुरस्कार भी मिला है। बांसगांव ब्लॉक की इस उपलब्धि ने गोरखपुर के साथ ही समूचे उत्तर प्रदेश का गौरव पूरे देश में बढ़ाया है। गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा और मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने इस उत्कृष्ट उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में हो रहे समावेशी विकास के कार्यों को दिया है।   

 

नीति आयोग की तरफ से देशभर में कराई गई जनवरी–मार्च 2026 तिमाही की आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम, डेल्टा रैंकिंग में गोरखपुर जनपद का बांसगांव ब्लॉक, उत्तरी भारत (जोन-2) में प्रथम स्थान प्राप्त करने में सफल रहा है। यह जानकारी नीति आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि छिब्बर की तरफ से यूपी के मुख्य सचिव को भेजे एक पत्र में दी गई है। इस उत्कृष्ट उपलब्धि के एवज में गोरखपुर को डेढ़ करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि भी मिली है।

जिलाधिकारी दीपक मीणा बताते हैं कि नीति आयोग के आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम का जोर समावेशी विकास के जरिए नागरिकों के जीवन में सुगमता और गुणवत्ता की वृद्धि तथा समग्र रूप में जीवन स्तर के सुधार पर होता है। इसके अंतर्गत पांच थीम स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, आधारभूत ढांचा और सामाजिक विकास के कुल 39 केपीआई (की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स या मुख्य निष्पादन संकेतक) पर संबंधित आकांक्षी ब्लॉकों का मूल्यांकन किया जाता है।

 

डीएम ने बताया कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में गोरखपुर बांसगांव ब्लॉक ने जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में सभी पांच थीम के 39 केपीआई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शत प्रतिशत वेटेज प्राप्त किया है। यह उपलब्धि इस तथ्य को भी प्रतिष्ठित करती है कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में गोरखपुर समावेशी विकास के मोर्चे पर देश में नए मानक स्थापित कर रहा है। 

संपूर्ण प्रदेश के लिए बांसगांव बना 'मॉडल ब्लॉक'

बांसगांव क्षेत्र, जिसे कभी विकास की दौड़ में चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, आज अपनी प्रशासनिक कार्यकुशलता और नवाचारों के बल पर पूरे देश में 'मॉडल विकास खंड' के रूप में उभरा है। इस सफलता से न केवल गोरखपुर जिले का मान बढ़ा है, बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य आकांक्षी ब्लॉकों के लिए भी यह एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

 

गोरखपुर के मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी का कहना है कि डेल्टा रैंकिंग में मिली नंबर वन की उत्कृष्ट उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बांसगांव ब्लॉक की जनता के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव का प्रमाण पत्र है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस पुरस्कार राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, आधारभूत ढांचे और आजीविका से जुड़े विकास कार्यों में किया जाएगा।