Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना गिरा, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

दिल्ली सर्राफा बाजार में 6 अक्तूबर को सोने में गिरावट आई। यह 200 रुपये गिरकर 1,49,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। एक्सपर्ट्स का कहना है कि घरेलू बाजार में कमजोर मांग और डॉलर में मजबूती का असर सोने की कीमतों पर पड़ा। दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ।

चांदी लगातार दूसरे दिन स्थिर रही। इसकी कीमत 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रही। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में हल्की तेजी और चांदी में हल्की नरमी देखने को मिली। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि पितृपक्ष की वजह से घरेलू बाजार में कमजोर डिमांड का असर सोने की कीमतों पर पड़ा। पितृपक्ष के दौरान आम तौर पर लोग सोना, चांदी, ज्वेलरी और प्रॉपर्टी खरीदने से परहेज करते हैं। इस वजह से इस दौरान इनकी बिक्री पर असर पड़ता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में हल्की तेजी दिखी, जबकि चांदी की कीमतों पर दबाव दिखा। सोना 0.38 फीसदी चढ़कर 4,154 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी 0.11 फीसदी गिरकर 60.90 डॉलर प्रति औंस थी। हालांकि, क्रूड में नरमी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 2 फीसदी से ज्यादा गिरकर 98.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

सोने और चांदी की कीमतें इस साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद दोनों में तेज गिरावट आई। फरवरी के आखिर में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू लड़ाई ने बुलियन पर दबाव और बढ़ा दिया। इसकी बड़ी वजह क्रूड की कीमतों में उछाल है। मध्यपूर्व में लड़ाई की वजह से क्रूड में उछाल है। इसका असर इनफ्लेशन पर पड़ रहा है। इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं।

इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घट जाती है। डॉलर में मजबूती का भी निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। इसकी वजह यह है कि डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। 7 अक्तूबर को आरबीआई अपनी मौद्रिक पॉलिसी पेश करेगा। इस महीने के अंत में फेडरल रिजर्व अपनी पॉलिसी पेश करेगा। अगर फेड इंटरेस्ट रेट में कोई बदलाव नहीं करता है तो सोने की कीमतों पर दबाव घट सकता है।

RBI MPC Meet: आपकी होम और कार लोन की EMI बढ़ेगी या घटेगी? कल 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे बड़ा ऐलान

RBI MPC Meet October 2026: देश के करोड़ों आम नागरिकों, होम लोन ग्राहकों और शेयर बाजार की नजरें कल यानी 7 अक्टूबर को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के फैसले पर टिकी होंगी। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) कल सुबह 10 बजे अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करेगी, जिसके बाद दोपहर में गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे।

पिछले 4 लगातार बैठकों से रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल व कमोडिटीज की कीमतों में तेजी के कारण इस बार ब्याज दरें बढ़ाए जाने की मजबूत संभावना जताई जा रही है।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) और ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स समेत अधिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस बार रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया जा सकता है।

इस बार की पॉलिसी पर क्या है दिग्गजों की राय?

बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी की अध्यक्ष सीए किंजल शाह के मुताबिक, ‘खुदरा महंगाई बढ़ने, ऊर्जा की ऊंची लागत और वैश्विक स्तर पर मौद्रिक सख्ती के बीच रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% किए जाने की व्यापक उम्मीद है। हालांकि, केवल दरों का फैसला ही पर्याप्त नहीं होगा। महंगाई की उम्मीदों को नियंत्रित रखने और घरेलू आर्थिक वृद्धि को बनाए रखते हुए कर्ज की उपलब्धता जारी रखने के लिए तरलता और भविष्य में ब्याज दरों की दिशा पर आरबीआई की स्पष्ट स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण होगी।’

बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी के उपाध्यक्ष सीए मंदार तेलंग ने कहा कि, ‘अब समय आ गया है कि सरकार केवल प्रक्रियाओं में छोटे-मोटे बदलाव करने के बजाय GST प्रशासन से जुड़े कुछ बुनियादी और संरचनात्मक मुद्दों पर भी ध्यान दे। केवल इस वजह से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) नहीं रोका जाना चाहिए कि सप्लायर या प्राप्तकर्ता ने रिटर्न दाखिल करते समय कोई वास्तविक क्लेरिकल, गणना संबंधी या प्रक्रियात्मक गलती कर दी हो, खासकर तब जब लेन-देन वास्तविक हो। सरकार को कई राज्यों में काम करने वाली कंपनियों के लिए वास्तविक केंद्रीकृत GST पंजीकरण और अनयूज्ड ITC को आपस में ट्रांसफर करने की सुविधा देनी चाहिए। 180 दिनों में भुगतान की शर्त और MSMEs के लिए पेमेंट बेसिस टैक्स जैसे व्यावहारिक सुधारों से अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी और कारोबारियों की वर्किंग कैपिटल पर दबाव घटेगा।’

कब और कहां देखें लाइव प्रसारण?

तारीख और समय: 7 अक्टूबर 2026, सुबह 10:00 बजे (पॉलिसी ऐलान) एवं दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस।

कहां देखें: आरबीआई के आधिकारिक यूट्यूब चैनल (YouTube Channel) और hindi.moneycontrol.com पर लाइव अपडेट्स।

कम होगी EMI या बढ़ेगा FDs पर ब्याज? जानिए 7 अक्टूबर को RBI के फैसले से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा

RBI क्या 7 अक्तूबर को बढ़ाएगा इंटरेस्ट रेट, क्या होम लोन, कार लोन सहित दूसरे लोन होंगे महंगा ?

आरबीआई 7 अक्तूबर यानी बुधवार को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेगा। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की मीटिंग 5 अक्तूबर को शुरू हुई। इसके नतीजे बुधवार को आएंगे। सवाल है कि क्या केंद्रीय बैंक इसमें रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान करेगा?

रेपो रेट एक चौथाई-फीसदी बढ़ सकता है

इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि RBI 7 अक्तूबर को रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी एक चौथाई-फीसदी बढ़ा सकता है। इसकी वजह यह है कि रिटेल इनफ्लेशन लगातार बीते कई महीनों से केंद्रीय बैंक के 4 फीसदी के तय लक्ष्य से ऊपर बना हुआ है। मध्यपूर्व में अमेरिका-ईरान की लड़ाई की वजह से क्रूड की कीमतों में उछाल आया है। इसने इनफ्लेशन पर दबाव बढ़ाया है।

फेडरल रिजर्व ने बढ़ाया था इंटरेस्ट रेट

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स में ग्लोबल चीफ इकोनॉमिस्ट्स पॉल ग्रुएनवाल्ड ने कहा कि आरबीआई उन केंद्रीय बैंकों की लिस्ट में शामिल है सकता है, जिन्होंने महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, उनका मानना है कि दुनिया में इंटरेस्ट रेट में होने वाली वृद्धि सीमित रहेगी।

दिसंबर में भी बढ़ सकता है रेपो रेट 

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डी के जोशी का भी मानना है कि आरबीआई अक्तूबर की पॉलिसी में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है। हालांकि, उनका कहना है कि फिर दिसंबर की पॉलिसी में भी इंटरेस्ट रेट बढ़ने की काफी उम्मीद है। उसके बाद इंटरेस्ट रेट में वृद्धि इकोनॉमी से जुड़े डेटा पर निर्भर करेगी।

अगले साल आर्थिक डेटा पर निर्भर करेगी वृद्धि

जोशी ने कहा, “हमारा मानना है कि इंटरेस्ट रेट में वृद्धि दिसंबर में भी होगी। उसके बाद इसके बढ़ने की कम उम्मीद है। हालांकि, यह इकोनॉमी से जुड़े डेटा पर निर्भर करेगा।” उनका मानना है कि केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में आक्रामक वृद्धि का साइकिल शुरू करने की जगह नापतौल कर इस बारे में फैसला लेगा।

अगस्त की पॉलिसी के बाद हुए हैं तीन बड़े बदलाव 

उन्होंने अगस्त की आरबीआई की पॉलिसी के बाद हुए तीन बदलावों का जिक्र किया। मानसून की बारिश कम हुई है और असमान रही है। पश्चिम एशिया में स्थिति गंभीर हुई है। ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई हैं। इस बीच. पहली तिमाही में देश में जीडीपी की ग्रोथ आरबीआई की उम्मीद से ज्यादा रही है।

इनफ्लेशन पर दबाव जारी रहने के आसार 

उपर्युक्त वजहों से इनफ्लेशन पर दबाव बना रह सकता है। अमेरिका और भारत के इंटरेस्ट रेट के बीच घटता फर्क दूसरी ब़ड़ी वजह है, जिसका असर पॉलिसी से जुड़े आरबीआई के फैसले पर पड़ सकता है। जोशी ने कहा कि 10 साल की भारत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच का फर्क घटकर 190 बेसिस प्वाइंट्स रह गया है, जो तीन साल पहले करीब 450 बेसिस प्वाइंट्स था। फेडरल रिजर्व भी इस महीने के आखिर में पॉलिसी का ऐलान करेगा। वह लगातार दूसरी बार इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

रिटेल इनफ्लेशन अगस्त में 4.82 फीसदी पहुंचा

भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट की फाउंडिंग और मैनेजिंग ट्रस्टी लक्ष्मी वेंकटरमण ने कहा कि अगस्त में भारत में रिटेल इनफ्लेशन बढ़कर 4.82 फीसदी पर पहुंच गया। यह जुलाई में 4.45 फीसदी था। हालांकि, इंडस्ट्रियल आउटपुट जुलाई के 6.7 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 8 फीसदी रहा। ऐसे में दोनों के बीच बैलेंस जरूरी है। उन्होंने कहा कि आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी का फोकस मैक्रोइकोनॉमिक स्टैबिलिटी पर होगा। हालांकि, केंद्रीय बैंक की कोशिश कर्ज तक आसान पहुंच बनाए रखने पर भी होगी।

Bank Holiday: आज शुक्रवार को बंद रहेंगे बैंक, जानिए RBI ने क्यों दी है छुट्टी

Bank Holiday 2 October: आज शुक्रवार, 2 अक्टूबर को देशभर के सभी सरकारी, प्राइवेट, क्षेत्रीय और ग्रामीण बैंक बंद रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की छुट्टियों की आधिकारिक सूची के अनुसार, 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश होने के कारण पूरे भारत में बैंकों में कामकाज नहीं होगा। अगर आपको आज बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है।

क्यों बंद रहेंगे बैंक?

2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है। यह देश के तीन प्रमुख राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है। इस अवसर पर आरबीआई के नियमों के तहत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैंक पूरी तरह से बंद रहते हैं।

अक्टूबर में छुट्टियों की भरमार

अक्टूबर का महीना त्योहारों से भरा हुआ है। दुर्गा पूजा, दशहरा और महालया जैसे बड़े त्योहारों के चलते अक्टूबर में अलग-अलग राज्यों में बैंकों की कई दिनों की छुट्टियां रहेंगी। आरबीआई द्वारा जारी अक्टूबर 2026 की छुट्टियों की लिस्ट:

  • 2 अक्टूबर (शुक्रवार): गांधी जयंती (पूरे भारत में बंद)
  • 10 अक्टूबर (शनिवार): महालया अमावस्या / दूसरा शनिवार (बेंगलुरु, कोलकाता और देशभर में)
  • 11 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे भारत में बंद)
  • 17 अक्टूबर (शनिवार): महा सप्तमी (अगरतला)
  • 18 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे भारत में बंद)
  • 19 अक्टूबर (सोमवार): महाष्टमी / महानवमी / दुर्गा पूजा (कोलकाता, पटना, गुवाहाटी, रांची आदि)
  • 20 अक्टूबर (मंगलवार): दशहरा – विजयादशमी (अधिकांश राज्यों में बंद)
  • 21-23 अक्टूबर (बुधवार से शुक्रवार): दुर्गा पूजा – दशैं / विजया दशमी (गंगटोक, कोलकाता, अगरतला आदि)
  • 24 अक्टूबर (शनिवार): चौथा शनिवार (पूरे भारत में बंद)
  • 25 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे भारत में बंद)
  • 26 अक्टूबर (सोमवार): लक्ष्मी पूजा / महर्षि वाल्मीकि जयंती (शिमला, जम्मू, श्रीनगर, अगरतला)
  • 29 अक्टूबर (गुरुवार): करवा चौथ (शिमला)
  • 31 अक्टूबर (शनिवार): सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती (अहमदाबाद)

(नोट: राज्यों के स्थानीय त्योहारों के आधार पर बैंक छुट्टियों में अंतर हो सकता है।)

ऑनलाइन और डिजिटल सेवाएं रहेंगी चालू

बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को वित्तीय लेनदेन में कोई परेशानी नहीं होगी। डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं 24/7 चालू रहेंगी। फंड ट्रांसफर (NEFT, RTGS, IMPS) की सुविधा सुचारू रूप से चलती रहेगी। Google Pay, PhonePe, Paytm जैसी यूपीआई सेवाओं के जरिए डिजिटल भुगतान सामान्य रूप से होगा। कैश निकालने या जमा करने के लिए एटीएम मशीनें चालू रहेंगी।

अगर आपको चेक क्लियरिंग या शाखा में जाकर कोई कैश डिपॉजिट/विड्रॉल जैसी सेवाएं लेनी हैं, तो इसके लिए अब आपको शनिवार, 3 अक्टूबर को बैंक खुलने का इंतजार करना होगा।

HDFC Bank ने अनूप बागची को नया एमडी और सीईओ नियुक्त किया

एचडीएफसी बैंक ने अनूप बागची को नया मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 27 अक्तूबर से शुरू होगा। एचडीएफसी बैंक के नए एमडी और सीईओ के पद पर बागची की नियुक्ति को आरबीआई की मंजूरी मिल गई है।

एचडीएफसी बैंक ने इस बारे में 1 अक्तूबर को स्टॉक एक्सचेंजों को बताया। बैंक के वर्तमान एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन 26 अक्तूबर को रिटायर कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि वह अपना कार्यकाल बढ़ाना नहीं चाहेंगे। इसके बाद एचडीएफसी बैंक ने नए एमडी और सीईओ की तलाश की प्रक्रिया शुरू की थी।

Stock Markets Holiday: 2 अक्तूबर यानी शुक्रवार को बीएसई और एनएसई में नहीं होगा कारोबार

Stock Markets Holiday: शेयर बाजारों में शुक्रवार यानी 2 अक्तूबर को कारोबार नहीं होगा। बीएसई और एनएसई दोनों बंद रहेंगे। इसकी वजह यह है कि 2 अक्तूबर को गांधी जयंती है। इस मौके पर राष्ट्रीय अवकाश होता है। इसका मतलब है कि सभी सरकारी ऑफिसेज, प्राइवेट ऑफिसेज, आरबीआई, बैंक आदि में छुट्टी होती है।

तीन दिन बाद बीएसई और एनएसई 5 अक्तूबर को खुलेंगे

प्राइवेट बैंक, सरकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, कोऑपरेटिव बैंक और विदेशी बैंकों की भी सभी शाखाएं बंद रहेंगी। चूंकि, शेयर बाजारों में हर हफ्ते सिर्फ पांच दिन कारोबार होता है, जिससे इस बार गुरुवार यानी 1 अक्तूबर इस हफ्ते का अंतिम कारोबारी दिन था। अब शेयर बाजार यानी BSE और NSE 5 अक्तूबर को खुलेंगे।

कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में भी 2 अक्तूबर को रहेगी छुट्टी

कमोडिटी एक्सचेंज MCX भी गांधी जयंती के मौके पर बंद रहेगा। कमोडिटी एक्सचेंज में सुबह और शाम दोनों ही सत्रों में कारोबार नहीं होगा। इसका मतलब है कि एमसीएक्स में भी कारोबार की शुरुआत 5 अक्तूबर यानी सोमवार को होगी। उस दिन दोनों ही सत्रों में एक्सचेंज में सामान्य कामकाज होगा।

20 अक्तूबर को भी दशहरा के मौके पर बंद रहेंगे शेयर बाजार 

शेयर बाजार इस महीने दशहरा के मौके पर भी बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि 20 अक्तूबर यानी मंगलवार को भी बीएसई और एनएसई में कारोबार नहीं होगा। 2 अक्तूबर को बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों में छुट्टी होने से चेक की क्लियरिंग भी नहीं होगी। हालांकि, नेट बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। बैंकों के एटीएम भी छुट्टी के दिन खुले रहेंगे।

हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन भी शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट 

शेयर बाजारों में 1 अक्तूबर को भी गिरावट देखने को मिली। Sensex 0.8 फीसदी यानी 570 अंक गिरकर 71,909 पर बंद हुआ। Nifty 0.9 फीसदी यानी 198 अंक गिरकर 22,421 पर क्लोज हुआ। आईटी छोड़कर निफ्टी के सभी सेक्टर सूचकांकों में गिरावट आई। ऑटो इंडेक्स 3 फीसदी गिरा। इसमें बजाज ऑटो में 6 फीसदी गिरावट का बड़ा हाथ रहा। M&M का शेयर भी 2.4 फीसदी गिरकर बंद हुआ।

RBI Policy Big Update: जल्द महंगी होगी आपकी EMI? ब्रोकरेज फर्म्स का दावा- अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ा सकता है रिजर्व बैंक

RBI Policy Repo Rate Hike: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, जिद्दी खुदरा महंगाई और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कड़े रुख के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के सामने एक जटिल आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई है। वित्तीय बाजारों में अगले एक साल के भीतर ब्याज दरों में 125 बेसिस पॉइंट्स यानी 1.25% तक की बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, दुनिया की दिग्गज ब्रोकरेज फर्मों और ग्लोबल इकोनॉमिक डेस्क के बीच इस बात को लेकर तीखे मतभेद हैं कि रिजर्व बैंक ब्याज दरें कितनी तेजी से और किस हद तक बढ़ाएगा।

आक्रामक रुख: बैंक ऑफ अमेरिका, एचएसबीसी और मॉर्गन स्टेनली

दिग्गज ब्रोकरेज फर्म्स BofA, HSBC और Morgan Stanley का मानना है कि आरबीआई को महंगाई और लिक्विडिटी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए जल्द से जल्द ब्याज दरें बढ़ानी होंगी।

बैंक ऑफ अमेरिका (BofA): BofA ने अपनी पिछली समयसीमा को पहले खिसकाते हुए अनुमान जताया है कि आरबीआई अक्टूबर में ही रेपो रेट बढ़ाना शुरू कर सकता है। BofA का मानना है कि इस पूरे चक्र में कुल 100 bps (1%) की बढ़ोतरी होगी और टर्मिनल रेपो रेट बढ़कर 6.25% तक पहुंच जाएगा।

मॉर्गन स्टेनली: मॉर्गन स्टेनली को भी अक्टूबर में 25 bps की बढ़ोतरी की उम्मीद है। उसका अनुमान है कि अप्रैल 2027 तक रेपो रेट बढ़कर 6.25% के स्तर पर आ जाएगा ताकि बाहरी आर्थिक स्थिरता बनी रहे।

एचएसबीसी का लिक्विडिटी पर जोर: एचएसबीसी ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी पर गंभीर चिंता जताई है। FCNR(B) डिपॉजिट जैसे स्पेशल विंडोज के जरिए भारी विदेशी मुद्रा प्रवाह से बैंकिंग सिस्टम में करीब ₹15 लाख करोड़ का लिक्विडिटी सरप्लस जमा हो गया है। एचएसबीसी का कहना है कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई को रेपो रेट बढ़ाने के साथ-साथ इस बहु-ट्रिलियन रुपये के सरप्लस को सिस्टम से बाहर निकालना होगा।

एक्सिस बैंक और एचएसबीसी का विश्लेषण: आरबीआई पहले से ही वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR), ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMO) सेल्स और फॉरेक्स इंटरवेंशन का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन इतनी बड़ी नकदी को बिना संभाले छोड़ने से महंगाई भड़कने का खतरा बना रहेगा।

नोमुरा का सीमित बढ़ोतरी का अनुमान

दूसरी ओर, जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा बाजार में चल रही इतनी आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं को खारिज करती है। नोमुरा का तर्क है कि भारत की कोर महंगाई दर ऐतिहासिक ऊंचाइयों से घटकर अब लगभग 3% के आसपास आ गई है और मजदूरी-कीमतों का कोई व्यापक दबाव नहीं दिख रहा है।

घरेलू वृद्धि की गति धीमी होने के संकेत को देखते हुए, नोमुरा का मानना है कि आरबीआई बहुत आक्रामक कदम नहीं उठाएगा। नोमुरा के अनुसार, आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 bps की दो छोटी बढ़ोतरी करके रेपो रेट को 5.75% तक ले जाएगा, जिसके बाद 2027 की शुरुआत से ही मौद्रिक सख्ती का दबाव कम होने लगेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nifty छह महीनों के निचले स्तर पर, एनालिस्ट्स से जानिए आगे बाजार चढ़ेगा या गिरेगा

निफ्टी 50 में 29 सितंबर को भी गिरावट देखने को मिली। इससे सूचकांक गिरकर छह महीने के निचले स्तर पर आ गया। 28 सितंबर को भी बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। ब्रेंट क्रूड में उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का हाई लेवल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। सवाल है कि अगले साल की शुरुआत में निफ्टी का लेवल क्या होगा?

एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि बाजार पर कई वजहों से दबाव दिख रहा है। इनमें क्रूड में उछाल, रुपये में कमजोरी और फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली शामिल है। BofA ने पिछले महीने भारतीय बाजारों के लिए 8 बड़े रिस्क बताए थे। इनमें क्रूड की ऊंची कीमतें, मानसून की कमजोर बारिश, रुपये में कमजोरी और आईपीओ की ज्यादा संख्या शामिल थी।

जेफरीज के क्रिस वुड ने ऑयल की ऊंची कीमतों को शॉर्ट टर्म के लिए सबसे बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि निफ्टी में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। उनका यह भी कहना है कि आरबीआई के इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाने पर हैरानी होगी। आरबीआई 7 अक्तूबर को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करेगा। अनुमान है कि वह रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि कर सकता है।

मॉर्गन स्टेनली ने कहा था कि भारतीय बाजार में शॉर्ट टर्म में कमजोरी दिख सकती है, क्योंकि एआई कंपनियों वाले देशों और भारतीय बाजार के प्रदर्शन के बीच गैप काफी बढ़ गया है। हालांकि, उसने कहा था कि चूंकि भारतीय बाजार कई साल के निचले स्तर पर हैं, जिसका मतलब है कि बाजार पर खराब खबरों का असर पड़ चुका है।

मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि आगे कई तिमाहियों तक अच्छी ग्रोथ दिख सकती है। एचएसबीसी की भी भारत को लेकर सोच पॉजिटिव है। BofA का मानना है कि अक्तूबर तक भारतीय बाजारों के लिए रिस्क चरम पर पहुंच जाएगा। उसके बाद नवंबर से बाजार में रिकवरी शुरू होगी। जेपी मॉर्गन ने अक्तूबर के अंत तक सावधानी बरतने की सलाह दी है। उसका मानना है कि साल के अंत से बाजार में तेजी शुरू हो सकती है।

एंबिट एसेट मैनेजमेंट में फंड मैनेजर त्रिलोक अग्रवाल ने कहा कि निफ्टी में एक साल की फॉरवर्ड अर्निंग्स के करीब 19 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। इसका मतलब है कि हालिया करेक्शन के बाद भी भारतीय बाजार की वैल्यूएशन दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले प्रीमियम पर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में हाई बॉन्ड यील्ड को देखते हुए वैल्यूएशन में यह फर्क मायने रखता है।

अग्रवाल का हालांकि मानना है कि भारतीय बाजार में और गिरावट नहीं आएगी। उन्होंने इसकी वजह अर्निंग्स आउटलुक को बताया। उनका मानना है कि FY27 में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ 17-20 फीसदी रह सकती है। अर्निंग्स ग्रोथ वैल्यूएशन में आई कमी से भारतीय बाजारों को सपोर्ट मिलेगा।

RBI उम्मीद से ज्यादा बढ़ा सकता है इंटरेस्ट रेट, होम लोन और कार लोन होंगे महंगे

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) उम्मीद से ज्यादा इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का कहना है कि केंद्रीय बैंक इस साल दिसंबर तक इंटरेस्ट रेट 50 बेसिस प्वाइंट्स तक बढ़ा सकता है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी अगले हफ्ते आने वाली है। इसमें इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला हो सकता है।

आरबीआई 7 अक्टूबर को पेश करेगा मॉनेटरी पॉलिसी

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग 5 अक्तूबर को शुरू होगी। इसके नतीजे 7 अक्तूबर को आएंगे। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा बुधवार यानी 7 अक्तूबर को सुबह 10 बजे मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेंगे। नोमुरा के मुताबिक, RBI का रुख इंटरेस्ट रेट को लेकर अनुमान से ज्यादा आक्रामक हो सकता है। ज्यादातर एनालिस्ट्स का मानना है कि आरबीआई अगले साल तक इंटरेस्ट रेट करीब 125 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है।

इस साल दो बार रेपो रेट बढ़ने का अनुमान 

नोमुरा का कहना है कि आरबीआई अक्तूबर की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स और दिसंबर की पॉलिसी में फिर 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है। इससे रेपो रेट बढ़कर 5.75 फीसदी पर पहुंच जाएगा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, आरबीआई का रुख शुरुआत में आक्रामक रह सकता है। इसकी वजह यह है कि फूड और एनर्जी की कीमतों में उछाल से अगले छह महीनों में इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ने का अनुमान है।

इनफ्लेशन को बढ़ने से रोकने के लिए RBI बढ़ाएगा रेपो रेट

नोमुरा का कहना है कि आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने का मकसद सिर्फ इनफ्लेशन को बढ़ने से रोकना है। इसे इंटरेस्ट रेट को लेकर आरबीआई की सख्त नीति की साइकिल की शुरुआत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ब्रोकरेज फर्म ने FY27 में एवरेज सीपीआई इनफ्लेशन 5.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। उसका यह भी कहना है कि FY28 में यह घटकर 4 फीसदी के आरबीआई के टारगेट तक आ जाएगा।

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क्रूड की कीमतों में उछाल से बढ़ रहा है इनफ्लेशन 

इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई थी। इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतो में उछाल आया है। जून में क्रूड ऑयल की कीमतों में कुछ नरमी आई थी। लेकिन, फिर से कीमतें काफी बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा है। इसका सीधा असर इनफ्लेशन पर पड़ रहा है। बीते 3-4 महीनों से रिटेल इनफ्लेशन लगातार बढ़ा है। अमेरिका-ईरान की लड़ाई से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 71 डॉलर प्रति बैरल था।