आरबीआई ने रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ाया, महंगा हो सकता है कर्ज

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बढ़ती मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितताओं के मद्देनजर बुधवार को अल्पावधि कर्ज की अपनी नीतिगत दर रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर दी।

इससे होम लोन, व्यक्तिगत ऋण और उद्योगों के लिए पूंजी की लागत बढ़ने की आशंका है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की आज समाप्त तीन दिवसीय बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय किया है। रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक पूंजी उपलब्ध कराता है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना रुख भी बदल दिया है और अब वह भविष्य में रेपो दर में और बढ़ोतरी के लिए तैयार है।

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श्री मल्होत्रा ने कहा कि निकट भविष्य में रेपो दर में कटौती की उम्मीद नहीं है। इसमें या तो वृद्धि होगी या इसे स्थिर रखा जाएगा। चालू वित्त वर्ष में एमपीसी की यह चौथी और कैलेंडर वर्ष में पांचवीं द्विमासिक बैठक थी जिसमें नीतिगत दरों की नियमित समीक्षा की जाती है। इस साल नीतिगत दरों में पहली बार बदलाव किया गया है।

पिछले साल एमपीसी ने चार बार में रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की थी जिससे आम लोगों को अपना घर और वाहन खरीदने में काफी राहत मिली थी। आखिरी कटौती दिसंबर में (0.25 प्रतिशत) की गई थी। फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो दर बढ़ाई गई है। कोविड काल में मई 2022 से फरवरी 2023 के बीच छह बार में इसमें कुल 2.5 प्रतिशत (250 आधार अंकों) की वृद्धि की गई थी।

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अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन की जीत ही देश को दिवालिया होने से बचा सकती है: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि आगामी मध्यावधि चुनावों में केवल रिपब्लिकन पार्टी की जीत ही देश को दिवालिया होने से बचा सकती है।

पत्रकारों से बात करते हुए श्री ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि अगर रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लेती है, तो अमेरिका प्रत्येक वयस्क अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर का लाभांश देगा।

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श्री ट्रंप ने पत्रकारों से कहा डेमोक्रेट्स ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि वे टैरिफ नहीं लगाते और इसलिए देश दिवालिया होने वाला है। इससे पहले मंगलवार को बाल्टीमोर में एक अलग कार्यक्रम में बोलते हुए श्री ट्रंप ने कहा कि अगर डेमोक्रेट्स चुनाव जीतते हैं तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 1929 जैसी मंदी का सामना करना पड़ेगा।

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव तीन नवंबर को होंगे। उस दिन, 33 सीनेटरों और प्रतिनिधि सभा के सभी 435 सदस्यों का चुनाव किया जाएगा। कई राज्यों में विधायी चुनाव भी होंगे।

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RBI MPC: तेजी से बढ़ रही ग्रोथ, आरबीआई की सख्ती, शेयर दबाव में, अब आगे क्या?

केंद्रीय बैंक आरबीआई (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की और इसे 5.5% कर दिया। मार्केट को इसने हैरान नहीं किया, क्योंकि इसकी उम्मीद पहले से ही थी। हालांकि कुछ और बातें ऐसी रही, जिसने मार्केट का ध्यान अपनी तरफ खींचा। आरबीआई ने ग्रोथ का अनुमान तेजी से बढ़ाया तो दूसरी तरफ महंगाई का भी अनुमान बढ़ाया है और साथ ही अपना रुख न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। आरबीआई ने इस वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया तो महंगाई का अनुमान भी 5% से बढ़ाकर 5.2% किया।

मार्केट में मिला-जुला रुझान

आरबीआई के रुझान से मार्केट को मिला-जुला संकेत मिला। जीडीपी अपग्रेड निश्चित रूप से कंपनियों की कमाई के लिए अच्छी बात है लेकिन महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी और मौद्रिक नीतियों की सख्ती से यह संकेत मिला कि दरों में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना है। आरबीआई गवर्नर ने भी ऐसे संकेत दिए हैं।

वैसे मार्केट पहले से ही कमजोर है। पिछले महीने सितंबर में निफ्टी 6.1% गिरकर 22,620 तक आ गया था, जोकि मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी तो सेंसेक्स 5.8% गिरकर 72,480 पर आ गया। साथ ही अक्टूबर में एंट्री करते ही इसने लगातार आठ हफ्तों की लगातार गिरावट दिखाई, जो 25 वर्षों में इसकी सबसे लंबी गिरावट रही। आरबीआई के 5 अगस्त के पॉलिसी पॉज के बाद इंडेक्स लगभग 7.5% गिर चुका है।

अब आगे क्या

आरबीआई ने अपने आउटलुक से यह संकेत दिया है कि इसका फोकस फिलहाल इनफ्लेशन पर है। वैसे भी जून 2026 तिमाही में भारतीय इकॉनमी 7.8% की रफ्तार से बढ़ी थी जोकि आरबीआई के पहले के अनुमान 7% से अधिक रही। अब आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7.1% कर दिया। इसका मतलब है कि कंपनियों की मांग और रेवेन्यू की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

अब सबसे बड़ी परीक्षा सितंबर तिमाही के नतीजे को लेकर है। निफ्टी 50 की कंपनियों से रेवेन्यू और मुनाफे में सालाना करीब 20% के ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि तेल और कच्चे माल की लागत में उछाल से रेवेन्यू में बढ़ोतरी का पूरा फायदा प्रॉफिट में नहीं बदल सकता है और कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि ऑपरेटिंग मार्जिन में सालाना आधार पर सितंबर तिमाही में 100-150 बीपीएस की गिरावट आ सकती है।

ऐसे में असली सवाल ये रहेगा कि कंपनियां बढ़ती लागत को कितना सोख सकती है और ईबीआईटीडीए मार्जिन कितना बचा सकती हैं। सितंबर तिमाही के कारोबारी नतीजे पर तो मार्केट की नजर रहेगी ही लेकिन इसके अलावा आगे यह भी देखना होगा कि मैनेजमेंट की कमेंट्री क्या रहती है, क्या कंपनियों के पास प्राइसिंग पावर है, और वित्त वर्ष 2027 में डिमांड कैसी रहती है।

फिलहाल तो इस समय सबसे बड़ा रिस्क कच्चा तेल भी है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $101 के पार चला गया क्योंकि इससे इनफ्लेशन, करंट अकाउंट, रुपये और कॉरपोरेट मार्जिन- चारों पर दबाव पड़ता है। दूसरी तरफ अमेरिका और भारत में बॉल्ड यील्ड ऊंची है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय मार्केट में निवेश का क्रेज फीका पड़ सकता है। अमेरिका में 10-साल का ट्रेजरी यील्ड उछलकर करीब 5.3% और भारत में 10-साल का गवर्नमेंट बॉन्ड यील्ड 7.2% पर पहुंच गया। इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। DIIs की खरीदारी और एसआईपी फ्लो ने एक जरूरी सहारा दिया है, लेकिन यूएस यील्ड में बढ़ोतरी, कमजोर रुपए और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से विदेशी पैसे की तेजी से वापसी मुश्किल हो गई है।

कंक्लूजन

बाजार का समीकरण बदल चुका है। 7.1% GDP ग्रोथ से कमाई का निचला स्तर तय होता है तो महंगाई की 5.2% की रफ्तार और 5.5% रेपो रेट से वैल्यूएशन रीरेटिंग की ऊपरी सीमा तय होती है। सितंबर में निफ्टी पहले ही लगभग 6% और अगस्त की पॉलिसी के बाद से लगभग 8% गिर चुका है, इसलिए अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या कंपनी की कमाई उम्मीदों से बेहतर हो सकती है। फिलहाल आरबीआई ने सस्ते कर्ज की संभावना खत्म कर दी है तो इक्विटी को बड़े बदलाव की जरूरत है। खास बात ये है कि भारत का ग्रोथ इंजन बना हुआ है लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कई वर्षों के हाई लेवल के करीब ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और मार्जिन पर दबाव से कंपनियों की मजबूत कमाई के बावजूद शेयरों का जोश फीका हो सकता है।

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RBI ने 25 बीपीएस बढ़ाया रेपो रेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आरबीआई के बयान से पहले सेंसेक्स 400 अंक लुढ़का

मौद्रिक नीति पर रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बयान से पहले बुधवार को घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती कारोबार में गिरावट रही और बीएसई का सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा टूट गया।

सेंसेक्स 102.43 अंक की बढ़त के साथ 72,965.38 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 444.27 अंक (0.61 प्रतिशत) के नुकसान में 72,676.52 अंक पर रहा। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन की बैठक के बाद आज बयान जारी होना है। इससे पहले बाजार में गिरावट देखी जा रही है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक 85.65 अंक नीचे 22,690.45 अंक पर खुला।

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खबर लिखे जाते समय यह 160.40 अंक यानी 0.70 प्रतिशत गिरकर 22,628.75 अंक पर था। वृहत बाजार में भी बिकवाली का जोर है। मीडिया सेक्टर को छोड़कर अन्य सभी सूचकांकों में गिरावट है। टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, ऑटो, धातु, एफएमसीजी, तेल एवं गैस, आईटी, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्रों की कंपनियों में बिकवाली ज्यादा हावी रही।

सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल और इटरनल को छोड़कर अन्य सभी कंपनियों के शेयर लाल निशान में हैं। टाइटन का शेयर करीब चार प्रतिशत नीचे है। एशियन पेंट्स, बीईएल, एक्सिस बैंक और मारुति सुजुकी के शेयर फिलहाल एक से डेढ़ फीसदी के बीच गिरावट में हैं।

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Repo Rate में बढ़ोतरी पर Nifty Bank में 500 प्वाइंट्स की रिकवरी, इस कारण ग्रीन

Nifty Bank jumps after Repo Rate Hike: केंद्रीय बैंक RBI ने रेपो रेट में उम्मीद के मुताबिक ही 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी 0.25% पर्सेंटेज प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की तो बैंकिंग स्टॉक चमक उठे। आज 7 अक्टूबर को रेपो रेट में बढ़ोतरी पर बैंक निफ्टी दिन के निचले स्तर से 500 प्वाइंट्स से अधिक रिकवर हुए। आरबीआई ने अपने नीतिगत रुझान को बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी सोच-समझकर सख्ती कर दिया है। रेपो रेट को आरबीआई ने 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है तो वित्त वर्ष 2027 की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी बढ़ाया है।

Repo Rate में बढ़ोतरी का मार्केट पर सेक्टरवाइज क्या असर

बैंक निफ्टी फिलहाल 10:28 AM पर 0.17% की बढ़त के साथ 55,222.20 पर है। शुरुआती कारोबार में यह 492.20 प्वाइंट्स टूटकर 54,636.20 तक आ गया था। रेपो रेट हाइक के बाद इसने तेजी से रिकवरी की और ग्रीन जोन में आ गया। वहीं दूसरी तरफ रेपो रेट में बढ़ोतरी से ऑटोमोबाइल्स और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों पर दबाव आ गया।

बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ने का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि लोन की दरें और जमा पर लागत कितनी तेजी से एडजस्ट होती हैं, और साथ ही क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार क्या रहती है। ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक तुरंत एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) बढ़ा देते हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि नियर टर्म में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। इससे संकेत मिला कि आने वाले नीतिगत बैठक में या तो इसे बढ़ाने का फैसला होगा या फिर इसे स्थिर रखा जाएगा।

क्या हुआ RBI MPC मीटिंग में

आरबीआई ने फरवरी 2023 के बाद से पहले एकमत होकर रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला किया। हालांकि रुख को लेकर अलग-अलग राय दिखी। कमेटी ने अपना रुख न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग किया है, जिसके पक्ष में चार तो विरोध में दो सदस्यों ने वोट किया। साथ ही आरबीआई गवर्नर ने आने वाली बैठकों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी या इसकी स्थिरता के संकेत दिए।

आरबीआई को उम्मीद है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी, लेकिन महंगाई का खतरा बढ़ गया है। आरबीआई गवर्नर के मुताबिक दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में तेजी बनी रहेगी लेकिन पहली तिमाही की तुलना में रफ्तार धीमी होगी।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को पहले के 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया। दूसरी तिमाही (Q2) के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7.2% और तीसरी तिमाही (Q3) के लिए 6.5% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया तो चौथी तिमाही (Q4) के लिए अनुमान 6.8% पर ही बरकरार रखा। हालांकि अगले वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के ग्रोथ अनुमान को 7.3% से घटाकर 7.1% कर दिया है।

महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।

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RBI ने 25 बीपीएस बढ़ाया रेपो रेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI Repo Rate Hike : आरबीआई गवर्नर ने कहा, ब्याज दरों में आगे भी कटौती की संभावना नहीं, इसमें अभी और बढ़ोतरी की संभावना

RBI Repo Rate Hike : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को कहा कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक का अगला नीतिगत कदम या तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकता है या फिर दरों को बरकरार रखा जा सकता है। यह बदलाव महंगाई तथा अन्य आर्थिक स्थितियों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।

यह गाइडेंस तब आया है जब मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट को 5.25% से 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है और अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि निकट भविष्य में “रेट में कटौती की कोई संभावना नहीं है” और आगे की पॉलिसी में हालात के हिसाब से या तो रेट बढ़ाए जाएंगे या फिर उन्हें जस का तस रखा जाएगा।

अक्टूबर में रेपो रेट में की गई यह बढ़ोतरी फरवरी 2023 के बाद RBI की ओर से रेपो रेट में पहली बढ़ोतरी है। उस समय MPC ने पॉलिसी रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.50% कर दिया गया था।

रुख में इस बदलाव का समर्थन MPC के छह में से चार सदस्यों ने किया, जबकि दो सदस्यों ने ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग'(सोच-समझकर सख्ती) की ओर बढ़ने के खिलाफ वोट दिया।

रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद, स्टैंडिंग डिपॉज़िट फैसिलिटी रेट को 5.25% पर एडजस्ट किया गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट को बढ़ाकर 5.75% कर दिया गया है।

महंगाई बढ़ने का डर रहा हावी

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि महंगाई का आउटलुक अब वैसा अनुकूल नहीं है जैसा पिछले साल था। कीमतों के दबाव को देखते हुए MPC मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव की जरूरत का आकलन कर रही है।

RBI ने FY27 के लिए कोर महंगाई का अनुमान 4.3% से बढ़ाकर 4.4% कर दिया है। मल्होत्रा ​​ने कहा कि FY27 की अगली तीन तिमाहियों में CPI महंगाई (रिटेल महंगाई) औसतन 5.8% रहने की उम्मीद है।

RBI गवर्नर ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी को सप्लाई शॉक के ‘सेकंड-राउंड’ असर (यानी सप्लाई में अचानक बदलाव से होने वाले बाद के असर) पर नजर रखनी होगी, भले ही शुरुआती सप्लाई-साइड महंगाई के असर से इन्हें अलग करना मुश्किल हो।

मल्होत्रा ​​ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी आंशिक रूप से ऐसे ‘सेकंड-राउंड’ असर को रोककर काम करती है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ब्याज दरों में बदलाव का असर इकॉनमी तक पहुंचने में समय लगता है।

दरें बढ़ाने का फैसला कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में फिर से आई अस्थिरता के माहौल में लिया गया है। बैठक से पहले, एनर्जी की बढ़ती लागत, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई के दबाव के कारण ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें मज़बूत हो गई थीं। अगस्त में रिटेल महंगाई दर 4.82% रही, जो लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के मीडियम टर्म टारगेट से ज्यादा है।

संजय मल्होत्रा ​​ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते टकराव ने ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटीमेंट को कमजोर किया है और फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है। उन्होंने ग्लोबल ट्रेड को लेकर बनी अनिश्चितता की ओर भी इशारा किया और कहा कि ग्लोबल महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी की आशंका है। उन्होंने कहा कि सख्त मॉनेटरी पॉलिसी और जारी संघर्षों से ग्लोबल इकोनॉमी के लिए जोखिम पैदा हो रहे हैं।

 

 

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Bank FD: बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा रखने वालों के लिए खुशखबरी, रेपो रेट बढ़ने से अब FD पर मिलेगा ज्यादा इंटरेस्ट

आरबीआई ने 7 अक्तूबर को रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान किया। अब यह 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है। फरवरी 2023 के बाद आरबीआई ने पहली बार रेपो रेट बढ़ाया है। यह बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा रखने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें अपने एफडी पर पहले से ज्यादा रिटर्न मिलेगा।

रेपो रेट बढ़ने से बैंकों में FD रखने वालों को फायदा

बैंकों का इंटरेस्ट रेट एक बाहरी बेंचमार्क से लिंक्ड होता है। ज्यादातर बैंक बेंचमार्क के रूप में रेपो रेट का इस्तेमाल करते हैं। इससे रेपो रेट बढ़ने पर उन्हें भी इंटरेस्ट रेट बढ़ाना पड़ता है। इससे होम लोन या कार लोन लेने वालों के लिए लोन लेना महंगा हो जाता है। लेकिन, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा रखने वाले लोगों को इंटरेस्ट रेट बढ़ने से फायदा होता है।

FD पर इंटरेस्ट रेट बढ़ने में थोड़ा समय लग सकता है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रेपो रेट 25 बेसिस बढ़ने के बाद बैंकों के एफडी पर इंटरेस्ट रेट बढ़ने में थोड़ा समय लग सकता है। इसकी वजह यह है कि बैंक डिपॉजिट की जरूरत, लोन की डिमांड और अपनी एसेट क्वालिटी को देखने के बाद ही एफडी पर इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला करते हैं। इसलिए रेपो रेट बढ़ने का असर एफडी के इंटरेस्ट रेट पर पड़ने में थोड़ा समय लग जाता है।

स्मॉल फाइनेंस बैंकों का इंटरेस्ट रेट सबसे ज्यादा

अभी ज्यादातर सरकारी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर 6.30 से 6.65 इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहे हैं। प्राइवेट और स्मॉल फाइनेंस बैंकों का इंटरेस्ट रेट थोड़ा ज्यादा है। छोटे-बड़े सभी बैंक सीनियर सिटीजंस को सामान्य इनवेस्टर्स के मुकाबले ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर करते हैं। हालांकि, एफडी की अवधि के हिसाब से इंटरेस्ट रेट में फर्क होता है।

नया एफडी करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान 

अगर आप बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट करना चाहते हैं तो आपके लिए थोड़ा इंतजार कर लेना ठीक रहेगा। इसकी वजह यह है कि बैंकों को रेपो रेट बढ़ने के बाद एफडी पर इंटरेस्ट रेट बढ़ाने में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। आपको एफडी पर बैंकों के नए इंटरेस्ट रेट्स को देखने के बाद एफडी करने का फैसला करना चाहिए। एफडी के इंटरेस्ट रेट में थोड़ा अंतर से रिटर्न में बड़ा फर्क पड़ता है। खासकर एफडी का अमाउंट ज्यादा होने पर यह फर्क काफी मायने रखता है।

Stocks to Watch: RBI के ऐलान का इंतजार; इंट्रा-डे में 4 लिस्टिंग्स और Titan, Ola Electric और Apollo Tyres समेत 24 शेयर फोकस में

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों से कमजोर रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 69.50 प्वाइंट्स यानी 0.31% की गिरावट के साथ 22,704.50 पर है। चूंकि आज आरबीआई की मौद्रिक नीतियों का ऐलान होना है और रेपो रेट (Repo Rate) पर फैसला सामने आएगा तो इसके चलते मार्केट में तेज उठा-पटक दिख सकती है। कई इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट से 50 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है।

एक कारोबारी दिन पहले 06 अक्टूबर को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स 685.34 प्वाइंट्स यानी 0.95% की बढ़त के साथ 73,067.81 और निफ्टी भी 220.35 प्वाइंट्स यानी 0.98% की मजबूती के साथ 22,776.10 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Asset Reconstruction Company India Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 14.6% बढ़कर ₹59.1 करोड़ और रेवेन्यू 115.4% उछलकर ₹234.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Glass Wall Systems Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ग्लास वाल सिस्टम्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 7.7% गिरकर ₹17.3 करोड़ पर आ गया लेकिन इसी दौरान रेवेन्यू 35.8% उछलकर ₹107.4 करोड़ पर पहुंच गया।

Kanohar Electricals Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कनोहर इलेक्ट्रिकल्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 140% बढ़कर ₹27.3 करोड़ और रेवेन्यू 103.5% उछलकर ₹137.1 करोड़ पर पहुंच गया।

Karamtara Engineering Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर करमतारा इंजीनियरिंग का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 45.3% बढ़कर ₹87.4 करोड़ और रेवेन्यू 72.3% उछलकर ₹1,580.9 करोड़ पर पहुंच गया।

Titan Company Q2 (YoY)

सितंबर तिमाही में टाइटन कंपनी का घरेलू बिजनेस सालाना 22%, इंटरनेशनल बिजनेस 97%, कंज्यूमर बिजनेस 25%, वॉच बिजनेस 30%, आईकेयर सेगमेंट 28%, एमर्जिंग बिजनेस 21% और ज्वैलरी बिजनेस 21% की रफ्तार से बढ़ा। सितंबर तिमाही में टाटइन ने अपने नेटवर्क में 77 घरेलू और 1 इंटरनेशनल स्टोर जोड़े और इसके साथ ही इसके कुल 3758 स्टोर हो गए।

Apollo Tyres

कंपनी के बाहर नए मौकों की तलाश में अपोलो टायर्स के सीएफओ गौरव कुमार ने कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 6 अक्टूबर से प्रभावी हुआ।

Mahindra Lifespace Developers

महिंद्रा लाइफस्पेस ने पुणे के बानेर एनेक्स में महिंद्रा रिवेंजा नाम का एक रेजिडेंशियल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है, जिसकी कुल ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (GDV) लगभग ₹3,500 करोड़ है।

ABB India

एबीबी इंडिया के बोर्ड ने सुनील कुमार मुनागा को कंपनी का सीएफओ बनाने की मंजूरी दे दी है, जो 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगी। अभी सुनील कुमार मुनागा कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस एरिया कंट्रोलर (इलेक्ट्रिफिकेशन) हैं।

Ola Electric Mobility

ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बोर्ड की बैठक 7 अक्टूबर को है, जिसमें ₹1000 करोड़ के राइट्स इश्यू से जुड़े कई मामलों पर चर्चा होगी।

Asian Paints

नतीजे के साथ-साथ एशियन पेंट्स बोर्ड की बैठक में अंतरिम डिविडेंड के भी प्रस्ताव पर विचार करने वाली है। इसकी रिकॉर्ड डेट 4 नवंबर तय की गई है।

Adani Ports and Special Economic Zone

अदाणी पोर्ट्स ने ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर दो ड्राई बल्क बर्थ के डेवलपमेंट और ऑपरेशन के लिए एक पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी पारादीप महानदी टर्मिनल बनाई है।

HCL Technologies

एचसीएल ग्रुप ने ₹500 करोड़ के प्लान के साथ एचसीएल आईटी सिटी के विस्तार का ऐलान किया है। इसमें 9.5 लाख स्क्वेयर फीट तक का नया एरिया तैयार होगा, जिसमें 4,500 टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के लिए जगह होगी। इसके अलावा एचसीएलटेक ने ऐलान किया है कि FY27 के दौरान उसके लिटमस (LITMUS) प्रोग्राम के जरिए उत्तर प्रदेश के 1,000 छात्रों को AI और उससे जुड़ी टेक्नोलॉजी में ट्रेनिंग दी जाएगी।

JSW Cement

जेएसडब्ल्यू सीमेंट ने राजस्थान के नागौर में 1.00 MTPA की एक और सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट शुरू की है। इसके साथ ही कंपनी की कुल सीमेंट ग्राइंडिंग क्षमता बढ़कर 25.10 MTPA हो गई है, जबकि क्लिंकर बनाने की इसकी कुल क्षमता 9.74 MTPA है, जिसमें इसके जॉइंट वेंचर JSW सीमेंट FZC की क्लिंकर क्षमता भी शामिल है।

Godrej Consumer Products

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की सब्सिडियरी गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स इंडोनेशिया ने केंडल स्पेशल इकोनॉमिक जोन में अपनी नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के पहले चरण का उद्घाटन किया। कंपनी ने इंडोनेशिया में अपनी मैन्युफैक्चरिंग स्थिति को मजबूत करने के लिए केंडल में लगभग ₹250 करोड़ का निवेश किया है।

Marsons

मार्सन्स और न्यूयॉर्क की प्राइवेट इक्विटी फर्म क्लीनहिल पार्टनर्स ने अमेरिका और कनाडा में ट्रांसफॉर्मर के डिस्ट्रीब्यूशन, सर्विसिंग और मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स को तेज करने के लिए एक जॉइंट वेंचर बनाने की योजना का ऐलान किया है।

Mphasis

एमफेसिस ने सोशल सिक्योरिटी स्कॉटलैंड के साथ 3.54 करोड़ पाउंड का एग्रीमेंट किया है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी सोशल सिक्योरिटी स्कॉटलैंड के बेनिफिट्स मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म को मैनेज और मेंटेन करेगी।

Shadowfax Technologies

टीपीजी की न्यूक्वेस्ट एशिया फंड IV (सिंगापुर) ने ₹114.8 करोड़ में शैडोफैक्स टेक के 40 लाख शेयर (0.68% हिस्सेदारी) प्रति शेयर र्287 के भाव पर बेच दिए। इसके साथ ही इसने शैडोफैक्स में अपनी हिस्सेदारी 4.86 पर्सेंटेज प्वाइंट्स (यानी 2.85 करोड़ इक्विटी शेयर) कम कर दी है। जून 2026 तक कंपनी में इसकी हिस्सेदारी 11.53% थी।

Satin Creditcare Network

कैम्ब्रिज की MIT (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) ने सैटिन क्रेडिटकेयर नेटवर्क के 14.54 लाख शेयर (1.31% हिस्सेदारी) ₹30.31 करोड़ में प्रति शेयर ₹208.36 के भाव पर बेच दिए। जून 2026 तक सैटिन क्रेडिटकेयर में MIT की हिस्सेदारी 1.81% थी।

One Mobikwik Systems

हर ग्लोबल कैपिटल मास्टर फंड I ने वन मोबिक्विक सिस्टम्स के 4.31 लाख शेयर (0.54% हिस्सेदारी) ₹9.83 करोड़ प्रति शेयर ₹227.86 के भाव पर खरीदे। वहीं बजाज लाइफ इंश्योरेंस ने मोबिक्विक के 7 लाख शेयर (0.88% हिस्सेदारी) ₹236.49 के भाव पर ₹16.55 करोड़ में बेच दिए। जून 2026 तक बजाज लाइफ इंश्योरेंस की कंपनी में 2.69% हिस्सेदारी थी।

RMC Switchgears

ईओएफ-डायरेक्ट ने स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनी आरएमसी स्विचगियर्स के 86,750 इक्विटी शेयर (0.82% हिस्सेदारी) ₹1.7 करोड़ में प्रति शेयर ₹195.93 के भाव पर खरीदे। वहीं इंडिया इमर्जिंग जायंट्स फंड ने इतने ही शेयर प्रति शेयर ₹195.72 के भाव पर बेच दिए।

Black Opal Consultants, Papadmalji Agro Foods, Vans Electroengineerings, Green Asia Impex

पापड़मालजी एग्रो फूड्स और ग्रीन एशिया इंपेक्स के शेयर आज एनएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे तो ब्लैक ओपल कंसल्टैंट्स और वान्स इलेक्ट्रोइंजीनियरिंग्स के शेयरों की बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price Today: दिल्ली-मुंबई से सस्ता सोना मिल रहा यहां, लगातार दूसरे दिन बढ़ी चमक, चेक करें 24 से 18 कैरट का भाव

Gold Rate Today in India: कच्चे तेल की नरमी ने गोल्ड की चमक बढ़ाई है। लगातार दो दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन आज इसके भाव ऊपर चढ़े हैं। इन दो दिनों में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹1050 और 22 कैरट वाला ₹960 महंगा हुआ है। इसमें से आज 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 और 22 कैरट वाला ₹10 ऊपर चढ़ा है। चांदी की बात करें तो इंडस्ट्रियल डिमांड की सुस्ती से लगातार छह दिनों की स्थिरता के बाद आज इसकी चमक फीकी पड़ी है और एक किलो चांदी ₹100 नीचे आई है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली₹1,50,380₹1,37,860₹1,12,830
मुंबई₹1,50,230₹1,37,710₹1,12,680
कोलकाता₹1,50,230₹1,37,710₹1,12,680
चेन्नई₹1,49,010₹1,36,590₹1,11,190
बेंगलुरू₹1,50,230₹1,37,710₹1,12,680
हैदराबाद₹1,50,230₹1,37,710₹1,12,680
लखनऊ₹1,50,380₹1,37,860₹1,12,830
पटना₹1,50,280₹1,37,760₹1,12,730
जयपुर₹1,50,380₹1,37,860₹1,12,830
अहमदाबाद₹1,50,280₹1,37,760₹1,12,730

छह दिनों की स्थिरता के बाद फिसली चांदी

चांदी लगातार छह दिनों की स्थिरता के बाद आज सस्ती हुई है। इससे पहले लगातार दो दिनों की स्थिरता के बाद 1 अक्टूबर को एक किलो चांदी ₹5 हजार नीचे आई थी। अब आज की बात करें तो आज 7 अक्टूबर को दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,34,900 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों में मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। वहीं चेन्नई में एक किलो चांदी ₹2,44,900 के भाव में बिक रही है यानी कि चारों महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में ही है।

फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर होंगी नजरें

इस समय मार्केट की नजर केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों पर है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर आमतौर पर सोने की चमक फीकी पड़ती है। डॉलर में मजबूती का भी निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि इससे दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। 7 अक्तूबर को आरबीआई अपनी मौद्रिक पॉलिसी पेश करेगा। इस महीने के अंत में फेडरल रिजर्व अपनी पॉलिसी पेश करेगा।

Gold silver Price: MCX पर सोने-चांदी की कीमतों में उछाल, एक्सपर्ट्स से जानें अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI MPC Meeting Live: आज होगा रेपो रेट पर बड़ा ऐलान! जानिए होम लोन EMI, FD और आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

RBI Monetary Policy Committee Live Updates: देश के करोड़ों आम लोगों, होम लोन ग्राहकों और निवेशकों की निगाहें आज, 7 अक्टूबर सुबह 10 बजे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के ऐलान पर टिकी हुई है। महंगाई के बढ़ते दबाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये के बीच आज केंद्रीय बैंक अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करने जा रहा है।

वैसे बाजार के अधिकांश विशेषज्ञों और रॉयटर्स के पोल में शामिल 60% से अधिक इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि आज रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो रेपो रेट वर्तमान 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगी।

होम लोन EMI पर कितना पड़ेगा असर?

अगर आज आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की जेब पर असर पड़ना तय है:

बढ़ेगी EMI या लोन की अवधि: रेपो रेट बढ़ते ही बैंकों की फंडिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिसे बैंक सीधे ग्राहकों पर डालेंगे। यदि आपका ₹50 लाख का होम लोन लंबे समय के लिए चल रहा है, तो 0.25% की बढ़ोतरी से बैंक या तो आपकी मासिक EMI बढ़ा देंगे या लोन की समयावधि को लंबा कर देंगे।

क्या करें उधारकर्ता?:  तुरंत पूरा लोन चुकाने की हड़बड़ी न करें। पहले अपने लोन की मौजूदा ब्याज दर, शेष अवधि, बैंक के स्प्रेड की जांच करें और जरूरत पड़ने पर दूसरे बैंक में बैलेंस ट्रांसफर के विकल्प पर विचार करें।

पर्सनल और कार लोन भी हो सकते हैं महंगे

होम लोन ही नहीं, बल्कि नए पर्सनल लोन, व्हीकल लोन और अन्य क्रेडिट प्रोडक्ट्स की दरें भी धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं। चूंकि पर्सनल लोन की दरें पहले से ही ऊंची होती हैं, इसलिए इस समय नया असुरक्षित कर्ज सोच-समझकर ही लें।

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के निवेशकों के लिए खुशखबरी

दरों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा फायदा बचत करने वालों को मिलेगा। कर्ज की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बैंक नए डिपॉजिट आकर्षित करने के लिए FD पर मिलने वाले ब्याज में बढ़ोतरी करेंगे। वैसे आपकी पहले से चल रही फिक्स्ड डिपॉजिट पर पुरानी दर ही लागू रहेगी। फायदा केवल नई FD कराने या पुरानी FD को रिन्यू करने पर ही मिलेगा।

सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरें

सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है, क्योंकि ये दरें प्रत्येक बैंक की लिक्विडिटी और प्रतिस्पर्धात्मक नीतियों पर निर्भर करती हैं।

आरबीआई क्यों ले सकता है दरें बढ़ाने का फैसला?

महंगाई: अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई, जो आरबीआई के 4% के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर है।

कच्चा तेल और रुपया: पश्चिम एशिया में तनाव से कच्चे तेल के दाम ऊंचे हैं और रुपया कमजोर हो रहा है, जिससे आयात महंगा हो रहा है।

मजबूत GDP ग्रोथ: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही है, जो आर्थिक मजबूती को दर्शाती है और आरबीआई को महंगाई पर ध्यान केंद्रित करने का मौका देती है।

RBI की नई पॉलिसी के पल पल के अपडेट के लिए जुगए रहें मनीकंट्रोल के आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी के नए ऐलानों के लिए बने इस स्पेशल लाइव ब्लॉग से।