Bank Holiday: दिल्ली, मुंबई और चेन्नई समेत देश के कई राज्यों में आज बंद रहेंगे बैंक, जानें आरबीआई ने क्यों दी है छुट्टी

Bank Holiday Today: आज शुक्रवार, 26 जून को मोहर्रम के मौके पर दिल्ली, मुंबई और चेन्नई समेत देश के कई बड़े राज्यों में सरकारी और प्राइवेट बैंक बंद रहेंगे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आधिकारिक हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, आज देश के ज्यादातर हिस्सों में बैंक बंद रहने के कारण बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा।

अगर आप आज बैंक से जुड़ा कोई बड़ा काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले बंद शहरों की लिस्ट और आने वाले लंबे वीकेंड की डिटेल्स जरूर चेक कर लें।

आज 26 जून को आपके शहर में बैंक खुले हैं या बंद?

आरबीआई के कैलेंडर के अनुसार, आज 26 जून को मोहर्रम के चलते देश के इन बड़े शहरों में बैंकों की छुट्टियां रहेंगी:

नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता, लखनऊ, कानपुर, भोपाल, हैदराबाद, पटना, रांची, रायपुर, नागपुर, श्रीनगर, जम्मू, अगरतला, आइजोल और बेलापुर।

इन शहरों के अलावा जिन राज्यों में मोहर्रम की छुट्टी स्थानीय स्तर पर अधिसूचित नहीं है, वहां बैंक सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे।

लगातार 3 दिन की छुट्टी: आज से शुरू हुआ लॉन्ग वीकेंड

देश के कई राज्यों में आज से लगातार तीन दिनों तक बैंक बंद रहने वाले हैं। ऐसे में अगर आपको बैंक ब्रांच जाना है, तो अब सीधे सोमवार को ही काम हो पाएगा:

26 जून (शुक्रवार): मोहर्रम के मौके पर देश के अधिकांश हिस्सों में बैंक बंद हैं।

27 जून (शनिवार): महीने का चौथा शनिवार होने के कारण देशभर के सभी बैंक बंद रहेंगे।

28 जून (रविवार): साप्ताहिक अवकाश के कारण देशभर के बैंकों में ताला लटका रहेगा।

इसके अलावा, अगले हफ्ते की शुरुआत में भी कुछ राज्यों में क्षेत्रीय छुट्टियां हैं। जैसे 29 जून को संत गुरु कबीर जयंती के मौके पर शिमला में बैंक बंद रहेंगे और 30 जून को ‘रेमना नी’ (Remna Ni) त्योहार के चलते आइजोल में बैंकों की छुट्टी रहेगी।

बैंक बंद होने पर कैसे निपटाएं अपने जरूरी काम?

भले ही त्योहार और वीकेंड के कारण बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी, लेकिन इस दौरान डिजिटल बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के 24 घंटे काम करती रहेंगी:

ऑनलाइन ट्रांजैक्शन: आप पैसे भेजने या मंगाने के लिए नेट बैंकिंग (Net Banking), मोबाइल बैंकिंग या यूपीआई (UPI) सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।

एटीएम और कैश: कैश निकालने के लिए देशभर के सभी एटीएम (ATMs) हमेशा की तरह काम करते रहेंगे।

डिजिटल फॉर्म और रिक्वेस्ट: चेकबुक रिक्वेस्ट, एनईएफटी (NEFT), आरटीजीएस (RTGS) और डिजिटल अकाउंट मेंटेनेंस से जुड़े काम ऑनलाइन ऐप के जरिए किए जा सकते हैं।

S&P का भारत के बारे में बड़ा बयान, कहा-भले ही यह AI की रेस जीत नहीं सकता, फिर भी इसकी ग्रोथ काफी तेज है

एसएंडपी ने इंडिया के बारे में बड़ी बात कही है। उसने कहा है कि इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बूम के बेनेफिशियरी के रूप में अभी नहीं उभरा है। लेकिन, इसका इकोनॉमिक ग्रोथ आउटलुक स्ट्रॉन्ग घरेलू मांग की वजह से ठोस बना हुआ है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स में चीफ एपीएसी इकोनॉमिस्ट लुइस कुइज्स ने यह बात कही है।

सेमीकंडक्टर और चिप बनाने वाले देशों में जा रहा निवेश

उन्होंने कहा कि अभी एआई-से जुड़ा ज्यादातर निवश उन इकोनॉमीज में जा रहा है, जिनकी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और चिप सप्लाई चेन में सीधी भूमिका है। इनमें ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देश हैं, जिनकी इकोनॉमी को लेकर बीते कुछ महीनों में सबसे ज्यादा अपग्रेड देखने को मिला है।

एआई से जुड़ी इकोनॉमी की ग्रोथ में ज्यादा अपग्रेड दिखा है

उन्होंने कहा कि जब हम पिछले डेढ़ साल के अपने अनुमान पर नजर डालते हैं तो हम पाते हैं कि इनमें ऐसी इकोनॉमीज हैं जो इस पूरी एआई स्टोरी से जुड़ी हैं। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन से जुड़ी दूसरी इकोनॉमीज में भी इसी तरह का ट्रेंड देख रही है। इनमें मलेशिया, चीन और जापान शामिल हैं।

भारत को मजबूत घरेलू मांग का मिल रहा बड़ा फायदा

जो देश चिप मैन्युफैक्चरिंग में ज्यादा एक्विट नहीं हैं, उनमें भी ग्रोथ दिख रही है, लेकिन यह ग्रोथ उतनी नहीं है जितनी चिप बनाने वाले देशों की है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इंडिया पिछड़ रहा है। इंडियन इकोनॉमी को उसके मजबूत घरेलू मांग का फायदा मिल रहा है। यह भारत की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है।

एसएंडपी ने इंडिया की ग्रोथ 6.6 फीसदी रहने की उम्मीद जताई

एसएंडपी को इंडिया की ग्रोथ करीब 6.6 फीसदी रहने की उम्मीद है। यह ग्रोथ के आरबीआई के अनुमान के करीब है। हालांकि, कुइज्स का मानना है कि एआई बूम अपेक्षाकृत कमजोर बुनियाद पर खड़ा है। एआई को लेकर ज्यादा उम्मीद का आधार कुछ मुट्ठीभर अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों का बड़ा निवेश है। ये कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स में बड़ा निवेश कर रही हैं।

एआई का फायदा उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला तो कई देशों को होगी दिक्कत

उन्होंने कहा कि अगर इन कंपनियों को एआई पर अपने इनवेस्टमेंट का फायदा मिलने में दिक्कत आती है तो इसका असर पूरे सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर दिखेगा। इसका असर उनक इकोनॉमीज पर भी दिखेगा जिन्हें एआई ट्रेड से फायदा हुआ है। इधर, इंडिया की ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले फैक्टर्स काफी डायवर्सिफायड हैं। घरेलू खपत से इकोनॉमी को लगातार सपोर्ट मिल रहा है।

अभी महंगे नहीं होंगे होम लोन और कार लोन, RBI गवर्नर ने इंटरेस्ट रेट में वृद्धि से किया इनकार

अभी कार लोन और होम लोन महंगे होने नहीं जा रहे हैं। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने खुद इस बारे में बताया है। उन्होंने 24 जून को उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि इंटरेस्ट रेट बढ़ने जा रहा है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति में अभी सख्ती की बात करना बहुत जल्दबाजी होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इनफ्लेशन और ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

इकोनॉमी से जुड़े डेटा के आधार पर फैसला लेगा आरबीआई

ईटी नाउ और ईटी नाउ स्वदेश से बातचीत में मल्होत्रा ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने जून की अपनी पॉलिसी में अपना रुख न्यूट्रल बनाए रखने का फैसला किया था। इसकी वजह यह है कि अभी इकोनॉमी की तस्वीर साफ नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन और इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए रिस्क के आकलन के लिए आने वाले डेटा पर निर्भर करेगा।

इंटरेस्ट रेट बढ़ाने से पहले रुख में बदलाव करेगा केंद्रीय बैंक

उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर केंद्रीय बैंक को यह लगेगा कि निकट भविष्य में इंटरेस्ट रेट बढ़ाना जरूरी है तो वह अपने रुख में बदलाव करेगा। इसे न्यूट्रल से बदलकर रिस्ट्रक्टिव करेगा। इस महीने की शुरुआत में छह सदस्यीय एमपीसी ने रेपो रेट अपरिवर्तित रखने का फैसला किया था। कमेटी का कहना था कि जियोपॉलिटिकल टेंशन, सप्लाई चेने की बाधा और मौसम से जुड़े रिस्क को देखते हुए रेपो रेट को 5.25 फीसदी बनाए रखने का फैसला लिया गया।

अप्रैल और मई में रिटेल इनफ्लेशन में तेज उछाल

इंटरेस्ट रेट बढ़ने की चर्चा रिटेल इनफ्लेशन में उछाल के बाद शुरू हुई। अप्रैल और मई के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा से यह साफ हो गया है कि जरूरी चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इसे क्रूड की कीमतों में उछाल का नतीजा माना जा रहा है। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर होना पड़ा।

फ्यूल महंगा होने से महंगाई का खतरा बढ़ जाता है

पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। यही वजह है कि RBI ने इस महीने की शुरुआत में पेश अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रिटेल इनफ्लेशन का अनुमान बढ़ा दिया। उसने इस वित्त वर्ष के ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया। माना जा रहा है कि महंगाई बढ़ने की वजह से इकोनॉमी की ग्रोथ सुस्त पड़ सकती है।

इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ने पर बढ़ सकात है रेपो रेट

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही आरबीआई गवर्नर ने यह साफ कर दिया है कि अभी केंद्रीय बैंक का रेपो रेट बढ़ाने का कोई प्लान नहीं है, लेकिन अगर महंगाई हाई लेवल पर बनी रहती है तो आगे रेपो रेट बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। रेपो रेट बढ़ने पर होम लोन, कार लोन और दूसरे लोन महंगे हो जाएंगे।

INR vs USD: डॉलर के मुकाबले रुपया 94.35 पर खुला, क्रूड में नरमी से मिल रहा सपोर्ट, आगे कैसा रहेगा आउटलुक

INR vs USD:  शुक्रवार, 19 जून को रुपया US डॉलर के मुकाबले 2 पैसे की मामूली गिरावट के साथ 94.35 पर खुला, क्योंकि US फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बाद घरेलू फ्लो और सेंटिमेंट में सुधार से मजबूत डॉलर के असर को कम करने में मदद मिली।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने बताया कि हाल के सेशंस में कैपिटल फ्लो भारतीय करेंसी के लिए तेजी से सपोर्टिव हो गया है। घरेलू डेट मार्केट में मजबूत इनफ्लो, इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो आउटफ्लो में कमी और इंपोर्टर्स और एक्सपोर्टर्स की बैलेंस्ड भागीदारी ने फॉरेक्स मार्केट में डिमांड-सप्लाई डायनामिक्स को बेहतर बनाने में मदद की है।

बैंकर्स ने बताया कि इंपोर्टर हेजिंग एक्टिविटी अभी भी ऊंची बनी हुई है, लेकिन मार्केट में एकतरफा डॉलर डिमांड से एक साफ बदलाव देखा गया है, जिसने हाल के हफ्तों में रुपये पर दबाव डाला था। इससे पहले, इंपोर्टर्स की तेज खरीदारी और लगातार विदेशी फंड आउटफ्लो ने लोकल करेंसी पर दबाव बनाए रखा था।

रुपये को विदेशी कैपिटल को आकर्षित करने और डॉलर इनफ्लो को बढ़ाने के मकसद से पॉलिसी उपायों से भी फायदा हुआ है। इसके अलावा, US-ईरान शांति समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से भारत के इंपोर्ट बिल को लेकर चिंता कम हुई है, जिससे करेंसी को लेकर ओवरऑल सेंटिमेंट बेहतर हुआ है।

मज़बूत इनफ्लो, तेल की कम कीमतों और मार्केट में बढ़ते भरोसे के मेल से US डॉलर में नई मज़बूती के बावजूद रुपया मज़बूत बना हुआ है।

क्रूड में नरमी से मिला रुपये को मजबूत सपोर्ट

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चा तेल अभी भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये के लिए सबसे बड़ा पॉज़िटिव फ़ैक्टर बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड अभी $75–78 प्रति बैरल की रेंज में ट्रेड कर रहा है, जो इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष से पहले के लेवल पर वापस आ गया है। हालांकि हाल ही में हुए US-ईरान शांति समझौते ने तुरंत सप्लाई की चिंताओं को कम किया है, लेकिन एनालिस्ट एक बड़े स्ट्रक्चरल ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं जो तेल की कीमतों को कम रख सकता है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) को उम्मीद है कि 2027 तक ग्लोबल तेल सप्लाई लगभग 8 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़ जाएगी, जबकि डिमांड ग्रोथ केवल लगभग 2 मिलियन बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सप्लाई-डिमांड के इस बढ़ते अंतर से तेल की कीमतों पर एक नैचुरल लिमिट लग सकती है, जिससे भारत जैसी तेल इंपोर्ट करने वाली इकॉनमी को सपोर्ट मिल सकता है।

पॉजिटिव सेंटिमेंट में यह भी शामिल है कि गल्फ के रास्ते तेल शिपमेंट नॉर्मल हो गए हैं, सऊदी अरब और UAE के टैंकर महीनों की रुकावटों के बाद रेगुलर ऑपरेशन फिर से शुरू कर रहे हैं, जिससे सप्लाई में रुकावटों को लेकर चिंता और कम हो गई है।

बेहतर फंडामेंटल्स के बीच रुपये में रिकवरी जारी

करेंसी स्ट्रैटेजिस्ट्स का कहना है कि तेल की कीमतों में गिरावट पर रुपये ने पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है, लगातार पांच सेशन तक मजबूत हुआ है और 94.30–94.60 प्रति डॉलर की रेंज में आराम से ट्रेड कर रहा है। यह कुछ हफ्ते पहले देखे गए दबाव से एक बड़ी रिकवरी है, जब क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों और विदेशी आउटफ्लो ने करेंसी पर दबाव डाला था।

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि कैपिटल फ्लो में सुधार, इंपोर्ट से जुड़ी डॉलर की कम डिमांड और जियोपॉलिटिकल रिस्क में कमी, इन सभी ने रुपये की हालिया मजबूती में योगदान दिया है।

फेड के सख्त रवैये से डॉलर को मिला सपोर्ट

हालांकि रुपया मजबूत हुआ है, लेकिन एनालिस्ट चेतावनी दे रहे हैं कि फेडरल रिजर्व के पॉलिसी रुख से US डॉलर को सपोर्ट मिलता रहेगा।

US सेंट्रल बैंक ने इंटरेस्ट रेट को 3.50%-3.75% पर बिना किसी बदलाव के रखा, लेकिन पॉलिसी बनाने वालों ने तुलनात्मक रूप से सख्त रुख बनाए रखा, जिसमें कमिटी के लगभग आधे सदस्य अभी भी इस साल कम से कम एक और रेट बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।

हाल के US इकोनॉमिक डेटा ने भी डॉलर की मजबूती को और मजबूत किया है। शुरुआती बेरोजगारी के दावे कम होकर 226,000 हो गए, जबकि छंटनी अब भी ऐतिहासिक रूप से कम है। हालांकि लगातार दावे बढ़े हैं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि लेबर मार्केट तेजी से कमजोर होने के बजाय धीरे-धीरे ठंडा होता दिख रहा है।

इस वजह से, डॉलर को जल्द ही सपोर्ट मिल सकता है, हालांकि मार्केट यह देखना जारी रखेंगे कि क्या महंगाई कम होने और एनर्जी की कीमतों में नरमी से फेड आखिरकार ज्यादा न्यूट्रल रुख अपना पाएगा।

एक्सपर्ट्स का यह भी मानना ​​है कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया अपने बाहरी बफ़र्स को मज़बूत करने के लिए अच्छे मार्केट हालात का फ़ायदा उठा रहा है। कच्चे तेल की कम कीमतों और बेहतर विदेशी करेंसी इनफ़्लो से रुपये को सपोर्ट मिलने के साथ, RBI से उम्मीद है कि वह फ़ॉरेक्स रिज़र्व को फिर से भरने के लिए एक्टिव रूप से डॉलर खरीदेगा और धीरे-धीरे अपनी बड़ी फ़ॉरवर्ड डॉलर पोज़िशन को कम करेगा, जिसका अनुमान लगभग $110 बिलियन है।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स का अनुमान है कि सेंट्रल बैंक ने पिछले कुछ सेशन में मार्केट से $3-5 बिलियन एब्ज़ॉर्ब किए होंगे। एनालिस्ट्स ज़ोर देते हैं कि इस तरह का दखल करेंसी के ट्रैजेक्टरी को लेकर किसी चिंता के बजाय समझदारी भरे रिज़र्व मैनेजमेंट को दिखाता है।

हालांकि ये खरीदारी रुपये की बढ़त की रफ़्तार को कम कर सकती हैं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनसे करेंसी की रिकवरी ज़्यादा टिकाऊ होगी और भविष्य के बाहरी झटकों से कम कमज़ोर होगी।

रुपये का आउटलुक

CR फ़ॉरेक्स एडवाइज़र्स के MD, अमित पाबारी के अनुसार, तेल की कीमतें सपोर्टिव बनी हुई हैं, विदेशी इनफ़्लो बेहतर हो रहे हैं, और डॉलर की मज़बूती नए सवालों का सामना कर रही है।

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Digital arrest scam पर बड़ा एक्शन, 9,400 WhatsApp ब्लॉक, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का खुलासा

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए दूरसंचार नियामकों, सेवा प्रदाताओं, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों एवं केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को शामिल करते हुए बहुस्तरीय कार्रवाई की गई है तथा व्हाट्सऐप ने ऐसे अपराधों में शामिल 9,400 खातों पर रोक लगाई है।

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सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने अपनी विस्तृत स्थिति रिपोर्ट में इस कार्रवाई का ब्योरा दिया है। यह रिपोर्ट देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट  के 9 फरवरी के निर्देशों के अनुपालन में दाखिल की गई है। Edited by : Sudhir Sharma

क्या Epstein row के बीच AI Impact Summit में शामिल होंगे Bill Gates, क्यों बना हुआ है सस्पेंस

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स के ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ AI (Impact Summit) में शामिल होने को लेकर मंगलवार को उस समय असमंजस की स्थिति पैदा हो गई, जब सरकारी सूत्रों ने उनके सम्मेलन में भाग नहीं लेने की जानकारी दी। हालांकि, गेट्स फाउंडेशन का कहना है कि वह इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। 16 फरवरी से दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुई समिट 20 फरवरी तक चलेगी। समिट के साथ-साथ 'इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026' का भी आयोजन किया गया है। यहां दुनियाभर की कंपनियों ने अपने लेटेस्ट AI सॉल्यूशंस दुनिया के सामने पेश किए हैं।

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क्या समिट से कट गया बिल गेट्स का पत्ता?

Impact.IndiaAI.Gov.In वेबसाइट पर 'विजनरीज ऑन द ग्लोबल स्टेज' (Visionaries on the Global Stage) सेक्शन के तहत 16 से 20 फरवरी, 2026 तक दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में शामिल होने वाले मुख्य वक्ताओं की सूची दी गई है। 

 

हालांकि, मंगलवार 15 फरवरी को बिल गेट्स का नाम सर्च करने पर 'No speakers found matching your criteria' (आपके मानदंडों के अनुसार कोई वक्ता नहीं मिला) का मैसेज दिखाई दिया जबकि इससे पहले उनका प्रोफाइल वहां मौजूद था।

गेट्स का नाम वेबसाइट से गायब होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। एनडीटीवी एक खबर के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि सरकार ने एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के मद्देनजर माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक को दिए गए निमंत्रण की 'समीक्षा'  (Review) की है। फिलहाल इस बात पर सस्पेंस बना हुआ है कि वह समिट का हिस्सा होंगे या नहीं।

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एपस्टीन फाइल्स और इंटरनेट पर भारी विरोध

अमेरिकी न्याय विभाग की 'एपस्टीन लाइब्रेरी' में प्रकाशित वर्षों पुराने ईमेल्स में बिल गेट्स के बार-बार संदर्भ आने पर इंटरनेट पर उनकी भारी आलोचना हो रही है। विशेष रूप से 30 जनवरी को डीओजे (DOJ) के अपडेट के बाद यह आक्रोश और बढ़ गया, जिसमें पहले से मौजूद दस्तावेजों के अलावा 30 लाख से अधिक नए पन्ने सार्वजनिक किए गए थे। Edited by : Sudhir Sharma

Foreign Exchange Reserves: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 688.13 अरब डॉलर तक बढ़ा, आठवें सप्ताह में वृद्धि जारी

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 25 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 1.98 अरब डॉलर बढ़कर 688.13 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बताया कि लगातार आठवें सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि हुई है। इसके पहले के सप्ताह में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 8.31 अरब डॉलर बढ़कर 686.14 अरब डॉलर […]

ट्रंप टैरिफ का भारत पर नहीं होगा ज्यादा असर, लॉन्ग टर्म में हो सकता है फायदा: RBI गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के शीर्ष अधिकारियों ने मंगलवार को संसदीय समिति को डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्क के भारत पर पड़ने वाले आर्थिक असर के बारे में अपने विचार साझा किए और कहा कि भारत पर इसका असर बहुत अधिक नहीं होगा। अधिकारियों ने समिति से कहा कि चीन और अमेरिका के […]

भारत में निवेश अमेरिकी कंपनियों के भविष्य के लिए लाभदायक होगा- आरबीआई गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​ने अमेरिकी उद्योग से भारत में निवेश करने को कहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत नीतिगत स्थिरता और निश्चितता के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने शुक्रवार को यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और […]

RBI MPC Meet: फिर घट सकता है Repo Rate? मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक आज से

RBI MPC Meet: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक आज से शुरू होगी जो मौजूदा वित्त वर्ष की पहली बैठक है। ऐसी उम्मीद है कि नीतिगत रीपो दर में 25 आधार अंकों की और कटौती संभव है हालांकि इससे ज्यादा कटौती की संभावना भी दिख रही है। इसके […]