Electric Scooter : सस्ते स्कूटर की होने वाली है धमाकेदार इंट्री, जान लीजिए फीचर्स, और क्या हो सकती है कीमत

Electric Scooter : सस्ते स्कूटर की होने वाली है धमाकेदार इंट्री, जान लीजिए फीचर्स, और क्या हो सकती है कीमत

aprila scooter

इटली की वाहन निर्माता कंपनी पियाजियो ग्रुप (Piaggio Group) भारतीय बाजार में अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटर रेंज का विस्तार करने की तैयारी कर रही है। कंपनी भारत के लिए एक नया स्कूटर प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है, जिस पर पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों तरह के स्कूटर तैयार किए जाएंगे। कंपनी की योजना इस नई रेंज को 2027 में अप्रिलिया (Aprilia) ब्रांड के तहत लॉन्च करने की है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 85,000 रुपये (एक्स-शोरूम) हो सकती है।

ALSO READ: Electric Scooter : सस्ते इलेक्ट्रिक स्कूटर के साथ रोजाना का सफर होगा आसान, मिलेगी 130 KM की रेंज, जान लीजिए दूसरे फीचर्स

पियाजियो व्हीकल्स के चेयरमैन, सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डिएगो ग्राफी ने नई स्कूटर रेंज की योजनाओं की पुष्टि की है। कंपनी के मुताबिक, इस रेंज में इलेक्ट्रिक स्कूटर के साथ 125cc पेट्रोल इंजन वाला मॉडल भी शामिल होगा। इनकी कीमत 85,000 रुपये से लेकर 1.30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच रखी जा सकती है। इस रेंज के ऊंचे कीमत वाले मॉडल प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर होंगे।

 

₹85,000 से ₹1.30 लाख के बीच होगी कीमत

 

कंपनी का लक्ष्य भारतीय बाजार में उन ग्राहकों को आकर्षित करना है, जो किफायती कीमत पर नया पेट्रोल या इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं। डिएगो ग्राफी के मुताबिक, कंपनी 85,000-90,000 रुपये की शुरुआती कीमत से लेकर 1.20-1.30 लाख रुपये तक के सेगमेंट को ध्यान में रखकर उत्पाद पेश करेगी। इस रेंज में अधिक कीमत वाले प्रीमियम इलेक्ट्रिक वेरिएंट भी शामिल होंगे।

 

कंपनी पिछले कुछ वर्षों से भारत के लिए इस नए प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है। यह प्लेटफॉर्म भारत में पियाजियो की विस्तार योजनाओं का अहम हिस्सा है। इसके जरिए कंपनी पेट्रोल स्कूटर के साथ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के बाजार में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

ALSO READ: Electric Scooter : इलेक्ट्रिक स्कूटर क्यों हैं भविष्य की सवारी? जानिए वो फायदे जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल

इलेक्ट्रिक और पेट्रोल दोनों स्कूटर के लिए बनेगा नया प्लेटफॉर्म

 

पियाजियो का नया प्लेटफॉर्म खासतौर पर भारतीय बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। कंपनी ने इसे शुरुआत से ही इलेक्ट्रिक और पेट्रोल, दोनों तरह के स्कूटरों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है।

 

आमतौर पर कंपनियां अपने मौजूदा पेट्रोल स्कूटर प्लेटफॉर्म में बदलाव करके इलेक्ट्रिक मॉडल तैयार करती हैं। हालांकि, पियाजियो का कहना है कि उसका नया प्लेटफॉर्म शुरुआत से ही इलेक्ट्रिक पावरट्रेन को समायोजित करने के लिए तैयार किया गया है। इससे लागत, परफॉर्मेंस और ड्राइविंग रेंज के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।

 

कंपनी भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन उद्योग से जुड़े नए घटनाक्रमों पर भी नजर रख रही है। इनमें दिल्ली की घोषित ईवी पॉलिसी 2026 भी शामिल है। हालांकि, पियाजियो की रणनीति किसी एक राज्य तक सीमित रहने के बजाय पूरे भारतीय बाजार को ध्यान में रखकर स्कूटर लॉन्च करने की है।

 

Vespa ब्रांड के तहत फिलहाल नहीं आएगा इलेक्ट्रिक स्कूटर

 

पियाजियो ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल वेस्पा (Vespa) ब्रांड के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च करने की उसकी योजना नहीं है। कंपनी के मुताबिक, मौजूदा कॉन्फिगरेशन में किफायती कीमत के साथ अपेक्षित रेंज और परफॉर्मेंस हासिल करना चुनौतीपूर्ण है।

 

इसी वजह से कंपनी नए प्लेटफॉर्म पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसे इलेक्ट्रिक स्कूटर की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जा रहा है। कंपनी का उद्देश्य लागत को नियंत्रित रखते हुए बेहतर परफॉर्मेंस, पर्याप्त रेंज और ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद तैयार करना है।

 

भारत से दूसरे देशों में भी निर्यात करेगी कंपनी

 

पियाजियो भारत को सिर्फ घरेलू बिक्री का बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में भी विकसित करना चाहती है। कंपनी के महाराष्ट्र स्थित बारामती प्लांट में बनने वाले कुल दोपहिया वाहनों में से फिलहाल लगभग 10-20 प्रतिशत का निर्यात विभिन्न देशों में किया जाता है।

 

कंपनी का लक्ष्य इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर कम से कम 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है। यानी भारत में बनने वाले उसके कुल दोपहिया वाहनों का आधा हिस्सा घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात के लिए तैयार करने की योजना है।

 

भारत में निर्मित अप्रिलिया RS 457 और Tuono 457 पहले से ही कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किए जाते हैं। कंपनी भविष्य में आने वाले मॉडलों के साथ भी इसी रणनीति को अपनाना चाहती है।

ALSO READ: Electric Scooter : इलेक्ट्रिक या पेट्रोल स्कूटर: रोजाना 30 KM चलाने पर किसमें होगी ज्यादा बचत? जानिए 5 साल का पूरा हिसाब

यूरोप में भी बिकेंगे नए स्कूटर

 

डिएगो ग्राफी के मुताबिक, विकास के चरण में मौजूद नए इलेक्ट्रिक और पेट्रोल स्कूटर सिर्फ भारत के लिए नहीं होंगे। इनके समान वेरिएंट यूरोप के बाजारों में भी निर्यात किए जाएंगे।

 

इस तरह पियाजियो की आगामी स्कूटर रेंज भारतीय ग्राहकों के लिए किफायती विकल्प उपलब्ध कराने के साथ-साथ कंपनी की वैश्विक विस्तार रणनीति का भी हिस्सा होगी। हालांकि, इन स्कूटरों के अंतिम डिजाइन, फीचर्स, बैटरी क्षमता, वास्तविक रेंज और लॉन्च की सटीक तारीख की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

 

EPFO: सैलरी ₹25,000 है तो तुरंत करें यह काम! EPFO के नए नियम से होगा बड़ा फायदा, जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

EPFO Wage Limit Hike: केंद्र सरकार ने बीतें दिनों कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी को लेकर एक बड़ा ऐलान किया था। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया गया। 17 सितंबर से लागू हुए इस फैसले के बाद लगभग 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को अब प्रोविडेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस (EDLI) के दायरे में लाया जाएगा।

वैसे सिर्फ ₹25,000 से कम वेतन होना ही पात्रता की एकमात्र गारंटी नहीं है। कर्मचारियों को संबंधित योजनाओं के नियमों और शर्तों को पूरा करना होगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस नई लिमिट का आपको कैसे फायदा मिलेगा और आप अपनी पात्रता कैसे चेक कर सकते हैं।

नए नियम के तहत कौन-कौन हो सकता है शामिल?

यह बदलाव मुख्य रूप से उन कर्मचारियों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है, जो पहले सिर्फ इसलिए EPF कवरेज से बाहर थे क्योंकि उनका मूल वेतन (Basic Salary + DA) ₹15,000 प्रति माह से अधिक था।

श्रम मंत्रालय के अनुसार, जिन कर्मचारियों का वेतन ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है और वे संबंधित शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें अब EPF के तहत नामांकित किया जा सकता है। जो कर्मचारी पहले से ही EPF के सदस्य हैं, उनका योगदान उनके लागू वेज बेस और सदस्यता की स्थिति पर निर्भर करेगा।

EPF, EPS और EDLI में कैसे कराएं अपना नामांकन?

कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से किसी अलग सार्वजनिक फॉर्म के जरिए तीनों योजनाओं में सीधे रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते। इसके लिए नियोक्ता को ही प्रक्रिया पूरी करनी होती है:

एलिजिबिलिटी चेक करें: सबसे पहले यह पक्का करें कि आपका मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक नहीं है और आप योजना की अन्य शर्तों को पूरा करते हैं।

HR या पेरोल टीम से संपर्क करें: अपने नियोक्ता की HR या अकाउंट्स टीम से संपर्क करें ताकि वे आपकी पात्रता सत्यापित कर आपका एनरोलमेंट शुरू कर सकें।

जरूरी दस्तावेज दें: अपनी पहचान, रोजगार विवरण, आधार विवरण और बैंक खाते की जानकारी नियोक्ता को सौंपें।

कंट्रिब्यूशन वेरिफाई करें: नामांकन पूरा होने के बाद अपनी सैलरी स्लिप और EPFO पासबुक चेक करें ताकि यह पक्का हो सके कि पीएफ कटौती और योगदान सही से दर्ज हो रहा है।

EPF, EPS और EDLI से आपको क्या-क्या फायदे मिलेंगे?

योजना का नाम मुख्य लाभ
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान और उस पर मिलने वाले ब्याज के जरिए रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनता है।
कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) अर्हता सेवा और पेंशन नियमों के आधार पर पात्र सदस्यों को आजीवन पेंशन मिलती है।
कर्मचारी जमा सम्बद्ध बीमा (EDLI) EPF सदस्यता से जुड़ा मुफ्त जीवन बीमा कवर, जिसके तहत अनहोनी की स्थिति में नॉमिनी को क्लेम की राशि मिलती है।

क्या अब आपकी PF कटौती बढ़ जाएगी?

नई वेज सीलिंग लागू होने से पात्र कर्मचारियों के योगदान की गणना के लिए वेतन आधार बढ़ सकता है। नए ढांचे के तहत, अंशदान के लिए अधिकतम वेतन सीमा ₹25,000 या कर्मचारी का वास्तविक वेतन जो भी कम हो वो मानी जाएगी।

इस गणित को ऐसे समझिए, अगर आपके ₹25,000 के पूरे वेतन आधार पर 12% पीएफ कटता है, तो कर्मचारी का मासिक योगदान ₹3,000 होगा। नियोक्ता का 12% योगदान नियमानुसार EPF और EPS में बंटेगा, जबकि EDLI का प्रीमियम अलग से पूरी तरह नियोक्ता द्वारा दिया जाएगा।

On Cloud M9

On Cloud M9
MG M9 front left tracking

Luxury in an MPV is about more than having room for seven. It is about how that space is used, how effortlessly the occupants can settle in, and how much the car does to make every journey comfortable. The MG M9 brings together the practicality of a three-row MPV and the refinement of an electric powertrain, with a host of features that make time spent on the move feel a little more indulgent. Here are six highlights that make it stand out.

Lounge On Wheels

MG M9 side tracking
Massive wheelbase gives the M9 an imposing presence and liberates room in the cabin.

The M9’s 5.2-metre length, 2-metre width and 3.2-metre wheelbase give it the proportions to create a spacious, airy cabin. But it is the second row that makes the biggest impression. Two individual Presidential captain’s chairs offer 16-way electric adjustment, heating, ventilation, massage functions and extendable leg rests. The Boss Mode function moves the front passenger seat forward to create additional legroom, letting rear occupants stretch out and recline. It is a space designed for unwinding, not just getting from one place to another.

Space For Everyone

MG M9 second row seats
The aptly called Presidential captain’s chairs are even fit for a king.

While the second row gets the headline features, the M9 is designed to make all three rows usable. Its long wheelbase allows generous room for occupants, while second-row climate control, rear window sunshades and a panoramic dual sunroof enhance the feeling of comfort. The third row gets dedicated AC vents and USB connectivity, too. A premium Cognac Brown interior and 64-colour ambient lighting add to the cabin’s upmarket appeal, with the latter allowing occupants to tailor the atmosphere to their mood.

Electric Serenity

MG M9 right tracking
No matter the road surface, the M9 insulates its passengers from the outside world. 

The M9’s 90kWh battery powers a front-mounted electric motor, producing 245hp and 350Nm, with an ARAI-claimed range of 548km. Beyond the performance and range figures, the electric powertrain brings a quality that matters particularly in a luxury MPV: refinement. With no engine noise and smooth, linear power delivery, the M9 makes for a more relaxed experience on the move. An acoustic windshield further helps keep the outside world at bay.

Quality Entertainment

MG M9 speaker
Superb 13-speaker JBL system enhances the cabin’s ambience.

A quiet cabin makes for a better listening environment, and the M9 builds on this with a 13-speaker JBL sound system, complete with an amplifier and subwoofer. Whether it is music on a long drive or a podcast during the daily commute, the system makes entertainment an integral part of the experience. The panoramic sunroof and ambient lighting add to the sense of being in a space designed around the occupants.

Tech-Suave

MG M9 infotainment touchscreen
12.3-inch central touchscreen has all the controls you’ll need within easy access.

A 12.3-inch central touchscreen, digital instrument cluster, wireless smartphone connectivity and wireless charging bring everyday convenience within easy reach. The 360-degree camera is particularly useful when manoeuvring a vehicle of the M9’s size, helping the driver negotiate tight spaces with greater confidence. These features complement the M9’s focus on passenger comfort with technology that makes the car easier to live with.

Safety Assured

MG M9 front splash
The M9 has received a 5-star Euro NCAP rating.

Luxury also means being able to travel with peace of mind. The M9 gets seven airbags and Level 2 advanced driver assistance systems, adding an extra layer of protection and driver support. Its five-star Euro NCAP safety rating provides further reassurance.

The MG M9’s appeal lies in how these elements come together. Generous space, thoughtful comfort features, electric refinement and modern safety technology give it a distinct identity in the luxury MPV segment. It’s no wonder that the M9 is the best-selling MPV in its class, with over 3,000 units sold since its launch last year. This is a vehicle that makes the journey itself something to look forward to, and that is what being on Cloud M9 is all about.

SBI की धांसू स्कीम! बिना किसी रिस्क के मिलेगी पक्की मंथली इनकम, मैच्योरिटी पर 110% रिफंड भी!

SBI Life Smart Platina Plus: एसबीआई लाइफ का ‘स्मार्ट प्लैटिनम प्लस’ एक नॉन-लिंक्ड सेविंग्स प्लान है, जो बिना किसी मार्केट रिस्क के गारंटीड रिटर्न और लाइफ कवर देता है। सुरक्षित और तयशुदा इनकम के जरिए अपने लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।

अगर आप बिना किसी मार्केट रिस्क के एक तयशुदा और सुरक्षित इनकम का जरिया तलाश रहे हैं, तो यह प्लान आपके फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने में बेहद मददगार साबित हो सकता है।

SBI Life स्मार्ट प्लैटिनम प्लस की मुख्य विशेषताएं

इस पॉलिसी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके रिटर्न पूरी तरह फिक्स और कॉन्ट्रैक्टुअल होते हैं, यानी शेयर बाजार की चाल का इस पर कोई असर नहीं पड़ता है। आइए जानते हैं इसके जरूरी नियम और फीचर्स:

प्लान टाइप: यह एक नॉन-लिंक्ड और नॉन-पार लाइफ इंश्योरेंस सेविंग्स प्लान है।

इनकम विकल्प: इसमें दो मुख्य विकल्प मिलते हैं- पहला ‘गारंटीड इनकम ऑप्शन’ (रेगुलर फिक्स इनकम के लिए) और दूसरा ‘लाइफ इनकम ऑप्शन’ (पेआउट पीरियड के दौरान रेगुलर गारंटीड इनकम)।

प्रीमियम भुगतान अवधि (PPT): पॉलिसीधारक अपनी सुविधा के अनुसार 6, 7, 8 या 10 साल के लिए प्रीमियम का भुगतान चुन सकते हैं।

न्यूनतम वार्षिक प्रीमियम: इस योजना का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम सालाना प्रीमियम ₹50,000 तय किया गया है।

न्यूनतम सम एश्योर्ड: प्लान के तहत न्यूनतम बीमा राशि ₹5,50,000 है।

पेआउट फ्रीक्वेंसी: निवेशक अपनी जरूरत के हिसाब से इनकम का भुगतान सालाना, छमाही, तिमाही या मासिक आधार पर ले सकते हैं।

मैच्योरिटी और डेथ बेनिफिट्स

मैच्योरिटी बेनिफिट: पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर, निवेशक को कुल चुकाए गए प्रीमियम का 110% हिस्सा रिफंड कर दिया जाता है।

डेथ बेनिफिट: पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसीधारक की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होने पर नॉमिनी को एकमुश्त डेथ बेनिफिट मिलता है। इसके अलावा, गारंटीड इनकम विकल्प के तहत कमेंसमेंट के बाद भी पेआउट मिलने का प्रावधान जारी रह सकता है।

पॉलिसी लोन सुविधा: वित्तीय आपातकाल के समय पॉलिसीधारक सरेंडर वैल्यू जो कम से कम 2 साल के पूरे प्रीमियम भुगतान के बाद मिलती है उसके 50% तक का लोन ले सकते हैं।

ऑप्शनल राइडर्स: सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इसमें एसबीआई लाइफ एक्सीडेंटल बेनिफिट राइडर (एक्सीडेंटल डेथ / आंशिक विकलांगता) और एसबीआई लाइफ वेवर ऑफ प्रीमियम राइडर जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कानपुर में नकली सीमेंट का कारोबार! तीन वर्षों में 11 लाख बोरी नकली सीमेंट की सप्लाई

कानपुर में नकली सीमेंट का कारोबार! तीन वर्षों में 11 लाख बोरी नकली सीमेंट की सप्लाई

Kanpur fake cement factory

Kanpur fake cement factory: औद्योगिक नगरी कानपुर के पनकी में नकली सीमेंट फैक्ट्री के खुलासे ने प्रदेश भर के निर्माण तंत्र और प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। नामी कंपनियों की साख की आड़ में पिछले तीन सालों से चल रहे इस अवैध खेल में न सिर्फ 10 लाख से अधिक बोरियां खपाए जाने का संगीन आरोप है, बल्कि इसके तार मेरठ से लेकर सीएम ग्रिड और लखनऊ एयरपोर्ट जैसे हाई-प्रोफाइल निर्माण कार्यों तक जुड़ने के दावे सामने आ रहे है। अब योगी सरकार के एक्शन का इंतजार है।

 

यूपी के कानपुर में SOG और स्थानीय पुलिस ने पनकी थाना क्षेत्र के इस्पात नगर में छापेमारी कर नामी ब्रांडों (ACC और अंबुजा) के नाम पर नकली सीमेंट बनाने वाली एक विशाल अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने पिछले 3 वर्षों में करीब 10.80 लाख बोरी नकली सीमेंट उत्तर प्रदेश के कई जिलों और बड़े सरकारी व निजी प्रोजेक्ट्स में सप्लाई की है। इस पूरे मामले में एक स्थानीय भाजपा नेता द्वारा आरोपियों को संरक्षण देने के भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। 

कैसे हुआ इस बड़े खेल का खुलासा?

अडानी ग्रुप की कानपुर शाखा के सीनियर सेल्स मैनेजर मुमताजुल हक को जब अचानक अपने ब्रांड्स की बिक्री में भारी गिरावट महसूस हुई, तो कंपनी की विजिलेंस टीम ने पिछले 15 दिनों से निजी स्तर पर खुफिया जांच शुरू की। कंपनी की पुख्ता शिकायत मिलने पर कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के निर्देश पर SOG और स्थानीय पुलिस की टीम ने पनकी के इस्पात नगर स्थित गोदाम पर अचानक छापेमारी कर इस अवैध सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर दिया। छापेमारी के दौरान मौके से 1000 से अधिक भरी हुई नकली बोरियां, 3000 खाली बोरियां, अत्याधुनिक पैकिंग मशीनें और नकली सीमेंट से लदे दो ट्रक जब्त किए गए। 

​महज 30 रुपए की लागत और मुनाफा… 

​पुलिस जांच में सामने आया है कि यह सिंडिकेट बेहद शातिर तरीके से लोगों की जान और सरकारी संपत्ति के साथ खिलवाड़ कर रहा था। यह गैंग बुंदेलखंड इलाके से खराब और एक्सपायर्ड हो चुकी सीमेंट को महज ₹10 से ₹20 प्रति बोरी की दर से खरीदता था। मेरठ के सप्लायरों (सुनील मित्तल और निशांत मित्तल) की मदद से इस पुराने माल को मशीनों में दोबारा पीसकर, उसमें हानिकारक केमिकल्स और थोड़ी असली सीमेंट मिलाकर नामी कंपनियों के ब्रांडेड बैगों में पैक किया जाता था।

 

​मोटा मुनाफा : महज ₹30 की लागत में तैयार होने वाली इस जानलेवा नकली सीमेंट की बोरी को बाजार में असली बताकर ₹250 से ₹280 में बेचा जा रहा था। गिरोह हर महीने करीब 30,000 से ज्यादा बोरियां बाजार में खपा रहा था। 

Kanpur fake cement factory

​बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स पर मंडराया खतरा!

​इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रदेश के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर उठ रहा है। जांच में सामने आया है कि ​CM ग्रिड सड़क योजना के तहत बन रही महत्वपूर्ण सड़कों में भी इसी घटिया सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। ​लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नए टर्मिनल के निर्माण कार्यों में भी इस नकली सीमेंट की भारी सप्लाई किए जाने का गंभीर दावा किया गया है।

​पुलिसिया कार्रवाई और गरमाई सियासत

​पुलिस ने फैक्ट्री के मुंशी/सुपरवाइजर राहुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, मुख्य संचालक भाई नीरज गुप्ता और धीरज गुप्ता अपने दो अन्य साझेदारों के साथ फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है, इंतजार योगी सरकार के बड़े एक्शन का है।

 

​इस खुलासे के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को घेरते हुए कड़ा तंज कसा है कि भाजपा का भ्रष्टाचार देश और प्रदेश की नींव को कमजोर कर रहा है। साथ ही, कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट्स में भी इस सीमेंट के इस्तेमाल की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।

फ्रांस में महंगाई पर भड़की हिंसा : राष्ट्रपति मैक्रों ने शांति की अपील की

फ्रांस में बढ़ती महंगाई, शिक्षा बजट में कटौती और चरमराती सार्वजनिक सेवाओं के खिलाफ जारी देशव्यापी प्रदर्शनों के दाैरान हिंसक दंगों, लूटपाट की घटनाओं को रोकने के लिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ‘शांति और व्यवस्था’ बनाए रखने की अपील की है।

राष्ट्रपति कार्यालय (एलिसी पैलेस) से राष्ट्र के नाम दिए टीवी संबोधन में श्री मैक्रों ने प्रदर्शनकारियों से स्थिति को और न बिगड़ने देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हम सभी गुस्सा और शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनकारियों की ‘जायज मांगों’ और तोड़फोड़ व लूटपाट के जिम्मेदार उपद्रवियों के बीच स्पष्ट फर्क किया जाना चाहिए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को पूरे फ्रांस में 5,50,000 से अधिक लोग सड़कों पर उतरे। अधिकतर प्रदर्शन हालांकि शांतिपूर्ण रहे, लेकिन रात ढलते ही कई शहरों में हिंसा भड़क उठी। सप्ताहांत के दौरान पुलिस ने 2,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं गृह मंत्रालय ने यह संख्या लगभग 2,400 बताई है।

पेरिस, मार्सिले, ल्योन और लिमोगेस में नकाबपोश समूहों ने दुकानों में तोड़फोड़ की, गाड़ियों में आग लगा दी और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया। लिमोगेस में आग लगने के कारण 143 वर्ष पुराने टाउन हॉल का गुंबद ढह गया। रविवार को भी पेरिस के कुछ हिस्सों में झड़पें जारी रहने पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

श्री मैक्रों ने इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसी तबाही को ‘किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता’। उन्होंने वादा किया कि उपद्रवियों को सख्त सजा दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने जनता की शिकायतों के समाधान के लिए इस सप्ताह ठोस उपायों पर बैठकों की प्रतिबद्धता जताई।

Also Read : अल्ट्राटेक सीमेंट का मुनाफा 21 प्रतिशत बढ़कर 1,501 करोड़ पर

यह विरोध प्रदर्शन सितंबर में पेरिस के उपनगरीय इलाकों के विद्यालयों में शिक्षकों और छात्रों की हड़ताल से शुरू हुआ था, जो कर्मी बढ़ाने और बेहतर संसाधनों की मांग कर रहे थे। बाद में कक्षाओं में भीड़, कर्मचारियों की कमी, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता को लेकर यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया।

वायरल वीडियो में एक पुलिसकर्मी द्वारा छात्रा को प्रतिबंधित तरीके से गर्दन से दबोचने की घटना सामने आते ही जन आक्रोश और भड़क गया। पुलिस पर बेतहाशा बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में कूद पड़े। इस अशांति ने मैक्रों सरकार को भारी राजनीतिक दबाव में ला खड़ा किया है। विरोधी सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन प्रदर्शन के इतने बड़े पैमाने का अंदाजा लगाने में पूरी तरह नाकाम रहा। स्थिति पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू सोमवार को कैबिनेट की आपात बैठक करने वाले थे।

घटनाक्रम पर राजनीतिक नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने वामपंथियों पर जन आक्रोश का फायदा उठाने का आरोप लगाया, वहीं वामपंथी नेता ज्यां-ल्यूक मेलेनचोन ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार का बचाव किया। आगे उपद्रव की आशंका के मद्देनजर मार्सिले प्रशासन ने सभाओं पर पाबंदी लगा दी है।

फ्रांस का यह आंदोलन बढ़ती महंगाई, मकानों की किल्लत और बदहाल सार्वजनिक सेवाओं को लेकर पूरे यूरोप में पनप रहे असंतोष का हिस्सा है। बेल्जियम, पुर्तगाल, इटली और अल्बानिया में भी ऐसे ही आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं।

इस स्थिति ने फ्रांस सरकार के लिए कानून-व्यवस्था बहाल करने के साथ-साथ प्रदर्शनों के पीछे की बुनियादी आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को सुलझाने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

Pic Credit : UNI

Renault Duster vs Maruti Victoris: Top-spec strong-hybrid SUVs compared

Renault Duster vs Maruti Victoris: Top-spec strong-hybrid SUVs compared
Renault Duster vs Maruti Victoris

With the Duster strong-hybrid E-Tech 160, Renault is the latest brand to jump on the strong-hybrid bandwagon. The Duster strong-hybrid is positioned as an economical alternative powertrain and adds to its existing turbo-petrol options. On the other hand, the Maruti Victoris has been in the market for a year, offering a strong-hybrid powertrain since launch. But which strong-hybrid mid–size SUV in top-spec guise offers more bang for buck? We compare their respective on-paper specifications to find out. For this comparison, we’ve chosen the top-spec Emotion and ZXi+ (O) versions of the strong-hybrid Renault Duster and Maruti Victoris, respectively.

Renault Duster vs Maruti Victoris: Dimensions

Renault Duster vs Maruti Victoris: Dimensions

 

Renault Duster

Maruti Victoris

Difference

Length (mm)

4,346

4,360

-14

Width (mm)

1,815

1,795

+20

Height (mm)

1,694

1,655

+39

Wheelbase (mm)

2,657

2,600

+57

Ground clearance (mm)

212

210

+2

Boot space (litres)

372

Under 300 (est.)

–

Est. – Estimated

Apart from length, the Duster outranks the Victoris in every other dimension. It is 20mm wider, 39mm taller, has a 57mm longer wheelbase, and rides 2mm higher off the ground. 

Renault Duster vs Maruti Victoris: Powertrain specifications

Renault Duster vs Maruti Victoris: Powertrain specifications

 

Renault Duster

Maruti Victoris

Engine 

Naturally aspirated petrol, Atkinson cycle

Naturally aspirated petrol, Atkinson cycle

Displacement (cc)

1,789

1,490

Power (hp)

110

92

Torque (Nm)

175

122

Transmission

multi-mode automatic gearbox with 2 electric gears & 4 petrol gears

e-CVT

Battery capacity (kWh)

1.4

0.76

E-motor power (hp)

50

80

E-motor torque (Nm)

208

141

Maximum power output (hp)

160

116

Maximum torque output (Nm)

NA

NA

Claimed efficiency (kpl)

29

28.65

In strong-hybrid guise, both SUVs utilise a naturally aspirated petrol engine running on the more efficient Atkinson cycle. However, the Duster’s larger unit delivers more power and torque figures. The Duster also uses a larger battery pack.  Both SUVs also use e-motors, wherein the one on the Maruti produces more power, but the Duster’s e-motor outputs more torque. With a combined power output of 160hp, the Duster strong-hybrid is much more powerful than the Victoris strong-hybrid. 

Both SUVs also differ in the gearboxes utilised here. The Duster uses a multi-mode automatic gearbox with 2 electric and 4 petrol gears, whereas the Victoris uses an e-CVT. Renault says that the Duster drives 80 percent on EV power in the city, which likely contributes to its higher claimed mileage. But real-world tests are awaited for the Renault.

Renault Duster vs Maruti Victoris: Exterior features

Renault Duster vs Maruti Victoris: Exterior features

 

Renault Duster

Maruti Victoris

Headlamps

LED

LED projector

LED DRLs

Yes

Connected

Puddle lamps

Yes

No

Tail lamps

Connected LED

Connected LED

Fog lamps

Optional

Yes

Welcome/goodbye animation

Yes

No

Wheel sizes

18-inch

17-inch

Rear spoiler

Yes

Yes

Electric adjust/fold ORVMs

Yes

Yes

Sharkfin antenna

Yes

Yes

Roof rails

Yes

Yes

Powered tailgate

Yes

Yes

Colour

Monotone and dual-tone

Monotone and dual-tone 

On the outside, LED light setups, DRLs, roof rails, a shark fin antenna, and a powered tailgate are found on both SUVs.  However, larger 18-inch alloy wheels, puddle lamps, and welcome/goodbye animations for the light setups are unique to the Duster.

Renault Duster vs Maruti Victoris: Interior features

Renault Duster vs Maruti Victoris: Interior features

 

Renault Duster

Maruti Victoris

Ventilated seats

Yes

Yes

Sunroof

Panoramic

Panoramic

Infotainment screen size

10.1-inch

10.1-inch

Digital driver’s display

10.25-inch

10.25-inch

Head-up display

Optional

Yes

Wireless Apple CarPlay, Android Auto

Yes

Yes

On-board navigation

No

Yes

Powered driver seat

6-way

8-way

Powered co-driver seat

6-way

No

Reclining rear seats

No

No

Air Purifier

Optional

Yes

Auto AC

Dual-zone

Single zone

Rear AC vents

Yes

Yes

Seat upholstery

Leatherette

Leatherette

Wireless phone charger

Yes

Yes

Audio system

6-speaker Arkamys

8-speaker Infinity

60:40 split rear seat folding

Yes

Yes

USB Type-C ports 

2x front, 2x rear

2x front, 2x rear

Rear armrest

No

Yes

Connected car tech

Yes

Yes

Rear window sunshade

No

No

Ambient lighting

Optional

Yes

Leatherette inserts on the dashboard

Yes

Yes

Push-button start

Yes

Yes

Keyless entry

Yes

Yes

Steering adjust

Tilt and Telescopic

Tilt and Telescopic

The Renault offers features such as a powered co-driver seat and dual-zone automatic climate control that the Maruti lacks. In contrast, the latter gets further adjustment for the driver seat, two additional speakers, and on-board navigation, while features like a head-up display and ambient lighting are factory-fitted on the former.

Renault Duster vs Maruti Victoris: Driving features 

Renault Duster vs Maruti Victoris: Driving features 

 

Renault Duster

Maruti Victoris

Drive modes

No

Eco, Normal, Sport

Cruise control

Regular

Regular

As far as driving features are concerned, both models come with regular cruise control, but drive modes are found only on the Victoris.

Renault Duster vs Maruti Victoris: Safety features 

Renault Duster vs Maruti Victoris: Safety features 

Safety features

Renault Duster

Maruti Victoris

Airbags

Six

Sx

Parking sensors

Rear

Front and rear 

Camera setup

Rear view

360-degree

Dash cam

Optional

Optional

Electronic parking brake with auto hold

Yes

Yes

ADAS

No

No

TPMS

Yes

Yes

Hill start assist

Yes

Yes

Disc brakes (Front/Rear)

Yes

Yes

ESC

Yes

Yes

Auto-dimming IRVM

Yes

Yes

On the safety front, both SUVs are well-equipped with features such as 6 airbags, rear parking sensors, auto-dimming IRVM, electronic parking brake with auto-hold, all-wheel disc brakes, and TPMS. However, the Victoris pips the Duster here by offering a 360-degree camera and front parking sensors. Notably, both miss out on a Level 2 ADAS suite.

Renault Duster vs Maruti Victoris: Prices and verdict 

Renault Duster vs Maruti Victoris: Prices (Rs lakh)

 

Renault Duster

Maruti Victoris

Price 

19.49

19.98

Comparing top-spec versions side by side, the Duster strong-hybrid is more affordable by Rs 41,000. Between the two, it’s the Duster we’d recommend. Apart from being the more affordable option, it offers slightly more kit and delivers more power without sacrificing much in terms of efficiency.

Urban Company Share Price : कमजोर नतीजों के बाद आज 8.75% टूटा शेयर, जानिए क्या है ब्रोकरेज की राय

Urban Company Share Price : दूसरी तिमाही में अर्बन कंपनी के नतीजे कमजोर रहे हैं। नतीजों के बाद शेयर में बड़ा एक्सिडेंट दिखा है। सोमवार को इंट्राडे में अर्बन कंपनी के शेयरों में लगभग 8% की भारी गिरावट आई। कंपनी द्वारा सितंबर तिमाही के कंसोलिडेटेड नेट लॉस में सालाना आधार पर बड़ी बढ़ोतरी की रिपोर्ट जारी करने के बाद यह शेयर दबाव में आ गया है। फिलहाल NSE पर अर्बन कंपनी के शेयर 13.82 रुपए यानी 8.74 फीसदी की गिरावट के साथ 144.30 रुपए पर दिख रहे हैं।

इस होम सर्विसेज प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 182.48 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह नुकसान 59.33 करोड़ रुपये था। इस अवधि में कंपनी की कामकाजी आय सालाना आधार पर 41.4% बढ़कर 537.29 करोड़ रुपये रही है, जो वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में 380.03 करोड़ रुपये थी। डिलीवर किए गए ऑर्डर्स की संख्या 15.1 मिलियन तक पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 103% की बढ़त दिखाता है। जबकि नेट ट्रांजैक्शन वैल्यू (NTV) 39% बढ़कर 1,432 करोड़ रुपये हो गई।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अर्बन कंपनी पर अपनी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग बरकरार रखी है और इसके टारगेट प्राइस को लगभग 5.3% बढ़ाकर 190 रुपये से 200 रुपये कर दिया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि अर्बन कंपनी (UC) ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (2QFY27) में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसमें इंडिया कंज्यूमर सर्विसेज (इंस्टाहेल्प को छोड़कर) (ICS) का NTV, एक ऊंचे बेस के बावजूद, सालाना आधार पर 26.3% बढ़ा है, जबकि इंटरनेशनल NTV में सालाना आधार पर 66.9% की ग्रोथ हुई है। एमके ने आगे कहा कि UC के हर सेगमेंट में विकास की काफी संभावनाएं हैं, क्योंकि इनका लोकल नेटवर्क मजबूत है, कोर बिजनेस में इसका एकाधिकार (मोनोपोली) है और अन्य इंटरनेट कंपनियों की तुलना में इसका मार्जिन भी अधिक है।

जमकर कैश होने के बावजूद कंपनी क्यों जुटा रही है फंड?

स्नैबिट अब कंपनी का बड़ा कंपिटीटर बन रहा है। स्नैबिट भी अब तकरीबन अर्बन कंपनी जैसे ही आंकड़े डिलिवर कर रहा है। इसका मतलब है कि इस इंडस्ट्री में बड़ा कंपिटीशन होगा। इससे निपटने के लिए बोर्ड से इक्विटी के जरिए 2500 करोड़ रुपए जुटाने को मंजूरी दी है। इस बीच अर्बन कंपनी के मैनेजमेंट कमेंट्री में कहा गया है कि Q3FY28 में Adj. EBITDA के ब्रेकइवन की उम्मीद है। FY31 में Adj. EBITDA 1,000 करोड़ रुपए के पार जाना संभव है। बोर्ड से नई कैटेगरी रेसिडेंशियल एयर कंडिशनर्स को मंजूरी दी है।

कंपनी की फंड जुटाने की योजना पर बात करते हुए एमके (Emkay) ने कहा कि 25 अरब रुपये तक की यह फंड जुटाने की योजना कोर और नेटिव (Native) ग्रोत, इंस्टाहेल्प (InstaHelp) के ग्रोथ, और चुनिंदा अधिग्रहणों (acquisitions) में मदद करेगी।

ब्रोकरेज ने आगे कहा कि फंड जुटाने से निवेश क्षमता मजबूत होती है, हालांकि पूंजी का इस्तेमाल और इक्विटी डाइल्यूशन (dilution) ऐसे पहलू हैं जिनका वैल्युएशन के समय ध्यान रखना होगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही के लिए अपने कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA ब्रेक-ईवन के अनुमान और वित्त वर्ष 2031 के लिए 10 अरब रुपये के लक्ष्य को बरकरार रखा है।

 

Bank Nifty Trend : बैंकिंग इंडेक्स 0.5% गिरा, एक्सिस और HDFC बैंक ने बनाया सबसे ज्यादा दबाव, जाने आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Bank Nifty Trend : बैंकिंग इंडेक्स 0.5% गिरा, एक्सिस और HDFC बैंक ने बनाया सबसे ज्यादा दबाव, जाने आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

Bank Nifty Trend : 19 अक्टूबर को बैंक निफ्टी इंडेक्स में 0.5% की गिरावट आई। एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक जैसे प्राइवेट बैंकों के कारण बैंक निफ्टी पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा है। जुलाई-सितंबर तिमाही के मुनाफे के अनुमानों पर खरे न उतरने के बाद प्राइवेट बैंकों में 1.7% की गिरावट आई है। इसमें HDFC बैंक और एक्सिस बैंक के शेयरों में 2% और 4.1% की गिरावट आई है।

HDFC बैंक पर ट्रेजरी आय में गिरावट और बैड लोन के लिए किए गए ज्यादा प्रावधान का दबाव दिखा है। जबकि एक्सिस बैंक के ऑपरेटिंग एक्सपेंस अधिक रहे हैं वहीं, अन्य आय कम रही है। दोनों ही बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में गिरावट आई है।

दूसरी ओर पब्लिक सेक्टर बैंकों में आज 2.2% की तेजी आई है। इसमें पंजाब नेशनल बैंक सबसे आगे रहा है। आज इसके शेयरों में 5.4% का उछाल आया है। सरकारी बैंको के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

अरिहंत कैपिटल मार्केट्स में इंस्टीट्यूशनल बिजनेस हेड अनीता गांधी ने कहा कि तिमाही नतीजों के बाद निवेशक साफ तौर पर PSU बैंकों के शेयरों को प्राथमिकता देते दिख रहे हैं। मजबूत FCNR डिपॉजिट का असर निजी बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर पड़ रहा है।

19 अक्टूबर को सुबह 11 बजे, बैंक निफ्टी 0.5% गिरकर 55,571.3 पर ट्रेड कर रहा था। दूसरी ओर, निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स 2.5% बढ़कर सबसे ज्यादा बढ़त वाला (टॉप गेनर) इंडेक्स बना हुआ था।

पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में 3-6% की तेजी आई है। PNB के शेयरों में 6% की बढ़त दिख रही है। यह निफ्टी 200 इंडेक्स का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा। बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक चंद्र ने शुक्रवार को नतीजों के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिसंबर तिमाही में बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन में 6-7 बेसिस पॉइंट्स का सुधार होने की उम्मीद है। सितंबर तिमाही में PNB का घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन 2.74% रहा था, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 10 बेसिस पॉइंट्स अधिक था।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बैंक निफ्टी में गुरुवार के 56,065 के हाई के ऊपर एक निर्णायक ब्रेकआउ देखने को मिलता है तो इसकी तेजी 56,500 और 56,900 के स्तर तक जा सकती है। ये लेवल 58,706 से 53,785 तक की पूरी गिरावट का 50% और 61.8% रिट्रेसमेंट हैं। हालांकि, अगर यह इस लेवल के ऊपर टिक नहीं पाता है, तो इंडेक्स 54,500–56,000 की रेंज में कंसोलिडेट हो सकता है।

बजाज ब्रोकिंग के पाबित्रो मुखर्जी का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए 54,000-54,500 के स्तर पर एक अहम शॉर्ट-टर्म सपोर्ट है। यह लेवल हाल के निचले स्तर और पिछली बढ़ के अहम रिट्रेसमेंट का संगम है। वीकली चार्ट पर बैंक निफ्टी अपने ‘लोअर हाई’ और ‘लोअर लो’ स्ट्रक्चर को नकार रहा है और पिछले वीक के आई के ऊपर ट्रेड कर रहा है, जिससे इसमें रिकवरी का रुझान बरकरार है। लगातार 56,000–56,065 के अहम रेजिस्टेंस जोन के ऊपर बने रहने से तेजी का रुख और मजबूत होगा जिससे आगे इसके और ऊपर जाने के रास्ते खुलेंगे।

प्रभुदास लीलाधर की वैशाली पारेख ने कहा कि निवेशकों का भरोसा कायम रखने और आने वाले दिनों में और तेजी के लिए, 56900 के स्तर पर स्थित 200-पीरियड MA (मूविंग एवरेज) के ऊपर एक निर्णायक बढ़त जरूरी है। वहीं दूसरी ओर, 54000 का जोन एक अहम सपोर्ट का काम करेगा। कुल मिलाकर बाजार का रुख अच्छा बनाए रखने के लिए इस स्तर का कायम रहना जरूरी है।

 

HDFC Bank Share price : Q2 नतीजों के बाद निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल हुआ शेयर, जानिए ब्रोकरेज की राय

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

तेज विकास के बावजूद रुपये की कमजोरी दे रही दर्द, 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का लक्ष्य छिटका दूर

IMF के आंकड़ों के मुताबिक तेज विकास दर के बावजूद रुपये की कमजोरी के कारण भारत के 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य 2029 तक टल सकता है। इसके पहले अनुमान थी कि 2027 में भारत जापान और UK को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। लेकिन IMF के पूर्वानुमानों के ‘मनीकंट्रोल’ द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि रुपये की गिरावट ने 5 लाख करोड़ डॉलर के टारगेट को एक साल और आगे के लिए टाल दिया है।

भारत 2027 में जापान और यूके को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, लेकिन 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का देश का यह लक्ष्य एक साल के लिए पिछड़ सकता है। इस टारगेट को रुपये की गिरती कीमत की वजह से झटका लग सकता है। जानकारों का कहना है कि रुपए के वैल्यू में कमी आने से डॉलर के हिसाब से देश के आर्थिक उत्पादन की वैल्यू में कमी आ रही है।

मनीकंट्रोल द्वारा इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के नवीनतम ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ (WEO) डेटाबेस के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था के 2029 में 5 लाख करोड़ डॉलर के स्तर को पार करने का अनुमान है, जबकि अप्रैल में इसके 2028 तक इस स्तर को पार करने का अनुमान लगाया गया था।

IMF ने रुपये के संदर्भ में भारत के आर्थिक आउटपुट के अनुमान को तो बढ़ाया है, लेकिन 2028 के लिए भारत की नॉमिनल GDP के अपने अनुमान को 5.1 लाख करोड़ डॉलर से घटाकर 4.996 लाख करोड़ डॉलर कर दिया है।

5 लाख करोड़ डॉलर का टारगेट खिसका दूर

यह अंतर भारत की डॉलर-मूल्य वाली जीडीपी पर मुद्रा के अवमूल्यन (मूल्य में गिरावट) के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है, जो ग्लोबल इकोनॉमिक रैंकिंग में देश की स्थिति तय करता है।

आईएमएफ (IMF) के अक्टूबर के अनुमानों के अनुसार, 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 4.06 लाख करोड़ डॉलर की होगी, जो 2027 में बढ़कर 4.52 लाख करोड़ डॉलर और 2029 में 5.54 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगी।

रुपये की गिरावट ने मजबूत घरेलू विकास के असर को किया बेअसर

ताजा अनुमान बताते हैं कि 5 लाख डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने में हो रही देरी की मुख्य वजह भारत की नॉमिनल आर्थिक ग्रोथ में आई गिरावट नहीं, बल्कि विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) से जुड़े अनुमान में हुआ बदलाव है।

IMF का अब अनुमान है कि 2028 में रुपया प्रति डॉलर औसतन 95.5 के स्तर पर रहेगा, जबकि अप्रैल के अनुमानों में यह आंकड़ा 93.3 था। 2027 के लिए, एक्सचेंज रेट का अनुमान 93 से बदलकर 95 हो गया है।

साल की शुरुआत से अब तक भारतीय रुपया 5 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हो चुका है। शुक्रवार को रुपया 96.73 के स्तर पर बंद हुआ, जिसके बाद RBI ने इसमें और गिरावट को रोकने के लिए कदम उठाए।

इस बीच, घरेलू मुद्रा में भारत की नॉमिनल GDP के 2028 में 477.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। अप्रैल में यह अनुमान 471.9 लाख करोड़ रुपये था, यानी इस अनुमान में 1.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। लेकिन, जब इसे डॉलर में बदला जाता है तो आर्थिक आउटपुट का यह अनुमान लगभग 63 अरब डॉलर कम हो जाता है।

मनीकंट्रोल की गणना से पता चलता है कि अप्रैल के 93.3 रुपए प्रति डॉलर के एक्सचेंज रेट अनुमान के आधार पर, 2028 के लिए भारत की रुपये में मापी गई GDP का IMF का ताजा अनुमान लगभग 5.11 लाख करोड़ डॉलर बैठता है, जो 5 लाख करोड़ डॉलर के आंकड़े से काफी ऊपर है। हालांकि, एक्सचेंज रेट के संशोधित अनुमान के आधार पर यह आंकड़ा घटकर लगभग 4.996 लाख करोड़ डॉलर रह जाता है।

इससे पता चलता है कि रुपये की कमजोरी, घरेलू नॉमिनल आउटपुट में हुई बढ़ोतरी के असर को पूरी तरह खत्म कर देती है। इससे यह भी साफ होता है कि भारत कब इस डॉलर-बेस्ड अहम इकोनॉमिक माइल स्टोन को हासिल करेगा, यह तय करने में विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) में होने वाले बदलाव कितने अहम होते हैं।

2027 में भारत, जापान और UK को छोड़ सकता है पीछे

इस देरी के बावजूद, 2027 में भारत के ग्लोबल आर्थिक रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंचने का अनुमान है। इस सूची में भारत अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद आएगा।

IMF के अक्टूबर के अनुमानों के अनुसार, 2027 में भारत की GDP 4.52 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगी। यह यूनाइटेड किंगडम की 4.49 लाख करोड़ डॉलर और जापान की अनुमानित 4.47 लाख करोड़ डॉलर की GDP से थोड़ी अधिक होगी। हालांकि, इन तीनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच का अंतर काफी कम है, जिसका मतलब है कि विनिमय दरों (exchange rates) में उतार-चढ़ाव अंतिम नतीजों को बदल सकते हैं।

IMF के ताजा अनुमानों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था के और विस्तार करने की उम्मीद है। 2030 में यह 6.13 लाख करोड़ डॉलर और 2031 में 6.74 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इस स्तर पर भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

 

PM VBRY: पहली नौकरी पर ₹15,000 का तोहफा! जानिए EPFO की इस खास स्कीम के बारे में