सावधानी हटी, दुर्घटना घटी! पहाड़ों पर गाड़ी चलाने की छोटी सी गलती कर देगी ट्रिप खराब

दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) से पहाड़ों की ट्रेवलिंग करना रोमांचक जरूर होता है, लेकिन पहाड़ी रास्तों पर ड्राइविंग शहर (city driving) की सड़कों से काफी अलग होती है। घुमावदार मोड़, खड़ी चढ़ाई और बदलता मौसम सफर को चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। ऐसे में थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। आइए जानते हैं पहाड़ों पर सेफ ड्राइविंग (mountain driving) के जरूरी टिप्स, जो आपकी ट्रिप को सिक्योर और यादगार बनाएंगे:

पहाड़ों पर धीरे और समझदारी से ड्राइव करें

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पहाड़ी सड़कों पर तेज रफ्तार से बचें और गाड़ी को हमेशा सही गियर में चलाएं। ढलान पर बार-बार ब्रेक लगाने की बजाय इंजन ब्रेकिंग (engine braking) का इस्तेमाल करें। ब्लाइंड मोड़ों पर हॉर्न जरूर बजाएं और बिना जरूरत किसी वाहन को ओवरटेक न करें। अगर पॉसिबल हो, तो रात में ड्राइविंग से बचें।

 

 

थकान महसूस हो तो तुरंत ब्रेक लें

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लंबी दूरी तक लगातार ड्राइव करने से थकान बढ़ जाती है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है। हर 2 से 3 घंटे में थोड़ा आराम करें, पानी पिएं और हल्का नाश्ता करें। अगर साथ में दूसरा ड्राइवर है, तो जरूरत पड़ने पर ड्राइविंग (driving) बदल लें। थकान में गाड़ी चलाने से हमेशा बचें।

 

 

सफर से पहले गाड़ी की पूरी जांच करें

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हिल स्टेशन जाने से पहले अपनी कार की अच्छी तरह जांच करवा लें। ब्रेक, टायर, इंजन ऑयल, कूलेंट, बैटरी और स्पेयर व्हील (spare wheel) की कंडीशन जरूर देखें। साथ ही फर्स्ट एड किट (first-aid kit), टॉर्च, टूल किट, पानी और जरूरी डॉक्यूमेंट अपने साथ रखें। मौसम (weather) और सड़क की जानकारी पहले से लेने से भी जर्नी आसान हो जाती है।

मौसम और सड़क की कंडीशन पर नजर रखें

पहाड़ों में मौसम कभी भी बदल सकता है। जर्नी शुरू करने से पहले बारिश, कोहरा या भूस्खलन (landslides) की जानकारी जरूर लें। अगर सड़क फिसलन भरी हो, तो गाड़ी धीरे चलाएं और अचानक ब्रेक लगाने से बचें। रास्ते की ताजा जानकारी के लिए GPS और वहां के लोगों की सलाह भी काम आ सकती है।

इमरजेंसी (emergency) के लिए हमेशा तैयार रहें

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ट्रेवलिंग के दौरान किसी भी इमरजेंसी सिचुएशन के लिए पहले से तैयारी रखें। मोबाइल पूरी तरह चार्ज रखें और जरूरी हेल्पलाइन नंबर सेव करके रखें। गाड़ी में रिफ्लेक्टर (reflector), टो-रोप (tow rope) और बेसिक टूल्स जरूर रखें। खराब मौसम या अंधेरा होने पर रसिक लेने की बजाय सेफ जगह रुकना बेहतर होता है।

Market Trend : 23800 से नीचे जाने पर निफ्टी में आ सकती है बड़ी गिरावट, कमजोर बाजार में भी इन दो शेयरों में हो सकती है कमाई

Market Trend : ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच 23 जुलाई को भारतीय इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। मेटल शेयरों को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर में बिकवाली के कारण निफ्टी 23900 के करीब ट्रेड कर रहा है। निफ्टी पर एटरनल,टाटा कंज्यूमर,ONGC,बजाज ऑटो और कोल इंडिया में बढ़त दिख रही है। जबकि डॉ.रेड्डीज़ लैब्स,इंटरग्लोब एविएशन,इंफोसिस,टाटा स्टील और सिप्ला में गिरावट नजर आ रही है। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे हैं।

निफ्टी ट्रेंड

ऐसे में मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए मंत्री फिनमार्ट (Mantri FinMart) के अरुण कुमार मंत्री ने कहा कि कल का सेशन काफी खराब रहा। लेकिन यह बात ध्यान रखने की है कि पिछले दो दिनों की गिरावट में मिड कैप और स्माल कैप का पार्टिसिपेशन नहीं था। छोटे-मझोले शेयरों में काफी अच्छा मोमेटम देखने को मिला था। लेकिन कल की गिरावट में मिड कैप और स्माल कैप में भी प्रेशर देखने को मिला। क्रूड का दाम बढ़ने से बाजार का मूड खराब हुआ है। साथ ही ट्रंप टैरिफ का वापस आना भी मार्केट का सेंटीमेंट खराब कर रहा है। ऐसे में अगर निफ्टी 23,800 के नीचे जाता है तो पोजीशन से निकल जाना चाहिए। जब तक निफ्टी 23,800 के ऊपर है एग्जिट की सलाह नहीं होगी। निफ्टी में 23,800 का स्टॉप लॉस होना चाहिए। उसके नीचे जाने पर ही ट्रेंड क्लियरली नेगेटिव होगा। इसके बाद निफ्टी 23,400 तक फिसल सकता है। अपसाइड में निफ्टी के लिए 24,300-24,250 पर रेजिस्टेंस है। ऐसे में लगता है कि अगले कुछ दिन निफ्टी 23,800-24,300 के दायरे में ट्रेड करता दिख सकता है।

बैंक निफ्टी ट्रेंड

जहां तक बैंक निफ्टी की बात है तो यह थोड़ा ज्यादा वीक है। HDFC बैंक इस कमजोरी को लीड कर रहा है। क्रूड का बढ़ना भी बैंक निफ्टी को काफी परेशान करता दिख रहा है। बैंक निफ्टी के लिए 56,700 के आसपास एक माइनर सपोर्ट है। अगर 56,700 का लेवल टूटता है तो बैंक निफ्टी मार्केट को और नीचे लो जा सकता है। ऐसे में आपको बैंक निफ्टी 56,700 पर स्टॉप लॉस लगाना है। अगर दोनों में से किसी में लॉन्ग पोजीशंस बनानी है तो निफ्टी ज्यादा बेहतर रहेगा।

Top Stock Picks : निफ्टी और बैंक निफ्टी में उछाल पर बिकवाली की रणनीति करेगी काम, आज इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

अरुण कुमार मंत्री के पसंदीदा शेयर

अरुण कुमार मंत्री का कहना है कि इस समय उनको दो स्टॉक काफी अच्छे लग रहे हैं। दोनों ही काफी अच्छे मोमेंटम है। इनमें से पहला है नेस्ले इंडिया। कल इसका रिजल्ट आया था। रिजल्ट के बाद एक क्लियर ब्रेकआउट है। इसमें डेली चार्ट पर कप एंड हैंडल का ब्रेकआउट देखने को मिला है। इस स्टॉक को 1497 के आसपास खरीदना है। 1472 रुपए का स्टॉप लॉस लगाएं। शॉर्ट टर्म में 1555 रुपए तक के टारगेट मिल सकते हैं। दूसरा स्टॉक थोड़े बड़े टिकट साइज का है। लेकिन इसमें मोमेंटम नजर आ रहा है। यह शेयर है BOSCH जिसमें 41550 रुपए के आसपास, 41020 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 42300 रुपए तक के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। दोनों ही स्टॉक्स आप दो से तीन दिन के लिए बाय करके चल सकते हैं।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

मानसून में ये 5 सब्जियां बन सकती हैं परेशानी की वजह, जानें बचने के तरीके

बारिश का मौसम आते ही बाजार में ताजी सब्जियों की भरमार दिखाई देने लगती है, लेकिन इस मौसम में बढ़ी हुई नमी कई सब्जियों की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है। गीले वातावरण के कारण कुछ सब्जियों में बैक्टीरिया, फंगस और छोटे कीड़ों के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार सब्जियां बाहर से बिल्कुल ताजी और अच्छी दिखती हैं, लेकिन उनके अंदर गंदगी या कीड़े छिपे हो सकते हैं। खासकर पत्तेदार और ज्यादा नमी वाली सब्जियों को खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।

सही तरीके से सफाई और जांच के बिना इन्हें खाने से पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए मानसून के दौरान सब्जियां खरीदते समय उनकी ताजगी, सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए, ताकि स्वाद के साथ सेहत भी सुरक्षित रहे।

1. हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, धनिया, मेथी, लेट्यूस जैसी पत्तेदार सब्जियां बारिश में जल्दी खराब हो सकती हैं। इनके पत्तों में मिट्टी, कीड़े और नमी छिप सकती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इन्हें इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है।

2. पत्तागोभी

पत्तागोभी की कई परतों के बीच बारिश के मौसम में छोटे कीड़े, गंदगी और नमी जमा हो सकती है। ज्यादा नमी के कारण इसमें फंगस लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। खरीदने से पहले इसकी ताजगी जरूर जांच लें।

3. फूलगोभी

फूलगोभी के छोटे-छोटे फूलों के अंदर कीड़े आसानी से छिप सकते हैं। मानसून में बढ़ी हुई नमी की वजह से इसमें कीड़ों का खतरा ज्यादा रहता है। इसे पकाने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है।

4. मशरूम

मशरूम में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए यह जल्दी खराब हो सकता है। बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से इसमें बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं। इसे हमेशा भरोसेमंद जगह से खरीदें और तुरंत इस्तेमाल करें।

5. बैंगन

बैंगन में मानसून के दौरान कीड़ों का खतरा बढ़ जाता है। कई बार बाहर से ताजा दिखने वाला बैंगन अंदर से खराब या कीड़ों से प्रभावित हो सकता है। इसलिए इसे काटकर अच्छी तरह जांचने के बाद ही पकाएं।

मानसून में सब्जियां सुरक्षित रखने के आसान तरीके

  • हमेशा ताजी और साफ सब्जियां ही खरीदें।
  • सब्जियों को बहते पानी में अच्छी तरह धोएं।
  • इस्तेमाल से पहले नमक वाले पानी या सिरके के घोल में 15-20 मिनट भिगो सकते हैं।
  • बारिश के मौसम में कच्ची सब्जियां खाने से बचें और अच्छी तरह पकाकर खाएं।
  • लौकी, तोरई, कद्दू और पेठा जैसी मौसमी सब्जियां बेहतर विकल्प हो सकती हैं।

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Invest Rs 10 Lakh: हाथ में हैं ₹10 लाख? जानें पैसा बढ़ाने की 5 सबसे सेफ और स्मार्ट स्ट्रेटेजी

10 Lakh Investment Options & Strategies: अपने जीवन का पहला ₹10 लाख का फंड जमा करना किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत बड़ा फाइनेंशियल माइलस्टोन होता है। चाहे यह पैसा सैलरी की बचत, बोनस, बिजनेस प्रॉफिट, या किसी प्रॉपर्टी की बिक्री से आया हो, इसे हासिल करने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इस ₹10 लाख को कहां और कैसे इन्वेस्ट करें ताकि भविष्य में इससे बड़ा वेल्थ बनाया जा सके।

फाइनेंशियल विशेषज्ञों का मानना है कि ₹10 लाख का निवेश करने के लिए ‘वन साइज फिट्स ऑल’ यानी एक जैसा नियम सब पर लागू होने का फॉर्मूला काम नहीं करता। आइए आपको बताते हैं कि सही रणनीति के साथ अपने ₹10 लाख को कैसे निवेश करें।

निवेश से पहले निपटाएं ये 3 सबसे जरूरी काम

₹10 लाख को सीधे बाजार में लगाने की जल्दबाजी न करें। सबसे पहले इन तीन बुनियादी बातों को मजबूत करें:

1- इमरजेंसी फंड: क्या आपके पास कम से कम 6 महीने के खर्चों के बराबर इमरजेंसी फंड है? अगर नहीं, तो इस ₹10 लाख में से कुछ हिस्सा लिक्विड फंड या बैंक एफडी में अलग रखें।

2- हेल्थ इंश्योरेंस: अपने और परिवार के लिए पर्याप्त हेल्थ कवर जरूर लें ताकि मेडिकल इमरजेंसी में आपकी बचत न डूबे।

3- महंगे कर्ज: अगर आप पर क्रेडिट कार्ड का बिल या पर्सनल लोन जैसा कोई भारी ब्याज वाला कर्ज है, तो निवेश करने से पहले उसे चुकता करें।

एक साथ पैसा लगाने से बचें, स्टैगर्ड तरीका अपनाएं

बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करने के लिए पूरा ₹10 लाख एक बार में निवेश न करें। अपने पैसे को किसी लिक्विड फंड में रखें और वहां से अगले 6 से 12 महीनों के दौरान सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के जरिए इक्विटी फंड्स में ट्रांसफर करें। इससे बाजार के ऊंचे और निचले दोनों स्तरों का फायदा मिलेगा और रिस्क कम होगा।

अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से बांटें पैसा

हर निवेशक का लक्ष्य अलग होता है, इसलिए समय सीमा के हिसाब से अपने पैसों का बंटवारा करें:

शॉर्ट टर्म गोल (1 से 3 साल): अगर आपको बच्चे की पढ़ाई, कार या घर की डाउन पेमेंट के लिए जल्द पैसा चाहिए, तो लो-रिस्क ऑप्शन जैसे डेट म्यूचुअल फंड, एफडी या आर्बिट्राज फंड चुनें।

लॉन्ग टर्म गोल (5 साल से ज्यादा): रिटायरमेंट या लंबी अवधि के वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (Flexi Cap, Large Cap), एनपीएस, या डायरेक्ट स्टॉक्स में निवेश करें।

एसेट एलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन का नियम

एसेट एलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन का नियम

पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा करें

₹10 लाख का निवेश करने के बाद रोज-रोज के बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर पैनिक न हों। अगर आप पहले से एसआईपी (SIP) चला रहे हैं, तो उसे जारी रखें। साल में एक या दो बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और जरूरत पड़ने पर रीबैलेंसिंग करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत में प्रॉपर्टी खरीदने की होड़ शुरू! इन शहरों में निवेश से मिलेगा बम्पर रिटर्न

अब्रॉड में रहने वाले इंडियन (NRI) अब भारत में घर और प्रॉपर्टी (property) खरीदने में पहले से ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अच्छी कमाई, बेहतर रिटर्न (returns) और भारत के रियल एस्टेट बाजार (real estate market) में बढ़ते भरोसे की वजह से वे बड़े शहरों में तेजी से इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं, इन शहरों में सबसे ज्यादा इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं NRI:

Delhi-NCR (दिल्ली-एनसीआर)

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दिल्ली-एनसीआर, खासकर गुरुग्राम (Bengaluru), NRI इंवेटर्स की पसंदीदा जगहों में शामिल है। यहां लग्जरी प्रोजेक्ट्स, अच्छी सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी (metro connectivity), बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस (corporate office) और तेजी से डेवलप हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण प्रॉपर्टी की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि यहां इन्वेस्टमेंट करने पर अच्छे रिटर्न (return) की उम्मीद रहती है।

 

Bengaluru (बेंगलुरु)

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बेंगलुरु को भारत की IT केपिटल कहा जाता है। यहां देश-विदेश की बड़ी टेक कंपनियां (tech companies) मौजूद हैं, जिससे नौकरी के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ती आबादी और किराये के घरों की मांग के कारण NRI इस शहर को लंबे समय के इन्वेस्टमेंट के लिए अच्छा ऑप्शन मानते हैं।

 

Hyderabad (हैदराबाद)

 

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हैदराबाद तेजी से आगे बढ़ता हुआ रियल एस्टेट (real estate) बाजार है। यहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी सेक्टर (IT sector) का विस्तार और दूसरे बड़े शहरों की तुलना में किफायती प्रॉपर्टी कीमतें इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करती हैं। यही कारण है कि हाल के वर्षों में NRI का रुझान इस शहर की ओर तेजी से बढ़ा है।

 

Mumbai (मुंबई)

 

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मुंबई देश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ NRI इन्वेस्टर्स की सबसे पसंदीदा रियल एस्टेट मार्केट भी है। यहां लग्जरी अपार्टमेंट, प्रीमियम प्रोजेक्ट्स और ऊंची प्रॉपर्टी वैल्यू (property value) इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करती है। 2024 में भारतीय रियल एस्टेट के प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट का लगभग 50% हिस्सा मुंबई को मिला, जिससे इसकी पॉपुलैरिटी और मजबूत हुई।

 

अच्छे रिटर्न (Good Returns) की उम्मीद

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भारत के कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में NRI मानते हैं कि आज किया गया इन्वेस्टमेंट आने वाले वर्षों में अच्छा प्रॉफिट दे सकता है। इसी वजह से वे रियल एस्टेट को सिक्योर और फायदेमंद इन्वेस्टमेंट मानते हैं।

 

किराये से कमाई (Rental Income) का मौका

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कई NRI भारत में घर खरीदकर उसे किराये पर दे देते हैं। इससे उन्हें हर महीने रेगुलर इनकम होती है और साथ ही समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत (property’s value) बढ़ने का भी फायदा मिलता है।

 

निवेश (Investment) करना हुआ आसान

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सरकार ने NRI के लिए प्रॉपर्टी खरीदने की प्रोसेस पहले से ज्यादा आसान बना दी है। डिजिटल बैंकिंग (digital banking), ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन (documentation) और सिंपल रेगुलेशन की वजह से अब विदेश में रहकर भी भारत में इन्वेस्टमेंट करना आसान हो गया है।

 

परिवार (Family) और भविष्य (Future) की जरूरत

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कई NRI अपने माता-पिता या परिवार के रहने के लिए भारत में घर खरीदते हैं। वहीं कुछ लोग रिटायरमेंट (retirement) के बाद भारत लौटने की प्लानिंग बनाकर पहले से ही प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं।

Jana Nayagan: तमिलनाडु में विजय की ‘जना नायकन’ को लेकर लोग हुए क्रेजी, हाउसफुल चल रहे शोज

Jana Nayagan: चेन्नई में गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री सी. विजय जोसेफ की फिल्म ‘जना नायकन’ का ‘पहला शो’ देखने के लिए एक्साइटेज फैंस और TVK के जोशीले कार्यकर्ता सिनेमाघरों में उमड़ पड़े और उन्होंने इस विदाई फिल्म का जश्न अलग-अलग तरीकों से मनाया।

कई सिनेमाघरों में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान आतिशबाजी, म्यूजिक, ड्रोन लाइट शो और बड़े केक काटे गए। जोश से भरे फैंस नाच-गा रहे थे और कई लोगों ने कहा कि वे खुश भी हैं और दुखी भी। खुश इसलिए क्योंकि फिल्म काफी देरी के बाद रिलीज हो रही है और दुखी इसलिए क्योंकि ‘जन नायकन’ विजय की आखिरी फिल्म होगी।

रोहिणी सिल्वरस्क्रीन, वुडलैंड्स और कैसीनो जैसे सिनेमाघरों में ‘जना नायकन’ के बड़े-बड़े होर्डिंग देखे जा सकते थे। चेन्नई में लगे एक होर्डिंग में विजय को तमिलनाडु का “एकमात्र पावर सेंटर” बताया गया। इसके अलावा, पूरे राज्य में विजय की “शान” की तारीफ करते हुए दीवार पर पोस्टर लगाए गए और उनके कई फैंस और समर्थकों ने फिल्म की जबरदस्त सफलता के लिए प्रार्थना करने के लिए मशहूर मंदिरों का दौरा किया।

चेन्नई के पास एक शहर में फिल्म के स्वागत के लिए रथ जैसा वाहन तैयार किया गया था और एक फैन ने अपनी लग्ज़री कार पर विजय की बड़ी-बड़ी तस्वीरें बनवाकर सबका ध्यान खींचा। कई फैंस ‘थंगमे थलापति’ लिखी टी-शर्ट पहने हुए थे। जश्न के साथ-साथ टिकट की ज़्यादा कीमत के आरोप भी सामने आए और टिकट के दाम बढ़ने को लेकर बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

उम्मीद है कि सीनियर मिनिस्टर एन. आनंद और प्रोड्यूसर वेंकट नारायण शहर में यह फिल्म देखेंगे। फैंस अपने पसंदीदा स्टार विजय का ज़बरदस्त अंदाज़ और तीखे डायलॉग देखने के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, जिसमें वे अच्छी राजनीति के ज़रिए अच्छा शासन देने और देश की सेवा करने की बात करते हैं।

यह फिल्म तमिलनाडु के 1,000 से ज़्यादा सिनेमाघरों में से लगभग 950 में दिखाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री विजय ने बुधवार शाम को कुछ अधिकारियों के साथ यहां फिल्म की एक स्पेशल स्क्रीनिंग देखी।

Sotefin IPO Listing: ढहते मार्केट में अपर सर्किट, ₹187 के शेयरों ने लिस्टिंग पर मचाया धमाल

Sotefin IPO Listing: ऑटोमेटेड कार पार्किंग सिस्टम कंपनी सोटेफिन भारत के शेयरों की आज BSE SME प्लेटफॉर्म पर प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 3 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹187 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹205.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 9.63% का लिस्टिंग गेन (Krystal Integrated Services Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹215.25 (Sotefin Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 15.11% मुनाफे में हैं।

Sotefin Bharat IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

सोटेफिन भारत का ₹90 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 16-20 जुलाई तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 3.99 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 2.82 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 6.05 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.78 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 48 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹20.13 करोड़ कोलकाता में एक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने, ₹8.17 करोड़ प्रस्तावित नए ऑफिस प्रेमिसेज की जरूरतों, ₹40.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Sotefin के बारे में

सोफेटिन भारत मैकेनाइज्ड और ऑटोमेटेड पार्किस सॉल्यूशंस ऑफर करती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में फुल्ली ऑटोमेटेड रोबोटिक पार्किंग सिस्टम, पजल पार्किंग सिस्टम, टावर पार्किंग सिस्टम और स्टैक पार्किंग सिस्टम हैं। कंपनी O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) और आफ्टर सेल्स सर्विसेज भी ऑफर करती है। मार्च 2026 तक कंपनी 55 प्रोजेक्ट्स पूरे कर चुकी थी और फिलहाल देश कई कई शहरों के साथ-साथ अमेरिका और दुबई में 30 से अधिक प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 के दौरान इसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 66% की अधिक रफ्तार से बढ़कर ₹17.37 करोड़ और टोटल इनकम 44% से अधिक तेजी से बढ़कर ₹118.23 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹24.01 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹70.57 करोड़ पड़े थे।

Lohia Corp IPO: 27 एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए ₹492 करोड़

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Xtranet Technologies IPO: आईटी सेक्टर के इस आईपीओ में निवेश का मौका! क्या आपको करना चाहिए अप्लाई? यहां जानें

Xtranet Technologies IPO Details: आईपीओ में पैसे लगाने वाले निवेशकों के लिए आज से एक और नया मौका खुल गया है। मध्य प्रदेश की आईटी सॉल्यूशंस प्रोवाइडर कंपनी एक्सट्रानेट टेक्नोलॉजीज का ₹167 करोड़ का आईपीओ आज यानी 23 जुलाई से दांव लगाने के लिए खुल गया है। कंपनी के अनलिस्टेड शेयर ग्रे मार्केट में अच्छे प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। आइए आपको बताते हैं ब्रोकरेज की राय सहित इस आईपीओ से जुड़ी हर जरूरी बात।

Xtranet Technologies IPO का प्राइस बैंड और लॉट साइज

  • प्राइस बैंड: ₹120 से ₹127 प्रति शेयर।
  • रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश: ₹13,970
  • इश्यू ओपनिंग-क्लोजिंग डेट: 23-27 जुलाई
  • शेयर अलॉटमेंट डेट: 28 जुलाई
  • लिस्टिंग डेट (BSE & NSE): 30 जुलाई

एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए ₹50 करोड़

यह ₹167 करोड़ का आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू है, जिसमें 1.31 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। आम लोगों के लिए आईपीओ खुलने से ठीक पहले कंपनी ने एंकर इनवेस्टर्स से ₹50.04 करोड़ जुटाए हैं। प्रमुख एंकर इनवेस्टर्स सेंट कैपिटल फंड, विनी ग्रोथ फंड, लॉन्गथ्राइव कैपिटल और टॉरस म्यूचुअल फंड शामिल हैं।

आईपीओ से मिले पैसों का इस्तेमाल कंपनी ₹102 करोड़ वर्किंग कैपिटल जरूरतों, ₹20.2 करोड़ कर्ज चुकाने और ₹8.48 करोड़ नए सिस्टम व हार्डवेयर खरीदने पर खर्च करेगी।

कंपनी की वित्तीय सेहत और ऑर्डर बुक

2002 में स्थापित यह कंपनी एंटरप्राइज एप्लीकेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, मैनेज्ड सर्विसेज और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स के क्षेत्र में एंड-टू-एंड आईटी सॉल्यूशंस प्रदान करती है।

फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) साल-दर-साल 35.6% बढ़कर ₹40.73 करोड़ हो गया। इस दौरान कुल रेवेन्यू 32.3% बढ़कर ₹365.3 करोड़ पर पहुंच गया। 30 अप्रैल 2026 तक कंपनी के पास ₹356.96 करोड़ की मजबूत ऑर्डर बुक थी।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा है GMP?

IPO मार्केट पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, 23 जुलाई को एक्सट्रानेट टेक्नोलॉजीज का ग्रे मार्केट प्रीमियम ₹13 प्रति शेयर दर्ज किया गया। इस हिसाब से इसका संभावित लिस्टिंग प्राइस ₹140 रह सकता है। अगर GMP के अनुमानों के मुताबिक लिस्टिंग होती है तो इसमें पैसा लगाने वाले निवेशकों को करीब 10% से ज्यादा का मुनाफा हो सकता है।

एक्सपर्ट्स की राय: क्या लगाएं पैसा?

ब्रोकरेज फर्म स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट ने इस आईपीओ को मध्यम अवधि और मध्यम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए ‘Subscribe’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ काफी मजबूत है और इसका वैल्यूएशन मौजूदा वित्तीय प्रदर्शन के हिसाब से सही है।

Indo-MIM IPO: पैसे कर लें तैयार! कल से खुलेगा ₹3,811 करोड़ का मेगा मेनबोर्ड आईपीओ, ग्रे मार्केट में 40% ऊपर चल रहा भाव

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission: सिर्फ फिटमेंट फैक्टर ही नहीं! जानिए वे 5 बड़े आर्थिक कारण जो तय करेंगे आपकी सैलरी

8th Pay Commission Salary Revision Factors: क्या 8वें वेतन आयोग में सिर्फ ‘फिटमेंट फैक्टर’ ही आपकी सैलरी और पेंशन बढ़ाएगा? जवाब है- नहीं! 3 नवंबर 2025 को बने इस आयोग का आधा समय यानी 9 महीने पूरा हो चुका है और अब फोकस केवल मांगों पर नहीं, बल्कि देश की आर्थिक हकीकत पर शिफ्ट हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कर्मचारियों का पे-स्केल तय करने के लिए 5 ऐसे बड़े आर्थिक कारण होंगे, जिन पर सरकार का सबसे ज्यादा जोर रहेगा।

आइए जानते हैं कि वे कौन-से 5 बड़े आर्थिक फैक्टर हैं, जो 1.1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन संशोधन को आकार देंगे।

फिटमेंट फैक्टर की मांग और इतिहास

फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला या मल्टीप्लायर है, जिसके जरिए कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

पुराने वेतन आयोगों का ट्रेंड: 5वें वेतन आयोग में कोई एक समान ऑफिशियल मल्टीप्लायर नहीं था। वहीं 6वें वेतन आयोग में 1.86 और 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया गया था।

यूनियनों की मांग: 8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारी संगठन 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, ‘वेतन आयोग हमेशा एक समग्र दृष्टिकोण अपनाते हैं। फिटमेंट फैक्टर भले ही सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरता है, लेकिन यह व्यापक मूल्यांकन का केवल एक हिस्सा है।’

सैलरी और पेंशन तय करने वाले 5 मुख्य आर्थिक कारण

सैलरी और पेंशन तय करने वाले 5 मुख्य आर्थिक कारण

सिर्फ फिटमेंट फैक्टर से फैसला क्यों नहीं हो सकता?

फिटमेंट फैक्टर सीधे तौर पर मूल वेतन में वृद्धि तय करता है, इसलिए यह सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। हालांकि, कोई भी वेतन आयोग देश की आर्थिक वास्तविकताओं की अनदेखी करके सिर्फ एक आंकड़े पर फैसला नहीं ले सकता।

आयोग को कर्मचारियों की आकांक्षाओं और देश के राजकोषीय संतुलन के बीच तालमेल बिठाना होता है। हाल ही में भुवनेश्वर (6-7 जुलाई) और कोलकाता (9-10 जुलाई) में आयोजित क्षेत्रीय बैठकों में मिले सुझावों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट?

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट मई या जून 2027 के आसपास केंद्र सरकार को सौंपेगा। जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंप देता और सरकार उसे मंजूरी नहीं दे देती, तब तक वेतन वृद्धि या पेंशन सुधार को लेकर किए जाने वाले सभी अनुमान केवल संभावित हैं।

Market cues : अगर निफ्टी 24000 के नीचे बना रहता है तो 23800 तक बढ़ सकती है गिरावट, 24100 पर रेजिस्टेंस

Trade setup for today : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण 22 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतें $95 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इससे निफ्टी 50 पर बिकवाली का दबाव पड़ा और यह 0.8 प्रतिशत गिरकर 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से थोड़ा नीचे बंद हुआ। मोमेंटम इंडिकेटर बाजार में शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत दे रहे हैं। इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज और बोलिंगर बैंड्स की मिडलाइन से भी नीचे आ गया है,जो बताता है कि बाजार में मंदड़िए मजबूत स्थिति में हैं।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी 24,000 के लेवल से नीचे बना रहता है,तो 23,800 तक गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस लेवल के टूटने पर मंदड़िए बाजार पर अपनी पकड़ और मजबूत कर सकते हैं। हालांकि,जानकारों के मुताबिक,अगर बाजार में रिकवरी होती है तो 24,100-24,200 का दायरा एक रेजिस्टेंस का काम कर सकता है

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,963, 23,915 और 23,836

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,120, 24,168 और 24,246

कुछ समय तक एक ही दायरे में रहने के बाद,निफ्टी 50 ने डेली चार्ट पर एक लंबी’बेयरिश कैंडल’बनाई और अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज (100-दिन के EMA) और बोलिंगर बैंड्स की मिडलाइन से नीचे आ गया। इससे पता चलता है कि बाजार में बिकवाली करने वालों का पलड़ा भारी हो गया है। RSI गिरकर 48.61 पर आ गया और इसमें नेगेटिव क्रॉसओवर देखा गया,जबकि MACD सिग्नल लाइन से और नीचे चला गया और हिस्टोग्राम में लाल बार और बड़ा हो गया,जो मंदी के रुझान(बेयरिश मोमेंटम)के मज़बूत होने का संकेत है।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 57,633, 57,835 और 58,161

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 56,981, 56,780 और 56,454

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,717

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,441, 55,742

बैंक निफ्टी में 1.2 प्रतिशत की गिरावट आई और यह पिछले कई सेशन की कंसोलिडेशन रेंज से नीचे आ गया। डेली चार्ट पर इसने एक लंबी बेयरिश कैंडल बनाई,जो बढ़ते सेलिंग प्रेशर का संकेत है। बैंकिंग इंडेक्स अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज और बोलिंगर बैंड्स की मिडलाइन से काफी नीचे आ गया,हालांकि यह अपने मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा। RSI गिरकर 48.1 पर आ गया और बेयरिश क्रॉसओवर का संकेत देता रहा,जबकि MACD रेफरेंस लाइन से नीचे बना रहा और हिस्टोग्राम में लाल बार का आकार बढ़ता गया,जो शॉर्ट टर्म में कमजोरी का संकेत है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

22 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹819 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे और वे नेट सेलर बने रहे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी लगातार दूसरे सेशन में बिकवाली जारी रखी और ₹418 करोड़ के शेयर बेचे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने वाला इंडिया VIX 5.5% बढ़कर 13.29 पर पहुंच गया और अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर चला गया। यह तेजड़ियो के लिए बढ़ती परेशानी का संकेत है। अगर यह 15 के लेवल की ओर और बढ़ता है तो बुलिश खेमे पर दबाव और बढ़ सकता है।

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पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 22 जुलाई को पिछले सेशन के 1.01 से गिरकर 0.84 पर आ गया। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

 

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