RBI MPC Meet: फिर एक बार जस की तस छोड़ी जा सकती है रेपो रेट, 5 अगस्त को आएगा फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में भी प्रमुख नीतिगत दर रेपो को बिना किसी बदलाव के जस का तस छोड़ सकता है। देश के 10 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के एक सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की मीटिंग 3-5 अगस्त को होने वाली है। इस साल जून की बैठक में रेपो रेट में लगातार तीसरी बार कोई बदलाव न करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर स्थिर छोड़ा गया था।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सर्वे में ज्यादातर उत्तरदाताओं का अनुमान रहा कि केंद्रीय बैंक आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी नीतिगत स्थिति को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखेगा। ऐसा भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और असमान मानसून से महंगाई के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए किया जा सकता है। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि केंद्रीय बैंक ‘देखो और इंतजार करो’ मोड में रहेगा क्योंकि वह महंगाई की स्थिति का आकलन कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक, इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है, ‘‘फिलहाल, महंगाई नरम बनी हुई है और ऐसे में यथास्थिति ही सबसे अच्छा नीतिगत विकल्प है।” जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के ट्रेजरी प्रमुख गोपाल त्रिपाठी का मानना है कि केंद्रीय बैंक मानसून की स्थिति और एफसीएनआर (बी) योजना की सफलता का इंतजार करेगा।

पूरे FY27 में रेपो रेट में हो सकती है वृद्धि

सर्वे के अधिकांश उत्तरदाताओं का मानना है कि भले ही अगस्त में पॉलिसी रेट को स्थिर रखा जाए लेकिन पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान इसमें बढ़ोतरी हो सकती है। अगर महंगाई का दबाव बढ़ा तो चालू वित्त वर्ष के दौरान रेपो रेट में कम से कम 2 बार बढ़ोतरी हो सकती है।

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महंगाई और ग्रोथ के अनुमानों को लेकर क्या राय

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल के बावजूद, ज्यादातर लोगों को उम्मीद है कि RBI महंगाई के अनुमान में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना ​​है कि अगर भूराजनीतिक तनाव बना रहा है तो इसमें बढ़ोतरी हो सकती है। धनलक्ष्मी बैंक के ट्रेजरी हेड बालासुब्रमण्यन आर का मानना है कि RBI वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर देगा।

ग्रोथ के अनुमानों को लेकर भी राय बंटी हुई है। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि मजबूत घरेलू मांग के कारण वित्त वर्ष 2027 के GDP ग्रोथ अनुमान में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं कुछ अन्य का मानना है कि कोई बदलाव नहीं होगा।

गोवा घूमने जा रहे हैं? पहले जान लें नए नियम, वरना देना पड़ सकता है ₹1 लाख जुर्माना

Goa Tourism: अगर आप इस सीजन गोवा के समुद्र तटों पर छुट्टियां बिताने या समुद्र किनारे पार्टी करने का प्लान बना रहे हैं, तो वहां जाने से पहले राज्य सरकार के नए नियमों को जान लेना बेहद जरूरी है। गोवा में समुद्र तट पर बिना अनुमति के पार्टी करने से लेकर अनधिकृत क्रूज टिकट विक्रेताओं से टिकट खरीदने जैसी गलतियां आपको भारी पड़ सकती हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर पर्यटकों और स्थानीय विक्रेताओं पर ₹5000 से लेकर ₹1 लाख तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है।

गोवा के पर्यटन विभाग के निदेशक केदार नायक द्वारा जारी एक ताजा अधिसूचना के तहत पर्यटन स्थलों पर की जाने वाली 19 आम गतिविधियों को दंडनीय न्यूसेंस (उपद्रव/असुविधा) की श्रेणी में रखा गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य के बीचेज और पर्यटन स्थलों को संरक्षित करना है। इसके साथ ही पुलिस और पर्यटन अधिकारियों को अब शिकायत दर्ज होने का इंतजार किए बिना, मौके पर ही सीधे कार्रवाई करने का स्पष्ट अधिकार दे दिया गया है।

गोवा के पर्यटन स्थलों पर किन गतिविधियों पर लगी रोक?

पर्यटन विभाग द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार, अगर आप गोवा जा रहे हैं तो आपको कई बातों का ख्याल रखना है-

बिना लाइसेंस की बीच पार्टियां या इवेंट्स: समुद्र तट की रेत पर बिना पूर्व अनुमति के साउंड स्पीकर लगाकर पार्टी करना या इवेंट आयोजित करना अब पूरी तरह प्रतिबंधित है।

अनाधिकृत गाइड या मसार की सेवाएं लेना: बीच पर घूम-घूम कर मालिश की पेशकश करने वाले अनवेरिफाइड मसार या बिना पंजीकरण वाले गाइडों की सेवाएं लेना आपको परेशानी में डाल सकता है। आदेश में अनधिकृत सेवाएं देने वाले मालिशियों, घुमंतुओं और फेरीवालों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है।

अनऑफिशियल काउंटरों से क्रूज या वॉटर-स्पोर्ट्स टिकट खरीदना: सिर्फ सरकार से स्वीकृत और लाइसेंस प्राप्त ऑपरेटरों से ही टिकट खरीदें। गैर-अनुमति वाले स्थानों से दलाली कर टिकट बेचना या खरीदना प्रतिबंधित है।

प्रतिबंधित जगहों पर शराब पीना और कांच की बोतलें फोड़ना: स्वीकृत क्षेत्रों के बाहर सार्वजनिक स्थानों पर शराब का सेवन करना और बीचेज पर कांच की बोतलें तोड़कर या छोड़कर जाना अपराध घोषित किया गया है।

गैर-निर्धारित क्षेत्रों में खाना पकाना या गंदगी फैलाना: समुद्र तट पर अलाव जलाना या खुले में खाना पकाना अब केवल तय किए गए विशेष क्षेत्रों तक ही सीमित रहेगा। कहीं भी कचरा फेंकना सख्त मना है।

अवैध रिवर क्रूज और वॉटर स्पोर्ट्स: केवल पंजीकृत और अनुमति प्राप्त ऑपरेटरों की नौकाओं या वॉटर स्पोर्ट्स का ही इस्तेमाल करें।

रेत पर गाड़ियां चलाना और आपातकालीन वाहनों का रास्ता रोकना: बीचेज पर वाहन चलाने पर पाबंदी है। इसके अलावा लाइफगार्ड, आपातकालीन सेवा या बीच की सफाई करने वाली गाड़ियों के रास्ते में रुकावट डालना भी प्रतिबंधित है।

कचरा, सीवेज या तेल बहाना: समुद्र तटों के पास या रेत पर कचरा, सीवेज, रसायन या तेल बहाना पूरी तरह वर्जित है। यह नियम पर्यटकों के साथ-साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी समान रूप से लागू होता है।

नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना, हो सकती है कानूनी कार्रवाई

अगर कोई पर्यटक या व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर न्यूनतम ₹5000 से लेकर अधिकतम ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा। सिर्फ आर्थिक दंड ही नहीं, बल्कि लोक सेवक के आदेश का पालन न करने के जुर्म में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 के तहत आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है। इसलिए गोवा यात्रा के दौरान इन नए नियमों का सख्ती से पालन करें ताकि आपकी छुट्टियां बिना किसी कानूनी अड़चन के सुरक्षित और सुखद रहें।

फिटनेस ने रोका जसप्रीत बुमराह का रास्ता! श्रीलंका दौरे से बाहर, जानें अब कौन संभालेगा तेज गेंदबाजी?

Jasprit Bumrah: भारत और श्रीलंका के बीच होने वाले दो टेस्ट मैच की सीरीज से पहले एक बड़ी खबर सामने आई है। सीरीज से पहले ही टीम इंडिया को एक बड़ा झटका लगता नजर आ रहा है। दुनिया के नंबर-1 टेस्ट गेंदबाज जसप्रीत बुमराह श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज में नहीं खेलेंगे। 32 साल के तेज गेंदबाज को 28 जुलाई को श्रीलंका दौरे के लिए भारत की 15 सदस्यीय टीम में चुना गया था। हालांकि, उनके खेलने का फैसला उनकी फिटनेस पर निर्भर था। कुछ दिन पहले खबर आई थी कि जसप्रीत बुमराह ने अपना फिटनेस टेस्ट पास कर लिया है और वह श्रीलंका दौरे के लिए पूरी तरह फिट हैं। लेकिन अब नई रिपोर्ट के अनुसार, बुमराह इस टेस्ट सीरीज का हिस्सा नहीं बन पाएंगे।

बुमराह को लेकर आई ये बड़ी खबर

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शुरुआती जांच के दौरान जसप्रीत बुमराह के बाएं घुटने में परेशानी पाई गई। इसके बाद टीम मैनेजमेंट और मेडिकल स्टाफ ने फैसला किया कि उन्हें अभी मैदान पर वापसी नहीं कराई जाएगी। फिलहाल बुमराह को पूरी तरह फिट होने तक आराम करने और इलाज जारी रखने की सलाह दी गई है। बीसीसीआई के एक सूत्र ने बताया कि पहले भी कुछ खिलाड़ियों को जल्दबाजी में मैदान पर उतारा गया था, जिससे उनकी चोट और बढ़ गई थी। इसलिए बुमराह के मामले में कोई जोखिम नहीं लिया जाएगा।

बोर्ड चाहता है कि वह पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही वापसी करें। सूत्र ने यह भी कहा कि इस साल और अगले साल की शुरुआत में भारत को एशियन गेम्स, न्यूज़ीलैंड दौरा और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट खेलने हैं, इसलिए बुमराह की फिटनेस सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

बुमराह की जगह लेगा ये गेंदबाज

बीसीसीआई की सीनियर मेंस सलेक्शन टीम ने जल्द ही जसप्रीत बुमराह के स्थान पर नए खिलाड़ी के नाम का ऐलान कर सकती है। इस दौड़ में जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज औकिब नबी डार सबसे आगे बताए जा रहे हैं। अगर उनका चयन होता है, तो वह श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम का हिस्सा होंगे। औकिब नबी डार ने अभी तक भारत के लिए किसी भी फॉर्मेट में अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। हालांकि, उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा है। बारामूला के रहने वाले इस तेज गेंदबाज ने रणजी ट्रॉफी 2025-26 सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लिए थे। उनके बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतने में सफलता हासिल की।

श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम में चार तेज गेंदबाजों को जगह दी गई है। इनमें जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार शामिल हैं। अगर बुमराह इस सीरीज से बाहर रहते हैं, तो भारत के तेज गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा संभाल सकते हैं। दोनों गेंदबाज नई गेंद से टीम के लिए अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे।

जापान बैकअप कैपिटल बनाने की तैयारी में, क्या भारत में भी दूसरी राजधानी की जरूरत है, दिल्ली के अलावा कौन से ऑप्शन चर्चा में रहे?

Japan second capital: जापान एक बड़े भूकंप जैसी भीषण प्राकृतिक आपदा के दौरान सरकारी कामकाज को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए एक बैकअप राजधानी बनाने पर विचार कर रहा है। इसके बाद भारत में भी एक पुरानी बहस फिर से छिड़ गई है कि क्या भारत को भी अपनी एक दूसरी राजधानी की जरूरत है? जापान में जहां यह चर्चा पूरी तरह से आपदा प्रबंधन और आपदा की स्थिति से निपटने की तैयारियों पर केंद्रित है। वहीं भारत में दूसरी राजधानी की मांग ऐतिहासिक रूप से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक पहुंच और राष्ट्रीय सुरक्षा के इर्द-गिर्द घूमती रही है।

यह विचार भारत के लिए नया नहीं है। संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. बी.आर अंबेडकर से लेकर विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया है। उनका तर्क रहा है कि भारत का शासन आज भी काफी हद तक नई दिल्ली में ही केंद्रित है।

डॉ. बीआर. अंबेडकर चाहते थे हैदराबाद बने भारत की दूसरी राजधानी

भारत में दूसरी राजधानी के पक्ष में सबसे शुरुआती और मजबूत तर्कों में से एक डॉ बीआर अंबेडकर का था। अपनी 1955 में प्रकाशित पुस्तक थॉट्स ऑन लिंग्विस्टिक स्टेट्स में उन्होंने तर्क दिया था कि नई दिल्ली भारत की एकमात्र राजधानी के लिए आदर्श जगह नहीं है। अंबेडकर ने तीन प्रमुख चिंताओं की ओर इशारा किया था।

पहली ये कि दिल्ली दक्षिण भारत से काफी दूर है, जिससे दक्षिण के नागरिकों और अधिकारियों को यहां आने-जाने में भारी असुविधा होती है। दूसरा दिल्ली की भीषण गर्मी और अत्यधिक ठंड इसे एक आरामदायक प्रशासनिक केंद्र नहीं बनने देती। अंबेडकर ने चेतावनी दी थी कि दिल्ली की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से निकटता युद्ध के समय इसे बेहद संवेदनशील और असुरक्षित बनाती है।

इसके विकल्प के रूप में उन्होंने हैदराबाद को देश की दूसरी राजधानी बनाने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने हैदराबाद को एक केंद्रीय रूप से स्थित और कॉस्मोपॉलिटन शहर बताया, जो उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक स्थायी संतुलन स्थापित कर सकता है।

बेंगलुरु प्रस्ताव ने फिर ताजा की थी बहस

दूसरी राजधानी का यह मुद्दा साल 2018 में तब फिर से चर्चा में आया जब कर्नाटक के तत्कालिक आवास मंत्री एम कृष्णप्पा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बेंगलुरु को भारत की दूसरी राजधानी के रूप में मान्यता देने की मांग की।

इस प्रस्ताव में तर्क दिया गया था कि भारत के टेक्नोलॉजी हब के रूप में बेंगलुरु की स्थिति, वहां का अनुकूल मौसम और मजबूत आर्थिक आधार इसे दक्षिण भारत में एक आदर्श प्रशासनिक केंद्र बनाते हैं। समर्थकों का यह भी मानना था कि इस कदम से देश के शासन ढांचे में दक्षिणी राज्यों का एकीकरण और मजबूत होगा।

दुनिया के कई देशों में हैं एक से अधिक राजधानियां

अगर भारत अपनी प्रशासनिक संस्थाओं को अलग-अलग शहरों में बांटता है तो ऐसा करने वाला वह पहला देश नहीं होगा। दुनिया के कई देशों ने अपनी सरकारी शक्तियों को विभिन्न शहरों में बांट कर रखा हुआ है। दक्षिण अफ्रीका यह मल्टी-कैपिटल मॉडल का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। यहां प्रिटोरिया में कार्यपालिका, केप टाउनमें संसद और ब्लोएमफोनटेन में न्यायपालिका है। इसी तरह मलेशिया ने अपने प्रशासनिक कार्यालयों को पुत्राजया में ट्रांसफर कर दिया है जबकि संसद कुआलालंपुर से ही चलती है।

श्रीलंका की संसद श्री जयवर्धनेपुरा कोट्टे में बैठती है जबकि कोलंबो इसका वाणिज्यिक केंद्र और कई सरकारी संस्थानों का मुख्यालय बना हुआ है। नीदरलैंड एम्स्टर्डम को अपनी संवैधानिक राजधानी मानता है, लेकिन सरकार, संसद और सुप्रीम कोर्ट द हेग में स्थित हैं। बोलीविया की भी दो राजधानियां हैं, जहां ला पाज प्रशासनिक राजधानी है और सुक्रे संवैधानिक राजधानी व न्यायपालिका का केंद्र है।

जापान का प्रस्ताव भारत की बहस से अलग क्यों है?

जापान का बैकअप कैपिटल का प्रस्ताव भारत में चल रही दूसरी राजधानी की बहस से एक बड़े मायने में अलग है। टोक्यो जापान की मुख्य राजधानी बना रहेगा। जापानी सरकार केवल एक आपातकालीन प्रशासनिक केंद्र की संभावनाओं की स्टडी कर रही है ताकि अगर कोई भीषण भूकंप या बड़ी आपदा राजधानी टोक्यो को प्रभावित करती है तो वहां से देश का शासन निर्बाध रूप से चलता रहे। जापान का मुख्य उद्देश्य सरकार का निरंतर संचालन है, न कि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व।

क्या भारत को वास्तव में दूसरी राजधानी की जरूरत है?

हालांकि समय-समय पर दूसरी राजधानी का विचार उभरता रहा है, लेकिन दिल्ली में किए गए भारी निवेश (जैसे सेंट्रल विस्टा का पुनर्विकास) को देखते हुए एक नई दूसरी राजधानी बनाना फिलहाल व्यावहारिक नजर नहीं आता। इसके बजाय विशेषज्ञों ने कुछ अधिक व्यावहारिक विकल्प सुझाए हैं। महाराष्ट्र विधानसभा के नागपुर में होने वाले शीतकालीन सत्र की तर्ज पर, हर साल संसद का कम से कम एक सत्र दक्षिण भारत के किसी शहर में आयोजित किया जा सकता है।

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एक्सपर्ट्स के मुताबिक न्याय तक आम जनता की पहुंच आसान बनाने के लिए चेन्नई, मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी क्षेत्रीय पीठें स्थापित की जा सकती हैं। फिलहाल नई दिल्ली ही भारत की एकमात्र राजधानी बनी हुई है। लेकिन जैसे-जैसे दुनिया भर के देश अपने शासन को अधिक लचीला, सुरक्षित और सुलभ बनाने के रास्ते तलाश रहे हैं, भारत में भी कुछ संस्थानों के विकेंद्रीकरण का सवाल समय-समय पर उठता रहेगा।

Trump का बिजनेस आइडिया! हर महीने ₹9500000 के खर्च में Truth Social पर दिखेगी सबसे पहले पोस्ट, सांसदों ने की शिकायत

Trump Effect: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मीडिया कंपनी ने एक नई पेड सर्विस शुरू की है। इसके तहत सब्सक्राइबर्स को ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर आने वाली पोस्ट्स, खासतौर से हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स की पोस्ट्स, आम यूजर्स से पहले देखने की सुविधा मिलेगी। खास बात ये है कि इस सर्विस के लिए सब्सक्राइबर्स को हर महीने $1 लाख यानी करीब ₹95 लाख रुपये देने होंगे। हालांकि इसने ट्रंप की राजनीतिक भूमिका और उनके कारोबारी हितों के बीच कनफ्लिक्ट ऑफ इंटेरेस्ट यानी हितों के टकराव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप मीडिया और एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप (TMTG) ने शनिवार को Truth API नाम से सब्सक्रिप्शन-बेस्ड सर्विस शुरू की। इसके तुरंत बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर एडम शिफ और एलिजाबेथ वॉरेन ने अमेरिकी बाजार नियामक एसईसी से इसकी जांच करने की मांग कर दी।

क्या है पेड सर्विस की खास बात

ट्रंप मीडिया ने ट्रुथ एपीआई नाम से सब्सक्रिप्शन सर्विस पेश किया है। कंपनी के अंतरिम सीईओ केविन मैकगर्न (Kevin McGurn) का कहना है कि इसके जरिए बिजनेसेज को मार्केट पर असर डालने वाली अहम जानकारियां आम लोगों से पहले तुरंत ही मिल जाएंगी। इसके तहत ट्रेडिंग फर्म्स और अन्य सब्सक्राइबर्स को आम यूजर्स से पहले जानकारी मिल जाएगी और इसके लिए उन्हें हर महीने $1 लाख तक की फीस देनी होगी।

क्यों हो रहा विरोध

अब इसे लेकर विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सर्विसेज होने के बावजूद ट्रंप के चलते ट्रुथ सोशल के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है। ट्रंप ट्रुथ सोशल के सबसे प्रभावशाली यूजर होने के साथ-साथ इसकी पैरेंट कंपनी के सबसे बड़े शेयरहोल्डर भी हैं। वह अकसर इसी के जरिए अहम सरकारी नीतियों, टैरिफ, आर्थिक फैसलों और अन्य बड़े मुद्दों पर ऐलान करते हैं जिसका मार्केट पर सीधा असर पड़ता है। अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि अगर कुछ लोगों को ट्रंप की पोस्ट पहले देखने को मिल जाए तो बाकी लोगों की तुलना में उन्हें अनुचित बढ़त मिल जाएगी। उनके बयानों पर मार्केट में काफी तेज मूवमेंट दिखता है।

क्या कहना है Trump Media का

अमेरिकी सांसदों ने एडम शिफ और एलिजाबेथ वॉरेन ने एसईसी के चेयरमैन पॉल एटकिन्स (Paul Atkins) को पत्र लिखकर शिकायत की है। उनका कहना है कि अगर बाजार को प्रभावित करने वाली जानकारी कुछ चुनिंदा कंपनियों को पहले मिलती है, तो क्या यह बाजार के नियमों का उल्लंघन नहीं है। उन्होंने इसे राष्ट्रपति के पद का व्यक्तिगत लाभ लेने के लिए गंभीर दुरुपयोग बताया। वहीं ट्रंप मीडिया का कहना है कि बाकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सर्विसेज की तरह ट्रुथ एपीआई एक कमर्शियल डेटा प्रोडक्ट की तरह है। बता दें कि ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप मीडिया के शेयरों में 70% से अधिक की गिरावट आ चुकी है और इससे कंपनी के शेयरहोल्डर्स की दौलत में अरबों डॉलर की कमी आई है।

Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

पहली डेट पर लड़की ने मंगाया इतना सब कि 20,500 रुपये का बिल आया, फिर जो हुआ उसने युवक का दिल तोड़ दिया

दिल्ली के एक 23 वर्षीय युवक की पहली डेट का अनुभव इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। डेटिंग ऐप के जरिए हुई इस मुलाकात को लेकर युवक ने Reddit पर अपनी आपबीती साझा की, जिसके बाद इंटरनेट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कई यूजर्स ने इसे एक महंगा सबक बताया, जबकि कुछ ने डेटिंग एटीकेट और बिल शेयर करने की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए। युवक का कहना है कि उसे सबसे ज्यादा अफसोस पैसों का नहीं, बल्कि पूरी स्थिति के तरीके का हुआ। देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई और ऑनलाइन डेटिंग, पहली मुलाकात और खर्च को लेकर नई बहस शुरू हो गई।

कैफे समझकर गया, पहुंच गया पब

युवक के मुताबिक, वह पहले कभी किसी रिलेशनशिप में नहीं रहा था और लड़कियों से भी ज्यादा बातचीत नहीं हुई थी। उसे लगा था कि मुलाकात किसी कैफे में होगी, लेकिन उसकी डेट उसे सीधे एक पब ले गई। उसने बताया कि वह न शराब पीता है और न ही स्मोकिंग करता है।

ऑर्डर पर ऑर्डर, बिल पहुंचा ₹20,500

पोस्ट के अनुसार, लड़की ने कई बोतल शैंपेन, दो हुक्के और खाने का ऑर्डर दिया। शाम खत्म होने पर बिल ₹20,500 आया। युवक ने बताया कि यह रकम उसकी मासिक सैलरी का लगभग आधा हिस्सा थी, जिसे देखकर वह हैरान रह गया।

‘पैसे नहीं, इस बात का ज्यादा अफसोस हुआ’

युवक ने लिखा कि उसे सबसे ज्यादा दुख पैसों का नहीं हुआ। असली निराशा इस बात से हुई कि उसकी डेट ने बिल शेयर करने की कोई बात नहीं की और न ही खर्च को लेकर कोई सवाल पूछा। उसने यह भी बताया कि बिल आने के समय लड़की वॉशरूम चली गई थी, लेकिन उसने उसके इरादों पर कोई आरोप नहीं लगाया।

‘शायद इत्तेफाक था, शायद नहीं’

युवक ने अपनी पोस्ट में साफ लिखा कि वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहता। उसके मुताबिक, लड़की का बिल आने के समय वॉशरूम जाना महज संयोग भी हो सकता है, इसलिए वह बिना सबूत उसके इरादों पर सवाल नहीं उठाना चाहता।

Reddit पर लोगों ने कहा- ‘महंगा सबक मिला’

पोस्ट वायरल होने के बाद Reddit यूजर्स ने युवक के अनुभव पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे धोखाधड़ी जैसा मामला बताया, जबकि कई यूजर्स ने कहा कि यह उसके लिए एक महंगा लेकिन जरूरी सबक था। वहीं कुछ ने उसकी मासूमियत पर भी मजाकिया टिप्पणियां कीं।

डेटिंग एटीकेट पर फिर शुरू हुई बहस

इस घटना ने सोशल मीडिया पर पहली डेट में बिल कौन चुकाए, खर्च पहले तय होना चाहिए या नहीं और ऑनलाइन डेटिंग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे मुद्दों पर नई चर्चा शुरू कर दी।

इंटरव्यू में पूछा गया एक सवाल, उम्मीदवार तुरंत उठा और छोड़ दी नौकरी; इंटरनेट पर छिड़ी बहस

El Nino Counter: अल-नीनो के खतरे के बीच आई बड़ी खुशखबरी! पॉजिटिव IOD लाएगा झमाझम बारिश, WMO की रिपोर्ट में दावा

India Mansoon Update: मानसून सत्र के दौरान जहां अल-नीनो के असर से सामान्य से कम बारिश का खतरा मंडरा रहा है। वहीं इस बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल (Positive IOD) बनने की संभावना जताई गई है। यह पॉजिटिव IOD अल-नीनो के निगेटिव इंपैक्ट को आंशिक रूप से बेअसर कर सकता है, जिससे देश भर में बारिश की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।

क्या है अल-नीनो और पॉजिटिव IOD? समझिए मौसम का गणित

मौसम के इस चक्र और मानसून पर इसके प्रभाव को समझने के लिए दोनों स्थितियों का अंतर जानना जरूरी है। अल-नीनो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह के पानी के गर्म होने का एक जलवायवीय पैटर्न है। भारत में इसका सीधा संबंध कमजोर मानसून और भीषण गर्मी से होता है। पॉजिटिव IOD उष्णकटिबंधीय हिंद महासागर (Indian Ocean) के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों की समुद्री सतह के तापमान का अंतर है। जब पॉजिटिव IOD बनता है तो इससे मानसून की हवाएं मजबूत होती हैं जो देश में बेहतर और झमाझम बारिश में मदद करती हैं।

दक्षिण भारत को राहत की उम्मीद, 22% की कमी होगी पूरी

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के पूर्वानुमान से उन इलाकों को सबसे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद है जहां अब तक बारिश की कमी रही है। 1 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की 22% कमी दर्ज की गई है। अब पॉजिटिव IOD के सक्रिय होने से न सिर्फ दक्षिण भारत, बल्कि देश के कई अन्य हिस्सों में भी मानसूनी बारिश की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आ सकता है।

सुपर अल-नीनो जैसी कोई आधिकारिक कैटिगरी नहीं: सरकार

उधर पिछले दिनों केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में अल-नीनो से जुड़े भ्रम को दूर करते हुए स्थिति स्पष्ट की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि WMO या पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आने वाले भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा आधिकारिक तौर पर सुपर अल-नीनो नाम की कोई कैटिगरी परिभाषित नहीं है। भूमध्यरेखीय मध्य प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान की विसंगतियों के आधार पर अल-नीनो घटनाओं को कमजोर, मध्यम, मजबूत या बहुत मजबूत श्रेणियों में बांटा जाता है।

जून में कमजोर, जुलाई में मध्यम हुआ अल-नीनो: IMD का अपडेट

राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक IMD ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान अल-नीनो स्थितियां विकसित होने की भविष्यवाणी की थी। जून 2026 के दौरान अल-नीनो की स्थिति कमजोर थी, जो जुलाई 2026 में बढ़कर मध्यम स्तर तक पहुंच गई।

अक्टूबर से दिसंबर 2026 के सीजन के दौरान अल-नीनो के और मजबूत होने की संभावना है और यह बहुत मजबूत श्रेणी तक पहुंच सकता है। भारत पर इसका सटीक असर सिर्फ अल-नीनो ही नहीं बल्कि महासागर और वायुमंडल के संयुक्त संबंधों के क्रमिक विकास पर निर्भर करता है।

IMD जारी कर रहा है नियमित चेतावनियां और आईबीएफ रिपोर्ट

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) अल-नीनो और अन्य जलवायु घटकों की लगातार निगरानी कर रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ दूसरे स्टेकहोल्डर्स को नियमित रूप से मौसमी, मासिक और विस्तारित सीमा के पूर्वानुमान जारी किए जा रहे हैं।

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इसके अतिरिक्त, आपदा प्रबंधन अधिकारियों, राज्य सरकारों और जिला प्रशासनों की तैयारियों व त्वरित प्रतिक्रिया में सहायता के लिए IMD दैनिक आधार पर अगले 7 दिनों के लिए प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और जोखिम-आधारित चेतावनियां दी जा रही हैं।

Lock Upp 2: ‘डॉक्टरों ने मुझसे कहा था कि मैं छह महीने में मर सकता हूं’, राम कपूर ने लॉकअप में अपना सबसे बड़ा राज खोला

Lock Upp 2: राम कपूर ने ‘लॉक अप’ में अपना तीसरा और एक और चौंकाने वाला राज खोला है। ‘बड़े अच्छे लगते हैं’ की शूटिंग के दौरान मोटापे से जूझ रहे इस एक्टर ने बताया कि उनकी सेहत इतनी खराब हो गई थी कि वे डिप्रेशन में चले गए थे और डॉक्टरों ने उनसे कहा था कि वे सिर्फ छह महीने में मर सकते हैं।

अपनी पत्नी और बच्चों समेत सबसे छिपाकर रखा गया एक राज़ बताते हुए राम कपूर ने कहा, “मैंने दुनिया से एक राज छिपाकर रखा है। यहां तक कि मेरी पत्नी को भी इसके बारे में नहीं पता। शो (‘बड़े अच्छे लगते हैं’) के दौरान, मैं अपनी ज़िंदगी के सबसे बुरे डिप्रेशन से गुजरा। अपने वजन की वजह से मुझे बहुत प्यार मिला और मेरी इतनी चर्चा हुई कि कुछ समय के लिए मैं सबसे ज़्यादा रेटिंग वाला टीवी स्टार बन गया था।”

एक्टर ने आगे बताया कि कैसे उनका वजन लगातार बढ़ता ही जा रहा था। फिर उन्होंने एक चौंकाने वाली बात बताई, “मेरे डॉक्टरों ने मुझसे कहा कि मैं अस्वस्थ हो गया हूं और छह महीने में मेरी मौत भी हो सकती है। मुझे डायबिटिक स्ट्रोक हो सकता था क्योंकि मैं दिन में तीन बार इंसुलिन ले रहा था। मेरा शुगर लेवल 400 से 600 के बीच रहता था और मैं दिन में 14 घंटे काम करता था। मैं इस बारे में कुछ नहीं करना चाहता था क्योंकि मुझे बहुत प्यार और पैसा मिल रहा था। मैं यह सब कैसे छोड़ सकता था? मैं बहुत बदसूरत इंसान बन गया था।”

यह बताते हुए कि उन्होंने अपने बच्चों के लिए खुद को कैसे बदला, राम ने कहा, “अगर मेरे बच्चे नहीं होते, तो मैं भी वही करता जो हर्षद ने किया था। जब आपके बच्चे होते हैं, तो आप उनके लिए जीते हैं और अपनी ज़िंदगी खत्म करने का हक आपको नहीं होता। बस इसी बात ने मुझे बचाया। यही वजह है कि मैं आज ज़िंदा हूं। 10 साल से ज़्यादा हो गए हैं, और आज मैं एक इंसान के तौर पर बहुत खुश हूं। गौतमी और मेरे बच्चों को भी अभी इस बारे में पता चल रहा होगा।”

इससे पहले राम कपूर ने एक बहुत ही इमोशनल राज़ का खुलासा किया था, जिसे सुनकर घर के सभी लोग रो पड़े थे। एक्टर ने बताया, “मैंने अपने पिता की मौत की प्लानिंग में उनकी मदद की थी।” उन्होंने बताया कि उनके पिता एक बार पैंक्रियाटिक कैंसर से लड़ चुके थे, लेकिन 73 साल की उम्र में जब कैंसर दोबारा हुआ, तो वे फिर से इलाज नहीं करवाना चाहते थे; राम उनके साथ खड़े रहे और उनके फैसले का समर्थन किया।

दिल्ली लक्ष्मी योजना में ₹2500 पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू, इसके लिए 6 जरूरी डॉक्युमेंट्स की पूरी लिस्ट

Delhi Lakshmi Yojana: दिल्ली की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार 1 अगस्त को ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ का ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2500 दिए जाएंगे। पोर्टल की शुरुआत के साथ ही इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली लक्ष्मी योजना दिल्ली की बहनों को आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान करने वाली योजना है।

सरकार ने इसके लिए ₹5100 करोड़ का बजट आवंटित किया है। आज से पोर्टल और रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। लगभग 500 बहनों ने अपने फॉर्म सफलतापूर्वक भर दिए हैं। दिल्ली कैबिनेट ने मंगलवार को इस योजना को मंजूरी दी थी, जो पिछले वर्ष आयोजित विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रमुख चुनावी वादों में से एक थी।

ऑनलाइन आवेदन के लिए 6 अनिवार्य दस्तावेज

योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन करते समय महिलाओं को निम्नलिखित 6 महत्वपूर्ण दस्तावेज अपलोड करने होंगे:-

स्थानीय विधायक (MLA) या सांसद (MP) का एंडोर्समेंट/अनुशंसा पत्र

आधार कार्ड

पैन कार्ड

आय प्रमाण पत्र

आधार से लिंक सिंगल-होल्डर बैंक अकाउंट डिटेल्स

दिल्ली वोटर पहचान पत्र / कम से कम 10 साल से दिल्ली में निवास का प्रमाण

कौन होगा पात्र? (Eligibility Criteria)

कैबिनेट द्वारा मंजूर दिशा-निर्देशों के अनुसार, योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। इसके मुताबिक परिवार की सबसे बड़ी महिला इस योजना की पात्र होंगी। महिला की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदक के परिवार की कुल वार्षिक आय ₹2.50 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदक दिल्ली का पंजीकृत वोटर होना चाहिए और कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य है।

किन्हें नहीं मिलेगा योजना का लाभ?

योजना के नियमों के तहत कई कैटेगिरी को इससे बाहर रखा गया है। जो महिलाएं पहले से किसी अन्य वित्तीय सहायता योजना या पेंशन का लाभ ले रही हैं वो इसका फायदा नहीं उठा पाएंगी। टैक्सपेयर्स और सरकारी कर्मचारी को भी इसका फायदा नहीं मिलेगा। 3 से अधिक जीवित बच्चों वाली महिलाओं को इस स्कीम में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक बिजली खपत 2,400 यूनिट से अधिक है वो इस स्कीम का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। जिन परिवारों के किसी सदस्य के पास सरकारी नौकरी है, कोई आपराधिक मामला दर्ज है या जिनके पास चार पहिया वाहन मौजूद है वो भी इस स्कीम के पात्र नहीं हैं।

2500 रुपये भुगतान के 2 विकल्प

योजना के तहत मिलने वाली ₹2500 की राशि के भुगतान के लिए लाभार्थियों को दो विकल्प दिए जाएंगे। ₹1000 प्रति माह सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी वॉलेट में दैनिक खर्चों के लिए और बाकी 1500 रुपये RD/FD खाते में रखे जाएंगे (जिसमें तीन साल की लॉक-इन अवधि होगी)। महिलाएं चाहें तो दीर्घकालिक बचत के लिए पूरी राशि (₹2500) को सीधे RD या FD खाते में जमा कराया जा सकता है।

फंड के इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध

योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि के उपयोग को लेकर सरकार ने कड़े नियम तय किए हैं। इस राशि का उपयोग शराब, तंबाकू, लॉटरी, सट्टेबाजी या किसी भी अन्य प्रतिबंधित सामान व सेवाओं की खरीदारी पर पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अगर कोई आवेदक गलत जानकारी देकर योजना का लाभ लेता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और वितरित की गई राशि की वसूली की जाएगी।

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