Smaller EVs will arrive as soon as charging network is ready: Maruti MD Takeuchi

Smaller EVs will arrive as soon as charging network is ready: Maruti MD Takeuchi
Suzuki

Maruti Suzuki plans to add smaller EVs to its India line-up once it has developed the charging infrastructure needed to support them. At the company’s annual general meeting, Managing director and CEO Hisashi Takeuchi said, “As soon as our EV charging will be ready in India, we will add smaller EVs in our portfolio.”

  1. More than 2,000 exclusive chargers installed across 1,100-plus cities
  2. Claims around 90 percent share of India’s EV exports
  3. Plans to build EVs, hybrids, CNG and ICE cars on the same line

Maruti Suzuki’s charging network plans

Maruti Suzuki has partnered with 13 charge-point operators and has already installed more than 2,000 exclusive charging points across over 1,100 cities. The company is also working to improve charging coverage on highways and expressways, while its plan for the top 100 cities calls for chargers at key locations around 5-10km apart.

The carmaker has set a larger target of more than 1,00,000 charging points across India by the end of this decade. The company has linked the introduction of smaller EVs to the expansion of this charging network.

Maruti currently sells the e Vitara as its only EV in India, while competitors Tata Motors and JSW MG Motor India already have smaller electric models on sale.

Maruti Suzuki expands EV exports

Maruti Suzuki is also expanding its electric vehicle exports. “We have started our EV exports to Europe first. Now, we are the largest exporter of EVs from India, with about 90 percent share in total EV exports from India,” he said. Takeuchi said the company exports vehicles to nearly 120 countries and shipped more than 4.4 lakh vehicles last year, a 34 percent increase overall. 

Japan has become Maruti’s second-largest market, according to Takeuchi, while the company expects trade agreements to create further export opportunities in markets including the UK, Germany and France.

ICE, hybrid and CNG investments to continue

Maruti Suzuki will continue investing in internal-combustion engine, hybrid and CNG vehicles alongside EVs. Takeuchi said ICE vehicles would remain an important part of the company’s business, with compressed biogas also expected to support their continued demand.

“Investment in ICE facilities will continue to be an integral part of our manufacturing process,” he said. The company is designing its new manufacturing facilities to build different types of vehicles on the same production line, allowing production to be adjusted as demand changes. “In our new plants, we can make EVs, hybrid vehicles, CNG and ICE vehicles on the same line,” Takeuchi said.

Reliance का Ice Cream Market में बड़ा दांव! ₹10 से शुरू होगी Bombay Creamery की आइसक्रीम, जानें क्या है खास

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रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड यानी RCPL अब आइसक्रीम बाजार में भी उतर गई है। कंपनी ने बॉम्बे क्रीमरी नाम से नया आइसक्रीम ब्रांड लॉन्च किया है। इसकी कीमत ₹10 से शुरू होगी। बॉम्बे क्रीमरी की आइसक्रीम रियल डेयरी क्रीम से बनाई जाएगी। कंपनी ने इसे कोन, कप, टब, बार और स्टिक जैसे अलग-अलग फॉर्मेट में उतारा है। फिलहाल इसकी बिक्री पश्चिम भारत में शुरू की जा रही है और जल्द ही इसे पूरे देश में उपलब्ध कराने की योजना है।

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RCPL का कहना है कि वह बॉम्बे क्रीमरी को किफायती कीमत पर प्रीमियम डेयरी अनुभव देने वाले ब्रांड के तौर पर पेश कर रही है। कंपनी अपने बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, रिटेल पहुंच और कंज्यूमर इनसाइट्स के सहारे इस कैटेगरी में लंबे समय के लिए उतर रही है।

 

RCPL के डायरेक्टर टी. कृष्णकुमार ने कहा कि बॉम्बे क्रीमरी को इस सोच के साथ तैयार किया गया है कि आइसक्रीम में डेयरी की असली पहचान बनी रहे। कंपनी का दावा है कि वह रियल डेयरी क्रीम से बनी आइसक्रीम को ऐसी कीमत पर उपलब्ध कराना चाहती है, जो भारतीय परिवारों की पहुंच में हो।

 

बॉम्बे क्रीमरी के साथ RCPL पहली बार आइसक्रीम कैटेगरी में उतर रही है। कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की FMCG इकाई है और अलग-अलग कंज्यूमर प्रोडक्ट कैटेगरी में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।

NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

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Supreme Court

नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज एफआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने आर्टिकल 142 के तहत मिले अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली और चार राज्यों में दर्ज एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। फैसले के तुरंत बाद सीजेपी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस ले लिया। ALSO READ: ट्रंप की टैरिफ नीति से बिगड़े समीकरण, भारत, चीन और रूस के गठबंधन से बढ़ेगी अमेरिका की टेंशन

 

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए दिल्ली, असम, महाराष्ट्र, बंगाल और बिहार में नीट प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। ये मामले 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन से जुड़े थे। दिल्ली पुलिस और 4 राज्य सरकारों ने कोर्ट से आर्टिकल 142 के तहत इन मामलों को खत्म करने की मांग की थी।

 

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों से बातचीत में दिए गए भरोसे पर कायम है। उन्होंने बताया कि नीट प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। केंद्र ने इसके लिए तीन महीने का समय मांगा है। मुआवजे का तरीका तय करने के लिए अलग-अलग राज्य सरकारों और संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी। ALSO READ: पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

 

2873 लोगों पर फिर कार्रवाई क्यों होगी?

कोर्ट ने केंद्र को 2873 ऐसे लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दी है। इनके बारे में आपराधिक इतिहास होने की बात कही गई है। सुनवाई के दौरान वकील हरिहरन ने इन 2873 लोगों की सूची मांगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन लोगों के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। ALSO READ: ‘GDP ग्रोथ का जश्न आम आदमी कैसे मनाए?’ खरगे ने PM मोदी पर साधा निशाना, बेरोजगारी-महंगाई से लेकर असमानता तक गिनाईं चुनौतियां

 

सीजेपी ने वापस लिया प्रोटेस्ट

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJP के सौरव दास ने कहा कि मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के सकारात्मक आश्वासनों, आज उन्हें मिली न्यायिक मान्यता को देखते हुए और  कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए कॉकरोच जनता पार्टी 5 सितंबर को होने वाले मार्च के आह्वान को वापस लेना उचित समझता है। उम्मीद है कि सरकार अपने वचन का पालन करेगी।

ETF में निवेश की टाइमिंग वाकई मायने रखती है? जानें लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सही रणनीति

ETF Investment Strategy: शेयर बाजार में निवेश करते समय हर निवेशक के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या फंड लगाने के लिए सही समय का इंतजार करना चाहिए? क्या गिरावट आने पर पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद होता है?

म्यूचुअल फंड के विपरीत, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) शेयर बाजार में दिनभर रियल-टाइम पर ट्रेड होते हैं। यही वजह है कि इनकी कीमतों में हर सेकंड होने वाला बदलाव निवेशकों को आकर्षित करता है। आइए समझते हैं कि ETF में टाइमिंग कितनी मायने रखती है और बिना जोखिम बढ़ाए बेहतर रिटर्न कैसे हासिल किया जाए।

टाइमिंग बनाम अवधि

लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए बाजार को टाइम करने की कोशिश करने से ज्यादा जरूरी बाजार में बने रहना है।

म्यूचुअल फंड बनाम ETF: म्यूचुअल फंड का NAV दिन में केवल एक बार तय होता है, जबकि ETF बाजार के घंटों के दौरान लगातार खरीदे और बेचे जाते हैं।

इंट्राडे वोलैटिलिटी का सच: दिन के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव ट्रेडर्स के लिए अवसर हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों को ‘परफेक्ट एंट्री पॉइंट’ के चक्कर में अपना निवेश नहीं रोकना चाहिए।

रिटर्न का पैच: बाजार के विभिन्न सूचकांकों (जैसे- निफ्टी 50, स्मॉलकैप, हाइब्रिड) का डेटा बताता है कि आउटपरफॉर्मेंस हमेशा टुकड़ों में आता है। अगर आप सही समय के इंतजार में बाहर बैठे रहे और वह तेजी का दौर निकल गया, तो आपका लॉन्ग टर्म रिटर्न काफी घट जाएगा।

मार्केट टाइमिंग के जोखिम से कैसे बचें?

बाजार में सही समय चुनने के बजाय जोखिम को कम करने के दो सबसे प्रभावी तरीके हैं:

ETF में SIP: निश्चित अंतराल पर थोड़ी-थोड़ी राशि ETF में लगाएं। इससे आपको Rupee-Cost Averaging का फायदा मिलेगा और अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी होने से एवरेज कॉस्ट बेहतर होगी।

एसेट एलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन: अलग-अलग सेगमेंट के ETF में पैसा लगाएं या हाइब्रिड इंडेक्स ETF चुनें। डेटा दर्शाता है कि हाइब्रिड इंडेक्स की वोलैटिलिटी प्योर इक्विटी इंडेक्स की तुलना में लगभग 40% कम होती है।

ETF खरीदते और बेचते समय ध्यान रखने योग्य 3 जरूरी रूल्स

अगर आप खुद ETF में ट्रेड कर रहे हैं, तो इन तकनीकी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:

1- शुरुआती और आखिरी मिनटों से बचें: बाजार खुलने के पहले 5-10 मिनट और बंद होने के आखिरी 5-10 मिनट में ट्रेडिंग न करें। इस दौरान लिक्विडिटी कम होती है और प्राइस वोलैटिलिटी अधिक रहती है।

2- घड़ी नहीं, Bid-Ask Spread और iNAV देखें: खरीदने से पहले यह जांचें कि ETF का ट्रेडेड प्राइस उसके इंडिकेटिव NAV के आसपास ही हो। जब ETF iNAV की तुलना में भारी प्रीमियम पर मिल रहा हो, तो खरीदारी से बचना चाहिए।

3- सिस्टमैटिक एंट्री लें: एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय किस्तों में खरीदारी करें ताकि एक ही दिन के गलत एंट्री पॉइंट का नुकसान न हो।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PPF vs NPS: किस स्कीम में निवेश से बड़ा रिटायरमेंट फंड बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs NPS: जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात होती है, तो दो स्कीमों पर सबसे अधिक जोर रहता है… पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) इन दोनों को अच्छा विकल्प माना जाता हैं, लेकिन दोनों में फर्क है। PPF सुरक्षित निवेश है। इसका ब्याज सरकार तय करती है। वहीं NPS बाजार से जुड़ा है। इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता।

किस स्कीम में कितना फंड बनेगा?

PPF और NPS में वक्त के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड सकता है। यहां ₹2,000, ₹5,000 और ₹12,500 मंथली निवेश का कैलकुलेशन है। इसमें 30 साल तक निवेश की अवधि मानी गई है। PPF पर 7.1% सालाना ब्याज और NPS में 10% सालाना औसत रिटर्न मानकर कैलकुलेशन किया गया है।

हर महीने निवेश30 साल में कुल निवेशPPF में अनुमानित फंड
NPS में अनुमानित फंड

₹2,000₹7.20 लाख₹25.03 लाख₹45.59 लाख
₹5,000₹18 लाख₹62.58 लाख₹1.14 करोड़
₹12,500₹45 लाख₹1.56 करोड़₹2.85 करोड़

दोनों स्कीम में निवेश की अवधि और रकम समान है। फर्क रिटर्न का है। इसी वजह से लंबे समय में NPS में बड़ा फंड बन सकता है।

₹2,000 की मंथली निवेश

अगर आप 30 साल तक हर महीने ₹2,000 निवेश करते हैं, तो कुल ₹7.20 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% के हिसाब से फंड करीब ₹25.03 लाख हो सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.59 लाख पहुंच सकता है। यानी ₹2,000 की छोटी मंथली निवेश भी लंबे समय में अच्छा फंड बना सकती है।

₹5,000 की मंथली निवेश

हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर 30 साल में आपकी जेब से ₹18 लाख जाएंगे। PPF में अनुमानित फंड करीब ₹62.58 लाख बन सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹1.14 करोड़ हो सकता है। यानी PPF के मुकाबले करीब ₹51 लाख ज्यादा फंड बन सकता है।

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₹12,500 की मंथली निवेश

हर महीने ₹12,500 निवेश करने पर 30 साल में कुल ₹45 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% ब्याज के हिसाब से फंड करीब ₹1.56 करोड़ तक पहुंच सकता है।

NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर यही फंड करीब ₹2.85 करोड़ हो सकता है। दोनों के बीच करीब ₹1.29 करोड़ का अंतर है। यह अंतर कंपाउंडिंग और ज्यादा रिटर्न की वजह से बनता है।

NPS में ज्यादा फंड क्यों बन सकता है?

NPS का पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड में लगाया जाता है। इक्विटी की वजह से लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

लेकिन बाजार का जोखिम भी होता है। 10% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। खराब बाजार के दौरान फंड की वैल्यू कम हो सकती है।

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NPS का पूरा पैसा एकमुश्त नहीं मिलेगा

ऊपर टेबल में दिखाया गया NPS का फंड कुल रिटायरमेंट कॉर्पस है। मौजूदा सामान्य नियमों के तहत 60 साल की उम्र पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी पड़ती है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है।

उदाहरण के लिए, ₹12,500 की मंथली निवेश से ₹2.85 करोड़ का कॉर्पस बनता है। इसमें से 60% यानी करीब ₹1.71 करोड़ एकमुश्त मिल सकते हैं। बाकी करीब ₹1.14 करोड़ एन्युटी में जा सकते हैं।

PPF में मैच्योरिटी की रकम आपके हाथ में

PPF की मैच्योरिटी अवधि 15 साल है। इसे तय नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। PPF में बाजार का जोखिम नहीं होता।

सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी की पूरी रकम आपके नियंत्रण में रहती है। आपको एन्युटी खरीदना जरूरी नहीं होता। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?

अगर आपको सुरक्षित रिटर्न चाहिए, तो PPF बेहतर हो सकता है। अगर आपकी उम्र कम है और रिटायरमेंट में काफी समय बाकी है, तो NPS बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकता है।

दोनों में निवेश करना भी एक विकल्प है। इससे बाजार की ग्रोथ और सुरक्षित निवेश, दोनों का फायदा मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Toyota Ebella vs Hyundai Creta Electric real-world range compared

Toyota Ebella vs Hyundai Creta Electric real-world range compared
Toyota Ebella vs Hyundai Creta Electric real-world range compared

The Toyota Urban Cruiser Ebella is one of the newer entrants in the electric midsize SUV segment, which the Hyundai Creta Electric has been a part of since early 2025. Both electric SUVs are rated at over 500km of range by MIDC, but which one travels further on a single charge in the real world? We put the Urban Cruiser Ebella and Creta Electric through our detailed range tests to find out.

Toyota Ebella vs Hyundai Creta Electric: Specifications

 EbellaCreta Electric
Battery capacity (kWh)6151.4
Motor setupSingle, frontSingle, front
Power (hp)174171
Torque (Nm)193255
MIDC range (km)543510
Kerb weight (kg)1,8151,577

The Ebella’s battery pack is nearly 10kWh larger than that of the Creta Electric, allowing the Toyota EV to claim a higher MIDC range. However, the Ebella is nearly 240kg heavier, which can detract from its real-world range. Both electric SUVs are similar in terms of power output, but the Creta Electric develops over 60Nm more torque.

Toyota Ebella vs Hyundai Creta Electric: Real-world range

Despite the Ebella’s battery capacity advantage, the Creta Electric emerged as the overall winner in our real-world range tests. The Hyundai EV formed a 37km lead over the Ebella on the highway, while the Toyota SUV was ahead by 29km in urban conditions. In terms of battery efficiency, the Creta Electric achieved higher numbers across the board.

Toyota Ebella vs Hyundai Creta Electric real-world efficiency

 EbellaCreta Electric
Tested city efficiency (km/kWh)6.377.00
Tested highway efficiency (km/kWh)6.808.80
Tested average efficiency (km/kWh)6.597.90

Averaging the range figures above, the Creta Electric beat the Ebella by a slim 6km margin. With a gap of 104km, the Creta Electric’s real-world range adhered better to its MIDC figure too, while the Ebella recorded a 141km deficit for the same.

Toyota Ebella vs Hyundai Creta Electric: Prices

 Price range (Rs, lakh)
Ebella23.60
Creta Electric (51.4kWh)*20.00-23.67

*Prices exclusive of home charger and installation cost.

The Ebella is available in just one 61kWh variant, which is priced on par with the Creta Electric’s top-spec 51.4kWh version. Since the Creta Electric 51.4kWh is sold in multiple variants, it undercuts the Ebella by up to Rs 3.6 lakh. That said, the Ebella comes bundled with a home charger, while Hyundai charges an extra Rs 73,000 for it.

Autocar India’s range testing

Before our real-world range tests, the battery of our test car was fully charged, and we maintained tyre pressures in accordance with the manufacturer’s recommendations. The car was driven on a weekday in Mumbai city and on the adjoining state highway in a fixed loop, and we maintained the set average speeds. At the end of each cycle, we calculated the range based on the percentage charge consumed.

Throughout our tests, the climate control was set to 22deg C in a full-auto setting, and other electricals, such as the audio system, indicators and ventilated front seats, were used when required, just as a regular user would. We take pride in our testing data, which isn’t merely consistent but also gives users an accurate indication of what they can expect in the real world.

All prices are ex-showroom, India.

Sensex लगातार दूसरे दिन लाल, एक्सपायरी को Nifty 24056 पर बंद, डूबे निवेशकों के ₹3.46 लाख करोड़

Sensex-Nifty closes red: उम्मीद से बेहतर जीडीपी ग्रोथ और निचले स्तर पर वैल्यू बाइंग से मार्केट में तेज रिकवरी आई लेकिन फिर कच्चे तेल के उबाल और बैंकिंग शेयरों की बिकवाली का दबाव अधिक भारी पड़ गया। इस दबाव में डे-हाई से सेंसेक्स 576 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24000 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर मिडकैप स्पेस में अधिक दबाव दिखा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 आज 0.25% कमजोर हुआ तो निफ्टी मिडकैप 100 भी 1.39% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेक्टरवाइज एफएमसीजी और आईटी सेक्टर ने मार्केट को संभालने की काफी कोशिश की जिनके निफ्टी इंडेक्स करीब 1% मजबूत हुए। हालांकि ऑटो, बैंकिंग और फार्मा स्टॉक्स का दबाव अधिक भारी पड़ गया। निफ्टी फार्मा आज करीब डेढ़ फीसदी तो निफ्टी ऑटो और निफ्टी पीएसयू बैंक 1% से अधिक और निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 1% कमजोर हुआ। बिकवाली की इस आंधी में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो महीने के पहले कारोबारी दिन आज 1 सितंबर निफ्टी की वीकली एक्सपायरी को सेंसेक्स (Sensex) 12.99 प्वाइंट्स यानी 0.02% की मामूली फिसलन के साथ 76,944.28 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 24.60 प्वाइंट्स यानी 0.10% की कमजोरी के साथ 24,055.80 पर बंद हुआ है।

इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स और निफ्टी में काफी उठा-पटक दिखी। पहले तो सेंसेक्स 193.01 प्वाइंट्स गिरकर 76,764.26 तक आया था, जिससे फिर यह 467.61 प्वाइंट्स रिकवर होकर 77,231.87 के हाई तक पहुंचा लेकिन फिर इस हाई से यह 575.75 प्वाइंट्स टूटकर 76,656.12 तक आ गया। वहीं निफ्टी भी 70.90 प्वाइंट्स टूटकर 24,009.50 तक आया था, जिससे यह फिर 133.65 प्वाइंट्स ऊपर चढ़कर 24,143.15 तक पहुंचा था लेकिन फिर इस हाई लेवल से यह 190.60 प्वाइंट्स टूटकर 23,952.55 तक आ गया।

डूबे निवेशकों के ₹3.46 लाख करोड़

एक कारोबारी दिन पहले यानी 31 अगस्त 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,91,58,204.57 करोड़ था। आज यानी 1 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,88,11,607.93 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,46,596.64 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 13 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 13 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज आईटीसी, एचसीएलटेक और इंफोसिस सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ मारुति, एसबीआई और इंडिगो में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अफगानिस्तान वनडे के बाद अब टी-20 सीरीज से भी बाहर होने की कगार पर खड़े हार्दिक

जून माह में अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर हुए हार्दिक पांड्या अब इस देश के खिलाफ इस महीने खेली जाने वाली टी-20 सीरीज से भी बाहर हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक उनके पैर में अकड़न है और टीम प्रबंधन उनको जल्द मैदान पर नहीं उतारना चाहता। इससे पहले अफगानिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज में  मांसपेशियां यानि कि हैमस्ट्रिंग के कारण वह बाहर रहे थे।

गौरतलब है कि मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर ने यह कहा था कि हार्दिक पांड्या को दक्षिण अफ्रीका में होने वाले एकदिवसीय विश्वकप के लिए भारतीय टीम में शामिल करने की योजना है।

यह चोट उस योजना को पीछे ढकेलती है क्योंकि एक बार फिर हार्दिक पांड्या की खराब फिटनेस सबके सामने उजागर हो जाती है। वह भी तब जब उनको बैंगलूरू स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से हरी झंडी मिल गई थी।इससे पहले पिछले एकदिवसीय विश्वकप में भी बीच हार्दिक पांड्या टूर्नामेंट चोटिल होकर बाहर हो गए थे।

2 टी-20 विश्वकप जीत चुके हार्दिक पांड्या टी20 टीम में पंड्या की वापसी की संभावना कम लग रही है क्योंकि अगरकर ने साफ कर दिया था कि उनका इस्तेमाल ज्यादातर 50 ओवर प्रारूप में किया जाएगा।अगरकर ने कहा था, ‘‘वह अभी अफगानिस्तान सीरीज के लिए वनडे टीम का हिस्सा हैं। बुमराह की तरह, अगर हम उनसे अच्छा प्रदर्शन करवा सकें और उन्हें वनडे क्रिकेट के लिए फिट रख सकें। इस समय यही मुख्य मक़सद है। ’’

उन्होंने कहा था, ‘‘हम उन्हें कभी भी वापस ला सकते हैं। इससे हमें नितीश रेड्डी जैसे खिलाड़ी को टी20 क्रिकेट में कुछ मौके देने का भी मौका मिलता है। इसलिए पंड्या के मामले में टी20 के लिए थोड़ा आराम और रोटेशन होगा। ’’

Share Market Holiday: 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी पर शेयर बाजार बंद या होगी ट्रेडिंग, क्या कहती है छुट्टियों की लिस्ट

इस साल देश में कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) शुक्रवार, 4 सितंबर की है। इस दिन पूरा देश भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन को बड़ी ही धूमधाम से मनाएगा। इस त्योहार के चलते कई जगहों पर छुट्टी रहेगी। लेकिन शेयर बाजार में इस मौके पर कारोबार बंद नहीं होगा। BSE और NSE पर जन्माष्टमी के दिन भी बाकी कारोबारी दिनों की तरह ही शेयरों की ट्रेडिंग होगी। इसके अलावा कमोडिटीज में ट्रेडिंग का प्लेटफॉर्म MCX (Multi Commodity Exchange) भी खुला रहने वाला है।

वैसे तो शेयर बाजार और MCX हर शनिवार और रविवार को बंद रहते हैं। लेकिन इसके अलावा कुछ दूसरे खास मौकों और सार्वजनिक अवकाशों पर भी इनमें छुट्टी रहती है। शनिवार और रविवार के अलावा सितंबर महीने में अब शेयर बाजार में अगली छुट्टी 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर होगी। BSE पर इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट, करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स, NDS-RST, ट्राई पार्टी रेपो सेगमेंट्स में ट्रेडिंग हॉलिडे है।वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स (EGR) सेगमेंट में शाम का सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) ओपन रहने वाला है।

NSE पर भी 14 सितंबर को इक्विटीज, इक्विटी डेरिवेटिव्स, कॉरपोरेट बॉन्ड्स, न्यू डेट सेगमेंट्स, निगोशिएटेड ट्रेड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स, म्यूचुअल फंड्स, सिक्योरिटी लेंडिंग एंड बॉरोइंग स्कीम्स, करेंसी डेरिवेटिव्स और इंट्रेस्ट रेट डेरिवेटिव्स सेगमेंट्स में छुट्टी रहेगी। वहीं कमोडिटी डेरिवेटिव्स में सुबह के सेशन में ट्रेडिंग बंद रहेगी लेकिन शाम के सेशन (शाम 5 बजे से 11:30/11:55 बजे तक) में ट्रेडिंग चालू रहेगी।

बाकी बचे साल में शनिवार-रविवार के अलावा और कब बाजार रहेगा बंद

2 अक्टूबर: महात्मा गांधी जयंती

20 अक्टूबर: दशहरा

10 नवंबर: दिवाली-बलिप्रतिपदा

24 नवंबर: प्रकाश पर्व श्री गुरु नानक देव

25 दिसंबर: क्रिसमस

शनिवार/रविवार को पड़ रही छुट्टियां

8 नवंबर: दिवाली लक्ष्मी पूजन

दिवाली के मौके पर मुहूर्त ट्रेडिंग रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। मुहूर्त ट्रेडिंग का समय बाद में घोषित किया जाएगा।

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Redmi Note 17 Pro Max 5G India Launch: भारत में जल्द दस्तक देगा Xiaomi का नया स्मार्टफोन, 10,000mAh बैटरी समेत मिलेंगे ये दमदार फीचर्स

Redmi Note 17 Pro Max 5G India Launch: भारत में जल्द दस्तक देगा Xiaomi का नया स्मार्टफोन, 10,000mAh बैटरी समेत मिलेंगे ये दमदार फीचर्स

Redmi Note 17 Pro Max 5G

Xiaomi ने भारत में अपने नए स्मार्टफोन Redmi Note 17 Pro Max 5G के लॉन्च को टीज कर दिया है। कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फोन के भारत आने का संकेत दिया है। हालांकि, अभी तक Xiaomi ने इसकी सटीक लॉन्च डेट का खुलासा नहीं किया है। कंपनी की भारतीय वेबसाइट पर इस स्मार्टफोन के लिए लैंडिंग पेज भी लाइव हो चुका है।

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Redmi Note 17 Pro Max 5G को Xiaomi ने अगस्त में चुनिंदा ग्लोबल मार्केट्स में लॉन्च किया था। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि भारत में आने वाला मॉडल ग्लोबल वेरिएंट के कई प्रमुख स्पेसिफिकेशन्स के साथ पेश किया जा सकता है।

 

6.83 इंच AMOLED डिस्प्ले और 120Hz रिफ्रेश रेट

 

ग्लोबल मॉडल में 6.83 इंच का 1.5K AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। इसका रिफ्रेश रेट 120Hz तक है, जबकि पीक ब्राइटनेस 3,500 निट्स तक बताई गई है। फोन में Snapdragon 6 Gen 5 चिपसेट दिया गया है। यह स्मार्टफोन 8GB RAM और अधिकतम 512GB स्टोरेज के साथ आता है। सॉफ्टवेयर की बात करें तो इसमें Android 16 पर आधारित HyperOS 3 दिया गया है।

 

50MP कैमरा और 4K वीडियो रिकॉर्डिंग

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कैमरा सेटअप की बात करें तो Redmi Note 17 Pro Max 5G में 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है, जो OIS सपोर्ट करता है। इसके साथ 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिलता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 32MP फ्रंट कैमरा दिया गया है। फोन के फ्रंट और रियर दोनों कैमरों से 4K वीडियो 30fps पर रिकॉर्ड किया जा सकता है।

10,000mAh की बड़ी बैटरी

 

Redmi Note 17 Pro Max 5G की सबसे बड़ी खासियत इसकी 10,000mAh सिलिकॉन-कार्बन बैटरी है। इसे 100W वायर्ड फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। फोन को IP66 और IP68 रेटिंग भी दी गई है।

 

कनेक्टिविटी के लिए इसमें 5G, Wi-Fi 6, Bluetooth 6.0 और NFC जैसे फीचर्स मिलते हैं।

 

भारत में कितनी हो सकती है कीमत?

 

जापान में Redmi Note 17 Pro Max 5G के 8GB + 256GB वेरिएंट की शुरुआती कीमत JPY 79,980 (लगभग 47,900 रुपए) है। वहीं 8GB + 512GB मॉडल की कीमत JPY 99,980 (लगभग 59,900 रुपए) है। ग्लोबल मॉडल Black, Cloudbrush और Purple कलर ऑप्शन में उपलब्ध है। हालांकि, भारत में इसकी कीमत, वेरिएंट और कलर ऑप्शन की आधिकारिक जानकारी लॉन्च के समय ही सामने आएगी।

 

नोट: भारत में कीमत और स्पेसिफिकेशन्स को लेकर Xiaomi की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।