क्या है सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और इसके लिए कोर्ट क्या सजा देती है?

क्या है सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और इसके लिए कोर्ट क्या सजा देती है?

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-समीरात्मज मिश्र

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पाबंदियां लगाने से जुड़े एक मामले में केंद्रीय गृह सचिव समेत तीन वरिष्ठ अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया। अधिकारियों ने अदालत में माफी मांगी, हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनके स्पष्टीकरण और माफी के स्वरूप पर सवाल उठाए। ALSO READ: कमजोर मानसून के बाद भारत में पानी और बिजली की किल्लत

 

दो दिन पहले ही एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के खिलाफ उनकी टिप्पणियों पर अवमानना नोटिस जारी किया। इन मामलों ने एक बार फिर अदालत की अवमानना को लेकर बहस शुरू कर दी है। आखिर अवमानना क्या होती है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट क्या सजा दे सकता है।

 

अदालत की अवमानना क्या होती है?

भारत में अदालत की अवमानना मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है— दीवानी अवमानना और आपराधिक अवमानना। इनके प्रावधान अदालत की अवमानना एक्ट 1971 में दिए गए हैं।

 

दीवानी अवमानना तब हो सकती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर अदालत के फैसले, आदेश या निर्देश का पालन नहीं करता। अदालत के सामने किए गए किसी वादे का जानबूझकर उल्लंघन भी इसके दायरे में आ सकता है।

 

विरोध-प्रदर्शनों पर पाबंदियों से जुड़ा हालिया मामला इसी सवाल के इर्द-गिर्द है। अदालत के सामने आरोप लगाया गया कि सीजेपी के प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से उठाए गए कुछ कदम मसलन, इंटरनेट बंद करना, मेट्रो और ट्रेनों के संचालन को रोकना उसके पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से जवाब मांगा और यह स्पष्ट करने को कहा कि संबंधित कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई।

 

सुप्रीम कोर्ट में अवमानना नोटिस के जवाब में अधिकारियों का कहना था कि उन्होंने जानबूझकर अवमानना नहीं की बल्कि ये कदम सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाए गए थे।

 

दूसरी तरफ आपराधिक अवमानना का संबंध ऐसे कामों से है जो अदालत की प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हों, न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालते या न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करते हों। इसमें लिखित और मौखिक बयान दोनों शामिल हो सकते हैं।

 

हालांकि इसका यह मतलब भी नहीं है कि अदालत के हर फैसले की आलोचना अवमानना है। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील रवींद्र गड़िया कहते हैं, “न्यायिक फैसलों के तर्कों पर सवाल उठाना और उनकी आलोचना करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है लेकिन सवाल यह है कि आलोचना कहां तक वैध है और किस बिंदु पर वह न्याय प्रशासन में बाधा डालने वाली कार्रवाई बन जाती है।” ALSO READ: प्रदर्शन का हक बनाम पुलिस की पाबंदी, क्या कहता है संविधान

 

अवमानना के लिए सुप्रीम कोर्ट कितनी सजा दे सकता है?

अदालत की अवमानना के लिए सजा का प्रावधान कानून में स्पष्ट है। अदालत की अवमानना एक्ट 1971 की धारा 12 के मुताबिक, दोषी पाए जाने पर अधिकतम छह महीने की साधारण कैद, दो हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

 

हालांकि कानून में माफी का भी प्रावधान है। यानी अगर अदालत को लगता है कि संबंधित व्यक्ति की माफी पर्याप्त और स्वीकार करने योग्य है, तो वह आरोप से मुक्त कर सकती है या सजा माफ कर सकती है। दीवानी अवमानना के कुछ मामलों में अदालत दोषी व्यक्ति को सिविल जेल भेजने का आदेश भी दे सकती है।

 

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अवमानना का नोटिस मिलते ही जेल जाना तय हो जाता है। रवींद्र गड़िया के मुताबिक, “पहले अदालत को आरोपों, उपलब्ध सामग्री और संबंधित व्यक्ति के जवाब पर विचार करना होता है। उसके बाद ही दोष और सजा पर फैसला लिया जा सकता है। अदालत यह भी देखती है कि उल्लंघन जानबूझकर किया गया था या नहीं, संबंधित व्यक्ति ने बाद में क्या कदम उठाए और क्या न्यायिक आदेश का पालन सुनिश्चित हो गया है। इन सबकी पड़ताल करने के बाद ही सजा पर फैसला होता है।”

 

दिलचस्प तथ्य यह है कि अदालतों में अवमानना के मामले तो बड़ी संख्या में दायर होते हैं लेकिन उनमें सजा बहुत कम मामलों में हो पाती है। लीगल-टेक कंपनी द प्रोफेसर वकीलों और मुकदमा लड़ने वाले लोगों को अदालतों से जुड़े डेटा का विश्लेषण उपलब्ध कराने पर काम करती है। कंपनी के विश्लेषण के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में सिविल अवमानना के कुल 5,566 मामले लंबित हैं या उन पर कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें विभिन्न पक्षों की तरफ से दायर 5,533 याचिकाएं और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से खुद शुरू किए गए 33 मामले शामिल हैं।

 

अवमानना मामलों में सजा की दर इतनी कम क्यों है?

विश्लेषण से पता चलता है कि अवमानना के सिर्फ बीस मामलों में यानी करीब आधे फीसदी मामलों में अवमानना के दोषी व्यक्ति को वास्तव में जेल या जुर्माने की सजा दी गई। कुछ मामलों में व्यक्ति को दोषी तो ठहराया गया, लेकिन जेल की सजा नहीं दी गई जबकि करीब 1।5 फीसदी मामलों को अदालत की तरफ से माफी स्वीकार किए जाने के बाद बंद कर दिया गया। वहीं, 98 प्रतिशत यानी 3,600 मामले ऐसे थे, जिनमें संबंधित व्यक्ति ने अदालत के आदेश का पालन कर लिया या मामले को खारिज कर दिया गया अथवा याचिका वापस ले ली गई।

 

सुप्रीम कोर्ट के वकील दुष्यंत पराशर कहते हैं कि सजा की कम दर की एक वजह यह है कि अवमानना की हर याचिका का मकसद संबंधित व्यक्ति को दंडित करवाना नहीं होता। डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहते हैं, “कई बार याचिका इसलिए दायर की जाती है ताकि अदालत के पहले के आदेश का पालन सुनिश्चित हो सके। अगर संबंधित पक्ष आदेश का पालन कर देता है, तो अदालत को अलग से सजा देना जरूरी नहीं लगता। इसलिए अवमानना कानून का मकसद केवल दंड देना नहीं, बल्कि न्यायिक आदेशों का सम्मान सुनिश्चित करना और न्याय प्रशासन को बाधित होने से बचाना भी है।”

 

अदालत की अवमानना से संबंधित कुछ चर्चित मामले

अदालत की आलोचना और अवमानना के बीच की सीमा पर बहस करने वाले मामलों में सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण का मामला काफी चर्चित है। साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके दो ट्वीट्स को आपराधिक अवमानना माना। इन टिप्पणियों में न्यायपालिका और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए एक रुपये का सांकेतिक जुर्माना लगाया जिसे उन्हें भरना पड़ा था। ऐसा नहीं करने पर उन्हें तीन महीने की कैद और वकालत पर पाबंदी लग सकती थी।

 

इसी तरह लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय को भी साल 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अवमानना के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें एक दिन की साधारण कैद और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

 

हालांकि कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश सीएस कर्णन का मामला काफी चर्चित रहा। साल 2017 में जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई जजों पर खुले तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई। उस समय कर्णन हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश थे।

 

निशिकांत दुबे के मामले में खुद संज्ञान लेने की मांग

अप्रैल 2025 में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की सुप्रीम कोर्ट और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ टिप्पणियों को लेकर अवमानना की कार्रवाई की मांग उठी थी। निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को ‘देश में गृहयुद्ध भड़काने के लिए जिम्मेदार’ बताया था।

 

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर अनुरोध किया गया कि अदालत इन टिप्पणियों पर खुद संज्ञान लेकर उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करे। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उनकी टिप्पणियों को गैर-जिम्मेदाराना बताया।

 

लेकिन इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया कि किसी बयान को अनुचित या गैर-जिम्मेदाराना मानना और उसे कानूनी रूप से अवमानना मानना क्या अलग-अलग चीजें हैं।

 

सरकारी विभागों के अफसर कई बार ऐसा करते हैं कि अवमानना मामलों में अदालत से माफी मांग लेते हैं लेकिन उनकी कार्यशैली में कोई फर्क नहीं पड़ता। हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शनों से निपटने के मामले हों या फिर बुलडोजर कार्रवाइयों को लेकर अफसरों को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, अदालती आदेशों की अवहेलना कई बार दिखी है।

 

दुष्यंत पराशर इसे खतरनाक स्थिति बताते हैं, “जब सरकारें यह समझ लेती हैं कि अदालत आदेश देती रहे, हमें तो वही करना है जो हमारे फायदे में है, तब आम जनता का न्याय प्रणाली से भरोसा उठने लगता है। अगर अवमानना की कार्रवाई केवल कागजी नोटिस तक सीमित रह जाएगी और दोषी अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तो अवमानना का खौफ पूरी तरह खत्म हो जाएगा।”

 

दरअसल, अवमानना का नोटिस अपने आप में सजा नहीं है लेकिन यह बताता है कि अदालत अपने आदेशों के पालन को गंभीरता से ले रही है। अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि जानबूझकर अवहेलना साबित होती है या नहीं और संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण अदालत को संतुष्ट करता है या नहीं।

मुफ्त प्लॉट के लिए फर्जी मुठभेड़ कर 10 को फंसाया, 35 साल बाद 12 पुलिसकर्मियों पर केस

 कानपुर में 35 साल पहले दिखाई गई पुलिस मुठभेड़ फर्जी निकली। आरोप था कि मुफ्त में प्लॉट नहीं देने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष ने 10 लोगों को मुठभेड़ में फंसाकर उनके पास अवैध असलहे और विस्फोटक बरामद दिखाए थे। अब सीआईडी की जांच में 18 पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं।

जुहू में फायरिंग के दौरान बारूद से झुलसा टाइगर श्रॉफ का हाथ, एकनाथ शिंदे ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

Tiger Shroff Attack: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को अभिनेता टाइगर श्रॉफ से उनके घर पर मुलाकात की। उन्होंने बताया कि मुंबई के जुहू इलाके में गोलीबारी की घटना के दौरान टाइगर श्रॉफ के दाहिने हाथ पर बारूद से जलने के निशान आए हैं। हालांकि, उन्होंने इस घटना को गंभीर बताया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। शिंदे ने चेतावनी दी कि मुंबई में किसी भी गैंग या व्यक्ति को फिर से गैंगवार शुरू करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

डिप्टी सीएम ने बताया कि रविवार शाम को एक फुटबॉल मैच खेलने के बाद जब टाइगर श्रॉफ अपनी BMW कार से निकल रहे थे, तो उन पर पांच राउंड फायरिंग की गई। हालांकि, अभिनेता को गोली नहीं लगी, लेकिन इस घटना में उनके ड्राइवर फिरदौस और एक ऑटो-रिक्शा चालक घायल हो गए।

वहीं टाइगर से मिलने के बाद, शिंदे ने बताया कि अभिनेता के दाहिने हाथ में चोट आई है, जो फायरिंग के दौरान बारूद से जल गया था। उन्होंने आगे कहा कि अभिनेता का परिवार और उनकी मां अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि उनकी किसी से कोई लड़ाई या दुश्मनी नहीं है।

डिप्टी सीएम ने टाइगर श्रॉफ के परिवार को दिलाया भरोसा

शिंदे ने कहा, “मैं अभी उनसे मिला और बात की। उनके दाहिने हाथ में चोट आई है। बारूद की वजह से उनका हाथ जल गया है।” उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार उनके साथ खड़ी है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार और पुलिस इस मामले को प्राथमिकता देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि धमकियों का सामना कर रहे मशहूर हस्तियों की सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी कि आम जनता की।

उन्होंने कहा, “मुंबई में किसी भी गिरोह या व्यक्ति को डराने-धमकाने या गुंडागर्दी करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना को गंभीरता से लिया है।

एकनाथ शिंदे की मशहूर हस्तियों से अपील

शिंदे ने मशहूर हस्तियों से यह भी अपील की कि अगर उन्हें धमकी भरे कॉल आते हैं, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी।

उन्होंने कहा, “मैं बस इतना ही कहूंगा कि जिस तरह 1990 के दशक में गैंगवार को खत्म कर दिया गया था, उसी तरह हम उन्हें मुंबई में वापस नहीं आने देंगे।”

टाइगर श्रॉफ पर गोलीबारी की घटना के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती और अभिनेता से बात की। फडणवीस ने पुलिस कमिश्नर से घटना की पूरी जानकारी ली और हमलावरों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। उन्होंने जांच में तेजी लाने और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को भी कहा।

हमले के पीछे बाइक सवार हमलावर

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तीन लोग एक मोटरसाइकिल पर आए थे। इनमें से दो ने कथित तौर पर फायरिंग की, जबकि तीसरा व्यक्ति बाइक पर ही इंतजार कर रहा था ताकि वे आसानी से भाग सकें। घटना के बाद सामने आए एक वीडियो में हमलावरों में से एक कई राउंड फायरिंग करता दिख रहा है, जबकि दूसरा भी गोली चलाने की कोशिश करता नजर आ रहा है। इसके बाद संदिग्धों को मोटरसाइकिल पर भागते हुए देखा गया।

एक चश्मदीद ने बताया कि फायरिंग से करीब आधा घंटा पहले इन संदिग्धों को एक वड़ा पाव स्टॉल के पास देखा गया था। चश्मदीद के अनुसार, दो लोगों ने फायरिंग की, जबकि तीसरा व्यक्ति उन्हें वहां से भगाने में मदद कर रहा था। बताया जा रहा है कि संदिग्ध एक पुरानी पल्सर मोटरसाइकिल पर सवार थे।

चश्मदीद के मुताबिक, गोलियां चलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हमलावरों ने BMW कार की उस तरफ निशाना लगाकर गोलियां चलाईं, जहां टाइगर श्रॉफ के ड्राइवर बैठे थे। चश्मदीद ने यह भी दावा किया कि ड्राइवर के घायल होने के बाद उसे पिछली सीट पर बैठाया गया और फिर टाइगर खुद कार चलाकर उसे अस्पताल ले गए।

एक अन्य चश्मदीद ने बताया कि गोलीबारी के समय टाइगर श्रॉफ ड्राइवर के बगल वाली आगे की सीट पर बैठे थे। हालांकि, चश्मदीदों के इन दावों की पुलिस जांच के बाद ही पुष्टि हो सकेगी।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली हमले की जिम्मेदारी

इस बीच, विदेश में रहने वाले बताए जा रहे गैंगस्टर अनिल पंडित और हरमन संधू के नाम से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई है। इस पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया है।

फिलहाल, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हमलावरों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिश की जा रही है। इस सिलसिले में पुलिस ने पूछताछ के लिए एक व्यक्ति को हिरासत में भी लिया है।

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Top News 19 October: फायरिंग में बाल-बाल बचे टाइगर श्रॉफ, पेट्रोल में गन्ने वाला इथेनॉल मिलाने पर रोक

Top News 19 October: फायरिंग में बाल-बाल बचे टाइगर श्रॉफ, पेट्रोल में गन्ने वाला इथेनॉल मिलाने पर रोक

top news 19 october

Top News 19 October: फायरिंग में बाल बाल बचे टाइगर श्राफ, पेट्रोल में गन्ने वाला इथेनॉल मिलाने पर रोक, CEC के खिलाफ 23 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन, अमित शाह 20 अक्टूबर को पंजाब जाएंगे, भारत ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से हराया। पल पल की जानकारी…

 

टाइगर श्राफ पर फायरिंग

मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ गोलीबारी में बाल-बाल बच गए। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली हमले की जिम्मेदारी। ताबड़तोड़ फायरिंग की इस घटना से महाराष्ट्र में सियासी पारा चढ़ा। विपक्षी दलों ने कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस को कटघरे में खड़ा किया है। शिवसेना नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने देर रात अभिनेता से उनके आवास पर मुलाकात की। ALSO READ: अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग, घटना का वाडियो आया सामने, मामले की जांच में जुटी पुलिस

 

पेट्रोल में गन्ने वाला इथेनॉल मिलाने पर रोक

केंद्र सरकार ने चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए गन्ने से बने इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने पर रोक लगा दी है। अब मक्का, टूटे चावल व अन्य पदार्थों से बने इथेनॉल का मिश्रण किया जाएगा। पेट्रोलियम कंपनियों से जारी निविदा में मक्के से बने इथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि भी घटाकर 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई।

 

CEC के खिलाफ 23 अक्टूबर को देशव्यापी प्रदर्शन

‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ नाम के नए बने मंच ने 23 अक्तूबर को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का बड़ा एलान किया है। संगठन ने संसद से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाकर उन्हें पद से हटाने और उन पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। इस संगठन का आरोप है कि एसआईआर की आड़ में देश के करोड़ों नागरिकों के मताधिकार छीन लिए गए हैं। 

 

अमित शाह का पंजाब दौरा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 अक्टूबर को पंजाब के दौरे पर आएंगे। इस दौरान वह मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात कर सकते हैं। झोटा की 13 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

 

भारत ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से हराया

भारतीय महिला टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में एकतरफा अंदाज में जीत दर्ज की। रविवार को खेले गए मैच में भारत ने जिम्बाब्वे को 9 विकेट से हराया। जिम्बाब्वे ने मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए 102 रन बनाए। भारतीय बल्लेबाजों ने महज 8.5 ओवर में 103 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया।

Gold Price Today: महानवमी पर सोने में गिरावट, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक इतना रह गया भाव

देश में सोने की कीमत और नीचे आ गई है। 19 अक्टूबर को महानवमी की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। मुंबई में भाव 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम है। बीते सप्ताह अलग-अलग शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 3760 रुपये तक ​फिसली। वहीं 22 कैरेट गोल्ड 3450 रुपये तक सस्ता हुआ।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,165.12 डॉलर प्रति औंस पर है। बीते सप्ताह सोने का वैश्विक भाव ​0.7 प्रतिशत कमजोर हुआ। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 147800 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 135340 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147650 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 135340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली135490147800
मुंबई135340147650
अहमदाबाद135390147700
चेन्नई135340147650
कोलकाता135340147650
हैदराबाद135340147650
जयपुर135490147800
भोपाल135390147700
लखनऊ135490147800
चंडीगढ़135490147800

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चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट दिख रही है। 19 अक्टूबर की सुबह चांदी 229900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। बीते सप्ताह चांदी का भाव 10000 रुपये नीचे आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 57.05 डॉलर प्रति औंस है। इस साल जनवरी में देश के अंदर चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थी।

Tiger Shroff Firing: एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग का पहला वीडियो आया सामने, गोलियों की आवाज से मायानगरी में मची अफरा-तफरी

Tiger Shroff Firing: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाकर की गई कथित फायरिंग की घटना से जुड़ा पहला वीडियो सामने आया है। मुंबई के जुहू इलाके में हुई इस फायरिंग के वीडियो में गोली चलने की आवाजें सुनाई देने और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल दिखाई दे रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर गोलियां चलाई थीं। सामने आए वीडियो में टोपी पहने दो संदिग्ध टाइगर श्रॉफ की ओर फायरिंग करते नजर आ रहे हैं। एक आरोपी ने सामने से, जबकि दूसरे ने भीड़ के बीच से गोली चलाई। वारदात के बाद दोनों फरार हो गए, जिनमें से एक मोटरसाइकिल के जरिए मौके से भाग निकला। इस घटना में अभिनेता को कोई चोट नहीं आई। जबकि उनके ड्राइवर और एक ऑटो रिक्शा चालक के घायल होने की खबर है।

वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की जांच में अब हमलावरों की पहचान करने और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने के लिए सीसीटीवी फुटेज अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, मामले में हमलावरों की पहचान और फायरिंग के पीछे की वजह की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई गिरोह ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

मौके पर मची अफरा-तफरी

सामने आए कथित वीडियो में फायरिंग के दौरान का तनावपूर्ण माहौल दिखाई देता है। फुटेज में गोलियों की आवाजें सुनाई देने का दावा किया गया है। घटना के दौरान लोग अचानक हुई गोलीबारी से घबराते नजर आते हैं और मौके पर अफरा-तफरी मच जाती है। वीडियो के एक हिस्से में एक व्यक्ति को ‘टाइगर भाई’ कहते हुए भी सुना जा सकता है। इस फुटेज को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे हमलावरों की गतिविधियों और घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है।

हमले के बाद एक्टर ने खुद दौड़ाई कार

एक वायरल वीडियो में ड्राइवर को चोट लगने के बाद टाइगर खुद कार चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वारदात के ठीक बाद टाइगर ने बहुत सूझबूझ दिखाई। गोलीबारी की घटना के बाद वह खुद कार से बाहर नहीं निकले, बल्कि अंदर ही ड्राइवर सीट बदल ली। वह जानते थे कि कार के बाहर अभी खतरा हो सकता है, इसलिए यही जगह उन्हें सबसे सुरक्षित दिखी।

जुहू के पुष्पा पार्क के पास हुई थी फायरिंग

जानकारी के मुताबिक, रविवार शाम मुंबई के जुहू इलाके में पुष्पा पार्क के पास यह घटना हुई। आरोप है कि बाइक पर आए अज्ञात लोगों ने टाइगर श्रॉफ की गाड़ी को निशाना बनाकर फायरिंग की।

घटना के समय टाइगर श्रॉफ सुरक्षित थे। हालांकि, उनके ड्राइवर और एक ऑटो रिक्शा चालक के घायल होने की सूचना सामने आई है।

घायलों की स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। फायरिंग की सूचना मिलने के बाद मुंबई पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस की कई टीमें हमलावरों की पहचान करने, उनके आने-जाने के रास्ते का पता लगाने और वारदात के पीछे की वजह समझने में जुटी हैं। घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम से कथित ऑडियो वायरल

फायरिंग की घटना के बाद एक कथित ऑडियो संदेश भी सामने आया। इस मैसेज में अनिल पंडित नाम से अपनी पहचान बताने वाले एक व्यक्ति और हरमन संधू ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। संदेश में सलमान खान से जुड़े फिल्म उद्योग के लोगों को भी धमकी दिए जाने की बात कही गई है।

हालांकि, इस ऑडियो की प्रामाणिकता और फायरिंग में कथित गैंग की भूमिका की पुलिस की ओर से स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि फायरिंग के पीछे व्यक्तिगत रंजिश, धमकी या कोई अन्य वजह थी। कथित ऑडियो और घटना के बीच संबंध स्थापित करने के लिए भी जांच जरूरी है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस कमिश्नर से की बात

घटना के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती से बातचीत की। उन्होंने मामले की गहन जांच करने और वारदात के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी टाइगर श्रॉफ और उनके परिवार से मुलाकात। उन्होंने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया और अभिनेता को सुरक्षा का आश्वासन दिया।

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अब हमलावरों की पहचान पर पुलिस की नजर

फायरिंग का कथित वीडियो सामने आने के बाद पुलिस के लिए हमलावरों की पहचान करना जांच का प्रमुख हिस्सा बन गया है। सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य और दूसरे तकनीकी इनपुट के आधार पर वारदात की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। फिलहाल सबसे अहम सवाल यही हैं कि हमलावर कौन थे, उन्होंने टाइगर श्रॉफ की गाड़ी को ही निशाना क्यों बनाया और क्या इस घटना का कथित धमकी भरे ऑडियो से कोई संबंध है। इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।

Petrol Diesel Price Today: 19 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, जानें अपने शहर का भाव

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 19 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

5 things to know about the Hero Xtreme 250R Carbon

5 things to know about the Hero Xtreme 250R Carbon
Xtreme 250R Carbon in black colour parked at the launch event

Hero MotoCorp has introduced a new Xtreme 250R Carbon variant with a substantial feature overhaul, adding multiple hardware and tech updates. Here are the five things you need to know about the bike.

1. What’s new on the updated Hero Xtreme 250R?

The Xtreme 250R Carbon features ride-by-wire, which unlocks four riding modes – Rain, Road, Sport and Track – along with traction control calibrated individually for each mode. A bi-directional quickshifter, cruise control and TPMS have also been added. In terms of tech, the LCD instrument cluster has been replaced by a 4.2-inch TFT screen borrowed from the Xpulse 210.

The rear suspension gets Frequency Selective Damping (FSD), a system that uses a secondary valve to automatically vary damping across two distinct profiles based on the speed and frequency of road inputs. It stiffens up to absorb high-frequency impacts, such as road chatter, and softens for longer, slower compressions, such as when going over a speed breaker.

2. What does the Hero Xtreme 250R engine have to offer?

The 249cc liquid-cooled, single-cylinder engine is carried over largely unchanged, producing 30hp at 9,250rpm and 25.3Nm at 7,500rpm. The latter represents a minor 0.3Nm increase over the outgoing bike, delivered 250rpm higher in the rev range.

3. Which is faster, the KTM 250 Duke or the Hero Xtreme 250R?

We found the Hero Xtreme 250R to be the quicker of the two during our tests. The KTM 250 Duke completed the 0-60kph run in 3.44 seconds and the 0-100kph run in 8.50 seconds. The Xtreme 250R, tested on the same day, completed the same runs in 3.15 seconds and 8.22 seconds, respectively.

It’s worth noting that these figures are for the standard Xtreme 250R. However, the engine remains largely unchanged, and Hero’s claimed 0-60kph time for the Carbon is identical to that of the standard model, so we expect the updated bike’s performance to be largely similar.

4. What is the price of the updated Hero Xtreme 250R Carbon?

The Hero Xtreme 250R Carbon is priced at Rs 1.98 lakh (ex-showroom, Delhi), a Rs 14,000 premium over the standard Xtreme 250R following an Rs 11,000 price hike for the standard model alongside the introduction of the Carbon variant. Despite the premium, the Carbon remains notably more affordable than the KTM 250 Duke, which costs Rs 2.28 lakh.

5. What colours is the new Xtreme 250R available in?

The Hero Xtreme 250R Carbon is offered in three colours: Carbon Red, Carbon Black and Carbon White. Along with the new colours, the Carbon variant also gets coloured wheels and exclusive graphics.

फ्रांस में बार-बार क्यों भड़कते हैं प्रदर्शन:पेंशन से लेकर महंगाई तक, सरकार के फैसलों पर सड़कों पर उतर आते हैं लोग

फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ बड़े विरोध में बदल गया है। अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को देशभर में हुए प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे। पेरिस में करीब 1.10 लाख लोगों ने मार्च निकाला। कई जगह पुलिस से झड़प, दुकानों में लूटपाट और सरकारी इमारतों में आगजनी हुई। पेरिस और आसपास के इलाकों में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस आंदोलन ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि दुनिया के अमीर देशों में शामिल फ्रांस को लगातार आंदोलनों का सामना क्यों करना पड़ता है… 1. फ्रांस में प्रदर्शन करना लोगों की आदत नहीं, ताकत है फ्रांस में सरकार के फैसलों के खिलाफ सड़क पर उतरना कोई नई बात नहीं है। यहां छात्र, कर्मचारी और आम लोग अपनी मांगें मनवाने के लिए प्रदर्शन और हड़ताल करते रहे हैं। इसके पीछे फ्रांस का इतिहास भी एक बड़ी वजह है। 2. ट्रेड यूनियन और हड़तालें आंदोलन को बड़ा बनाती हैं फ्रांस में ट्रेड यूनियन कर्मचारियों को एकजुट कर बड़े पैमाने पर हड़तालें आयोजित करती हैं। इसका असर तब ज्यादा होता है, जब परिवहन, स्कूल और दूसरे सरकारी विभागों के कर्मचारी एक साथ काम बंद कर देते हैं। 1995 में इसका बड़ा उदाहरण देखने को मिला। तत्कालीन प्रधानमंत्री एलेन जुप्पे की सरकार ने पेंशन में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। इसके विरोध में रेलवे समेत कई क्षेत्रों के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। फ्रांस में रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और पेरिस में लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई। कई हफ्तों तक चले विरोध के बाद सरकार को अपनी प्रस्तावित योजना के अहम हिस्से वापस लेने पड़े। 3. फ्रांस में अमीर-गरीब की खाई भी विरोध की वजह फ्रांस में अमीर और गरीब के बीच आर्थिक असमानता लंबे समय से एक मुद्दा रही है। इसका असर सिर्फ लोगों की कमाई और जीवनशैली पर नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और आगे बढ़ने के अवसरों पर भी पड़ता है। फ्रांस की सरकारी संस्था INSEE के मुताबिक, देश के सबसे अमीर 10% परिवारों के पास कुल संपत्ति का करीब 47% हिस्सा है। वहीं, सबसे कम संपत्ति वाले 50% परिवारों के पास सिर्फ 8% संपत्ति है। यानी देश की आधी आबादी के मुकाबले अमीर परिवारों के पास कहीं ज्यादा संपत्ति है। आर्थिक असमानता का असर बच्चों की पढ़ाई में भी दिखाई देता है। OECD की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस में अमीर परिवारों के बच्चों ने गणित में गरीब परिवारों के बच्चों के मुकाबले औसतन 113 अंक ज्यादा हासिल किए। 4. स्कूलों की खस्ता हालत भी 2026 में आंदोलन की वजह बनी फ्रांस स्कूलों की खराब हालत 2026 के आंदोनल की बड़ी वजह बनी। छात्रों की शिकायत है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और इसका असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। इसके पीछे फ्रांस की आर्थिक तंगी और उस पर बढ़ते कर्ज को भी वजह बताया जा रहा है। फ्रांस का सरकारी कर्ज उसकी GDP के 119.3% के बराबर है। धीमी आर्थिक विकास दर और कर्ज पर बढ़ते ब्याज के कारण सरकार पर बजट संभालने का दबाव है। सरकार को रक्षा, अस्पताल, नई तकनीक और जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे क्षेत्रों पर भी खर्च करना है। ऐसे में शिक्षा सहित अलग-अलग क्षेत्रों के लिए बजट तय करना चुनौती बन गया है। 5. फ्रांस में आंदोलन का असर यूरोप पर क्यों पड़ सकता है? फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों का असर यूरोप के दूसरे देशों की राजनीति पर भी पड़ सकता है। महंगाई, प्रवासन और सरकार की नीतियों से पहले से नाराज लोगों के बीच फिलिस्तीन के झंडे दिखने और दुकानों में लूटपाट के आरोप राष्ट्रीय पहचान और कानून-व्यवस्था पर बहस तेज कर सकते हैं। यूरोप में आर्थिक असंतोष नया नहीं है। फ्रांस के येलो वेस्ट आंदोलन से लेकर जर्मनी और ब्रिटेन में महंगाई के खिलाफ हुए प्रदर्शनों तक, जीवन-यापन का बढ़ता खर्च लोगों की नाराजगी की बड़ी वजह रहा है। वहीं, सीमा सुरक्षा और प्रवासन को लेकर भी कई देशों में बहस जारी है। ऐसे माहौल में फ्रांस में मरीन ले पेन की नेशनल रैली, जर्मनी में AfD और इटली में जॉर्जिया मेलोनी की पार्टी जैसे दक्षिणपंथी दलों को अपने मुद्दे उठाने का मौका मिल सकता है। फ्रांस में लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता रहने से रक्षा, प्रवासन और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर यूरोपीय देशों के बीच सहमति बनाना भी मुश्किल हो सकता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें…. फ्रांस में दुकानों से आईफोन लूटे, पुलिस को दौड़ाया:जोकर, कैप्टन अमेरिका बनकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, 143 साल पुरानी इमारत में आग लगाई; 15 PHOTOS फ्रांस में महंगाई के खिलाफ शनिवार को 8 लाख लोग सड़कों पर उतर आए। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों पर पत्थर फेंके और पुलिसकर्मियों को दौड़ाया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

फ्रांस में बार-बार क्यों भड़कते हैं प्रदर्शन:पेंशन से लेकर महंगाई तक, सरकार के फैसलों पर सड़कों पर उतर आते हैं लोग

फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ बड़े विरोध में बदल गया है। अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को देशभर में हुए प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे। पेरिस में करीब 1.10 लाख लोगों ने मार्च निकाला। कई जगह पुलिस से झड़प, दुकानों में लूटपाट और सरकारी इमारतों में आगजनी हुई। पेरिस और आसपास के इलाकों में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस आंदोलन ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि दुनिया के अमीर देशों में शामिल फ्रांस को लगातार आंदोलनों का सामना क्यों करना पड़ता है… 1. फ्रांस में प्रदर्शन करना लोगों की आदत नहीं, ताकत है फ्रांस में सरकार के फैसलों के खिलाफ सड़क पर उतरना कोई नई बात नहीं है। यहां छात्र, कर्मचारी और आम लोग अपनी मांगें मनवाने के लिए प्रदर्शन और हड़ताल करते रहे हैं। इसके पीछे फ्रांस का इतिहास भी एक बड़ी वजह है। 2. ट्रेड यूनियन और हड़तालें आंदोलन को बड़ा बनाती हैं फ्रांस में ट्रेड यूनियन कर्मचारियों को एकजुट कर बड़े पैमाने पर हड़तालें आयोजित करती हैं। इसका असर तब ज्यादा होता है, जब परिवहन, स्कूल और दूसरे सरकारी विभागों के कर्मचारी एक साथ काम बंद कर देते हैं। 1995 में इसका बड़ा उदाहरण देखने को मिला। तत्कालीन प्रधानमंत्री एलेन जुप्पे की सरकार ने पेंशन में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। इसके विरोध में रेलवे समेत कई क्षेत्रों के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। फ्रांस में रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और पेरिस में लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई। कई हफ्तों तक चले विरोध के बाद सरकार को अपनी प्रस्तावित योजना के अहम हिस्से वापस लेने पड़े। 3. फ्रांस में अमीर-गरीब की खाई भी विरोध की वजह फ्रांस में अमीर और गरीब के बीच आर्थिक असमानता लंबे समय से एक मुद्दा रही है। इसका असर सिर्फ लोगों की कमाई और जीवनशैली पर नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और आगे बढ़ने के अवसरों पर भी पड़ता है। फ्रांस की सरकारी संस्था INSEE के मुताबिक, देश के सबसे अमीर 10% परिवारों के पास कुल संपत्ति का करीब 47% हिस्सा है। वहीं, सबसे कम संपत्ति वाले 50% परिवारों के पास सिर्फ 8% संपत्ति है। यानी देश की आधी आबादी के मुकाबले अमीर परिवारों के पास कहीं ज्यादा संपत्ति है। आर्थिक असमानता का असर बच्चों की पढ़ाई में भी दिखाई देता है। OECD की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस में अमीर परिवारों के बच्चों ने गणित में गरीब परिवारों के बच्चों के मुकाबले औसतन 113 अंक ज्यादा हासिल किए। 4. स्कूलों की खस्ता हालत भी 2026 में आंदोलन की वजह बनी फ्रांस स्कूलों की खराब हालत 2026 के आंदोनल की बड़ी वजह बनी। छात्रों की शिकायत है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और इसका असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। इसके पीछे फ्रांस की आर्थिक तंगी और उस पर बढ़ते कर्ज को भी वजह बताया जा रहा है। फ्रांस का सरकारी कर्ज उसकी GDP के 119.3% के बराबर है। धीमी आर्थिक विकास दर और कर्ज पर बढ़ते ब्याज के कारण सरकार पर बजट संभालने का दबाव है। सरकार को रक्षा, अस्पताल, नई तकनीक और जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे क्षेत्रों पर भी खर्च करना है। ऐसे में शिक्षा सहित अलग-अलग क्षेत्रों के लिए बजट तय करना चुनौती बन गया है। 5. फ्रांस में आंदोलन का असर यूरोप पर क्यों पड़ सकता है? फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों का असर यूरोप के दूसरे देशों की राजनीति पर भी पड़ सकता है। महंगाई, प्रवासन और सरकार की नीतियों से पहले से नाराज लोगों के बीच फिलिस्तीन के झंडे दिखने और दुकानों में लूटपाट के आरोप राष्ट्रीय पहचान और कानून-व्यवस्था पर बहस तेज कर सकते हैं। यूरोप में आर्थिक असंतोष नया नहीं है। फ्रांस के येलो वेस्ट आंदोलन से लेकर जर्मनी और ब्रिटेन में महंगाई के खिलाफ हुए प्रदर्शनों तक, जीवन-यापन का बढ़ता खर्च लोगों की नाराजगी की बड़ी वजह रहा है। वहीं, सीमा सुरक्षा और प्रवासन को लेकर भी कई देशों में बहस जारी है। ऐसे माहौल में फ्रांस में मरीन ले पेन की नेशनल रैली, जर्मनी में AfD और इटली में जॉर्जिया मेलोनी की पार्टी जैसे दक्षिणपंथी दलों को अपने मुद्दे उठाने का मौका मिल सकता है। फ्रांस में लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता रहने से रक्षा, प्रवासन और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर यूरोपीय देशों के बीच सहमति बनाना भी मुश्किल हो सकता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें…. फ्रांस में दुकानों से आईफोन लूटे, पुलिस को दौड़ाया:जोकर, कैप्टन अमेरिका बनकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, 143 साल पुरानी इमारत में आग लगाई; 15 PHOTOS फ्रांस में महंगाई के खिलाफ शनिवार को 8 लाख लोग सड़कों पर उतर आए। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों पर पत्थर फेंके और पुलिसकर्मियों को दौड़ाया। पूरी खबर यहां पढ़ें…