Nissan, Honda team up to standardise ECUs, software for next-gen vehicles

Nissan, Honda team up to standardise ECUs, software for next-gen vehicles
Honda and Nissan logo

Nissan Motor and Honda Motor have announced a joint development agreement to standardise multiple electronic control units (ECUs) and software for their next-generation software-defined vehicles (SDVs), aiming to reduce development costs and improve R&D efficiency. Under the agreement, the two companies will jointly establish common specifications for multiple core ECUs within the electrical/electronic (E/E) architecture of next-generation SDVs, along with the in-vehicle operating system, key parts of the middleware, and vehicle control software that runs on these ECUs.

  1. Software-defined vehicles (SDVs) identified as a priority for collaboration.
  2. Collaboration aims to mitigate development costs and enhance R&D efficiency.

Common E/E architecture to underpin upcoming Honda and Nissan cars 

The ECUs covered include high-performance main ECUs (High Performance Computers) that use system-on-chips (SoCs), as well as zone ECUs that oversee individual areas of the vehicle. The resulting E/E architecture is planned for application in both companies’ next-generation SDVs starting in fiscal year 2029.

The agreement follows extensive joint studies by Nissan and Honda into potential collaboration in the software domain, conducted as part of their broader strategic partnership. The companies identified the SDV software domain as a priority area for collaboration, citing the pace of technological change and the need to strengthen competitiveness through faster R&D and more efficient investment.

By standardising these foundational technologies, Nissan and Honda said they aim to combine their engineering expertise and development resources to accelerate innovation and achieve economies of scale. The two automakers said they will continue to build on their respective strengths and explore further collaboration opportunities, including efforts related to carbon neutrality and vehicle safety.

With inputs from Shruti Shiraguppi

खटीमा में सीएम धामी ने उठाया चाय का लुत्फ, राहुल गांधी पर साधा निशाना

खटीमा में सीएम धामी ने उठाया चाय का लुत्फ, राहुल गांधी पर साधा निशाना

cm dhami chai par charcha

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोकल फॉर वोकल अभियान को बढ़ावा देने के लिए मेलाघाट रोड पर पैदल चलकर एक स्थानीय डेरी पहुंचे और चाय-फैन का लुत्फ उठाया। इस दौरान उन्होंने मेलाघाट मार्ग के दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों से बातचीत की और राहुल गांधी पर भी तंज कसा। ALSO READ: उत्तराखंड सरकार का बड़ा कदम: महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा 5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, खटीमा के मेलाघाट रोड पर भ्रमण के दौरान मिलन डेरी में चाय की चुस्कियों के साथ स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों से आत्मीय संवाद किया। स्थानीय उत्पादों, दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

 

उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत नींव है। जब हम स्थानीय दुकानों और उत्पादों को अपनाएंगे, तभी हमारे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और स्वरोजगार की प्रेरणा मिलेगी।

राहुल गांधी की मानसिकता पर सवाल उठाए

चाय पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की मानसिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ बैठकर चाय पीते हुए मुझे चाय का स्वाद और लोगों का अपनापन तो साफ दिखाई दिया, लेकिन कहीं भी कोई जाति नजर नहीं आई। राहुल गांधी द्वारा चाय के कप में भी जाति और भेदभाव तलाशना संकीर्ण राजनीति की पराकाष्ठा है। कप डिस्पोजेबल हो सकता है, लेकिन सोच इतनी डिस्पोजेबल नहीं होनी चाहिए कि चाय में भी जाति और राजनीति ढूंढ ली जाए।

नेपाल बाढ़ में कैसे बचा 40 साल पुराना ‘हरा घर’:मालिक बोला- नींव मजबूत बनाई, नदी किनारे घर था इसलिए ज्यादा ध्यान दिया था

नेपाल में 26 अगस्त को त्रिशूली नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। तेज बहाव में गाड़ियां, इमारतें और लोगों के सामान बह गए, लेकिन नुवाकोट जिले में नदी किनारे बना 40 साल पुराना हरा घर लगभग सुरक्षित बच गया। बाढ़ के बाद घर की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। लोग इसे ‘चमत्कारी घर’ कहने लगे। एक ही सवाल था कि इतनी तेज बाढ़ में यह घर कैसे बच गया। अब घर के मालिक प्रकाश ने बताया है कि घर की मजबूत नींव इसकी बड़ी वजह हो सकती है। उन्होंने बताया कि यह घर 40 साल पुराना है। नदी के पास बनाते समय इसकी नींव पर खास ध्यान दिया गया था। घर के नीचे सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की दो-तीन परतें भी डाली गई थीं। बाढ़ के बीच परिवार घर की छत पर पहुंचा प्रकाश ने उस दिन की कहानी भी बताई है। उन्होंने इंडिया टुडे की सहयोगी वेबसाइट द लल्लनटॉप से बात करते हुए बताया कि पानी बढ़ने पर परिवार घर की ऊपरी मंजिलों में चला गया और करीब एक से डेढ़ घंटे तक सबसे ऊंचे हिस्से में फंसा रहा। प्रकाश ने बताया कि बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था। तब लगा कि शायद यह उनके जीवन का आखिरी पल हो सकता है। उस समय परिवार के छह लोग थे, जिनमें पांच घर के अंदर मौजूद थे। प्रकाश पास की अपनी दुकान पर थे, तभी उन्हें बाढ़ का पानी बढ़ने की खबर मिली। वह तुरंत घर पहुंचे और परिवार के लोगों को अंदर आने के लिए कहा। लेकिन बाहर निकलते ही उन्होंने देखा कि पानी के तेज बहाव ने उनकी गाड़ी को पलट दिया है। यह देखकर वह वापस घर के अंदर भाग गए। परिवार पहले घर की चौथी मंजिल पर पहुंचा। यह इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल थी, लेकिन कुछ देर बाद बाढ़ का पानी वहां तक भी पहुंच गया। इसके बाद सभी लोग घर के सबसे ऊंचे हिस्से में चले गए। पाइप और रस्सी से परिवार को बाहर निकाला प्रकाश के मुताबिक, परिवार करीब एक से डेढ़ घंटे तक घर के सबसे ऊंचे हिस्से में फंसा रहा। पानी थोड़ा कम होने के बाद पास के टोल इलाके के लोग उनकी मदद के लिए पहुंचे। उन्होंने दोनों इमारतों के बीच एक पाइप लगाया और रस्सी के सहारे परिवार को सुरक्षित दूसरी तरफ पहुंचाया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक वह घर सिर्फ एक वजह से नहीं बचा था। इसके पीछे कई चीजों का मिला-जुला असर था: घर का ढांचा मजबूत था: यह घर सिर्फ पत्थर और गारे से नहीं बना था। इसमें कंक्रीट के मजबूत पिलर और बीम थे, जिनमें लोहे की सरिया लगी थी। पिलर और बीम आपस में जुड़े थे: घर का पूरा ढांचा एक मजबूत फ्रेम की तरह बना था। इससे पानी और मलबे का जोर किसी एक दीवार पर नहीं पड़ा, बल्कि उसका असर पूरे ढांचे में बंट गया। नींव मजबूत थी: घर नदी के करीब था, इसलिए इसकी नींव को मजबूत बनाने पर खास ध्यान दिया गया था। गहरी और मजबूत नींव ने घर को अपनी जगह टिकाए रखने में मदद की। घर सीधे सबसे तेज बहाव की चपेट में नहीं था: घर नदी के मुख्य और सबसे तेज बहाव के ठीक बीच में नहीं बना था। पानी और मलबे का बड़ा हिस्सा इसके दोनों तरफ से निकल गया। मलबे ने भी कुछ हद तक बचाव किया: बाढ़ के शुरुआती दौर में जमा हुआ कीचड़ और मलबा बाद में एक तरह की ढाल बन गया। इससे बाद में आने वाले पानी का सीधा दबाव घर पर कुछ कम हुआ। मलबे के दबाव को ढांचे ने झेला: मजबूत पिलर, बीम और नींव ने मलबे और पानी से लगने वाले साइड के दबाव को सहने में मदद की। यानी कि घर का मजबूत स्ट्रक्चर, मजबूत नींव, उसकी लोकेशन और आसपास जमा मलबा… इन सभी वजहों ने मिलकर घर को बचाए रखने में भूमिका निभाई। ————————— यह खबर भी पढ़ें… नेपाल में फिर बाढ़ का अलर्ट, नदियों का जलस्तर बढ़ा:मौत का आंकड़ा 1 हजार के पार हुआ, सबसे ज्यादा चितवन में 321 शव बरामद नेपाल में नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद 7 जिलों में बाढ़ का नया अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन जिलों में नदियों के किनारे बसे इलाकों के लिए चेतावनी जारी की है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Renault Triber turbo to launch by September end

Renault Triber turbo to launch by September end
Renault Triber front quarter static

Renault is set to introduce a turbo-petrol powertrain option for the Triber MPV by the end of September. With this engine borrowed from the Kiger, Renault would try to address one of the Triber’s major criticisms – its underpowered naturally aspirated powertrain. A factory-fitted CNG option will also be offered with this turbo-petrol engine. 

  1. 1.0-litre turbo-petrol engine expected to produce around 100hp
  2. Factory-fitted CNG option will utilise dual-cylinder technology

Renault Triber turbo-petrol engine specifications

Three-cylinder turbo-petrol unit will be the same as the one in Kiger

Nissan Magnite’s engine bay shown for representative purposes only. 

The upcoming three-cylinder turbo-petrol engine on the Triber, codenamed HR10, is derived from the Renault Duster’s ‘HR13’ 1.3-litre four-cylinder engine, albeit with one less cylinder. This engine is offered in the Renault Kiger and Nissan Magnite, with the option of a 5-speed manual or a CVT, and produces 100hp and up to 160Nm. This is 28hp and 62Nm more than the Triber’s naturally aspirated petrol engine and is expected to address the Triber’s criticism of being an underpowered MPV. However, it will be interesting to see whether the Triber turbo comes in the same state of tune and is offered with a CVT.  

A factory-fitted dual-cylinder CNG option will be offered with the same engine

Renault will also offer the Triber with a factory-fitted CNG option, which will utilise dual cylinders placed under the boot floor for space utilisation. It is expected to be offered only with a manual transmission. This dual-cylinder CNG option will also be employed in the Kiger at a later date.

The Triber’s CMF-A platform, now called RGEP, has been modified to accommodate the new powertrains. 

Currently, the Renault Triber is offered with an aftermarket CNG kit that can be retrofitted to the MPV’s manual variants. It comes with a standard 3-year/1 lakh km warranty (whichever is first). 

With the under-the-hood changes, the turbo-petrol-powered Renault Triber is expected to offer everything the naturally aspirated petrol version offers. The prices, however, are expected to rise from the current model’s Rs 5.81 lakh to Rs 8.53 lakh range (ex-showroom). 

DA Hike: त्योहारी सीजन से पहले कर्मचारियों को मिलेगा बड़ा तोहफा! DA पर आ गया ये बड़ा अपडेट

8th CPC Latest Updates September 2026: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन के बाद देश के लगभग 55 लाख मौजूदा केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स के लिए बड़ी खबरें निकलकर सामने आ रही हैं। आयोग के नियम एवं शर्तों (ToR) को मंजूरी मिले लगभग 10 महीने बीत चुके हैं और अब इसकी सिफारिशें लागू होने की दिशा में गतिविधियां तेज हो गई हैं।

इसी बीच सितंबर महीने में महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी से लेकर राज्यों के दौरों और पेंशन संशोधन की मांगों तक, कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए कई बड़े अपडेट्स आए हैं। आइए जानते हैं कि इस बार कम फिटमेंट फैक्टर के बावजूद कर्मचारियों की सैलरी में 7वें वेतन आयोग से भी बड़ा उछाल क्यों आ सकता है।

सितंबर में मिल सकती है खुशखबरी, 63% तक बढ़ सकता है DA

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों को सितंबर 2026 में जुलाई महीने के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) का तोहफा मिलने की पूरी उम्मीद है। जनवरी 2026 में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद वर्तमान में कुल DA दर 60% है। ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के 12 महीनों के आंकड़ों के आधार पर इस बार 3% की बढ़ोतरी का अनुमान है। 3% की इस बढ़ोतरी के बाद कर्मचारियों का कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 63% हो जाएगा।

ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, आमतौर पर इसकी घोषणा सितंबर में होती है, हालांकि कई बार यह अक्टूबर तक भी जा सकती है।

8वें वेतन आयोग का राज्यों का दौरा जारी

8वां वेतन आयोग विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर कर्मचारी संगठनों और हितधारकों के साथ परामर्श कर रहा है। आयोग 1 सितंबर 2026 को जयपुर का अपना दो दिवसीय दौरा पूरा कर रहा है। आयोग 8 सितंबर को पुडुचेरी, 16 और 18 सितंबर को चंडीगढ़, और 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु का दौरा करेगा। इससे पहले दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बैठकें पूरी की जा चुकी हैं।

पूर्व पेंशनरों की पेंशन समीक्षा का मामला व्यय विभाग को ट्रांसफर

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 18 अगस्त 2026 के एक ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन और ऑल इंडिया आरएमएस, एमएमएस एंड पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन की याचिकाओं को वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग को भेजा है।

संगठन चाहते हैं कि 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनभोगियों की पेंशन समीक्षा को भी 8वें वेतन आयोग के ToR में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। इसके लिए 1985 (चौथे वेतन आयोग) की उस ऐतिहासिक मिसाल का हवाला दिया जा रहा है, जब पूर्व कर्मचारियों के लिए भी नियमों में बदलाव कर आयोग के दायरे में लाया गया था।

कम फिटमेंट फैक्टर में भी 7वें वेतन आयोग से ज्यादा बढ़ेगी सैलरी!

कर्मचारी संगठनों का दावा है कि 8वें वेतन आयोग में अगर 7वें वेतन आयोग (2.57) की तुलना में कम फिटमेंट फैक्टर (जैसे 2.1) भी रखा जाता है, तब भी कर्मचारियों को हाथ में ज्यादा सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा।

कर्मचारी यूनियनों के अनुसार, 7वें वेतन आयोग के समय DA 125% तक पहुंच चुका था, जिससे बेसिक पे तो बढ़ा लेकिन प्रभाव कम हो गया। 8वें वेतन आयोग के समय कम DA होने के कारण 2.1 के फिटमेंट फैक्टर पर भी कर्मचारियों को सीधा 53% का शुद्ध फायदा होगा, जो 7th CPC के 32% से काफी अधिक है।

कब तक लागू होंगी सिफारिशें?

नवंबर 2025 में गठित 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग की सिफारिशें लागू होने की तय तारीख 1 जनवरी 2026 मानी जा रही है, हालांकि इस पर अंतिम फैसला कैबिनेट की हरी झंडी के बाद ही होगा।

19 सितंबर से शुरु होगा Family Full House with Rohit Sharma, टीजर हुआ रीलीज (Video)

भारतीय पूर्व कप्तान रोहित शर्मा जल्द ही अपना फैमिली शो Family Full House with Rohit Sharma.में बतौर होस्ट शिरकत करते हुए नजर आएंगे। उन्होंने इस टीजर को रीट्विट कर कैप्शन में लिखा कि 19 सितंबर का प्लान सेट कर दिया है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक यह मशूहर अमेरिकी शो द फैमिली फ्यूड(The Family Feud) का भारतीय संस्करण होगा और इसके 40 एपिसोड रोहित शर्मा को शूट करने होंगे।इस अमेरिकी शो में मशहूर होस्ट स्टीव हार्वे की भूमिका रोहित शर्मा निभाएंगे।

संन्यास की अटकलें जुलाई से हो रही है तेज

17 जुलाई (शुक्रवार) से मीडिया सूत्रों में यह अटकलें लग रही थी कि वह संन्यास के बारे में सोच रहे हैं और 19 जुलाई को (रविवार) को लॉर्ड्स पर खेला जाने वाला एकदिवसीय मैच उनका अंतिम मैच होगा। इस मैच से पहले या तो वह खुद संन्यास ले लेंगे या फिर ड्रॉप हो जाएंगे।लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव देवजीत सैकैया ने कहा है कि यह सब अफवाह है। वह जब तक चाहे क्रिकेट खेल सकते हैं।

माना जा रहा था रोहित शर्मा ने अपने PR यानि कि जनसंपर्क के कारण अफगानिस्तान सीरीज में अपनी जगह बचा ली थी लेकिन इंग्लैंड उनकी अंतिम सीरीज मानी जा रही थी।रोहित शर्मा ने फिर जबरदस्त जनसंपर्क की बिसात बिछाकर अपनी जगह एक बार फिर बचा ली और आलोचकों के मुंह शतक लगाकर बंद कर दिए।

साल भर रहा बुरा फॉर्म, लॉर्ड्स पर मिली संजीवनी

गौरतलब है कि रोहित शर्मा खराब फॉर्म से जूझ रहे थे और इंग्लैंड के पहले दो एकदिवसीय मैच में फ्लॉप रहे थे। जिसके बाद उनकी संन्यास की अटकलें लगनी शुरु हो गई थी। हालांकि आज उन्होंने बेहतरीन पारी खेली। रोहित शर्मा ने 110 गेंदो में 138 रन बनाए। उन्हें जैकब बैथल ने बोल्ड किया।

रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले एकदविसीय मैच में 21 गेंदो में 11 रन बनाए थे।  दूसरे एकदिवसीय मैच में 47 गेंद में 1 चौका और छक्का मारने के बाद 26 रन बनाकर आउट हुए। उनका 5 रनों पर गस एटिंकसन ने कैच छोड़ा था।

अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच को छोड़ दे तो इस साल रोहित का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।पहले मैच में वह 16 रन बनाकर रनआउट हो गए और दूसरे मैच में वह 39 गेंदों में 48 रन बनाकर बोल्ड हो गए।

इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए।

Nepal: नेपाल में कुदरत का कहर, मलबे में दबे एक ही घर से मिले 23 शव! 4 हजार से ज्यादा लोग लापता

नेपाल में 26 अगस्त को आए सैलाब ने भारी तबाही मचाई है। इस फ्लड से हुए तबाही का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा है। बाढ़ में मरने वालों की संख्या 962 तक पहुंच गया है। वहीं 4 हजार से ज्यादा लोग अभी लापता है। फ्लड प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य के दौरान ऐसी तस्वीरें सामने आ रही है, जिसे देख हर किसी का दिल पसीज जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार सुबह नुवाकोट के बेत्रावती इलाके में राहत और बचाव अभियान के दौरान एक घर से कम से कम 23 शव बरामद किए गए। एक ही जगह से इतनी बड़ी संख्या में शव मिलने के बाद इलाके में मातम का माहौल है। ये घर भोटेकोशी नदी की बाढ़ के मलबे में दब गया था। बाढ़ के बाद अब भी कई इलाकों में राहत और बचाव का काम जारी है और प्रशासन प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटा है।

एक घर में मिले 23 शव

इंडिया टुडे के मुताबिक, नेपाल के नुवाकोट जिले में बाढ़ के बाद मलबे में दबे एक घर से 23 लोगों का शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। नेपाल में बाढ़ के छह दिन बाद नुवाकोट में एक घर से मिले शवों को लेकर अधिकारियों ने आशंका जताई कि, बाढ़ से बचने के लिए कुछ लोग घर के अंदर जमा हुए होंगे। लंबे समय तक मलबे में दबे रहने के कारण शवों की हालत काफी खराब हो गई थी, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था। यह घटना उस भीषण बाढ़ के बाद सामने आई है, जिसने नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, जबकि कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

बचाव काम जारी

रिपोर्ट के अनुसार, बिदुर नगरपालिका-10 के बेत्रावती में सोमवार को बचाव दल ने छह शव बाहर निकाले थे, जबकि मंगलवार को बाकी शवों को निकालने का काम जारी रहा। नुवाकोट जिला पुलिस के एसपी बिपिन रेगमी ने भी बताया कि, घटनास्थल से कई शव बरामद किए गए हैं। बाढ़ के बाद राहत और बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से तबाही का आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। अब तक आपदा से मरने वालों की संख्या 950 से ज्यादा हो चुकी है, वहीं 4,400 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

राहत और बचाव दल मलबे और कीचड़ में फंसे लोगों को लगातार तलाश रहे हैं। वहीं लापता लोगों के परिवार अपने अपनों के वापस मिलने की उम्मीद में हैं और उनकी कोई खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

मलबे में फंसे सैकड़ों कर्मचारी

नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों के लापता होने की खबर है। नेपाल की बिजली कंपनियों के एक निजी क्षेत्र के संगठन के मुताबिक, बाढ़ से प्रभावित 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में करीब 900 कर्मचारी अभी तक नहीं मिल पाए हैं। इनमें से लगभग 500 कर्मचारियों के मलबे और कीचड़ से भरी सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। बचाव दल इन कर्मचारियों की तलाश में जुटे हुए हैं।

VIDEO Nepal Flood: नेपाल में तबाही के बीच बचावकर्मियों ने बचाई मासूम की जान, डेढ़ महीने के बच्चे का रेस्क्यू, वीडियो वायरल

VIDEO Nepa Flood: नेपाल के बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले से रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। बचावकर्मियों ने महज डेढ़ महीने के एक मासूम बच्चे को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित बाहर निकाला। फिर उसे रसुवा के धांगे कैंप पहुंचाया। भयंकर बाढ़ और मलबे के बीच राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। रसुवा और आसपास के इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़कें, पुल और कई बस्तियां तबाह कर दी हैं, जिसके बाद सेना और सुरक्षा बलों की टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में जुटी हैं।

डेढ़ महीने के इस मासूम का सुरक्षित रेस्क्यू ऐसे मुश्किल हालात में उम्मीद और राहत की बड़ी तस्वीर पेश करता है। नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार (1 सितंबर) को 987 हो गई। सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMA ने बताया कि अचानक आयी बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं। बाढ़ में कुल 279 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 168 लोगों को इलाज के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई है।

शव ले जाने के लिए प्रक्रिया जारी

काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में मारे गए भारतीयों समेत विदेशी नागरिकों के शवों की शिनाख्त करने और उन्हें स्वदेश भेजने के लिए मंगलवार को विस्तृत प्रक्रिया जारी की। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई। हजारों लोग लापता हो गए। मकानों, सड़कों, पुलों तथा हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है।

दूतावास ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों के शव सौंपने के लिए नौ चरणों वाली प्रक्रिया तय की है। इसमें जरूरी दस्तावेज तैयार करना, तस्वीरें और डिटेल्स दर्ज करना, पोस्टमार्टम, मृत्यु के कारण की पुष्टि और औपचारिक शिनाख्त शामिल हैं।

बयान के अनुसार, प्रक्रिया में उंगलियों के निशान, डीएनए और अन्य फॉरेंसिक सैंपल लेना, मृतक के पासपोर्ट या पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन, दूतावास या वाणिज्य दूतावास के स्तर पर समन्वय तथा शव सौंपने संबंधी ज्ञापन और रसीद जारी करना भी शामिल हैं। दूतावास ने बताया कि इस प्रक्रिया के पहले चार चरण नेपाल के अधिकारियों द्वारा पूरे किए जाएंगे।

यदि रिश्तेदार नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध तस्वीरों और डिटेल्स के आधार पर शव की शिनाख्त कर पाते हैं, तो भारतीय दूतावास उसे सौंपने और स्वदेश भेजने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में मदद करेगा।

VIDEO Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ प्रभावित इलाके से डेढ़ महीने के बच्चे को बचाकर रसुवा धांगे कैंप लाया गया

दूतावास ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफना दिया है। ऐसे शवों की शिनाख्त के लिए सबसे नजदीकी परिजन से डीएनए का मिलान करना होगा।

सबसे नजदीकी परिजन से आशय ऐसे पारिवारिक सदस्य से है जो वंशावली में एक पीढ़ी के अंतर पर हो। इसमें माता-पिता, सगे भाई-बहन और संतान शामिल हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन मामलों में शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती या अवशेषों को अस्थायी रूप से दफना दिया गया है, वहां नेपाल सरकार डीएनए मिलान की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

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शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

narendra modi at SCO summit

PM Modi at SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO समिट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने आतंकवाद पर सख्‍त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसके विरुद्ध लड़ाई में हम क्रिया-प्रतिक्रिया की सोच तक सीमित नहीं रह सकते। हमें आतंकवाद के फंडिंग, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना होगा। ALSO READ: 7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

 

पीएम मोदी ने कहा कि हमें एक आवाज में कहना चाहिए कि इस गंभीर मुद्दे पर दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं हो सकती। जो देश आतंकवाद को अपनी नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं और आतंकवादियों को पनाह और समर्थन देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता।

 

उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज भी पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। हमें आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना होगा- जिसमें उसकी फंडिंग, लोगों की भर्ती और सुरक्षित ठिकाने शामिल हैं। हमें एक सुर में यह कहना होगा कि आतंकवाद के मामले में दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं हो सकती।

पीएम मोदी ने कहा कि युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकलता, सभी युद्धों और विवादों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शांत और सुरक्षित यूरेशिया की हमारी साझा आकांक्षा, अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है, और आगे भी देता रहेगा। भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं, व्यापार को आसान बनाते हैं और विकास के नए रास्ते खोलते हैं।

ये खाना है या चूहे की दावत? सूरत रेलवे स्टेशन के फूड स्टॉल का VIDEO देख भड़के लोग

सूरत रेलवे स्टेशन से सामने आए एक वीडियो ने यात्रियों का ध्यान खींच लिया है। इसमें एक चूहा कांच के फूड काउंटर के अंदर रखा आलू पेटिज खाते हुए दिखाई दे रहा है। एक यात्री ने इस घटना को कैमरे में रिकॉर्ड किया और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामला सामने आने के बाद रेलवे अधिकारियों ने तुरंत संबंधित स्टॉल पर कार्रवाई की। इस घटना ने रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले खाने की साफ-सफाई और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

यात्रियों के बीच अब सवाल उठ रहे हैं कि खाने के सामान को किस तरह सुरक्षित रखा जाता है और फूड स्टॉल्स की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है। घटना के बाद रेलवे ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

सुबह-सुबह यात्री ने देखा पूरा मंजर

यह घटना 29 अगस्त की सुबह के शुरुआती घंटों की बताई जा रही है। एक यात्री ने देखा कि चूहा कांच के डिस्प्ले काउंटर के अंदर आराम से घूम रहा था और वहां रखे खाने में से पफ कुतर रहा था। काउंटर में यात्रियों के लिए दूसरे खाद्य पदार्थ भी रखे हुए थे। यात्री ने तुरंत इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया रेलवे

वीडियो के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद रेलवे अधिकारियों तक मामला पहुंचा। इसके बाद संबंधित स्टॉल को तुरंत बंद करा दिया गया। वेस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक के मुताबिक, रेलवे को घटना की जानकारी मिलते ही स्टॉल पर कार्रवाई की गई। बंद किए गए काउंटर की सफाई भी कराई गई।

स्टॉल संचालक पर भी शुरू हुई कार्रवाई

मामले को सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं रखा गया है। रेलवे के कमर्शियल विभाग ने स्टॉल संचालक के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे की ओर से आगे ऐसी कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे संबंधित स्टॉल का कॉन्ट्रैक्ट स्थायी रूप से खत्म किया जा सकता है।

खास सफाई अभियान के बीच सामने आया मामला

हैरानी की बात यह है कि यह घटना रेलवे के एक विशेष सफाई अभियान के कुछ ही दिनों बाद सामने आई। वेस्टर्न रेलवे ने सूरत और उधना रेलवे स्टेशनों के फूड स्टॉल्स में डीप क्लीनिंग और सैनिटाइजेशन अभियान चलाने की घोषणा की थी। इस अभियान का उद्देश्य रेलवे के खानपान केंद्रों में साफ-सफाई और हाइजीन के स्तर को बेहतर बनाना था।

16 अगस्त को भी हुआ था पेस्ट कंट्रोल

रेलवे अधिकारी के अनुसार, 16 अगस्त को स्टेशन पर पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल भी कराया गया था। इसके बावजूद फूड काउंटर के अंदर चूहे के पहुंचने की घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यात्रियों की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता

रेलवे स्टेशन पर लोग सफर के दौरान अक्सर फूड स्टॉल से खाना और नाश्ता खरीदते हैं। ऐसे में खाने के सामान के बीच चूहे का पहुंचना यात्रियों के लिए चिंता की बात है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों का सवाल यही है कि अगर कांच के बंद काउंटर के अंदर चूहा पहुंच सकता है, तो वहां रखे खाने की सुरक्षा और साफ-सफाई कितनी भरोसेमंद है? फिलहाल रेलवे ने स्टॉल बंद कर कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन यह घटना स्टेशन के फूड आउटलेट्स में नियमित सफाई और निगरानी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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