El Nino: मजबूत अल नीनो का असर, जुलाई में राहत के बाद फिर गहराया सूखा संकट! 14% की गिरावट के साथ सितंबर में भी कम बारिश का अलर्ट

भारत में इस साल का मॉनसून अब कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मॉनसून सीजन के आखिरी महीने सितंबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मॉनसून के दौरान बारिश की कमी पहले ही चिंता का कारण बनी हुई है। 1 जून से 31 अगस्त तक देश में सामान्य के मुकाबले 14 फीसदी कम बारिश हुई है। अब सितंबर में भी कम बारिश का अनुमान है, ऐसे में पूरे मॉनसून सीजन में बारिश की कमी और बढ़ सकती है। मौसम विभाग ने इस दौरान अल नीनो के असर की संभावना भी जताई थी, जिसे मॉनसून की बारिश को प्रभावित करने वाली अहम वजहों में से एक माना जाता है।

जून से सितंबर तक चलने वाले चार महीने के मॉनसून में सितंबर का महीना काफी अहम माना जाता है, लेकिन इस बार कम बारिश का अनुमान किसानों और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ा सकता है। हालांकि, बारिश का असर अलग-अलग राज्यों और इलाकों में अलग रह सकता है।

1901 के बाद दूसरा सबसे गर्म रहा अगस्त

अगस्त के दौरान देश के कई क्षेत्रों में गर्मी का असर काफी ज्यादा देखने को मिला। अगस्त में देश के कई हिस्सों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर चिंता बढ़ाई। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में यह महीना 1901 के बाद दूसरा सबसे गर्म अगस्त रहा। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर इलाकों में अगस्त तीसरा सबसे गर्म रहा। उत्तर-पश्चिम भारत में भी तापमान काफी ज्यादा रहा और यहां 126 साल के रिकॉर्ड में पांचवां सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया। इससे साफ है कि इस साल अगस्त में देश के अलग-अलग हिस्सों में गर्मी का असर काफी ज्यादा रहा।

सितंबर में कब होगी बारिश

IMD चीफ मृत्युंजय महापात्रा ने कहा, “देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व, पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है।” उन्होंने कहा कि फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में “मजबूत अल नीनो की स्थिति” बनी हुई है, जिसके चलते मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है। महापात्रा ने कहा, “आने वाले महीनों में इन स्थितियों के और मजबूत होने की संभावना है।” उन्होंने संकेत दिया कि इसका सितंबर की बारिश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

IOD की स्थिति नॉर्मल

अल नीनो की स्थिति को आमतौर पर भारत में कमजोर मॉनसून और ज्यादा गर्मी से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, हिंद महासागर में फिलहाल इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति सामान्य है और इसके सितंबर तक ऐसी ही रहने की संभावना है। सकारात्मक IOD मॉनसून को मजबूत करने और बारिश बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन मौजूदा समय में ऐसी स्थिति नहीं है। ऐसे में मॉनसून को हिंद महासागर से बारिश बढ़ाने के लिए कोई खास मदद मिलने की उम्मीद नहीं है।

बारिश का रिकॉर्ड

इस साल मॉनसून की बारिश का असर देशभर में एक जैसा नहीं रहा। मौसम विभाग के मुताबिक, जून में बारिश की कमी 35% तक पहुंच गई थी। मॉनसून बारिश के वितरण का आकलन किए गए कुल 741 जिलों में से 312 जिलों (42%) में 31 अगस्त तक सामान्य से कम बारिश हुई, जबकि 38 जिलों (5%) में बहुत कम बारिश दर्ज की गई।

फसलों पर पड़ेगा असर

सितंबर में अगर बारिश उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई तो इसका सीधा असर किसानों और खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। भले ही ज्यादातर खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन इस साल फसल का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 2 फीसदी कम है। ऐसे में बारिश की कमी किसानों की मुश्किलें और बढ़ा सकती है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए उन्हें सिंचाई का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे डीजल, बिजली और पानी पर खर्च बढ़ेगा और खेती की लागत पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

चाइना मास्टर्स के पहले मुकाबले में लक्ष्य सेन को मिल सकता है वॉकओवर, हटा यह फ्रेंच चैंपियन

Lakshya Sen

मंगलवार को शेनझेन स्पोर्ट्स सेंटर जिम्नेजियम में 1 से 6 सितंबर तक होने वाले सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट चाइना मास्टर्स 2026 में भारत के शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी खेलते हुए नज़र आएंगे।दुनिया के 13वें नंबर के खिलाड़ी लक्ष्य का पहला मुकाबला फ्रांस के नए वर्ल्ड चैंपियन एलेक्स लैनियर के खिलाफ होना था लेकिन उन्होंने अंतिम लम्हों से टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया। यह बुरे फॉर्म से गुजर रहे लक्ष्य सेन के लिए राहत की बात है।

21 साल के लैनियर अगस्त में नई दिल्ली में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में जापान के कोडाई नारोका को हराकर पुरुष सिंगल्स का वर्ल्ड टाइटल जीतने वाले पहले फ्रांसीसी खिलाड़ी बने थे।

लैनियर और लक्ष्य के बीच पिछली भिड़ंत पिछले साल डेनमार्क ओपन के क्वार्टर फाइनल में हुई थी, जिसमें फ्रांसीसी शटलर ने 21-9, 21-14 से जीत हासिल की थी।25 साल के भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी वर्ल्ड चैंपियनशिप में अमेरिका के दुनिया के 92वें नंबर के खिलाड़ी गैरेट टैन से दूसरे राउंड में मिली हार के बाद वापसी करने की कोशिश करेंगे।

आयुष शेट्टी, जिन्होंने नई दिल्ली में पहले राउंड में चीन के 2025 वर्ल्ड चैंपियन शी युकी को हराया था, इस टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधु भी भारतीय टीम में शामिल नहीं हैं। पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 किदांबी श्रीकांत पुरुष सिंगल्स में भारत के दूसरे प्रतिनिधि होंगे। 33 साल के भारतीय खिलाड़ी जून में सुपर 300 टूर्नामेंट, यूएस ओपन में रनर-अप रहे थे।

दुनिया के नंबर 5 खिलाड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी शेनझेन में भारत की डबल्स चुनौती की अगुवाई करेंगे। चौथी वरीयता प्राप्त इस जोड़ी ने मई में सिंगापुर बैडमिंटन ओपन (एक और सुपर 750 टूर्नामेंट) जीता था और नई दिल्ली में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था।

भारत महिला सिंगल्स में तीन होनहार युवा खिलाड़ियों – उन्नति हुड्डा, तन्वी शर्मा और देविका सिहाग – को उतारेगा।ताज़ा बैडमिंटन रैंकिंग में दुनिया की नंबर 25 खिलाड़ी, 18 साल की उन्नति ने नई दिल्ली में अपने पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में दूसरे राउंड तक जगह बनाई थी, जहाँ उन्हें कनाडा की मिशेल ली से तीन गेम के कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था।

दुनिया की नंबर 26 खिलाड़ी तन्वी के लिए यह सीज़न शानदार रहा है और उन्होंने ताइपे ओपन में अपना पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीता है। वहीं, देविका ने इस साल की शुरुआत में सुपर 300 टूर्नामेंट, थाईलैंड मास्टर्स जीता था। ये तीनों खिलाड़ी आइची-नागोया में होने वाले आगामी एशियाई खेलों के लिए भारत की महिला टीम का हिस्सा हैं।

मिक्स्ड डबल्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व ध्रुव कपिला-तनीषा क्रास्टो और रोहन कपूर-रुत्विका शिवानी गद्दे करेंगे।शेनझेन में महिला डबल्स में भारत का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होगा। ट्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद, जिन्होंने पिछले हफ़्ते नई दिल्ली में वर्ल्ड चैंपियनशिप में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था, इस टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले रही हैं।

चाइना मास्टर्स, एशियाई खेलों के लिए भारत की 20 सदस्यीय बैडमिंटन टीम के कई सदस्यों के लिए तैयारी का एक अच्छा मौका भी होगा। एशियाई खेल जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होंगे।

लक्ष्य, श्रीकांत, उन्नति, तन्वी, देविका, सात्विक, चिराग, अर्जुन, हरिहरन, ध्रुव और तनीषा – एशियाई खेलों की बैडमिंटन टीम के ये 11 सदस्य शेनझेन में मुकाबला करेंगे।2005 में इस टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से किसी भी भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने चाइना मास्टर्स नहीं जीता है।

7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

pm modi on india GDP growth

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की मजबूत आर्थिक विकास दर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए देशवासियों को बधाई दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 7.8% की शानदार विकास दर हासिल की है, जिससे पूरा देश खुशी से भरा हुआ है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय देश के नागरिकों के संकल्प और उनके मेहनती स्वभाव को दिया है। ALSO READ: LPG Price 1 September: सितंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर, जानें दिल्ली-मुंबई समेत 4 महानगरों में नए दाम

 

वैश्विक संकटों के बीच भारत की रफ्तार

प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा वैश्विक हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया संघर्षों और संकटों से घिरी हुई है। हर तरफ युद्ध की खबरें आ रही हैं और वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह बाधित हुई है। साल 2020 के कोविड महामारी के दौर के बाद से ही दुनिया भर में आर्थिक स्थिरता की कमी बनी हुई है। इन तमाम वैश्विक बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद भारत तेजी से प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

निराशा फैलाने वालों पर साधा निशाना

देश के भीतर का माहौल पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस दौरान कुछ लोग निराशा के अंधेरे में डूबे हुए हैं जो लगातार झूठ फैला रहे हैं और देश में निराशा का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, देश इन तमाम नकारात्मकताओं से ऊपर उठकर और हर बाधा को पार करते हुए 7.8% की विकास दर हासिल करने में सफल रहा है। ALSO READ: Top News 1 September: अगस्त में 125 साल की गर्मी का रिकॉर्ड टूटा, अन्ना हजारे अस्पताल में भर्ती, मेसी का संन्यास

 

'आत्मनिर्भर भारत' पर जोर

प्रधानमंत्री ने इस गति को भविष्य में भी लगातार बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को लगातार आगे बढ़ाते रहने के लिए 'आत्मनिर्भर भारत' का बनना बेहद जरूरी है। देश की यह सामूहिक ताकत भविष्य में आने वाली हर चुनौती का सामना करने के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।

Badshah- Isha Rikhi Divorce: 5 महीने बाद टूट गई बादशाह की दूसरी शादी, ईशा रिखी संग तलाक का किया ऐलान

रैपर बादशाह और पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी की शादी टूट गई है। दोनों ने सोमवार रात सोशल मीडिया पर एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी करके अपने अलग होने की घोषणा की है। दोनों ने आपसी सहमति से अपने रिश्ते को खत्म करने का फैसला लिया है। बता दें, पिछले कुछ दिनों से बादशाह और एक्ट्रेस ईशा रिखी के रिश्ते में दरार की खबरें सुर्खियों में थीं। अब आखिरकार उन्होंने अपने तलाक को कंफर्म कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों ने मार्च में एक निजी समारोह में शादी की थी और शादी के करीब पांच महीने बाद यह खबर सामने आई है।

सोशल मीडिया पर दी जानकारी

सोशल मीडिया पर शेयर जॉइंट स्टेटमेंट में बादशाह ने कहा, “मैंने और ईशा रिखी ने आपसी सहमति से अलग होने और अपने-अपने रास्ते पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। यह फैसला हमने एक-दूसरे के सम्मान को ध्यान में रखते हुए लिया है। हम सभी से अपील करते हैं कि इस समय हमारी निजता का सम्मान करें।” उन्होंने आगे कहा, “इस मामले में यह हमारा एकमात्र बयान होगा। हम ईमानदारी से अनुरोध करते हैं कि हमारे रिश्ते को लेकर आगे किसी तरह की अटकलें या धारणाएं न बनाई जाएं।”

ईशा ने किया था पोस्ट

जुलाई में सोशल मीडिया पर बादशाह और ईशा रिखी के रिश्ते में अनबन की खबरें सामने आने लगी थीं। जुलाई में ईशा ने बादशाह के साथ अपनी कुछ तस्वीरों और वीडियो का एक मोंटाज सोशल मीडिया पर शेयर किया था। उन्होंने इस पोस्ट के साथ लिखा था, “हर तूफान एक सबक है। हर प्रार्थना उम्मीद है,” और इसके साथ दिल टूटने और हाथ जोड़ने वाले इमोजी भी लगाए थे। ईशा के इस पोस्ट के बाद दोनों के रिश्ते में अनबन की अटकलें तेज हो गई थीं।

Badshah

मार्च 2026 में हुई थी चर्चा

बादशाह और ईशा रिखी की शादी को लेकर मार्च 2026 में चर्चाएं शुरू हुई थीं। इसकी शुरुआत तब हुई जब ईशा की मां पूनम रिखी ने सोशल मीडिया पर शादी की रस्मों से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। इन तस्वीरों में बादशाह भूरे रंग के कुर्ते और सुनहरे साफे में नजर आए, जबकि ईशा लाल रंग के पारंपरिक दुल्हन के लिबास में दिखाई दीं। इसके बाद जून में ईशा ने इंस्टाग्राम पर एक ‘आस्क मी एनीथिंग’ सेशन के दौरान बादशाह के साथ अपनी शादी की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार की थी। अब दोनों के अलग होने की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब ईशा के सलमान खान द्वारा होस्ट किए जाने वाले बिग बॉस 20 का हिस्सा बनने की भी चर्चा चल रही है।

कौन है ईशा रिखी

ईशा रिखी चंडीगढ़ की रहने वाली अभिनेत्री और मॉडल हैं, जिन्होंने साल 2013 में पंजाबी फिल्म ‘जट्ट बॉयज पुट्ट जट्टां दे’ से एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह ‘हैप्पी गो लकी’, ‘अरदास’ और ‘मिंडो तसीलदारनी’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। साल 2018 में उन्होंने फिल्म ‘नवाबजादे’ से बॉलीवुड में कदम रखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईशा और बादशाह ने शादी से पहले कई साल तक एक-दूसरे को डेट किया था और इसके बाद दोनों ने निजी समारोह में शादी की।

बादशाह की थी दूसरी शादी

बादशाह की ईशा रिखी से ये दूसरी शादी है, जो अब खत्म हो गई है। इससे पहले बादशाह की जैस्मीन मसीह से 2012 में शादी हुई थी। दोनों का रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल सका और साल 2020 में उनका तलाक हो गया। दोनों की एक बेटी भी है, जेसीमी ग्रेस मसीह सिंह, जिसका जन्म जनवरी 2017 में हुआ था।

100% स्वदेशी AK-203 ‘शेर’: अमेठी में तैयार हुई देश की पहली पूरी तरह देसी गन, जानिए INSAS के मुकाबले कितनी घातक है भारतीय सेना की नई राइफल!

100% स्वदेशी AK-203 'शेर': अमेठी में तैयार हुई देश की पहली पूरी तरह देसी गन, जानिए INSAS  के मुकाबले कितनी घातक है भारतीय सेना की नई राइफल!

AK 203 Sher assault rifle: भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया गया है। उत्तर प्रदेश के अमेठी में कोरबा स्थित 'इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड' (IRRPL) की फैक्ट्री में 100% भारतीय पुर्जों और कच्चे माल से निर्मित पहली AK-203 'शेर' (Sher) असाल्ट राइफल का निर्माण कर इसका सफल परीक्षण (Test-fire) कर लिया गया है।

यह महज कलपुर्जों का असेंबलिंग नहीं, बल्कि 100% एंड-टू-एंड स्वदेशीकरण (End-to-End Indigenisation) का परिणाम है। इसके साथ ही भारतीय सेना के दशकों पुराने INSAS (इंसास) राइफलों को रिटायर करने और जवानों को दुनिया की सबसे घातक असाल्ट राइफलों में से एक से लैस करने की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है।

'मेक इन इंडिया' की बड़ी छलांग : अमेठी की कोरबा फैक्ट्री का कारनामा

AK-203 मूल रूप से रूस की प्रसिद्ध कलाश्निकोव (Kalashnikov) 200 सीरीज पर आधारित है, जिसे भारत-रूस के संयुक्त उद्यम (JV) के तहत अमेठी में बनाया जा रहा है।                     

  • प्रोजेक्ट की कुल लागत: भारत सरकार ने सेना के लिए लगभग 6,01,427 AK-203 राइफलों की आपूर्ति के लिए ₹5,124 करोड़ के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
  • हर 100 सेकंड में एक राइफल: प्लांट में पूर्ण क्षमता से उत्पादन शुरू होने के बाद हर 100 सेकंड में एक स्वदेशी AK-203 राइफल बनकर तैयार होगी।
  • आर्मी ट्रायल्स की तैयारी: IRRPL अब 100% स्वदेशी प्रोटोटाइप्स तैयार कर रहा है, जिन्हें सितंबर 2026 में भारतीय सेना के व्यापक परीक्षणों (Army Trials) के लिए सौंपा जाएगा।

कितनी घातक है AK-203 'शेर'? जानिए इसकी प्रमुख ताकतें

भारतीय सेना के अग्रिम पंक्ति के सैनिकों के लिए यह राइफल बेहद मारक, सटीक और हर मौसम में काम करने वाली साबित होगी:

  1. भारी कारतूस, ज्यादा मारक क्षमता: इसमें $7.62 times 39text{mm}$ कैलीबर की गोलियों का उपयोग होता है, जो दुश्मन को एक ही वार में न्यूट्रलाइज़ (One-shot Stop) करने की ताकत रखती हैं।
  2. लंबी रेंज और हाई-फायरिंग स्पीड: AK-203 'शेर' की प्रभावी मारक क्षमता (Effective Range) 800 मीटर तक है और यह 700 राउंड प्रति मिनट की रफ्तार से फायर कर सकती है।
  3. हल्का वजन और छोटा साइज: 30-राउंड मैगजीन के साथ इसका कुल वजन मात्र 3.8 किलोग्राम है, जिससे सियाचिन के ग्लेशियरों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक इसे ले जाना और इस्तेमाल करना बेहद आसान है।
  4. कभी न जाम होने वाली विश्वसनीयता: यह गैस-ऑपरेटेड रोटेटिंग बोल्ट सिस्टम पर काम करती है। अत्यधिक बर्फ, रेत या कीचड़ में भी इसके जाम होने की संभावना न के बराबर है।
  5. मॉड्यूलर डिजाइन (Picatinny Rail): इसमें आधुनिक टेलिस्कोपिक साइट, नाइट-विज़न स्कोप, लेजर डिज़ाइनर और ग्रिप लगाने के लिए पिकाटिनी रेल दी गई है, जो इसे रात के ऑपरेशन्स के लिए आदर्श बनाती है।

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AK 203 Sher assault rifle

 

अमेठी में 100% भारतीय घटकों से बनी AK-203 'शेर' का सफल परीक्षण न केवल भारतीय सेना की पैदल सेना (Infantry) की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि विदेशी हथियारों के आयात पर भारत की निर्भरता को समाप्त कर देश को रक्षा निर्यात के एक नए युग में ले जाएगा।

955 मौतों के बाद भी खत्म नहीं हुआ खौफ! नेपाल में सुरंगों के अंदर फंसे लोगों को बचाने की जंग जारी

नेपाल और तिब्बत में आई भयंकर बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। कई इलाकों में पानी और मलबे के कारण हालात बेहद खराब हैं। सोमवार शाम तक 955 लोगों की मौत और 4,471 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई। नेपाल में लापता लोगों में बड़ी संख्या हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़ी है। कई लोग सुरंगों और मलबे के बीच फंसे होने की आशंका है। उन्हें बाहर निकालने के लिए सेना और बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। कई जगह रास्ते और पुल टूटने से राहत कार्य मुश्किल हो गया है।

ऐसे में ड्रोन, थर्मल कैमरों और दूसरे आधुनिक उपकरणों की मदद से लापता लोगों की तलाश की जा रही है। बचाव दल सुरंगों के अंदर भी पहुंचकर हर संभव जगह को खंगाल रहे हैं। इस बीच विदेशों में रहने वाले नेपाली और मैपिंग वॉलंटियर्स भी प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी जुटाने में मदद कर रहे हैं।

250 मीटर गहरी सुरंग में उतरी टीम

नेपाल आर्मी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बसनेट के मुताबिक, रेस्क्यू टीम रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में दाखिल हुई। यहां 14 लोगों के फंसे होने की आशंका थी। टीम के पास सर्चलाइट और ड्रोन थे और उसने करीब 250 मीटर गहरी सुरंग के आखिरी हिस्से तक पहुंचकर काफी देर तक तलाश की। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद किसी व्यक्ति का कोई सुराग नहीं मिला और टीम को वापस लौटना पड़ा।

चिलिमे प्रोजेक्ट में 100 मीटर बाद रास्ता हुआ बंद

चिलिमे हाइड्रोपावर प्लांट में भी बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। विदेशी विशेषज्ञों के साथ संयुक्त रेस्क्यू टीम सुरंग के भीतर करीब 100 मीटर तक पहुंची, लेकिन आगे का रास्ता कीचड़ और गाद से पूरी तरह दबा मिला। मलबे ने बचाव दल की राह रोक दी, जिससे अंदर तक पहुंचना मुश्किल हो गया।

त्रिशूली-3A में रास्ता बनाने के लिए किया गया नियंत्रित विस्फोट

सबसे कठिन अभियानों में त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का रेस्क्यू ऑपरेशन भी शामिल रहा। यहां सुरंग तक पहुंचने के लिए रेस्क्यू टीम को नियंत्रित विस्फोट करना पड़ा, ताकि एक नया प्रवेश मार्ग बनाया जा सके। भारी मलबे और बदहाल रास्तों के बीच हर कदम पर बचाव दल को नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

सड़कें टूटीं तो आसमान बना रेस्क्यू का रास्ता

बाढ़ ने सड़कें और पुल तक बहा दिए हैं। ऐसे में रेस्क्यू टीमों के लिए कई इलाकों तक जमीन के रास्ते पहुंचना लगभग नामुमकिन हो गया है। अब ड्रोन आसमान से मलबे के बीच जिंदगी के संकेत तलाश रहे हैं। थर्मल कैमरों की मदद से संभावित रूप से फंसे लोगों और शवों की पहचान की जा रही है। यही ड्रोन दुर्गम इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी मदद कर रहे हैं।

विदेशों में बैठे नेपाली और मैपिंग वॉलंटियर्स भी जुटे

इस मुश्किल घड़ी में मदद सिर्फ जमीन पर मौजूद रेस्क्यू टीमों तक सीमित नहीं है। विदेशों में रहने वाले नेपाली और दुनियाभर के मैपिंग वॉलंटियर्स भी अभियान में योगदान दे रहे हैं। वे सैटेलाइट तस्वीरों को स्कैन कर बाढ़ से प्रभावित इलाकों का नक्शा तैयार करने में मदद कर रहे हैं, ताकि बचाव दल उन जगहों तक जल्दी पहुंच सके जहां लोगों के फंसे होने की आशंका है।

हर सुरंग, हर मलबे के ढेर में उम्मीद की तलाश

बाढ़ की तबाही ने नेपाल के हाइड्रोपावर क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया है। कहीं सुरंगें मलबे से बंद हैं तो कहीं सड़क और पुल पूरी तरह गायब हो चुके हैं। इसके बावजूद रेस्क्यू टीमें एक-एक सुराग तलाश रही हैं। अंधेरी सुरंगों से लेकर आसमान में उड़ते ड्रोन तक, हर कोशिश का मकसद एक ही है कहीं कोई जिंदगी अब भी मदद का इंतजार तो नहीं कर रही।

VIDEO: नंगे पांव दौड़ी 47 साल की मां, बेटियों की पढ़ाई के लिए जीती मैराथन रेस; ₹3000 की इनामी राशि बनी उम्मीद की किरण

8th Pay Commission: पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर! इस डेट से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन रिवीजन पर आयोग ने उठाया ये कदम

8th CPC Pension Revision Update: 8वां वेतन आयोग की बैठकों के बीच देश के लाखों पेंशनर्स के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक हलचल देखने को मिल रही है। 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों की पेंशन संशोधन की मांग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों (ToR) में संशोधन की मांग करने वाले आवेदनों को अंतिम विचार और उचित कार्रवाई के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पास भेज दिया है। आइए आपको बताते हैं कि पेंशन संगठनों ने क्या मांग रखी है और इस कदम का पूर्व कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा।

किन पेंशनभोगी संगठनों ने भेजी है अर्जी?

DoPT ने जिन दो मुख्य कर्मचारी/पेंशनभोगी संगठनों के ज्ञापनों को व्यय विभाग को फॉरवर्ड किया है, उनके नाम ये हैं:

1- ऑल इंडिया आरएमएस, एमएमएस एंड पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन: संगठन के महासचिव गिरिराज सिंह द्वारा 30 जुलाई 2026 को भेजा गया आवेदन।

2- ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन: संगठन के महासचिव सी. श्रीकुमार द्वारा 4 अगस्त 2026 को प्रस्तुत किया गया आवेदन।

DoPT ने 18 अगस्त 2026 के अपने ऑफिस मेमोरेडम में स्पष्ट किया है कि इन ज्ञापनों पर ‘उचित कार्रवाई’ के लिए इन्हें व्यय विभाग को सौंपा जा रहा है।

पेंशनभोगियों की मुख्य मांग क्या है?

पेंशनभोगी संगठनों की प्राथमिक मांग यह है कि 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference में संशोधन किया जाए। वर्तमान में पेंशनभोगी चाहते हैं कि आयोग के अधिकार क्षेत्र में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन संशोधन के मुद्दे को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए, ताकि जब आयोग वेतन और पेंशन ढांचे की समीक्षा करे, तो पुराने पेंशनभोगियों के हितों की भी अनदेखी न हो।

क्या पेंशन संशोधन को मंजूरी मिल गई है?

नहीं, बिल्कुल नहीं। DoPT के मेमोरेंडम को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। DoPT ने अभी केवल पेंशनभोगियों की मांग को वित्त मंत्रालय को स्थानांतरित किया है। इस आदेश में पेंशन संशोधन को मंजूरी नहीं दी गई है और न ही ToR में कोई संशोधन हुआ है। इस मेमोरेंडम में किसी भी फिटमेंट फैक्टर, संशोधित पेंशन फॉर्मूले या अतिरिक्त लाभ का ऐलान नहीं किया गया है। आयोग के ToR में बदलाव का निर्णय केवल केंद्र सरकार के औपचारिक आदेश द्वारा ही संभव है।

चौथे वेतन आयोग (1985) का दिया गया ऐतिहासिक संदर्भ

पेंशनभोगी संगठनों ने अपनी मांग के समर्थन में ऐतिहासिक मिसाल का हवाला दिया है।8 नवंबर 1985 को वित्त मंत्रालय ने एक प्रस्ताव पारित कर चौथे वेतन आयोग के नियम और शर्तों (ToR) में संशोधन किया था। इसके जरिए आयोग को यह विशेष जिम्मेदारी दी गई थी कि वह पुराने और नए दोनों पेंशनभोगियों के लिए एक न्यायसंगत पेंशन ढांचे की समीक्षा करे।

इसी तर्ज पर संगठन चाहते हैं कि 8वें वेतन आयोग में भी पुरानी और नई पेंशन दरों के बीच तालमेल बिठाने के लिए ToR में संशोधन किया जाए।

आगे क्या होगा?

अब यह पूरा मामला वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पाले में है। व्यय विभाग इन ज्ञापनों की समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि क्या 8वें वेतन आयोग के ToR में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाना चाहिए या नहीं। जब तक वित्त मंत्रालय या कैबिनेट की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक 1 जनवरी 2026 से पहले के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन समीक्षा पर अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा।

5 रन से जिम्बाब्वे जीती T20I मैच, नामिबिया के खिलाफ टाला उलटफेर


NAMvsZIM विंडहोक में खेले गए त्रिकोणीय सीरीज के मैच में ज़िम्बाब्वे ने नामीबिया से मिली कड़ी चुनौती का सामना करते हुए पांच रन से रोमांचक जीत दर्ज की। टीम 101/6 के स्कोर से उबरकर 195/6 तक पहुँची और आखिरी ओवर में संयम बनाए रखा। नामीबिया, जिसने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शानदार जीत के साथ ट्राई-सीरीज की शुरुआत की थी, लक्ष्य का पीछा करते हुए 76/6 के स्कोर पर मुकाबले से बाहर दिख रहा था, लेकिन ज़ेन ग्रीन और अलेक्जेंडर वोल्शेंक ने सातवें विकेट के लिए सिर्फ़ 49 गेंदों में 109 रनों की शानदार साझेदारी की।

बल्लेबाजी का न्योता मिलने के बाद ज़िम्बाब्वे ने मज़बूत शुरुआत की; बेन करन और ब्रायन बेनेट ने पहले विकेट के लिए तेज़ी से 64 रन जोड़े। नामीबिया को पावरप्ले की आखिरी गेंद पर सफलता मिली, जब बेनेट ने जेजे स्मिट की गेंद पर पुल शॉट खेलने की कोशिश में डीप मिडविकेट पर कैच दे दिया; वे 21 गेंदों में 32 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद अगले ओवर में डियोन मायर्स बर्नार्ड शोल्ट्ज़ का शिकार बने; वे एक ऐसी गेंद पर आउट हुए जो तेज़ी से टर्न हुई और ऑफ स्टंप के ऊपरी हिस्से से टकरा गई।

दो गेंदों बाद, गेरहार्ड इरास्मस ने सिकंदर रज़ा को ‘गोल्डन डक’ (पहली ही गेंद पर आउट) पर पवेलियन भेजकर सबसे बड़ी सफलता दिलाई; रज़ा स्लॉग-स्वीप शॉट सही समय पर नहीं खेल पाए। नौवें ओवर में करन के आउट होने से टीम लड़खड़ा गई, और जब इरास्मस ने जल्द ही वेस्ली मधावेरे को भी आउट किया, तो 10वें ओवर तक ज़िम्बाब्वे का स्कोर 79/5 हो गया था।

बाद में रयान बर्ल और ब्रैड इवांस ने आठवें विकेट के लिए 48 गेंदों में 94 रन जोड़े और पारी का रुख पूरी तरह बदल दिया। आखिरी ओवर के लिए स्पिन गेंदबाज़ी का सहारा लेने का नामीबिया का फ़ैसला भी काफ़ी महंगा साबित हुआ। बर्ल ने इरास्मस की गेंदों पर एक छक्का और लगातार तीन चौके जड़े और उस ओवर से 20 रन बटोरे, जिससे ज़िम्बाब्वे का स्कोर 195/6 के शानदार टोटल तक पहुँच गया।

नामीबिया की पारी की शुरुआत में कुछ मुश्किल पल आए, और फिर तीसरे ओवर में ब्लेसिंग मुज़राबानी ने लॉरेन स्टीनकैंप को आउट कर दिया। गेरहार्ड इरास्मस ने तेज़ी से 12 रन बनाए, लेकिन फिर ब्रैड इवांस का शिकार बने। जान निकोल लोफ़्टी-ईटन ने 13 गेंदों पर 20 रन बनाकर कुछ देर के लिए पलटवार किया, लेकिन ब्रायन बेनेट ने तीन गेंदों के अंदर उन्हें और जेजे स्मिट को आउट कर दिया, जिससे नामीबिया का स्कोर 66/4 हो गया।

जान फ्रिलिंक की 29 गेंदों पर 22 रनों की संयमित पारी भी टीम को लड़खड़ाने से नहीं बचा सकी और 11वें ओवर में वेलिंगटन मसकाद्ज़ा ने उन्हें अपना पहला शिकार बनाया। और जब अगले ओवर में रूबेन ट्रम्पेलमैन सिकंदर रज़ा की गेंद पर आउट हुए, तो नामीबिया 76/6 के स्कोर पर हार की कगार पर दिख रहा था।

इसके बाद टीम ने ज़बरदस्त वापसी की। वोल्शेंक ने आक्रामक रुख अपनाया, 13वें ओवर में वेलिंगटन मसकाद्ज़ा के खिलाफ़ दो छक्के जड़े और लगातार छोटी लेंथ की गेंदों को निशाना बनाया। ग्रीन भी उनके साथ जुड़े और धीरे-धीरे लय में आ गए। दोनों ने तेज़ी से रन बटोरे, खराब गेंदों का फायदा उठाया और ज़िम्बाब्वे को जमने का मौका नहीं दिया। उनकी साझेदारी 100 रन के पार पहुँच गई और अचानक नामीबिया को आखिरी ओवर में जीत के लिए सिर्फ़ 16 रनों की ज़रूरत थी, जबकि छह विकेट गिर चुके थे।

आखिरी ओवर फेंकने के लिए बुलाए गए ब्रैड इवांस ने नो-बॉल के साथ शुरुआत की, हालांकि नामीबिया उस पर सिर्फ़ दो रन ही बना सका। इसके बाद दो और रन बने, फिर ग्रीन 26 गेंदों पर 54 रन बनाकर रन आउट हो गए; रज़ा के सीधे थ्रो ने उन्हें नॉन-स्ट्राइकर एंड पर क्रीज़ से बाहर पकड़ लिया।

वोल्शेंक ने सीधे मैदान की तरफ़ एक बाउंड्री लगाकर उम्मीद बनाए रखी, लेकिन उनकी शानदार पारी 29 गेंदों पर 56 रनों पर खत्म हुई; एक फुल और वाइड गेंद पर उनके बल्ले का किनारा लगा और मारुमानी ने स्टंप्स के पीछे एक हाथ से शानदार कैच लपका।

दो गेंदें बाकी थीं और नामीबिया को नौ रनों की ज़रूरत थी। बर्नार्ड शोल्ट्ज़ एक मुश्किल सिंगल लेने की कोशिश में रन आउट हो गए, जिससे जैक ब्रासेल के पास आखिरी मौका बचा। इवांस ने संयम बनाए रखा, ब्रासेल को शून्य पर बोल्ड किया और ज़िम्बाब्वे के लिए पांच रनों की शानदार जीत पक्की कर दी।

संक्षिप्त स्कोर: जिम्बाब्वे 195/6 (रयान बर्ल 57*; गेरहार्ड इरास्मस 3-46) ने नामीबिया 190 (अलेक्जेंडर वोल्शेंक 56, ज़ेन ग्रीन 54; ब्रैड इवांस 3-41) को 5 रन से हराया।

गुजरात विधानसभा का 3 दिवसीय मानसून सत्र 9 सितंबर से: पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि के बाद शुरू होगी कार्यवाही

गुजरात विधानसभा का 3 दिवसीय मानसून सत्र 9 सितंबर से: पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि के बाद शुरू होगी कार्यवाही

Gujarat Monsoon Session 2026

गुजरात विधानसभा के आगामी मानसून सत्र के शेड्यूल में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राज्यपाल द्वारा जारी की गई नई अधिसूचना के अनुसार, यह 9वां सत्र अब 8 सितंबर के बजाय 9, 10 और 11 सितंबर यानी तीन दिनों तक चलेगा। गांधीनगर में आयोजित होने वाले इस छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सत्र के दौरान राज्य सरकार के नीतिगत और प्रशासनिक कार्यों को निपटाया जाएगा। तीनों दिनों के दौरान राज्य सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी विधेयक पेश किए जाएंगे और उन पर विस्तृत चर्चा के बाद उन्हें पारित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ALSO READ: Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार

 

प्रधानमंत्री के दौरे के कारण सत्र की तारीखों में बदलाव

मिल रही जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 8 सितंबर को तय हुए गुजरात दौरे को ध्यान में रखते हुए विधानसभा सत्र के समय-पत्रक में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान विभिन्न राजनीतिक और सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन होना है, जिसमें राज्य के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी व्यवस्थाओं में व्यस्त रहेंगे। इसी वजह से सत्र की शुरुआत 8 सितंबर के बजाय 9 सितंबर से रखी गई है। नई तारीखों की घोषणा के साथ ही विधानसभा सचिवालय द्वारा सभी विधायकों और संबंधित विभागों को नया शेड्यूल भेज दिया गया है।

 

पहले दिन दिवंगत नेताओं को शोक उल्लेख और श्रद्धांजलि

सत्र के शुरुआती दिन विधायी कार्य और अन्य संसदीय कार्यवाही शुरू होने से पहले सदन में नियमानुसार शोक उल्लेख पेश किया जाएगा। इस अवसर पर हाल के समय में दिवंगत हुए राज्य के पूर्व विधायकों, वर्तमान सदस्यों और महानुभावों को पूरे सदन द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं द्वारा दिवंगत नेताओं के राज्य के विकास और जनकल्याण में दिए गए अतुलनीय योगदान को याद किया जाएगा। इसके बाद सभी सदस्य दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे, जिसके बाद ही सदन की दैनिक कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

 

जमीन टुकड़ा कानून संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश होने की संभावना

तीन दिवसीय इस सत्र के दौरान राज्य सरकार द्वारा जनहित और भू-राजस्व (लैंड रेवेन्यू) सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रखे जाने की प्रबल संभावना है। विशेष रूप से, राज्य के किसानों और भूमि स्वामियों से संबंधित 'जमीन टुकड़ा कानून संशोधन विधेयक' (Land Fragmentation Act Amendment Bill) सहित कुछ अन्य सुधार बिल पेश किए जाने की चर्चा है। इसके अलावा, सत्र के दौरान विधायकों के लिए तारांकित प्रश्नकाल का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के मुद्दों, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चर्चा देखने को मिलेगी।