IMD Weather Report: इन 5 राज्यों में भारी बारिश और आंधी-तूफान का अलर्ट, जानें आपके यहां कैसा रहेगा मौसम

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रविवार को देश के कई राज्यों में बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है, जबकि दिल्ली-NCR, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही, दक्षिण-पश्चिम मानसून के अगले कुछ दिनों में महाराष्ट्र के और हिस्सों तक पहुंचने की उम्मीद है।

दिल्ली-NCR में मिलेगी गर्मी से राहत

दिल्ली-NCR के लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को कई जगहों पर बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। शनिवार को भी ऐसा ही मौसम देखने को मिला था और यह सिलसिला रविवार को भी जारी रह सकता है।

महाराष्ट्र में बढ़ेगा मानसून का असर

महाराष्ट्र में अगले 4-5 दिनों के दौरान मानसून और आगे बढ़ सकता है। विदर्भ क्षेत्र में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है, जिसके चलते कुछ इलाकों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।

हालांकि राज्य के आंतरिक हिस्सों में अगले तीन दिनों तक अधिकतम तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है, जिसके बाद तापमान में गिरावट आने की संभावना है।

तमिलनाडु में भारी बारिश का अलर्ट

तमिलनाडु के पश्चिमी घाट से जुड़े 10 से अधिक जिलों में 21 जून से भारी बारिश होने की संभावना है। नीलगिरि, इरोड, सलेम, धर्मपुरी, कृष्णागिरी, कोयंबटूर, थेनी, डिंडीगुल, कन्याकुमारी और तिरुनेलवेली के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।

बारिश के कारण कई जिलों में तापमान 4-5 डिग्री तक कम हो सकता है। मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह भी दी है, क्योंकि तटीय इलाकों में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

पश्चिम बंगाल में रेड अलर्ट

उत्तर बंगाल के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भारी बारिश हो सकती है।

वहीं, कोलकाता और दक्षिण बंगाल के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने जलभराव, ट्रैफिक जाम और कम दृश्यता को लेकर चेतावनी दी है।

हिमाचल प्रदेश में येलो अलर्ट

हिमाचल प्रदेश के 7 से 10 जिलों में रविवार और सोमवार को गरज-चमक, बिजली गिरने और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने 25 जून तक राज्य में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।

राजस्थान में तेज आंधी और बारिश

राजस्थान में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण मौसम बदल गया है। बीकानेर, शेखावाटी, जयपुर, भरतपुर और अजमेर संभाग में अगले 48 घंटों के दौरान 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।

जोधपुर, उदयपुर और कोटा संभाग के कुछ हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश और आंधी-तूफान का अनुमान है।

मानसून को लेकर क्या है अनुमान?

IMD के दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार जून से सितंबर के बीच देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि इस अवधि में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 90% रह सकती है, जो सामान्य से कम मानी जाती है।

लोगों के लिए सलाह

मौसम विभाग ने जिन इलाकों में अलर्ट जारी किया है, वहां के लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने, बिजली गिरने से बचने और स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

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Monsoon: इन 5 कारणों से महाराष्ट्र में फंसा मानसून, खरीफ फसलों पर पड़ सकता है असर

Monsoon: दक्षिण-पश्चिम मानसून के दक्षिण महाराष्ट्र में रुके रहने के कारण देश में 4 जून से 18 जून के बीच बारिश में 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस दौरान देश में सामान्य 72.2mm बारिश के मुकाबले केवल 42.6mm बारिश हुई है। IMD के क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक, मध्य भारत में 67%, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 42%, दक्षिणी प्रायद्वीप में 22%  और उत्तर-पश्चिम भारत में 6% बारिश की कमी दर्ज की गई है।

मौसम विभाग ने गुरुवार को बताया कि “बड़े पैमाने पर अनुकूल मौसमी परिस्थितियों की कमी” ही मुख्य वजह है, जिसके कारण पिछले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में आगे नहीं बढ़ पाया है।

मानसून के उत्तर की ओर बढ़ने में देरी के पीछे कुल 5 प्रमुख कारण हैं:

पहला कारण यह है कि वर्तमान मानसून प्रवाह को अरब सागर से मजबूत “सर्ज” यानी तेज और स्थिर हवाओं का सपोर्ट नहीं मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, “आम तौर पर ऐसी तेज हवाएं ही नमी को बढ़ाने और बड़े पैमाने पर बारिश कराने के लिए जिम्मेदार होती हैं, जिससे मानसून आगे बढ़ता है।”

दूसरा कारण यह है कि अरब सागर में मानसून से जुड़ी निचले स्तर की दक्षिण-पश्चिमी हवाएं कमजोर पड़ गई हैं। इसके चलते महाराष्ट्र के तटीय और अंदरूनी इलाकों तक नमी (moisture) का प्रवाह कम हो गया है।

तीसरा कारण पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर में क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो का कमजोर होना है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए मुख्य नमी स्रोत माना जाता है। आईएमडी के अनुसार, इस प्रवाह के कमजोर होने से मानसून की गतिविधि भी प्रभावित हुई है।

चौथा कारण यह है कि अभी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मौसमीय सिस्टम नहीं है, जैसे निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area), चक्रवाती परिसंचरण या पश्चिमी तट के साथ सक्रिय ऑफशोर ट्रफ। ये सिस्टम सामान्यतः मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन फिलहाल इनकी कमी है।

आखिरी वजह मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का कमजोर दौर है। यह हवा, बादलों और दबाव का एक चलता-फिरता सिस्टम है जो भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमते हुए बारिश लाता है। जब यह सक्रिय होता है, तो दक्षिण भारत में अधिक बादल बनते हैं, जो मानसून हवाओं के साथ उत्तर की ओर बढ़कर ज्यादा बारिश कराते हैं। लेकिन अभी यह कमजोर स्थिति में है।

IMD के अनुसार, इसी वजह से अगले 4-5 दिनों तक महाराष्ट्र के अधिकतर हिस्सों में बारिश सीमित और केवल छिटपुट रहने की संभावना है।

अल नीनो से खरीफ फसलों पर पड़ेगा असर

दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तर दिशा में धीमी गति और हाल ही में उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में उत्पन्न हुई अल नीनो की स्थिति, जिसके कारण भारत में कम बारिश हुई है, खरीफ फसलों के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है, क्योंकि इन फसलों के फलने-फूलने के लिए समय पर बारिश जरूरी है।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को दिया निर्देश

इसी को देखते हुए मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिया कि ऐसे जिलों की पहचान की जाए जहां कम या असमान बारिश की संभावना है। साथ ही राज्यों के साथ मिलकर फसल-वार आपातकालीन (contingency) योजनाएं तैयार करने को कहा गया है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतर-फसल खेती और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

चौहान ने निर्देश दिया कि हर जोखिम वाले जिले के लिए एक अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जानी चाहिए ताकि खरीफ के मौसम में किसानों को कोई परेशानी न हो।

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