Mumbai Rains Tracker: मुंबई में बरस रही आफत, लोनावाला में 2 दिन में ही महीने भर की बारिश! पवई में 7 फीट का मगरमच्छ भी आया बाहर

Mumbai Rains Update: महाराष्ट्र में मॉनसून की भारी बारिश का कहर लगातार जारी है। सोमवार को हुई मूसलाधार बरसात ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया और राज्य भर में परिवहन व्यवस्था को ठप कर दिया। कई क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। इससे लोगों और यात्रियों के सामने बड़े संकट खड़े हो गए हैं। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार के लिए मुंबई में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और भारी बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक मुंबई में अगले दो से तीन दिनों के भीतर ही पूरे महीने की औसत बारिश होने की संभावना है।

लोनावाला में 2 दिन में 1290 mm बारिश, बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड

मौसम विभाग (IMD) के नाउकास्ट के मुताबिक मशहूर हिल स्टेशन लोनावाला में पिछले 48 घंटों में चौंकाने वाली रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। लोनावाला में महज दो दिनों के भीतर ही रिकॉर्ड 1290 मिमी बारिश दर्ज की गई। यहां 5 जुलाई को 670 मिमी और अगले दिन 6 जुलाई को 620 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग का कहना है कि इस हिल स्टेशन ने सिर्फ दो दिनों में लगभग दो महीने के बराबर की बारिश दर्ज की है।

पवई झील के पास रिहायशी इलाके में घुसा 7 फीट का मगरमच्छ

भारी बारिश के बीच मुंबई के पवई झील के पास स्थित मोरारजी नगर में एक दरगाह के पास करीब सात फीट लंबा मगरमच्छ देखा गया। इससे स्थानीय निवासियों में भारी हड़कंप और दहशत मच गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग और एक बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया। पकड़े गए मगरमच्छ की फिलहाल मेडिकल जांच की जा रही है और स्वास्थ्य जांच पूरी होने के बाद उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

हादसों में गई कई जान, मानखुर्द में गिरी 4 मंजिला इमारत

मुंबई में खराब और भीषण मौसम के कारण कई लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। मानखुर्द इलाके में एक चार मंजिला इमारत ढह गई। इसके मलबे में दबने से छह लोगों की मौत हो गई। पूरे शहर में पेड़ गिरने से संबंधित 200 से अधिक घटनाएं सामने आईं हैं। इनमें दो लोगों की जान चली गई। अगर पिछले पांच दिनों की बात करें तो मुंबई में काफी भारी बारिश हुई है। पुराने मुंबई के कोलाबा क्षेत्र में पहले ही अपनी मासिक औसत 744.2 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। सांताक्रूज वेधशाला ने 805.6 मिमी बारिश दर्ज की है। ये जुलाई महीने की कुल औसत बारिश का लगभग 94 प्रतिशत है।

मुंबई एक्सप्रेसवे पर बंद हुआ था ट्रैफिक, अब लिंक रोड बहाल

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के मुताबिक लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन होने की वजह से सोमवार को पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे और पुराने पुणे-मुंबई हाईवे दोनों पर यातायात को सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में सड़कों से मलबे को साफ करने के बाद अधिकारियों ने ‘पुणे-मुंबई कनेक्टिंग लिंक रोड’ पर वाहनों की आवाजाही को दोबारा बहाल कर दिया है। इसके बावजूद मूसलाधार बारिश के चलते मुंबई महानगरीय क्षेत्र (MMR) में भारी जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है।

ठाणे, कल्याण समेत उत्तरी उपनगरों में हाई अलर्ट

मौसम विभाग के ताजा नाउकास्ट के अनुसार, मुंबई महानगरीय क्षेत्र (MMR) के उत्तरी हिस्सों के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया है। कांदिवली, बोरीवली, वसई, विरार, ठाणे और कल्याण में तेज हवाओं के साथ अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मुंबई के इन उत्तरी उपनगरों में भारी बौछारें तेज होने के कारण निचले इलाकों में गंभीर जलभराव की आशंका जताई गई है। इससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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Monsoon: इन 5 कारणों से महाराष्ट्र में फंसा मानसून, खरीफ फसलों पर पड़ सकता है असर

Monsoon: दक्षिण-पश्चिम मानसून के दक्षिण महाराष्ट्र में रुके रहने के कारण देश में 4 जून से 18 जून के बीच बारिश में 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। भारत मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस दौरान देश में सामान्य 72.2mm बारिश के मुकाबले केवल 42.6mm बारिश हुई है। IMD के क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक, मध्य भारत में 67%, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 42%, दक्षिणी प्रायद्वीप में 22%  और उत्तर-पश्चिम भारत में 6% बारिश की कमी दर्ज की गई है।

मौसम विभाग ने गुरुवार को बताया कि “बड़े पैमाने पर अनुकूल मौसमी परिस्थितियों की कमी” ही मुख्य वजह है, जिसके कारण पिछले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में आगे नहीं बढ़ पाया है।

मानसून के उत्तर की ओर बढ़ने में देरी के पीछे कुल 5 प्रमुख कारण हैं:

पहला कारण यह है कि वर्तमान मानसून प्रवाह को अरब सागर से मजबूत “सर्ज” यानी तेज और स्थिर हवाओं का सपोर्ट नहीं मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, “आम तौर पर ऐसी तेज हवाएं ही नमी को बढ़ाने और बड़े पैमाने पर बारिश कराने के लिए जिम्मेदार होती हैं, जिससे मानसून आगे बढ़ता है।”

दूसरा कारण यह है कि अरब सागर में मानसून से जुड़ी निचले स्तर की दक्षिण-पश्चिमी हवाएं कमजोर पड़ गई हैं। इसके चलते महाराष्ट्र के तटीय और अंदरूनी इलाकों तक नमी (moisture) का प्रवाह कम हो गया है।

तीसरा कारण पश्चिमी हिंद महासागर और अरब सागर में क्रॉस-इक्वेटोरियल फ्लो का कमजोर होना है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए मुख्य नमी स्रोत माना जाता है। आईएमडी के अनुसार, इस प्रवाह के कमजोर होने से मानसून की गतिविधि भी प्रभावित हुई है।

चौथा कारण यह है कि अभी अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत मौसमीय सिस्टम नहीं है, जैसे निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area), चक्रवाती परिसंचरण या पश्चिमी तट के साथ सक्रिय ऑफशोर ट्रफ। ये सिस्टम सामान्यतः मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन फिलहाल इनकी कमी है।

आखिरी वजह मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO) का कमजोर दौर है। यह हवा, बादलों और दबाव का एक चलता-फिरता सिस्टम है जो भूमध्य रेखा के चारों ओर घूमते हुए बारिश लाता है। जब यह सक्रिय होता है, तो दक्षिण भारत में अधिक बादल बनते हैं, जो मानसून हवाओं के साथ उत्तर की ओर बढ़कर ज्यादा बारिश कराते हैं। लेकिन अभी यह कमजोर स्थिति में है।

IMD के अनुसार, इसी वजह से अगले 4-5 दिनों तक महाराष्ट्र के अधिकतर हिस्सों में बारिश सीमित और केवल छिटपुट रहने की संभावना है।

अल नीनो से खरीफ फसलों पर पड़ेगा असर

दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तर दिशा में धीमी गति और हाल ही में उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में उत्पन्न हुई अल नीनो की स्थिति, जिसके कारण भारत में कम बारिश हुई है, खरीफ फसलों के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है, क्योंकि इन फसलों के फलने-फूलने के लिए समय पर बारिश जरूरी है।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को दिया निर्देश

इसी को देखते हुए मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिया कि ऐसे जिलों की पहचान की जाए जहां कम या असमान बारिश की संभावना है। साथ ही राज्यों के साथ मिलकर फसल-वार आपातकालीन (contingency) योजनाएं तैयार करने को कहा गया है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतर-फसल खेती और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

चौहान ने निर्देश दिया कि हर जोखिम वाले जिले के लिए एक अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जानी चाहिए ताकि खरीफ के मौसम में किसानों को कोई परेशानी न हो।

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