अदाणी ग्रुप की 4 कंपनियों के नतीजे इस हफ्ते: Adani Green से लेकर Adani Power तक, जानें रिजल्ट्स की तारीखें और शेयरों का हालिया रिटर्न

Adani Group Q2 Results: कारपोरेट अर्निंग्स का सीजन चल रहा है। अगले हफ्ते शेयर बाजार की नजर अदाणी ग्रुप की चार बड़ी कंपनियों पर रहेगी। सितंबर 2026 तिमाही (Q2) के नतीजों के लिए इन कंपनियों की अहम बैठकें होने वाली हैं। इनमें Adani Green, Adani Energy Solutions, Adani Total Gas और Adani Power शामिल हैं। आइए जानते हैं इन नतीजों की तारीखें, इन्वेस्टर्स कॉल की टाइमिंग और इनके शेयरों का हालिया प्रदर्शन।

1. Adani Energy Solutions Q2 Results

अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड के AGM की बैठक गुरुवार, 22 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी। इसमें वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2FY27) और छमाही (H1FY27) के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजों की घोषणा और उस पर चर्चा की जाएगी। कंपनी की इन्वेस्टर्स/एनालिस्ट कॉन्फ्रेंस कॉल शुक्रवार, 23 अक्टूबर को होगी।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर BSE पर 0.54% की गिरावट के साथ ₹1,360 पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप ₹1,66,321.81 करोड़ है।इस शेयर ने निवेशकों को 1 साल में 43.60%, 2 साल में 31.64% और 3 साल में लगभग 75.55% का शानदार रिटर्न दिया है।

2. Adani Green Energy Q2 Results

अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड का बोर्ड बुधवार, 21 अक्टूबर को बैठक करेगा, जिसमें Q2FY27 और H1FY27 के नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। कंपनी की पोस्ट-रिजल्ट इन्वेस्टर्स कॉल गुरुवार, 22 अक्टूबर को तय की गई है।

बीएसई पर अदाणी ग्रीन का शेयर 0.46% गिरकर ₹1,300 पर बंद हुआ, जबकि कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹2,14,132.90 करोड़ दर्ज किया गया। इस ग्रीन एनर्जी स्टॉक ने 1 साल में 22.64% का पॉजिटिव रिटर्न दिया है, हालांकि पिछले 2 सालों में इसमें 25.78% की गिरावट आई है।

3. Adani Total Gas Q2 Results

अदाणी टोटल गैस का निदेशक मंडल गुरुवार, 22 अक्टूबर को अपनी बैठक में दूसरी तिमाही और छमाही नतीजों की समीक्षा व अनुमोदन करेगा। इसके बाद कंपनी की इन्वेस्टर्स कॉल शुक्रवार, 23 अक्टूबर को आयोजित होगी।

बीएसई पर अदाणी टोटल गैस का शेयर 0.40% की हल्की बढ़त के साथ ₹579.55 पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप ₹63,739.49 करोड़ है। शेयर के प्रदर्शन पर दबाव देखा गया है। इसमें 1 साल में 6.79%, 2 साल में 22.36% और 3 साल में करीब 2.63% की गिरावट दर्ज की गई है।

4. Adani Power Q2 Results

अदाणी पावर के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक शुक्रवार, 23 अक्टूबर को होगी, जिसमें वित्तीय नतीजे जारी किए जाएंगे। इसके बाद कंपनी की एनालिस्ट/इन्वेस्टर्स कॉल अगले कारोबारी दिन सोमवार, 26 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी।

BSE पर अदाणी पावर का शेयर 0.28% टूटकर ₹195.75 पर बंद हुआ। इसका कुल मार्केट कैप ₹3,77,497.90 करोड़ है। रिटर्न के मामले में यह शेयर सबसे आगे रहा है। अदाणी पावर ने 1 साल में 24.44%, 2 साल में 56.46% और पिछले 3 सालों में लगभग 196% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Greater Noida Family Deaths: नूडल्स नहीं, बल्कि प्रॉपर्टी विवाद के चलते 5 लोगों की गई जान! ग्रेटर नोएडा मामले में मृतक की बहनें-जीजा गिरफ्तार

Greater Noida Family Deaths Case: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के एक गांव में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चों की कथित जान देने के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत के मामले में जांच के दौरान शुरुआती तौर पर चाय और नूडल्स खाने के बाद फूड पॉइजनिंग से जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन पोस्टमार्टम में जहर के संकेत मिलने के बाद पुलिस अब संपत्ति विवाद और मौत को गले लगाने के लिए उकसाने के एंगल से जांच कर रही है। इस मामले में मृतक की दो बहनों और उनके जीजा को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस जांच में पता चला है कि मृतक महेश जिस मकान में पत्नी और बच्चों सहित रहता था, उसे उसकी ही सगी बहन सुनीता ने मां से अपने नाम करवा लिया था। इसे लेकर महेश हमेशा टेंशन में रहता था। उसके मोबाइल से एक ऑडियो मिली है। इसमें मौत का जिम्मेदार बहन सुनीता, बहनोई शेखर, छोटी बहन सपना को बताया है। शिकायत के आधार पर ग्रेटर नोएडा पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि परिवार लंबे समय से संपत्ति विवाद से जूझ रहा था। इसी विवाद को पांचों की मौत की परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

मौत से पहले महेश ने वॉयस नोट में खोला राज!

पुलिस के मुताबिक, मृतक महेश ने अपनी मौत से पहले मोबाइल फोन में एक वॉयस नोट रिकॉर्ड किया था। इसमें उसने परिवार की स्थिति के लिए अपनी दोनों बहनों और जीजा को जिम्मेदार ठहराया है। इस रिकॉर्डिंग को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, आरोपियों की भूमिका और मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। रबूपुरा के थाना प्रभारी (SHO) सुजीत उपाध्याय ने पीटीआई को बताया कि मृतक व्यक्ति की दो बहनों और एक जीजा को एक रिश्तेदार की ओर से मिली शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, 37 वर्षीय महेश ने अपनी मौत से पहले मोबाइल फोन पर एक ‘वॉयस नोट’ रिकॉर्ड किया था, जिसमें कथित तौर पर तीनों आरोपियों को मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि संपत्ति के विवाद के कारण यह घटना हुई होगी। थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम में जहर दिए जाने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद विसरा के सैंपल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत का सटीक कारण पता चल सकेगा। महेश, उनकी पत्नी ललिता (35), बेटी मिष्टी (7) और बेटे लड्डू (11) व साक्षात (3) के शव शनिवार सुबह रबूपुरा के पास नगला श्री पदम गांव स्थित उनके घर से बरामद हुए थे। शुरुआत में मौत का कारण खाद्य विषाक्तता माना जा रहा था क्योंकि खबरों से पता चला था कि परिवार के सदस्यों ने मौत से पहले ‘नूडल्स’ खाए थे। फिलहाल, मामले में अन्य एंगल से भी जांच चल रही है।

शिकायत के आधार पर तीन रिश्तेदार गिरफ्तार

पुलिस ने महेश की दो बहनों सुनीता और सपना तथा उनके जीजा शेखर को गिरफ्तार किया है। मृतकों में से एक के भाई की शिकायत के आधार पर तीनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तीनों रिश्तेदार महेश और उसके परिवार को परेशान कर रहे थे। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। फिलहाल, यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित उत्पीड़न और संपत्ति विवाद का पांचों की मौत से क्या संबंध था।

विसरा रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज

पोस्टमार्टम में जहर के संकेत मिलने के बाद डॉक्टरों ने पांचों मृतकों के विसरा सैंपल सुरक्षित रखे थे। इन नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल, पुलिस आत्महत्या की आशंका, जहर दिए जाने की संभावना, संपत्ति विवाद और वॉयस नोट में लगाए गए आरोपों सहित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। ऐसे में विसरा रिपोर्ट इस मामले में अहम साबित हो सकती है।

ये भी पढ़ें- IMD Weather Alert: इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट! कई इलाकों में आंधी-तूफान और तेज हवाओं की चेतावनी, 24 अक्टूबर तक बरसेंगे बादल

Rakhi Sawant: यूपी की अदालत में राखी सावंत नहीं हुईं पेश, एक्ट्रेस के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया

Rakhi Sawant: उत्तर प्रदेश के झांसी की एक अदालत ने अभिनेत्री राखी सावंत के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। यह मामला 2010 में हुई एक आत्महत्या से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि राखी ने अपने टीवी शो के दौरान एक स्थानीय निवासी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। सरकारी वकील ने शनिवार को यह जानकारी दी।

जिला सरकारी वकील (अपराध) मृदुल कांत श्रीवास्तव ने बताया कि सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अंजलि ने शुक्रवार को यह वारंट जारी किया है। क्योंकि राखी कई बार बुलाए जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुईं।

राखी सावंत से जुड़ा मामला

पीटीआई के अनुसार यह मामला झांसी के हंसारी प्रेम नगर इलाके के रहने वाले लक्ष्मण अहिरवार से जुड़ा है। वकील ने बताया कि 10 नवंबर 2010 को लक्ष्मण ने आत्महत्या कर ली थी। आरोप है कि राखी ने अपने टीवी शो ‘राखी का इंसाफ’ में कुछ ऐसी टिप्पणियां की थीं, जिनसे लक्ष्मण को अपमानित महसूस हुआ।

लक्ष्मण की मां सावित्री ने प्रेम नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2010 में प्रसारित शो के एक एपिसोड के दौरान राखी ने उनके बेटे के खिलाफ अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार लक्ष्मण और उनकी पत्नी अनीता (जो राजगढ़ की रहने वाली थीं) को उनके वैवाहिक विवाद के चलते शो में बुलाया गया था। पति-पत्नी के बीच झगड़े के बाद अनीता अपने मायके लौट गई थीं। श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को तय की गई है।

राखी सावंत चर्चा में

हाल ही में राखी सावंत, गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादी को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों की वजह से चर्चा में थीं। उन्होंने गोविंदा के अपनी को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ कथित संबंधों पर भी प्रतिक्रिया दी। इस महीने की शुरुआत में पैपराजी से बात करते हुए राखी ने कहा कि वह गोविंदा से इसलिए नाराज हैं क्योंकि उन्होंने अपनी पत्नी को नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा- “गोविंदा जी पूरा देश आपसे नाराज है। जिस महिला ने आपसे शादी की आपके दो बच्चों को जन्म दिया और जो 40 सालों से आपके साथ रही आपने उसे छोड़ दिया। यह कोमल कौन है?”

इसके बाद राखी ने दावा किया कि कोमल उनके बारे में बुरा-भला कह रही हैं और उन्होंने कोमल को चेतावनी दी कि वह उनके सामने न आएं। उन्होंने हिंदी में कहा- “वह मेरी बुराई कर रही है और बाकी सेलिब्रिटीज के बारे में भी बकवास कर रही है। चिची भैया ने ही उसे इतनी छूट दी है। सुन लो मुझसे पंगा मत लेना। मैं सुनीता नहीं हूं, मैं तुम्हारी धज्जियां उड़ा दूंगी।” राखी ने कोमल को “पति चोर” भी कहा।

इससे पहले राखी के साथ फोन पर बातचीत के दौरान सुनीता ने आरोप लगाया था कि गोविंदा और कोमल शादी करने की योजना बना रहे हैं। सुनीता का दावा था कि इसी वजह से उन्होंने कोर्ट जाकर अपनी तलाक की अर्जी वापस ले ली थी। हालांकि बाद में गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने दूसरी शादी के इन दावों को पूरी तरह से गलत बताते हुए खारिज कर दिया।

घूस लेकर अभ्यर्थियों को पास कराने वाले दोनों डॉक्टर जेल पहुंचे, बीमारी का बहाना भी नहीं आया काम

होमगार्ड भर्ती परीक्षा के मेडिकल में घूस लेकर अभ्यर्थियों को पास-फेल करने के आरोपी दो आरोपी डॉक्टरों को आखिर जेल जाना पड़ा। उर्सला के आईसीयू में भर्ती दोनों डॉक्टरों और ड्राइवर को शनिवार हैलट और कार्डियोलॉजी भेजा गया। दोनों हॉस्पिटलों ने फिट घोषित कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया।

दादी की एक रेसिपी ने बदल दी किस्मत! 5 लाख लगाकर दो बहनों ने खड़ा किया 10 करोड़ का बिजनेस

कहते हैं कि सफलता की सबसे खास कहानियां अक्सर घर की रसोई से शुरू होती हैं। बेंगलुरु की दो बहनों, राम्या रवि और श्वेता रवि ने इस बात को सच कर दिखाया है। बचपन में दादी के हाथों की पारंपरिक बिरयानी का स्वाद चखने वाली इन बहनों ने उसी रेसिपी को अपना बिजनेस आइडिया बनाया। साल 2020 में महज 5 लाख रुपये से शुरू हुआ उनका कारोबार आज करीब 10 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। उनकी कहानी बताती है कि सही सोच, मेहनत और अपने काम पर भरोसा हो, तो छोटी शुरुआत भी बड़ी कामयाबी में बदल सकती है।

दादी की रेसिपी से आया बिजनेस का आइडिया

राम्या और श्वेता बचपन से ही अपनी दादी के हाथों की कर्नाटक स्टाइल डोन्ने बिरयानी खाती आई थीं। इस बिरयानी का स्वाद उनके लिए सिर्फ एक पसंदीदा डिश नहीं, बल्कि परिवार की यादों और परंपरा का हिस्सा था। बड़े होने के साथ दोनों बहनों को एहसास हुआ कि उनकी दादी की यह खास रेसिपी दूसरे लोगों को भी पसंद आ सकती है। यहीं से उन्होंने पारिवारिक स्वाद को बिजनेस में बदलने का फैसला किया। उनका मकसद बिरयानी के असली स्वाद को बरकरार रखते हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना था।

5 लाख रुपये से शुरू किया कारोबार

नवंबर 2020 में कोरोना महामारी के दौरान दोनों बहनों ने RNR Donne Biryani नाम से अपना कारोबार शुरू किया। शुरुआत बेंगलुरु के महज 200 वर्ग फुट के क्लाउड किचन से हुई। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने 5 लाख रुपये लगाए और एक कुक तथा कुछ सहायकों की मदद से काम शुरू किया। छोटी-सी रसोई से शुरू हुआ यह सफर पहले ही महीने में चर्चा में आ गया। द बेटर इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में राम्या ने बताया कि कारोबार के पहले महीने में उन्हें 10,000 से ज्यादा ऑर्डर मिले। इस शुरुआती सफलता ने दोनों बहनों को आगे बढ़ने का हौसला दिया।

अनोखी पैकेजिंग ने बनाई अलग पहचान

दोनों बहनों ने शुरुआत में महंगे रेस्टोरेंट खोलने के बजाय डिलीवरी आधारित बिजनेस मॉडल अपनाया। इससे कम लागत में कारोबार शुरू करना और धीरे-धीरे उसका विस्तार करना आसान हुआ। उन्होंने अपने ब्रांड को अलग पहचान देने के लिए पैकेजिंग पर भी ध्यान दिया। उनकी बिरयानी केले के पत्ते में लपेटकर टिन के डिब्बे में रखी जाती है। इस अंदाज ने पारंपरिक स्वाद को खास प्रस्तुति के साथ जोड़ दिया।

14 क्लाउड किचन तक पहुंचा कारोबार

रिपोर्ट के मुताबिक, RNR Donne Biryani का विस्तार अब 14 क्लाउड किचन और एक अलग रेस्टोरेंट तक हो चुका है। कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 10 करोड़ रुपये बताया गया है। बिरयानी के अलावा यहां ड्रमस्टिक चिली स्टार्टर, मटन बोन सूप और चिकन घी रोस्ट जैसे व्यंजन भी मिलते हैं। मिठाई में इलनेर पायसम यानी नारियल से बनी खीर भी मेन्यू का हिस्सा है। यहां वेज और चिकन बिरयानी की कीमत 269 से 349 रुपये के बीच है, जबकि मटन बिरयानी 419 रुपये में मिलती है।

View this post on Instagram

A post shared by Instagram

घर के स्वाद से मिली बड़ी सफलता

राम्या और श्वेता की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने हुनर या पारिवारिक परंपरा को कारोबार में बदलना चाहते हैं। दोनों बहनों ने दादी की रेसिपी को आधुनिक बिजनेस मॉडल से जोड़ा और एक छोटे किचन को बड़े ब्रांड में बदल दिया। उनकी सफलता दिखाती है कि बिजनेस की शुरुआत के लिए हमेशा बड़ी पूंजी जरूरी नहीं होती। कई बार एक खास आइडिया और उसे पूरा करने का जुनून ही सफलता की असली नींव बन जाता है।

डेंटिस्ट बनने दुबई गईं भारतीय महिला, डांस फिटनेस से बदली किस्मत, अब हर महीने कमाती हैं 11 लाख रुपये

रांची से पटना का सफर होगा सुपरफास्ट: ₹5,000 करोड़ के फोरलेन से बदलेगी कोडरमा और झुमरी तिलैया की तस्वीर

Ranchi to Patna Four Lane Highway: झारखंड की राजधानी रांची से पटना के लिए ₹5,000 करोड़ की लागत से फोरलेन बनकर तैयार हो रहा है। अगले साल दिसंबर 2027 तक यह काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। PWD विभाग के सचिव सुनील कुमार बताते हैं कि काम में काफी तेजी है और धरातल पर भी आपको काफी कुछ देखने को मिल रहा होगा।

आगे बताते हैं कि अगले साल के अंत तक हम इसके उद्घाटन की योजना बना रहे हैं। यह सड़क बनने से कोडरमा, झुमरी तिलैया, रजरप्पा जैसी जगह जाना भी बेहद आसान हो जाएगा। यह परियोजना करीबन 323 किलोमीटर लंबी है। इससे न सिर्फ इकोनॉमिक कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि यात्रा काफी सुगम व सुरक्षित रहेगी।

हजारीबाग व अन्य शहर जाना होगा आसान

इस परियोजना से खासतौर पर रांची से हजारीबाग जाना बेहद आसान हो जाएगा। बता दें कि रांची से हजारीबाग के बीच पहले ही फोरलेन बन चुका है। हजारीबाग के बरही से कोडरमा के फोरलेन का अंतिम चरण का काम मंजूरी के इंतजार में लटका हुआ था। चूंकि केंद्र से मंजूरी मिल चुकी है, तो काम में काफी तेजी देखने को मिलेगी।

साथ ही, बिहार में रजौली से बख्तियारपुर तक फोरलेन प्रस्तावित है, जबकि बख्तियारपुर से पटना के बीच फोरलेन बना हुआ है। बीच के फोरलेन बनने से रांची और पटना के बीच यात्रियों को काफी आराम मिलेगा, बल्कि टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। अब आप कुछ घंटे में तिलैया डैम जा सकते हैं व रांची से रजरप्पा मंदिर मात्र 1.5 घंटे में पहुंच सकते हैं।

आसपास की जमीन का रेट हुआ हाई

सचिव सुनील कुमार बताते हैं कि सड़क बनने से सिर्फ आवागमन ही सुगम नहीं होगा, बल्कि आसपास की जमीन का रेट ही चार गुना अधिक देखने को मिल रहा है। यानी कि आर्थिक रूप से वहां के आसपास के लोग सशक्त हो रहे हैं। यह ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होगा। सड़क के दोनों ओर आपको अच्छी-खासी हरियाली और ग्रीन पैच भी देखने को मिलेंगे।

रिपोर्ट- शिखा श्रेया

संडे प्रोफाइल : जॉन टर्नस:टर्नस के सामने एपल को एआई में आगे ले जाने की चुनौती

एपल के नए सीईओ जॉन टर्नस डिजाइन की खूबसूरती के साथ हार्डवेयर पर यकीन करते हैं। वे मानते हैं टेक्नोलॉजी से अलग हटकर दूसरी चीजों का भी महत्व है। टर्नस को हाल ही में टाइम मैगजीन के बेस्ट इन्वेंशन ऑफ 2026 के संस्करण के कवर पर जगह मिली है। सितंबर में एपल के बहुप्रतीक्षित फोल्डेबल फोन की लॉन्चिंग के दौरान जॉन टर्नस के हाथ कांप रहे थे। कार्यक्रम का यूट्यूब पर सीधा प्रसारण हो रहा था और कई लोगों ने इस पर ध्यान दिया। बाद में टर्नस ने बताया कि वे इतने उत्साहित थे कि रातभर सो नहीं पाए। इससे अपने प्रोडक्ट के प्रति उनका लगाव जाहिर होता है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले टर्नस ने एपल में 25 साल से ज्यादा समय तक काम किया है। इस दौरान उन्होंने आईफोन, मैक, आईपैड और एयरपॉड्स जैसे प्रोडक्ट को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई। आईपैड की हर पीढ़ी और पहली पीढ़ी के एयरपॉड्स के हार्डवेयर विकास में वे शामिल रहे। मैक कंप्यूटर में इंटेल के प्रोसेसर की जगह एपल के अपने चिप लगाने के बदलाव में भी उन्होंने योगदान दिया। उनके काम में प्रोडक्ट को मजबूत और टिकाऊ बनाना और उनकी मरम्मत आसान करना भी शामिल रहा है। टर्नस से पहले एपल के सीईओ रहे टिम कुक और स्टीव जॉब्स की भूमिका अलग थी। कुक ने कंपनी के कारोबार को बढ़ाने, दुनिया भर में प्रोडक्ट पहुंचाने और सामान बनाने व सप्लाई करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर काम किया। उनसे पहले स्टीव जॉब्स नए प्रोडक्ट की सोच, उनके डिजाइन और लोगों के इस्तेमाल के अनुभव पर ध्यान देते थे। आईफोन, आईपैड और आईपॉड जैसे प्रोडक्ट को दुनिया के सामने लाने में उनकी अहम भूमिका रही। टर्नस की खासियत यह है कि वे प्रोडक्ट के अंदरूनी हिस्सों, उसकी बनावट और काम करने के तरीके पर ध्यान देते हैं। वे यह सुनिश्चित करने में जुटे रहे कि प्रोडक्ट अच्छी तरह काम करें और लोगों के लिए उपयोगी हों। टर्नस का जन्म 1975 में हुआ था। आठ साल की उम्र में उनके पिता ने उन्हें एपल-2 कंप्यूटर दिया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वर्चुअल रियलिटी से जुड़ी एक कंपनी में काम किया। 2001 में वे एपल की प्रोडक्ट डिजाइन टीम में इंजीनियर बने। 2013 में हार्डवेयर इंजीनियरिंग के वाइस प्रेसिडेंट और 2021 में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बने। इस दौरान कंपनी के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में उनकी जिम्मेदारी बढ़ती गई। एपल के प्रोडक्ट डिजाइन वाइस प्रेसिडेंट रिचर्ड डिन्ह के अनुसार, कंपनी की अलग-अलग टीमों के बीच तालमेल बढ़ाने में टर्नस की अहम भूमिका रही है। अब उनके सामने एआई के क्षेत्र में एपल को आगे बढ़ाने की चुनौती है। दूसरी बड़ी टेक कंपनियां एआई पर तेजी से काम कर रही हैं, जबकि एपल की प्रगति पर सवाल उठे हैं। टर्नस का कहना है कि हम ऐसी एआई सुविधाओं पर काम कर रही है, जिनमें यूजर की निजी जानकारी सुरक्षित रहे। फिलहाल टर्नस डिजाइन स्टूडियो और यूजर्स से जुड़ी टीमों के साथ समय बिताते हैं।

‘मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने अपनी कंपनी से 4.7 करोड़ चुराए हैं’, टेक कर्मचारी ने 2 साल तक कुछ काम न करने पर कही बड़ी बात

एक टेक कर्मचारी ने यह दावा करके इंटरनेट यूजर्स को हैरान कर दिया है कि उसने लगभग दो साल तक काम पर लगभग कुछ भी न करते हुए 275,000 डॉलर (करीब 2.6 करोड़ रुपये) की सालाना सैलरी कमाई। कर्मचारी का अनुमान है कि इस दौरान उसे 500,000 डॉलर (लगभग 4.7 करोड़ रुपये) से ज्यादा का भुगतान किया गया, जबकि उसके पास लगभग कोई जिम्मेदारी नहीं थी।

रेडिट पोस्ट वायरल

रेडिट (Reddit) पर एक पोस्ट में उसने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक में एक बड़ा प्रमोशन कैसे एक अप्रत्याशित मोड़ पर आ गया। कंपनी में अचानक हुए पुनर्गठन (restructuring) के कारण उसके पास न तो कोई सार्थक काम बचा और न ही उसे मैनेजमेंट से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले।

रेडिट के ‘r/corporate’ सबरेडिट पर अपना अनुभव साझा करते हुए कर्मचारी ने कहा- “मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने अपनी कंपनी से 500,000 डॉलर से ज्यादा चुरा लिए हैं।” उसने बताया कि उसने कंपनी में लगभग एक दशक बिताया और इस दौरान पांच अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। हालांकि 2025 की शुरुआत में जो उसके करियर का एक अहम पड़ाव होना चाहिए था, वह अनिश्चितता के एक लंबे दौर में बदल गया।

रेडिट यूजर के अनुसार- उसे एक नई टीम में शामिल होने का ऑफर मिला, जो उसके करियर में एक बड़ा कदम था। लेकिन जिस दिन उसने नई टीम जॉइन की उसी दिन कंपनी में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन हुआ, जिसके चलते वे मैनेजर और डायरेक्टर दोनों ही कंपनी छोड़कर चले गए, जिन्होंने उसे काम पर रखा था।

jobb

इस मौके के लिए अपने परिवार को वेस्ट कोस्ट से न्यूयॉर्क शहर ले जाने के बाद उन्होंने एक-दो सप्ताह इंतजार करने का फैसला किया कि नई लीडरशिप के तहत टीम कैसे काम करेगी। हालांकि हालात वैसे नहीं सुधरे जैसी उन्होंने उम्मीद की थी। उन्होंने लिखा- “तो वहां मैं था। साल के लगभग 275,000 डॉलर कमा रहा था एक ऐसी टीम में जहां कोई जिम्मेदारी या मैनेजमेंट का कोई दिशा-निर्देश नहीं था। बस कुछ नहीं कर रहा था।”

ऑफिस के कैफे में बैठकर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स देखते थे

कर्मचारी ने बताया कि उनका अनुभव सिर्फ कम काम या कभी-कभार होने वाली मीटिंग्स से कहीं बढ़कर था। उन्होंने बताया कि वे अपने काम के घंटों में ऑफिस के कैफे में बैठकर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स देखते थे। न्यूयॉर्क शहर के मशहूर रेस्तरां ढूंढ़ते थे और मैनहट्टन में घूमते-फिरते थे। भले ही यह सुनने में एक बहुत ही शानदार स्थिति लगे, लेकिन उन्होंने कहा कि किसी उद्देश्य का न होना धीरे-धीरे उनके लिए निराशा का कारण बन गया।

रेडिट यूजर ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने सार्थक काम पाने और बिजनेस को बेहतर ढंग से समझने के लिए कई कोशिशें कीं। हालांकि उनका कहना है कि नए मैनेजर की तरफ से कोई खास दिशा-निर्देश नहीं मिले, जिसकी वजह से वे अपने काम से पूरी तरह अलग-थलग महसूस करने लगे।

आखिरकार उसने काम खोजने की नियमित कोशिशें बंद कर दीं और ज्यादातर दिन घर पर ही रहने लगा। उसने बताया कि वह अपने अपार्टमेंट के जिम में समय बिताता था, तरह-तरह के नाश्ते तैयार करता था, बालकनी में बैठकर शहर के नजारे देखते हुए कॉफी पीता था और कॉर्पोरेट जीवन की बेतुकी बातों के बारे में सोचता रहता था।

इस अनुभव ने टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के प्रति उसके नजरिए को भी बदल दिया। उसने कहा कि उसे इस बात से काफी हैरानी हुई कि कोई कर्मचारी इतने लंबे समय तक बिना किसी काम (बिना किसी असाइनमेंट) के रह सकता है और फिर भी उसे अच्छी-खासी सैलरी मिलती रहती है।

टेक कर्मचारी का कहना है कि आखिरकार उसे एक बेहतर रोल मिल गया

इन अजीब हालात के बावजूद कर्मचारी ने तय किया कि वह इस अनचाहे ब्रेक का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेगा। कई महीनों तक इंटरव्यू देने के बाद उसे हाल ही में उसी कंपनी में एक और पद मिल गया, जिसे उसने अपने करियर में एक बड़ी तरक्की बताया। हालांकि वह इस नए मौके को लेकर उत्साहित था, लेकिन लगभग दो साल तक बिना किसी काम के रहने के बाद फिर से एक चुनौतीपूर्ण रोल में लौटना काफी मुश्किल साबित हुआ।

उन्होंने लिखा, “मुझे यहां आए अभी सिर्फ डेढ़ हफ्ता ही हुआ है और मुझे लगभग 2 साल तक कोई काम न करने का असर अभी से महसूस होने लगा है। मुझे लग रहा है कि मैं काफी पीछे छूट गया हूं और मेरी कार्यक्षमता भी काफी कम हो गई है।” फिर भी उन्होंने कहा कि वे खुश हैं कि उन्हें एक ऐसी भूमिका मिल गई है, जहां वे सार्थक योगदान दे सकते हैं और फिर से कुछ नया सीख सकते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बिना ज्यादा काम किए सैलरी लेने पर कोई गिल्ट महसूस हुआ तो उन्होंने माना कि शुरुआत में उन्हें लगा जैसे वे कंपनी पर एक ‘बेवजह का खर्च’ बन गए हैं। ऐसा इसलिए था क्योंकि इससे पहले एक सेल्सपर्सन के तौर पर वे कंपनी के लिए काफी रेवेन्यू (कमाई) लाते थे।

हालांकि समय के साथ उनका यह अपराधबोध गुस्से में बदल गया और फिर उन्होंने स्थिति को स्वीकार कर लिया। आखिरकार उन्होंने इस समय का भरपूर फायदा उठाने का फैसला किया—अपनी पत्नी के साथ अच्छा समय बिताया, न्यूयॉर्क के अलग-अलग रेस्तरां में खाना चखा और खुद को एक बहुत जरूरी मानसिक ब्रेक दिया।

उन्होंने आगे कहा कि इस अनुभव ने उन्हें कॉर्पोरेट टेक्नोलॉजी नौकरियों के बारे में एक अलग नजरिया दिया है। यहां कर्मचारी कभी-कभी कंपनी की व्यवस्था की कमियों के बीच ऐसे छिप सकते हैं कि किसी को पता ही नहीं चलता कि उनकी जिम्मेदारियां क्या हैं।

पोस्ट के अंत में उन्होंने पाठकों को अपने सवाल पूछने के लिए इनवाइट किया। बाद में एक एडिट में उन्होंने अपने जैसे अनुभव साझा करने वाले लोगों को धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी कहानियां सुनकर उन्हें अपनी स्थिति के बारे में बेहतर महसूस हुआ।

रेडिट यूजर्स ने अपने मिलते-जुलते अनुभव साझा किए

इस कर्मचारी की कहानी पढ़ने के बाद कई रेडिट यूजर्स ने अपने विचार साझा किए। कुछ लोगों को इस स्थिति से जलन हुई तो कुछ ने इस बात पर चिंता जताई कि कोई सार्थक काम न होने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। एक यूजर ने कहा, “न्यूयॉर्क में इधर-उधर घूमना किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन अगर मेरे हफ्ते में 2 दिन से ज्यादा समय खाली निकल जाए तो मैं पागल होने लगता हूं।”

एक दूसरे यूजर ने कहा, “मैं खुद टेक इंडस्ट्री में काम करता हूं और पूरे दिन व्यस्त रहता हूं, इसलिए आप मेरी ‘ड्रीम जॉब’ जी रहे हैं! बस फर्क इतना है कि अगर मैं आपकी जगह होता तो उस खाली समय का इस्तेमाल अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने और नए सर्टिफिकेशन लेने में करता।”

एक तीसरे यूजर ने कहा, “मैं यहां कुछ पूछने नहीं आया हूं, बस इतना कहना चाहता हूं कि ‘मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है!’ कुछ समय तक तो मजा आता है, लेकिन फिर यह निराशाजनक लगने लगता है। मुझे अभी एक प्रमोशन मिला है और मैं थोड़ा घबराया हुआ हूं क्योंकि अब मुझे सच में काम करना पड़ेगा, लेकिन साथ ही मुझे कुछ नया सीखने और असली काम करने का मौका भी मिलेगा! और हां, अब यह पूरी तरह से रिमोट (घर से काम) नहीं है, बल्कि हाइब्रिड है, जिसे लेकर मैं काफी उत्साहित हूं! और सबसे अच्छी बात यह है कि मैं यूरोप जा रहा हूं।”

Trump Tariff Relief : भारत को रूस से तेल खरीदने पर राहत, ट्रंप 60 दिन में तय करेंगे आगे की रणनीति

Trump Tariff Relief : भारत को रूस से तेल खरीदने पर राहत, ट्रंप 60 दिन में तय करेंगे आगे की रणनीति

sargio gor on modi trump friendship

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस पर प्रतिबंधों और दूसरे देशों पर शुल्क लगाने के वैश्विक और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करने के लिए 60 दिन का समय चाहते हैं।  ट्रंप के हालिया फैसले से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दंडात्मक शुल्क लगाने से जुड़ी कुछ व्यवस्थाओं में राहत मिली है, जिसका फायदा भारत को भी हुआ है।

 

रुबियो उज्बेकिस्तान और भारत की यात्रा पर रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन को यह समझने के लिए समय चाहिए कि रूस से जुड़े प्रतिबंधों और टैरिफ का इस्तेमाल करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।

ALSO READ: Durga Puja Pandal Stampede : माइक से पंडाल गिरने की चेतावनी के बाद मची भगदड़, 19 लोगों की मौत, 25 घायल, सामने आया घटना का वीडियो

रूस से तेल खरीदने वाले देशों को राहत

 

ट्रंप ने शुक्रवार को रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम, जिसे ग्राहम अधिनियम भी कहा जाता है, के कुछ प्रमुख प्रावधानों से छूट देने का फैसला किया था। इस कानून के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दंडात्मक शुल्क लगाने का प्रावधान है।

 

इस छूट से भारत समेत उन देशों को राहत मिली है, जो रूस से ऊर्जा का आयात करते हैं। अमेरिकी प्रशासन अब इस बात का आकलन करना चाहता है कि प्रतिबंधों और टैरिफ से जुड़े कदमों का आर्थिक प्रभाव कितना व्यापक हो सकता है।

jaishakar and rubio

60 दिन तक लागू रह सकती है छूट

 

ट्रंप की ओर से शुक्रवार को हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश के अनुसार, यह छूट तब तक लागू रहेगी, जब तक राष्ट्रपति या विदेश मंत्री, आवश्यकता के अनुसार वित्त मंत्री और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि से परामर्श करने के बाद यह तय नहीं कर लेते कि आगे कोई कार्रवाई करना उचित होगा या नहीं।

 

रुबियो ने कहा कि ग्राहम अधिनियम में छूट का प्रावधान इसलिए रखा गया था, ताकि दुनिया में बदलती परिस्थितियों और उनके प्रभावों का आकलन किया जा सके। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में भी अलग-अलग घटनाओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना जरूरी है।

 

ईरान युद्ध से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव का भी होगा आकलन

 

रुबियो ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव डालने वाली कई घटनाओं को इस समीक्षा में ध्यान में रखना होगा। इनमें ईरान युद्ध, सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के हमले और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी परिस्थितियां शामिल हैं।

 

उन्होंने कहा कि इन सभी घटनाओं के प्रभावों की तुलना करना जरूरी है, ताकि यह तय किया जा सके कि प्रतिबंधों और शुल्कों के संबंध में आगे कौन-सा कदम या किन कदमों का संयोजन सबसे उपयुक्त होगा।

 

भारत अब भी रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीद रहा: रुबियो

 

भारत की ऊर्जा नीति पर बात करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत जैसे देशों ने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाई है, लेकिन वे अब भी रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं।

 

रुबियो के मुताबिक, किसी देश के लिए ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं को रातोंरात बदलना आसान नहीं होता। इसलिए किसी भी फैसले के आर्थिक और ऊर्जा संबंधी प्रभावों को समझना जरूरी है।

 

उन्होंने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार भी बताया। रुबियो सोमवार को भारत पहुंचेंगे। उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा पर नजर रहेगी।

 

भारत-अमेरिका संबंधों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

 

रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी शुल्क का मुद्दा भारत के लिए महत्वपूर्ण रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों का आयात करता है। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ से जुड़े फैसलों का असर भारत की ऊर्जा लागत और व्यापारिक हितों पर पड़ सकता है।

 

ट्रंप प्रशासन की 60 दिन की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों के संबंध में अमेरिका आगे क्या नीति अपनाता है। फिलहाल, दी गई छूट भारत के लिए राहत है, लेकिन आगे की स्थिति अमेरिकी प्रशासन के अगले फैसलों पर निर्भर करेगी।

सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि से आलोकित हो रहा है नारीशक्ति का जीवन : योगी आदित्यनाथ

सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि से आलोकित हो रहा है नारीशक्ति का जीवन : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi Adityanath offered prayers during Sharadiya Navaratri

– दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़कर 31 जनपदों की 4 लाख से अधिक महिलाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रदान कर रहीं मजबूती

– मुख्यमंत्री योगी ने शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर की मां महागौरी की पूजा, कहा- सशक्त नारी, समृद्ध उत्तर प्रदेश

– मुख्यमंत्री ने सरकार के प्रयास से नारीशक्ति के जीवन में आए बदलाव की दी जानकारी

– योगी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय 3,000 रुपए से बढ़ाकर 12,000 रुपए प्रतिमाह किया

– स्वयं सहायता समूहों से आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिख रहीं 1.20 करोड़ से अधिक महिलाएं

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी के स्वरूप की पूजा की। उन्होंने मां महागौरी को शांति, पवित्रता और करुणा की प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने रविवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा कि मां महागौरी की आराधना हमें स्मरण कराती है कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब हर मां स्वस्थ और सुरक्षित हो, हर बेटी को पोषण एवं बेहतर भविष्य मिले तथा प्रत्येक नारी सम्मान के साथ आत्मनिर्भर होकर जीवन यापन कर सके। अब सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि से नारीशक्ति का जीवन आलोकित हो रहा है। 

 

नारीशक्ति को बनाया प्रगति का सक्रिय भागीदार

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने नारीशक्ति को प्रदेश की प्रगति का सक्रिय भागीदार बनाते हुए सुरक्षा, सम्मान, पोषण, शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के अवसरों का विस्तार किया है।

 

आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग किया प्रशस्त 

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले सरकार की नाकामी पर भी प्रहार किया। कहा कि उस समय जहां प्रदेश में बच्चों के पोषण से जुड़ी व्यवस्था माफिया के शिकंजे में दम तोड़ रही थी, वहीं प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद हमने टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपकर व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की और नारीशक्ति के आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त किया। इस पहल ने प्रदेश में पोषण सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ ही कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई को अधिक प्रभावी बनाया।

 

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाया 

सीएम ने बताया कि हमने बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की आधारशिला रखने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय में वृद्धि कर इसे 3,000 रुपए से बढ़ाकर 12,000 रुपए प्रतिमाह किया है। साथ ही, स्वास्थ्य बीमा का लाभ देकर उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को भी संबल प्रदान किया जा रहा है।

 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहीं 4 लाख से अधिक महिलाएं

मुख्यमंत्री ने लिखा कि आज प्रदेश में बलिनी, सामर्थ्य, काशी, बाबा गोरखनाथ और सृजनी जैसी दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़कर 31 जनपदों की 4 लाख से अधिक महिलाएं दुग्ध उत्पादन को आय, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में बीसी सखी पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

सशक्त नारी, समृद्ध उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री ने बताया कि आज प्रदेश में 1 करोड़ 20 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिख रही हैं। लखपति दीदी पहल के माध्यम से महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर को नियमित आय एवं आर्थिक समृद्धि में बदलकर अपने परिवार की खुशहाली सुनिश्चित कर रही हैं। मां महागौरी की कृपा से प्रदेश में आज नारीशक्ति का जीवन सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि से आलोकित हो रहा है। सशक्त नारी, समृद्ध उत्तर प्रदेश।