VIDEO: नंगे पांव दौड़ी 47 साल की मां, बेटियों की पढ़ाई के लिए जीती मैराथन रेस; ₹3000 की इनामी राशि बनी उम्मीद की किरण

Maharashtra News: कहते हैं कि मां अपने बच्चों के भविष्य के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। महाराष्ट्र के बीड़ जिले की 47 वर्षीय रामाबाई रणवीर ने इस बात को सिर्फ साबित ही नहीं किया। बल्कि अपनी मेहनत और हौसले से एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसे देखकर हर कोई उन्हें सलाम कर रहा है। महिला ने नंगे पैर महाराष्ट्र के मैराथन रेस में हिस्सा लिया और पहला स्थान हासिल किया। इस जीत से मिली 3000 रुपये की इनामी रकम उनकी बेटियों की पढ़ाई में मदद करेगी।

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक अंबाजोगाई की रहने वाली रामाबाई एक अकादमी में रसोइया के तौर पर काम करती हैं। पति की मुंबई में एक हादसे में मौत के बाद उनके सामने जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। दो बेटियों की परवरिश और उनकी पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी रामाबाई के कंधों पर आ गई। आर्थिक मुश्किलें थीं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया।

₹3 हजार उनके लिए सिर्फ इनाम नहीं, बेटियों के सपनों की उम्मीद थी

रामाबाई को जब स्थानीय स्तर पर आयोजित ‘अमृत दौड़’ मैराथन के बारे में पता चला तो उन्होंने इसमें हिस्सा लेने का फैसला किया। प्रतियोगिता में जीतने वाले को ₹3,000 की पुरस्कार राशि मिलनी थी। किसी के लिए शायद ₹3,000 बहुत बड़ी रकम न हो। लेकिन रामाबाई के लिए यह राशि बेहद मायने रखती थी। उनके लिए यह सिर्फ मैराथन की पुरस्कार राशि नहीं थी। बल्कि बेटियों की फीस, किताबों और पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों में मदद करने वाली रकम थी। इसी उम्मीद को लेकर वह दौड़ में शामिल होने पहुंचीं।

न स्पोर्ट्स शूज, न महंगे कपड़े, साड़ी और चप्पल में पहुंचीं

रामाबाई के पास न कोई प्रोफेशनल रनिंग शूज थे, न स्पोर्ट्स ड्रेस और न ही किसी तरह की विशेष ट्रेनिंग। वह साधारण साड़ी और चप्पल पहनकर दौड़ में पहुंचीं। दौड़ में उनके आसपास कई युवा प्रतिभागी थे। दूसरे धावक स्पोर्ट्स कपड़ों और रनिंग शूज के साथ पूरी तैयारी में नजर आ रहे थे। लेकिन रामाबाई के पास इन सुविधाओं की कमी जरूर थी, हौसले की नहीं। उनके मन में सिर्फ एक बात थी।उन्हें हर हाल में अपनी बेटियों के भविष्य के लिए दौड़ना है और रेस को जीतना है।

चप्पल बनी रुकावट तो उतार दी और नंगे पांव दौड़ पड़ीं

रेस शुरू हुई तो चप्पल के साथ दौड़ना रामाबाई के लिए मुश्किल होने लगा। चप्पल उनकी रफ्तार में बाधा बन रही थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी चप्पल उतारकर हाथ में पकड़ ली और नंगे पांव दौड़ना शुरू कर दिया। 47 साल की एक मां, साधारण साड़ी में, बिना जूतों के सड़क पर दौड़ रही थीं। सामने उनसे कम उम्र के कई धावक थे, जिनके पास बेहतर जूते और तैयारी थी। लेकिन रामाबाई के कदमों को आगे बढ़ाने वाली ताकत किसी ट्रेनिंग सेंटर से नहीं आई थी।

Maharashtra News: आर्थिक तंगी के बावजूद रमाबाई रणवीर ने पक्का इरादा किया कि दोनों बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाएंगी Maharashtra News: आर्थिक तंगी के बावजूद रमाबाई रणवीर ने पक्का इरादा किया कि दोनों बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाएंगी

फिनिश लाइन पर सबसे पहले पहुंचीं रामाबाई

दौड़ के दौरान हर कदम उनके लिए चुनौती रहा होगा। लेकिन उन्होंने अपनी रफ्तार कम नहीं होने दी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और रामाबाई रणवीर ने सबसे पहले फिनिश लाइन पार कर मैराथन जीत ली। उनके हाथ में अब ₹3,000 की पुरस्कार राशि थी।

रकम भले ही छोटी हो, लेकिन उसके पीछे छिपी कहानी बहुत बड़ी है। यह एक ऐसी मां की जीत थी, जिसने पति को खोने के बाद अकेले अपने परिवार को संभाला और बेटियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए हर संभव कोशिश की।

एक मां की दौड़, जिसने बता दिया कि हौसले के आगे मुश्किलें छोटी हैं

रामाबाई की कहानी सिर्फ एक मैराथन जीतने की कहानी नहीं है। यह उस मां की कहानी है, जिसने आर्थिक तंगी के बावजूद अपनी बेटियों के सपनों को टूटने नहीं दिया। जहां कुछ लोग सुविधाओं के अभाव को आगे बढ़ने में बाधा मान लेते हैं। वहीं रामाबाई ने चप्पल तक छोड़ दी। लेकिन अपनी मंजिल नहीं छोड़ी।

ये भी पढ़ें- नोएडा सेक्टर 148 और 150 को जोड़ने के लिए एक्सप्रेसवे पर बनेगा नया फ्लाईओवर, संकरे अंडरपास से मिलेगी मुक्ति, फुल डिटेल जानिए

उनके लिए यह दौड़ सिर्फ सड़क पर तय किया गया कुछ किलोमीटर का सफर नहीं था। यह अपनी बेटियों के भविष्य के लिए संघर्ष का एक और कदम था। रामाबाई रणवीर की यह जीत उन तमाम मांओं को समर्पित है, जो अपने बच्चों के सपनों के लिए खुद की जरूरतों को पीछे छोड़ देती हैं। महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। उसकी बहादुरी के चर्चे हर तरफ छाई हुई हैं।

दिव्यांग माँ सड़क किनारे चला रही है किचन | Handicapped kitchen | Delhi | Inspiring Woman Story

दिव्यांग माँ सड़क किनारे चला रही है किचन | Handicapped kitchen | Delhi | Inspiring Woman Story

बचपन से दिव्यांग आरती की जिंदगी आसान कभी नहीं रही।
शादीशुदा जिंदगी में भी उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन हर बार टूटने के बाद उन्होंने खुद को फिर से संभाला।
आज दिल्ली के प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन के पास अपने छोटे-से Handicapped kitchen स्टॉल पर आरती सिर्फ खाना नहीं खिलाती, बल्कि अपने दोनों बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हर दिन नई उम्मीद भी पकाती हैं।
अगर आप दिल्ली में हैं, तो एक बार इनके स्टॉल पर ज़रूर जाएँ। आपका एक ऑर्डर किसी माँ के हौसले को और मजबूत बना सकता है। :heart:

📌Handi Service, प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन, दिल्ली

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क्रिकेट इतिहास की अनोखी हार! खराब प्रिंटर की वजह से मैच हार गई टीम

क्रिकेट में अक्सर आपने सुना होगा कि मैदान पर बल्लेबाज, गेंदबाज या फिर बारिश की वजह से मैच का नतीजा बदल जाता है। लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि प्रिंटर खराब होने की वजह से एक टीम हार गई। नॉर्दर्न आयरलैंड में एक मैच का फैसला बेहद अनोखी वजह से हुआ। मैदान पर खेल शुरू होने के बाद बारिश के कारण मैच रोकना पड़ा था। इसके बाद DLS नियम के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी की जानी थी। इसी दौरान सामने आई एक छोटी सी तकनीकी खराबी की वजह से मुकाबले का फैसला हो गया। इस फैसले की काफी चर्चा हो रही है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

किस टीम के बीच था ये मुकाबला

नॉर्दर्न आयरलैंड में एक क्रिकेट मैच का नतीजा बेहद अजीब तरीके से सामने आया। नॉर्थ वेस्ट क्रिकेट यूनियन प्रीमियर लीग में शनिवार को बैलीस्पैलन और एग्लिंटन के बीच मुकाबला खेला गया। एग्लिंटन की टीम 48.1 ओवर में 159 रन बनाकर ऑलआउट हो गई, जिसके बाद बैलीस्पैलन टारगेट का पीछा करने उतरी। टीम ने दो ओवर में 19 रन बना लिए थे, लेकिन तभी बारिश के कारण मैच रोकना पड़ा। इसकी वजह से मैच को कुछ देर के लिए रोक दिया गया। इसके बाद जो घटनाक्रम हुआ, उसने इस मुकाबले को क्रिकेट की बेहद अनोखी हार में बदल दिया।

DLS शीट नहीं कर पाई प्रिंट

बारिश के कारण मैच के ओवर कम करने पड़े। इसके बाद अंपायरों ने DLS नियम के तहत नया लक्ष्य तय करने का फैसला किया। लेकिन इसी समय ये मामला दिलचस्प हो गया। बैलीस्पैलन की टीम जरूरी DLS शीट प्रिंट नहीं कर सकी। टीम का प्रिंटर खराब था, इसलिए जरूरी कागज तैयार नहीं हो पाए। नियमों के मुताबिक, इन कागजों के बिना मैच फिर से शुरू नहीं किया जा सकता था। बारिश रुकने के बाद भी खेल शुरू नहीं हुआ और एग्लिंटन को विजेता घोषित कर दिया गया। इस तरह सिर्फ प्रिंटर खराब होने की वजह से बैलीस्पैलन को मैच हारना पड़ा।

कैसे लिया गया फैसला

नियमों के मुताबिक, अगर दोनों टीमों और अंपायरों को DLS की जरूरी शीट नहीं मिलती है तो घरेलू टीम के खिलाफ फैसला किया जा सकता है। इसके लिए मेजबान क्लब की जिम्मेदारी होती है कि वह मैच के दौरान जरूरी तकनीकी सुविधाएं तैयार रखे। बैलीस्पैलेन इस मैच की मेजबान टीम थी। क्लब के पास DLS चलाने के लिए उपयुक्त सॉफ्टवेयर वाला कंप्यूटर, पर्याप्त कागज और स्याही वाला सही प्रिंटर होना चाहिए। इसके साथ ही प्रिंटर चलाने के लिए एक ऐसा व्यक्ति भी मौजूद होना जरूरी है, जो इस काम को ठीक से संभाल सके।

दोबारा नहीं शुरू हुआ मैच

नॉर्थ वेस्ट क्रिकेट यूनियन के नियमों के अनुसार, मैच शुरू होने से पहले मेजबान टीम को यह सुनिश्चित करना होता है कि DLS से जुड़ा पूरा सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा हो। बैलीस्पैलन की टीम इस जरूरी व्यवस्था को तैयार रखने में नाकाम रही। इसी तकनीकी कमी का उसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ा और बारिश से रुका मैच दोबारा शुरू नहीं हो सका। आखिरकार नियमों के तहत विरोधी टीम को जीत दे दी गई।

GIFT Nifty से सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत के संकेत, तेल की कीमतों और वॉल स्ट्रीट ने बिगाड़ा बाजार का मूड

मंगलवार को सेंसेक्स और निफ्टी के कमजोर शुरुआत करने की संभावना है,क्योंकि आज के कारोबार में GIFT निफ्टी में मामूली गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमतें 91 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं हैं,जबकि वॉल स्ट्रीट में कल गिरावट रही। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली का भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह करीब 8.10 बजे GIFT निफ्टी 24,166 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। इसमें पिछले दिन की क्लोजिंग से 60 अंक या 0.25 प्रतिशत नीचे कारोबार हो रहा था। पिछले सेशन में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 307.68 अंक या 0.40 प्रतिशत गिरकर 76,956.83 पर बंद हुआ था। जबकि निफ्टी 95.25 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 24,080.40 पर बंद हुआ था।

मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मिले-जुले बने हुए हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ से मिलने वाले कुछ सपोर्ट को बेअसर कर सकती हैं। साथ ही यह उम्मीद भी बढ़ रही है कि US फेडरल रिजर्व लंबे समय तक मॉनेटरी पॉलिसी को सख्त बनाए रख सकता है। इससे उभरते बाजारों में रिस्क लेने की इच्छा पर असर पड़ सकता है।

US-Iran के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने से तेल की कीमत $91 के पार

मंगलवार को मिडिल ईस्ट में फिर से शुरू हुई लड़ाई के कारण एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं है। ब्रेंट क्रूड 0.7% बढ़कर $91 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है,जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $86.55 प्रति बैरल हो गया है। US और ईरान के बीच लगभग एक महीने में पहली बार हमले हुए है। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक द्वीप पर हमला किया और ईरान ने जवाब में संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर हमले किए।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

आज मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल है। निवेशक जियोपॉलिटिकल चिंताओं और क्षेत्रीय बाजारो में मजबूती के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं। ताइवान के शेयरों की अगुवाई में MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी गेज 0.3 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। जापान का Topix 0.5 प्रतिशत बढ़ा है। जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.5 प्रतिशत गिरा है। हांगकांग का Hang Seng 0.7 प्रतिशत गिरा है। जबकि Shanghai Composite में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

Stock Market live Updates: GIFT निफ्टी से मिल रहे कमजोर शुरुआत के संकेत, अमेरिकी बाजार गिरे, एशियाई बाजारों में बढ़त

महंगाई की चिंताओं के कारण वॉल स्ट्रीट गिरावट के साथ हुआ बंद

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.70 प्रतिशत गिरकर 53,185.90 पर आ गया,जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ यह 7,686.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट 0.12 प्रतिशत गिरकर 26,370.89 पर आ गया।

हाल के संकेतों से पता चलता है कि पॉलिसी मेकर्स महंगाई को काबू में रखने पर फोकस रहे हैं। US जॉब्स रिपोर्ट अगला अहम ग्लोबल ट्रिगर होगा। निवेशक इसमें फेड की पॉलिसी की दिशा,ट्रेज़री यील्ड और जोखिम लेने की इच्छा से जुड़े संकेत तलाशेंगे।

भारत की मज़बूत GDP ग्रोथ से घरेलू बाजार को सपोर्ट

घरेलू मोर्चे पर एक मजबूत अर्थव्यवस्था को चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात का सामना करना पड़ रहा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जो RBI के 7 प्रतिशत के अनुमान और बाज़ार की उम्मीदों,दोनों से बेहतर है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि ग्लोबल माहौल के मुश्किल होते जाने के बावजूद,मजबूत घरेलू खपत,लगातार होते निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी ग्रोथ की वजह से बेहतर परफॉर्मेंस देखने को मिली है। उन्हें उम्मीद है कि ग्रोथ के ये आंकड़े भारतीय इक्विटी मार्केट के सामने आने वाले जोखिमों को कम करने में मदद करेंगे।

 

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नोएडा सेक्टर 148 और 150 को जोड़ने के लिए एक्सप्रेसवे पर बनेगा नया फ्लाईओवर, संकरे अंडरपास से मिलेगी मुक्ति, फुल डिटेल जानिए

Noida News: राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए नोएडा अथॉरिटी ने एक अहम योजना तैयार की है। नोएडा सेक्टर-148 और सेक्टर-150 को जोड़ने के लिए करीब 500 मीटर लंबा फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 85 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य एक्सप्रेसवे के दोनों ओर स्थित सेक्टरों के बीच आवाजाही आसान करना और मौजूदा संकरे अंडरपास पर वाहनों का दबाव कम करना है।

148 से 150 के बीच बनेगा 500 मीटर का फ्लाईओवर

नोएडा अथॉरिटी एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित सेक्टर-148, 149, 150, 151, 152 और 153 के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने की तैयारी में है। प्रस्तावित फ्लाईओवर करीब 500 मीटर लंबा होगा और मुख्य रूप से सेक्टर-148 तथा सेक्टर-150 को आपस में जोड़ेगा। अथॉरिटी ने इस परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 85 करोड़ रुपये बताई गई है।

मौजूदा अंडरपास बना परेशानी का कारण

फिलहाल, इस एक्सप्रेसवे के नीचे बने अंडरपास के जरिए आसपास के सेक्टरों के लोग एक तरफ से दूसरी तरफ आते-जाते हैं। लेकिन यह अंडरपास काफी संकरा है। खासकर सुबह और शाम के पीक आवर्स में यहां वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है।

समस्या सिर्फ जाम तक सीमित नहीं है। मानसून के दौरान अंडरपास में पानी भरने से आवाजाही और ज्यादा प्रभावित होती है। ऐसे में फ्लाईओवर बनने के बाद स्थानीय वाहन चालकों को अंडरपास पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही एक्सप्रेसवे के दोनों ओर आने-जाने के लिए एक वैकल्पिक और सीधा रास्ता उपलब्ध होगा।

करीब 2 लाख लोगों को होगा फायदा

अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना से आसपास के सेक्टरों में रहने वाले करीब दो लाख लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा आसपास के करीब 20 गांवों के लोगों के लिए भी स्थानीय आवागमन आसान होगा। फ्लाईओवर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्थानीय ट्रैफिक को एक्सप्रेसवे के नीचे बने संकरे अंडरपास से गुजरने की मजबूरी कम होगी। इससे पीक आवर्स में जाम की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

स्पोर्ट्स सिटी में बढ़ने वाली गतिविधियों को ध्यान में रखकर फैसला

नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक, सेक्टर-150 में स्पोर्ट्स सिटी से जुड़े विकास कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में यहां खेल सुविधाओं और अन्य परियोजनाओं के विकसित होने के साथ ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए अथॉरिटी ने अभी से कनेक्टिविटी मजबूत करने की योजना बनाई है। नोएडा अथॉरिटी के जनरल मैनेजर ए.के. अरोड़ा ने बताया कि क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास को ध्यान में रखते हुए सेक्टर-148 और सेक्टर-150 को जोड़ने वाला फ्लाईओवर बनाने का निर्णय लिया गया है।

स्पोर्ट्स सिटी की परियोजनाओं को भी मिली राहत

इसी बीच नोएडा जनरल मैनेजर बोर्ड ने स्पोर्ट्स सिटी के संशोधित लेआउट को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही वर्ष 2022 में स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं पर लगाया गया व्यापक प्रतिबंध भी हटा दिया गया है।इस फैसले से लंबे समय से अटके प्रोजेक्टों में फंसे करीब 20,000 होमबायर्स को अपने फ्लैटों का कब्जा और रजिस्ट्री मिलने की उम्मीद जगी है।

यह कदम नवंबर 2025 में जारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में उठाया गया है। इससे उन परियोजनाओं से जुड़े नक्शे की मंजूरी, बिल्डिंग प्लान के दोबारा सत्यापन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाओं का रास्ता साफ हुआ है, जो लंबे समय से अटकी हुई थीं।

एक्सप्रेसवे पर पहले से हैं दो प्रमुख फ्लाईओवर

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल महामाया फ्लाईओवर और सेक्टर-128 का फ्लाईओवर प्रमुख क्रॉस-एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी देते हैं। प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के आसपास ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर करने के लिए कई अंडरपास भी बनाए हैं। इनमें सेक्टर-94, कोंडली गांव, एडवांट और सेक्टर-148 के अंडरपास शामिल हैं। इसके अलावा झट्टा और सुल्तानपुर गांव में भी अंडरपास का निर्माण कार्य चल रहा है।

फ्लाईओवर से स्थानीय ट्रैफिक को मिलेगा सीधा रास्ता

नए फ्लाईओवर के बनने के बाद नोएडा के प्रमुख सेक्टर-148 और 150 के बीच आने-जाने वाले गाड़ियों को मौजूदा संकरे अंडरपास से होकर गुजरने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे जाम, मानसून में जलभराव और पीक आवर्स में ट्रैफिक दबाव जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है। नोएडा में एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से हो रहे आवासीय और कमर्शियल डेवलपमेंट के बीच यह फ्लाईओवर भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक को देखते हुए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साबित हो सकता है।

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अगस्त में बारिश ने किया निराश, गर्मी ने तोड़ा 125 साल का रिकॉर्ड; सितंबर में भी कम बारिश का अनुमान

अगस्त में बारिश ने किया निराश, गर्मी ने तोड़ा 125 साल का रिकॉर्ड; सितंबर में भी कम बारिश का अनुमान

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अगस्त में देशभर में बारिश सामान्य से करीब 16 फीसदी कम दर्ज की गई। इसके चलते 1 जून से 31 अगस्त तक पूरे मानसून सीजन में बारिश की कमी बढ़कर लगभग 14 फीसदी हो गई है। अब भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सितंबर को लेकर भी राहत की उम्मीद कम कर दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस महीने देश में कुल बारिश सामान्य से कम रह सकती है। ALSO READ: Top News 1 September: अगस्त में 125 साल की गर्मी का रिकॉर्ड टूटा, अन्ना हजारे अस्पताल में भर्ती, मेसी का संन्यास

 

बारिश की कमी के साथ अगस्त में तापमान ने भी नया रिकॉर्ड बनाया। आईएमडी के मुताबिक, 1901 के बाद अगस्त 2026 भारत का सबसे गर्म अगस्त रहा। महीने के दौरान देश का औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सामान्य औसत तापमान 27.34 डिग्री सेल्सियस है।

 

125 साल में सबसे गर्म रहा अगस्त

आईएमडी के महानिदेशक मौसम विज्ञान मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि अगस्त 2026 में देश का औसत तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान औसत न्यूनतम तापमान भी 1901 के बाद अगस्त महीने के लिए सबसे अधिक रहा।

 

अगस्त में औसत न्यूनतम तापमान 24.36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि इसका सामान्य स्तर 23.68 डिग्री सेल्सियस है। यानी रात के तापमान में भी सामान्य के मुकाबले बढ़ोतरी देखने को मिली।

 

मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त में देशभर में कुल 213.3 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य से कम है और 2001 के बाद अगस्त महीने में दर्ज सातवीं सबसे कम बारिश है।

 

अल नीनो से सितंबर में भी बारिश पर असर

आईएमडी ने सितंबर में कम बारिश की एक प्रमुख वजह प्रशांत महासागर में बनी मजबूत अल नीनो स्थिति को बताया है। मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

 

अगस्त में देश में चार कम दबाव वाले क्षेत्र बने थे और ये कुल 26 दिनों तक सक्रिय रहे। हालांकि, इनसे होने वाली बारिश का असर मुख्य रूप से गंगा के मैदानी इलाकों तक सीमित रहा। देश के दूसरे हिस्सों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण कुल मानसूनी बारिश में कमी बनी रही। ALSO READ: LPG Price 1 September: सितंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर, जानें दिल्ली-मुंबई समेत 4 महानगरों में नए दाम

 

सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

आईएमडी के 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर सितंबर में सामान्य बारिश का दीर्घकालिक औसत (LPA) 167.9 मिलीमीटर है। मौसम विभाग का अनुमान है कि सितंबर में देश के बड़े हिस्से में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।

 

हालांकि, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व, पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। इसके बावजूद पूरे देश के स्तर पर बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान लगाया गया है।

 

सितंबर में गर्मी से भी राहत की उम्मीद कम

बारिश के साथ तापमान को लेकर भी मौसम विभाग का पूर्वानुमान लोगों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है। देश के अधिकांश हिस्सों में सितंबर का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। इसी तरह ज्यादातर क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रह सकता है।

 

हालांकि, उत्तर-पश्चिम, पश्चिम-मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य या सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। ALSO READ: नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

 

हिंद महासागर में फिलहाल न्यूट्रल स्थिति

आईएमडी के मुताबिक, अभी हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति न्यूट्रल है। मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMcFS) के अनुमान के अनुसार सितंबर तक भी न्यूट्रल IOD की स्थिति बने रहने की संभावना है।

 

इस तरह सितंबर में देश को एक तरफ कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है, वहीं अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है। अगस्त में बारिश की कमी और रिकॉर्ड गर्मी के बाद अब सितंबर का मौसम भी चुनौतीपूर्ण रहने के संकेत दे रहा है।

Silver Price Today: चांदी के रेट में तेजी या गिरावट? दिल्ली, मुंबई समेत इन शहरों में आज का भाव जरूर चेक करें

Silver Price Today: 1 सितंबर 2026 चांदी खरीदने वालों के लिए आज के भाव जानना बेहद जरूरी है। वैश्विक बाजार में जारी हलचल के बीच चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। घरेलू बाजार में भी चांदी के भाव अलग-अलग प्लेटफॉर्म और शहरों के हिसाब से अलग नजर आ रहे हैं। MCX पर चांदी के वायदा भाव में आज मामूली तेजी दर्ज की गई है, जबकि सर्राफा बाजार और बुलियन्स में इसके दाम अलग स्तर पर हैं। ऐसे में निवेशकों और खरीदारों के लिए यह समझना जरूरी है कि आज चांदी किस भाव पर मिल रही है और पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले इसमें कितना बदलाव आया है।

अगर आप भी आज चांदी खरीदने का मन बना रहे हैं या कीमतों पर नजर रख रहे हैं, तो यहां जानिए MCX से लेकर देश के प्रमुख शहरों तक चांदी के ताजा भाव, साथ ही अलग-अलग शुद्धता वाली चांदी की कीमतें।

MCX पर चांदी का वायदा भाव कितना बढ़ा?

MCX पर सुबह तक चांदी का वायदा भाव 0.06 फीसदी यानी 136 रुपये की बढ़त के साथ 2,33,977 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में चांदी का वायदा भाव 2,33,841 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था।

यानी शुरुआती कारोबार में चांदी की कीमत में मामूली सुधार देखने को मिला है। हालांकि, हाल के कारोबारी सत्रों में कीमती धातु की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है।

बुलियन्स के अनुसार चांदी का आज का भाव

बुलियन्स के आंकड़ों के मुताबिक, 999 फाइन चांदी का भाव बढ़कर 2,39,800 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। वहीं, चांदी की अलग-अलग शुद्धता के हिसाब से कीमतें इस प्रकार हैं:

चांदी की शुद्धता 1 किलो भाव

999 फाइन चांदी ₹2,39,800

925 स्टर्लिंग चांदी       ₹2,21,815

900 कॉइन चांदी ₹2,15,820

800 जर्मन चांदी ₹1,91,840

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों पर नजर

वैश्विक बाजार में भी चांदी की कीमत में हलचल जारी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 57.86 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई है। वैश्विक बाजार की चाल का असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिलता है।

दिल्ली के सर्राफा बाजार में क्या है चांदी का रेट?

दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 2,45,500 रुपये प्रति किलोग्राम, सभी टैक्स समेत, बताई गई है। वहीं, गुडरिटर्न्स के अनुसार दिल्ली में चांदी का भाव 2,55,000 रुपये प्रति किलो है। दोनों आंकड़ों में अंतर इसलिए है क्योंकि अलग-अलग स्रोत कीमत तय करने के लिए अलग बाजार, टैक्स और मूल्य निर्धारण के आधार इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से अंतिम कीमत जरूर कन्फर्म करनी चाहिए।

देश के प्रमुख शहरों में आज चांदी कितने की?

गुडरिटर्न्स के मुताबिक, 1 सितंबर को देश के ज्यादातर प्रमुख शहरों में चांदी का भाव 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं कुछ शहरों में यह कीमत 2,60,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

दिल्ली: ₹2,55,000

मुंबई: ₹2,55,000

कोलकाता: ₹2,55,000

चेन्नई: ₹2,60,000

पटना: ₹2,55,000

लखनऊ: ₹2,55,000

मेरठ: ₹2,55,000

अयोध्या: ₹2,55,000

कानपुर: ₹2,55,000

गाजियाबाद: ₹2,55,000

नोएडा: ₹2,55,000

गुरुग्राम: ₹2,55,000

चंडीगढ़: ₹2,55,000

जयपुर: ₹2,55,000

अहमदाबाद: ₹2,55,000

पुणे: ₹2,55,000

लुधियाना: ₹2,55,000

गुवाहाटी: ₹2,55,000

इंदौर: ₹2,55,000

सूरत: ₹2,55,000

नागपुर: ₹2,55,000

नासिक: ₹2,55,000

बैंगलोर: ₹2,55,000

वडोदरा: ₹2,55,000

भुवनेश्वर: ₹2,60,000

रायपुर: ₹2,55,000

हैदराबाद: ₹2,60,000

पिछले कारोबारी दिन सर्राफा बाजार में क्या रहा भाव?

कारोबारियों के अनुसार, पिछले कारोबारी दिन दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी 2,45,500 रुपये प्रति किलोग्राम, सभी टैक्स समेत, पर स्थिर रही। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी में करीब एक फीसदी की तेजी दर्ज की गई और कीमत 66.97 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।

इससे संकेत मिलता है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की चाल एक जैसी नहीं रही और दोनों बाजारों में अलग-अलग स्तर पर उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

पिछले दिन वायदा बाजार में चांदी क्यों गिरी?

इससे पहले सोमवार को कमजोर हाजिर मांग और कारोबारियों की ओर से सौदों का आकार घटाए जाने के कारण चांदी के वायदा भाव में गिरावट आई थी। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 1,955 रुपये यानी 0.81 फीसदी गिरकर 2,40,489 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई थी।

वैश्विक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। न्यूयॉर्क में चांदी की कीमत 1.04 फीसदी की गिरावट के साथ 68.22 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी।

क्यों महत्वपूर्ण है चांदी की मौजूदा चाल?

चांदी की कीमत पर घरेलू मांग के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा, डॉलर की चाल, निवेशकों की धारणा और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों का असर पड़ता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच कीमती धातुओं में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

LPG Price Hike: 1 सितंबर से गैस सिलेंडर हुआ महंगा, ₹10.50 तक बढ़े दाम

नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

nepal flood

रीतिका 

26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने नेपाल की अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका दिया है। आर्थिक तौर पर नेपाल के सामने कमोबेश वैसी ही चुनौतियां फिर से खड़ी हो गई हैं जिनका सामना उसने 2015 में आए विनाशकारी भूकंपों के दौरान किया था। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक इस हफ्ते आई प्रलयकारी बाढ़ से उबरने के लिए नेपाल को 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ सकती है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी है और कहा है कि यह रकम देश की अर्थव्यवस्था के लगभग दसवें हिस्से के बराबर है। ALSO READ: नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

 

वागले ने कहा कि बाढ़ से हुए विनाश के बाद के पुनर्निमार्ण के लिए शुरुआती अनुमान 4-5 अरब डॉलर के बीच है। हालांकि, यह सिर्फ एक अनुमान है क्योंकि कुल नुकसान कितना हुआ है इस पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। साथ ही उन्होंने कहा कि नेपाल को 2015 के भूकंप के लिए जितनी जरूरत थी, उससे काफी कम की आवश्यकता होगी और फिलहाल कुल नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

 

वित्त मंत्री वागले ने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि पुनर्निर्माण का खर्च 2015 में आए भूकंप के बाद खर्च किए गए 9 अरब डॉलर से कम रहने की उम्मीद क्यों है। उस भूकंप में लगभग 9,000 लोग मारे गए थे, 5 लाख से अधिक घर नष्ट हो गए थे और नेपाल की अर्थव्यवस्था के लगभग एक तिहाई हिस्से के बराबर नुकसान हुआ था। बीते 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के कारण पत्थर, बर्फ, कीचड़ और मलबे का एक विशाल सैलाब हिमालय की पहाड़ी नदी त्रिशुली से होकर गुजरा। इस विनाशकारी सैलाब में नेपाल और चीन के तिब्बत में 600 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 2000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

 

नेपाल को तकनीकी मदद की दरकार

लापता लोगों की तलाश में प्रभावित इलाके का खराब मौसम भी चुनौती बनकर उभरा है। नेपाल के शीर्ष अधिकारी नरेंद्र परियार ने रॉयटर्स को बताया कि खोज और बचाव कार्य अस्थायी रूप से रोक दिए गए हैं क्योंकि बारिश हो रही है और मौसम धुंधला है। वहीं, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा है कि देश को खोज और बचाव अभियानों में मदद की जरूरत नहीं है, बल्कि सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, उन स्थानों पर परिवहन और संचार लाइनों को शुरू करने जहां पुल नष्ट हो गए थे, शवों की पहचान, डीएनए परीक्षण और शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में सहायता की जरूरत है। उन्होंने रॉयटर्स को बताया, “हमने ऐसे क्षेत्रों में विशेष सेवाओं और तकनीकी सहायता के लिए अनुरोध किया है जहां हमारे पास पर्याप्त विशेषज्ञता और तकनीकी जानकारी नहीं है।”

 

भारत ने नेपाल के लिए लगभग 60 टन राहत सामग्री ले जाने वाली तीन उड़ानें भेजी हैं, जिनमें कंबल, दवाएं, भोजन और पानी साफ करने वाली गोलियां शामिल हैं। इसके साथ ही भारत की योजना एक सुरंग बचाव दल और एक चिकित्सा दल भेजने की भी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने अपनी आपदा प्रतिक्रिया बल और पूर्वनिर्मित पुलों के साथ संपर्क बहाल करने में मदद के लिए तकनीकी टीमों की भी पेशकश की है। वहीं, चीन ने नेपाल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए आपातकालीन सहायता और अंतरराष्ट्रीय बचाव सहयोग का आह्वान किया है। हालांकि उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि चीन नेपाल को मदद के तौर पर क्या भेज रहा है। ALSO READ: नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

 

अर्थव्यवस्था को फिर पीछे धकेला

बाढ़ ने सीमावर्ती इलाके के शहरों को तबाह कर दिया, पुलों और सड़कों को अपने साथ बहा ले गई और प्रमुख जलविद्युत स्टेशनों को नुकसान पहुंचाया है। पर्यटन और जलविद्युत पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए ये आपदा कई स्तरों पर विनाशकारी साबित हुई है। अब तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक इसने राष्ट्रीय बिजली उत्पादन क्षमता के 12 प्रतिशत से अधिक हिस्से वाले बिजली प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचाया है। इन योजनाओं में काम करने वाले 900 से ज्यादा कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं।

 

इस आपदा के आने से पहले से ही नेपाल की अर्थव्यवस्था दबाव में थी। जेन जी प्रदर्शनों के बाद सत्ता में आई प्रधानमंत्री बालेन शाहकी सरकार सीमित संसाधनों के साथ काम कर रही है। ऐसे में इस आपदा ने अर्थव्यवस्था पर कई गुना बोझ बढ़ा दिया है। इसके साथ ही पर्यटन पर निर्भर इस देश के लिए यह बाढ़ नुकसानदायक साबित हुई है क्योंकि इससे तीर्थ, ट्रेकिंग और पर्वतारोहण जैसी गतिविधियां ठप पड़ गई हैं। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक पर्यटन नेपाल की जीडीपी का 6.4 फीसदी हिस्सा है और देश की करीब 15 फीसदी नौकरियां यहीं से आती हैं।

 

अंतरराष्ट्रीय संस्था रेड क्रॉस ने कहा है कि इस बाढ़ से 93,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने बताया है कि इस आपदा ने 10,000 स्कूली बच्चों का भी नुकसान किया है क्योंकि प्रभावित इलाकों में कम से कम 18 स्कूल बह गए हैं और 20 स्कूलों की इमारतों को नुकसान पहुंचा है।

LPG Price 1 September: सितंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर, जानें दिल्ली-मुंबई समेत 4 महानगरों में नए दाम

LPG Price 1 September: सितंबर की शुरुआत में महंगा हुआ कमर्शियल सिलेंडर, जानें दिल्ली-मुंबई समेत 4 महानगरों में नए दाम

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सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही कमर्शियल LPG सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों को महंगाई का झटका लगा है। तेल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलो वाले व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के मुताबिक, अलग-अलग शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में करीब 9.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि, तेल कंपनियों ने 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। यानी घरों में इस्तेमाल होने वाला गैस सिलेंडर सितंबर में भी पुरानी कीमत पर ही मिलेगा। ALSO READ: Top News 1 September: अगस्त में 125 साल की गर्मी का रिकॉर्ड टूटा, अन्ना हजारे अस्पताल में भर्ती, मेसी का संन्यास

 

चारों महानगरों में 19 किलो LPG सिलेंडर के नए दाम

कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में शहर के हिसाब से बदलाव हुआ है। दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर अब 9.50 रुपये महंगा होकर 2,747.50 रुपये का हो गया है। 31 अगस्त तक इसकी कीमत 2,738 रुपये थी। मुंबई में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,691.50 रुपये से बढ़कर 2,701 रुपये हो गई है। कोलकाता में इसकी कीमत 2,872.50 रुपये से बढ़कर 2,982 रुपये पहुंच गई है। वहीं, चेन्नई में 19 किलो वाला व्यावसायिक LPG सिलेंडर अब 2,916.50 रुपये में मिलेगा।

5 और 10 किलो वाले सिलेंडर के दाम भी स्थिर

तेल कंपनियों ने 5 किलो और 10 किलो वाले LPG सिलेंडर की कीमतों में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। 5 किलो वाला सामान्य ‘छोटू’ LPG सिलेंडर अभी भी 349.50 रुपये में उपलब्ध है। वहीं, XTRALITE 5 किलो सिलेंडर की कीमत 339 रुपये पर बनी हुई है। हालांकि, 5 किलो के नॉन-डोमेस्टिक LPG सिलेंडर की कीमत में मामूली बढ़ोतरी हुई है। इसकी कीमत 762 रुपये से बढ़कर अब 764 रुपये हो गई है। ALSO READ: 1 सितंबर से बदल जाएंगे आपकी जेब और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ये नियम, LPG से लेकर विदेश यात्रा तक जानें क्या बदलेगा

 

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें स्थिर

घरेलू उपभोक्ताओं को इस महीने कीमतों में बढ़ोतरी से राहत मिली है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें चारों महानगरों में स्थिर रखी गई हैं। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये में मिल रहा है।

All you need to know about Lexus ES

All you need to know about Lexus ES
Lexus ES

The Lexus ES is available in India in two forms: the ES 350h strong hybrid and the ES 500e EV. The 350h was added to the ES range in July, joining the 500e that launched earlier this year. Beyond the new powertrain options, the latest ES gets a larger footprint, a redesigned cabin and a host of new features. Here’s everything you need to know.

1. How much do the Lexus ES 350h and ES 500e cost in India

The Lexus ES 350h is priced at Rs 66.10 lakh for the Exquisite variant and Rs 71.80 lakh for the Luxury trim, whereas the ES 500e costs Rs 89.99 lakh (all prices are ex-showroom). Both versions get an eight-year/2,00,000km warranty, covering the vehicle and its battery.

2. What powertrain does the Lexus ES 350h get?

The ES 350h uses a 2.5-litre four-cylinder naturally aspirated petrol engine paired with an electric motor and lithium-ion battery. The petrol engine produces 186hp and 235Nm, while the electric motor develops 201hp and 270Nm in isolation. The combined system output is 244hp. Power is sent to the front wheels through an e-CVT gearbox. Lexus claims an ARAI-certified fuel efficiency of 25.22kpl.

3. What battery, motor and range does the Lexus ES 500e offer?

The ES 500e gets a 74.68kWh battery and two electric motors, one on each axle. The front motor produces 227hp and 267Nm, while the rear motor makes 120hp and 170Nm. The combined output is 343hp and 438Nm, with a claimed 0-100kph time of 5.5sec. Lexus claims a range of 580km on a full charge. The ES 500e supports 11kW AC charging, while a 150kW DC fast charger can charge the battery from 10 to 80 percent in 28 minutes. A 2.8kW portable charger is also offered.

4. What are the key features of the Lexus ES?

The new ES gets a dual-tone cabin with a 14-inch touchscreen and a 12.3-inch digital driver’s display. It also gets a Mark Levinson premium audio system, wireless Apple CarPlay and Android Auto, wireless phone charging and three-zone climate control. Other features include powered front seats with heating and ventilation, a head-up display, digital inside rearview mirror, ambient lighting, rear window sunshades and a power-operated boot lid.

One of the ES’s standout features is proximity-sensing controls. Physical controls are integrated into the dashboard and steering wheel and illuminate when they detect a hand approaching, combining touch controls with physical switches.

The exterior gets Lexus’s new design language, with a sealed-off front end, Twin L-signature lighting and a connected rear light bar. The new ES also has a coupe-like roofline and a rising beltline.

5. How spacious is the new Lexus ES?

The new ES measures 5,145mm long, 1,920mm wide and 1,575mm tall. It is 170mm longer, 55mm wider and 130mm taller than the previous-generation model, while the wheelbase has increased by 80mm to 2,950mm. Lexus has increased ground clearance for India by 20mm to 158mm. The larger dimensions are complemented by a lower window line and thinner seats and trim pieces, while the longer wheelbase frees up more space inside the cabin.

6. What safety and ADAS features does the Lexus ES get?

The ES 350h gets Lexus Safety System+, which includes a pre-collision system, adaptive cruise control, lane keep assist, lane departure alert, automatic emergency braking, a blind-spot monitor and automatic high beam. It also gets eight airbags, Isofix and top-tether mounts and an emergency brake signal. The Luxury variant additionally gets a drive monitor.

The ES 500e gets 10 airbags, a 360-degree camera setup, blind-spot monitoring, adaptive high-beam assist, radar-guided cruise control, lane-change assist and a driver drowsiness monitor. Electronic stability control and all-round parking sensors are also standard.

7. Where is the Lexus ES made, and which cars does it compete with?

The ES is locally assembled in India. The Lexus ES competes with luxury sedans such as the Mercedes-Benz E-Class, BMW 5 Series and Audi A6. The ES stands out in the segment by offering buyers a choice of hybrid and fully electric powertrains.