मेरी बेटी बोझ नहीं है, ऑटिस्टिक होने के बावजूद, वो सबसे प्यारी बड़ी बहन है | Autistic Daughter

मेरी बेटी बोझ नहीं है, ऑटिस्टिक होने के बावजूद, वो सबसे प्यारी बड़ी बहन है | Autistic Daughter

#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #जिसे दुनिया ने बोझ समझा, आज वही अपनी छोटी बहन की सबसे सुरक्षित जगह है। ❤️
16 साल की ऑटिस्टिक रिद्धिमा बोल नहीं सकतीं, लेकिन अपने प्यार से हर दिन बहुत कुछ कहती हैं।
आज रिद्धिमा अपनी छोटी बहन आध्विका का वैसे ही ख्याल रखती हैं, जैसे कोई बड़ी बहन रखती है—उसे गोद में लेना, उसके चोट लगने पर उसके साथ रोना और हर दिन उसके घर लौटने का इंतज़ार करना।
जिस बच्ची को कभी लोगों ने श्राप कहा था, आज वही अपनी छोटी बहन की सबसे सुरक्षित जगह है। ❤️
उनकी कहानी याद दिलाती है—किसी बच्चे की काबिलियत उसकी कमियों से नहीं, उसके प्यार और हौसले से पहचानी जानी चाहिए।
@addu_dadyprincess

[16-Year-Old Autistic Girl Riddhima and Her Sister Story, A Non-Verbal Girl Shares A Beautiful Bond With Her Younger Sister, Autism Never Defines A Child’s Ability] thebetterindiahindi #hindi

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Jio Platforms IPO: दिग्गज फंड मैनेजर समीर अरोड़ा ने जियो प्लेटफॉर्म्स को बताया दमदार स्टॉक, जानिए उन्होंने क्या कहा

Jio Platforms IPO: हेलियोस कैपिटल के फाउंडर समीर अरोड़ा ने जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों को दमदार बताया है। उनका मानना है कि जियो ने बड़े लेवल की डिजिटल कनेक्टिविटी बनाई है। साथ ही ऐसा नेटवर्क बनाया है, जिस पर देश की न्यू एज कंपनियां बनाई जाएंगी। जियो ने उनके लिए फाउंडेशनल प्लेटफॉर्म तैयार किया है।

लंबी अवधि में ग्रोथ की काफी संभावना 

उन्होंने कहा है कि जियो प्लेटफॉर्म की निरंतर ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं। इस वजह से यह हाई-कनविक्शन स्टॉक बन जाता है। टेलीकॉम मार्केट में कंपनी की एंट्री 2016 में हुई थी। यह समय भारत में टेलीकॉम मार्केट के लिए मील का पत्थर बना। कंपनी की एग्रेसिव प्राइसिंग और फ्री वॉयस एंड डेटा ऑफरिंग्स ने पूरे टेलीकॉम मार्केट को बदल दिया।

जियो की वजह से देश में बढ़ा डेटा कंजम्प्शन

हेलियोस के फाउंडर के मुताबिक, जियो ने मोबाइल ब्रॉडबैंड पर फोकस बढ़ाया, जिसके बाद देश में डेटा की खपत में नाटकीय बदलाव देखने को मिला। एक दशक बाद आज कंपनी ने ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिस पर मोबाइल सर्विसेज, एंटरटेनमेंट, ब्रॉडबैंड, क्लाउड और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस उपलब्ध हैं।

जून में सब्सक्राइबर्स की संख्या 53 करोड़ के पार

इस साल जून के अंत में जियो के सब्सक्राइबर्स की संख्या 53.3 करोड़ थी। इसमें 5जी के 28.49 करोड़ सब्सक्राइबर्स शामिल हैं। पिछले वित्त वर्ष में इंडिया के वायरलेस डेटा ट्रैफिक में जियो की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी रही। जियो के वायरलेस ब्रॉडबैंड नेटवर्क के दायरे में देश की आबादी का 99 फीसदी हिस्सा आता है। कंपनी ने इस बारे में अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्ट्स में बताया है।

2जी के 26 करोड़ सब्सक्राइबर्स पर जियो की नजर

जियो ने पिछले एक दशक में जो प्लेटफॉर्म तैयार किया है, उसका फायदा उठाने का वक्त अब आ गया है। देश में डेटा का कंजम्प्शन बढ़ रहा है। सब्सक्राइबर्स 2जी से 4जी और 5जी में माइग्रेट कर रहे हैं। इस साल जून के अंत में देश में 2जी इस्तेमाल करने वाले सब्सक्राइबर्स की संख्या 26.1 करोड़ थी। यह जियो जैसी कंपनी के लिए एक बड़ा मौका है।

आईपीओ के पैसे से कंपनी की बैलेंसशीट को मिलेगी मजबूती

जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ से आने वाले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। कंपनी ने जियो इंफोकॉम के लिए कर्ज लिया था, जिसमें से 27,500 करोड़ रुपये वह आईपीओ के पैसे से चुकाएगी। इससे कंपनी की बैलेंसशीट को मजबूती मिलेगी। जियो इंफोकॉम जियो प्लेटफॉर्म्स की सब्सिडियरी है। यह देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है।

यह भी पढ़ें: IPOs This Week: 19 अक्टूबर से शुरू हफ्ते में Jio IPO समेत 2 नए इश्यू, 9 कंपनियां होंगी लिस्ट

लिस्टिंग के बाद कंपनी 10 लाख करोड़ क्लब में होगी शामिल 

जियो ने आईपीओ के लिए 1065-1119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कंपनी की वैल्यूएशन 10.3 लाख करोड़ रुपये है। यह FY26 में कंपनी की अर्निंग्स का करीब 34.3 गुना है। शेयर की लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स देश की 10 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन वाली कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी।

पाकिस्तान- 200 साल पुराने हिंदू मंदिर को तोड़ने की कोशिश:कमर्शियल प्लाजा बनाने के लिए राम लीला मंदिर को गिराने का आरोप

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में करीब 200 साल पुराने रामलीला मंदिर को तोड़ने की कोशिश की गई। आरोप है कि मंदिर की जगह कमर्शियल प्लाजा बनाने के लिए यह कदम उठाया गया। हिंदू समुदाय और सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद स्थानीय प्रशासन ने शनिवार को मंदिर को अपने कब्जे में लिया। इसके बाद इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने इसे सील कर दिया। यह मंदिर डेरा इस्माइल खान शहर के रहीम बाजार इलाके में स्थित है। डेरा सिविल सोसाइटी और स्थानीय व्यापार संघ के अध्यक्ष सोहेल अहमद अजमी के मुताबिक, उन्हें मंदिर गिराने की जानकारी मिली तो वे दूसरे लोगों के साथ मौके पर पहुंचे और काम रुकवाया। मंदिर की जमीन के मालिकाना हक की जांच की मांग घटना के बाद हिंदू समुदाय के सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंदिर की जमीन के मालिकाना हक और वहां व्यावसायिक निर्माण की वैधता की जांच कराने की मांग की। उन्होंने निर्वाचित प्रतिनिधियों से यह मामला पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में उठाने की अपील भी की। रामलीला मंदिर को डेरा इस्माइल खान की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत का हिस्सा माना जाता है। ETPB ने जिले की करीब 400 इमारतों को सांस्कृतिक विरासत के रूप में चिह्नित किया है। यह सरकारी संस्था बंटवारे के बाद भारत चले गए लोगों की छोड़ी संपत्तियों और अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक स्थलों का प्रबंधन करती है। धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर उठे सवाल ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट के अध्यक्ष हारून सरब डायल ने धार्मिक स्थलों को विशेष सुरक्षा देने की मांग की है। उन्होंने 2013 से 2026 के बीच धार्मिक संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जे और उनकी बिक्री की जांच कराने की भी अपील की। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। आयोग की हालिया रिपोर्ट में हिंदू और ईसाई लड़कियों के अपहरण, जबरन शादी और धर्म परिवर्तन के मामलों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार का जिक्र किया गया है। आयोग ने धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की सिफारिश भी की है।

पंजाब के संगरूर में भीषण सड़क हादसा, तेज रफ्तार कार ने 8 मनरेगा मजदूरों को कुचला, कई घायल

पंजाब के संगरूर जिले में रविवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। इस हादसे में आठ MGNREGA मजदूरों की जान चली गई। वहीं कई गंभीर रूप से घायल हो गए। ये हादसा लहरागागा इलाके के चोटियां गांव के पास जाखल रोड पर हुआ। इस हादसे के समय करीब 23 महिला और पुरुष मजदूर सड़क किनारे काम कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रही एक कार अचानक बेकाबू हो गई और मजदूरों की ओर मुड़ गई। इस तेज रफ्तार कार ने काम कर रहे मजदूरों को कुचल दिया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया।

आठ लोगों की हुई मौत

तेज रफ्तार कार को संभालने से पहले ही वह सड़क किनारे काम कर रहे कई मजदूरों से टकरा गई। इस हादसे में आठ मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत इलाज के लिए आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। फिलहाल, हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें प्रभावित लोगों से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आने का इंतजार है।

कौन चला रहा था कार

इंडिया टूडे के मुताबिक, इस दुर्घटना में शामिल कार शेवरले मैग्नम थी, जिसका नंबर PB11 CP 0080 बताया गया। कार चलाने वाले व्यक्ति की पहचान रायधराना गांव के परगट सिंह काला के रूप में हुई है। घटना के बाद हादसे से जुड़ी जानकारी और राहत व्यवस्था को लेकर चर्चा हो रही है।

तेज रफ्तार कार ने मारी मजदूरों को टक्कर 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब के संगरूर जिले में हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले आठ मजदूरों की पहचान कर्मजीत कौर, जीवन सिंह, निकी, सरबजीत कौर, रणजीत कौर, कर्मजीत, रानी कौर और देस राज के रूप में हुई है। ये सभी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सड़क पर काम कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार कार ने मजदूरों को टक्कर मार दी, जिससे आठ लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

योगी सरकार ने किसानों के बच्चों के लिए दोगुनी कीं कृषि छात्रवृत्ति की सीटें, अब 2820 मेधावियों को मिलेगा लाभ

योगी सरकार ने किसानों के बच्चों के लिए दोगुनी कीं कृषि छात्रवृत्ति की सीटें, अब 2820 मेधावियों को मिलेगा लाभ

Chief Minister Yogi Adityanath makes a big announcement regarding agricultural scholarships

– मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना में बड़ा विस्तार, सालाना सहायता राशि भी 36 हजार से बढ़ाकर 60 हजार रुपए की गई

– कृषि विश्वविद्यालयों में 90 और कृषि महाविद्यालयों में 30 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का प्रावधान

– किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों के लिए उच्च कृषि शिक्षा की राह होगी आसान

Uttar Pradesh News : किसानों की अगली पीढ़ी को कृषि शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में योगी सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाया है। राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की इस योजना के तहत छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटों को दोगुना कर दिया गया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। इस विस्तार से प्रदेश के अधिक मेधावी किसान परिवारों को उच्च कृषि शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी।

 

संशोधित व्यवस्था के तहत प्रत्येक कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि संस्थान में छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों की निर्धारित संख्या 45 से बढ़ाकर 90 और प्रत्येक कृषि महाविद्यालय में 15 से बढ़ाकर 30 कर दी गई है। इस प्रकार योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति की कुल निर्धारित संख्या 1,410 से बढ़कर 2,820 हो गई है। पात्र विद्यार्थियों को अब सालाना 60 हजार रुपए की छात्रवृत्ति मिलेगी।

 

योगी सरकार की इस पहल से आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उच्च शिक्षा में चुनौतियों का सामना करने वाले किसान और खेतिहर मजदूर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को सहारा मिलेगा। साथ ही कृषि, उद्यान, वानिकी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित कर प्रदेश में कृषि आधारित ज्ञान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा।

 

छात्रवृत्ति की राशि में भी 24 हजार रुपए सालाना की बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत छात्रवृत्ति की मासिक राशि तीन हजार रुपए से बढ़ाकर पांच हजार रुपए कर दी गई है। इसके परिणामस्वरूप चयनित विद्यार्थियों को अब सालाना 36 हजार रुपए के स्थान पर 60 हजार रुपए मिलेंगे। यानी, प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिवर्ष 24 हजार रुपए की अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त होगी। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद मिलेगी और परिवार पर आर्थिक दबाव भी कम हो सकेगा।

 

9 वर्षों में 6454 विद्यार्थियों को मिली 22.90 करोड़ रुपए की सहायता

योजना के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक 6,454 विद्यार्थियों को लगभग 22.90 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति प्रदान की जा चुकी है। अब छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटें दोगुनी होने से अधिक विद्यार्थियों को इस सहायता का लाभ पाने का अवसर मिलेगा। प्रदेश के 11 कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों और 61 कृषि महाविद्यालयों में पात्र विद्यार्थियों को इस योजना के तहत छात्रवृत्ति दी जा रही है।

 

कृषि शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रमों में बढ़ीं सीटें

संशोधित व्यवस्था के तहत कृषि विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में कृषि स्नातक पाठ्यक्रम के लिए छात्रवृत्ति की निर्धारित संख्या 25 से बढ़ाकर 50, गृह विज्ञान स्नातक के लिए छह से बढ़ाकर 12, कृषि स्नातकोत्तर के लिए 10 से बढ़ाकर 20 और गृह विज्ञान स्नातकोत्तर के लिए चार से बढ़ाकर आठ कर दी गई है। इसी तरह कृषि महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर छात्रवृत्ति की संख्या 10 से बढ़ाकर 20 तथा स्नातकोत्तर स्तर पर पांच से बढ़ाकर 10 की गई है। कृषि के साथ उद्यान, वानिकी, पशुपालन और संबंधित विषयों में अध्ययनरत पात्र विद्यार्थी भी योजना के दायरे में आते हैं।

 

मेरिट के आधार पर चयन, किसान और खेतिहर मजदूर परिवारों को प्राथमिकता

योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के निवासी कृषकों एवं खेतिहर मजदूरों के पुत्र-पुत्रियों तथा उन पर पूर्ण रूप से आश्रित पात्र विद्यार्थियों को दिया जाता है। स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट में न्यूनतम 70 प्रतिशत और अन्य बोर्ड से 85 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए स्नातक स्तर पर कम से कम 70 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। विद्यार्थियों का चयन निर्धारित पात्रता और मेरिट के आधार पर किया जाता है।

 

मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। छात्रवृत्ति की निर्धारित संख्या और आर्थिक सहायता में वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने और कृषि क्षेत्र में भविष्य बनाने में मदद मिलेगी।

Airtel ने लॉन्च किए तीन सस्ते प्रीपेड प्लान, जानिए इनमें सब्सक्राइबर्स के लिए क्या है खास

भारती एयरटेल ने तीन नए वॉयस-ओनली प्रीपेड रीचार्ज प्लान लॉन्च किए हैं। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) की 21 अक्तूबर की डेडलाइन से पहले कंपनी ने ये प्लान लॉन्च किए हैं। ये प्लान 185 रुपये, 203 रुपये और 206 रुपये के हैं। भारती एयरटेल देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है।

इन तीनों प्लान में से प्रत्येक में सब्सक्राइबर्स को अनलिमिटेड लोकल और नेशनल वॉयस कॉलिंग और 300 एसएमएस की सुविधा मिलेगी। 185 रुपये के प्लान की वैलिडिटी 28 दिन की है, 203 रुपये के प्लान की वैलिडिटी 30 दिन की है। 206 रुपये की वैलेडिटी कैलेंडर के महीने के हिसाब से होगी।

ये सभी प्लान एयरटेल के ऐप पर सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध हैं। वॉयल-ओनली पैक की नई रेंज लॉन्च करने वाली देश की पहली टेलीकॉम कंपनी है। बाकी दो टेलीकॉम कंपनियों रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया को भी टेलीकॉम रेगुलेटर के निर्देश के तहत ऐसे प्लान लॉन्च करने होंगे।

ट्राई ने सितंबर में टेलीकॉम कंपनियों को एक खास निर्देश दिया था। इसमें कंपनियों को इंटरनेट डेटा के बगैर सिर्फ वॉयल कॉल और एसएमएस के लिए स्पेशल टैरिफ वाउचर्स लॉन्च करने को कहा गया था। इसके लिए टेलीकॉम रेगुलेटर ने 21 अक्टूबर की डेडलाइन तय की थी। टेलीकॉम कंपनियों को इस निर्देश के पालन के सिए 30 दिन का समय मिला था।

ट्राई के इस निर्देश से उन सब्सक्राइबर्स की शिकायत दूर हो गई है, जिन्हें इंटरनेट डेटा की जरूरत के बगैर बंडल्ड प्रीपेड खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। ऐसे कई सब्सक्राइबर्स हैं, जो मोबाइल का इस्तेमाल सिर्फ वॉयल कॉल और एसएमएस के लिए करते हैं। अभी तक बाजार में जो प्रीपेड प्लान थे, उनके साथ इटरनेट डेटा भी होता था। इससे प्रीपेड प्लान महंगा हो जाता है।

हैंडसेट की बढ़ती कीमतों की वजह से सब्सक्राइबर्स अपने डिवाइस का इस्तेमाल लंबे समय तक करते हैं। वॉयस-ओनली प्लान से ऐसे सब्सक्राइबर्स को फायदा होगा, जो सिर्फ वॉयस-ओनली रिचार्ज प्लान का इस्तेमाल करने में दिलचस्पी रखते हैं। ऐसे सब्सक्राइबर्स को डेटा की जरूरत नहीं होती है। अब उन्हें 30 दिन तक की वैलिडिटी वाले वाउचर्स मिलेंगे।

कल का मौसम 19 अक्टूबर: दिल्ली-UP से लेकर बिहार तक बारिश और आंधी का कहर, दक्षिण भारत के इन राज्यों में गरज-चमक का अलर्ट

IMD Weather Update: देशभर में इस समय धूमधाम से दुर्गापूजा और नवरात्रि मनाया जा रहा है। वहीं त्योहारों के मौसम के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने टेंशन भरा अलर्ट जारी कर दिया है। देश के कई हिस्सों में 19 अक्टूबर को मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। आने वाले कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा कई राज्यों में बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। मौसम को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं दिल्ली से लेकर केरल तक कैसा होगा कल का मौसम

19 अक्टूबर को दक्षिण भारत समेत कई राज्यों में बारिश, तेज हवाओं और बिजली कड़कने की संभावना है। वहीं दिल्ली और यूपी में भी बारिश का अलर्ट जारी किया है। लोगों को मौसम विभाग के अपडेट पर ध्यान देने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

कैसा होगा दिल्ली का मौसम

दिल्ली में 19 अक्टूबर को मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, राजधानी में बारिश होने के साथ 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सतही हवाएं चल सकती हैं। तापमान की बात करें तो दिन में पारा 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि रात में न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।

कैसा होगा यूपी और बिहार का मौसम

उत्तर प्रदेश और बिहार में 19 अक्टूबर को मौसम बदलने की संभावना है। यूपी के मेरठ, आगरा, गाजियाबाद, मथुरा, प्रयागराज, देवरिया, बिजनौर, गोरखपुर, अमरोहा, बुलंदशहर, कानपुर और झांसी में कुछ जगहों पर बारिश के साथ आंधी चल सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। वहीं, बिहार के पटना, गया, भोजपुर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, बेगूसराय, कटिहार, भागलपुर और मुंगेर में हल्की से भारी बारिश हो सकती है। यहां भी तेज हवाएं चलने की संभावना है।

इन जगहों पर होगी तेज बारिश

आईएमडी के मुताबिक देश के दक्षिणी हिस्से में तेज बारिश की संभावना है। आईएमडी के अलर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ जगहों पर बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका जताई है। इन इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। वहीं, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंतरिक कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप, तेलंगाना और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी मौसम बदल सकता है। यहां बिजली कड़कने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। इन क्षेत्रों में बारिश के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इन जगहों पर गरज-चमक के साथ होगी बारिश

इसके अलावा छत्तीसगढ़, तटीय कर्नाटक, पूर्वी मध्य प्रदेश, कोंकण और गोवा तथा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

चलेंगी तेज हवाएं

समुद्र में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और उत्तर-पश्चिमी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर के आसपास 35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ समय के लिए इनकी गति बढ़कर 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। ऐसे मौसम में समुद्र में जाने वाले लोगों और मछुआरों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

बिहार की सड़कों पर होगा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का जलवा, पूरे राज्य में लगेंगे चार्जिंग स्टेशंस

फुटबॉल स्टेडियम में हुआ बड़ा हादसा, स्टंट करते समय करीब 150 फीट नीचे गिरा सैनिक, हुई मौत

अमेरिका के टेक्सास में शनिवार को रात स्टेडियम में हजारों दर्शकों के सामने एक दर्दनाक हादसा हो गया। मैच शुरू होने से पहले रैपलिंग स्टंट करते समय अमेरिकी वायुसेना का एक सैनिक स्टेडियम की छत से करीब 150 फीट नीचे गिर गया। करीब 150 फीट नीचे गिरने की वजह से उसकी मौत हो गई। ये सैनिक सैन एंटोनियो के अलामोडोम में एक डिस्प्ले में हिस्सा ले रहे चार मिलिट्री वालों में से एक था। ये कार्यक्रम यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट सैन एंटोनियो (UTSA) और नेवी के बीच होने वाले कॉलेज फुटबॉल मैच से पहले आयोजित किया गया था।

बैलेंस बगड़ने से गिरे सैनिक

बताया जा रहा कि रस्सी के सहारे नीचे उतरते समय एक सैनिक का बैलेंस बिगड़ गया और वह सीधे मैदान में जा गिरा। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, जमीन पर गिरने से पहले वह काफी तेजी से नीचे आ रहा था। इस हादसे को देखकर स्टेडियम में मौजूद दर्शक घबरा गए। घटना के तुरंत बाद आपातकालीन सेवाओं की टीम मौके पर पहुंची और घायल सैनिक की मदद करने की कोशिश की। हादसे के बाद मेडिकल टीम ने मैदान पर ही सैनिक को बचाने की कोशिश की। इसके बाद सैन एंटोनियो फायर डिपार्टमेंट की टीम उसे गंभीर हालत में पास के अस्पताल ले गई। लेकिन सैनिक की जान नहीं बच सकी। नेवादा के नेलिस एयर फोर्स बेस के प्रवक्ता ने बाद में उसकी मौत की पुष्टि की।

द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्रवक्ता ने बताया, “इस घटना की जांच की जा रही है। जैसे ही मामले से जुड़ी और जानकारी सामने आएगी, उसे जारी कर दिया जाएगा।”

20 हजार से ज्यादा फुटबॉल प्रशंसक थे मौजूद

ये हादसा UTSA के सालाना कार्यक्रम ‘सैल्यूट टू आर्म्ड फोर्सेज एंड वेटरन्स नाइट’ के दौरान हुआ। इस आयोजन का मकसद सेना के जवानों और पूर्व सैनिकों को सम्मान देना था। बताया जा रहा कि जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त स्टेडियम में 20 हजार से ज्यादा फुटबॉल प्रशंसक मौजूद थे। हादसे के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी और चिंता का माहौल बन गया। हादसे के बाद राहत और बचाव दल के मौके पर पहुंचने के कारण फुटबॉल मैच को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। लेकिन, थोड़ी देर बाद खेल दोबारा शुरू कर दिया गया।

UTSA यूनिवर्सिटी ने जारी किया बयान

UTSA यूनिवर्सिटी ने एक बयान जारी कर इस हादसे पर दुख जताया और मृत सैनिक के परिवार व साथियों के प्रति संवेदना व्यक्त की। बताया जा रहा कि मृतक सैनिक 6th कॉम्बैट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन की डिटैचमेंट 2 यूनिट का हिस्सा था। ये यूनिट ऐसे सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षण देती है, जो जमीन पर मौजूद सैनिकों के साथ मिलकर हवाई मदद की योजना बनाते हैं और उसे सही दिशा में इस्तेमाल करने का काम करते हैं।

विश्वास टूटता कहां है और बनता कैसे है?

विश्वास टूटता कहां है और बनता कैसे है?

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विश्वास अचानक नहीं बनता। वह हमारे छोटे-छोटे व्यवहारों से तैयार होता है और अक्सर उन्हीं छोटी बातों से टूटता भी है। विश्वास आखिर टूटता कहां है? क्या किसी एक बड़ी गलती से या उन छोटी-छोटी बातों से जिन्हें हम महत्वहीन समझकर टाल देते हैं? किया हुआ वादा भूल जाना, सच जानते हुए भी आधा सच कहना, अपनी गलती छिपाना या जिम्मेदारी से पीछे हट जाना—यही वे क्षण हैं जहां भरोसा धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। इसके विपरीत, समय पर निभाया गया वादा, कठिन परिस्थिति में बोला गया सच, स्वीकार की गई गलती और उसे सुधारने का ईमानदार प्रयास विश्वास को मजबूत बनाते हैं। मनुष्य के जीवन में विश्वास केवल संबंधों का आधार नहीं है; यह व्यक्तित्व, काम, निर्णय और आत्मविश्वास की भी नींव है।

किसी निराश व्यक्ति से यदि कोई कह दे—मुझे तुम पर विश्वास है, तो कई बार यही एक वाक्य उसे फिर खड़ा होने की शक्ति दे देता है लेकिन विश्वास जितना शक्तिशाली है, उतना ही संवेदनशील भी है। उसे बनने में समय लगता है और कमजोर होने में कभी-कभी केवल एक क्षण। इसलिए विश्वास जीत लेना उपलब्धि नहीं है; उसके योग्य बने रहना असली परीक्षा है।

 

विश्वास शब्दों से नहीं, व्यवहार से बनता है

विश्वास बड़े वादों से नहीं बनता। वह जीवन की साधारण लगने वाली बातों से तैयार होता है। आपने किसी को समय दिया और समय पर पहुंचे, जिम्मेदारी स्वीकार की और उसे पूरा किया, आपसे गलती हुई और आपने बहाना बनाने के बजाय उसे स्वीकार किया—यही छोटे क्षण भरोसे की नींव बनाते हैं। लोग केवल यह नहीं देखते कि हमने क्या कहा; वे यह भी देखते हैं कि हमने अपने कहे को कितना निभाया। शब्दों और कर्मों के बीच जितनी कम दूरी होगी, विश्वास उतना ही मजबूत होगा।

मान लीजिए किसी व्यवसायी ने ग्राहक से सोमवार तक माल पहुँचाने का वादा किया, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। वह फोन से बच सकता है, बहाना बना सकता है या स्वयं ग्राहक से संपर्क कर वास्तविक स्थिति बताते हुए नया समाधान दे सकता है। पहला रास्ता कुछ समय की असुविधा से बचाता है, लेकिन भरोसा कमजोर करता है। दूसरा रास्ता कठिन अवश्य है, पर यह दिखाता है कि गलती होने पर भी व्यक्ति सच बोलने और जिम्मेदारी निभाने का साहस रखता है। लोग पूर्ण व्यक्ति नहीं खोजते; वे विश्वसनीय व्यक्ति खोजते हैं।

 

सबसे कठिन सत्य वह है, जो हमें अपने बारे में स्वीकार करना पड़ता है

दूसरों से सच बोलना साहस है, लेकिन स्वयं से सच बोलना उससे भी बड़ा साहस है। असफलता आने पर मन अक्सर कारण बाहर खोजता है—परिस्थितियां कठिन थीं, लोग साथ नहीं थे, समय अनुकूल नहीं था। इनमें कुछ बातें सच भी हो सकती हैं, लेकिन फिर भी एक प्रश्न बचा रहता है— अब मैं क्या कर सकता हूं? यही प्रश्न शिकायत को समाधान में बदलता है। यदि व्यवसाय कमजोर हो रहा है, तो बाजार को दोष देने से पहले अपने आंकड़ों और निर्णयों को देखना होगा।

यदि संबंधों में दूरी बढ़ रही है, तो संवाद की कमी पहचाननी होगी। यदि परिणाम बार-बार निराश कर रहे हैं, तो तैयारी और पद्धति की समीक्षा करनी होगी। दर्पण तोड़ देने से चेहरा नहीं बदलता; उसी तरह सत्य से आंखें बंद करने पर समस्या समाप्त नहीं होती। सत्य हमें निराश करने नहीं, सही जगह से नई शुरुआत कराने आता है।

 

गलती को शिक्षा में बदलना ही सुधार है

जीवन में आगे वे लोग नहीं बढ़ते जिनसे कभी गलती नहीं होती; आगे वे बढ़ते हैं जो अपनी गलती पहचानकर उससे सीखते हैं। यदि कल आपका कोई निर्णय गलत था, तो इसका अर्थ यह नहीं कि आप गलत व्यक्ति हैं। इसका अर्थ केवल इतना है कि आज आपके पास कल से अधिक अनुभव है। मुझसे गलती हुई—यह ईमानदारी है। मैं इसे सुधारूंगा—यह विकास है। और मैं इससे सीखूंगा ताकि यह दोबारा न हो— यह परिपक्वता है। सुधार हमेशा बड़े बदलाव से नहीं आता।

एक अच्छी आदत शुरू करना, एक गलत आदत कम करना, अनावश्यक खर्च रोकना, अधूरा काम पूरा करना या रोज थोड़ा सीखना—यही छोटे सुधार समय के साथ बड़े परिणाम देते हैं। अपनी कमजोरियों को पहचानना जरूरी है, लेकिन स्वयं को लगातार दोष देना सुधार नहीं है। गलती को स्वीकार कीजिए, उससे सीखिए, लेकिन उसे अपनी पहचान मत बनाइए। आपका भविष्य आपकी किसी एक भूल का कैदी नहीं है।

 

आत्मविश्वास को कर्म का प्रमाण चाहिए

आत्मविश्वास केवल प्रेरक बातें पढ़ने से मजबूत नहीं होता। उसे हमारे अपने कर्मों से प्रमाण चाहिए। जब हम स्वयं से किया छोटा-सा वादा निभाते हैं, तब अपने ऊपर भरोसा बढ़ता है। आपने तय किया कि प्रतिदिन आधा घंटा पढ़ेंगे और वास्तव में पढ़ा, तो आपके भीतर यह संदेश दर्ज होता है कि आपकी अपनी बात पर भरोसा किया जा सकता है। इसके विपरीत, बार-बार संकल्प लेकर उन्हें तोड़ने से अपने ही शब्द कमजोर हो जाते हैं। इसलिए बड़े दावे करने के बजाय छोटे, वास्तविक वादे कीजिए और उन्हें निभाइए।

आत्मविश्वास का अर्थ यह नहीं कि हमें सब कुछ आता है; इसका अर्थ है—रास्ता कठिन हो सकता है, लेकिन मैं स्वयं को बीच रास्ते में छोड़कर नहीं जाऊंगा। दिन समाप्त होने से पहले पांच मिनट स्वयं को दीजिए और पूछिए—आज मैंने किसका विश्वास मजबूत किया? कहां सत्य से बचने की कोशिश की? आज की कठिनाई ने मुझे क्या सिखाया? कल मैं कौन-सा एक सुधार करूंगा? और क्या मेरी दिनचर्या मुझे मेरे लक्ष्य के निकट ले जा रही है? इन प्रश्नों के उत्तर किसी और को दिखाने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन स्वयं से इन्हें छिपाना भी नहीं चाहिए।

 

विश्वास टूट जाए तो क्या वह फिर बन सकता है?

हां, लेकिन केवल शब्दों से नहीं। विश्वास टूटने के बाद सबसे पहले सत्य स्वीकार करना पड़ता है। गलती को छोटा बताना, बहाना बनाना या दोष किसी और पर डालना भरोसे को और कमजोर करता है। इसके विपरीत, स्पष्ट रूप से गलती स्वीकार करना, क्षमा मांगना और फिर अपने व्यवहार में वास्तविक परिवर्तन दिखाना विश्वास लौटाने की शुरुआत हो सकती है।

यदि आपने किसी का विश्वास तोड़ा है, तो केवल मुझे माफ कर दीजिए, कहकर मत रुकिए। बदला हुआ व्यवहार ही सबसे मजबूत प्रमाण है। शब्द क्षमा का द्वार खोल सकते हैं, लेकिन भरोसा समय और लगातार सही आचरण से लौटता है। यही बात स्वयं के विश्वास पर भी लागू होती है। अपने ऊपर भरोसा खो गया है, तो छोटे लक्ष्य तय कीजिए, उन्हें पूरा कीजिए और स्वयं को फिर यह प्रमाण दीजिए कि आप अपनी बात निभा सकते हैं।

 

परिवर्तन की सही तारीख आज है

हम अक्सर बदलाव के लिए सोमवार, नए महीने या नए वर्ष की प्रतीक्षा करते हैं। लेकिन जीवन कैलेंडर बदलने से नहीं बदलता; वह निर्णय बदलने से बदलता है। कोई आदत पीछे खींच रही है, तो आज एक छोटा कदम उठाइए। किसी से मनमुटाव है, तो संवाद शुरू कीजिए। कोई काम लंबे समय से रुका है, तो आज उसके लिए समय निकालिए। परिवर्तन हमेशा किसी बड़े संकल्प से नहीं, बल्कि एक ईमानदार छोटे निर्णय से शुरू होता है। यदि किसी असफलता ने आपका आत्मविश्वास कमजोर कर दिया है, तो यह याद रखिए कि उसने केवल आपकी एक कोशिश को रोका है, आपकी पूरी क्षमता को नहीं।

जीवन में हार अंतिम निर्णय नहीं होती; कई बार वह केवल यह बताती है कि तरीका बदलने की जरूरत है। जीवन हमसे पूर्णता नहीं मांगता। वह हमसे ईमानदारी, जिम्मेदारी और सुधार की इच्छा मांगता है। इसलिए सत्य स्वीकार कीजिए, लेकिन हिम्मत खोकर नहीं; गलती पहचानिए, लेकिन स्वयं को छोटा बनाकर नहीं; सुधार कीजिए, लेकिन दूसरों से आगे निकलने के लिए नहीं, बल्कि अपने कल के स्वरूप से बेहतर बनने के लिए।

 

जब कभी लगे कि बहुत देर हो गई है, स्वयं को इतना याद दिलाइए—जहां हूं, वहीं से शुरुआत कर सकता हूं। जो हुआ, उससे सीख सकता हूं और जिस व्यक्ति के रूप में स्वयं को देखना चाहता हूं, उसकी दिशा में आज एक कदम आगे बढ़ सकता हूं। विश्वास की सबसे सुंदर बात यही है कि वह टूटने के बाद भी फिर बन सकता है—यदि सत्य स्वीकार करने का साहस हो, जिम्मेदारी निभाने का धैर्य हो और सुधार को केवल संकल्प नहीं, व्यवहार बना लिया जाए। यही निरंतर सुधार अंततः ऐसी सफलता में बदलता है, जो केवल हमारा जीवन नहीं संवारती, बल्कि दूसरों को भी यह विश्वास देती है कि बदलाव हमेशा संभव है—यदि शुरुआत ईमानदारी से की जाए।

 

उसे पहचानने के लिए दूसरों जैसा बनने की जल्दी छोड़नी होगी। किसी की सफलता देखकर प्रेरणा लेना अच्छा है, लेकिन अपनी दिशा केवल उसकी उपलब्धि के आधार पर चुन लेना आपको अपने स्वभाव से दूर ले जा सकता है। हर आकर्षक रास्ता आपके जीवन के अनुकूल नहीं होता। अपने लिए रास्ता चुनते समय रुचि के साथ उपयोगिता भी देखिए। आपके काम से किसकी जरूरत पूरी होगी? उसे सीखने और बेहतर करने के लिए आप कितना समय दे सकते हैं? वह आपकी वर्तमान परिस्थितियों में कैसे आगे बढ़ सकता है?

इन बातों पर विचार करने से इच्छा एक व्यावहारिक उद्देश्य का रूप लेने लगती है। फिर उसे छोटे स्तर पर आजमाइए। सिखाना अच्छा लगता है तो किसी को एक विषय समझाकर देखिए। लिखने की इच्छा है तो एक छोटा लेख पूरा कीजिए। कोई काम शुरू करना चाहते हैं तो पहले कुछ लोगों की वास्तविक जरूरत समझिए। अनुभव बताएगा कि आपकी रुचि कहां टिकती है और किस तैयारी की कमी है। इस शुरुआत को तुरंत बड़ी उपलब्धि की कसौटी पर मत कसिए। आरंभ में आपका काम अपनी क्षमता को समझना है।

गलतियां होंगी, झिझक होगी, कुछ प्रयास उम्मीद के अनुसार नहीं होंगे। उनसे मिली जानकारी अगले कदम को बेहतर बना सकती है। दिशा समझ में आने के बाद उसके लिए समय तय करना होगा। ‘जब समय मिलेगा’ कहकर छोड़ा गया काम अक्सर प्रतीक्षा में ही रह जाता है। अपनी दिनचर्या में एक छोटी, निश्चित जगह बनाइए—इतनी कि जरूरी जिम्मेदारियाँ निभाते हुए उसे नियमित रूप से बचा सकें। सफलता की एक उपयोगी कुंजी है—अपनी क्षमता को किसी सार्थक काम से जोड़ना और उसे लगातार बेहतर करना। केवल व्यस्त रहना पर्याप्त नहीं।

यह देखना भी जरूरी है कि आपकी मेहनत उस दिशा में लग रही है या नहीं जिसे आपने अपने लिए चुना है। रास्ते में नए अवसर और सलाह मिलेंगे। हर प्रस्ताव पर तुरंत चल पड़ने से पहले ठहरिए। पूछिए—क्या यह मेरे उद्देश्य में मदद करेगा? इसके लिए क्या छोड़ना पड़ेगा? कई बार आगे बढ़ने के लिए किसी आकर्षक संभावना को मना करना भी जरूरी होता है। इसके साथ कुछ सप्ताह बाद अपने काम को ध्यान से देखिए। क्या सीखा? कहां सुधार हुआ? किस कठिनाई के लिए सहायता चाहिए?

यह समीक्षा आपको भटकने से बचाएगी और जरूरत पड़ने पर तरीका बदलने का साहस देगी। अपने प्रयास की कमी पहचानना भी प्रगति का हिस्सा है। यदि पुरानी असफलताओं ने विश्वास कमजोर कर दिया है, तो अपने आप से बहुत बड़ा वादा मत कीजिए। एक छोटा काम चुनिए और उसे पूरा कीजिए। निभाया हुआ वादा आपके सामने प्रमाण रखेगा कि आप अभी भी सीख सकते हैं, निर्णय ले सकते हैं और कुछ बदल सकते हैं।

 

आपके उद्देश्य में आपके मूल्य भी दिखाई देने चाहिए। आगे बढ़ते हुए ईमानदारी, संबंधों, स्वास्थ्य और आत्मसम्मान के लिए जगह बची रहे। ऐसी उपलब्धि अधिक संतोष देती है जिसके साथ आप अपने जीवन और अपने व्यवहार को भी सम्मान से देख सकें। आज कुछ देर अकेले बैठिए और लिखिए—मेरे भीतर कौन-सी क्षमता है जिसे मैंने पर्याप्त अवसर नहीं दिया? उससे मैं क्या उपयोगी कर सकता हूं? इस सप्ताह उसकी शुरुआत कैसे करूंगा? उत्तर प्रभावशाली होने जरूरी नहीं; सच्चे और निभाने योग्य होने चाहिए। संभव है, इन्हें लिखते समय आपको अपनी कोई पुरानी इच्छा याद आ जाए।

वह काम जिसे करते हुए मन खिल उठता था। वह हुनर जिसके लिए किसी ने कभी आपकी प्रशंसा की थी। उसे फिर अवसर दीजिए। इस बार अपनी आज की समझ और अनुभव के साथ। सबके लिए समय निकालते हुए अपने सपनों को लगातार टालना धीरे-धीरे आदत बन जाता है। उस आदत को बदलने की शुरुआत एक छोटे निर्णय से हो सकती है—अपने जरूरी काम के लिए दिन में जगह तय करके उसे निभाना।

अगली रात जब आप बीते दिन का हिसाब करें, तो जिम्मेदारियों के साथ एक बात और कह सकें—’आज मैंने उस काम को भी समय दिया, जो मेरे जीवन को अर्थ देता है।’ शायद उस दिन सारी मंजिलें न मिलें, लेकिन अपने भीतर का अधूरापन थोड़ा कम हो जाए, क्योंकि इस बार आपने अपने सपने को केवल याद नहीं किया, उसे जीने की शुरुआत की है।

(इस लेख में व्यक्त विचार/ विश्लेषण लेखक के निजी हैं। इसमें शामिल तथ्य तथा विचार/ विश्लेषण वेबदुनिया के नहीं हैं और वेबदुनिया इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेती है।)

गोवा में गरजे राहुल गांधी, बोले- वोट चोरी के पीछे ज्ञानेश कुमार, बच नहीं पाएंगे CEC

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Rahul Gandhi took aim at CEC Gyanesh Kumar over SIR

गोवा के मडगांव में लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ 45 से ज्यादा मानहानि के मुकदमे चल रहे हैं, लेकिन वोट चोरी का आरोप लगाने पर अब तक कोई मुकदमा नहीं हुआ। राहुल ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि ऐसे मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई तो आरोप लगाने वालों को भी सवालों का सामना करना पड़ सकता है। राहुल ने कहा, पूरा देश जानता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार वोट चोरी को अंजाम देते हैं और गृहमंत्री अमित शाह तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनका समर्थन करते हैं।

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राहुल ने कहा, पूरा देश जानता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार वोट चोरी को अंजाम देते हैं और गृहमंत्री अमित शाह तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनका समर्थन करते हैं। राहुल ने कहा, कांग्रेस संविधान की रक्षक है। प्रधानमंत्री, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार जानते हैं कि वे हमसे बच नहीं सकते। राहुल ने कहा, पीएम मोदी, अमित शाह और सीईसी ज्ञानेश कुमार को न्याय का सामना करना पड़ेगा और उन्होंने जो किया है, उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, पहले हमारे पास विश्वस्तरीय शिक्षा प्रणाली हुआ करती थी, लेकिन अब छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। राहुल गांधी ने दावा किया कि देश के युवा केंद्र सरकार के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। राहुल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को रात में नींद नहीं आती क्योंकि वे जानते हैं कि कांग्रेस उनसे न्याय लेकर रहेगी।

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राहुल गांधी ने दावा किया कि मोदी सरकार की ‘एक्सपायरी डेट’ अब नजदीक आ रही है। इसके साथ ही उन्होंने गोवा के स्थानीय मुद्दों, बेरोजगारी, शिक्षा और पर्यावरण की रक्षा का भी मुद्दा उठाया है। उन्होंने गोवा में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत देने की अपील करते हुए जमीन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी उठाए। जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह की राजनीति को समझ रही है।

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उन्होंने कहा कि किसी सरकार के पास कितना भी पैसा, संसाधन और प्रचार तंत्र क्यों न हो, जनता का फैसला सबसे अहम होता है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस संविधान की रक्षा के लिए लड़ रही है और वोट चोरी के जरिए संविधान पर हमला किया गया है। राहुल गांधी ने दक्षिण गोवा के मडगांव में कांग्रेस की ‘गोय राखोन यात्रा’ में हिस्सा लिया और पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ 2 किलोमीटर तक पैदल चले।