IMD Rain Alert: बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम से अलर्ट पर ये 6 राज्य! यूपी-बिहार संग इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

India Weather Update: देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश का दौर एक बार फिर बेहद उग्र रूप धारण करने वाला है। गांगेय पश्चिम बंगाल और उससे सटे उत्तर तटीय ओडिशा, झारखंड और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र के असर से कई राज्यों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 सितंबर को ताजा वेदर बुलेटिन जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यह नया मौसमी तंत्र अगले 48 घंटों के दौरान उत्तर ओडिशा और झारखंड के पार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा। इसके असर से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश समेत 6 प्रमुख राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

झारखंड में अत्यंत भारी बारिश, ओडिशा में बीते 24 घंटे में बरसा 20 सेमी पानी

मौसम विभाग के मुताबिक 1 सितंबर को झारखंड में अलग-अलग जगहों पर बेहद भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं ओडिशा, झारखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और गांगेय पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर देखने को मिलेगा। बीते 24 घंटों के दौरान भी मानसूनी बारिश ने जमकर तबाही मचाई है, जहां ओडिशा में 20 सेमी से अधिक बेहद भारी बारिश दर्ज की गई।

इसके अलावा उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, त्रिपुरा और झारखंड में बहुत भारी बारिश रिकॉर्ड की गई जबकि उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश दर्ज हुई है।

उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा मौसम

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में मानसूनी ट्रफ और निचले व मध्य ट्रोपोस्फीयर स्तर पर बने ट्रफ के प्रभाव से व्यापक बारिश की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 1 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 सितंबर और 6 से 7 सितंबर के दौरान तेज बारिश का सिलसिला बना रहेगा।

जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 से 5 सितंबर तक भारी बारिश होगी। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में 2 से 5 सितंबर के बीच भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली कड़कने की संभावना जताई गई है। पहाड़ी राज्यों में उत्तराखंड में 1 से 7 सितंबर तक और हिमाचल प्रदेश में 1 से 5 सितंबर तक व्यापक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लगातार 5 दिनों तक मूसलाधार बारिश का अनुमान

मध्य भारत के राज्यों में कम दबाव के क्षेत्र का काफी असर देखने को मिलेगा। छत्तीसगढ़ में 1 और 2 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश होगी। जबकि 3 सितंबर को भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 1 से 4 सितंबर के दौरान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के बीच बेहद भारी बारिश होने के आसार हैं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग अलग हिस्सों में 1 से 5 सितंबर तक आकाशीय बिजली गिरने और गरज-चमक की स्थिति लगातार बनी रहेगी।

पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत का पूर्वानुमान

पूर्वोत्तर भारत में 1 सितंबर को असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है जबकि अरुणाचल प्रदेश में 1 से 4 सितंबर और 6 से 7 सितंबर के दौरान भारी बारिश होगी।

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दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में अगले एक सप्ताह के दौरान मानसूनी गतिविधियां धीमी बनी रहेंगी। वैसे तटीय कर्नाटक और केरल में 2 से 4 सितंबर के बीच अधिकांश जगहों पर बारिश होगी। तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, कर्नाटक और तेलंगाना में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी जारी की गई है।

‘GDP ग्रोथ का जश्न आम आदमी कैसे मनाए?’ खरगे ने PM मोदी पर साधा निशाना, बेरोजगारी-महंगाई से लेकर असमानता तक गिनाईं चुनौतियां

‘GDP ग्रोथ का जश्न आम आदमी कैसे मनाए?’ खरगे ने PM मोदी पर साधा निशाना, बेरोजगारी-महंगाई से लेकर असमानता तक गिनाईं चुनौतियां

mallikarjun kharge attacks narendra modi on GDP statement

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। खरगे ने GDP ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश का आम नागरिक बेरोजगारी, महंगाई और बढ़ती आर्थिक असमानता के ‘3 अ’ के बोझ तले दबा हुआ है। ALSO READ: पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

 

खरगे ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि लाइट्स, कैमरा और इनैक्शन (निष्क्रियता)! यह अर्थव्यवस्था के मामले में मोदी जी के पीआर (प्रचार) की कहानी है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदीजी, आप कह रहे हैं कि देश जीडीपी ग्रोथ का जश्न मना रहा है। आपके पास यह विलासिता हो सकती है, लेकिन आम आदमी के पास नहीं!

 

3 'अ' के बोझ तले दबा आम नागरिक

उन्होंने कहा कि हमारा आम नागरिक 3 'अ' के बोझ तले दबा हुआ है और इसके लिए आप जिम्मेदार हैं! 3 'अ' अभूतपूर्व बेरोजगारी, असहनीय महंगाई और अनियंत्रित असमानता! बेरोजगारी 50 साल के उच्चतम स्तर पर है। युवा स्नातकों में से 40% बेरोजगार हैं। जुलाई 2026 में 15 से 29 वर्ष की आयु के हर 6 में से 1 युवा भारतीय बेरोजगार था। हर साल 2 करोड़ नौकरियों का वादा चूर-चूर हो चुका है।

 

खुदरा महंगाई 19 महीने के उच्चतम स्तर पर है। चीनी, प्याज, टमाटर, दाल, खाना पकाने का तेल, चावल, दूध—रसोई की हर जरूरत आग उगल रही है। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी की कीमतें आम पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। मध्यम वर्गीय परिवार किसी तरह जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और गरीबों ने तो उम्मीद ही छोड़ दी है।

 

असमानता ब्रिटिश राज से भी बदतर हो गई है। शीर्ष 1% के पास भारत की कुल संपत्ति का 40% हिस्सा है। सबसे निचले 50% लोग बमुश्किल 15% पर गुजर-बसर कर रहे हैं। आपकी सरकार ने स्वतंत्र भारत के इतिहास में गरीबों से अमीरों की तरफ संपत्ति का सबसे बड़ा ट्रांसफर किया है। ALSO READ: 7.8% की शानदार विकास दर के बीच पीएम मोदी ने क्यों की सोना नहीं खरीदने की अपील?

क्रोनी कैपिटलिज्म इकलौती आर्थिक नीति

खरगे ने कहा कि अंधाधुंध क्रोनी कैपिटलिज्म (पक्षपातपूर्ण पूंजीवाद) ही आपकी इकलौती आर्थिक नीति है। आपकी सरकार ने 2014 से लेकर अब तक 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कॉर्पोरेट कर्ज को बट्टे खाते (राइट ऑफ) में डाल दिया है। इसके सबसे ताजा और चौंकाने वाले उदाहरण में, लेनदारों ने 22,006 करोड़ रुपये के दावों के मुकाबले महज 6.5 करोड़ रुपये वसूले, यानी 99.97% की भारी-भरकम छूट (हेयरकट) दे दी गई। ALSO READ: 7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

 

खरगे ने बताया क्या बदला?

उन्होंने कहा कि देश ने देखा है कि भारत के प्रधानमंत्री एक चहेते मित्र के लिए पर्सनल ट्रैवल एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं! भारतीयों से सोना न खरीदने और विदेश यात्रा न करने के लिए आपके बार-बार दिए जाने वाले उपदेश जमीनी हकीकत को बयां करते हैं। सच्चाई यह है कि जनता से झूठ बोलने की आपकी क्षमता के अलावा कुछ भी नहीं बदला है!

पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

पीएम मोदी का नया मंत्र- Wed in India, आखिर क्या है इसके मायने?

मेक इन इंडिया के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को एक नया मंत्र दिया है 'Wed in India'। देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से 'स्वदेशी' और 'आत्मनिर्भरता' को अपनाने की भावुक अपील की है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत GDP विकास दर का हवाला देते हुए पीएम मोदी ने विशेष रूप से विदेशों में होने वाली खर्चीली शादियों पर चिंता जताई और 'Wed in India' (भारत में शादी) के मंत्र पर जोर दिया।

विदेशों में शादियों के चलन पर चिंता

पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि घूमने के अलावा अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचना चाहिए और विदेशों में शादियां रचाने के चलन पर विराम लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेश यात्राएं अगर घूमने के लिए जाते हैं, तो नहीं जाना चाहिए। अगर विदेश में शादियां करते हैं, तो नहीं करनी चाहिए। ‘वेड इन इंडिया’ के मंत्र को जीना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने घरेलू उत्पादों की खपत बढ़ाने और बिना जरूरत के सोना न खरीदने की भी सलाह दी। ALSO READ: शहबाज शरीफ के सामने गरजे पीएम मोदी, आतंकवाद पर दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे, जड़ से खत्म करना होगा इकोसिस्टम

विदेशी डेस्टिनेशन वेडिंग का सच

उद्योग अनुमानों और रिपोर्टों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 5000 अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन वेडिंग्स (विदेशों में) आयोजित की जाती हैं। हालांकि इसका कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन, कंज्यूमर और वेडिंग इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार हर साल इन 5000 शादियों के जरिए भारतीय परिवारों का लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का खर्च देश से बाहर विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन (जैसे थाईलैंड, यूएई, श्रीलंका, वियतनाम और यूरोप) में चला जाता है। ALSO READ: 7.8% विकास दर पर गदगद हुए पीएम मोदी: बोले- दुनिया संकटों में फंसी है, फिर भी तेजी से आगे बढ़ रहा भारत

पीएम मोदी की अपील का उद्देश्य

पीएम मोदी की सीधी अपील का उद्देश्य इसी धन को देश के भीतर बनाए रखना है। भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग का औसतन खर्च करीब 58 लाख रुपए आता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बजट बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है। भारतीयों के लिए थाइलैंड सबसे लोकप्रिय विदेशी वेडिंग डेस्टिनेशन बना हुआ है। इसके अलावा UAE, वियतनाम और श्रीलंका (2025 में 25% की वृद्धि) भी प्रमुख विकल्प हैं, जबकि इटली, स्पेन और ग्रीस का चयन लक्जरी शादियों के लिए किया जाता है। Policybazaar के आंकड़े दर्शाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय शादियों के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस की खरीद में लगातार दो वर्षों तक 27.4% की सालाना वृद्धि हुई है।

फाइनल की हार से टूट चुके थे मेस्सी, नहीं कर पाए करियर का परिकथा अंत

शायद दुनिया के महानतम फुटबॉलर और इस खेल के जादूगर ने 20 जुलाई की रात को ही तय कर लिया था कि बस अब बहुत हुआ अब मैदान से विदाई ले लेने में ही भलाई है। 20 जुलाई की रात को उनके आंखो में आसूं थे क्योंकि वह लगातार अर्जेंटीना को विश्वकप नहीं जिता पाए थे और ना ही अपने करियर का परिकथा अंत कर पाए थे।

FIFA World Cup का टूर्नामेंट जिस हिसाब से जा रहा था ऐसा लग रहा था कि लियोनेल मेस्सी के करियर का परिकथा अंत होगा। लेकिन उनके हाथ ना ही खिताब लगा और ना ही पैर पर गोल्डन बूट लगा। मेस्सी के लिए बस एक बात अच्छी रही कि  वह पिछले साल विजेता टीम का हिस्सा थे अन्यथा इस महान फुटबॉलर को बिना किसी वैश्विक खिताब के रवाना होना पड़ता।

आखिरी सीटी बजने पर उनकी आंखों में नमी और चेहरे पर निराशा को सभी ने देखा। एक तरफ स्पेन के खिलाड़ी जश्न मना रहे थे तो दूसरी तरफ मेस्सी और उनकी टीम स्टेडियम के दक्षिणी छोर पर अर्जेंटीना के समर्थकों को धन्यवाद दे रही थी और शायद माफी भी मांग रही थी।

बार्सीलोना और पेरिस सेंट जर्मेन के साथ 12 लीग और चार चैम्पियंस लीग खिताब जीतने के बाद मेस्सी ने जब यूरोपीय फुटबॉल से विदा लेकर तीन साल पहले एमएलएस का रूख किया तो लोगों को लगा कि वह रिटायर होकर अमेरिका में बस जायेंगे ।

लेकिन वह एक बार फिर अर्जेंटीना को विश्व कप फाइनल तक ले गए जिनमें उनके खाते में आठ गोल आये और चार में वह सहायक रहे। विश्व कप में उनके 21 गोल हो गए हैं और शनिवार को तीसरे स्थान के मुकाबले में फ्रांस के कीलियन एमबाप्पे (22 गोल) के आगे निकलने तक वह शीर्ष पर थे। तीन विश्व कप फाइनल खेलने वाले पहले खिलाड़ी मेस्सी के 125 अंतरराष्ट्रीय गोल हैं और वह सिर्फ क्रिस्टियानो रोनाल्डो (146) से पीछे हैं।

स्पेन के खिलाड़ी आखिरी सीटी बजने के बाद मेस्सी को ढांढस बंधाने आये। मेस्सी मैदान पर बैठ गए और हाथ पीछे रखकर एकटक देखते रहे। उपविजेता का पदक लेने आये तो मुस्कुराने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे।फिर अपने विचारों में खोये हुए, दुख को छिपाने की कोशिश करते मैदान के एक कोने से चुपचाप बाहर चले गए। विश्व कप से आखिरी बार।इस मैच के लगभग 1.5 महीने बाद लियोनेल मेस्सी ने जूता टांग दिया।

दवाओं पर अब तक लागू नहीं हुआ नया नियम, पूरी स्‍ट्रिप खरीदने को मजबूर मरीज, पैकेजिंग बदली तो बढ़ेगा जेब पर भार

दवाओं पर अब तक लागू नहीं हुआ नया नियम, पूरी स्‍ट्रिप खरीदने को मजबूर मरीज, पैकेजिंग बदली तो बढ़ेगा जेब पर भार

medicine strip

जब आप किसी मेडिकल स्‍टोर पर कोई दवा खरीदने जाते हैं, आप दवाओं का सिर्फ एक डोज चाहते हैं, मसलन, आपको सिर्फ 3 टेबलेट चाहिए, लेकिन मेडिकल संचालक आपको टेबलेट का पूरा स्‍ट्रिप थमा देता है। यानी आपको चाहिए सिर्फ 3 टेबलेट, लेकिन खरीदना पड़ती है 10 गोलियां। यह भारत में ज्‍यादातर मरीजों के साथ होता है।

इसके लिए सरकार में दवाओं की पैकेजिंग और उन पर बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट की प्रिंटिंग को लेकर बदलाव की योजना बनाई थी, लेकिन वो अब तक लागू नहीं हो सकी है, नतीजा यह है कि आज भी मरीजों को दो गोली की जगह मेडिसिन का पूरा पत्‍ता यानी स्‍ट्रिप खरीदना पड़ रही है। अगर ऐसा होता है तो इसमें भी एक अलग समस्‍या पैदा हो सकती है। केमिस्‍टों का मानना है कि पैकेजिंग बदलेगी तो उसका बोझ भी मरीजों की जेब पर आएगा।

मरीज की मजबूरी : दरअसल, नियम यह है कि कानूनी रूप से आपको या किसी भी मरीज को मेडिकल संचालक पूरी स्ट्रिप लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता, लेकिन इसके पीछे कुछ तकनीकी खामियां हैं, जिसकी वजह से केमिस्ट वाले ऐसा करने के लिए मजबूर हैं। जानते हैं क्‍या हैं दवाओं को खरीदने के नियम और सरकार इस लूपहोल से निपटने के लिए क्‍या योजना बना रही है।

मरीजों के साथ क्‍यों हो रहा ऐसा : दरअसल, दवाओं पर उनकी बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट छपी होती है। स्‍ट्रिप को काटकर उसमें से कुछ ही गोलियां निकालने पर स्‍ट्रिप के एक हिस्‍से में यह जानकारी नहीं मिल पाती है, क्‍योंकि यह जानकारी स्‍ट्रिप के एक ही हिस्‍से में लिखी होती है। जबकि ग्राहक के लिए यह जानना जरूरी है कि जो दवा वो खरीद रहा है, उनकी बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट क्‍या है। केमिस्‍ट स्‍ट्रिप पर लिखी जानकारी मिटने और नुकसान के डर से ऐसा करते हैं। हालांकि, नियमों में सख्ती और नई पैकेजिंग आने के बाद यह समस्या जल्द ही पूरी तरह खत्म होने का दावा किया जा रहा है।

किन वजहों से केमिस्‍ट ऐसा करते हैं?
जानकारी गायब होने का डर : दरअसल, दवा की स्ट्रिप के पीछे बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट छपी होती है। अगर केमिस्ट स्ट्रिप को बीच से काट कर दो गोलियां दे देता है, तो बाकी बची स्ट्रिप से यह जरूरी जानकारी गायब हो सकती है। बिना एक्सपायरी डेट या लेबल वाली दवाएं रखना या बेचना ड्रग नियमों के खिलाफ माना जाता है।

Medicine Time After Food

दवा कंपनियों का नियम: दवा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स का यह नियम होता है कि वे केवल पूरी और बिना कटी हुई स्ट्रिप ही वापस (Return) लेते हैं। अगर मेडिकल स्टोर वाला कोई धीमी बिकने वाली दवा (Slow-moving drug) काट कर दे देता है और बची हुई दवाएं एक्सपायर हो जाती हैं, तो कंपनी उसे वापस नहीं लेती। इसका पूरा आर्थिक नुकसान छोटे मेडिकल स्टोर संचालक को उठाना पड़ता है।

दवाइयों की बर्बादी: कुछ दवाइयां बहुत कम बिकती हैं (स्लो मूविंग ड्रग्स)। उनकी कटी हुई स्ट्रिप दुकान में महीनों पड़ी रह सकती है और अंत में केमिस्ट को उसे फेंकना पड़ता है।

पूर्व सिविल सर्जन डॉ प्रवीण जड़िया ने बताया कि तकनीकी खामियों और इन वजह से मरीज की जेब पर होने वाले भार और मेडिसिन की पूरी जानकारी भी बरकरार रखने के इरादे के साथ ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) और उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय इस समस्या को खत्म करने के लिए नए नियमों पर काम की योजना तो बनाई थी, हालांकि उस पर अब तक कुछ हो नहीं सका है।

क्‍या कहते हैं मेडिकल संचालक और केमिस्‍ट : दरअसल, इस पूरे मसले में तकनीकी खामी है। कुछ केमिस्‍ट संचालकों का कहना है कि स्‍ट्रिप की हर गोली पर क्‍यूआर कोड और बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट प्रिंट करना संभव नहीं है। अगर ऐसा होता है तो पैकेजिंग में कई तरह के बदलाव करना होगा। यह दवा कंपनियों के लिए एक महंगा सौदा साबित होगा। ऐसे में दवा कंपनियां मेडिसिन के दाम बढाएगी और उसका बोझ मरीज की ही जेब पर पड़ेगा।

लंबी बीमारी में तो ठीक, आम बीमारियों में बोझ : दरअसल, लाइफ लॉन्‍ग बीमारियां जैसे शूगर हार्ट, बीपी ओर कैंसर में तो मरीज दो महीने या तीन महीने के डोज खरीदता ही है, लेकिन आम बीमारियों के इलाज में लगने वाली दवाओं को खरीदने में मरीज पर बोझ बरकरार है, क्‍योंकि आम शिकायतों में मरीज को 2 या तीन डोज लेना होते हैं।

इस नई योजना पर चल रहा काम: सटीक मात्रा बेचने का प्रस्ताव (Exact Quantity Dispensing): DCGI ने एक नए नियम का प्रस्ताव रखा है जिसके तहत फार्मासिस्टों को उतनी ही दवाएं काट कर देनी होंगी, जितनी डॉक्टर के पर्चे पर लिखी हैं।

हर गोली पर QR कोड और जानकारी: पैकेजिंग टेक्नोलॉजी में बदलाव के सुझाव दिए गए हैं ताकि हर एक सिंगल टैबलेट या कैप्सूल के पीछे या उसकी पैकेजिंग पर एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और QR कोड अंकित हो। इससे पत्ता काटने पर भी जानकारी सुरक्षित रहेगी।

परफोरेशन्स (Perforation) तकनीक: दवा कंपनियों को ऐसी स्ट्रिप्स बनाने की सलाह दी जा रही है, जिन्हें बिना कैंची के आसानी से सिंगल यूनिट में अलग किया जा सके।

केमिस्‍ट और मरीज के बीच विवाद: नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) के मुताबिक इस तरह की शिकायतों की संख्या में तेजी आई है। NCH को कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्ट्री रन करती है। इससे मिले आंकड़ों के आधार पर ही मिनिस्ट्री विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। मंत्रालय ने हाल में फार्मा और मेडिकल डेवाइसेज इंडस्ट्री के नुमाइंदों के साथ सलाह-मशविरा किया था। इसमें ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के टॉप अधिकारी भी शामिल हुए। क्‍योंकि अक्‍सर केमिस्‍ट और मरीज के बीच इसे लेकर विवाद हो रहे हैं।

Radhika Gupta: कभी 0% बचत, आज सैलरी का 90% SIP! एडलवाइस CEO राधिका गुप्ता ने बताए वेल्थ क्रिएशन के ये 4 सीक्रेट्स

Radhika Gupta SIP Investment Strategy: एडलवाइस म्यूचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता अपनी फाइनेंशियल डिसिप्लिन के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी पर्सनल फाइनेंस जर्नी को लेकर बड़ा खुलासा किया है। राधिका गुप्ता ने बताया कि आज वह अपनी टैक्स कटने के बाद मिलने वाली सैलरी का 90% हिस्सा म्यूचुअल फंड SIP में निवेश करती हैं।

हालांकि, उनकी शुरुआत ऐसी बिल्कुल नहीं थी। एक समय ऐसा भी था जब वह अपनी सैलरी से एक रुपया भी नहीं बचा पाती थीं। आइए जानते हैं उनकी जर्नी और पहली जॉब वाले युवाओं के लिए उनके दिए गए गोल्डन रूल्स के बारे में।

₹45000 की सैलरी में से कम से कम ₹5000 बचाएं

‘Konversation with Kushal’ पॉडकास्ट में बात करते हुए राधिका गुप्ता ने युवाओं को सलाह दी कि अपनी पहली सैलरी से ही निवेश करने की आदत डालनी चाहिए, भले ही शुरुआत छोटी राशि से हो। आपकी कमाई की शुरुआत में बड़ी रकम से ज्यादा महत्वपूर्ण आपकी निवेश करने की आदत है।

उन्होंने कहा, ‘अगर आपकी सैलरी ₹45000 है, तो उसमें से ₹9000 से ₹10000 बचाने की कोशिश करें। अगर आप इतना नहीं बचा पा रहे हैं, तो कम से कम ₹5000 हर महीने बचाने का लक्ष्य जरूर रखें।’

SIP क्यों है बेस्ट?

राधिका गुप्ता के अनुसार, SIP की सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह ऑटोमेशन के जरिए अनुशासन बनाती है। उन्होंने समझाया, ‘जब आपकी सैलरी ₹50000 होती है, तो आप टैक्स से नहीं बच पाते क्योंकि वह सैलरी क्रेडिट होने से पहले ही TDS के रूप में कट जाता है।

ठीक इसी तरह SIP भी Investment Deducted at Source की तरह होनी चाहिए।’ ऑटोमैटिक डेबिट सेट करने से पैसा पहले ही इन्वेस्ट हो जाता है, जिससे ‘पहले खर्च करो और बाद में बचाओ’ वाली आदत पर रोक लगती है।

‘जीरो बचत’ से 90% तक का सफर

अपनी पर्सनल फाइनेंस जर्नी को याद करते हुए एडलवाइस की सीईओ ने बताया कि उन्होंने रातों-रात 90% सेविंग्स रेट हासिल नहीं किया। उन्होंने अपनी पोस्ट-टैक्स सैलरी से बिल्कुल कुछ न बचाने की स्थिति से 10%, फिर 20% और धीरे-धीरे आय बढ़ने के साथ इसे बढ़ाकर 90% तक पहुंचाया।

बेटे के 6 महीने के होते ही शुरू किया पोर्टफोलियो

राधिका गुप्ता बच्चों के नाम पर शुरुआती उम्र में निवेश की पुरजोर समर्थक हैं। उन्होंने 2023 में खुलासा किया था कि उन्होंने अपने बेटे के 6 महीने का होते ही उसके नाम पर इक्विटी में निवेश शुरू कर दिया था ताकि उसे लंबे समय तक कंपाउंडिंग का फायदा मिल सके। बच्चों के नाम पर SIP खोलने से माता-पिता ज्यादा गोल-ओरिएंटेड हो जाते हैं और वे लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों पर फोकस रहते हैं।

‘जिंदगी सिर्फ सबसे बड़े NAV या बैंक बैलेंस की रेस नहीं है’

हालांकि वह एक अग्रेसिव सेविंग्स रेट बनाए रखती हैं, लेकिन उन्होंने केवल पैसे जोड़ने की सनक से बचने की सलाह भी दी है। उन्होंने अपनी एक पोस्ट में लिखा था, ‘मेरा काम SIP बेचना है, लेकिन मैं हमेशा सभी से कहती हूं कि अपनी कड़ी मेहनत के फलों का आनंद लेने के लिए भी समय निकालें।’

उन्होंने आगे लिखा कि ‘जिंदगी इस बात की रेस नहीं है कि किसके पास सबसे ज्यादा NAV या सबसे ज्यादा रुपये हैं, बल्कि इस बात की है कि किसने सबसे ज्यादा खुशी से अपनी जिंदगी जी है।’

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nepal Floods: बाढ़ से भयानक तबाही के बाद भारत-अमेरिका-चीन से मुआवजा क्यों मांगने लगा नेपाल?

Nepal Floods: नेपाल ने विनाशकारी बाढ़ के बाद अब इंटरनेशनल मदद की मांग का अपना रुख बदलते हुए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग उठाई है। नेपाल का कहना है कि जलवायु संकट पैदा करने में उसका योगदान बेहद कम है। लेकिन ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और चरम मौसम की घटनाओं का सबसे ज्यादा खामियाजा हिमालयी देश को भुगतना पड़ रहा है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने मानवीय सहायता मांगने के बजाय विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के लिए ‘क्लाइमेट मुआवजे’ की मांग करने का अपना कूटनीतिक रुख बदल लिया है।

नेपाल का तर्क है कि यह हिमालयी देश उस जलवायु संकट का खामियाजा भुगत रहा है, जिसे पैदा करने में उसकी भूमिका बहुत कम थी ‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि उनका देश अब सहायता को महज मानवीय मदद के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि इसे जलवायु जिम्मेदारी और मुआवजे के मुद्दे से जोड़ रहा है। यह विनाशकारी बाढ़ 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के गिरने या हिमस्खलन के कारण आई थी।

‘यह दान नहीं, न्याय और मुआवजे का मामला’

विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान लगभग नगण्य है। इसके बावजूद जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और हिमालयी आपदाओं का सामना नेपाल को करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नेपाल अपनी कूटनीतिक रणनीति को ‘मदद’ से ‘न्याय और मुआवजे’ की ओर ले जा रहा है। उनके मुताबिक यह किसी देश की ओर से दी जाने वाली चैरिटी नहीं, बल्कि जलवायु संकट के लिए जिम्मेदारी और मुआवजे का सवाल है।

भारत, चीन और अमेरिका को बताया बड़ा प्रदूषक

नेपाल के विदेश मंत्री ने चीन, अमेरिका और भारत को दुनिया के प्रमुख इंडस्ट्रियल एमिटर्स में शामिल बताते हुए कहा कि इन देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि वे नेपाल जैसे जलवायु संवेदनशील देशों को मुआवजा दें। खनाल ने कहा कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा एमिटर्स है, उसके बाद अमेरिका और भारत का स्थान आता है। उन्होंने दावा किया कि नेपाल ने इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को औपचारिक क्लाइमेट कंपेंसेशन क्लेम लेटर भी भेजा है।

‘यह बाढ़ नहीं, हिमालयी सुनामी थी’

विदेश मंत्री ने हालिया आपदा की भयावहता बताते हुए इसे सामान्य बाढ़ मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पानी की लहरें 20 से 30 मीटर तक ऊंची थीं। उनकी रफ्तार करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई। इसी वजह से उन्होंने इसे ‘हिमालयी सुनामी’ करार दिया। बाढ़ के पानी ने घरों, गाड़ियों, सड़कों और पुलों को बहा दिया। जबकि कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा।

नेपाल ने UN से मांगी 5 अरब डॉलर की मदद

आपदा के बाद नेपाल ने पुनर्निर्माण और रिकवरी की लागत करीब 5 अरब डॉलर आंकी है। साथ ही, देश ने जलवायु आपदाओं से उबरने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े विशेष फंड से तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की है। नेपाल के जलवायु अधिकारियों का कहना है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन ने उन परिस्थितियों को और गंभीर बनाया, जिनके बीच यह भयावह आपदा सामने आई।

नेपाल का तर्क है कि जो देश जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं, वे ही अक्सर इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि हिमालय के ग्लेशियर लगातार पिघलते रहे तो गंगा और त्रिशूली जैसी नदियों पर निर्भर दक्षिण एशिया के अरबों लोगों की जल सुरक्षा भी गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

नेपाल में मौतों का आंकड़ा 1,000 के करीब

नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर मंगलवार को 987 हो गई> सुरक्षा बल देश के अलग-अलग हिस्सों में तलाश एवं बचाव अभियान के दौरान और शव बरामद कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, 3,916 लोग अब भी लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में नेपाल सेना समेत सुरक्षा बलों ने तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है।

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नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, चितवन से 321 शव, नवलपरासी पूर्व से 216, नवलपरासी पश्चिम से 170 और नुवाकोट से 95 शव बरामद किए गए हैं।इसी तरह, गोरखा से 65, धादिंग से 55, तनहूं से 38 और रसुवा से 27 शव बरामद किए गए हैं। NDRRMAए ने बताया कि अचानक आई बाढ़ से आठ जिले प्रभावित हुए हैं।

नेपाल से बाढ़ में बहकर बिहार आईं रहस्यमयी मछलियां! प्रशासन ने इन्हें खाने से किया मना, जानिए इनसे क्या है खतरा

नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत के कुछ राज्यों में भी दिखाई दे रहा है। बिहार के बगहा में बाढ़ के बाद प्रशासन ने लोगों को अनजान मछलियों से दूर रहने की सलाह दी है। ये मछलियों नेपाल से बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई है। बाढ़ के पानी के साथ कुछ अनजान मछलियां स्थानीय तालाबों और दूसरे जलस्रोतों में पहुंच गई हैं। प्रशासन ने इन मछलियों को खाने से मना किया है। बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये सलाह जारी की है। ऐसी मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों के बीमार होने की शिकायत सामने आई है।

नेपाल से आने वाली नदियों में पानी बढ़ने के कारण बगहा के कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने और बाढ़ के पानी के साथ आई अनजान मछलियों को खाने से बचने की अपील की है।

SDM ने जारी की एडवाइजरी

बगहा की SDM चांदनी कुमारी ने ऐसी मछलियों को लेकर लोगों को सावधान किया है। यह चेतावनी उन खबरों के बाद जारी की गई, जिनमें इन मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई थी। प्रभात खबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक SDM ने कहा, बाढ़ के पानी के साथ कुछ ऐसी मछलियां भी स्थानीय तालाबों और जलस्रोतों में पहुंच गई हैं, जो वहां आमतौर पर नहीं मिलतीं। अधिकारियों के अनुसार, इन मछलियों को खाने के बाद कुछ लोगों की तबीयत खराब होने की शिकायत सामने आई है। इसके बाद प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और बिना पहचान वाली मछलियों का सेवन न करने की सलाह दी है।

क्यों नहीं खाना चाहिए

अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ के तेज पानी में मछलियां तालाब, नदी और झील जैसे अपने सामान्य स्थानों से दूर चली जाती हैं। इस दौरान उनका संपर्क गंदे नालों, मरे हुए जानवरों और अन्य दूषित चीजों से हो सकता है, जिससे उनमें हानिकारक बैक्टीरिया और दूसरे संक्रमण फैलाने वाले जीव मौजूद हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन ने लोगों से बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को खाने मना किया है। विभाग के मुताबिक, जब तक बाढ़ का पानी पूरी तरह उतर नहीं जाता और इलाके के हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक ऐसी मछलियों से दूरी बनाना ही सुरक्षित है।

इन समस्याओं को नजरअंदाज ना करें

प्रशासन ने लोगों से अनजान मछलियां दिखने पर खुद कार्रवाई करने के बजाय इसकी सूचना मत्स्य अधिकारी या स्थानीय प्रशासन को देने की अपील की है। साथ ही, अफवाहों से बचने और बाढ़ के पानी से मिली चीजें खाने में सावधानी बरतने को कहा है। प्रशासन ने लोगों से कहा कि अगर अनजान मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, चक्कर या सांस लेने में परेशानी जैसी शिकायत हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घर पर ठीक होने का इंतजार करने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल जाकर डॉक्टर से सलाह लें।

Market Insight : सितंबर के दूसरे भाग में निफ्टी में आ सकती है तेजी, छोटे-मझोले शेयरों में दिख रहा दम

Market Insight : मार्केट टेक्निकल्स पर चर्चा करते हुए जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज (JM Financial Services) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और हेड ऑफ रिसर्च राहुल शर्मा ने कहा कि इंडेक्स तो अभी भी रेंज बाउंड ही हैं। कल के सेशन में हमने देखा कि निफ्टी में ब्रेकडाउन की कोशिश जरूर हुई थी। निफ्टी ने 24,000 का लेवल तोड़ने की कोशिश तो हुए लेकिन क्लोजिंग तक वापस निफ्टी रेंज में आ गया। ऐसे में लगता है कि जब तक निफ्टी में 24,000 का लेवल क्लोजिंग बेसिस पर नहीं टूटता रेंज बाउंड एक्टिविटी जारी रहेगी। बाजार में स्टॉक स्पेसिफिक एक्शन बना हुआ है। चाहे हम बैंक निफ्टी लें या निफ्टी लें दोनों ही दायरे में फंसे हुए हैं।

इस समय ऑटो स्टॉक्स में बहुत अच्छा अट्रैक्शन देखने को मिल रहा है। कल और आज में हमने देखा कि टू व्हीलर ऑटो जैसे बजाज ऑटो में बहुत बेहतरीन मूव रहा है। अब हमें लगता है कि कहीं ना कहीं ऑटो एंसिलरी स्टॉक्स में इसका फॉलोअप देखने मिल सकता है।

ऑटो एंसिलरी में Minda का सेटअप सबसे अच्छा लग रहा है। स्टॉक में एक बहुत ही अच्छे कंसोलिडेशन के बाद आज के सेशन में ब्रेकआउट देखने को मिल रहा है। स्टॉक 1300 के ऊपर है। यह बुल्स के ग्रुप में है। इस स्टॉक में 1380 रुपए तक के लेवल्स आते हुए दिख सकते हैं। इन लेवल्स पर खरीदारी की जा सकती है। इसमें ओवरऑल 1265 रुपए का स्टॉप लॉस रहेगा।

एफआई की शॉर्टिंग हो रही है। ऐसे में क्या मार्केट में ब्रेकडाउन का रिस्क दिख रहा है आपको? इसके जवाब में राहुल शर्मा ने कहा कि हां ऐसा हो सकता है। यह ऐसा ब्रेकडाउन है जो अभी तक तो आया नहीं है। कहीं ना कहीं जो कैश में जो एफआई सेलिंग थी वो काफी टेप डाउन हो चुकी है। इतना सब कुछ होने के बावजूद निफ्टी में मंथली चार्ट्स पर अभी भी एक तरह से हायर हाई हायर लो बना हुआ है। ऐसे में लगता है कि ये टाइम करेक्शन है। प्राइस करेक्शन नहीं है। जीडीपी नंबर्स काफी अच्छे हैं। Q1 भी ठीक रहा। देर सबेर मार्केट इस रेंज से बाहर निकलेगा। फिलहाल अभी की रेंज 24500 की रेंज की ओर शिफ्ट होती हुई दिखेगी। सितंबर सीरीज के दूसरे भाग में हमें बाजार में तेजी आ सकती है। लेकिन अभी के लिए सलाह यह होगी जब तक बाजार रेंज से बाहर नहीं निकलता तब तक खास करके इंडेक्स में वेट एंड वॉच करना चाहिए।

वैसा इस मार्केट में इंडेक्स भले ही रेंज बाउंड है लेकिन स्माल कैप्स और माइक्रो कैप्स एक अलग ही तेजी में चल रहे है। जहां पर एक्शन है जहां पर सबसे ज्यादा लिक्विडिटी जा रही है और वहीं पर फोकस करना चाहिए। इस समय छोटे स्टॉक्स पर फोकस रहना चाहिए, वहां पर हमें ट्रैक्शन अच्छा दिखाई दे रहा है।

 

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