इजराइल से ऑस्ट्रिया जा रही ऑस्ट्रियन एयरलाइंस की फ्लाइट को बम की धमकी के बाद बुल्गारिया में उतारा गया। एयरबस A320 रविवार रात तेल अवीव से वियना जा रहा था। खतरे की सूचना के बाद बुल्गारिया की वायुसेना ने विमान को एस्कॉर्ट करने के लिए MiG-29 लड़ाकू विमान भेजा। विमान में 51 यात्री और छह क्रू सदस्य सवार थे। सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। किसी के घायल होने की खबर नहीं है। फ्लाइट तीन घंटे बाद बुल्गारिया में लैंड हुई फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ऑस्ट्रियन एयरलाइंस की फ्लाइट रविवार शाम 6:46 बजे तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट से रवाना हुई थी। विमान जब रोमानिया के ऊपर था तब इसे बुल्गारिया की राजधानी सोफिया की ओर मोड़ा गया। करीब तीन घंटे बाद 9:10 बजे यह सोफिया के वासिल लेव्स्की एयरपोर्ट पर उतरा। बुल्गारिया के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, अलर्ट मिलने के करीब 30 मिनट बाद विमान की सुरक्षा जांच शुरू हुई। बुल्गारिया और इजराइली मीडिया ने बताया कि विमान को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। ऑस्ट्रियन एयरलाइंस ने भी खतरे की पुष्टि की है, लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं दी। 6 दिन पहले भी इजराइल जा रही फ्लाइट को बम की धमकी मिली थी अमेरिका के न्यूयॉर्क से तेल अवीव पहुंची डेल्टा एयरलाइंस की फ्लाइट को भी 13 अक्टूबर को बम की धमकी मिली। विमान खाली कराकर तलाशी ली गई, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला। इससे एक दिन पहले इंडोनेशियाई पायलट के कारण इजराइल ने इथियोपियन एयरलाइंस के कार्गो विमान को उतरने की मंजूरी नहीं दी थी। पायलट बदलने के बाद विमान को अनुमति मिली। दरअसल सितंबर में फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुए हादसे के बाद इजराइल ने सुरक्षा नियम सख्त कर 11 देशों के पायलटों और क्रू पर रोक लगा दी है। इनमें अफगानिस्तान, अल्जीरिया, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, कुवैत, नाइजर, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया और वेनेजुएला शामिल हैं। इन देशों के इजराइल से राजनयिक संबंध नहीं हैं। पिछले महीने फ्लाईदुबई की फ्लाइट हाईजैक हुई थी 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के पायलट ने विमान को हाईजैक कर लिया था। उसने दूसरे पायलट पर चाकू से हमला कर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर विमान को इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर गिराने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, कई यात्रियों ने बीच में आकर उसे रोक दिया और फाइटर जैट्स की निगरानी में विमान की सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिग कराई गई। फ्लाइदुबई की फ्लाइट का रूट देखें… इजराइली न्यूज चैनल 12 के मुताबिक, फ्लाईदुबई पर हमले के अगले दिन इजराइल के परिवहन मंत्रालय ने एयरलाइंस को पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि दुश्मन देशों के नागरिकों को इजराइल जाने वाली उड़ानों में पायलट, क्रू मेंबर या यात्री के तौर पर सफर करने की अनुमति न दी जाए। ——————- यह खबर भी पढ़ें… कनाडा में सैन्य अड्डे पर धमाका, 4 सैनिकों की मौत:रक्षा मंत्री बोले- ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा; यहां 1300 कर्मचारी तैनात थे कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में सैन्य अड्डे पर शनिवार को जोरदार धमाके के बाद आग लग गई। हादसे में 4 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि दर्जनों गंभीर रूप से घायल हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने रविवार को इसकी पुष्टि की। पूरी खबर पढ़ें…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में फेरबदल का मामला कई महीने से चर्चा में है। अब कहा जा रह है कि पहले परिसीमन का बिल पास होगा और उसके बाद ही फेरबदल होगी। परिसीमन बिल का अर्थ है कि एक साथ तीन बिल पास कराना है। उसमें सबसे अहम महिला आरक्षण कानून में संशोधन का बिल है, जिसके लिए दो तिहाई बहुमत की जरुरत है। सरकार और भाजपा के प्रबंधक संख्या जुटाने में लगे हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि संख्या जुटाने के अभियान में मंत्रिमंडल फेरबदल का इस्तेमाल होना है। नई पार्टियों और नए नेताओं को मंत्री बनाने का प्रलोभन दिया जा रहा है।
पार्टियों को सरकार में शामिल कराने के प्रयास चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि एक साथ कई प्रयास हो रहे हैं। एमके स्टालिन की पार्टी को एनडीए में लाने का प्रयास हो रहा है तो ममता बनर्जी की पार्टी से अलग होकर 20 सांसद जिस एनसीपीआई में गए हैं उसके विलय की बात हो रही है। अगल विलय नहीं होता है तो 17 सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं और बाकी तीन सरकार को बाहर से समर्थन देंगे।
भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद डीएमके से है। उसको लग रहा है कि कांग्रेस और उसके साथ ही जितनी सेकुलर पार्टियां हैं, जिनमें लेफ्ट पार्टियां भी शामिल हैं उनका टीवीके से स्थायी तालमेल हो गया। दूसरी ओर अन्ना डीएमके नीचे जा रही है। पिछले चुनाव में जीती उसकी दो सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उन दोनों सीटों पर अन्ना डीएमके तीसरे स्थान पर चली गई। ई पलानीस्वामी के असर वाले पश्चिमी तमिलनाडु के कोंगू क्षेत्र में अन्नाडीएमके तीसरे स्थान पर रही और डीएमके दूसरे स्थान पर आ गई। इससे लग रहा है कि अब अगले कुछ दिन डीएमके बनाम टीवीके मुकाबला होगा।
ऐसे में डीएमके को एनडीए में आने में समस्या नहीं है। अगर डीएमके एनडीए में आए तो 22 लोकसभा सांसदों के दम पर उसे कम से कम चार मंत्री पद देने होंगे। यह फैसला होने के बाद ही मंत्रिमंडल में फेरबदल का काम होगा। शरद पवार अपनी पार्टी के एनडीए में जाने की संभावना से इनकार कर रहे हैं। लेकिन भाजपा की ओर से प्रयास किया जा रहा है। अगर वे एनडीए में नहीं जाते हैं तो उनकी पार्टी भी टूट सकती है। उनमें से दो को मंत्री पद देने की बात है।
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे की शिव सेना के छह सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। इससे उसके सांसदों की संख्या 13 हो गई है। वह जनता दल यू से बड़ी पार्टी बन गई है। ऐसे में उसके नेता कम से कम दो मंत्री पद और मांग रहे हैं। एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे के मंत्री बनने की चर्चा है। इसी तरह एनसीपीआई में गए ममता बनर्जी की पार्टी के कम से कम तीन सांसदों को मंत्री बनाए जाने की खबर है। इस तरह जो मंत्री पद खाली हैं और जो खाली होने वाले हैं उनके दावेदार भाजपा से बाहर ज्यादा हैं। जनता दल यू ने भी एक मंत्री पद की मांग रखी है। पहले जदयू के सांसद हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उप सभापति थे। लेकिन अब वे मनोनीत सांसद हैं। इस वजह से जदयू की ओर से संजय झा के लिए एक मंत्री पद की दावेदारी रखी गई है। सो, डीएमके, एनसीपीआई, शिव सेना, जदयू जैसी सहयोगी पार्टियों की ओर से कम से कम 10 मंत्री पद की मांग है। अगर परिसीमन से पहले मंत्रिमंडल फेरबदल होगी तो जितने लोग संतुष्ट होंगे उससे ज्यादा लोग नाराज होंगे। इस समय सरकार एक भी सांसद की नाराजगी अफोर्ड करने की स्थिति में नहीं है।
KDA Kanpur Highway City Vistar 96 Plots: कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) अपना घर बनाने की चाह रखने वालों के लिए दशहरा के बाद बड़ा मौका लाने जा रहा है। प्राधिकरण अपनी लोकप्रिय हाईवे सिटी विस्तार योजना के तहत 96 आवासीय प्लॉटों की बिक्री प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। जो लोग कानपुर शहर में अपनी मनपसंद लोकेशन पर प्लॉट खरीदकर मकान बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक शानदार अवसर साबित होगा।
केडीए की ओर से शहर की अलग-अलग आवासीय योजनाओं में खाली पड़े भूखंडों को बिक्री के लिए चरणबद्ध तरीके से लाया जा रहा है। हाईवे सिटी विस्तार योजना के इन 96 भूखंडों के लिए आवेदन की तारीख, प्लॉटों का क्षेत्रफल, निर्धारित दरें और नियम-शर्तों की विस्तृत जानकारी जल्द ही प्राधिकरण की ओर से आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी।
केडीए सचिव अभय पांडेय ने बताया कि हाईवे सिटी विस्तार योजना के तहत 96 आवासीय भूखंडों की बिक्री की तैयारी अंतिम चरण में है। इच्छुक आवेदकों को मौका देने के लिए विभागीय प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
844 अन्य प्लॉटों की बिक्री से भी खुलेंगे नए विकल्प
हाईवे सिटी के अलावा, केडीए ने शहर की विभिन्न प्राइम लोकेशनों पर कुल 844 आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों की बिक्री की रूपरेखा तैयार की है।
किन-किन योजनाओं में मिलेंगे प्लॉट?
- जवाहरपुरम
- शताब्दी नगर
- हाईवे सिटी विस्तार
- अर्रा-बिनगवां एवं अन्य योजनाएं
इन योजनाओं में आम लोगों को रहने के लिए आवासीय प्लॉट मिलेंगे, वहीं कारोबारियों व निवेशकों के लिए कमर्शियल प्लॉट खरीदने के बेहतरीन विकल्प उपलब्ध होंगे।
ऑनलाइन आवेदन और ई-ऑक्शन पर रखें नजर
केडीए के इन प्लॉटों की बिक्री मुख्य रूप से ऑनलाइन माध्यम/ई-ऑक्शन के जरिए होगी। इच्छुक खरीदारों को केडीए की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाले नोटिफिकेशन पर नजर रखनी होगी।
जरूरी जानकारियां: नोटिफिकेशन में पंजीकरण शुल्क, प्लॉट का साइज, न्यूनतम बेस प्राइस और भुगतान की किस्तों की पूरी डिटेल दी जाएगी।
ई-ऑक्शन प्रक्रिया: जिन भूखंडों पर ई-ऑक्शन लागू होगा, वहां आवेदकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन बोली लगानी होगी।
रिपोर्ट- अखंड प्रताप सिंह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में लगातार रिक्तियां बढ़ती जा रही हैं। एक के बाद एक मंत्री पद खाली हो रहे हैं और उनकी जगह नई नियुक्ति नहीं हो रही है। लोकसभा की कुल संख्या के 15 फीसदी की सीमा के आधार पर केंद्र सरकार में कुल 81 मंत्री हो सकते हैं। इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित मंत्रियों की कुल संख्या 69 है। इनमें 29 कैबिनेट मंत्री हैं, पांच स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री हैं और 34 राज्यमंत्री हैं। यानी अभी 12 वैकेंसी है। इनकी जगह नए मंत्रियों की शपथ होनी है। वह कब होगी यह किसी को पता नहीं है। लेकिन जैसे जैसे वैकेंसी बढ़ती जा रही है वैसे वैसे मंत्री पद के दावेदारों की संख्या भी बढ़ रही है। भाजपा में भी हर दिन नए दावेदार सामने आ रहे हैं।
बहरहाल, मौजूदा 12 रिक्तियों के अलावा कई और पद खाली होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पंकज चौधरी के बारे में कहा जा रहा है कि किसी भी समय उनका इस्तीफा हो सकता है। वे प्रदेश अध्यक्ष के साथ साथ केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री भी हैं। इसी तरह दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा का भी इस्तीफा होना है। इन दोनों इस्तीफों के बाद 14 पद खाली हो जाएंगे। वैसे तो पीयूष गोयल भी केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि वे अभी कुछ दिन तक दोनों पदों पर बने रहेंगे।
बहरहाल, दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को राज्यसभा की टिकट नहीं मिली है। दोनों का कार्यकाल 25 नवंबर तक है। अगर मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद एल मुरुगन के इस्तीफे से खाली की हुई सीट पुरी को नहीं मिलती है तो इन दो मंत्रियों के इस्तीफे होंगे। इस तरह 16 पदों की वैकेंसी हो जाएगी। सो, अगर अब किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं हो तब भी 16 नए मंत्री बनाए जा सकेंगे। इस लिहाज से अगली फेरबदल बहुत बड़ी होनी है। कहा जा रहा है कि पूरी सरकार का स्वरूप बदल जाएगा।

कैबिनेट में फेरबदल को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर कई सहयोगी दलों का भी दबाव है। बिहार की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी जनता दल यू ने एक अतिरिक्त मंत्री पद के लिए दबाव बनाया है। उसके 12 लोकसभा और चार राज्यसभा सांसद हैं। 16 सांसद होने के बावजूद इसके डेढ़ मंत्री हैं। एक कैबिनेट मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और दूसरे राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर। पहले राज्यसभा के उप सभापति का पद पार्टी के पास था, जो अब नहीं है। सो, पार्टी एक कैबिनेट मंत्री का पद मांग रही है। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा इस पद के दावेदार हैं।
जदयू के अलावा बिहार की तीनों सहयोगी पार्टियों ने भी दबाव बनाया है। खास कर चिराग पासवान ने। चिराग लगातार सरकार के खिलाफ बयान दे रहे हैं। वे कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में भी बोल चुके हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि वे खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से खुश नहीं हैं और उनको कोई बड़ा मंत्रालय चाहिए। राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास कोई लोकसभा सीट नहीं है और उनके बेटे को राज्य सरकार में मंत्री बनाया गया है। लेकिन वे भी केंद्र में मंत्री पद चाहते हैं। झारखंड की सहयोगी पार्टी आजसू के इकलौते लोकसभा सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी भी केंद्र में मंत्री बनना चाहते हैं।

भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए को लोकसभा की एक एक सीट की चिंता है। इसलिए कई सांसदों के ऊपर अनुशानहीनता के आरोप लगने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। दूसरी बात यह है कि भाजपा की इस चिंता को लेकर चुनाव आयोग कितना संवेदनशील है वह भी दिखाई देता है। सोचें, पिछले दो साल से पश्चिम बंगाल की बशीरहाट लोकसभा सीट खाली है। इस साल मई में खाली हुई असम की नगांव सीट पर चुनाव आयोग ने उपचुनाव करा लिया है लेकिन बशीरहाट सीट खाली रखी गई है। इसका एकमात्र कारण यह है कि मुस्लिम बहुल इस सीट पर उपचुनाव हुआ तो भाजपा नहीं जीत पाएगी। कोई विपक्षी पार्टी ही जीतेगी। इसलिए आयोग चुनाव ही नहीं करा रहा है। इसके बावजूद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले कठघरे में खड़ा किए जा रहे हैं!
बहरहाल, बिहार में जनता दल यू के कई सांसद बागी हो गए हैं। कई तो नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री रहते ही पार्टी विरोधी काम में लग गए थे। बांका के सांसद गिरधारी यादव ने अपने बेटे को राजद की टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ाया था। संसद में सरकार की लाइन से अलग बोलते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की गई थी। लेकिन फिर रोक दिया गया। ऐसे ही भागलपुर के सासंद अजय मंडल अपने प्रतिद्वंद्वी शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के जदयू में आने और राज्य सरकार में मंत्री बन जाने से नाराज हैं और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। तीसरी सांसद लवली आनंद के पति आनंद मोहन लगातार पार्टी के खिलाफ लाइन पर चल रहे हैं। मधेपुरा के सांसद दिनेश चंद्र यादव भी पार्टी से उलट कामकाज कर रहे हैं। लेकिन किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है। क्योंकि इस समय एनडीए एक भी सांसद गंवाने की जोखिम नहीं ले सकता है।

भारतीय जनता पार्टी में अभी जो स्थिति है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि कोई भी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व को चुनौती नहीं दे सकता है। यह भी थोड़ी दूर की कौड़ी है कि मोदी और शाह में अनबन है, जिसकी वजह से कैबिनेट में फेरबदल का फैसला टल रहा है। लोग बड़े दावे से कह रहे हैं कि भाजपा में पहले कभी फैसला करने में इतना समय नहीं लगता था और न इतनी हिचक दिखती थी। हो सकता है कि मोदी और शाह में कुछ मुद्दों पर असमहति हो लेकिन दोनों में झगड़ा है, इस वजह से मंत्रिमंडल में फेरबदल नहीं हो रहा है या शाह के करीबी नेताओं की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो जाएगी यह थोड़ी दूर की कौड़ी दिख रही है। लेकिन राजनीति में कभी भी और कुछ भी संभव है।
इन अटकलों के बीच भाजपा के अंदर की खींचतान सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की आठ सीटों पर बिल्कुल नए और कई गुमनाम से चेहरे तय किए गए। इससे पार्टी के कई नेता नाराज हैं। दो बार सांसद रहे और उत्तर प्रदेश में भाजपा की बहुजन राजनीति का बड़ा चेहरा रहे धर्मेंद्र कश्यप ने नाराजगी में पार्टी छोड़ दी है। वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो रहे हैं। ऐसे ही पिछले दिनों ओडिशा के पार्टी के सांसद, पुराने नेता और केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने बिना नाम लिए पार्टी के कई नेताओं पर हमला किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ साजिश की जा रही है। लेकिन साथ यह भी कह दिया कि कितनी भी साजिश हो जाए वे सरकार नहीं छोड़ेंगे। सवाल है कि क्या उनसे सरकार छुड़ाने यानी इस्तीफा कराने का प्रयास हो रहा था?
इसी बीच केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन का इस्तीफा हो गया। कहा जा रहा है कि इस्तीफे के लिए कहा तो कई मंत्रियों को गया है लेकिन लोग इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। कई मंत्रियों ने कथित तौर पर कहा है कि अगर हटाना है तो प्रधानमंत्री खुद ही सरकार से हटा दें। अगर ऐसा है तो यह भाजपा की पिछले 12 साल की राजनीति में नई चीज है।
लगातार 2 कारोबारी सत्रों में बढ़त देखने के बाद भारतीय शेयर बाजारों में 19 अक्टूबर को महानवमी के मौके पर गिरावट है। सेंसेक्स बढ़त में खुला लेकिन फिर चंद पलों में पिछली क्लोजिंग से 538 अंक टूटकर 74,191.21 के लो तक गया। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 3.23 लाख करोड़ रुपये घट गया। इसी तरह निफ्टी भी बढ़त में खुलने के बाद पिछली क्लोजिंग से 175 अंक से ज्यादा टूटकर 22,970.50 के लो तक गया।
शुक्रवार को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,73,46,932.132 करोड़ रुपये रहा था। सोमवार को मार्केट खुलने के कुछ ही देर में यह 4,70,22,982.02 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 3,23,950.112 करोड़ रुपये की कमी।
शुक्रवार को कैसी रही थी चाल
आईटी कंपनियों के शेयरों में तगड़ी खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों से शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शेयर बाजारों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त देखी गई थी। सेंसेक्स 413.66 अंक या 0.56 प्रतिशत बढ़कर 74,729.27 पर बंद हुआ था। निफ्टी 148.80 अंक या 0.65 प्रतिशत बढ़कर 23,146.15 पर बंद हुआ था। बीते सप्ताह सेंसेक्स में 2,256.94 अंक या 3.11 प्रतिशत और निफ्टी में 625.7 अंक या 2.77 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
PM Viksit Bharat Rozgar Yojana PM VBRY: फॉर्मल सेक्टर में पहली बार नौकरी शुरू करने वाले युवाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत पहली बार नौकरी जॉइन करने वाले योग्य कर्मचारियों को ₹15,000 तक का इंसेंटिव दिया जा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के माध्यम से संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को फॉर्मल रोजगार से जोड़ना और ईपीएफ (EPF) सिस्टम में उनका स्वागत करना है।
वैसे यह ₹15,000 का इंसेंटिव सभी को एकमुश्त या खुद-ब-खुद नहीं मिलेगा। इसके लिए सरकार और ईपीएफओ ने कुछ जरूरी शर्तें, सैलरी सीमा और सर्विस पीरियड तय किया है।
कब से कब तक की नौकरियों पर मिलेगा फायदा?
यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सर्जित होने वाली नई नौकरियों पर लागू होगी। अगर कर्मचारी का मासिक ईपीएफ वेतन ₹1 लाख प्रति माह तक है, तो वह इस योजना के तहत योग्य माना जाएगा। इंसेंटिव की राशि कर्मचारी के 1 महीने के ईपीएफ वेज के बराबर (अधिकतम ₹15,000 की सीमा तक) होगी।
कौन है ₹15,000 इंसेंटिव के लिए योग्य?
PM-VBRY के ‘पार्ट-ए’ के तहत इंसेंटिव पाने के लिए कर्मचारी को पहली बार ईपीएफ सदस्य बनना अनिवार्य है। पात्रता की मुख्य शर्तें नीचे टेबल में दी गई हैं:
| पात्रता की शर्त | इसका क्या मतलब है? |
| पहली बार EPF मेंबरशिप | कर्मचारी 1 अगस्त 2025 से पहले कभी भी ईपीएफ का अंशदान करने वाला सदस्य (छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट समेत) नहीं होना चाहिए। |
| जॉइनिंग की तारीख | नौकरी में कार्यभार संभालने की तिथि 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच होनी चाहिए। |
| मासिक सैलरी | कर्मचारी का मासिक वेतन ₹1 लाख तक होना चाहिए (योजना की परिभाषा के अनुसार)। |
| सर्विस की अवधि | पहली किस्त के लिए 6 महीने और दूसरी किस्त के लिए 12 महीने की निरंतर सेवा आवश्यक है। |
| एंप्लॉयर कम्प्लायंस | जिस कंपनी/संस्था में काम कर रहे हैं, उसने ईपीएफओ में जरूरी रिपोर्टिंग और कंट्रीब्यूशन (ECR) दाखिल किया हो। |
कैसे मिलेगी ₹15,000 की रकम?
यह इंसेंटिव कर्मचारियों को सीधे दो किस्तों में दिया जाएगा:
| किस्त | जरूरी शर्त | अधिकतम राशि |
| पहला किस्त | निरंतर 6 महीने की योग्य सेवा पूरी होने पर | ₹7,500 |
| दूसरी किस्त | 12 महीने की सेवा और फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम पूरा करने पर | बाकी बची राशि (कुल ₹15,000 तक) |
ध्यान दें: इंसेंटिव की राशि योग्य सैलरी के आधार पर तय होगी, इसलिए हर किसी को फ्लैट ₹15,000 नहीं मिलेंगे। इसके अलावा, दूसरी किस्त तुरंत कैश में निकालने योग्य नहीं हो सकती है; गाइडलाइंस के मुताबिक इसे किसी उपयुक्त सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट या डिपॉजिट अकाउंट में तय समय के लिए रखा जा सकता है।
फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स क्यों है जरूरी?
दूसरी किस्त पाने के लिए फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम को पूरा करना अनिवार्य बनाया गया है। 6 महीने की नौकरी पूरी होने पर पहली किस्त मिल जाएगी, लेकिन पूरे ₹15,000 पाने के लिए कर्मचारी को 12 महीने की नौकरी के साथ-साथ इस कोर्स को भी पूरा करना होगा।
इसके लिए कर्मचारी PM-VBRY के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर पूरी गाइडेंस ले सकते हैं। पोर्टल पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जनरेट करने और यूएएन-आधार लिंकिंग से जुड़ी जानकारियां भी उपलब्ध हैं।
पैसा बैंक खाते में कैसे आएगा?
सरकार ने साफ किया है कि पार्ट-ए के तहत इंसेंटिव का भुगतान सीधे कर्मचारी के आधार-सीडेड बैंक अकाउंट (DBT) में आधार ब्रिज पेमेंट सिस्टम के जरिए किया जाएगा। इसलिए कर्मचारियों को अपने बैंक खाते और यूएएन को आधार से लिंक रखना जरूरी है।
एंप्लॉयर्स के लिए अलग लाभ
इस योजना में कंपनियों/नियुक्तियों के लिए भी अलग प्रावधान (‘पार्ट-बी’) है, जहां एंप्लॉयर को हर नए योग्य कर्मचारी पर ₹3,000 प्रति माह तक का इंसेंटिव मिल सकता है। इसे कर्मचारियों के ₹15,000 वाले व्यक्तिगत इंसेंटिव से जोड़कर न देखें।

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हाल ही में हुई ताबड़तोड़ फायरिंग के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गे अनिल पंडित ने इस जानलेवा हमले की जिम्मेदारी ली है। हैरान करने वाली बात यह है कि हरियाणा का रहने वाला यह गैंगस्टर इन दिनों अमेरिका के कैलिफोर्निया में बैठकर दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक एक्सटोर्शन सिंडिकेट ऑपरेट कर रहा है। ALSO READ: टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामला: अभिनेता के घर पहुंचे एकनाथ शिंदे, बोले- ’90 के दशक जैसा गैंगवार बर्दाश्त नहीं’
कौन है अनिल पंडित?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अनिल पंडित साल 2023 में अपने निजी पासपोर्ट पर भारत छोड़कर कनाडा गया था। इसके बाद वह कनाडा, थाईलैंड और दुबई के रास्ते गैंगस्टर रणदीप मलिक के संपर्क में आया, जो फिलहाल अमेरिका में है। आरोप है कि रणदीप की मदद से ही अनिल कैलिफोर्निया पहुंचा और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के ग्लोबल नेटवर्क से जुड़ गया। पिछले छह महीनों से वह विदेश में बैठकर भारत में लगातार आपराधिक वारदातों को अंजाम दिलवा रहा है।
फेसबुक पोस्ट और ऑडियो ने खोली पोल
टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के कुछ ही देर बाद सोशल मीडिया पर सनसनी फैल गई। अनिल पंडित ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर हमले की जिम्मेदारी ली, साथ ही एक ऑडियो भी जारी किया। इस वायरल ऑडियो में अनिल पंडित खुद को लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई बता रहा है। ऑडियो में वह कहते सुनाई दे रहा है— “मैं अनिल पंडित, लॉरेंस का छोटा भाई। आज जो मुंबई में टाइगर श्रॉफ पर हमला हुआ है, इसकी जिम्मेदारी मैं और मेरा बड़ा भाई हरमन संधू लेते हैं। इसको हमने समझाया था, लेकिन इसे बात समझ में नहीं आई।” ALSO READ: अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग, घटना का वाडियो आया सामने, मामले की जांच में जुटी पुलिस
अनिल पंडित कौन है? हरियाणा के पानीपत (गांव रैर कलां) का रहने वाला, उम्र लगभग 32 साल। 2023-2024 के आसपास विदेश (कनाडा/अमेरिका) चला गया और अब अमेरिका से बिश्नोई गैंग के लिए काम करने का दावा करता है। पहले जून 2026 में दिल्ली में पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा के जिम के बाहर फायरिंग की जिम्मेदारी भी ली थी। अन्य रंगदारी और फायरिंग केस से भी जोड़ा जाता है।
— Sudhakar Singh Rajput (@07VSR) October 18, 2026
बाबा सिद्दीकी मर्डर और दिलेर खरकिया केस में भी आया था नाम
गैंगस्टर अनिल पंडित का नाम इससे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों में आ चुका है। नेता बाबा सिद्दीकी मर्डर केस में भी उसका नाम शामिल बताया जाता है। इसके अलावा, कुछ ही दिन पहले हरियाणवी सिंगर दिलेर खरकिया की गाड़ी पर हुई फायरिंग के पीछे भी इसी गैंग का हाथ सामने आया था, तब भी फेसबुक पोस्ट के जरिए धमकी दी गई थी कि समझाने के बावजूद सिंगर ने बात नहीं मानी थी। 11 जून 2026 को दिल्ली के पश्चिम विहार में 24HS फिटनेस जिम के बाहर फायरिंग हुई। यह जिम गुरु रंधावा से जुड़ा बताया जाता है।
कौन है लॉरेंस बिश्नोई?
पंजाब के फाजिल्का जिले का रहने वाला लॉरेंस बिश्नोई भारत का एक कुख्यात गैंगस्टर है। फिलहाल वह गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। लॉरेंस बिश्नोई चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज और पंजाब विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति से अपराध की दुनिया में कदम रखा। जेल में बंद होने के बावजूद वह देश-विदेश में फैलाए गए अपने आपराधिक नेटवर्क को संचालित करता है। अमेरिका, कनाडा और यूरोप की एजेंसियों ने भी उसके सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई की है।
फिलहाल, इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां और मुंबई पुलिस पूरी तरह सतर्क हो चुकी हैं और मामले की गहराई से जांच की जा रही है।


