बैंक लोन के हर अप्लिकेशन को एप्रूव नहीं करते है। बीते कुछ सालों में बैंकों ने लोन एप्रूवल के नियमों को सख्त बनाया है। खासकर क्रेडिट स्कोर की शुरुआत के बाद से यह ट्रेंड बढ़ा है। लेकिन, यह जानना जरूरी है कि बैंक क्रेडिट स्कोर के अलावा भी कई चीजें देखने के बाद ग्राहक के लोन के अप्लिकेशन पर फैसला लेते हैं।
कई बार क्रेडिट स्कोर 750 से 800 के बीच होने पर भी होम लोन या कार लोन का अप्लिकेशन रिजेक्ट हो जाता है। ऐसे में ग्राहक को बड़ा झटका लगता है। आम तौर पर लोग यह मानकर चलते हैं कि अगर क्रेडिट स्कोर 750 या इससे ज्यादा है तो उनके लोन के अप्लिकेशन को बैंक तुरंत एप्रूव कर देगा।
सेव (Save) ग्रुप के को-फाउंडर और एमडी अजीत कुमार सिंह ने कहा कि अब पहले के मुकाबले बैंक और एनबीएफसी से लोन लेना काफी आसान हो गया है। लेकिन, अब ग्राहक की क्रेडिटवर्दीनेस पर फोकस बढ़ा है। क्रेडिटवर्दिनेस का मतलब सिर्फ क्रेडिट स्कोर से नहीं है। दोनों के बीच फर्क है। इसे समझना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बैंक और एनबीएफसी अब क्रेडिट स्कोर पर गौर करने के साथ ही कई दूसरी चीजों को भी देखते हैं। वे इस बात की जांच करते हैं कि ग्राहक ने पहले कितना लोन लिया हुआ है। उसने पहले लिए गए लोन में से कितना चुकाया है। क्या उसने कोई EMI नहीं चुकाई है। साथ ही अभी उसके ऊपर लोन का कितना पैसा बाकी है।
अगर आप चाहते हैं कि होम लोना या कार लोन का आपका अप्लिकेशन रिजेक्ट न हो तो आपको पहले अपने क्रेडिटवर्दिनेस को देखना चाहिए। इसके बाद अगर आपको लगता है कि आपका क्रेडिटवर्दिनेस स्ट्रॉन्ग है तो आप लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। फिर आपके लोन अप्लिकेशन के एप्रूव हो जाने की काफी ज्यादा संभावना होगी।
सिंह ने कहा कि इस बात का खास ध्यान रखने की जरूरत है कि अगर बैंक आपको ज्यादा लोन ऑफर कर रहा है तो आपको उसे एक्सेप्ट करने से पहले कई चीजों को देखना चाहिए। पहला, जरूरी खर्चों के बाद आप हर महीने कितनी EMI चुका सकते हैं। कई बार बैंक के ज्यादा लोन ऑफर करने पर हम पूरे अमाउंट का लोन ले लेते हैं। फिर हमें बाद में EMI चुकाने में दिक्कत आती है।
यह ध्यान में रखना जरूरी है कि एक भी EMI, क्रेडिट कार्ड बिल या किसी दूसरे बिल के पेमेंट पर डिफॉल्ट करने का आपका क्रेडिट स्कोर पर खराब असर पड़ता है। कई लोग यह सोचते हैं कि अगर बिल का अमाउंट कम है तो डिफॉल्ट का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन, ऐसा नहीं है। बिल का अमाउंट छोटा हो या बड़ा डिफॉल्ट का क्रेडिट स्कोर पर एक जैसा असर पड़ता है।

