दूसरे देश से रिमोटली काम कर रहे एक कर्मचारी से कहा गया कि वह 10 दिनों के भीतर अपने देश वापस आए और ऑफिस में रिपोर्ट करे। आखिरी समय में यात्रा करने का खर्च बहुत ज्यादा होने और पहले से बनी योजनाओं के बावजूद, कर्मचारी इस आदेश को मानने के लिए तैयार हो गया। लेकिन कर्मचारी के वहां पहुंचने के बाद हालात कुछ ऐसे हो गए, जिसकी उसने उम्मीद भी नहीं की थी।
कंपनी ने HR के साथ एक मीटिंग बुलाई और कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया। कर्मचारी का कहना है कि उसे इतनी दूर से क्यों बुलाया गया, जबकि यह मीटिंग ऑनलाइन भी हो सकती थी।
कंपनी ने उसे 10 दिनों के भीतर वापस आने को कहा था
रेडिट (Reddit) के ‘r/OfficePolitics’ सबरेडिट पर अपना अनुभव साझा करते हुए यूजर ने पोस्ट शेयर किया- “कंपनी ने मुझे ऑफिस से काम करने के लिए अपने देश वापस बुलाया और फिर मुझे नौकरी से निकाल दिया।”
कर्मचारी ने बताया कि कंपनी ने अचानक रिमोटली काम करने वाले कर्मचारियों से कहा कि उनके पास ऑफिस वापस आने के लिए सिर्फ 10 दिन हैं। वह अकेला ऐसा कर्मचारी था, जो दूसरे देश से काम कर रहा था। इसलिए इस आदेश का मतलब था कि उसे एक महंगी अंतरराष्ट्रीय यात्रा करनी पड़ेगी न कि कोई सामान्य आना-जाना।
“कंपनी ने अचानक रिमोटली काम करने वाले कर्मचारियों से कहा कि उनके पास ऑफिस आने के लिए सिर्फ 10 दिन हैं, इसलिए मुझे विदेश से वापस आने के लिए बहुत पैसे खर्च करने पड़े। मैं अकेला ऐसा कर्मचारी था जो दूसरे देश से काम कर रहा था, इसलिए मेरे लिए यह काम पर जाने जैसा कोई सामान्य सफर नहीं था।”
कर्मचारी ने बताया कि उसने पहले ही रहने की व्यवस्था कर ली थी और लगभग एक महीने बाद घर लौटने की योजना बनाई थी। जल्दी वापस आने का मतलब था कि उसे कम समय में दो बार यात्रा करनी पड़ती और आखिरी समय में फ्लाइट की टिकट भी बहुत महंगी पड़ती है।
The Company Made Me Return to My Home Country to Work from the Office, Then Fired Me
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“मैंने उन्हें ईमेल के जरिए यह सब समझाने की कोशिश की, लेकिन HR ने कहा कि मुझे डेडलाइन से पहले वहां पहुंचना होगा वरना मुझे इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे। काफी बातचीत और बहस के बाद मैंने हार मान ली, फ्लाइट बुक की और ऑफिस पहुंच गया।”
कंपनी ने पहुंचने के तुरंत बाद उसे निकाल दिया
कर्मचारी ने बताया कि कंपनी ने वहां पहुंचने के कुछ ही समय बाद HR के साथ एक मीटिंग रखी गई, जिसमें उसे बताया गया कि उसे नौकरी से निकाला जा रहा है। कंपनी ने इसके लिए पॉलिसी तोड़ने का हवाला दिया और लगभग दो साल पुरानी कुछ छोटी-मोटी बातों का जिक्र किया।
यूजर ने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा- “तो उन्होंने मुझे दुनिया के दूसरे कोने से यहां तक बुलाया सिर्फ इसलिए कि वे मुझे आमने-सामने बैठकर नौकरी से निकाल सकें। मुझे लगभग 10 हफ्तों की सैलरी के बराबर सेवरेंस (नौकरी छूटने पर मिलने वाली रकम) तो मिली, लेकिन वे इस परेशानी से बच सकते थे और मीटिंग रिमोटली (ऑनलाइन) भी कर सकते थे।”
रेडिट यूजर्स ने कंपनी के असली मकसद पर सवाल उठाए
इस पोस्ट पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ यूजर्स का मानना है कि ‘रिटर्न-टू-ऑफिस’ (ऑफिस लौटने) के आदेश का मकसद शायद कर्मचारी को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करना था। “वे तो पहले से ही आपको निकालने की योजना बना रहे थे। उन्हें बस यही उम्मीद थी कि अचानक आए RTO (ऑफिस लौटने) के आदेश से आप खुद ही इस्तीफा दे देंगे ताकि उन्हें आपको नौकरी से न निकालना पड़े।”
एक अन्य कमेंट करने वाले ने सवाल उठाया कि क्या कर्मचारी ने कंपनी के साथ हुई बातचीत की कुछ अहम बातें छिपा ली हैं। “ऐसा लग रहा है कि आपने ‘कई दौर की बातचीत’ की काफी सारी डिटेल्स छिपा ली हैं। उस दौरान आपने किसे नाराज कर दिया था?”
एक और यूजर ने ‘रिटर्न-टू-ऑफिस’ पॉलिसी पर एक अलग नजरिया पेश करते हुए लिखा- “इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है। जब कंपनियां RTO पॉलिसी बनाती हैं तो उनका मकसद कर्मचारियों को वापस ऑफिस बुलाना नहीं होता, बल्कि छंटनी से पहले उनसे खुद ही इस्तीफा दिलवाना होता है।”
कुछ यूजर्स ने यह भी सुझाव दिया कि कर्मचारी को कानूनी सलाह लेनी चाहिए। एक ने लिखा- “आपके पास कानूनी दावा करने का आधार हो सकता है। किसी रोजगार वकील से बात करें,” जबकि एक अन्य ने इस स्थिति को बेहद क्रूर बताया।
एक और कमेंट में यह बात सामने आई कि शायद कंपनी चाहती थी कि कर्मचारी अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ दे। “वे चाहते थे कि आप खुद नौकरी छोड़ दें ताकि उन्हें आपको ‘सेवरेंस’ (नौकरी छूटने पर मिलने वाली रकम) न देनी पड़े। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि आप सच में वापस आ जाएंगे।”

