Salman Khan: परेंट्स की शादी को लेकर सलमान खान ने किया बड़ा खुलासा, बोले- 5 साल तक सलीम खान से नहीं की थी बात

Salman Khan: बिग बॉस में कंटेस्टेंट्स से बात करते हुए सलमान खान अक्सर अपनी निजी जिंदगी के किस्से साझा करते हैं। हाल ही में उन्होंने बताया कि कैसे उनके नाना, उनके पिता और स्क्रीनराइटर सलीम खान से सालों तक बात नहीं करते थे, क्योंकि वे सलीम खान और सलमान की मां सलमा खान की शादी से नाराज थे।

सलमान ने सलीम खान से माफी मांगी

शो के एक एपिसोड के दौरान सलमान शो की ‘जीरो-टॉलरेंस’ पॉलिसी के बारे में बात कर रहे थे और बता रहे थे कि कैसे कंटेस्टेंट्स अक्सर अपने किए पर पछताते हैं। अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने अपने पिता से माफी मांगी है। उन्होंने पिता से कहा कि अगर कभी उन्होंने उन्हें निराश किया हो या कोई ऐसी बात कही हो जिससे उन्हें दुख पहुंचा हो तो वे उन्हें माफ कर दें।

‘इसमें कोई धार्मिक पहलू नहीं था’

सलमान ने अपने नाना का किस्सा सुनाया, जो सलमा और सलीम खान की शादी से नाराज थे। उन्होंने बताया कि उनके नाना को इस शादी से कोई धार्मिक ऐतराज नहीं था, बल्कि उन्हें इस बात की चिंता थी कि उनकी बेटी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े किसी व्यक्ति से शादी कर रही है।

उन्होंने कहा- “मैं आपको बता दूं कि जब मेरे माता-पिता की शादी हुई तो इसमें कोई धार्मिक पहलू नहीं था। सिर्फ मेरे नाना इसलिए नाराज थे, क्योंकि मेरी मां एक ऐसे हैंडसम आदमी से शादी कर रही थीं जो एक्टर बनना चाहता था। उन्हें बस इस बात से ऐतराज था कि वह फिल्म इंडस्ट्री के किसी इंसान से शादी कर रही हैं। मेरी मां के भाई-बहनों को इससे कोई दिक्कत नहीं थी। वे मेरे पिता को पसंद करते थे, लेकिन मेरे नाना को चिंता थी कि उनकी बेटी उस माहौल में कैसे रहेगी।”

सलमान के नाना ने 5 साल तक सलीम खान से बात नहीं की

सलमान ने आगे बताया- “उन्होंने मेरे पिता से पांच साल तक बात नहीं की। जब सोहेल का जन्म हुआ तो मेरे नाना माहिम से बांद्रा मिठाई लेकर आए। उन्हें इस बात का बहुत पछतावा था कि वे अपने नाती-पोतों को बड़े होते हुए नहीं देख पाए और इतने अच्छे इंसान से बात नहीं कर पाए, क्योंकि उनके मन में कुछ बातें थीं। यह पछतावा उनके आखिरी सांस तक रहा। एक-दो बार जब मम्मी-पापा के बीच झगड़ा हुआ और मम्मी अपने मायके चली गईं तो नाना ने उन्हें घर के अंदर नहीं आने दिया। उन्होंने कहा- ‘अपने घर वापस जाओ। तुम कभी भी आ सकती हो, लेकिन लड़-झगड़ कर यहां नहीं आ सकतीं।'”

सलीम खान और सलमा खान की लव स्टोरी

सलीम खान और सलमा खान की प्रेम कहानी तब शुरू हुई जब सलमा और सलीम एक-दूसरे के सामने वाले अपार्टमेंट में रहते थे। दोनों को प्यार हो गया और 1964 में उन्होंने शादी कर ली। शादी के बाद सुशीला ने ‘सलमा’ नाम अपना लिया। इस जोड़े के चार बच्चे हुए- सलमान, अरबाज, सोहेल खान और उनकी बेटी अलवीरा अग्निहोत्री।

Navratri Special : मां के हौसले से स्टार्टअप बना ‘Hostels Near Me’, यूपी सरकार ने दी आर्थिक मदद

Navratri Special : मां के हौसले से स्टार्टअप बना 'Hostels Near Me', यूपी सरकार ने दी आर्थिक मदद

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नवरात्र के पावन दिनों में जब घर-घर शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना हो रही है, तब झांसी की एक मां समाज को नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण दिखा रही हैं। बेटे की एक परेशानी को उन्होंने सिर्फ सुना ही नहीं, बल्कि उसे समाधान और फिर कारोबार की शक्ल दे दी। यह कहानी है अनुराधा मेहरोत्रा की, जो आज स्टार्टअप ‘हॉस्टल्स नियर मी’ की मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) हैं। इस स्टार्टअप को योगी सरकार की ‘स्टार्ट इन यूपी’ पहल के तहत 10 लाख की ग्रांट भी स्वीकृत हुई है।

 

एक परेशानी, जो बन गई प्रेरणा

कहानी की शुरुआत बेहद आम-सी समस्या से हुई। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान बेटे आर्यमन को रहने के लिए हॉस्टल तलाशने में खासी दिक्कत आई। यह हर साल हजारों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की भी परेशानी है। अनजान शहर, सीमित जानकारी और भरोसेमंद विकल्पों की कमी, इन सबके बीच सही ठिकाना तलाशना आसान नहीं होता। आर्यमन ने अपनी इस परेशानी और उसके समाधान का आइडिया मां अनुराधा के साथ साझा किया। यहीं मां ने वह भूमिका निभाई, जो हर बेटे को चाहिए। उन्होंने न आइडिया को हल्के में लिया और न बेटे के उत्साह को। मां-बेटे ने मिलकर इसे हकीकत में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया। यही विचार आगे चलकर ‘हॉस्टल्स नियर मी’ के रूप में सामने आया।

 

मां ने संभाली कमान, बनीं सीओओ

अनुराधा केवल प्रेरणा देने तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने स्टार्टअप में मुख्य परिचालन अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली और इसके संचालन व विकास में सक्रिय भूमिका निभाई। वह कहती हैं कि कॉलेज के दिनों में बेटे ने जो समस्या बताई, उसी से इस विचार का जन्म हुआ। आज वह एक तरफ बेटे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं, तो दूसरी तरफ कंपनी की रोजमर्रा की कमान भी संभाल रही हैं। एक मां के लिए अपने बच्चे का सहारा बनना स्वाभाविक है, लेकिन उस सहारे को कारोबारी नेतृत्व में बदल देना बड़ी बात है। नवरात्र में जिस शक्ति की उपासना की जाती है, वह यही है- परिवार को थामने वाली, और जरूरत पड़ने पर नई राह बनाने वाली।

 

इनक्यूबेशन सेंटर से ग्रांट तक का सफर

‘हॉस्टल्स नियर मी’ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के इनक्यूबेशन सेंटर में पंजीकृत है। कंपनी के रूप में इसका रजिस्ट्रेशन वर्ष 2024 में हुआ। यह प्लेटफॉर्म कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से हॉस्टल तलाशने में मदद करता है। अब हॉस्टल खोजने के लिए गली-गली भटकने या अधूरी जानकारी पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो रही है। वर्ष 2025 में ‘स्टार्ट इन यूपी’ के तहत इस स्टार्टअप के लिए 10 लाख की ग्रांट स्वीकृत हुई और इसकी पहली किस्त भी प्राप्त हो चुकी है। अनुराधा के मुताबिक प्रदेश सरकार की ओर से स्टार्टअप की सराहना की गई है, जो टीम के लिए बड़ा संबल है।

 

छह शहरों तक पहुंचा स्टार्टअप

आज यह प्लेटफॉर्म सिर्फ झांसी तक सीमित नहीं है। लखनऊ, जयपुर, ग्वालियर, इंदौर और मेरठ जैसे शहरों में भी विद्यार्थी हॉस्टल तलाशने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। एक छोटे शहर से शुरू हुआ विचार अब कई राज्यों के विद्यार्थियों के काम आ रहा है। फिलहाल यह सुविधा वेबसाइट के माध्यम से उपलब्ध है। ग्रांट मिलने के बाद स्टार्टअप में नए फीचर जोड़ने की तैयारी है। आने वाले समय में इसे मोबाइल ऐप के रूप में भी उपलब्ध कराने की योजना है। 

 

नवरात्र का संदेश भी यही है कि शक्ति केवल पूजा की चीज नहीं, जीने और करने का तरीका है। झांसी की इस मां ने दिखा दिया कि जब महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व संभालती हैं, तो घर के साथ-साथ समाज और अर्थव्यवस्था भी आगे बढ़ती है। ‘हॉस्टल्स नियर मी’ की यह यात्रा अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन एक मां की हिम्मत और बेटे के आइडिया ने जो नींव रखी है, वह आने वाले समय में कई और परिवारों को प्रेरित करेगी।

AI में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम, जानिए भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा कितना असर

अमेरिका में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में आई बड़ी गिरावट ने कई एशियाई शेयर बाजारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिका में सेमीकंडक्टर्स शेयरों में लगातार 8 सत्रों में बिकवाली देखने को मिली। यह 2008 के बाद बिकवाली का सबसे लंबा सिलसिला था। इसका असर नैस्डेक 100 पर भी पड़ा। अप्रैल 2005 के बाद इसमें सबसे बड़ी गिरावट आई।

आईआई शेयरों की बदौलत अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी

पिछले 1.5-2 सालों में अमेरिका में एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इस सेक्टर को चिप और दूसरे हार्डवेयर सप्लाई करने वाली एशियाई कंपनियों के शेयरों में भी खूब तेजी आई है। इनमें दक्षिण कोरिया और ताइवान की कई कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका में एआई बूम जारी रखने के लिए नए निवेश की जरूरत है। पहले ही इस सेक्टर में काफी ज्यादा निवेश हो चुका है।

एआई में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम

अगर अमेरिका में एआई में निवेश की रफ्तार सुस्त पड़ती है तो इसका असर इस सेक्टर से जुड़ी एशियाई कंपनियों पर भी पड़ेगा। इसका संकेत दिखने लगा है। नियोक्लाउड ऑफर करने वाली कंपनी CoreWeave के बॉन्ड्स की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इससे इस सेक्टर पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है। इनवेस्टर्स सवाल पूछ रहे है कि एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों ने जो निवेश किया है, क्या उसका रिटर्न मिलने जा रहा है? क्या AI की डिमांड इतनी है, जिससे इन कंपनियों के रेवेन्यू को सपोर्ट मिलेगा?

इंटरेस्ट रेट बढ़ने से एआई कंपनियों के लिए बढ़ रही इनवेस्टमेंट कॉस्ट

CoreWeave के शेयरों में 16 अक्तूबर को 12 फीसदी गिरावट आई। क्रूड की बढ़ती कीमतों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों के लिए चिंता और बढ़ा दी है। क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ रही है, जिससे काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट्स बढ़ा रहे हैं। इससे इससे एआई कंपनियों के लिए नए निवेश की लागत भी बढ़ रही है। पिछले महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ा चुका है। अब नजरें इस महीने की फेड की पॉलिसी पर लगी हैं।

ताइवान और दक्षिण कोरिया की चिप कंपनियों को हो सकती है दिक्कत

ताइवान की TSMC, दक्षिण कोरिया की SK Hynix और Samsung Electronics जैसी कंपनियां AI कंप्यूटिंग के लिए जरूरी चिप और मेमोरी की सप्लाई करती हैं। इन कंपनियों की कमाई एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले इनवेस्टमेंटम पर निर्भर है। अगर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश घटता है तो इन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। Gartner ने चेतावनी दी है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 3.5 ट्रिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट को 2030 तक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टमेंट के अनुपात में रेवेन्यू नहीं दिख रहा।

कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में 236% तक उछाल

Union Bancaire Privee में मैनेजिंग डायरेक्टर वी-सेर्न लिंग ने कहा, “अगर हायरपरस्केलर्स और नियोक्लाउड्स को निवेश जारी रखने के लिए फंड नहीं मिलता है तो इसका असर टीएसएमसी, सैमसंग और SK Hynix जैसी एशियाई कंपनियों पर पड़ेगा। उन्हें मिलने वाले ऑर्डर्स घट जाएंगे।” इस साल MSCI Asia-Pacific Index की सबसे ज्यादा चढ़ने वाली 10 कंपनियों से 8 कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियां हैं। इनमें से हर कंपनी का शेयर कम से कम 236 फीसदी चढ़ा है।

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भारतीय बाजार पर इस वजह से नहीं पड़ेगा असर 

जहां तक भारत की बात है तो इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत में एआई और सेमीकंडक्टर्स बनाने वाली कंपनियां नहीं हैं। यहीं वजह है कि पिछले 1-2 सालों में जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों में तेजी आई तब भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। यहां तक की एआई बूम का निगेटिव असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा है। अब जब एआई और चिप शेयर गिर रहे हैं तो भारतीय आईटी शेयरों में तेजी दिख रही है।

 

Kolkata Stampede Update: ‘कभी कभी हो जाता है…’; कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ पर बोले बंगाल के मंत्री दिलीप घोष, अब तक 19 लोगों की मौत

Kolkata Stampede Update: पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने रविवार (18 अक्टूबर) को दुर्गा पूजा समितियों से पंडालों में लोगों के आने-जाने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने और भगदड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। उनकी यह टिप्पणी उत्तरी कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार (17 अक्टूबर) शाम बारिश के बीच अचानक भीड़ बढ़ने से मची भगदड़ के बाद आई है। इस भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई और 25 अन्य घायल हो गए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री घोष ने पत्रकारों से कहा कि संभवतः अचानक अत्यधिक भीड़ बढ़ जाने के कारण भगदड़ मची।

‘कभी कभी हो जाता है’

घोष ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “जो घटना हुआ है, दुर्भाग्यपूर्ण है, बहुत दुखदाई है। और कभी-कभी हो जाता है। सालों साल पूजा होता है, इतने सारे बड़े-बड़े पूजा है, लाखों लोग दर्शन करते हैं एक-एक पूजा में…। लेकिन कभी-कभी थोड़ा सा लापरवाही के कारण इस प्रकार घटना हो जाता है, जो नहीं होना चाहिए। और हमारे देश में कई जगह धार्मिक स्थानों पर इस प्रकार बहुत बड़ी भीड़ जहां होती है, कभी ना कभी घटना घट जाती है। इसलिए आयोजकों को और ज्यादा सावधानी बरतना चाहिए।”

मंत्री ने आगे कहा, “सरकार की तरफ से माननीय मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव, माननीय हमारे राष्ट्रीय पार्टी प्रेसिडेंट और सारे मंत्री-नेता भी वहां पहुंचे हैं। और पूरी व्यवस्था है जो घायलों का चिकित्सा के लिए। लेकिन जिनके साथ इस प्रकार घटना हो गया, चले गए, उनका परिवार को भी बहुत बड़ा कष्ट और दुख हुआ है।”

कैसे मची भगदड़?

कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि महासप्तमी के उत्सव के दौरान अचानक तेज बारिश के बाद भीड़ का उचित मैनेजमेंट नहीं किए जाने और भ्रामक घोषणाओं के कारण लोगों में घबराहट फैल गई होगी। इससे उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ मच गई। अधिकारी ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ-साथ स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से संकेत मिलता है कि शनिवार शाम पंडाल में भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, जिससे यह घटना हुई।

पुलिस ने यह भी पाया कि आयोजन स्थल पर तैनात पुलिसकर्मियों और निजी सुरक्षा गार्डों की संख्या पर्याप्त नहीं थी, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। पुलिस अधिकारी ने पीटीआई से कहा, “हमने पर्याप्त साक्ष्य जुटाए हैं जिसमें आयोजकों की गंभीर लापरवाही और कुप्रबंधन के संकेत हैं। बड़ी संख्या में आने वाले लोगों को संभालने की कोई स्पष्ट योजना नहीं थी और सारी व्यवस्था मौखिक निर्देशों के आधार पर चल रही थी। हमने सीसीटीवी फुटेज जुटाए हैं, स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए हैं तथा विभिन्न जानकारियों की पुष्टि की है। सुरक्षा कर्मियों की संख्या भी अपर्याप्त थी।”

उन्होंने कहा, “कुप्रबंधन के कारण भगदड़ के दौरान लोगों ने एंट्री गेट से ही बाहर निकलने की कोशिश की। दोनों गेट और वहां तक पहुंचने वाली सड़क संकरी थी, जिससे हादसा हुआ।” उन्होंने कहा कि एंट्री-एग्जिट और भीड़ की आवाजाही को लेकर पर्याप्त घोषणाएं नहीं की गई थीं, जिससे भीड़ के दबाव के बीच लोग भ्रमित हो गए। अधिकारी ने कहा, “हमारे पास एक घोषणा का वीडियो है, जिसमें लोगों से यह कहते हुए पंडाल खाली करने को कहा गया था कि उसकी संरचना ढहने वाली है। हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह घोषणा किसने की थी और इसके पीछे क्या वजह थी।”

पंडाल में पुलिस की अपर्याप्त तैनाती का आरोप

स्थानीय लोगों ने भी पंडाल में पुलिस की अपर्याप्त तैनाती का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पुलिसकर्मी मुख्य रूप से VIP एंट्री गेट के पास तैनात थे। अधिकारी ने बताया कि फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम ने शनिवार रात पंडाल का दौरा किया और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी ने बताया कि कोलकाता पुलिस जांच के तहत हादसे में बच गए लोगों से भी पूछताछ करने की योजना बना रही है।

इस बीच, कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने रविवार सुबह उत्तर कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल से सटी सड़कों पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू कर दी। यह आदेश बहुबाजार थाने के अधिकार क्षेत्र में आने वाले पंडाल के आसपास की सड़कों पर लोगों के जमावड़े पर रोक लगाता है। ये प्रतिबंध 20 अक्टूबर तक लागू रहेंगे। शनिवार शाम बारिश के बीच अचानक भीड़ बढ़ने के कारण पंडाल में भगदड़ मच गई थी।

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UP News: यूपी में महिलाओं को ₹3,000 की जगह अब ₹12,000 मानदेय, 1.20 करोड़ महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

UP News: यूपी में महिलाओं को ₹3,000 की जगह अब ₹12,000 मानदेय, 1.20 करोड़ महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

CM Yogi Janta Darshan

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी के स्वरूप की पूजा की। उन्होंने मां महागौरी को शांति, पवित्रता और करुणा की प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने रविवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा कि मां महागौरी की आराधना हमें स्मरण कराती है कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब हर मां स्वस्थ और सुरक्षित हो, हर बेटी को पोषण एवं बेहतर भविष्य मिले तथा प्रत्येक नारी सम्मान के साथ आत्मनिर्भर होकर जीवन यापन कर सके। अब सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि से नारीशक्ति का जीवन आलोकित हो रहा है। 

 

नारीशक्ति को बनाया प्रगति का सक्रिय भागीदार

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने नारीशक्ति को प्रदेश की प्रगति का सक्रिय भागीदार बनाते हुए सुरक्षा, सम्मान, पोषण, शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन के अवसरों का विस्तार किया है।

 

आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग किया प्रशस्त 

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले सरकार की नाकामी पर भी प्रहार किया। कहा कि उस समय जहां प्रदेश में बच्चों के पोषण से जुड़ी व्यवस्था माफिया के शिकंजे में दम तोड़ रही थी, वहीं प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद हमने टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपकर व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की और नारीशक्ति के आर्थिक स्वावलंबन का मार्ग प्रशस्त किया। इस पहल ने प्रदेश में पोषण सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ ही कुपोषण के विरुद्ध लड़ाई को अधिक प्रभावी बनाया।

 

आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाया 

सीएम ने बताया कि हमने बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की आधारशिला रखने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय में वृद्धि कर इसे ₹3,000 से बढ़ाकर ₹12,000 प्रतिमाह किया है। साथ ही, स्वास्थ्य बीमा का लाभ देकर उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक कल्याण को भी संबल प्रदान किया जा रहा है।

 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहीं 4 लाख से अधिक महिलाएं

मुख्यमंत्री ने लिखा कि आज प्रदेश में बलिनी, सामर्थ्य, काशी, बाबा गोरखनाथ और सृजनी जैसी दुग्ध उत्पादक कंपनियों से जुड़कर 31 जनपदों की 4 लाख से अधिक महिलाएं दुग्ध उत्पादन को आय, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं। प्रत्येक ग्राम पंचायत में बीसी सखी पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

सशक्त नारी, समृद्ध उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री ने बताया कि आज प्रदेश में 1 करोड़ 20 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिख रही हैं। लखपति दीदी पहल के माध्यम से महिलाएं अपनी मेहनत और हुनर को नियमित आय एवं आर्थिक समृद्धि में बदलकर अपने परिवार की खुशहाली सुनिश्चित कर रही हैं। मां महागौरी की कृपा से प्रदेश में आज नारीशक्ति का जीवन सुरक्षा, सम्मान, सामर्थ्य और समृद्धि से आलोकित हो रहा है।

आपके PF के पैसे का क्या होता है? जानिए EPFO कहां इन्वेस्ट करता है और कैसे तय होता है ब्याज

Where EPFO invests PF money: नौकरीपेशा लोगों की सैलरी से हर महीने प्रोविडेंट फंड (PF) के नाम पर जो कटौती होती है, उसे हम भविष्य की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार मानते हैं। जितनी रकम आपकी सैलरी से कटती है, उतना ही योगदान आपकी कंपनी भी आपके खाते में जमा करती है।

लेकिन क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि आपकी तिजोरी में जमा होने वाले करोड़ों-अरबों रुपये आखिर कहां जाते हैं? क्या यह पैसा किसी बैंक में रखा रहता है या कहीं और निवेश होता है? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) आपके इस पैसे को सुरक्षित रखने और उस पर शानदार रिटर्न (जैसे हालिया 8.25% ब्याज) देने के लिए क्या रणनीति अपनाता है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

EPFO आपके पैसे का क्या करता है?

EPFO कोई साधारण बैंक नहीं है, बल्कि भारत के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन काम करने वाला एक बड़ा वैधानिक निकाय है। कर्मचारियों के इस विशाल फंड के प्रबंधन की जिम्मेदारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) के पास होती है। बोर्ड के तय नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत इस पैसे को देश के अलग-अलग वित्तीय और सरकारी साधनों में निवेश किया जाता है। इस निवेश से होने वाली कमाई से ही आपके पीएफ खाते में हर साल ब्याज का पैसा भेजा जाता है।

कहां-कहां होता है पीएफ का निवेश?

सरकार के तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ईपीएफओ निवेशकों के पैसे की सुरक्षा और बेहतर रिटर्न के बीच संतुलन बनाने के लिए फंड को दो मुख्य हिस्सों में बांटता है:

  1. सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स: लगभग 85% तक
  2. इक्विटी यानी शेयर बाजार (Equity – ETFs): 15% तक

पोर्टफोलियो श्रेणी संभावित आवंटन % मुख्य साधन
सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs)45% – 65% केंद्र सरकार के बॉन्ड्स, स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs)
कॉरपोरेट बॉन्ड्स व डेट20% – 45%PSUs, सरकारी वित्तीय संस्थानों व सुरक्षित कॉरपोरेट बॉन्ड्स
इक्विटी (शेयर बाजार) 5% – 15%केवल इंडेक्स आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs – Nifty 50, Sensex)
शॉर्ट-टर्म डेट/मनी मार्केट0% – 5% लिक्विडिटी और तात्कालिक नकदी प्रबंधन के लिए ट्राइ-पार्टी रेपो (TREPS)

85% पैसा जाता है पूरी तरह सुरक्षित सरकारी डेट में

ईपीएफओ अपने पास आने वाले कुल फंड का करीब 85 हिस्सा ऐसी जगहों पर लगाता है जहां डूबने का जोखिम न के बराबर होता है:

सरकारी बॉन्ड्स और स्टेट डेवलपमेंट लोन: ईपीएफओ का एक बहुत बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों की विकास योजनाओं के बॉन्ड्स में लगा होता है। इससे देश का बुनियादी ढांचा (सड़कें, बिजली, रेलवे) मजबूत होता है और पीएफ के लिए तयशुदा रिटर्न सुनिश्चित होता है।

PSU के कॉरपोरेट बॉन्ड्स: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और अन्य महारत्न कंपनियों के सुरक्षित डेट सिक्योरिटीज में भी यह पैसा निवेश किया जाता है।

15% हिस्सा शेयर बाजार में: क्या आपका पैसा जोखिम में है?

साल 2015 से पहले ईपीएफओ शेयर बाजार में निवेश नहीं करता था। लेकिन कम ब्याज दरों की चुनौती से निपटने और रिटर्न बढ़ाने के लिए सरकार ने अगस्त 2015 से इक्विटी में 5% से 15% तक निवेश करने की अनुमति दी।

सीधे शेयरों की खरीद नहीं: ईपीएफओ कभी भी किसी कंपनी विशेष के शेयर सीधे बाजार से नहीं खरीदता।

केवल इंडेक्स ETFs का सहारा: यह निवेश केवल BSE Sensex और NSE Nifty-50 जैसे शीर्ष सूचकांकों को ट्रैक करने वाले ETFs के जरिए किया जाता है, जिससे जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

ईपीएफओ कैसे तय करता है आपका सालाना ब्याज?

वित्तीय वर्ष के दौरान डेट बॉन्ड्स से मिलने वाला तय ब्याज और इक्विटी (ETFs) की बिक्री से हुआ मुनाफा जोड़ा जाता है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) सभी आंकड़ों का विश्लेषण कर ब्याज दर का प्रस्ताव तैयार करता है। वित्त मंत्रालय की मुहर लगने के बाद तय ब्याज दर कर्मचारियों के पीएफ खातों में क्रेडिट कर दी जाती है।

Mission Shakti 6.0: यूपी पुलिस का कमाल, 7 दिन में 5 राज्यों से खोज निकाले ₹32 लाख के 120 गुम मोबाइल

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योगी सरकार के मिशन शक्ति 6.0 अभियान के पहले ही सप्ताह में उत्तर प्रदेश पुलिस ने तकनीक आधारित पुलिसिंग और जनशिकायतों के निस्तारण में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इसी क्रम में कासगंज पुलिस ने महज सात दिनों के भीतर करीब 32 लाख रुपये कीमत के गुम मोबाइल फोन बरामद कर 120 लोगों को बड़ी राहत पहुंचाई है। खास बात यह है कि इन मोबाइलों की तलाश केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही।

पुलिस ने तकनीकी संसाधनों की मदद से मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक गुम मोबाइलों का पता लगाया और उन्हें बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सौंप दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पुलिसिंग को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और आमजन की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में कासगंज पुलिस की यह उपलब्धि मिशन शक्ति 6.0 के शुरुआती सप्ताह की महत्वपूर्ण सफलता बनकर सामने आई है।

 

सात दिन में 32 लाख के मोबाइल बरामद, दूसरे राज्यों तक पहुंची पुलिस

 

मिशन शक्ति 6.0 की शुरुआत 11 अक्टूबर को हुई थी। अभियान के पहले सप्ताह में कासगंज पुलिस ने गुम मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाया। पुलिस ने प्राप्त शिकायतों के आधार पर तकनीकी माध्यमों से मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस करनी शुरू की। इस दौरान कई मोबाइल फोन की लोकेशन उत्तर प्रदेश से बाहर मिली। इसके बाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा तक संपर्क एवं समन्वय स्थापित किया। तकनीकी सहायता से मोबाइल फोन का पता लगाकर उन्हें बरामद किया गया। सात दिनों के भीतर करीब 32 लाख रुपये कीमत के मोबाइल बरामद कर 120 लोगों को वापस सौंपे गए।

 

मोबाइल के साथ वापस मिली लोगों की ‘डिजिटल दुनिया’

 

आज मोबाइल फोन केवल बातचीत का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति की पूरी डिजिटल दुनिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग, यूपीआई भुगतान, जरूरी दस्तावेज, कारोबार से जुड़ी जानकारियां, पारिवारिक तस्वीरें और महत्वपूर्ण संपर्क मोबाइल में ही सुरक्षित रहते हैं। ऐसे में फोन खोने पर व्यक्ति को केवल आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि उसकी रोजमर्रा की कई जरूरी गतिविधियां भी प्रभावित हो जाती हैं। कासगंज पुलिस की कार्रवाई से ऐसे ही 120 लोगों को राहत मिली। जिन लोगों को अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद कम रह गई थी, उनके हाथों में दोबारा फोन पहुंचने से उनके चेहरे खिल उठे। पुलिस की इस पहल ने आमजन के बीच भरोसे को भी मजबूत किया है।

 

शिकायत दर्ज करने से लेकर मोबाइल लौटाने तक पुलिस ने की कार्रवाई

 

कासगंज के पुलिस अधीक्षक ओपी सिंह ने बताया कि गुम मोबाइलों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तकनीकी संसाधनों के माध्यम से उनकी तलाश शुरू की। मोबाइल फोन ट्रेस होने के बाद उनकी बरामदगी सुनिश्चित की गई। इसके बाद स्वामित्व और पहचान का सत्यापन कर संबंधित व्यक्तियों को मोबाइल सौंप दिए गए। उन्होंने बताया कि अभियान में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिले। इसी उद्देश्य से पुलिस टीमों ने दूसरे राज्यों तक संपर्क स्थापित कर गुम मोबाइलों की बरामदगी सुनिश्चित की।

 

योगी सरकार में तकनीक आधारित पुलिसिंग को मिल रहा बढ़ावा

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के थानों में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था के माध्यम से साइबर अपराध और डिजिटल माध्यमों से जुड़ी शिकायतों में लोगों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन बैंकिंग और मोबाइल आधारित सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच तकनीकी संसाधनों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। कासगंज पुलिस की यह कार्रवाई इसका उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल केवल साइबर अपराधियों की पहचान और कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियों को दूर करने में भी उपयोगी साबित हो रहा है।

 

मिशन शक्ति 6.0 में जनसेवा और जवाबदेही का संदेश

 

मिशन शक्ति 6.0 के पहले सप्ताह में कासगंज पुलिस की इस उपलब्धि का महत्व केवल 32 लाख रुपये के मोबाइल फोन बरामद करने तक सीमित नहीं है। इससे 120 लोगों को उनकी महत्वपूर्ण डिजिटल जानकारियों और संपर्कों तक दोबारा पहुंच मिली है। साथ ही यह संदेश भी गया है कि गुम मोबाइल की शिकायत पर पुलिस तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए दूसरे राज्यों तक भी तलाश कर सकती है। योगी सरकार के अभियान के शुरुआती सप्ताह में सामने आई यह उपलब्धि पुलिस की सक्रियता, तकनीकी दक्षता और शिकायतों के बेहतर निस्तारण का उदाहरण है। मोबाइल की बरामदगी से जहां लोगों को उनकी खोई हुई डिजिटल दुनिया वापस मिली, वहीं पुलिस के प्रति उनका विश्वास भी मजबूत हुआ है। 

Durga Puja Pandal Stampede : माइक से पंडाल गिरने की चेतावनी के बाद मची भगदड़, 19 लोगों की मौत, 25 घायल, सामने आया घटना का वीडियो

Durga Puja Pandal Stampede : माइक से पंडाल गिरने की चेतावनी के बाद मची भगदड़, 19 लोगों की मौत, 25 घायल, सामने आया घटना का वीडियो

Kolkata Durga Pandal Stampede

उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार शाम हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, पंडाल के गिरने का खतरा बताने वाली माइक पर की गई घोषणा से लोगों में दहशत फैल गई होगी, जिसके कारण भगदड़ मचने की आशंका है।
 

पुलिस ने रविवार को बताया कि इस घोषणा का एक वीडियो सामने आया है, जिसकी जांच कोलकाता पुलिस कर रही है। वीडियो में माइक पर लोगों को चेतावनी देते हुए कहा जा रहा है कि पंडाल की हालत बेहद खराब है और वह गिर सकता है। घोषणा में लोगों से वहां से निकलने की अपील भी की गई थी।

माइक पर किसने दी पंडाल गिरने की चेतावनी?

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि माइक पर यह घोषणा किसने की थी और इसके पीछे क्या वजह थी। जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या इस चेतावनी के कारण श्रद्धालुओं के बीच घबराहट फैली और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई। पुलिस के अनुसार, घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है, ताकि हादसे के कारणों का पता लगाया जा सके।
 

आयोजकों की लापरवाही पर उठे सवाल

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस त्रासदी के लिए कथित तौर पर आयोजकों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया और मामले की जांच कराने की बात कही। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि पूजा समिति की ओर से माइक पर की गई घोषणा के कारण भीड़ में धक्का-मुक्की बढ़ी होगी और भगदड़ मच गई होगी। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पंडाल में भगदड़ किन परिस्थितियों में मची और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

अमेरिका में चुनावी प्रचार में AI का इस्तेमाल बढ़ा:न्यूयॉर्क के मेयर को महंगाई की दवा बेचते, डेमोक्रेट उम्मीदवार को 9/11 पर हंसते दिखाया

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राजनीतिक प्रचार में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। उम्मीदवारों और राजनीतिक संगठनों ने AI से बने विज्ञापनों के प्रचार पर करीब 1300 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। एक विज्ञापन में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और गवर्नर कैथी होकुल को महंगाई और अपराध का डर दूर करने वाली दवा बेचते दिखाया गया। एक दूसरे विज्ञापन में मिशिगन के डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार डॉ. अब्दुल एल-सय्यद का AI से बना वीडियो दिखाया गया। इसमें वे ‘डेथ टू अमेरिका’ और ‘9/11 हमले का जश्न मनाओ’ लिखे कार्ड देखकर हंसते नजर आए। 80% AI विज्ञापन ट्रम्प की पार्टी ही बना रही अमेरिका की वेस्लेयन यूनिवर्सिटी की जांच में 220 से ज्यादा ऐसे वीडियो की पहचान हुई है जिनमें AI का इस्तेमाल किया गया था। वेस्लेयन मीडिया प्रोजेक्ट की प्रोफेसर एरिका फ्रैंकलिन फाउलर ने कहा, कई विज्ञापनों में AI का इस्तेमाल इतनी सफाई से किया गया कि बिना किसी जानकारी के यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि वीडियो में AI का इस्तेमाल हुआ है। इसका मकसद- विरोधियों को बदनाम करना AI से बनाए गए कुछ विज्ञापनों में राजनीतिक विरोधियों को ऐसे नेताओं के साथ दिखाया गया, जिनसे जुड़ने पर मतदाताओं के बीच विवाद हो सकता है। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन और अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज जैसे नेता शामिल हैं। ओक्लाहोमा में ‘मेक ओक्लाहोमा ग्रेट अगेन’ नाम के एक समूह ने डेमोक्रेटिक गवर्नर उम्मीदवार को हिलेरी क्लिंटन के साथ गले मिलते दिखाया। वीडियो में दोनों को हाथ पकड़े हुए दिखाया गया, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प किनारे उदास खड़े नजर आए। स्क्रीन पर लिखा था, ‘क्लिंटन का समर्थक, ट्रम्प का विरोधी।’ चुनवी रैलियों में भीड़ के लिए भी AI का इस्तेमाल AI का इस्तेमाल चुनावी रैलियों में ज्यादा भीड़ दिखाने के लिए भी किया जा रहा है। वहीं, फ्लोरिडा के गवर्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार जेम्स फिशबैक के एक विज्ञापन में उन्हें डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर और ईरान के नेताओं के साथ पार्टी करते दिखाया गया। वीडियो में ईरानी नेताओं को तलवारों से यहूदी धर्म के प्रतीक ‘स्टार ऑफ डेविड’ पर हमला करते दिखाया गया। राजनीतिक विज्ञापनों में AI का इस्तेमाल केवल नकली घटनाएं बनाने तक सीमित नहीं है। ओक्लाहोमा के रिपब्लिकन उम्मीदवार चिप कीटन के एक विज्ञापन की शुरुआत में उनकी पुरानी असली तस्वीर दिखाई गई। यह तस्वीर उस समय की थी, जब वे ओक्लाहोमा में पुलिस अधिकारी थे। AI की मदद से तस्वीर में उनका सिर ऊपर उठता और चेहरे पर बड़ी मुस्कान आती दिखाई गई। AI से 19 करोड़ में बनने वाले विज्ञापन 1 करोड़ में बन रहे हॉलीवुड की विज्ञापन कंपनी स्ट्रैटेजिक परसेप्शन के संस्थापक फ्रेड एन. डेविसे मुताबिक, AI विज्ञापन बनाने की लागत काफी कम कर रहा है। उन्होंने एक विज्ञापन का उदाहरण देते हुए बताया कि इसे पारंपरिक तरीके से बनाने पर करीब लगभग 19 करोड़ रुपए खर्च होते। इसमें कलाकारों, कपड़ों की व्यवस्था, खाने-पीने और कैमरा-लाइटिंग के साथ पूरे दिन की शूटिंग की जरूरत पड़ती। लेकिन AI की मदद से वही दृश्य तैयार करने पर खर्च करीब 1.8 करोड़ रुपए रह गया है। अब AI कम समय और कम खर्च में ऐसे विज्ञापन बना सकता है। कई बार दर्शकों को पता भी नहीं चलता कि वीडियो में दिखाई गई घटना असली नहीं है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार AI के इस्तेमाल में ज्यादा सतर्क डेमोक्रेटिक उम्मीदवार AI के इस्तेमाल को लेकर रिपब्लिकन उम्मीदवारों से ज्यादा सतर्क हैं। इसकी एक वजह यह है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक इस तकनीक की ज्यादा आलोचना करते हैं और इस पर नियम बनाने की मांग करते हैं। वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और प्रोजेक्ट के सह-निदेशक ट्रैविस एन. रिडआउट ने कहा कि AI का इस्तेमाल करने से डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों और संगठनों की छवि को नुकसान पहुंचने का खतरा ज्यादा है, क्योंकि वे खुद इस तकनीक पर नियंत्रण के लिए नियम बनाने की मांग कर रहे हैं। —————————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने मदद रोकी तो यूक्रेन का क्या होगा:जेलेंस्की का साथ छोड़ पुतिन के साथ दिख रहे ट्रम्प; 1 सप्ताह में 4 झटके दिए रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

FPI ने अक्टूबर में अब तक बेचे ₹52100 करोड़ के भारतीय शेयर, किन वजहों से बने हुए हैं सेलर

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 52,100 करोड़ रुपये निकाले हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिका में बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय शेयरों से 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे।

इससे पहले जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का निवेश किया था। अक्टूबर की ताजा सेलिंग के साथ विदेशी निवेशक साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 3.12 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चॉइस वेल्थ के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौड़ का कहना है कि अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर हाई यील्ड, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अमेरिका में महंगाई का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंकाओं को बढ़ा रहा है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी एसेट्स अधिक आकर्षक हो गए हैं।

यह भी कहा कि महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। इसके अलावा, उत्तर एशियाई बाजारों में आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के कारण विदेशी पूंजी भारत के बजाय उन बाजारों की ओर जा रही है।

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को रेलवे से ₹134 करोड़ का ऑर्डर मिला, फोकस में रहेगा स्टॉक

16 अक्टूबर को की थी खरीद

16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने कुछ बाइंग की थी। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर यील्ड के कुछ नीचे आने और रुपये में मजबूती के कारण ऐसा हुआ था। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्व पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और शुक्रवार को बाइंग इस बात का संकेत है कि बाजार में निवेशकों की धारणा स्थिर हो सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में रिकवरी की राह में अब भी जोखिम बनी हुई हैं।