Swachh Bharat Mission : CM योगी के मार्गदर्शन में बदली यूपी के शहरों की तस्वीर, 10 हजार से ज्यादा सार्वजनिक शौचालय-यूरिनल ब्लॉक्स बने

Swachh Bharat Mission : CM योगी के मार्गदर्शन में बदली यूपी के शहरों की तस्वीर, 10 हजार से ज्यादा सार्वजनिक शौचालय-यूरिनल ब्लॉक्स बने

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद से शहरी स्वच्छता अभियान को नई गति मिली है। स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय के तहत सरकार ने स्वच्छता अवसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के निर्माण को तेज किया है। इसका असर आंकड़ों में भी साफ दिखाई देता है। जहां 2017-18 तक प्रदेश में योजना के तहत नगरों में सिर्फ 3.10 लाख के करीब व्यक्तिगत घरेलू शौचालय ही निर्मित थे, वहीं योगी सरकार में अभियान को मिली रफ्तार से यह संख्या 9 लाख के पार पहुंच गई है।  

 

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 तक प्रदेश में 3,09,924 व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (आईएचएचएल) बने थे। इसके बाद शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। वर्ष 2018-19 तक शौचालयों की संख्या बढ़कर 7,58,949 हो गई थी। प्रदेश में अब तक 9,00,113 व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बन चुके हैं। इस तरह वर्ष 2017-18 के बाद करीब 5.90 लाख अतिरिक्त शौचालयों का निर्माण किया गया है। इससे बड़ी संख्या में शहरी परिवारों को घर में ही सुरक्षित और सम्मानजनक स्वच्छता सुविधा उपलब्ध हुई है।

 

सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाओं का भी विस्तार

 

सरकार ने घरेलू शौचालयों के साथ सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाओं को भी मजबूत किया है। स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय 1.0 के तहत प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में 10 हजार से अधिक सामुदायिक एवं सार्वजनिक शौचालय तथा यूरिनल ब्लॉक्स का भी निर्माण कराया गया है। इनके जरिए 70 हजार से अधिक शौचालय सीटें तैयार की गई हैं। इस तरह बाजारों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, व्यावसायिक क्षेत्रों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर इन सुविधाओं के विस्तार से नागरिकों को आसानी से स्वच्छता सुविधाएं मिल रही हैं।

 

स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय के अगले चरण में भी सार्वजनिक स्वच्छता अवसंरचना के विस्तार पर जोर जारी है। वर्ष 2024-25 से अबतक 2623 सार्वजनिक शौचालय सीटों तथा 1104 यूरिनल सीटों का निर्माण किया गया है। इस प्रकार इस अवधि में कुल 3727 अतिरिक्त सार्वजनिक स्वच्छता जोड़ी गई है। 

 

घरेलू शौचालयों से मजबूत हुआ शहरी स्वच्छता ढांचा

 

घरेलू शौचालयों से लेकर सार्वजनिक स्वच्छता ढांचे तक हुए इस विस्तार को प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नगर विकास विभाग के सचिव अनुज कुमार झा ने बताया कि प्रदेश सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन-नगरीय के माध्यम से व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शौचालयों का निर्माण करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र परिवार को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक स्वच्छता सुविधा उपलब्ध कराना है।

CM Yogi in Bahraich : नेपाल सीमा से बदलेगी बहराइच की तस्वीर! सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर साधा निशाना, रेल सेवा की शुरुआत

CM Yogi in Bahraich : नेपाल सीमा से बदलेगी बहराइच की तस्वीर! सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर साधा निशाना, रेल सेवा की शुरुआत

CM Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सीएम ने कहा कि बहराइच कभी भारत की सत्ता का संचालन भी करता था, लेकिन आजादी के बाद भी यह क्षेत्र विकास से वंचित रहा। एक हजार वर्ष पहले महाराजा सुहेलदेव ने बहराइच में ही सालार मसूद को मिट्टी में मिलाया था और भारत को विदेशी आक्रांताओं से मुक्त किया था, लेकिन आजादी के बाद भी दशकों तक महाराजा सुहेलदेव को विस्मृत किया गया। सालार मसूद के नाम पर उर्स व मेले लगवाकर देश को अपमानित किया जाता रहा। किंतु आज यहां विदेशी आक्रांता के नाम पर कोई आयोजन नहीं होता, बल्कि महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक बनकर तैयार हो गया है।

 

मुख्यमंत्री ने सोमवार को बहराइच में आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़े रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ नेपालगंज रोड (रुपईडीहा)-नानपारा-बहराइच रेल खंड और इस पर ट्रेन सेवा की शुरुआत की। दोनों ने हरी झंडी दिखाकर स्पेशल ट्रेन को वाराणसी के लिए रवाना किया। रेलमंत्री ने बहराइच नानपारा-नेपालगंज रोड के रेलखंड को ब्रॉडगेज नेटवर्क से जोड़ने की घोषणा की। सीएम ने चार अन्य ट्रेनों की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री व रेलमंत्री के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि रेलमंत्री ने बहराइच से नानपारा और नेपालगंज रोड के रेलवे ब्रॉडगेज कार्य (56 किमी का रेलखंड) को 730 करोड़ से समय-सीमा के अंदर पूरा कराया। पहली ट्रेन रूपईडीहा से बाबा विश्वनाथ के धाम वाराणसी सिटी तक जाएगी। 

 

आजादी के बाद भी विकास से वंचित था बहराइच 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस बहराइच ने भारत की गौरव-गाथा को बढ़ाया था, वह विकास से वंचित हो गया। रेल कनेक्टिविटी न के बराबर थी, जो थी वह मीटरगेज (छोटी लाइन) के रूप में थी। मित्र राष्ट्र नेपाल से भी कनेक्टिविटी नहीं हो पाई। आजादी के बाद कई स्थानों पर रेल लाइन को मीटरगेज से ब्रॉडगेज किया गया। शताब्दी समेत अनेक नई ट्रेनें चलीं, फिर भी यह खंड मीटरगेज के रूप में उन सरकारों की संकीर्ण सोच का प्रतीक बनी रही, जिन्होंने इसे बॉर्डर का क्षेत्र मानकर पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया था। उनके लिए भले ही यह अंतिम क्षेत्र रहा हो, लेकिन हमारे लिए रूपईडीहा बहराइच-नानपारा का यह क्षेत्र भारत के प्रवेश द्वार के रूप में रहा। इस क्षेत्र के लोग दशकों से यह दिन देखने को लालायित थे। पीढ़ियां चली गईं, लेकिन यह सपना और संकल्प आज साकार हो रहा है।

 

रेल सेवाओं से बढ़ेगी क्षेत्र की कनेक्टिविटी

सीएम ने कहा कि रेल सेवाओं से यहां की कनेक्टिविटी मजबूत होने जा रही हैं। कनेक्टिविटी गति देती है। जब गति सकारात्मक दिशा में गंतव्य की ओर बढ़ती है तो वह प्रगति का आधार बनती है। यह भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ करेगी। यह कनेक्टिविटी बॉर्डर क्षेत्र की सुरक्षा व सुविधा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की प्रॉस्पैरिटी के लिए भी महत्वपूर्ण है। इससे व्यापार बढ़ेगा, उद्योग लगेंगे, पर्यटन व कृषि को नया आयाम मिलेगा। ईको टूरिज्म के बेहतरीन केंद्र कतर्निया तक पहुंच होगी। अयोध्या, वाराणसी व गोरखपुर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों को जोड़ने में भी मदद मिलेगी। नेपालगंज रोड, नानपारा, बाबागंज, मटेरा, रिसिया, बहराइच समेत पूरे क्षेत्र के सामाजिक व आर्थिक प्रगति में इसकी बड़ी भूमिका होगी। बहराइच से खलीलाबाद के लिए नई रेललाइन बिछाई जा रही है। नई रेल सेवा के तहत गोरखपुर से सिद्धार्थनगर, शोहरतगढ़, बलरामपुर होते हुए बहराइच तक की कनेक्टिविटी के जरिए नेपालगंज रोड को जोड़ने की गतिविधि भी प्रारंभ हो रही है। इससे क्षेत्र की नई संभावनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। 

 

हमने न आंखें फेरीं और न ही धूल झोंकी

सीएम ने कहा कि पिछली सरकार हर जनपद में माफिया पालती थी। अब बहराइच, बलरामपुर, गोंडा, अंबेडकरनगर, बस्ती, अयोध्या, सुल्तानपुर, सिद्धार्थनगर समेत हर जनपद में मेडिकल कॉलेज हैं। बालार्क ऋषि के नाम पर हॉस्पिटल है। श्रावस्ती में एयरपोर्ट का निर्माण किया गया है। कभी यह सीजन इस क्षेत्र में इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी की कहर लेकर आता था, जिसमें मासूम दम तोड़ते थे। पिछली सरकार उसे अज्ञात बीमारी बताते हुए मासूमों की मौत पर पर्दा डालकर आंखों में धूल झोंकती थी। लेकिन, सरकार बनने के बाद हमने न आंखें फेरीं और न ही धूल झोंकी। हमने बीमारी का उन्मूलन किया। यूपी से माफिया व इंसेफेलाइटिस, दोनों समाप्त हो गए। अब यह सीजन किसी माता-पिता के लिए चिंता लेकर नहीं आता।

 

जमीन पर दिखते हैं डबल इंजन सरकार के कार्य

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कार्य जमीन पर दिखाई देते हैं। अब यूपी में किसी बेटी-व्यापारी को माफिया से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं। पीएम मोदी जी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने लखनऊ से बहराइच की रोड कनेक्टिविटी को फोरलेन से जोड़ने की स्वीकृति दी है। नए भारत में चारों ओर रोड व रेल कनेक्टिविटी हो रही है। रैपिड रेल, नमो भारत, अमृत भारत, वंदे भारत के रूप में नई रेल सेवाएं विकसित व आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को पूरा करती दिखाई दे रही हैं। 

 

लगभग सभी रेल लाइनों का इलेक्ट्रिफिकेशन

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी हम तरसते थे कि हमारे क्षेत्र में रेलवे लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन हो जाता, लेकिन आज भारत में रेलवे की जितनी भी लाइनें हैं, लगभग सभी का इलेक्ट्रिफिकेशन हो चुका है। सभी ब्रॉडगेज की हो गई हैं। जब पटरी बड़ी होती है तो रास्ते भी बड़े होते हैं, बाजार भी बड़े होते हैं, अवसर भी बड़े होते हैं और तब संकल्पों की पूर्ति होने में देर नहीं लगती है। आज से शुरू होने वाली कनेक्टिविटी यह डबल इंजन सरकार की विकास-गाथा के रूप में जानी जाएगी। सीएम ने देश व उत्तर प्रदेश में रेलवे में कायाकल्प के लिए प्रधानमंत्री व रेलमंत्री का आभार जताया।

 

दुख की घड़ी में हम सभी नेपाल के साथ

कार्यक्रम से पहले सभी ने नेपाल की भीषण आपदा में जान गंवाने वालों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। सीएम ने कहा कि हाल में नेपाल, भारत समेत दुनिया के कई देशों के सैकड़ों लोगों को प्राकृतिक आपदा का शिकार होना पड़ा। सीएम ने परिजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए नेपालवासियों को आश्वस्त किया कि सुख-दुख में हम सभी एकसाथ मिलकर चलेंगे। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने त्वरित निर्णय लेते हुए मित्र राष्ट्र नेपाल के सहयोग के लिए कदम उठाया है। हमारा सिर्फ राजनीतिक रिश्ता नहीं है, बल्कि साझी सांस्कृतिक विरासत भी है। भगवान पशुपतिनाथ से लेकर काशी विश्वनाथ, गोरखा से गोरखपुर, जनकपुर से अयोध्या को श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाता है। हम एक-दूसरे के धाम में जाकर साझी विरासत का आदर भी करते हैं।

 

इस अवसर पर बहराइच के सांसद डॉ. आनंद गोंड, डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल, विधायक रामनिवास वर्मा, सुभाष त्रिपाठी, अनुपमा जायसवाल, सुरेश्वर सिंह, सरोज सोनकर, विधान परिषद सदस्य प्रज्ञा त्रिपाठी,  पूर्व सांसद अक्षयवर लाल गोंड आदि मौजूद रहे।

बस्ती में वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्यप्रकाश सिंह ने की खुदकुशी, पुलिस महकमे में हड़कंप

बस्ती में वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्यप्रकाश सिंह ने की खुदकुशी, पुलिस महकमे में हड़कंप

Walterganj SO suicide: ​उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद से एक बेहद दुखद और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। वाल्टरगंज थाने के थानाध्यक्ष (SO) 57 वर्षीय सूर्यप्रकाश सिंह ने शनिवार को अपने सरकारी आवास में पंखे से गमछे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हमेशा जिंदादिल और खुशमिजाज रहने वाले एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के इस अप्रत्याशित कदम से पुलिस महकमे से लेकर उनके परिवार तक में कोहराम मच गया है।

​थाने से लेकर घर तक घटनाक्रम

शनिवार सुबह 10 बजे सूर्यप्रकाश सिंह ने थाने में स्टाफ मीटिंग ली और कर्मियों को रोज की तरह दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने अपने जरूरी काम निपटाए और सरकारी वाहन से शहर चले आए। सिविल लाइन पुलिस चौकी के पास उन्होंने अपने सहयोगियों को रुकने के लिए कहा और खुद डीएम कार्यालय के पास स्थित अपने आवास में चले गए। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर उन्होंने आत्महत्या कर ली।

नहीं मिला ​सुसाइड नोट 

​देर शाम करीब 7 बजे जब आवास का दरवाजा खोला गया, तो अंदर पंखे से गमछे के सहारे उनका शव लटकता मिला। कमरे में प्रवेश का वही एकमात्र रास्ता था। मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए। डीआईजी संजीव त्यागी के अनुसार, मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

 

​घटना के बाद लखनऊ में रह रहे परिजनों को जब बस्ती आने को कहा गया, तब उनकी बेटी बार-बार फोन करके पिता की सलामती पूछती रही, लेकिन पुलिसकर्मी सच बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। दरअसल, रक्षाबंधन से पहले उनका परिवार लखनऊ स्थित घर चला गया था। देर रात बस्ती पहुंचे परिजन भी आत्महत्या की वजह को लेकर पूरी तरह अनभिज्ञ हैं।

​कौन थे सूर्यप्रकाश सिंह?

आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थानाक्षेत्र के ग्राम भीलमपुर छपरा निवासी सूर्यप्रकाश सिंह के परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। वे ​15 फरवरी 1988 में पुलिस विभाग में आरक्षी (कांस्टेबल) पद पर भर्ती हुए थे। 7 सितंबर 2008 में हेड कांस्टेबल पद पर उन्हें पदोन्नति मिली। ​11 नवंबर 2016 में उपनिरीक्षक बने। सिद्धार्थनगर से स्थानांतरित होकर बस्ती आने पर पहले पासपोर्ट कार्यालय, फिर एसपी के पीआरओ और कार्यशैली से प्रभावित होकर उन्हें वाल्टरगंज थाने का प्रभार (SO) दिया गया था। जिम्मेदारी और सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले एक अधिकारी का यूं अचानक चले जाना पीछे कई अनसुलझे सवाल छोड़ गया है, जिसकी पड़ताल में पुलिस जुटी हुई है।

भारत के रईस पेट्रोल-डीजल गाड़ियों को छोड़ खरीद रहे ये महंगी EV, समझिए अमीरों में तेजी से क्यों बढ़ा लग्जरी EVs का क्रेज

भारत में महंगी कार खरीदने वाले अमीर ग्राहकों के बीच इलेक्ट्रिक कारों का चलन बाकी कार बाजार के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ रहा है। 2026 के पहले छह महीनों में भारत में बिकने वाली हर चार BMW कारों में से एक इलेक्ट्रिक कार थी। इससे BMW की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री करीब 25% रही, जो पूरे पैसेंजर व्हीकल बाजार के मुकाबले लगभग तीन गुना है। इस दौरान देश में कुल कार बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी करीब 8-9% रही।

यह बदलाव Mercedes-Benz में भी साफ तौर पर दिख रहा है, खासकर इसके सबसे अमीर ग्राहकों के बीच। इन्हीं छह महीनों के दौरान, कंपनी ने अपने ‘टॉप-एंड’ सेगमेंट – जिसमें 1.4 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले मॉडल शामिल हैं – से लगभग हर तीन घंटे में एक बैटरी इलेक्ट्रिक गाड़ी (BEV) बेची। इसकी CLA BEV, जिसकी शुरुआती कीमत 57 लाख रुपये है, का 2026 का कोटा पहले ही खत्म हो चुका है, जिससे नए खरीदारों को डिलीवरी के लिए अगले साल तक इंतजार करना पड़ेगा

आम भारतीय कार खरीदारों को इलेक्ट्रिक कार खरीदने से जो दिक्कतें होती हैं, जैसे चार्जिंग की सुविधा, कार की रेंज को लेकर चिंता और ज्यादा कीमत, अमीर परिवारों के लिए ये समस्याएं काफी कम हो जाती हैं।

LVP फोरकास्टिंग मोबिलिटी ग्लोबल के एसोसिएट डायरेक्टर गौरव वंगाल ने कहा, “लग्जरी सेगमेंट में EV को अपनाने की दर ज्यादा है क्योंकि इसके रास्ते में कोई रुकावट नहीं है। इन खरीदारों के पास घर पर चार्जर के साथ कवर्ड पार्किंग होती है, इसलिए चार्जिंग कभी कोई समस्या नहीं बनती।”

उन्होंने आगे कहा, “EV शायद ही कभी उनकी एकमात्र कार होती है, इसलिए रेंज की चिंता कभी नहीं होती। और पेट्रोल या डीजल वाली लग्जरी कार की तुलना में इलेक्ट्रिक कार पर टैक्स बहुत कम लगता है, इसलिए कीमत का वह अंतर जो ज्यादातर खरीदारों को रोकता है, यहां मौजूद ही नहीं है।”

मालिक होने की स्थितियों में यह अंतर बिक्री के आंकड़ों में साफ तौर पर दिख रहा है। जहां पारंपरिक लग्जरी कारों की बिक्री में बढ़ोतरी धीमी हुई है, वहीं EV से BMW और मर्सिडीज-बेंज को तेजी से बढ़ते ग्राहक मिल रहे हैं।

2026 के पहले छह महीनों में, BEV को छोड़कर Mercedes-Benz की बिक्री में सिर्फ 2.3% की बढ़ोतरी हुई, जबकि BMW की नॉन-BEV बिक्री में 5% की बढ़ोतरी हुई। जब इलेक्ट्रिक कारों को भी शामिल किया जाता है, तो Mercedes की कुल बढ़ोतरी 9% और BMW की 17% हो जाती है।

इसलिए, इलेक्ट्रिक गाड़ियां अब लग्जरी मार्केट में सिर्फ एक अतिरिक्त पावरट्रेन नहीं रह गई हैं। वे अतिरिक्त बढ़ोतरी का एक अहम जरिया बन रही हैं।

BMW ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और CEO, हरदीप सिंह बरार ने कहा कि इसकी अपील सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी बातों से कहीं ज्यादा है।

बरार ने कहा, “EVs न सिर्फ जीरो-एमिशन वाली गाड़ियां हैं, बल्कि ये परफॉर्मेंस से कोई समझौता किए बिना सस्टेनेबल मोबिलिटी भी देती हैं, और साथ ही इनकी रनिंग, मेंटेनेंस और टैक्स की लागत भी काफी कम होती है।”

यह बात उन कीमतों पर भी असरदार साबित हो रही है जहां ईंधन की बचत शायद ही यह तय करती हो कि कोई ग्राहक कार खरीदेगा या नहीं।

मर्सिडीज़-बेंज़ के टॉप-एंड इलेक्ट्रिक पोर्टफ़ोलियो – जिसमें लगभग 1.4 करोड़ रुपये की EQS SUV, 2.4 करोड़ रुपये की EQS मेबैक SUV और 3.1 करोड़ रुपये की G580 शामिल हैं – ने जून 2026 को खत्म हुए छह महीनों में साल-दर-साल 27 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की।

लक्ज़री मार्केट के ज़्यादा किफायती सेगमेंट में, मर्सिडीज़ ने CLA BEV का अपना 2026 का पूरा कोटा पहले ही बेच दिया है।

Mercedes-Benz इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, संतोष अय्यर ने कहा, “CLA BEV का पूरी तरह बिक जाना, खासकर 61 लाख रुपये वाले टॉप-एंड 250+ वेरिएंट्स का, लक्जरी EV ग्राहकों की बढ़ती समझ को दिखाता है। ये ग्राहक अब सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और वैल्यू-बेस्ड लक्जरी मोबिलिटी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।”

रुकावटें दूर हो रही हैं

लग्जरी कार खरीदने वालों की प्रोफाइल से यह समझने में मदद मिलती है कि EV को अपनाने की रफ्तार आम बाजार के मुकाबले इतनी तेज क्यों है।

जो परिवार अपनी इकलौती कार खरीद रहा है, उसके लिए इलेक्ट्रिक कार अपनाने में कई समझौते करने पड़ सकते हैं। अपार्टमेंट में रहने वाले खरीदार के पास शायद अपना पर्सनल चार्जर न हो, और लंबी यात्राओं के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर योजना बनानी पड़ती है। EV की शुरुआती ज्यादा कीमत की तुलना कई सालों में होने वाली ईंधन की बचत से भी करनी पड़ती है।

कई अमीर परिवारों के लिए, ये हिसाब-किताब काफी अलग होते हैं।

इन परिवारों के पास आमतौर पर अपनी पार्किंग की जगह होती है, इसलिए घर पर चार्जर लगाना आसान होता है। वे रातभर अपनी कार चार्ज कर सकते हैं और उन्हें पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना पड़ता।

सबसे बड़ी बात यह है कि अमीर परिवारों में EV अक्सर इकलौती कार नहीं होती। उनके पास एक से ज्यादा गाड़ियां होती हैं।

इसका मतलब है कि EV को परिवार की हर तरह की यात्रा की जरूरत पूरी करने की जरूरत नहीं होती। इलेक्ट्रिक कार रोजाना शहर में आने-जाने के काम आ सकती है, जबकि लंबी दूरी की यात्रा के लिए परिवार के पास पेट्रोल या डीजल कार का विकल्प मौजूद रहता है।

भारत का टैक्स सिस्टम इस बात को और मज़बूत करता है।

इलेक्ट्रिक कारों पर 5% GST लगता है, जबकि बड़ी पेट्रोल और डीजल कारों पर 28% GST और साथ में कंपनसेशन सेस भी लगता है। लग्जरी कारों की कीमतों के मामले में, यह अंतर बैटरी टेक्नोलॉजी की ज्यादा लागत को काफी हद तक कम कर सकता है और इलेक्ट्रिक व इंटरनल-कंबशन मॉडल के बीच कीमत के अंतर को घटा सकता है।

EVs में अब ऐसी खूबियां भी तेज़ी से आ रही हैं जो लग्ज़री ड्राइविंग के लिए एकदम सही हैं। इलेक्ट्रिक मोटर तुरंत टॉर्क देती है, जिससे कार तेजी से पिकअप लेती है। वहीं, पेट्रोल या डीजल इंजन नहीं होने के कारण EV काफी शांत और स्मूद ड्राइविंग अनुभव देती है। प्रीमियम कार कंपनियां भी अपनी लग्जरी कारों में इसी तरह की शांति और आराम देने के लिए काफी पैसा खर्च करती हैं।

इसलिए, हाई-एंड मार्केट के खरीदारों के लिए, इलेक्ट्रिक गाड़ियां कम टैक्स और कम रनिंग कॉस्ट के साथ-साथ परफॉर्मेंस, टेक्नोलॉजी और नई खूबियों का बेहतरीन कॉम्बिनेशन हो सकती हैं।

विकल्प तेजी से बढ़ रहे हैं

एक और बड़ा बदलाव यह है कि अमीर भारतीय अब कई तरह की इलेक्ट्रिक कारें खरीद सकते हैं।

FY25 से, भारत के लग्जरी सेगमेंट में 13 नई BEV लॉन्च हुई हैं, जिनमें Porsche, Volvo, Rolls-Royce, Ferrari और Lexus के मॉडल शामिल हैं। इनकी सबसे ज्यादा कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये तक है।

इस विस्तार से EV अपनाने में आने वाली एक और रुकावट धीरे-धीरे दूर हो रही है: विकल्पों की कमी।

शुरुआत में लग्जरी EV खरीदने वालों के पास इलेक्ट्रिक मॉडल्स के कुछ ही विकल्प होते थे, जबकि पेट्रोल और डीजल मार्केट में कई तरह की सेडान, SUV और परफॉर्मेंस कारें उपलब्ध थीं। अब ग्राहक अपनी पसंद की बॉडी स्टाइल, परफॉर्मेंस कैटेगरी या लग्जरी ब्रांड को छोड़े बिना आसानी से पावरट्रेन बदल सकते हैं।

इसका असर इंडस्ट्री के आंकड़ों में साफ दिखता है।

FY26 में भारत में बिकने वाली कुल पैसेंजर व्हीकल्स में लग्जरी कारों की हिस्सेदारी सिर्फ 1.1-1.2% रही। लेकिन देश में बिकने वाली कुल इलेक्ट्रिक कारों (BEV) में लग्जरी कारों की हिस्सेदारी करीब 2.5-2.7% रही। यानी पूरे पैसेंजर व्हीकल बाजार में लग्जरी कारों की हिस्सेदारी के मुकाबले इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में इनकी हिस्सेदारी दोगुने से भी ज्यादा है।

इस बदलाव का सबसे साफ उदाहरण BMW है। कंपनी ने जून 2026 को खत्म हुए छह महीनों में 2,359 EV बेचीं, जिससे भारत में उसकी कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का हिस्सा लगभग एक-चौथाई हो गया। इसी दौरान Mercedes-Benz ने 859 BEV बेचीं।

फिर भी, Tesla का अनुभव बताता है कि इस तेजी का फायदा हर प्रीमियम EV बनाने वाली कंपनी को बिक्री के तौर पर नहीं मिलता।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में ग्लोबल पहचान होने के बावजूद, भारत में अपने पहले साल (जो जून 2026 में खत्म हुआ) में Tesla ने सिर्फ 450 के आस-पास कारें बेचीं।

इसकी सीमित प्रोडक्ट रेंज एक रुकावट है। टेस्ला अभी भारत में सिर्फ ‘मॉडल Y’ बेचती है, जिससे यह कई ऐसे सेगमेंट में मौजूद नहीं है जहां पहले से मौजूद लग्जरी कार बनाने वाली कंपनियां ग्राहकों को सेडान, SUV और परफॉर्मेंस-ओरिएंटेड मॉडल ऑफर कर सकती हैं।

इसकी एक और चुनौती कीमत भी रही है। टेस्ला ने बेस ‘मॉडल Y’ को 59.89 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) में लॉन्च किया था, और बाद में मई 2026 में इसकी कीमत घटाकर 50.89 लाख रुपये कर दी। कीमत कम करने के बाद भी, पूरी तरह से इम्पोर्ट किया गया यह मॉडल उन कंपनियों से मुकाबला करता है जिनके पास ज्यादा बड़े पोर्टफोलियो और पहले से स्थापित सेल्स और सर्विस नेटवर्क हैं। यह अंतर दिखाता है कि भारत का लग्जरी EV मार्केट किस तरह बदल रहा है।

आम कार खरीदारों के लिए EV खरीदने पर अभी भी चार्जिंग, ड्राइविंग रेंज, ज्यादा शुरुआती कीमत और सिर्फ एक कार पर निर्भर रहने जैसी कई परेशानियां हो सकती हैं। लेकिन अमीर परिवारों के लिए इनमें से कई दिक्कतों को आसानी से दूर किया जा सकता है। वे घर पर चार्जर लगवा सकते हैं, लंबी दूरी की यात्रा के लिए दूसरी कार का इस्तेमाल कर सकते हैं और EV पर कम टैक्स लगने से इलेक्ट्रिक कार खरीदना उनके लिए अपेक्षाकृत सस्ता पड़ता है।

इन वजहों से अमीर भारतीय परिवारों में इलेक्ट्रिक लग्जरी कार अब सिर्फ महंगा प्रयोग नहीं रह गई है। यह धीरे-धीरे उनकी गैराज में एक आम और पसंदीदा विकल्प बनती जा रही है।

BMW और Mercedes-Benz के लिए यह बदलाव एक कदम और आगे बढ़ चुका है। भारत में EV अब सिर्फ उनके भविष्य के प्रोडक्ट प्लान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि आज ही उनकी बिक्री और ग्रोथ को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

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Kaushambi Blast : कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट, 10 से ज्यादा की मौत

Kaushambi Blast : कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट, 10 से ज्यादा की मौत

उत्तरप्रदेश के कौशांबी जिले में सोमवार को कथित अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट से इलाके में हड़कंप मच गया। धमाका इतना शक्तिशाली था कि फैक्टरी की पूरी इमारत जमींदोज हो गई और आसपास के कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा। हादसे में करीब 11 लोगों की मौत बताई जा रहे हैं। इसमें बच्चे भी शामिल हैं जबकि कुछ लोग घायल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसे अंदर करीब 25 मजदूर मौजूद थे। 

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धमाके के बाद फैक्टरी पूरी तरह तबाह हो गई और आसपास मलबा फैल गया। बताया जा रहा है कि विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद इलाके में धुएं का बड़ा गुबार छा गया।  मलबे में फंसे लोगों की तलाश के साथ राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। कौशांबी के जिलाधिकारी अमित पाल शर्मा और पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण प्रजापत समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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मुख्यमंत्री ने जताया दु:ख

बताया जा रहा है कि विस्फोट के बाद भी काफी देर तक धमाके होते रहे।  इससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आसपास के कई मकानों को भारी नुकसान पहुंचा। बताया जा रहा है कि कुछ मकानों में रखे LPG सिलेंडरों में भी विस्फोट हुआ और आग लग गई।

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इससे स्थिति और भयानक हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने अधिकारियों को घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को मृतकों के परिवारों के संपर्क में रहने और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।

अयोध्या से साधु-संतों ने भरी हुंकार, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए मथुरा रवाना हुई ‘रजत शिला’

अयोध्या से साधु-संतों ने भरी हुंकार, श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए मथुरा रवाना हुई 'रजत शिला'

​Sri Krishna Janmabhoomi Movement

​Sri Krishna Janmabhoomi Movement: अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति और मंदिर निर्माण के आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। साधु-संतों और श्रद्धालुओं की मंडली ने अयोध्या से मथुरा तक धार्मिक चेतना जगाने का संकल्प लिया है।

 

​रजत शिला का पवित्र पूजन : हिंदू पक्षकार दिनेश फलाहारी की अगुवाई में पहुंचे श्रद्धालुओं ने सबसे पहले पूर्णिमा पर मां सरयू में डुबकी लगाई और तट पर शिला का पूजन किया।

 

रामलला और हनुमान जी की आज्ञा : सरयू महाआरती के बाद शिला को हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के समक्ष अर्पित कर आशीर्वाद लिया गया और फिर श्रीराम जन्मभूमि की चौखट तक ले जाकर दर्शन कराए गए।

 

​महंत नृत्यगोपाल दास का आशीर्वाद : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट व श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने मणिरामदास छावनी में रजत शिला का स्पर्श और पूजन कर सफलता का आशीर्वाद दिया। इस दौरान उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास और जानकी दास समेत संतों ने पुष्प वर्षा की।

 

एक लाख गांवों में जाएगा अभियान : ब्रज धर्माचार्य परिषद के महामंत्री पं. राजेश पाठक के नेतृत्व में यह रजत शिला देश के प्रमुख मंदिरों और 1 लाख से अधिक गांवों में पूजन हेतु ले जाई जाएगी।

 

​1 सितंबर को वृंदावन में अनुष्ठान : अयोध्या से रवाना हुई यह शिला 1 सितंबर को ब्रजभूमि पहुंचेगी, जहां वृंदावन में विशेष वैदिक पूजन के साथ आगे के अभियान की शुरुआत होगी।

रामलला से धोखा! चेन्नई की महिला ने 4 करोड़ का दिया था चेक, खाते में सिर्फ 3 रुपए

रामलला से धोखा! चेन्नई की महिला ने 4 करोड़ का दिया था चेक, खाते में सिर्फ 3 रुपए

Ayodhya Ram Mandir fraud: तमिलनाडु के चेन्नई की एक महिला श्रद्धालु ने हाल ही में अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 4 करोड़ रुपए का चेक सौंपा था। महिला की इच्छा थी कि इस राशि का उपयोग विशेष रूप से मंदिर परिसर में तैनात कर्मचारियों की सुविधाओं पर ही किया जाए। इसके लिए उन्होंने ट्रस्ट से एक लिखित आश्वासन की भी मांग की थी। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया था। इसके अलावा महिला ने राम मंदिर के लिए 10 हजार रुपए का अलग से भी दान दिया था।

​खाते में राशि न होने से चेक बाउंस

जब ट्रस्ट ने 4 करोड़ रुपए का यह चेक बैंक में जमा कराया, तो बैंक जांच में महिला के खाते में केवल 3 रुपए ही जमा पाए गए। पर्याप्त धनराशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गया। अब नियमानुसार बैंक महिला को नोटिस भेजकर इतनी बड़ी रकम का फर्जी/अनादरित चेक जारी करने पर जवाब तलब करेगा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

 

​क्या है पूरा मामला?

  • चेन्नई की महिला श्रद्धालु ने राम मंदिर कर्मियों के लिए 4 करोड़ रुपए का चेक दिया था। 
  • ​क्लियरिंग के दौरान उसके खाते में महज 3 रुपए की राशि पाई गई।
  • महिला ने राशि को केवल कर्मचारी कल्याण में खर्च करने का लिखित आश्वासन मांगा था।
  • बैंक नोटिस की तैयारी में है, वहीं ट्रस्ट भी बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है।

​इससे पहले भी बाउंस हुए हैं चेक

2020 के निधि समर्पण अभियान के दौरान भी लगभग 100 करोड़ रुपए के चेक बाउंस हुए थे, जिनमें से अधिकांश की बाद में रिकवरी कर ली गई थी। गौरतलब है कि रामलला मंदिर को हर महीने नकद, चेक और ऑनलाइन माध्यमों से करीब 3 से 4 करोड़ रुपये का दान प्राप्त होता है, जिसमें से लगभग 1 से 1.5 करोड़ रुपए सिर्फ चेक के जरिए आते हैं। 4 करोड़ रुपए के इस चेक बाउंस मामले के बाद अब ट्रस्ट और बैंक प्रशासन बड़ी रकम वाले चेक स्वीकार करने और उनकी क्लियरिंग प्रक्रिया में विशेष सतर्कता बरतने की तैयारी कर रहे हैं।

टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत

Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।

हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।

भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं

भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।

नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।

फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।

भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।

हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी

भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।

खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।

नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।

हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।

पीड़ितों की DNA से पहचान

नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।

भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।

वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।

नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।

इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।

रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।

वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में

भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।

सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।

बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।

बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।

रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।

वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।

इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।

वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

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Gold Silver Prices Today: सोने में लगातार चौथे सत्र गिरावट, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

दिल्ली सर्राफा बाजार में 31 अगस्त को सोने में लगातार चौथे सत्र गिरावट देखने को मिली। यह 1,500 रुपये गिरकर 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में गिरावट का असर घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर पड़ा। चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ।

बीते हफ्तों में अच्छी तेजी के बाद मुनाफावसूली

ट्रेडर्स ने बताया कि बीते कुछ हफ्तों में सोने की कीमतों में अच्छी तेजी दिखी थी। अब लगातार मुनाफावसूली हो रही है, जिसका असर कीमतों पर पड़ रहा है। ट्रेडर्स सोने में इस लिए भी पोजीशन घटा रहे हैं, क्योंकि सोने में तेजी का ट्रेंड लंबे समय तक जारी रहने में नाकाम रहा। चांदी की कीमतें 31 अगस्त को 2,45,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित रही।

केविन वॉर्श की स्पीच के बाद सोने पर दबाव

लेमन मार्केट डेस्क में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा, “फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच के बाद सोने की कीमतों पर दबाव दिख रहा है। उन्होंने 28 अगस्त को जैक्सन होल में अपनी स्पीच में सख्त मॉनेटरी पॉलिसी के संकेत दिए। इससे सितंबर में फेडरल रिजर्व की अगली बैठक में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।”

बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर इंडेक्स में मजबूती का भी असर

उन्होंने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और डॉलर इंडेक्स में मजबूती का भी निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ा। डॉलर में मजबूती का सोने की कीमतों पर खराब असर पड़ता है, क्योंकि इससे दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में कमजोरी 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में कमजोरी दिखी। यह 0.35 फीसदी गिरकर 4,436 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। हालांकि, चांदी हल्की मजबूती के साथ 66.97 डॉलर प्रति औंस पर चल रही थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बुलियन मार्केट्स पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का भी असर पड़ा, क्योंकि इससे क्रूड की कीमतें एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रही हैं।

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क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंची बने रहने पर बढ़ सकती है महंगाई

ब्रेंट क्रूड का भाव अगर 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है तो इससे अमेरिकी सहित दुनियाभर में महंगाई बढ़ेगी। महंगाई को काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंकों पर इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का दबाव बढ़ जाएगा। फेडरल रिजर्व सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ाकर इसकी शुरुआत कर सकता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने वाले माहौल में सोने की चमक फीकी पड़ जाती है।