Indus Waters Treaty: भारत ने सिंधु के पानी पर पाकिस्तान को फिर दिया बड़ा झटका! ये बोल खारिज किया कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का फैसला

Indus Waters Treaty Update: सिंधु जल संधि को लेकर भारत ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। भारत ने सोमवार को तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (CoA) द्वारा अंतरिम उपायों और सिंधु जल संधि की स्थिति को लेकर जारी किए गए फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन को ही गैर-कानूनी रूप से गठित बताते हुए साफ कहा है कि इस मंच का भारत पर कोई क्षेत्राधिकार नहीं है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि वर्ल्ड बैंक द्वारा इस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन का गठन सिंधु जल संधि की शर्तों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करके किया गया था। भारत ने इस निकाय द्वारा जारी हालिया फैसले के साथ-साथ इसके सभी पिछले बयानों और आदेशों को भी स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है।

गैर-कानूनी निकाय को भारत ने कभी मान्यता नहीं दी- विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में दोहराया कि भारत ने कानूनी रूप से इस गैर-कानूनी और तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के अस्तित्व को कभी स्वीकार नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस मध्यस्थता निकाय की स्थापना स्वयं सिंधु जल संधि का एक गंभीर उल्लंघन है। भारत ने साफ किया कि वह इस निकाय के समक्ष कभी भी पेश नहीं हुआ है और उसने इसके किसी भी पिछले फैसलों या घोषणाओं का संज्ञान लेने से भी हमेशा इनकार किया है।

भारत की संप्रभुता और परियोजनाओं पर नहीं पड़ेगा कोई असर

विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के पास भारत के संप्रभु निर्णयों पर फैसला सुनाने का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है। भारत द्वारा शुरू की जा रही या चलाई जा रही परियोजनाओं से जुड़े कदमों पर इस निकाय के वर्तमान या भविष्य के किसी भी फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही भारत सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का उसका फैसला पूरी तरह से लागू रहेगा और प्रभाव में बना रहेगा।

आपको बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता को स्थगित करने का फैसला किया था। इसके बाद ही पाकिस्तान लगातार इसे लेकर धमकी देने के साथ तमाम तरह के पैंतरे दिखा रहा है। इसी क्रम में अब इसे लेकर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले और खुद कोर्ट को ही खारिज कर भारत ने पाकिस्तान को एक और तगड़ा झटका दे दिया है।

न्यूजीलैंड दौरे के लिए तैयार किए जाएंगे आकिब नबी, सरे के लिए खेलेंगें काउंटी

रणजी ट्रॉफी में चमक बिखेरने के बाद भारतीय टेस्ट टीम दल में शामिल होने वाले आकिब नबी को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड काउंटी का अनुभव देना चाहती है ताकि न्यूजीलैंड श्रृंखला में भारत के पास तेज गेंदबाजी विकल्प रहें। गौरतलब है कि जसप्रीत बुमराह के फिटनेस पर संदेह के बादल हैं और मोहम्मद सिराज की गेंद की गति धीमी होती जा रही है।ऐसे में टीम को एक विश्वसनीय नाम चाहिए जो कि न्यूजीलैंड में विकेट निकाले।

इसी सिलसिले में जम्मू-कश्मीर के प्रतिभाशाली तेज गेंदबाज आकिब नबी भारत के अक्टूबर में होने वाले न्यूजीलैंड दौरे को ध्यान में रखते हुए काउंटी चैंपियनशिप डिवीजन एक में सरे के लिए तीन मैच खेलने के लिए ब्रिटेन रवाना हुए।    नबी को हाल में श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट की श्रृंखला के लिए चोटिल जसप्रीत बुमराह के स्थान पर भारतीय टीम में शामिल किया गया था लेकिन उन्हें पदार्पण का मौका नहीं मिला।

गोपनियता की शर्त पर शीर्ष भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के एक सूत्र ने बताया, ‘‘नबी दुबई से ब्रिटेन के लिए रवाना हो गए हैं और बुधवार को यॉर्कशर के खिलाफ होने वाले मैच में खेलने को लेकर बेताब हैं।’’

रणजी ट्रॉफी के पिछले सत्र में सर्वाधिक विकेट लेने वाले नबी के समय पर लौटने की भी उम्मीद है जिससे कि वह पुडुचेरी में ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ भारत के चार दिवसीय अनौपचारिक टेस्ट मैच में हिस्सा ले सकें। यह श्रृंखला 22 सितंबर से शुरू होगी।जम्मू-कश्मीर ने पिछले सत्र में पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता था।

इससे पहले खबर आई थी कि सरे को स्विंग गेंदबाज की तलाश थी और नबी को कुछ मैच में क्लब की ओर से खिलाने को लेकर बातचीत चल रही थी।यॉर्कशर के खिलाफ दो से पांच सितंबर तक होने वाले मुकाबले के बाद सरे को आठ से 11 सितंबर तक ससेक्स और 15 से 18 सितंबर तक ग्लेमोर्गन का सामना करना है।

आकिब बने थे रणजी के मैन ऑफ द मैच

अबूधाबी में हुए IPL नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स से 8.40 करोड़ रुपये की भारी भरकम रकम मिली। हालांकि सफेद गेंद से उनका प्रदर्शन प्रभावशाली नहीं रहा लेकिन वह लाल गेंद के सिद्धहस्त गेंदबाज माने जाते हैं।

नबी ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सत्र में कुल 104 विकेट लिए थे, जिनमें 2025-26 सत्र में लिए गए 60 विकेट भी शामिल हैं। उन्होंने जम्मू कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। वह बल्लेबाजी में भी उपयोगी योगदान देने में सक्षम हैं।

NCR के बाहर ‘रियल एस्टेट बूम’: मेरठ से नौगांव तक क्यों आसमान छू रही हैं जमीन-मकान की कीमतें? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

NCR Satellite Towns Real Estate Boom: मेरठ के रहने वाले प्रदीप चौधरी जब करीब ढाई साल पहले अपने शहर की एक पॉश कॉलोनी में 150 वर्ग गज के घर की जानकारी लेने गए थे, तब उसकी कीमत लगभग ₹1.1 करोड़ थी। हाल ही में उन्होंने वही प्रॉपर्टी ₹2.5 करोड़ में खरीदी।

प्रदीप बताते हैं, ‘अगर मैं ऐसा ही घर नोएडा में खरीदता तो ₹4-5 करोड़ लगते, और गुरुग्राम में तो रेट इससे भी कहीं ज्यादा हैं। मैं दिल्ली में नौकरी करता हूं, लेकिन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और नमो भारत (RRTS) आने के बाद अब मेरठ से दिल्ली पहुंचने में सिर्फ 50 मिनट लगते हैं। यह सफर नोएडा या गुरुग्राम के कुछ इलाकों से भी ज्यादा आसान और तेज है। फिर मैं करोड़ों रुपये ज्यादा क्यों खर्च करूं?’

प्रदीप की यह कहानी अकेले उनकी नहीं है। यह दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट मार्केट में आ रहे एक ऐतिहासिक बदलाव की बानगी है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, नमो भारत (RRTS), गंगा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने दूरी और समय को इतना घटा दिया है कि लोग अब नोएडा, दिल्ली या गुरुग्राम जाने के बजाय मेरठ और नौगांव जैसे उभरते शहरों में घर और जमीन खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

मेरठ का रियल एस्टेट मार्केट: सिर्फ 2-3 साल में दोगुनी हुईं कीमतें

मेरठ इस इंफ्रास्ट्रक्चर बूम का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। नमो भारत/RRTS और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी ने मेरठ को दिल्ली-एनसीआर का एक प्रैक्टिकल ‘कम्यूटर हब’ बना दिया है।

रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ मेरठ (REDAM) के अध्यक्ष अशोक गर्ग के मुताबिक, ‘पहले दिल्ली से दूरी और जाम मेरठ की सबसे बड़ी कमजोरी थी, लेकिन अब इंफ्रास्ट्रक्चर ने बाजी पलट दी है। पिछले 2 से 3 सालों में मेरठ में जमीन के रेट 100 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। दिल्ली-नोएडा की तुलना में मेरठ में रहने का खर्च बहुत कम है, इसलिए लोग यहां रहकर दिल्ली में आराम से नौकरी कर रहे हैं।’

सरकार मोदीपुरम के पास एक विशेष विकास क्षेत्र विकसित कर रही है, जिससे यहां कमर्शियल और बिजनेस एक्टिविटीज को और बड़ा बूस्ट मिलेगा। मेरठ के पॉश इलाके साकेत में ढाई साल पहले जमीन ₹80,000 से ₹90,000 प्रति वर्ग गज थी, जो आज बढ़कर ₹2 लाख से ₹2.25 लाख प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई है।

दिल्ली-NCR के मुकाबले क्यों लोगों की पसंद बन रहे हैं मेरठ जैसे शहर?

पहले जहां लोग नौकरी के सिलसिले में दिल्ली, नोएडा या गुरुग्राम में बसने का सपना देखते थे, वहीं अब महंगी प्रॉपर्टी और रोज के ट्रैफिक जाम के कारण वे अपने फैसले पर पुनर्विचार कर रहे हैं। दरअसल, मेरठ जैसे उभरते सैटेलाइट शहरों में ₹1.5 से ₹2.5 करोड़ में बड़ा विला या स्वतंत्र मकान मिल जाता है, जबकि नोएडा-गुरुग्राम में छोटे फ्लैट्स के लिए भी ₹4 से ₹6 करोड़ तक चुकाने पड़ते हैं।

इसके अलावा, एक्सप्रेसवे और नमो भारत (RRTS) की बदौलत अब मेरठ से दिल्ली का सफर ट्रैफिक जाम से बचकर महज 50 मिनट से 1 घंटे में पूरा हो जाता है, जो नोएडा या गुरुग्राम के कई इलाकों से भी तेज है। कम रहने का खर्च और बेहतर स्पेस मिलने की वजह से ही लोग अब इन नए शहरों का रुख कर रहे हैं।

नौगांव और बड़ौदा मेव: फार्महाउस और रिजॉर्ट्स का बूम

अगर मेरठ रोज की भागदौड़ और नौकरीपेशा लोगों की पहली पसंद बन रहा है, तो राजस्थान के अलवर क्षेत्र में स्थित नौगांव और बड़ौदा मेव वीकेंड होम्स और फार्महाउस के लिए हॉटस्पॉट बन चुके हैं।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे ने इन इलाकों को गुरुग्राम और दिल्ली के बेहद करीब ला खड़ा किया है। स्थानीय डीलरों के अनुसार, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे बनने के बाद नौगांव और बड़ौदा मेव के अर्बन लोकल बॉडी इलाकों में जमीनों के दाम 30 से 40 फीसदी तक चढ़ चुके हैं।

राम रतन ग्रुप के चेयरमैन विजय राम रतन बताते हैं कि एक्सप्रेसवे ने दिल्ली-गुरुग्राम के लोगों के लिए वीकेंड ट्रैवल को बहुत आसान बना दिया है। नौगांव के आसपास होटल, फार्महाउस रिजॉर्ट्स और ग्लैंपिंग की बुकिंग्स में भारी उछाल आया है।

डेवलपर्स की नई रणनीति: हाइवे किनारे होर्डिंग्स की भरमार

दिल्ली-एनसीआर के बड़े बिल्डर्स अब पारंपरिक हब्स को छोड़कर इन नए रूटों का रुख कर रहे हैं। डेवलपर्स को इन नए इलाकों में बड़े भूखंड काफी सस्ते दामों पर मिल रहे हैं। दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के पास बागपत और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पास नौगांव में बड़े बिल्डर्स प्लॉट्स, लग्जरी विला और गेटेड फार्म कम्युनिटीज ला रहे हैं।हाइवे किनारे लगे बड़े-बड़े बिलबोर्ड्स इस बात का सबूत हैं कि अब दूरी किलोमीटर से नहीं, बल्कि ‘मिनटों’ से नापी जा रही है।

कनेक्टिविटी ने पलट दिया पूरा गेम?

मेरठ और नौगांव भले ही दो अलग-अलग तरह के रियल एस्टेट मार्केट हों जहां मेरठ रोजाना दिल्ली आकर नौकरी करने वालों का नया ठिकाना बन रहा है, वहीं नौगांव वीकेंड गेटवे और लाइफस्टाइल फार्महाउस के रूप में उभर रहा है। लेकिन दोनों को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी है एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी। बेहतर कनेक्टिविटी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सफर आसान हो, तो महंगे एनसीआर हब्स में करोड़ों रुपये फंसाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

MG Hector Tomahawk PHEV powertrain explained

MG Hector Tomahawk PHEV powertrain explained
MG Hector Tomahawk PHEV powertrain explained

MG has introduced the Hector Tomahawk PHEV as India’s first mass-market plug-in hybrid, with prices ranging from Rs 25.70 lakh to Rs 27.80 lakh (ex-showroom). It combines a 1.5-litre petrol engine with a 20.5kWh battery and electric motor, allowing it to offer electric-only driving as well as the longer range of a petrol engine. But how does the Hector Tomahawk PHEV’s hybrid system work, and how does it differ from the strong-hybrid systems already offered by Maruti Suzuki, Toyota and Honda Let’s take a closer look. 

MG Hector Tomahawk PHEV powertrain: All you need to know

Gets an electric motor powered by a 20.5kWh battery and a 1.5-litre petrol engine

The Hector Tomahawk PHEV combines a 1.5-litre naturally aspirated petrol engine with a 20.5kWh battery and an electric motor. The petrol engine uses the Atkinson cycle and produces 102hp and 125Nm, while the permanent-magnet synchronous motor develops 201hp and 237Nm. The system sends a combined 198hp and 230Nm to the front wheels.

The petrol engine is paired with a Dedicated Hybrid Transmission (DHT) with an e-clutch, while the battery uses lithium iron phosphate (LFP) chemistry. Unlike a conventional hybrid, the Hector Tomahawk PHEV’s battery can be charged externally, allowing it to operate as an EV for more than 115km, according to MG, before the petrol engine kicks in.

How is the Hector Tomahawk PHEV different from a strong-hybrid powertrain?

Honda, Toyota and Maruti Suzuki offer strong-hybrid powertrains in models such as the City Hybrid, Urban Cruiser Hyryder, Innova Hycross, Grand Vitara, Victoris and Invicto. These systems also use an electric motor and battery, but their battery packs are charged through regenerative braking and the combustion engine rather than an external power source. They can drive the wheels on electric power for short periods but do not offer the extended electric driving capability of a plug-in hybrid.

The Hector Tomahawk PHEV’s 20.5kWh battery can be charged from the grid, giving it a greater electric driving capability. It supports 25kW DC charging, which MG claims takes 35 minutes for a 30-80 percent charge. A 3.3kW AC charger is said to take 7.5 hours for a 10-100 percent charge.

MG claims a 43.2 percent thermal efficiency for the petrol engine and around 50kpl combined fuel efficiency. The company pegs the combined range with a fully charged battery and the 52-litre fuel tank brimmed at over 1,100km.

MG offers it with four primary drive modes

The MG Hector Tomahawk PHEV can operate in four primary drive modes: EV, Series Hybrid, Parallel Hybrid and Engine Direct. Each mode uses the petrol engine, electric motor and battery differently. Here is how each one works.

  • EV mode: The battery alone powers the electric motor, which drives the wheels. The petrol engine remains switched off, making this the mode used for electric-only driving.
  • Series Hybrid mode: The petrol engine runs as a generator to produce electricity. It recharges the battery pack, which powers the electric motor driving the front wheels. The engine therefore does not directly power the wheels in this mode.
  • Parallel Hybrid mode: Both the petrol engine and electric motor drive the wheels. This allows the powertrain to combine the engine’s output with electric assistance when higher performance is required.
  • Engine Direct drive mode: The petrol engine drives the wheels directly through the hybrid transmission, reducing energy conversion losses associated with generating electricity and then using the motor to drive the wheels. This mode is primarily suited for high-speed cruising.

However, MG is offering no way to change these drive modes manually. The automaker claims the system shuffles between the modes in just 0.1 seconds, depending on the Hector Tomahawk PHEV’s state of charge, speed, throttle input and road conditions.

MG Hector Tomahawk PHEV prices

Although it’s a plug-in hybrid, the Hector Tomahawk PHEV comes with a BaaS option

MG Hector Tomahawk PHEV prices (ex-showroom)

Trim

Non-BaaS prices

BaaS prices

Upfront cost saving

Exclusive

Rs 25.70 lakh

Rs 21.79 lakh + 3.2 per km

Rs 3.91 lakh

Essence

Rs 27.80 lakh 

Rs 23.89 lakh + 3.2 per km

Rs 3.91 lakh

Both the Exclusive and Essence trims get the same powertrain, but certain features differ. Interestingly, the Hector Tomahawk PHEV is being offered with a Battery-as-a-Service (BaaS) scheme, just like the manufacturer’s EVs. This scheme reduces the upfront cost by a significant Rs 3.91 lakh.

As mentioned earlier, the MG Hector Tomahawk PHEV is the sole plug-in hybrid in India, offering a more fuel-efficient alternative to three-row SUVs such as the Tata Safari and Mahindra XUV 7XO.

Prices are ex-showroom, India.

Ather Konarc vs Bajaj Chetak: किस Electric Scooter में है ज्यादा दम? कीमत, रेंज, स्पीड और फीचर्स की पूरी तुलना

Ather Konarc vs Bajaj Chetak: किस Electric Scooter में है ज्यादा दम? कीमत, रेंज, स्पीड और फीचर्स की पूरी तुलना

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इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में Ather Energy ने Ather Konarc के जरिए फैमिली इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में अपनी दावेदारी मजबूत की है। इसका मुकाबला बाजार में पहले से मौजूद Bajaj Chetak जैसे लोकप्रिय इलेक्ट्रिक स्कूटर से है। बड़ी बात यह है कि दोनों स्कूटर में 3.5 kWh बैटरी पैक दिया गया है, लेकिन रेंज, टॉप स्पीड, फीचर्स, स्टोरेज और चार्जिंग के मामले में दोनों का फोकस अलग-अलग है। अगर आप फैमिली के लिए नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो दोनों के बीच यह तुलना आपके लिए काफी काम की हो सकती है।

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 Ather Konarc vs Bajaj Chetak: कीमत

 

Ather Konarc S 161 की एक्स-शोरूम कीमत ₹1.45 लाख है। वहीं Bajaj Chetak C3501 की एक्स-शोरूम कीमत बेंगलुरु में करीब ₹1.52 लाख है। इस हिसाब से Ather Konarc करीब ₹7,000 सस्ता है।

Battery और Range में कौन आगे?

दोनों इलेक्ट्रिक स्कूटर में 3.5 kWh बैटरी मिलती है, लेकिन दावा की गई रेंज में Ather Konarc आगे है।

  • Ather Konarc S 161: 161 km IDC रेंज
  • Bajaj Chetak C3501: 153 km रेंज
  • Ather ने SmartEco मोड में 130 km TrueRange का भी दावा किया है।

यानी कागज पर देखें तो Ather Konarc करीब 8 km ज्यादा IDC रेंज देता है।

  •  Top Speed में Bajaj Chetak आगे
  • स्पीड के मामले में Bajaj Chetak बाजी मारता है।
  • Chetak C3501 की टॉप स्पीड 80 km/h है, जबकि Ather Konarc S 161 की टॉप स्पीड 70 km/h है।
  • यानी Chetak की टॉप स्पीड Konarc से 10 km/h ज्यादा है।

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Boot Space में भी Chetak आगे

अगर आपके लिए स्कूटर में ज्यादा सामान रखने की जगह महत्वपूर्ण है, तो Bajaj Chetak बेहतर विकल्प नजर आता है।  Chetak का एक बड़ा फायदा इसका 35 लीटर का बूट स्पेस है। Chetak में 4 लीटर ज्यादा बूट स्पेस मिलता है, जो रोजाना के फैमिली इस्तेमाल में उपयोगी हो सकता है।

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 Features में Ather Konarc का पलड़ा भारी

 

Ather Konarc को टेक्नोलॉजी के लिहाज से ज्यादा एडवांस पैकेज के साथ पेश किया गया है। इसमें AtherStack Pro, OTA Updates, Bluetooth और SIM Connectivity जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा Ather App Integration, रिमोट चार्जिंग स्टेटस और Theft/Tow Alerts भी दिए गए हैं। इसके टॉप-स्पेक वर्जन में 7-inch DeepView Display मिलता है।

Bajaj Chetak में क्या मिलता है?

Bajaj Chetak C3501 में 5-inch TFT Touchscreen दिया गया है। इसमें Integrated Google Maps, OTA Updates, Hill-Hold और अलग-अलग Ride Modes मिलते हैं।

 

 Charging में Chetak की बड़ी बढ़त

 

चार्जिंग के मामले में Bajaj Chetak C3501 को बड़ा फायदा मिलता है। इसके टॉप वेरिएंट में 950W On-board Charger दिया गया है। इससे इसकी सामान्य चार्जिंग स्पीड Ather Konarc की तुलना में बेहतर हो जाती है और 0-80% चार्जिंग में Chetak को बढ़त मिलती है।

  Ather Konarc या Bajaj Chetak, कौनसा आपके लिए बेहतर

 

अगर आपकी प्राथमिकता ज्यादा रेंज और आधुनिक टेक्नोलॉजी है तो कागज पर Ather Konarc S 161 ज्यादा आकर्षक नजर आता है। इसमें ज्यादा IDC रेंज, बड़ा 7-inch डिस्प्ले और कई कनेक्टेड फीचर्स मिलते हैं। वहीं, अगर आपको ज्यादा टॉप स्पीड, बड़ा बूट स्पेस और तेज स्टैंडर्ड चार्जिंग चाहिए तो Bajaj Chetak C3501 बेहतर विकल्प हो सकता है।

 

Ather Konarc चुनें अगर:

  • ज्यादा रेंज चाहिए
  •  ज्यादा टेक्नोलॉजी और कनेक्टेड फीचर्स चाहिए
  • बड़ा TFT डिस्प्ले पसंद है
  •  कम कीमत में स्कूटर चाहिए

 

Bajaj Chetak चुनें अगर

  • ज्यादा टॉप स्पीड चाहिए
  •  ज्यादा बूट स्पेस चाहिए
  • तेज चार्जिंग प्राथमिकता है
  •  ज्यादा किलोमीटर की वाहन वारंटी चाहते हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्‍स 

दोनों स्कूटर में बैटरी क्षमता समान है, लेकिन उनका फोकस अलग है। Ather Konarc रेंज और टेक्नोलॉजी पर जोर देता है, जबकि Bajaj Chetak स्पीड, प्रैक्टिकलिटी और चार्जिंग सुविधा को प्राथमिकता देता है।

OTT Releases This Week: इस हफ्ते होगा मनोरंजन का धमाका, गांधारी, धमाल 4, तक ये फिल्में-शो होने वाले हैं रिलीज

OTT Releases This Week: सितंबर की शुरुआत कई तरह की दिलचस्प स्ट्रीमिंग फिल्मों और सीरीज के साथ हो रही है। इनमें एक मां की अपने खोए हुए बच्चे की तलाश और इंटरनेशनल गैंग वॉर, घटनाओं की जांच और कोल्ड वॉर के समय के सर्वाइवल एडवेंचर तक शामिल हैं। तापसी पन्नू ‘गंधारी’ में एक ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो अपनी बेटी को खोजने की बेताब कोशिश में बच्चों की तस्करी करने वाले नेटवर्क की जड़ों तक पहुंच जाती है।

वहीं, अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी ‘धमाल 4’ में खजाने की तलाश के मजेदार हंगामे के लिए फिर से साथ आ रहे हैं। साथ ही, थियो जेम्स और काया स्कोडेलेरियो ‘द जेंटलमैन’ के दूसरे सीज़न में हॉर्नमैन-ग्लास क्रिमिनल नेटवर्क को ब्रिटेन से बाहर ले जा रहे हैं।

पीरियड रोमांस और कोर्टरूम ड्रामा से लेकर कर्नाटक संगीत, हॉरर-कॉमेडी और डॉक्यूमेंट्री तक, यहां 1 सितंबर से 6 सितंबर के बीच रिलीज़ होने वाली प्रमुख OTT फिल्में और सीरीज दी गई हैं।

‘गंधारी’- नेटफ्लिक्स, 3 सितंबर

तापसी पन्नू इस डार्क एक्शन थ्रिलर में बानी का किरदार निभा रही हैं, जो एक ऐसी मां है जिसकी लाइफ तब तहस-नहस हो जाती है जब उसकी छोटी बेटी अचानक एक भीड़ भरे रेलवे स्टेशन से गायब हो जाती है। बच्ची को ढूंढने की उसकी बेताब कोशिशें तब और भी खौफनाक मोड़ ले लेती हैं। पन्नू के साथ इशवाक सिंह, छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी, मीता वशिष्ठ और जतिन सरना अहम भूमिकाओं में हैं।

धमाल 4 – नेटफ्लिक्स, 4 सितंबर

खजाना वापस आ गया है, और जाहिर है, उसे खोजने के लिए पागलपन से भरे लोग भी वापस आ गए हैं। इंद्र कुमार की स्लैपस्टिक फ़्रैंचाइज़ी अपनी चौथी किस्त के साथ लौट रही है, जिसमें गुड्डू, लल्लन, आदि और मानव एक बार फिर रातों-रात अमीर बनने की उम्मीद में उलझते-भटकते नजर आएंगे। ‘टोटल धमाल’ के बाद अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी फिर से एक साथ आ रहे हैं, साथ ही रवि किशन, संजय मिश्रा, ईशा गुप्ता, संजीदा शेख और अंजलि आनंद भी इस बड़ी स्टार कास्ट का हिस्सा हैं।

द जेंटलमैन सीजन 2 – नेटफ्लिक्स, 3 सितंबर

रे विंस्टन, डैनियल इंग्स, जोली रिचर्डसन, विनी जोन्स, जियानकार्लो एस्पोसिटो, जैस्मीन ब्लैकबोरो और पियर्स क्विगली की वापसी हो रही है। इस बढ़ते हुए क्रिमिनल यूनिवर्स में ह्यू बॉनविले, बेंजामिन क्लेमेंटाइन, बेनेडेट्टा पोरोकारोली, मिशेल मोरोन, सर्जियो कास्टेलिटो और अमरा मल्लासी भी शामिल हो रहे हैं, साथ ही बॉक्सर क्रिस यूबैंक जूनियर और टेलीविज़न प्रेजेंटर माया जामा भी नजर आएंगे।

लवसिक – नेटफ्लिक्स, 2 सितंबर

1910 के दशक में सेट इस सात-एपिसोड वाले मैक्सिकन पीरियड ड्रामा में उलझनों के बीच रोमांस की कहानी दिखाई गई है। रेनाटा वाका ने वियोलेटा का किरदार निभाया है, जो एक ताकतवर परिवार में पैदा हुई यंग महिला है। उसके सामाजिक रुतबे के साथ वफादारी, शादी और भविष्य को लेकर कुछ तय उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।

बिग बॉस 20- JioHotstar, 6 सितंबर 2026

सलमान खान के होस्ट वाला पॉपुलर रियलिटी शो बिग बॉस 20 अपने नए सीजन के साथ कमबैक कर रहा है। शो में नए कंटेस्टेंट्स, टास्क, विवाद और अलग-अलग गेम डायनामिक्स देखने को मिलने वाले हैं।

नोमुरा ने दी इस दिग्गज ऑटो कंपनी के शेयर खरीदने की सलाह, एक साल में 29% चढ़ा स्टॉक

इस शेयर ने बीते एक साल में निवेशकों का करीब 29 फीसदी रिटर्न दिया है। इस दौरान शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी का रिटर्न निगेटिव रहा है। हम बात कर रहे हैं दोपहिया बनाने वाली दिग्गज कंपनी टीवीएस मोटर की। यह कंपनी स्कूटी, मोटरसाइकिल और थ्री-व्हीलर्स बनाती है। यह इलेक्ट्रिक दो-पहिया और थ्री-व्हीलर्स भी बनाती है।

विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने TVS Motor के शेयरों को खरीदने की अपनी सलाह बनाए रखी है। उसने पेमन कारगर की डायरेक्टर एवं सीईओ पद पर नियुक्ति के बाद शेयर पर अपनी बाय रेटिंग बनाए रखी है। कारगर की नियुक्ति 27 जनवरी, 2027 से प्रभावी होगी। वह केएन राधाकृष्णन की जगह लेंगे, जो जनवरी के आखिर तक अपने पद पर बने रहेंगे। उसके बाद वह जुलाई 2027 में कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) तक कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर रहेंगे।

केएन राधाकृष्णन ने 2004 में टीवीएस मोटर में नौकरी शुरू की थी। वह 2008 में कंपनी के प्रेसिडेंट बन गए। वह 2018 में डायरेक्टर और सीईओ बने। उनके कार्यकाल में टीवीएस मोटर का रेवेन्यू सीएजीआर 16 फीसदी और टैक्स बाद प्रॉफिट का सीएजीआर 30 फीसदी रहा। FY08 में कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 8.3 अरब रुपये था। यह 28 अगस्त को बढ़कर 2.05 लाख करोड़ रुपये हो गया।

कारगर ने टीवीएस मोटर में बतौर प्रेसिडेंट (इंटरनेशनल बिजनेस) अप्रैल 2025 में नौकरी शुरू की थी। उन्हें दुनिया के कई देशों में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में काम करने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। इनमें यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट शामिल हैं। टीवीएस मोटर में आने से पहले वह Infiniti के ग्लोबल चेयरमैन एवं प्रेसिडेंट थे। यह निसान का लग्जरी ब्रांड है।

ब्रोकरेज फर्म ने बताया है कि नॉर्टन की जल्द लॉन्चिंग से प्रीमियम सेगमेंट में एग्जिक्यूशन पर नजरें होंगी। उसने कहा है कि नए सीईओ के तहत कंपनी के प्रीमियम और ग्लोबल सेगमेंट पर ज्यादा फोकस होगा। इसकी वजह यह हहै कि कारगर को लग्जरी और ग्लोबल ब्रांड्स का व्यापक अनुभव है।

TVS Motor का शेयर 31 अगस्त को 0.41 फीसदी चढ़कर 4,322 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, शेयर बाजारों पर दबाव दिखा। निफ्टी 0.39 फीसदी यानी 95 अंक गिरकर 24,080 पर रहा। सेंसेक्स 0.40 फीसदी यानी 307 अंक गिरकर 76,957 पर क्लोज हुआ। हांलांकि, बैंक निफ्टी हरे निशान में बंद हुआ।

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए कितने की करनी होगी मंथली SIP? जानिए 15, 20 और 25 साल का पूरा कैलकुलेशन

Monthly SIP For ₹1 Crore Retirement Corpus: अपने रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को बिना किसी आर्थिक तंगी के सुकून से जीने के लिए एक बड़ा फंड होना बेहद जरूरी है। आज के दौर में महंगाई और जीवनशैली के खर्चों को देखते हुए कम से कम ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट गोल एक बुनियादी जरूरत बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि इस ₹1 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपको हर महीने कितना निवेश करना होगा?

म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) के जरिए रेगुलर निवेश करके आप आसानी से ₹1 करोड़ का फंड तैयार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड इक्विटी स्कीम्स ने लंबी अवधि में औसतन 12% का सीएजीआर रिटर्न दिया है। आइए समझते हैं कि 15, 20 और 25 साल की समय सीमा के हिसाब से आपको हर महीने कितने रुपये की SIP शुरू करनी होगी।

1. 15 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 40-45 साल के करीब है और आपके पास रिटायरमेंट के लिए केवल 15 साल का समय बचा है, तो आपको कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए थोड़ी बड़ी रकम निवेश करनी होगी:

  • लक्ष्य: ₹1 करोड़
  • समय अवधि: 15 साल (180 महीने)
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • जरूरी मंथली SIP: ₹20,017 (करीब ₹20,000 प्रति महीने)

गणित का पूरा हिसाब:

कुल निवेश: ₹36,03,060

अनुमानित वेल्थ गेन: ₹63,96,940

कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

2. 20 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आप 35-40 साल की उम्र में अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर रहे हैं और आपके पास 20 साल का समय है, तो आपका मंथली SIP अमाउंट काफी घटकर आधा रह जाता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹10,009 (करीब ₹10,000 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹24,02,160
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹75,97,840
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

3. 25 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है और आप अपने करियर की शुरुआत में ही रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग (Chakravridhi) का जादू सबसे बेहतरीन काम करता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹5,270 (करीब ₹5,300 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹15,81,000
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹84,19,000
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

स्मार्ट टिप: Step-Up SIP से आसान होगी राह

अगर आप शुरुआत में ही ₹10,000 या ₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं कर सकते, तो आप Step-Up SIP का सहारा ले सकते हैं। इसमें आप हर साल अपनी सैलरी या आमदनी बढ़ने के साथ अपनी SIP रकम में 10% का इजाफा कर सकते हैं। ऐसा करने पर आप बहुत छोटी मंथली रकम (जैसे- ₹2,500 – ₹3,000) से शुरुआत करके भी समय से पहले 1 करोड़ रुपये का गोल हासिल कर सकते हैं।

एक्सपर्ट्स की माने तो रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे महत्वपूर्ण कारक आपकी उम्र और समय है। जितना जल्दी आप निवेश की शुरुआत करेंगे, जेब पर उतना ही कम बोझ पड़ेगा और कंपाउंडिंग का फायदा उतना ही ज्यादा मिलेगा। अगर आप भी 1 करोड़ रुपये का फंड बनाना चाहते हैं, तो आज ही अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार म्यूचुअल फंड्स में SIP की शुरुआत करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Zomato ने ‘एनालॉग डिश’ पर कसा शिकंजा, नियमों का पालन न करने वाले रेस्टोरेंट्स होंगे डीलिस्ट

Zomato: फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने सोमवार को अपने प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड रेस्टोरेंट्स के लिए एनालॉग चीज, पनीर या दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स की बिक्री को लेकर सख्त नियम लागू करने का ऐलान किया है। कंपनी ने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट बेचने वाले रेस्टोरेंट्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी।

Zomato ने साफ किया है कि अगर कोई रेस्टोरेंट इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो कंपनी उसे अपने प्लेटफॉर्म से हटा सकती है (डीलिस्ट कर सकती है)।

‘एनालॉग’ डिश में पारंपरिक सामग्री की जगह सस्ती या वैकल्पिक चीजों (जैसे असली दूध या चीज की जगह वनस्पति तेल) का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इनका रूप-रंग और स्वाद वैसा ही रहता है।

महाराष्ट्र की कार्रवाई का असर

बता दें कि यह कदम महाराष्ट्र में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की राज्य-व्यापी कार्रवाई और दिल्ली के फाइव-स्टार होटलों में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की जांच के बाद खाद्य सुरक्षा पर फिर से ध्यान दिए जाने के बीच उठाया गया है।

प्लेटफॉर्म से डीलिस्ट होंगे रेस्टोरेंट पार्टनर 

Zomato ने कहा कि जिन डिश में ‘एनालॉग डेयरी’ होने की बात रेस्टोरेंट पार्टनर ने बताई है, उन्हें तुरंत प्रभाव से प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।

Zomato ने आगे कहा कि जो रेस्टोरेंट पार्टनर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा।

सोमवार को प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड व्यापारियों को भेजे गए एक मैसेज में Zomato ने कहा, “हमारी प्राथमिकता यह पक्का करना है कि ग्राहकों को ऐसा खाना मिले जो सही जानकारी वाला हो, सुरक्षित हो और उम्मीद के मुताबिक क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करता हो।”

एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स पर जीरो टॉलरेंस

Zomato ने कहा, “इसीलिए, हम अपने प्लेटफॉर्म पर एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर और दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाले खाने के सामान की लिस्टिंग और सप्लाई को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ लागू कर रहे हैं।”

फूड डिलीवरी एग्रीगेटर ने कहा कि यह कदम फूड सेफ्टी और रेगुलेटरी जरूरतों के मुताबिक, अपने ग्राहकों के लिए पारदर्शिता और खाने की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए उठाया जा रहा है।

Zomato ने कहा, “जिन रेस्टोरेंट ने पहले ही अपने मेन्यू में एनालॉग चीज, एनालॉग पनीर या दूसरे एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल की जानकारी दी है, उनके ऐसे आइटम तुरंत प्लेटफॉर्म से हटा दिए जाएंगे।”

इसने रेस्टोरेंट पार्टनर्स से तुरंत कुछ कदम उठाने को कहा है, जैसे: असली डेयरी प्रोडक्ट्स अपनाना; जिन मामलों में तुरंत बदलाव मुमकिन न हो, वहां अपने मेन्यू से एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट्स वाली चीजें हटाना; और इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जांच करने और Zomato पर लिस्टेड प्रोडक्ट्स की सही जानकारी पक्का करने के लिए रेस्टोरेंट सप्लायर्स द्वारा दिए गए प्रोडक्ट लेबल और सामग्री की जानकारी का रिव्यू करना।

Zomato ने रेस्टोरेंट को दी सख्त चेतावनी

Zomato ने कहा, “अगर कोई रेस्टोरेंट नियमों का पालन नहीं करता पाया जाता है, तो Zomato के पास ऐसे रेस्टोरेंट को प्लेटफॉर्म से हटाने का अधिकार है। इसके अलावा, हम अपनी पॉलिसी और लागू कानूनों के तहत कोई भी दूसरी कार्रवाई भी कर सकते हैं।”

कंपनी ने यह भी कहा कि अगर नियमों का पालन न करने वाले प्रोडक्ट्स ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं, तो इससे होने वाले किसी भी नुकसान, लागत, डैमेज या खर्च की भरपाई करने का अधिकार भी Zomato के पास है।

CEO ने क्या कहा?

Zomato के CEO आदित्य मंगला ने कहा: “Zomato में हमारा मुख्य मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बेहतर खाना पहुंचाना है। इसका मतलब है ग्राहकों की सेहत का ध्यान रखना और हमारे रेस्टोरेंट पार्टनर्स द्वारा लिस्ट और सर्व किए जाने वाले खाने के लिए साफ स्टैंडर्ड बनाए रखना। यह पॉलिसी उसी कमिटमेंट को दिखाती है, जिसे हम उन पार्टनर्स के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं जिनकी सोच भी ऐसी ही है।”

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Nepal Flood : बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो, अनजान शख्स बना फरिश्ता, बची 370 से ज्यादा जानें, स्कूल में ऐसे हुआ जिंदगी का सबसे बड़ा Rescue

Nepal Flood : बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो, अनजान शख्स बना फरिश्ता, बची 370 से ज्यादा जानें, स्कूल में ऐसे हुआ जिंदगी का सबसे बड़ा Rescue

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'बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो…' चिल्लाते हुए स्कूल के पास से गुजर रहे इस अज्ञात व्यक्ति ने जो आवाज लगाई, वह किसी आधिकारिक अलर्ट से पहले उत्तर्गया पब्लिक स्कूल, बेत्रावती तक पहुंच गई। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच एक अनजान शख्स की कुछ शब्दों की चेतावनी ने सैकड़ों जिंदगियां बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक बुधवार की सुबह त्रिशूली बाजार से कुछ किलोमीटर दूर, नदी के उस पार बेत्रावती में उत्तरगया पब्लिक स्कूल के पास से भागते हुए एक अनजान आदमी ने कहा था कि बाढ़ आ रही है भागो। उस वक्त स्कूल में पढ़ाई का दिन शुरू ही हुआ था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में बाढ़ का पानी रास्तों और आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में लेने वाला है। स्कूल में न तो सायरन बजा था, न कोई ऑटोमेटेड मैसेज आया था और न ही कोई आधिकारिक चेतावनी पहुंची थी,  लेकिन उस अनजान शख्स की आवाज ने सबको खतरे का एहसास करा दिया। 

 

नाश्ता कर रहे थे हॉस्टल के छात्र, तभी सुनाई दी आवाज

बाढ़ की चेतावनी जब स्कूल परिसर में पहुंची, तब हॉस्टल में रहने वाले छात्र नाश्ता कर रहे थे। जैसे ही उन्हें पता चला कि बड़ी बाढ़ आने वाली है, स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। कक्षा 7 से 10 तक के बड़े छात्र खुद ऊंचाई की तरफ भागने लगे, जबकि शिक्षकों ने छोटे बच्चों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी संभाली। कुछ बच्चे कीचड़ में तेजी से नहीं चल पा रहे थे तो स्कूल स्टाफ ने उन्हें उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

 

कुछ ही मिनटों में छात्र स्कूल के पीछे मौजूद जंगल और ऊंची पहाड़ी की ओर पहुंचने लगे। बाढ़ के पानी ने सड़क और सामान्य रास्तों को काट दिया था।  नेपाल की यह घटना सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा की कहानी नहीं है। यह हमें बताती है कि कभी-कभी एक छोटी सी चेतावनी भी सैकड़ों जिंदगियों के बीच और मौत के बीच दीवार बन सकती है।

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न कोई सरकारी सिस्टम, न सायरन और न कोई आधिकारिक संदेश—लेकिन एक अनजान व्यक्ति ने खतरा देखा और बिना यह सोचे कि उसे इसका क्या मिलेगा, लोगों को चेतावनी देने लगा।

 

उसकी एक आवाज- 'बड़ी बाढ़ आ रही है, भागो…' 

 

शायद सैकड़ों लोगों के लिए जिंदगी की पुकार बन गई। और जब खतरा सामने आया तो शिक्षकों ने भी अपने छात्रों को अकेला नहीं छोड़ा। बड़े बच्चों ने छोटे बच्चों का साथ दिया और स्टाफ ने उन बच्चों को भी उठाकर सुरक्षित पहुंचाया जो खुद भाग नहीं पा रहे थे।