असम में मुस्लिम शादियों के रजिस्ट्रेशन का नया नियम, कैबिनेट ने लिए कई अहम फैसले!

गुवाहाटी, 24 सितंबर (PTI), असम कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को कई फैसलों को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बैठक के बाद बताया कि राज्य में मुस्लिम शादियों का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य होगा। इसके लिए ‘असम मुस्लिम विवाह पंजीकरण (अनिवार्य) नियम, 2026’ को मंजूरी दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पहले काजियों से मुस्लिम शादियों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई थी, लेकिन तब इसकी जगह दूसरी व्यवस्था नहीं हुई थी। अब इस कमी को दूर कर पूरे असम में रजिस्ट्रेशन की एक जैसी प्रोसेस बनाई है। ये नए नियम ‘असम मुस्लिम विवाह और तलाक अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024’ की धारा 25 के तहत बनाए गए हैं।

कैबिनेट ने महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) मेंबर को आधार बनवाने के लिए एक बार की छूट दी है। अब ये महिलाएं 31 मार्च 2027 तक आधार एनरोलमेंट करा सकेंगी।

ये लिए कैबिनेट ने 5 बड़े फैसले

1. महिला SHG को आधार में राहत: सरकार ने 16 साल से ऊपर के लोगों के नए आधार बनाने पर रोक लगाई थी, लेकिन SHG की कई महिलाओं का आधार नहीं होने से बैंक लोन अटक रहा था। इसलिए उन्हें 31 मार्च 2027 तक आधार बनवाने की वन-टाइम छूट दी गई है।

2. मछली पालन को बूस्ट: 796.88 करोड़ के SWIFT प्रोजेक्ट को मंजूरी। इसमें 637 करोड़ ADB देगा। इससे राज्य के 102 बील (तालाब) का विकास होगा और मछली पालकों को फायदा मिलेगा।

3. 11,000 करोड़ का निवेश: JK लक्ष्मी सीमेंट राज्य में क्लिंकर यूनिट और 4 ग्राइंडिंग यूनिट लगाएगी। इससे 2,000 लोगों को नौकरी मिलेगी।

4. चीनी सस्ती: अक्टूबर में NFSA लाभार्थियों को 30 रुपये किलो चीनी मिलेगी, जिससे 100 रुपये में दाल और चीनी दोनों मिल जाएंगे।

5. जमीन अलॉट: हाजो में 504 बीघा जमीन इंडस्ट्रियल एस्टेट के लिए और श्रीभूमि में एग्रीकल्चर कॉलेज के लिए 256 बीघा जमीन अलॉट की गई है।

कैबिनेट ने 1 सितंबर से 166 मस्टर रोल, कैजुअल और फिक्स्ड-पे इम्प्लॉई को फिक्स्ड पेमेंट देने की मंजूरी दी है। साथ ही नवंबर में दो ऑटोनॉमस काउंसिल के चुनाव कराने और UNNATI 2024 में एलिजिबल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को सब्सिडी देने का फैसला किया गया है।

महाराष्ट्र UCC पैनल में विवाद: सार्वजनिक फीडबैक पर मतभेद के बाद जस्टिस आरसी चव्हाण का इस्तीफा, प्रक्रिया पर उठाए सवाल

UCC Panel Shock In Maharashtra: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर गठित समिति में अब मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। समिति की दूसरी बैठक के दो दिन बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने समिति से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आम लोगों से सुझाव और फीडबैक लेने की प्रक्रिया को लेकर असहमति जताई है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के लिए नियम और सिफारिशें तैयार करने के लिए जुलाई 2026 में सात सदस्यीय समिति बनाई थी।

खास बात यह है कि इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं। इस समिति को अपनी रिपोर्ट देने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। जस्टिस चव्हाण ने कमिटी की ऑनलाइन मीटिंग के कुछ घंटे बाद 19 सितंबर को अपना इस्तीफा भेज दिया। राज्य सरकार ने सोमवार 21 सितंबर को इसे मंजूरी दे दी।

क्या है पूरा विवाद?

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस आरसी चव्हाण ने इस्तीफे के पीछे मुख्य रूप से जनता से फीडबैक लेने की प्रक्रिया को लेकर मतभेद का हवाला दिया है। उनका कहना है कि समिति को पहले क्वेश्चनेयर (Questionnaire) को अंतिम रूप देना था। लेकिन समिति की अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई की ओर से कथित तौर पर क्वेश्चनेयर पहले ही जारी कर दी गई। चव्हाण ने समिति की बैठक में एक ऐसे व्यक्ति की कथित मौजूदगी और भूमिका पर भी सवाल उठाया, जो समिति का सदस्य नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार, चव्हाण ने इसके बाद 19 सितंबर को अपना इस्तीफा दिया।

समिति को भेजे अपने ईमेल में जस्टिस चव्हाण ने कहा कि मीटिंग के एजेंडा में से एक UCC पर लोगों की राय जानने के लिए क्वेश्चनेयर (questionnaire) को अंतिम रूप देना था। उन्होंने कहा, “तीन सदस्यों ने अपनी बात रखने की कोशिश की, जैसे कि जवाब देने वालों को सिर्फ ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देना हो, या फिर सदस्य डॉ. सुवर्णा रावल की देखरेख में प्रोफेसरों से क्वेश्चनेयर की जल्द और पेशेवर तरीके से जांच करवाई जाए।”

उन्होंने आगे लिखा, “माननीय चेयरपर्सन पहले ही अपने द्वारा तैयार की गई क्वेश्चनेयर सभी को भेज चुकी थीं और कहा था कि वेबसाइट तैयार होने पर इसे अपलोड कर दिया जाएगा। इस तरह, आज की मीटिंग के एजेंडा का तीसरा और आखिरी मुद्दा पूरा हो गया। इसलिए, समय और इंटरनेट बचाने के लिए मैंने लॉग-आउट कर दिया।”

सात सदस्यीय समिति में कौन-कौन?

महाराष्ट्र सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने और उसके क्रियान्वयन से जुड़ी सिफारिशें देने के लिए सात सदस्यीय समिति बनाई है। चव्हाण के इस्तीफे के बाद समिति की संरचना में बदलाव आया है। इसमें जस्टिस रंजना देसाई के अलावा ये लोग भी शामिल हैं:-

  • जस्टिस आरसी चव्हाण- पूर्व बॉम्बे हाई कोर्ट जज
  • जस्टिस एसजी मेहरे- पूर्व हाई कोर्ट जज
  • डीके जैन- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव
  • वीरेंद्र सराफ- पूर्व एडवोकेट जनरल
  • रमेश पतांगे- संवैधानिक विशेषज्ञ
  • सुवर्णा रावल- शिक्षाविद

UCC पर महाराष्ट्र सरकार की क्या प्लान है?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 सितंबर को कहा था कि समिति अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के बाद सरकार UCC को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। सरकार ने संकेत दिया है कि UCC से जुड़ा विधेयक विधानसभा के नागपुर में होने वाले शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है। समिति को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है।

जनता की राय लेने की प्रक्रिया क्यों अहम?

UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। ऐसे में समिति द्वारा आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव लेने की प्रक्रिया उसके मसौदे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी प्रक्रिया को लेकर समिति के भीतर मतभेद सामने आने से महाराष्ट्र की UCC प्रक्रिया पर अब ध्यान और बढ़ गया है। हालांकि, इस्तीफा समिति की अंतिम सिफारिशों या प्रस्तावित UCC के अंतिम स्वरूप का संकेत नहीं है। ये चीजें समिति की आगे की कार्यवाही और रिपोर्ट से स्पष्ट होंगी।

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Asian Games में स्पोर्ट्स प्रेसेंटर की भूमिका में दिखेंगी सानिया मिर्जा

आईची नागोया-जापान में शुरु हुए एशियाड में भारत की पूर्व लॉन टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा एक स्पोर्ट्स प्रेजेंटर की भूमिका निभाएंगी। यह घोषणा सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क ने की। उनका साथ देंगी बैडमिंटन की ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल, पूर्व हॉकी डबल ओलंपिक मेडलिस्ट पी आर श्रीजेश, ओलंपिक पदक विजेता विजेंदर सिंह, पूर्व एथलेटिक्स खिलाड़ी अंजू बॉबी जॉर्ज, पूर्व टेबल टेनिस खिलाड़ी नेहा अग्रवाल शर्मा।

मिर्जा ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने कुल मिलाकर तीन युगल और तीन मिश्रित युगल प्रमुख खिताब जीते हैं। ऑस्ट्रेलिया ओपन से पहले उन्होंने अपने 20 साल के टेनिस करियर से विदा लेने का ऐलान किया।

सानिया ने महेश भूपति के साथ मिलकर 2009 में ऑस्ट्रेलियाई ओपन और 2012 में फ्रेंच ओपन का मिश्रित युगल खिताब जीता था। उन्होंने 2014 में ब्राजील के ब्रूनो सोरेस के साथ मिलकर अमेरिकी ओपन का मिश्रित युगल खिताब अपने नाम किया था।

पाक क्रिकेट से हुई शादी फिर हुआ तलाक

2010 में भारतीय टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा ने हैदराबाद में अपने बचपन के दोस्त सोहराब मिर्जा के साथ सगाई तोड़कर पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से निकाह कर लिया था। शोएब का पूरा परिवार कराची में रहता है लेकिन शादी के बाद सानिया और शोएब दुबई के अपने घर में शिफ्ट हो गए थे। अब इन दोनों का एक बेटा भी है।भारत की पूर्व टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा (Sania Mirza) से अलग होने की अफवाहों के बीच पाकिस्तान क्रिकेट स्टार शोएब मलिक (Shoaib Malik) ने लोकप्रिय पाकिस्तानी अभिनेत्री सना जावेद (Sana Javed) से शादी कर ली।


UCC Row In NDA: 2029 तक 21 राज्यों में UCC के अमित शाह के दावे को मिला JDU का चैलेंज! TDP और चिराग पासवान का भी सख्त रुख

UCC Row In NDA: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि 21 राज्यों की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह ने कहा, “तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू की है। मुझे विश्वास है कि BJP-NDA शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।”

शाह ने कहा कि सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। साथ ही दावा किया कि कई राज्यों में एक साल में दोषसिद्धि दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन साल के भीतर न्याय दिलाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35ए को बिना एक बूंद खून बहाए या एक गोली चलाए समाप्त किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच दशक से जारी नक्सलवाद को समाप्त किया है। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

UCC पर NDA में हलचल, JDU ने किया विरोध

अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे। फिर उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी। झा ने इस विषय पर पीटीआई से कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पार्टी यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख तय करेगी।

बिहार में लागू नहीं होने देंगे: श्याम रजक

इस बीच, बिहार में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक JDU के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया था। लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी ने भले ही नागरिक संहिता से जुड़े विधेयक का संसद में समर्थन किया था। लेकिन वह इसे राज्य में लागू करने के पक्ष में नहीं है। JDU के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रजक ने दावा किया कि इस मुद्दे पर पार्टी का रुख सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।

JDU विधायक दल के नेता एवं बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी यूसीसी पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के प्रवक्ता बोलेंगे। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष सुनने के बाद वह कुछ कहेंगे। JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूसीसी के मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेंगे। बिहार में भारतीय जनता पार्टी नीत राजग सरकार में JDU दूसरा सबसे बड़ा घटक है। अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है।

चिराग ने भी जताया विरोध

बिहार में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पहले ड्राफ्ट आए। इसमें सभी पक्षों के हित शामिल रहें। पासवान ने एक पोस्ट में लिखा, “भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएँ और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है। पांचवीं-छठी अनुसूची, आर्टिकल 371A व 371G, और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है। मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता- दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो> तत्पश्चात अवलोकन उपरांत पार्टी अपना मत रखेगी।”

TDP का मिला समर्थन

लोकसभा में TDP के नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हम इसका समर्थन करेंगे।” कृष्ण ने कहा, “अभी तो कोई चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन जब भी हमें इसकी जरूरत महसूस होगी, हम इस पर विचार करेंगे। इसे अपनाने से पहले हम निश्चित रूप से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को इसमें शामिल करेंगे।”

ओवैसी ने यूसीसी को लेकर शाह पर साधा निशाना

देश के 21 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकारों के 2029 से पहले यूसीसी लागू करने के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल मुसलमानों को निशाना बनाना चाहता है।नउन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और शाह संविधान के आर्टिकल 25 (जो धर्म की आजादी की गारंटी देता है) और आर्टिकल 14 (जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है) का उल्लंघन करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

ओवैसी ने कहा कि देश की आत्मा उसकी विविधता है। यूसीसी लागू करने का मतलब गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा नियुक्त विधि आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यूसीसी न तो जरूरी है और न ही वांछनीय। गोवा में यूसीसी के अलग-अलग प्रावधानों का जिक्र करते हुए, उन्होंने पूछा कि क्या शाह और भाजपा पश्चिमी राज्य में भी उसी यूसीसी को लागू करेंगे, जैसा उत्तराखंड जैसे भाजपा-शासित राज्यों में लागू है।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एन. चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार और चिराग पासवान जैसे NDA नेता यूसीसी के प्रावधानों का समर्थन करेंगे। दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-चीन संबंधों में आए सुधार पर ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या बेहतर द्विपक्षीय संबंधों का मतलब यह है कि भारत ने भारत-चीन सीमा पर अपने गश्त करने के अधिकार खो दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए थे।

‘सांप्रदायिक राजनीतिक के लिए कर रही यूसीसी का इस्तेमाल’

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस मुद्दे का इस्तेमाल सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के लिए कर रही है। माकपा ने कहा कि एकरूपता का मतलब हमेशा समानता नहीं होता और यूसीसी लागू करने की घोषणा से भाजपा का राजनीतिक इरादा स्पष्ट हो गया है।

माकपा ने आरोप लगाया कि BJP समान अधिकारों से जुड़े जटिल सवाल को सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के हथियार में बदल रही है। अगले लोकसभा चुनाव से पहले अपने हिंदुत्व वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। वाम दल ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और छात्रों की समस्याओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के बजाय भाजपा एक और विभाजनकारी अभियान चलाने को प्राथमिकता दे रही है।

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इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा ने की दूसरी शादी:पूर्व PAK प्रधानमंत्री से तलाक के 22 साल बाद आयरिश-ऑस्ट्रेलियाई करोड़पति को जीवनसाथी बनाया

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और क्रिकेटर इमरान खान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने 52 साल की उम्र में दूसरी शादी कर ली है। जेमिमा ने 62 साल के आयरिश-ऑस्ट्रेलियाई करोड़पति कैमरन ओ’राइली से शादी की है। दोनों की शादी इमरान खान से तलाक के 22 साल बाद हुई है। इमरान और जेमिमा का तलाक 2004 में हुआ था। हालांकि, जेमिमा और कैमरन ने खुद अपनी शादी की जानकारी सार्वजनिक नहीं की। जेमिमा की भाभी जेमिमा जोन्स ने इसकी जानकारी दी। जोन्स, जेमिमा के भाई बेन गोल्डस्मिथ की पत्नी हैं। उन्होंने 13 सितंबर को इंस्टाग्राम पर एक फोटो शेयर की। जेमिमा ने 1995 में इमरान खान से की थी शादी जेमिमा ने पहली शादी इमरान खान से 1995 में की थी। उस समय जेमिमा की उम्र सिर्फ 21 साल थी, जबकि इमरान खान 42 साल के थे। इमरान तब क्रिकेट की दुनिया में बड़ा नाम थे और राजनीति में कदम रखने की तैयारी कर रहे थे। दोनों की उम्र में 21 साल का अंतर था। इसके अलावा दोनों की संस्कृति भी अलग थी। इसी वजह से जेमिमा के माता-पिता इस रिश्ते को लेकर शुरुआत में चिंतित थे। शादी के बाद दोनों के दो बेटे हुए, सुलेमान ईसा और कासिम। जेमिमा और इमरान का जून 2004 में तलाक हो गया। तलाक के बाद जेमिमा अपने दोनों बच्चों के साथ लंदन लौट गईं। वहां उन्होंने डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर और स्क्रीनराइटर के तौर पर काम शुरू किया। निजी समारोह में हुई शादी डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, जेमिमा और कैमरन ने एक निजी समारोह में शादी की। शादी बेहद गुपचुप तरीके से हुई और इससे पहले मीडिया को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों की मुलाकात एक फिल्म और डॉक्यूमेंट्री पर काम करने के दौरान हुई थी। कैमरन इस प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर थे। पहले दोनों में दोस्ती हुई और बाद में यह रिश्ता आगे बढ़ गया। दोनों एक साल से ज्यादा समय से चुपचाप डेट कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने शादी कर ली। कैमरन ने ऑक्सफोर्ट यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की कैमरन ओ’राइली दिवंगत आयरिश मीडिया कारोबारी सर एंथनी ओ’राइली के बेटे हैं। उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। कैमरन ऑस्ट्रेलिया की बड़ी मीडिया कंपनियों में शामिल APN न्यूज एंड मीडिया के CEO भी रह चुके हैं। यह कंपनी अब ARN मीडिया के नाम से जानी जाती है। इसके बाद उन्होंने ‘बेयार्ड कैपिटल’ नाम की प्राइवेट इक्विटी कंपनी शुरू की। कैमरन की पहली शादी से चार बच्चे हैं। अरबपति परिवार से हैं जेमिमा जेमिमा गोल्डस्मिथ दिवंगत अरबपति कारोबारी सर जेम्स गोल्डस्मिथ और लेडी एनाबेल गोल्डस्मिथ की बेटी हैं। उनकी मां लंदन की मशहूर सोशलाइट थीं। लेडी एनाबेल का करीब एक साल पहले निधन हुआ था, जबकि जेमिमा के पिता सर जेम्स की मौत 1997 में हुई थी। जेमिमा लंबे समय से राजनीति, मीडिया और सामाजिक काम से जुड़ी रही हैं। पहली शादी और तलाक के बाद से उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को काफी हद तक मीडिया से दूर रखा है। दूसरी शादी के बारे में उन्होंने अब तक खुद सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। ———————- यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख किया पाकिस्तान ने भारतीय संसद पर हमले के आरोपी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के प्रमुख मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया है। पूरी खबर पढ़ें…

Amit Shah UCC: ‘2029 से पहले 21 राज्यों में लागू होगा UCC’: अमित शाह का बड़ा ऐलान, बोले- घुसपैठियों की पहचान कर डिपोर्ट करेंगे

Amit Shah UCC: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार (13) को कहा कि 21 राज्यों की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार की पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP की 25 साल की यात्रा का उल्लेख किया।

‘मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए’

अमित शाह ने कहा, “तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की है। मुझे विश्वास है कि भाजपा-राजग शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।”आपको बता दें कि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। साथ ही दावा किया कि कई राज्यों में एक साल में दोषसिद्धि दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन साल के भीतर न्याय दिलाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35A को बिना एक बूंद खून बहाए या एक गोली चलाए समाप्त किया गया। गृह मंत्री ने दावा किया कि कश्मीर अब भारत के साथ पूरी तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच दशक से जारी नक्सलवाद को समाप्त किया है और देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

90000 लोगों ने किया सरेंडर

शाह ने कहा, “नौ हजार से अधिक लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। आज हम पूर्वोत्तर को विकास के रास्ते पर लाए हैं।” उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमले और ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति स्थापित की है। मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) लागू करने के लिए क्या 1951 को आधार वर्ष माना जाएगा? इस सवाल पर शाह ने कहा कि केंद्र इस मुद्दे पर अपने सहयोगियों और राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर रहा है।

उन्होंने कहा, “हम इन मुद्दों पर अपने सहयोगियों और मणिपुर के राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर रहे हैं। जो भी फैसला होगा, हम आपको बताएंगे।” अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और मुंबई जैसे शहरों में उनकी पहचान किए जाने के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि सरकार उन्हें चिह्नित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों का खुलासा नहीं करेगी।

शाह ने चुटकी लेते हुए कहा, “आप गृहमंत्री से कह रहे हैं कि वह तरीकों को सार्वजनिक कर दें और आपको बता दें कि यह कैसे किया जाएगा। फिर हम उन्हें कैसे पकड़ेंगे? उन्हें भी पता चल जाएगा।”

अवैध घुसपैठियों पर एक्शन

शाह ने देश से अवैध घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें बाहर निकालने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा, “मैं अपने संकल्प को दोहराता हूं कि हम इस देश के एक-एक अवैध घुसपैठिये की पहचान करेंगे और एक-एक करके उन्हें देश से बाहर भेजेंगे।”

इस दौरान सरकार के एंटी ड्रग्स अभियान पर शाह ने कहा कि उन्होंने हाल में ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ शुरू किया है।इस अभियान के तहत हर राज्य का दौरा करेंगे। शाह ने कहा कि उन्होंने पिछले दिन एक मुख्यमंत्री से बात की थी। अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए पूरे दिन बैठक की जाएगी।

क्या है UCC?

समान नागरिक संहिता (UCC) का मतलब देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों से जुड़े समान नागरिक कानूनों की व्यवस्था से है। वर्तमान में इन विषयों पर अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं। UCC का उद्देश्य इन व्यक्तिगत मामलों में एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है।

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इटली की नेता और पूर्व विदेश मंत्री बोनिनो का निधन:महिलाओं के हक पर पोप से टकरा गई थीं एमा; 48 साल पुराना एबॉर्शन कानून बदलवाया

इटली की पूर्व विदेश मंत्री एमा बोनिनो को एक ऐसी महिला के रूप में याद किया जाएगा, जिसने अपनी निजी पीड़ा को लाखों महिलाओं के अधिकार की लड़ाई बना दिया। 26 साल की उम्र में जब उनका गर्भपात हुआ, तब इटली में यह गैरकानूनी था। इसके बाद उन्होंने तय किया कि दूसरी महिलाओं को एबॉर्शन के अपमान और असुरक्षित हालात से नहीं गुजरना पड़े। यूरोपीय आयुक्त भी रह चुकीं इटली की कद्दावर नेता एमा अपनी तीखी टिप्पणियों और मानवाधिकारों के प्रति अटूट निष्ठा के लिए जानी जाती थीं। उनका 78 वर्ष की उम्र में शुक्रवार को निधन हो गया। उनकी पार्टी ‘मोर यूरोप’ ने कहा कि देश ने सबसे दूरदर्शी, साहसी और स्वतंत्र सोच वाली नेता को खो दिया है। जानते हैं ​उनके राजनीतिक संघर्ष… निजी पीड़ा को बनाया इटली में क्रांति का नया हथियार – 1974 में जब इटली में गर्भपात गैरकानूनी था, तब 26 वर्षीय एमा ने एक क्लिनिक में गर्भपात कराया। – गर्भपात पर प्रतिबंध वाले 48 साल पुराने कानून के विरोध में पुलिस के सामने समर्पण किया। अपनी गिरफ्तारी से उपजी लहर को जनआंदोलन बनाया। – दबाव में संसद ने 1978 में 48 साल पुराने 1930 के कानून को बदलते हुए गर्भपात को कानूनी मान्यता दी। इससे पहले तलाक का कानून भी बनाया गया था। एमा ने कभी विवाह नहीं किया। एबॉर्शन के सवाल पर वेटिकन से भी टकराव रहा एमा ने वेटिकन चर्च के कड़े विरोध के बावजूद गर्भपात और तलाक को कानूनी दर्जा दिलवाने के अभियानों का नेतृत्व किया। महिला अधिकारों पर टकराव के बावजूद पोप फ्रांसिस के साथ उनकी अनूठी और गहरी दोस्ती भी थी। पोप फ्रांसिस अक्सर उनकी मानवीय पहलों की सराहना करते थे और उन्हें सबसे कमजोर तबके की आवाज उठाने वाली नेता कहते थे। कैंसर के बावजूद सक्रिय रहीं – 2015 में कैंसर का पता चलने के बाद भी एमा ने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। वह रंग-बिरंगे स्कार्फ पहनकर संसद से लेकर टीवी डिबेट्स में मानवाधिकारों की आवाज बुलंद करती रहीं। आखिरी बात: लड़ाइयां अभी बहुत हैं – बीमारी के बीच जब उनसे पूछा गया कि कौन सी लड़ाई बाकी है, तब कहा था, ‘बहुत सारी, जरूरत से भी ज्यादा- मानवाधिकार, वैश्विक भूख और स्वतंत्र वैज्ञानिक शोध। दस जन्म भी कम पड़ेंगे।’

BB 20 Final List: मैरीकॉम, आम्रपाली से लेकर पंचायत के ‘दामाद जी’ तक… जानें इस बार बिग बॉस के घर का कौन-कौन बढ़ाएगा पारा

Bigg Boss 20: बिग बॉस 20 का आखिरकार इंतजार खत्म हुआ। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने ‘बिग बॉस 20’ के होस्ट के रूप में एक बार फिर शो में वापसी की है। प्रीमियर एपिसोड में ही कंटेस्टेंट्स की एंट्री के साथ माहौल काफी रोमांचक नजर आया। शो के ग्रैंड प्रीमियर में सलमान खान काउबॉय लुक में नजर आए और उन्होंने अपने डांस से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। फैंस बेसब्री से इस सीजन का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, शो में शामिल होने वाले सभी कंटेस्टेंट्स की फाइनल लिस्ट भी सामने आ गई है। आइए जानते हैं इस बार बिग बॉस के घर में कौन-कौन से कंटेस्टेंट्स शामिल होने वाले हैं।

कनिका मान

‘बिग बॉस 20’ में सबसे पहले कनिका मान ने एंट्री ली। सलमान ने पानीपत की कनिका के काम की तारीफ की और बताया कि उनकी मां सलमा खान भी कनिका की फैन हैं। इसके बाद कनिका ने बिग बॉस के घर में कदम रखा और घर का जायजा लिया। बिग बॉस ने उन्हें कन्फेशन रूम में बुलाकर एक खास जिम्मेदारी दी। कनिका को ‘पपेट मास्टर’ बनाया गया है, जिसके तहत उन्हें घर में आने वाले कंटेस्टेंट्स पर एक खास ताकत इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा।

आसिफ खान

बिग बॉस 20 के घर में दूसरे प्रतियोगी के तौर पर अभिनेता आसिफ खान ने एंट्री ली। आसिफ खान को वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ और ‘पंचायत’ सीरीज से पहचान मिली थी। शो में सलमान खान ने उनका स्वागत किया। इस दौरान आसिफ ने बताया कि वह फिल्म ‘रेडी’ में सलमान खान के साथ जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम कर चुके हैं। अपनी जिंदगी के इस सफर को याद करते हुए आसिफ भावुक हो गए और उन्होंने अपनी मां के लिए भी खास संदेश दिया।

काजी अबरार

बिग बॉस 20 के घर में तीसरे कंटेस्टेंट के तौर पर सिंगर काजी अबरार ने कदम रखा। उन्हें ‘अफगान जलेबी’ गाने के लिए जाना जाता है। शो में सलमान खान ने काजी का स्वागत किया, जिसके बाद उन्होंने बताया कि कई साल पहले कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में वह सलमान के साथ मंच शेयर कर चुके हैं। घर में एंट्री के बाद काजी काफी उत्साहित नजर आए और लगातार अपनी बात रखते रहे।

ईशा रिखी

बिग बॉस 20 में पंजाबी एक्ट्रेस ईशा रिखी ने चौथी कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री ली। शो में उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और पति से अलगाव को लेकर खुलकर बात की। ईशा ने बिना नाम लिए बताया कि वह कभी अपने पति को हरे-भरे जंगल की तरह समझती थीं, लेकिन समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि इस रिश्ते में उनकी खुद की पहचान कहीं पीछे छूट रही है। इस बारे में बात करते हुए वह भावुक भी हो गईं। सलमान खान ने जब उनसे पति का नाम बताने के बारे में पूछा तो ईशा ने साफ कहा कि वह उनका नाम नहीं लेंगी, क्योंकि वह उनकी जिंदगी का बीता हुआ हिस्सा है।

आम्रपाली दुबे

बिग बॉस 20 के घर में भोजपुरी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री आम्रपाली दुबे ने पांचवीं कंटेस्टेंट के रूप में एंट्री की। शो में पहुंचकर उन्होंने सलमान खान से बातचीत की और कहा कि वह यहां दर्शकों को अपना नया और बदला हुआ अंदाज दिखाने के लिए तैयार हैं। आम्रपाली के स्वागत के लिए भोजपुरी अभिनेता निरहुआ भी शो में पहुंचे।

रोहेड खान

बिग बॉस 20 में ऑस्ट्रिया के अभिनेता और मॉडल रोहेड खान ने भी बतौर कंटेस्टेंट एंट्री ली। रोहेड इससे पहले सलमान खान की फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ में उनके साथ नजर आ चुके हैं। वह बॉलीवुड के अलावा यूरोप और इंटरनेशनल सिनेमा में भी काम कर चुके हैं। ऑस्ट्रिया में जन्मे रोहेड जर्मन, अंग्रेजी, दारी, फारसी और हिंदी भाषाएं बोलते हैं।

लव गिल और मैरी कॉम

बिग बॉस 20 में पंजाबी अभिनेत्री लव गिल और पूर्व बॉक्सर मैरी कॉम ने भी कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री की। शो में मैरी कॉम नीली ड्रेस में नजर आईं और उन्होंने सलमान खान के साथ बातचीत करते हुए अपनी पहली मुलाकात का किस्सा साझा किया। इस दौरान सलमान ने उनके लिए अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा का एक खास संदेश भी सुनाया। बता दें कि प्रियंका चोपड़ा फिल्म ‘मैरी कॉम’ में बॉक्सर मैरी कॉम का किरदार निभा चुकी हैं।

रैपर युंग DSA

बिग बॉस 20 में 22 साल के रैपर युंग DSA ने भी एंट्री ली। सलमान खान से बातचीत के दौरान युंग ने बताया कि वह यरवदा से आते हैं। यह सुनकर सलमान ने मजाकिया अंदाज में कहा, “मुझे ऐसे मत डरा।” इसके बाद सलमान ने युंग से पूछा कि क्या उनका किसी गैंग से कोई संबंध है। रैपर ने साफ किया कि वह किसी भी गैंग का हिस्सा नहीं हैं।

स्काउट

बिग बॉस 20 में गेमिंग की दुनिया के मशहूर चेहरा स्काउट ने भी कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री ली। सलमान खान ने उनका परिचय कराते हुए उनसे उनके नाम से जुड़ी कहानी पूछी। स्काउट का असली नाम तन्मय है और सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है, इंस्टाग्राम पर उन्हें 4.4 मिलियन लोग फॉलो करते हैं।

सैय्यद अरिश्फा खान

सोशल मीडिया स्टार सैय्यद अरिश्फा खान ने भी कदम रखा। शो में सलमान खान से बातचीत के दौरान अरिश्फा ने बताया कि सोशल मीडिया पर उनके 29 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनकी इतनी बड़ी फैन फॉलोइंग सुनकर सलमान ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें भी अरिश्फा से ज्यादा फॉलोअर्स हासिल करने का तरीका सीखना चाहिए। दोनों के बीच इस बातचीत ने शो में हल्का-फुल्का माहौल बना दिया।

अमन गांधी

टीवी अभिनेता अमन गांधी ने भी बिग बॉस 20 के घर में कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री की। सलमान खान ने उनका परिचय कराते हुए उन्हें टीवी का जाना-पहचाना और सफल चेहरा बताया। अमन को मशहूर धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में रितिक विरानी के किरदार से खास पहचान मिली थी। अब बिग बॉस के घर में उनकी मौजूदगी दर्शकों के लिए एक नया अनुभव होने वाली है।

उदिति सिंह

अभिनेत्री उदिति सिंह ने भी कंटेस्टेंट के तौर पर एंट्री की। उदिति ने बताया कि लोग अक्सर उनकी तुलना बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर से करते हैं, इसी बात पर सलमान ने मजाकिया अंदाज में उन्हें ‘करीना’ कहकर बुलाया। उदिति इससे पहले हिमेश रेशमिया के साथ ‘सुरूर’ में भी नजर आ चुकी हैं।

ऋति तिवारी

बिग बॉस 20 में ऋति तिवारी ने कंटेस्टेंट के तौर पर घर में कदम रखा। उनकी एंट्री के दौरान उनके पिता और भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी भी शो में पहुंचे और अपने मशहूर गाने ‘रिंकिया के पापा’ पर परफॉर्म किया। सलमान खान ने मनोज से मजाक में पूछा कि क्या वह खुद भी इस बार बिग बॉस का हिस्सा बनने वाले हैं, जिस पर उन्होंने बताया कि वह सिर्फ अपनी बेटी को घर तक छोड़ने आए हैं। इसके बाद मनोज ने अपनी पहली शादी से हुई बेटी ऋति का स्वागत किया। वहीं, सलमान ने ऋति से मजाक करते हुए कहा कि वह घर में अंडे को लेकर कोई हंगामा न करें।

माही विज

बिग बॉस 20 के ग्रैंड प्रीमियर में अभिनेत्री माही विज ने आखिरी कंटेस्टेंट के तौर पर घर में कदम रखा। उन्होंने ‘छलिया’ गाने पर डांस करते हुए शो में एंट्री की। माही इससे पहले ‘मेहर’ में नजर आ चुकी हैं और हाल ही में पति जय भानुशाली से तलाक की खबरों को लेकर भी चर्चा में थीं।

Manish Brahmbhatt: कॉकरोच जनता पार्टी में बगावत! जानिए कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट, अभिजीत दिपके से अलग होकर बनाई CJP-लोकतांत्रिक

Who is Manish Brahmbhatt: सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को नई राजनीतिक पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D)’ के गठन की घोषणा की। उन्होंने इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विकल्प के रूप में पेश किया। ब्रह्मभट्ट ने CJP के मुखिया अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले पार्टी पर उस छात्र आंदोलन से दूर जाने का आरोप लगाया, जिससे यह संगठन उभरा था। ब्रह्मभट्ट ने पहले CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन अब आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की मनमाने ढंग से चुनी गई टीम बन गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल रहे स्वयंसेवकों तथा प्रदर्शनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नया मंच आंदोलन में शामिल रहे लोगों की सामूहिक ताकत को एकजुट करने का प्रयास करेगा। CJP की शुरुआत पहले एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में हुई थी। बाद में इसने पेपर लीक और एजुकेशन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में आंदोलन किया। इसके बाद संगठन ने देशभर में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की।

दीपके पर AAP से जुड़े होने का आरोप!

ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP के नए नेतृत्व में आंदोलनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को इसमें शामिल किया गया। जबकि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े स्वयंसेवकों और प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों को बाहर रखा गया। ब्रह्मभट्ट ने सवाल किया, “आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को ही क्यों शामिल किया गया है?”

उन्होंने कहा कि शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों से जुड़े लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था। लेकिन नए संगठनात्मक ढांचे में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनके नेतृत्व वाला संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए एक राष्ट्रीय टीम बनाने और फैसले लेने की प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों को शामिल करने की कोशिश करेगा।

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?

सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट CJP आंदोलन से जुड़े प्रमुख वालंटियर और कोऑर्डिनेटर रहे हैं। चुनावी राजनीति में भी वे कोई नया चेहरा नहीं हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत’ करने वाले नेता के तौर पर उभरने से पहले ब्रह्मभट्ट ने 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव पालनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 964 वोट (0.53%) मिले थे। वे पांचवें स्थान पर रहे थे। इस सीट से राज्य में सत्ताधारी BJP के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

पेशेवर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के ‘MyNeta’ प्लेटफॉर्म पर मौजूद ब्रह्मभट्ट के चुनावी हलफनामे के अनुसार, चुनाव के समय वे 37 साल के मैनेजमेंट कंसल्टेंट थे। उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से B.Com और F.Y. LLB की पढ़ाई की है।

संपत्ति और विवाद से जुड़े मामले

चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 44.42 लाख रुपये थी। उन्होंने कोई देनदारी (कर्ज) नहीं बताई थी। उनके चुनावी हलफनामे में चार लंबित आपराधिक मामलों का भी जिक्र है। इनमें IPC की धारा 325 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने वाले बयान), 114 (अपराध के समय मौजूद रहकर उकसाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 501 (मानहानि करने वाली सामग्री छापना) और 502 के तहत आरोप शामिल हैं। हालांकि, ये मामले लंबित हैं। इनमें उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।

CJP में विवाद और भूख हड़ताल की वजह!

बताया जा रहा है कि ब्रह्मभट्ट का हालिया राजनीतिक उभार जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र-युवा आंदोलन से हुआ। विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त में CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और शीर्ष नेतृत्व का ऐलान किया। इसमें अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक बनाया गया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि इस आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे। लेकिन 12 सदस्यीय कोर टीम बनाते समय जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

अगस्त में जब दीपके ने अपने आवास पर कोर टीम की बैठक बुलाई, तो ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। इस फैसले में प्रतिनिधित्व न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हेल्थ बिगड़ने पर ब्रह्मभट्ट और पांड्या को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मूल आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया।

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