PNB Bank Share Price: मुनाफे में जबरदस्त उछाल से 7 महीने के हाई पर पहुंचा शेयर, अब खरीदें, बेचें या रहे बने

PNB Bank Share Price: पीएसयू बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के शेयर आज 8% उछलकर 7 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। स्टॉक में यह तेजी कंपनी के तिमाही नतीजों के ऐलान के बाद आई। हालांकि स्टॉक में अच्छी तेजी देखी जा रही है, लेकिन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्मों CLSA और Citi की इस पर अलग-अलग राय है। CLSA इसे लेकर बुलिश है, जबकि Citi ने इस स्टॉक पर Sell की रेटिंग दी है।

कैसे रहे तिमाही नतीजे

PNB ने सितंबर 2024 को समाप्त तिमाही के लिए अपने नेट प्रॉफिट में 145% की बढ़ोतरी की जानकारी दी। सितंबर 2023 की तिमाही में 1756 करोड़ रुपये के मुकाबले, Q2 में नेट प्रॉफिट बढ़कर 4303.5 करोड़ रुपये हो गया। Q2 में ग्रॉस NPA, जून 2024 की तिमाही के 4.98% से घटकर 4.48% रह गए। नेट NPA भी जून 2024 की तिमाही के 0.60% से घटकर 0.46% पर आ गए।

जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 5.99% बढ़कर 10,517 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह 9923 करोड़ रुपये थी। प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफे) का एक अहम पैमाना, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पिछली तिमाही में 2.92% रहा।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेज की राय

CLSA

CLSA ने PNB को “आउटपरफॉर्म” रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹140 प्रति शेयर तय किया है। यह पिछले क्लोजिंग प्राइस से 20.4% की बढ़त की संभावना दिखाता है। फर्म के अनुसार, बैंक का दूसरी तिमाही का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) अनुमानों से 20% अधिक रहा। इसकी मुख्य वजह नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) का बेहतर प्रदर्शन और कुछ विशेष रिकवरी रही, हालांकि अन्य आय (other income) में कमी ने इस बढ़त को कुछ हद तक कम कर दिया।

CLSA ने बताया कि बैंक की लोन ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले बढ़कर 16% हो गई है, जबकि कुछ तिमाहियों पहले यह दहाई के निचले स्तर (low double-digits) पर थी। वहीं, डिपॉजिट ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले 10% पर स्थिर बनी हुई है।

पंजाब नेशनल बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में 8 बेसिस पॉइंट्स का सुधार हुआ है, जो मुख्य रूप से लोन यील्ड (loan yields) और डिपॉजिट कॉस्ट (deposit cost) में बदलाव के कारण हुआ है।

बैंक प्रबंधन ने संकेत दिया है कि NIM में आगे और सुधार हो सकता है। CLSA के अनुसार, बैंक की एसेट क्वालिटी स्थिर रही है और ग्रॉस स्लिपेज रेशियो 0.8% है।

Citi

Citi ने पंजाब नेशनल बैंक के शेयरों पर “Sell” की सलाह दी है। Citi का कहना है कि FCNR इनफ्लो के जरिए होलसेल डिपॉजिट कम होने से डिपॉजिट पर कैश 5 बेसिस पॉइंट्स घट गया। वहीं, रिटेल IBPC और कम रिटर्न देने वाले कॉर्पोरेट एक्सपोजर को कम करने से यील्ड (yields) में 8 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा हुआ। सिटी (Citi) के अनुसार, स्टैंडर्ड एसेट प्रोविज़निंग से मिली राशि ने नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) और फ्लोटिंग प्रोविज़न बफ़र्स की भरपाई कर दी, जिससे बैंक की क्रेडिट कॉस्ट लगभग शून्य हो गई।

PNB का ‘रिटर्न ऑन एसेट्स’ 1% से ऊपर स्थिर रहा। बैंक के ग्लोबल एडवांसेज (कर्ज) में पिछले साल के मुकाबले 14.7% और पिछली तिमाही के मुकाबले 5.3% की बढ़ोतरी हुई। यह FY27 के लिए तय 12% – 13% के लक्ष्य से भी अधिक है। इसमें FCNR-फंडेड ओवरसीज एक्सपोजर का भी योगदान रहा, जो बैंक की कुल बुक का 1.5% है।

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के शेयर पर नजर रखने वाले 23 एनालिस्ट्स में से 14 ने इसे buy , 3 ने hold करने और 6 ने sell की रेटिंग दी है।

ICICI Bank Share Price:Q2 नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म बुलिश, बढ़ाया टारगेट, मिल सकता है 45% का रिटर्न

 

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ICICI Bank Share Price:Q2 नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्म बुलिश, बढ़ाया टारगेट, मिल सकता है 45% का रिटर्न

ICICI BANK SHARE PRICE: ICICI बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जिसके बाद ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बैंक को लेकर काफी बुलिश हैं। जेपी मॉर्गन और नोमुरा ने बैंक के लिए अपना टारगेट प्राइस बढ़ा दिया है, जबकि कई अन्य फर्मों ने ‘Buy’ या इसी तरह की रेटिंग बरकरार रखी है। जिन ब्रोकरेज फर्मों ने इस पर अपनी राय दी है, उनमें गोल्डमैन सैक्स सबसे ज्यादा तेजी की उम्मीद जता रहा है। गोल्डमैन सैक्स ने 2,025 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो शुक्रवार के 1,397 रुपये के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 45 फीसदी की तेजी दिखाता है।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेज फर्मों की राय

Bernstein

इस इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग दी है और प्रति शेयर ₹1,800 का टारगेट प्राइस तय किया है। इसका मतलब है कि पिछले क्लोजिंग प्राइस से इसमें 28.8% तक की तेजी आ सकती है।फर्म ने कहा कि ICICI बैंक ने एक और शानदार तिमाही पेश की है, जिससे सबसे तेजी से बढ़ने वाले बड़े प्राइवेट बैंक के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत हुई है।

बैंक के लोन और डिपॉजिट ग्रोथ में काफी तेजी आई है। लोन ग्रोथ में कॉर्पोरेट, बिजनेस बैंकिंग और रिटेल सेगमेंट – सभी क्षेत्रों का मजबूत योगदान रहा है। बर्नस्टीन के अनुसार, हालांकि इस तिमाही में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में थोड़ी कमी आई है, लेकिन यह गिरावट अन्य बैंकों के अनुरूप ही है। साथ ही, मजबूत बैलेंस शीट ग्रोथ के कारण नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी अच्छी बनी रही। फर्म ने आगे कहा कि मजबूत फीस इनकम और बेहतर होती एसेट क्वालिटी के चलते, बैंक अपनी बेहतरीन ऑपरेटिंग और अर्निंग्स ग्रोथ को बनाए रखने में कामयाब रहा है।

JPMorgan

जेपी मॉर्गन ने ICICI बैंक को ‘ओवरवेट’ रेटिंग दी है और इसके लिए ₹1,800 का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि बैंक ने दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) ₹25,340 करोड़ रही, जो जेपी मॉर्गन के अनुमान से 2% ज्यादा है। प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट (PPOP) ₹20,580 करोड़ रहा, जो अनुमान से 7% अधिक है, और टैक्स के बाद का मुनाफा (PAT) ₹14,840 करोड़ रहा, जो अनुमान से 11% ज्यादा है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने बताया कि IT रिफंड पर मिलने वाले ब्याज को छोड़कर, कोर NII में पिछली तिमाही के मुकाबले 6% और पिछले साल के मुकाबले 18% की बढ़ोतरी हुई है। इसे पिछली तिमाही के मुकाबले 12.3% की लोन ग्रोथ से सपोर्ट मिला, जो इंडस्ट्री में सबसे बेहतर है।

ICICI बैंक का कोर NIM (IT रिफंड पर मिलने वाले ब्याज को छोड़कर) पिछली तिमाही के मुकाबले 4 बेसिस पॉइंट्स कम हो गया है, जिसका मुख्य कारण FCNR (B) का असर है।

फर्म ने आगे कहा कि हालांकि FCNR (B) का पूरा असर तीसरी तिमाही में देखने को मिलेगा, जिससे NIM पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन JP मॉर्गन को चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 2028 में NIM बढ़ने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि बैंक का 57% लोन बुक रेपो रेट से जुड़ा है। साथ ही, अब अनुमानों में 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी (जिसमें दिसंबर 2026 की एक बढ़ोतरी भी शामिल है) को भी जोड़ लिया गया है।

Nomura

नोमुरा ने ICICI बैंक को “Buy” (खरीदने) की रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹1,700 से बढ़ाकर ₹1,740 प्रति शेयर कर दिया है। यह पिछले क्लोजिंग प्राइस से 24.6% की संभावित बढ़त को दर्शाता है।

नोमुरा के अनुसार, ICICI बैंक ने वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2029 के लिए अपने ‘अर्निंग पर शेयर’ (EPS) के अनुमानों को क्रमशः 3% और 7% बढ़ा दिया है।

फर्म ने बताया कि वन-ऑफ (असाधारण) आइटम्स को एडजस्ट करने के बाद NII में पिछले साल के मुकाबले 18% की बढ़ोतरी हुई है। यह नोमुरा के अनुमान से 2% अधिक है, जिसमें लोन और डिपॉजिट ग्रोथ क्रमशः 30% और 27% रही।

कोर PPOP ₹20,800 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 22% अधिक है। नोमुरा ने बताया कि बैंक ने ₹1.6 लाख करोड़ के FCNR (B) डिपॉजिट जुटाए (जो कुल डिपॉजिट का 8% है)। इसमें से 50% हिस्सा इन्हीं डिपॉजिट्स के बदले दिए गए लोन से आया है। बैंक के मैनेजमेंट को उम्मीद है कि अगले दो तिमाहियों में इस लिक्विडिटी का इस्तेमाल कर लिया जाएगा।

Goldman Sachs

गोल्डमैन सैक्स ने Buy” रेटिंग दी है और प्रति शेयर 2,025 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। यह इसके पिछले क्लोजिंग प्राइस से 44.9% की बढ़त की संभावना दिखाता है। बैंक का दूसरा तिमाही प्रदर्शन हर मोर्चे पर उम्मीदों से बेहतर रहा। लोन ग्रोथ 24% रही, जो अनुमान से 2% ज्यादा है, और कोर रेवेन्यू ग्रोथ 18% रही, जो गोल्डमैन सैक्स के अनुमान से 2% अधिक है।

बैंक का NIM (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) अनुमान से 5 बेसिस पॉइंट ज्यादा रहा और PPoP (प्रोविजन से पहले का मुनाफा) भी उम्मीद से बेहतर रहा, जबकि प्रोविजन (संभावित नुकसान के लिए रखी गई रकम) कम रहे। NIM का प्रदर्शन खास तौर पर उल्लेखनीय रहा; सिस्टम में सबसे मजबूत FCNR (B) डिपॉजिट बेस होने के बावजूद, इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले केवल 10 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई।

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, बैंक ने ब्याज दर चक्र के निचले स्तर पर भी लिक्विडिटी (नकदी) को बनाए रखा है। इसका लिक्विडिटी डिपॉजिट रेशियो (LDR) 95% है। इससे मध्यम अवधि में कमाई बढ़ाने के लिए काफी गुंजाइश मिलती है, क्योंकि इस लिक्विडिटी का इस्तेमाल आगे किया जा सकता है।

UBS

UBS ने ICICI बैंक के लिए “Buy” रेटिंग दी है और 1,800 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। इस इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्म का कहना है कि बैंक का दूसरा तिमाही प्रदर्शन हर लिहाज से शानदार रहा, जिसे मजबूत लोन और डिपॉजिट ग्रोथ का सहारा मिला।

बैंक की लोन ग्रोथ पिछली तिमाही के मुकाबले 12.3% और पिछले साल के मुकाबले 30% रही, जो उम्मीदों और अन्य बैंकों के प्रदर्शन से काफी बेहतर है। इसमें बिजनेस बैंकिंग की लगातार मजबूती के अलावा, कॉर्पोरेट लोन में भी काफी तेजी देखी गई।

मैनेजमेंट को उम्मीद है कि तीसरी तिमाही में मार्जिन अपने निचले स्तर पर आ जाएंगे, जिसके बाद चौथी तिमाही में इनमें सुधार देखने को मिलेगा।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Petrol Diesel Price Today: 19 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, जानें अपने शहर का भाव

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 19 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

IPO की तैयारी कर रही OYO के लिए मूडीज ने आउटलुक किया ‘पॉजिटिव’, B2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग बरकरार

मूडीज रेटिंग्स ने IPO लाने की तैयारी कर रही OYO की पेरेंट कंपनी प्रिज्म (Prism) के आउटलुक को ‘स्टेबल’ से बदलकर ‘पॉजिटिव’ कर दिया है। साथ ही कंपनी की ‘B2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग’ (CFR) को बरकरार रखा है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मूडीज रेटिंग्स की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट श्वेता पटोदिया का कहना है, “पॉजिटिव आउटलुक हमारी इस उम्मीद को दर्शाता है कि OYO अगले 12-18 महीनों में अपनी अच्छी कमाई और फ्री कैश फ्लो जनरेशन को बरकरार रखेगी। इससे कंपनी को अपना कर्ज कम करने में मदद मिलेगी और उसकी लिक्विडिटी (नकदी की उपलब्धता) भी अच्छी बनी रहेगी।”

मूडीज के अनुसार, OYO के लिए लीड एनालिस्ट पटोदिया का कहना है, “B2 कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग (CFR) को बरकरार रखने का मतलब है कि OYO अपने मुख्य बाजारों में बजट अकोमोडेशन (ठहरने की किफायती जगह) सेक्टर में लीडिंग पोजिशन रखती है। साथ ही कारोबार में भौगोलिक विविधता है क्योंकि इसका बिजनेस भारत, यूरोप और अमेरिका में फैला हुआ है।”

12-18 महीनों में ₹3000 करोड़ हो सकता है OYO का EBITDA

मूडीज को उम्मीद है कि अगले 12-18 महीनों में OYO का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) बढ़कर लगभग 3,000 करोड़ रुपये (31.5 करोड़ डॉलर) हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी लगातार अपना विस्तार कर रही है और अपने प्लेटफॉर्म पर नए स्टोरफ्रंट (होटल/प्रॉपर्टी) जोड़ रही है। वित्त वर्ष 2025—26 में OYO का EBITDA दोगुने से भी ज्यादा होकर 2,630 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025 में यह 1,080 करोड़ रुपये था।

बेहतर कमाई और वर्किंग कैपिटल के आउटफ्लो के स्थिर होने की वजह से OYO पहली बार वित्त वर्ष 2026 में पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो हासिल करने में सफल रही। मूडीज को उम्मीद है कि OYO अगले एक से दो वर्षों तक पॉजिटिव फ्री कैश फ्लो बरकरार रखेगी। इसका ऑपरेटिंग कैश फ्लो निकट भविष्य के खर्चों को कवर करने के लिए पर्याप्त होगा।

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6,650 करोड़ का IPO लाने की तैयारी

OYO अपने IPO के जरिए लगभग 6,650 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसमें से करीब 5,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा। मूडीज का कहना है, “अगर IPO योजना के मुताबिक कंप्लीट होता है, तो इससे कर्ज कम करने की प्रक्रिया तेज होगी और कंपनी की क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होगी। हालांकि, IPO की टाइमिंग और इसके एग्जीक्यूशन को लेकर अनिश्चितता को देखते हुए, हमारे बेस-केस वित्तीय अनुमानों में इस रकम या इससे जुड़े कर्ज के भुगतान को शामिल नहीं किया गया है।”

पटना तारामंडल में बनेगा बिहार का पहला एस्ट्रो पार्क! सूर्य घड़ी से चलेगा समय का पता, टेलीस्कोप से दिखेंगे ग्रह

सूर्य की चाल से समय का अंदाजा लगाना हो या धरती के घूमने की स्पीड को करीब से समझना, अब इन वैज्ञानिक सिद्धांतों को जानने के लिए सिर्फ किताबों के पन्ने पलटने की जरूरत नहीं होगी। बिहार की राजधानी पटना के इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर यानी तारामंडल में कुछ ऐसा ही खास इंतजाम होने जा रहा है। यहां विज्ञान को देखकर, समझकर और अनुभव करके सीखा जा सकेगा। यहां एस्ट्रो पार्क और मॉडर्न ऑब्जर्वेटरी डोम बनाया जा रहा है। यह पहल खास तौर पर स्टूडेंट्स, खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों और विज्ञान को करीब से जानने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

क्या क्या होगा एस्ट्रो पार्क के खास

इनकम टैक्स गोलंबर के पास स्थित तारामंडल परिसर में बन रहे एस्ट्रो पार्क सूर्य घड़ी की थीम पर आधारित होगा। यहां11 इंटरैक्टिव साइंस मॉडल लगाए जाने हैं। इनके माध्यम से दर्शक सूर्यघड़ी, पृथ्वी की घूर्णन गति और समय की गणना जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल और रोचक तरीके से समझ सकेंगे। यानी विज्ञान की पढ़ाई केवल किताबों और क्लास तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि दर्शकों को उसे अपनी आंखों से देखने और अनुभव करने का मौका भी मिलेगा।

सूर्य घड़ी से समझेंगे समय का विज्ञान

एस्ट्रो पार्क में अब तक दो साइंस मॉडल लगाए जा चुके हैं। इनमें इंटरैक्टिव सन डायल और वर्टिकल सन डायल शामिल हैं। ये मॉडल सूर्य की स्थिति और छाया के आधार पर समय की गणना जैसे सिद्धांतों को समझने में मदद करेंगे। सन डायल यानी सूर्य घड़ी समय मापने की प्राचीन वैज्ञानिक विधियों में से एक है। सूर्य की स्थिति बदलने के साथ छाया की दिशा और लंबाई में होने वाले बदलाव से समय का अनुमान लगाया जाता है। एस्ट्रो पार्क में ऐसे मॉडलों के जरिये स्टूडेंट्स यह समझ सकेंगे कि आधुनिक घड़ियों के प्रचलन से पहले समय की गणना किस तरह की जाती थी और सूर्य-पृथ्वी की गति का इससे क्या संबंध है। पार्क में बाकी नौ साइंस मॉडल लगाए जाने हैं। इनके पूरा होने के बाद परिसर में विज्ञान और खगोल विज्ञान से जुड़े सिद्धांतों को समझने के लिए एक नया शैक्षणिक आकर्षण तैयार होगा।

छत पर बनेगा ऑब्जर्वेटरी डोम, टेलीस्कोप से दिखेंगे ग्रह

एस्ट्रो पार्क के साथ तारामंडल की छत पर अत्याधुनिक ऑब्जर्वेटरी डोम बनाने की भी प्लानिंग है। इस परियोजना का सबसे खास आकर्षण यहां स्थापित होने वाला जाइंट टेलीस्कोप होगा। इसके लिए नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम (एनसीएसएम) की ओर से करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।

उच्च क्षमता वाले लेंस और ट्रैकिंग सिस्टम से लैस इस टेलीस्कोप की मदद से सूर्य, चंद्रमा और मंगल, बृहस्पति और शनि जैसे खगोलीय पिंडों को प्रत्यक्ष देखने की सुविधा भी देने की योजना है। इससे लोगों को अंतरिक्ष और ग्रहों के बारे में पढ़ने के साथ उन्हें दूरबीन के माध्यम से देखने का अवसर भी मिल सकेगा।

1.32 करोड़ रुपये से आकार ले रहा प्रोजेक्ट

तारामंडल परिसर में एस्ट्रो पार्क और ऑब्जर्वेटरी डोम के निर्माण पर कुल 1.32 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने हैं। इसमें एस्ट्रो पार्क के लिए 32.56 लाख रुपये और ऑब्जर्वेटरी डोम के लिए 99.71 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी भवन निर्माण विभाग को सौंपी गई है। सिविल वर्क चल रहा है। इस परियोजना पर जनवरी 2026 से काम शुरू हुआ था। परियोजना के पूरा होने पर तारामंडल परिसर में खगोल विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों और शैक्षणिक अनुभवों का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।

रोजाना 1500 से अधिक दर्शक पहुंचते हैं तारामंडल

पटना का इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर पहले से ही विज्ञान और अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के बीच लोकप्रिय है। यहां हर दिन करीब 1500 से अधिक दर्शकों के पहुंचने की जानकारी मिली है। तारामंडल में प्रतिदिन संचालित होने वाले आठों शो में भी दर्शकों की अच्छी भीड़ रहती है। इसके अलावा वीआर और दूसरे शो को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह देखने को मिलता है।

पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

LTCG Tax: क्या अमेरिकी शेयरों की कमाई पर मिलेगा ₹1.25 लाख टैक्स छूट का फायदा? जानें क्या कहते हैं नियम

LTCG Tax on Global Stocks: बजट 2027 से पहले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के रुख ने इक्विटी टैक्सेशन पर नई बहस छेड़ दी है। विदेशी निवेशकों की निकासी और भारतीय इक्विटी की प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताओं के बीच निवेशक राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

एक बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में चुनिंदा इक्विटी निवेशों पर मिलने वाली ₹1.25 लाख सालाना LTCG टैक्स छूट का फायदा विदेशी शेयरों पर भी मिल सकता है। आइए जानते हैं कि विदेशी शेयरों पर कैपिटल गेन्स पर टैक्स कैसे लगता है और कौन से निवेश इसके दायरे में आते हैं।

क्या ग्लोबल शेयरों पर ₹1.25 लाख की सालाना LTCG टैक्स छूट मिलती है?

आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 198 के तहत मिलने वाला ₹1.25 लाख का सालाना थ्रेशोल्ड सिर्फ इसलिए विदेशी शेयरों के मुनाफे पर लागू नहीं होता कि वे विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हैं या लंबे समय तक रखे गए हैं।

इस प्रावधान में केवल वे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स शामिल हैं जो योग्य इक्विटी शेयरों, इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स और बिजनेस ट्रस्टों की यूनिट्स से मिलते हैं, बशर्ते वे निर्धारित सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की शर्तों को पूरा करते हों।

विदेशी शेयर आमतौर पर इन शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। धारा 197 के तहत उनके लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर बिना ₹1.25 लाख की छूट के 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है, जिसमें लागू सरचार्ज और सेस शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, अगर किसी भारतीय निवासी को अमेरिकी शेयरों से ₹1 लाख का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन होता है, तो यह मुनाफा सिर्फ इसलिए टैक्स-फ्री नहीं हो जाता कि यह ₹1.25 लाख से कम है। किसी अन्य राहत या एडजस्टमेंट को छोड़कर, इस पर सरचार्ज और सेस से पहले ₹12,500 का टैक्स बनेगा।

ग्लोबल शेयरों पर LTCG और STCG की गणना कैसे की जाती है?

विदेशी शेयरों पर कैपिटल गेन्स की गणना, बिक्री मूल्य में से खरीद लागत और ट्रांसफर से जुड़े योग्य खर्चों को घटाकर की जाती है। निवेशकों को इसमें विदेशी मुद्रा रूपांतरण के नियमों का भी ध्यान रखना होता है।

धारा 2(101) के तहत, विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध शेयर उन एसेट्स की श्रेणी में आते हैं जिन पर मान्यता प्राप्त भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध विशिष्ट प्रतिभूतियों के मुकाबले 24 महीने की होल्डिंग पीरियड की परीक्षा लागू होती है।

24 महीने या उससे कम समय के लिए रखे गए विदेशी शेयरों से होने वाले मुनाफे को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) माना जाता है और निवेशक के लागू इनकम-टर्म स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। वहीं, 24 महीने से अधिक समय तक रखे गए शेयर बिना इंडेक्सेशन के 12.5 प्रतिशत की लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स दर के दायरे में आते हैं।

किन अन्य निवेशों को इस छूट से बाहर रखा गया है?

पीएनएएम एंड कंपनी एलएलपी (PNAM & Co. LLP) के पार्टनर मोहित गुप्ता के अनुसार, ₹1.25 लाख का थ्रेशोल्ड सभी प्रकार के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स के लिए यूनिवर्सल छूट नहीं है। धारा 198 के दायरे से बाहर रहने वाले प्रमुख निवेश ये हैं:

रियल एस्टेट: जमीन या मकान की बिक्री से होने वाला मुनाफा।

सोना और चांदी: भौतिक कीमती धातुओं से होने वाला लाभ।

डेट-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड: टैक्स का तरीका विशिष्ट म्यूचुअल फंड्स के विशेष नियमों समेत लागू प्रावधानों पर निर्भर करता है।

इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड: अगर वे विदेशी इक्विटी में निवेश करते हैं और इक्विटी-ओरिएंटेड फंड की वैधानिक परिभाषा पर खरे नहीं उतरते हैं, तो वे इसके पात्र नहीं हैं।

बॉन्ड और डिबेंचर: टैक्स का स्वरूप इंस्ट्रूमेंट और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग होता है।

अन्य गैर-पात्र एसेट्स: वे मुनाफे जो धारा 198 की पात्रता और STT शर्तों को पूरा नहीं करते।

निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

निवेशकों को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि क्या उनके निवेश धारा 198 के तहत योग्य हैं और क्या निर्धारित STT शर्तें पूरी होती हैं।

  • ₹1.25 लाख की छूट की सीमा पात्र मुनाफे के लिए एक संयुक्त वार्षिक सीमा है, न कि प्रत्येक स्टॉक, ब्रोकर, डीमैट खाते या म्यूचुअल फंड निवेश के लिए अलग-अलग मिलने वाली छूट।
  • कैपिटल गेन्स की गणना को सही साबित करने के लिए निवेशकों को खरीद और बिक्री की पुष्टि, ब्रोकरेज स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन खर्च और विदेशी मुद्रा रूपांतरण के रिकॉर्ड संभाल कर रखने चाहिए।
  • निवेशक की रेसिडेंशियल स्थिति और फाइलिंग की परिस्थितियों के आधार पर विदेशी निवेशों में विदेशी संपत्ति और विदेशी आय से जुड़े अतिरिक्त खुलासे की जरूरत पड़ सकती है।
  • जिन निवेशकों ने विदेश में टैक्स चुकाया है, उन्हें अलग से यह आकलन करना चाहिए कि क्या वे लागू प्रावधानों और संधि की शर्तों के तहत विदेशी कर क्रेडिट का दावा कर सकते हैं।

मुख्य अंतर यह है कि किसी निवेश को लंबे समय तक होल्ड करने मात्र से उसका मुनाफा स्वचालित रूप से ₹1.25 लाख की छूट के योग्य नहीं हो जाता। अपनी टैक्स देनदारी की गणना करने से पहले निवेशकों को एसेट कैटेगरी और प्रासंगिक वैधानिक शर्तों की जांच जरूर करनी चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LPG Price 18 October 2026: दिल्ली से लखनऊ तक, जानें 14.2 किलो सिलेंडर का भाव

LPG Price 18 October 2026: हर महीने की तरह अक्टूबर में भी एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है। त्योहारों के सीजन में रसोई का खर्च पहले से ही बढ़ जाता है, ऐसे में गैस सिलेंडर के दाम आम परिवारों के बजट को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें कारोबार के खर्च से सीधे जुड़ी होती हैं। 18 अक्टूबर 2026 को घरेलू गैस सिलेंडर बुक कराने की तैयारी कर रहे हैं, तो अपने शहर का ताजा रेट जानना आपके लिए जरूरी है।

इस महीने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई नया बदलाव नहीं हुआ है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और पटना समेत दूसरे शहरों में आज गैस सिलेंडर किस कीमत पर मिल रहा है? आइए, शहरवार रेट पर नजर डालते हैं।

दिल्ली में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत कितनी है?

राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के लिए 942 रुपये देने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,810 रुपये है। यानी घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है, लेकिन कमर्शियल गैस का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों को बढ़ी हुई कीमतों के हिसाब से अपना बजट तैयार करना पड़ सकता है।

आपके शहर में कितने रुपये का मिल रहा LPG सिलेंडर?

गैस सिलेंडर की कीमत हर शहर में एक जैसी नहीं होती। स्थानीय टैक्स और अन्य खर्चों के कारण इनके दाम में अंतर देखने को मिलता है। नीचे प्रमुख शहरों में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें दी गई हैं।

  • दिल्ली: 942 रुपये
  • मुंबई: 941.50 रुपये
  • कोलकाता: 968 रुपये
  • चेन्नई: 957.50 रुपये
  • नोएडा: 939.50 रुपये
  • गुरुग्राम: 950.50 रुपये
  • लखनऊ: 979.50 रुपये
  • जयपुर: 945.50 रुपये
  • पटना: 1,031.50 रुपये
  • हैदराबाद: 994 रुपये

इन आंकड़ों पर नजर डालें तो सूची में पटना में घरेलू सिलेंडर की कीमत सबसे ज्यादा, जबकि नोएडा में सबसे कम है। हालांकि, बुकिंग से पहले अपने स्थानीय गैस वितरक से मौजूदा कीमत की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

आखिर क्यों अलग-अलग होते हैं गैस सिलेंडर के दाम?

एलपीजी की कीमतें केवल घरेलू मांग और आपूर्ति से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी इन पर असर डालती है। इसके अलावा, स्थानीय करों और वितरण से जुड़े खर्चों के कारण अलग-अलग शहरों में अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

तेल विपणन कंपनियां घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों की समय-समय पर समीक्षा करती हैं। आम तौर पर हर महीने की शुरुआत में कीमतों में बदलाव की घोषणा पर नजर रहती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर महीने दाम बदलना जरूरी है।

घरेलू ग्राहकों को राहत

घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर रहने से फिलहाल परिवारों के रसोई बजट पर कोई नया सीधा असर नहीं पड़ा है। दूसरी तरफ, कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट संचालकों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर कारोबार के मुनाफे और आगे चलकर कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

इसलिए गैस सिलेंडर बुक कराने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर जांचें। खासकर कारोबारियों के लिए कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों पर नजर रखना जरूरी है, ताकि महीने के खर्च का सही हिसाब रखा जा सके।

Petrol Diesel Price Today: 18 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपडेट, टंकी फुल कराने से पहले जानें रेट

Petrol Diesel Price Today: 18 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपडेट, टंकी फुल कराने से पहले जानें रेट

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 18 अक्टूबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

How to Buy Home: ₹30000 की सैलरी में भी खरीद सकते हैं अपना घर, समझिए कैसे बनाएं पूरा प्लान

How to Buy Home: अपना घर खरीदने का सपना हर कोई देखता है। लेकिन महीने की सैलरी ₹30,000 के आसपास हो, तो लगता है कि आज के जमाने में घर खरीदना शायद मुमकिन नहीं है। किराया, राशन, बिजली का बिल और बच्चों की फीस देने के बाद बचता ही कितना है? ऐसे में होम लोन की EMI चुकाना बड़ी जिम्मेदारी लगती है।

हालांकि, कम सैलरी में भी घर खरीदा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी कमाई के हिसाब से घर चुनें। बड़ा लोन लेने के बजाय ऐसी EMI रखें, जिसे हर महीने आसानी से चुका सकें। आइए, उदाहरण से समझते हैं कि ₹30,000 की सैलरी में घर खरीदने का प्लान कैसे बना सकते हैं।

₹30,000 की सैलरी पर कितना होम लोन लें?

BASIC Home Loan के CEO और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि अगर आप ₹10 लाख का होम लोन लेते हैं, तो ब्याज दर और लोन की अवधि के हिसाब से EMI करीब ₹10,000 हो सकती है। मोंगा के मुताबिक, अगर आपकी सैलरी ₹30,000 है, तो घर खरीदना सिर्फ कमाई पर निर्भर नहीं करता। ये भी जरूरी है कि आप घर खरीदने की कितनी अच्छी तैयारी करते हैं। घर

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि आपकी सैलरी ₹30,000 है। इसमें से ₹8,000 घर और किराने, ₹3,000 बिजली और दूसरे बिलों, ₹4,000 आने-जाने और ₹5,000 परिवार के अन्य खर्चों में जाते हैं। इस तरह कुल खर्च ₹20,000 हुआ। अब आपके पास ₹10,000 बचते हैं।

सैलरी के हिसाब से खर्च का पूरा हिसाब समझें

महीने का हिसाबरकम
कुल सैलरी₹30,000
राशन और घर का खर्च₹8,000
बिजली, मोबाइल और दूसरे बिल₹3,000
आने-जाने का खर्च₹4,000
परिवार के दूसरे खर्च₹5,000
कुल खर्च₹20,000
खर्च के बाद बची रकम₹10,000

ये सिर्फ उदाहरण है। आप अपने परिवार के खर्च के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकते हैं। जैसे कि कुछ पैसे बचाकर इमरजेंसी के लिए रख सकते हैं।

डाउन पेमेंट के लिए पैसे कैसे जुटाएं?

बैंक आमतौर पर घर की पूरी कीमत का लोन नहीं देते। घर खरीदते समय आपको भी कुछ पैसा लगाना पड़ता है। इसी को डाउन पेमेंट कहते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी जैसे खर्च भी हो सकते हैं।

मान लीजिए, आपको ₹15 लाख का घर पसंद आया। बैंक ₹12 लाख का लोन देने को तैयार है। ऐसे में बाकी ₹3 लाख आपको अपनी तरफ से लगाने होंगे। रजिस्ट्री और दूसरे खर्चों के लिए अलग से पैसा भी चाहिए हो सकता है।

इसलिए घर खरीदने से पहले बचत शुरू करें। हर महीने ₹5,000 बचाने पर एक साल में ₹60,000 जमा होंगे। इसी तरह, तीन साल में ब्याज को छोड़कर ₹1.80 लाख जमा हो सकते हैं। अगर परिवार से आर्थिक मदद मिले या बोनस की रकम बचा सकें, तो डाउन पेमेंट का लक्ष्य जल्दी पूरा हो सकता है।

होम लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अतुल मोंगा के मुताबिक, होम लोन लेने से पहले सबसे पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरें और प्रोसेसिंग फीस देखें। सिर्फ कम ब्याज दर देखकर लोन लेने से बचना चाहिए। लोन की अवधि और दूसरी शर्तें भी समझना जरूरी है।

कमाई और बैंकिंग रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने से आवेदन की प्रक्रिया आसान हो सकती है। अगर भविष्य में आपकी कमाई बढ़ती है और आपके पास अतिरिक्त पैसा आता है, तो लोन की कुछ रकम पहले चुकाने पर भी विचार कर सकते हैं। इसे पार्ट-प्रीपेमेंट कहते हैं। इससे बकाया लोन और कुल ब्याज घट सकता है।

मोंगा का कहना है कि आखिरकार मकसद सिर्फ होम लोन लेना नहीं होना चाहिए। जरूरी यह है कि लोन की रकम इतनी हो, जिसकी EMI परिवार लंबे समय तक आसानी से चुका सके। इसके लिए परिवार के दूसरे जरूरी खर्चों और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों से समझौता नहीं करना पड़े।

हेल्थ पॉलिसी के बावजूद हॉस्पिटल का 3 लाख बिल जेब से भरना है, FD तोड़े या किसी से उधार लें?

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।