बांग्लादेश भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली के बावजूद चीन से महंगी बिजली खरीद रहा है। ढाका के पास अमीनबाजार में लग रहे वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट से 42 MW बिजली 25 टका यानी करीब 19.25 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। इसके लिए 25 साल का करार हुआ है। भारत से बांग्लादेश को करीब 11 टका यानी 8.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। चीन से मिलने वाली बिजली की कीमत भारत से दोगुने से भी ज्यादा है। 2 सितंबर को बीजिंग में हुए इस समझौते का बांग्लादेश में विरोध हो रहा है। बांग्लादेश ने भारत के 1 पैसे के चार्ज पर आपत्ति जताई थी भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने सीमा-पार बिजली लेनदेन और ग्रिड से जुड़े खर्च के लिए 1 पैसे प्रति यूनिट शुल्क प्रस्तावित किया था। बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) ने इसका विरोध किया। इसके बाद भारत ने शुल्क को घटाकर आधा पैसा प्रति यूनिट करने की बात कही। चीन के प्रोजेक्ट से कचरे की समस्या भी होगी कम अमीनबाजार का प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है। इसमें ढाका के कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। करीब 2.3 करोड़ आबादी वाले ढाका में रोजाना 8 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से कचरे की समस्या कम करने के साथ बिजली भी पैदा होगी। बांग्लादेश इस समय बिजली की कमी और पावर कट की समस्या से जूझ रहा है। देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट भी है। बांग्लादेश के पावर सेक्टर में चीन का दखल बढ़ रहा चीन बांग्लादेश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। वह तीस्ता नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत बिजली से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अमीनबाजार का वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट भी इसी बढ़ती भागीदारी का हिस्सा है। चीन की योजना बांग्लादेश के रास्ते म्यांमार तक भी ऊर्जा पहुंच बढ़ाने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक ढाका के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से म्यांमार को बिजली सप्लाई करने की तैयारी है। इस तरह अमीनबाजार प्रोजेक्ट का इस्तेमाल बांग्लादेश की बिजली जरूरत के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। पूरी खबर पढ़ें…
SBI ATM Rule Change from 1st Oct: देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने सैलरी पैकेज अकाउंट होल्डर्स के लिए एक बड़ा अपडेट जारी किया है। बैंक ने दूसरे बैंकों के एटीएम से मुफ्त पैसे निकालने और दूसरी सर्विसेज के इस्तेमाल की लिमिट को घटाने का फैसला किया है। ये नया नियम 1 अक्टूबर से लागू होगा।
फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन 10 से घटाकर किए गए 5
मौजूदा नियमों के मुताबिक एसबीआई के सैलरी पैकेज अकाउंट होल्डर्स भारत भर के सभी केंद्रों पर दूसरे बैंकों के एटीएम और ऑटोमेटेड डिपॉजिट एंड विड्रॉल मशीन से हर महीने 10 फ्री ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। 1 अक्टूबर से इस लिमिट को हटाकर सिर्फ 5 ट्रांजैक्शन कर दिया जाएगा। बैंक ने स्पष्ट किया है कि महीने में मिलने वाले इन 5 फ्री ट्रांजैक्शन में फाइनेंशियल और नॉन फाइनेंशियल दोनों ही तरह के लेनदेन शामिल होंगे। इसका मतलब है कि कैश विड्रॉल के साथ-साथ एटीएम से जुड़ी दूसरी नॉन फाइनेंशियल सर्विस भी इसी 5 ट्रांजैक्शन की लिमिट में शामिल रहेंगी।
फ्री लिमिट खत्म होने के बाद कितना लगेगा चार्ज?
मुफ्त सीमा घटने के बावजूद एसबीआई ने फ्री लिमिट समाप्त होने के बाद लगने वाले सर्विस चार्ज में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। दूसरे बैंक के एटीएम से तय फ्री लिमिट खत्म होने के बाद हर कैश विड्रॉल पर एसबीआई पहले की तरह 23 रुपये + जीएसटी (GST) का चार्ज लगाता रहेगा। लिमिट खत्म होने के बाद हर नॉन फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर 11 रुपये + जीएसटी का चार्ज देना होगा।
दूसरे अकाउंट होल्डर्स के लिए कोई बदलाव नहीं
एसबीआई ने अपनी पब्लिक नोटिस में साफ किया है कि यह नया नियम खासकर सैलरी पैकेज अकाउंट्स के लिए है। इसके अलावा दूसरे तरह के अकाउंट्स के लिए लागू मंथली फ्री ट्रांजैक्शन की संख्या और सर्विस चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अगरल एसबीआई के डेबिट कार्ड होल्डर्स एसबीआई के अपने ही एटीएम या एडीडब्ल्यूएम का इस्तेमाल करते हैं तो उनके लिए भी फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट या सर्विस चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कार्डलेस कैश विड्रॉल रहेगा पूरी तरह मुफ्त
एसबीआई ने अलग से स्पष्ट किया है कि एसबीआई के एटीएम/एडीडब्ल्यूएम या दूसरे बैंकों के एटीएम/एडीडब्ल्यूएम से कार्डलेस कैश विड्रॉल ट्रांजैक्शन पर नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। बैंक के मुताबिक अगले आदेश तक असीमित मुफ्त कार्डलेस कैश विड्रॉल की सुविधा जारी रहेगी।
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान किसी ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने दूसरे देशों को चेतावनी दी कि वे तेहरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद न करें।
रुबियो ने फॉक्स न्यूज रेडियो के ‘द ब्रायन किल्मीड शो’ में एक इंटरव्यू के दौरान ये बातें कहीं। उनसे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मुलाकात के बारे में पूछा गया था।
रूबियो ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई ट्रेड डील हुई है। जाहिर है, हर देश अपनी विदेश नीति बनाता है और दुनिया भर के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं।”
इस बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कि पीएम मोदी और पेजेशकियन के बीच ट्रेड डील होने की संभावना दिख रही है, रूबियो ने आगे कहा: “मेरा मतलब है कि हमने भी ईरान की सरकार के कुछ लोगों से मुलाकात की है, क्योंकि कुछ बातचीत हुई है और उनसे संपर्क भी रहा है।”
रूबियो ने US प्रतिबंधों को लेकर चेतावनी दी
रूबियो ने कहा कि US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन का रुख साफ कर दिया है: देशों को ईरान की मदद नहीं करनी चाहिए कि वह US प्रतिबंधों से बच सके।
रूबियो ने कहा, “किसी भी देश को ऐसे तरीके बनाने में उनकी मदद नहीं करनी चाहिए जिनसे वे कमाई कर सकें और उस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने और परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में कर सकें।”
उन्होंने आगे कहा, “और अगर देश ऐसा करने का फैसला करते हैं, तो हमें उन पर भी प्रतिबंध लगाने होंगे।”
रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ईरान के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए हुए है, और साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध के बीच अमेरिका के साथ भी बातचीत कर रहा है।
मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात में क्या हुआ?
फरवरी में ईरान-अमेरिका के बीच तनाव शुरू होने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को बिश्केक में पेजेशकियन से अपनी पहली द्विपक्षीय बातचीत की।
बैठक के दौरान, मोदी ने कहा कि भारत ईरान के साथ अपने व्यापार के दायरे को “बढ़ाना और उसमें विविधता लाना” चाहता है। साथ ही, उन्होंने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के प्रयासों के लिए नई दिल्ली के समर्थन को भी दोहराया।
दोनों नेताओं ने इस टकराव और आम नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और नेविगेशन की आजादी की सुरक्षा की जरूरत पर भी चर्चा की।
पेजेशकियान ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वे बातचीत को बढ़ावा देने और लड़ाई खत्म करने में मदद के लिए, संघर्ष में शामिल देशों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करें।
भारत ने ईरान और अन्य संबंधित पक्षों के साथ चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर भी बातचीत जारी रखी है। यह दोनों देशों के बीच एक अहम कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है, जिस पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।
नई दिल्ली का मानना है कि इस क्षेत्र में विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए, साथ ही उसे अपने व्यापार, कनेक्टिविटी और व्यापक रणनीतिक हितों की भी रक्षा करनी चाहिए।
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Trading Ideas : खराब ग्लोबल संकेतों से कल बाजार में दबाव दिखा। निफ्टी और सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। एनर्जी,PSE और तेल-गैस इंडेक्स बढ़त पर बंद हुए। ऑटो,IT और कैपिटल मार्केट शेयरों में बिकवाली रही। निफ्टी 141 प्वाइंट गिरकर 23,914 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 374 प्वाइंट गिरकर 76,570 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी 238 प्वाइंट गिरकर 57,172 पर बंद हुआ। मिडकैप 333 प्वाइंट गिरकर 63,002 पर बंद हुआ। निफ्टी के 50 में से 36 शेयरों में बिकवाली रही। सेंसेक्स के 30 में से 20 शेयरों में बिकवाली रही। बैंक निफ्टी के 14 में से 7 शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया भी 2 पैसे कमजोर होकर 94.97 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
निफ्टी व्यू
मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए मंत्री फिनमार्ट के अरुण कुमार मंत्री ने कहा कि अगर मार्केट की बात करें तो निफ्टी में एक ब्रेकडाउन के संकेत हैं। 24000-24050 का जो एक हायर ट्रेंड लाइन का ब्रेकडाउन था वो कल देखने को मिला। यहां पर एक बेनिफिट ऑफ डाउट जरूर दे सकते हैं क्योंकि वीकली क्लोजिंग होनी अभी बाकी है और कैश के एडजस्टमेंट्स भी देखने को मिल रहे हैं। जहां तक निफ्टी की बात है आज के सेशन के लिए जो सपोर्ट है वो 23,800 के आसपास है। वहीं, 24050 को रेजिस्टेंस के तौर पर देख सकते हैं। अगर वीकली क्लोजिंग वापस 24,000 के ऊपर हो जाती है जो कि फ्राइडे होनी है तो मार्केट में वापस एक कंसोलीडेशन का जोन देखने को मिलेगा। वहीं, अगर 23,800 का लेवल टूट जाता है तो एक बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है और निफ्टी 23,500 की तरफ भी जा सकता है। ऐसे आज और कल का सेशन काफी अहम रहेगा। अगर 23,800 ब्रीच होता है तो मार्केट एक बड़ी गिरावट की तरफ जाएगा। वहीं, अगर हम आज वापस 24,000 रिक्लेम कर लेते हैं तो वापस हमें एक कंसोीडेशन देखने को मिल सकता है। जहां तक आज की बात है तो निफ्टी में कंसोलीडेशन देखने को मिल सकता है। इसके लिए निफ्टी ट्रेडर्स को 23800 पर स्टॉप लॉस रखना चाहिए।
बैंक निफ्टी व्यू
इसी तरह का नजरिया बैंक निफ्टी पर भी है। बैंक निफ्टी का स्ट्रक्चर थोड़ा ज्यादा पॉजिटिव है। बैंक निफ्टी ने अभी भी 57,000 का लेवल होल्ड किया हुआ है। अगर ये लेवल होल्ड कर जाता है और हम 57,500 के तरफ बढ़ते हैं तो बैंक निफ्टी जरूर एक लीडरशिप पोजीशन ले सकता है।
अरुण कुमार मंत्री की टॉप पिक्स
अपने पसंदीदा स्टॉक्स पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि स्टॉक्स में काफी अच्छा एक्शन है। आज के लिए बाय साइड पर दो स्टॉक्स अच्छे लग रहे हैं। पहला डिक्शन टेक्नोलॉजी, जिसमें खरीदारी की सलाह रहेगी। एक अच्छे कंसोलिडेशन के बाद यह स्टॉक वापस 14,500 रुपए के सपोर्ट के आसपास दिख रहा है। इसको 14,500 रुपए के आसपास खरीदनें की सलाह है। 14,240 रुपए का स्टॉपलॉस लगा कर 14,910 रुपए तक के टारगेट्स के लिए खरीदारी करें।
दूसरा स्टॉक नौकरी या इंफोएज हैं। इसमें खरीदारी की सलाह है। इस स्टॉक में भी एक ब्रेकआउट है और ओवरऑल ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव बना है। इसको 134042 रुपए के आसपास खरीदे। 1326 रुपए का स्टॉप लॉस रहेगा और 1371 रुपए तक के टारगेट सेट करें।
Market cues : खतरे में 23800 का लेवल, यह सपोर्ट टूटने पर निफ्टी में 23,600 तक की गिरावट मुमकिन
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HUDCO Share: सरकारी कंपनी Housing and Urban Development Corporation Ltd (HUDCO) ने बिहार सरकार के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इसके तहत HUDCO राज्य में इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए ₹25,000 करोड़ तक की फाइनेंशियल मदद देगी।
पांच साल में मिलेगी फंडिंग
यह रकम एक साथ जारी नहीं होगी। अगले पांच साल में जरूरत के हिसाब से अलग-अलग चरणों में फंड दिया जाएगा।
इस पैसे का इस्तेमाल बिहार में इंडस्ट्रियल पार्क बनाने में होगा। इसमें जमीन खरीदना और उद्योगों के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना शामिल है।
25 साल तक के लिए मिल सकता है लोन
HUDCO राज्य सरकार की ओर से तय की गई एक संस्था को ₹25,000 करोड़ तक के टर्म लोन देगी। फंडिंग अलग-अलग चरणों में होगी।
लोन की शर्तें भी लचीली होंगी। मोरेटोरियम की सुविधा मिल सकती है। लोन चुकाने के लिए 25 साल तक का समय दिया जा सकता है। समय से पहले लोन चुकाने का विकल्प भी होगा।
IDA को जिम्मेदारी मिली
बिहार सरकार ने राज्य के Infrastructure Development Authority को इन प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी दी है। यह संस्था इंडस्ट्रियल पार्क के लिए जमीन खरीद और डेवलप कर सकती है।
यहां उद्योगों के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जाएगा। हर प्रोजेक्ट के लिए अलग समझौता होगा। उसमें फंडिंग की शर्तें और प्रोजेक्ट का दायरा तय किया जाएगा।
तुरंत नहीं मिलेंगे ₹25,000 करोड़
यह MoU ₹25,000 करोड़ तुरंत जारी करने का करार नहीं है। यह सिर्फ फंडिंग के लिए एक फ्रेमवर्क है। जरूरत के हिसाब से पांच साल में फंड जारी होगा। MoU तीन साल तक वैध रहेगा। इसकी हर साल समीक्षा की जाएगी।
बुधवार को HUDCO का शेयर 0.11% की मामूली गिरावट के साथ ₹178.38 पर बंद हुआ।
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कोलकाता की एक पत्रकार ने बताया कि कैसे एक उबर ड्राइवर ने उन्हें 37,000 रुपये कुछ ही मिनटों में लौटा दिए, जब उन्होंने गलती से Google Pay के जरिए उसे पैसे भेज दिए थे। उन्होंने कहा कि इस घटना ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और स्कैम को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच लोगों में उनका भरोसा फिर से जगा दिया है।
संचारी घोष ने लिंक्डइन पोस्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि 1 सितंबर को Google Pay से पेमेंट करते समय उन्होंने गलती से आनंद दास नाम के गलत व्यक्ति को 37,000 रुपये भेज दिए थे।
मनीकंट्रोल से बात करते हुए घोष ने कहा कि वह एक ऐसे कॉन्टैक्ट को पैसे भेजना चाहती थीं, जिसका पहला नाम और सरनेम उनके फोन में सेव किसी दूसरे व्यक्ति जैसा ही था। उन्हें अपनी गलती का एहसास कई घंटों बाद हुआ, जब जिस व्यक्ति को पैसे मिलने थे, उसने पेंडिंग पेमेंट के बारे में उनसे संपर्क किया।
उन्होंने पैसे पाने वाले शख्स को कैसे ढूंढा?
गलती का पता चलने के बाद, घोष ने HDFC बैंक और कोलकाता पुलिस के साइबर सेल से संपर्क किया। अपनी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री देखने और यह शक होने पर कि पैसे पाने वाला व्यक्ति शायद उनकी पिछली किसी राइड से जुड़ा हो सकता है, उन्होंने उबर से भी संपर्क किया।
लेकिन, जब आधिकारिक तरीकों से मामले पर कार्रवाई हो रही थी, तब उन्होंने खुद भी छानबीन करने का फैसला किया।
घोष ने पब्लिकेशन को बताया कि उन्होंने अपने पिछले ट्रांजैक्शन चेक किए और पाया कि उन्होंने 24 अगस्त को आनंद दास नाम के ड्राइवर को उबर का 180 रुपये का किराया दिया था।
इसके बाद उन्होंने अपनी पिछली राइड की जानकारी निकाली और सीधे उस ड्राइवर से संपर्क करने में कामयाब रहीं।
15 मिनट में पैसे वापस मिल गए
घोष ने बताया कि उन्होंने दास को पूरी बात बताई। दास ने तुरंत ट्रांजैक्शन की जांच की और पूरे 37,000 रुपये वापस कर दिए।
उन्होंने ‘मनीकंट्रोल’ को बताया, “पूरी बात सुनने के बाद, उन्होंने तुरंत जांच की और पूरी रकम वापस कर दी।” पत्रकार ने आगे बताया कि बाद में उन्होंने दास से मिलकर उन्हें तारीफ के तौर पर कुछ छोटा-सा तोहफा देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया। इसके बजाय, दास ने उनसे कहा: “आपकी तारीफ और भरोसा ही मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है। 37,000 रुपये से मैं कब तक गुजारा कर पाता? लेकिन यह भरोसा मुझे बहुत आगे ले जाएगा।”
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Europe Travel Budget: भारत के कई लोगों के लिए यूरोप घूमना काफी महंगा हो सकता है, खासकर तब जब ट्रिप में कई देशों की यात्रा करनी हो और सफर करीब एक महीने तक चले। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 30 दिनों तक यूरोप घूमने में असल में कुल कितना खर्च आता है? बता दें कि एक भारतीय कपल ने अपनी पूरी ट्रिप का खर्च शेयर किया है, जिसमें बताया गया है कि उन्होंने रहने की जगह, फ्लाइट, खाने, ट्रांसपोर्ट और एक्टिविटीज पर कितना खर्च किया।
मुस्कान मित्तल और आशीष गुप्ता ने अपनी एक महीने की ट्रिप के दौरान 8 देशों की सैर की। उनकी यात्रा में फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड, प्राग, ऑस्ट्रिया, इटली, वेटिकन सिटी और स्विट्जरलैंड शामिल थे।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
अपने जॉइंट इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए गए एक वीडियो में, इस कपल ने बताया कि उन्होंने अपना ट्रैवल बजट कैसे बांटा और यह भी बताया कि ट्रिप के किस हिस्से में उनका सबसे ज्यादा खर्च हुआ।
8 देशों की यात्रा करते समय, हर जगह ठहरने की जगह का खर्च तेजी से बढ़ सकता है। इस कपल के लिए, रहने-सहने का खर्च ही सबसे बड़ा खर्च साबित हुआ।
वे Airbnb और होटलों में रुके; ज्यादातर जगहें शहर के सेंटर में या बड़े रेलवे स्टेशनों के पास थीं। मुस्कान ने कहा, “औसतन, हमने हर रात के लिए 10,000 रुपये खर्च किए।”
यूरोप तक पहुंचने की फ्लाइट भी कपल के ट्रिप बजट का एक बड़ा हिस्सा थी। उन्होंने फ्लाइट पर प्रति व्यक्ति ₹50,000 खर्च किए। सीधी फ्लाइट लेने के बजाय, उन्होंने मिडिल ईस्ट से होकर जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट बुक कीं। दो लोगों के लिए, उनकी कुल फ्लाइट का खर्च लगभग ₹1 लाख आया।
यात्रा में 8 देश शामिल थे, इसलिए शहरों के बीच घूमना भी ट्रिप का एक अहम हिस्सा था। कपल ने बताया कि उन्होंने एक महीने का ‘यूरेल ग्लोबल पास’ इस्तेमाल किया, जिसमें उनके रूट की लगभग सभी ट्रेन यात्राएं शामिल थीं और इसकी कीमत ₹58,000 थी। उन्होंने कार रेंटल और मेट्रो पर भी ₹28,000 खर्च किए।
खाने-पीने का खर्च भी एक ऐसी चीज थी जिसके लिए कपल को अपनी 30 दिन की यात्रा के दौरान प्लानिंग करनी पड़ी। उन्होंने दोनों के खाने पर रोजाना लगभग ₹5,000 खर्च किए। उन्होंने बताया, “हम दिन में एक बार बाहर खाना खाते थे, लेकिन खाने का खर्च कंट्रोल में रखने के लिए साथ में ‘रेडी-टू-ईट’ खाना भी रखते थे और अक्सर ग्रोसरी स्टोर से सामान खरीदते थे।”
यूरोप घूमना सिर्फ एक शहर से दूसरे शहर जाने तक ही सीमित नहीं है। ट्रिप के दौरान कई टूरिस्ट प्लेस, अलग-अलग एक्सपीरियंस और एक्टिविटीज पर भी खर्च होता है। इस कपल ने अपनी 30 दिनों की यात्रा के दौरान एक्टिविटीज पर प्रति व्यक्ति 85,000 रुपये खर्च किए।
कपल ने अपने बजट में वीजा और ट्रैवल इंश्योरेंस का खर्च भी शामिल किया था। इन खर्चों पर उन्होंने प्रति व्यक्ति ₹15,000 खर्च किए। उन्होंने अन्य खर्चों के लिए भी प्रति व्यक्ति ₹10,000 से ₹15,000 अलग रखे थे।
रहने, फ्लाइट, ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने, घूमने-फिरने की एक्टिविटीज, वीजा, इंश्योरेंस और अन्य खर्चों को मिलाकर, इस कपल ने बताया कि दो लोगों के लिए उनकी एक महीने की यूरोप बैकपैकिंग ट्रिप का कुल खर्च लगभग 9.5 लाख रुपये आया।
इस कपल के खर्चों के ब्योरे को देखकर दूसरे यूजर्स ने भी बताया कि उन्होंने अपनी यूरोप की छुट्टियों पर कितना खर्च किया था।
एक यूजर ने कमेंट किया, “हमने 10 दिनों के लिए 8 लाख रुपये खर्च किए।” एक और यूजर ने कहा, “यह तो काफी सही है।”
हालांकि, एक यूजर को यह रकम कम लगी। उसने कहा, “मुझे लगता है कि यह सस्ता है। हमारे मामले में, 2 लोगों की ट्रिप का खर्च रोजाना लगभग 800-900 यूरो आता है, जिसमें हवाई जहाज़ का किराया शामिल नहीं है।”
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर शेयर किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।
क्या आप सीधे शेयरों में पैसा लगाने से डरते हैं? अगर हां तो आपका डरना सही है। कई लोग शेयर बाजार को फटाफट मुनाफा कमाने का जरिया समझते हैं। ऐसे लोग दोस्त-रिश्तेदार को देख शेयर बाजार में निवेश करना शुरू करते हैं। फिर, नुकसान होने पर हमेशा के लिए बाजार से मुंह मोड़ लेते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयर बाजार फटाफट कमाई का जरिया नहीं है। शेयरों में निवेश से पहले बुनियादी बातों की समझ जरूरी है। इससे पैसा डूबने का रिस्क घट जाता है। आइए ऐसी 5 बुनियादी बातें जानते हैं, जिन्हें शेयरों में निवेश करने से पहले समझना जरूरी है।
1. रिस्क लेने की अपनी क्षमता को समझें
शेयर बाजार की दिशा के बारे में पक्के तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। बाजार की दिशा पर देश और विदेश से आने वाली खबरों का असर पड़ता है। निगेटिव खबरों पर बाजार गिरता है। पॉजिटिव खबरों पर बाजार चढ़ता है। लेकिन, इतिहास बताता है कि लंबी अवधि यानी 8-10 साल में शेयरों का रिटर्न किसी दूसरे एसेट क्लास से ज्यादा रहता है। फिर भी, पैसे लगाने से पहले आपको रिस्क लेने की अपनी क्षमता को जानने की जरूरत है। आप जितने पैसे पर रिस्क ले सकते हैं, उतने ही पैसे का निवेश शेयर बाजार में करें।
2. उधार के पैसे से नहीं करें निवेश
कई लोग किसी कंपनी के शेयर या आईपीओ से मोटी कमाई के लिए उधार लेकर निवेश करते हैं। इसमें काफी रिस्क है। अगर आपका दांव गलत साबित होता है तो आपको बड़ा नुकसान हो सकता है। बड़े इनवेस्टर्स को भी पोर्टफोलियो के हर शेयर पर मुनाफा नहीं होता। कुछ शेयरों में नुकसान होना स्वाभाविक है। अगर उस शेयर में उधार के पैसे से आपने निवेश किया है तो आपकी मुश्किल बढ़ सकती है।
3. निवेश से पहले कंपनी को जानें
किसी दोस्त या रिश्तेदार के बताने पर किसी निवेश करना कई बार खतरनाक साबित होता है। ऐसे शेयर में नुकसान होने पर आप दोस्त या रिश्तेदार को दोष देना शुरू कर देते हैं। सच यह है कि आपको निवेश से पहले कंपनी के बारे में बुनियादी बातें जानना जरूरी है। कंपनी का मैनेजमेंट अच्छा होना चाहिए। प्रॉफिट का ट्रैक रिकॉर्ड स्ट्रॉन्ग होना चाहिए। कंपनी में गवर्नेंस के नियमों का पालन होना जरूरी है। साथ ही कंपनी पर ज्यादा कर्ज नहीं होना चाहिए।
4. इनवेस्टमेंट में धैर्य जरूरी है
अगर आपने सोच-समझकर किसी कंपनी के शेयरों में निवेश किया है तो फिर आपको धैर्य रखना चाहिए। कई बार शेयर में गिरावट आने पर निवेशक डर जाते हैं। वे ज्यादा लॉस होने के डर से अपने शेयर बेचना शुरू कर देते हैं। इससे उन्हें बड़ा नुकसान होता है। सच यह है कि उतार-चढ़ाव बाजार का स्वभाव है। अगर किसी शेयर में गिरावट आती है तो वह कुछ समय के लिए होगी। स्थितियां बदलते ही शेयरों में तेजी फिर से शुरू होगी। हर कुछ साल बाद बाजार में बड़ी गिरावट आती है। फिर बाजार में तेजी देखने को मिलती है।
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5. लंबी अवधि के लिए करें निवेश
कई निवेशक शेयरों में निवेश के बाद थोड़ा मुनाफा होते ही शेयर बेच देते हैं। इससे वे बड़ी कमाई का मौका चूक जाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयरों में पैसा तब बनता है, जब लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं। ऐसे कई शेयर हैं, जिन्होंने 8 साल, 10 साल और 15 साल में निवेशकों के पैसे को कई गुना कर दिया है। लंबे समय तक बाजार में टिके रहने वाले निवेशक वेल्थ क्रिएट कर पाते हैं। थोड़ा मुनाफा होने पर शेयर बेचने वाले निवेशक वेल्थ क्रिएट नहीं कर पाते हैं।
इस बदलते ट्रेंड का असर कॉफी शॉप्स के मेन्यू पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले जहां गर्म कॉफी सबसे ज्यादा पसंद की जाती थी, वहीं अब आइस्ड और दूसरे ठंडे ड्रिंक्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। कस्टमर अपनी पसंद के हिसाब से ड्रिंक को कस्टमाइज कर रहे हैं और नए-नए कॉम्बिनेशन आजमा रहे हैं। कॉफी का कप अब सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि पर्सनल स्टाइल और पसंद दिखाने का तरीका भी बनता जा रहा है।

जेन-जी अपनी पसंद के हिसाब से ड्रिंक को बदलना पसंद करती है। वे मूड, मौसम और मौके के अनुसार फ्लेवर, सिरप, फोम, टॉपिंग और दूसरी चीजें जोड़ना चाहते हैं। इससे उन्हें लगता है कि ड्रिंक उनकी अपनी पसंद के हिसाब से तैयार हुआ है। यही वजह है कि सिर्फ एक तय स्वाद वाली कॉफी के बजाय कस्टमाइज किए जा सकने वाले कोल्ड ड्रिंक्स युवाओं के बीच ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।
जेन-जी कीमत को लेकर जागरूक जरूर है, लेकिन कोई ड्रिंक उन्हें स्पेशल, टेस्टी या हेल्थ से जुड़ा फायदा देने वाला लगता है, तो वे उसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार रहते हैं। ड्रिंक अब सिर्फ प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि उसका टेस्ट, पैकेजिंग, लुक और ब्रांड भी खरीदारी के डिसीजन को प्रभावित करता है। इसी वजह से कोल्ड ड्रिंक्स को कई युवा छोटी-सी ‘अफोर्डेबल लग्जरी’ की तरह भी देखते हैं।
कोल्ड ड्रिंक बनी पहचान
आज जेन-जी के लिए ड्रिंक का टेस्ट जितना मायने रखता है, उसका लुक भी उतना ही जरूरी हो गया है। रंग-बिरंगे कप, अलग-अलग फ्लेवर और अट्रैक्टिव टॉपिंग वाला ड्रिंक सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए भी अच्छा लगता है। IHL ग्रुप के एनालिस्ट जेरी शेल्डन के मुताबिक, कोल्ड ड्रिंक अब सेल्फ-एक्सप्रेशन का एक तरीका बन रही है। ब्रिटेन के आंकड़ों में भी यह ट्रेंड साफ दिखता है। 25 साल से कम उम्र के लोगों की घर से बाहर खरीदी जाने वाली ड्रिंक्स में 60% ठंडी होती हैं, जबकि 55 साल से ज्यादा उम्र वालों में यह आंकड़ा करीब 30% है।
युवाओं की पसंद को देखते हुए स्टारबक्स से लेकर डंकिन और मैकडॉनल्ड्स जैसी कंपनियां अपने मेन्यू में नए-नए कोल्ड ऑप्शन जोड़ रही हैं। स्टारबक्स का रंग-बिरंगा यूनिकॉर्न फ्रैपुचीनो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा था। वहीं डंकिन प्रोटीन और कस्टमाइज्ड कोल्ड ड्रिंक्स पर फोकस कर रही है, जबकि दूसरी कंपनियां फ्रूट-बेस्ड और बिना कैफीन वाले ठंडे ऑप्शन बढ़ा रही हैं। भारत में भी आइस्ड लाटे, कोल्ड ब्रू और रेडी-टू-ड्रिंक कॉफी की मांग बढ़ रही है। इसी को देखते हुए कंपनियां वनीला, चॉकलेट, बनाना, ऑरेंज और कोकोनट जैसे नए फ्लेवर और कोल्ड फोम वाले ऑप्शन भी पेश कर रही हैं।
कारोबार में पहली कोशिश नाकाम हो जाए तो बहुत से लोग दोबारा जोखिम लेने से बचते हैं। लेकिन भोपाल के अभिषेक साहू की कहानी कुछ अलग है। करीब 15 साल पहले शुरू किया गया उनका इंटरनेट कैफे एक साल के अंदर बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय महज ₹30 हजार के लोन से एक छोटे से सैंडविच कार्ट की शुरुआत की। आज उनका यही छोटा कारोबार सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
पहला बिजनेस एक साल में ही हो गया बंद
अभिषेक साहू करीब 15 साल पहले भोपाल पहुंचे थे। उन्होंने शुरुआत इंटरनेट कैफे से की। उस दौर में इंटरनेट कैफे एक अच्छा बिजनेस आइडिया माना जाता था, लेकिन उनका कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चला।
करीब एक साल बाद ही उन्हें इंटरनेट कैफे बंद करना पड़ा। पहली कोशिश की असफलता के बावजूद अभिषेक ने कारोबार करने का विचार नहीं छोड़ा। इस बार उन्होंने ऐसा बिजनेस चुना, जिसमें कम पूंजी लगाकर शुरुआत की जा सके।
₹30 हजार जुटाए और बदल दी दिशा
पहले कारोबार के बाद अभिषेक ने फूड बिजनेस की तरफ रुख किया। उन्होंने ₹30 हजार का लोन लिया और एक छोटा सा सैंडविच कार्ट शुरू किया। खास बात यह थी कि उनके पास सैंडविच बनाने की कोई बड़ी प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं थी। उन्होंने YouTube की मदद से अलग-अलग सैंडविच की रेसिपी सीखीं और फिर उन्हें अपने छोटे से कार्ट पर आजमाना शुरू किया। यानी दूसरी शुरुआत बड़े निवेश या बड़े सेटअप से नहीं, बल्कि सीमित पैसे और खुद सीखने की कोशिश से हुई।
धीरे-धीरे लोगों को पसंद आने लगा स्वाद
शुरुआत में यह एक छोटा सा सैंडविच कार्ट था, लेकिन समय के साथ ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। लोगों को सैंडविच पसंद आने लगे और धीरे-धीरे इस छोटे कारोबार ने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। अभिषेक के बिजनेस की कहानी में सोशल मीडिया ने भी अहम भूमिका निभाई। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सैंडविच कार्ट पर बनी एक Instagram Reel वायरल हो गई। इसके बाद भोपाल के अलग-अलग हिस्सों से लोग उनके सैंडविच का स्वाद लेने पहुंचने लगे।
अब 30-50 मिनट तक इंतजार करते हैं ग्राहक
कभी जिस कारोबार की शुरुआत एक छोटे कार्ट से हुई थी, आज उसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्राहक सैंडविच के लिए इंतजार करने को भी तैयार रहते हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, कई ग्राहकों को ऑर्डर के लिए करीब 30 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इसके बावजूद लोगों की भीड़ कम नहीं हुई।
हर दिन सैकड़ों सैंडविच की बिक्री
सोशल मीडिया पर अभिषेक की कहानी शेयर करने वाले यूजर प्रथम के मुताबिक, उनका Hari Har Sandwich अब हर दिन लगभग 600 से ज्यादा सैंडविच बेचता है। वीकेंड पर यह संख्या और बढ़ जाती है। पोस्ट में दावा किया गया है कि शनिवार और रविवार जैसे दिनों में 1,000 से ज्यादा सैंडविच बिकते हैं। इसी पोस्ट के अनुसार, इस छोटे से फूड बिजनेस का मासिक टर्नओवर करीब ₹25 लाख तक पहुंच चुका है।
असफलता से शुरुआत, लेकिन वहीं नहीं रुके
अभिषेक साहू की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं है। असली बात यह है कि पहला बिजनेस बंद होने के बाद उन्होंने खुद को दोबारा आजमाया।
इंटरनेट कैफे के अनुभव के बाद उन्होंने कम पैसे वाला बिजनेस चुना, YouTube से स्किल सीखी और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बनाया। यही छोटा कदम आगे चलकर बड़े कारोबार में बदलता गया।
This is Abhishek Sahu.
15 years ago, he moved to Bhopal and started an internet café. It shut down within a year.
He then took a ₹30,000 loan and started a small sandwich cart after learning recipes on YouTube.
Today, Hari Har Sandwich sells:
⁰• 600+ sandwiches on weekdays… pic.twitter.com/mwjGaaChuU
— Pratham (@CapitalLens_) September 1, 2026
सोशल मीडिया पर क्यों हो रही चर्चा?
प्रथम ने X पर अभिषेक की कहानी शेयर करते हुए उनके सफर को उजागर किया। पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनकी दोबारा शुरुआत करने की हिम्मत की तारीफ की। एक यूजर ने लिखा कि इस कहानी की सबसे खास बात ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं, बल्कि पहली असफलता के बाद सिर्फ ₹30 हजार से दोबारा शुरुआत करने का फैसला है। दूसरे यूजर ने इसे एक शानदार ‘कमबैक’ बताया।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

