PPF Investment: क्या आप भी PPF में डालते हैं पैसा और लमसम या मंथली में है कंफ्यूज? जान लें 5 तारीख वाला ये ‘गोल्डन रूल’

PPF Investment Timing: अगर आप हर साल पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में अधिकतम ₹1.5 लाख का निवेश करते हैं, तो क्या आपने कभी सोचा है कि पैसा साल की शुरुआत यानी अप्रैल में एक साथ जमा करना सही है या हर महीने किश्तों में?

अक्सर लोग अपनी सुविधा के हिसाब से निवेश करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ निवेश के सही समय का चुनाव करने से आपके फाइनल मैच्योरिटी फंड में ₹1.1 लाख से ₹1.2 लाख तक का अंतर आ सकता है? आइए समझते हैं PPF में ब्याज की गणना कैसे होती है और 15 साल बाद दोनों तरीकों में से कौन सा विकल्प ज्यादा रिटर्न देगा।

PPF में ब्याज की गणना का नियम

PPF में ज्यादा से ज्यादा रिटर्न पाने के लिए इसके ब्याज की गणना का गणित समझना बेहद जरूरी है। वर्तमान में सरकार PPF पर 7.1% सालाना ब्याज दे रही है, जो हर साल कंपाउंड होता है। PPF नियम के अनुसार, ब्याज की गणना हर महीने की 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच मौजूद सबसे न्यूनतम बैलेंस पर की जाती है।

अगर आप 5 अप्रैल से पहले पूरा ₹1.5 लाख जमा कर देते हैं, तो आपको पूरे 12 महीनों के लिए उस ₹1.5 लाख पर ब्याज मिलता है। इसके विपरीत, हर महीने ₹12,500 जमा करने पर ब्याज केवल उसी हिस्से पर मिलेगा जो महीने-दर-महीने खाते में जुड़ता जाएगा।

5 अप्रैल से पहले लमसम vs हर महीने ₹12,500

अगर आप PPF खाते में हर साल अधिकतम ₹1.5 लाख का निवेश करते हैं, तो 15 साल की मैच्योरिटी अवधि (7.1% सालाना चक्रवृद्धि ब्याज पर) में कुल ₹22.5 लाख जमा करने के बाद, साल की शुरुआत में यानी 5 अप्रैल से पहले एकमुश्त पैसा जमा करने पर आपको ₹40,68,209 का कुल फंड मिलता है। जबकि हर महीने ₹12,500 की किश्त में निवेश करने पर यही फंड घट कर ₹39,47,848 रह जाता है।

पैसे कम बढ़ने के पीछे की वजह है PPF का 5 तारीख का ब्याज वाला नियम है, जिसके तहत 5 अप्रैल से पहले एक साथ पैसा जमा करने पर आपकी पूरी रकम पर पूरे 12 महीनों तक लगातार चक्रवृद्धि ब्याज बनता है, जिससे बिना कोई अतिरिक्त पैसा लगाए आपको ₹1,20,361 (लगभग ₹1.2 लाख) का ज्यादा ब्याज प्राप्त होता है।

किस निवेशक के लिए कौन सा विकल्प सही है?

लमसम (5 अप्रैल से पहले): ये उन लोगों के सही है जिन लोगों के पास साल की शुरुआत में बोनस, मैच्योरिटी फंड या पर्याप्त सरप्लस पैसा उपलब्ध है। इससे आपके पैसे को 12 महीनों तक लगातार ब्याज और कंपाउंडिंग की ताकत मिलती है।

मंथली SIP (हर महीने की 5 तारीख से पहले): नौकरीपेशा और वे लोग जो अपनी मासिक सैलरी से बजट बनाकर थोड़ा-थोड़ा निवेश करते हैं। एकमुश्त बड़ी रकम का वित्तीय दबाव नहीं पड़ता और बचत का अनुशासन बना रहता है। इस बात का ध्यान दें कि अगर आप हर महीने निवेश कर रहे हैं, तो हमेशा महीने की 5 तारीख से पहले पैसा ट्रांसफर करें ताकि उस महीने का ब्याज न छूटे।

अगर आपके पास पैसा पहले से मौजूद है, तो उसे बैंक खाते में रखकर साल भर में थोड़ा-थोड़ा निवेश करने का कोई फायदा नहीं है। 5 अप्रैल से पहले एकमुश्त ₹1.5 लाख जमा करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। समय की ताकत और चक्रवृद्धि ब्याज का सही इस्तेमाल करके आप आसानी से ₹1.2 लाख की एक्स्ट्रा कमाई कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Asian Games में मेडल जीते बिना घर नहीं जाएंगी मीराबाई चानू, खा ली कसम

भारत की मीराबाई चानू का मानना है कि जापान के आइची, नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 उनके इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग करियर की “सबसे मुश्किल प्रतियोगिताओं” में से एक होंगे।

मीराबाई चानू एशियाई खेलों में पांच सदस्यों वाली भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम की अगुवाई करेंगी। तीन बार ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं मीराबाई टीम की चार महिला खिलाड़ियों में से एक होंगी। एशियाई खेलों में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता 22 से 28 सितंबर तक आइची के टोकाई सिटिज़न जिम्नेजियम में होगी।

कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीतने के बाद, टोक्यो 2020 की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई को लगता है कि एशियाई खेलों में मुकाबला “ओलंपिक स्तर” का होगा। मीराबाई ने कहा, “मेरी वेट कैटेगरी (49 किग्रा) में सबसे मजबूत लिफ्टर एशिया से ही आते हैं और आपको जापान में ओलंपिक जैसी झलक देखने को मिलेगी।”

इससे पहले चोटों की वजह से मीराबाई चानू एशियाई खेलों में मेडल नहीं जीत पाई थीं। हांगझोऊ में हुए पिछले खेलों में, हिप और जांघ की चोट के कारण स्नैच राउंड में ही उनका अभियान खराब हो गया था और वह 49 किग्रा कैटेगरी में चौथे स्थान पर रही थीं। जकार्ता में हुए 2018 के खेलों में, पीठ की गंभीर चोट के कारण मीराबाई चानू बाहर हो गई थीं।

आगामी एशियाई खेलों से पहले चोट से दूर रहना मीराबाई की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।उत्तर प्रदेश के मोदीनगर में एक सेंटर पर उनकी ट्रेनिंग की देखरेख करने वाले दो लोग कोच विजय शर्मा और अमेरिकी स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच डॉ. एरन हॉर्शिग हैं। डॉ. हॉर्शिग के साथ उनका जुड़ाव नवंबर 2020 में शुरू हुआ था और आज भी जारी है।

मीराबाई ने कहा, “हम हर गुरुवार उनसे वीडियो कॉल पर बात करते हैं और ट्रेनिंग, रिकवरी और आगे के कदमों के बारे में चर्चा करते हैं।” “हर चीज़ की बारीकी से समीक्षा की जाती है और चूंकि डॉ. हॉर्शिंग खुद एक वेटलिफ्टर थे, इसलिए उन्हें शरीर की हर मांसपेशी के बारे में जानकारी है। इस लगातार समीक्षा ने मुझे फिट रखा है।”

एशियाई खेलों की तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है। ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मीराबाई और उनकी टीम ने एक भी दिन बर्बाद नहीं किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजकों ने वेटलिफ्टिंग हॉल हटा दिया था, लेकिन मीराबाई, विजय शर्मा और फिजियो रोहित छाबड़िया ने ग्लासगो में एक जिम ढूंढा और ट्रेनिंग सेशन के लिए पैसे दिए।

मीराबाई ने कहा, “मैं सीधे मोदीनगर में ट्रेनिंग के लिए लौट आई। असल में, मैं घर नहीं गई और मैंने खुद को एक चुनौती दी है कि ‘जब तक मैं एशियाई खेलों में मेडल नहीं जीत लेती, तब तक घर नहीं जाऊंगी’।”

कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद, यह भारतीय वेटलिफ्टर ग्लासगो में मुकाबले के स्तर को बहुत ज़्यादा अहमियत नहीं दे रही हैं। मीराबाई ने कहा, “सच कहूं तो, कॉमनवेल्थ गेम्स में मुकाबला मेरे लिए मुश्किल नहीं था। मुझे ग्लासगो में बहुत ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। असली परीक्षा एशियाई खेलों में होगी।”

ग्लासगो में, मीराबाई ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में कुल 190 किग्रा (स्नैच – 85 किग्रा; क्लीन एंड जर्क – 105 किग्रा) वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता और स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल वज़न में नए कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाए।

नाइजीरिया की रूथ असुकुओ न्योंग ने कुल 168 किग्रा (75 किग्रा 93 किग्रा) वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता, जबकि मलेशिया की आइरीन जेन हेनरी ने 167 किग्रा (77 किग्रा 90 किग्रा) वजन उठाकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता।

मीराबाई का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन 205 किग्रा (89 किग्रा 116 किग्रा) है, जो उन्होंने 2021 एशियाई चैंपियनशिप और हाल ही में फरवरी 2026 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में किया था। “मैं देखना चाहती हूं कि मैं जापान में कितना आगे जा सकती हूं। एशियाई खेल मेरे लिए सबसे मुश्किल रहे हैं।”

मीराबाई का कहना है कि उन्हें चीन, उत्तर कोरिया, जापान और थाईलैंड के वेटलिफ्टरों से सबसे कड़े मुकाबले की उम्मीद है। पेरिस 2024 में, थाईलैंड की सुरोदचाना खाम्बाओ ने मीराबाई को सिर्फ़ एक किलो के अंतर से चौथे स्थान पर धकेल दिया। थाई एथलीट ने कुल 200 किलो वज़न उठाया था।

मीराबाई ने कहा, “हम फ़िटनेस को लेकर सावधान रहे हैं और अब तक मुझे अपने शरीर में अच्छा महसूस हुआ है।” उन्होंने आगे कहा कि एशियाई खेल ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। “मैं देखूँगी कि एशियाई खेलों में कैसा प्रदर्शन रहता है। लॉस एंजेलिस में वेट क्लास 53 किलो होगी और मुझे अपना वज़न बढ़ाना होगा। “यह कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, लेकिन सब कुछ एशियाई खेलों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और उसके बाद हम दिसंबर में होने वाले ओलंपिक क्वालीफ़ायर के लिए योजना बना सकते हैं। मुझे लगता है कि जो भी जापान में मुक़ाबला करेंगे, वे लॉस एंजेलिस 2028 को लक्ष्य बनाएँगे, लेकिन अभी मेरे लिए मिशन एशियाई खेल ही है।”

बंगाल सरकार लौटाएगी मेसी के कोलकाता इवेंट का पैसा, CM का बड़ा ऐलान, 33 हजार लोगों को मिलेगा रिफंड

नेशनल स्पोर्ट्स डे के मौके पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फुटबॉलर लियोनेल मेसी के कार्यक्रम को लेकर बड़ा ऐलान किया। पिछले साल 13 दिसंबर को मेसी के युवा भारती स्टेडियम पहुंचने के दौरान कार्यक्रम में भारी भीड़ आने की वजह से हालात बिगड़ गए। अर्जेंटीना के मशहूर फुटबॉलर की एक झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने 4,000 और 6,000 रुपये तक के टिकट खरीदे थे। मैदान में पैदा हुई कुछ परेशानियों के कारण कई दर्शकों को उन्हें देखने का मौका नहीं मिल सका। इसे बाद से टिकट के पैसे वापस करने की बात कही गई है। अभी तक इस मामले में उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। वहीं सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि, टिकट खरीदने वाले करीब 33,000 दर्शकों को उनकी रकम वापस की जाएगी।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेसी के कार्यक्रम की टिकट खरीदने वाले करीब 33,000 दर्शकों को उनकी रकम वापस की जाएगी। अर्जेंटीना के मशहूर फुटबॉलर की एक झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने 4,000 और 6,000 रुपये तक के टिकट खरीदे थे। इसके लिए राज्य के खेल बजट से पैसे दिए जाएंगे।

रिफंड किया जाएगा

नेशनल स्पोर्ट्स डे पर बोलते हुए अधिकारी ने कहा, “मेसी के बहुत बड़े फैन हैं। उन्होंने Rs 4,000 और Rs 6,000 के टिकट खरीदे थे। मेरी इच्छा है कि इन 33,000 स्पोर्ट्स के शौकीनों का दिया हुआ पैसा वापस किया जाए। मैंने पहले ही अंदरूनी तौर पर प्रोसेस शुरू कर दिया है। मुझे उम्मीद है कि मैं इसे पूरा कर पाऊंगा।” उन्होंने आगे कहा,” 29 अगस्त को आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व हॉकी खिलाड़ी गुरबक्स सिंह, खेल मंत्री इंद्रनील खान, AIFF अध्यक्ष कल्याण चौबे समेत कई मशहूर हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया और उन्हें नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए।

पश्चिम बंगाल की भागीदारी हुई कम

अधिकारी ने कहा कि, “ये हैरान करने वाली बात है कि जिन खिलाड़ियों को आज नियुक्ति पत्र मिले हैं, उनमें से कई के पेपर 11 साल से मुख्यमंत्री के ऑफ़िस में धूल फांक रहे थे।” उन्होंने आगे कहा कि, “पिछले कुछ वर्षों में ओलंपिक, एशियन गेम्स और राष्ट्रीय टीमों में पश्चिम बंगाल के खिलाड़ियों की भागीदारी बेहद कम रही है, जबकि ओडिशा और झारखंड जैसे राज्य लगातार अपने खिलाड़ियों को बड़े मंच पर भेज रहे हैं।

मेसी के कार्यक्रम में हुई थी तोड़फोड़

13 दिसंबर, 2025 को कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में मेसी के G.O.A.T. इंडिया टूर इवेंट में अफरा-तफरी और तोड़फोड़ हो गई। हजारों फैंस, जिन्होंने 10,000 रुपये या उससे ज्यादा दिए थे, गुस्सा हो गए जब अधिकारियों और सेलिब्रिटीज ने पिच के किनारे भीड़ लगा दी, जिससे फुटबॉल सुपरस्टार को देखने में रुकावट आई और लगभग 20 मिनट बाद उन्हें अचानक जाना पड़ा।

Step Up SIP: क्या आप इस 10% वाले सीक्रेट फॉर्मूले के बारे में जानते हैं? सिर्फ ₹5000 की SIP से बन गया ₹1 करोड़ का फंड

Step-Up SIP Wealth Creation: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच हर नौकरीपेशा व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार करे। लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर कदम पीछे खींच लेते हैं कि शुरुआत में उनके पास बड़ा पैसा निवेश करने के लिए नहीं है।

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अमित की कहानी आपकी इस सोच को पूरी तरह बदल देगी। अमित ने कोई बहुत बड़ा निवेश नहीं किया, बल्कि सिर्फ ‘स्टेप-अप SIP’ की एक छोटी सी तरकीब अपनाकर ₹1 करोड़ का बड़ा फंड तैयार कर लिया। आइए आपको बताते हैं कम पैसों के इनवेस्टमेंट से भी इस फॉर्मूले से मोटा फंड तैयार किया जा सकता है।

₹5,000 की SIP से शुरू की इन्वेस्टमेट जर्नी की शुरूआत

बात लगभग 20 साल पुरानी है। अमित ने जब अपने करियर की शुरुआत की, तो उसकी सैलरी बहुत कम थी। बचत के नाम पर उसके पास ज्यादा पैसे नहीं बचते थे। हालांकि, उसके बावजूद उसने म्यूचुअल फंड में हर महीने ₹5000 की एक छोटी मंथली SIP से शुरुआत करने का फैसला किया। उसी के साथ काम करने वाले विकास ने भी ₹5,000 महीने की ही SIP शुरू की। लेकिन दोनों के निवेश करने के अंदाज में एक बड़ा अंतर था जिसका असर उसके वेल्थ क्रिएशन पर भी देखने को मिला।

विकास ने तय किया कि वह अगले 20 सालों तक बिना किसी फेरबदल के हर महीने ₹5,000 जमा करता रहेगा। अमित ने एक स्मार्ट फॉर्मूला अपनाया। वो जानता था कि हर साल उसकी सैलरी में कम से कम 10% से 12% का इंक्रीमेंट होगा। इसलिए उसने फैसला किया कि वह हर साल अपनी SIP में भी 10% की बढ़ोतरी करेगा।

साल-दर-साल कैसे बढ़ा अमित का निवेश?

अमित ने अपनी जेब पर बिना कोई एक्स्ट्रा दबाव डाले इस प्रक्रिया को बेहद आसान रखा:

  • पहला साल: हर महीने ₹5,000 जमा किए (साल में कुल ₹60,000 निवेश)।
  • दूसरा साल (10% बढ़ोतरी): इंक्रीमेंट होते ही SIP ₹500 बढ़ा दी। अब हर महीने ₹5,500 जाने लगे।
  • तीसरा साल (10% बढ़ोतरी): अब हर महीने ₹6,050 की SIP होने लगी।
  • चौथा साल: हर महीने ₹6,655 जमा होने लगे… और इसी तरह हर साल 10% का स्टेप-अप अपने आप लागू होता गया।

एक जैसी शुरुआत, लेकिन 20 साल बाद नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर!

जब 20 साल पूरे हुए और औसतन 12% का वार्षिक रिटर्न मिला, तो दोनों के खातों का रिपोर्ट कार्ड कुछ इस तरह था:

मापदंड विकास (साधारण SIP) अमित (स्टेप-अप SIP)
शुरुआती मंथली SIP₹5,000₹5,000
सालाना बढ़ोतरी0% (फिक्स्ड)10% प्रति वर्ष
20 साल में कुल निवेश₹12 लाख₹34.36 लाख
20 साल बाद मिला कुल फंड₹49.95 लाख (करीब ₹50 लाख)₹98.71 लाख (करीब ₹1 करोड़)

बड़ा टेकअवे: साधारण SIP से विकास केवल ₹50 लाख बना पाया, जबकि अमित ने सिर्फ हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाकर लगभग ₹1 करोड़ का फंड बना लिया।

कंपाउंडिंग का जादू: अमित कैसे बना विजेता?

अमित की सफलता के पीछे 3 मुख्य कारण रहे:

1- जेब पर बोझ नहीं पड़ा: उसने एक साथ ₹15,000-₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं की। सैलरी बढ़ने के साथ-साथ निवेश बढ़ा, जिससे उसकी दिनचर्या और खर्चों पर कोई असर नहीं पड़ा।

2- कंपाउंडिंग की ताकत: जो एक्स्ट्रा पैसा अमित ने दूसरे, तीसरे और चौथे साल से बढ़ाया, उस बढ़ी हुई रकम पर भी उसे अगले 15-18 सालों तक ब्याज पर ब्याज मिलता रहा।

3- अनुशासन: ऑटो-डेबिट और टॉप-अप ऑप्शन की मदद से उसका निवेश हर साल अपने आप बढ़ता गया।

आप अपने लिए इसे कैसे शुरू कर सकते हैं?

अगर आप भी अमित की तरह कम समय या छोटी शुरुआत से बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो जब भी किसी म्यूचुअल फंड ऐप (Groww, Zerodha, PayTM Money आदि) से नई SIP शुरू करें, वहां ‘Step-Up SIP’ या ‘Top-Up’ का विकल्प जरूर चुनें।

वहां अपनी सुविधा के अनुसार 10% सालाना या ₹500/₹1,000 सालाना की बढ़ोतरी सेट कर दें। आज लिया गया यह छोटा सा फैसला आपके भविष्य को आर्थिक रूप से पूरी तरह चिंतामुक्त बना सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tax-Saving Mutual Fund: टैक्स बचाने वाला इकलौता म्यूचुअल फंड प्लान, तो सबसे कम लॉक-इन वाला ऑप्शन भी

Tax-Saving Mutual Fund: इक्विटी मार्केट में निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है और जो निवेशक कंजर्वेटिव हैं, वे म्यूचु्अल फंड्स के जरिए अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी मार्केट का एक्सपोजर रखते हैं। हालांकि इसमें एक खामी ये है कि इसमें जो पैसे लगाते हैं, उस पर कोई टैक्स डिडक्शन नहीं मिलता है, सिवाय एक विकल्प में। यहां उसी एक म्यूचुअल फंड ऑप्शन यानी ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) के बारे में बताया जा रहा है, जिसमें निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं और ऐसा भी नहीं है कि टैक्स बेनेफिट्स मिल रहा है, तो रिटर्न म्यूचुअल फंड्स के बाकी विकल्पों की तुलना में फीका रहेगा, बल्कि महंगाई को बीट करते हुए तगड़ा रिटर्न भी हासिल किया जा सकता है। इसके अलावा एक और खास बात ये है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत पुरानी टैक्स रिजीम में जितने भी तरीके हैं टैक्स बचाने के, उसमें सबसे कम लॉक-इन भी इसी का है।

ELSS में निवेश के क्या हैं टैक्स बेनेफिट्स

ईएलएसएस म्यूचुअल फंड्स में निवेश पर पुरानी टैक्स रिजीम में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत एक वित्त वर्ष में ₹1.50 लाख तक के निवेश पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

एक साल से अधिक होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) में से ₹1 लाख से अधिक जितना मुनाफा है, उस पर 10% की दर से तो एक साल से कम वाली होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 20% की दर से टैक्स देना होगा।

ईएलएसएस की यूनिट्स के रिडेम्प्शन पर कोई TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) नहीं है।

टैक्स बेनेफिट्स के अलावा और क्या है खासियतें

ईएलएसएस इकलौता ऐसा म्यूचुअल फंड प्लान हैं, जिसमें टैक्स बेनेफिट्स मिलता है।

एक और खास बात ये है कि सेक्शन 80सी के तहत जिन-जिन विकल्पों में जितने भी निवेश प्लान हैं, उनमें सबसे कम लॉक-इन पीरियड इसी का है जैसे कि पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन है तो टैक्स-सेविंग्स एफडी का लॉक-इन पांच साल है लेकिन ईएलएसएस के मामले में तीन ही साल है।

ईएलएसएस में लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद यूनिट्स बेचने पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा।

इसमें चाहें तो एकमुश्त निवेश कर सकते हैं या एसआईपी (SIP) यानी एक नियमित समय अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा करके भी लंबे समय में अच्छा फंड तैयार कर सकते हैं।

कैसा है रिटर्न के मामले में

ईएलएसएस में रिटर्न भी तगड़ा मिलता है। सिर्फ तीन साल के ही आंकड़ों को लेकर बात करें तो मोतीलाल ओसवाल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में सालाना 23.84%, आईटीआई ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 19.45%, व्हाइटओक कैपिटल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.63%, एचएसबीसी ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.34% और जेएम ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.27% की रफ्तार से बढ़ा है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

EPFO 3.0 Big Update: अब UPI और ATM से झटपट निकलेगा PF का पैसा! जानें ऑटो-सेटलमेंट सहित ये 5 बड़े बदलाव

EPFO 3.0 Digital Reforms: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के करोड़ों नौकरीपेशा सदस्यों के लिए बड़ी खबर है। सरकार अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करते हुए EPFO 3.0 की शुरुआत कर रही है। इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद पीएफ (PF) क्लेम सेटलमेंट की लंबी प्रक्रिया खत्म हो जाएगी और मेंबर्स बिना किसी कागजी कार्रवाई के सीधे अपने UPI या UPI-सक्षम ATM से पैसा निकाल सकेंगे।

हाल ही में केंद्र सरकार ने FY26 के लिए EPF और VPF पर 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दी थी। अब EPFO 3.0 के जरिए सदस्यों को उनके फंड तक तुरंत और आसान पहुंच दी जा रही है। आइए जानते हैं कि इस नए सिस्टम से पीएफ सब्सक्राइबर्स की जिंदगी कितनी आसान होने वाली है।

क्या है EPFO 3.0 और क्यों हुआ यह बदलाव?

EPFO 3.0 का मुख्य उद्देश्य पीएफ क्लेम में लगने वाले समय को कम करना और सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाना है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, EPFO ने जुलाई में अपने पूरे मेंबर्स डेटाबेस को सेन्ट्रलाइज्ड आईटी-सक्षम प्रणाली (CITES) प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक ट्रांसफर कर दिया है। इससे पुराना सिस्टम खत्म हो गया है और पूरे देश का एक नेशनल डेटाबेस बन गया है। इसकी मदद से अब सब्सक्राइबर्स UPI के जरिए अपने लिंक्ड बैंक अकाउंट में तुरंत पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे।

EPFO 3.0 से सब्सक्राइबर्स को मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

1. UPI और ATM से 75% तक PF निकासी

नियमों और शर्तों के आधार पर सब्सक्राइबर्स अपने ईपीएफ बैलेंस का 50% से 75% तक हिस्सा UPI या UPI-सक्षम ATM के जरिए निकाल सकेंगे। मेंबर्स अपने बैंक खाते में ट्रांसफर योग्य एलिजिबल बैलेंस देख सकेंगे और UPI PIN का इस्तेमाल करके सुरक्षित तरीके से पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके बाद इस पैसे को आप डिजिटली खर्च कर सकते हैं या ATM से कैश निकाल सकते हैं।

2. ऑटो-सेटलमेंट लिमिट बढ़कर हुई ₹5 लाख

EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को ₹1 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹5 लाख कर दिया है। इससे बीमारी, बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदने/बनाने जैसी जरूरतों के लिए सब्सक्राइबर्स का क्लेम मात्र 3 दिनों के भीतर ऑटो-प्रोसेस होकर खाते में आ जाएगा।

3. UMANG App में Face Authentication

मेंबर्स अब उमंग ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (FAT) का उपयोग करके अपना UAN जेनरेट या एक्टिवेट कर सकते हैं। इसके साथ ही वे तुरंत पासबुक एक्सेस करने, गलत जानकारियों को सुधारने और ऑनलाइन क्लेम सबमिट करने जैसी सुविधाएं घर बैठे पा सकते हैं।

4. क्लेम रिजेक्शन से मिलेगी मुक्ति

पुराने सिस्टम में मेंबर्स को यह पता नहीं होता था कि वे कितना पैसा निकालने के पात्र हैं, जिससे क्लेम रिजेक्ट हो जाता था। अब EPFO 3.0 में सब्सक्राइबर्स को अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से पात्र राशि पहले ही स्क्रीन पर दिखाई देगी।

5. ऑनलाइन शिकायतों का डिजिटल जवाब

अगर क्लेम प्रोसेसिंग के दौरान पीएफ ऑफिस को किसी अतिरिक्त जानकारी की जरूरत होती है, तो मेंबर्स अब उसका जवाब ऑनलाइन डिजिटली दे सकेंगे। पहले ऑनलाइन स्पष्टीकरण देने की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

EPFO 3.0 में क्या-क्या बदल गया?

EPFO 3.0 में क्या-क्या बदल गया?

Hero Motors लाएगी ₹1000 करोड़ का ही IPO, पैसों के इस्तेमाल में भी बदलाव

Hero Motors IPO: पावरट्रेन सॉल्यूशंस प्रोवाइडर हीरो मोटर्स ने अपने आईपीओ का साइज घटा दिया है। बाजार नियामक सेबी से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी ने पब्लिक इश्यू का साइज घटाकर ₹1000 करोड़ कर दिया है। हालांकि इसमें जो कटौती हुई है, वह फ्रेश इश्यू में हुई है यानी कि अब आईपीओ के तहत नए शेयर कम जारी होंगे जबकि ऑफर फॉर सेल इश्यू के तहत बिकने वाले शेयरों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कंपनी की योजना आईपीओ के तहत ₹600 करोड़ के नए शेयर जारी करने की है तो ऑफर फॉर सेल के जरिए प्रमोटर्स ₹400 करोड़ के शेयर बेचेंगे।

नियमों के तहत IPO Size में कितना बदलाव करने की है मंजूरी?

हीरो मोटर्स ने जून 2025 में बाजार नियामक सेबी के पास अपना आईपीओ ड्राफ्ट यानी डीआरएचपी दाखिल किया था। इसके जरिए कंपनी की योजना ₹1,200 करोड़ जुटाने की थी जिसमें ₹800 करोड़ के नए शेयर जारी होते तो ₹400 करोड़ के शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल के तहत होनी थी। इस साल 13 अप्रैल से लागू हुए नए नियमों के बाद, जिसके तहत कंपनियों को सेबी के पास ड्राफ्ट दोबारा दाखिल किए बिना फ्रेश इश्यू के साइज में 50% तक बदलाव करने की अनुमति है, हीरो मोटर्स ने 30 जुलाई को सेबी के पास आवेदन किया। कंपनी ने फ्रेश इश्यू का साइज कम करने और कुल ऑफर साइज में बदलाव की मंजूरी मांगी। फिर 27 अगस्त के अप्रूवल लेटर के बाद कंपनी ने आईपीओ के तहत फ्रेश इश्यू साइज ₹600 करोड़ से घटाकर ₹400 करोड़ कर दिया।

और क्या हुआ है आईपीओ में बदलाव

कंपनी ने ऑफर फॉर सेल के ढांचे में भी बदलाव किया है। यह बदलाव इश्यू के तहत शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स भाग्योदय इंवेस्टमेंट्स और ओपी मुंजाल होल्डिंग्स की 27 अगस्त की चिट्ठियों के बाद किया गया। भाग्योदय इंवेस्टमेंट्स ने ₹5 करोड़ तक के शेयर बेचने का अपना ऑफर वापस लेने का फैसला किया। वहीं ओपी मुंजाल होल्डिंग्स ने अपने ऑफर साइज को उतना ही बढ़ाकर ₹390 करोड़ से ₹395 करोड़ कर दिया है। अब इश्यू के तहत

ओपी मुंजाल होल्डिंग्स ₹395 करोड़ के शेयर और हीरो साइकिल्स ₹5 करोड़ के शेयर बेचेंगे।

हीरो मोटर्स ने नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों के इस्तेमाल में भी बदलाव किया है। अब आईपीओ से मिले ₹190 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी कर्ज हल्का करने और ₹200 करोड़ उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में स्थित अपने प्लांट में कैपेसिटी बढ़ाने के लिए जरूरी इक्विपमेंट्स की खरीदारी में खर्च करेगी। बाकी पैसे अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में खर्च होंगे। वहीं ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिलेगा।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rashifal Today: इन मूलांक वालों के लिए पैसा कमाने के बनेंगे नए मौके! जानें आज का राशिफल

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। 30 अगस्त 2026 का दिन आर्थिक मामलों में अलग-अलग मूलांक वाले लोगों के लिए अलग असर लेकर आएगा। कुछ लोगों के लिए निवेश और बचत के लिहाज से दिन अच्छा रह सकता है, जबकि कुछ लोगों को पैसों से जुड़े फैसले लेते समय सावधानी बरतने की जरूरत होगी। आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के लोगों के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज आपको अपनी आर्थिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। बजट और निवेश की दोबारा जांच करने का अच्छा समय है। भविष्य को ध्यान में रखकर लंबी अवधि की योजना बनाएं। बेवजह की खरीदारी से बचें और पैसे को सुरक्षित रखने पर ध्यान दें।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में दिन अच्छा रह सकता है। आपको नई तकनीक या इनोवेशन से जुड़े निवेश के अवसरों के बारे में जानकारी मिल सकती है। हालांकि, किसी भी फैसले में जल्दबाजी न करें। लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान देना आपके लिए बेहतर रहेगा।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज बड़े आर्थिक फैसले लेने से बचना चाहिए। अपने मौजूदा निवेश और वित्तीय योजनाओं की समीक्षा करें। बाजार में होने वाले अचानक बदलाव से प्रभावित होकर कोई फैसला न लें। जरूरत पड़ने पर किसी अनुभवी वित्तीय सलाहकार की मदद लेना बेहतर हो सकता है।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आर्थिक मामलों में आज सोच-समझकर किया गया निवेश भविष्य में फायदा दे सकता है। कारोबार या खुद का काम करने वालों को सहयोग मिल सकता है। अगर कोई पुराना कर्ज चुकाने की योजना है तो उस दिशा में कदम बढ़ाने का अच्छा समय है।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। निवेश से फायदा मिलने की संभावना बन सकती है और कमाई के नए रास्ते भी सामने आ सकते हैं। हालांकि, खर्च करते समय सावधानी रखें। दोस्तों या सहयोगियों की अच्छी सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में थोड़ा सतर्क रहना होगा। निवेश या कारोबार में ऐसा मौका मिल सकता है जिसमें फायदा कम और नुकसान का खतरा ज्यादा हो। इसलिए जोखिम समझे बिना पैसा न लगाएं। बड़े लेन-देन से बचना और बजट पर नियंत्रण रखना बेहतर रहेगा।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति अच्छी रह सकती है। आपकी समझदारी और सही विश्लेषण से निवेश से जुड़ा फैसला बेहतर हो सकता है। किसी भी अवसर पर तुरंत फैसला लेने के बजाय उसके सभी पहलुओं को समझें। मेहनत का फायदा मिलने और आर्थिक परेशानी कम होने के संकेत हैं।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सुधार का दिन है। निवेश के लिए समय अनुकूल हो सकता है, लेकिन फैसला सोच-समझकर ही लें। बचत बढ़ाने के नए तरीके खोजें और गैर-जरूरी खर्च कम करें। परिवार या दोस्तों के साथ आर्थिक योजनाओं पर चर्चा करना भी फायदेमंद हो सकता है।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है, जिससे बजट बिगड़ सकता है। इसलिए गैर-जरूरी चीजों पर पैसे खर्च न करें और किसी नए निवेश में जल्दबाजी न करें। अपने बजट की समीक्षा करना आज आपके लिए जरूरी रहेगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

PPF Vs SSY: हर महीने ₹5000 निवेश करें तो पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना में कितना पैसा बनेगा? जानिए पूरा हिसाब

PPF Vs SSY: अपनी बेटी के हायर एजुकेशन, शादी या दूसरी लंबे समय की फाइनेंशियल जरूरतों के लिए बचत की शुरुआत करते समय माता-पिता के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि पैसा कहां निवेश किया जाए। सरकार द्वारा समर्थित पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) दो सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित विकल्प हैं। हालांकि इनकी एलिजिबिलिटी, इंट्रेस्ट रेट, मैच्योरिटी और समय से पहले पैसे निकालने के नियमों के मामले में दोनों योजनाएं एक-दूसरे से काफी अलग हैं।

वर्तमान में सुकन्या समृद्धि योजना 8.2 प्रतिशत का हायर इंट्रेस्ट रेट देती है। वहीं पीपीएफ पर 7.1 प्रतिशत की दर से ब्याज मिल रहा है। हालांकि सुकन्या योजना में मिलने वाला अधिक रिटर्न सख्त विड्रॉल नियमों के साथ आता है जबकि पीपीएफ में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।

बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी कहते हैं कि पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना दोनों ही सरकार के सपोर्ट से चलने वाली बचत योजनाएं हैं, लेकिन उनकी एलिबिलिटी, टेन्योर, इंट्रेस्ट रेट और निकासी के नियम अलग-अलग हैं। ये बातें उन्हें अलग-अलग बचत जरूरतों के हिसाब से बनाते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि सही ऑप्शन का चुनाव बच्ची की उम्र, निवेश की समयसीमा और इस बात पर निर्भर करता है कि आप बेटी के भविष्य के लिए इन्वेस्ट करना चाहते हैं या आपका लॉन्ग टर्म गोल कुछ और है।

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): ज्यादा इंट्रेस्ट पर विड्रॉल के नियम सख्त

सुकन्या समृद्धि योजना का खाता 10 साल से कम उम्र की बच्ची के लिए खोला जा सकता है। यह अकाउंट ओपन होने के डेट से 21 साल में मैच्योर होता है। इसमें सिर्फ शुरुआती 15 वर्षों तक ही कंट्रीब्यूशन करना होता है। अभी इस योजना पर 8.2 प्रतिशत की दर से इंट्रेस्ट दिया जा रहा है।

यह योजना उन माता-पिता के लिए ज्यादा बेहतर है जो अपनी बेटी के भविष्य के लिए फोकस होकर फंड बनाना चाहते हैं।

पैसे निकालने के नियम: SSY से आप जब चाहें तब पैसे नहीं निकाले जा सकते। नियम के मुताबिक बच्ची के 18 वर्ष का होने के बाद हायर एजुकेशन के खर्चों के लिए पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में मौजूद बैलेंस का 50 फीसदी तक आंशिक रूप से निकालने की अनुमति देते हैं। यह रकम एक बार में या कुछ वर्षों की किश्तों में ली जा सकती है।

समय से पहले खाता बंद करना: बच्ची के 18 साल का होने के बाद शादी होने की स्थिति में खाता बंद किया जा सकता है। इसके अलावा खाताधारक की मौत या फाइनेंशियल क्राइसिस जैसी गंभीर परिस्थितियों में भी शर्तों के तहत समय से पहले खाता बंद करने की अनुमति है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): इन्वेस्टमेंट में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी के लिए पीपीएफ की शुरुआती मैच्योरिटी अवधि 15 साल की होती है। इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाया जा सकता है। इसमें फिक्स्ड टेन्योर के बाद लोन और पार्टिशयस विड्रॉल की सुविधा मिलती है।

खाता खोलने के वर्ष के अंत से 5 साल पूरे होने के बाद कुछ खास परिस्थितियों या वजहों से पीपीएफ खाते को समय से पहले बंद किया जा सकता है, जैसे-

खाताधारक, जीवनसाथी, बच्चों या आश्रित माता-पिता की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए।

खाताधारक या उनके बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए (प्रवेश का प्रमाण पत्र देने पर)।

खाताधारक की निवास स्थिति में बदलाव होने पर।

यह सुविधा उन माता-पिता के लिए फायदेमंद है जो अपनी बेटी के लिए बचत तो करना चाहते हैं लेकिन उस पैसे को सिर्फ उसी के खर्चों से पूरी तरह बांधकर नहीं रखना चाहते।

PPF VS SSY कैलकुलेशन: हर महीने ₹5000 के निवेश पर कितना मिलेगा रिटर्न?

अगर आप PPF और SSY दोनों में हर महीने ₹5000 (यानी ₹60000 सालाना) इन्वेस्ट करते हैं तो मौजूदा इंट्रेस्ट रेट पर ही कैलकुलेट किया जाए तो भी दोनों की मैच्योरिटी पर बड़ी फर्क देखने को मिलता है। पहले बात करते हैं पीपीएफ की। अगर आप हर महीने ₹5000 डालते हैं तो 15 साल में आप कुल 9 लाख रुपये जमा करेंगे। 7.1 फीसदी के इंट्रेस्ट रेट के हिसाब से आपको 7 लाख 27 हजार के करीब ब्याज मिलेगा। 15 साल बाद आपकी कुल मैच्योरिटी राशि ₹1627284 हो जाएगी.

अगर आप सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में अपनी बेटी के लिए हर महीने ₹5000 जमा करते हैं, तो 8.2 प्रतिशत की वर्तमान ब्याज दर के आधार पर आपको काफी अधिक रिटर्न मिलेगा। इस योजना के नियमानुसार आपको सिर्फ शुरुआती 15 सालों तक ही पैसे जमा करने होते हैं। इससे आपकी कुल जमा राशि 9 लाख रुपये ही रहेगी. हालांकि खाता खोलने की तारीख से 21 वर्ष में मैच्योर होने की वजह से अगले 6 वर्षों तक आपकी जमा राशि पर ब्याज जुड़ता रहेगा। इस तरह 21 साल की मैच्योरिटी पूरी होने पर आपको करीब ₹18 लाख 71 हजार का सिर्फ इंट्रेस्ट मिलेगा और आपकी कुल मैच्योरिटी 27 लाख 71 हजार से ज्यादा हो जाएगी।

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कौन सा विकल्प आपके लिए सबसे सही है?

अगर आपका एकमात्र उद्देश्य अपनी बेटी के भविष्य के लिए एक बड़ा और डेडिकेटेड फंड तैयार करना है, तो उच्च ब्याज दर (8.2%) की वजह से सुकन्या समृद्धि योजना अधिक फायदेमंद है। अगर आप उच्च ब्याज दर के बजाय निवेश में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी और इमरजेंसी में पैसे निकालने की सुविधा चाहते हैं, तो पीपीएफ ज्यादा बेहतर विकल्प है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

न कार, न सोना…9 साल तक गुल्लक में जोड़े पैसे, फिर युवती ने खरीदी ऐसी चीज, लोग करने लगे तारीफ

वीडियो देखने के बाद लोग दीक्षा की बचत और पैसे को सही जगह लगाने के फैसले से काफी प्रभावित हुए। कई लोगों ने उनकी तारीफ की कि उन्होंने अपनी सालों की बचत को ऐसी चीजों पर खर्च करने के बजाय जमीन में लगाया, जिसकी कीमत समय के साथ बढ़ सकती है